वनस्पति जगत 31 संतति काॅलोनी जनक काॅलोनी पफलैजिला शाखाएं अक्ष ;अ - पद्ध ;अ - पपद्ध ;अ - पपपद्ध प्रपणर् मध्य श्िारा प्रपणर् वायु ब्लैडर प्रपणर् ;ब - पद्ध छत्रिाका वृंत स्थापपांग ;ब - पपद्ध स्थापपांग ;ब - पपपद्ध छत्रिाका वृंत प्रपणर् मुख्य अक्ष शाखाएं चित्रा 3.1 शैवाल ;अद्ध ;बद्ध ;सद्ध हरित शैवाल भूरे शैवाल लाल शैवाल ;स - पद्ध ;पद्ध बाॅलबाक्स ;पद्ध लैमिनेरिया ;पद्ध पौरपफाइरा ;पपद्ध क्लैमाइडोमोनाॅस ;पपद्ध फ्रयूकस ;पपद्ध पाॅलीसाइपफोनिया ;स - पपद्ध ;पपपद्धकारा ;पपपद्धडिक्टाइओटा 34 जीव विज्ञान निषेचनोत्तर विकास होता है। इसके सामान्य सदस्य - पोलीसाइपफोनिया, ग्रेसिलेरिया, पोरपफायरातथा जिलेडियम हैं ;चित्रा 3.1 सद्ध। 3.2 ब्रायोपफाइट ब्रायोपफाइट में माॅस तथा लिवरवटर् आते हैं जो प्रायः पहाडि़यों में नम तथा छायादार क्षेत्रों में पाए जाते हैं ;चित्रा 3.2द्ध। ब्रायोपफाइट को पादप जगत के जलस्थलचर भी कहते हैंऋ स्त्राीधनीध्र पुंधनीध्र जेमा कप जेमा कप ;अद्ध मूलाभ ;बद्ध मूलाभ सीटा प्रपणर् शाखाएं बीजाणु - उद्भ्िाद् पिायंा युग्मकोद्भ्िाद् चित्रा 3.2 ;सद्ध ब्रायोपफाइट ;अद्ध लिवरवटर् - मारवैंफश्िाया ;अद्ध मादा थैलस ;बद्ध नर थैलस माॅस - ;सद्ध फ्रयूनेरिया, युग्मकोद्भ्िाद् तथा बीजाणुद्गमिद् ;दद्ध स्पफैगनम युग्मकोद्भ्िाद् मुख्य अक्ष ;दद्ध मूलाभ स्त्राीधनी शाखा वनस्पति जगत 37 स्ट्रोबिलस पिायां पवर् स्तम्भ स्ंाध्ि/गाँठ मूल शाखा ;अद्ध राइजोम ;बद्ध ;दद्ध;सद्ध चित्रा 3.3 टैरिडोपफाइट ;अद्ध सेलैजिनैला ;बद्ध इक्वीस्िटम ;सद्ध पफनर् ;दद्ध सैलबीनिया वनस्पति जगत 39 ही न्यूनीकृत होती है और यह वुफछ ही कोश्िाकाओं में सीमित रहती हैं। इस न्यूनीकृत नर युग्मकोद्भ्िाद् को परागकण कहते हैं। परागकणों का विकास लघुबीजाणुधनी में होता है। जिस शंवुफ पर गुरु बीजाणुपणर् तथा गुरु बीजाणुधनी होती हैऋ उन्हें गुरु बीजाणुधनिक अथवा मादा शंवुफ कहते हैं। दो प्रकार के नर अथवा मादा शंवुफ एक ही वृक्ष ;पाइनसद्ध अथवा विभ्िान्न वृक्षों पर ;साइवैफसद्ध पर स्िथत हो सकते हैं। गुरु बीजाणु मातृ कोश्िाका बीजांड काय की एक कोश्िाका से विभेदित हो जाता है। बीजांडकाय एक अस्तर द्वारा सुरक्ष्िात रहता है और इस सघन रचना को बीजांड कहते हैं। बीजांड गुरु बीजाणुपणर् पर होते हैं, जो एक गुच्छा बनाकर मादा शंवुफ बनाते हैं। गुरु बीजाणु मातृ कोश्िाका में मिआॅसिस द्वारा चार गुरु बीजाणु बन जाते हैं। गुरु बीजाणुधनी ;बीजांडकायद्ध स्िथत अकेला गुरुबीजाणु मादा युग्मकोद्भ्िाद् में विकसित होता है। इसमें दो अथवा दो से अिाक स्त्राीधनी अथवा मादा जनन अंग होते हैं। बहुकोश्िाक मादा युग्मकोद्भ्िाद् भी गुरु बीजाणुधनी में ही रह जाता है। जिम्नोस्पमर् में दोनांे ही नर तथा मादा युग्मकोद्भ्िाद् ब्रायोपफाइट तथा टैरिडोपफाइट की तरह स्वतंत्रा नहीं होते। वे स्पोरोपफाइट पर बीजाणुधनी में ही रहते हैं। बीजाणुधनी से परागकण बाहर निकलते हैं। ये गुरु बीजाणुपणर् पर स्िथत बीजांड के छिद्र तक हवा द्वारा ले जाए जाते हैं। परागकण से एक परागनली बनती है जिसमें नर युग्मक होता हैं। यह परागनली स्त्राीधनी की ओर जाती है और वहाँ पर शुक्राणु छोड़ देती है। निषेचन के बाद युग्मनज बनता है, जिससे भ्रूण विकसित होता है और बीजांड से बीज बनते हैं। ये बीज ढके हुए नहीं होते। 3.5 एंजियोस्पमर् पुष्पी पादपों अथवा एंजियोस्पमर् में परागकण तथा बीजांड विश्िाष्ट रचना के रूप में विकसित होते हैं जिसे पुष्प कहते हैं। जबकि जिम्नोस्पमर् में बीजांड अनावृत होते हैं। एंजियोस्पमर् पुष्पी पादप हैं, जिसमें बीज पफलों के भीतर होते हैं। यह पादपों में सबसे बड़ा वगर् है। उनके वासस्थान भी बहुत व्यापक हैं। इनका माप सूक्ष्मदशीर् जीवों वुल्िपफया से लेकर सबसे ऊंचे वृक्ष यूकेल्िपट्स ;100 मीटर से अध्िक ऊंचाइर्द्ध तक होता है। इनसे हमें भोजन, चारा, ईंध्न, औषध्ियाँ तथा अन्य दूसरे आथ्िार्क महत्त्व के उत्पाद प्राप्त होते हैं। ये दो वगो± द्विबीजपत्राी तथा एकबीजपत्राी में विभक्त होते हैं।2 द्विबीजपत्राी पौधें के बीजों में ;अद्ध ;बद्ध बामन शाखा लंब प्ररोह बीज ;सद्ध चित्रा 3.4 जिम्नोस्पमर् ;अद्ध साइकस ;बद्ध पाइनस ;दद्ध गिंकगो वनस्पति जगत 41 भ्रूण ;जिससे एक अथवा दो बीजपत्रा हो सकते हैंद्ध मेें विकसित हो जाता है और प्राथमिक भू्रणपोष वेंफद्रक भू्रणपोष में विकसित हो जाता है। भ्रूणपोष विकासशील भू्रण को पोषण प्रदान करता है। इन घटनाओं के दौरान बीजांड से बीज बन जाते हैं तथा अंडाशय से पफल बन जाता है। निषेचन के बाद सहाय कोश्िाकाएँ तथा प्रतिव्यासांत कोश्िाकाएँ लुप्त हो जाती है। एंजियोस्पमर् के जीवन चक्र को चित्रा 3.6 में दिखाया गया है। पराग कोश लघु बीजाणु मातृ कोश्िाकाविार्काग्र तंतु लघु बीजाणुधनीवतिर्का गुरू बीजाणु मातृ कोश्िाका अंडाश्य पुष्प लघु बीजाणु गुरूबीजाणुधनी ;बीजांडद्ध युग्मकोद्भ्िाद्बीजाणु - उद्भ्िाद बीजाणु - उद्भ्िाद् ;दद्ध संतति ;2दद्ध संतति लघु बीजाणु ;परागकणद्ध भ्रूण नर युग्मकोद्भ्िाद् युग्मन्ज अंड युग्मक चित्रा 3.6 ऐन्िजयोस्पमर् का जीवन चक्र 3.6 पादप जीवन चक्र तथा संतति या पीढ़ी - एवंफातरण पादप में अगुण्िात तथा द्विगुण्िात कोश्िाकाएँ माइटोसिस द्वारा विभक्त होती हैं। इसके कारण विभ्िान्न काय, अगुण्िात तथा द्विगुण्िात बनते हैं। अगुण्िात पादपकाय माइटोसिस द्वारा युग्मक बनाते हैं। इसमें पादप काय युग्मकोद्भ्िाद् होता है। निषेचन के बाद युग्मनज भी माइटोसिस द्वारा विभक्त होता है जिसके कारण द्विगुण्िात स्पोरोपफाइट पादपकाय बनाता है। इस

RELOAD if chapter isn't visible.