अध्याय 6 इस अध्याय के अध्ययन के बाद आप इस योग्य होंगे किः ऽ औसतों की सीमाएँ जान सवेंफऋ ऽ परिक्षेपण के माप की आवश्यकता को समझ सवेंफ। ऽ परिक्षेपण के विभ्िान्न मापों का परिगणन कर सवेंफऋ ऽ मापों का परिकलन और उनकी तुलना कर सवेंफऋ ऽ निरपेक्ष एवं सापेक्ष मापों के बीच भेद कर सवेंफ। 1. प्रस्तावना पिछले अध्याय में आपने पढ़ा कि किस प्रकार से आँकड़ों को एक प्रतिनिध्ि मान के रूप में समेटा जा सकता है। लेकिन वह मान आँकड़ों में विद्यमान परिवतर्नशीलता को नहीं दशार्ता है। इस अध्याय में परिक्षेपण के माप आप उन मापों का अध्ययन करेंगे जो आँकड़ों में परिवतर्नशीलताओं को मापने का प्रयास करते हैं। तीन मित्रा राम, रहीम और मारिया चाय पीते हुए बातचीत कर रहे हैं। उनकी आपसी बातचीत के दौरान, उनके अपने परिवारों की आय के बारे में चचार् होने लगती है। राम बताता है कि उसके परिवार में चार सदस्य हैं और उसके परिवार के सदस्यों की औसत आय 15,000 रुपये है। रहीम बताता है कि उसके परिवार की औसम आय भी उतनी ही है, किंतु उसके परिवार में 6 सदस्य हैं। मारिया बताती है कि उसके परिवार में 5 सदस्य हैं, उनमें से एक काम नहीं करता है। वह भी परिकलन कर के बताती है कि उसके परिवार की भी औसत आय 15,000 रुपये है। वे तीनों कापफी आश्चयर्चकित हुए, क्योंकि उन्हें मालूम है कि मारिया के पिता की आय बहुत अिाक है। उन्होंने विस्तार से पता किया और निम्नलिख्िात आँकड़ों को एकत्रा कियाः पारिवारिक आय ;रुपयों मेंद्ध क्र.स राम रहीम मारिया 123456 12,000 14,000 16,000 18,000 ........ 7,000 10,000 14,000 17,000 20,000 22,000 0 7,000 8,000 10,000 50,000 ..... वुफल आय औसत आय 60,000 15,000 90,000 15,000 75,000 15,000 क्या आपने ध्यान दिया कि सब के औसत एक जैसे है, परंतु व्यक्ितगत आय में बहुत भ्िान्नताएँ हैं। यह बिल्वुफल स्पष्ट है कि औसत वितरण के केवल एक पहलू के बारे में बताता है, अथार्त् मानों का प्रतिनिध्ि आकार। इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए आपको मानों के प्रसरण को जानने की आवश्यकता है। आप देख सकते हैं कि राम के परिवार में आय की भ्िान्नता अपेक्षाकृत कम है। रहीम के परिवार में आय की यह भ्िान्नता कापफी अध्िक है, जबकि मारिया के परिवार में यह भ्िान्नता अध्िकतम है। केवल औसत का ज्ञान अपयार्प्त है। यदि आपको किसी अन्य मान की जानकारी हो, जो मान में विचरण अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी की मात्रा को प्रदश्िार्त करता है, तो उस वितरण के बारे में आपका ज्ञान बढ़ जायेगा। उदाहरण के लिए, प्रतिव्यक्ित आय केवल औसत आय को प्रदश्िार्त करती है। परिक्षेपण की माप आपको आय की असमानताओं के बारे में बता सकता है। इस तरह से समाज के विभ्िान्न वगो± के लोगों के सापेक्ष जीवन - स्तर के बारे में आपकी जानकारी में वृि होगी। परिक्षेपण यह दशार्ता है कि वितरण का मान उसके औसत मान से कितना भ्िान्न है। विचरण विभ्िान्नता के विस्तार को निधर्रित करने हेतु वुफछ निश्िचत माप हैं, जो इस प्रकार हैः ;कद्ध परास ;खद्ध चतुथर्क विचलन ;गद्ध माध्य विचलन ;घद्ध मानक विचलन इन मापों के अतिरिक्त, जो संख्यात्मक मान देते हैं, परिक्षेपण के अनुमान के लिए आरेखीय विध्ि भी है। परास एवं चतुथर्क विचलन परिक्षेपण की माप उस प्रसरण के परिकलन द्वारा करते हैं, जिसमें ये मान निहित होते हैं। माध्य विचलन तथा मानक विचलन औसत से मानों के अंतर की मात्रा को मापते हैं। 2.मानों के प्रसरण पर आधरित माप परास ;त्ंदहमद्ध परास किसी वितरण में अध्िकतम ;स्द्ध एवं न्यूनतम ;ैद्ध मानों के बीच का अंतर है। अतः, त् त्र स् . ै। परास का अध्िक मान अध्िक परिक्षेपण दशार्ता है और, इसके विपरीत कम मान निम्न परिक्षेपण को दशार्ता है। परास: टिप्पणी परास चरम मान के द्वारा अनुचित रूप से प्रभावित होता है। यह सभी मानों पर आधरित नहीं है। जब तक न्यूनतम एवं अध्िकतम मान अपरिवतिर्त रहते हंै, तब तक दूसरे मानों में कोइर् भी बदलाव परास को प्रभावित नहीं करता। इसे मुक्तांत बारंबारता वितरण में परिकलित नहीं किया जा सकता है। वुफछ सीमाओं के होते हुए भी परास अपनी सरलता के कारण आसानी से समझा एवं बहुध प्रयुक्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, हम लोग दूरदशर्न पर विभ्िान्न शहरों का दैनिक अध्िकतम एवं न्यूनतम तापमान देखते रहते हैं और तापमान विविध्ता के आधर पर उनके बारे में राय बनाते हैं। चतुथर्क विचलन ;फनंतजपसम क्मअपंजपवदद्ध किसी वितरण में उच्च या निम्न किसी भी चरम मान की उपस्िथति परिक्षेपण के माप के रूप में परास की 75 उपयोगिता को घटा सकती है। इसलिए, आपको एक ऐसे माप की जरूरत हो सकती है, जो कि बाह्यमूल्यों से अनुचित रूप से प्रभावित न हो। ऐसी स्िथति में, यदि संपूणर् आँकड़ों को चार बराबर भागों में विभाजित किया जाए, तो प्रत्येक में मानों का 25» भाग समाहित होगा, जिससे हमें चतुथर्कों एवं मियका का मान प्राप्त होता है ;जिनके बारे में आप पहले ही अध्याय 5 में पढ़ चुके हैंद्ध। उच्च एवं निम्न चतुथर्क ;क्रमशः फ3 एवं फ1द्ध का प्रयोग अंतर - चतुथर्क परास के परिकलन में किया जाता है, जो फदृफहैं।31 अंतरμचतुथर्क परास, किसी वितरण में माध्य के 50» मानों पर आधरित होता है। अतः वह चरम मान के द्वारा प्रभावित नहीं होता है। अंतर - चतुथर्क परास के आध्े को चतुथर्क - विचलन कहा जाता है। अतः फ3 − फ1फक् त्र ,ण्ण् 2 चतुथर्क विचलन को अध्र् - अंतर - चतुथर्क परास भी कहा जाता है। असमूहित आँकड़ों के लिए परास और चतुथर्क विचलन का परिकलन। उदाहरण 1 निम्नलिख्िात प्रेक्षणों का परास और चतुथर्क विचलन परिकलित कीजिएः 20, 25, 29, 30, 35, 39, 41, 48, 51, 60 और 70 स्पष्टतः परास 70 μ 20 = 50 है। चतुथर्क विचलन के लिए हमें उच्च फ3 एवं निम्न फके मानों को परिकलित करने की आवश्यकता1 होती है। द ़ 1 फ1 मान वें मद का आकार है।4 चूँकि द 11 है, फतीसरे मद का आकार है।1 क्योंकि मानों को पहले ही आरोही क्रम में व्यवस्िथत किया हुआ है, यह देखा जा सकता है कि फतीसरा1 मान 29 है। ;यदि ये मान एक क्रम में नहीं हों तो आप क्या करेंगे?द्ध 3;द ़ 1द्धठीक इसी तरह से, फवें मद का3 4 आकार है, अथार्त 9वें मद का मान, 51 है। अतः फ3 = 51 फ3 − फ 51 .29फक् त्र 1 त्र 11ण्ण् =22 क्या आपने ध्यान दिया है कि फण्क्ण् मियका से चतुथर्कों का औसत अंतर है। बारंबारता वितरण के लिए परास और चतुथर्क विचलन का परिकलन उदाहरण 2 किसी कक्षा के 40 छात्रों द्वारा प्राप्तांकों के वितरण में परास एवं चतुथर्क विचलन का परिकलन कीजिए। सारणी 6.1 वगर् अंतरालब् प् छात्रों की संख्या;द्धि 0μ10 5 10μ20 8 20μ40 16 40μ60 7 60μ90 4 40 परास उच्चतम वगर् की उच्च सीमा तथा निम्नतम वगर् की निम्न सीमा के बीच का अंतर है। इसलिए, परास 90μ0=90 है। चतुथर्क विचलन के लिए, अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी सबसे पहले संचयी बारंबारता को निम्नानुसार परिकलित कीजिएः वगर् अंतराल ब्प् बारंबारता ि संचयी बारंबारता बण् ण्ि 0μ10 10μ20 20μ40 40μ60 60μ90 5 8 16 7 4 05 13 29 36 40 द = 40 द एक संतत श्रंृखला में फ का मान वें मद का14 आकार है। अतः यह 10वें मद का आकार है, जो कि वगर् 10μ20 में निहित है। अतः फवगर् 10μ20 में1 निहित है। फका सही मान परिकलित करने हेतु,1 निम्नलिख्िात सूत्रा प्रयुक्त होता हैः द ब ि4फ1 त्र स् ़ञ प ियहाँ पर स् = 10 ;संगत चतुथर्क वगर् की निम्न सीमाद्ध है। बण्ण्ि = 5 ;चतुथर्क वगर् के पूवर्वतीर् वगर् के लिए बण्ण्ि का मानद्ध प = 10 ;चतुथर्क वगर् का अंतरालद्ध ि= 8 ;चतुथर्क वगर् की बारंबारताद्ध अतः 10 − 5फ1 त्र 10 ़ ×त्र 16 25 10 ण् 8 3द ठीक इसी तरह से, फका मान वें मद34 का आकार है, अथार्त् 30वें मद का मान जो वगर् 40μ60 में निहित है। अब फके सूत्रा का प्रयोग3 करते हुए इसके मान को निम्न तरीके से परिकलित किया जा सकता हैः 3द − बण्िण् 4फ3 त्ऱस् ×प ि30 − 29फ3 त्र40 ़×20 7 फ3 त्र42 87 ण् 42 87 −16 25 ण्ण्फक् त्रत्र13 31 ण्ण् ण् 2 विविक्त एवं व्यष्िटगत शृंखलाओं में, फ1 का मान द ़ 1 वें मद का आकार है। लेकिन संतत वितरण4 द में, यह मान वें मद का आकार होता है। ठीक4 इसी प्रकार से, फऔर मियका के लिए भी द़13 की जगह में द प्रयुक्त होता है। यदि समूचे समूह को दो बराबर भागों में बाँटा जाए और प्रत्येक भाग की मियका परिकलित की जाए तो आपके पास बेहतर छात्रों की मियका तथा कमजोर छात्रों की मियका होगी। ये मियकाएँ समूचे समूह की मियका से औसतन 13.31 से भ्िान्न हंै। ठीक इसी प्रकार से, मान लीजिए, आप के पास एक कस्बे के लोगों की आय के आँकड़े हैं, तो सभी लोगों की मियका आय परिकलित की जा सकती है। अब यदि सभी लोगों को दो बराबर भागों, ध्नी एवं निध्र्न समूहों, में बाँट दिया जाए तो इनकी मियकाएँ परिकलित की जा सकती हैं। चतुथर्क विचलन आपको ध्नी समूह से संबंध्ित तथा निध्र्न समूह से संबंध्ित मियकाओं के, पूरे समूह की मियका से, औसत अंतर को बताएगा। सामान्यतः चतुथर्क विचलन मुक्तांत वितरण के लिए परिकलित किया जा सकता है और यह चरम मानों द्वारा अनुचित रूप से प्रभावित नहीं होता है। 3.औसत से परिक्षेपण के माप आपको याद होगा कि परिक्षेपण हमें यह बतलाता है कि किसी वितरण की विभ्िान्न मदों का मान वितरण के औसत मान से किस सीमा तक भ्िान्न है। परास और चतुथर्क विचलन यह परिकलन करने का प्रयास नहीं करते हंै कि मान अपने औसत से कितनी दूर हैं, पिफर भी मानों के प्रसरण के परिकलन द्वारा वे परिक्षेपण के बारे में एक अच्छा अनुमान दे देते हैं। दो माप, जोकि मानों के अपने औसत से विचलन पर आधरित होते हंै वे हंैं, माध्य विचलन और मानक विचलन। चूँकि औसत एक वेंफद्रीय मान है, वुफछ विचलन ध्नात्मक और वुफछ )णात्मक होते हैं। अगर उन्हें ऐसे ही जोड़ दिया जाए, तो जोड़ से कोइर् परिणाम नहीं निकलेगा। वास्तव में समांतर माध्य से विचलनों का योग सदैव शून्य होता है। मानों के निम्न दो समुच्चयों को देखेंः समुच्चय अः 5, 9, 16 समुच्चय बः 1, 9, 20 आप देख सकते हैं कि समुच्चय ब में मान अपने औसत से अध्िक दूर है और इसलिए समुच्चय अ के मानों की अपेक्षा अध्िक प्रसरित है। यहाँ समांतर माध्य से विचलनों को परिकलित कीजिए और प्िाफर उन्हें जोड़ दीजिए। आपने क्या देखा? अब यही िया मियका के साथ दोहराइए। क्या आप परिकलित मानों से विचरण की मात्रा पर टिप्पणी कर सकते हैं? माध्य विचलन, विचलनों के संकेतों की उपेक्षा करके इस समस्या का समाधन करने की कोश्िाश करता है, अथार्त् यह सभी विचलनों को ध्नात्मक मानता है। मानक विचलन के लिए, पहले विचलनों के वगार्ें का परिकलन करके उनका औसत निकाला जाता है। इसके बाद औसत का वगर्मूल निकाला जाता है। अब हम विस्तार से इन पर चचार् करेंगे। माध्य विचलन ;डमंद क्मअपंजपवदद्ध मान लीजिए पाँच कस्बों ।ए ठए ब्ए क् और म् के लिए एक कॅालेज प्रस्तावित किया जाता है। ये कस्बे एक सड़क के किनारे इसी क्रम से स्िथत हैं। । कस्बे से दूसरे कस्बों की दूरी ;किलोमीटर मेंद्ध तथा छात्रों की संख्या नीचे दी जा रही है। कस्बे कस्बा । से दूरी छात्रों की संख्या । 0 90 ठ 2 150 ब् 6 100 क् 14 200 म् 18 80 620 अब, यदि काॅलेज कस्बा । में स्िथत होता है तो कस्बा ठ के 150 छात्रा 2 किमी प्रति छात्रा के हिसाब से ;वुफल 300 किमीद्ध यात्रा करके काॅलेज पहुँचेंगे। उद्देश्य यह है कि ऐसी जगह पता करें, जिससे छात्रों को कम से कम औसत दूरी की यात्रा करनी पड़े। आप देख सकते हैं कि यदि काॅलेज । या म् कस्बे में स्िथत होता है तो छात्रों को औसतन अध्िक यात्रा करनी होगी और यदि काॅलेज किसी मध्यवतीर् जगह पर स्िथत होता है, तो उन्हें अपेक्षाकृत कम यात्रा करनी पड़ेगी। यात्रा की गइर् औसत दूरी का परिकलन माध्य विचलन के द्वारा होता है, जो मानों के उनके औसत से अंतरों का समांतर माध्य है। यहाँ प्रयुक्त औसत या तो समांतर माध्य है या मियका। ;चूँकि बहुलक एक स्िथर औसत नहीं है अतः माध्य विचलन के परिकलन हेतु इसका प्रयोग नहीं किया जाता हैद्ध। अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी असमूहित आँकड़ों के लिए समांतर माध्य से माध्य विचलन का परिकलन प्रत्यक्ष विध्ि इस विध्ि के निम्नलिख्िात चरण हैंः ;कद्ध मानों का समांतर माध्य परिकलित किया जाता है। ;खद्ध प्रत्येक मान और समांतर माध्य के बीच के अंतर का परिकलन किया जाता है। ये सभी अंतर धनात्मक माने जाते हैं। इन्हें द्यकद्य द्वारा दशार्या जाता है। ;गद्ध इन अंतरों का समांतर माध्य, माध्य विचलन है। Σ कद्यद्य ण्ण् त्रअथार्त् डक् द उदाहरण 3 निम्नलिख्िात मानों का माध्य विचलन परिकलित कीजिएः 2, 4, 7, 8 एवं 9Σग् 30समांतर माध्य;ण्।डण्द्ध त्र त्र त्र 6 द5 ग् द्यकद्य 2 4 4 2 7 1 8 2 9 3 12 परिक्षेपण के माप 12डक् त्रत्र ण्ण्ण् 24ग्5;द्ध कल्िपत माध्य विध्ि माध्य विचलन कल्िपत माध्य से परिकलित विचलनों द्वारा भी निकाला जा सकता है। यह विध्ि विशेष रूप से तब अपनाइर् जाती है, जब वास्तविक माध्य भ्िान्नात्मक संख्या में होता है। ;यह ध्यान रखें कि कल्िपत माध्य वास्तविक माध्य के निकट होद्ध। उदाहरण 3 के मानों के लिए मान 7 को कल्िपत माध्य लेकर माध्य विचलन निम्न तरह से परिकलित किया जा सकता हैः उदाहरण 4 Σ ग् 2 4 7 8 9 द्यकद्य 5 3 0 1 2 11 सूत्रा में मानों को प्रतिस्थापित करने पर, 11 ़ ;6 . 7द्ध;2 . 3द्ध 12डण्क्ण् त्र त्र त्र2ण्4 ;गद्ध 55 असमूहित आँकड़ों के लिए मियका से माध्य विचलन प्रत्यक्ष विध्ि उदाहरण 3 के मानों का प्रयोग करते हुए मियका से माध्य विचलनों को निम्न प्रकार से परिकलित किया जा सकता है, ;कद्ध मियका को परिकलित कीजिए जो 7 है। ;खद्ध मियका से निरपेक्ष विचलन परिकलित कीजिए, द्यकद्य के रूप में दिखाइए। ;गद्ध इन निरपेक्ष विचलनों का औसत ज्ञात कीजिए। यह माध्य विचलन है। उदाहरण 5ख्ग् .मियका, ग् द्यकद्य 2 5 4 3 7 0 8 1 9 2 11 ऐसे मामलों में, निम्नलिख्िात सूत्रा प्रयुक्त होता हैः Σद्यद्य ; क ़ ग − ।गद्ध; Σ ि−Σद्धिडक् ग त्र ठ। ण्ण्;द्ध द यहाँ पर Σ द्यकद्य कल्िपत माध्य से लिए गए निरपेक्ष विचलनों का योग है। ग वास्तविक माध्य है। ।ग कल्िपत माध्य है, जो विचलनों के परिकलन में प्रयुक्त होता है। ठि वास्तविक माध्य तथा उससे नीचे के मानों की संख्या है। Σ ।ि वास्तविक माध्य से ऊपर के मानों की संख्या है। मियका से माध्य विचलन इस प्रकार हैः Σद्यद्यक 11डक् त्र त्रत्र ण्22ण्ण्;डमकपंद द्ध द5 संक्ष्िाप्त विध्ि संक्ष्िाप्त विध्ि द्वारा माध्य विचलन को परिकलित करने हेतु किसी मान ;।द्ध को विचलनों के परिकलन के लिए प्रयुक्त किया जाता है और इसके लिए निम्न सूत्रा है, डक्ण्ण्;डमकपंद द्ध Σद्यद्य ; क ़ डमकपंद − ।द्ध; Σ ि−Σद्धित्र ठ। द यहाँ पर । = एक स्िथरांक है, जिससे विचलनों को परिकलित करते हैं ;अन्य संकेतक वैसे ही रहेंगे जैसे कि कल्िपत माध्य विध्ि में हैद्ध। संतत वितरण के लिए माध्य से माध्य विचलन सारणी 6.2 वंफपनियों का वंफपनियों लाभ ;लाख रु. मेंद्ध की संख्या वगर् अंतराल बारंबारता 10μ20 5 20μ30 8 30μ50 16 50μ70 8 70μ80 3 40 चरण ;कद्ध वितरण का माध्य परिकलित कीजिए। ;खद्ध माध्य से वगार्ें के मध्य बिंदुओं का निरपेक्ष विचलन द्यकद्य परिकलित कीजिए। ;गद्ध द्यिकद्यका मान प्राप्त करने के लिए प्रत्येक द्यकद्य मान को इसकी संगत बारंबारता से गुणा कीजिए और इन्हें जोड़कर Σ द्यिकद्य प्राप्त कीजिए। ;घद्ध निम्न सूत्रा का प्रयोग कीजिए Σकिद्यद्यडक् त्रण्ण्;द्धग Σ िसारणी 6.2 में वितरण का माध्य विचलन निम्नानुसार भी परिकलित कर सकते हैंः अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी उदाहरण 6 वगर् बारंबारता मध्य द्यकद्य द्यिकद्य अंतराल बिन्दु ग =40.5 10μ20 5 15 25.5 127.5 20μ30 8 25 15.5 124.0 30μ50 16 40 0.5 8.0 50μ70 8 60 19.5 156.0 70μ80 3 75 34.5 103.5 40 519.0 Σकिद्यद्य 519डक् त्र त्रत्र ण्ण्ण् 12 975 ग;द्ध Σ ि40 मियका से माध्य विचलन सारणी 6.3 वगर् अंतराल बारंबारता 20μ30 5 30μ40 10 40μ60 20 60μ80 9 80μ90 6 50 मियका से माध्य विचलन परिकलित करने की प्रिया ठीक वैसी ही है, जैसी कि माध्य से माध्य विचलन के लिए होती है, सिवाय इसके कि विचलन मियका से लिए जायँ, जैसा कि नीचे दिखाया गया हैः उदाहरण 7 वगर् अंतराल 20μ30 30μ40 40μ60 60μ80 80μ90 बारंबारता 5 10 20 9 6 मध्य बिंदु 25 35 5070 85 द्यकद्य उ=40.5 25 15 0 20 35 द्यिकद्य 125 150 0 180 210 50 665 Σकिद्यद्यडक् त्रण्ण्;डमकपंद द्ध Σ ि665 त्रत्र13 3ण् 50 माध्य विचलन: टिप्पणी माध्य विचलन सभी मानों पर आधरित होता है। अतः एक भी मान में परिवतर्न इस पर प्रभाव डालेगा। यदि इसे मियका से परिकलित किया जाए तो यह निम्नतम होगा, अथार्त् यदि इसे माध्य से परिकलित किया जाए तो यह अध्िक होगा। परंतु, यह विचलनोंके चिÉों की उपेक्षा करता है और मुक्तांत वितरण के लिए परिकलित नहीं किया जा सकता है। मानक विचलन ;ैजंदकंतक क्मअपंजपवदद्ध मानक विचलन माध्य से विचलनों के वगार्ें के माध्य का ध्नात्मक वगर्मूल है। इसलिए यदि पाँच मान ग1ए ग2ए ग3ए ग4 एवं ग5 हैं, तो सबसे पहले इनका माध्य परिकलित किया जाता है। इसके बाद माध्य से मानों के विचलन परिकलित किए जाते हैं। पिफर इन विचलनों का वगर् किया जाता है। इन वगर् विचलनों का माध्य प्रसरण कहलाता है। प्रसरण का ध्नात्मक वगर्मूल मानक विचलन होता है। ;यह ध्यान दें कि मानक विचलन का परिकलन केवल माध्य के आधार पर होता हैद्ध। असमूहित आँकड़ों के लिए मानक विचलन का परिकलन व्यक्ितगत मानों के मानक विचलन के परिकलन के लिए चार वैकल्िपक विध्ियाँ उपलब्ध् हैं। इन सभी विध्ियों के द्वारा मानक विचलन का मान एक ही प्राप्त होता है। ये निम्न हैंः ;कद्ध वास्तविक माध्य विध्ि ;खद्ध कल्िपत माध्य विध्ि ;गद्ध प्रत्यक्ष विध्ि ;घद्ध पद विचलन विध्ि वास्तविक माध्य विध्ि मान लीजिए, आपको निम्नलिख्िात मानों का मानक विचलन परिकलित करना हैः 5, 10, 25, 30, 50 उदाहरण 8 ग् क क2 5 μ19 361 10 μ14 196 25 $1 1 30 $6 36 50 $26 676 0 1270 अब निम्नलिख्िात सूत्रा प्रयुक्त होगाः Σक2 े त्र द 1270 े त्र त्र 254 15 937त्र ण् 5 उपयुर्क्त उदाहरण में जिस मान से विचलन परिकलित किए गए हैं, क्या आपने उस मान पर ध्यान दिया है? क्या यह वास्तविक माध्य है? कल्िपत माध्य विध्ि इन्हीं मानों के लिए विचलन को किसी भी स्वैच्िछक मान ।ग से परिकलित किया जा सकता है। क त्र ग दृ ।गए । ग त्र 25 लेते हुए मानक विचलन का अभ्िाकलन नीचे दिखाया गया है, उदाहरण 9 ग् क क2 5 μ20 400 10 μ15 225 25 0 0 30 $5 25 50 $25 625 μ5 1275 मानक विचलन के लिए सूत्रा, 1275 ⏐−5⎞2 े त्र −⎯त्र 254 त्र 15 937ण्⎯ ⎠⎟ 5 ®5 प्रत्यक्ष विध्ि मानक विचलन को मानों से सीध्े भी, अथार्त् विचलनों को बिना लिए भी, परिकलित किया जा सकता है, जैसा कि नीचे दिखाया गया हैः उदाहरण 10 अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी यहाँ निम्नलिख्िात सूत्रा प्रयुक्त किया जायगाः Σग2 े त्र −;द्ध2ग द या े त्र 4150 −;24द्ध2 5 या े त्र 254 त्र ण्15 937पद - विचलन विध्ि यदि मान किसी समापवतर्क से विभाज्य है, तो उन्हें इससे विभाजित किया जा सकता है और मानक विचलन को प्राप्त मानों से निम्नानुसार परिकलित किया जा सकता हैः उदाहरण 11 चूँकि सभी पाँचों मान समापवतर्क 5 से विभाज्य हैं, अतः विभाजन करके हम निम्न मान प्राप्त करते हैंः ग गश् क क2 5 1 μ3.8 14.44 10 2 μ2.8 7.84 25 5 $0.2 0.04 30 6 $1.2 1.44 50 10 $5.2 27.04 0 50.80 क2ै े त्र द ग् ग2 5 25 10 100 25 625 30 900 50 2500 120 4150 ;यहाँ विचलन शून्य से लिए गए माने जा सकते हैंद्ध। ;परिकलन में चरण ठीक वैसे ही है, जैसे कि वास्तविक माध्य विध्ि में हंैद्ध। मानक विचलन के परिकलन हेतु निम्न सूत्रा प्रयुक्त किया जाता हैः Σक2 े त्र ×ब द ग गष् त्र ब यहाँ पर, ब् = समापवतर्क है मानों को प्रतिस्थापित करने पर, 50ण्80 े त्र 5 5 े त्र 10 16×5ण् े त्र 15 937ण् वैकल्िपक तौर पर, किसी समापवतर्क द्वारा मानों को विभाजित करने की अपेक्षा, विचलनों को किसी समापवतर्क से विभाजित किया जा सकता है। मानक विचलन का परिकलन निम्नानुसार किया जा सकता है। उदाहरण 12 ग क कश् क2 5 μ20 μ4 16 10 μ15 μ3 9 25 0 0 0 30 $5 $1 1 50 $25 $5 25 μ1 51 यहाँ विचलन को स्वैच्िछक मान 25 से परिकलित किया गया है। विचलनों को विभाजित करने के लिए समापवतर्क 5 को प्रयुक्त किया गया है। Σकष्2 ⏐Σकष्⎞2 े त्र −⎯ब⎟ ×⎯ द ® द ⎠51 ⏐−1⎞2 े त्र −⎯5⎯ ⎠⎟ × 5 ®5 े त्र ण् ×5त्र15 9371016 ण् मानक विचलन पैमाने पर स्वतंत्रा नहीं होता है। अतः, यदि मान या विचलन एक समापवतर्क से विभाजित होते हैं तो मानक विचलन ज्ञात करने के लिए समापवतर्क का मान सूत्रा में प्रयुक्त होता है। संतत बारंबारता वितरण में मानक विचलन असमूहित आँकड़ों की भाँति, समूहित आँकड़ों के लिए मानक विचलन को किसी भी निम्नलिख्िात विध्ि के द्वारा परिकलित किया जा सकता हैः ;कद्ध वास्तविक माध्य विध्ि ;खद्ध कल्िपत माध्य विध्ि ;गद्ध पद - विचलन विध्ि वास्तविक माध्य विध्ि सारणी 6.2 में दिए मानों के लिए मानक विचलन को निम्नानुसार परिकलित किया जा सकता है। उदाहरण 13 ;1द्ध ;2द्ध ;3द्ध ;4द्ध ;5द्ध ;6द्ध ;7द्ध ;ब्ण्प्ण्द्ध ि उ उि क कि कि2 10μ20 5 15 75 μ25.5 μ127.5 3251.25 20μ30 8 25 200 μ15.5 μ124.0 1922.00 30μ50 16 40 640 μ0.5 μ8.0 4.00 50μ70 8 60 480 $19.5 $156.0 3042.00 70μ80 3 75 225 $34.5 $103.5 3570.75 40 1620 0 11790.00 निम्नलिख्िात चरण अपनाए जाते हैंः 1 वितरण का माध्य परिकलित कीजिए। ग त्र उि िै ै त्र 1620 40 त्र 40 5ण् 2 माध्य से मध्यबिंदुओं का विचलन परिकलित कीजिए, ताकि कउत्र . ग ;स्तंभ 5द्ध 84 अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी 3 श्किश् मान ;स्तंभ 6द्ध को पाने हेतु विचलन के ध्यान दें कि इस स्तंभ का वुफल योग शून्य नहीं साथ उसकी संगत बारंबारता को गुणा कीजिए है, चूँकि विचलनों को कल्िपत माध्य से लिया ¹ध्यान दें कि Σ कि = 0ह् गया हैद्ध। 45 ष्किष् मानों को ष्कष् मानों के साथ गुणा करके ष्कि2ष् परिकलित कीजिए ;स्तंभ 7द्ध, इन्हें जोड़कर Σ कि2 प्राप्त करें। निम्न सूत्रा का प्रयोग कीजिएः 45 ष्कष् ;स्तंभ 4द्ध मानों के साथ कि ;स्तंभ 5द्ध मानों को गुणा कीजिए, ताकि कि2 मान ;स्तंभ 6द्ध प्राप्त हो सवेंफ। कि2 प्राप्त कीजिए। निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा मानक विचलन का परिकलन ेत्र ैकि द 2 त्र 11790 40 त्र17 168ण् किया जा सकता है। ेत्र .Ê ध्प्र ६ ¯˜ ै ैकि द कि द 2 2 कल्िपत माध्य विध्ि उदाहरण 13 के मानों के लिए मानक विचलन को एक कल्िपत माध्य, जैसे 40, से विचलन लेकर या निम्नानुसार परिकलित किया जा सकता हैः या वत ेत्र 294 75 त्र17 168 ण् ण् उदाहरण 14 ;1द्ध ;ब्ण्प्ण्द्ध ;2द्ध ि ;3द्ध उ ;4द्ध क ;5द्ध कि ;6द्ध कि2 पद विचलन विध्ि यदि विचलनों के मूल्य किसी समापवतर्क द्वारा Σ ेत्र 10μ20 20μ30 5 8 15 25 μ25 μ15 μ125 μ120 3125 1800 विभाज्य हों तो पद विचलन विध्ि से परिकलनों को सरल बनाया जा सकता है, जैसा नीचे उदाहरण में 30μ50 16 40 0 0 0 दिया गया हैः 50μ70 8 60 $20 160 3200 70μ80 3 75 $35 105 3675 उदाहरण 15 40 निम्नलिख्िात चरण आवश्यक हैंः $20 11800 ;1द्ध ब्ण्प्ण् ;2द्ध ि ;3द्ध उ ;4द्ध क ;5द्ध कश् ;6द्ध किश् ;7द्ध किश्2 12 वगार्ें के मध्य बिंदु परिकलित करें। ;स्तंभ 3द्ध किसी कल्िपत माध्य से मध्य बिंदुओं के विचलन परिकलित कीजिए जैसे कि क त्र उ दृ । ग 10μ20 20μ30 30μ50 5 8 16 15 25 40 μ25 μ15 0 μ5 μ3 0 μ25 μ24 0 125 72 0 ;स्तंभ 4द्ध। कल्िपत माध्य = 40 है। 50μ70 8 60 $20 $4 $32 128 3 ष्किष् मानों ;स्तंभ 5द्ध की प्राप्ित हेतु ष्कष् के मानों 70μ80 3 75 $35 $7 $21 147 को संगत बारंबारताओं से गुणा कीजिए। ;यह 40 $4 472 1 वगर् के मध्य बिंदुओं का परिकलन करें ;स्तंभ 3द्ध तथा किसी भी स्वैच्िछक मूल्य से इनका विचलन निकालें, जैसा कल्िपत माध्य विध्ि में किया जाता है। इस उदाहरण में 40 से विचलन लिए गए हैं। ;काॅलम 4द्ध 2 विचलनों को समापवतर्क ब् से भाग दें। उपयुर्क्त उदाहरण में ब् त्र 5। इस प्रकार से प्राप्त किए गए मूल्य कश् ;स्तंभ 5द्ध में दिये गये हैं। 3 कश् मूल्यों को संगत ि;स्तंभ 2द्ध से गुणा करें। जिससे किश् मूल्य प्राप्त हो सके। ;स्तंभ 6द्ध 4 किश् मूल्यों को कश् मूल्यों से गुणा करके किश्2 मूल्य ;स्तंभ 7द्ध प्राप्त करें। 5 स्तंभ 6 तथा स्तंभ 7 के मूल्यों को जोड़कर Σ किश् तथा Σ किश्2 मूल्यों को प्राप्त करें। 6 निम्नलिख्िात सूत्रा का प्रयोग करेंः 2ैकि¢ Êैकि¢६2 े त्र .ध्प्र ˜ञ बै िै ि¯472 Ê 4 ६2 या, े त्र .˜ञ 5ध्प्र40 40¯या, े त्र 11 8 ण् .ण्01 ञ 5 े त्र ण्511 79 ञया, े त्र ण्17 168 मानक विचलनः टिप्पणी मानक विचलन परिक्षेपण के मापों में सवार्ध्िक प्रचलित है, क्योंकि यह सभी मानों पर आधरित होता है। इसलिए, किसी भी मान में परिवतर्न, मानक विचलन के मान को प्रभावित करता है। यह उद्गम से स्वतंत्रा है, पर स्केल से नहीं। इसके साथ ही यह वुफछ उच्च सांख्ियकीय विध्ियों में भी प्रयुक्त होता है। 5.परिक्षेपण के निरपेक्ष तथा सापेक्ष माप अभी तक ऊपर वण्िार्त सभी माप परिक्षेपण के निरपेक्ष माप हैं। वे ऐसे मान का परिकलन करते हैं, जो कभी - कभी निवर्चन में कठिन होते हैं। उदाहरण के लिए, निम्नलिख्िात दो आँकड़ों के समुच्चय पर ध्यान दीजिएः समुच्चय ;कद्ध 500 700 1000 समुच्चय ;खद्ध 100000 120000 130000 मान लीजिए समुच्चय क के मान एक आइसक्रीम विवे्रफता की दैनिक बिक्री का रिकाडर् है, जबकि समुच्चय ख के मान एक बड़े डिपाटर्मेंटल स्टोर की दैनिक बिक्री के हंै। समुच्चय क का परास 500 है, जबकि समुच्चय ख का परास 30,000 है। परास का मान समुच्चय ख में बहुत अध्िक है। क्या आप यह कह सकते हैं कि डिपाटर्मेंटल स्टोर की बिक्री में विचरण अध्िक है? यह बात आसानी से देखी जा सकती है कि समुच्चय क का उच्चतम मान निम्नतम मान का दोगुना है, जबकि समुच्चय ख में यह केवल 30» अध्िक है। अतः निरपेक्ष माप विचरण के प्रसरण के बारे में भ्रामक अनुमान दे सकते हैं, विशेष रूप सेतब जब औसतों में महत्त्वपूणर् अंतर हो। निरपेक्ष मापों की एक अन्य कमजोरी यह है किइनका उत्तर उस इकाइर् में आता है, जिसमें वास्तविक मान व्यक्त किए गए हों। पफलस्वरूप, यदि मान को किलोमीटर में व्यक्त किया गया है, तो परिक्षेपण भी किलोमीटर में ही व्यक्त होगा। लेकिन यदि ठीक वही मान मीटर में व्यक्त किए गए हों तो निरपेक्ष माप भी मीटर में ही होंगे और परिक्षेपण का मान 1000 गुना प्रतीत होगा। इन समस्याओं के हल के लिए, परिक्षेपण के सापेक्ष मान प्रयुक्त किए जाते हैं। प्रत्येक निरपेक्ष माप का एक संब( प्रतिरूप होता है। अतः परास के लिए, परास - गुणांक है, जिसे निम्नानुसार परिकलित किया जाता है। 86 −स्ै त्रपरास - गुणांक ़स्ै यहाँ पर स् = अध्िकतम मान ै = न्यूनतम मान ठीक इसी प्रकार से, चतुथर्क विचलन के लिए चतुथर्क विचलन गुणांक है, जिसे निम्नानुसार परिकलित किया जा सकता हैः − 1फफ त्र 3चतुथर्क विचलन गुणांक , यहाँ3़ 1फफ पर फत्र तृतीय चतुथर्क तथा फत्र प्रथम चतुथर्क3 1 माध्य विचलन के लिए, यह माध्य विचलन गुणांक है। माध्य विचलन गुणांक = डक्गडक् द्धण्ण्; द्ध ण्ण्;डमकपंदअथवा ग डमकपंद इसलिए, यदि माध्य के आधर पर माध्य विचलन का परिकलन होता है तो इसे माध्य द्वारा विभाजित करते हैं। यदि माध्य विचलन के परिकलन हेतु मियका प्रयुक्त होता है तो इसे मियका द्वारा विभाजित किया जाता है। मानक विचलन के लिए सापेक्ष माप को विचरण गुणांक कहा जाता है, जिसका परिकलन आगे दिया गया है। उदाहरण 16 अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी मानक विचलन विचरण गुणांक = × 100 समान्तर माध्य इसे प्रायः प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है और परिक्षेपण का यह सवार्ध्िक प्रयुक्त होने वाला सापेक्ष माप है। चूँकि सापेक्ष माप उन इकाइयों से मुक्त होते हैं, जिनमें मान व्यक्त किए गए हों, अतः इनकी तुलना विभ्िान्न इकाइयों में व्यक्त विभ्िान्न समूहों से भी की जा सकती है। 7.लारेंज वक्र ;स्वतमद्र ब्नतअमद्ध अब तक चचिर्त परिक्षेपण के माप, परिक्षेपण का एक संख्यात्मक मान देते हैं। परिक्षेपण के अनुमान के लिए एक आरेखी माप जिसे लारेंज वक्र कहा जाता है, भी उपलब्ध् है। आपने ऐसे वक्तव्य सुने होंगे, जैसे देश के शीषर् 10» लोग देश की 50» राष्ट्रीय आय अजिर्त करते हैं, जबकि शीषर् 20» लोग 80» आय। इन संख्याओं से आय वितरण की असमानता के बारे में अनुमान प्राप्त होता हैंै। लारेंज वक्र का प्रयोग संचयी रूप में व्यक्त सूचनाओं की परिवतर्नशीलता की मात्रा को दशार्ने के लिए किया जाता है। यह दो या दो से अध्िक वितरणों की परिवतर्नशीलता की तुलना में विशेष उपयोगी है। नीचे एक कंपनी के कमर्चारियों की मासिक आय दी गइर् है। आय सीमा ;1द्ध मध्य बिन्दु ;2द्ध संचयीमध्य बिन्दु ;3द्ध संचयीμमध्यबिन्दु ;प्रतिशतद्ध ;4द्ध कमर्चारियोंकी संख्या बारंबारता;5द्ध संचयीबारंबारता ;6द्ध संचयीबारंबारता;प्रतिशतद्ध;7द्ध 0μ5000 2500 2500 2.5 5 5 10 5000μ10000 7500 10000 10.0 10 15 30 10000μ20000 15000 25000 25.0 18 33 66 20000μ40000 30000 55000 55.0 10 43 86 40000μ50000 45000 100000 100.0 7 50 100 सारणी 6.4 आय ;रु मेंद्ध कमर्चारियों की संख्या 0μ5,000 5 5,000μ10,000 10 10,000μ20,000 18 20,000μ40,000 10 40,000μ50,000 7 लारेंज वक्र का निमार्ण निम्नलिख्िात चरण आवश्यक हैंः 1.वगार्ें के मध्यबिंदु परिकलित कीजिए तथा उनका संचयी योग पता कीजिए जैसा उदाहरण 16 में स्तंभ 3 में दिया गया है। 2.स्तंभ 6 के अनुरूप संचयी बारंबारताएँ परिकलित कीजिए। 3.स्तंभ 3 और 6 का वुफल योग 100 के रूप में व्यक्त कीजिए और इन स्तंभों के संचयी योगों को प्रतिशत में बदलिए, जैसा कि स्तंभ 4 एवं 7 में किया गया है। 4.अब, ग्रापफ पेपर पर, चर ;आयद्ध के संचयी प्रतिशत को ल् अक्ष पर तथा बारंबारताओं ;कमर्चारियों की संख्याद्ध के संचयी प्रतिशत को ग्दृअक्ष पर ;चित्रा 6.1 की भाँतिद्ध प्रदश्िार्त कीजिए। इस तरह से प्रत्येक अक्ष पर 0 से 100 तक का मान होगा। 5.निदर्ेशांक ;0, 0द्ध को ;100, 100द्ध से जोड़ते हुए एक रेखा खींचिए। इसे सम - वितरण की रेखा कहा जाता है, जैसा कि चित्रा 6.1 में व्ब् रेखा के द्वारा दिखाया गया है। 6.चित्रा में चर के संचयी प्रतिशत को बारंबारता के संगत संचयी प्रतिशत के साथ अभ्िालेख्िात कीजिए। इन बिंदुओं को मिला कर वक्र व्।ब् प्राप्त कीजिए। लारंेज वक्र का अध्ययन व्ब् को सम वितरण की रेखा कहा जाता है, चूूँकि यह ऐसी स्िथति में लागू होता है, जहाँ शीषर् 20» लोग वुफल आय का 20» अजिर्त करते हैं और शीषर् 60» वुफल आय का 60» अजिर्त करते हैं। व्।ब् वक्र इस रेखा से जितना अध्िक दूर होता है वितरण में उतनी ही अध्िक परिवतर्नशीलता होती है। यदि यहाँ पर दो या इससे अध्िक वक्र हैं, तो वह वक्र जो व्ब् रेखा से जितना अध्िक दूर होगा, उसमें उतना ही अध्िक परिक्षेपण होगा। 8.सारांश यद्यपि परास समझने तथा परिकलन के लिए सबसे सरल है, लेकिन यह चरम मानों से अनुचित रूप से प्रभावित होता है। चतुथर्क विचलन चरम मानों से प्रभावित नहीं होता है, क्योंकि वह आँकड़ों के केवल मध्यवतीर् 50» आँकड़ों पर आधरित होता है। परंतु, अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी चतुथर्क विचलन का निवर्चन बहुत कठिन होता है। अंगण्िातीय प्रतीत होता है। मानक विचलन माध्य से माध्य विचलन और मानक विचलन दोनों ही मानों के औसत विचलन के परिकलन का प्रयास करता है। अपने औसत से विचलनों पर आधरित होते हैं। माध्य माध्य विचलन की भाँति यह सभी मानों पर आधरित विचलन औसत से विचलनों के औसत को परिकलित होता है एवं इसका प्रयोग उच्चतर सांख्ियकीय समस्याओं करता है, लेकिन विचलन के चिन्हों की ;)णात्मक में भी होता है। यह परिक्षेपण के माप के लिए सामान्य तथा ध्नात्मकद्ध उपेक्षा करता है। इसी कारण यह रूप से प्रयुक्त होता है। पुनरावतर्न ऽ परिक्षेपण का माप किसी आथ्िार्क चर के व्यवहार के बारे में हमारे ज्ञान में वृि करता है। ऽ परास तथा चतुथर्क विचलन मानों के प्रसरण पर आधरित होते हैं। ऽ माध्य विचलन तथा मानक विचलन औसत से मानों के विचलनों पर आधरित होते हैं। ऽ परिक्षेपण के माप निरपेक्ष या सापेक्ष हो सकते हैं। ऽ निरपेक्ष मापों का उत्तर उन्हीं इकाइयों में होता है, जिसमें आँकड़ों को व्यक्त किया गया है। ऽ सापेक्ष माप उन इकाइयों से मुक्त होते हंै, जिनमें आँकड़े व्यक्त किए जाते हैं और इसीलिए ये विभ्िान्न चरों की तुलना करने के लिए प्रयुक्त किए जा सकते हैं। ऽ वक्र के आकार में परिक्षेपण अनुमान प्रस्तुत करने वाली आरेखीय विध्ि को लारेंज वक्र कहते हैं। अभ्यास 1.‘किसी बारंबारता वितरण के समझने में परिक्षेपण का माप वेंफद्रीय मान का एक अच्छा संपूरक है’, टिप्पणी करें। 2. परिक्षेपण का कौन सा माप सवार्ेत्तम है और वैफसे? 3.‘परिक्षेपण के वुफछ माप मानों के प्रसरण पर निभर्र करते हैं, लेकिन वुफछ, वेंफद्रीय मान से मानों के विचरण को परिकलित करते हैं।’ क्या आप सहमत हैं? 4.एक कस्बे में, 25» लोग रुú 45,000 से अध्िक आय अजिर्त करते हैं, जबकि 75» लोग 18,000 से अिाक अजिर्त करते हैं। परिक्षेपण के निरपेक्ष एवं सापेक्ष मानों का परिकलन कीजिए। 5.एक राज्य के 10 जिलों की प्रति एकड़ गेहूँ व चावल पफसल की उपज निम्नवत् हैः जिले 12345 678910 गेहूँ 12 10 15 19 21 16 18 9 25 10 चावल 22291223181512341812 प्रत्येक पफसल के लिए परिकलन करें, ;कद्धपरास ;खद्ध चतुथर्क विचलन ;गद्धमाध्य से माध्य विचलन ;घद्ध मियका से माध्य विचलन ;ड़द्ध मानक विचलन ;चद्धकिस पफसल में अध्िक विचरण है? ;छद्धप्रत्येक पफसल के लिए विभ्िान्न मापों के मानों की तुलना कीजिए। 6.पूवर्वतीर् प्रश्न में, विचरण के सापेक्ष मापों को परिकलित कीजिए और वह मान बताइए जो आपके विचार से सवार्ध्िक विश्वसनीय हो। 7.किसी िकेट टीम के लिए एक बल्लेबाज का चयन करना है। यह चयन ग और ल के बीच पाँच पूवर्वतीर् स्कोर के आधर पर करना है, जो निम्नवत् हैंः ग 25 85 40 80120 ल 50 70 65 45 80 किस बल्लेबाज को टीम में चुना जाना चाहिए? ;कद्ध अध्िक रन स्कोर करने वाले को, या ;खद्ध अध्िक भरोसेमंद बल्लेबाज को। 8.दो ब्रांडों के बल्बों की गुणवत्ता जाँचने के लिए, ज्वलन अवध्ि घंटों में उनके जीवन काल को, प्रत्येक ब्रांड के 100 बल्बों के आधर पर निम्नानुसार अनुमानित किया गया हैः जीवन काल बल्बों की संख्या ;घंटों मेंद्ध ब्रांड क ब्रांड ख0μ 50 15 250μ100 20 8 100μ150 18 60 150μ200 25 25 200μ250 22 5 100 100 ;कद्ध किस ब्रांड का जीवन काल अध्िक है? ;खद्ध कौन सा ब्रांड अध्िक भरोसेमंद है? 9.एक कारखाने के 50 मजदूरों की औसत दैनिक मजदूरी 200 रु. तथा मानक विचलन 40 रुú था। प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 20 रु. की वृि की गइर्। अब मजदूरों की औसत दैनिक मजदूरी एवं मानक विचलन क्या है? क्या मजदूरी में समानता आइर् है? 10.पूवर्वतीर् प्रश्न में, यदि प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 10» की वृि की जाए, तो माध्य एवं मानक विचलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? अथर्शास्त्रा में सांख्ियकी 11.निम्नलिख्िात वितरण के लिए, माध्य से माध्य विचलन और मानक विचलन का परिकलन कीजिए। वगर् बारंबारता20μ 40 3 40μ 80 6 80μ100 20 100μ120 12 120μ140 9 50 12.10 मानों का योग 100 है और उनके वगार्ें का योग 1090 है। विचरण गुणांक ज्ञात कीजिए?

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