5ण्1 समग्र अवलोकन हम जानते हैं कि एक वास्तविक संख्या का वगर् सदैव )णेत्तर होता है। उदाहरणाथर्, ;4द्ध2 त्र 16 और ;दृ 4द्ध2 त्र 16 है।इसलिए16 का वगर्मूल± 4 है।किसी )णात्मक संख्या के वगर्मूल के बारे में क्या कहा जा सकता है? यह स्पष्ट है कि एक )णात्मक संख्या का कोइर् वास्तविक वगर्मूल नहीं हो सकता। अतः, हमें वास्तविक संख्याओं के निकाय को एक ऐसे निकाय में विस्तृत करने की आवश्यकता है जिसमें हम )णात्मक संख्याओं के वगर्मूल भी ज्ञात कर सवेंफ। आॅयलर ;1707 - 1783द्ध ऐसा प्रथम गण्िातज्ञ था, जिसने - 1 के धनात्मक वगर्मूल के लिए संकेत पख्आयोटा ;;पवजंद्ध, प्रयुक्त किया। अथार्त्, पत्र 5ण्1ण्1 काल्पनिक संख्याएँ किसी )णात्मक संख्या का वगर्मूल एक काल्पनिक संख्या कहलाता है, जैसे 91−त्र− 9 त्र प3ए −त्र−7 17 त्रप7 5ण्1ण्2 प की पूणा±कीय घातें पत्र −1ए प2 त्र दृ 1ए प3 त्र प2 पत्र दृ पए प4 त्र ;प2द्ध2 त्र ;दृ1द्ध2 त्र 1ए इत्यादि। ददझ 4 के लिएए पअभ्िाकलित करने के लिए, हम दको4 से भाग देकर उसेदत्र 4उ़ तके रूप में लिखते हैं, जहाँ उभागपफल है और तशेषपफल है 0 ≤ त≤ 4 है।द4उ़ततअतः, पत्र पत्र;प4द्धउण् ;पद्धतत्र ;1द्धउ;पद्धतत्र पद्ध394 × 9 ़ 3उदाहरणाथर्, ;प त्र प त्र;प4द्ध9 ण् ;पद्ध3 त्र प3 त्र दृ पतथा ;पद्धदृ435 त्र पदृ ;4 × 108 ़ 3द्ध त्र;पद्धदृ ;4 × 108द्ध ण् ;पद्धदृ 3 11 प त्रण् त्रत्रप4108 3 4;द्ध प ;द्धप ;द्धप ;पद्ध यदि ंऔर इधनात्मक वास्तविक संख्याएँ हैं, तो −×−त्र− 1 ं×− 1 त्रंइ ×इपंपइ त्र−ंइ ;पपद्ध ंण् इत्र ंइयदि ंऔर इधनात्मक हैं अथवा इनमें से कम से कम एक )णात्मक हो या शून्य हो। परंतु ए यदि ंऔर इदोनों )णात्मक हैं। 5ण्1ण्3 सम्िमश्र संख्याएँ 1ण् वह संख्या जिसे ं ़ पइ के रूप में लिखा जा सके एक सम्िमश्र संख्या कहलाती है, जहाँ ं और इ वास्तविक संख्याएँ हैं तथाप त्र −1 है। 2ण् यदि ्र त्र ं ़ पइ एक सम्िमश्र संख्या है, तो ं और इ क्रमशः इस सम्िमश्र संख्या के वास्तव और काल्पनिक भाग कहलाते हैं। इन्हें त्म ;्रद्ध त्र ं और प्उ ;्रद्ध त्र इ लिखा जाता है। 3ण् सम्िमश्र संख्याओं के लिए क्रम संबंध ‘से बड़ा है’ और ‘से छोटा है’ परिभाष्िात नहीं है। 4ण् यदि किसी सम्िमश्र संख्या का काल्पनिक भाग शून्य हो, तो वह एक शु(तः वास्तविक संख्या कही जाती है तथा यदि उसका वास्तविक भाग शून्य हो, तो वह शु(तः काल्पनिक संख्या कही जाती है। उदाहरणाथर्, 2 एक शु(तः काल्पनिक संख्या है, क्योंकि इसका काल्पनिक भाग शून्य है तथा 3प के शु(तः काल्पनिक संख्या है, क्योंकि इसका वास्तविक भाग शून्य है। 5ण्1ण्4 सम्िमश्र संख्याओं का बीजगण्िात 1ण् दो सम्िमश्र संख्या ्र1 त्र ं ़ पइ और ्र2 त्र ब ़ पक बराबर कहलाती है, यदि ं त्र ब और इ त्र क 2ण् मान लीजिए कि ्र1 त्र ं ़ पइ और ्र2 त्र ब ़ पक दो सम्िमश्र संख्याएँ हैं। तब ्र1 ़ ्र2 त्र ;ं ़ बद्ध ़ प ;इ ़ कद्ध होता है। 5ण्1ण्5 सम्िमश्र संख्याओं का योग निम्नलिख्िात गुणों ;गुणध्मो±द्ध को संतुष्ट करता है 1ण् क्योंकि दो सम्िमश्र संख्याओं का योग पुनः एक सम्िमश्र संख्या होता है, इसलिए सम्िमश्र संख्याओं का समुच्चय योग के लिए संवृत है। 2ण् सम्िमश्र संख्याओं का योग क्रम विनिमेय होता है, अथार्त् ्र1 ़ ्र2 त्र ्र2 ़ ्र1 3ण् सम्िमश्र संख्याओं का योग साहचयर् ;या सहचारीद्ध होता है, अथार्त् ;्र1 ़ ्र2द्ध ़ ्र3 त्र ्र1 ़ ;्र2 ़ ्र3द्ध 4ण् किसी सम्िमश्र संख्या ्र त्र ग ़ प ल के लिए एक ऐसी सम्िमश्र संख्या 0, अथार्त्;0 ़ 0पद्ध ऐसी होती है कि्र ़ 0 त्र 0 ़ ्र त्र ्र होता है। यह संख्या 0 योग के लिए तत्समक अवयव कहलाती है। 5ण् एक सम्िमश्र संख्या्र त्र ग ़ पल के लिए, सदैव एक सम्िमश्र संख्या दृ ्र त्र दृ ग दृ पल ऐसी होती है कि ्र ़ ;दृ ्रद्ध त्र ;दृ ्रद्ध ़ ्र त्र 0। यह संख्या दृ्रए ्र का योज्य प्रतिलोम कहलाती है। 5ण्1ण्6 सम्िमश्र संख्याओं का गुणन मान लीजिए कि ्र1 त्र ं ़ पइ और ्र2 त्र ब ़ पकए दो सम्िमश्र संख्याएँ हैं। तब ्र त्र ;ं ़ पइद्ध ;ब ़ पकद्ध त्र ;ंब दृ इकद्ध ़ प ;ंक ़ इबद्ध1 ण् ्र21ण् क्योंकि दो सम्िमश्र संख्याओं का गुणनपफल पुनः एक सम्िमश्र संख्या है, इसलिए सम्िमश्र संख्याओं का समुच्चय गुणन के लिए संवृत है। 2ण् सम्िमश्र संख्याओं का गुणन क्रम विनिमेय होता है, अथार्त् ्रण््र त्र ्रण््र1221 सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 75 3ण् सम्िमश्र संख्याओं का गुणन सहचारी होता है, अथार्त् ;्र1ण््र2द्ध ण् ्र3 त्र ्र1 ण् ;्र2ण््र3द्ध 4ण् किसी सम्िमश्र संख्या ्र त्र ;ग ़ पलद्ध के लिए एक ऐसी सम्िमश्र संख्या 1, अथार्त्;1 ़ 0पद्धए इस प्रकार कि ्र ण् 1 त्र 1 ण् ्र त्र ्र होता है। यह संख्या 1 गुणन के लिए तत्समक अवयव कहलाती है। 5ण् किसी शून्येतर सम्िमश्र संख्या ्र त्र ग ़ पल के लिए, एक सम्िमश्र संख्या 1 है जिसके लिए्र 111 ्र ⋅त्र⋅ ्र त्र1 होता है। , ्र का गुणनात्मक प्रतिलोम कहलाता है। अथार्त् ं ़ पइ का ्र ्र ्र ंपइ गुणनात्मक प्रतिलोम 1 त्र− है।ंपइ 2 इ2़ ं ़ 6ण् किन्हीं तीन सम्िमश्र संख्या ्र1ए ्र2 और ्र3 के लिए, ्र ण् ;्र ़ ्रद्ध त्र ्र ण् ्र ़ ्र ण् ्र123 1213 तथा ;्र ़ ्रद्ध ण् ्र त्र ्र ण् ्र ़ ्र ण् ्र1 2 31323 अथार्त् सम्िमश्र संख्याओं के लिए गुणन, योग पर वितरित ;या बंटितद्ध है। 5ण्1ण्7 मान लीजिए कि ्र1 त्र ं ़ पइ और ्र2 त्र ब ़ पक ;शून्येत्तरद्ध ्र ़ ;ंब ़इक द्ध;ंपइ इब −ंक द्धदो सम्िमश्र संख्याएँ हैं। तब, ्र1 झ् ्र2 त्र 1त्र त्र ़प22 22्र2 ़ ब ़ बबपक क ़क 5ण्1ण्8 एक सम्िमश्र संख्या का संयुग्मी मान लीजिए कि्र त्र ं ़ पइ एक सम्िमश्र संख्या है। तब इसके काल्पनिक भाग के चिन्ह को बदलने पर प्राप्त संख्या सम्िमश्र संख्या्र का संयुग्मी कहलाती है तथा इसे ्र से निदिर्ष्ट किया जाता है, अथार्त् ्र त्र ं दृ पइ ध्यान दीजिए कि्र का योज्य प्रतिलोमदृ ं दृ पइ है, जबकि इसका संयुग्मी ं दृ पइ है। हमें ज्ञात हैः 1ण् ;द्ध्र त्र्र 2ण् ्र ़ ्र त्र 2 त्म ;्रद्ध ए ्र दृ ्र त्र 2 प प्उ;्रद्ध 3ण् ्र त्र ्र ए यदि ्र शु(तः वास्तविक संख्या है। 4ण् ्र ़ ्र त्र 0 ⇔ ्र शु(तः काल्पनिक संख्या है। 5ण् ्र ण् ्र त्र क्ष्त्म ;्रद्धद्व2 ़ क्ष्प्उ ;्रद्धद्व2 6ण् ;्र्र द्ध ्र्र आर;्र −्र द्ध त्र्र दृ़ त्ऱ ै ्र1 212 12 12 ्र ;द्ध;ण्द्ध त्र्र्र द्धऔर ⎛⎞1 त्र ्र1 ए; ्र ≠0द्ध ्र्र ; द्धण्; 7ण्12 12 ⎜⎟2 ्र2 ;द्ध्र2⎝⎠ 5ण्1ण्9 एक सम्िमश्र संख्या का मापांक या निरपेक्ष मान मान लीजिए कि ्र त्र ं ़ पइ एक सम्िमश्र संख्या है। तब, इसके वास्तविक भाग के वगर् और काल्पनिक भाग के वगर् के योग का धनात्मक वगर्मूल ्र का मापांक ;निरपेक्ष मानद्ध कहलाता है। और इसे ्र से निदिर्ष्ट किया जाता है, अथार्त् ्र त्र ं2 ़इ2 सम्िमश्र संख्याओं के एक समुच्यय में, ्र झ ्रया ्र झ ्र अथर्हीन हैऋ परंतु1 2 21्र झ ्र या ्र ढ ्र अथर्पूणर् हैंऋ क्योंकि और वास्तविक संख्याएँ हैं।्र1 ्र21 2 1 2 5ण्1ण्10 एक सम्िमश्र संख्या के मापांक के गुण 1ण् ्रत्र 0 ⇔ ्र त्र 0ए अथार्त् त्म ;्रद्ध त्र 0 और प्उ ;्रद्ध त्र 0 2ण् ्र त्र ्र त्र − ्र 3ण् दृ ्र ≤ त्म ;्रद्ध ≤ ्र और दृ ्र ≤ प्उ ;्रद्ध ≤ ्र 22 2्र त्र ्र4ण् ्र्र त्र ए्र ्र्र 11्र्र त्र ्र ण् ्र ए त्र ;्र2 ≠ 0द्ध 5ण् 12 1 2 ्र ्र2 2 2 26ण् ्र ़ ्र त्र ्र ़ ्र 2 ़ 2त्म ; ्र्र द्ध1 2 1 2 12 2 27ण् ्र1 − ्र2 त्र ्र ़ ्र 2 −2त्म ; ्र्र द्ध1 2 12 8ण् ्र ़ ्र ≤ ्र ़ ्र1 2 1 2 9ण् ्र1 − ्र2 ≥ ्र − ्र1 2 2 2 2द्ध2 2210ण् ं्र − ़ इ्र1 ़ ं्र2 त्र ;ं ़इ द्ध; ्र ़ ्र1 इ्र2 1 2 विशेषतः 2 2 2द्ध्र1 − ्र2 ़ ्र ़ ्र 2 त्र2; ्र1 ़ ्र12 2 11ण् जैसा कि पूवर् में चचार् की जा चुकी है, एक सम्िमश्र संख्या ्र त्र ं ़ पइ ;≠ 0द्ध का गुणनात्मक प्रतिलोम ;व्युत्क्रमद्ध 1 − ्रंपइ त्र त्र 2्र ं2 ़इ2 ्र सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 77 5ण्2 आग±ड तल किसी सम्िमश्र संख्या ्र त्र ं ़ पइ को समकोण्िाक अक्षों के एक युग्म के सापेक्ष एक कातीर्य ;तलद्ध में एक अद्वितीय बिंदु;ंए इद्ध के रूप में निरूपित किया जा सकता है। सम्िमश्र संख्या0 ़ 0प मूल बिंदु व् ; 0ए 0द्ध को निरूपित करती है। एक शु(तः वास्तविक संख्या ंए अथार्त् ;ं ़ 0पद्ध को ग.अक्ष पर स्िथतबिंदु;ंए 0द्ध से निरूपित किया जाता है। इसीलिए, ग.अक्ष को वास्तविक अक्ष कहते हैं। एक शु(तः काल्पनिक संख्या पइए अथार्त् ;0 ़ पइद्ध को ल.अक्ष स्िथत बिंदु ;0ए इद्ध से निरूपित किया जाता है। इसीलिए, ल.अक्ष को काल्पनिक अक्ष कहते हैं। इसी प्रकार, तल में सम्िमश्र संख्याओं के बिंदुओं द्वारा निरूपण को आग±ड आरेख ;।तहंदकद्ध कपंहतंउद्ध कहते हैं। वह तल जिस पर सम्िमश्र संख्याओं को बिंदुओं के रूप में निरूपित किया जाता है। सम्िमश्र तल या आग±ड तल या गाउसनीय तल कहलाता है। यदि एक सम्िमश्र तल में, दो सम्िमश्र संख्या ्र1 और ्र2 को क्रमशः बिंदुओं च् और फ से निरूपित किया ्र1 − ्र2जाता है, तो त्र च्फ 5ण्2ण्1 एक सम्िमश्र संख्या का ध््रुवीय रूप मान लीजिए कि च् आग±ड तल में एक शून्येत्तर सम्िमश्र संख्या ्र त्र ं ़ पइ को निरूपित करने वाला एक बिंदु है। यदि व्च्ए ग.अक्ष की ध्नात्मक दिशा से कोणθ बनाये तो ्र त्र त ;बवेθ ़ पेपदθद्ध इस इसम्िमश्र संख्या का ध्ु्रवीय रूप कहलाता है, जहाँ त त्र ्र त्र ं2 ़इ2 है और जंदθ त्र है। यहाँθ ं सम्िमश्र संख्या्र का कोणांक ;ंतहनउमदज या ंउचसपजनकमद्ध कहलाता है तथा हम इसे ंतह ;्रद्ध त्र θ लिखते हैं। θ का वह अद्वितीय मान, जिससेदृ π≤ θ ≤ π हो, मुख्य कोणांक कहलाता है। ंतह ;्र1 ण् ्र2द्ध त्रंतह ;्र1द्ध ़ ंतह ;्र2द्ध ⎛ ्र1 ⎞ ंतह ⎜⎟ त्र ंतह ;्र1द्ध दृ ंतह ;्र2द्ध्र⎝ 2 ⎠ 5ण्2ण्2 एक द्विघात समीकरण का हल समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 जहाँ ंए इ और ब संख्याएँ ;वास्तविक या सम्िमश्र, ं ≠ 0 हैं, चर ग में एक व्यापक द्विघात समीकरण कहलाता है। चर के वे मान जो इस समीकरण को संतुष्ट करते हैं, इसके मूल कहलाते हैं। दृइ ़क्वास्तविक गुणांकों वाली द्विघात समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के दो मूल और2ं दृइ दृक् होते हैं, जहाँ क् त्र इ2 दृ 4ंब होता है, जो इस समीकरण का विविक्तकर2ं कहलाता है। $टिप्पण्िायाँ 1ण् जब क् त्र 0 है, तो द्विघात समीकरण के मूल वास्तविक और बराबर ;समानद्ध होते हैं। जब क् झ 0 है, तो मूल वास्तविक और असमान होते हैं। साथ ही, यदि ंए इए ब ∈ फ और क् एक पूणर् वगर् है, तो समीकरण के मूल परिमेय और असमान होते हैं तथा यदि ंए इए ब ∈ फ और क् एक पूणर् वगर् नहीं है, तो मूल अपरिमेय होते हैं और एक युग्म के रूप में होते हैं। जब क् ढ 0 तो द्विघात समीकरण के मूल अवास्तविक ;सम्िमश्रद्ध होते हैं। −इ 2ण् यदि αए β समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के मूल हैं, तो मूलों का योग ;α ़ βद्ध त्र औरं बमूलों का गुणनपफल ; α ण् βद्ध त्र होता है।ं 3ण् मान लीजिए कि किसी द्विघात समीकरण के मूलों का योग ै है और मूलोें का गुणनपफल च् है, तो वह समीकरण ग2 दृ ैग ़ च् त्र 0 होता है। 5ण्3ण् हल किए हुए उदाहरण लघु उत्तरीय प्रश्न ;ै।द्ध उदाहरण 1 मान ज्ञात कीजिए रू ;1 ़ पद्ध6 ़ ;1 दृ पद्ध3 हल ;1 ़ पद्ध6 त्र क्ष्;1 ़ पद्ध2द्व3 त्र ;1 ़ प2 ़ 2पद्ध3 त्र ;1 दृ 1 ़ 2पद्ध3 त्र 8 प3 त्र दृ 8प तथा ;1 दृ पद्ध3 त्र 1 दृ प3 दृ 3प ़ 3प2त्र1 ़ प दृ 3प दृ 3 त्र दृ 2 दृ 2प अतः, ;1 ़ पद्ध6 ़ ;1 दृ पद्ध3 त्रदृ8प दृ 2 दृ 2प त्र दृ 2 दृ 10प 1 उदाहरण 2 यदि ;ग ़पलद्ध3 त्र ं ़ पइए जहाँ लए ंए इ ∈ त् तो दशार्इए कि गल− त्र दृ 2 ;ं2 ़ इ2द्धंइ1 हल ;ग ़पलद्ध3 त्र ं ़ पइ ⇒ ग ़ पल त्र ;ं ़ पइद्ध3 अथार्त् ग ़ पल त्र ं3 ़ प3 इ3 ़ 3ं2 ;पइद्ध ़ 3ं ;पइद्ध2 त्र ं3 दृ पइ3 ़ प3ं2इ दृ 3ंइ2 त्र ं3 दृ 3ंइ2 ़ प ;3ं2इ दृ इ3द्ध ⇒ ग त्र ं3 दृ 3ंइ2 और ल त्र 3ं2इ दृ इ3 सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 79 अतः, ग त्र ं2 दृ 3इ2 और इल त्र 3ं2 दृ इ2 ं इसलिए, ग −ल त्र ं2 दृ 3इ2 दृ 3ं2 ़ इ2 त्र दृ 2 ं2 दृ 2इ2 त्र दृ 2 ;ं2 ़ इ2द्धंइउदाहरण 3 समीकरण ्र2 त्र ्र को हल कीजिए, जहाँ ्र त्र ग ़ पल है। हल ्र2त्र ्र ⇒ ग2 दृ ल2 ़ प2गल त्र ग दृ पल अतः, ग2 दृ ल2 त्र ग ण्ण्ण् ;1द्ध और 2गल त्र दृ ल ण्ण्ण् ;2द्ध 1 ;2द्ध से, हम ल त्र 0 या ग त्र −प्राप्त करते हैं।2 जब ल त्र 0 , तो ;1द्धए से हमग2 दृ ग त्र 0 प्राप्त करते हैं, जिससे ग त्र 0 या ग त्र 1 प्राप्त होता है। 1 113 3 जब ग त्र − तो;1द्ध से हम ल2 त्र ़ अथार्त् ल2 त्र 4 जिससे ल त्र ± प्राप्त होता है।242 2 1अतः समीकरण के हल 0 ़ प0ए 1 ़ प0ए −़ प 31 ए −−प 3 है।2 222 ्र ़उदाहरण 4 यदि 21 का काल्पनिक भाग - 2 है, तो दशार्इए कि ्र को आग±ड तल में निरूपितप्र ़1 करने वाले बिंदु का बिंदु पथ एक सरल रेखा है। हल मान लीजिए कि ्र त्र ग ़ पल तब, 21्र ़ 2; ग़़ 1 ;2 ग 1द्ध प2 लपलद्ध ़़ त्रत्र ़1; ़़ पल द्ध1 ;1 लद्धप्रपग −़ पग क्ष्;2 ग 1द्ध पल क्ष्;1 −− पग द्व़़2द्व लद्धत्र × क्ष्;1 द्धद्व क्ष्;1 −−लद्ध पग द्व−़लपग ;2ग़−़ 1 लप ;2ल −2 ल22ग2द्ध −− गद्ध त्र 1 ल22 लग2़ −़ 21्र ़⎞2 ल−2 ल22ग2⎛ −− गइस प्रकार, प्उ ⎜ ⎟त्र ⎝प्र ़11 ल22ल 2⎠ ़−़ ग ⎛2्र ़1⎞परंतु, प्उ ⎜⎟त्र दृ 2 ;दिया हैद्ध⎝प्र ़1 ⎠ 2ल −2 ल2 −2ग2 −गअतः, त्र−2 1़ ल2 −2ल ़ग2 ⇒ 2ल दृ 2ल2 दृ 2ग2 दृ ग त्र दृ 2 दृ2ल2 ़ 4ल दृ 2ग2 अथार्त् ग ़ 2ल दृ 2 त्र 0ए जो एक सरल रेखा का समीकरण है। उदाहरण 5 यदि ्र21−त्र ्र 2 ़1 है, तो दशार्इए कि ्र काल्पनिक अक्ष पर स्िथत है। हल मान लीजिए कि ्र त्र ग ़ पल, तब द्य ्र2 दृ 1 द्य त्र द्य ्र द्य2़ 1 ग22 प⇒ −ल −़ 12गल त्र ग़पल 2 ़1 ⇒ ;ग2 दृ ल2 दृ1द्ध2 ़ 4ग2 ल2 त्र ;ग2 ़ ल2 ़ 1द्ध2 ⇒ 4ग2 त्र 0 अथार्त् ग त्र 0 अतः,्रए ल.अक्ष, अथार्त् काल्पनिक अक्ष पर स्िथत है। उदाहरण 6 मान लीजिए कि ्र1 और ्र2 दो सम्िमश्र संख्याएँ इस प्रकार है कि ्र1 ़प्र2 त्र0 है तथा ंतह ;्र1 ्र2द्ध त्र πए तब ंतह ;्र1द्ध ज्ञात कीजिए। हल दिया हैः ्र ़प्र त्र012 ⇒ ्र त्र प ्रऔर ्र त्र दृ प ्र12 21 इस प्रकार ंतह ;्र्रद्ध त्र ंतह ;्रद्ध ़ ंतह ;दृप ्रद्ध त्र π1211⇒ ंतह ;दृ प्र12द्ध त्र π ⇒ ंतह ;दृ प द्ध ़ ंतह ्र12;द्ध त्र π ⇒ ंतह ;दृ प द्ध ़ 2 ंतह ;्र1द्ध त्र π −π ⇒ ़ 2 ंतह ;्र1द्ध त्र π2 3π⇒ ंतह ;्रद्ध त्र14 उदाहरण 7 मान लीजिए कि ्र1 और ्र2 दो सम्िमश्र संख्याएँ इस प्रकार हैं कि द्य्र1 ़ ग2द्य त्र द्य्र1द्य ़ ्र2द्य तब दशार्इए कि ंतह ;्र1द्ध दृ ंतह ;्र2द्ध त्र 0 हल मान लीजिए कि ्र त्र त ;बवेθ ़ प ेपद θद्ध तथा ्र त्र त ;बवेθ ़ प ेपद θद्ध11112222जहाँ त1 त्र ए ंतह ;द्धत्र θ1ए त2्र त्र और ंतह ;्र2द्ध त्र θ2्र1 ्र21़्र्रहमें ज्ञात है त्र ्र ़ ्र12 1 2 त्र 1 ;बवे 1 पेपद θ द्ध ़ 2 ;बवे θ़ पेपद θ2त θ़ 1 त 2द्ध त्रत ़त12 सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 81 22 2ततθत्ऱ त्र त़़2 तबवे; θ−द्ध; तत द्ध ⇒ बवे ;θ दृ θ द्ध त्र11212 1212 12⇒θ1 दृ θ2 त्र 0 अथार्त् θ1 त्र θ2 अथार्त् ंतह;्रद्ध त्रंतह;्रद्ध या ंतह; ्रद्ध दृंतह;्रद्ध त्र012 12 111 ्र त्र्रत्र्र त्र ़़ त्र11 2 3उदाहरण 8 यदि ्र1ए ्र2ए ्रऐसी सम्िमश्र संख्याएँ हैं कि ए3 ्र्र्र12 3 तो ्ऱ़्र्र का मान ज्ञात कीजिए।12 3 हल ्र त्र्रत्र्र त्र11 2 3 2 2⇒ ्र त्र्र त्र्र 2 त्र11 2 3 ⇒ 1 22 त्र्र्रत्र1्र्र त्र्र्र1 33 111⇒ ्रत्र ए ्रत्र ए ्रत्र 12 3 ्र्र्र123 111़़ त्र1दिया है कि ्र्र्र12 3 ्ऱ़ ्र्र त्र1⇒ ़़्र्र्र त्र1 एअथार्त् 123123 ⇒ ़़्र्र्र त्र1123 उदाहरण 9 यदि एक सम्िमश्र संख्या्रत्रिाज्या 3 इकाइर् और वेंफद्र ;दृ 4ए 0द्ध वाले एक वृत्त के अभ्यंतर या उसकी परिसीमा पर स्िथत है, तो ्ऱ1 के अिाकतम और न्यूनतम मान ज्ञात कीजिए। हल ्रको निरूपित करने वाले बिंदु की वृत्त के वेंफद्र से दूरी ;4 प0द्ध त्र्र−−़ ्ऱ4 अब, ्र 1़त्र्ऱ4दृ3 ≤्ऱ4 ़−3 336≤़त्र अतः, ्ऱ1 का अिाकतम मान 6 है। क्योंकि किसी सम्िमश्र संख्या के मापांक का न्यूनतम मान शून्य होता है, इसलिए द्य्ऱ 1द्य का न्यूनतम मान 0 है। उदाहरण 10 वे बिंदु निधार्रित कीजिए, जिनके लिए 3ढढ4्र हलः 4 ग2 ़ ल्रढ⇒2 ढ 16ए जो वेंफद्र मूलबिंदु और त्रिाज्या 4 इकाइर् वाले वृत्त का अभ्यंतर है तथा 3 ग2 ़ ल्रझ⇒2 झ 9ए जो वेंफद्र मूलबिंदु और त्रिाज्या 3 इकाइर् वाले वृत का बहिभार्ग है। अतः ्र3 ढ ढ 4 वह भाग है जो दो वृत्त ग2 ़ ल2 त्र 9 और ग2 ़ ल2 त्र 16 के बीच में स्िथत है। उदाहरण 11 2ग4 ़ 5ग3 ़ 7ग2 दृ ग़ 41 का मान ज्ञात कीजिए, जब गत्र दृ 2 दृ हल ग़ 2 त्र दृ 3 प ⇒ ग2 ़4ग़ 7 त्र 0 अतः 2ग4 ़ 5ग3 ़ 7ग2 दृ ग ़ 41 त्र ;ग2 ़ 4ग़ 7द्ध ;2ग2 दृ 3ग़ 5द्ध ़ 6 त्र 0 × ;2ग2 दृ 3ग़ 5द्ध ़ 6 त्र 6 उदाहरण 12 च् का वह मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए समीकरण ग2 दृ च्ग़ 8 त्र 0 के मूलों का अंतर 2 हो। हल मान लीजिए कि ग2 दृ च्ग़ 8 त्र 0 के मूल α और β हैं। इसलिए, α ़ β त्र च् और α ण् β त्र 8 अब, α दृ β त्र ± ; ़द्धβ 2 दृ 4 αβα अतः, 2 त्र ± च्2 −32 ⇒ च्2 दृ 32 त्र 4ए च्2 त्र 36 अथार्त् च् त्र ± 6 उदाहरण 13 ंका वह मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए समीकरण ग2 दृ ;ंदृ 2द्ध गदृ ;ं़ 1द्ध त्र 0 के मूलों के वगो± का योग न्यूनतम है। हल मान लीजिए कि αए β दिए हुए समीकरण के मूल हैं। अतः, α ़ β त्र ंदृ 2 और αβ त्र दृ ; ं़ 1द्ध अब, α2 ़ β2 त्र;α ़ βद्ध2 दृ 2αβ त्र;ंदृ 2द्ध2 ़ 2 ;ं़ 1द्ध त्र;ंदृ 1द्ध2 ़ 5 अतः, α2 ़ β2 न्यूनतम होगा, जब ;ंदृ 1द्ध2 त्र 0ए अथार्त् ंत्र 1 दीघर् उत्तरीय प्रश्न ;स्।द्ध उदाहरण 14 यदि सम्िमश्र संख्याओं ्र1 और ्र2 के लिए, 2 − 2द्ध तो ाका मान ज्ञात कीजिए।1− ्र्र ्र1 − ्र2 2त्र ा;1− ्र 2 द्ध ;1 − ्र12 1 2 हलः 2 − 2स्भ्ै त्र 1− ्र्र ्र1 − ्र212 त्र ;1− ्र्र द्ध ;1 −्र्र द्ध − ;्र− ्रद्ध; ्र− ्रद्ध12 12 1212 त्र ;1− ्र्रद्ध ;1 − ्र्रद्ध −; − द्ध; ्र्र − द्ध्र्र12 12 1212 त्र1 ़ ्र्र्र्र − ्र्र − ्र्र1 122 11 22 सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 83 2 ⋅ 2 − 2 − 2 त्र1़ ्र ्र ्र ्र1 2 1 2 2द्धत्र ;1− ्र 2द्ध ;1 − ्र1 2 2द्ध्र 2 द्ध;1 − ्र2त्भ्ै त्र ा ;1 दृ 1 अतः, स्भ्ै और त्भ्ै को बराबर करने पर ा त्र 1 उदाहरण 15 यदि ्र1 और ्र2 दोनों ्र ़ ्र त्र2 ्र −1ए जहाँ ंतह ;्र1 दृ ्र2द्ध त्र 4 π को संतुष्ट करते हैं, तो प्उ ;्र1 ़ ्र2द्ध ज्ञात कीजिए। हल मान लीजिए कि्र त्र ग ़ पलए ्र1 त्र ग1 ़ पल1 और ्र2 त्र ग2 ़ पल2 है। तब, ्र ़ ्र त्र 2 ्र −1 ⇒ ;ग ़ पलद्ध ़ ;ग दृ पलद्ध त्र 2 1 पलग −़⇒ 2ग त्र 1 ़ ल2 ण्ण्ण् ;1द्ध क्योंकि ्र1 और ्र2 दोनों ;1द्ध को संतुष्ट करते हैं, इसलिए हमें प्राप्त हैः 2ग त्र 1 ़ ल2 और 2गत्र 1 ़ ल2 11 2 2 ⇒ 2 ;ग दृ गद्ध त्र ;ल ़ लद्ध ;ल दृ लद्ध1212 12⎛ लल ⎞⇒ 2 त्र ;ल ़ लद्ध ⎜ 1 − 2 ⎟ ण्ण्ण् ;2द्ध12ग −ग⎝ 12 ⎠ पुनः ्र दृ ्र त्र ;ग दृ गद्ध ़ प ;ल दृ लद्ध1 212 121 − 2अतः जंद θ त्र लल ए जहाँ θ त्र ंतह ;्र1 दृ ्र2द्ध है।ग1 −ग2 π लल1 − 2 ⎛ π⎞⇒ जंद त्र ⎜क्योंकि θत्र ⎟4 ग −ग ⎝⎠1 2 4 ललअथार्त् 1 त्र 1 − 2 ग1 −ग2 अतः, ;2द्ध से हमें प्राप्त होता हैः 2 त्र ल1 ़ ल2, अथार्त् प्उ ;्र1 ़ ्र2द्ध त्र 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न उदाहरण 16 रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएः ;पद्ध ष्ंष् का वास्तविक मान जिसके लिए 3प3 दृ 2ंप2 ़ ;1 दृ ंद्धप ़ 5 वास्तविक है होगा। πऋऋऋऋऋऋ;पपद्ध यदि ्र त्र2 और ंतह ;्रद्ध त्र 4 है, तो ्र त्र है। π;पपपद्ध ंतह ;्रद्ध त्र को संतुष्ट करने वाले ्र का बिंदु पथ ऋऋऋऋऋऋ है।3 4दृ3 ऋऋऋऋऋऋद;पअद्ध ;−−1द्ध का मान है, जहाँ द ∈ छ −प;अद्ध सम्िमश्र संख्या 1 का संयुग्मी है।1़प ;अपद्ध यदि एक सम्िमश्र संख्या तीसरे चतुथा±श में स्िथत है, तो उसका संयुग्मी में स्िथत होगा। ;अपपद्ध यदि ;2 ़ पद्ध ;2 ़ 2पद्ध ;2 ़ 3पद्ध ण्ण्ण् ;2 ़ दपद्ध त्र ग ़ पल तो 5ण्8ण्13 ण्ण्ण् ;4 ़ द2द्ध त्र ऋऋऋऋऋऋ हल ;पद्ध 3प3 दृ 2ंप2 ़ ;1 दृ ंद्धप ़ 5 त्र दृ3प ़ 2ं ़ 5 ़ ;1 दृ ंद्धप त्र 2ं ़ 5 ़ ;दृ ं दृ 2द्ध पए जो वास्तविक होगा यदि दृ ं दृ 2 त्र 0 अथार्त् ं त्र दृ 2 ⎛ π π⎞⎛11 ⎞ ्र बवे ़प ेपद त्र2 ़प त्र 2 ;1 ़पद्ध;पपद्ध ्र त्र ⎜ ⎟⎜ ⎟⎝ 44 ⎠⎝ 22 ⎠ ;पपपद्ध मान लीजिए कि ्र त्र ग ़ पलए तो इसका ध््रुवीय रूप ्र त्र त ;बवे θ ़ प ेपद θद्ध है, जहाँ जंद θत्रल और θए ंतह ;्रद्ध है। θत्रπदिया है।ग 3 π लइस प्रकार, जंद त्र ल⇒त्र 3ग ए जहाँग झ 0ए ल झ 0 है।3 ग अतः, ्र का बिंदु पथ, मूलबिंदु के अतिरिक्त ल त्र3ग ए का प्रथम चतुथा±श में एक भाग है। 4दृ3 4द−34द −31−1द्ध द त्र;द्ध त्र;−पद्ध−प ;द्ध−प त्र ;द्धप 3;पअद्ध यहाँ, ;दृ − 1 1 प 3 त्रत्र 2 त्र−प −प पप 1 प22 −− 2प त्र 1−प 1−प −प 1़− प 11 ;अद्ध त्र ×त्र 2 त्र ़त्र−प 1़प 1़प 1−प 1−प 11 1−पअतः, का संयुग्मी प है।1़प ;अपद्ध किसी सम्िमश्र संख्या का संयुग्मी ग.अक्ष के सापेक्ष उसका प्रतिबिंब होता है। अतः, एक संख्या तीसरे चतुथा±श में स्िथत है, तो उसका प्रतिबिंब दूसरे चतुथा±श में स्िथत होगा। ;अपपद्ध दिया हैः ;2 ़ पद्ध ;2 ़ 2पद्ध ;2 ़ 3पद्ध ण्ण्ण् ;2 ़ दपद्ध त्र ग ़ पल ण्ण्ण् ;1द्ध सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 85 ⇒ ;2 ़पद्ध ;2 ़2 द्ध;2 ़3 द्धण्ण्ण्;2 ़दप द्ध ;प त्ऱपल द्धत्र − ; गप गपल द्ध अथार्त् ;2 दृ पद्ध ;2 दृ 2पद्ध ;2 दृ 3पद्ध ण्ण्ण् ;2 दृ दपद्ध त्र ग दृ पल ण्ण्ण् ;2द्ध;1द्ध और ;2द्ध का गुणा करने पर, हमें प्राप्त होता हैः 5ण्8ण्13 ण्ण्ण् ;4 ़ द2द्ध त्र ग2 ़ ल2 उदाहरण 17 बताइए कि निम्नलिख्िात में से कौन सा कथन सत्य है और कौन सा असत्य है। ;पद्ध एक शून्येतर सम्िमश्र संख्या को प से गुणा करने पर, वह उसे वामावतर् दिशा में एक समकोण पर घुमा देता है। ;पपद्ध सम्िमश्र संख्या बवेθ ़ प ेपदθए θ के किसी मान के लिए शून्य हो सकती है। ;पपपद्ध यदि कोइर् सम्िमश्र संख्या अपने संयुग्मी के साथ संपाती है, तो वह संख्या अवश्य ही काल्पनिक अक्ष पर स्िथत होना चाहिए। 7π ;पअद्ध सम्िमश्र संख्याएं ्र त्र ;1 ़प 3द्ध ;1 ़ पद्ध ;बवे θ ़ प ेपद θद्ध का कोणांक ़ θ है।12 ;अद्ध सम्िमश्र संख्या ्रए जिसके लिए ्र 1़ढ्र −1 है, को निरूपित करने वाले बिंदु एक वृत्त के अभ्यंतर में स्िथत होते हैं। ;अपद्ध यदि तीन सम्िमश्र संख्याएँ ्र1ए ्र2 और ्र3 एक समांतर श्रेणी ;।ण्च्द्ध में हैं तो वे सम्िमश्र तलमें एक वृत्त पर स्िथत होते हैं। ;अपपद्ध यदि द एक ध्नात्मक पूणा±क है, तो पद ़ ;पद्धद़1 ़ ;पद्धद़2 ़;पद्धद़3 का मान शून्य है। हल ;पद्ध सत्य, मान लीजिए कि व्च् द्वारा निरूपित सम्िमश्र संख्या ्र त्र 2 ़ 3प है। तब, प्र त्र दृ3 ़ 2प रेखाखंड व्फ से निरूपित होगा, जहाँ व्च् वामावतर् दिशा में एक समकोण पर घूमने पर व्फ के संपाती हो जाता है। ;पपद्ध असत्य, क्योंकि बवेθ ़ पेपदθ त्र 0 ⇒ बवेθत्र 0 और ेपदθत्र 0ण् परंतु θ का कोइर् ऐसा मान नहीं है, जिसके लिए बवेθ और ेपदθ एक साथ शून्य होंगे। ;पपपद्ध असत्य, क्योंकि ग ़ पल त्र ग दृ पल ⇒ ल त्र 0 ⇒ संख्या ग.अक्ष पर स्िथत है। ;पअद्ध सत्यए ंतह ;्रद्ध त्र ंतह ;1 ़ प 3द्ध ़ ंतह ;1 ़ पद्ध ़ ंतह ;बवेθ ़ पेपदθद्ध ππ 7π⇒ ़़θत्र ़θ 34 12 ;अद्ध असत्य, क्योंकि ग ़़1 ढपल ग ़−पल 1 ⇒ ;ग ़ 1द्ध2 ़ ल2 ढ ;ग दृ 1द्ध2 ़ ल2 जिससे 4ग ढ 0 प्राप्त होता है। ़्र्र;अपद्ध असत्य, क्योंकि यदि ्रए ्रऔर्रएक समांतर श्रेणी में हों, तो ्र त्र13 ⇒ ्रए ्रऔर123 22 12 ्र3 का मध्य बिंदु है। इसका अथर् है कि ्र1ए ्र2 और ्र3 संरेख हैं। ;अपपद्ध सत्य, क्योंकि पद ़ ;पद्धद़1 ़ ;पद्धद़2 ़ ;पद्धद़3 त्र पद ;1 ़ प ़ प2 ़ प3द्ध त्र पद ;1 ़ प दृ 1 दृ पद्ध त्र पद ;0द्ध त्र 0 उदाहरण 18 स्तंभ । और स्तंभ ठ के कथनों का सही मिलान कीजिएः स्तंभ । स्तंभ ठ ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध 1़प2 ़ प4 ़ प6 ़ ण्ण्ण् प20 का मान है ;पद्ध पदृ1097 का मान है ;पपद्ध 1़प का संयुग्मी किस चतुथार्ंश में स्िथत है ;पपपद्ध शु(तः काल्पनिक सम्िमश्र संख्या शु(तः वास्तविक सम्िमश्र संख्या द्वितीय चतुथा±श ;कद्ध 12 1 ़ − प प किस चतुथार्ंश में स्िथत है ;पअद्ध चैथा चतुथा±श ;मद्ध यदि ंए इए ब ∈ त् और इ2 दृ 4ंब ढ 0 ;अद्ध संयुग्मी युग्मों में घटित नहीं हो सकते हैं तब समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 ;द्धि के मूल अवास्तविक एवं सम्िमश्र हैं यदि ंए इए ब ∈ त् और इ2 दृ 4ंब झ 0 ;अपद्ध संयुग्मी युग्मों में घटित हो सकते हैं एवंइ2 दृ 4ंब एक पूणर् वगर् है, तो समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के मूल हैं हल ;ंद्ध ⇔ ;पपद्धए क्योंकि 1 ़ प2 ़ प4 ़ प6 ़ ण्ण्ण् ़ प20 त्र 1 दृ 1 ़ 1 दृ 1 ़ ण्ण्ण् ़ 1 त्र 1 ;जो शु(तः एक वास्तविक सम्िमश्र संख्या हैद्ध 11 11 प;इद्ध ⇔ ;पद्धए क्योंकि पदृ1097 त्र त्र त्र त्रत्र त्र−प , जो1097 4 2741 ़ 4274 2;द्धपप× ;द्धप पपप शु(तः एक काल्पनिक सम्िमश्र संख्या है। ;बद्ध ⇔ ;पअद्धए 1 ़ प का संयुग्मी1 दृ प है, जो बिंदु;1ए दृ1द्ध से निरूपित किया जाता है और यह चैथे चतुथा±श में स्िथत है। 12प 12प 1़प −़प 1़़ 13 3;कद्ध ⇔ ;पपपद्धए क्योंकि ⎛13में बिंदु −ए⎜⎝22 त्र × त्र त्र−़ प , जिसे द्वितीय चतुथा±श1दृ प 1−प 1़प 2 22 ⎞से निरूपित किया जाता है।⎟⎠सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 87 ;मद्ध ⇔ ;अपद्धए यदि इ2 दृ 4ंब ढ 0 तो त्र क् ढ 0 अथार्त् क् का वगर्मूल एक काल्पनिक संख्या इ−±है। अतः मूल ग त्र काल्पनिक सख्ंया है, अथार्त् मूल संयुग्मी युग्मों में हैं।2ं ;द्धि ⇔ ;अद्धए समीकरण ग2 दृ ;5 ़ 2द्ध ग ़ 5 2त्र 0 पर विचार कीजिए, जहाँ ं त्र 1ए इ त्र दृ ;5 ़ 2द्धए ब त्र 5 2स्पष्टतः ंए इए ब ∈ त् अब क् त्र इ2 दृ 4ंब त्र क्ष्दृ ;5 ़ 2द्धद्व2 दृ 4ण्1ण्5 2 त्र ;5 दृ 2द्ध2 5 ़ 2 ±− ;5 2द्ध अतः ग त्रत्र5ए 2 जिससे संयुग्मी युग्म नहीं बनता है।2 4द़1 −4द−1 उदाहरण 19रू पप का क्या मान है?2 41़ 4द−14द 4द −पपद −प पप −पपहलः पए क्योंकि त्र 22 1प − 2प −1 −2पत्र त्र त्रत्रप 22प 2प उदाहरण 20रू वह कौन - सा न्यूनतम धनात्मक पूणा±क द है, जिसके लिए ;1 ़ पद्ध2द त्र ;1 दृ पद्ध2द ? ⎛1़प ⎞2द हल द त्र 2ए क्योंकि ;1 ़ पद्ध2द त्र ;1 दृ पद्ध2द ⇒ ⎜त्र1 ⎝1−प ⎟ ⎠ ⇒ ;पद्ध2द त्र1 जो द त्र 2 के लिए संभव है ;∴ प4 त्र 1द्ध उदाहरण 21रू 3 ़ 7 प का व्युत्क्रम क्या है? ्र हलः ्र का व्युत्क्रम त्र 2्र 3 −7 प 37 प त्र दृ 16 1616अतः, 3 ़ 7 प का व्युत्क्रम त्र ⎛⎞ ्र1उदाहरण 22रू यदि ्र त्र 3़ प 3 और ्र त्र 3़ प, तो ज्ञात कीजिए कि ⎜⎟ किस चतुथा±श्र12⎝⎠ 2 में स्िथत है। ्र 3 ़ प 3 ⎛ 3़ 3 ⎞⎛ 3− 3 ⎞ हलः 1 त्र त्ऱ पए जो प्रथम चतुथा±श में स्िथत एक बिंदु से⎜ ⎟⎜ ⎟ ्र23 ़ प ⎝ 4 ⎠⎝ 4 ⎠ निरूपित होता है। 512 ़ 5 12प़ प − उदाहरण 23रू का संयुग्मी क्या है?512 − 5 12प़ प − हलः मान लीजिए कि 512़ प ़ 5 12 ़ प ़ 512प− प 5 12 − ्र त्र × 5 ़12प − 5 −12प 5 12 ़ 5 प़ प −12 512 ़512प़ 2 25144़ प −़ त्र 512प−512प़़ 33प3 त्र त्र त्र 0 − प 2प−22 अतः,्र का संयुग्मीत्र 0 ़ 3 प2 उदाहरण 24रू 1 दृ प के कोणांक का मुख्य मान क्या है? हलः मान लीजिए कि 1 दृ प के कोणांक का मुख्यमान θ है। ⎛π⎞ πक्योंकि जंद θ त्र दृ 1 त्र जंद ⎜− ⎟ ⇒θत्र− ⎝ 4 ⎠ 4 उदाहरण 25रू सम्िमश्र संख्या ;प25द्ध3 का ध््रुवीय रूप क्या है? प4×18़3 त्र ;प4द्ध18हलः ्र त्र ;प25द्ध3 त्र;पद्ध75 त्र ;पद्ध3 त्र प3 त्र दृ प त्र 0 दृ प ्र का ध््रुवीय रूप त्र त ;बवे θ ़ प ेपदθद्ध ⎧ ⎛π⎞ ⎛π⎞⎫ त्र 1बवे −़प ेपद −⎨⎜⎟ ⎜⎟⎬ ⎩⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠⎭ ππ त्र बवे दृ प ेपद22 उदाहरण 26 रू ्र का बिंदु पथ क्या होगा, यदि्र दृ 2 दृ 3प का कोणांक π है?4 हलः मान लीजिए कि ्र त्र ग ़ पल तब, ्र दृ 2 दृ 3प त्र ;ग दृ 2द्ध ़ प ;ल दृ 3द्ध सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 89 ल −3मान लीजिए कि ्र दृ 2 दृ 3प का कोणांक θ है। तब, जंद θत्रग−2 π ल −3 ⎛ π⎞जंद त्र क्योंकि θत्र⇒ ⎜⎟4 ग −2 ⎝ 4⎠ ल −3⇒ 1त्र अथार्त् ग दृ ल ़ 1 त्र 0 ग −2 अतः, ्र का बिंदु पथ एक सरल रेखा है। उदाहरण 27 यदि 1 दृ प समीकरणग2 ़ ंग ़ इ त्र 0 का एक मूल है, जहाँ ंए इ ∈ त्ए तब ं और इ के मान ज्ञात कीजिए। −ं हल मूलों का योग त्र त्र ;1 दृ पद्ध ़ ;1 ़ पद्ध ⇒ ं त्र दृ 2ण्1 ;क्योंकि अवास्तविक सम्िमश्र मूल संयुग्मी युग्मों में घटित होते हैंद्ध त्र− पद्धमूलों का गुणनपफल त्र इ ;1 पद्ध ;1 ़ ⇒ इ त्र 21 उदाहरण 28 से 33 तक प्रत्येक के लिए दिए हुए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए;डण्ब्ण्फण्द्धरू उदाहरण 28 1 ़ प2 ़ प4 ़ प6 ़ ण्ण्ण् ़ प2द हैः ;।द्ध धनात्मक ;ठद्ध )णात्मक ;ब्द्ध 0 ;क्द्ध इसका मान नहीं निकाला जा सकता हल ;क्द्ध 1 ़ प2 ़ प4 ़ प6 ़ ण्ण्ण् ़ प2द त्र 1 दृ 1 ़ 1 दृ 1 ़ ण्ण्ण् ;दृ1द्धद इसका मान तब तक नहीं निकाला जा सकता, जब तक कि द का ज्ञान न हो। उदाहरण 29 यदि सम्िमश्र संख्या ्र त्र ग ़ पल प्रतिबंध 11 को संतुष्ट करती है,्र ़त्र तो ्र स्िथत हैः ;।द्ध ग.अक्ष पर ;ठद्ध वेंफद्र ;1ए 0द्ध और त्रिाज्या 1 इकाइर् वाले एक वृत्त पर ;ब्द्ध वेंफद्र ;दृ1ए 0द्ध और त्रिाज्या 1 वाले वृत्त पर ;क्द्ध ल.अक्ष पर हल ;ब्द्धए 11 ⇒्र ़त्र;ग 1द्ध ़़पल त्र1 ⇒ ;ग ़1द्ध2 ़ ल2 त्र 1 वेंफद्र ;दृ1ए 0द्ध और त्रिाज्या 1 इकाइर् वाला एक वृत्त है। उदाहरण30 सम्िमश्र संख्याओं ्रए दृ प्र और ्र ़ प्र द्वारा सम्िमश्र तल में बनाये गये त्रिाभुज का क्षेत्रापफल है। 2 2;।द्ध ;ठद्ध्र ्र 2 ्र;ब्द्ध ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं2 हल ;ब्द्ध मान लीजिए कि ्र त्र ग ़ पल तब,दृ प्र त्र ल दृ पग अतः ्र ़ प्र त्र ;ग दृ लद्ध ़ प ;ग ़ लद्ध 2 ्रत्रिाभुज का वांछित क्षेत्रापफल त्र 1; ग2 ़ल2द्ध त्र 22 उदाहरण 31 समीकरण ्र ़−1 प त्र्र −़1 प निरूपित करता है एक ;।द्ध सरल रेखा ;ठद्ध वृत्त ;ब्द्ध परवलय ;क्द्ध अतिपरवलय हल ;।द्धए ्र ़−1 प त्र्र −़1 प ⇒ ;1 पद्ध्र −−़ त्र ;1 पद्ध्र −− ⇒ च्। त्र च्ठ ए जहाँ । बिंदु ;दृ1ए 1द्ध को व्यक्त करता है, ठ बिंदु ;1ए दृ1द्ध को व्यक्त करता है तथा च् बिंदु;गए लद्ध को व्यक्त करता है। ⇒ ्र रेखाखंड।ठ के लंब समद्विभाजक पर स्िथत है और लंब समद्विभाजक एक सरल रेखा होती है। उदाहरण 32 समीकरण ्र2 ़ 2त्र 0ए ्र ≠ 0 के हलों की संख्या है्र ;।द्ध1 ;ठद्ध 2 ;ब्द्ध 3 ;क्द्ध अपरिमित रूप से अनेक हल ;क्द्धए ्र2 ़ 2त्र 0ए ्र ≠ 0्र ⇒ ग2 दृ ल2 ़ प2गल ़ ग2 ़ ल2 त्र 0 ⇒ 2ग2 ़ प2गल त्र 0 ⇒2ग ;ग ़ पलद्ध त्र 0 ⇒ ग त्र 0 या ग ़ पल त्र 0 ;संभव नहींद्ध इसलिएः, ग त्र 0 और ्र ≠0 इसी प्रकार, ल का कोइर् भी वास्तविक मान हो सकता है। इसीलिए, अपरिमित रूप से अनेक हल। उदाहरण 33 ेपद π़प ;1 −बवे πद्ध का कोणांक है55 2ππ ππ;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध5 5 1510 सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 91 π⎛⎞हल ;क्द्धए यहाँ त बवे θ त्र ेपद πतथा त ेपद θ त्र 1 दृ बवे⎜⎟55⎝⎠ π⎛⎞ 1बवे π 2ेपद2 ⎜⎟− 5 10 त्रइसलिए, जंद θ त्र ⎝⎠ ππ ⎛⎞ π ⎛⎞ ेपद 2ेपद ण्बवे ⎜⎟ ⎜⎟ 5 10 10⎝⎠ ⎝⎠ ππ⎛⎞⇒ जंद θत्रजंद अथात र्् θत्र⎜⎟⎝⎠10 10 लघु उत्तरीय प्रश्न ;ै।द्ध 1ण् एक धनात्मक पूणा±ंक द के लिए,;1 दृ पद्धद ⎛⎜1−1⎞द का मान ज्ञात कीजिए।⎟⎝ प ⎠ 13 दद 12ण् ∑;प ़प ़द्ध का मान ज्ञात कीजिए, जहाँ द∈छ दत्र1 33⎛1़प ⎞⎛1−प ⎞3ण् यदि − त्र ग ़ पलए तो ;गए लद्ध ज्ञात कीजिए।⎜⎟⎜ ⎟1.प 1़प⎝⎠⎝ ⎠ ;1़पद्ध2 4ण् यदि त्र ग ़ पल, तो ग ़ ल ज्ञात कीजिए।2 −प ⎛1−प ⎞100 5ण् यदि ⎜⎟ त्र ं ़ पइ है, तो ;ंए इद्ध ज्ञात कीजिए।1 प⎝़⎠ 1़ं6ण् यदि ं त्र बवे θ ़ प ेपदθ है, तो का मान ज्ञात कीजिए।1−ं 7ण् यदि ;1 ़ पद्ध ्र त्र ;1 दृ पद्ध ्र है, तो दशार्इए कि ्र त्र दृ प्र 8ण् यदि ्र त्र ग ़ पल, तो दशार्इए कि ्र ्र ़ 2 ;्र ़ ्र द्ध ़ इ त्र 0 जहाँइ ∈ त्, एक वृत्त निरूपित करता है। ्र ़29ण् यदि का वास्तविक भाग 4 है, तो दशार्इए कि ्र को निरूपित करने वाले बिंदु का बिंदु्र −1 पथ सम्िमश्र तल में एक वृत्त है। ⎛्र −1 ⎞π10ण् दशार्इए कि प्रतिबंध ंतह ⎜⎟त्र को संतुष्ट करने वाली सम्िमश्र संख्या ्र एक वृत्त पर⎝्र ़1 ⎠ 4 स्िथत है। 11ण् समीकरण ्र त्र ्र ़ 1 ़ 2प को हल कीजिए। दीघर् उत्तर प्रश्न ;स्।द्ध 12ण् यदि ्र ़1त्र ्र ़ 2 ;1 ़ पद्ध है, तो ्र ज्ञात कीजिए। 13ण् यदि ंतह ;्र दृ 1द्ध त्र ंतह ;्र ़ 3पद्ध है, तोग दृ 1 रू लण् ज्ञात कीजिए, जहाँ ्र त्र ग ़ पल ्र −214ण् दशार्इए कि त्र 2 एक वृत्त निरूपित करता है। इसकी वेंफद्र और त्रिाज्या ज्ञात कीजिए।्र−3 ्र −115ण् यदि एक शु(तः काल्पनिक संख्या है;्र ≠ दृ 1द्धए तो ्र का मान ज्ञात कीजिए।्र ़1 16ण् यदि ्र1 और्र2 दो ऐसी सम्िमश्र संख्याएँ हैं ताकि ्र त्र ्र और ंतह ;्रद्ध ़ ंतह ;्रद्ध त्र π, तो1 2 1 2 दशार्इए कि ्र1 त्र − ्र2 ्र −117ण् यदि त्र 1 ;्र ≠ दृ1द्ध और ्र त्र 1 , तो दशार्इए कि ्रका वास्तविक भाग शून्य है।्र1 12 2्र1 ़1 18ण् यदि ्र1ए ्र2 और ्र3ए ्र4 संयुग्मी सम्िमश्र संख्याओं के दो युग्म हैं, तब ⎛ ्र ⎞1 ⎛ ्र ⎞ ंतह ⎜⎟ ़ ंतह ⎜ 2 ⎟ ज्ञात कीजिए।्र⎝ 4 ⎠ ्र⎝ 3 ⎠ 19ण् यदि ्र त्र ्रत्र ण्ण्ण् त्र त्र1, तो दशार्इए कि1 2 ्रद 11 1 1 ़़ ्र ़ण्ण्ण््र्र ़ ्र त्र ़़ ़ण्ण्ण़्123 द ्र्र ्र ्र12 3 द 20ण् यदि सम्िमश्र संख्या ्र1 और ्र2 के लिए, ंतह ;्र1द्ध दृ ंतह ;्र2द्ध त्र 0, तब दशार्इए कि ्र1 − ्र2 त्र ्र − ्र1 2 21ण् समीकरणों के निकाय त्म ;्र2द्ध त्र 0ए ्र त्र2 को हल कीजिए। 22ण् समीकरण ्र ़ 2 द्य;्र ़ 1द्धद्य ़ प त्र 0 को संतुष्ट करने वाली सम्िमश्र संख्या ज्ञात कीजिए। 1−प23ण् सम्िमश्र संख्या ्र त्रπ π को ध््रुवीय रूप में लिख्िाए। बवे ़ पेपद 33 π 24ण् यदि ्र और ू दो सम्िमश्र संख्याएँ इस प्रकार हैं कि ्रू त्र1 और ंतह ;्रद्ध दृ ंतह ;ूद्ध त्र , तो दशार्इए कि ्रू त्र दृ प सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 93 वस्तुनिष्ठ प्रश्न 25ण् निम्नलिख्िात में रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएः ;पद्ध किन्हीं दो सम्िमश्र संख्याओं ्र1ए ्र2 और किन्हीं वास्तविक संख्याओं ंए इए के लिए, 2 2 ं्र1 −इ्र 2 ़इ्र1 ़ं्र2 त्र ण्ण्ण्ण्ण् ;1−पद्ध3 ;पपपद्ध संख्या 3 ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् के बराबर है1−प ;पअद्ध श्रेणी प ़ प2 ़ प3 ़ ण्ण्ण् का 1000 पदों तक का योग ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्है। ;अद्ध 1 ़ प का गुणनात्मक प्रतिलोम ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् है। ;अपद्ध यदि्रऔर्रऐसी सम्िमश्र संख्याएँ हैं कि ्र ़ ्रएक वास्तविक संख्या है, तो ्र त्र ण्ण्ण्ण्1212 2;अपपद्ध ंतह ;्रद्ध ़ ंतह ्र ;्र ≠0द्ध ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् है। ;अपपपद्ध यदि 4्र ़≤3 तो ्र ़1 के अिाकतम और न्यूनतम मानण्ण्ण्ण्ण् एवं ....... हंै। ्र −2;पगद्ध यदि त्रπहै, तो ्र का बिंदु पथ ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् है।्र ़26 5π ;गद्ध यदि ्रत्र 4 और ंतह ;्रद्ध त्र ए तो ्र त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्6 26ण् बताइए कि निम्नलिख्िात में से कौन सा कथन सत्य है और कौन सा कथन असत्य है ;पद्ध सम्िमश्र संख्याओं के समुच्चय में क्रम संबंध परिभाष्िात है। ;पपद्ध एक शून्येत्तर सम्िमश्र संख्या कादृ प से गुणन उस सम्िमश्र संख्या द्वारा निरूपित बिंदु का मूल बिंदु के परित वामावतर् दिशा में एक समकोण पर घूणर्न कर देता है। ;पपपद्ध किसी भी सम्िमश्र संख्या ्र के लिए, ्र −1 का कम से कम मान 1 है।्र ़ ;पअद्ध ्र 1−त्र्र −प को निरूपित करने वाला बिंदु पथ;1ए 0द्ध और ;0ए 1द्ध को मिलाने वाली रेखा पर एक लंब रेखा है। ;अद्ध यदि्र एक ऐसी सम्िमश्र संख्या है कि ्र ≠0 और त्म ;्रद्ध त्र 0, तो प्उ ;्र2द्ध त्र 0 ;अपद्ध असमिका 4्र −ढ−2्र असमिका ग झ 3 से प्रदत्त क्षेत्रा को निरूपित करती है। ;अपपद्ध मान लीजिए कि ्र1 और ्र2 दो ऐसी सम्िमश्र संख्याएँ हैं कि ़्र्र त्र्र ़्र1 2 1 2 तब ंतह ;्र दृ ्रद्ध त्र 01 2;अपपपद्ध 2 एक सम्िमश्र संख्या है। 27ण् स्तंभ । और स्तंभ ठ के कथनों का सही मिलान कीजिएः स्तंभ। स्तंभ ठ ;ंद्ध प ़3 का ध््रुवीय रूप है ;पद्ध ;μ2, 0द्ध और ;2, 0द्ध को मिलाने वाले रेखाखंड का लंब समद्विभाजक ;इद्ध दृ1 ़ −का कोणांक है ;पपद्ध वेंफद्र ;0, μ4द्ध और त्रिाज्या 3 इकाइर् वाले वृत्त पर या उसके बाहर 2π ;बद्ध यदि ्र 2़त्र्र −2 , तो ;पपपद्ध 3 ्र का बिंदु पथ है ;कद्ध यदि ्र ़2प त्र्र −2प , तो ;पअद्ध ;0,μ2द्ध और ;0, 2द्ध को मिलाने वाले ्र का बिंदुपथ है रेखाखंड का लंब समद्विभाजक ⎛π π⎞;मद्ध ्र ़4प ≥3 से निरूपित ;अद्ध 2बवे ़पेपद ⎜⎟⎝ 66 ⎠ क्षेत्रा है ;द्धि 43 से निरूपित क्षेत्रा है वेंफद्र ;μ4, 0द्ध और त्रिाज्या 3 मात्राक वाले्र ़≤ ;अपद्ध वृत्त पर या उसके अंदर ़;हद्ध 12प का संयुग्मी किस चतुथा±श में स्िथत है ;अपपद्ध प्रथम चतुथा±श1−प ;ीद्ध 1 दृ प का व्युत्क्रम किस चतुथा±श में स्िथत है ;अपपपद्ध तीसरा चतुथा±श 2 −प 28ण् 2 का संयुग्मी क्या है?;1−2द्ध प 29ण् यदि ्र त्र्र तब क्या ्र1 त्र ्र2 होना आवश्यक है?1 2 ;ं2 ़1द्ध 2 30ण् यदि त्र ग ़ पल तो ग2 ़ ल2 का क्या मान है?2 −ंप 5π 31ण् ्र ज्ञात कीजिए, यदि ्र त्र4 और ंतह ;्रद्ध त्र 6 सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 95 ;2 ़पद्ध;1़पद्ध32ण् ज्ञात कीजिए।;3 ़पद्ध 33ण् ;1 ़ प 3 द्ध2 का मुख्य कोणांक ज्ञात कीजिए। ्र −5प34ण् यदि त्र1, तो ्र कहाँ स्िथत है?्र ़5प प्रश्न 35 से 50 तक प्रत्येक में दिए हुए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए ;डण्ब्ण्फद्धरू 35ण् निम्नलिख्िात में से किसके लिए, ेपदग ़ प बवे 2ग और बवे ग दृ प ेपद 2ग परस्पर संयुग्मी हैं ⎛ 1 ⎞π;।द्ध ग त्र दπ ;ठद्ध ग त्र ⎜द ़ ⎟⎝ 22 ⎠ ;ब्द्ध ग त्र 0 ;क्द्ध ग का कोइर् मान नहीं 1ेपद प α36ण् α का वह वास्तविक मान, जिसके लिए व्यंजक − शु(तः वास्तविक है, निम्नलिख्िात12 ेपद प α़ में से कौन सा हैः ;।द्ध ;द ़1द्धπ ;ठद्ध ;2द ़ 1द्ध π 2 2 ;ब्द्ध द π ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं, जहाँ द ∈छ 37ण् यदि ्र त्र ग ़ पल तीसरे चतुथा±श में स्िथत है, तो ्र भी तीसरे चतुथा±श में स्िथत होगा, यदि्र ;।द्ध ग झ ल झ 0 ;ठद्ध ग ढ ल ढ 0 ;ब्द्ध ल ढ ग ढ 0 ;क्द्ध ल झ ग झ 0 38ण् ;्र ़ 3द्ध ; ्र ़ 3द्ध का मान निम्नलिख्िात में से किसके समतुल्य है ;।द्ध ्र ़3 2 ;ठद्ध ्र −3 ;ब्द्ध ्र2 ़ 3 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं ⎛1़प ⎞ग 39ण् यदि ⎜त्र 1, तो⎝1−प ⎟⎠ ;।द्ध ग त्र 2द़1 ;ठद्ध ग त्र 4द ;ब्द्ध ग त्र 2द ;क्द्ध ग त्र 4द ़ 1ए जहाँ द ∈छ ⎛34पग40ण् ग का एक वास्तविक मान समीकरण −⎞ प α β∈त्द्ध को संतुष्ट करता है,⎜ ⎟त्रα− β;ए34पग⎝़ ⎠ यदि α2 ़ β2 त्र ;।द्ध 1 ;ठद्धदृ 1 ;ब्द्ध2 ;क्द्ध दृ 2 41ण् किन्हीं दो सम्िमश्र संख्याओं ्र1 तथा ्र2 के लिए, निम्नलिख्िात में से कौन सही है? ;।द्ध ्र्र त्र ्र ्र ;ठद्ध ंतह ;्र्रद्ध त्र ंतह ;्रद्धण् ंतह ;्रद्ध12 1 2 1212 ;ब्द्ध ्र ़ ्र त्र ्र ़ ्र ;क्द्ध ्र ़ ्र ≥ ्र − ्र12 1 2 12 1 2 42ण् यदि सम्िमश्र संख्या 2 दृ पसे निरूपित बिंदु को मूलबिंदु के प्रति दक्ष्िाणावतर् दिशा में एक कोण π पर घुमाया जाए, तो उस बिंदु की नयी स्िथति होगी2 ;।द्ध 1 ़ 2प ;ठद्ध दृ1 दृ 2प ;ब्द्ध 2 ़ प ;क्द्ध दृ1 ़ 2 प 43ण् मान लीजिए कि गए ल∈ त्ए तो ग़ पलएक अवास्तविक सम्िमश्र संख्या है, यदि ;।द्ध गत्र 0 ;ठद्ध लत्र 0 ;ब्द्ध ग ≠ 0 ;क्द्ध ल ≠ 0 44ण् यदि ं़ पइत्र ब़ पक, तो ;।द्ध ं2 ़ ब2 त्र 0 ;ठद्ध इ2 ़ ब2 त्र 0 ;ब्द्ध इ2 ़ क2 त्र 0 ;क्द्ध ं2 ़ इ2 त्र ब2 ़ क2 प्ऱ45ण् प्रतिबंध को संतुष्ट करने वाली सम्िमश्र संख्या स्िथत होगीःप्र− ;।द्ध वृत्त ग2 ़ ल2 त्र 1 पर ;ठद्ध ग.अक्ष पर ;ब्द्ध ल.अक्ष पर ;क्द्ध रेखाग़ लत्र 1 पर 46ण् यदि ्रएक सम्िमश्र संख्या है, तो 22 2;।द्ध ्र झ ्र 2 ;ठद्ध ्र त्र ्र 22्र ढ ्र ्र2 ≥ ्र;ब्द्ध 2 ;क्द्ध 47ण् ़्र्र त्र ्र ़ ्र संभव है, यदि12 1 2 1 ;।द्ध ्र2 त्र ्र1;ठद्ध ्र2 त्र ्र1 ;ब्द्ध ंतह ;्र1द्ध त्र ंतह ;्रद्ध ;क्द्ध ्र त्र ्र1 22सम्िमश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण 97 1ब़प वेθ48ण् θ का वह वास्तविक मान, जिसके लिए एक वास्तविक संख्या है, निम्नलिख्िात12प बवेθ− में से कौन सा हैः π द π ;।द्ध दπ़ ;ठद्ध द ;1द्ध π़ − 4 4 π;ब्द्ध 2दπ± ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं2 49ण् जब ग ढ 0 तो ंतह ;गद्ध का मान है π ;।द्ध 0 ;ठद्ध 2 ;ब्द्ध π ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 7−्र50ण् यदि ि;्रद्ध त्र 2 जहाँ ्र त्र 1 ़ 2पए तो ;द्ध्रि है1−्र ्र;।द्ध ;ठद्ध ्र 2 ;ब्द्ध 2 ्र ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं।

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