11ण्1 समग्र अवलोकन ;व्अमतअपमूद्ध 11ण्1ण्1 शंवुफ के परिच्छेद ;ैमबजपवदे व िं बवदमद्ध मान लीजिए कि स एक स्िथर उध्वार्धर रेखा है और उ एक दूसरी रेखा है जो इस रेखा को स्िथर बिन्दु ट पर प्रतिच्छेद करती है और इसके साथ एक कोण α बनाती है। ;आकृति 11ण्1द्धण् आकृति 11ण्1 अब हम रेखाउ को रेखास के परितः इस प्रकार घुमाते हैं कि उ की सभी स्िथतियों मेंंंं कोण α अचर रहता है। इस प्रकार उत्पन्न पृष्ठ एक लंब वृतीय खोखला द्विशंवुफ है जिसे हम अब से शंवुफ ही कहेंगेऔर ये दोनों दिशाओं मेंंं अनिश्िचत दूरी तक बढ़ रहा है। ;आकृति 11.2द्ध बिन्दु ट को शीषर् कहते हैं और स्िथर रेखा स शंवुफ का अक्ष कहलाती है। घूमने वाली रेखा उ शंवुफ की जनक कहलाती है। शीषर् शंवुफ को दो भागों मेंं विभक्त करता है जिन्हें नापे ;छंचचमेद्धकहा जाता है। यदि हम एक तल और शंवुफ का परिच्छेद लेते हैं तो इस प्रकार प्राप्त परिच्छेद एक, शंवुफ परिच्छेद कहलाता है। अतः शंवुफ परिच्छेद ऐसे वक्र हैं जिन्हें एक लम्बवृतीय शंवुफ और एक तल के परिच्छेदन से प्राप्त किया जाता है। शंवुफ के उध्वार्धर अक्ष और परिच्छेदी तल के बीच बने कोण और परिच्छेदी तल की स्िथतियों के अनुसार विभ्िान्न प्रकार के शंवुफ प्राप्त होते हैं। मान लीजिए परिच्छेदी तल, शंवुफ के उध्वार्धर अक्ष के साथ β कोण बनाता है ;आकृति 11.3द्ध तल का शंवुफ के साथ परिच्छेदन या तो शंवुफ के शीषर्पर हो सकता है या नापे के दूसरे किसी भाग पर ऊपर या नीचे हो सकता है। तब तल, शंवुफ के नापे ;शीषर् के अतिरिक्तद्ध को काटता है तो हमेंं निम्नांकित स्िथतियाँ प्राप्त होती हैं - ;ंद्ध जब β त्र 90वए तो परिच्छेद एक वृत होता है। ;इद्ध जब α ढ β ढ 90वए तो परिच्छेद एक दीघर्वृत्त होता है। ;बद्ध जब β त्र α तो परिच्छेदा एक परवलय होता है। ¹उपरोक्त तीनों परिस्िथतियों मेंं तल शंवुफ के एक नापे को पूणर्तः आर - पार काटता है।ह् ;कद्ध जब0 ≤β ढ αय तो तल शंवुफ के दोनों नेप्स को काटता है और परिच्छेद वक्र अतिपरवलय होता है। वास्तव मेंं, ये वक्र, आजकल बाहरी अंतरिक्ष के अन्वेषण और परमाणु कणों के व्यवहार की खोज के लिए महत्वपूणर् साधन है। हम शंवुफ परिच्छेदों को तलीय वक्रों के रूप मेंं लेेते हैं। इस उद्देश्य के लिए अन्य समान परिभाषा का उपयोग सुविधाजनक है जो केवल उस तल से सम्बन्ध जोड़ती है जिसमें वक्र स्िथत हैं और इस तल मेंं विश्िाष्ट बिन्दुओं एवं रेखाओं, जिन्हें नाभ्िायां एवं नियंताएं कहते हैं, के साथ सम्बन्ध जोड़तीहै। इस उपगमन के अनुसार परवलय, दीघर्वृत्त एवं अतिपरवलय को तल के एक निश्िचत बिन्दु ;जिसे नाभ्िा कहा जाता हैद्ध और एक निश्िचत रेखा जिसे नियता कहा जाता हैद्ध की सहायता से परिभाष्िात किया जाता है। यदि, ै नाभ्िा औरस नियता हैं, तो तल के ऐसे सभी बिन्दुओं का समुच्चय जिनकी बिन्दु ै से दूरी, रेखा स से दूरी के साथ एक अचर अनुपात ;मद्ध धारण करती है, शंवुफ परिच्छेद कहलाता है। अचर अनुपात ;मद्ध को उत्वेंफद्रता कहते हैं।दीघर्वृत्त के विश्िाष्ट स्िथति के रूप मेंं हमेंं वृत्त प्राप्त होता है जिसके लिए ;मद्ध का मान शून्य होता है और इसलिए इसका अध्ययन हम विभ्िान्न वििा से करते हैं। 11ण्1ण्2 वृत्त ;ब्पतबसमद्धरू वृत्त, तल के उन सभी बिन्दुओं का समुच्चय होता हैं जो तल के एक स्िथर बिंदु से एक निश्िचत दूरीपर होते हैं। स्िथर बिन्दु को वृत्त का वेंफद्र कहते हैं और वृत्त पर किसी भी बिंदु की वेंफद्र से दूरी वृत्त की त्रिाज्या कहलाती है। केंद्र;ीए ाद्ध तथा त्रिाज्या त के वृत्त का समीकरण ;ग दृ ीद्ध2 ़ ;ल दृ ाद्ध2 त्र त2 है। वृत्त का व्यापक समीकरण ग2 ़ ल2 ़ 2हग ़ 2लि ़ ब त्र 0ए जहाँ हए िऔर ब अचर हैं। ;ंद्ध इस वृत्त का वेंफद्र ;दृ हए दृ िद्ध है। 22;इद्ध इस वृत्त की त्रिाज्या ह ़ ि− ब है। मूल बिन्दु से गुजरने वाले वृत्त का व्यापक समीकरण ग2 ़ ल2 ़ 2हग ़ 2लि त्र 0 है। दो घात वाला व्यापक समीकरण अथार्त्ंग2 ़ 2ीगल ़ इल2 ़ 2हग ़ 2लि ़ ब त्र 0 वृत्त को निरूपित करता है यदि;पद्ध ग2 एवंल2 के गुणांक एक समान हैं अथार्त् ं त्र इ ≠ 0 एवं;पपद्ध गल का गुणांक शून्य हैं अथार्त् ी त्र 0ण् वृत्त ग2 ़ ल2 त्र त2 के प्राचलिक समीकरणग त्र त बवेθए ल त्र त ेपदθ हैं, जहाँ θ एक प्राचल है और वृत्त ;ग दृ ीद्ध2 ़ ;ल दृ ाद्ध2 त्र त2 के प्राचलिक समीकरण ग दृ ी त्र त बवेθए ल दृ ा त्र त ेपदθ अथवा ग त्र ी ़ त बवेθए ल त्र ा ़ त ेपदθ हैं। आकृति 11ण्5 नोटः वृत्त के व्यापक समीकरण मेंं तीन अचर हैं जो इस बात को दशार्ते हैंकिवृत्त को अद्वितीय रूप मेंं ज्ञात करने के लिए कम से कम तीन प्रतिबंधों की आवश्यकता होती है। 11ण्1ण्3 परवलय ;च्ंतंइवसंद्ध परवलय, तल के उन सभी बिन्दुओं च् का समुच्चय है जो तल के एक निश्िचत बिन्दु थ् एवं एक निश्िचत सरल रेखा फ से समान दूरी पर है। निश्िचत बिन्दु थ् को परवलय की नाभ्िा कहते हैं और निश्िचत रेखा को परवलय की नियता ;कपतमबजतपगद्ध कहा जाता है। आकृति 11ण्6 परवलय का प्रमाण्िाक समीकरण ;ैजंदकंतक मुनंजपवदे व िचंतंइवसंद्ध आकृति 11.7;ंद्ध से ;कद्ध तक परवलय के चार सम्भावित रूपों को दशार्या गया है। आकृति 11ण्7 नाभ्िालंब जीवा ;स्ंजने तमबजनउद्ध परवलय की नाभ्िा से जाने वाली और परवलय के अक्ष के लंबवतरेखाखंड जिसके अंत्य बिंदु परवलय पर हों, को परवलय की नाभ्िालंब जीवा कहते हैं। ;आकृति 11.17द्ध परवलय से सम्बन्िधत मुख्य तथ्य परवलय का रूप ल2 त्र 4ंग ल2 त्र दृ 4ंग ग2 त्र 4ंल ग2 त्र दृ 4ंल अक्ष ल त्र 0 ल त्र 0 ग त्र 0 ग त्र 0 नियता ग त्र दृ ं ग त्र ं ल त्र दृ ं ल त्र ं शीषर् ;0ए 0द्ध ;0ए 0द्ध ;0ए 0द्ध ;0ए 0द्ध नाभ्िा ;ंए 0द्ध ;दृ ंए 0द्ध ;0ए ंद्ध ;0ए दृ ंद्ध नाभ्िालंब जीवा कीलम्बाइर् 4ं 4ं 4ं 4ं नाभ्िालंब जीवा कासमीकरण ग त्र ं ग त्र दृ ं ल त्र ं ल त्र दृ ं बिन्दु की नाभीय दूरी ;थ्वबंस कपेजंदबम व िं चवपदजद्ध मान लीजिए कि परवलय का समीकरण ल2 त्र 4ंग है और च्;गए लद्ध इस पर कोइर् बिन्दु है। बिन्दु च्;गए लद्ध एवं नाभ्िा ;ंए 0द्ध के बीच की दूरी बिन्दु ;च्द्ध की नाभीय दूरी कहलाती है। त्रद्य ग ़ ं द्य 11ण्1ण्4 दीघर्वृत्त ;म्ससपचेमद्ध एक दीघर्वृत्त तल के उन बिन्दुओं का समुच्चय है, जिसका तल मेंं दो स्िथर बिन्दुओं से दूरियों कायोग अचर होता है। विकल्पतः दीघर्वृत्त तल के उन सभी बिन्दुओं का समुच्चय है जिनकी तल केकिसी स्िथर बिंदु से दूरी, तल की किसी स्िथर रेखा से दूरी के साथ, एक अचर अनुपात ;ढ 1द्ध धारणकरती है। स्िथर बिंदु को नाभ्िा एवं स्िथर रेखा को नियता, कहते हैं अचर अनुपात ;म ढ 1द्ध दीघर्वृत्त की उत्वेंफद्रता कहलाता है। दीघर्वृत्त के दो मानक समीकरण इस प्रकार हैंः 22 22गल गल;पद्ध ़त्र 1 और ;पपद्ध ़त्र 1ए22 22ंइ इं दोनों ही समीकरणों मेंं ं झ इ एवंइ2त्र ं2;1 दृ म2द्धए म ढ 1 ;पद्ध मेंं दीघर् अक्ष, ग.अक्ष के अनुदिश है और लघु - अक्ष, ल.अक्ष के अनुदिश है।;पपद्धमेंं दीघर् अक्ष, ल.अक्ष के अनुदिश है एवं लघु - अक्ष, ग.अक्ष के अनुदिश है। आकृति 11ण्8 ;ंद्ध और ;इद्ध दीघर् वृत्त से सम्बन्िधत मुख्य तथ्य आवृफति 11ण्8 दीघर्वृत्त का रूप 2 2 2 2 1ग ल ं इ ़ त्र 2 2 2 2 1ग ल इ ं ़ त्र ं झ इ ं झ इ दीघर् अक्ष का समीकरण ल त्र 0 ग त्र 0 दीघर् अक्ष की लम्बाइर् 2ं 2ं लघु अक्ष का समीकरण ग त्र 0 ल त्र 0 लघु अक्ष की लम्बाइर् 2इ 2इ नियताएं ग त्र ± ं म ल त्र ± ं म नाभ्िालंब जीवा का समीकरण ग त्र ± ंम ल त्र ± ंम नाभ्िालंब जीवा की लम्बाइर् 2इ2 ं 2इ2 ं वेंफद्र ;0ए 0द्ध ;0ए 0द्ध नाभीय दूरी ग2 ल2 दीघर्वृत्त ं2 ़ इ2 त्र 1के किसी बिन्दु च्;गए लद्ध की नाभीय दूरी, नजदीक वाली नाभ्िा से ं दृ म द्य गद्य है और दूर वाली नाभ्िा से ं ़ म द्य ग द्य है। दीघवृत्त पर स्िथत किसी बिंदु की नाभीय दूरीयों का योग अचर एवं दीघर् अक्ष की लंबाइर् के समान होता है। 11ण्1ण्5 अतिपरवलय ;भ्लचमतइवसंद्ध एक अतिपरवलय, तल के उन सभी बिन्दुओं का समुच्चय है जिनकी तल मेंं दो स्िथर बिन्दुओं से दूरीका अंतर अचर होता है। विकल्पतः अतिपरवलय तल के उन सभी बिन्दुओं का समुच्चय है जिनकीतल के किसी स्िथर बिन्दु से दूरी, तल की किसी स्िथर रेखा से दूरी के साथ, एक अचर अनुपात; झ 1द्ध बनती है। स्िथर बिंदु को नाभ्िा, स्िथर रेखा को नियता एवं स्िथर अनुपात ;म झ 1द्ध को उत्वेंफद्रता कहते हैं। अतिपरवलय के दो मानक रूप हैं, 22 22गल लग;पद्ध −त्र 1 एवं ;पपद्ध −त्र 122 22ंइ ंइ यहाँ इ2 त्र ं2 ;म2 दृ 1द्धए म झ 1ण् अतिपरवलय ;पद्ध का अनुप्रस्थ अक्ष, ग.अक्ष के अनुदिश है एवं संयुग्मी अक्ष, ल.अक्ष के अनुदिश है। जबकि अतिपरवलय ;पपद्ध का अनुप्रस्थ अक्ष, ल.अक्ष के अनुदिश है एवं संयुग्मी अक्ष, ग.अक्ष के अनुदिश है। आकृति 11ण्9 अतिपरवलय से सम्बन्िधत मुख्य तथ्य अतिपरवलय का रूप 2 2 2 2 1ग ल ं इ − त्र 2 2 2 2 1ल ग ं इ − त्र अनुप्रस्थ अक्ष का समीकरण ल त्र 0 ग त्र 0 संयुग्मी अक्ष का समीकरण ग त्र 0 ल त्र 0 अनुप्रस्थ अक्ष की लम्बाइर् 2ं 2ं नाभ्िायां ;± ंमए 0द्ध ;0ए ± ंमद्ध नाभ्िालंब जीवा का समीकरण ग त्र ± ंम ल त्र ± ंम नाभ्िालंब जीवा की लम्बाइर् 22इ ं 22इ ं केंद्र ;0ए 0द्ध ;0ए 0द्ध शंवुफ परिच्छेद 193 नाभीय दूरी ग2 ल2 अतिपरवलय −त्र1 के किसी बिन्दु ;गए लद्ध की नाभीय दूरी, नजदीक वाली नाभ्िा से म द्य ग द्य दृ ं ं2 इ2 है और दूरी वाली नाभ्िा से म द्य ग द्य ़ ं है। अतिपरवलय पर स्िथत किसी बिन्दु की नाभीय दूरियों का अन्तर अचर एवं अनुप्रस्थ अक्ष की लम्बाइर् के समान होता है। शांकवों के प्राचलिक समीकरण ;च्ंतंउमजतपब मुनंजपवद व िबवदपबेद्ध शांकव प्राचलिक समीकरण ;पद्ध परवलय रू ल2 त्र 4ंग ग त्र ंज2ए ल त्र 2ंजय दृ ∞ ढ ज ढ ∞ ग2 ल2 ;पपद्ध दीघर्वृत्त रू ं2 ़ इ2 त्र1 ग त्र ं बवेθए ल त्र इ ेपदθय 0 ≤ θ≤ 2π 22 ;पपपद्ध अतिपरवलय रू ग −ल त्र1 ग त्र ं ेमबθए ल त्र इ जंदθए जहाँं2 इ2 π ππ 3π−ढθढ य ढθढ 222 2 11ण्2 हल किए हुए उदाहरण लघु उत्तरीय उदाहरण उदाहरण 1 वृत्त ग2 ़ ल2 दृ 2ग ़ 4ल त्र 8 की त्रिाज्या एवं वेंफद्र ज्ञात कीजिए। हल दिए हुए समीकरण को;ग2 दृ 2गद्ध ़ ; ल2 ़ 4लद्ध त्र 8 के रूप मेंं लिखा जा सकता है। पूणर् वगर् बनाने पर हम ;ग2 दृ 2ग ़ 1द्ध ़ ; ल2 ़ 4ल ़ 4द्ध त्र 8 ़ 1 ़ 4 अथवा ;ग दृ 1द्ध2 ़ ;ल ़ 2द्ध2 त्र 13ए प्राप्त करते हैं। वृत्त के मानक समीकरण के साथ इसकी तुलना करने परहम देखते हैं कि वृत्त का वेंफद्र ;1, μ2द्ध एवं त्रिाज्या 13 है। उदाहरण 2 यदि ग2 त्र दृ 8ल किसी परवलय का समीकरण है, तो नाभ्िा के निदेर्शांक, नियता कासमीकरण और नाभ्िालंब जीवा की लम्बाइर् ज्ञात कीजिए। हल दिया हुआ समीकरणग2 त्र दृ 4ंल के रूप का है जिसमेंं ं धनात्मक है। इसलिए परवलय की नाभ्िा )णात्मक ल.अक्ष पर है और यह परवलय नीचे की तरपफ खुलता है। दिए हुए समीकरण को, मानक रूप से तुलना करने पर हमं त्र 2 प्राप्त करते हैं। इसलिए नाभ्िा के निदेर्शांक ;0ए दृ2द्ध हैं। नियता का समीकरणल त्र 2 है एवं नाभ्िालंब जीवा की लम्बाइर् 4ं अथार्त् 8 है। उदाहरण 3 यदि एक दीघर्वृत्त का समीकरण 9ग2 ़ 25ल2 त्र 225ए है, तो दीघर् अक्ष, लघु अक्ष, उत्वेंफद्रता, नाभ्िायाँ एवं शीषर् ज्ञात कीजिए। हल 225 से भाग करने पर दिए हुए समीकरण को मानक रूप मेंं निम्नलिख्िात प्रकार लिख सकते हैंः ग2 ल2 ़ त्र125 9 इससे हमं त्र 5 एवं इ त्र 3 प्राप्त करते हैं। अतः9 त्र 25;1 दृ म2द्धए इसलिएम त्र 4 क्योंकि ग2 का हर बड़ा5 है इसलिए दीघर् अक्ष,ग.अक्ष के अनुदिश है एवं लघु - अक्ष, ल.अक्ष के अनुदिश है। नाभ्िायाँ ;4, 0द्ध एवं ;μ4, 0द्ध हैं। शीषर् ;5, 0द्ध एवं ;μ5, 0द्ध हैं। उदाहरण 4 एक ऐसे दीघर्वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए जिसकी नाभ्िायाँ;± 5ए 0द्ध पर है और एक नियता का समीकरण ग त्र 36 है।5 ं 36 5 हल हमेंं प्राप्त है, ंम त्र 5ए त्र जिससे हम ं2 त्र 36 वत ं त्र 6 इसलिए म त्र म 56 गलअब इ त्र ं 1 −म2 त्र61 −25 त्र11 अतः दीघर्वृत्त का समीकरण 2 ़ 2 त्र1 है।36 36 11 उदाहरण 5 अतिपरवलय 9ग2 दृ 16ल2 त्र 144 के लिए शीषर्, नाभ्िायां एवं उत्वेंफद्रता ज्ञात कीजिए। ग2 ल2 हल अतिपरवलय का समीकरण दृ त्र1 के रूप मेंं लिखा जा सकता है। इसलिए ं त्र 4ए16 9 925 51इ त्र 3 एवं 9 त्र 16 ;म2 दृ 1द्ध एवं म2 त्र ़त्र इस प्रकार म त्र अतः शीषर्, ;± ंए 0द्ध त्र1616 4 ;± 4ए 0द्ध पर है और नाभ्िायाँ;± ंमए0द्ध त्र ;± 5ए 0द्ध पर हैं। उदाहरण6 एक ऐसे अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए जिसके शीषर्;0ए ± 6द्ध पर हैं एवंम त्र 5ण्3 हल क्योंकि शीषर् ल.अक्ष पर हैं ;मध्य बिन्दु मूल बिन्दु पर हैद्ध इसलिए अतिपरवलय का समीकरण ल2 ग2 −त्र1 है।ं2 इ2 क्योंकि शीषर् ;0ए ± 6द्ध हैं इसलिए ं त्र 6ए इ2 त्र ं2 ;म2 दृ 1द्ध त्र 36 ⎛⎜ 25 −1⎟⎞ त्र 64 अतः अतिपरवलय⎝⎠9 ल2 ग2 का अभीष्ट समीकरण −त्र 1है और नाभ्िायां ;0ए ± ंमद्ध त्र ;0ए ± 10द्ध हैं।36 64 दीघर् उत्तरीय उदाहरण उदारहण 7 बिन्दुओं ;20ए 3द्धए ;19ए 8द्ध और ;2ए दृ9द्ध से गुजरने वाले वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए।वृत्त का वेंफद्र एवं त्रिाज्या भी ज्ञात कीजिए। हल दिए हुए निदेर्शांकों को वृत्त के व्यापक समीकरण ग2 ़ ल2 ़ 2हग ़ 2लि ़ ब त्र 0 मेंं प्रतिस्थापित करने पर हम 40ह ़ 6 ि़ ब त्र दृ409 38ह ़ 16 ि़ ब त्र दृ425 4ह दृ 18 ि़ ब त्र दृ85 प्राप्त करते हैं। इन तीन समीकरणों से हम ह त्र दृ 7ए ित्र दृ 3 एवंब त्र दृ111 प्राप्त करते हैं। अतः वृत्त का समीकरण ग2 ़ ल2 दृ 14ग दृ 6ल दृ 111त्र 0 अथवा ;ग दृ 7द्ध2 ़ ;ल दृ 3द्ध2 त्र132 है। इसलिए वृत्त का वेंफद्र ;7, 3द्ध एवं त्रिाज्या 13 है। उदाहरण8 परवलयल2 त्र 4ंग के अन्तगर्त एक समबाहु त्रिाभुज इस प्रकार बनाया जाता है कि त्रिाभुज का एक शीषर्, परवलय के शीषर् पर है। त्रिाभुज की भुजा की लम्बाइर् ज्ञात कीजिए। हल जैसा कि आकृति मेंं दशार्या गया है, समबाहु त्रिाभुज को ।च्फ से निदिर्ष्ट किया गया है जिसकी समान भुजाओं की लम्बाइर्स है ;मान लीजिएद्ध यहाँ ।च् त्र स इसलिए ।त् त्र स बवे30° 3 त्र स 2 साथ ही च्त् त्र स ेपद 30° त्र स ण्2 ⎞अतः ⎜⎛ स 3ए स ⎟ ए परवलय ल2 त्र 4ंग पर स्िथत बिन्दु च् के निदेर्शांक है।⎝⎠ आकृति 11ण्10 22 196 प्रश्न प्रद£शका 2 ⎛ स 3 ⎞ इसलिए स त्र4ं ⎜ ⎟ 3⎠ ⇒ स त्र 8 ं⎝42 इस प्रकार, परवलय ल2 त्र 4ंग के अंतगर्त बनाइर् गइर् समबाहु त्रिाभुज की भुजा की अभीष्ट लम्बाइर् 8 ं है। उदारहण 9 एक ऐसे दीघर्वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए जो बिन्दु ;दृ3ए 1द्ध से जाता है एवं उसकी उत्वेंफद्रता 2 है। दीघर् अक्ष ग.अक्ष पर है और वेंफद्र मूल बिन्दु पर है।5 ग2 ल2 हल मान लीजिए कि बिन्दु ;दृ3ए 1द्ध से गुजरने वाले दीघर्वृत्त का समीकरणं2 ़ इ2 त्र1 है। इसलिए, 92 ़ 12 त्र1ण् ंइ अथवा 9इ2 ़ ं2 त्र ं2 इ2 अथवा 9ं2 ;12 दृ म2द्ध ़ ं2 त्र ं2 ं2 ;1 दृ म2द्ध ;न्ेपदह इ2 त्र ं2 ;1 दृ म2द्ध 32अथवा ं2 त्र 3 32 ⎛ 2⎞ 32 पिफर से इ2 त्र ं2 ;1 दृ म2द्ध त्र ⎜1 − ⎟त्र ⎝⎠3 55 अतः दीघर्वृत्त का अभीष्ट समीकरण ग2 ल2 ़ त्र132 32 35 अथवा 3ग2 ़ 5ल2 त्र 32ण् उदाहरण10 एक ऐसे अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए जिसके शीषर्;± 6ए 0द्ध पर है और किसी एक नियता का समीकरण ग त्र 4 है। हल जैसा कि, शीषर् बिन्दु ग.अक्ष पर हैं और उनका मध्य बिन्दु मूल बिन्दु है, इसलिए अतिपरवलय ग2 ल2 का समीकरण ं2 − इ2 त्र1 के रूप का होना चाहिए। ंयहाँ इ2 त्र ं2 ;म2 दृ 1द्ध शीषर् ;± ंए 0द्ध हैं एवं नियताएं ग त्र ± से प्राप्त होती है।म शंवुफ परिच्छेद 197 ं 3 ⎛ 9 −⎞इस प्रकार ं त्र 6ए त्र 4 इसलिए म त्र जिससे इ2 त्र 36 ⎜ 1⎠⎟ त्र 45 प्राप्त होता है।⎝म24 परिणामतः अतिपरवलय का अभीष्ट समीकरण ग2 − ल2 त्र 1 है।36 45 वस्तुनिष्ठ प्रश्न उदाहरण संख्या 11 से 16 तक प्रत्येक के लिए चार सम्भावित विकल्प हैं, जिनमेंं से एक सही है।दिए गये चार विकल्पों मंे से सही उत्तर का चयन कीजिए उदाहरण 11 मूल बिन्दु से 1 इकाइर् की दूरी पर प्रत्येक निदेर्शांक अक्ष को स्पशर् करने वाले वृत्त का प्रथम चतुथा±श मेंं समीकरण हैः ;।द्ध ग2 ़ ल2 दृ 2ग दृ 2ल ़ 1त्र 0 ;ठद्ध ग2 ़ ल2 दृ 2ग दृ 2ल दृ 1 त्र 0 ;ब्द्ध ग2 ़ ल2 दृ 2ग दृ 2ल त्र 0 ;क्द्ध ग2 ़ ल2 दृ 2ग ़ 2ल दृ 1 त्र 0 हल सही विकल्प ;।द्ध है। क्योंकि दिया हुआ समीकरण ;ग दृ 1द्ध2 ़ ;ल दृ 1द्ध2 त्र 1 के रूप मेंं लिखा जासकता है। यह समीकरण एक ऐसे वृत्त को निरूपित करता है जिसका वेंफद्र ;1, 1द्ध है, एवं त्रिाज्या1 इर्काइर् है। यह वृत्त दोनों अक्षों का मूल बिन्दु से 1 इर्काइर् की दूरी पर स्पशर् करता है। उदाहरण 12 रेखाओं 3ग ़ ल त्र 14 एवं 2ग ़ 5ल त्र 18 के प्रतिच्छेद बिन्दु से जाने वाले उस वृत का समीकरण जिसका वेंफद्र ;1,μ2द्ध है। ;।द्ध ग2 ़ ल2 दृ 2ग ़ 4ल दृ 20 त्र 0 ;ठद्ध ग2 ़ ल2 दृ 2ग दृ 4ल दृ 20 त्र 0 ;ब्द्ध ग2 ़ ल2 ़ 2ग दृ 4ल दृ 20 त्र 0 ;क्द्ध ग2 ़ ल2 ़ 2ग ़ 4ल दृ 20 त्र 0 हल सही विकल्प ;।द्ध है, 3ग ़ ल दृ 14 त्र 0 एवं 2ग ़ 5ल दृ 18 त्र 0 का प्रतिच्छेद बिन्दु ग त्र 4ए ल त्र 2 अथार्त् ;4ए 2द्ध है। इसलिए वृत्त की त्रिाज्या त्र अतः वृत्त का समीकरण ;ग दृ 1द्ध2 ़ ;ल ़ 2द्ध2 त्र25 अथवा ग2 ़ ल2 दृ 2ग ़ 4ल दृ 20 त्र 0 है। उदारहण13 परवलयग2 त्र 12ल के शीषर् को नाभ्िालम्बजीवा के अंत्य बिन्दुओं से मिलाने पर बने त्रिाभुज काक्षेत्रापफल है। ;।द्ध12 वगर् इकाइर् ;ब्द्ध 18 वगर् इकाइर् ;ठद्ध16 वगर् इकाइर् ;क्द्ध 24 वगर् इकाइर् हल सही विकल्प ;ब्द्ध है, आकृति मेंं व्च्फ उस त्रिाभुज को निरूपित करता है जिसका क्षेत्रापफल ज्ञात करना है। 11 आकृति 11ण्11 त्र च्फ × व्थ् त्र ;12 × 3द्ध त्र 18 वगर् इकाइर्22उदाहरण 14 परवलयल2 त्र 6ग के शीषर् को इसके ऐसे बिन्दुओं, जिनका भुज ;ग.निदेर्शांकद्ध 24 है, से मिलाने पर, प्राप्त रेखाओं के समीकरण हैं - ;।द्ध ल ± 2ग त्र 0 ;ठद्ध 2ल ± ग त्र 0 ;ब्द्ध ग ± 2ल त्र 0 ;क्द्ध 2ग ± ल त्र 0 हल सही विकल्प ;ठद्ध है। मान लीजिए परवलय ल2 त्र 6ग पर च् एवंफ दो बिन्दु है जिनके भुज 24 हैं और व् को च् एवं फ से मिलाने पर व्च्ए व्फ दो रेखाएँ हैं। अतः ल2 त्र 6 × 24 त्र 144 अथवा ल त्र ± 12ण् इसलिएच् एवंफ के निदेर्शांक क्रमशः ;24ए 12द्ध एवं;24ए दृ12द्ध हैं। अतः ल त्र± 12 ग ⇒ 2ल त्र± ग अभीष्ट रेखाएं है।24 आकृति 11ण्12 उदारहण 15 एक दीघर् वृत्त का वेंफद्र मूल बिन्दू है एवं दीघर् अक्ष, ग.अक्ष पर है, यह बिन्दुओं;दृ3ए 1द्ध एवं ;2ए दृ2द्ध से जाता है। उस दीघर्वृत्त का समीकरण हैंः ;।द्ध 5ग2 ़ 3ल2 32 ;ठद्ध 3ग2 ़ 5ल2 त्र 32 ;ब्द्ध 5ग2 दृ 3ल2 त्र 32 ;क्द्ध 3ग2 ़ 5ल2 ़ 32 त्र 0 ग2 ल2 हल ;ठद्ध सही विकल्प है। मान लीजिए, दीघर्वृत्त का समीकरण ं2 ़ इ2 त्र 1 है। दिए हुए प्रतिबंधों 91 111के अनुसार, 2 ़ 2 त्र 1 एवं 2 ़ 2 त्र ंइ ंइ 4 32 32इनसे हमेंं ं2 त्र 3 एवं इ2 त्र 5 प्राप्त होता है। दीघर् वृत्त का अभीष्ट समीकरण 3ग2 ़ 5ल2 त्र 32 है। उदारहण 16 एक अतिपरवलय का वेंफद्र मूल बिन्दु पर है एवं इसके अनुप्रस्थ अक्ष जो ग.अक्ष के अनुदिश है, की लम्बाइर् 7 है। यह अतिपरवलय बिन्दु ;5, μ2द्ध से जाता है। अतिपरवलय का समीकरण हैः 4 2196 2 492 51 2;।द्ध ग − ल त्र 1 ;ठद्ध ग − ल त्र 1 49 51 4196 4 251 2;ब्द्ध ग − ल त्र 1 ;क्द्ध इनमेंं से कोइर् नहीं49 196 ग2 ल2 हल सही विकल्प ;ब्द्ध है। मान लीजिए ं2 − इ2 त्र1 अतिपरवलय को निरूपित करता है। दिए हुए प्रतिबंधों के अनुसार अनुप्रस्थ अक्ष की लम्बाइर् अथार्त् 2ं त्र 7 ⇒ ं त्र 7 यह भी दिया हुआ है कि2 बिन्दु ;5, μ2द्ध अतिपरवलय पर स्िथत है। इसलिए हम 4 ;25द्धदृ 42 त्र 1 प्राप्त करते हैं। इससे हमेंं49 इइ2 त्र 196 प्राप्त होता है। अतः अतिपरवलय का समीकरण51 4 ग2 −51 ल2 त्र 1 है।49 196 बताइए उदारहण17 एवं18 मेंं दिए हुए कथन सत्य है अथवा नहीं। उत्तर की पुष्िट कीजिए। उदारहण 17 एक वृत्त पर किसी भी बिंदु के निदेर्शांक;2 ़ 4 बवेθए दृ1 ़ 4 ेपदθद्ध है, जहाँθ प्राचलहै। उस वृत्त का समीकरण ;ग दृ 2द्ध2 ़ ;ल ़ 1द्ध2 त्र 16 है। हल सत्य, दिए हुए प्रतिबंधों से हम ग त्र 2 ़ 4 बवेθ ⇒ ;ग दृ 2द्ध त्र 4 बवेθ अथवा ल त्र दृ1 ़ 4 ेपदθ ⇒ ल ़ 1 त्र 4 ेपदθण् प्राप्त करते हैं। वगर् करने पर एवं जोड़ने पर हमेंं ;ग दृ 2द्ध2 ़ ;ल ़ 1द्ध2 त्र 16 प्राप्त होता है। उदाहरण 18 दी हुइर् लम्बाइर् की एक छड़ इस प्रकार घूमती है कि इसके अन्ितम छोर, परस्पर लंब दो निश्िचत सरल रेखाओं पर ही रहते हैं। छड़ पर लिया हुआ कोइर् भी बिन्दुदीघर्वृत्त को दशार्ता है। हल सत्य, मान लीजिए, सलाख पर कोइर् बिंदु च्;गएलद्ध इस प्रकार है कि च्। त्र ं एवं च्ठ त्र इ आकृति 11ण्13ण् ग त्र व्स् त्र इ बवेθ एवं ल त्र च्स् त्र ं ेपदθ इनसे हमेंं ग 22 ़ल 22 त्र 1ए प्राप्त होता है और यहइं आकृति 11ण्13 एक दीघर्वृत्त है। उदारहण संख्या 19 से 23 में रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएः उदारहण 19 बिन्दु ;2, 2द्ध पर वेंफद्र एवं बिन्दु ;4, 5द्ध से जाने वाले वृत्त का समीकरणऋऋऋऋऋऋऋ है। हल क्योंकि वृत्त ;4, 5द्ध से जाता है और इसका वेंफद्र ;2, 2द्ध है इसलिए इसकी त्रिाज्या 22;4 − 2द्ध ़ ;5 − 2द्ध त्र 13 है। अतः अभीष्ट उत्तर ;ग दृ 2द्ध2 ़ ;ल दृ 2द्ध2 त्र 13 है। उदारहण 20 एक वृत्त की त्रिाज्या 3 इर्काइर् है और इसका वेंफद्र रेखा, ल त्र ग दृ 1 पर स्िथत है। यदियह वृत्त बिन्दु ;7, 3द्ध से जाता है, तो इसका समीकरण ऋऋऋऋऋऋऋऋ है। हलः मान लीजिए वृत्त का वेंफद्र ;ीए ाद्ध है। तब ा त्र ी दृ 1 इसलिए वृत्त का समीकरण ;ग दृ ीद्ध2 ़ ख्ल दृ ;ी दृ 1द्ध,2 त्र 9 ण्ण्ण् ;1द्ध दिया हुआ है कि वृत्त का वेंफद्र ;7, 3द्ध से जाता है इसलिए हम, ;7 दृ ीद्ध2 ़ ;3 दृ ;ी दृ 1द्धद्ध2 त्र9 अथवा ;7 दृ ीद्ध2 ़ ;4 दृ ीद्ध2 त्र9 अथवा ी2 दृ 11ी ़ 28 त्र 0 प्राप्त करते हैं। अथवा ;ी दृ 7द्ध ;ी दृ 4द्ध त्र 0 ⇒ ी त्र 4 अथवा ी त्र 7 अतः वृत्त के अभीष्ट समीकरण, ग2 ़ ल2 दृ 8ग दृ 6ल ़ 16 त्र 0 अथवा ग2 ़ ल2 दृ 14ग दृ 12ल ़ 76 त्र 0 उदाहरण 21 एक दीघर्वृत्त का अक्ष, ग.अक्ष के अनुदिश है और इसका वेंफद्र मूल बिन्दु पर है। इसके नािभलंब जीवा की लम्बाइर् 10 इकाइर् है। यदि नाभ्िायों के बीच की दूरी = लघु अक्ष की लम्बाइर्, तोदीघर्वृत्त का समीकरण ऋऋऋऋऋऋऋऋ है। 22 हल दिया हुआ है कि इ त्र10 एवं 2ंम त्र 2इ ⇒ इ त्र ंम ं हम यह भी जानते हैं कि इ2 त्र ं2 ;1 दृ म2द्ध अथवा 2ं2म2 त्र ं2 ⇒ म त्र 1 ;इ त्र ंम प्रयोग करने परद्ध2 अतः ं त्र इ 2 2इ2 पिफर से त्र10 ंअथवा इ त्र52 इस प्रकार हमं त्र 10 प्राप्त करते हैं। अतः दीघर्वृत्त का अभीष्ट समीकरण ग2 ़ल2 त्र 1 है।100 50 उदाहरण 22 एक परवलय की नाभ्िा, बिन्दु ;2, 3द्ध है एवं रेखा ग दृ 4ल ़ 3 त्र 0 उसकी नियता है। उस परवलय का समीकरण ऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है। हल परवलय की परिभाषा का उपयोग करते हुए हम ग − 4 ल ़ 3 प्राप्त करते हैं।; ग − 2द्ध 2 ़; ल दृ 3द्ध 2 त्र 17 17 ;ग2 ़ ल2 दृ 4ग दृ 6ल ़ 13द्ध त्र ग2 ़ 16ल2 ़ 9 दृ 8गल दृ 24ल ़ 6ग अथवा 16ग2 ़ ल2 ़ 8गल दृ 74ग दृ 78ल ़ 212 त्र 0 प्राप्त होता है। उदारहण 23 बिन्दुओं ;3, 0द्ध एवं ;3 2ए 2द्ध से जाने वाले अतिपरवलय ग2 − ल2 त्र 1 की ं2 इ2 उत्वेंफद्रता ऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है। हल दिया हुआ है कि अतिपरवलय ग2 − ल2 त्र 1 बिन्दुओं ;3, 0द्ध एवं ;3 2ए2द्ध से जाता हैं2 इ2 इसलिए हम ं2 त्र 9 एवंइ2 त्र 4 प्राप्त करते हैं। इससे हमेंं इ2 त्र ं2 ;म2 दृ 1द्ध अथवा 4 त्र 9;म2 दृ 1द्ध 13अथवा म2 त्र 9 अथवा म त्र 13 प्राप्त होता है।3 लघु उत्तरीय प्रश्न 1ण् एक वृत्त की त्रिाज्या ं है और यह प्रथम चतुथा±श मेंं दोनों अक्षों को स्पशर् करता है, वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए। 2ंज ं ;1 − ज2द्ध2ण् दशार्इए किग त्र एवं ल त्र द्वारा देय बिन्दु ;गए लद्ध ए ज के सभी वास्तविक मानों1 ़ ज21 ़ ज2 के लिए एक वृत्त पर स्िथत है जहाँ ं कोइर् भी दी हुइर् वास्तविक संख्या है और दृ1 ढ जढ 1ण् 3ण् यदि कोइर् वृत्त बिन्दुओं ;0, 0द्ध,;ंए वद्ध एवं ;वए इद्धसे जाता है तो इसके वेंफद्र के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। 4ण् ऐसे वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए जोग.अक्ष को स्पशर् करता है और जिसका वेंफद्र ;1, 2द्ध है। 5ण् यदि रेखाएं 3ग दृ 4ल ़ 4 त्र 0 एवं6ग दृ 8ल दृ 7 त्र 0 एक वृत्त की स्पशर् रेखाएं हैं, तो वृत्त की त्रिाज्या ज्ञात कीजिए। ख्संकेतरू दी हुइर् समांतर रेखाओं के बीच की दूरी से हम वृत्त का व्यास प्राप्त करते हैं, 6ण् तीसरे चतुथा±श मेंं स्िथत एक ऐसे वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए जो दोनों अक्षों एवं रेखा 3ग दृ 4ल ़ 8 त्र 0 को स्पशर् करता है। ख्संकेतरू माना ं वृत की त्रिाज्या है, तब ;दृंए दृंद्ध वृत के वेंफद्र होंगे और दी गइर् रेखा की वेंफद्र से लम्ब दूरी, वृत की त्रिाज्या है। 7ण् यदि वृत्तग2 ़ ल2 दृ 4ग दृ 6ल ़ 11 त्र 0 के व्यास एक छोर ;3ए 4द्धए पर है, तो व्यास के दूसरे छोर के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। 8ण् एक वृत्त का वेंफद्र ;1ए दृ2द्ध पर है और यह 3ग ़ ल त्र 14ए 2ग ़ 5ल त्र 18 से जाता है। वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए। 9ण् यदि रेखा ल त्र 3 ग ़ ा वृत्त ग2 ़ ल2 त्र 16 को स्पशर् करती है, तो ा का मान ज्ञात कीजिए। ख्संकेतरू वृत की त्रिाज्या वृत के वेंफद्र से लम्ब दूरी के बराबर है।, 10ण् वृत्त ग2 ़ ल2 दृ 6ग ़ 12ल ़ 15 त्र 0 के संवेंफद्री एवं इससे दुगने क्षेत्रापफल के वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए। ख्संकेतरू सवेंफद्री वृतों के वेंफद्र समान होते हैं।, 11ण् यदि किसी दीघर् वृत्त की नाभ्िालंब जीवा, लघु अक्ष के आधे के समान हैं, तो इसकी उत्वेंफद्रता ज्ञात कीजिए। 12ण् दिये गये दीघर् वृत्त 9ग2 ़ 25ल2 त्र 225 की उत्वेंफद्रता एवं नाभ्िायां ज्ञात कीजिए। 5 13ण् यदि किसी दीघर्वृत्त की उत्वेंफद्रता 8 है और नाभ्िायों के बीच की दूरी 10 है, तो दीघर्वृत्त की नाभ्िालंब जीवा ज्ञात कीजिए। 14ण् एक दीघर् वृत्त की उत्वेंफद्रता 2 है, नाभ्िालंब जीवा 5 है एवं वेंफद्र ;0 , 0द्ध है। दीघर्वृत्त का3 समीकरण ज्ञात कीजिए। ग2 ल2 15ण् दीघर्वृत्त ़त्र 1 की नियताओं के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।36 20 16ण् परवलयल2 त्र 8ग पर किसी बिन्दु की नाभीय दूरी 4 है। उस बिन्दु के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। 17ण् परवलयल2 त्र 4ंग के शीषर् एवं परवलय पर स्िथत किसी बिन्दु को मिलाने वाले रेखाखंड की लम्बाइर् ज्ञात कीजिए। यदि रेखाखंड ग.अक्ष के साथθ कोण बनाता है। 18ण् यदि एक परवलय का शीषर् एवं नाभ्िा क्रमशः ;0, 4द्ध एवं ;0, 2द्ध पर हैं, तो उसका समीकरण ज्ञात कीजिए। 19ण् यदि रेखा ल त्र उग ़ 1 परवलय ल2 त्र 4ग की स्पशर् रेखा है, तोउ का मान ज्ञात कीजिए। ख्संकेतरू परवलय एवं रेखा के समीकरण को हल करने पर हमेंं एक द्विघात समीकरण प्राप्त होता है और स्पश्िार्ता के प्रतिबंध का उपयोग करने पर उ का मान प्राप्त होता है। , 20ण् यदि एक अतिपरवलय की उत्वेंफद्रता 2 है और इसकी नाभ्िायों के बीच की दूरी 16 हैं, तो अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए। 21ण् अतिपरवलय 9ल2 दृ 4ग2 त्र 36 की उत्वेंफद्रता ज्ञात कीजिए। 22ण् एक अतिपरवलय की उत्वेंफद्रता 3 है और इसकी नाभ्िायाँ ;± 2ए 0द्ध पर हैं, अतिपरवलय का2 समीकरण ज्ञात कीजिए। दीघर् उत्तरीय प्रश्न ;स्ण्।ण्द्ध 23ण् यदि रेखाएं 2ग दृ 3ल त्र 5 एवं 3ग दृ 4ल त्र 7 किसी ऐसे वृत्त के व्यास हैं जिसका क्षेत्रापफल 154वगर् इकाइर् है, तो वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए। 24ण् एक वृत्त का वेंफद्र सरल रेखा ल दृ 4ग ़ 3 त्र 0 पर स्िथत हैं और यह वृत्त बिन्दुओं;2, 3द्ध एवं;4, 5द्ध से होकर जाता है। वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए। 25ण् एक ऐसे वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए जिसका वेंफद्र ;3, μ1द्ध है और जो रेखा 2ग दृ 5ल ़ 18 त्र 0 से 6 इकाइर् लम्बी एक जीवा काटता है। ख्संकेतरू वृत्त की त्रिाज्या ज्ञात करने के लिए, वेंफद्र से दी हुइर् रेखा पर लंब दूरी ज्ञात कीजिए।, 26ण् 5 सेमी त्रिाज्या वाले एक ऐसे वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए जो एक दूसरे वृत्त ग2 ़ ल2 दृ 2ग दृ 4ल दृ 20 त्र 0 को ;5ए 5द्ध पर स्पशर् करता है। 27ण् 3 इकाइर् त्रिाज्या वाला एक वृत्त बिन्दु ;7, 3द्ध से जाता है और इसका वेंफद्र रेखा ल त्र ग दृ 1 पर स्िथत है। वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए। 28ण् निम्नलिख्िात परवलयों मेंं से प्रत्येक का समीकरण ज्ञात कीजिए। ;ंद्ध नियता ग त्र 0ए नाभ्िा ;6ए 0द्ध ;इद्ध शीषर् ;0ए 4द्धए नाभ्िा ;0ए 2द्ध ;बद्ध नाभ्िा ;दृ1ए दृ2द्धए नियता ग दृ 2ल ़ 3 त्र 0 29ण् उन सभी बिन्दुओं के समुच्चय का समीकरण ज्ञात कीजिए, जिनकी बिन्दुओं ;3, 0द्ध एवं ;9, 0द्ध से दूरियों का योग 12 है। 30ण् उन सभी बिन्दुओं के समुच्चय का समीकरण ज्ञात कीजिए जिनकी बिन्दु ;0, 4द्ध से दूरी, रेखा 2 ल त्र 9 से दूरी का है।3 31ण् दशार्इए कि ऐसे सभी बिन्दुओं का समुच्चय, जिनकी ;4, 0द्ध एवं ;μ4, 0द्ध से दूरी का अन्तर हमेंशा 2 है, एक अतिपरवलय को निरूपित करता है। 32ण् अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए यदि दिया हुआ हैः 4;ंद्ध शीषर् ;± 5ए 0द्धए नाभ्िा ;± 7ए 0द्ध ;इद्ध शीषर् ;0ए ± 7द्धए म त्र 3 ;बद्ध नाभ्िा ;0ए ± 10द्धए बिन्दु ;2, 3द्ध से जाता है। वस्तुनिष्ठ प्रश्न बताइए कि प्रश्न संख्या 33 से 40 तक के कथनों मेंं से कौन - सा कथन सत्य है और कौन - सा असत्य है? 33ण् रेखाग ़ 3ल त्र 0ए वृत्त ग2 ़ ल2 ़ 6ग ़ 2ल त्र 0 का व्यास है। 34ण् बिन्दु ;2, μ7द्ध से वृत्त ग2 ़ ल2 दृ 14ग दृ 10ल दृ 151 त्र 0 की न्यूनतम दूरी 5 इकाइर् है। ख्संकेतरू न्यूनतम दूरी त्रिाज्या एवं वेंफद्र से दिए हुए बिन्दु के बीच की दूरी का अंतर है, 35ण् यदि रेखा सग ़ उल त्र 1ए वृत्त ग2 ़ ल2 त्र ं2 की स्पशर् रेखा है, तो बिन्दु ;सए उद्ध वृत्त पर स्िथत हैं। ख्संकेतरू वेंफद्र से रेखा की दूरी, वृत्त की त्रिाज्या के समान है।, 36ण् बिन्दु ;1, 2द्ध वृत्तग2 ़ ल2 दृ 2ग ़ 6ल ़ 1 त्र 0 के अन्दर स्िथत हैं। 37ण् रेखासग ़ उल ़ द त्र 0ए परवलय ल2 त्र 4ंग को स्पशर् करेगी यदि सद त्र ंउ2ण् ग 2 ल 2 38ण् यदि च् दीघर्वृत्त ़त्र1 पर एक बिन्दु है जबकि ै एवं ै′ दीघर्वृत्त की नाभ्िायाँ है, तो16 25 च्ै ़ च्ै′ त्र 8ण् 39ण् रेखा2ग ़ 3ल त्र 12 दीघर्वृत्त ग2 ़ल2 त्र2 को बिन्दु ;3ए 2द्ध पर स्पशर् करती है।40ण् रेखाओं 3गल 43ा त्र0 एवं 3ाग ़ाल दृ 43 त्र0 के प्रतिच्छेद बिन्दु का बिन्दुपथ9 4 −− ा के विभ्िान्न मानों के लिए एक ऐसा अतिपरवलय है जिसकी उत्वेंफद्रता 2 है।ख्संकेत रू दिए हुए समीकरणों मेंं से ा को विलुप्त कीजिए।, प्रश्न संख्या 41 से 46 तक रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएः 41ण् एक वृत्त का वेंफद्र ;3, μ4द्ध है और यह रेखा 5ग ़ 12ल दृ 12 त्र 0 को स्पशर् करता है। वृत्त का समीकरण ऋऋऋऋऋऋऋ है। ख्संकेतरूवृत त्रिाज्या, वृत्त के वेंफद्र से स्पशर् रेखा की लम्ब दूरी है।, 42ण् रेखाएँ ल त्र ग ़ 2ए 3ल त्र 4ग और 2ल त्र 3ग किसी त्रिाभुज की भुजाएँ हैं। इस त्रिाभुज को परिगत ;ब्पतबनउेबतपइपदहद्ध करने वाला वृत्त का समीकरण ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है। 43ण् एक अंतहीन रस्सी को दो पिनों के ऊपर से निकालकर एक दीघर्वृत्त का निधार्रण किया जाता है। यदि अक्षों की लम्बाइर् 6 सेमी एवं 4 सेमी हैं, तो रस्सी की लम्बाइर् एवं पिनों के बीच की दूरी ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋहै। 44ण् एक दीघर्वृत्त की नाभ्िायाँ ;0, 1द्ध, ;0, μ1द्ध है और लघु अक्ष की लम्बाइर् 1 इकाइर् है। दीघर्वृत्त का समीकरण ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है। 45ण् एक परवलय की नाभ्िा ;μ1, μ2द्ध पर है और नियता ग दृ 2ल ़ 3 त्र 0 है। परवलय का समीकरण ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है। 46ण् एक अतिपरवलय के शीषर् ;0ए ± 6द्ध पर हैं और उत्वेंफद्रता 5 है। अति परवलय का समीकरण3 एवं नाभ्िायां क्रमशः ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ एवं ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ हैं। प्रश्न संख्या 47 से 59 तक दिए हुए चार विकल्पों मेंंें से सही उत्तर का चयन कीजिए - 47ण् बिन्दु ;1, 2द्ध पर केन्िद्रत एवं बिन्दु ;4, 6द्ध से जाने वाले वृत्त का क्षेत्रापफल हैः - ;।द्ध 5π ;ठद्ध 10π ;ब्द्ध 25π ;क्द्ध इनमेंं से कोइर् नहीं 48ण् दोनों अक्षों को स्पशर् करने वाले एवं बिन्दु ;3, 6द्ध से जाने वाले वृत्त का समीकरण हैः - ;।द्ध ग2 ़ ल2 ़ 6ग ़ 6ल ़ 3 त्र 0 ;ठद्ध ग2 ़ ल2 दृ 6ग दृ 6ल दृ 9 त्र 0 ;ब्द्ध ग2 ़ ल2 दृ 6ग दृ 6ल ़ 9 त्र 0 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 49ण् यदि एक वृत्त मूल बिन्दु एवं बिन्दु ;2, 3द्ध से जाता है और उसका वेंफद्र ल.अक्ष पर है, तोवृत्त का समीकरण हैः - ;।द्ध ग2 ़ ल2 ़ 13ल त्र 0 ;ठद्ध3ग2 ़ 3ल2 ़ 13ग ़ 3 त्र 0 ;ब्द्ध 6ग2 ़ 6ल2 दृ 13ग त्र 0 ;क्द्ध ग2 ़ ल2 ़ 13ग ़ 3 त्र 0 50ण् एक वृत्त का वेंफद्र मूल बिन्दु पर है और यह एक ऐसे समबाहु त्रिाभुज के शीषो± से जाता है जिसकी माियका की लम्बाइर् 3ं है। वृत्त का समीकरण है - ;।द्ध ग2 ़ ल2 त्र 9ं2 ;ठद्ध ग2 ़ ल2 त्र 16ं2 ;ब्द्ध ग2 ़ ल2 त्र 4ं2 ;क्द्ध ग2 ़ ल2 त्र ं2 2 ख्संकेतरू त्रिाभुज का वेंफद्रक और वृत्त का वेंफद्र संपाती है। वृत्त की त्रिाज्या, माियका की लम्बाइर् का 3 गुना है।, 51ण् यदि किसी परवलय की नाभ्िा ;0, μ3द्ध है और इसकी नियता ल त्र 3 है, तो इसका समीकरण हैः ;।द्ध ग2 त्र दृ12ल ;ठद्ध ग2 त्र 12ल ;ब्द्ध ल2 त्र दृ12ग ;क्द्ध ल2 त्र 12ग 52ण् यदि परवलयल2 त्र 4ंगए बिन्दु ;3, 2द्ध से जाता है, तो इसके नाभ्िालंब जीवा की लम्बाइर् हैः 24 1 ;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध 4 33 3 53ण् यदि एक परवलय का शीषर्, बिन्दु ;μ3, 0द्ध है और नियता, रेखा ग ़ 5 त्र 0 है, तो इसका समीकरण हैः ;।द्ध ल2 त्र 8 ;ग ़ 3द्ध ;ठद्ध ग2 त्र 8 ;ल ़ 3द्ध ;ब्द्ध ल2 त्र दृ 8 ;ग ़ 3द्ध ;क्द्ध ल2 त्र 8 ; ग ़ 5द्ध 1 54ण् एक दीघर्वृत्त की नाभ्िा ;1, μ1द्ध, नियता ग दृ ल दृ 3 त्र 0 और उत्वेंफद्रता 2 है। दीघर्वृत्त का समीकरण हैः ;।द्ध 7ग2 ़ 2गल ़ 7ल2 दृ 10ग ़ 10ल ़ 7 त्र 0 ;ठद्ध 7ग2 ़ 2गल ़ 7ल2 ़ 7 त्र 0 ;ब्द्ध 7ग2 ़ 2गल ़ 7ल2 ़ 10ग दृ 10ल दृ 7 त्र 0 ;क्द्ध इसमेंं से कोइर् नहीं 55ण् दीघर् वृत्त 3ग2 ़ ल2 त्र 12 के नाभ्िालंब जीवा की लम्बाइर् हैंः 4 ;।द्ध 4 ;ठद्ध3 ;ब्द्ध8 ;क्द्ध ग2 ल2 56ण् यदि दीघर्वृत्त ं2 ़ इ2 त्र1 ;ं ढ इद्धए की उत्वेंफद्रता म है, तो ;।द्ध इ2 त्र ं2 ;1 दृ म2द्ध ;ठद्ध ं2 त्र इ2 ;1 दृ म2द्ध ;ब्द्ध ं2 त्र इ2 ;म2 दृ 1द्ध ;क्द्ध इ2 त्र ं2 ;म2 दृ 1द्ध 57ण् एक अति परवलय के नाभ्िालंब जीवा की लम्बाइर् 8 इकाइर् है और इसका संयुग्मी अक्ष नाभ्िायों के बीच की दूरी के आधे के समान है। उस अतिपरवलय की उत्वेंफद्रता हैः 44 2 ;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध इनमेंं से कोइर् नहीं है3 3358ण् एक अतिपरवलय की नाभ्िायों के बीच की दूरी 16 है और इसकी उत्वेंफद्रता 2 है। अतिपरवलय का समीकरण हैः ग 2 ल 2 ;।द्ध ग2 दृ ल2 त्र 32 ;ठद्ध −त्र 1 ;ब्द्ध 2ग दृ 3ल2 त्र 7 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं49 3 59ण् यदि एक अतिपरवलय की उत्वेंफद्रता है और नाभ्िायां ;± 2ए 0द्ध पर हैं, तो अतिपरवलय का2 समीकरण हैः 2 2 2222ग ल 4 गल 4 गल;।द्ध −त्र ;ठद्ध −त्र ;ब्द्ध −त्र1 ;क्द्ध इनमेंं से कोइर् नहीं है4 59 999 49

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