9ण्1 समग्र अवलोकन ;व्अमतअपमूद्ध अनुक्रम से हमारा तात्पयर् है, किसी नियमानुसार संख्याओं का एक निश्िचत क्रम में विन्यास। अनुक्रम के पदों को हम ं1ए ं2ए ं3ए ण्ण्ण् ए इत्यादि से निदिर्ष्ट करते हैं जिसमें पदांक पद की स्िथति को निदिर्ष्ट करते हैं। उपयुर्क्त के संदभर् में अनुक्रम को किसी समुच्चय ग् में ि;द्ध त्र∀द ∈ छ द्वारा परिभाष्िातद जद प्रतिचित्राण अथवा पफलन िरू छ → ग् के रूप में समझा जा सकता है। िका प्रांत प्राकृत संख्याओं का समुच्चय अथवा उपसमुच्चय है जो पदों की स्िथति को निदिर्ष्ट करता है। यदि पदों के मान को निदिर्ष्ट करने वाला इसका परिसर वास्तविक संख्याओं का उपसमुच्चय त् है तो यह वास्तविक अनुक्रम कहलाता है। पदों की संख्या के अनुसार अनुक्रम परिमित अथवा अपरिमित होता है। हमेें यह आशा नहीं करनीचाहिए कि अनुक्रम के पद किसी विश्िाष्ट सूत्रा से ही अवश्य प्रदत्त होंगे। यद्यपि हम पदों को प्राप्त करने के लिए किसी सै(ान्ितक प(ति अथवा नियम की आशा करते हैं। मान लीजिए, ं1ए ं2ए ं3ए ण्ण्ण् ए अनुक्रम हैं, तब, व्यंजक ं1 ़ ं2 ़ ं3 ़ ण्ण्ण् दिए हुए अनुक्रम से जुड़ी हुइर् श्रेणी कहलाती है। दिए हुए अनुक्रम के परिमित अथवा अपरिमित होने के अनुसार श्रेणी भी परिमित अथवा अपरिमित होती है। टिप्पणीः श्रेणी का उपयोग करने पर यह निरूपित योग का बोध कराता है न कि स्वयं योग का। निश्िचत पैटनो± का अनुसरण करने वाले अनुक्रम श्रेणी कहलाते हैं। श्रेणी में प्रथम पद के अतिरिक्त प्रत्येक पद एक निश्िचत तरीके से प्रगति करता है। 9ण्1ण्1 समांतर श्रेढ़ी ;।ण्च्ण्द्ध समांतर श्रेणी एक ऐसा अनुक्रम है जिसमें प्रथम पद के अतिरिक्त प्रत्येक पद उससे पूवर् पद में एक निश्िचत संख्या ;धनात्मक अथवा )णात्मकद्ध जोड़ने पर प्राप्त होता है। अतः कोइर् अनुक्रमं1ए ं2ए ं3 ण्ण्ण् ं ण्ण्ण् एक समांतर श्रेणी कहलाता है यदि उसमें ं त्र ं ़ क दद ़ 1 दद ∈ छए इसमें क समांतर श्रेणी का सावर् अंतर कहलाता है। सामान्यतः समांतर श्रेणी के प्रथम पद को ं से तथा अंतिम पद को स से निदिर्ष्ट किया जाता है। समांतर श्रेणी के व्यापक पद अथवा दवें पद का सूत्रा ं त्र ं ़ ;द दृ 1द्ध क है। अंत से दवाँ पद ंद त्र स दृ ;द दृ 1द्ध क से प्रदत्त है।दसमांतर श्रेणी के प्रथमदपदों का योग दद2 ़ 1द्ध ंस ै त्र 2 ख् ंद ; − क,त्र 2; ़ द्धए होता है, जहाँ सत्र ं़ ;ददृ 1द्ध कसमांतर श्रेणी का अंतिम पददहै। व्यापक पद ंत्र ै दृ ै होता है।ददददृ 1 दधनात्मक संख्याओं ं1ए ं2ए ं3ए ण्ण्ण् ंका समांतर माध्यदं ़़ ण्ण्ण् ़ ं12 द।ण्डण् त्र होता हैद यदि ंए । तथा इसमांतर श्रेणी में हैं तो।ए संख्या ंतथा इका समांतर माध्य कहलाता है। ंइ़अथार्त् । त्र 2 यदि किसी समांतर श्रेणी के पदों को समान अचर से जोड़ा घटाया, गुणा अथवा भाग कर दिया जाए तब भी वे पद समांतर श्रेणी में ही रहते हैं। यदि ं1ए ं2ए ं3 ण्ण्ण् एक ऐसा समांतर श्रेणी है जिसका सावर्अंतर कहै, तो ;पद्ध ं1 ± ाए ं2 ± ाए ं3 ± ाए ण्ण्ण् भी सावर्अंतर कवाला एक समांतर श्रेणी होगा। ं ं123;पपद्ध ंाए ंाए ंाए ण्ण्ण् एवं ए ए ण्ण्ण् भी समांतर श्रेणी हैं जिनके सावर्अंतर क्रमशः1 23 ाााका;ा≠ 0द्ध एवं क;ा≠ 0द्ध है।ायदि ं1ए ं2ए ं3 ण्ण्ण् एवंइ1ए इ2ए इ3 ण्ण्ण् दो समांतर श्रेण्िायाँ हैं, तो ;पद्ध ं± इ1ए ं± इ2ए ं± इ3ए ण्ण्ण् भी समांतर श्रेणी हैं123 ं ं123 एए;पपद्ध ंइ1ए ं2 इ2ए ंइ3ए ण्ण्ण् एवं इइ इए ण्ण्ण् समांतर श्रेणी नहीं है।13 12 3 यदि ं1ए ं2ए ं3 ण्ण्ण् ंसमांतर श्रेणी में हैं, तोद;पद्ध ं़ ंत्र ं़ ं त्र ं़ ं त्र ण्ण्ण्1द2ददृ 13 ददृ 2ं ़ ं़ता− ता;पपद्ध ंत त्र∀ ाए 0 ≤ ा≤ ददृ त 2 ;पपपद्ध यदि किसी अनुक्रम का दवाँ पद दमें एक रैख्िाक व्यंजक है तो वह अनुक्रम समांतर श्रेणी हैं। ;पअद्ध यदि किसी अनुक्रम के दपदों का योग दमें एक द्विघात व्यंजक है तो वह अनुक्रम समांतर श्रेणी है। अनुक्रम तथा श्रेणी 149 9ण्1ण्2 गुणोत्तर श्रेणी ;ळण्च्ण्द्ध गुणोत्तर श्रेणी एक ऐसा अनुक्रम है जिसमें प्रथम पद के अतिरिक्त प्रत्येक पद, उससे पूवर् पद को किसीनिश्िचत शून्येत्तर अचर से गुणा करने पर प्राप्त होता है। यह शून्येत्तर अचर सावर् अनुपात कहलाता है।हम एक ऐसी गुणोत्तर श्रेणी लेते हैं जिसका प्रथम शून्येत्तर पद ंतथा सावर्अनुपात त है अथार्त् ंए ंतए ंत2ए ण्ण्ण् ए ंतद दृ 1 ए ण्ण्ण् एक गुणोत्तर श्रेणी है। ददृ1ंतयहाँ सावर् अनुपातत त्र ददृ2ंत गुणोत्तर श्रेणी का व्यापक अथवा दवाँ पद ं त्र ंतद दृ 1 द्वारा प्राप्त किया जाता है।दगुणोत्तर श्रेणी का अंतिम पदसए दवें पद के समान होता हैं और इसे स त्र ंतद दृ 1 द्वारा प्राप्त किया जाता है। गुणोत्तर श्रेणी का अंत से दवाँ पद ं त्र दस − 1 द्वारा प्राप्त होता है। प्रथम द पदों का योगत ; द −1द्ध ंत ै त्र ए ;यदि त ≠ 1द्धदत −1 अथवा ैत्र दं ;यदित त्र 1द्ध द्वारा प्राप्त होता है।द यदि ंए ळए इ गुणोत्तर श्रेणी में हैं तो ळ संख्या ं तथा इ का गुणोत्तर माध्य कहलाता है और इसे ळ त्र ंइ के द्वारा प्राप्त किया जाता है। ;पद्ध यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी के पदों को किसी शून्येत्तर अचर ;ा ≠ 0द्ध से गुणा अथवा भाग करदिया जाए तो इस प्रकार प्राप्त पद भी गुणोत्तर श्रेणी में होते हैं। ं ं1 23यदि ंए ंए ंए ण्ण्ण् ए गुणोत्तर श्रेणी है तो ंाए ंाए ंाए ण्ण्ण् तथा ए ए ए ण्ण्ण्123 123 ााा भी गुणोत्तर श्रेणी होंगी और इनका सावर्अनुपात भी अपरिवतिर्त रहेगा। विशेषतः यदि ं1ए ं2ए ं3ए ण्ण्ण् भी गुणोत्तर श्रेणी है, तो 111 ए ए ण्ण्ण् भी गुणोत्तर श्रेणी ही है।ं ं1 23 ;पपद्ध यदि ंए ंए ं ण्ण्ण् तथा इए इए इ ण्ण्ण् दो गुणोत्तर श्रेण्िायाँ हैं, तो ंइए ंइए ंइ ण्ण्ण् तथा123123 11223 3ं ं1 23 ए एइइ इ ए ण्ण्ण् भी गुणोत्तर श्रेणी हैं।1 2 3 ं ं1 23;पपपद्ध यदिं1ए ं2ए ं3 ण्ण्ण् समांतर श्रेणी है;ंप झ 0 ∀ पद्धए तब,ग ए ग ए ग ए ण्ण्ण्ए गुणोत्तर श्रेणी है;∀ गझ 0द्ध ;पअद्ध यदि ं1ए ं2ए ं ण्ण्ण्ए ं गुणोत्तर श्रेणी है, तब ं त्र ं त्र ं त्र ण्ण्ण्3द 1 द2 द दृ 1 3 द दृ 29ण्1ण्3 विशेष अनुक्रमों के योग से संबंिात महत्त्वपूणर् परिणाम ;पद्ध प्रथम दप्राकृत संख्याओं का योगः ; ़1द्ध दद∑दत्ऱ़़़त्र 123ण्ण्ण् द 2 ;पपद्ध प्रथम दप्राकृत संख्याओं के वगो± का योगः 22 22; ़1द्ध ;2 द2 दद ़1द्ध ∑द 1 2 3 ण्ण्ण् दत्ऱ ़़़ त्र 6 ;पपपद्ध प्रथम दप्राकृत संख्याओं के घनों का योगः ; ़ 2 33 33 3 ⎡दद1द्ध ⎤∑द 12 3ण्ण्ण् दत्ऱ ़़़ त्र⎢⎥⎣ 2 ⎦ 9ण्2 हल किए हुए उदाहरण ;ैवसअमक म्गंउचसमेद्ध लघु उत्तरीय ;ैण्।ण्द्ध उदाहरण 1 किसी समांतर श्रेणी का प्रथम, द्वितीय एवं अंतिम पद क्रमशः ंए इएवं बहैं। दशार्इए कि ;इब ंबं 2 द्ध; ़़− द्धसमांतर श्रेणी का योग है।2;इंद्ध− हल मान लीजिए कि समांतर श्रेणी के पदों की संख्या दतथा सावर्अंतर कहै। क्योंकि प्रथम पदंहै तथा द्वितीय पदइहै, इसलिए कत्र इदृ ं यह भी ज्ञात है कि अंतिम पद बहै, इसलिए बत्र ं़ ;ददृ 1द्ध ;इदृ ंद्ध ;क्योंकि कत्र इदृ ंद्ध बं− ⇒ ददृ 1 त्र इं− बं इंबं इब−़− ़− 2− ं त्र⇒ द त्र1़ − त्र इं इं− इं − द;इब ं ़−2द्ध इसलिए ै;ंस;ंबद्धद त्र ़द्ध त्र ़ 2 2;इं−द्ध उदाहरण 2 किसी समांतर श्रेणी का चवाँ पद ंतथा ुवाँ पद इहै। सि( कीजिए कि इसके च़ु ंइ ⎤ ⎢़़;च़ ुद्ध पदों का योग ⎡ंइ −− ⎥है।2 ⎣ चु⎦अनुक्रम तथा श्रेणी 151 हल मान लीजिए कि समांतर श्रेणी का प्रथम पद । तथा सावर्अंतर क् है। दिया हुआ है कि जच त्र ं⇒ । ़ ;चदृ 1द्ध क् त्र ं ण्ण्ण् ;1द्ध जु त्रइ⇒ । ़ ;ुदृ 1द्ध क् त्र इ ण्ण्ण् ;2द्ध ;1द्ध में से ;2द्ध को घटाने पर, हम ;चदृ 1 दृ ु़ 1द्ध क् त्र ंदृ इप्राप्त करते हैं। ंइ− ⇒ क् त्र ण्ण्ण् ;3द्धच−ु ;1द्ध तथा ;2द्ध को जोड़ने पर हम 2। ़ ;च़ ुदृ 2द्ध क् त्र ं़ इप्राप्त करते हैं। ⇒ 2। ़ ;च़ ुदृ 1द्ध क् त्र ं़ इ़ क् ंइ− ⇒ 2। ़ ;च़ ुदृ 1द्ध क् त्र ं़ इ़ ण्ण् ;4द्धच−ु च़ुअब ै त्र ख्2। ़ ;च़ ुदृ 1द्ध क्,च़ ु2 च़ु ंइ ⎤⎡− ⎢़़त्र 2 ⎣ ंइ च−ु⎦⎥ ख्;3द्ध एवं ;4द्ध के प्रयोग से, उदाहरण 3 यदि किसी समांतर श्रेणी के पदों की संख्या ;2द़ 1द्ध है तो सि( कीजिए कि विषम पदों के योग का समपदों के योग से अनुपात ;द़ 1द्ध रू दहै। हल मान लीजिए, समांतर श्रेणी का प्रथम पदंतथा सावर्अंतर क है। यह भी मान लीजिए कि जिस समांतर श्रेणी के पदों की संख्या ;2द़ 1द्ध है उसके विषम पदों का योग ै1 है। तो, ै1 त्र ं1 ़ ं3 ़ ं5 ़ ण्ण्ण् ़ ं2द़ 1 द़1 ;ं़द्धै1 त्र 1 ़2द12 द़1 त्र ख्ं;2 ़−1 1द्ध क,़़ द 2 त्र;द़ 1द्ध ;ं़ दकद्ध इसी प्रकार यदि सम पदों के योग को ै2 द्वारा निदिर्ष्ट किया जाता है, तो दै त्र ख्2ं ़ 2दक, त्र द ;ं ़ दकद्ध22 ;द ़1द्ध ; ं ़ दक द्ध द ़1ै1अतः त्र त्र ै2 दं; ़ दक द्ध द उदाहरण 4 प्रत्येक वषर् के अंत में किसी मशीन का मूल्य उस वषर् के प्रारंभ्िाक मूल्य का 20» कम हो जाता है। यदि मशीन का प्रारंभ्िाक मूल्य 1250 रुपये है तो 5 वषर् के अंत में उसका मूल्य ज्ञात कीजिए। हल प्रत्येक वषर् के अंत में मशीन का मूल्य पिछले वषर् के मूल्य का 80» हो जाता है। इसलिए 5 वषर् के अंत में मशीन के मूल्य का 5 बार अवमूल्यन होगा। अतः हमें एक ऐसे गुणोत्तर श्रेणी का 6वाँ पद ज्ञात करना है जिसका प्रथम पद ं1 त्र 1250 है तथा सावर्अनुपात त त्र8 है। अतः 5 वषर् के अंत में मशीन का मूल्य त्र ज6 त्र ं1 त5 त्र 1250 ;ण्8द्ध5 त्र 409ण्6 उदाहरण 5 समांतर श्रेणी ं1ए ं2ए ं3 ण्ण्ण् के प्रथम 24 पदों का योग ज्ञात कीजिए, यदि ं ़ ं ़ ं ़ ं ़ ं ़ ं त्र 225 दिया हुआ है।1510152024हल हम जानते हैं कि किसी भी समांतर श्रेणी के प्रारंभ एवं अंत से समदूरस्थ पदों का योग समान होता है और यह प्रथम एवं अंतिम पद के योग के बराबर होता है। इसलिए क त्र इ दृ ं अथार्त् ं1 ़ ं24 त्र ं5 ़ ं20 त्र ं10 ़ ं15 दिया हुआ है कि ;ं1 ़ ं24द्ध ़ ;ं5 ़ ं20द्ध ़ ;ं10 ़ ं15द्ध त्र 225 ⇒ ;ं ़ ंद्ध ़ ;ं ़ ंद्ध ़ ;ं ़ ंद्ध त्र225 124 124124⇒ 3 ;ं1 ़ ं24द्ध त्र 225 ⇒ ं1 ़ ं24 त्र75 द ़हम जानते हैं कि ै त्र2ख्ंस,ए जहाँं समांतर श्रेणी का प्रथम पद और स अंतिम पद है।द24अतः ै त्र ख्ं ़ ं, त्र 12 × 75 त्र 900241242उदारहण 6 समांतर श्रेणी बनाने वाली तीन संख्याओं का गुणनपफल 224 है और सबसे बड़ी संख्या छोटी संख्या का सात गुना है। संख्याएँ ज्ञात कीजिए। हल मान लीजिए समांतर श्रेणी की तीन संख्याएँ ं दृ कए ंए ं ़ क ;क झ 0द्ध हैं। अनुक्रम तथा श्रेणी 153 अब, ;ं दृ कद्ध ं ;ं ़ कद्ध त्र 224 ⇒ ं ;ं2 दृ क2द्ध त्र 224 ण्ण्ण् ;1द्ध क्योंकि सबसे बड़ी संख्या सबसे छोटी संख्या से सात गुना है अथार्त् ं ़ क त्र 7 ;ं दृ कद्ध 3ंइसलिए क त्र 4 क का मान ;1द्ध में रखने पर, हमें ⎛ 9ं 2 ⎞ ं 2 ⎟ 224 प्राप्त होता है।⎜− त्र ⎝ 16 ⎠अथार्त् ं त्र8 3ं 3 एव ं क त्र त्र×86त्र प्राप्त होता है44 अतः वांछित तीन संख्याएँ 2ए 8ए 14 हैं। उदाहरण 7 यदि गए ल एवं ्र समांतर श्रेणी में हैं तो दशार्इए कि ;ग2 ़ गल ़ ल2द्धए ;्र2 ़ ग्र ़ ग2द्ध एवं ;ल2 ़ ल्र ़ ्र2द्ध किसी समांतर श्रेणी के क्रमागत पद हैं। हल पद ;ग2 ़ गल ़ ल2द्धए ;्र2 ़ ग्र ़ ग2द्ध एवं;ल2 ़ ल्र ़ ्र2द्ध समांतर श्रेणी में होंगे यदि ;्र2 ़ ग्र ़ ग2द्ध दृ ;ग2 ़ गल ़ ल2द्ध त्र ;ल2 ़ ल्र ़ ्र2द्ध दृ ;्र2 ़ ग्र ़ ग2द्ध ल2अथार्त् ्र2 ़ ग्र दृ गल दृ त्र ल2 ़ ल्र दृ ग्र दृ ग2 अथार्त् ग2 ़ ्र2़ 2ग्र दृ ल2 त्र ल2 ़ ल्र ़ गल अथार्त् ;ग ़ ्रद्ध2 दृ ल2 त्र ल ;ग ़ ल ़ ्रद्ध अथार्त् ग ़ ्र दृ ल त्र ल अथार्त् ग ़ ्र त्र2ल यह सत्य है क्योंकि गए लए ्र समांतर श्रेणी में हैं। अतःग2 ़ गल ़ ल2ए ्र2 ़ ग्र ़ ग2ए ल2 ़ ल्र ़ ्र2 भी समांतर श्रेणी में हैं। उदाहरण 8 यदि ंए इए बए क गुणोत्तर श्रेणी में हैं तो सि( कीजिए कि ं2 दृ इ2ए इ2 दृ ब2ए ब2 दृ क2 भी गुणोत्तर श्रेणी में हैं। हल मान लीजए कि दी हुइर् गुणोत्तर श्रेणी का सावर्अनुपात त है। इब क इस प्रकार त्र त्र त्रत ंइ ब ⇒ इ त्र ंतए ब त्र इत त्र ंत2ए क त्र बत त्र ंत3 अब ं2 दृ इ2 त्र ं2 दृ ं2त2 त्र ं2 ;1 दृ त2द्ध इ2 दृ ब2 त्र ं2 त2 दृ ं2त4 त्र ं2 त2 ;1 दृ त2द्ध एवं ब2 दृ क2 त्र ं2 त4 दृ ं2त6 त्र ं2 त4 ;1 दृ त2द्ध 22 22इ − बब − क 2इसलिए त्र त्र त22 22ं −इइ − ब अतः ं2 दृ इ2ए इ2 दृ ब2ए ब2 दृ क2 गुणोत्तर श्रेणी में है। दीघर् उत्तरीय ;स्ण्।ण्द्ध उदाहरण 9 यदि किसी समांतर श्रेणी के उ पदों का योग अगले द पदों अथवा च पदों के योग के बराबर है, तो सि( कीजिए कि ⎛ 11 ⎞⎛ 11 ⎞ त्र;उचद्ध −−़;उ ़ दद्ध ⎜⎟ ⎜⎟⎝ उच ⎠⎝ उद ⎠ हल मान लीजिए,ंए ं ़ कए ं ़ 2कए ण्ण्ण् ण् समांतर श्रेणी है। हमें प्राप्त है, ं ़ ं ़ ण्ण्ण् ़ ं त्र ं ़ ं ़ ण्ण्ण् ़ ं ण्ण्ण् ;1द्ध12उउ़1उ़2उ़द ;1द्ध के दोनों पक्षों में ं1 ़ ं2 ़ ण्ण्ण् ़ ंउ जोड़ने पर हमें 2 ख्ं1 ़ ं2 ़ ण्ण्ण् ़ ंउ, त्र ं1 ़ ं2 ़ ण्ण्ण् ़ ंउ ़ ंउ़1 ़ ण्ण्ण् ़ ंप्राप्त होता है। अथार्त्उ़द 2 ै त्र ैउउ़द उउ़ दइसलिए,2 क्ष्2ंउ़; −1द्ध कद्वत्र क्ष्2ं़ ;उ़द−1द्ध कद्व22 उपरोक्त समीकरण में 2ं ़ ;उ दृ 1द्ध क त्र ग प्रतिस्थापित करने पर हमें उद़उग त्र ;ग ़ दकद्ध प्राप्त होता है।2 ;2उ दृ उ दृ दद्ध ग त्र;उ ़ दद्ध दक ⇒ ;उ दृ दद्ध ग त्र;उ ़ दद्ध दक ण्ण्ण् ;2द्ध इसी प्रकार यदि ं ़ ं ़ ण्ण्ण् ़ ं त्र ं ण्ण्ण् ़ ं12उउ ़ 1उ ़ च दोनों पक्षों में1 ़ ं2 ़ ण्ण्ण् ़ ंउ जोड़ने पर हमें, 2 ;ं1 ़ ं2 ़ ण्ण्ण् ़ ंउद्ध त्र ं ़ ं2 ़ ण्ण्ण् ़ ं ़ ण्ण्ण् ़ ंउ ़ च प्राप्त होता है।1उ ़ 1अथवा 2 ै त्रै उउ ़ च ⎡उ उचक त्र ⎣ 2 ⎦ 2 अथार्त् ;उ दृ चद्ध ग त्र;उ ़ चद्धचक ण्ण्ण् ;3द्ध ⇒ 2 ⎢ क्ष्2 ं ़ ;उ−1द्ध द्व ⎥⎤ ़ क्ष्2ं ़ ;उ ़ च दृ 1द्धकद्व ;2द्ध को ;3द्ध से भाग करने पर हम अनुक्रम तथा श्रेणी 155 ; − द्ध ग ;उदद्धउद़ दक त्र प्राप्त करते हैं।;उचद्ध ग ; ़ द्ध− उचचक ⇒ ;उदृ दद्ध ;उ़ चद्ध चत्र;उदृ चद्ध ;उ़ दद्ध द दोनों पक्षों को उदचसे भाग देने पर हम ⎛ 11 ⎞⎛ 11 ⎞ ;उ़ चद्ध ⎜− ⎟ त्र;उ़ दद्ध ⎜− ⎟ प्राप्त करते हैं⎝ दउ⎠⎝ चउ⎠ ⎛ 11 ⎞⎛ 11 ⎞− −त्र;उ़ दद्ध ⎜⎟ त्र ;उ़ चद्ध ⎜⎟⎝ उच⎠⎝ उद⎠ उदाहरण 10 यदि समांतर श्रेणी ं1ए ं2ए ण्ण्ण्ए ंदका सावर्अंतर कहै;क≠ 0द्ध तो सि( कीजिए की श्रेणी ेपद क;बवेमब ंबवेमब ं़ बवेमब ंबवेमब ं़ ण्ण्ण़् बवेमब ं बवेमब ंद्ध1223 ददृ1दका योग बवज ं1 दृ बवज ंदके बराबर है। हल हमें प्राप्त है, ेपद क;बवेमब ं1 बवेमब ं2 ़ बवेमब ं2 बवेमब ं3 ़ ण्ण्ण़् बवेमब ंददृ1 बवेमब ंदद्ध ⎡ 11 1 ⎤ेपद क ़़ण्ण्ण़्त्र ⎢ ⎥ेपद ंेपद ं ेपद ंेपद ं ेपद ं ेपद ं⎣ 12 23 द−1 द⎦ ेपद ; ं 2 − 1द्ध ेपद; 3 − 2द्ध ेपद; − द द्धं ं द −1 त्र ़़ण्ण्ण़् ेपद ं1 ेपद ं2 ेपद ं2 ेपद ं3 ेपद ंद−1 ेपद ंद ेपद ंबवे ं−बवे ंेपद ंद्ध ेपद ंबवे ं−बवे ंेपद ंद्ध ेपद ंबवे ं−बवे ंेपद ंद्ध2121 3232 दद−1 दद−1़ ़ण्ण्ण् ़त्र ेपद ं1 ेपद ं2 ेपद ं2 ेपद ं3 ेपद ंद−1ेपद ंद त्र ;बवज ंदृ बवज ंद्ध ़ ;बवज ंदृ बवज ंद्ध ़ ण्ण्ण् ़ ;बवज ं दृ बवज ंद्ध1223ददृ1दत्र बवज ंदृ बवज ं1द उदाहरण 11 ;पद्ध यदि चार विभ्िान्न धनात्मक राश्िायाँ ंए इए बए कसमांतर श्रेणी में हैं, तो सि( कीजिए कि इबझ ंक ;पपद्ध यदि चार विभ्िान्न धनात्मक राश्िायाँ ंए इए बए कगुणोत्तर श्रेणी में हैं तो सि( कीजिए कि ं़ कझ इ़ ब हल ;पद्ध क्योंकि ंए इए बए क समांतर श्रेणी में हैं, इसलिए प्रथम तीन पदों के लिए ।ण्डण् झ ळण्डण् अतः इ झ ंब वगर् करने पर, इ2 झ ंबइसी प्रकार अंतिम तीन पदों के लिए ।ड झ ळड ब झ इक ब2 झ इक ;1द्ध तथा ;2द्ध को गुणा करने पर हम इ2ब2 झ ;ंबद्ध ;इकद्ध प्राप्त करते हैं। ⇒ इब झ ंक ;पपद्ध क्योंकि ंए इए बए क गुणोत्तर श्रेणी में है प्रथम तीन पदों के लिए ।ण्डण् झ ळण्ड ंब़अथार्त् झ इ ; क्योंकि ंब त्रइद्ध2 ⇒ ं ़ ब झ 2इ इसी प्रकार अंतिम तीन पदों के लिए इक़झ ब2 ⇒ इ ़ क झ 2ब ;3द्ध एवं ;4द्ध को जोड़ने पर हम ⎛ ंब़⎞ ⎜∵ त्रइ⎟⎝ 2 ⎠ ण्ण्ण् ;1द्ध ⎛ इक़⎞∵ त्रब⎜⎟⎝ 2 ⎠ ण्ण्ण् ;2द्ध ण्ण्ण् ;3द्ध ; क्योंकि इक त्रबद्ध ण्ण्ण् ;4द्ध ;ं ़ बद्ध ़ ;इ ़ कद्ध झ 2इ ़ 2ब प्राप्त करते हैं ⇒ ं ़ क झ इ ़ ब उदाहरण12 यदिंए इए ब किसी समांतर श्रेणी के तीन क्रमागत पद हैं औरगए लए ्र किसी गुणोत्तर श्रेणी के तीन क्रमागत पद हैं, तो सि( कीजिए कि गइ दृ ब ंण् लब दृ ण् ्रं दृ इ त्र 1 अनुक्रम तथा श्रेणी 157 हल ंए इए बसमांतर श्रेणी के तीन क्रमागत पद हैं इसलिए इदृ ंत्र बदृ इत्र क ;मान लीजिएद्ध बदृ ंत्र2क ंदृ इत्रदृ क इदृ बबदृ ं दृ क2कदृ कअतः, ग ण् ल ण् ्र दृ इत्र ग ण् ल ण् ्र दृ क 2क − कत्र ग ; ग्रद्धण् ्र;क्योंकि गए लए्रगुणोत्तर श्रेणी में होने के कारण लत्र ; ग्रद्धद्ध दृ कककदृ कत्र ग ण् गण् ्रण् ्र दृ क़ ककदृ कत्र ग ण् ्रत्र ग° ्र° त्र 1 द उदाहरण 13 यदि ∑ंि ा ; ़ द्ध त्र 16;2ददृ 1द्ध जहाँ पफलन एि ;िग़ लद्ध त्र ;िगद्ध ण् ;िलद्ध को सभी ात्र1 प्राकृत संख्याओं गए लके लिए संतुष्ट करता है एवं ;ि1द्ध त्र 2 है, तो प्राकृत संख्या ंज्ञात कीजिए। हल दिया हुआ है कि ;िग़ लद्ध त्र ;िगद्ध ण् ;िलद्ध और ;ि1द्ध त्र 2 इसलिए ;ि2द्ध त्र ;ि1 ़ 1द्ध त्र ;ि1द्ध ण् ;ि1द्ध त्र 22 ;ि3द्ध त्र ;ि1 ़ 2द्ध त्र ;ि1द्ध ण् ;ि2द्ध त्र 23 ;ि4द्ध त्र ;ि1 ़ 3द्ध त्र ;ि1द्ध ण् ;ि3द्ध त्र 24 और इस प्रकार इस प्रिया को आगे बढ़ाते हुए हम ;िाद्ध त्र 2ाएवं ;िंद्ध त्र 2ं प्राप्त करते हैं। दद अतः ∑; ़ द्ध त्र ∑ ंि ाि ंि ा ;द्धण् ;द्ध ात्र1 ात्र1 द ाित्र ;िंद्ध ∑ ;द्ध ात्र1 त्र2ं;21 ़ 22 ़ 23 ़ ण्ण्ण् ़ 2दद्ध द⎧ 2ण्2 1 ⎫ ं⎪ ; −द्ध⎪ ं़1 द2 ⎨ ⎬त्र 2 ;2 −1द्ध त्र ण्ण्ण् ;1द्ध21−⎪⎪⎩⎭ द परंतु ∑ ंि ा ; ़ द्धत्र 16 ;2ददृ 1द्ध दिया हुआ है।ात्र1 इसलिए 2ं़ 1 ;2द दृ 1द्ध त्र 16 ;2ददृ 1द्ध ⇒ 2ं़1 त्र24 ⇒ ं ़ 1 त्र 4 ⇒ ं त्र3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न उदाहरण संख्या 14 से 23 तक में दिए हुए चार विकल्पों से सही उत्तर का चयन कीजिए। उदाहरण 14 अनुक्रम को निम्नलिख्िात में से किस रूप में परिभाष्िात किया जा सकता हैः ;।द्ध एक संबंध, जिसका परिसर ⊆ छ ;प्राकृत संख्याएंद्ध ;ठद्ध एक पफलन जिसका प्रांत ⊆ छ ;ब्द्ध एक पफलन जिसका प्रांत ⊆ छ ;क्द्ध वास्तविक मानों वाली श्रेणी। हल ;ब्द्ध सही उत्तर है। अनुक्रम को एक पफलन िरू छ →ग् के रूप में परिभाष्िात किया जाता है जिसका प्रांत ⊆ छ उदाहरण 15 यदि गए लए ्र ध्नात्मक पूणा±क हैं तो व्यंजक ;ग ़ लद्ध ;ल ़ ्रद्ध ;्र ़ गद्ध का मान हैः ;।द्ध त्र 8गल्र ;ठद्ध झ 8गल्र ;ब्द्ध ढ 8गल्र ;क्द्ध त्र 4गल्र हल ;ठद्ध सही उत्तर है क्योंकि ़ ल्ऱ ्रग़ ।ण्डण् झ ळण्डण्ए गल झ गलए झ ल्र और झ ्रग 2 2 2 तीनों असमिकाओं को गुणा करने पर हम गलल्रल्ऱ ़़ ण्ण् झ ; द्ध;द्ध;द्ध ्रग गलल्र 2 22 या ;ग ़ लद्ध ;ल ़ ्रद्ध ;्र ़ गद्ध झ 8 गल्र उदाहरण16 ध्नात्मक पदों की किसी गुणोत्तर श्रेणी का कोइर् भी पद अगले दो पदों के योग के समानहै तो गुणोत्तर श्रेणी का सावर्अनुपात हैः ;।द्ध ेपद 18° ;ठद्ध 2 बवे18° ;ब्द्ध बवे 18° ;क्द्ध 2 ेपद 18° हल ;क्द्ध सही उत्तर है क्योंकि जद त्र जद़1 ़ जद़2 ⇒ ंतददृ1 त्र ंतद ़ ंतद़1 ⇒ 1 त्र त ़ त2 15−± त त्र 2 अनुक्रम तथा श्रेणी 159 −क्योंकित झ 0ए इसलिए त त्र 2 51 त्र 2 ेपद 18°4 उदाहरण 17 किसी समांतर श्रेणी का चवाँ पदु है एवं;च ़ ुद्धवाँ पद 0 है। उस श्रेणी काुवाँ पद हैः ;।द्ध दृ च ;ठ च ;ब्द्ध च ़ ु ;क्द्ध च दृ ु हल ;ठद्ध सही उत्तर है मान लीजिए ं और क क्रमशः प्रथम पद और सावर्अंतर हैं इसलिए ज् च त्र ं ़ ;च दृ 1द्ध क त्र ु और ण्ण्ण् ;1द्ध ज् च़ ु त्र ं ़ ;च ़ ु दृ 1द्ध क त्र 0 ण्ण्ण् ;2द्ध ;2द्ध में से ;1द्ध को घटाने पर ुक त्र दृ ु प्राप्त करते हैं। क का मान ;1द्ध में प्रतिस्थापित करने पर हमं त्र ु दृ ;च दृ 1द्ध ;दृ1द्ध त्र ु ़ च दृ 1 अब ज्ु त्र ं ़ ;ु दृ 1द्ध क त्र ु ़ च दृ 1 ़ ;ु दृ 1द्ध ;दृ1द्ध त्र ु ़ च दृ 1 दृ ु ़ 1 त्र च उदाहरण 18 मान लीजिए कि किसी गुणोत्तर श्रेणी के तीन पदों का योगै है, गुणपफल च है एवं व्युत्क्रमों का योग त् है, तो च्2 त्3 रू ै3 बराबर हैः ;।द्ध 1 रू 1 ;ठद्ध ;सावर्अनुपातद्धद रू 1 ;ब्द्ध ;प्रथम पदद्ध2 रू ;सावर्अनुपातद्ध2 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं हल ;।द्ध सही उत्तर है। ं ंत आइए एक गुणोत्तर श्रेणी लेते हैं जिसके तीन पद एए हैं।त ंत ;2 त 1द्ध ं ़़ ंत त्रतत 111 ⎛त2 त 1 तब ै त्र ़़ त ़़⎞ च् त्र ं3ए त् त्र ़़त्र⎜ ⎟ ं ंत ं ⎝ त ⎠ ⎛ ़़⎞ 23 ं6 ⋅⎜ ⎟1 त2 त 13 च्त् ं3 ⎝ त ⎠त्र1 3 त्र 2 त 13ै3 ⎛त ़़⎞ ं ⎜⎟⎝ त ⎠ इसलिए वांछित अनुपात 1ः 1 है। उदाहरण 19 श्रेणी 3 ़ 7 ़ 11 ़ ण्ण्ण् एवं 1 ़ 6 ़ 11 ़ ण्ण्ण् का 10 वाँ उभयनिष्ठ पद निम्नलिख्िात में से कौन - सा है? ;।द्ध 191 ;ठद्ध 193 ;ब्द्ध 211 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं। हल ;।द्ध सही उत्तर है प्रथम उभयनिष्ठ पद 11 है। इससे अगला पद सावर्अंतर 4 एवं 5 के ल.स.व. अथार्त् 20 को जोड़ने पर प्राप्त होता है। इसलिए 10वाँ उभयनिष्ठ पदत्र समांतर श्रेणी का ज्10 जिसमें ं त्र 11 एवंकत्र 20ण् ज्10 त्र ं़ 9 कत्र 11 ़ 9 ;20द्ध त्र 191 उदाहरण 20 एक गुणोत्तर श्रेणी में पदों की संख्या सम है। यदि सभी पदों का योग विषम पदों केयोग का 5 गुना है, तो गुणोत्तर श्रेणी का सावर्अनुपात हैंः −41;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध 4 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं55 हल सही उत्तर ;ब्द्ध है। आइए एक ऐसी गुणोत्तर श्रेणी ंए ंतए ंत2ए ण्ण्ण् लेते हैं जिसके पदों की संख्या 2दहै। द 2 द ंत ; द्धंत द्ध;2 −1द्ध 5; −1 हम त्र 2 प्राप्त करते हैं।त−1 त −1 ;क्योंकि विषम पदों का सावर्अनुपात त2 होगा और पदों की संख्यादहोगी द्ध 2द 2दंत; −1द्ध ंत; −1द्ध त्र 5⇒ 2त−1;त −1द्ध ⇒ ं;त़ 1द्ध त्र 5ंए अथार्त् तत्र 4 उदाहरण 21 व्यंजक 3ग़ 31 दृ ग ए ग∈ त् का न्यूनतम मान हैः 1 ;।द्ध0 ;ठद्ध ;ब्द्ध3 ;क्द्ध 3 हल सही उत्तर ;क्द्ध है। हम जानते हैं कि धनात्मक संख्याओं के लिए ।ण्डण् ≥ ळण्ड ग 1− ग3 ़3 ग 1−गइसलिए ≥ 33⋅ 2 ग 1− ग3 ़3 ग 3 ⇒ ≥ 3 ⋅ ग23 ⇒ 3ग़ 31दृ ग ≥ 23 अनुक्रम तथा श्रेणी 161 लघु उत्तरीय प्रश्न ;ैण्।द्ध 1ण् एक समांतर श्रेणी का प्रथम पद ंहै एवं प्रथम चपदों का योग शून्य है। दशार्इए कि इसके ; ़ द्ध−ंच ुु अगले ुपदों का योग हैख्संकेतरू वांछित योग त्र ै दृ ै,च़ ुचच−1 2ण् एक व्यक्ित 20 वषर् मेें 66000 रुपये बचाता है। प्रथम वषर् के पश्चात् प्रत्येक परवतीर् वषर् में वह पिछले वषर् की तुलना में 200 रुपये अिाक बचाता है। ज्ञात कीजिए कि वह व्यक्ित प्रथम वषर् में कितने रुपये बचाता था? 3ण् एक व्यक्ित 5200 रुपये के प्रारंभ्िाक वेतन पर किसी पद को स्वीकार करता है। अगले ही महीने से उसे प्रत्येक महीने 320 रुपये की वेतन वृि प्राप्त होती है। ;ंद्ध उसका दसवें महीने का वेतन ज्ञात कीजए ;इद्ध प्रथम वषर् में उसने वुफल कितना धन अजिर्त किया? 4ण् यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी के चवाँ एवं ुवाँ पद क्रमशः ुएवं चहै तो सि( कीजिए कि उस 1 ⎛ च −ु ⎞ चुश्रेणी का ;च़ ुद्धवाँ पद ⎜ चु⎟ है।⎝ ⎠ 5ण् एक बढ़इर् को 192 ख्िाड़कियों के पे्रफम तैयार करने के लिए काम पर रखा गया । प्रथम दिन उसने पाँच प्रेफम बनाये और उसके पश्चात् प्रतिदिन पिछले दिन की तुलना में 2 प्रेफम अिाक बनाए। ज्ञात कीजिए कि कायर् को पूरा करने में उसने कितने दिन लगाए? 6ण् हम जानते हैं कि त्रिाभुज के अंतः कोणों का योग 180ह् होता है। सि( कीजिए कि 3, 4, 5, 6 .......... भुजाओं वाले बहुभुजों के अंतः कोणों का योग एक समांतर श्रेणी बनाता है। 21भुजाओं वाले बहुभुज के अंतःकोणों का योग ज्ञात कीजिए। 7ण् एक समबाहु त्रिाभुज की एक भुजा 20 सेमी लंबी है। प्रथम त्रिाभुज की भुजाओं के मध्य बिंदुओं को मिलाकर एक दूसरी त्रिाभुज पहली त्रिाभुज के अंदर बनायी जाती है। यह प्रक्रम चलता ही रहता है तो इस प्रकार बनी हुइर् ;छठीद्ध अंतः समबाहु त्रिाभुज का परिमाप ज्ञात कीजिए। 8ण् एक आलू दौड़ में 20 आलू एक ही पंक्ित में 4 मीटर के अंतराल पर रखे गये हैं जिसमें प्रथम आलू दौड़ शुरू होने वाले बिंदु से 24 मीटर की दूरी पर रखा गया है। एक प्रतिभागी को एक समय में एक आलू को उठाकर लाते हुए सभी आलुओं को वापस उस बिंदु पर लाना है जहाँ से दौड़ शुरू हुइर् है। सभी आलुओं को वापस लाने के लिए उसे कितनी दूरी तय करनी पड़ेगी। 9ण् किसी िकेट टूनार्मेंट में 16 विद्यालयों की टीम हिस्सा लेती है। सभी टीमों के लिए पुरस्कार राश्िा के रूप में 8000 रुपये की राश्िा वितरित की जानी है। यदि अंतिम टीम को पुस्कार राश्िा के रूप में 275 रुपये दिए जाते हैं और बारी - बारी से आने वाली प्रत्येक टीम का पुरस्कार एक निश्िचत राश्िा से बढ़ाया जाता है। ज्ञात कीजिए कि प्रथम स्थान पाने वाली टीम को कितनी राश्िा प्राप्त होगी? 10ण् यदि ं1ए ं2ए ं3ए ण्ण्ण्ए ंसमांतर श्रेणी में हंै जहाँ ंप झ 0 ∀ पए तो दशार्इए किद 11 1 द −1़ ़ण्ण्ण़्त्र ं1 ़ ं2 ं2 ़ ं3 ंद−1 ़ ंद ं1 ़ ंद 11ण् श्रेणी ;33 दृ 23द्ध ़ ;53 दृ 43द्ध ़ ;73 दृ 63द्ध ़ ण्ण्ण् का योग ;पद्ध द पदों तक;पपद्ध 10 पदों तक, ज्ञात कीजिए। 12ण् किसी समांतर श्रेणी का तवाँ पद ज्ञात कीजिए यदि उसके प्रथमद पदों का योग2द ़ 3द2 है। ख्संकेतरू ंद त्र ैद दृ ैददृ1, दीघर् उत्तरीय प्रश्न ;स्ण्।ण्द्ध 13ण् किंहीं दो संख्याओं के बीच।समांतर माध्य है औरळ1ए ळ2 दो गुणोत्तर माध्य हैं, तो सि( कीजिए किμ ळ2 ळ2 2। त्र 1 ़ 2 ळ 2 ळ1 14ण् यदि θ1ए θ2ए θ3ए ण्ण्ण्ए θद ए समांतर श्रेणी में है जिसका सावर्अंतर क हैं, तो सि( कीजिए किμ जंद θद −जंद θ1ेमबθ ेमबθ ़ ेमबθ ेमबθ ़ ण्ण्ण् ़ ेमबθ ेमबθ त्र ण्1 223ददृ1द ेपद क 15ण् यदि किसी समांतर श्रेणी के च पदों का योग ु है और ु पदों का योग च है, तो सि( कीजिए कि श्रेणी के च ़ ु पदों का योग दृ ;च ़ ुद्ध है। उस समांतर श्रेणी के प्रथम च दृ ु ;च झ ुद्ध पदों का योग भी ज्ञात कीजिए। 16ण् किसी समांतर श्रेणी एवं गुणोत्तर श्रेणी दोनों के चवाँए ुवाँ एवं तवाँ पद क्रमशः ंए इ एवंब है, तो सि( कीजिए किμ ंइदृबंण् इब दृ ण् बं दृ इ त्र 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रश्न संख्या 17 से 26 तक प्रत्येक में दिए हुए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए। ;डण्ब्ण्फद्ध 17ण् यदि किसी समांतर श्रेणी केद पदों का योग ै त्र 3द ़ 2द2ए है, तो उस समांतर श्रेणी का सावर्अंतर हैμद;।द्ध 3 ;ठद्ध 2 ;ब्द्ध 6 ;क्द्ध 4 18ण् एक गुणोत्तर श्रेणी का तीसरा पद 4 है। इसके प्रथम पाँच पदों का गुणनपफल हैμ ;।द्ध 43 ;ठद्ध 44 ;ब्द्ध 45 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं अनुक्रम तथा श्रेणी 163 19ण् यदि किसी समांतर श्रेणी के 9वें पद का 9 गुना और उसके 13वें पद के 13 गुना के बराबर है, तो उस समांतर श्रेणी का 22वाँ पद हैμ ;।द्ध 0 ;ठद्ध 22 ;ब्द्ध 220 ;क्द्ध 198 20ण् यदि गए 2लए 3्र समांतर श्रेणी में हैं जबकि गए लए ्र गुणोत्तर श्रेणी में हैं, तो गुणोत्तर श्रेणी का सावर्अनुपात हैμ 1 1;।द्ध 3 ;ठद्ध ;ब्द्ध 2 ;क्द्ध3 2 21ण् यदि किसी समांतर श्रेणी के लिए ै त्र ुद2 एवं ै त्र ुउ2ए जहाँ ै समांतर श्रेणी केत पदों में दउत योग को निदिर्ष्ट करता है, तो ैु बराबर हैμ ु3 ;।द्ध ;ठद्ध उदु ;ब्द्ध ु3 ;क्द्ध ;उ ़ दद्ध ु2 2 22ण् मान लीजिए कि किसी समांतर श्रेणी के प्रथम द पदों के योग को ै से निदिर्ष्ट किया जाताद है। यदि ै त्र 3ै तो ै रू ै बराबर हैμ2 दद 3दद ;।द्ध 4 ;ठद्ध 6 ;ब्द्ध 8 ;क्द्ध 10 23ण् 4ग ़ 41दृग ए ग ∈ त् का न्यूनतम मान हैμ ;।द्ध 2 ;ठद्ध 4 ;ब्द्ध 1 ;क्द्ध 0 24ण् मान लीजिए किैप्रथमद प्राकृत संख्याओं के घनों के योग को निदिर्ष्ट करता है एवं ेप्रथमद द द ैतद प्राकृत संख्याओं के योग को निदिर्ष्ट करता है, तो ∑बराबर है। तत्र1 ेत; ़1द्ध; द दद; ़1द्ध दद ़2द्ध ;।द्ध ;ठद्ध6 2 23द2द ़़;ब्द्ध ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं2 25ण् यदिजद श्रेणी 2 ़ 3 ़ 6 ़ 11 ़ 18 ़ ण्ण्ण् के दवें पद को निदिर्ष्ट करता है, तो ज50 का मान हैμ ;।द्ध 492 दृ 1 ;ठद्ध 492 ;ब्द्ध 502 ़ 1 ;क्द्ध 492 ़ 2 26ण् लकड़ी के ठोस आयताकार खंड के तीन असमान किनारों की लंबाइर् गुणोत्तर श्रेणी में है। उस लकड़ी के खंड का आयतन 216 घन सेमी एवं वुफल पृष्ठीय क्षेत्रापफल 252 वगर् सेमी है। सबसे लंबे किनारे की लंबाइर् है। ;।द्ध 12 बउ ;ठद्ध 6 बउ ;ब्द्ध 18 बउ ;क्द्ध 3 बउ प्रश्न संख्या 27 से 29 तक रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएμ ंइ− 27ण् ंए इए ब को गुणोत्तर श्रेणी में होने के लिए, −का मान ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् के समान है।इब 28ण् किसी समांतर श्रेणी के प्रारंभ एवं अंत से समदूरस्थ पदों का योगण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् के समान है। 29ण् एक गुणोत्तर श्रेणी का तीसरा पद 4 है, तो प्रथम पाँच पदों का गुणनपफल ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् है। बताइए, प्रश्न संख्या 30 से 34 तक में दिए हुए कथन सत्य हैं अथवा असत्य हैं। 30ण् दो अनुक्रम एक साथ समांतर श्रेणी एवं गुणोत्तर श्रेणी नहीं हो सकते है। 31ण् प्रत्येक श्रेणी एक अनुक्रम होता हैं परंतु यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक अनुक्रम एक श्रेणी होता है। 32ण् किसी समांतर श्रेणी के प्रथम पद के अतिरिक्त कोइर् भी पद स्वयं से समदूरस्थ पदों के योग के आधे के समान होता है। 33ण् दो गुणोत्तर श्रेण्िायों का योग अथवा अंतर भी एक गुणोत्तर श्रेणी होता है। 34ण् यदि किसी अनुक्रम के दपदों का योग एक द्विघात व्यंजक है तो वह अनुक्रम हमेशा एक समांतर श्रेणी को निरुपित करता है। स्तंभ प् में दिए हुए प्रश्नों का स्तंभ प्प् में दिए हुए उत्तरों में से सही उत्तर के साथ मिलान कीजिएः 35ण् स्तंभ प् स्तंभ प्प् ;ंद्ध 4ए 1ए 1ए 1 ;पद्ध समांतर श्रेणी4 16 ;इद्ध 2ए 3ए 5ए 7 ;पपद्ध अनुक्रम ;बद्ध 13ए 8ए 3ए दृ2ए दृ7 ;पपपद्ध गुणोत्तर श्रेणी 36ण् स्तंभ प् स्तंभ प्प् ⎛ दद; ़ 1द्ध ⎞2 ;ंद्ध 12 ़ 22 ़ 32 ़ ण्ण्ण़्द2 ;पद्ध ⎜⎟⎝ 2 ⎠ ;इद्ध 13 ़ 23 ़ 33 ़ ण्ण्ण़्द3 ;पपद्ध द;द़ 1द्ध ; ़1द्ध;2 ददद ़1द्ध ;बद्ध 2 ़ 4 ़ 6 ़ ण्ण्ण् ़ 2द ;पपपद्ध 6 ; ़1द्ध दद;कद्ध 1 ़ 2 ़ 3 ़ण्ण्ण़् द ;पअद्ध 2

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