12ण्1 समग्र अवलोकन ;व्अमतअपमूद्ध 12ण्1ण्1 निदेर्शांक अक्ष एवं निदेर्शांक तल ;ब्ववतकपदंजम ंगमे ंदक बववतकपदंजम चसंदमेद्ध मान लीजिए ग्′व्ग्ए ल्′व्ल्ए र्′व्र् तीन परस्पर लंब रेखाएं हैं जो बिंदु व् से इस प्रकार जाती हैं कि ग्′व्ग् एवं ल्′व्ल् कागज के तल पर स्िथत हैं और र्′व्र् कागज के तल पर लंब है। ये तीन रेखाएं समकोण्िाक अक्ष कहलाती हैं ;रेखाएं ग्′व्ग्ए ल्′व्ल् एवं र्′व्र् क्रमशः ग.अक्षए ल.अक्ष एवं ्र.अक्ष कहलाती हैं।द्ध हम इस निदेर्शांक निकाय को त्रिाविमीय अंतरिक्ष अथवा केवल अंतरिक्ष कहते हैं। इन तीन अक्षों को एक साथ युग्म रूप मेें लेने परगलए ल्र एवं ्रग.तलों अथार्त् तीन निदेर्शांक तलों को दशार्ते हैं। प्रत्येक तल अंतरिक्ष को दो भागों में विभक्त करता है और तीन निदेर्शांक तल एक साथ मिलकर अंतरिक्ष को आठ क्षेत्रों ;भागोंद्ध, अथार्त ;पद्ध व्ग्ल्र् ;पपद्ध व्ग्′ल्र् ;पपपद्ध व्ग्ल्′र् ;पअद्ध व्ग्ल्र्′ ;अद्ध व्ग्ल्′र्′ ;अपद्ध व्ग्′ल्र्′ ;अपपद्ध व्ग्′ल्′र् ;अपपपद्ध व्ग्′ल्′र्′ ;आकृति 12.1द्ध, में बाँटते हैं। ये आठ भाग अष्टांशक ;व्बजंदजद्ध कहलाते हैं। मान लीजिए च् एक ऐसा बिंदु है जो निदेर्शांक तल में नहीं बल्िक अंतरिक्ष में स्िथत है। बिंदु च् से निदेर्शांक तलों ल्रए ्रग एवं गल के समांतर ऐसे तल खींचिए जो निदेर्शांक अक्षों को क्रमशः बिंदुओं ।ए ठ एवं ब् पर मिलें। वे तीन तल इस प्रकार हैः ;पद्ध ।क्च्थ् द्यद्य ल्र.तल ;पपद्ध ठक्च्म् द्यद्य ग्र.तल ;पपपद्ध ब्थ्च्म् द्यद्य गल.तल ये तल एक समकोण्िाक षट्पफलकीय को दशार्ते हैं जिसमें समकोण्िाक पफलों के तीन युग्म ;।क् च् थ्ए व् ठ म् ब्द्धए ;ठ क् च् म्ए ब् थ् । व्द्ध एवं ;। व् ठ क्ए थ्च्म्ब्द्ध होते हैं ;आकृति 12.2द्ध 12ण्1ण्2 अंतरिक्ष में एक बिंदु के निदेर्शांक ;ब्ववतकपदंजम व िं चवपदज पद ेचंबमद्ध त्रिाविमीय अंतरिक्ष में किसी स्वेच्छ बिंदु च् के निदेर्शांक ;ग0ए ल0ए ्र0द्ध होते हैं, यदि ;1द्ध ल्र.तल के समांतर बिंदु च् से जाने वाला तलग.अक्ष को;ग0ए 0ए 0द्ध पर प्रतिच्छेद करता है। ;2द्ध ्रग.तल के समांतर बिंदु च् से जाने वाला तल ल.अक्ष को ;0ए ल0ए 0द्ध पर प्रतिच्छेद करता है। ;3द्ध गल.तल के समांतर बिंदु च् से जाने वाला तल ्र.अक्ष को;0ए 0ए ्र0द्ध पर प्रतिच्छेद करता है। अं0ए ल0ए ्र0तरिक्ष निदेर्शांक ;गद्धए बिंदु च् के कातीर्य निदेर्शांक अथवा समकोण्िाक निदेर्शांक कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त हम कह सकते हैं कि तल।क्च्थ् ; आकृति 12ण्2द्ध ग.अक्ष पर लंब है अथवाग.अक्ष तल ।क्च्थ् पर लंब है और इस प्रकार ग.अक्ष तल ।क्च्थ् की प्रत्येक रेखा पर लंब है। इसलिए च्। एवं व्ग् परस्पर लम्ब हैं। अतः बिंदु ।ए बिंदु च् से ग.अक्ष पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु है और इस पाद बिंदु । की, बिंदु व् से दूरी, बिंदु च् काग.निदेर्शांक है। इसी प्रकार हम कह सकते हैं कि ठ एवं ब् किन्तु च् से क्रमशः ल.अक्ष एवं ्र.अक्ष पर खींचे गए लंबों के पाद बिंदु हैं। इन पाद बिंदुओं ठ एवं ब् को बिंदु व् से दूरियां बिंदु च् के क्रमशः ल एवं ्र निदेर्शांक है। अतः बिंदु च् के निदेर्शांक गए ल्र बिंदु च् की तीन निदेर्शांक तलों ल्रए ्रग एवं गल से क्रमशः दूरियां हैं। 12ण्1ण्3 एक बिंदु के निदेर्शांकों के चिÉ ;ैपहद व िबववतकपदंजमे व िं चवपदजद्ध व्ग्ए व्ल्ए व्र् के अनुदिश अथवा समांतर मापी गइर् दूरी धनात्मक ली जाती है एवंव्ग्′ए व्ल्′ए व्र्′ के अनुदिश अथवा समांतर मापी गइर् दूरी )णात्मक ली जाती है, तीन परस्पर लंब निदेर्शांक तल अंतरिक्ष को आठ भागों में विभक्त करते हैं जिनमें से प्रत्येक भाग अष्टांशक ;वबजंदजद्ध कहलाता है। किसी बिंदुके निदेर्शांकों के चिÉ उस अष्टांशक ;वबजंदजद्ध पर निभर्र करते हैं जिसमें वह बिंदु स्िथत है। प्रथम अष्टांशक ;वबजंदजद्ध में सभी निदेर्शांक धनात्मक होते हैं और सातवें अष्टांशक ;वबजंदजद्ध में सभी निदेर्शांक )णात्मक होते हैं। तीसरे अष्टांशक ;वबजंदजद्ध में गए ल निदेर्शांक )णात्मक एवं ्र धनात्मक होते हैं। पाँचवें अष्टांशक ;वबजंदजद्ध में गए ल धनात्मक एवं ्र )णात्मक होते हैं। चतुथर् अष्टांशक ;वबजंदजद्ध में गए ्र धनात्मक एवंल )णात्मक होते हैं। छठे अष्टांशक ;वबजंदजद्ध मेंगए ्र )णात्मक एवं ल धनात्मक होते हैं। दूसरे अष्टांशक ;वबजंदजद्ध में ग )णात्मक एवं लए ्र धनात्मक होते हैं। अष्टांशक → प् प्प् प्प्प् प्ट ट टप् टप्प् टप्प्प् निदेर्शांक व्ग्ल्र् व्ग्′ल्र् व्ग्′ल्′र् व्ग्ल्′र् व्ग्ल्र्′ व्ग्′ल्र्′ व्ग्′ल्′र्′ व्ग्ल्′र्′ ↓ ग ़ दृ दृ ़ ़ दृ दृ ़ ल ़ ़ दृ दृ ़ ़ दृ दृ ्र ़ ़ ़ ़ दृ दृ दृ दृ 12ण्1ण्4 दूरी सूत्रा ;क्पेजंदबम वितउनसंद्ध दो बिंदुओं च् ;ग1ए ल1ए ्र1द्ध एवं फ ;ग2ए ल2ए ्र2द्ध के बीच की दूरी 2 22च्फत्रग−गद्ध ़− ; लल द्ध;्र्रद्ध से प्राप्त होती है।़− 2 121 21 बिंदुओं ;ग1ए ल1ए ्रद्ध एवं ;ग2ए ल2ए ्रद्ध से निदेर्शांक तलों के समांतर खींचे गए तल एक12 षट्पफलकीय का निमार्ण करते हैं। षट्पफलकीय के किनारों की लम्बाइर् गदृ ग1ए लदृ ल1ए ्रदृ ्रएवं2221 12ण्1ण्5 विभाजन सूत्रा ;ैमबजपवद वितउनसंद्ध बिंदुओं च्;ग1ए ल1ए ्रद्ध एवंफ;ग2ए ल2ए ्रद्ध को मिलाने वाले रेखाखंड को अंतः अथवा बाह्यत्रू उरू दके12अनुपात में विभाजित करने वाले बिंदु त् के निदेर्शांक क्रमशः ⎛उग दगउल द़्र⎞⎛ −गउल द−्र⎞़़लउ्रदउगद−लउ्र द21 2121 212121 एएए एवं एए⎜ ⎟⎜ ⎟हैं।⎝उद उद उद़⎠⎝ उद − उद़़ − उद −⎠ बिंदुओं च् ;ग1ए ल1ए ्रद्ध एवं फ ;ग2ए ल2ए ्रद्ध को मिलाने वाले रेखाखंड के मध्य बिंदु के निदेर्शांक12 ग़गल ल्र्र ़⎞⎛़1 21 212⎜ ⎟हैं।⎝ 2ए2ए2 ⎠एक त्रिाभुज जिसके शीषर् ;ग1ए ल1ए ्र1द्धए ;ग2ए ल2ए ्र2द्ध एवं ग3ए ल3ए ्र3 पर हैं, के केन्द्रक के निदेर्शांक ग गगलल ल्र्र ़़ ़़्र⎞⎛ ़़1 2312 3123⎜ एए ⎟हैं।⎝ 3 33 ⎠12ण्2 हल किए हुए उदाहरणलघु उत्तरीय उदाहरण उदाहरण 1 बिंदु;पद्ध ;2ए 3ए 4द्ध ;पपद्ध ;दृ2ए दृ2ए 3द्ध का अंतरिक्ष में स्थान निधार्रित ;सवबंजमद्ध कीजिए। हल ;पद्ध बिंदु ;2ए 3ए 4द्ध को अंतरिक्ष में स्थान निधार्रित ;सवबंजमद्ध करने के लिए हम बिंदु व् से ग.अक्षकी धनात्मक दिशा के अनुदिश 2 इकाइर्आगे बढ़ते हैं मान लीजिए यह बिंदु ।;2ए व्ए व्द्ध है। इस बिंदु । से ल.अक्ष कीधनात्मक दिशा के समांतर 3 इकाइर् की दूरीतय कीजिए। मान लीजिए यह बिंदु आकृति 12ण्3 ठ;2ए 3ए 0द्ध है। इस बिंदु ठ से ्र.अक्ष की धनात्मक दिशा के अनुदिश 4 इर्काइर् की दूरी तय कीजिए। मान लीजिए यह बिंदु च्;2ए 3ए 4द्ध है। ;पपद्ध मूल बिंदु सेग.अक्ष की )णात्मक दिशा के अनुदिश 2 इकाइर् की दूरी तय कीजिए। मान लीजिएयह बिंदु ।;दृ2ए 0ए 0द्ध है। इस बिंदु । से ल.अक्ष की )णात्मक दिशा के समांतर 2 इकाइर् दूरी तयकीजिए। मान लीजिए यह बिंदु ;दृ2ए दृ2ए 0द्धए बिंदु ठ से ्र.अक्ष की धनात्मक दिशा के समांतर 3 इकाइर् दूरी तय कीजिए। यह हमारा अभीष्ट बिंदु फ ;दृ2ए दृ2ए 3द्धहै ;आकृति 12ण्4द्ध आकृति 12ण्4 उदाहरण 2 निम्नलिख्िात तलों का रेखाचित्रा बनाइर्ए ;पद्ध ग त्र 1 ;पपद्ध ल त्र 3 ;पपपद्ध ्र त्र 3 हल ;पद्ध तल का समीकरण ग त्र 0ए ल्र तल को निरूपित करता है और तल का समीकरण ग त्र 1ए ल्र तलके समांतर एक ऐसे तल को निरूपित करता है जो ल्र तल से ऊपर की तरपफ 1 इकाइर् कीदूरी पर है। अब हम ल्र तल के समांतर, ऊपर की तरपफ एक इकाइर् की दूरी पर एक अन्य तलखींचते हैं। ;आकृति 12.5 ;ंद्धद्ध ;पपद्ध तल का समीकरण ल त्र 0ए ग्र तल को निरूपित करता है और तल का समीकरण ल त्र 3ए एक ऐसे तल को निरूपित करता है जो ग्र तल के समांतर है और ग्र तल से ऊपर की तरपफ 3इकाइर् की दूरी पर स्िथत है ;आकृति 12.5 ;इद्धद्ध ;पपपद्ध तल का समीकरण ्र त्र 0ए गल तल को निरूपित करता है और ्र त्र 3ए गल तल के समांतर ऊपरकी दिशा में 3 इर्काइर् की दूरी पर एक अन्य तल को निरूपित करता है। ;आकृति 12.5 ;बद्धद्ध ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध आकृति 12ण्5 उदाहरण 3 मान लीजिए बिंदु च् ;3ए 4ए 5द्ध से गए ल एवं ्र अक्ष पर खींचे गए लंबों के पाद बिंदु क्रमशः स्ए ड एवं छ हैं। स्ए ड एवं छ के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। हल क्योंकि बिंदु स्ए बिंदु च् से ग.अक्ष पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु है इसलिए इसके ल एवं ्र निदेर्शांक शून्य हैं। अतः स् के निदेर्शांक ;3, 0, 0द्ध हैं। इसी प्रकार ड एवं छ के निदेर्शांक ;0, 4, 0द्ध एवं ;0, 0, 5द्ध हैं। उदाहरण 4 मान लीजिए स्ए डए छ किसी बिंदु च्;3ए 4ए 5द्ध से क्रमशः गलए ल्र एवं ्रग तलों पर खींचे गए लंब - खंडों के पाद बिंदु हैं। स्ए ड एवं छ के निदेर्शांक क्या हैं? हल क्योंकि स् बिंदु च् से गल तल पर खींचे गए लंबखंड का पाद बिंदु है और गल तल पर ्र निदेर्शांक शून्य है, इसलिए स् के निदेर्शांक ;3, 4, 0द्ध हैं। इसी प्रकार हम ड ;0ए 4ए 5द्ध एव छ ;3ए 0ए 5द्ध ज्ञात कर सकते हैं। उदाहरण 5 मान लीजिए स्ए डए छ किसी बिंदु च्;3ए 4ए 5द्ध आकृति 12ण्6से क्रमशः गलए ल्र एवं ्रग तलों पर खींचे गए लंबखंडों के पाद बिंदु है। इन बिंदुओं स्ए डए छ का बिंदु च् से दूरियां ज्ञात कीजिए। हलक्योंकि स् बिंदु च् से गल तल पर खींचे गए लंबखंड का पाद बिंदु है। इसलिए बिंदु के निदेर्शांक ;3, 4, 0द्ध है। बिंदु ;3, 4, 5द्ध एवं बिंदु ;3, 4, 0द्ध के बीच की दूरी 5 इकाइर् है। इसी प्रकार हम ल्र एवं ्रग तल पर खींचे गए लंबखंडों की लम्बाइर् ज्ञात कर सकते हैं जो क्रमशः 3 इकाइर् एवं 4 इकाइर् है। उदाहरण 6 दूरी सूत्रा का उपयोग करते हुए दशार्इए कि बिंदु च् ;2ए 4ए 6द्धए फ ;दृ 2ए दृ 2ए दृ 2द्ध एवं आकृति 12ण्7 त् ;6ए 10ए 14द्ध संरेख हैं। हल तीन बिंदु संरेख होते हैं यदि दो दूरियों का योग तीसरी दूरी के समान है। 2 22च्फ त्र ;दृ2दृ2द्ध ़;दृ2दृ 4द्ध ़;दृ2दृ6द्ध त्र16 36 64 116 त्र2 29 ़़ त्र 222फत् त्र ;6 2द्ध ;10 2द्ध ;14 2द्ध त्र64 ़़ 256 ़़़़़ 144 त्र464 त्र4 29 2 22च्त् त्र ;6 2द्ध ;10 4द्ध ;14 दृ6द्ध त्र 16 ़़64 116 त्र 229 − ़− ़36 त्र क्योंकि फत् त्र च्फ ़ च्त् इसलिए दिए हुए बिंदु संरेख हैं। उदारहण 7 चार बिंदुओं व् ;0ए 0ए 0द्धए । ;सए 0ए 0द्धए ठ ;0ए उए 0द्ध एवंब् ;0ए 0ए दद्ध से समदूरस्थ एक बिंदु के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। हल मान लीजिए च् ;गए लए ्रद्ध वांछित बिंदु है। तब व्च्त्र च्। त्र च्ठ त्र च्ब् सअब, व्च् त्र च्। ⇒व्च्2 त्र च्।2 ⇒ ग2 ़ ल2 ़ ्र2 त्र ;ग दृ सद्ध2 ़ ;ल दृ 0द्ध2 ़ ;्र दृ 0द्ध2 ⇒ ग त्र 2 उदइसी प्रकार, व्च् त्र च्ठ ⇒ ल त्र और व्च् त्र च्ब् ⇒ ्र त्र 22 सउदअतः वांछित बिंदु के निदेर्शांक ;ए ए द्ध हैं।222 उदाहरण 8 बिंदुओं । ;3ए 2ए 2द्ध तथा ठ ;5ए 5ए 4द्ध से समदूरस्थ, ग.अक्ष पर स्िथत एक बिंदु ज्ञात कीजिए। हल ग.अक्ष पर बिंदु च् ;गए 0ए 0द्ध के रूप का होगा। क्योंकि बिंदु । तथा ठ बिंदु च् से समदूरस्थ हैं, इसलिए च्।2 त्र च्ठ2 अथार्त् ;ग दृ 3द्ध2 ़ ; 0 दृ 2द्ध2 ़ ;0 दृ 2द्ध2 त्र ;ग दृ 5द्ध2 ़ ;0 दृ 5द्ध2 ़ ;0 दृ 4द्ध2 49 ⇒ 4ग त्र 25 ़ 25 ़ 16 दृ 17 अथार्त् ग त्र ण्4 49अतः । तथा ठ से समदूरस्थ, ग.अक्ष पर स्िथत बिंदु; ए 0ए 0द्ध है।4 उदाहरण 9 ल.अक्ष पर एक ऐसा बिंदु ज्ञात कीजिए जो बिंदु ;1, 2, 3द्ध से 10 की दूरी पर है। हल मान लीजिए ल.अक्ष पर च् कोइर् बिंदु हैं। इसलिए यह च्;0ए लए 0द्ध के रूप में है। बिंदु ;1ए 2ए 3द्धए बिंदु च्;0ए लए 0द्ध से 10 की दूरी पर है। 2 22इसलिए ;1−0द्ध ़;2 − लद्ध ़ ;3 − 0द्ध त्र 10 ⇒ ल2 दृ 4ल ़ 4 त्र 0 ⇒ ;ल दृ 2द्ध2 त्र 0 ⇒ ल त्र 2 अतः ;0ए 2ए 0द्ध अभीष्ट बिंदु है। उदाहरण 10 यदि बिंदुओं ;2, 3, 5द्ध एवं ;5, 9, 7द्ध से निदेर्शांक अक्षों के समांतर खींचे गए तलों से एक षट्पफलकीय बनाया गया है, तो उस षट्पफलकीय के किनारों एवं विकणर् की लम्बाइर् ज्ञात कीजिए। हल षट्पफलकीय के किनारों की लम्बाइर् 5 दृ 2ए 9 दृ 3ए 7 दृ 5 अथार्त् 3ए 6ए 2 हैं। 2 22विकणर् की लम्बाइर् 3 ़ 6 ़ 2 त्र 7 इकाइर् है। उदाहरण 11 दशार्इए कि बिंदु;0ए 7ए 10द्धए ;दृ1ए 6ए 6द्ध एवं;दृ 4ए 9ए 6द्ध एक समद्विबाहु समकोण त्रिाभुज बनाते हैं। हल मान लीजिए दिए हुए तीन बिंदु च् ;0ए 7ए 10द्धए फ ;दृ1ए 6ए 6द्ध एवं त् ;दृ 4ए 9ए 6द्ध हैं। यहां च्फ त्र फत् त्र अब च्फ2 ़ फत्2 त्र ;3 2द्ध2 ़;3 2द्ध 2त्र 18 ़ 18 त्र 36 त्र ;च्त्द्ध2 इसलिए Δ च्फत् एक समकोण त्रिाभुज है। साथ ही, च्फ त्र फत् अतः Δ च्फत् समद्विबाहु है। उदाहरण 12 दशार्इए कि बिंदु;5ए दृ1ए 1द्धए ;7ए दृ 4ए 7द्धए ;1 दृ 6ए 10द्ध एवं;दृ1ए दृ 3ए 4द्ध एक सम चतुभुर्ज के शीषर् हैं। हल मान लीजिए। ;5ए दृ 1ए 1द्धए ठ ;7ए दृ 4ए 7द्धए ब्;1ए दृ 6ए 10द्ध एवं क् ;दृ 1ए दृ 3ए 4द्धए किसी चतुभुर्ज के चार शीषर् हैं।़़3649।ठ त्र 4936 त्र 7 ए ठब् त्र ़़ त्र 7ए ब्क् त्र 4936़़ त्र 7ए क्। त्र 2349़़ त्र 7 ध्यान दीजिए कि ।ठ त्र ठब् त्र ब्क् त्र क्। द्ध।ठब्क् एक समचतुभर्ुज है। उदारहण 13 ज्ञात कीजिए कि बिंदुओं ;2ए 4ए 5द्ध एवं ;3ए 5ए दृ 4द्ध को मिलाने वाले रेखाखंड को ग्र.तल किस अनुपात में बाँटता है। हल मान लीजिए ग्र तल, बिंदुओं च् ;2ए 4ए 5द्ध एवं फ ;3ए 5ए दृ 4द्ध को मिलाने वाले रेखाखंड को ा रू 1 के अनुपात में बिंदु त्;गए लए ्रद्ध विभाजित करता है। 3ा ़25ा ़44ा 5−़ ग त्र ल त्र ्र त्र ़ ए ़ एा 1 ा 1 ा ़1 क्योंकि बिंदु त्ए गए ल तल में स्िथत हैं इसलिए इसका ल.निदेर्शांक शून्य होना चाहिए 5 ा ़44अथार्त् ़ त्र 0 ⇒ ा त्र −ा 1 5 अतः अभीष्ट अनुपात μ4ः 5 है अथार्त् तल दिए हुए रेखाखंड को 4: 5 के अनुपात में बाह्य विभाजित करता है। 5 उदाहरण14 एक बिंदु च्ए बिंदु। ;दृ 2ए 0ए 6द्ध से बिंदु ठ ;10ए दृ 6ए दृ 12द्धके बीच रास्ते के वें भाग6 पर स्िथत है। बिंदु च् के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। हल मान लीजिए च् ;गए लए ्रद्ध वांछित बिंदु हैं अथार्त् च्ए।ठ को 5 रू 1 के अनुपात में विभाजित करता है। इसलिए⎛510 × ़× 1 दृ25 ×दृ6 105 ×−12 16़× ़×⎞ च् ;गए लए ्रद्ध त्र⎜ एए ⎟त्र ;8ए दृ 5ए दृ 9द्ध5 ़1 51़ 51 ⎠⎝़ उदाहरण 15 एक समकोण्िाक षट्पफलकीय के शीषर् एवं किनारा ज्ञात कीजिए यदि उसका एक शीषर् ;3, 5, 6द्ध प्रथम अष्टांशक में है, एक शीषर् मूल बिंदु पर है और उसके किनारे गए ल एवं ्र अक्षों केअनुदिश हैं। हलः षट्पफलकीय के छः तल निम्न प्रकार हैं - तल व्।ठब्ए गल.तल में स्िथत है। इस तल में स्िथत प्रत्येक बिंदु का ्र निदेर्शांक शून्य है। इस तल में गल का समीकरण ्र त्र 0ए तल च्क्म्थ्ए गल तल केसमांतर एवं ऊपर की तरपफ 6 इर्काइर् की दूरी पर स्िथत है। इस तल का समीकरण ्र त्र 6 है। तल ।ठच्थ्ए तल ग त्र 3 का निरूपित करता है। तल व्ब्क्म्ए ल्र.तल में स्िथत है और इस तल का समीकरण ग त्र 0 है। तल ।व्म्थ्ए ग्र तल में स्िथत है। इस तल मंे स्िथत प्रत्येक बिंदु का ल.निदेर्शांक शून्य है। इसलिए इस तल का समीकरण ल त्र 0 है। तल ठब्क्च्ए तल।व्म्थ् के समांतर ल त्र 5 की दूरी पर है। किनारा व्।ए ग.अक्ष पर स्िथत है ग.अक्ष का समीकरण ल त्र 0 एवं ्र त्र 0 है। किनाराव्ब् एवंव्म् क्रमशःल.अक्ष एवं्र.अक्ष पर स्िथत हैं। ल.अक्ष के समीकरण्र त्र 0ए ग त्र 0 है। ्र.अक्ष का समीकरणग त्र 0ए ल त्र 0 है। बिंदुच् ;3ए 5ए 6द्ध कीग.अक्ष से लंबवत् दूरी 52 ़62 त्र 61 है। बिंदुच् ;3ए 5ए 6द्ध कील.अक्ष एवं्र.अक्ष से दूरियाँ क्रमशः 32 ़62 त्र 45 एवं 32 ़52 त्र 34 हैं। बिंदुच् ;3ए 5ए 6द्ध से निदेर्शांक अक्षों पर खींचे गए लम्बों के पाद बिंदुओं के निदेर्शांक ।ए ब् एवं म् है। बिंदु च्;3ए 5ए 6द्ध से निदेर्शांक तलों गलए ल्र एवं ्रग पर खींचे गए लंबों के पाद बिंदुओं के निदेर्शांक क्रमशः ;3ए 5ए 0द्धए ;0ए 5ए 6द्ध एवं ;3ए 0ए 6द्ध है। हम यह भी देखते हैं कि बिंदु च् की तलों गलए ल्र एवं ्रग से लंबवत् दूरियाँ क्रमशः 6, 5 एवं 3 हैं। उदाहरण16 मान लीजिए तीन बिंदु । ;3ए 2ए 0द्धए ठ ;5ए 3ए 2द्ध एवंब् ;दृ 9ए 6ए दृ 3द्धए एक त्रिाभुज बनाते हैं। ∠ ठ।ब् का कोण समद्विभाजक ।क्ए भुजा ठब् को क् पर मिलता है। बिंदु क् के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। हल ध्यान दीजिएः 22 2।ठ त्र;5दृ 3द्ध ;32द्ध ;20द्ध त्र4 ़1़−़− ़4 त्र 3 22 2।ब् त्र;दृ9 दृ 3द्ध ़− ़;3 −0द्ध त्र144 16;6 2द्ध −़़9 त्र 13 ठक्।ठ 3क्योंकि।क्ए ∠ ठ।ब् का कोण समद्विभाजक है इसलिए हम त्र त्र प्राप्त करते हैं।क्ब्।ब् 13 अथार्त् बिंदु क्ए ठब् को 3 रू 13 के अनुपात में विभाजित करता है। इस प्रकार क् के निदेर्शांक 3; 9द्ध −़13;5द्ध 3;6द्ध 13;3द्ध 3; 3द्ध −़ 13 ;2द्ध ⎞⎛ 19 5717 ⎞⎛़ एए त्र एए⎜ ⎟⎜ ⎟हैं।⎝ 313 ़ 313 ़ ⎠⎝ 816 16 ़ 313 ⎠उदाहरण 17 ल्र.तल में एक ऐसा बिंदु ज्ञात कीजिए, जो तीन बिंदुओं । ;2ए 0 3द्ध ठ ;0ए 3ए 2द्ध एवं ब् ;0ए 0ए 1द्ध से समदूरस्थ है। हल क्योंकिल्र तल में स्िथत किसी भी बिंदु काग.निदेर्शांक शून्य है। इसलिए च् ;0ए लए ्रद्धए ल्र.तल में एक बिंदु हैं और च्। त्र च्ठ त्र च्ब् च्। त्र च्ठ ⇒ ;0 दृ 2द्ध2 ़ ;ल दृ 0द्ध2 ़ ;्र दृ 3द्ध2 त्र ;0 दृ 0द्ध2 ़ ;ल दृ 3द्ध2 ़ ;्र दृ 2द्ध2 अथार्त् ्र दृ 3ल त्र 0 ;1द्ध एवं च्ठ त्र च्ब् ⇒ ल2 ़ 9 दृ 6ल ़ ्र2 ़ 4 दृ 4्र त्र ल2 ़ ्र2 ़ 1 दृ 2्र अथार्त् 3ल ़ ्र त्र 6 ;2द्ध समीकरण ;1द्ध तथा ;2द्ध को हल करने पर हम ल त्र 1ए ्र त्र 3 प्राप्त करते हैं। इसलिए बिंदु च् के निदेर्शांक ;0ए 1ए 3द्ध हैं। वस्तुनिष्ठ प्रश्न उदाहरण संख्या 18 से 23 तक प्रत्येक के लिए दिए हुए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिएः ;डण्ब्ण्फद्ध उदाहरण 18 बिंदु च् ;3ए 4ए 5द्ध सेल.अक्ष पर खींचे गए लंब की लम्बाइर् हैः ;।द्ध 10 ;ठद्ध 34 ;ब्द्ध 113 ;क्द्ध52 हल मान लीजिए बिंदु च् से ल.अक्ष पर खींचे गए लम्ब का पाद बिंदु स है इसलिए इसके ग एवं ्र निदेर्शांक शून्य हैं अथार्त् ;0ए 4ए 0द्ध इसलिए बिंदुओं;0ए 4ए 0द्ध एवं;3ए 4ए 5द्ध के बीच की दूरी अथार्त् 34 है। उदाहरण 19 बिंदु च् ;6ए 7ए 8द्ध की गल.तल से लम्बवत् दूरी हैः ;।द्ध 8 ;ठद्ध7 ;ब्द्ध6 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं है। हल मान लीजिए बिंदु च्;6ए 7ए 8द्ध से गल तल पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु स् है और इस पाद बिंदु स् की च् से दूरी, च् के र् निदेर्शांक के समान है। अथार्त् 8 इर्काइर् है। उदाहरण20 बिंदु च् ;6ए 7ए 8द्ध से गल.तल पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु स् है। बिंदु स् के निदेर्शांक हैः ;।द्ध ;6ए 0ए 0द्ध ;ठद्ध ;6ए 7ए 0द्ध ;ब्द्ध ;6ए 0ए 8द्ध ;क्द्ध इनमें से कोइर् हल क्योंकि बिंदुस्ए बिंदु च् से गल.तल पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु है और गल.तल में ्र निदेर्शांक शून्य है। इसलिए स् के निदेर्शांक ;6, 7, 0द्ध हैं। उदाहरण21 किसी बिंदु ;6, 7, 8द्ध से ग.अक्ष पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु स् है। स् के निदेर्शांक हैंः ;।द्ध ;6ए 0ए 0द्ध ;ठद्ध ;0ए 7ए 0द्ध ;ब्द्ध ;0ए 0ए 8द्ध ;क्द्ध कोइर् नहीं हल क्योंकि बिंदुस्ए बिंदुओं से च् सेग.अक्ष पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु है और ल एवं्र.निदेर्शांक शून्य हैं। अतः स् के निदेर्शांक ;6ए 0ए 0द्ध हैं। उदाहरण 22 एक बिंदु, जिसके लिए ल त्र 0ए ्र त्र 0ए का बिंदु पथ हैः ;।द्ध ग.अक्ष का समीकरण ;ठद्ध ल.अक्ष का समीकरण;ब्द्ध ्र.अक्ष का समीकरण ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं हल जिस बिंदु के लिए ल त्र 0ए ्र त्र 0 उसका बिंदुपथग.अक्ष है क्योंकिग.अक्ष पर ल एवं ्र दोनों शून्य होते हैं। उदाहरण 23 बिंदु स्ए बिंदु च् ;3ए 4ए 5द्ध से ग्र तल पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु है। बिंदु स् के निदेर्शांक हैंः ;।द्ध ;3ए 0ए 0द्ध ;ठद्ध ;0ए 4ए 5द्ध ;ब्द्ध ;3ए 0ए 5द्ध ;क्द्ध ;3ए 4ए 0द्ध हल क्योंकिस्ए बिंदु च् ;3ए 4ए 5द्ध से ग्र.तल पर डालें गए लंब का पाद बिंदु है और ग्र तल में स्िथत सभी बिंदुओं का ल निदेर्शांक शून्य है। इसलिए लंब के पाद बिंदु के निदेर्शांक ;3, 0, 5द्ध है। उदाहरण संख्या 24 से 28 में रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएः उदाहरण 24 एक रेखा गल तल के समांतर है, यदि रेखा पर स्िथत सभी बिंदुओं के समान है। हल गल तल के समांतर रेखा पर सभी बिंदुओं के ्र निदेर्शांक समान होते हैं। उदाहरण 25 समीकरण ग त्र इ ऋऋऋऋऋऋ तल के समांतर एक तल को निरूपित करता है। हल क्योंकि ग त्र 0ए ल्र तल को निरूपित करता है इसलिए ग त्र इए ल्र तल के समांतर मूलबिंदु से इ इकाइर् की दूरी पर एक अन्य तल को निरूपित करता है। उदाहरण 26 ल.अक्ष से बिंदु च् ;3ए 5ए 6द्ध की लंबवत् दूरी है। हल क्योंकि डए बिंदु च् सेल.अक्ष पर डाले गए लंब का पाद बिंदु है। इसलिए इसके ग एवं्र निदेर्शांक शून्य हैं। ड के निदेर्शांक ;0ए 5ए 0द्ध हैं। च् कील.अक्ष से लंबवत दूरी उदाहरण 27 स्ए बिंदु च् ;3ए 4ए 5द्ध से ्रग तल पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु है। स् के निदेर्शांक हैं। हल क्योंकि,स् बिंदु च् से्रग.तल पर बनाए गए लंब का पाद बिंदु है और ्रग तल में प्रत्येक बिंदु का ल निदेर्शांक शून्य है। अतः स् के निदेर्शांक ;3, 0, 5द्ध हैं। उदाहरण28 बिंदुच् ;ंए इए बद्ध से ्र.अक्ष पर बनाए गए लंब के पाद बिंदु की च् से दूरीहै। हल च् ;ंए इए बद्ध से ्र.अक्ष पर बनाए गए लंब के निदेर्शांक ;0ए 0ए ब द्ध इसलिए बिंदु च् ;ंए इए बद्ध एवं बिंदु ;0ए 0ए बद्ध के बीच की दूरी बताइए कि उदाहरण संख्या 29 से 36 तक के कथन सत्य है अथवा असत्य है - उदाहरण 29 ल.अक्ष एवं ्र.अक्ष संयुक्त रूप से एक तल का निधार्रण करते हैं जिसे ल्र तल कहा जाता है। उदाहरण सत्य उदारहण 30 बिंदु ;4ए 5ए दृ 6द्ध छठे अष्टांशक में स्थत हैं। हल असत्य, बिंदु ;4ए 5ए दृ 6द्ध 5वें अष्टांशक में है। उदाहरण 31 ग.अक्ष, दो तलों गल.तल एवं ग्र तल का प्रतिच्छेदन है। हल सत्य उदाहरण 32 तीन परस्पर लंब तल अंतरिक्ष को आठ अष्टांशक में विभाजित करते हैं। हल सत्य उदाहरण 33 तल का समीकरण ्र त्र 6 एक ऐसे तल को निरूपित करता है जो गल.तल के समांतर है और जिसका ्र अंतःखंड 6 इकाइर् है। हल सत्य उदाहरण 34 तल का समीकरणग त्र 0ए ल्र.को निरूपित करता है। हल सत्य उदाहरण 35 ग.अक्ष का बिंदु, जिसका ग.निदेर्शांक ग0 है, को ;ग0ए 0ए 0द्ध के रूप में लिखा जाता है। हल सत्य उदाहरण 36 ग त्र ग0 ए ल्र.तल के समांतर एक तल को निरूपित करता है। हल सत्य उदाहरण् 37 स्तम्भ ब्1 के अन्तगर्त दिए प्रश्नों में से प्रत्येक को, स्तम्भब्2 के अन्तगर्त दिए गए सहीउत्तर से मिलान कीजिए। स्तम्भ ब्1 स्तम्भ ब्2 ;ंद्ध यदि एक त्रिाभुज का केन्द्रक मूल ;पद्ध समांतर चतुभुर्ज बिंदु पर है और दो शीषर् ;3ए दृ 5ए 7द्ध एवं ;दृ1ए 7ए दृ 6द्ध हैं, तो तीसरा शीषर् हैः ;इद्ध यदि किसी त्रिाभुज की भुजाओं के मध्य ;पपद्ध ;दृ2ए दृ2ए दृ1द्ध बिंदु ;1ए 2ए दृ 3द्धए ;3ए 0ए 1द्ध एवं ;दृ1ए 1ए दृ 4द्ध हैं तो उसका केन्द्रक हैंः ;बद्ध बिंदु ;3ए दृ 1ए दृ 1द्धए ;5ए दृ 4ए 0द्धए ;पपपद्ध समद्विबाहु समकोण त्रिाभुज ;2ए 3ए दृ 2द्ध एवं ;0ए 6ए दृ 3द्ध किसके शीषर् हैं? ;कद्ध बिंदु।;1ए दृ1ए 3द्धए ठ ;2ए दृ 4ए 5द्ध एवं ;पअद्ध ;1ए 1ए दृ 2द्ध ब् ;5ए दृ 13ए 11द्ध हैंः ;मद्ध बिंदु। ;2ए 4ए 3द्धए ठ ;4ए 1ए 9द्ध एवं ;अद्ध संरेख ब् ;10ए दृ 1ए 6द्ध किसके शीषर् हैं? हल ;ंद्ध मान लीजिए । ;3ए दृ 5ए 7द्धए ठ ;दृ 1ए 7ए दृ 6द्धए ब् ;गए लए ्रद्ध ऐसे त्रिाभुज।ठब् के शीषर् हैं, जिसका केन्द्रक ;0ए0ए0द्ध है। ⎛−़ −़़ 76 2231 ग 57 ल −़ ्र ⎞ ग ़ ल़ ्र ़1इसलिए ;0ए 0ए 0द्ध त्र ⎜ एए ⎟⇒ त्र0ए त्र0ए त्र0ण्⎝ 333 ⎠3 33 अतः ग त्र दृ 2ए ल त्र दृ 2 एवं ्र त्र दृ 1 इसलिए ;ंद्ध ↔ ;पपद्ध ;इद्ध मान लीजिए।ठब् एक त्रिाभुज है और क्म्थ् क्रमशःठब्ए ब्।एवं।ठ के मध्य बिंदु हैं। हम जानते हैं कि त्रिाभुज ।ठब् का केंद्रक = त्रिाभुज क्म्थ् का केंद्रक ⎛1312़− 01 314़़ −़− ⎞ Δ का केन्द्रक ⎜⎟अथार्त् ;1ए 1ए दृ 2द्ध है।⎝ 3ए3ए 3 ⎠अतः;इद्ध ↔ ;पअद्ध 3 2 13दृ1दृ2 ⎞ 5 −3 ⎞⎛़−़ ⎛;बद्ध विकणर्।ब् का मध्य बिंदु ⎜ एए ⎟अथार्त् ⎜ए1ए ⎟है।⎝ 22 2 ⎠⎝22 ⎠50़ 4603−⎞ 5 −3⎛−़ ⎛⎞विकणर् ठक् का मध्य बिंदु ⎜ एए ⎟अथार्त् ⎜ए1ए ⎟है।⎝222 ⎠⎝22 ⎠समांतर चतुभुर्ज के विकणर् एक दूसरे को बराबर भागों में बांटते हैं। इसलिए ;बद्ध ↔ ;पद्ध 2 22;कद्ध ।ठ त्र;2 1द्ध ;41द्ध ;5 3द्ध त्र14− ़−़ ़− 2 22ठब् ;5 −2द्ध ;13 4द्ध ़;11 −5द्ध त्र3त्र ़−़ 14 2 22।ब् ;5 −1द्ध ़− ़ ; 13 1द्ध ़− त्र4त्र ;11 3द्ध 14 अब ।ठ ़ठब् त्र।ब् अतः बिंदु।ए ठए ब् संरेख है। इसलिए ;कद्ध ↔ ;अद्ध ;मद्ध ।ठ त्र ठब् त्र अब।ठ2 ़ठब्2 त्र ।ब्2 इस प्रकार ।ठब् एक समद्विबाहु समकोण त्रिाभुज है। अतः ;मद्ध ↔ ;पपपद्ध लघु उत्तरीय प्रश्न 1ण् निम्नलिख्िात बिंदुओं का स्थान निधार्रित ;स्वबंजमद्ध कीजिएः ;पद्ध ;1ए दृ 1ए 3द्धए ;पपद्ध ;दृ 1ए 2ए 4द्ध ;पपपद्ध ;दृ 2ए दृ 4ए दृ7द्ध ;पअद्ध ;दृ 4ए 2ए दृ 5द्धण् 2ण् निम्नलिख्िात बिंदुओं में से प्रत्येक के लिए उस अष्टांश ;वबजंदमद्ध का नाम लिख्िाए जिसमें वह बिंदु स्िथत हैः ;पद्ध;1ए 2ए 3द्धए ;पपद्ध ;4ए दृ 2ए 3द्धए ;पपपद्ध ;4ए दृ2ए दृ5द्ध ;पअद्ध ;4ए 2ए दृ5द्ध ;अद्ध;दृ 4ए 2ए 5द्ध ;अपद्ध ;दृ3ए दृ1ए 6द्ध ;अपपद्ध ;2ए दृ 4ए दृ 7द्ध ;अपपपद्ध ;दृ 4ए 2ए दृ 5द्धण् 3ण् एक बिंदु च् से गए ल एवं ्र अक्ष पर बनाए गए लंबों के पाद बिंदु क्रमशः ।ए ठए ब् हैं। निम्नलिख्िात में से प्रत्येक के लिए ।ए ठए ब् के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। ;पद्ध ;3ए 4ए 2द्ध ;पपद्ध ;दृ5ए 3ए 7द्ध ;पपपद्ध ;4ए दृ 3ए दृ 5द्ध 4ण् एक बिंदु च् से गलए ल्र एवं ्रग तल पर बनाए गए लंबों के पाद बिंदु क्रमशः ।ए ठ एवं ब् हैं। निम्नलिख्िात में से प्रत्येक के लिए ।ए ठए ब् के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए जहाँ बिंदु च् हैμ ;पद्ध ;3ए 4ए 5द्ध ;पपद्ध ;दृ5ए 3ए 7द्ध ;पपपद्ध ;4ए दृ 3ए दृ 5द्धण् 5ण् बिंदु, ;2ए 0ए 0द्ध एवं ;दृ3ए 0ए 0द्ध एक दूसरे से कितनी दूरी पर हैं? 6ण् मूल बिंदु से बिंदु ;6ए 6ए 7द्ध तक की दूरी ज्ञात कीजिए। 7ण् दशार्इए कि यदि ग2 ़ ल2 त्र 1ए तो बिंदु;गए लए 1−−ग2 ल2 द्ध मूल बिंदु से 1 इकाइर् की दूरी पर है। 8ण् दशार्इए कि बिंदु । ;1ए दृ 1ए 3द्धए ठ ;2ए दृ 4ए 5द्ध एवं ब्;5ए दृ 13ए 11द्ध संरेख है। 9ण् एक समांतर चतुभुर्ज।ठब्क् के तीन क्रमागत शीषर्। ;6ए दृ 2ए 4द्धए ठ ;2ए 4ए दृ 8द्धए ब् ;दृ2ए 2ए 4द्ध है। चैथे शीषर् के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। ख्संकेतरू समान्तर चतुभुर्ज के विकणा±े के मध्य बिंदु समान होते हैं।, 10ण् दशार्इए कि त्रिाभुज।ठब्ए जिसके शीषर् । ;0ए 4ए 1द्धए ठ ;2ए 3ए दृ 1द्ध एवं ब् ;4ए 5ए 0द्ध हैं, एक समकोण त्रिाभुज है। 11ण् एक ऐसे त्रिाभुज का तीसरा शीषर् ज्ञात कीजिए जिसका केन्द्रक मूल बिंदु है और दो शीषर् ;2ए 4ए 6द्ध एवं ;0ए दृ2ए दृ5द्ध हैं। 12ण् एक त्रिाभुज का केन्द्रक ज्ञात कीजिए यदि उसकी भुजाओं के मध्य बिंदु क् ;1ए 2ए दृ 3द्धए म् ;3ए 0ए 1द्ध एवं थ् ;दृ 1ए 1ए दृ 4द्ध हैं। 13ण् एक त्रिाभुज की भुजाओं के मध्य बिंदु;5ए 7ए 11द्धए ;0ए 8ए 5द्धएवं;2ए 3ए दृ 1द्ध हैं। त्रिाभुज के शीषर् ज्ञात कीजिए। 14ण् एक समांतर चतुभुर्ज।ठब्क् के तीन शीषर् । ;1ए 2ए 3द्धए ठ ;दृ 1ए दृ 2ए दृ 1द्ध एवं ब् ;2ए 3ए 2द्ध हैं। चैथा शीषर् क् ज्ञात कीजिए। 15ण् ऐसे बिंदुओं के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए जो बिंदुओं । ;2ए 1ए दृ 3द्ध तथा ठ ;5ए दृ 8ए 3द्ध को मिलाने वाले रेखा खंड को समत्रिाभाजित करते हैं। 16ण् यदि एक त्रिाभुज।ठब् के शीषर् । ;ंए 1ए 3द्धए ठ ;दृ 2ए इए दृ 5द्ध एवं ब् ;4ए 7ए बद्ध हैं तथा केन्द्रक मूल बिंदु पर है, तो ंए इए ब के मान ज्ञात कीजिए। 17ण् मान लीजिए कि । ;2ए 2ए दृ 3द्धए ठ ;5ए 6ए 9द्ध एवंब् ;2ए 7ए 9द्ध एक त्रिाभुज के शीषर् हैं। कोण । का अंतः समद्विभाजक ठब् को बिंदु क् पर मिलाता है। क् के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। दीघर् उत्तरीय प्रश्न ;स्ण्।ण्द्ध 18ण् दशार्इए कि तीन बिंदु । ;2ए 3ए 4द्धए ठ ;दृ1ए 2ए दृ 3द्ध एवं ब् ;दृ 4ए 1ए दृ 10द्ध संरेख हैं। बिंदु ब् द्वारा ।ठ को विभाजित करने वाला अनुपात ज्ञात कीजिए। 19ण् एक त्रिाभुज की भुजाओं के मध्य बिंदु;1ए 5ए दृ 1द्धए ;0ए 4ए दृ 2द्ध एवं;2ए 3ए 4द्धहैं। त्रिाभुज के शीषर् तथा केन्द्रक ज्ञात कीजिए। 20ण् सि( कीजिए कि बिंदु ;0ए दृ 1ए दृ 7द्धए ;2ए 1ए दृ 9द्ध एवं;6ए 5ए दृ 13द्ध संरेख हैं। प्रथम बिंदु द्वारा अन्य दो बिंदुओं को मिलाने वाले रेखाखंड को विभाजित करने का अनुपात ज्ञात कीजिए। 21ण् दो इकाइर् भुजा वाले एक घन के शीषर् क्या हैं, यदि उसका एक शीषर् मूल बिंदु के संपाती है, और मूल बिंदु से जाने वाली तीन भुजाएं मूलबिंदु से जाने वाली अक्षों की धनात्मक दिशाओें के संपाती हैं। वस्तुनिष्ठीय प्रश्न प्रश्न संख्या 22 से 34 तक प्रत्येक के लिए दिए हुए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए - ;डण्ब्ण्फण्द्ध 22ण् बिंदु च्;3ए 4ए 5द्ध की ल्र.तल से दूरी हैः ;।द्ध 3 इकाइर् ;ठद्ध 4 इकाइर् ;ब्द्ध 5 इकाइर् ;क्द्ध 550 इकाइर् 23ण् बिंदु च् ;3ए 4ए 5द्ध से ल.अक्ष पर बनाए गए पाद लम्ब की लम्बाइर् है। ;।द्ध 41 ;ठद्ध 34 ;ब्द्ध 5 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं। 24ण् बिंदु ;3ए 4ए 5द्ध की मूल बिंदु से दूरी हैः ;।द्ध 50 ;ठद्ध3 ;ब्द्ध4 ;क्द्ध5 25ण् यदि बिंदुओं;ंए 0ए 1द्ध और ;0ए 1ए 2द्ध के बीच की दूरी 27 है, तो ं का मान हैः ;।द्ध 5 ;ठद्ध ± 5 ;ब्द्ध दृ5 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 26ण् ग.अक्ष निम्नलिख्िात में से कौन से दो तलों का प्रतिच्छेन हैः ;।द्ध गल एवं ग्र ;ठद्ध ल्र एवं ्रग ;ब्द्ध गल एवं ल्र ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 27ण् ल.अक्ष का समीकरण हैः ;।द्ध ग त्र 0ए ल त्र 0 ;ठद्ध ल त्र 0ए ्र त्र 0 ;ब्द्ध ्र त्र 0ए ग त्र 0 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 28ण् बिंदु ;दृ2ए दृ3ए दृ4द्ध निम्नलिख्िात में से किस अष्टांशक ;वबजंदजद्ध में स्िथत हैः ;।द्ध प्रथम ;ठद्ध सातवां ;ब्द्ध दूसरा ;क्द्ध आठवां 29ण् एक तल, ल्र तल के समांतर है इसलिए यह लम्ब हैः ;।द्ध ग.अक्ष पर ;ठद्ध ल.अक्ष पर ;ब्द्ध ्र.अक्ष पर ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 30ण् एक बिंदु, जिसके लिएल त्र 0ए ्र त्र 0ए का बिंदुपथ हैः ;।द्ध ग.अक्ष का समीकरण ;ठद्ध ल.अक्ष का समीकरण ;ब्द्ध ्र.अक्ष का समीकरण ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 31ण् एक बिंदु, जिसके लिएग त्र 0ए का बिंदुपथ हैः ;।द्ध गल.तल ;ठद्ध ल्र.तल ;ब्द्ध ्रग.तल ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 32ण् यदि बिंदुओं ;5ए 8ए 10द्ध एवं ;3ए 6ए 8द्ध से, निदेर्शांक तलों के समांतर तल खींचकर एक षट्पफलकीय बनाया जाता है, तो उसके विकणर् की लम्बाइर् हैः ;।द्ध 23 ;ठद्ध32 ;ब्द्ध 2 ;क्द्ध 3 33ण् स्ए बिंदु च् ;3ए 4ए 5द्ध से गल.तल पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु है, बिंदु स् के निदेर्शांक हैंः ;।द्ध ;3ए 0ए 0द्ध ;ठद्ध ;0ए 4ए 5द्ध ;ब्द्ध ;3ए 0ए 5द्ध ;क्द्ध कोइर् नहीं 34ण् किसी बिंदु ;3ए 4ए 5द्ध सेग.अक्ष पर खींचे गए लंब का पाद बिंदु स् हैं। स् के निदेर्शांक हैंः ;।द्ध ;3ए 0ए 0द्ध ;ठद्ध ;0ए 4ए 0द्ध ;ब्द्ध ;0ए 0ए 5द्ध ;क्द्ध कोइर् नहीं प्रश्न संख्या 35 से 49 में रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिए - 35ण् तीन अक्ष व्ग्ए व्ल्ए व्र् बनाते हैं ऋऋऋऋऋऋऋऋ 36ण् तीन तल समकोण्िाक षट्पफलकीय को दशार्ते हैं, जिसमें ऋऋऋऋऋऋऋऋ समकोण्िाक पफल होते हैं। 37ण् किसी बिंदु के निदेर्शांक ऋऋऋऋऋऋऋऋ से क्रमागत अक्षों पर लंबवत् दूरी होती है। 38ण् तीन निदेर्शांक तल अंतरिक्ष को ऋऋऋऋऋऋऋऋ भागों में विभाजित करते हैं। 39ण् यदि कोइर् बिंदु च्ए ल्र तल में स्िथत है, तो ल्र तल में उस बिंदु के निदेर्शांक ऋऋऋऋऋऋऋऋ के रूप में होंगे। 40ण् ल्र तल का समीकरण ऋऋऋऋऋऋऋऋ है। 41ण् यदि बिंदु च्ए ्र.अक्ष पर स्िथत है, तोच् के निदेर्शांक ऋऋऋऋऋऋऋऋ के रूप में होंगे। 42ण् ्र.अक्ष का समीकरण ऋऋऋऋऋऋऋऋ है। 43ण् एक रेखा गल तल के समांतर है, यदि रेखा के सभी बिंदुओं काऋऋऋऋऋऋऋऋ समान है। 44ण् एक रेखा ग.अक्ष के समांतर है यदि रेखा के सभी बिंदुओं का ऋऋऋऋऋऋऋऋ समान है। 45ण् ग त्र ं एक ऐसे तल को निरूपित करता है जो ऋऋऋऋऋऋऋऋ के समांतर है। 46ण् ल्र.तल के समांतर तलऋऋऋऋऋऋऋऋ के लंबवत है। 47ण् एक समकोण्िाक कमरे की विमाएं 10, 13 एवं 8 इकाइर् है। उस कमरे में सीधे पैफलाइर् जा सकने वाली रस्सी की अिाकतम लम्बाइर् ऋऋऋऋऋऋ है। 48ण् यदि बिंदुओं ;ंए 2ए 1द्ध एवं ;1ए दृ1ए 1द्ध द्धके बीच की दूरी 5 है, तो ं का मान ऋऋऋऋऋऋऋ है। 49ण् यदि एक त्रिाभुज की भुजाओं ।ठए ठब्ए ब्।के मध्य बिंदु क्रमशः क् ;1ए 2ए दृ 3द्धए म् ;3ए 0ए 1द्ध एवं थ् ;दृ1ए 1ए दृ 4द्ध हैं, तो त्रिाभुज ।ठब् का केन्द्रक ऋऋऋऋऋऋऋऋ है। 50ण् स्तम्भ ब्1 के अन्तगर्त दिए हुए प्रत्येक प्रश्न का स्तम्भ ब्2 के अन्तगर्त दिए गए सही उत्तर के साथ मिलान कीजिए। स्तम्भ ब्1 ;ंद्ध गल.तल में ;इद्ध बिंदु ;2ए 3ए4द्ध स्िथत है। ;बद्ध ऐसे बिंदु जिनका ग निदेर्शांक शून्य हैं उनका बिंदुपथ हैः ;कद्ध एक रेखा ग.अक्ष के समांतर है यदि और केवल यदि ;मद्ध यदि ग त्र 0ए ल त्र 0 को संयुक्त रूप से लेने पर निरूपित करते हैं ;द्धि ्र त्र ब जिस तल को निरूपित करता है वह हैः ;हद्ध तल ग त्र ंए और तल ल त्र इ जिस रेखा को निरूपित करते हैं वह हैः ;ीद्ध एक बिंदु के निदेर्शांक मूल बिंदु से लंब के पाद बिंदु तक की दूरी है ;पद्ध अंतरिक्ष में एक गेंद जिससे घ्िारा हुआ ठोस क्षेत्रा है वह है ;रद्ध तल में वृत्त से घ्िारा हुआ क्षेत्रा कहलाता है। स्तम्भ ब्2 ;पद्ध प्रथम अष्टांशक ;पपद्ध ल्र.तल ;पपपद्ध ्र.निदेर्शांक शून्य है ;पअद्ध ्र.अक्ष ;अद्ध गल.तल के समांतर तल ;अपद्ध यदि रेखा के सभी बिंदुओं के ल एवं ्र निदेर्शांक समान है। ;अपपद्ध बिंदु से क्रमागत अक्षों पर ;अपपपद्ध ्र .अक्ष के समांतर ;पगद्ध चिका ;डिस्कद्ध ;गद्ध गोला

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