प्राण्िा जगत 4949प्राण्िा जगत संगठन के स्तर सममिति प्रगुहा कोश्िाकीय स्तर एनीमेलीया अरीय;बहुकोशकीद्ध ;बिना गुहा काद्ध ऊतक/अंग अगुहीय अंग तंत्रा वूफट गुहीय द्विपाश्र्व ;वूफट गुहाद्ध सत्य गुहा युक्त गुहीय ऽ एकाइनोडमर् में जीवन चक्र की अवस्था के अनुसार अरीय या द्विपाश्वर् सममिति पायी जाती है। चित्रा 4.4 मौलिक लक्षणों के आधर पर प्राण्िा जगत का विस्तृत वगीर्करण श्वसन तथा अपश्िाष्ट पदाथो± को उत्सजिर्त करने में सहायक होता है। कोएनोसाइट या काॅलर कोश्िाकाएं स्पंजगुहा तथा नाल - तंत्रा को स्तरित करती हैं। कोश्िाकाओं में पाचन होता है ;अंतराकोश्िाकद्ध। कंकाल शरीर को आधर प्रदान करता है। जो कंटिकाओं तथा स्पंजिन तंतुओं का बना होता है। स्पंज प्राणी में नर तथा मादा पृथव्फ नहीं होते। वे उभयलिंगाश्रयी होते हैं। अंडे तथा शुक्राणु दोनों एक द्वारा ही बनाए जाते हैं। उनमें अलैंगिक जनन विखंडन द्वारा तथा लैंगिक जनन युग्मकों द्वारा होता है। निषेचन आंतरिक होता तथा परिवध्र्न अप्रत्यक्ष होता है, जिसमें वयस्क से भ्िान्न आकृति की लावार् अवस्था पाइर् जाती है। उदाहरण साइकन ;साइपफाद्ध, स्पंाजिला ;अद्ध ;स्वच्छ जलीय स्पंजद्ध तथा यूस्पंजिया ;बाथस्पंजद्ध। 4.2.2 संघ सिलेन्ट्रेटा ;नाइडेरियाद्ध ये जलीय अध्िकांशतः समुद्री स्थावर अथवा मुक्त तैरने वाले सममिति प्राणी हैं ;चित्रा 4.6द्ध। नाइडेरिया नाम इनकी दंश कोश्िाका, नाइडोब्लास्ट या निमेटोब्लास्ट से बना है। यह कोश्िाकाएं स्पशर्कों तथा शरीर में अन्य स्थानों पर पाइर् जाती संघ पोरीपेफरा नाइर्डेरिया सीलेंटरेटा टीनोपफोरा प्लेटीहेल्िमंथीस एस्केल्िमथ्िंास ऐनेलिडा आथोर्पोडा मोलस्क ऽएकाइनोडमर् हेमीकाडेर्टा ;अध्र्रज्जुकीद्ध काडेर्टा ;रज्जुकीद्ध ;बद्ध ;सद्ध चित्रा 4.5 पोरीपेफरा के उदाहरणः ;अद्ध साइकन ;साइपफाद्धहैं। दंशकोरक ;नाइडोब्लास्टद्ध स्िथरक, रक्षा तथा श्िाकार ;बद्ध यूस्पंाजिया ;सद्ध स्पंाजिला 50 जीव विज्ञान ;अद्ध ;बद्ध चित्रा 4.6 सिलेन्ट्रेटा के उदाहरणः ;अद्ध ओरेलिया ;मेडुसाद्ध ;बद्ध एडमसिया ;पालिपद्ध से अपनी काया का बाह्य रूप चित्रा 4.7 नाइडोब्लास्ट का आरेखीय दृश्य पकड़ने में सहायक हैं ;चित्रा 4.7द्ध। नाइडेरिया में ऊतक स्तर संगठन होता है और ये द्विकोश्की होते हैं। इन प्राण्िायों में वेंफद्रीय जठर संवहनी ;गैस्ट्रोवेस्क्यूलरद्ध गुहा पाइर् जाती है, जो अधोमुख ;हाइर्पोस्टोमद्ध पर स्िथत मुख द्वारा खुलती है। इनमें अंतःकोश्िाकी एवं अंतराकोश्िाक दोनों प्रकार का है। इनके वुफछ सदस्यों ;जैसे प्रवाल/कोरलद्ध में वैफल्िसयम काबोर्नेट से बना कंकाल पाया जाता है। इनका शरीर दो आकारों पालिप तथा मेडुसा से बनता है। पाॅलिप स्थावर तथा बेलनाकार होता है। जैसे - हाइड्रा। मेडुसा छत्राी के आकार का तथा मुक्त प्लावी होता है। जैसे - ओरेलिया या जेली पिफश। वे नाइडेरिया जिन में दोनों पाॅलिप तथा मेडुसा दोनों रूप में पाए जाते हैं, उनमें पीढ़ी एकांतरण ;मेटाजनेसिसद्ध होता है जैसे ओबेलिया में। पाॅलिप अलैंगिक जनन के द्वारा मेडुसा उत्पन्न करता है तथा मेडुसा लैंगिक जनन के द्वारा पाॅलिप उत्पन्न करता है। उदाहरण - पफाइसेलिया ;पुतर्गाली यु( मानवद्ध एडमसिया ;समुद्र ऐनीमोनद्ध पेनेट्युला ;समुद्री पिच्छद्ध गोरगोनिया ;समुद्री व्यंजनद्ध तक्ष तथा मेन्डरीना ;ब्रेन कोरलद्ध। 4.2.3 संघ टीनोपफोर टीनोपफोर ;कंकतध्रद्ध को सामान्यतः समुद्री अखरोट ;सी वालनटद्ध या कंकाल जैली ;काॅम्ब जैलीद्ध कहते हैं। ये सभी समुद्रवासी अरीय सममिति, द्विकोरिक जीव होते हैं तथा इनमें ऊतक श्रेणी का शरीर संगठन होता है। शरीर में आठ बाह्य पक्ष्माभी कंकत पट्टिका होती है, जो चलन में सहायता करती है ;चित्रा 4.8द्ध। पाचन अंतःकोश्िाक तथा अंतराः कोश्िाक दोनांे प्रकार का होता है। जीवसंदीप्ित ;प्राणी के द्वारा प्रकाश उत्सजर्न करनाद्ध प्राण्िा जगत 5151टीनोपफोर की मुख्य विशेषता है। नर एवं मादा अलग नहीं होते हैं। जनन केवल लैगिंक होता है। निषेचन बाह्य होता है तथा अप्रत्यक्ष परिवध्र्न होता है, जिसमें लावार् अवस्था नहीं होती ;उदाहरण - प्लूरोब्रेकिआ तथा टीनोप्लानाद्ध। 4.2.4 संघ प्लेटीहैल्िमंथीज ;चपटे कृमिद्ध इस संघ के प्राणी पृष्ठाध्र रूप से चपटे होते हैं। इसलिए इन्हें सामान्यतः चपटे कृमि कहा जाता है। इस समूह के अध्िकांश प्राणी मनुष्य तथा अन्य प्राण्िायों में अंतः परजीवी के रूप में पाए जाते हैं। चपटे कृमि द्विपाशर्व सममिति, त्रिाकोरकी तथा अप्रगुही होते हैं। इनमें अंग स्तर का शरीर संगठन होता है। परजीवी प्राणी में अंवुफश तथा चूषक पाए जाते हैं ;चित्रा 4.9द्ध। वुफछ चपटेकृमि खाद्य पदाथर् को परपोषी से सीध्े अपने शरीर की सतह से अवशोष्िात करते हैं। ज्वाला कोश्िाकाएं परासरण नियंत्राण तथा उत्सर्जन में सहायता करती हंै। नर मादा अलग नहीं होते हैं। निषेचन आंतरिक होता है तथा परिवध्र्न में बहुत सी लावार् अवस्थाएं पाइर् जाती हैं। प्लैनेरिया में पुनरुद्भवन की असीम क्षमता होती है। उदाहरण - टीनिया ;पफीताकृमिद्ध, पेफसियोला ;पणर्कृमिद्ध चित्रा 4.8 टीनोप्लाना ;प्लूरोब्रेकिआद्ध का उदाहरण ;अद्ध ;बद्ध चित्रा 4.9 प्लेटीहैल्िमंथीज के उदाहरण ;कद्ध पीताकृमि ;टीनियाद्ध ;बद्ध पणर्कृमि ;पैफसियोलाद्ध 4.2.5 संघ ऐस्केलमिंथीज ;गोल कृमिद्ध ऐस्केलमिंथीज प्राणी अनुप्रस्थ काट में गोलाकार होते हैं, अतः इन्हें गोलकृमि कहते हैं। ये मुक्तजीवी, जलीय अथवा स्थलीय तथा पौध्े एवं प्राण्िायों में परजीवी भी होते हैं। ये द्विपार्श्व सममिति, त्रिाकोरकी, तथा वूफटप्रगुही प्राणी होते हैं। इनका शरीर संगठन अंगतंत्रा 52 जीव विज्ञान स्तर का है। आहार नाल पूणर् होती है, जिसमें सुपरिवध्िर्त पेशीय ग्रसनी होती है। उत्सजर्न नाल शरीर से अपश्िाष्ट पदाथोंर् को उत्सजर्न रंध््र के द्वारा बाहर निकालती है ;चित्रा 4.10द्ध। नर तथा मादा ;एकलिंगाश्रयीद्ध होते हैं। प्रायः मादा नर से बड़ी होती है। निषेचन आंतरिक होता है तथा ;परिवध्र्न प्रत्यक्ष ;श्िाशु वयस्क के समान ही दिखते हैंद्ध अथवा अप्रत्यक्ष ;लावार् अवस्था द्वाराद्ध होता है। उदाहरण - एस्केरिस ;गोलकृमिद्ध, वुचेरेरिया ;पफाइलेरियाकृमिद्ध एनसाइलोस्टोमा ;अंवुफशकृमिद्ध 4.2.6 संघ ऐनेलिडा ये प्राणी जलीय ;लवणीय तथा अलवण जलद्ध अथवा स्थलीय, स्वतंत्रा जीव तथा कभी - कभी परजीवी होते हैं। ये अंगतंत्रा स्तर नर मादा के संगठन को प्रदश्िार्त करते हंै तथा द्विपाशर्व सममिति होते चित्रा 4.10 ऐस्कलमिंथीज हैं। ये त्रिाकोरकी क्रमिक पुनरावृिा, विखंडित खंडित तथा - गोलकृमि गुहीय प्राणी होते हैं। इनकी शरीर सतह स्पष्टतः खंड अथवा विखंडों में बँटा होता है। ;लैटिन एनुलस अथार्त् सूक्ष्म वलयद्ध इसलिए इस संघ को एनेलिडा कहते हैं ;चित्रा 4.11द्ध। इन प्राण्िायों में अनुदैघ्यर् तथा वृत्ताकार दोनों प्रकार की पेश्िायां पाइर् जाती हंै जो चलन में सहायता करती हैं। जलीय एनेलिडा जैसे नेरिस में पाश्र्वपाद ;उपांगद्ध पैरापोडिया पाए जाते हैं जो तैरने में सहायता करते हंै। इसमें बंद परिसंचरण - तंत्रा उपस्िथत होता है। वृक्कक ;एक वचन नेिडियमद्ध परासरण नियमन तथा उत्सजर्न में सहायक हैं। तंत्रिाका - तंत्रा मंे एक जोड़ी गुच्िछकाएं ;एक वचन - गैंग्िलयोनद्ध होती है, जो पाश्वर् तंत्रिाकाओं द्वारा दोहरी अध्र तंत्रिाका रज्जु से जुड़ी होती हैं ;चित्रा 4.11द्ध। नेरीस, एक जलीय एनेलिड है, जिसमें नर तथा मादा अलग होते हैं ;एकलिंगाश्रयीद्ध लेकिन वेंफचुए तथा जोंक में नर तथा मादा पृथव्फ नहीं होते ;उभयलिंगाश्रयीद्ध हैं। जनन लैंगिक विध्ि द्वारा होता है। उदाहरण - नेरीस पेफरेटिमा ;वेंफचुआद्ध तथा हीरुडिनेरिया ;रक्तचूषक जोंकद्ध ;अद्ध 4.2.7 आथोर्पोडा ;बद्ध आथोर्पोडा प्राण्िा जगत का सबसे बड़ा संघ है, जिसमें कीट चित्रा 4.11 ऐनेलिडा के उदाहरण ;अद्ध नेरीस भी सम्िमलित हैं। लगभग दो तिहाइर् जाति पृथ्वी पर आथोर्पोडा ;बद्ध हीरुडिनेरिया ;रक्तचूषक जोंकद्ध प्राण्िा जगत 5353ही हैं ;चित्रा 4.12द्ध। इसमें अंग - तंत्रा स्तर का शरीर संगठन होता है। तथा ये द्विपार्श्व सममिति, त्रिाकोरकी, विखंडित तथा प्रगुही प्राणी हैं। आथोर्पोड का शरीर काइर्टीनी वहिवंफकाल से ढका रहता है। शरीर सिर, वक्ष तथा उदर में विभाजित होते हैं। ;आथोर्स मतलब संध्ि, पोडा मतलब उपांगद्ध इसमें संध्ियुक्तपाद होता है। श्वसन अंग क्लोम, पुस्त - क्लोम, पुस्त पुफप्पुफस अथवा श्वसनिकाओं के द्वारा होता है। परिसंचरण - तंत्रा खुला होता है। संवेदी अंग जैसे - श्ंाृगिकाएं, नेत्रा ;सामान्य तथा संयुक्तद्ध, संतुलनपुटी ;स्टेटोसिस्टद्ध उपस्िथत होते हैं। उत्सजर्न मैलपिगी नलिका के द्वारा होता है। नर - मादा पृथक होते हैं तथा अध्िकांशतः अंडप्रजक होते हैं। परिवध्र्न प्रत्यक्ष अथवा लावार् अवस्था द्वारा ;अप्रत्यक्षद्ध होता है। आथ्िार्क रूप से महत्वपूणर् कीट हैः ऐपिस ;मधुमक्खीद्ध व बांबिक्स ;रेशम कीटद्ध, लैसिपफर ;लाख कीटद्धऋ रोग वाहक कीट, एनापफलीज, क्यूलेक्स तथा एडीज ;मच्छरद्धऋ यूथपीड़क टिड्डी ;लोकस्टाद्धऋ तथा जीवित जीवाश्म लिमूलस ;राज कवर्फट किंग क्रेबद्ध आदि। 4.2.8 संघ मोलस्का ;कोमल शरीर वाले प्राणीद्ध मोलस्का दूसरा सबसे बड़ा प्राणी संघ है ;चित्रा 4.13द्ध। ये प्राणी स्थलीय अथवा जलीय ;लवणीय एवं अलवणीयद्ध तथा अंगतंत्रा स्तर के संगठन वाले होते हैं। ये द्विपाश्वर् सममिति त्रिाकोरकी तथा प्रगुही प्राणी हैं। शरीर कोमल परंतु कठोर वैफल्िसयम के कवच से ढका रहता है। इसका शरीर अखंडित जिसमें सिर, पेशीय पाद तथा एक अंतरंग कवुफद होता है। त्वचा की नरम तथा स्पंजी परत कवुफद के ऊपर प्रावार बनाती है। कवुफद तथा प्रावार के बीच के स्थान को प्रावार गुहा कहते हैं, जिसमें पख के समान क्लोम पाए जाते हैं, जो श्वसन एवं उत्सजर्न दोनों में सहायक हैं। सिर पर संवेदी स्पशर्क पाए जाते हैं। मुख में भोजन के लिए रेती के समान घ्िासने का अंग होता है। इसे रेतीजिह्ना ;रेडुलाद्ध कहते हैं। सामान्यतः नर ;अद्ध ;बद्ध ;सद्ध ;दद्ध चित्रा 4.12 आथोर्पोडा के उदाहरणः ;अद्ध टिड्डी ;बद्ध तितली ;सद्ध बिच्छू ;दद्ध झींगा ;प्राॅनद्ध ;अद्ध ;बद्ध चित्रा 4.13 मोलस्का के उदाहरणः ;अद्ध पाइला ;सेबघोंघा ;बद्ध आॅक्टोपस जीव विज्ञान एवं जल दोनों में पाए जाते हंै। सरीसृप की त्वचा सूखी एवं करेटिनित होती है। संापों में पाद अनुपस्िथत रहते हैं। मछलियाँ, उभयचर तथा सरीसृप असमतापी ;अनियततापीद्ध हैं। पक्षी समतापी जीव होते हैं तथा शरीर पर पंख होते हैं जो उड़ने में सहायता करते हैं। ये पंख रूपंातरित अग्रपाद हैं। पश्चपाद चलने, तैरने, टिकने पक्ष्िासाद या आलिंगन के लिए अनुवूफलित होते हैं। स्तनधरियों के विश्िाष्ट लक्षणों में स्तन गं्रथ्िा एवं त्वचा पर बाल प्रमुख हैं। ये सामान्यतया जरायुज ;बच्चे देने वालेद्ध होते हैं। अभ्यास 1.यदि मूलभूत लक्षण ज्ञात न हों तो प्राण्िायों के वगीर्करण में आप क्या परेशानियाँ महसूस करेंगे? 2.यदि आपको एक नमूना ;स्पेसिमेनद्ध दे दिया जाए तो वगीर्करण हेतु आप क्या कदम अपनाएंगे? 3.देहगुहा एवं प्रगुहा का अध्ययन प्राण्िायों के वगीर्करण में किस प्रकार सहायक होता है? 4.अंतः कोश्िाकीय एवं बाह्य कोश्िाकीय पाचन में विभेद करें। 5.प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष परिवध्र्न में क्या अंतर है? 6.परजीवी प्लेटिहेल्िमंथीज के विशेष लक्षण बताएं। 7.आथोर्पोडा प्राण्िा - समूह का सबसे बड़ा वगर् है, इस कथन के प्रमुख कारण बताएं। 8.जल संवहन - तंत्रा किस वगर् के मुख्य लक्षण हैं? ;अद्ध पोरीपेफरा ;बद्ध टीनोपफोरा ;सद्ध एकाइनोडमेर्टा ;दद्ध वफाॅडेर्टा 9.सभी कशेरुकी ;वटिर्ब्रेट्सद्ध रज्जुकी ;वफाॅडेर्टसद्ध है, लेकिन सभी रज्जुकी कशेरुकी नहीं हैं। इस कथन को सि( करें। 10.मछलियांे में वायु - आशय ;एयर ब्लैडरद्ध की उपस्िथति का क्या महत्व है? 11.पक्ष्िायों में उड़ने हेतु क्या - क्या रूपंातरण हैं? 12.अंडजनक तथा जरायुज द्वारा उत्पन्न अंडे या बच्चे संख्या में बराबर होते हैं? यदि हाँ तो क्यों? यदि नहीं तो क्यों? 13.निम्नलिख्िात में से शारीरिक खंडीभवन किसमें पहले देखा गया? ;अद्ध प्लेटिहेल्िमंथीज ;बद्ध एस्केलमिंथीज ;सद्ध ऐनेलिडा ;दद्ध आथ्रोर्पोडा 14.निम्न का मिलान करें - ;पद्ध प्रच्छद ;अद्ध टीनेपफोरा ;पपद्ध पाश्वर्पाद ;बद्ध मोलस्का ;पपपद्ध शल्क ;सद्ध पोरीपफोरा ;पअद्ध कंकत पट्टिका ;काम्बप्लेटद्ध ;दद्ध रेप्टेलिया ;अद्ध रेडूला ;इर्द्ध ऐनेलिडा ;अपद्ध बाल ;पफद्ध साइक्लोस्टोमेटा एवं काॅन्िड्रीक्थीज ;अपपद्ध कीपकोश्िाका ;कोएनोसाइटद्ध ;गद्ध मैमेलिया ;अपपपद्ध क्लोमछिद्र ;घद्ध अॅास्िटक्थीज 15.मनुष्यों पर पाए जाने वाले वुफछ परजीवों के नाम लिखें।

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