अध्याय 7 इस अध्याय का अध्ययन करने के बाद आप इस योग्य होंगे किः ऽ सहसंबंध् का अथर् समझ सवेंफऋ ऽ दो चरों के बीच संबंध् के स्वरूप को समझ सवेंफऋ ऽ सहसंबंध् के विभ्िान्न मापों का परिकलन कर सवेंफऋ ऽ संबंध् की कोटि और दिशा का विश्लेषण कर सवेंफ। 1. प्रस्तावना पिछले अध्याय में आपने सीखा कि आँकड़ों के समूह तथा सवर्सम चरों में परिवतर्नों का संक्ष्िाप्त माप कैसे प्राप्त किया जाए। अब आप यह सीखेंगे कि दो चरों के बीच के संबंध् का परीक्षण कैसे करें। सहसंबंध् जैसे - जैसे गमीर् में तापमान बढ़ता है, पवर्तीय स्थलों पर सैलानियों की भीड़ बढ़ने लगती है। आइसक्रीम की बिक्री तेजी से बढ़ने लगती है। इस प्रकार, तापमान का संबंध् सैलानियों की संख्या एवं आइसक्रीम की बिक्री से हो जाता है। ठीक इसी प्रकार, जब स्थानीय मंडी में टमाटर की पूतिर् बढ़ जाती है, तो उसकी कीमत कम हो जाती है। जब स्थानीय पफसल तैयार होकर बाजार में पहुँचने लगती है तो टमाटरों की कीमत सामान्य पहुँच के बाहर की 40 रु प्रति किलो से घटकर 4 रु प्रति किलो या और भी कम हो जाती है। अतः पूतिर् का संबंध् कीमत से रहता है। सहसंबंध् का विश्लेषण ऐसे संबंधें के क्रमब( परीक्षण का एक साध्न है। यह निम्नलिख्िात प्रश्नों के समाधान करता हैः ऽ क्या दो चरों का आपस में कोइर् संबंध् है? ऽ यदि एक चर का मान बदलता है तो क्या दूसरे का मान भी बदल जाता है? ऽ क्या दोनों चरों में समान दिशा में परिवतर्न होता है? ऽ उनका यह संबंध् कितना घनिष्ठ ;पक्काद्ध है?अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी 2.संबंधें के प्रकार आइए, पहले विभ्िान्न प्रकार के संबंधें पर विचार करें। माँगी गइर् मात्रा तथा किसी वस्तु की कीमत में परिवतर्न का संबंध् माँग के सि(ंात का अभ्िान्न अंग है। इसके बारे में आप विस्तार से कक्षा ग्प्प् में पढ़ेंगे। बारिश की कमी का संबंध् कृष्िा की कम उत्पादकता से रहता है। संबंधें के इस प्रकार के उदाहरणों को कारण और परिणाम के रूप में समझा जा सकता है। अन्य उदाहरण संयोग मात्रा हो सकते हैं। किसी पक्षी - विहार में प्रवासी पक्ष्िायों के आने के साथ उस क्षेत्रा में जन्म - दरों के संबंध् को कारण - परिणाम संबंध् का नाम नहीं दिया जा सकता। ऐसे संबंध् संयोग - मात्रा हैं। आपके जूते की माप और आपकी जेब में पैसों का संबंध् भी संयोग का ही एक उदाहरण है, यदि इनके बीच कोइर् संबंध् हो भी, तो उसकी व्याख्या करना कठिन होता है। एक अन्य उदाहरण में, दो चरों पर तीसरे चर के प्रभाव से, दोनों चरों के बीच के संबंध् प्रभावित हो सकते हैं। आइसक्रीम की बिक्री में तेजी डूबकर मरने वालों की संख्या से जोड़ी जा सकती है, यद्यपि मरने वाले आइसक्रीम खाकर नहीं डूबे थे। तापमान के बढ़ने के कारण ही आइसक्रीम की बिक्री में तेजी आती है। साथ ही, गमीर् से राहत पाने के लिए लोग अध्िक संख्या में तरणतालों में जाने लगते हैं। संभवतः डूब कर मरने वालों की संख्या इसी कारण बढ़ गइर् हो। इस प्रकार, आइसक्रीम की बढ़ती हुइर् बिक्री और डूबने से मरने वालों की संख्या के बीच उच्च सहसंबंध् का कारण तापमान है। सहसंबंध् किसका मापन करता है? सहसंबंध् चरों के बीच संबंधें की गहनता एवं दिशा का अध्ययन एवं मापन करता है। सहसंबंध् सह - प्रसरण का मापन करता है न कि कायर् - कारण संबंध् का। सहसंबंध् को कायर् - कारण संबंध् के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। दो चरों ग और ल के बीच सहसंबंध् की उपस्िथति का अथर् है कि जब एक चर का मान किसी दिशा में बदलता है तो दूसरे चर का मान या तो उसी दिशा में बदलता है ;अथार्त् ;ध्नात्मक परिवतर्नद्ध या पिफर विपरीत दिशा में ;अथार्त् )णात्मक परिवतर्नद्ध। परंतु, यह एक निश्िचत ढंग से होता है। इसे आसानी से समझने के लिए, यहाँ हम मान लें कि सहसंबंध्, यदि है, तो रेखीय है, अथार्त दो चरों की सापेक्ष गति को ग्रापफ पेपर पर एक सीध्ी रेखा द्वारा दिखाया जा सकता है। सहसंबंध् के प्रकार सहसंबंध् को आमतौर पर ध्नात्मक या )णात्मक सहसंबंध्के रूप में वगीर्कृत किया जा सकता है। जब चरों की गति एक ही दिशा में एक साथ होती है तो सहसंबंध् को ध्नात्मक कहा जाता है। जब आय बढ़ती है तो उपभोग में भी वृि होती है। अब आय में कमी होती है तो उपभोग भी कम हो जाता है। आइसक्रीम की बिक्री तथा तापमान दोनों एक ही दिशा में गतिमान हैं। जब चर विपरीत दिशा में गतिमान हों तो सहसंबंध् )णात्मक कहलाता है। जब सेबों की कीमत में गिरावट आती हैं तो उनकी माँग बढ़ जाती है और जब कीमत बढ़ती है तो माँग कम हो जाती हैं। जब आप पढ़ाइर् में अध्िक समयलगाते है तो आपके अनुत्तीणर् होने की संभावना कम हो जाती है और जब पढ़ाइर् में कम समय लगाते हैं तोअनुत्तीणर् होने की संभावना बढ़ जाती है। ये )णात्मक सहसंबंध् के उदाहरण हैं। यहाँ चरों की गति विपरीत दिशाओं में होती है। 3.सहसंबंध् को मापने की प्रविध्ियाँ सहसंबंध् के अध्ययन के लिए अध्िकांश रूप से प्रयुक्त होने वाली प्रविध्ियाँ हैंः प्रकीणर् आरेख, कालर् पियरसन का सहसंबंध् गुणांक तथा स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध्। प्रकीणर् आरेख साहचयर् के स्वरूप को कोइर् विश्िाष्ट संख्यात्मक मान दिए बिना दृश्य रूप में प्रस्तुत करता है। कालर् पियरसन का सहसंबंध् - गुणांक दो चरों के बीच के रेखीय संबंधें का संख्यात्मक मापन करता है। संबंध् को तब रेखीय कहा जाता है, जब इसे एक सीध्ी रेखा द्वारा प्रस्तुत किया जा सके। स्पीयरमैन का सहसंबंध् गुणांक एक अन्य मापन - प्रविध्ि है जिसमें व्यष्िटगत मदों के बीच उनके गुणों के आधर पर निधार्रित कोटियों के द्वारा रेखीय सहसंबंध् को मापा जाता है। गुण वे चर हैं, जिनका संख्यात्मक मापन संभव नहीं जैसे लोगों का बौिक स्तर, शारीरिक रूप - रंग तथा इर्मानदारी आदि। प्रकीणर् आरेख ;ैबंजजमत क्पंहतंउद्ध प्रकीणर् आरेख, किसी संख्यात्मक मान के बिना, संबंधों के स्वरूप की जाँच दृश्य रूप में प्रस्तुत करने की एक उपयोगी प्रविध्ि है। इस प्रविध्ि में, दो चरों के मान को ग्रापफ पेपर पर बिंदुओं के रूप में आलेख्िात किया जाता है। आलेख्िात बिंदुओं के इस गुच्छ को प्रकीणर् आरेख कहा जाता हैं। प्रकीणर् आरेख के द्वारा संबंधें के स्वरूप को कापफी सही रूप में जाना जा सकता है। प्रकीणर् आरेख में प्रकीणर् बिंदुओं के सामीप्य की कोटि और उनकी व्यापक दिशा के आधर पर उनके आपसी संबंधें की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यदि सभी बिंदु एक ही रेखा पर होते हैं तो सहसंबंध् परिपूणर् होता है एवं एक ;1द्ध के बराबर होता है। यदि प्रकीणर् बिंदु सरल रेखा के चारों तरपफ पफैले हुए होते हैं तो सहसंबंध् निम्न माना जाता है। सहसंबंध् को तब रेखीय कहा जाता है जब प्रकीणर् बिंदु एक रेखा पर हों या रेखा के निकट हों। प्रकीणर् आरेख, आरेख 7.1 से 7.5 तक दिखाए गए हैं। ये हमेशा चरों के बीच के संबंधें के बारे मेंजानकारी देते हैं। आरेख 7.1 में प्रकीणर्न ऊपर की ओर बढ़ती हुइर् रेखा के आस - पास दिखाया गया है, जो एक ही दिशा में चरों के गतिमान होने का संकेत देता है। जब ग् बढ़ता है तो ल् भी बढ़ता है, जो ध्नात्मक सहसंबंध् दशार्ता है। आरेख 7.2 में सारे बिंदु नीचे की ओर ढलती रेखा के आस - पास बिखरे हुए हैं। इस बार चर विपरीत दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जब ग् बढ़ता है तो ल् घटता है और ल् के बढ़ने पर ग् घटता है। यह )णात्मक सहसंबंध् दशार्ता है। चित्रा 7.3 में न तोऐसी ऊपर उठती रेखा है और न नीचे गिरती हुइर् रेखा, जिनके आसपास ये बिंदु पफैले हों। यह सहसंबंध् न होने का उदाहरण है। आरेख 7.4 तथा 7.5 में ये बिंदु न तोऊपर उठती रेखा के चारों ओर पफैले दिखाइर् देते है और न नीचे गिरती रेखा के चारों ओर। ये बिंदु स्वयं रेखाओं पर ही स्िथत हैं। इन्हें क्रमशः पूणर् ध्नात्मक सहसंबंध् तथा पूणर् )णात्मक सहसंबंध् कहा जाता है। प्रकीणर् आरेख को देखने से हमें संबंधें की गहनता एवं स्वरूप की जानकारी प्राप्त होती है। कालर् पियरसन का सहसंबंध् गुणांक ;ज्ञंतस च्मंतेवदश्े ब्वमपििबपमदज व िब्वततमसंजपवदद्ध इसे गुणन आध्ूणर् सहसंबंध् ;च्तवकनबज डवउमदज ब्वततमसंजपवदद्ध तथा सरल सहसंबंध् गुणांक के नामों से भी जाना जाता है। यह दो चरों ग् एवं ल् के बीच रेखीय संबंधें के सही संख्यात्मक मान की कोटि दशार्ता है। रेखीय सहसंबंध् को इस प्रकार दिखा सकते हैं ल् त्र ं ़ इग् अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी इस प्रकार के सहसंबंध् को एक सीध्ी रेखा द्वारा दिखाया जा सकता हैं। यह रेखा ल् - अक्ष को जहाँ अंतः - खंडित करती है उसे ं के द्वारा तथा रेखा की ढाल को इ के द्वारा दिखाया गया है। यह ग् के मान में एक छोटे से परिवतर्न के कारण ल् के मान में हुए परिवतर्न को दिखाता है। दूसरी ओर, यदि संबंध् को किसी सीधी रेखा के द्वारा नहीं दिखाया जा सकता है जैसे, ल् त्र ग्2 तो गुणांक का मान शून्य होगा। इससे स्पष्ट है कि शून्य सहसंबंध् का अथर् यह नहीं है कि दोनों चरों में किसी प्रकार का संबंध् नहीं है। मान लें कि ग्ए ग्ए ण्ण्ण्ए ग् आदि ग् के छ मान12छहैं तथा ल्1ए ल्2 एण्ण्ण्ए ल्ल् के संगत मान हैं। आगे कीछ प्रस्तुतियों में सरलता की दृष्िट से इकाइयों को दशार्ने वाले पादांकों को छोड़ दिया गया है। ग् तथा ल् के समांतर माध्य को इस प्रकार परिभाष्िात किया गया हैः Σग् Σल्ग् त्र यल् त्र छछ और उनके प्रसरण निम्नलिख्िात हैंः 22ग्ग्द्ध Σग्Σ; े2ग त्र त्र.ग्2 छछ 22Σ; .2ल्ल्द्ध Σल्तथा े2ल त्र त्र.ल् छछ यहाँ, ग् एवं ल् के मानक विचलन क्रमशः उनके प्रसरण के ध्नात्मक वगर्मूल हैं। ग् तथा ल् के सहप्रसरण निम्नलिख्िात हैंः .द्ध; ल्.ल्द्ध ΣΣ;ग्ग् गलब्वअ;ग्एल्द्ध त्रत्र छछ जहाँ ग त्र ग्.ग् तथा ल त्र ल् .ल् । ये ग् तथा ल् के माध्य मानों से उनके प वें मान के विचलन हैं। चित्रा 7.1 ध्नात्मक सहसंबंध् चित्रा 7.2 )णात्मक सहसंबंध् चित्रा 7.3 कोइर् सहसंबंध् नहीं चित्रा 7.4 पूणर् ध्नात्मक सहसंबंध् चित्रा 7.5 पूणर् )णात्मक सहसंबंध् ग् और ल् के बीच सहप्रसरण का चिÉ सहसंबंध्गुणांक के चिÉ का निधर्रण करता है। मानक विचलन हमेशा ध्नात्मक होते हंै। यदि सहप्रसरण शून्य होता है, तो सहसंबंध् गुणांक भी सदैव शून्य होता है। गुणन आघूणर् सहसंबंध् या कालर् पियरसन का सहसंबंध् मापन नीचे दिया जा रहा है, त त्रΣगल छेे ...;1द्धगल या Σ;ग्ग्द्ध; ल् .ल्द्धत त्र 2 ...;2द्धग्ग्द्ध Σ ल् .द्ध2Σ; .;ल् या ;Σग्द्ध; Σल्द्धΣग्ल् छत त्र ;Σग्द्ध2 ;Σल्2 ...;3द्धΣग्2 .Σल्2 .द्ध छछ या छग्ल् ;Σग्द्धΣ द्ध; Σल् त त्र ...;4द्ध22 22छग् ;Σग्द्ध ΣΣल्Σ छल्; द्ध सहसंबंध् गुणांक के गुण सहसंबंध् गुणांक के गुण निम्नलिख्िात हैंः ऽ त की कोइर् इकाइर् नहीं होती। यह एक संख्या - मात्रा है। इसका तात्पयर् है कि माप की इकाइयाँ त का हिस्सा नहीं हैं। उदाहरण के लिए कद ;पुफटों मेंद्ध तथा वजन ;कि.ग्रा. मेंद्ध के बीच त है 0.7। ऽ त का )णात्मक मान प्रतिलोम संबंध् दशार्ता है। किसी चर में बदलाव, दूसरे चर में विपरीत दिशा में बदलाव के साथ संबं( रहता है। जब एक वस्तु की कीमत बढ़ती है तो उसकी माँग घट जाती है। जब ब्याज दर बढ़ती है तो निध्ियों ;ब्याज पर ली जाने वाली ध्न - राश्िायँाद्ध की माँग अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी घट जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि निध्ियाँ महँगी हो जाती हैं। ऽ यदि त ध्नात्मक होता है तो दोनों चर एक ही दिशा में गतिमान होते हैं। जब चाय के स्थानापन्न के रूप में काॅपफी के दाम बढ़ते हैं, तो चाय की माँग भी बढ़ जाती है। सिंचाइर् व्यवस्था के सुधर का संबंध् पफसलों की अध्िक पैदावार से रहता है। जब तापमान में वृि होती है, तो आइसक्रीम की बिक्री बढ़ जाती है। ऽ यदि त त्र 0, तो दो चर असहसंबंध्ित होते हैं। इनके बीच कोइर् रेखीय संबंध् नहीं होता। तथापि इनके बीच दूसरे प्रकार के सहसंबंध् हो सकते हैं। ऽ यदि त त्र ़1 या त त्र .1 है तो सहसंबंध् पूणर् है। इनके बीच यथातथ ;सुनिश्िचतद्ध सहसंबंध् है। ऽ त का उच्च मान सुदृढ़ रेखीय संबंध् दशार्ता है। जब यह मान $1 या - 1 के निकट हो, तो वह उच्च कहलाता है। ऽ त का निम्न मान दुबर्ल रेखीय संबंध् दशार्ता है। जब यह शून्य के निकट हो तो इसका मान निम्न कहलाता है। ऽ सहसंबंध् गुणांक का मान - 1 तथा $1 के बीच स्िथत होता है - 1 ≤ त ≤ $1। यदि किसी भी अभ्यास में त का मान इस परास के बाहर होता है तो इससे परिकलन में त्राुटि का संकेत मिलता है। ऽ त का मान उद्गम परिवतर्न या पैमाने के परिवतर्न से प्रभावित नहीं होता है। यदि हमें चर दिए गए हों तो दो नए चरों को इस प्रकार परिभाष्िात किया जा सकता हैः ग्। ल्ब्न् त्र यट त्र ठक् यहां पर । तथा ब् क्रमशः ग् तथा ल् के कल्िपत मान हैं। ठ तथा क् समापवतर्क हैं। अतः, त त्र त गल नअ यह गुण, पद विचलन विध्ि की भाँति सहसंबंध् गुणांक को अत्यंत सरल विध्ि द्वारा परिकलित करने के लिए प्रयुक्त होता है। हमने पहले अध्याय में चचार् की है कि सांख्ियकीय विध्ियाँ व्यवहार बुि का स्थानापन्न नहीं हैं। एक अन्य उदाहरण लेते हैं, जो सहसंबंध् के परिकलन से पहले आँकड़ों की विशेषताओं को समझने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। वुफछ गाँवों में महामारी पफैलती है और सरकार प्रभावित गाँवों में डाॅक्टरों का दल भेजती है। गाँव में होने वाली मौतों की संख्या तथा भेजे गए डाॅक्टरों की संख्या के बीच ध्नात्मक सहसंबंध् पाया गया। ;अथार्त् डाॅक्टरों की संख्या बढ़ने से मौतें बढ़ गइर्ंद्ध। सामान्यतः डाॅक्टरों द्वारा उपलब्ध् कराइर् जानेवाली सेवाओं के परिणामस्वरूप मृत्यु दर में कमी की आशा की जाती है, अथार्त् इनके बीच )णात्मक सहसंबंध् होता है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो इसके पीछे अन्य कारण रहे होंगे। आँकड़े, संभवतः, किसी अवध्ि - विशेष से संबंध्ित होंगे या पिफर, दजर् की गइर् मृत्यु दर संभवतः ऐसे व्यक्ितयों के बारे में हो सकती है जिनकी दशा बहुत बिगड़ चुकी थी। साथ ही, किसी भी क्षेत्रा में डाक्टरों की उपस्िथति का सुपरिणाम वुफछ समय बीतने के बाद ही दिखाइर् देता है। यह भी संभव है कि दजर् की गइर् मौतें महामारी के कारण हुइर् ही न हों। जैसे, सुनामी ने अचानक किसी देश में अपना भयंकर रूप दिखाया हो और मृत्यु - दर बढ़ गइर् हो। आइए किसानों द्वारा विद्यालय में बिताए गए वषार्ें तथा प्रति एकड़ वाष्िार्क उपज के बीच के संबंध् के परीक्षण के द्वारा त के परिकलन को सोदाहरण स्पष्ट करेंः उदाहरण 1 किसानों द्वारा विद्यालय में प्रति एकड़ वाष्िार्क उपज बिताए गए वषर् ;‘000 रु मेंद्ध 0 4 2 4 4 6 6 10 8 10 10 8 12 7 ेेसूत्रा 1 के लिए Σगलए गएल के मानों की आवश्यकता है। सारणी 7.1 के द्वारा हम इन मान को प्राप्त कर सकते हैं जो अगले पृष्ठ पर दी गइर् हैः Σगल त्र42ए Σ ग्ग्द्ध 112; .2 ेग त्र त्र एछ7 Σ;ल्ल् 38. द्ध2 े त्र त्र लछ 7 इन मानों को सूत्रा 1 में प्रतिस्थापित करने पर, 42 त त्र त्रण्0 644112 387 77 सूत्रा 2 के द्वारा भी इन्हीं मानों को प्राप्त किया जा सकता है, Σ ;ग्ग्द्ध; ल् .ल्द्धत त्र ...;2द्ध; .2 ल्2Σ ग्ग्द्ध Σ ;ल् .द्ध 98 42 त त्रत्र ण्0 644112 38 इस प्रकार, हमने देखा कि किसानों की श्िाक्षा के वषर् तथा प्रति एकड़ उपज के बीच ध्नात्मक सहसंबंध् है। साथ ही त का मान भी अध्िक है। इससे पता चलता है कि किसान जितने अध्िक वषार्ें तक श्िाक्षा ग्रहण करेंगे, प्रति एकड़ उपज उतनी ही अध्िक होगी।इससे किसानों के लिए श्िाक्षा के महत्त्व पर प्रकाश पड़ता है। सूत्रा ;3द्ध का प्रयोग करने पर ;Σग्द्ध; Σल्द्धΣग्ल् छत त्र ;Σग्द्ध2 ;Σल्द्ध2 ...;3द्ध22Σग् .Σल् छछ इस सूत्रा के प्रयोग के लिए हमें निम्नलिख्िात व्यंजकों का परिकलन करना होगा, 2Σग्ल्ए Σग्ए Σल्2 अब त का मूल्य जानने के लिए सूत्रा ;3द्ध का प्रयोग करें। आइए, अब त के मान की विभ्िान्न व्याख्याओं की जानकारी लें। मान लें कि अंग्रेजी तथा सांख्ियकी इन अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी दोनों विषयों के प्राप्तांकों के बीच सहसंबंध् 0.1 है। इसका अथर् है कि इन दोनों विषयों में प्राप्त किए गए अंकों में ध्नात्मक सहसंबंध् है एवं सहसंबंध् की प्रबलता कमजोर है। अंग्रेजी में अध्िक अंक प्राप्त करने वाले छात्रा सांख्ियकी में अपेक्षाकृत कम अंक प्राप्त कर सकते हैं। यदि त का मान 0.9 होता, तो अंग्रेजी में अध्िक प्राप्तांक वाले विद्याथ्िार्यों ने निश्िचत रूप से सांख्ियकी में अध्िक अंक प्राप्त किए होते। )णात्मक सहसंबंध् के एक उदाहरण के रूप में स्थानीय मंडी में सब्िजयों के आगमन के साथ उनकी कीमत के संबंध् को लिया जा सकता है। यदि त = - 0.9 होता, तो स्थानीय मंडी में सब्िजयों की पूतिर् बढ़ने के साथ इनकी कीमत कम होगी। यदि त = - 0.1 होता तो भी सब्िजयों की अध्िक पूतिर् के साथ इनकी कीमतें कम तो होतीं, परंतु उतनी कम नहीं जितनी तब थीं, जब त = - 0.9 था। कीमत में किस हद तक गिरावट होगी इसका संबंध् त के निरपेक्ष मान के साथ है। यदि त = 0 होगा, तो बाजार में पूतिर् के कापफी बढ़ने पर भी, कीमत में कोइर् कमी नहीं होती। ऐसी भी संभावना है कि पूतिर् के बढ़ने पर वुफशल परिवहन तंत्रा की सहायता से इन्हें अन्य बाजारों में ले जाया गया हो। सारणी 7.1 किसानों की श्िाक्षा के वषर् एवं प्रति एकड़ पैदावार के बीच त का परिकलन श्िाक्षा के ;ग्दृ ग् द्ध ;ग्दृ ग् द्ध2 प्रति एकड़ ;ल्दृ ल् द्ध ;ल्दृ ल् द्ध2 ;ग्दृ ग् द्ध;ल्दृ ल् द्ध वषर् वाष्िार्क पैदावार ’000 रु ;गद्ध ;ल्द्ध 0 μ6 36 4 μ3 9 18 2 μ4 16 4 μ3 9 12 4 μ2 4 6 μ1 1 2 6 0 0 10 3 9 0 8 2 4 10 3 9 6 10 4 16 8 1 1 4 12 6 36 7 0 0 0 Σ ग्त्र42 Σ ;ग्दृ ग् द्ध2त्र112 Σ ल्त्र49 Σ ;ल्दृ ल् द्ध2त्र38 Σ ;ग्दृ ग् द्ध;ल्दृ ल् द्धत्र42 सहसंबंध् गुणांक के परिकलन में पद - विचलन विध्ि जब चरों के मान ऊँचे हों, तो परिकलन की समस्या को त के एक गुण के प्रयोग द्वारा कम किया जा सकता है। यह गुण है कि त ‘उद्गम परिवतर्न’ तथा ‘स्केल परिवतर्न’ से प्रभावित नहीं होता है। इसे पद विचलन विध्ि के रूप में भी जाना जाता है। इसके अंतगर्त ग् एवं ल् चरों को निम्नलिख्िात पद विचलन विध्ि से परिवतिर्त किया जा सकता हैः ग्। ल्ठन्त्र यटत्र ीा यहाँ । तथा ठ कल्िपत माध्य हैं तथा ी एवं ा समापवतर्क हैं। अतः तत्र तन्ट ग्ल् इसे कीमत सूचकांक तथा ध्न की पूतिर् के बीच सहसंबंध् के विश्लेषण की प्रिया के द्वारा समझा जा सकता है। सारणी 7.2 वषर् राष्ट्रीय आय की वाष्िार्क वृि सकल घरेलू बचत ळक्च् के प्रतिशत के रूप में 1992μ93 14 24 1993μ94 17 23 1994μ95 18 26 1995μ96 17 27 1996μ97 16 25 1997μ98 12 25 1998μ99 16 23 1999μ00 11 25 2000μ01 8 24 2001μ02 10 23 ड्डोत्राः आथ्िार्क सवर्ेक्षण, ;2004μ05द्ध पृष्ठ 8, 9 99 उदाहरण 2 कीमत 120 150 190 220 230 सूचकांक ;ग्द्ध ध्न की पूतिर् 1800 2000 2500 2700 3000 ;करोड़ रु मेंद्ध ;ल्द्ध पद विचलन विध्ि का प्रयोग करते हुए, सरलीकरणों को निम्नलिख्िात विध्ि द्वारा दिखाया गया हैः । = 100ऋ ी = 10ऋ ठ = 1700 एवं ा = 100 चरों की रूपांतरित सारणी नीचे दी गइर् हैः कीमत सूचकांक तथा मुद्रा की पूतिर् के बीच पद - विचलन विध्ि का उपयोग करते हुए त का परिकलनः सारणी 7.3 न्ट Ê ग् .100६Ê ल् .1700६ ˜˜ न्2 ट2न्टध्प्र 10 ¯ध्प्र 100 ¯2 1 412 5 3 25 915 9 8 816472 12 10 144 100 120 13 13 169 169 169 Σन् त्र41य Σट त्र 35य न्2 त्र 423य Σट2 त्र 343य Σन्ट त्र 378 इन मानों को सूत्रा ;3द्ध में प्रतिस्थापन करने पर ;Σन्द्ध; Σटद्धΣन्ट छत त्र 2;Σन्द्ध2 ;Σटद्ध ;3द्ध2Σन् .Σट2 छछ 41 ञ 35378 5त्र ;41द्ध2 ;35द्ध2 423 .343 55 = 0.98 कीमत सूचकांक एवं मुद्रा - पूतिर् के बीच यह प्रबलध्नात्मक सहसंबंध् वित्तीय नीतियों के लिए महत्त्वपूणर् आधर है। जब मुद्रा - पूतिर् बढ़ती है तब कीमत सूचकांक में भी वृि होती है। स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध् ;ैचमंतउंदश्े त्ंदा ब्वततमसंजपवदद्ध ‘स्पीयरमैन कोटि सहसंबंध्’ का विकास बि्रटिश मनोवैज्ञानिक सी.इर्. स्पीयरमैन द्वारा किया गया था। इसका प्रयोग तब किया जाता है, जब चरों का साथर्क रूप से मापन नहीं किया जा सकता, जैसे कीमत, आय, वजन आदि। कोटि - निधर्रण तब अध्िक साथर्क होता है जब चरों की माप भ्रामक हो। ऐसी स्िथति की कल्पना करें जहाँ हमें दूर - दराज के गाँव में छात्रों के कद और वजन के बीच के सहसंबंध् को परिकलित करने की आवश्यकता हो। वहाँ न कोइर् मापक दंड उपलब्ध् है और न ही तराजू। लेकिन मापक दंड तथा तराजू के बिना भी छात्रों के कद और वजन को आसानी से कोटिब( किया जा सकता है।कभी - कभी निष्पक्षता एवं इर्मानदारी आदि गुणवत्ताओंको परिमाणीकृत करने की आवश्यकता पड़ सकती है।गुणवत्ताओं का परिमाणीकरण करने की बजाए उनकी कोटि निधर्रित करना अध्िक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसके अतिरिक्त, कभी - कभी चरम मानों वाले दो चरों के बीच सहसंबंध् गुणांक, चरम मान से रहित गुणांक से अत्यन्त भ्िान्न हो सकता है। इन परिस्िथतियों में कोटि - सहसंबंध् साधरण सहसंबंध् की तुलना में बेहतर विकल्प प्रदान करता है। अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी कोटि सहसंबंध् गुणांक तथा सरल सहसंबंध् गुणांक की व्याख्या समान रूप से की जाती है। इसका सूत्रा सरल सहसंबंध् गुणांक से प्राप्त किया गया है जहाँ व्यष्िटगत मानों को कोटियों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है। इन कोटियों का प्रयोग सहसंबंध् के परिकलन के लिए किया जाता है। यह गुणांक इन इकाइयों के लिए निधर्रित कोटियों के बीच रेखीय संबंध् को मापता है, न कि उनके मानों के बीच। यह कोटियों के बीच गुणन आघूूणर् सहसंबंध् कहलाता है। इसे निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा प्राप्त करते हैंः 26Σक् ता त्र 13 ...;4द्धदद यहाँ ‘द’ प्रेक्षणों की संख्या है तथा क् किसी चर के लिए निधर्रित कोटियों का, किसी अन्य चर के लिए निधर्रित कोटि से, विचलन दशार्ता है। जब कोटियों को दोहराया जाता है, तो निम्नलिख्िात सूत्रा का प्रयोग किया जाता है ता = 1 - ीं ;उ31 .उ1द्ध ;उ32 .उ2द्ध ˘6 Σक् ़़ ़ ण्ण्ण्ट्ठट्ट 2 12 12 ˚˙ दद; 2 .1द्ध यहाँ उए उए ण्ण्ण्ए कोटियों की दोहराइर् गइर् संख्याएँ हैं123उ1 उऔर 121 ..., उनके संगत संशोध्न गुणांक हैं। दोनों ही चरों के दोहराए गए मानों के लिए संशोध्न आवश्यक होता है। यदि तीन मानों को दोहराया गया है तो प्रत्येक मान के लिए एक संशोध्न होगा। हर बार उवह संख्या बताता है जितनी बार मान को1 दोहराया जाता है। सरल सहसंबंध् गुणांक के सभी गुण यहाँ लागू किए जा सकते हैं। पियरसन सहसंबंध् गुणांक की भाँति यह भी $1 तथा - 1 के बीच स्िथत होता है। हालाँकि, सामान्य तौर पर यह सामान्य विध्ि की तरह यथातथ नहीं होता है। इसका कारण यह है कि आँकड़ों से संब( सभी सूचनाओं का उपयोग नहीं होता है। शृंखला में मदों के मानों के वे प्रथम अंतर जो उनके परिमाण के अनुसार क्रम में व्यवस्िथत किए जाते हैं, आमतौर पर कभी स्िथर नहीं होते। सामान्यतः आँकड़ा - गुच्छ वेंफद्रीय मानों के आस पास सरणी के मध्य में थोड़े बहुत अंतर पर एकत्रा होता है। यदि प्रथम अंतर स्िथर होते, तब त और त समानापरिमाण देते। प्रथम अंतर क्रमिक मानों में अंतर होता है। कोटि सहसंबंध् को पियरसन गुणांक की अपेक्षा तब अध्िक प्राथमिकता दी जाती है, जब चरम मान दिए गए हों। सामान्यतः त का मान त से कम यााइसके बराबर होता है। कोटि सहसंबंध् के परिकलन की सोदाहरण चचार् नीचे तीन स्िथतियों में की गइर् हैः 1.जब कोटियाँ दी गइर् हों। 2.जब कोटियाँ नहीं दी गइर् हों। उन्हें आँकड़ों से प्राप्त किया जाना हो। 3.जब कोटियों की पुनरावृिा की गइर् हो। स्िथति 1ः जब केाटियाँ दी गइर् हों उदाहरण 3 किसी सौंदयर् प्रतियोगिता में तीन निणार्यकों द्वारा पाँच लोगों का मूल्यांकन किया जाता है। हमें ज्ञात करना है कि सौंदयर् - बोध् के प्रति किन दो निणार्यकों का दृष्िटकोण सवार्ध्िक समान है। प्रतियोगी निणार्यक 1 2 3 4 5 क 1 2 3 4 5 ख 2 4 1 5 3 ग 1 3 5 2 4 यहाँ पर निणार्यकों के तीन जोड़े हैं, अतः कोटि सहसंबंध् का परिकलन तीन बार किया जायगा। यहाँ सूत्रा ;4द्ध का प्रयोग करना चाहिए, 26Σक् ते त्र1 ...;4द्धद3 .द निणार्यकों क और ख के बीच कोटि - सहसंबंध् नीचे परिकलित किया गया हैः क 1 2 3 4 5 ख 2 4 1 5 3 ग μ1 μ2 2 μ1 2 घ 1 4 4 1 4 योग 14 सूत्रा ;4द्ध में इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर 26Σक् ते त्र1 ...;4द्धद3 .द ञ 84614 1 त्र.ण्त्र.1 त्र.107 ण् त्र03 53 .5 120 निणार्यकों ;कद्ध और ;गद्ध के बीच कोटि सहसंबंध् निम्नवत् परिकलित किया गया हैः क 1 2 3 4 5 ख 1 3 5 2 4 ग 0 μ1 μ2 2 1 घ2 0 1 4 4 1 योग 10 सूत्रा ;4द्ध में इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर कोटि सहसंबंध् 0.5 होता है। ठीक इसी प्रकार से निणार्यकों ‘ख’ और ‘ग’ के बीच कोटि सहसंबंध् 0.9 है। अतः निणार्यकों ‘क’ और ‘ग’ के सौंदयर् बोध् निकटतम हैं। निणार्यक ‘ख’ और ‘ग’ की रुचियाँ कापफी भ्िान्न है। स्िथति 2ः जब कोटियाँ नहीं दी गइर् हों लिए समान कोटियाँ दी जाती हैं। समान कोटि उन कोटियों का माध्य है जिन्हें वे मद तब धरण करते हैं,उदाहरण 4 जब उनमें एक दूसरे से भ्िान्नता होती। अगले मद के यहाँ पर 5 छात्रों द्वारा अथर्शास्त्रा एवं सांख्ियकी विषयों लिए वह कोटि निधर्रित की जायेगी जो पहले दी गइर् में प्राप्त अंकों का प्रतिशत दिया गया है। अब कोटियों कोटि के बाद होगी। जब कोटियों को दोहराया जाता है, का निधर्रण करना है और कोटि सह - संबंध् का परिकलन तो स्पीयरमैन कोटि सहसंबंध् के गुणांक का सूत्रा इस करना है। प्रकार होता हैः छात्रा सांख्ियकी में अथर्शास्त्रा में त त्रे1 प्राप्तांक प्राप्तांक 33ीं 2 ;उ1 .उद्ध ;उ2 .उ2द्ध ˘;ग्द्ध;ल्द्ध 6 Σक् ़ 1 ़़ण्ण्ण्ट्ट ˙ट्ठ12 12 ˚क 85 60 दद; .द्धख 6048 21 ग 55 49 यहाँ उए उए ण्ण्ण्ए कोटियों की पुनरावृत्त संख्याएँ12घ 6550 3उ1 .उड़ 75 55 हैं और 1 ण्ण्ण्ए उनके संगत संशोध्न गुणक12 हैं। चैथी एवं पाँचवीं दोनों कोटियों पर ग् के मान 35छात्रा सांख्ियकी में अथर्शास्त्रा में कोटियाँ कोटियाँ हैं। इसलिए दोनों की औसत कोटियाँ नीचे दी गइर् हैं, ;त् द्ध;त्द्ध जैसे,गल्क 11 45़ ख 4 जी त्र45ण् वीं कोटि5 2 ग 54 ग् ल् ग्त्श् ल्त्श्श् कोटि क्रम में क्2घ 33 कोटि की कोटि विचलनघ 22 क्त्रत्श्दृत्श्श् एक बार जब कोटियाँ देने का क्रम जब पूरा हो 25556 2 416 जाए तो कोटि सहसंबंध् के परिकलन के लिए सूत्रा 45 80 1 1 0 0 ;4द्ध का प्रयोग किया जाता है। 35 30 4ण्58 3ण्5 12ण्25 40353 7 μ4 16 स्िथति 3ः जब कोटियों को दोहराया गया हो 15408 5 39 19427 4 39 उदाहरण 5 35 364ण्56 μ1ण्52ण्25 42482 3 μ1 1ग् तथा ल् के मान नीचे दिए गये हैंः योग Σक् त्रण्65 5ग् 25 45 35 4015 19 3542 ल् 55 60 30 35 40 42 36 48 अतः, आवश्यक संशोध्न यह होगा कोटि सहसंबंध् के परिकलन के लिए मानों की उ3 .उ 23 .21 त्रत्र कोटियाँ निधर्रित की जाती हैं। दोहराए गए मदों के 12 122 इस समीकरण का प्रयोग करते हुए, 3ीं 2 ;उ .उद्ध˘6 Σक् ़ट्ट ˙12ट्ठ ˚...;5द्धते त्र1 3द .द इन व्यंजकों के मानों को प्रतिस्थापित करने पर, 6 655 ण् ़ण् द्ध 396; 05 ते त्र.1 त्र1 83 .8 504 त्र.0 786 त्रण्1 ण् 0214 इस प्रकार यहाँ पर ग् और ल् के बीच ध्नात्मक कोटि सहसंबंध् है। ग् तथा ल् दोनों एक ही दिशा में गतिमान हैं। हालाँकि इनके संबंध् को सुदृढ़ नहीं कहा जा सकता। ियात्मक गतिविध्ि ऽ अपनी कक्षा के 10 छात्रों द्वारा नवीं और दसवीं की परीक्षाओं में प्राप्त किए अंकों के आँकड़े संगृहीत करें। उनके बीच कोटि सहसंबंध् गुणांक का परिकलन करें। यदि आपके आँकड़ों में पुनरावतर्न हो, तो दोहराइर् गइर् कोटियों वाले आँकड़ों का संग्रह करके इस अभ्यास को पुनः दोहराएँ। ऐसी कौन सी स्िथतियाँ हैं, जिनमें 4.सारांश हमने दो चरों के बीच संबंध्, विशेषतः रेखीय संबंध्, के अध्ययन के लिए वुफछ प्रविध्ियों की चचार् की। प्रकीणर् आरेख संबंधें की दृश्यात्मक प्रस्तुति करता है और यह रेखीय संबंध् तक ही सीमित नहीं है। सहसंबंध् के माप जैसे कि कालर् पियरसन का सहसंबंध् गुणांक तथा स्पीयरमैन का कोटि - सहसंबंध् निश्िचत रूप से रेखीय संबंधें की माप हैं। जब चरों को परिशु( रूप से मापना संभव न हो, तो वहाँ कोटि सहसंबंध् का प्रयोग अध्िक साथर्क हो सकता है। लेकिन ये माप कायर् - कारण संबंध् सूचित नहीं करते। जब सहसंबंध्ित चरों में परिवतर्न होता है, तो सहसंबंध् का ज्ञान हमें चरों में परिवतर्न की दिशा तथा गहनता के बारे में बताता है। पुनरावतर्न ऽ सहसंबंध् विश्लेषण के अंतगर्त दो चरों के बीच के संबंधें का अध्ययन किया जाता है। ऽ प्रकीणर् आरेख दो चरों के बीच संबंध् के स्वरूप का दृश्य प्रस्तुतीकरण करता है। ऽ कालर् पियरसन का सहसंबंध् गुणांक त दो चरों के बीच केवल रेखीय संबंध् को संख्यात्मक रूप से मापता है। त सदैव - 1 तथा $1 के बीच स्िथत रहता है। ऽ यदि चरों को परिशु(ता से न मापा जा सके, तो स्पीयरमेन के कोटि सहसंबंध् का उपयोग रेखीय संबंधें को संख्यात्मक रूप से मापने के लिए किया जा सकता है। ऽ दोहराइर् गइर् कोटियों को संशोध्न गुणकों की आवश्यकता होती है। ऽ सहसंबंध् का तात्पयर् कायर् - कारण संबंध् नहीं, बल्िक केवल सहप्रसरण दशार्ना है। अभ्यास 1.कद ;पुफटों मेंद्ध तथा वशन ;किलोग्राम मेंद्ध के बीच सहसंबंध् गुणांक की इकाइर् हैः ;कद्धकि.ग्रा./पुफट ;खद्धप्रतिशत ;गद्ध अविद्यमान 2.सरल सहसंबंध् गुणांक का परास निम्नलिख्िात होगा ;कद्ध0 से अनंत तक ;खद्ध - 1 से $1 तक ;गद्ध )णात्मक अनंत ;पदपिदपजलद्ध से ध्नात्मक अनंत ;पदपिदपजलद्ध तक 3.यदि तगल ध्नात्मक है तो ग और ल के बीच का संबंध् इस प्रकार का होता हैः ;कद्धजब ल बढ़ता है तो ग बढ़ता है। ;खद्धजब ल घटता है तो ग बढ़ता है। ;गद्ध जब ल बढ़ता है तो ग नहीं बदलता है। 4.यदि तगल = 0 तब चर ग और ल के बीचः ;कद्धरेखीय संबंध् होगा ;खद्धरेखीय संबंध् नहीं होगा ;गद्ध स्वतंत्रा होगा 5.निम्नलिख्िात तीनों मापों में, कौन सा माप किसी भी प्रकार के संबंध् की माप कर सकता है। ;कद्धकालर् पियरसन सहसंबंध् गुणांक ;खद्धस्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध् ;गद्ध प्रकीणर् आरेख 6.यदि परिशु( रूप से मापित आँकड़े उपलब्ध् हों, तो सरल सहसंबंध् गुणांकः ;कद्धकोटि सहसंबंध् गुणांक से अध्िक सही होता है। ;खद्धकोटि सहसंबंध् गुणांक से कम सही होता है। ;गद्ध कोटि सहसंबंध् की ही भाँति सही होता है। 7.साहचयर् के माप के लिए त को सहप्रसरण से अध्िक प्राथमिकता क्यों दी जाती है? 8.क्या आँकड़ों के प्रकार के आधर पर तए - 1 तथा $1 के बाहर स्िथत हो सकता है? 9.क्या सहसंबंध् के द्वारा कायर्कारण संबंध् की जानकारी मिलती है? 10.सरल सहसंबंध् गुणांक की तुलना में कोटि सहसंबंध् गुणंाक कब अध्िक परिशु( होता है? 11.क्या शून्य सहसंबंध् का अथर् स्वतंत्राता है? 12.क्या सरल सहसंबंध् गुणांक किसी भी प्रकार के संबंध् को माप सकता है? 13.एक सप्ताह तक अपने स्थानीय बाजार से 5 प्रकार की सब्िजयों की कीमतें प्रतिदिन एकत्रा करें। उनका सहसंबंध् गुणांक परिकलित कीजिए। इसके परिणाम की व्याख्या कीजिए। 14.अपनी कक्षा के सहपाठियों के कद मापिए। उनसे उनके बेंच पर बैठे सहपाठी का कद पूछिए। इन दो चरों का सहसंबंध् गुणांक परिकलित कीजिए और परिणाम का निवर्चन कीजिए। 15.वुफछ ऐसे चरों की सूची बनाएँ जिनका परिशु( मापन कठिन हो। 16.त के विभ्िान्न मानों $1, 1, तथा 0 की व्याख्या करें। 17.पियरसन सहसंबंध् गुणांक से कोटि सहसंबंध् गुणांक क्यों भ्िान्न होता है? 18.पिताओं ;गद्ध और उनके पुत्रों ;लद्ध के कदों का माप नीचे इंचों में दिया गया है, इन दोनों के बीच सहसंबंध् गुणांक को परिकलित कीजिए ग 65 66 57 67 68 69 70 72 ल 67 56 65 68 72 72 69 71 ;उत्तर त = 0.603द्ध 19.ग और ल के बीच सहसंबंध् गुणांक को परिकलित कीजिए और उनके संबंध् पर टिप्पणी कीजिए। ग μ3μ2μ1 1 2 3 ल 941149 ;उत्तर त = 0द्ध 20.ग और ल के बीच सहसंबंध् गुणांक को परिकलित कीजिए और उनके संबंध् पर टिप्पणी कीजिए। ग 134578 ल 2 6 8101416 ;उत्तर त = 1द्ध

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