जीव जगत साथ - साथ चलती रहती हैं। सभी पौधें, प्राण्िायों, कवकों ;पेफजाइर्द्ध तथा सूक्ष्म जीवों में उपापचयी ियाएं होती हैं। हमारे शरीर में होने वाली सभी रासायनिक ियाएं उपापचयी ियाएं हैं। किसी भी निजीर्व में उपापचयी ियाएं नहीं होती। शरीर के बाहर कोश्िाका मुक्त तंत्रा में उपापचयी ियाएं प्रदश्िार्त हो सकती हैं। जीव के शरीर से बाहर परखनली में की गइर् उपापचयी ियाएं न तो जैव हैं और न ही निजीर्व। अतः उपापचयी ियाएं निरापवाद जीवों के विश्िाष्ट गुण के रूप में पारिभाष्िात हैं जबकि पात्रो में एकाकी उपापचयी ियाएं जैविक नहीं है यद्यपि ये निश्िचत ही जीवित ियाएं हैं। अतः शरीर का कोश्िाकीय संगठन जीवन स्वरूप का सुस्पष्ट अभ्िालक्षण हैं। शायद, सभी जीवों का सबसे स्पष्ट परंतु पेंचीदा अभ्िालक्षण अपने आस - पास या पयार्वरण के उद्दीपनों, जो भौतिक, रासायनिक अथवा जैविक हो सकती हैं, के प्रति संवेदनशीलता तथा प्रतििया करना है। हम अपने संवेदी अंगों द्वारा अपने पयार्वरण से अवगत होते हैं। पौध्े प्रकाश, पानी, ताप, अन्य जीवों, प्रदूषकों आदि जैसे बाह्य कारकों के प्रति प्रतििया दिखाते हैं। प्रोकेरिआॅट से लेकर जटिलतम यूकेरिआॅट तक सभी जीव पयार्वरण संकेतों के प्रति संवदेना एवं प्रतििया दिखा सकते हैं। पादप तथा प्राण्िायों दोनों में दीप्ित काल मौसमी प्रजनकों के जनन को प्रभावित करता है। इसलिए सभी जीव अपने पयार्वरण से अवगत रहते हैं। मानव ही केवल ऐसा जीव है जो स्वयं से अवगत अथार्त् स्वचेतन है। इसलिए चेतना जीवों को पारिभाष्िात करने के लिए अभ्िालक्षण हो जाती है। जब हम मानव के विषय में चचार् करते हैं तब जीवों को पारिभाष्िात करना और भी कठिन हो जाता है। हम रोगी को अस्पताल में अचेत अवस्था में लेटे रहते हुए देखते हैं जिसके हृदय तथा पुफप्पुफस को चालू रखने के लिए मशीनें लगाइर् गइर् होती हैं। रोगी का मस्ितष्क मृतसम होता है। रोगी में स्वचेतना नहीं होती। ऐसे रोगी जो कभी भी अपने सामान्य जीवन में वापस नहीं आ पाते, तो क्या हम इन्हें जीव अथवा निजीर्व कहेंगे? उच्चस्तरीय अध्ययन में जीव विज्ञान पृथ्वी पर जैव विकास की कथा है आपको पता लगेगा कि सभी जीव घटनाएं उसमें अंतनिर्हित प्रतिियाओं के कारण होती हैं। ऊतकों के गुण कोश्िाका में स्िथत कारकों के कारण नहीं हैं, बल्िक घटक कोश्िाकाओं की पारस्परिक प्रतििया के कारण है। इसी प्रकार कोश्िाकीय अंगकों के लक्षण अंगकों में स्िथत आण्िवक घटकों के कारण नहीं बल्िक अंगकों में स्िथत आण्िवक घटकों के आपस में िया करने के कारण हैं। उच्च स्तरीय संगठन उद्गामी गुणध्मर् इन प्रतिियाओं के परिणामस्वरूप होते हैं। सभी स्तरों पर संगठनात्मक जटिलता की पदानुक्रम में यह अद्भुत घटना यथाथर् है। अतः हम कह सकते हैं कि जीव स्वप्रतिकृति, विकासशील तथा स्वनियमनकारी पारस्पारिक ियाशील तंत्रा हैे जो बाह्य उद्दीपन के प्रति अनुिया की क्षमता रखते हैं। जीव विज्ञान पृथ्वी पर जीवन की कहानी है। वतर्मान, भूत एवं भविष्य के सभी जीव एक दूसरे से सवर्निष्ठ आनुवंश्िाक पदाथर् की साझेदारी द्वारा संब( है, परंतु यह पदाथर् सबमें विविध् अंशों में होते हैं।

RELOAD if chapter isn't visible.