सूचकांक इस अध्याय को पढ़ने के बाद आप इस योग्य होंगे किः ऽ सूचकांक शब्द का अथर् समझ सवेंफऋ ऽ अध्िकतर प्रयोग किए जाने वाले वुफछ सूचकांकों से परिचित हो सवेंफऋ ऽ सूचकांक का परिकलन कर सवेंफऋ ऽ इसकी सीमाओं को समझ सवेंफ। 1. प्रस्तावना पिछले अध्यायों में आपने पढ़ा कि आँकड़ों के समूह से संक्ष्िाप्त मापों को वैफसे प्राप्त किया जा सकता है। अब आप पढ़ेंगे कि संबंध्ित चरों के समूह में परिवतर्न के द्वारा संक्ष्िाप्त मापों को वैफसे प्राप्त करें। रवि कापफी समय के बाद बाशार जाता है। वह देखता है कि अध्िकांश वस्तुओं की कीमतें परिवतिर्त हो चुकी हैं। वुफछ वस्तुएँ महँगी हो गइर् हैं तो वुफछ वस्तुएँ अध्याय 8 सस्ती। वह बाशार से खरीद कर लाइर् गइर् प्रत्येक वस्तु की परिवतिर्त कीमतों के बारे में अपने पिताजी को बताता है। यह दोनों के लिए ही विस्मयकारी था। औद्योगिक क्षेत्रा के अंतगर्त कइर् उपक्षेत्राक भी आते हैं। इनमें से प्रत्येक में परिवतर्न हो रहा है। वुफछ उपक्षेत्राकों में उत्पादन बढ़ रहा है, जबकि वुफछ में घट रहा है। ये परिवतर्न एकरूप नहीं हैं। व्यष्िट दरों में परिवतर्न के वणर्न को समझना कठिन होगा। क्या कोइर् एकल संख्या इन परिवतर्नों को प्रस्तुत कर सकती है? निम्नलिख्िात उदाहरणों को देखेंः उदाहरण 1 एक औद्योगिक श्रमिक 1982 में 1000 रु वेतन प्राप्त करता था। आज उसकी आय 12000 रु है। क्या ऐसा कहा जा सकता है कि इस अवध्ि में उसके जीवन - स्तर में 12 गुना सुधर आया है? उसके वेतन को कितना बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि उसका जीवन स्तर वैसा हो जाय, जैसा पहले था? उदाहरण 2 आप समाचार - पत्रों में सेंसेक्स के बारे में अवश्य ही पढ़ते होंगे। सेंसेक्स का 8000 का अंक पार करना, वास्तव में सुखद अहसास कराता है। हाल ही में, जबसेंसेक्स 600 अंक नीचे गिरा तो निवेशकों की संपिा में 1, 53, 690 करोड़ रु का भारी नुकसान हुआ। यथाथर् में सेंसेक्स है क्या? उदाहरण 3 सरकार कहती है कि पेट्रोलियम पदाथार्ें की कीमतों में वृि के कारण मुद्रास्पफीति दर में तेजी से वृि होगी। मुद्रास्पफीति की माप वैफसे की जाती है? ये ऐसे प्रश्नों के वुफछ उदाहरण हैं जिनसे आपका सामना प्रतिदिन होता रहता है। सूचकांक के अध्ययन से इन प्रश्नों का विश्लेषण करने में सहायता मिलती है। 2. सूचकांक क्या है? सूचकांक संबंध्ित चरों के समूह के परिमाण में परिवतर्नों को मापने का एक सांख्ियकीय साध्न है। यह अपसारित ;भ्िान्न - भ्िान्न दिशाओं मेंद्ध होने वालेअनुपातों की सामान्य प्रवृिा का प्रतिनिध्ित्व करता है, जिनसे इसको परिकलित किया जाता है। यह दो भ्िान्न स्िथतियों में संबंध्ित चरों के किसी समूह में औसत परिवतर्न का एक माप है। तुलना समान वगार्ें में की जा सकती है जैसे व्यक्ितयों, स्वूफलों, अस्पतालों आदि में। सूचकांक उल्िलख्िात वस्तुओं की सूची में कीमतों, उद्योग के विभ्िान्न क्षेत्राकों में उत्पादन की मात्रा, विभ्िान्न कृष्िा पफसलों का उत्पादन, निवार्ह खचर् आदि चरों के मूल्यों में परिवतर्न को भी मापता है। परंपरागत रूप से, सूचकांकों को प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है। दो अवध्ियों में से, जिस अवध्ि के साथ तुलना की जाती है, उसे आधार - अवध्ि के रूप में जाना जाता है। आधर - अवध्ि में सूचकांक का मान 100 होता है। यदि आप जानना चाहते हैं कि 1990 के स्तर से 2005 में कीमतों में कितना परिवतर्न हुआ है, तब 1990 आधर बन जाता है। किसी भी अवध्ि का सूचकांक इसके अनुपात में होता है। अतः 250 का सूचकांक यह इंगित करता है कि मूल्य, आधार अवध्ि के मान का ढाइर् गुना है। कीमत - सूचकांक वुफछ वस्तुओं की कीमतों की माप करता है जिससे उनकी तुलना संभव हो पाती है। परिमाणात्मक सूचकांक उत्पादन की भौतिक मात्रा, निमार्ण तथा रोशगार में परिवतर्न को मापता है। यद्यपि कीमत - सूचकांकों का प्रयोग अध्िकांश रूप से किया जाता है, उत्पादन सूचकांक भी अथर्व्यवस्था में उत्पादन के स्तर का महत्वपूणर् सूचक होता है। 3.सूचकांक की रचना निम्नलिख्िात खंडों में सूचकांक की रचना के सि(ांतों को कीमत - सूचकांक के माध्यम से उदाहरण सहित समझाया जाएगा। निम्नलिख्िात उदाहरण देखेंः उदाहरण 1 सरल समूहित कीमत सूचकांक का परिकलन 108 सारणी 8.1 वस्तु आधर अवध्ि वतर्मान अवध्ि प्रतिशत कीमत ;रुद्ध कीमत ;रुद्ध परिवतर्न । 2 4 100 ठ 5 6 20 ब् 4 5 25 क् 2 3 50 जैसा कि आप इस उदाहरण में देखते हैं, प्रत्येक वस्तु के लिए प्रतिशत परिवतर्न भ्िान्न - भ्िान्न है। यदि सभी चारों वस्तुओं के लिए प्रतिशत परिवतर्न एक समान रहता, तो परिवतर्नों की व्याख्या करने के लिए केवल एक माप ही पयार्प्त होता। तथापि प्रतिशत परिवतर्नों में भ्िान्नता होती है तथा प्रत्येक मद के लिए प्रतिशत परिवतर्न को रिपोटर् करना भ्रामक होगा। ऐसा तब होता है जब वस्तुओं की संख्या बहुत अध्िक होती है, जो किसी भी वास्तविक बाशार स्िथति में सामान्य है। कीमत - सूचकांक इन परिवतर्नों को एकल संख्यात्मक माप के द्वारा प्रस्तुत करता है। सूचकांक की रचना करने की दो विध्ियाँ हैं। इन्हें समूहित विध्ि के द्वारा तथा सापेक्षों के माध्य परिकलन विध्ि के द्वारा अभ्िाकलित किया जा सकता है। समूहित विध्ि ;।हहतमहंजपअम डमजीवकद्ध अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी यहाँ यह कहा जाता है कि कीमतों में 38.5 प्रतिशत की वृि हुइर् है। क्या आप जानते हैं कि इस प्रकार के सूचकांकों का उपयोग सीमित होता है। इसका कारण यह है कि विभ्िान्न वस्तुओं की कीमतों के माप की इकाइयाँ समान नहीं होती हैं। यह अभारित ;सूचकांकद्ध है, क्योंकि इसमें मदों का सापेक्ष्िाक महत्व उपयुक्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं होता है। यहाँ सभी मदों को बराबर महत्व या भार वाला माना जाता है। लेकिन वास्तव में क्या होता है? वास्तव में, क्रय की गइर् मदों के महत्व के क्रम में भ्िान्नता होती है। हमारे व्यय में खाद्य पदाथार्ें का अनुपात कापफी अध्िक होता है। ऐसी स्िथति में अध्िक भार वाली मद की कीमत में तथा कम भारवाली मद की कीमत में समान वृि के द्वारा कीमत सूचकांक में होने वाले वुफल परिवतर्न के आशय भ्िान्न - भ्िान्न होंगे। भारित कीमत सूचकांक के लिए सूत्रा है, च्01 त्र Σ Σ च्ु11 च्ु01 ञ100 कोइर् सूचकांक तब भारित सूचकांक बन जाता है, जब मदों के सापेक्ष्िाक महत्व को ध्यान में रखा जाता है। यहँा भार परिमाणात्मक भार है। भारित समूहित सूचकांक की रचना में वुफछ विशेष वस्तुओंएक सरल समूहित कीमत - सूचकांक के लिए सूत्रा है, को लिया जाता है तथा इनके मूल्य को प्रतिवषर्Σ Σ च्1 च्0 परिकलित किया जाता है। इस प्रकार, यह वस्तुओंच्01 त्र ञ100 के एक निश्िचत समूह के मूल्यों में होने वाले यहाँ पर चतथा च क्रमशः वतर्मान अवध्ि तथा10आधर अवध्ि में वस्तुओं की कीमत को इंगित करता है। उदाहरण 1 के आँकड़ों का प्रयोग करते हुए सरल समूहित कीमत सूचकांक है, 465़़़ 3 ञ100 त्र138 5 त्र ण्च्01 2542़़़ परिवतर्न को मापता है। क्योंकि वस्तुओं के निश्िचत समूह के वुफल मूल्य में परिवतर्न होता है, यह परिवतर्न कीमत में परिवतर्न के कारण होता है। भारित समूहित सूचकांक परिकलन की विभ्िान्न विध्ियों में भ्िान्न - भ्िान्न समय में वस्तअुों के भ्िान्न - भ्िान्न समूहों का प्रयोग किया जाता है। कि आप यहाँ देख सकते हैं कि कीमत - वृि के कारण, आधर - अवध्ि परिमाणों का मूल्य 35.3 प्रतिशत तक बढ़ गया है। आधर - अवध्ि मात्रा को भार के रूप में प्रयोग करके, यह कहा जा सकता है कि कीमतों में 35.3 प्रतिशत की वृि हुइर् है। चूँकि वतर्मान अवध्ि परिमाण आधर - अवध्ि परिमाणों से भ्िान्न होते हैं, अतः वतर्मान अवध्ि भार का प्रयोग करने वाला सूचकांक, सूचकांकों का भ्िान्न मूल्य देता है। च्01 त्र Σ Σ च्ु11 च्ु01 ञ 100उदाहरण 2 भारित समूहित कीमत सूचकांक का परिकलन सारणी 8.2 वस्तुएँ आधर अवध्ि वतर्मान अवध्ि कीमत मात्रा कीमत मात्रा च्ुचु0 011 । 2 10 4 5 ठ 5 12 610 ब् 4 20 515 क् 2 15 310 Σ Σ च्ु11 च्ु01 ञच्01 100त्र ञ़ 6 ञ ़ञ15 ़ 3 ञ10 45 105 त्रञ 100ञञ2 ञ 5 ़ 510 ़ 4 ञ15 ़ 215 185 त्रञ 100 त्र ण्132 1140 यह वतर्मान अवध्ि परिमाणों का भार के रूप में प्रयोग करता है। जब भारित समूहित कीमत सूचकांक वतर्मान अवध्ि परिमाण को भार के रूप में प्रयोग करता है, तो यह ‘पाशे का मूल्य सूचकांक’ के नामसे जाना जाता है। यह ऐसे प्रश्नों के उत्तर देने में सहायक होता है कि जब वतर्मान अवध्ि वस्तुओं की 4 ञ ़ञ12 ़ 5 ञ़106 203 ञ15 त्रञ 100 2 ञ10 ़ 5 ञ 12 ़ञ ़4202 ञ 15 257 त्रञ 100 त्र ण्135 3190 यह विध्ि आधर अवध्ि की मात्राओं को भार के रूप में प्रयुक्त करती है। भारित समूहित कीमत सूचकांक, जब आधर अवध्ि की मात्रा को भार के रूप में प्रयोग करता है उसे लेस्पेयर कीमत सूचकांक भी कहते हैं। यह इस प्रश्न की व्याख्या करता है कि यदि आधर अवध्ि में वस्तुओं की एक टोकरी पर व्यय रु 100 था, तो वस्तुओं की उसी टोकरी पर वतर्मान अवध्ि में कितना व्यय होना चाहिए? जैसा टोकरी को आधर - अवध्ि में उपभोग किया जाता और यदि हम इस पर 100 रु व्यय करते, तो वस्तुओं की उसी टोकरी पर वतर्मान अवध्ि में कितना व्यय होना चाहिए? पाशे के कीमत सूचकांक के अंतगर्त 132.1 को 32.1 प्रतिशत कीमत में वृि के रूप में व्यक्त किया जाता है। वतर्मान अवध्ि भार का प्रयोग करते हुए यह कहा जाएगा कि कीमत 32.1 प्रतिशत बढ़ गइर् है। मूल्यानुपातों की माध्य विध्ि ;डमजीवक व ि।अमतंहपदह त्मसंजपअमेद्ध जब केवल एक वस्तु हो, तब कीमत - सूचकांक वस्तु की वतर्मान अवध्ि की कीमत तथा आधर - अवध्ि की कीमत का अनुपात होता है। सामान्यतः इसे प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है। मूल्यानुपातों की माध्य परिकलन विध्ि इन मूल्यानुपातों के औसत या माध्य का प्रयोग तब करती है, जब वस्तुएँ अध्िक होती हैं। मूल्यानुपातों का प्रयोग करने वाले सूचकांक को इस प्रकार से पारिभाष्िात किया जाता है 1 च1च्01 त्र Σ ञ100 दच0 यहाँ च् तथा च् क्रमशः वतर्मान अवध्ि और आधार10अवध्ि में वस्तु की कीमतों को इंगित करते हैं। अनुपात ;च्/ च्द्ध × 100 को वस्तु का मूल्यानुपात1 0भी कहा जाता है। यहाँ द = वस्तुओं की संख्या है। वतर्मान उदाहरण में, 1 Ê 4653६च्01 त्र ़़़˜ञ100 त्र 149 4 ध्प्र 2542¯इस तरह से वस्तुओं की कीमत में 49 प्रतिशत की वृि हुइर् है। मूल्यानुपातों का भारित सूचकांक भारित समान्तर माध्य होता है, जिसे इस प्रकार से परिभाष्िात किया जाता हैः Ê च्1 ६Σॅ ञ100ध्प्र ˜च्0 ¯च्01 त्र Σॅ यहाँ ॅ भार है। भारित मूल्यानुपात सूचकांक में भारों का निधर्रण आधर वषर् में वुफल व्यय में उन पर किए गए व्यय के अनुपात अथवा प्रतिशत द्वारा किया जा सकता है। यह वतर्मान अवध्ि के लिए भी हो सकता है, जो प्रयोग किए गए सूत्रा पर निभर्र करता है। अनिवायर्तः ये वुफल व्यय में विभ्िान्न वस्तुओं पर किए गए व्यय अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी के मूल्यांश होते हैं। सामान्यतः आधर - अवध्ि भार को वतर्मान अवध्ि भार की अपेक्षा अध्िक वरीयता दी जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रतिवषर् भार का परिकलन असुविधजनक होता है। यह ;वस्तुओं कीद्ध विभ्िान्न टोकरियों के परिवतिर्त मूल्यों को भी दशार्ता है। ये तुलना योग्य नहीं होते। उदाहरण 3 भारित कीमत सूचकांक के परिकलन के लिए आवश्यक सूचना की जानकारी देता है। उदाहरण 3 भारित मूल्यानुपातों के कीमत सूचकांक का परिकलन सारणी 8.3 वस्तु आधर वतर्मान मूल्यानुपात भार वषर् कीमत वषर् कीमत ;» मेंद्ध ;रु मेंद्ध ;रु मेंद्ध । 2 4 200 40 ठ 5 6 120 30 ब् 4 5 125 20 क् 2 3 150 10 भारित कीमत सूचकांक है, Ê च् ६Σॅ1 ञ100ध्प्र ˜च्0 ¯च्01 त्र Σॅ 40 ञ 200 ़ 30 ञ 120 ़ 20 ञ 125 ़ 10 ञ 150 त्र 100 = 156 यहाँ भारित कीमत सूचकांक 156 है। कीमत सूचकांक 56 प्रतिशत बढ़ गया है। अभारित कीमत सूचकांक तथा भारित कीमत सूचकांक के मानों में अंतर होता है, जोकि होना भी चाहिए। भारित सूचकांक में अध्िक वृि उदाहरण 3 में अति महत्वपूणर् मद के दोगुना होने के कारण है। 4.वुफछ महत्वपूणर् सूचकांक उपभोक्ता कीमत सूचकांक ;ब्वदेनउमत च्तपबम प्दकमगद्ध उपभोक्ता कीमत सूचकांक ;ब्च्प्द्ध को निवार्ह सूचकांक के नाम से भी जानते हैं। यह खुदरा कीमतों में औसत परिवतर्न को मापता है। औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक को सामान्य मुद्रा स्पफीति का उपयुक्त संकेतक माना जाता है, जो जनसाधरण के जीवन निवार्ह पर कीमत - वृि के सबसे उपयुक्त प्रभाव को दशार्ता है। निम्नलिख्िात वक्तव्य पर ध्यान दीजिए कि जनवरी 2005 में औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक ;ब्च्प्द्ध 526 ;1982 = 100द्ध है। इस कथन का अभ्िाप्राय क्या है? इसका अभ्िाप्राय है कि यदि एक औद्योगिक श्रमिक वस्तुओं की विशेष टोकरी पर 1982 में 100 रु व्यय कर रहा था, तो उसे जनवरी 2005 में उसी प्रकार की वस्तुओं की टोकरी खरीदने के लिए 526 रु की आवश्यकता है। यह आवश्यक नहीं है कि वह टोकरी खरीदे, बल्िक महत्वपूणर् यह है कि उसके पास इसे खरीद पाने की क्षमता है या नहीं। उदाहरण 4 उपभोक्ता कीमत सूचकांक की रचना Σॅत् ण्9786 85 ब्च्प् त्रत्र त्र ण्97 86 Σॅ 100 उपभोक्ता कीमत सूचकांक ;ब्च्प्द्ध भारत में तीन उपभोक्ता कीमत सूचकांक बनाए जाते हैं। ये हैं, औद्योगिक श्रमिकों के लिए ब्च्प् ;आधार रूप में 1982द्ध, शहरी गैर - शारीरिक कमर्चारियों ;वषर् 1984μ1985 आधरद्ध के लिए ब्च्प् तथा कृष्िा श्रमिकों के लिए ;वषर् 1986μ87 आधरद्ध के लिए ब्च्प्। इनका नियमित रूप से हर महीने परिकलन होता है, ताकि इन तीनों उपभोक्ताओं की व्यापक श्रेण्िायों के जीवन निवार्ह पर, खुदरा कीमतों में आए परिवतर्नों के प्रभावों का विश्लेषण किया जा सके।औद्योगिक श्रमिकों तथा कृष्िा श्रमिकों के लिए ब्च्प् का प्रकाशन श्रमिक वेंफद्र, श्िामला द्वारा किया जाता है। वेंफद्रीय सांख्ियकीय संगठन शहरी गैर - शारीरिक कमर्चारियों के लिए ब्च्प् संख्याओं का प्रकाशन करता है। ऐसा इसलिए आवश्यक है क्योंकि उनकी विश्िाष्ट उपभोक्ता टोकरी की वस्तुएँ असमान होती हैं। औद्योगिक श्रमिकों के लिए मुख्य वस्तु समूहों के लिए ब्च्प् में ;1982=100द्ध भार - योजना निम्न सारणी में दी गइर् है। इस योजना में खाद्य - पदाथार्ें को सबसे अध्िक भार दिया गया है। खाद्य एक महत्वपूणर् श्रेणी है। खाद्य मदों की कीमत में किसी भी प्रकार की वृि का ब्च्प् पर महत्वपूणर् प्रभाव होगा। इसके साथ ही यह सरकार द्वारा प्रायः दिए गए व्यक्तव्य कि तेल की कीमतों में वृि से मुद्रास्पफीति नहीं होगी, की भी व्याख्या करता है। मुख्य समूह » में भार खाद्य 57.00 पान, सुपारी, तंबावूफ आदि 3.15 इंर्ध्न एवं प्रकाश 6.28 आवास 8.67 कपड़े, बिस्तर तथा जूते चप्पल 8.54 विविध् समूह 16.36 सामान्य 100.00 स्रोतः आथ्िार्क सवर्ेक्षण, भारत सरकार। यह उदाहरण प्रदश्िार्त करता है कि जीवन निवार्ह की कीमत में 2.14 प्रतिशत की गिरावट आइर् है। 100 से अध्िक का सूचकांक क्या संकेत देता है? इसका अथर् है कि निवार्ह लागत में वृि, मजदूरी एवं वेतन में उपरिमुखी समायोजन की आवश्यकता है। यह वृि उतने प्रतिशत की होनी चाहिए जितना यह ;सूचकांकद्ध 100 से अध्िक होता है। यदि सूचकांक 150 है, तो 50 प्रतिशत उपरिमुखी समायोजन की आवश्यकता है। इसका अथर् है कि कमर्चारियों के वेतन में 50» वृि की जानी चाहिए। अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक ;प्दकनेजतपंस च्तवकनबजपवद प्दकमगद्ध औद्योगिक उत्पादन सूचकांक अनेक उद्योगों के औद्योगिक उत्पादन के स्तर में परिवतर्न को मापता है। इसके अंतगर्त सावर्जनिक तथा निजी क्षेत्राक के उत्पादन शामिल होते हैं। यह परिमाण मूल्यानुपातों का भारित औसत है। सूचकांक के लिए सूत्रा हैः Σु1 ञ ॅप्प्च्01 त्रञ 100Σॅ सारणी 8.4 मद भार » में आधर अवध्ि वतर्मान अवध्ि त्त्रच्पध्च्व × 100 ॅत् ॅ कीमत ;रुद्ध कीमत ;रुद्ध ;» मेंद्ध खाद्य ;आहारद्ध 35 150 145 96.67 3883.45 इर्ंध्न 10 25 23 92.00 920.00 कपड़े 20 75 65 86.67 1733.40 किराया 15 30 30 100.00 1500.00 सम्िमश्रित 20 40 45 112.50 2250.00 9786.85 थोक कीमत सूचकांक ;ॅीवसमेंसम च्तपबम पदकमगद्ध थोक कीमत सूचकांक सामान्य कीमत - स्तर में परिवतर्न का संकेत देता है। उपभोक्ता कीमत सूचकांक के विपरीत इसके लिए कोइर् संदभर् उपभोक्ता श्रेणी नहीं होती है। इसके अंतगर्त ऐसे मद शामिल नहीं होते हैं, जो सेवा से संबंध्ित हों जैसे नाइर् के प्रभार, मरम्मत आदि। ‘‘1993μ94 को आधर मानते हुए माचर् 2005 में थोक कीमत सूचकांक 189.1 है’’ इस कथन का अभ्िाप्राय है कि इस अवध्ि के दौरान सामान्य कीमत स्तर में 89.1 प्रतिशत की वृि हुइर् है। भारत में, वषर् 1993μ94 के आधर पर इसका परिकलन प्रत्येक माह में होता है। सारणी 8.6 में आप वुफछ औद्योगिक समूहों के सूचकांक, उनके भार के साथ, देख सकते हैं। सारणी 8.6 व्यापक औद्योगिक समूहन एवं उनके भार व्यापक समूहन भार » में मइर् 2005 में सूचकांक खनन एवं उत्खनन विनिमार्ण 10.47 79.36 155.2 222.7 विद्युत सामान्य सूचकांक 10.17 196.7 213.0 जैसा कि सारणी प्रदश्िार्त करती है कि व्यापक श्रेण्िायों के संवृि निष्पादन में भ्िान्नता है। सामान्य सूचकांक इन श्रेण्िायों के औसत निष्पादन को दिखाता है। खनन तथा उत्खनन के अपेक्षाकृत निम्न निष्पादन के बावजूद सामान्य सूचकांक नीचे क्यों नहीं गिरा? थोक मूल्य सूचकांक ;ॅच्प्द्ध थोक मूल्य सूचकांक में वस्तुओं के भार का निधर्रण आधर वषर् के घरेलू उत्पादन के वस्तु मान तथा आयात के मानों ;आयात कर सहितद्ध द्वारा होता है। यह साप्ताहित आधर पर उपलब्ध् होता है।वस्तुओं को सामान्यतः तीन वगार्ें में वगीर्कृत किया गया है, जैसे प्राथमिक वस्तुएँ, इर्ंध्न, विद्युत, प्रकाश एवं स्नेहक ;लुब्रीवेंफटद्ध तथा विनिमिर्त उत्पाद। भार योजना नीचे दी गइर् है। इर्ंध्न, शक्ित, प्रकाश तथा स्नेहक को दिए गए निम्न भार यह दशार्ते हैं कि सरकार ऐसे व्यक्तव्य देकर वैफसे बच सकती है कि तेल की कीमत में वृि, मुद्रास्पफीति को नहीं बढ़ायेगी, कम - से - कम अल्पावध्ि में। सारणी 8.5 श्रेभार » मेंणी मदों की संख्या प्राथमिक वस्तुएँ 22.0 98 इर्ंध्न, शिाफ, प्रकाश तथा स्नेहक 14.2 19 विनिमिर्त उत्पाद 63.8 318 ड्डोतः आथ्िार्क सवर्ेक्षण 2004μ2005, भारत सरकार पृष्ठ - 89 कृष्िा उत्पादन सूचकांक ;प्दकमग दनउइमत व ि।हतपबनसजनतंस च्तवकनबजपवदद्ध कृष्िा उत्पादन का सूचकांक परिमाण मूल्यानुपातों का एक भारित औसत है। इसकी आधर अवध्ि त्रौवाष्िार्क है, जिसका अंतिम वषर् 1981μ82 है। 2003μ04 में कृष्िा उत्पादन सूचकांक 179.5 था। इसका अथर् है कि तीन वषार्ें, 1979μ80, 1980μ81 एवं 1981μ82 के दौरान कृष्िा उत्पादन में औसतन 79.5 प्रतिशत वृि हुइर्। इस सूचकांक में खाद्यानों का भार 63.92 प्रतिशत है। संवेदी सूचकांक ;ैमदेमगद्ध आपने प्रायः समाचार पत्रों में ऐसे समाचार पढ़े होंगे, ‘‘संवेदी सूचकांक ने 8700 का आँकड़ा पार कर लिया। बी.एस.इर्. ;मुंबइर् स्टाॅक एक्सचेंजद्ध 8650 अंकोंपर बंद हुआ। निवेशकों की संपिा में 9000 करोड़ रु की वृि हुइर्। संवेदी सूचकांक ने अपने इतिहास में पहली बार 8700 के अंक को पार किया, विंफतु 8650 अंक पर बंद हुआ, जो बंद होने के स्तर का एक नया रिकाडर् है।’’ संवेदी सूचकांक में यह वृि आजतक का सवार्ेच्च स्तर है, जो सामान्य तौर पर अथर्व्यवस्था की अच्छी दशा का सूचक है। जैसे - जैसे शेयर की कीमत में वृि होती है, जो संवेदी सूचकांक में वृि द्वारा प्रतिबिंबित होती है, शेयर धरकों की संपिा का मान भी बढ़ता है। अन्य समाचारों को देख्िाए, ‘‘लगातार 30 दिनों में संवेदी सूचकांक 600 अंक नीचे गिरा।’’ निवेशकों को 1,53,690 करोड़ रु कीसंपिा की हानि हुइर्। जबकि संवेदी सूचकांक लगातार दो दिनों में 338 अंक नीचे गिरा, यह 4 अक्टूबर से अब तक 6.8» या 598 अंक की क्षति के साथ नीचे आया है, जबकि यह उस समय 8800 अंकों पर सवार्ध्िक था। इस अवध्ि के दौरान निवेशकों को भ्िान्न - भ्िान्न समयों पर, 1,53,690 करोड़ रु या 6.7» की दर से,संपिा की क्षति हुइर्। इससे यह प्रदश्िार्त होता है कि अथर्व्यवस्था की दशा ठीक नहीं है। निवेशक इस बात को तय करने में कठिनाइर् महसूस कर सकते हैं कि निवेश करें या नहीं। हाल ही के वषार्ें में मानव विकास सूचकांक एक अन्य उपयोगी सूचकांक के रूप में उभर कर आया है। शीघ्र ही उत्पादन कीमत सूचकांक, थोक कीमत सूचकांक की जगह ले लेगा। स्टाॅक एक्सचेंज सेंसेक्स मुंबइर् स्टाॅक एक्सचेंज संवेदी सूचकांक का संक्ष्िाप्त रूप है, जिसका आधर वषर् 1978μ79 है। संवेदी सूचकांक का मान इस अवध्ि के संदभर् में होता है। भारतीय स्टाॅक मावेर्फट के लिएयह मुख्य निदर्ेश चिÉ सूचकांक है। इसके अंतगर्त 30 स्टाॅक हंै, जो अथर्व्यवस्था के 13 क्षेत्राकों काप्रतिनिध्ित्व करते हैं तथा सूचीकृत कंपनियाँ अपने - अपने उद्योगों में अग्रणी हैं। यदि संवेदीसूचकांक ऊपर चढ़ता है तो यह संकेत देता है कि बाजार ठीक चल रहा है और निवेशक इन कंपनियों से बेहतर आमदनी की आशा करते हैं। यह अथर्व्यवस्था की मूल दशा के प्रति निवेशकों के बढ़ते विश्वास को भी दशार्ता है। उत्पादक कीमत सूचकांक उत्पादक कीमत सूचकांक उत्पादकों के दृष्िटकोण से कीमतों में परिवतर्न को मापता है। यह करों, व्यापार - लाभ तथा परिवहन लागत सहित आधर कीमतों का प्रयोग करता है। साथ ही थोक कीमत सूचकांक ;1993μ94=100द्ध के संशोध्न पर भारत में कायर्रत एक कायर्कारी दल अन्य बिंदुओं के साथ - साथ थोक कीमत सूचकांक ;ॅच्प्द्ध को बदलकर उत्पादन कीमत सूचकांक ;च्च्प्द्ध करने की अनुवूफलता की जाँच कर रहा है, जैसा कि अन्य कइर् देशों में किया गया है। 5.सूचकांक की रचना में मुद्दे सूचकांक की रचना करते समय वुफछ महत्वपूणर् मुद्दों को ध्यान में रखना चाहिएः ऽ आपको सूचकांक के उद्देश्य के बारे में स्पष्ट होने की आवश्यकता है। जब किसी को मूल्य सूचकांक की आवश्यकता हो तो, परिमाण सूचकांक का परिकलन अनुपयुक्त होगा। ऽ इसके अतिरिक्त, जब आप उपभोक्ता कीमत सूचकांक की रचना कर रहे हों तब विभ्िान्न उपभोक्ता समूहों के मद समान महत्व वाले नहीं होते हैं। पेट्रोल की कीमत में वृि शायद प्रत्यक्ष रूप से किसीनिध्र्न कृष्िा मजदूर की जीवन - स्िथति को प्रभावित नहीं करे। इसलिए किसी भी सूचकांक के लिए मदों का चयन सावधनीपूवर्क किया जाना चाहिए, ताकि जहाँ तक संभव हो सके, ये उनका ;मदों काद्ध प्रतिनिध्ित्व कर सवेंफ। केवल तभी आपको परिवतर्न की सही जानकारी प्राप्त हो सकेगी। ऽ प्रत्येक सूचकांक का एक आधर होना चाहिए। जहाँ तक संभव हो सके, यह आधर सामान्य होना चाहिए। आधर - अवध्ि के लिए चरम मानों को नहीं चुना जाना चाहिए। यह अवध्ि भी अतीत में अध्िक दूर नहीं होनी चाहिए। 1993 और 2005 के बीच तुलना, 1960 और 2005 के बीच की तुलना से अध्िक साथर्क होती है। 1960 की विश्िाष्ट उपभोक्ता टोकरी की बहुत सी मदें आज के दौर में विलुप्त हो चुकी हैं। इसलिए किसी भी सूचकांक के आधर वषर् को नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है। ऽ सूत्रा के चुनाव का विषय भी है, जो अध्ययन किए जाने वाले प्रश्न की प्रकृति पर निभर्र करता है। लेस्पेयर के सूचकांक तथा पाशे के सूचकांक के बीच केवल इन सूत्रों में प्रयुक्त भारों की भ्िान्नता है। ऽ इसके अतिरिक्त भी आँकड़ों के अनेक ड्डोत हैं जिनकी विश्वसनीयता भ्िान्न - भ्िान्न है। कम विश्वसनीयता के आँकड़े भ्रामक परिणाम देंगे। अतः आँकड़ों के संग्रह में उचित सावधनी बरती जानी चाहिए। यदि प्राथमिक आँकड़ों को प्रयुक्त नहीं किया जाता है, तो पिफर सवार्ध्िक विश्वसनीय द्वितीयक आँकड़ों के ड्डोत का चुनाव किया जाना चाहिए। 6. अथर्शास्त्रा में सूचकांक हमें सूचकांक के उपयोग की आवश्यकता क्यों पड़ती है? थोक कीमत सूचकांक ;ॅच्प्द्ध, उपभोक्ता कीमत सूचकांक ;ब्च्प्द्ध तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक ;प्प्च्द्ध का नीति - निमार्ण में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। ऽ उपभोक्ता कीमत सूचकांक ;ब्च्प्द्ध अथवा निवार्ह सूचकांक, मजदूरी समझौता, आय - नीति, कीमत - नीति, किराया - नियंत्राण, कराधन तथा सामान्य आथ्िार्क नीतियों के निमार्ण में सहायक होते हैं। ऽ थोक कीमत सूचकांक ;ॅच्प्द्ध का प्रयोग समुच्चयों की कीमतों में परिवतर्न जैसे कि राष्ट्रीय आय, पूँजी - निमार्ण आदि के परिवतर्नों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए किया जाता है। ऽ थोक कीमत सूचकांक ;ॅच्प्द्ध का प्रयोग सामान्य रूप से मुद्रास्पफीति दर को मापने में किया जाता है। मुद्रास्पफीति कीमतों में सामान्य तथा निरंतर वृि को कहते हैं। यदि मुद्रा स्पफीति बहुत बढ़ जाती है, तो मुद्रा अपने पारंपरिक गुणों - जैसे विनिमय का साध्न एवं लेखे की इकाइर् आदि को खो सकती है। इसका मुख्य प्रभाव मुद्रा के मूल्य में कमी का होना है। साप्ताहिक मुद्रास्पफीति दर निम्न द्वारा प्राप्त होती है, ग्ग्ज ज1 ञ100 यहाँ ग्ज एवं ग् .1 ;जद्धवेंग्ज.1ज तथा ;ज.1द्धवें सप्ताहों के थोक कीमत सूचकांक को दशार्ते हैं। ऽ उपभोक्ता कीमत सूचकांक ;ब्च्प्द्ध का मुद्रा की क्रय शक्ित एवं वास्तविक मजदूरी के परिकलन के लिए प्रयोग किया जाता है। कद्ध मुद्रा की क्रयशक्ित = 1/निवार्ह सूचकांक खद्ध वास्तविक मजदूरी = ;मौदि्रक मजदूरी/निवार्ह सूचकांकद्ध × 100 यदि उपभोक्ता कीमत सूचकांक ;1982=100द्ध जनवरी 2005 में 526 है, तो जनवरी 2005 में एक रुपया का समतुल्य 100/526 = 0.19 रु होगा। इसका तात्पयर् यह है कि 1982 में जो एक रुपया था, अब 19 पैसे के बराबर हो गया है। यदि आज एक उपभोक्ता की मौदि्रक मजदूरी 10,000 रु है तो उसकी वास्तविक मजदूरी निम्नवत होगी, 10010 000 रु त्र 1 901 रुएए526 इसका अभ्िाप्राय है कि वषर् 1982 में 1901 रु की क्रय शक्ित उतनी ही थी, जो जनवरी 2005 में 10,000 रु की है। यदि 1982 में वह 3000 रु प्राप्त कर रहा था, तो मूल्य - वृि के हिसाब से वह बदतर स्िथति में है। अतः 1982 के जीवन - स्तर को बनाये रखने के लिए उसका वेतन बढ़ाकर 15,780 रु कर देना चाहिए, जिसे आधर - अवध्ि के वेतन को 526/100 के गुणांक द्वारा गुणा करके प्राप्त किया जा सकता है। ऽ औद्योगिक उत्पादन सूचकांक हमें औद्योगिक क्षेत्रा में उत्पादन में परिवतर्न के बारे में परिमाणात्मक अंक प्रदान करता है। ऽ कृष्िा उत्पादन सूचकांक हमें कृष्िा क्षेत्रा के निष्पादन का तत्काल परिकलन प्रदान करता है। ऽ संवेदी सूचकांक स्टाॅक माकर्ेट में निवेशकों के लिए उपयोगी मागर्दशर्क का काम करता है। यदि सूचकांक चढ़ता है तो निवेशक भावी अथर्व्यवस्था के निष्पादन की दिशा में आशावादी होते हैं। निवेश के लिए यह एक उपयुक्त समय होता है। हमें ये सूचकांक कहाँ से मिल सकते हैं? सामान्य रूप से प्रयोग होने वाले वुफछ सूचकांक नियमित रूप से आथ्िार्क सवर्ेक्षण, जो भारत सरकार अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी का एक वाष्िार्क प्रकाशन है, में प्रकाश्िात किए जाते हैं, जिनमें थोक कीमत सूचकांक ;ॅच्प्द्ध, उपभोक्ता कीमत सूचकांक ;ब्च्प्द्ध, प्रमुख पफसलों के उत्पादन सूचकांक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक तथा विदेशी व्यापार सूचकांक आदि हैं। 7. सारांश इस प्रकार, सूचकांक की विध्ि आपको मदों में बड़ी संख्याओं में परिवतर्नों को एकल माप के द्वारा परिकलित करने के योग्य बनाती है। सूचकांकों का परिकलन कीमत, मात्रा, आदि के लिए किया जा सकता है। सूत्रों से यह भी स्पष्ट है कि सूचकांक की रचना से प्राप्त अंकों को सावधनी के साथ निवर्चन की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही, शामिल किए जाने वाले मदों एवं आधर - अवध्ि का चुनाव महत्वपूणर् है। उनके विभ्िान्न प्रयोगों से पता चलता है कि सूचकांक नीति - निमार्ण में अत्यध्िक महत्वपूणर् होते हैं। पुनरावतर्न ऽ बड़ी संख्या के मदों के सापेक्ष्िाक परिवतर्नों को मापने के लिए सूचकांक एक सांख्ियकीय विध्ि है। ऽ सूचकांकों की रचना के लिए कइर् सूत्रा हैं, और प्रत्येक सूत्रा के निवर्चन में सावधनी की आवश्यकता होती है। ऽ सूचकांक हेतु सूत्रा का चुनाव अध्िकांशतः अभ्िारुचि के प्रश्न पर निभर्र होता है। ऽ व्यापक रूप से प्रयुक्त होने वाले सूचकांक हैं, थोक कीमत सूचकांक, उपभोक्ता कीमतसूचकांक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, कृष्िा उत्पादन सूचकांक तथा संवेदी सूचकांक। ऽ सूचकांक आथ्िार्क नीति - निमार्ण के लिए अपरिहायर् होते हैं। अभ्यास 1.मदों के सापेक्ष्िाक महत्व को बताने वाले सूचकांक को, ;कद्ध भारित सूचकांक कहते हैं ;खद्ध सरल समूहित सूचकांक कहते हैं ;गद्ध सरल मूल्यानुपातों का औसत कहते हैं 2.अध्िकांश भारित सूचकांकों में भार का संबंध्, ;कद्ध आधर वषर् से होता है ;खद्ध वतर्मान वषर् से होता है ;गद्ध आधर एवं वतर्मान वषर् दोनों से होता है 3.ऐसी वस्तु जिसका सूचकांक में कम भार है, उसकी कीमत में परिवतर्न से सूचकांक में वैफसा परिवतर्न होगा, ;कद्ध कम ;खद्ध अध्िक ;गद्ध अनिश्िचत 4.कोइर् उपभोक्ता कीमत सूचकांक किस परिवतर्न को मापता है? ;कद्ध खुदरा कीमत ;खद्ध थोक कीमत ;गद्ध उत्पादकों की कीमत 5.औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक में किस मद के लिए उच्चतम भार होता है? ;कद्ध खाद्य - पदाथर् ;खद्ध आवास ;गद्ध कपड़े 6.सामान्यतः मुद्रा - स्पफीति के परिकलन में किसका प्रयोग होता है? ;कद्ध थोक कीमत सूचकांक ;खद्ध उपभोक्ता कीमत सूचकांक ;गद्ध उत्पादक कीमत सूचकांक 7.हमें सूचकांक की आवश्यकता क्यों होती है? 8.आधर अवध्ि के वांछित गुण क्या होते हैं? 9.भ्िान्न उपभोक्ताओं के लिए भ्िान्न उपभोक्ता कीमत सूचकांकों की अनिवायर्ता क्यों होती है? 10.औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक क्या मापता है? 11.कीमत सूचकांक तथा मात्रा सूचकांक में क्या अंतर है? 12.क्या किसी भी तरह का कीमत परिवतर्न एक कीमत सूचकांक में प्रतिबिंबित होता है? 13.क्या शहरी गैर - शारीरिक कमर्चारियों के लिए उपभोक्ता कीमत - सूचकांक भारत के राष्ट्रपति के निवार्ह लागत में परिवतर्न का प्रतिनिध्ित्व कर सकता है? 14.नीचे एक औद्योगिक वेंफद्र के श्रमिकों द्वारा 1980 एवं 2005 के दौरान निम्न मदों पर प्रतिव्यक्ित मासिक व्यय को दशार्या गया है। इन मदों का भार क्रमशः 75, 10, 5, 6 तथा 4 है। 1980 को आधर मानकर 2005 के लिए जीवन निवार्ह लागत का एक भारित सूचकांक तैयार कीजिए। मद वषर् 1980 में कीमत वषर् 2005 की कीमत खाद्य पदाथर् 100 200 कपड़े 20 25 इर्ंध्न एवं बिजली 15 20 मकान किराया 30 40 विविध् 35 65 15.निम्नलिख्िात सारणी को ध्यानपूवर्क पढि़ए एवं अपनी टिप्पणी कीजिए - औद्योगिक उत्पादन सूचकांक ;आधर 1993μ94द्ध उद्योग भार » में 1996μ1997 2003μ2004 सामान्य सूचकांक खनन एवं उत्खनन विनिमार्ण 100 10.73 79.58 130.8 118.2 133.6 189.0 146.9 196.6 विद्युत 10.69 122.0 172.6 16.अपने परिवार में उपभोग की जाने वाली महत्वपूणर् मदों की सूची बनाने का प्रयास कीजिए। 17.यदि एक व्यक्ित का वेतन आधर वषर् में 4000 रु प्रतिवषर् था और उसका वतर्मान वषर् में वेतन 6000 रु है। उसके जीवन - स्तर को पहले जैसा ही बनाए रखने के लिए उसके वेतन में कितनी वृि होनी चाहिए, यदि उपभोक्ता कीमत सूचकांक 400 हो। 18.जून 2005 में उपभोक्ता कीमत सूचकांक 125 था। खाद्य सूचकांक 120 तथा अन्य मदों का सूचकांक 135 था। खाद्य पदाथार्ें को दिया जाने वाला भार वुफल भार का कितना प्रतिशत है? मदों पर व्यय खाद्य पदाथर् ंर्कपड़ा किराया विविध् इध्न 35» 10» 20» 15» 20» 2004 में कीमत ;रु मेंद्ध 1500 250 750 300 400 1995 में कीमत ;रु मेंद्ध 1400 200 500 200 250 1995 की तुलना में 2004 में निवार्ह सूचकांक का मान क्या होगा? 20.दो सप्ताह तक अपने परिवार के ;प्रति इकाइर्द्ध दैनिक व्यय, खरीदी गइर् मात्रा तथा दैनिक खरीददारी को अभ्िालेख्िात कीजिए। कीमत में आए परिवतर्न आपके परिवार को किस तरह से प्रभावित करते हैं? 21.निम्नलिख्िात आँकड़े दिए गए हैं - वषर् औद्योगिक श्रमिकों नगरीय गैर शारीरिक कृष्िा श्रमिक थोक कीमत सूचकांक का ब्च्प् कमर्चारियों का ब्च्प् का ब्च्प् ;1993μ94=100द्ध ;1982 = 100द्ध ;1984μ85=100द्ध ;1986μ87=100द्ध 1995μ96 313 257 234 121.6 1996μ97 342 283 256 127.2 1997μ98 366 302 264 132.8 1998μ99 414 337 293 140.7 1999μ00 428 352 306 145.3 2000μ01 444 352 306 155.7 2001μ02 463 390 309 161.3 2002μ03 482 405 319 166.8 2003μ04 500 420 331 175.9 स्रोतः आथ्िार्क सवर्ेक्षण, भारत सरकार, 2004μ2005 ;कद्ध विभ्िान्न सूचकांकों को प्रयुक्त करते हुए मुद्रा - स्पफीति की दर का परिकलन कीजिए। ;खद्ध सूचकांकों के सापेक्ष्िाक मानों पर टिप्पणी कीजिए। ;गद्ध क्या ये तुलना योग्य हैं?

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Arthashastramesankhyiki-008

अध्याय 8


सूचकांक



इस अध्याय को पढ़ने के बाद आप इस योग्य होंगे किः

सूचकांक शब्द का अर्थ समझ सकें;

अधिकतर प्रयोग किए जाने वाले कुछ सूचकांकों से परिचित हो सकें;

सूचकांक का परिकलन कर सकें;

सकी सीमाओं को समझ सकें।

1. प्रस्तावना

पिछले अध्यायों में आपने पढ़ा कि आँकड़ों के समूह से संक्षिप्त मापों को कैसे प्राप्त किया जा सकता है। अब आप पढ़ेंगे कि संबंधित चरों के समूह में परिवर्तन के द्वारा संक्षिप्त मापों को कैसे प्राप्त करें।

रवि काफी समय के बाद बाज़ार जाता है। वह देखता है कि अधिकांश वस्तुओं की कीमतें परिवर्तित हो चुकी हैं। कुछ वस्तुएँ महँगी हो गई हैं तो कुछ वस्तुएँ सस्ती। वह बाज़ार से खरीद कर लाई गई प्रत्येक वस्तु की परिवर्तित कीमतों के बारे में अपने पिताजी को बताता है। यह दोनों के लिए ही विस्मयकारी था।

औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत कई उपक्षेत्रक भी आते हैं। इनमें से प्रत्येक में परिवर्तन हो रहा है। कुछ उपक्षेत्रकों में उत्पादन बढ़ रहा है, जबकि कुछ में घट रहा है। ये परिवर्तन एकरूप नहीं हैं। व्यष्टि दरों में परिवर्तन के वर्णन को समझना कठिन होगा। क्या कोई एकल संख्या इन परिवर्तनों को प्रस्तुत कर सकती है? निम्नलिखित उदाहरणों को देखेंः

उदाहरण 1

एक औद्योगिक श्रमिक 1982 में 1000 रु वेतन प्राप्त करता था। आज उसकी आय 12000 रु है। क्या एेसा कहा जा सकता है कि इस अवधि में उसके जीवन-स्तर में 12 गुना सुधार आया है? उसके वेतन को कितना बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि उसका जीवन स्तर वैसा हो जाय, जैसा पहले था?

उदाहरण 2

आप समाचार-पत्रों में सेंसेक्स के बारे में अवश्य ही पढ़ते होंगे। सेंसेक्स का 8000 का अंक पार करना, वास्तव में सुखद अहसास कराता है। हाल ही में, जब सेंसेक्स 600 अंक नीचे गिरा तो निवेशकों की संपत्ति में 1, 53, 690 करोड़ रु का भारी नुकसान हुआ। यथार्थ में सेंसेक्स है क्या?

उदाहरण 3

सरकार कहती है कि पेट्रोलियम पदार्थाें की कीमतों में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति दर में तेजी से वृद्धि होगी। मुद्रास्फीति की माप कैसे की जाती है?

ये एेसे प्रश्नों के कुछ उदाहरण हैं जिनसे आपका सामना प्रतिदिन होता रहता है। सूचकांक के अध्ययन से इन प्रश्नों का विश्लेषण करने में सहायता मिलती है।

2. सूचकांक क्या है?

सूचकांक संबंधित चरों के समूह के परिमाण में परिवर्तनों को मापने का एक सांख्यिकीय साधन है। यह अपसारित (भिन्न-भिन्न दिशाओं में) होने वाले अनुपातों की सामान्य प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जिनसे इसको परिकलित किया जाता है। यह दो भिन्न स्थितियों में संबंधित चरों के किसी समूह में औसत परिवर्तन का एक माप है। तुलना समान वर्गाें में की जा सकती है जैसे व्यक्तियों, स्कूलों, अस्पतालों आदि में। सूचकांक उल्लिखित वस्तुओं की सूची में कीमतों, उद्योग के विभिन्न क्षेत्रकों में उत्पादन की मात्रा, विभिन्न कृषि फसलों का उत्पादन, निर्वाह खर्च आदि चरों के मूल्यों में परिवर्तन को भी मापता है।

परंपरागत रूप से, सूचकांकों को प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है। दो अवधियों में से, जिस अवधि के साथ तुलना की जाती है, उसे आधार-
अवधि के रूप में जाना जाता है। आधार-अवधि में

सूचकांक का मान 100 होता है। यदि आप जानना चाहते हैं कि 1990 के स्तर से 2005 में कीमतों में कितना परिवर्तन हुआ है, तब 1990 आधार बन जाता है। किसी भी अवधि का सूचकांक इसके अनुपात में होता है। अतः 250 का सूचकांक यह इंगित करता है कि मूल्य, आधार अवधि के मान का ढाई गुना है।

कीमत-सूचकांक कुछ वस्तुओं की कीमतों की माप करता है जिससे उनकी तुलना संभव हो पाती है। परिमाणात्मक सूचकांक उत्पादन की भौतिक मात्रा, निर्माण तथा रोज़गार में परिवर्तन को मापता है। यद्यपि कीमत-सूचकांकों का प्रयोग अधिकांश रूप से किया जाता है, उत्पादन सूचकांक भी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के स्तर का महत्वपूर्ण सूचक होता है।

3. सूचकांक की रचना

निम्नलिखित खंडों में सूचकांक की रचना के सिद्धांतों को कीमत-सूचकांक के माध्यम से उदाहरण सहित समझाया जाएगा।

निम्नलिखित उदाहरण देखेंः

उदाहरण 1

सरल समूहित कीमत सूचकांक का परिकलन

सारणी 8.1

eq76

­ जैसा कि आप इस उदाहरण में देखते हैं, प्रत्येक वस्तु के लिए प्रतिशत परिवर्तन भिन्न-भिन्न है। यदि सभी चारों वस्तुओं के लिए प्रतिशत परिवर्तन एक समान रहता, तो परिवर्तनों की व्याख्या करने के लिए केवल एक माप ही पर्याप्त होता। तथापि प्रतिशत परिवर्तनों में भिन्नता होती है तथा प्रत्येक मद के लिए प्रतिशत परिवर्तन को रिपोर्ट करना भ्रामक होगा। एेसा तब होता है जब वस्तुओं की संख्या बहुत अधिक होती है, जो किसी भी वास्तविक बाज़ार स्थिति में सामान्य है। कीमत-सूचकांक इन परिवर्तनों को एकल संख्यात्मक माप के द्वारा प्रस्तुत करता है।

सूचकांक की रचना करने की दो विधियाँ हैं। इन्हें समूहित विधि के द्वारा तथा सापेक्षों के माध्य परिकलन विधि के द्वारा अभिकलित किया जा सकता है।

समूहित विधि (Aggregative Method)

एक सरल समूहित कीमत-सूचकांक के लिए सूत्र है,

eq77

यहाँ पर p1 तथा p0 क्रमशः वर्तमान अवधि तथा
आधार अवधि में वस्तुओं की कीमत को इंगित करता है। उदाहरण 1 के आँकड़ों का प्रयोग करते हुए सरल समूहित कीमत सूचकांक है,

यहाँ यह कहा जाता है कि कीमतों में 38.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

क्या आप जानते हैं कि इस प्रकार के सूचकांकों का उपयोग सीमित होता है। इसका कारण यह है कि विभिन्न वस्तुओं की कीमतों के माप की इकाइयाँ समान नहीं होती हैं। यह अभारित (सूचकांक) है, क्योंकि इसमें मदों का सापेक्षिक महत्व उपयुक्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं होता है। यहाँ सभी मदों को बराबर महत्व या भार वाला माना जाता है। लेकिन वास्तव में क्या होता है? वास्तव में, क्रय की गई मदों के महत्व के क्रम में भिन्नता होती है। हमारे व्यय में खाद्य पदार्थाें का अनुपात काफी अधिक होता है। एेसी स्थिति में अधिक भार वाली मद की कीमत में तथा कम भारवाली मद की कीमत में समान वृद्धि के द्वारा कीमत सूचकांक में होने वाले कुल परिवर्तन के आशय भिन्न-भिन्न होंगे।

भारित कीमत सूचकांक के लिए सूत्र है,

कोई सूचकांक तब भारित सूचकांक बन जाता है, जब मदों के सापेक्षिक महत्व को ध्यान में रखा जाता है। यहाँ भार परिमाणात्मक भार है। भारित समूहित सूचकांक की रचना में कुछ विशेष वस्तुओं को लिया जाता है तथा इनके मूल्य को प्रतिवर्ष परिकलित किया जाता है। इस प्रकार, यह वस्तुओं के एक निश्चित समूह के मूल्यों में होने वाले परिवर्तन को मापता है। क्योंकि वस्तुओं के निश्चित समूह के कुल मूल्य में परिवर्तन होता है, यह परिवर्तन कीमत में परिवर्तन के कारण होता है। भारित समूहित सूचकांक परिकलन की विभिन्न विधियों में भिन्न-भिन्न समय में वस्तुओं के भिन्न-भिन्न समूहों का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण 2

भारित समूहित कीमत सूचकांक का परिकलन

सारणी 8.2

eq78


यह विधि आधार अवधि की मात्राओं को भार के रूप में प्रयुक्त करती है। भारित समूहित कीमत सूचकांक, जब आधार अवधि की मात्रा को भार के रूप में प्रयोग करता है उसे लेस्पेयर कीमत सूचकांक भी कहते हैं। यह इस प्रश्न की व्याख्या करता है कि यदि आधार अवधि में वस्तुओं की एक टोकरी पर व्यय रु 100 था, तो वस्तुओं की उसी टोकरी पर वर्तमान अवधि में कितना व्यय होना चाहिए? जैसा कि आप यहाँ देख सकते हैं कि कीमत-वृद्धि के कारण, आधार-अवधि परिमाणों का मूल्य 35.3 प्रतिशत तक बढ़ गया है। आधार-अवधि मात्रा को भार के रूप में प्रयोग करके, यह कहा जा सकता है कि कीमतों में 35.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

चूँकि वर्तमान अवधि परिमाण आधार-अवधि परिमाणों से भिन्न होते हैं, अतः वर्तमान अवधि भार का प्रयोग करने वाला सूचकांक, सूचकांकों का भिन्न मूल्य देता है।

यह वर्तमान अवधि परिमाणों का भार के रूप में प्रयोग करता है। जब भारित समूहित कीमत सूचकांक वर्तमान अवधि परिमाण को भार के रूप में प्रयोग करता है, तो यह ‘पाशे का मूल्य सूचकांक’ के नाम से जाना जाता है। यह एेसे प्रश्नों के उत्तर देने में सहायक होता है कि जब वर्तमान अवधि वस्तुओं की टोकरी को आधार-अवधि में उपभोग किया जाता और यदि हम इस पर 100 रु व्यय करते, तो वस्तुओं की उसी टोकरी पर वर्तमान अवधि में कितना व्यय होना चाहिए? पाशे के कीमत सूचकांक के अंतर्गत 132.1 को 32.1 प्रतिशत कीमत में वृद्धि के रूप में व्यक्त किया जाता है। वर्तमान अवधि भार का प्रयोग करते हुए यह कहा जाएगा कि कीमत 32.1 प्रतिशत बढ़ गई है।

मूल्यानुपातों की माध्य विधि (Method of Averaging Relatives)

जब केवल एक वस्तु हो, तब कीमत-सूचकांक वस्तु की वर्तमान अवधि की कीमत तथा आधार-अवधि की कीमत का अनुपात होता है। सामान्यतः इसे प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है। मूल्यानुपातों की माध्य परिकलन विधि इन मूल्यानुपातों के औसत या माध्य का प्रयोग तब करती है, जब वस्तुएँ अधिक होती हैं। मूल्यानुपातों का प्रयोग करने वाले सूचकांक को इस प्रकार से पारिभाषित किया जाता है

eq79

यहाँ P1 तथा P0 क्रमशः वर्तमान अवधि और आधार अवधि में वस्तु की कीमतों को इंगित करते हैं। अनुपात (P1 / P0) × 100 को वस्तु का मूल्यानुपात भी कहा जाता है। यहाँ n = वस्तुओं की संख्या है। वर्तमान उदाहरण में,

eq80

इस तरह से वस्तुओं की कीमत में 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मूल्यानुपातों का भारित सूचकांक भारित समान्तर माध्य होता है, जिसे इस प्रकार से परिभाषित किया जाता हैः

यहाँ W भार है।

भारित मूल्यानुपात सूचकांक में भारों का निर्धारण आधार वर्ष में कुल व्यय में उन पर किए गए व्यय के अनुपात अथवा प्रतिशत द्वारा किया जा सकता है। यह वर्तमान अवधि के लिए भी हो सकता है, जो प्रयोग किए गए सूत्र पर निर्भर करता है। अनिवार्यतः ये कुल व्यय में विभिन्न वस्तुओं पर किए गए व्यय के मूल्यांश होते हैं। सामान्यतः आधार-अवधि भार को वर्तमान अवधि भार की अपेक्षा अधिक वरीयता दी जाती है। एेसा इसलिए होता है क्योंकि प्रतिवर्ष भार का परिकलन असुविधाजनक होता है। यह (वस्तुओं की) विभिन्न टोकरियों के परिवर्तित मूल्यों को भी दर्शाता है। ये तुलना योग्य नहीं होते। उदाहरण 3 भारित कीमत सूचकांक के परिकलन के लिए आवश्यक सूचना की जानकारी देता है।

उदाहरण 3

भारित मूल्यानुपातों के कीमत सूचकांक का परिकलन

सारणी 8.3

eq81

भारित कीमत सूचकांक है,

eq82

= 156

यहाँ भारित कीमत सूचकांक 156 है। कीमत सूचकांक 56 प्रतिशत बढ़ गया है। अभारित कीमत सूचकांक तथा भारित कीमत सूचकांक के मानों में अंतर होता है, जोकि होना भी चाहिए। भारित सूचकांक में अधिक वृद्धि उदाहरण 3 में अति महत्वपूर्ण मद के दोगुना होने के कारण है।

क्रियात्मक गतिविधि

• उदाहरण 2 में दिए गए आँकड़ों में वर्तमान अवधि के मूल्यों को आधार-अवधि के मूल्यों में परिवर्तित कीजिए। लेस्पेयर तथा पाशे के सूत्रों का प्रयोग करते हुए कीमत सूचकांक परिकलित कीजिए। पूर्ववर्ती उदाहरण की तुलना में आप क्या अंतर पाते हैं?

4. कुछ महत्वपूर्ण सूचकांक

उपभोक्ता कीमत सूचकांक (Consumer Price Index)

उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) को निर्वाह सूचकांक के नाम से भी जानते हैं। यह खुदरा कीमतों में औसत परिवर्तन को मापता है। निम्नलिखित वक्तव्य पर ध्यान दीजिए कि दिसम्बर 2014 में उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) 277 (2001 = 100) है। इस कथन का अभिप्राय क्या है? इसका अभिप्राय है कि यदि एक औद्योगिक श्रमिक वस्तुओं की विशेष टोकरी पर 2001 में 100 रु व्यय कर रहा था, तो उसे दिसम्बर 2014-15 में उसी प्रकार की वस्तुओं की टोकरी खरीदने के लिए 277 रु की आवश्यकता है। यह आवश्यक नहीं है कि वह टोकरी खरीदे, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि उसके पास इसे खरीद पाने की क्षमता है या नहीं।

उदाहरण 4

उपभोक्ता कीमत सूचकांक की रचना

यह उदाहरण प्रदर्शित करता है कि जीवन निर्वाह की कीमत में 2.14 प्रतिशत की गिरावट आई है। 100 से अधिक का सूचकांक क्या संकेत देता है? इसका अर्थ है कि निर्वाह लागत में वृद्धि, मजदूरी एवं वेतन में उपरिमुखी समायोजन की आवश्यकता है। यह वृद्धि उतने प्रतिशत की होनी चाहिए जितना यह (सूचकांक) 100 से अधिक होता है। यदि सूचकांक 150 है, तो 50 प्रतिशत उपरिमुखी समायोजन की आवश्यकता है। इसका अर्थ है कि कर्मचारियों के वेतन में 50% वृद्धि की जानी चाहिए।

उपभोक्ता कीमत सूचकांक

भारत में राजकीय संस्थाओं/ एजेंसी.ज द्वारा बड़ी संख्या में उपभोक्ता कीमत सूचकांकों की रचना की जाती है। उनमें से कुछ निम्न प्रकार हैंः

• औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 2001=100) मई 2017 में इस सूचकांक का मूल्य 278 था।

• कृषि श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 1986-87=100) मई 2017 में इसका मूल्य 872 था।

• ग्रामीण श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 1986-87=100) मई 2017 में इसका मूल्य 878 था।

• अखिल भारतीय ग्रामीण उपभोक्ता सूचकांक
(आधार वर्ष 2012=100) मई 2017 में इसका मूल्य 133.3 था।

• अखिल भारतीय शहरी उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 2012=100) मई 2017 में इसका मूल्य 129.3 था।

• अखिल भारतीय संयुक्त उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 2012=100) मई 2017 में इस सूचकांक का मूल्य 131.4 था।

इसके अतिरिक्त, यह सूचकांक राज्य स्तर पर भी उपलब्ध है।

उपरोक्त प्रत्येक सूचनाओं की रचना में प्रयुक्त विस्तृत रीतियाँ अलग-अलग हैं। उन ब्योरों में इस स्तर पर जाना आवश्यक नहीं है।

सारणी 8.4

eq83

भारतीय रि.जर्व बैंक, अखिल भारतीय संयुक्त उपभोक्ता कीमत सूचकांक को, कीमतों में परिवर्तन के मुख्य मापक के रूप में प्रयोग करती है। इसलिए इस सूचकांक के विषय में कुछ विस्तृत जानकारी आवश्यक है।

अब इस सूचकांक को 2012=100 के आधार पर बनाया जा रहा है और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार इसमें अनेक सुधार किए गए हैं। संशोधित शृंखला के लिए, मदों की बास्केट, भारांकन तथा चित्रों को राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (National Sample Survey) के 68वें (Modified Mixed Reference Period- MMRP) समंकों का प्रयोग कर तैयार किया गया है। भार निम्नवत हैः

eq84

स्रोतः आर्थिक सर्वेक्षण, 2014-15, भारत सरकार।

समंकों को प्रतयेक उप-समूह तथा प्रमुख समूहों में होने वाले प्रतिवर्ष, परिवर्तन की दर से ज्ञात किया जाता है। इस प्रकार, इन समंकों से हम ज्ञात कर सकते हैं कि सबसे ज़्यादा कौन-सी कीमतें बढ़ रही हैं और मुद्रास्फीति में अपना योगदान दे रही हैं।

‘उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक’ (Consumer Food Price Index–CFPI) वही है जो Price Index for ‘Food and Beverages’ होता है सिवाय इसके कि इसमें मादक पेय और निर्मित भोजन, स्नैक्स, मिठाइयाँ सम्मिलित नहीं की जाती हैं।


थोक कीमत सूचकांक (Wholesale Price Index)

थोक कीमत सूचकांक सामान्य कीमत-स्तर में परिवर्तन का संकेत देता है। उपभोक्ता कीमत सूचकांक के विपरीत इसके लिए कोई संदर्भ उपभोक्ता श्रेणी नहीं होती है। इसके अंतर्गत एेसे मद शामिल नहीं होते हैं, जो सेवा से संबंधित हों जैसे नाई के प्रभार, मरम्मत आदि।

इस कथन से क्या यह अभिप्राय है कि थोक मूल्य सूचकांक (आधार वर्ष 2004-05) अक्तूबर 2014 में 253 था? इसका यह यर्थ है कि इस अवधि में सामान्य कीमत स्तर में 153 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

अब थोक मूल्य सूचकांक 2011-12=100 को आधार मानकर प्रकट किया जा रहा है। मई 2017 के लिए यह सूचकांक 112.8 था। यह सूचकांक, थोक स्तर पर प्रचलित मूल्यों का प्रयोग करता है। वस्तुओं की केवल कीमतों को सम्मिलित किया जाता है। प्रमुख वस्तु प्रकार और उनके भार निम्नवत हैं-

eq85

स्रोतः सांख्यिकी मंत्रालय एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन, 2016-17।

सामान्यतः थोक मूल्य शीघ्रता से उपलब्ध हो जाते हैं। समग्र वस्तु मुद्रास्फीति दर (All Commodities Inflation Rate) को सामान्यतः हेडलाइन मुद्रास्फीति (Headline Inflation) कहा जाता है। कभी खाद्य वस्तुओं पर अधिक .जोर होता है जोे कुल भार का 24.23 प्रतिशत है। इस खाद्य सूचकांक को प्राथमिक वस्तु समूह की खाद्य वस्तुओं तथा विनिर्मित उत्पाद समूह की खाद्य वस्तुओं से तैयार किया जाता है। कुछ अर्थशास्त्री विनिर्मित माल (खाद्य पदार्थ एवं ईंधन को छोड़कर) के थोक मूल्यों पर .जोर देना चाहते हैं तथा इसके लिए वे कोर मुद्रास्फीति (Core Inflation) का अद्यतन करते हैं जिसका थोक मूल्य सूचकांक के भारों में लाभ का 55 प्रतिशत भाग है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक

उपभोक्ता कीमत सूचकांक अथवा थोक मूल्य सूचकांक से अलग, यह वह सूचकांक है जो मात्राओं को मापने का प्रयास करता है। अप्रैल 2017 से, इसका आधार वर्ष 2011-12=100 निश्चित किया गया है। आधार वर्ष में तीव्र परिवर्तनों का कारण यह है कि प्रतिवर्ष या तो अनेक वस्तुओं का उत्पादन बंद हो जाता है या महत्वहीन हो जाता है, जबकि अन्य अनेक वस्तुओं का विनिर्माण शुरू हो जाता है।

जबकि कीमत सूचकांक अनिवार्य रूप से, कीमत मूल्यानुपातों के भारित माध्य थे, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, मात्रा मूल्यानुपातों के भारित अंकगणितीय माध्य है जहाँ विभिन्न मदों के उनके द्वारा आधार वर्ष में जोड़े गए मूल्य के अनुपातों में भार दिए जाते हैं। जिनको लेसपेयरे के निम्न सूत्र द्वारा निर्धारित किया जाता है-

यहाँ IIP01 सूचकांक है, q1i वर्ष 1 के लिए वस्तु i के लिए 0 आधार वर्ष पर मात्रा मूल्यानुपात है। Wi, वस्तु i का आबंटित भार है। उत्पादन सूचकांक में n वस्तुएँ हैं।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, औद्योगिक क्षेत्रकों तथा उप-क्षेत्रकों के स्तर पर उपलब्ध होता है। इसकी प्रमुख शाखाएँ हैं- ‘खनन’, ‘विनिर्माण’ एवं ‘विद्युत’। कभी-कभी हमारा .जोर ‘कोर’ उद्योगों पर होता है, जैसे कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, खाद, इस्पात, सीमेंट तथा विद्युत। इन आठों कोर उद्योगों का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में सामूहिक भार 40.27 प्रतिशत है।

सारणी 8.5

eq86

स्रोत: सांख्यिकी मंत्रालय एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन, 2016-17

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक ‘उत्पाद के उपयोग’ के अनुसार भी उपलब्ध है, जैसे ‘प्राथमिक वस्तुएँ’, ‘उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएँ’ आदि।

सारणी 8.6

eq87

स्रोतः सांख्यिकी मंत्रालय एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन, 2016-17

मानव विकास सूचकांक

मानव विकास सूचकांक एक और लाभदायक सूचकांक है, जिसको एक देश के विकास के अध्ययन के लिए उपयोग किया जाता है। इसके विषय में आपने कक्षा 10 में पढ़ा होगा।

संवेदी सूचकांक (Sensex)

सेंसेक्स मुंबई स्टॉक एक्सचेंज संवेदी सूचकांक का संक्षिप्त रूप है, जिसका आधार वर्ष 1978–79 है। संवेदी सूचकांक का मान इस अवधि के संदर्भ मेें होता है। भारतीय स्टॉक मार्केट के लिए यह मुख्य निर्देश चिह्न सूचकांक है। इसके अंतर्गत 30 स्टॉक हैं, जो अर्थव्यवस्था के 13 क्षेत्रकों का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा सूचीकृत कंपनियाँ अपने-अपने उद्योगों में अग्रणी हैं। यदि संवेदी सूचकांक ऊपर चढ़ता है तो यह संकेत देता है कि बाजार ठीक चल रहा है और निवेशक इन कंपनियों से बेहतर आमदनी की आशा करते हैं। यह अर्थव्यवस्था की मूल दशा के प्रति निवेशकों के बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है।





5. सूचकांक की रचना में मुद्दे

सूचकांक की रचना करते समय कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को ध्यान में रखना चाहिएः

• आपको सूचकांक के उद्देश्य के बारे में स्पष्ट होने की आवश्यकता है। जब किसी को मूल्य सूचकांक की आवश्यकता हो तो, परिमाण सूचकांक का परिकलन अनुपयुक्त होगा।

• इसके अतिरिक्त, जब आप उपभोक्ता कीमत सूचकांक की रचना कर रहे हों तब विभिन्न उपभोक्ता समूहों के मद समान महत्व वाले नहीं होते हैं। पेट्रोल की कीमत में वृद्धि शायद प्रत्यक्ष रूप से किसी निर्धन कृषि मजदूर की जीवन-स्थिति को प्रभावित नहीं करे। इसलिए किसी भी सूचकांक के लिए मदों का चयन सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए, ताकि जहाँ तक संभव हो सके, ये उनका (मदों का) प्रतिनिधित्व कर सकें। केवल तभी आपको परिवर्तन की सही जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

• प्रत्येक सूचकांक का एक आधार होना चाहिए। जहाँ तक संभव हो सके, यह आधार सामान्य होना चाहिए। आधार-अवधि के लिए चरम मानों को नहीं चुना जाना चाहिए। यह अवधि भी अतीत में अधिक दूर नहीं होनी चाहिए। 1993 और 2005 के बीच तुलना, 1960 और 2005 के बीच की तुलना से अधिक सार्थक होती है। 1960 की विशिष्ट उपभोक्ता टोकरी की बहुत सी मदें आज के दौर में विलुप्त हो चुकी हैं। इसलिए किसी भी सूचकांक के आधार वर्ष को नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है।

• सूत्र के चुनाव का विषय भी है, जो अध्ययन किए जाने वाले प्रश्न की प्रकृति पर निर्भर करता है। लेस्पेयर के सूचकांक तथा पाशे के सूचकांक के बीच केवल इन सूत्रों में प्रयुक्त भारों की भिन्नता है।

• इसके अतिरिक्त भी आँकड़ों के अनेक स्रोत हैं जिनकी विश्वसनीयता भिन्न-भिन्न है। कम विश्वसनीयता के आँकड़े भ्रामक परिणाम देंगे। अतः आँकड़ों के संग्रह में उचित सावधानी बरती जानी चाहिए। यदि प्राथमिक आँकड़ों को प्रयुक्त नहीं किया जाता है, तो फिर सर्वाधिक विश्वसनीय द्वितीयक आँकड़ों के स्रोत का चुनाव किया जाना चाहिए।

क्रियाकलाप

• स्थानीय सब्जी बाजार से एक सप्ताह में कम से कम 10 मदों के आँकड़े एकत्र कीजिए। एक सप्ताह के लिए प्रतिदिन का कीमत सूचकांक बनाने का प्रयत्न कीजिए। कीमत सूचकांक की रचना में दोनों विधियों का अनुप्रयोग करने के क्रम में आप किन समस्याओं का सामना करते हैं?

6. अर्थशास्त्र में सूचकांक

हमें सूचकांक के उपयोग की आवश्यकता क्यों पड़ती है? थोक कीमत सूचकांक (WPI), उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का नीति-निर्माण में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है।

• उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) अथवा निर्वाह सूचकांक, मजदूरी समझौता, आय-नीति, कीमत-नीति, किराया-नियंत्रण, कराधान तथा सामान्य आर्थिक नीतियों के निर्माण में सहायक होते हैं।

• थोक कीमत सूचकांक (WPI) का प्रयोग समुच्चयों की कीमतों में परिवर्तन जैसे कि राष्ट्रीय आय, पूँजी-निर्माण आदि के परिवर्तनों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए किया जाता है।

• थोक कीमत सूचकांक (WPI) का प्रयोग सामान्य रूप से मुद्रास्फीति दर को मापने में किया जाता है। मुद्रास्फीति कीमतों में सामान्य तथा निरंतर वृद्धि को कहते हैं। यदि मुद्रास्फीति बहुत बढ़ जाती है, तो मुद्रा अपने पारंपरिक गुणों-जैसे विनिमय का साधन एवं लेखे की इकाई आदि को खो सकती है। इसका मुख्य प्रभाव मुद्रा के मूल्य में कमी का होना है। साप्ताहिक मुद्रास्फीति दर निम्न द्वारा प्राप्त होती है,

eq88 यहाँ Xt एवं Xt–1 tवें तथा (t–1)वें सप्ताहों के थोक कीमत सूचकांक को दर्शाते हैं।

• उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) का मुद्रा की क्रय शक्ति एवं वास्तविक मजदूरी के परिकलन के लिए प्रयोग किया जाता है।

क) मुद्रा की क्रयशक्ति = 1/निर्वाह सूचकांक

ख) वास्तविक मजदूरी = (मौद्रिक मजदूरी/निर्वाह सूचकांक) × 100

यदि उपभोक्ता कीमत सूचकांक (1982=100) जनवरी 2005 में 526 है, तो जनवरी 2005 में एक रुपया का समतुल्य 100/526 = 0.19 रु होगा। इसका तात्पर्य यह है कि 1982 में जो एक रुपया था, अब 19 पैसे के बराबर हो गया है। यदि आज एक उपभोक्ता की मौद्रिक मजदूरी 10,000 रु है तो उसकी वास्तविक मजदूरी निम्नवत होगी,

इसका अभिप्राय है कि वर्ष 1982 में 1901 रु की क्रय शक्ति उतनी ही थी, जो जनवरी 2005 में 10,000 रु की है। यदि 1982 में वह 3000 रु प्राप्त कर रहा था, तो मूल्य-वृद्धि के हिसाब से वह बदतर स्थिति में है। अतः 1982 के जीवन-स्तर को बनाये रखने के लिए उसका वेतन बढ़ाकर 15,780 रु कर देना चाहिए, जिसे आधार-अवधि के वेतन को 526/100 के गुणांक द्वारा गुणा करके प्राप्त किया जा सकता है।

• औद्योगिक उत्पादन सूचकांक हमें औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन में परिवर्तन के बारे में परिमाणात्मक अंक प्रदान करता है।

• कृषि उत्पादन सूचकांक हमें कृषि क्षेत्र के निष्पादन का तत्काल परिकलन प्रदान करता है।

• संवेदी सूचकांक स्टॉक मार्केट में निवेशकों के लिए उपयोगी मार्गदर्शक का काम करता है। यदि सूचकांक चढ़ता है तो निवेशक भावी अर्थव्यवस्था के निष्पादन की दिशा में आशावादी होते हैं। निवेश के लिए यह एक उपयुक्त समय होता है।

हमें ये सूचकांक कहाँ से मिल सकते हैं?

सामान्य रूप से प्रयोग होने वाले कुछ सूचकांक सर्वेक्षण, जो भारत सरकार जैसे थोक कीमत सूचकांक (WPI), उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI), प्रमुख फसलों के उत्पादन सूचकांक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक तथा विदेशी व्यापार सूचकांक आदि आर्थिक सर्वेक्षण में उपलब्ध हैं।

क्रियात्मक गतिविधि

• समाचार-पत्रों की जाँच कर 10 प्रेक्षणों के साथ संवेदी सूचकांक की एक काल श्रेणी बनाइये। अगर उपभोक्ता कीमत-सूचकांक का आधार वर्ष 1982 से बदलकर 2000 कर दिया जाए तब क्या होगा?


7. सारांश

सूचकांक का आकलन आपको मदों में बड़ी संख्याओं में परिवर्तनों को एकल माप के द्वारा परिकलित करने के योग्य बनाती है। सूचकांकों का परिकलन कीमत, मात्रा, आदि के लिए किया जा सकता है। सूत्रों से यह भी स्पष्ट है कि सूचकांक की रचना से प्राप्त अंकों को सावधानी के साथ निर्वचन की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही, शामिल किए जाने वाले मदों एवं आधार-अवधि का चुनाव महत्वपूर्ण है। उनके विभिन्न प्रयोगों से पता चलता है कि सूचकांक नीति-निर्माण में अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

पुनरावर्तन

• बड़ी संख्या के मदों के सापेक्षिक परिवर्तनों को मापने के लिए सूचकांक एक सांख्यिकीय विधि है।

• सूचकांकों की रचना के लिए कई सूत्र हैं, और प्रत्येक सूत्र के निर्वचन में सावधानी की आवश्यकता होती है।

• सूचकांक हेतु सूत्र का चुनाव अधिकांशतः अभिरुचि के प्रश्न पर निर्भर होता है।

• व्यापक रूप से प्रयुक्त होने वाले सूचकांक हैं, थोक कीमत सूचकांक, उपभोक्ता कीमत सूचकांक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, कृषि उत्पादन सूचकांक तथा संवेदी सूचकांक।

• सूचकांक आर्थिक नीति-निर्माण के लिए अपरिहार्य होते हैं।


अभ्यास

1. मदों के सापेक्षिक महत्व को बताने वाले सूचकांक को,

(क) भारित सूचकांक कहते हैं

(ख) सरल समूहित सूचकांक कहते हैं

(ग) सरल मूल्यानुपातों का औसत कहते हैं

2. अधिकांश भारित सूचकांकों में भार का संबंध,

(क) आधार वर्ष से होता है

(ख) वर्तमान वर्ष से होता है

(ग) आधार एवं वर्तमान वर्ष दोनों से होता है

3. एेसी वस्तु जिसका सूचकांक में कम भार है, उसकी कीमत में परिवर्तन से सूचकांक में कैसा परिवर्तन होगा,

(क) कम

(ख) अधिक

(ग) अनिश्चित

4. कोई उपभोक्ता कीमत सूचकांक किस परिवर्तन को मापता है?

(क) खुदरा कीमत

(ख) थोक कीमत

(ग) उत्पादकों की कीमत

5. औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक में किस मद के लिए उच्चतम भार होता है?

(क) खाद्य-पदार्थ

(ख) आवास

(ग) कपड़े

6. सामान्यतः मुद्रा-स्फीति के परिकलन में किसका प्रयोग होता है?

(क) थोक कीमत सूचकांक

(ख) उपभोक्ता कीमत सूचकांक

(ग) उत्पादक कीमत सूचकांक

7. हमें सूचकांक की आवश्यकता क्यों होती है?

8. आधार अवधि के वांछित गुण क्या होते हैं?

9. भिन्न उपभोक्ताओं के लिए भिन्न उपभोक्ता कीमत सूचकांकों की अनिवार्यता क्यों होती है?

10. औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक क्या मापता है?

11. कीमत सूचकांक तथा मात्रा सूचकांक में क्या अंतर है?

12. क्या किसी भी तरह का कीमत परिवर्तन एक कीमत सूचकांक में प्रतिबिंबित होता है?

13. क्या शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता कीमत-सूचकांक भारत के राष्ट्रपति के निर्वाह लागत में परिवर्तन का प्रतिनिधित्व कर सकता है?

14. नीचे एक औद्योगिक केंद्र के श्रमिकों द्वारा 1980 एवं 2005 के दौरान निम्न मदों पर प्रतिव्यक्ति मासिक व्यय को दर्शाया गया है। इन मदों का भार क्रमशः 75, 10, 5, 6 तथा 4 है। 1980 को आधार मानकर 2005 के लिए जीवन निर्वाह लागत का एक भारित सूचकांक तैयार कीजिए।

eq95

15. निम्नलिखित सारणी को ध्यानपूर्वक पढ़िए एवं अपनी टिप्पणी कीजिए-

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आधार 1993–94)

eq94

16. अपने परिवार में उपभोग की जाने वाली महत्वपूर्ण मदों की सूची बनाने का प्रयास कीजिए।

17. यदि एक व्यक्ति का वेतन आधार वर्ष में 4000 रु प्रतिवर्ष था और उसका वर्तमान वर्ष में वेतन 6000 रु है। उसके जीवन-स्तर को पहले जैसा ही बनाए रखने के लिए उसके वेतन में कितनी वृद्धि होनी चाहिए, यदि उपभोक्ता कीमत सूचकांक 400 हो।

18. जून 2005 में उपभोक्ता कीमत सूचकांक 125 था। खाद्य सूचकांक 120 तथा अन्य मदों का सूचकांक 135 था। खाद्य पदार्थाें को दिया जाने वाला भार कुल भार का कितना प्रतिशत है?

19. किसी शहर में एक मध्यवर्गीय पारिवारिक बजट में जाँच-पड़ताल से निम्नलिखित जानकारी प्राप्त होती हैः

eq93

1995 की तुलना में 2004 में निर्वाह सूचकांक का मान क्या होगा?

20. दो सप्ताह तक अपने परिवार के (प्रति इकाई) दैनिक व्यय, खरीदी गई मात्रा तथा दैनिक खरीददारी को अभिलेखित कीजिए। कीमत में आए परिवर्तन आपके परिवार को किस तरह से प्रभावित करते हैं?

21. निम्नलिखित आँकड़े दिए गए हैं-

eq92

स्रोतः आर्थिक सर्वेक्षण, भारत सरकार, 2004–2005

(क) सूचकांकों के सापेक्षिक मानों पर टिप्पणी कीजिए।

(ख) क्या ये तुलना योग्य हैं?

22. एक परिवार का कुछ महत्वपूर्ण मदों पर मासिक व्यय तथा उन पर लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) इस प्रकार हैः

eq90eq91

इस परिवार के लिए औसत कर दर की गणना करें।

वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) की औसत दर ज्ञात करने के लिए भारित माध्य के सूत्र का उपयोग किया जाता है। इस स्थिति में, वस्तुओं के प्रत्येक वर्ग पर किया गया कुल व्यय का भाग ही भार है। कुल भार, परिवार द्वारा किए गए कुल व्यय के बराबर है। तथा चर जी.एस.टी. दरें हैं।

eq89

इस परिवार के लिए माध्य जी.एस.टी. दर, , अर्थात् 9.66% है।


क्रियात्मक गतिविधियाँ

• सामान्य रूप से प्रयुक्त होने वाले सूचकांक की सूची बनाने हेतु अपने शिक्षक से परामर्श प्राप्त करें। स्रोत को अंकित करते हुए नवीनतम आँकड़े प्राप्त करें। क्या आप बता सकते हैं कि एक सूचकांक की इकाई क्या होती है?

• गत 10 वर्षाें के लिए औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक की एक सारणी बनाइए तथा मुद्रा की क्रय-शक्ति का परिकलन कीजिए। यह कैसे परिवर्तित हो रही है?


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