™ॅीमतम ं उंजीमउंजपबंस तमंेवदपदह बंद इम ींकए पज पे ंे हतमंज ं विससल जव उंाम नेम व िंदल वजीमतए ंे जव हतवचम वित ं जीपदह पद जीम कंताए ूीमद लवन ींअम ं बंदकसम पद लवनत ींदकण्दृ श्रव्भ्छ ।त्ठन्ज्भ्छव्ज् ऽ 16ण्1 भ्ूामिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध पहले की कक्षाओं में हमने प्रायिकता की संकल्पना को विभ्िान्न परिस्िथतियों की अनिश्िचतता की माप के रूप में पढ़ा है। हमने किसी पासे वेेफ पेंफकने पर एक सम संख्या प्राप्त होने की प्रायिकता 63 अथार्त् 12 ज्ञात की थी। यहाँ वुफल संभावित परिणाम ;वनजबवउमेद्ध1, 2, 3, 4, 5 और 6 हैं ;जिनकी संख्या छः हैद्ध। घटना ‘एक सम संख्या प्राप्त होना’ के अनुकूल परिणाम 2, 4, 6 ;अथार्त् तीन संख्याएँद्ध हैं। व्यापक रूप से किसी घटना की प्रायिकता ज्ञात करने के लिए हम घटना के अनुवूफल परिणामों की संख्या का वुफल परिणामों की संख्या के साथ अनुपात ज्ञात करते हैं। प्रायिकता के इस सि(ांत को प्रायिकता का पुरातन सि(ांत ;ब्संेेपबंस जीमवतल व िचतवइंइपसपजलद्ध कहा जाता है। कक्षा नवीं में हमने प्रायिकता को प्रेक्षण और संकलित आँकड़ों के आधर पर ज्ञात करना सीखा है। इसे प्रायिकता का सांख्ियकीय दृष्िटकोण ;ैजंजपेजपबंस ंचचतवंबीद्ध कहते हैं। इन दोनों सि(ांतों में वुफछ गंभीर समस्याएँ हैं। उदाहरणतः इन सि(ांतों को उन ियाकलापों/ प्रयोगों पर नहीं लगाया जा सकता है जिनमें संभावित परिणामों की संख्या अपरिमित होती है। पुरातन सि(ांत में हम सभी संभावित परिणामों को सम संभाव्य मानते हैं। स्मरण कीजिए कि परिणामों को सम संभाव्य कहा जाता है जब हमें यह विश्वास करने का कोइर् कारण न हो कि एक परिणाम के घटित होने की संभावना दूसरे से अध्िक है। दूसरे शब्दों में, हम यह मानते हैं कि सभी परिणामों के घटित होने की संभावना ;प्रायिकताद्ध समान है। अतः हमने प्रायिकता को परिभाष्िात करने के लिए सम प्रायिकता या सम संभाव्य परिणामों का उपयोग किया है। यह ता£कक दृष्िट से ठीक परिभाषा नहीं है। इसलिए रूस के गण्िातज्ञ ।ण्छण्ज्ञवसवउवहतवअम ने एक अन्य प्रायिकता सि(ांत का विकास किया। उन्हांेने 1933 में प्रकाश्िात अपनी पुस्तक ‘प्रायिकता का आधर’ ;थ्वनदकंजपवद व िच्तवइंइपसपजलद्ध में प्रायिकता की व्याख्या के लिए वुफछ स्वतः प्रमाण्िात तथ्य ;अभ्िागृहीतद्ध निधर्रित किए। इस अध्याय में हम प्रायिकता के इसी दृष्िटकोण, जिसे प्रायिकता का अभ्िागृहीतीय दृष्िटकोण ;।गपवउंजपब ंचचतवंबी व िचतवइंइपसपजलद्ध कहते हैं, का अध्ययन करेगें। इस दृष्िटकोण को समझने के लिए वुफछ मूल शब्दों को जानना आवश्यक है, जैसे कि यादृच्िछक परीक्षण ;त्ंदकवउ मगचमतपउमदजद्ध, प्रतिदशर् समष्िट ;ैंउचसम ेचंबमद्ध, घटनाएँ ;मअमदजेद्ध इत्यादि। आइए इनके बारे में आगे आने वाले अनुभागों में अध्ययन करें। 16ण्2 यादृच्िछक परीक्षण ;त्ंदकवउ म्गचमतपउमदजद्ध दैनिक जीवन में हम ऐसे कइर् ियाकलाप करते हैं जिनके परिणाम सदैव एक ही होते हैं चाहे उन्हंे कितनी बार भी दोहराया जाए। उदाहरण के लिए, किसी दिए गए त्रिाभुज के कोणों का मान न जानते हुए भी हम निश्िचत रूप से कह सकते हैं कि कोणों का योग 180°होगा। हम इस प्रकार के भी कइर् प्रायोगिक ियाकलाप करते हैं जिन्हें समान परिस्िथतियों में दोहराने पर भी परिणाम सदैव एक सा नहीं होता है। उदाहरण के लिए जब एक सिक्के को उछाला जाता हैतो चित्त ;ीमंकद्ध आ सकता है या पट् ;जंपसद्ध आ सकता है लेकिन हम यह निश्िचत नहीं कर सकते हैं कि वास्तविक परिणाम इन दोनों में से क्या होगा? इस प्रकार के परीक्षण को यादृच्िछक परीक्षण कहा जाता है। अतः एक परीक्षण को यादृच्िछक परीक्षण कहा जाता है यदि यह निम्नलिख्िात दो प्रतिबंधें को संतुष्ट करता हैः ;पद्ध इसके एक से अध्िक संभावित परिणाम हों। ;पपद्ध परीक्षण के पूणर् होने से पहले परिणाम बताना संभव न हो। जाँच कीजिए कि एक पासा को पेंफकने का परीक्षण यादृच्िछक है या नहीं? इस अध्याय में एक यादृच्िछक परीक्षण को केवल परीक्षण कहा गया है जब तक कि अन्यथा व्यक्त न किया गया हो। 16ण्2ण्1 परिणाम और प्रतिदशर् समष्िट ;व्नजबवउमे ंदक ेंउचसम ेचंबमद्ध किसी यादृच्िछक परीक्षण के किसी सभांवित नतीजे को परिणाम कहते हैं।एक पासा पेफकनें के परीक्षण पर विचार करें। यदि हम पासे के ऊपरी पफलक पर अंकित बिंदुओं की संख्या में रुचि रखते हैं तो इस परीक्षण के परिणाम 1, 2, 3, 4, 5 या 6 हैं। सभी परिणामों का समुच्चय क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्व इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट कहलाता है। अतः किसी यादृच्िछक परीक्षण के सभी संभावित परिणामों का समुच्चय उस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट कहलाता है। प्रतिदशर् समष्िट को संकेत ै द्वारा प्रकट किया जाता है। प्रतिदशर् समष्िट का प्रत्येक अवयव एक प्रतिदशर् बिंदु कहलाता है। दूसरे शब्दों में, यादृच्िछक परीक्षण का प्रत्येक परिणाम भी प्रतिदशर् बिंदु कहलाता है। आइए वुफछ उदाहरणों पर विचार करें। उदाहरण 1 दो सिक्कों ;एक 1 रु का तथा दूसरा 2 रु काद्ध को एक बार उछाला गया है। प्रतिदशर् समष्िट ज्ञात कीजिए। हल स्पष्टतः सिक्के इस अथर् में विभेद्य हैं कि हम उनको पहला सिक्का और दूसरा सिक्का संबोध्ित कर सकते हैं क्योंकि दोनों सिक्कों में से किसी पर चित्त ;भ्द्ध या पट् ;ज्द्ध प्रकट हो सकते हैं, इसलिए संभव परिणाम निम्नलिख्िात हो सकते हंैःदोनों सिक्कों पर चित्त त्र ;भ्एभ्द्ध त्र भ्भ् पहले सिक्के पर चित्त और दूसरे पर पट् त्र ;भ्एज्द्ध त्र भ्ज् पहले सिक्के पर पट् और दूसरे पर चित्त त्र ;ज्एभ्द्ध त्र ज्भ् दोनों सिक्कों पर पट् त्र ;ज्एज्द्ध त्र ज्ज् अतएव, दिए हुए परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्भ्भ्ए भ्ज्ए ज्भ्ए ज्ज्द्वहै। $टिप्पणी परीक्षण के परिणाम भ् तथाज् के क्रमित युग्म हैं। सरलता के लिए क्रमित युग्म में स्िथत अ(र् - विराम ;बवउउंद्ध को छोड़ दिया गया है। उदाहरण 2 पासों के जोड़े ;जिसमें एक लाल रंग का और दूसरा नीले रंग का हैद्ध को एक बार पेफंकने के परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ज्ञात कीजिए। प्रतिदशर् समष्िट के अवयवों की संख्या भी ज्ञात कीजिए। हल मान लीजिए कि नीले रंग के पासे पर 1 और लाल रंग पर 2 प्रकट होता है। हम इस परिणाम को क्रमित युग्म ;1, 2द्ध द्वारा निरूपित करते हैं। इसी प्रकार, यदि नीले पासे पर 3 और लाल पर 5 प्रकट होता है, तो इस परिणाम को ;3, 5द्ध द्वारा निरूपित करते हैं। व्यापक रूप से प्रत्येक परिणाम को क्रमित युग्म ;गए लद्धए द्वारा निरूपित किया जा सकता है जहाँ ग नीले रंग के पासे पर और ल लाल पासे पर प्रकट होने वाली संख्याएँ हैं। अतएव, प्रतिदशर् समष्िट निम्नलिख्िात हैः ै त्र क्ष्;गए लद्धरू ग नीले पासे पर प्रकट संख्या और ल लाल पासे पर प्रकट संख्या है द्व इस प्रतिदशर् समष्िट के अवयवों की संख्या 6 × 6 त्र 36 है ओर प्रतिदशर् समष्िट नीचे प्रदत्त हैः क्ष्;1ए1द्धए ;1ए2द्धए ;1ए3द्धए ;1ए4द्धए ;1ए5द्धए ;1ए6द्धए ;2ए1द्धए ;2ए2द्धए ;2ए3द्धए ;2ए4द्धए ;2ए5द्धए ;2ए6द्धए ;3ए1द्धए ;3ए2द्धए ;3ए3द्धए ;3ए4द्धए ;3ए5द्धए ;3ए6द्धए ;4ए1द्धए ;4ए2द्धए ;4ए3द्धए ;4ए4द्धए ;4ए5द्धए ;4ए6द्धए ;5ए1द्धए ;5ए2द्धए ;5ए3द्धए ;5ए4द्धए ;5ए5द्धए ;5ए6द्धए ;6ए1द्धए ;6ए2द्धए ;6ए3द्धए ;6ए4द्धए ;6ए5द्धए ;6ए6द्धद्व उदाहरण 3 निम्नलिख्िात प्रत्येक परीक्षण के लिए उपयुक्त प्रतिदशर् समष्िट का उल्लेख कीजिए ;पद्ध एक बालक की जेब में एक 1 रु, एक 2 रु व एक 5 रु के सिक्के हैं। वह अपनी जेब से एक के बाद एक दो सिक्वेेफ निकालता है। ;पपद्ध एक व्यक्ित किसी व्यस्त राजमागर् पर एक वषर् में होने वाली दुघर्टनाओं की संख्या लिखता है। हल ;पद्ध मान लीजिए 1 रु का सिक्का फ से, 2 रु का सिक्का भ् से तथा 5 रू का सिक्का त् से निरूपित होते हैं। उसके द्वारा जेब से निकाला गया पहला सिक्का तीन सिक्कों में से कोइर् भी एक सिक्का फए भ् या त् हो सकता है। पहले सिक्के फ के संगत दूसरी बार निकाला गया सिक्का भ् या त् हो सकता है। अतः दो सिक्के निकालने का परिणाम फभ् या फत् हो सकता है। इसी प्रकार, भ् के संगत दूसरी बार निकाला गया सिक्का फ या त् हो सकता है। इसलिए, परिणाम भ्फ या भ्त् हो सकता है। अंततः त् के संगत दूसरी बार निकाला गया सिक्का भ् या फ हो सकता है। इसलिए परिणाम त्भ् या त्फ होगा। अतः प्रतिदशर् समष्िट ैत्रक्ष्फभ्ए फत्ए भ्फए भ्त्ए त्भ्ए त्फद्वहै। ;पपद्ध किसी व्यस्त राजमागर् पर दुघर्टनाओं की संख्या 0 ;किसी दुघर्टना के न होने परद्ध या 1 या 2, या कोइर् भी ध्न पूणा±क हो सकता है। अतः इस परीक्षण के लिए प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्0ए1ए2एण्ण्ण्द्व हैः उदाहरण 4 एक सिक्का उछाला जाता है। यदि उस पर चित्त प्रकट हो तो हम एक थैली, जिसमें 3 नीली एवं 4 सप़ेफद गंेद हैं, में से एक गेंद निकालते हैं। यदि सिक्के पर पट् प्रकट होता है तो हम एक पासा पेफंकते हैं। इस परीक्षण के प्रतिदशर् समष्िट का वणर्न कीजिए। हल मान लीजिए हम नीली गेंदों को ठ1ए ठ2ए ठ3 और सप़ेफद गेंदोें को ॅ1ए ॅ2ए ॅ3ए ॅ4 से निरूपित करते हैं। इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष् भ्ठए भ्ठए भ्ठए भ्ॅए भ्ॅए भ्ॅए भ्ॅए ज्1ए ज्2ए ज्3ए ज्4ए ज्5ए ज्6द्वहै।1231234यहाँ भ्ठप का अथर् है कि सिक्के पर चित्त है और गेंद ठप निकाली गइर् है। भ्ॅप का अथर् है कि सिक्के पर चित्त है और गेंद ॅप निकाली गइर् है। इसी प्रकार ज्प का अथर् है कि सिक्के पर पट् और पासे पर संख्या प प्रकट हुइर् है। उदाहरण 5 एक ऐसे परीक्षण पर विचार कीजिए जिसमें एक सिक्के को बार - बार तब तक उछालते रहते हैं जब तक उस पर चित्त प्रकट न हो जाए। इसकी प्रतिदशर् समष्िट का वणर्न कीजिए। हल इस परीक्षण में चित्त प्रथम उछाल या द्वितीय उछाल या तृतीय उछाल इत्यादि में से किसी में भी प्रकट हो सकता है। अतः, वांछित प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्भ्ए ज्भ्ए ज्ज्भ्ए ज्ज्ज्भ्ए ज्ज्ज्ज्भ्एण्ण्ण्द्व है। प्रश्नावली 16ण्1 निम्नलिख्िात प्रश्नों 1 से 7, में प्रत्येक में निदिर्ष्ट परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ज्ञात कीजिए। 1ण् एक सिक्के को तीन बार उछाला गया है। 2ण् एक पासा दो बार पंेफका गया है। 3ण् एक सिक्का चार बार उछाला गया है। 4ण् एक सिक्का उछाला गया है और एक पासा पेंफका गया है। 5ण् एक सिक्का उछाला गया है और केवल उस दशा में, जब सिक्के पर चित्त प्रकट होता है एक पासा पेफंका जाता है। 6ण् ग् कमरेमें 2 लड़के और 2 लड़कियाँ हैं तथा ल् कमरे में 1 लड़का और 3 लड़कियाँ हैं। उस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ज्ञात कीजिए जिसमें पहले एक कमरा चुना जाता है पिफर एक बच्चा चुना जाता है। 7ण् एक पासा लाल रंग का, एक सप़ेफद रंग का और एक अन्य पासा नीले रंग का एक थैले में रखेहैं। एक पासा यादृच्छया चुना गया और उसे पेफंका गया है, पासे का रंग और इसके ऊपर के पफलक पर प्राप्त संख्या को लिखा गया है। प्रतिदशर् समष्िट का वणर्न कीजिए। 8ण् एक परीक्षण में 2 बच्चों वाले परिवारों में से प्रत्येक में लड़के - लड़कियों की संख्याओं को लिखा जाता है। ;पद्ध यदि हमारी रुचि इस बात को जानने में है कि जन्म के क्रम में बच्चा लड़का या लड़की है तो प्रतिदशर् समष्िट क्या होगी? ;पपद्ध यदि हमारी रुचि किसी परिवार में लड़कियों की संख्या जानने में है तो प्रतिदशर् समष्िट क्या होगी? 9ण् एक डिब्बे में 1 लाल और एक जैसी 3 सप़ेफद गेंद रखी गइर् हैं। दो गेंद उत्तरोतर ;पद ेनबबमेेपवदद्ध बिना प्रतिस्थापित किए यादृच्छया निकाली जाती है। इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ज्ञात कीजिए। 10ण् एक परीक्षण में एक सिक्के को उछाला जाता है और यदि उस पर चित्त प्रकट होता है तो उसे पुनः उछाला जाता है। यदि पहली बार उछालने पर पट् प्राप्त होता है तो एक पासा पेफंका जाता है। प्रतिदशर् समष्िट ज्ञात कीजिए। 11ण् मान लीजिए कि बल्बों के एक ढेर में से 3 बल्ब यादृच्छया निकाले जाते हैं। प्रत्येक बल्ब कोे जाँचा जाता है और उसे खराब ;क्द्ध या ठीक ;छद्ध में वगीर्वृफत करते हैं। इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ज्ञात कीजिए। 12ण् एक सिक्का उछाला जाता है। यदि परिणाम चित्त हो तो एक पासा पेंफका जाता है। यदि पासे पर एक सम संख्या प्रकट होती है तो पासे को पुनः पेंफका जाता है। इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ज्ञात कीजिए। 13ण् कागश की चार पचिर्यों पर संख्याएँ 1, 2, 3 और 4 अलग - अलग लिखी गइर् हैं। इन पचिर्यों को एक डिब्बे में रख कर भली - भाँति मिलाया गया है। एक व्यक्ित डिब्बे में से दो पचिर्याँ एक के बाद दूसरी बिना प्रतिस्थापित किए निकालता है। इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ज्ञात कीजिए। 14ण् एक परीक्षण में एक पासा पेंफका जाता है और यदि पासे पर प्राप्त संख्या सम है तो एक सिक्का एक बार उछाला जाता है। यदि पासे पर प्राप्त संख्या विषम है, तो सिक्के को दो बार उछालते हैं। प्रतिदशर् समष्िट लिख्िाए। 15ण् एक सिक्का उछाला गया। यदि उस पर पट् प्रकट होता है तो एक डिब्बे में से जिसमें 2 लालऔर 3 काली गेंदंे रखी हैं, एक गेंद निकालते हैं। यदि सिक्के पर चित्त प्रकट होता है तो एक पासा पेंफका जाता है। इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट लिख्िाए। 16ण् एक पासा को बार - बार तब तक पेंफका जाता है जब तक उस पर 6 प्रकट न हो जाए। इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट क्या है? 16ण्3 घटना ;म्अमदजद्ध हमने यादृच्िछक परीक्षण और उसके प्रतिदशर् समष्िट के बारे में पढ़ा है। किसी परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट उस परीक्षण से संबंध्ित सभी प्रश्नों के लिए सावर्त्रिाक समुच्चय ;न्दपअमतेंस ेमजद्ध होता है। एक सिक्के को दो बार उछालने के परीक्षण पर विचार कीजिए। संबंध्ित प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्भ्भ्ए भ्ज्ए ज्भ्ए ज्ज्द्व है।अब, मान लीजिए कि हमारी रुचि उन परिणामों में है जो तथ्यतः एक चित्त प्रकट होने के अनुकूल होते हैं। हम पाते हैं कि इस घटना के होने के अनुकूल ै के अवयव केवल भ्ज् और ज्भ् हैं। यह दो अवयव एक समुच्चय म् त्र क्ष्भ्ज्ए ज्भ्द्व बनाते हैं। हम जानते हैं कि समुच्चय म् प्रतिदशर् समष्िट ै का उपसमुच्चय है। इसी प्रकार हम पाते हैं कि विभ्िान्न घटनाओं और ै के उपसमुच्चयों में निम्नलिख्िात संगतता हैः घटना का वणर्न ष्ैष् का संगत उपसमुच्चय पटों की संख्या तथ्यतः दो है । त्र क्ष्ज्ज्द्व पटों की संख्या कम से कम 1 है ठ त्र क्ष्भ्ज्ए ज्भ्ए ज्ज्द्व चित्तों की संख्या अध्िकतम 1 है ब् त्र क्ष्भ्ज्ए ज्भ्ए ज्ज्द्व द्वितीय उछाल में चित्त नहीं है क् त्र क्ष् भ्ज्ए ज्ज्द्व चित्तों की संख्या अध्िकतम दो है ै त्र क्ष्भ्भ्ए भ्ज्ए ज्भ्ए ज्ज्द्व चित्तों की संख्या दो से अध्िक है φ ण् उपयुर्क्त चचार् से यह स्पष्ट है कि प्रतिदशर् समष्िट के किसी उपसमुच्चय के संगत एक घटना होती है और किसी घटना के संगत प्रतिदशर् समष्िट का एक उपसमुच्चय होता है। इसके संदभर् में एक घटना को निम्नलिख्िात प्रकार से परिभाष्िात किया जाता हैः परिभाषा प्रतिदशर् समष्िट ै का कोइर् उपसमुच्चय एक घटना कही जाती है। 16ण्3ण्1 एक घटना का घटित होना ;व्बबनततमदबम व िंद मअमदजद्ध एक पासा को पेंफकने के परीक्षण पर विचार कीजिए। मान लीजिए कि घटना ‘पासा पर 4 से छोटी संख्या प्रकट होना’ को म् से निरूपित किया जाता है। यदि पासा पर वास्तव में ‘1’ प्रकट होता है तो हम कह सकते हैं कि घटना म् घटित हुइर् है। वस्तुतः यदि परिणाम 2 या 3 हैं तो हम कहते हैं कि घटना म् घटित हुइर् है। अतः किसी परीक्षण के प्रतिदशर् समष्िट ै की घटना म् घटित हुइर् कही जाती है यदि परीक्षण का परिणाम ω इस प्रकार है कि ω∈ म्ण् यदि परिणाम ω ऐसा है कि ω∉ म्एतो हम कहते हैं कि घटना म् घटित नहीं हुइर् है। 16ण्3ण्2 घटनाओं के प्रकार ;ज्लचमे व िमअमदजेद्ध घटनाओं को उनके अवयवों के आधर पर विभ्िान्न प्रकारों में वगीर्वृफत किया जा सकता है। 1ण् असंभव व निश्िचत घटनाएँ ;प्उचवेेपइसम ंदक ैनतम म्अमदजेद्ध रिक्त समुच्चय φ और प्रतिदशर् समष्िट ै भी घटनाओं को व्यक्त करते हैं। वास्तव में φ को असंभव घटना और ै अथार्त् पूणर् प्रतिदशर् समष्िट को निश्िचत घटना कहते हैं। इन्हें समझने के लिए आइए पासा पेंफकने के परीक्षण पर विचार करें। इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्1ए2ए3ए4ए5ए6द्व है। मान लीजिए म् घटना ‘पासे पर प्रकट संख्या 7 का गुणज है’ को निरूपित करता है। क्या आप घटना म् के संगत उपसमुच्चय लिख सकते हैं? स्पष्टतया परीक्षण का कोइर् भी परिणाम घटना म् के प्रतिबंध् को संतुष्ट नहीं करता है अथार्त् प्रतिदशर् समष्िट का कोइर् भी अवयव घटना म् वफा घटित होने को निश्िचत नहीं करता हैं। अतः हम कह सकते हैं कि केवल रिक्त समुच्चय ही घटना म् के संगत समुच्चय है। दूसरे शब्दों में, हम कहसकते हैं कि पासे के ऊपरी पफलक पर 7 का गुणज प्रकट होना असंभव है। इस प्रकार घटना म् त्र φ एक असंभव घटना है। आइए अब हम एक अन्य घटना थ् ‘पासा पर प्राप्त संख्या या तो सम है या विषम’ पर विचार करें। स्पष्टतया थ् त्र क्ष्1ए2ए3ए4ए5ए6एद्व त्र ैण् अथार्त् सभी परिणाम घटना थ् के घटित होने को निश्िचत करते हैं। अतः थ् त्र ै एक निश्िचत घटना है। 2ण् सरल घटना ;ैपउचसम म्अमदजद्ध यदि किसी घटना म् में केवल एक ही प्रतिदशर् बिंदु हो, तो घटना म् को सरल या प्रारम्िभक घटना कहते हैं। ऐसा परीक्षण जिसके प्रतिदशर् समष्िट जिसमें द पृथक अवयव हों, में द सरल घटनाएँ विद्यमान होती हैं। उदाहरण के लिए, एक सिक्वफा के दो उछालों वाले परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ैत्रक्ष्भ्भ्ए भ्ज्ए ज्भ्ए ज्ज्द्व है। यहाँ इस प्रतिदशर् समष्िट की चार सरल घटनाएँ हैं, जो निम्नलिख्िात हैंः म्1त्र क्ष्भ्भ्द्वए म्2त्रक्ष्भ्ज्द्वए म्3त्र क्ष् ज्भ्द्व और म्4त्रक्ष्ज्ज्द्वण् 3ण् मिश्र घटना ;ब्वउचवनदक म्अमदजेद्ध यदि किसी घटना में एक से अध्िक प्रतिदशर् बिंदु होते हैं, तो उसे मिश्र घटना कहते हैं। उदाहरण के लिए एक सिक्के की तीन उछालों के परीक्षण में निम्नलिख्िात घटनाएँ मिश्र घटनाएँ हैंः म्रू तथ्यतः एक चित्त प्रकट होना थ्रू न्यूनतम एक चित्त प्रकट होना ळरू अध्िकतम एक चित्त प्रकट होना, इत्यादि। इन घटनाओं के संगत ै के उपसमुच्चय निम्नलिख्िात हैंः म्त्रक्ष्भ्ज्ज्एज्भ्ज्एज्ज्भ्द्व थ्त्रक्ष्भ्ज्ज्एज्भ्ज्ए ज्ज्भ्ए भ्भ्ज्ए भ्ज्भ्ए ज्भ्भ्ए भ्भ्भ्द्व ळत्र क्ष्ज्ज्ज्ए ज्भ्ज्ए भ्ज्ज्ए ज्ज्भ्द्व उपयुर्क्त प्रत्येक उपसमुच्चय में एक से अध्िक प्रतिदशर् बिंदु हैं इसलिए यह सब मिश्र घटनाएँ हैं। 16ण्3ण्3 घटनाओं का बीजगण्िात ;।सहमइतं व िम्अमदजेद्ध समुच्चयों के अध्याय में हमने दो या अध्िक समुच्चयों के संयोजन के विभ्िान्न तरीकों के बारे में पढ़ा था अथार्त् सम्िमलन ;नदपवदद्ध, सवर्निष्ठ ;पदजमतेमबजपवदद्धए अंतर ;कपमिितमदबमद्ध, समुच्चय का पूरक ;ब्वउचसमउमदज व िं ेमजद्ध, इत्यादि के बारे में समझा था। इसी प्रकार हम घटनाओं का संयोजन समुच्चय संकेतनों के सदृश उपयोग द्वारा कर सकते हैं। मान लीजिए ।एठएब् ऐसे प्रयोग से संब( घटनाएँ हैं जिसकी प्रतिदशर् समष्िट ै है। 1ण् पूरक घटना ;ब्वउचसमउमदजंतल म्अमदजद्ध प्रत्येक घटना । के सापेक्ष एक अन्य घटना ।′ होती है जिसे घटना । की पूरक घटना कहते हैं। ।′ को घटना ‘।दृनहीं’ भी कहा जाता है। उदाहरण के लिए ‘एक सिक्के की तीन उछालों’ के परीक्षण को लें। इसका प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्भ्भ्भ्ए भ्भ्ज्ए भ्ज्भ्ए ज्भ्भ्ए भ्ज्ज्ए ज्भ्ज्ए ज्ज्भ्ए ज्ज्ज्द्व है। मान लीजिए ।त्रक्ष्भ्ज्भ्ए भ्भ्ज्ए ज्भ्भ्द्व घटना ‘केवल एक पट का प्रकट होना’ को दशार्ता है। परिणाम भ्ज्ज् के होने पर घटना । घटित नहीं हुइर् है। किंतु हम कह सकते हैं कि घटना ‘।दृनहीं’ घटित हुइर् है। इस प्रकार, प्रत्येक परिणाम के लिए जो । में नहीं हैं हम कहते हैं कि ‘। - नहीं’ घटित हुइर् है। इस प्रकार घटना । के लिए पूरक घटना ‘।दृनहीं’ अथार्त् ।′त्र क्ष्भ्भ्भ्ए भ्ज्ज्ए ज्भ्ज्ए ज्ज्भ्ए ज्ज्ज्द्व या ।′त्र क्ष्ω रू ω ∈ ै और ω ∉ ।द्व त्र ै दृ । है। 2ण् घटना ‘। या ठ’ ;म्अमदज । वत ठद्ध स्मरण कीजिए कि दो समुच्चयों । और ठ का सम्िमलन । ∪ ठ द्वारा निरूपित किया जाता है जिसमें वह सब अवयव सम्िमलित होते हैं जो या तो । में हैं या ठ में है या दोनों में हैं। जब समुच्चय । और ठ किसी प्रतिदशर् समष्िट से संबंध्ित दो घटनाएँ हों तो ष्। ∪ ठष् घटना । या ठ या दोनों को निरूपित करता है। घटना ष्। ∪ ठष् को ष्। या ठष् भी कहा जाता है। इसलिए घटना ष्। या ठष् त्र । ∪ ठ त्र क्ष्ωरू ω∈। या ω ∈ ठद्व 3ण् घटना श्। और ठश् ;म्अमदज । ंदक ठद्ध हम जानते हैं कि दो समुच्चयों का सवर्निष्ठ । ∩ ठ वह समुच्चय होता है जिसमें वे अवयव होते हैं जो । और ठ दोनों में उभयनिष्ठ होते हैं अथार्त् जो । और ठ दोनों में होते हैं। यदि ष्। और ठष् दो घटनाएँ हों तो समुच्चय । ∩ ठ घटना ष्। और ठष् को दशार्ता है। इस प्रकार, । ∩ ठ त्र क्ष्ω रू ω ∈ । और ω ∈ ठद्व उदाहरण के लिए एक पासा को दो बार पेंफकने के परीक्षण मंे मान लीजिए घटना । ‘पहली पेंफक में संख्या 6 प्रकट होती है’ और घटना ठ ‘दो पेंफकों पर प्रकट संख्याओं का योग न्यूनतम 11 होता है’ को व्यक्त करती हैं। तब । त्र क्ष्;6ए1द्धए ;6ए2द्वए ;6ए3द्धए ;6ए4द्धए ;6ए5द्धए ;6ए6द्धद्व और ठ त्र क्ष्;5ए6द्धए ;6ए5द्धए ;6ए6द्धद्व इसलिए । ∩ ठ त्र क्ष्;6ए5द्धए ;6ए6द्धद्व नोट कीजिए कि समुच्चय। ∩ ठ त्र क्ष्;6ए5द्धए ;6ए6द्धद्व, घटना ‘पहली पेंफक पर 6 प्रकट होता है और दोनों पेंफकों पर प्रकट संख्याओं का योग न्यूनतम 11 होता है’ को व्यक्त करता है। 4ण् घटना ‘। किंतु ठ नहीं’ ;म्अमदज । इनज दवज ठद्ध हम जानते हैं कि । दृ ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय होता है जो । में तो हैं लेकिन ठ में नहीं हैं। इसलिए, समुच्चय श्। दृ ठश् घटना ष्। किंतु ठ नहींष् को व्यक्त कर सकता है। हम जानते हैं कि । दृ ठ त्र । ∩ ठ′ उदाहरण 6 एक पासा पेंफकने के परीक्षण पर विचार कीजिए। घटना ‘एक अभाज्य संख्या प्राप्त होना’ को । से और घटना ‘एक विषम संख्या प्राप्त होना’ को ठ से निरूपित किया गया है। निम्नलिख्िात घटनाओं ;पद्ध । या ठ ;पपद्ध । और ठ ;पपपद्ध । किंतु ठ नहीं ;पअद्ध ष्।दृनहींष् को निरूपित करने वाले समुच्चय लिख्िाए। हल यहाँ ै त्र क्ष्1ए2ए3ए4ए5ए6द्वए । त्र क्ष्2ए3ए5द्व औरठ त्र क्ष्1ए3ए5द्व प्रत्यक्षतः ;पद्ध ष्। या ठष् त्र । ∪ ठ त्र क्ष्1ए2ए3ए5द्व ;पपद्ध ष्। और ठष् त्र । ∩ ठ त्र क्ष्3ए5द्व ;पपपद्ध ष्। किंतु ठ नहींष् त्र । दृ ठ त्र क्ष्2द्व ;पअद्ध ष्।दृनहींष् त्र ।´ त्र क्ष्1ए4ए6द्व 16ण्3ण्4 परस्पर अपवजीर् घटनाएँ ;डनजनंससल मगबसनेपअम मअमदजेद्ध पासा पेंफकने के परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्व है। मान लीजिए घटना । ‘एक विषम संख्या का प्रकट होना’ और घटना ठ ‘एक सम संख्या का प्रकट होना’ को व्यक्त करते हैं। स्पष्टतया घटना ।ए घटना ठ को अपवजिर्त कर रही है तथा इसका विलोम भी सत्य है। दूसरे शब्दों में, ऐसा कोइर् परिणाम नहीं है जो घटना । और ठ के एक साथ घटित होने को निश्िचत करता है यहाँ । त्र क्ष्1ए 3ए 5द्व और ठ त्र क्ष्2ए 4ए 6द्व स्पष्टतया । ∩ ठ त्र φ अथार्त् । और ठ असंयुक्त समुच्चय हैं। व्यापकतः दो घटनाएँ । और ठ परस्पर अपवजीर् घटनाएँ कही जाती हैं, यदि इनमें से किसी एक का घटित होना दूसरी के घटित होने को अपवजिर्त करता है अथार्त् वे एक साथ घटित नहीं हो सकती हैंं। इस दशा में समुच्चय । और ठ असंयुक्त होते हैं। पुनः एक पासे को पेंफकने के परीक्षण में घटना । ‘एक विषम संख्या प्रकट होना’ और घटना ठ ‘4 से छोटी संख्या प्रकट होना’ पर विचार कीजिए। प्रत्यक्षतः । त्र क्ष्1ए 3ए 5द्व और ठ त्र क्ष्1ए 2ए 3द्व अब 3 ∈ । तथा साथ ही 3 ∈ ठ इसलिए। और ठ असंयुक्त नहीं है। अतः । और ठ परस्पर अपवजीर् घटनाएँ नहीं हैं। टिपप्णी एक प्रतिदशर् समष्िट की सरल घटनाएँ सदैव परस्पर अपवजीर् होती हंै। 16ण्3ण्5 निःशेष घटनाएँ ;म्गींनेजपअम मअमदजेद्ध एक पासे को पेंफकने के परीक्षण पर विचार कीजिए। हम पाते हैं ै त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्वण् आइए निम्नलिख्िात घटनाओं को परिभाष्िात करेंः।रू ष्4 से छोटी संख्या प्रकट होनाष्एठरू ष्2 से बड़ी किंतु 5 से छोटी संख्या प्रकट होनाष् और ब्रूष्4 से बड़ी संख्या प्रकट होनाष्ण् तब । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्वए ठ त्र क्ष्3ए4द्व और ब् त्र क्ष्5ए 6द्वण् हम देखते हैं कि । ∪ ठ ∪ ब् त्र क्ष्1ए2ए3द्व ∪ क्ष्3ए4द्व ∪ क्ष्5ए 6द्व त्र ैण् ऐसी घटनाओं ।ए ठ और ब् को निःशेष घटनाएँ कहते हैं। व्यापक रूप से यदि म्1ए म्2ए ण्ण्ण्ए म्द किसी प्रतिदशर् समष्िट ै की द घटनाएँ हैं और यदि द म् ∪ म् ∪ म् ण्ण्ण् ∪ म् त्र∪ म् त्र ै123 दपपत्र1 तब म्1ए म्2ए ण्ण्ण्ए म् को निःशेष घटनाएँ कहते हैं। दूसरे शब्दों में, घटनाएँ म्1ए म्2ए ण्ण्ण्ए म्निःशेष दद कहलाती हैं यदि परीक्षण के करने पर इनमें से कम से कम एक घटना अवश्य ही घटित हो। इसके अतिरिक्त यदि सभी प ≠ र के लिए म्∩ म् त्र φ अग्रतः यदि म्∩ म्त्र φए प ≠ र अथार्त्परपर द म्प और म्र परस्पर अपवजीर् हैं, और ∪ म्प त्र ै हो, तो घटनाएँ म्1ए म्2ए ण्ण्ण्ए म्द परस्पर अपवजीर्पत्र1 निःशेष घटनाएँ कहलाती हैं। आइए अब वुफछ उदाहरणों पर विचार करें। उदाहरण 7 दो पासे पेंफके जाते हैं और पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग लिखा जाता है। आइए अब हम इस प्रयोग से संबंध्ित निम्नलिख्िात घटनाओं पर विचार करेंः ।रू ष्प्राप्त योग सम संख्या हैष्। ठरू ष्प्राप्त योग 3 का गुणज हैष्। ब्रू ष्प्राप्त योग 4 से कम हैष्। क्रू ष्प्राप्त योग 11 से अध्िक हैष्। इन घटनाओं में से कौन से युग्म परस्पर अपवजीर् हैंघ् हल प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्;गए लद्धरू गए ल त्र 1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्व में 36 अवयव हैं। तब । त्र क्ष्;1ए 1द्धए ;1ए 3द्धए ;1ए 5द्धए ;2ए 2द्धए ;2ए 4द्धए ;2ए 6द्धए ;3ए 1द्धए ;3ए 3द्धए ;3ए 5द्धए ;4ए 2द्धए ;4ए 4द्धए ;4ए 6द्धए ;5ए 1द्धए ;5ए 3द्धए ;5ए 5द्धए ;6ए 2द्धए ;6ए 4द्धए ;6ए 6द्धद्व ठ त्र क्ष्;1ए 2द्धए ;2ए 1द्धए ;1ए 5द्धए ;5ए 1द्धए ;3ए 3द्धए ;2ए 4द्धए ;4ए 2द्धए ;3ए 6द्धए ;6ए 3द्धए ;4ए 5द्धए ;5ए 4द्धए ;6ए 6द्धद्व ब् त्र क्ष्;1ए 1द्धए ;2ए 1द्धए ;1ए 2द्धद्व और क् त्र क्ष्;6ए 6द्धद्व हमें प्राप्त होता है । ∩ ठ त्र क्ष्;1ए 5द्धए ;2ए 4द्धए ;3ए 3द्धए ;4ए 2द्धए ;5ए 1द्धए ;6ए 6द्धद्व ≠ φ इसलिए, । और ठ परस्पर अपवजीर् नहीं हैं। इसी प्रकार । ∩ ब् ≠ φए । ∩ क् ≠ φए ठ ∩ ब् ≠ φए और ठ ∩ क् ≠ φए इस प्रकार युग्म ;।ए ब्द्धए ;।ए क्द्धए ;ठए ब्द्धए ;ठए क्द्ध परस्पर अपवजीर् नहीं है। साथ ही ब् ∩ क् ≠ φ इसलिए, ब् और क् परस्पर अपवजीर् घटनाएँ हैं। उदाहरण 8 एक सिक्के को तीन बार उछाला गया है। निम्नलिख्िात घटनाओं पर विचार कीजिएः ।रू ष्कोइर् चित्त प्रकट नहीं होता हैष् ए ठरू ष्तथ्यतः एक चित्त प्रकट होता हैष् और ब्रू ष्कम से कम दो चित्त प्रकट होते हैंष्। क्या यह परस्पर अपवजीर् और निःशेष घटनाओं का समुच्चय हैघ् हल परिणाम का प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्भ्भ्भ्ए भ्भ्ज्ए भ्ज्भ्ए ज्भ्भ्ए भ्ज्ज्ए ज्भ्ज्ए ज्ज्भ्ए ज्ज्ज्द्व है और । त्र क्ष्ज्ज्ज्द्वए ठ त्र क्ष्भ्ज्ज्ए ज्भ्ज्ए ज्ज्भ्द्वतथा ब् त्र क्ष्भ्भ्ज्ए भ्ज्भ्ए ज्भ्भ्ए भ्भ्भ्द्व अब । ∪ ठ ∪ ब् त्र क्ष्ज्ज्ज्ए भ्ज्ज्ए ज्भ्ज्ए ज्ज्भ्ए भ्भ्ज्ए भ्ज्भ्ए ज्भ्भ्ए भ्भ्भ्द्व त्र ै इसलिएए ।ए ठ और ब् निःशेष घटनाएँ हैं। साथ ही । ∩ ठ त्र φए । ∩ ब् त्र φ और ठ ∩ ब् त्र φ इसलिए, घटनाएँ युग्म के अनुसार असंयुक्त हैं अथार्त् वे परस्पर अपवजीर् हैं। अतः ।ए ठ और ब् परस्पर अपवजीर् व निःशेष घटनाओं का समुच्चय बनाते हैं। प्रश्नावली 16ण्2 1ण् एक पासा पेंफका जाता है। मान लीजिए घटना म् ‘पासे पर संख्या 4 दशार्ता’ है और घटना थ् ‘पासे पर सम संख्या दशार्ता’ है। क्या म् और थ् परस्पर अपवजीर् हैंघ् 2ण् एक पासा पेंफका जाता है। निम्नलिख्िात घटनाओं का वणर्न कीजिएः ;पद्ध ।रू संख्या 7 से कम है। ;पपद्ध ठरू संख्या 7 से बड़ी है। ;पपपद्ध ब्रू संख्या 3 का गुणज है। ;पअद्ध क्रू संख्या 4 से कम है। ;अद्ध म्रू 4 से बड़ी सम संख्या है। ;अपद्ध थ्रू संख्या 3 से कम नहीं है। । ∪ ठए । ∩ ठए ठ ∪ ब्ए म् ∩ थ्ए क् ∩ म्ए । दृ ब्ए क् दृ म्ए म् ∩ थ्′ए थ्´ भी ज्ञात कीजिए। 3ण् एक परीक्षण में पासें वेेफ एक जोड़े को पेंफकते हैं और उन पर प्रकट संख्याओं को लिखते हैं। निम्नलिख्िात घटनाओं का वणर्न कीजिएः ।रू प्राप्त संख्याओं का योग 8 से अध्िक है। ठरू दोनों पासों पर संख्या 2 प्रकट होती है। ब्रू प्रकट संख्याओं का योग कम से कम 7 है और 3 का गुणज है। इन घटनाओं वेेफ कौन - कौन से युग्म परस्पर अपवजीर् हैं? 4ण् तीन सिक्कों को एक बार उछाला जाता है। मान लीजिए कि घटना ’तीन चित्त दिखना’ को । से, घटना ‘दो चित्त और एक पट् दिखना’ को ठ से, घटना ‘तीन पट् दिखना’ को ब् और घटना’पहले सिक्के पर चित्त दिखना’ को क् से निरूपित किया गया है। बताइए कि इनमें से कौन सी घटनाएँ ;पद्ध परस्पर अपवजीर् हैं? ;पपद्ध सरल हैं घ् ;पपपद्ध मिश्र हैं घ् 5ण् तीन सिक्के एक बार उछाले जाते हैं। वणर्न कीजिए। ;पद्ध दो घटनाएँ जो परस्पर अपवजीर् हैं। ;पपद्ध तीन घटनाएँ जो परस्पर अपवजीर् और निःशेष हैं। ;पपपद्ध दो घटनाएँ जो परस्पर अपवजीर् नहीं हैं। ;पअद्ध दो घटनाएँ जो परस्पर अपवजीर् हैं किंतु निःशेष नहीं हैं। ;अद्ध तीन घटनाएँ जो परस्पर अपवजीर् हैं किंतु निःशेष नहीं हैं। 6ण् दो पासे पेंफके जाते हंै। घटनाएँ ।ए ठ और ब् निम्नलिख्िात प्रकार से हैंः ।रू पहले पासे पर सम संख्या प्राप्त होना 7ण् उपयुर्क्त प्रश्न 6 को देख्िाए और निम्नलिख्िात में सत्य या असत्य बताइए ;अपने उत्तर का कारण दीजिएद्धः ;पद्ध । और ठ परस्पर अपवजीर् हैं। ;पपद्ध । औरठ परस्पर अपवजीर् और निःशेष हैं। ठरू पहले पासे पर विषम संख्या प्राप्त होना ब्रू पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग ≤ 5 होना निम्नलिख्िात घटनाओं का वणर्न कीजिएः ;पद्ध ।′ ;पपद्ध ठ - नहीं ;पपपद्ध । या ठ ;पअद्ध । और ठ ;अद्ध । किंतु ब् नहीं ;अपद्ध ठ या ब् ;अपपद्ध ठ और ब् ;अपपपद्ध । ∩ ठ′ ∩ ब्′ ;पपपद्ध । त्र ठ′ ;पअद्ध । और ब् परस्पर अपवजीर् हैं। ;अद्ध । और ठ′ परस्पर अपवजीर् हैं। ;अपद्ध ।′ए ठ′ए ब् परस्पर अपवजीर् और निःशेष घटनाएँ हैं। 16ण्4 प्रायिकता की अभ्िागृहीतीय दृष्िटकोण ;।गपवउंजपब ।चचतवंबी जव च्तवइंइपसपजलद्ध इस अध्याय के पहले अनुच्छेदों में हमने यादृच्िछक परीक्षण, प्रतिदशर् समष्िट तथा इन परीक्षणों से संबंध्ित घटनाओं पर विचार किया है। हम अपने दैनिक जीवन में किसी घटना के घटित होने की संभावना के लिए अनेक शब्दों का उपयोग करते हैं। प्रायिकता सि(ांत किसी घटना के घटित होने या न होने की संभावना को एक माप देने का प्रयास है। पिछली कक्षाओं में हमने किसी परीक्षण में वुफल संभावित परिणामों की संख्या ज्ञात होने पर, किसी घटना की प्रायिकता ज्ञात करने की वुफछ विध्ियों के बारे में पढ़ा है। किसी घटना की प्रायिकता ज्ञात करने की एक और विध्ि अभ्िागृहीतीय दृष्िटकोण है। इस तरीका में प्रायिकताएँ निधर्रित करने के लिए अभ्िागृहीतियों या नियमों को बण्िार्त ;कमचपबजद्ध किया गया है। मान लें कि किसी यादृच्िछक परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ै है। प्रायिकता च् एक वास्तविक मानीय पफलन है जिसका प्रांत ै का घात समुच्चय है, और परिसर अंतराल ख्0ए1, है जो निम्नलिख्िात अभ्िागृहीतियों को संतुष्ट करता हैः ;पद्ध किसी घटना म्ए के लिए, च् ;म्द्ध ≥ 0 ;पपद्ध च्;ैद्ध त्र 1 ;पपपद्ध यदि म् और थ् परस्पर अपवजीर् घटनाएँ हैं तो च्;म् ∪ थ्द्ध त्र च्;म्द्ध ़ च्;थ्द्धण् अभ्िागृहित ;पपपद्ध से यह अनुसरित होता है कि च्;φद्ध त्र 0ण् इसे सि( करने के लिए हम थ् त्र φ लेते हैं और देखते हैं कि म् और φ परस्पर अपवजीर् घटनाएँ है, इसलिए अभ्िागृहीत ;पपपद्ध से हम पाते हैं कि च् ;म् ∪ φद्ध त्र च् ;म्द्ध ़ च् ; φ द्ध या च्;म्द्ध त्र च्;म्द्ध ़ च् ;φद्ध अथार्त् च्;φद्ध त्र 0 मान लीजिए कि ω1ए ω2ए ण्ण्ण्एωप्रतिदशर् समष्िट ै के परिणाम हैं अथार्त्द ै त्र क्ष्ω1ए ω2ए ण्ण्ण्एωद्वहै।दप्रायिकता की अभ्िागृहीतीय परिभाषा से यह निष्कषर् निकलता है कि ;पद्ध प्रत्येक ωप ∈ ै के लिए 0 ≤ च् ;ωपद्ध ≤ 1 ;पपद्ध च् ;ω1द्ध ़ च् ;ω2द्ध ़ ण्ण्ण् ़ च् ;ω दद्ध त्र 1 ;पपपद्ध किसी घटना ωप के लिए च्;।द्ध त्र Σ च् ;ωपद्धए ωप ∈ । पद्व को सरल घटना कहते हैं और संकेतन की सुविध के लिए हम च्;क्ष्ωद्वद्ध को च्;ωद्ध लिखते हैं।पपउदाहरण के लिए एक सिक्के को उछालने के परीक्षण में हम प्रत्येक परिणाम भ् और ज् के 1साथ संख्या 2 निधर्रित कर सकते हैं 1 1 अथार्त् च्;भ्द्ध त्र 2 और च्;ज्द्ध त्र 2 ण्ण्ण् ;1द्ध स्पष्टतया यह निधर्रण दोनों प्रतिबंधें को संतुष्ट करता है अथार्त् प्रत्येक संख्या न तो शून्य से छोटी है और न ही एक से बड़ी है 11 और च्;भ्द्ध ़ च्;ज्द्ध त्र ़ त्र 122इसलिए इस दशा में हम कह सकते हैं कि 11 भ् की प्रायिकता त्र 2 और ज् की प्रायिकता त्र 2ण् 1 3आइए हम च्;भ्द्ध त्र और च्;ज्द्ध त्र लेते हैं। ण्ण्ण् ;2द्ध4 4 क्या यह निधर्रण अभ्िागृहीतीय तरीका के प्रतिबंधें को संतुष्ट करता है? 13हाँ, इस दशा में भ् की प्रायिकता त्र और ज् की प्रायिकता त्र है।44 हम पाते हैं कि दोनांे प्रायिकता निधर्रण ;1द्ध और ;2द्ध, भ् और ज् की प्रायिकताओं के लिए वैध् हैं। वास्तव में दोनों परिणामों भ् तथा ज् की प्रायिकताओं के लिए संख्याएँ क्रमशः च तथा ;1 दृ चद्ध निधर्रित कर सकते हैं, जबकि 0 ≤ च ≤ 1 और च्;भ्द्ध ़ च्;ज्द्ध त्र च ़ ;1 दृ चद्ध त्र 1 यह प्रायिकता निधर्रण भी अभ्िागृहीतीय दृष्िटकोण के प्रतिबंधें को संतुष्ट करते हैं। अतः हम कह सकते हैं कि किसी परीक्षण के परिणामों के साथ प्रायिकता वितरण अनेक ;या यह कहना अध्िक उचित्त होगा कि अनंतद्ध प्रकार से किया जा सकता है। आइए अब वुफछ उदाहरणों पर विचार करें। उदाहरण 9 मान लीजिए एक प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्ω1ए ω2ए ण्ण्ण्एω6द्वहै। निम्नलिख्िात में से प्रत्येक परिणाम के लिए कौन - कौन से प्रायिकता निधर्रण वैध् हैं? परिणाम ω1 ω2 ω3 ω4 ω5 ω6 ;ंद्ध 1 6 1 6 1 6 1 6 1 6 1 6 ;इद्ध 1 0 0 0 0 0 ;बद्ध 1 8 2 3 1 3 1 3 1 4 − 1 3 − ;कद्ध 1 12 1 12 1 6 1 6 1 6 3 2 ;मद्ध 0ण्1 0ण्2 0ण्3 0ण्4 0ण्5 0ण्6 हल ;ंद्ध प्रतिबंध् ;पद्धरू प्रत्येक संख्या च ;ωद्ध ध्नात्मक है और एक से छोटी है।पप्रतिबंध्;पपद्धरू प्रायिकताओं का योग 111111 त्र ़़़़़त्र 1 666666 इसलिए यह प्रायिकता निधर्रण वैध् है। ;इद्ध प्रतिबंध् ;पद्धरू प्रत्येक संख्या च;ωपद्ध या तो 0 है या 1 है। प्रतिबंध् ;पपद्धरू प्रायिकताओं का योग त्र 1 ़ 0 ़ 0 ़ 0 ़ 0 ़ 0 त्र 1 इसलिए यह निधर्रण वैध् है। ;बद्ध प्रतिबंध् ;पद्धरू दो प्रायिकताएँ च ;ω5द्ध और च;ω6द्ध )णात्मक हैं। इसलिए यह निधर्रण वैध् नहीं है। 3;कद्ध क्यांेकि च ;ω6द्ध त्र 2झ 1ए इसलिए यह प्रायिकता निधर्रण वैध् नहीं है। ;मद्ध क्यांेकि प्रायिकताओं का योग त्र 0ण्1 ़ 0ण्2 ़ 0ण्3 ़ 0ण्4 ़ 0ण्5 ़ 0ण्6 त्र 2ण्1 है इसलिए ए यह प्रायिकता निधर्रण वैध् नहीं है। 16ण्4ण्1 घटना की प्रायिकता ;च्तवइंइपसपजल व िंद मअमदजद्ध एक मशीन द्वारा निमिर्त कलमों में से तीन का परीक्षण उन्हें अच्छा ;त्राुटिरहितद्ध और खराब ;त्राुटियुक्तद्ध में वगीर्वृफत करने के लिए किया गया। मान लीजिए कि इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ै है। इस परीक्षण के प़फलस्वरूप हमें 0ए 1ए 2 या 3 खराब कलमें मिल सकती हैं। इस प्रयोग के संगत प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्ठठठए ठठळए ठळठए ळठठए ठळळए ळठळए ळळठए ळळळद्वहै। जहाँ ठ एक त्राुटियुक्त या खराब कलम को और ळ एक अच्छे या त्राुटिरहित कलम को प्रकट करता है। मान लीजिए, कि परिणामों के लिए निम्नलिख्िात प्रायिकताएँ निधर्रित की गइर् हैंः प्रतिदशर् बिंदुरू ठठठ ठठळ ठळठ ळठठ ठळळ ळठळ ळळठ ळळळ 11111111प्रायिकतारू 88888888 मान लीजिए घटना ‘तथ्यतः एक त्राुटियुक्त कलम का निकलना’ को। से व घटना ‘न्यूनतम दो त्राुटियुक्त कलमों का निकलना’ को ठ से प्रकट करते हैं। स्पष्टतः । त्र क्ष्ठळळए ळठळए ळळठद्व और ठ त्र क्ष्ठठळए ठळठए ळठठए ठठठद्व अब च्;।द्ध त्र ∑च्;ωप द्धए ωप ।∀∈ 1113त्र च्;ठळळद्ध ़ च्;ळठळद्ध ़ च्;ळळठद्ध त्र ़़त्र 8888 और च्;ठद्ध त्र ∑च्;ωद्धए ∀ ∈ ωप ठप 111141त्र च्;ठठळद्ध ़ च्;ठळठद्ध ़ च्;ळठठद्ध ़ च्;ठठठद्ध त्र ़़़त्रत्र 88888 2 आइए एक अन्य परीक्षण ‘एक सिक्के को दो बार उछालना’ पर विचार करें। इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्भ्भ्ए भ्ज्ए ज्भ्ए ज्ज्द्व है। मान लीजिए कि विभ्िान्न परिणामों के लिए निम्नलिख्िात प्रायिकताएँ निधर्रित की गइर् हैंः 112 9च्;भ्भ्द्ध त्र ए च्;भ्ज्द्ध त्र ए च्;ज्भ्द्ध त्र ए च्;ज्ज्द्ध त्र47 728 स्पष्टतया यह प्रायिकता निधर्रण अभ्िागृहीतीय अभ्िागम के प्रतिबंधें को संतुष्ट करता है। आइए अब हम घटना म् ‘दोनों उछालों में एक सा ही परिणाम है’ की प्रायिकता ज्ञात करें। यहाँ म् त्र क्ष्भ्भ्ए ज्ज्द्व 194अब सभी ωप ∈ म् के लिए च्;म्द्ध त्र ∑च्;ωपद्धए त्र च्;भ्भ्द्ध ़ च्;ज्ज्द्ध त्र ़त्र 428 7 घटना थ्रू ‘तथ्यतः दो चित्त’ के लिए, हम पाते हैं थ् त्र क्ष्भ्भ्द्व और च्;थ्द्ध त्र च्;भ्भ्द्ध त्र 14 16ण्4ण्2 सम सम्भाव्य परिणामों की प्रायिकता ;च्तवइंइपसपजल व िमुनंससल सपामसल वनजबवउमेद्ध मान लीजिए कि एक परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्ω1ए ω2ए ण्ण्ण्ए ω द्व हैदमान लें कि सभी परिणाम सम संभाव्य हैं, अथार्त् प्रत्येक सरल घटना के घटित होने की संभावना समान है। अथार्त् सभी ωप ∈ ै के लिए, च्;ωपद्ध त्र चए जहाँ 0 ≤ च ≤ 1 ∑ दपक्योंकि च्;ωद्ध त्र1 इसलिए च ़ च ़ ण्ण्ण् ़ च ;द बारद्ध त्र 1 पत्र1 1या दच त्र 1 या च त्र द मान लीजिए कि प्रतिदशर् समष्िट ै की कोइर् एक घटना म्ए इस प्रकार है कि द;ैद्ध त्र द और द;म्द्ध त्र उण् यदि प्रत्येक परिणाम सम संभाव्य है तो यह अनुसरित होता है कि उ म् वफेअनुकलू परिणामांेकीसख्ंया च्;म्द्ध त्र त्र द वुफलसभ्ंाावितपरिणामांेकी सख्ंया 16ण्4ण्3 घटना श्। या ठश् की प्रायिकता ;च्तवइंइपसपजल व िजीम मअमदज ष्। वत ठष्द्ध आइए अब हम घटना ष्। या ठष्ए की प्रायिकता अथार्त् च् ;। ∪ ठद्ध ज्ञात करें। मान लीजिए, । त्र क्ष्भ्भ्ज्ए भ्ज्भ्ए ज्भ्भ्द्व और ठ त्र क्ष्भ्ज्भ्ए ज्भ्भ्ए भ्भ्भ्द्वए ‘एक सिक्के की तीन उछालों के परीक्षण की दो घटनाएँ हैं। स्पष्टतया । ∪ ठ त्र क्ष्भ्भ्ज्ए भ्ज्भ्ए ज्भ्भ्ए भ्भ्भ्द्व अब च् ;। ∪ ठद्ध त्र च्;भ्भ्ज्द्ध ़ च्;भ्ज्भ्द्ध ़ च्;ज्भ्भ्द्ध ़ च्;भ्भ्भ्द्ध यदि सभी परिणाम सम संभाव्य हों तो 111141च् ;। ∪ ठद्ध त्ऱ़़त्रत्र 88888 2 साथ ही च्;।द्ध त्र च्;भ्भ्ज्द्ध ़ च्;भ्ज्भ्द्ध ़ च्;ज्भ्भ्द्ध त्र 83 और च्;ठद्ध त्र च्;भ्ज्भ्द्ध ़ च्;ज्भ्भ्द्ध ़ च्;भ्भ्भ्द्ध त्र 83 33 6़त्रइसलिए च्;।द्ध ़ च्;ठद्ध त्र 88 8 यह स्पष्ट है कि च्;। ∪ ठद्ध ≠ च्;।द्ध ़ च्;ठद्ध बिंदुओं भ्ज्भ् और ज्भ्भ्ए । तथा ठ में उभयनिष्ठ अवयव हैं। च्;।द्ध ़ च्;ठद्ध के परिकलन में भ्ज्भ् औरज्भ्भ्ए ;अथार्त् । ∩ ठ के अवयवद्ध की प्रायिकता को दो बार सम्िमलित किया गया है। अतः च्;। ∪ ठद्ध को ज्ञात करने के लिए हमें । ∩ ठ के प्रतिदशर् बिंदुओं की प्रायिकताओं को च्;।द्ध ़ च्;ठद्ध में से घटाना होगा। अथार्त् च्;। ठद्ध च्;।द्ध ़च्;ठद्ध −∑च्;ωप द्धए ωप ।ठ∪ त्र ∀∈∩ त्र च्;।द्ध ़च्;ठद्ध −च्;। ∪ठद्ध अतः च्;। ∪ठद्ध त्र च्;।द्ध ़च्;ठद्ध −च्;। ∩ठद्ध व्यापकतः यदि। और ठ किसी परीक्षण की कोइर् दो घटनाएँ हैं तब किसी घटना की प्रायिकता की परिभाषा के अनुसार हमें प्राप्त होता है कि च्। ∪त्र ठ च;द्धए ωप ।∑ ω ∀∈∪ठण् क्योंकि । ∪त्र −∪∩∪− ;। ठद्ध;। ठद्ध ;ठ ।द्ध ए इसलिए ;द्ध प ठ च्;। ∪ ठद्धत्र ख्च्; द्ध∀ω∈;।दृठद्ध ़∑ωद्ध ω∈∩ठ़ ∑ωच्; ∀। ∑च्;ωωद्ध∀∈ ठदृ। पप ,ख् पप ,ख् पप , ;क्योंकि।दृठए । ∩ ठ और ठ दृ । परस्पर अपवजीर् हैं। ण्ण्ण् ;1द्ध ∑ω∀पप ,च;द्ध ωप ∈ठ,साथ ही च्;।द्ध ़च्;ठद्ध त्रख्च;द्ध ω∈।़ ख्∑ω∀प त्र ख्∑ωच्; द्ध∀∈;।दृठद्ध ∪∩ ठद्ध ़ ∑ωद्ध∀∈;ठदृ।द्ध ;। ω;। ,ख्च्; ω∪∩ ठद्ध ,पप पप ∑ωप ,च्; प ω;। , च्; प ωत्र ख्च्; प द्ध∀ω∈;। दृ ठद्ध ़ ख्∑ωद्ध∀प ∈∩ ठद्ध ़ ख्∑ωद्ध∀प ∈;ठदृ।द्ध , ़ ख्∑ωप द्ध∀ωप ∈∩ ठद्ध ,च्; ;। त्र च्;।न्ठद्ध ़∑ωप द्ध∀ω∈∩ ठ ख्;1द्ध के प्रयोग से,ख्च्; प । , त्र च्;। ∪ठद्ध़ च्;। ∩ठद्ध ण् अतः च्;। ठद्ध च्;।द्ध ़च्;ठद्ध दृ च्;। ∩ठद्ध ण्∪त्र इस सूत्रा का वैकल्िपक प्रमाण निम्नलिख्िात प्रकार से भी दिया जा सकता है। । ∪ ठ त्र । ∪ ;ठ दृ ।द्ध जहाँ । और ठ दृ । परस्पर अपवजीर् हैं। और ठ त्र ;। ∩ ठद्ध ∪ ;ठ दृ ।द्ध जहाँ । ∩ ठ और ठ दृ । परस्पर अपवजीर् हैं। प्रायिकता की अभ्िागृहीत ;पपपद्ध द्वारा, हमें प्राप्त होता है कि च् ;। ∪ ठद्ध त्र च् ;।द्ध ़ च् ;ठ दृ ।द्ध ण्ण्ण् ;2द्ध और च्;ठद्ध त्र च् ; । ∩ ठद्ध ़ च् ;ठ दृ ।द्ध ण्ण्ण् ;3द्ध ;2द्ध में से ;3द्ध घटाने पर, च् ;। ∪ ठद्ध दृ च्;ठद्ध त्र च्;।द्ध दृ च् ;। ∩ ठद्ध या च्;। ∪ ठद्ध त्र च्;।द्ध ़ च् ;ठद्ध दृ च् ;। ∩ ठद्ध उपयुर्क्त परिणाम को वेन् - आरेख ;आवृफति 16.1द्ध का अवलोकन करके भी पुनः सत्यापित किया जा सकता है। आवृफति 16ण्1 यदि । और ठ असंयुक्त समुच्चय हों अथार्त् ये दोनों परस्पर अपवजीर् घटनाएँ हों तो ;। ∩ ठद्ध त्र φ इसलिए, च् ;। ∩ ठद्ध त्र च् ;φद्ध त्र 0 अतः परस्पर अपवजीर् घटनाओं। और ठए के लिए, हम पाते हैं च् ;। ∪ ठद्ध त्र च् ;।द्ध ़ च् ;ठद्धए जो विफ प्रायिकता की अभ्िागृहीत ;पपपद्ध ही है। 16ण्4ण्4 घटना ‘।.नहीं’ की प्रायिकता ;च्तवइंइपसपजल व िमअमदज श्दवज ।श्द्ध 1 से 10 तक अंकित पूणा±कों वाले दस पत्तों के डेक में से एक पत्ता निकालने के परीक्षण की घटना । त्र क्ष्2ए 4ए 6ए 8द्व पर विचार कीजिए। स्पष्टतया प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्1ए 2ए 3ए ण्ण्ण्ए10द्व है। यदि सभी परिणामों 1ए 2ए 3एण्ण्ण्ए10 को सम संभाव्य मान लें तो प्रत्येक परिणाम की प्रायिकता 101 होगी। अब च्;।द्ध त्र च्;2द्ध ़ च्;4द्ध ़ च्;6द्ध ़ च्;8द्ध 1111 42 त्र ़़़त्रत्र 1010 101010 5 साथ ही घटना ‘।.नहीं’ त्र ।′ त्र क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए 9ए 10द्व अब च्;।′द्ध त्र च्;1द्ध ़ च्;3द्ध ़ च्;5द्ध ़ च्;7द्ध ़ च्;9द्ध ़ च्;10द्ध 63 त्रत्र 10 5 32त्र− त्र− च्;।द्ध इस प्रकार च्;।′द्ध त्र515 1 साथ ही हमें यह भी पता है कि ।′ तथा । परस्पर अपवजीर् और निःशेष घटनाएँ हैं। अतः । ∩ ।′ त्र φ और । ∪ ।′ त्र ै या च्;। ∪ ।′द्ध त्र च्;ैद्ध अब च्;।द्ध ़ च्;।′द्ध त्र 1ए अभ्िागृहीतों ;पपद्ध और ;पपपद्ध के प्रयोग द्वारा या च्;।′द्ध त्र च्;। नहींद्ध त्र 1 दृ च्;।द्ध आइए सम संभावित परिणामों वाले परीक्षणों के लिए वुफछ उदाहरणों व प्रश्नों पर विचार करें,जब तक कि अन्यथा न कहा गया हो। उदाहरण 10 ताश के 52 पत्तों की एक भली - भाँति पेंफटी गइर् गडóी में से एक पत्ता निकाला गया है।निकाले गए पत्ते की प्रायिकता ज्ञात कीजिए यदि ;पद्ध पत्ता इर्ंट का है। ;पपद्ध पत्ता इक्का नहीं है। ;पपपद्ध पत्ता काले रंग का है ;अथार्त् चिड़ी या हुकुम काद्धए ;पअद्ध पत्ता इर्ंट का नहीं है। ;अद्ध पत्ता काले रंग का नहीं है। हल जब 52 पत्तों की भली - भाँति पेंफटी गइर् गडóी में एक पत्ता निकाला जाता है तो संभव परिणामों कीसंख्या 52 है। ;पद्ध मान लीजिए घटना ‘निकाला गया पत्ता इर्ंट का है, को । से दशार्या गया है। स्पष्टतया । में अवयवों की संख्या 13 है। इसलिए, च्;।द्ध त्र 13 त्र 1 52 4 1अथार्त्, एक ईंट का पत्ता निकालने की प्रायिकता त्र 4 ;पपद्ध मान लीजिए कि घटना ‘निकाला गया पत्ता इक्का है’ को ठ से दशार्ते हैं।इसलिए ‘निकाला गया पत्ता इक्का नहीं है’ को ठ′ से दशार्या जाएगा। 4 112 अब च्;ठ′द्ध त्र 1 दृ च्;ठद्ध त्र 1−त्र 1 −त्र 52 1313 ;पपपद्ध मान लीजिए घटना ‘निकाला गया पत्ता काले रंग का है’ को ब् से दशार्ते हैं। इसलिए समुच्चय ब् में अवयवों की संख्या त्र 26 26 1अथार्त् च्;ब्द्ध त्र त्र 52 2 1इस प्रकार काले रंग का पत्ता निकालने की प्रायिकता त्र 2 ;पअद्ध हमने उपयुर्क्त ;पद्ध में माना है कि घटना ‘निकाला गया पत्ता इर्ंट का है’ को । से दशार्ते हैं।इसलिए घटना ‘निकाला गया पत्ता इर्ंट का नहीं है’ को ।′ या ‘। - नहीं’ से दशार्एगें। 131−त्रअब च्;। - नहींद्ध त्र 1 दृ च्;।द्ध त्र 44 ;अद्ध घटना ‘निकाला गया पत्ता काले रंग का नहीं है’ कोब्′ या ‘ब् - नहीं’ से दशार्या जा सकता है। 11अब हमें ज्ञात है कि च्;ब् - नहींद्ध त्र 1 दृ च्;ब्द्ध त्र 1−त्र22इसलिए, पत्ता काले रंग का न होने की प्रायिकता त्र 12 उदाहरण 11 एक थैले में 9 डिस्क हैं जिनमें से 4 लाल रंग की, 3 नीले रंग की और 2 पीले रंग की हैं। डिस्क आकार एवं माप में समरूप हैं। थैले में से एक डिस्क यादृच्छया निकाली जाती है। प्रायकिता ज्ञात कीजिए कि निकाली गइर् डिस्क ;पद्ध लाल रंग की है ;पपद्ध पीले रंग की है;पपपद्ध नीले रंग की है ;पअद्ध नीले रंग की नहीं हैए ;अद्ध लाल रंग की है या नीले रंग की है। हल डिस्कांे की वुफल संख्या 9 है। इसलिए संभव परिणामों की वुफल संख्या 9 हुइर्। मान लीजिए घटनाओं ।ए ठ व ब् को इस प्रकार से परिभाष्िात किया गया है। ।रू निकाली गइर् डिस्क लाल रंग की है। ठरू निकाली गइर् डिस्क पीले रंग की है। ब्रू निकाली गइर् डिस्क नीले रंग की है। ;पद्ध लाल रंग की डिस्कों की संख्या त्र 4 अथार्त् द ;।द्ध त्र 4 4अतः च्;।द्ध त्र 9 ;पपद्ध पीले रंग की डिस्कों की संख्या त्र 2ए अथार्त् द ;ठद्ध त्र 2 2इसलिए, च्;ठद्ध त्र 9 ;पपपद्ध नीले रंग की डिस्कों की संख्या त्र 3ए अथार्त् द;ब्द्ध त्र 3 31इसलिए, च्;ब्द्ध त्र त्र 93 ;पअद्ध स्पष्टतया घटना ‘डिस्क नीले रंग की नहीं है’ श्ब्.नहींश् ही है हम जानते हैं कि च्;ब्.नहींद्ध त्र 1 दृ च्;ब्द्ध 12इसलिए च्;ब्.नहींद्ध त्र 1−त्र 33 ;अद्ध घटना ‘लाल रंग की डिस्क या नीले रंग की डिस्क’ का समुच्चय ष्। ∪ ब्ष् से वण्िार्त किया जा सकता है। क्योंकि, । और ब् परस्पर अपवजीर् घटनाएँ हैं, इसलिए 417च्;। या ब्द्ध त्र च् ;। ∪ ब्द्ध त्र च्;।द्ध ़ च्;ब्द्ध त्र ़त्र 939 उदाहरण 12 दो विद्याथ्िार्यों अनिल और आश्िामा एक परीक्षा में प्रविष्ट हुए। अनिल के परीक्षा में उत्तीणर्होने की प्रायिकता 0.05 है और आश्िामा के परीक्षा में उत्तीणर् होने की प्रायिकता 0.10 है। दोनों केपरीक्षा में उत्तीणर् होने की प्रायिकता 0.02 है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि ;ंद्ध अनिल और आश्िामा दोनों परीक्षा में उत्तीणर् नहीं हो पाएगें। ;इद्ध दोनों में से कम से कम एक परीक्षा में उत्तीणर्नहीं होगा। ;बद्ध दोनों में से केवल एक परीक्षा में उत्तीणर्होगा। हल मान लीजिए म् तथाथ् घटनाओं ‘अनिल परीक्षा उत्तीणर् कर लेगा’ और ‘आश्िामा परीक्षा उत्तीणर् कर लेगी’ को क्रमशः दशार्ते हैं। इसलिए च्;म्द्ध त्र 0ण्05ए च्;थ्द्ध त्र 0ण्10 और च्;म् ∩ थ्द्ध त्र 0ण्02ण् तब ;ंद्ध घटना ’दोनों परीक्षा उत्तीर्ण नहीं हांेगे’ को म्´ ∩ थ्´ से दशार्या जा सकता है। क्योंकि म्´ घटना ष्म्.नहींष्ए अथार्त् ‘अनिल परीक्षा उत्तीणर् नहीं करेगा’ तथा थ्´ घटना ष्थ्.नहींष्ए अथार्त् ‘आश्िामा परीक्षा उत्तीणर् नहीं करेगी’ दशार्ते हैं। साथ ही म्´ ∩ थ्´ त्र ;म् ∪ थ्द्ध´ ;डी - मोरगन् नियम द्वाराद्ध अब च्;म् ∪ थ्द्ध त्र च्;म्द्ध ़ च्;थ्द्ध दृ च्;म् ∩ थ्द्ध या च्;म् ∪ थ्द्ध त्र 0ण्05 ़ 0ण्10 दृ 0ण्02 त्र 0ण्13 इसलिए च्;म्´ ∩ थ्´द्ध त्र च्;म् ∪ थ्द्ध´ त्र 1 दृ च्;म् ∪ थ्द्ध त्र 1 दृ 0ण्13 त्र 0ण्87 ;इद्ध च्;दोनों में से कम से कम एक उत्तीणर् नहीं होगाद्ध त्र 1 दृ च्;दोनों उत्तीणर् होंगेद्ध त्र 1 दृ 0ण्02 त्र 0ण्98 ;बद्ध घटना ‘दोनों मे से केवल एक उत्तीणर् होगा’ निम्नलिख्िात घटना के समरूप हैः‘अनिल उत्तीणर् होगा और आश्िामा उत्तीणर् नहीं होगी’ या ‘अनिल उत्तीणर् नहीं होगा और आश्िामा उत्तीणर् होगी’ अथार्त् म् ∩ थ्´ या म्´ ∩ थ् जहाँ म् ∩ थ्´ और म्´ ∩ थ् परस्पर अपवजीर् हैं। इसलिए, च् ;दोनों में से केवल एक उत्तीणर् होगाद्ध त्र च्;म् ∩ थ्´ या म्´ ∩ थ्द्ध त्र च्;म् ∩ थ्´द्ध ़ च्;म्´ ∩ थ्द्ध त्र च् ;म्द्ध दृ च्;म् ∩ थ्द्ध ़ च्;थ्द्ध दृ च् ;म् ∩ थ्द्ध त्र 0ण्05 दृ 0ण्02 ़ 0ण्10 दृ 0ण्02 त्र 0ण्11 उदाहरण 13 दो पुरुषों व दो स्ित्रायों के समूह में से दो व्यक्ितयों की एक समिति का गठन करना है। प्रायिकता क्या है कि गठित समिति में ;ंद्ध कोइर् पुरुष न होघ् ;इद्ध एक पुरुष हो घ् ;बद्ध दोनों ही पुरुष होंघ् हल समूह में व्यक्ितयों की वुफल संख्या त्र 2 ़ 2 त्र 4ण् इन चार व्यक्ितयों में से दो को 4ब्तरीके से2 चुना जा सकता है। ;ंद्ध समिति में कोइर् पुरुष न होने का अथर् है कि समिति में दो स्ित्रायाँ हैं। दो स्ित्रायों में से दोनों के चुनने के 2ब् त्र 1तरीका है।22ब्212 1××1 त्रत्र त्रइसलिए च्;कोइर् पुरुष नहींद्ध 4ब्2 43× 6 ;इद्ध समिति में एक पुरुष होने का तात्पयर् है कि इसमें एक स्त्राी है 2 पुरुषों में से एक पुरुष चुनने के 2ब्1 तरीके हैं तथा दो स्ित्रायों में से एक चुनने के भी 2ब्1 तरीके हैं। दोनों चुनावों को एक साथ करने के 2ब्× 2ब्तरीके हैं।1 1 2ब् ×2ब् × 222 त्र 11 त्रत्रइसलिए च्;एक पुरूषद्ध 4 ब्2 23× 3 ;बद्ध दो पुरुषों को 2ब्2 तरीकों से चुना जा सकता है। 2ब् 11 त्र 2 त्रत्रअतः च्;दो पुरुषद्ध 44ब्2 ब्26 प्रश्नावली 16ण्3 1ण् प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्ω1ए ω2ए ω3ए ω4ए ω5ए ω6ए ωद्वके परिणामों के लिए निम्नलिख्िात में से7कौन से प्रायिकता निधर्रण वैध् नहीं हैः परिणाम ω 1 ω 2 ω 3 ω 4 ω 5 ω 6 ω 7 ;ंद्ध 0ण्1 0ण्01 0ण्05 0ण्03 0ण्01 0ण्2 0ण्6 ;इद्ध 1 7 1 7 1 7 1 7 1 7 1 7 1 7 ;बद्ध 0ण्1 0ण्2 0ण्3 0ण्4 0ण्5 0ण्6 0ण्7 ;कद्ध दृ 0ण्1 0ण्2 0ण्3 0ण्4 दृ 0ण्2 0ण्1 0ण्3 ;मद्ध 1 14 2 14 3 14 4 14 5 14 6 14 15 14 2ण् एक सिक्का दो बार उछाला जाता है। कम से कम एक पट् प्राप्त होने की क्या प्रायिकता हैघ् 3ण् एक पासा पेंफका जाता है। निम्नलिख्िात घटनाओं की प्रायिकता ज्ञात कीजिएः ;पद्ध एक अभाज्य संख्या प्रकट होना ;पपद्ध 3 या 3 से बड़ी संख्या प्रकट होना ;पपपद्ध 1 या 1 से छोटी संख्या प्रकट होना ;पअद्ध छः से बड़ी संख्या प्रकट होना ;अद्ध छः से छोटी संख्या प्रकट होना 4ण् ताश की गडóी के 52 पत्तों में से एक पत्ता यादृच्छया निकाला गया है। ;ंद्ध प्रतिदशर् समष्िट में कितने बिंदु हैं? ;इद्ध पत्ते का हुकुम का इक्का होने की प्रायिकता क्या है? ;बद्ध प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि पत्ता ;पद्ध इक्का है ;पपद्ध काले रंग का है। 5ण् एक अनभ्िानत ;नदइपंेमकद्ध सिक्का जिसके एक तल पर 1 और दूसरे तल पर 6 अंकित है तथा एक अनभ्िानत पासा दोनों को उछाला जाता है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि प्रकट संख्याओं का योग ;पद्ध 3 है। ;पपद्ध 12 है। 6ण् नगर परिषद् में चार पुरुष व छः स्ित्रायाँ हैं। यदि एक समिति के लिए यादृच्छया एक परिषद् सदस्य चुना गया है तो एक स्त्राी के चुने जाने की कितनी संभावना है? 7ण् एक अनभ्िानत सिक्के को चार बार उछाला जाता है और एक व्यक्ित प्रत्येक चित्त पर एक रू जीतता है और प्रत्येक पट् पर 1.50रू हारता है। इस परीक्षण के प्रतिदशर् समष्िट से ज्ञात कीजिए कि आप चार उछालों में कितनी विभ्िान्न राश्िायाँ प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही इन राश्िायों में से प्रत्येक की प्रायिकता भी ज्ञात कीजिए? 8ण् तीन सिक्के एक बार उछाले जाते हैं। निम्नलिख्िात की प्रायिकता ज्ञात कीजिएः ;पद्ध तीन चित्त प्रकट होना ;पपद्ध 2 चित्त प्रकट होना ;पपपद्ध न्यूनतम 2 चित्त प्रकट होना ;पअद्ध अध्िकतम 2 चित्त प्रकट होना ;अद्ध एक भी चित्त प्रकट न होना ;अपद्ध 3 पट् प्रकट होना ;अपपद्ध तथ्यतः 2 पट् प्रकट होना ;अपपपद्ध कोइर् भी पट् न प्रकट होना ;पगद्ध अध्िकतम 2 पट् प्रकट होना 9ण् यदि किसी घटना । की प्रायिकता 112 है तो घटना ‘।.नहीं’ की प्रायिकता ज्ञात कीजिए। 10ण् शब्द श्।ैै।ैैप्छ।ज्प्व्छश् से एक अक्षर यादृच्छया चुना जाता है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि चुना गया अक्षर ;पद्ध एक स्वर ;अवूमसद्ध है ;पपद्ध एक व्यंजन ;बवदेवदंदजद्ध है। 11ण् एक लाटरी में एक व्यक्ित 1 से 20 तक की संख्याओं में से छः भ्िान्न - भ्िान्न संख्याएँ यादृच्छया चुनता है और यदि ये चुनी गइर् छः संख्याएँ उन छः संख्याओं से मेल खाती हैं, जिन्हें लाटरी समिति ने पूवर्निधर्रित कर रखा है, तो वह व्यक्ित इनाम जीत जाता है। लाटरी के खेल में इनाम जीतने की प्रायिकता क्या है? ख्संकेतः संख्याओं के प्राप्त होने का क्रम महत्वपूणर् नहीं है, 12ण् जाँच कीजिए कि निम्न प्रायिकताएँ च्;।द्ध और च्;ठद्ध युक्ित संगत ;बवदेपेजमदजसलद्ध परिभाष्िात की गइर् हैंः ;पद्ध च्;।द्ध त्र 0ण्5ए च्;ठद्ध त्र 0ण्7ए च्;।प्ठद्ध त्र 0ण्6 ;पपद्ध च्;।द्ध त्र 0ण्5ए च्;ठद्ध त्र 0ण्4ए च्;।न्ठद्ध त्र 0ण्8 13ण् निम्नलिख्िात सारणी में खाली स्थान भरिएः च्;।द्ध च्;ठद्ध च्;। ∩ ठद्ध च्;। ∪ ठद्ध 1 11;पद्ध ण् ण् ण्3 515 ;पपद्ध 0ण्35 ण् ण् ण् 0ण्25 0ण्6 ;पपपद्ध 0ण्5 0ण्35 ण् ण् ण् 0ण्7 14ण् च्;।द्ध त्र 3 और च्;ठद्ध त्र 15ए दिया गया है। यदि । और ठ परस्पर अपवजीर् घटनाएँ हैं, तो5 च्;। या ठद्धए ज्ञात कीजिए। 11 115ण् यदि म् और थ् घटनाएँ इस प्रकार हैं कि च्;म्द्ध त्र ए च्;थ्द्ध त्र और च्;म् और थ्द्ध त्र 8ए तो42 ज्ञात कीजिए ;पद्ध च्;म् या थ्द्ध ;पपद्ध च्;म् - नहीं और थ् - नहींद्ध। 16ण् घटनाएँ म् और थ् इस प्रकार हैं कि च्;म् - नहीं औरथ् - नहींद्ध त्र 0ण्25ए बताइए किम् औरथ् परस्पर अपवजीर् हैं या नहीं? 17ण् घटनाएँ । और ठ इस प्रकार हैं कि च्;।द्ध त्र 0ण्42ए च्;ठद्ध त्र 0ण्48 और च्;। और ठद्ध त्र 0ण्16ण् ज्ञात कीजिएः ;पद्ध च्;। - नहींद्ध ;पपद्ध च्;ठ - नहींद्ध ;पपपद्ध च्;। या ठद्ध 18ण् एक पाठशाला की कक्षा ग्प् के 40ः विद्याथीर् गण्िात पढ़ते हैं और 30ः जीव विज्ञान पढ़ते हैं। कक्षा के 10ः विद्याथीर् गण्िात और जीव विज्ञान दोनों पढ़ते हैं। यदि कक्षा का एक विद्याथीर् यादृच्छया चुना जाता है, तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह गण्िात या जीव विज्ञान पढ़ता होगा। 19ण् एक प्रवेश परीक्षा को दो परीक्षणों ;ज्मेजेद्धके आधर पर श्रेणीब( किया जाता है। किसी यादृच्छया चुने गए विद्याथीर् की पहले परीक्षण में उत्तीणर् होने की प्रायकिता 0ण्8 है और दूसरेपरीक्षण में उत्तीणर् होने की प्रायिकता 0ण्7 है। दोनों में से कम से कम एक परीक्षण उत्तीणर् करने की प्रायिकता 0ण्95 है। दोनों परीक्षणों को उत्तीणर् करने की प्रायिकता क्या है? 20ण् एक विद्याथीर् के अंतिम परीक्षा के अंग्रेजी और हिंदी दोनों विषयों को उत्तीणर् करने की प्रायिकता 0ण्5 है और दोनों में से कोइर् भी विषय उत्तीणर् न करने की प्रायिकता 0ण्1 है। यदि अंग्रेशी कीपरीक्षा उत्तीणर् करने की प्रायिकता 0ण्75 हो तो हिंदी की परीक्षा उत्तीणर् करने की प्रायिकता क्या है? 21ण् एक कक्षा के 60 विद्या£थयों में से 30 ने एन. सी. सी. ;छब्ब्द्ध, 32 ने एन. एस. एस. ;छैैद्ध और 24 ने दोनों को चुना है। यदि इनमें से एक विद्याथीर् यादृच्छया चुना गया है तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि ;पद्ध विद्याथीर् ने एन.सी.सी. या एन.एस.एस. को चुना है। ;पपद्ध विद्याथीर् ने न तो एन.सी.सी. और न ही एन.एस.एस. को चुना है। ;पपपद्ध विद्याथीर् ने एन.एस.एस. को चुना है किंतु एन.सी.सी. को नहीं चुना है। विविध् उदाहरण उदाहरण 14 छुटिðयों में वीना ने चार शहरों ।ए ठए ब् और क् की यादृच्छया क्रम में यात्रा की। क्या प्रायिकता है कि उसने ;पद्ध । की यात्रा ठ से पहले कीघ् ;पपद्ध । की यात्रा ठ से पहले और ठ की ब् से पहले कीघ् ;पपपद्ध । की सबसे पहले और ठ की सबसे अंत में यात्रा कीघ् ;पअद्ध । की या तो सबसे पहले या दूसरे स्थान पर यात्रा कीघ् ;अद्ध । की यात्रा ठ से एकदम पहले कीघ् हल वीना द्वारा चार शहरों ।ए ठए ब्ए और क् की यात्रा के विभ्िान्न ढंगों की संख्या 4! अथार्त् 24 है। इसलिए द ;ैद्ध त्र 24 क्योंकि प्रयोग की प्रतिदशर् समष्िट के अवयवों की संख्या 24 है। ये सभी परिणाम सम संभाव्य माने गए हैं। इस परीक्षण का प्रतिदशर् समष्िट ै त्र क्ष्।ठब्क्ए ।ठक्ब्ए ।ब्ठक्ए ।ब्क्ठए ।क्ठब्ए ।क्ब्ठ ठ।ब्क्ए ठ।क्ब्ए ठक्।ब्ए ठक्ब्।ए ठब्।क्ए ठब्क्। ब्।ठक्ए ब्।क्ठए ब्ठक्।ए ब्ठ।क्ए ब्क्।ठए ब्क्ठ। क्।ठब्ए क्।ब्ठए क्ठब्।ए क्ठ।ब्ए क्ब्।ठए क्ब्ठ।द्व है। ;पद्ध मान लीजिए घटना ‘वीना । की यात्रा ठ से पहले करती है,’ को म् से दशार्ते हैं। इसलिए म् त्र क्ष्।ठब्क्ए ब्।ठक्ए क्।ठब्ए ।ठक्ब्ए ब्।क्ठए क्।ब्ठ ।ब्ठक्ए ।ब्क्ठए ।क्ठब्ए ब्क्।ठए क्ब्।ठए ।क्ब्ठद्व द;म्द्ध 12 1च्म् त्र त्रत्रइस प्रकार ;द्ध द;द्ध 24 ै2 ;पपद्ध मान लीजिए घटना ‘वीना ने । की यात्रा ठ से पहले और ठ की यात्रा ब् से पहले की’ को थ् से दशार्ते हैं। यहाँ थ् त्र क्ष्।ठब्क्ए क्।ठब्ए ।ठक्ब्ए ।क्ठब्द्व द थ्च्थ् ;द्धत्र 41 इसलिए ;द्धत्र त्र द;द्ध 24 ै6 विद्या£थयों को सलाह दी जाती है कि ;पपपद्धए ;पअद्ध व ;अद्ध की प्रायिकता स्वयं ज्ञात करें। उदाहरण 15 जब ताश के 52 पत्तों की गडóी से 7 पत्तों का एक समूह बनाया जाता है तो इस बात की प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि इसमें ;पद्ध सारे बादशाह शामिल हंै;पपद्ध तथ्यतः 3 बादशाह हंै ;पपपद्ध न्यूनतम 3 बादशाह हैं। हल समूहों की वुफल संभव संख्या त्र 52ब्7 ;पद्ध 4 बादशाहों सहित समूहों की संख्या त्र 4ब्× 48ब् ;अन्य 3 पत्ते शेष 48 पत्तों में से चुने43जाते हैंद्ध 4 ब्4 ×48 ब्3 1 त्रअतः च् ;समूह में चार बादशाहद्ध त्र 52 ब्7 7735 48;पपद्ध 3 बादशाह और 4 अन्य पत्तों वाले समूहों की संख्या त्र 4ब्3 × ब्4 4 ब्3 ×48 ब्4 9 त्रइसलिए च् ;तथ्यतः 3 बादशाहद्ध त्र 52 ब्7 1547 ;पपपद्ध च्;न्यूनतम 3 बादशाहद्ध त्र च्;तथ्यतः 3 बादशाहद्ध ़ च्;4 बादशाहद्ध 9 146 त्र ़त्र 1547 7735 7735 उदाहरण 16 यदि ।ए ठए ब् किसी यादृच्िछक प्रयोग के संगत तीन घटनाएँ हों तो सि( कीजिए कि ; ठब्द्धत्रच्। ़ ;द्ध़च्ब् −; ∩ठ −; ∩ब्च्। ∪∪ ;द्ध च्ठ ;द्ध च्। द्ध च्। द्ध ;∩ब्द्ध़च्। ∩∩ ब्द्ध−च्ठ ; ठ हल विचारिए म् त्र ठ ∪ ब् तब च्;। ∪ ठ ∪ ब् द्ध त्र च्;। ∪ म्द्ध च्। च्।म् ण्ण्ण् ;1द्धत्र ;द्ध ;द्ध ़च्म् −; ∩द्ध अब च्;म्द्ध त्र च्;ठ ∪ ब्द्ध त्रच्ठ;द्ध़;द्ध−च्ठ ;च्ब् ∩ब्द्ध ण्ण्ण् ;2द्ध साथ ही ।म्∩त्र∩ ∪। ;ठब्द्धत्र ;।ठद्ध; ।ब्द्ध∩∪∩ ख्समुच्चयों के संघ पर सवर्निष्ठ के वितरण नियम द्वारा, अतः च्।;∩म् त्र ; ठ च्। ∩ब्द्धदृ च्ख्। ठ । द्धच्। ∩∩∩ च्। ∩़ द्ध ; ठ द्ध ∩़ द्ध; ; द्ध; ब्, त्र ; ठ च्। ∩ब्द्धदृ च्।ख्∩∩ब्, ण्ण्ण् ;3द्ध ;2द्ध और ;3द्ध को ;1द्ध में प्रयोग करने पर च्। ठ ़च्ठ च्ठ द्धख्∪∪ब्,त्रच्।;द्ध ;द्ध़च्ब् ;द्ध−;∩ब्दृ च्;। ∩ ठद्ध दृ च्;। ∩ ब्द्ध दृ च्;। ∩ ठ ∩ ब्द्ध उदाहरण 17 एक रिले दौड़ ;तमसंल तंबमद्ध में पाँच टीमों ।ए ठए ब्ए क् और म् ने भाग लिया। ;ंद्ध ।ए ठ और ब् के क्रमशः पहला, दूसरा व तीसरा स्थान पाने की क्या प्रायिकता है?;इद्ध ।ए ठ और ब् के पहले तीन स्थानों ;किसी भी क्रमद्ध पर रहने की क्या प्रायिकता है?;मान लीजिए कि सभी अंतिम क्रम सम संभाव्य हैं।द्ध हल यदि हम पहले तीन स्थानों के लिए अंतिम क्रमों के प्रतिदशर् समष्िट पर विचार करें तो पाएँगे कि 5! 1इसमें 5 च्3 ए पण्मण्ए ;द्ध त्र 5 × 4 × 3 त्र 60 प्रतिदशर् बिंदु हैं और प्रत्येक की प्रायिकता है।53!−60 ;ंद्ध ।एठ और ब् क्रमशः प्रथम, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहते हैं। इसके लिए एक ही अंतिम क्रम है अथार्त्।ठब् 1अतः च्;।ए ठ और ब् क्रमशः प्रथम, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहते हैंद्ध त्र 60 ;इद्ध ।ए ठ और ब् पहले तीन स्थानों पर हैं। इसके लिए ।ए ठ और ब् के लिए 3! तरीके हैं। इसलिए इस घटना के संगत 3! प्रतिदशर् बिंदु होंगे। 3!6 1अतः च् ;।ए ठ और ब् पहले तीन स्थानों पर रहते हैंद्ध त्रत्रत्र 60 6010 विविध् प्रश्नावली 1ण् एक डिब्बे में 10 लाल, 20 नीली व 30 हरी गोलियाँ रखी हैं। डिब्बे से 5 गोलियाँ यादृच्छयानिकाली जाती हैं। प्रायिकता क्या है कि ;पद्ध सभी गोलियाँ नीली हैं घ् ;पपद्ध कम से कम एक गोली हरी हैघ् 2ण् ताश के 52 पत्तों की एक अच्छी तरह पेंफटी गइर् गडóी से 4 पत्ते निकाले जाते हैं। इस बात कीक्या प्रायिकता है कि निकाले गए पत्तों में 3 इर्ंट और एक हुकुम का पत्ता है? 3ण् एक पासे के दो पफलकों में से प्रत्येक पर संख्या ‘1’ अंकित है, तीन पफलकों में प्रत्येक पर संख्या ‘2’ अंकित है और एक पफलक पर संख्या ‘3’ अंकित है। यदि पासा एक बार पेंफका जाता है, तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध च्;2द्ध ;पपद्ध च्;1 या 3द्ध ;पपपद्ध च्;3.नहींद्ध 4ण् एक लाटरी में 10000 टिकट बेचे गए जिनमें दस समान इनाम दिए जाने हैं। कोइर् भी इर्नाम न मिलने की प्रायिकता क्या है यदि आप ;ंद्ध एक टिकट खरीदते हैं ;इद्ध दो टिकट खरीदते हैं ;बद्ध 10 टिकट खरीदते हैं? 5ण् 100 विद्याथ्िार्यों में से 40 और 60 विद्याथ्िार्यों के दो वगर् बनाए गए हैं। यदि आप और आपका एक मित्रा 100 विद्याथ्िार्यों में हैं तो प्रायिकता क्या है कि ;ंद्ध आप दोनों एक ही वगर् में होंघ् ;इद्ध आप दोनों अलग - अलग वगो± में होंघ् 6ण् तीन व्यक्ितयों के लिए तीन पत्रा लिखवाए गए हैं और प्रत्येक के लिए पता लिखा एक लिपफापफा है। पत्रों को लिपफापफों में यादृच्छया इस प्रकार डाला गया कि प्रत्येक लिपफापेफ में एक ही पत्रा है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि कम से कम एक पत्रा अपने सही लिपफापेफ में डाला गया है। 7ण् । और ठ दो घटनाएँ इस प्रकार हैं कि च्;।द्ध त्र 0ण्54ए च्;ठद्ध त्र 0ण्69 और च्;। ∩ ठद्ध त्र 0ण्35ण् ज्ञात कीजिएः ;पद्ध च्;। ∪ ठद्ध ;पपद्ध च्;।´ ∩ ठ´द्ध ;पपपद्ध च्;। ∩ ठ´द्ध ;पअद्ध च्;ठ ∩ ।´द्ध 8ण् एक संस्था के कमर्चारियों में से 5 कमर्चारियों का चयन प्रबंध् समिति के लिए किया गया है। पाँच कमर्चारियों का ब्योरा निम्नलिख्िात हैः क्रम नाम लिंग आयु ;वषोर्ं मेंद्ध 1ण् हरीश ड 30 2ण् रोहन ड 33 3ण् शीतल थ् 46 4ण् ऐलिस थ् 28 5ण् सलीम ड 41 इस समूह से प्रवक्ता पद के लिए यादृच्छया एक व्यक्ित का चयन किया गया। प्रवक्ता के पुरुष या 35 वषर् से अध्िक आयु का होने की क्या प्रायिकता है? 9ण् यदि 0, 1, 3, 5 और 7 अंकों द्वारा 5000 से बड़ी चार अंकों की संख्या का यादृच्छया निमार्ण किया गया हो तो पाँच से भाज्य संख्या के निमार्ण की क्या प्रायिकता है जब, ;पद्ध अंकों की पुनरावृिा नहीं की जाए? ;पपद्ध अंकों की पुनरावृिा की जाए? 10ण् किसी अटैची के ताले में चार चक्र लगे हैं जिनमें प्रत्येक पर 0 से 9 तक 10 अंक अंकित हैं।ताला चार अंकों के एक विशेष क्रम ;अंकों की पुनरावृिा नहींद्ध द्वारा ही खुलता है। इस बात की क्या प्रायिकता है कि कोइर् व्यक्ित अटैची खोलने के लिए सही क्रम का पता लगा ले? सारांश इस अध्याय में हमने प्रायिकता की अभ्िागृहीतीय तरीका के विषय में पढ़ा है। इस अध्याय की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिख्िात हैंः ऽ प्रतिदशर् समष्िटःसभी संभावित परिणामों का समुच्चय ऽ प्रतिदशर् बिंदुःप्रतिदशर् समष्िट के अवयव ऽ घटनाःप्रतिदशर् समष्िट का एक उपसमुच्चय ऽ असंभव घटनाःरिक्त समुच्चय ऽ निश्िचत घटनाःपूणर् प्रतिदशर् समष्िट ऽ पूरक घटना या नहीं - घटना रू समुच्चय ।′ या ै दृ । ऽ घटना । या ठः समुच्चय । ∪ ठ ऽ घटना । और ठः समुच्चय। ∩ ठ ऽ घटना । किंतु ठ नहींः समुच्चय । दृ ठ ऽ परस्पर अपवजीर् घटनाएँः । और ठ परस्पर अपवजीर् होती हैं यदि । ∩ठ त्रφ ऽ निःशेष व परस्पर अपवजीर् घटनाएँ: घटनाएँ म्1ए म्2एण्ण्ण्ए म्परस्पर अपवजीर् व निःशेषद हैं यदि म्1 ∪ म्∪ ण्ण्ण् ∪ म् त्र ै और म्प ∩ म्र त्र φ ट प ≠ र2 दऽ प्रायिकता रू प्रत्येक प्रतिदशर् बिंदु ωके संगत एक संख्या च् ;ωद्ध ऐसी है किप प;पद्ध 0 ≤ च् ;ωपद्ध ≤ 1 ;पपद्ध ∑च्;द्धωप सभी ωप ∈ै त्र 1 ;पपपद्ध च्;।द्ध त्र ∑च्;द्धωप सभी ωप ∈ । संख्या च्;ωपद्ध परिणाम ωपण् की प्रायिकता कहा जाता है। ऽ सम संभावित परिणाम रू समान प्रायिकता वाले सभी परिणाम ऽ घटना की प्रायिकता रू एक सम संभावित परिणामों वाले परिमित प्रतिदशर् समष्िट के लिए द;।द्ध घटना । की प्रायिकता च्;।द्ध त्र एजहाँ द;।द्ध त्र समुच्चय । में अवयवों की संख्याद;ैद्ध और द;ैद्ध त्र समुच्चय ै में अवयवों की संख्या ऽ यदि । और ठ कोइर् दो घटनाएँ हैं, तो च्;। या ठद्ध त्र च् ;।द्ध ़ च्;ठद्ध दृ च् ;। और ठद्ध समतुल्यतः च् ;। ∪ ठद्ध त्र च् ;।द्ध ़ च् ;ठद्ध दृ च् ;। ∩ ठद्ध ऽ यदि । और ठ परस्पर अपवजीर् हैं, तो च् ;। या ठद्ध त्र च्;।द्ध ़ च्;ठद्ध ऽ किसी घटना । के लिए च्;।दृनहींद्ध त्र 1 दृ च्;।द्ध ऐतिहासिक पृष्ठभ्ूामि प्रायिकता सि(ांत का विकास, गण्िात की अन्य शाखाओं की भाँति, व्यावहारिक कारणों से हुआ है। इसकी उत्पिा 16वीं शताब्दी में हुइर् थी जब इटली ने एक चिकित्सक तथा गण्िातज्ञ श्रमतवउम ब्ंतकंद ;1501 - 1576द्ध ने इस विषय पर पहली पुस्तक ‘संयोग के खेलों पर, ;ठपइमत कम स्नकव ।समंमद्ध लिखी। यह पुस्तक उनके मरणोपरांत सन् 1633 में प्रकाश्िात हुइर्। सन् 1654 में, ब्ीमअंसपंत कम डमतम नामक जुआरी ने, पासे से संबध्ित वुफछ समस्याओं को लेकर सुप्रसि( प्रफंासीसी दाशर्निक एवं गण्िातज्ञ ठसंपेम च्ंेबंस ;1623 - 1662द्ध से संपवर्फ किया। च्ंेबंस इस प्रकार की समस्याओं में रुचि लेने लगे और उन्होंने इसकी चचार् विख्यात प्रफांसीसी गण्िातज्ञ च्पमततम कम थ्मतउंज ;1601 - 1665द्ध से की। च्ंेबंस और थ्मतउंज दोनों ने स्वतंत्रा रूप से समस्याओं को हल किया। च्ंेबंस और थ्मतउंज के अतिरिक्त एक डच निवासी ब्ीतपेजपंद भ्नलहमदमे ;1929 - 1695द्ध, एक स्िवस निवासी श्रण्ठमतदवनससप ;1651 - 1705द्ध, एक प्रफांसीसी ।ण्क्म डवपअतम ;1667 - 1754द्ध, एक अन्य प्रफांस निवासी च्पमततम स्ंचसंबम ;1749 - 1827द्ध तथा रूसी च्ण्स्ण्ब्ीमइलमबींअ ;1821 - 1894द्ध, ।ण्।ण्डवतावअ ;1856 - 1922द्ध और ।ण्छण्ज्ञवसउवहवतवअम ने भी प्रायिकता सि(ांत में विश्िाष्ट योगदान दिया। प्रायिकता सि(ांत के अभ्िागृहीतिकरण का श्रेय ज्ञवसउवहवतवअम को मिला है। सन 1933 में प्रकाश्िात उनकी पुस्तक ‘प्रायिकता के आधर’ ;थ्वनदकंजपवद व िच्तवइंइपसपजलद्ध में प्रायिकता को समुच्चय पफलन के रूप में प्रस्तुत किया गया है और यह पुस्तक एक क्लासिक ;ब्संेेपबद्ध मानी जाती है। कृ ऽ कृ

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Ganit

अध्याय 16

प्रायिकता (Probability)

"Where a mathematical reasoning can be had, it is as great a folly to  make use of any other, as to grope for a thing in the dark, when you have a candle in your hand.John Arbuthnot "

16.1 भूमिका (Introduction)

पहले की कक्षाओं में हमने प्रायिकता की संकल्पना को विभिन्न परिस्थितियों की अनिश्चितता की माप के रूप में पढ़ा है। हमने किसी पासे केे फेंकने पर एक सम संख्या प्राप्त होने की प्रायिकता अर्थात् ज्ञात की थी। यहाँ कुल संभावित परिणाम (outcomes)1, 2, 3, 4, 5 और 6 हैं (जिनकी संख्या छ: है)। घटना ‘एक सम संख्या प्राप्त होना’ के अनुकूल परिणाम 2, 4, 6 (अर्थात् तीन संख्याएँ) हैं। व्यापक रूप से किसी घटना की प्रायिकता ज्ञात करने के लिए हम घटना के अनुकूल परिणामों की संख्या का कुल परिणामों की संख्या के साथ अनुपात ज्ञात करते हैं। प्रायिकता के इस सिद्धांत को प्रायिकता का पुरातन सिद्धांत (Classical theory of probability) कहा जाता है।

Kolmogorove

(1903-1987 A.D.)

कक्षा नवीं में हमने प्रायिकता को प्रेक्षण और संकलित आँकड़ों के आधार पर ज्ञात करना सीखा है। इसे प्रायिकता का सांख्यिकीय दृष्टिकोण (Statistical approach) कहते हैं।

इन दोनों सिद्धांतों में कुछ गंभीर समस्याएँ हैं। उदाहरणत: इन सिद्धांतों को उन क्रियाकलापों/ प्रयोगों पर नहीं लगाया जा सकता है जिनमें संभावित परिणामों की संख्या अपरिमित होती है। पुरातन सिद्धांत में हम सभी संभावित परिणामों को सम संभाव्य मानते हैं। स्मरण कीजिए कि परिणामों को सम संभाव्य कहा जाता है जब हमें यह विश्वास करने का कोई कारण न हो कि एक परिणाम के घटित होने की संभावना दूसरे से अधिक है। दूसरे शब्दों में, हम यह मानते हैं कि सभी परिणामों के घटित होने की संभावना (प्रायिकता) समान है। अत: हमने प्रायिकता को परिभाषित करने के लिए सम प्रायिकता या सम संभाव्य परिणामों का उपयोग किया है। यह तार्किक दृष्टि से ठीक परिभाषा नहीं है। इसलिए रूस के गणितज्ञ A.N.Kolomogrove ने एक अन्य प्रायिकता सिद्धांत का विकास किया। उन्हाेंने 1933 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘प्रायिकता का आधार’ (Foundation of Probability) में प्रायिकता की व्याख्या के लिए कुछ स्वत: प्रमाणित तथ्य (अभिगृहीत) निर्धारित किए। इस अध्याय में हम प्रायिकता के इसी दृष्टिकोण, जिसे प्रायिकता का अभिगृहीतीय दृष्टिकोण (Axiomatic approach of probability) कहते हैं, का अध्ययन करेगें। इस दृष्टिकोण को समझने के लिए कुछ मूल शब्दों को जानना आवश्यक है, जैसे कि यादृच्छिक परीक्षण (Random experiment), प्रतिदर्श समष्टि (Sample space), घटनाएँ (events) इत्यादि। आइए इनके बारे में आगे आने वाले अनुभागों में अध्ययन करेें।

16.2 यादृच्छिक परीक्षण (Random Experiment)

दैनिक जीवन में हम एेसे कई क्रियाकलाप करते हैं जिनके परिणाम सदैव एक ही होते हैं चाहे उन्हें कितनी बार भी दोहराया जाए। उदाहरण के लिए, किसी दिए गए त्रिभुज के कोणों का मान न जानते हुए भी हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि कोणों का योग 180° होगा।

हम इस प्रकार के भी कई प्रायोगिक क्रियाकलाप करते हैं जिन्हें समान परिस्थितियों में दोहराने पर भी परिणाम सदैव एक सा नहीं होता है। उदाहरण के लिए जब एक सिक्के को उछाला जाता है तो चित्त (head) आ सकता है या पट् (tail) आ सकता है लेकिन हम यह निश्चित नहीं कर सकते हैं कि वास्तविक परिणाम इन दोनों में से क्या होगा? इस प्रकार के परीक्षण को यादृच्छिक परीक्षण कहा जाता है। अत: एक परीक्षण को यादृच्छिक परीक्षण कहा जाता है यदि यह निम्नलिखित दो प्रतिबंधों को संतुष्ट करता है:

(i) इसके एक से अधिक संभावित परिणाम हों।

(ii) परीक्षण के पूर्ण होने से पहले परिणाम बताना संभव न हो।

जाँच कीजिए कि एक पासा को फेंकने का परीक्षण यादृच्छिक है या नहीं?

इस अध्याय में एक यादृच्छिक परीक्षण को केवल परीक्षण कहा गया है जब तक कि अन्यथा व्यक्त न किया गया हो।

16.2.1 परिणाम और प्रतिदर्श समष्टि (Outcomes and sample space) किसी यादृच्छिक परीक्षण के किसी सभांवित नतीजे को परिणाम कहते हैं।

एक पासा फेकनें के परीक्षण पर विचार करें। यदि हम पासे के ऊपरी फलक पर अंकित बिंदुओं की संख्या में रुचि रखते हैं तो इस परीक्षण के परिणाम 1, 2, 3, 4, 5 या 6 हैं। सभी परिणामों का समुच्चय {1, 2, 3, 4, 5, 6} इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि कहलाता है।

अत: किसी यादृच्छिक परीक्षण के सभी संभावित परिणामों का समुच्चय उस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि कहलाता है। प्रतिदर्श समष्टि को संकेत S द्वारा प्रकट किया जाता है।

प्रतिदर्श समष्टि का प्रत्येक अवयव एक प्रतिदर्श बिंदु कहलाता है। दूसरे शब्दों में, यादृच्छिक परीक्षण का प्रत्येक परिणाम भी प्रतिदर्श बिंदु कहलाता है।

आइए कुछ उदाहरणों पर विचार करें।

उदाहरण 1 दो सिक्कों (एक 1 रु का तथा दूसरा 2 रु का) को एक बार उछाला गया है। प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।

हल स्पष्टत: सिक्के इस अर्थ में विभेद्य हैं कि हम उनको पहला सिक्का और दूसरा सिक्का
संबोधित कर सकते हैं क्योंकि दोनों सिक्कों में से किसी पर चित्त (
H) या पट् (T) प्रकट हो सकते हैं, इसलिए संभव परिणाम निम्नलिखित हो सकते हैं:

दोनों सिक्कों पर चित्त = (H,H) = HH

पहले सिक्के पर चित्त और दूसरे पर पट् = (H,T) = HT

पहले सिक्के पर पट् और दूसरे पर चित्त = (T,H) = TH

दोनों सिक्कों पर पट् = (T,T) = TT

अतएव, दिए हुए परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि

S = {HH, HT, TH, TT}है।

टिप्पणी परीक्षण के परिणाम H तथा T के क्रमित युग्म हैं। सरलता के लिए क्रमित युग्म में स्थित अर्द्ध-विराम (comma) को छोड़ दिया गया है।

उदाहरण 2 पासों के जोड़े (जिसमें एक लाल रंग का और दूसरा नीले रंग का है) को एक बार फेंकने के परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए। प्रतिदर्श समष्टि के अवयवों की संख्या भी
ज्ञात कीजिए।

हल मान लीजिए कि नीले रंग के पासे पर 1 और लाल रंग पर 2 प्रकट होता है। हम इस परिणाम को क्रमित युग्म (1, 2) द्वारा निरूपित करते हैं। इसी प्रकार, यदि नीले पासे पर 3 और लाल पर 5 प्रकट होता है, तो इस परिणाम को (3, 5) द्वारा निरूपित करते हैं।

व्यापक रूप से प्रत्येक परिणाम को क्रमित युग्म (, ), द्वारा निरूपित किया जा सकता है जहाँ नीले रंग के पासे पर और लाल पासे पर प्रकट होने वाली संख्याएँ हैं। अतएव, प्रतिदर्श समष्टि निम्नलिखित है:

S = {(x, y): x नीले पासे पर प्रकट संख्या और y लाल पासे पर प्रकट संख्या है }

इस प्रतिदर्श समष्टि के अवयवों की संख्या 6 × 6 = 36 है ओर प्रतिदर्श समष्टि नीचे प्रदत्त है:

{(1,1), (1,2), (1,3), (1,4), (1,5), (1,6), (2,1), (2,2), (2,3), (2,4), (2,5), (2,6),

(3,1), (3,2), (3,3), (3,4), (3,5), (3,6), (4,1), (4,2), (4,3), (4,4), (4,5), (4,6),

(5,1), (5,2), (5,3), (5,4), (5,5), (5,6), (6,1), (6,2), (6,3), (6,4), (6,5), (6,6)}

उदाहरण 3 निम्नलिखित प्रत्येक परीक्षण के लिए उपयुक्त प्रतिदर्श समष्टि का उल्लेख कीजिए

(i) एक बालक की जेब में एक 1 रु, एक 2 रु व एक 5 रु के सिक्के हैं। वह अपनी जेब से एक के बाद एक दो सिक्केे निकालता है।

(ii) एक व्यक्ति किसी व्यस्त राजमार्ग पर एक वर्ष में होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या
लिखता है।

हल (i) मान लीजिए 1 रु का सिक्का Q से, 2 रु का सिक्का H से तथा 5 रु का सिक्का R से निरूपित होते हैं। उसके द्वारा जेब से निकाला गया पहला सिक्का तीन सिक्कों में से कोई भी एक सिक्का Q, H या R हो सकता है। पहले सिक्के Q के संगत दूसरी बार निकाला गया सिक्का H या R हो सकता है। अत: दो सिक्के निकालने का परिणाम QH या QR हो सकता है। इसी प्रकार, H के संगत दूसरी बार निकाला गया सिक्का Q या R हो सकता है। इसलिए, परिणाम HQ या HR हो सकता है। अंतत: R के संगत दूसरी बार निकाला गया सिक्का H या Q हो सकता है। इसलिए परिणाम RH या RQ होगा।

अत: प्रतिदर्श समष्टि S={QH, QR, HQ, HR, RH, RQ}है।

(ii) किसी व्यस्त राजमार्ग पर दुर्घटनाओं की संख्या 0 (किसी दुर्घटना के न होने पर) या 1 या 2, या कोई भी धन पूर्णांक हो सकता है।

अत: इस परीक्षण के लिए प्रतिदर्श समष्टि S = {0,1,2,...} है:

उदाहरण 4 एक सिक्का उछाला जाता है। यदि उस पर चित्त प्रकट हो तो हम एक थैली, जिसमें
3 नीली एवं 4 सफ़ेद गेंद हैं, में से एक गेंद निकालते हैं। यदि सिक्के पर पट् प्रकट होता है तो हम एक पासा फेंकते हैं। इस परीक्षण के प्रतिदर्श समष्टि का वर्णन कीजिए।

हल मान लीजिए हम नीली गेंदों को B1, B2, B3 और सफ़ेद गेंदों को W1, W2, W3, W4 से निरूपित करते हैं। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि

S = { HB1, HB2, HB3, HW1, HW2, HW3, HW4, T1, T2, T3, T4, T5, T6}है।

यहाँ HBi का अर्थ है कि सिक्के पर चित्त है और गेंद Bi निकाली गई है। HWi का अर्थ है कि सिक्के पर चित्त है और गेंद Wi निकाली गई है। इसी प्रकार Ti का अर्थ है कि सिक्के पर पट् और पासे पर संख्या प्रकट हुई है।

उदाहरण 5 एक एेसे परीक्षण पर विचार कीजिए जिसमें एक सिक्के को बार-बार तब तक उछालते रहते हैं जब तक उस पर चित्त प्रकट न हो जाए। इसकी प्रतिदर्श समष्टि का वर्णन कीजिए।

हल इस परीक्षण में चित्त प्रथम उछाल या द्वितीय उछाल या तृतीय उछाल इत्यादि में से किसी में भी प्रकट हो सकता है।

अत:, वांछित प्रतिदर्श समष्टि S = {H, TH, TTH, TTTH, TTTTH,...} है।

प्रश्नावली 16.1

निम्नलिखित प्रश्नों 1 से 7, में प्रत्येक में निर्दिष्ट परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।

1. एक सिक्के को तीन बार उछाला गया है।

2. एक पासा दो बार फेंका गया है।

3. एक सिक्का चार बार उछाला गया है।

4. एक सिक्का उछाला गया है और एक पासा फेंका गया है।

5. एक सिक्का उछाला गया है और केवल उस दशा में, जब सिक्के पर चित्त प्रकट होता है एक पासा फेंका जाता है।

6. X कमरे में 2 लड़के और 2 लड़कियाँ हैं तथा Y कमरे में 1 लड़का और 3 लड़कियाँ हैं। उस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए जिसमें पहले एक कमरा चुना जाता है फिर एक बच्चा चुना जाता है।

7. एक पासा लाल रंग का, एक सफ़ेद रंग का और एक अन्य पासा नीले रंग का एक थैले में रखे हैं। एक पासा यादृच्छया चुना गया और उसे फेंका गया है, पासे का रंग और इसके ऊपर के फलक पर प्राप्त संख्या को लिखा गया है। प्रतिदर्श समष्टि का वर्णन कीजिए।

8. एक परीक्षण में 2 बच्चों वाले परिवारों में से प्रत्येक में लड़के-लड़कियों की संख्याओं को लिखा जाता है।

(i) यदि हमारी रुचि इस बात को जानने में है कि जन्म के क्रम में बच्चा लड़का या लड़की है तो प्रतिदर्श समष्टि क्या होगी?

(ii) यदि हमारी रुचि किसी परिवार में लड़कियों की संख्या जानने में है तो प्रतिदर्श समष्टि क्या होगी?

9. एक डिब्बे में 1 लाल और एक जैसी 3 सफ़ेद  गेंद रखी गई हैं। दो गेंद उत्तरोतर (in succession) बिना प्रतिस्थापित किए यादृच्छया निकाली जाती है। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।

10. एक परीक्षण में एक सिक्के को उछाला जाता है और यदि उस पर चित्त प्रकट होता है तो उसे पुन: उछाला जाता है। यदि पहली बार उछालने पर पट् प्राप्त होता है तो एक पासा फेंका जाता है। प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।

11. मान लीजिए कि बल्बों के एक ढेर में से 3 बल्ब यादृच्छया निकाले जाते हैं। प्रत्येक बल्ब कोे जाँचा जाता है और उसे खराब (D) या ठीक (N) में वर्गीकृत करते हैं। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।

12. एक सिक्का उछाला जाता है। यदि परिणाम चित्त हो तो एक पासा फेंका जाता है। यदि पासे पर एक सम संख्या प्रकट होती है तो पासे को पुन: फेंका जाता है। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए

13.  कागज़  की चार पर्चियों पर संख्याएँ 1, 2, 3 और 4 अलग-अलग लिखी गई हैं। इन पर्चियों को एक डिब्बे में रख कर भली-भाँति मिलाया गया है। एक व्यक्ति डिब्बे में से दो पर्चियाँ एक के बाद दूसरी बिना प्रतिस्थापित किए निकालता है। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।

14. एक परीक्षण में एक पासा फेंका जाता है और यदि पासे पर प्राप्त संख्या सम है तो एक सिक्का एक बार उछाला जाता है। यदि पासे पर प्राप्त संख्या विषम है, तो सिक्के को दो बार उछालते हैं। प्रतिदर्श समष्टि लिखिए।

15. एक सिक्का उछाला गया। यदि उस पर पट् प्रकट होता है तो एक डिब्बे में से जिसमें 2 लाल और 3 काली गेंदें रखी हैं, एक गेंद निकालते हैं। यदि सिक्के पर चित्त प्रकट होता है तो एक पासा फेंका जाता है। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि लिखिए।

16. एक पासा को बार-बार तब तक फेंका जाता है जब तक उस पर 6 प्रकट न हो जाए। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि क्या है?


16.3 घटना (Event)

हमने यादृच्छिक परीक्षण और उसके प्रतिदर्श समष्टि के बारे में पढ़ा है। किसी परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि उस परीक्षण से संबंधित सभी प्रश्नों के लिए सार्वत्रिक समुच्चय (Universal set) होता है।

एक सिक्के को दो बार उछालने के परीक्षण पर विचार कीजिए। संबंधित प्रतिदर्श समष्टि S = {HH, HT, TH, TT} है।

अब, मान लीजिए कि हमारी रुचि उन परिणामों में है जो तथ्यत: एक चित्त प्रकट होने के अनुकूल होते हैं। हम पाते हैं कि इस घटना के होने के अनुकूल S के अवयव केवल HT और TH हैं। यह दो अवयव एक समुच्चय E = {HT, TH} बनाते हैं।

हम जानते हैं कि समुच्चय E प्रतिदर्श समष्टि S का उपसमुच्चय है। इसी प्रकार हम पाते हैं कि विभिन्न घटनाओं और S के उपसमुच्चयों में निम्नलिखित संगतता है:

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उपर्युक्त चर्चा से यह स्पष्ट है कि प्रतिदर्श समष्टि के किसी उपसमुच्चय के संगत एक घटना होती है और किसी घटना के संगत प्रतिदर्श समष्टि का एक उपसमुच्चय होता है। इसके संदर्भ में एक घटना को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया जाता है:

परिभाषा प्रतिदर्श समष्टि S का कोई उपसमुच्चय एक घटना कही जाती है।


16.3.1 एक घटना का घटित होना (Occurrence of an event) 

एक पासा को फेंकने के परीक्षण पर विचार कीजिए। मान लीजिए कि घटना ‘पासा पर 4 से छोटी संख्या प्रकट होना’ को E से निरूपित किया जाता है। यदि पासा पर वास्तव में ‘1’ प्रकट होता है तो हम कह सकते हैं कि घटना E घटित हुई है। वस्तुत: यदि परिणाम 2 या 3 हैं तो हम कहते हैं कि घटना E घटित हुई है।

अत: किसी परीक्षण के प्रतिदर्श समष्टि S की घटना E घटित हुई कही जाती है यदि परीक्षण का परिणाम ω इस प्रकार है कि ω E. यदि परिणाम ω एेसा है कि ω E,तो हम कहते हैं कि घटना E घटित नहीं हुई है।


16.3.2 घटनाओं के प्रकार (Types of events) 

घटनाओं को उनके अवयवों के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

1. असंभव व निश्चित घटनाएँ (Impossible and Sure Events) रिक्त समुच्चय φ और प्रतिदर्श समष्टि S भी घटनाओं को व्यक्त करते हैं। वास्तव में φ को असंभव घटना और S अर्थात् पूर्ण प्रतिदर्श समष्टि को निश्चित घटना कहते हैं।

इन्हें समझने के लिए आइए पासा फेंकने के परीक्षण पर विचार करें। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि S = {1,2,3,4,5,6} है।

मान लीजिए E घटना ‘पासे पर प्रकट संख्या 7 का गुणज है’ को निरूपित करता है। क्या आप घटना E के संगत उपसमुच्चय लिख सकते हैं?

स्पष्टतया परीक्षण का कोई भी परिणाम घटना E के प्रतिबंध को संतुष्ट नहीं करता है अर्थात् प्रतिदर्श समष्टि का कोई भी अवयव घटना E का घटित होने को निश्चित नहीं करता हैं। अत: हम कह सकते हैं कि केवल रिक्त समुच्चय ही घटना E के संगत समुच्चय है। दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि पासे के ऊपरी फलक पर 7 का गुणज प्रकट होना असंभव है।

इस प्रकार घटना E = φ एक असंभव घटना है।

आइए अब हम एक अन्य घटना F ‘पासा पर प्राप्त संख्या या तो सम है या विषम’ पर विचार करें। स्पष्टतया F = {1,2,3,4,5,6,} = S.

अर्थात् सभी परिणाम घटना F के घटित होने को निश्चित करते हैं। अत: F = S एक निश्चित घटना है।

2. सरल घटना (Simple Event) यदि किसी घटना E में केवल एक ही प्रतिदर्श बिंदु हो, तो घटना E को सरल या प्रारम्भिक घटना कहते हैं। एेसा परीक्षण जिसके प्रतिदर्श समष्टि जिसमें पृथक अवयव हों, में सरल घटनाएँ विद्यमान होती हैं।

उदाहरण के लिए, एक सिक्का के दो उछालों वाले परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि

S={HH, HT, TH, TT} है।

यहाँ इस प्रतिदर्श समष्टि की चार सरल घटनाएँ हैं, जो निम्नलिखित हैं:

E1= {HH}, E2={HT}, E3= { TH} और E4={TT}.

3. मिश्र घटना (Compound Events) यदि किसी घटना में एक से अधिक प्रतिदर्श बिंदु होते हैं, तो उसे मिश्र घटना कहते हैं। उदाहरण के लिए एक सिक्के की तीन उछालों के परीक्षण में निम्नलिखित घटनाएँ मिश्र घटनाएँ हैं:

E: तथ्यत: एक चित्त प्रकट होना

F: न्यूनतम एक चित्त प्रकट होना

G: अधिकतम एक चित्त प्रकट होना, इत्यादि।

इन घटनाओं के संगत S के उपसमुच्चय निम्नलिखित हैं:

E={HTT,THT,TTH}

F={HTT,THT, TTH, HHT, HTH, THH, HHH}

G= {TTT, THT, HTT, TTH}

उपर्युक्त प्रत्येक उपसमुच्चय में एक से अधिक प्रतिदर्श बिंदु हैं इसलिए यह सब मिश्र
घटनाएँ हैं।


16.3.3 घटनाओं का बीजगणित (Algebra of Events) 

समुच्चयों के अध्याय में हमने दो या अधिक समुच्चयों के संयोजन के विभिन्न तरीकों के बारे में पढ़ा था अर्थात् सम्मिलन (union), सर्वनिष्ठ (intersection), अंतर (difference), समुच्चय का पूरक (Complement of a set), इत्यादि के बारे में समझा था। इसी प्रकार हम घटनाओं का संयोजन समुच्चय संकेतनों के सदृश उपयोग द्वारा कर सकते हैं।

मान लीजिए A,B,C एेसे प्रयोग से संबद्ध घटनाएँ हैं जिसकी प्रतिदर्श समष्टि S है।

1. पूरक घटना (Complementary Event) प्रत्येक घटना A के सापेक्ष एक अन्य घटना होती है जिसे घटना A की पूरक घटना कहते हैं। A को घटना ‘A–नहीं’ भी कहा जाता है।

उदाहरण के लिए ‘एक सिक्के की तीन उछालों’ के परीक्षण को लें। इसका प्रतिदर्श समष्टि

S = {HHH, HHT, HTH, THH, HTT, THT, TTH, TTT} है।

मान लीजिए A={HTH, HHT, THH} घटना ‘केवल एक पट का प्रकट होना’ को दर्शाता है। परिणाम HTT के होने पर घटना A घटित नहीं हुई है। किंतु हम कह सकते हैं कि घटना ‘Aनहीं’ घटित हुई है। इस प्रकार, प्रत्येक परिणाम के लिए जो A में नहीं हैं हम कहते हैं कि ‘A-नहीं’ घटित हुई है। इस प्रकार घटना A के लिए पूरक घटना ‘Aनहीं’ अर्थात्

A= {HHH, HTT, THT, TTH, TTT}

या A= {ω : ω ∈ S और ω A} = S – A है।

2. घटना A या B (Event A or B) स्मरण कीजिए कि दो समुच्चयों A और B का सम्मिलन
A
B द्वारा निरूपित किया जाता है जिसमें वह सब अवयव सम्मिलित होते हैं जो या तो A में हैं या B में है या दोनों में हैं।

जब समुच्चय A और B किसी प्रतिदर्श समष्टि से संबंधित दो घटनाएँ हों तो ‘A B’ घटना A या B या दोनों को निरूपित करता है। घटना ‘A B’ को ‘A या B’ भी कहा जाता है।

इसलिए घटना ‘A या B’ = A B = {ω: ω∈A या B}

3. घटना 'A और B' (Event A and B) हम जानते हैं कि दो समुच्चयों का सर्वनिष्ठ
A
B वह समुच्चय होता है जिसमें वे अवयव होते हैं जो A और B दोनों में उभयनिष्ठ होते हैं अर्थात् जो A और B दोनों में होते हैं।

यदि ‘A और B’ दो घटनाएँ हों तो समुच्चय A B घटना ‘A और B’ को दर्शाता है।

इस प्रकार, A B = {ω : ω ∈ A और ω ∈ B}

उदाहरण के लिए एक पासा को दो बार फेंकने के परीक्षण में मान लीजिए घटना A ‘पहली फेंक में संख्या 6 प्रकट होती है’ और घटना B ‘दो फेंकों पर प्रकट संख्याओं का योग न्यूनतम 11 होता है’ को व्यक्त करती हैं। तब

A = {(6,1), (6,2}, (6,3), (6,4), (6,5), (6,6)} और B = {(5,6), (6,5), (6,6)}

इसलिए A B = {(6,5), (6,6)}

नोट कीजिए कि समुच्चय A B = {(6,5), (6,6)}, घटना ‘पहली फेंक पर 6 प्रकट होता है और दोनों फेंकों पर प्रकट संख्याओं का योग न्यूनतम 11 होता है’ को व्यक्त करता है।

4. घटना ‘A किंतु B नहीं’ (Event A but not B) हम जानते हैं कि A – B उन सभी अवयवों का समुच्चय होता है जो A में तो हैं लेकिन B में नहीं हैं। इसलिए, समुच्चय 'A – B' घटना ‘A किंतु B नहींको व्यक्त कर सकता है। हम जानते हैं कि A – B = A B

उदाहरण 6 एक पासा फेंकने के परीक्षण पर विचार कीजिए। घटना ‘एक अभाज्य संख्या प्राप्त होना’ को A से और घटना ‘एक विषम संख्या प्राप्त होना’ को B से निरूपित किया गया है। निम्नलिखित घटनाओं (i) A या B (ii) A और B (iii) A किंतु B नहीं (iv) ‘A–नहींको निरूपित करने वाले समुच्चय लिखिए।

हल यहाँ S = {1,2,3,4,5,6}, A = {2,3,5} और B = {1,3,5}

प्रत्यक्षत:

(i) ‘A या B’ = A B = {1,2,3,5}

(ii) ‘A और B’ = A B = {3,5}

(iii) ‘A किंतु B नहीं’ = A – B = {2}

(iv) ‘A–नहीं’ = A´ = {1,4,6}


16.3.4 परस्पर अपवर्जी घटनाएँ (Mutually exclusive events)

पासा फेंकने के परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि S = {1, 2, 3, 4, 5, 6} है। मान लीजिए घटना A ‘एक विषम संख्या का प्रकट होना’ और घटना B ‘एक सम संख्या का प्रकट होना’ को व्यक्त करते हैं।

स्पष्टतया घटना A, घटना B को अपवर्जित कर रही है तथा इसका विलोम भी सत्य है। दूसरे शब्दों में, एेसा कोई परिणाम नहीं है जो घटना A और B के एक साथ घटित होने को निश्चित करता है यहाँ

A = {1, 3, 5} और B = {2, 4, 6}

स्पष्टतया A B = φ अर्थात् A और B असंयुक्त समुच्चय हैं।

व्यापकत: दो घटनाएँ A और B परस्पर अपवर्जी घटनाएँ कही जाती हैं, यदि इनमें से किसी एक का घटित होना दूसरी के घटित होने को अपवर्जित करता है अर्थात् वे एक साथ घटित नहीं हो सकती हैं। इस दशा में समुच्चय A और B असंयुक्त होते हैं।

पुन: एक पासे को फेंकने के परीक्षण में घटना A ‘एक विषम संख्या प्रकट होना’ और घटना B ‘4 से छोटी संख्या प्रकट होना’ पर विचार कीजिए।

प्रत्यक्षत: A = {1, 3, 5} और B = {1, 2, 3}

अब 3 A तथा साथ ही 3 B

इसलिए A और B असंयुक्त नहीं है। अत: A और B परस्पर अपवर्जी घटनाएँ नहीं हैं।

टिपप्णी एक प्रतिदर्श समष्टि की सरल घटनाएँ सदैव परस्पर अपवर्जी होती हैं।


16.3.5 नि:शेष घटनाएँ (Exhaustive events)

एक पासे को फेंकने के परीक्षण पर विचार कीजिए। हम पाते हैं S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}.

आइए निम्नलिखित घटनाओं को परिभाषित करें:

A: ‘4 से छोटी संख्या प्रकट होना’,

B: ‘2 से बड़ी किंतु 5 से छोटी संख्या प्रकट होना

और C:‘4 से बड़ी संख्या प्रकट होना’.

तब A = {1, 2, 3}, B = {3,4} और C = {5, 6}. हम देखते हैं कि

A B C = {1,2,3} {3,4} {5, 6} = S.

एेसी घटनाओं A, B और C को नि:शेष घटनाएँ कहते हैं। व्यापक रूप से यदि E1, E2, ..., En किसी प्रतिदर्श समष्टि S की n घटनाएँ हैं और यदि

तब E1, E2, ..., En को नि:शेष घटनाएँ कहते हैं। दूसरे शब्दों में, घटनाएँ E1, E2, ..., En नि:शेष कहलाती हैं यदि परीक्षण के करने पर इनमें से कम से कम एक घटना अवश्य ही घटित हो।

इसके अतिरिक्त यदि सभी i j के लिए Ei Ej = φ अग्रत: यदि Ei Ej = φए i j अर्थात् Ei और Ej परस्पर अपवर्जी हैं, और हो, तो घटनाएँ E1, E2, ..., En परस्पर अपवर्जी नि:शेष घटनाएँ कहलाती हैं।

आइए अब कुछ उदाहरणों पर विचार करें।

उदाहरण 7 दो पासे फेंके जाते हैं और पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग लिखा जाता है। आइए अब हम इस प्रयोग से संबंधित निम्नलिखित घटनाओं पर विचार करें:

A: ‘प्राप्त योग सम संख्या है

B: ‘प्राप्त योग 3 का गुणज है

C: ‘प्राप्त योग 4 से कम है

D: ‘प्राप्त योग 11 से अधिक है

इन घटनाओं में से कौन से युग्म परस्पर अपवर्जी हैं?

हल प्रतिदर्श समष्टि S = {(x, y): x, y = 1, 2, 3, 4, 5, 6} में 36 अवयव हैं।

तब A = {(1, 1), (1, 3), (1, 5), (2, 2), (2, 4), (2, 6), (3, 1), (3, 3), (3, 5), (4, 2), (4, 4),

(4, 6), (5, 1), (5, 3), (5, 5), (6, 2), (6, 4), (6, 6)}

B = {(1, 2), (2, 1), (1, 5), (5, 1), (3, 3), (2, 4), (4, 2), (3, 6), (6, 3), (4, 5), (5, 4),

(6, 6)}

C = {(1, 1), (2, 1), (1, 2)} और D = {(6, 6)}

हमें प्राप्त होता है

A B = {(1, 5), (2, 4), (3, 3), (4, 2), (5, 1), (6, 6)} ≠ φ

इसलिए, A और B परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।

इसी प्रकार A C ≠ φए A D ≠ φए B C ≠ φए और B D ≠ φए

इस प्रकार युग्म (A, C), (A, D), (B, C), (B, D) परस्पर अपवर्जी नहीं है।

साथ ही C D ≠ φ इसलिए, C और D परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हैं।

उदाहरण 8 एक सिक्के को तीन बार उछाला गया है। निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए:

A: ‘कोई चित्त प्रकट नहीं होता है’ ,

B: ‘तथ्यत: एक चित्त प्रकट होता हैऔर

C: ‘कम से कम दो चित्त प्रकट होते हैं

क्या यह परस्पर अपवर्जी और नि:शेष घटनाओं का समुच्चय है?

हल परिणाम का प्रतिदर्श समष्टि

S = {HHH, HHT, HTH, THH, HTT, THT, TTH, TTT} है

और A = {TTT}, B = {HTT, THT, TTH}तथा C = {HHT, HTH, THH, HHH}

अब A B C = {TTT, HTT, THT, TTH, HHT, HTH, THH, HHH} = S

इसलिए, A, B और C नि:शेष घटनाएँ हैं।

साथ ही A B = φ, A C = φ और B C = φ

इसलिए, घटनाएँ युग्म के अनुसार असंयुक्त हैं अर्थात् वे परस्पर अपवर्जी हैं।

अत: A, B और C परस्पर अपवर्जी व नि:शेष घटनाओं का समुच्चय बनाते हैं।


प्रश्नावली 16.2

1. एक पासा फेंका जाता है। मान लीजिए घटना E ‘पासे पर संख्या 4 दर्शाता’ है और घटना F ‘पासे पर सम संख्या दर्शाता’ है। क्या E और F परस्पर अपवर्जी हैं?

2. एक पासा फेंका जाता है। निम्नलिखित घटनाओं का वर्णन कीजिए:

(i) A: संख्या 7 से कम है। (ii) B: संख्या 7 से बड़ी है।

(iii) C: संख्या 3 का गुणज है। (iv) D: संख्या 4 से कम है।

(v) E: 4 से बड़ी सम संख्या है। (vi) F: संख्या 3 से कम नहीं है।

A B, A B, B C, E F, D E, A – C, D – E, E F′, भी ज्ञात कीजिए।

3. एक परीक्षण में पासें केे एक जोड़े को फेंकते हैं और उन पर प्रकट संख्याओं को लिखते हैं। निम्नलिखित घटनाओं का वर्णन कीजिए:

A: प्राप्त संख्याओं का योग 8 से अधिक है।

B: दोनों पासों पर संख्या 2 प्रकट होती है।

C: प्रकट संख्याओं का योग कम से कम 7 है और 3 का गुणज है।

इन घटनाओं केे कौन-कौन से युग्म परस्पर अपवर्जी हैं?

4. तीन सिक्कों को एक बार उछाला जाता है। मान लीजिए कि घटना ’तीन चित्त दिखना’ को A से, घटना ‘दो चित्त और एक पट् दिखना’ को B से, घटना ‘तीन पट् दिखना’ को C और घटना ’पहले सिक्के पर चित्त दिखना’ को D से निरूपित किया गया है। बताइए कि इनमें से कौन सी घटनाएँ (i) परस्पर अपवर्जी हैं? (ii) सरल हैं ? (iii) मिश्र हैं ?

5. तीन सिक्के एक बार उछाले जाते हैं। वर्णन कीजिए।

(i) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी हैं।

(ii) तीन घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी और नि:शेष हैं।

(iii) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।

(iv) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी हैं किंतु नि:शेष नहीं हैं।

(v) तीन घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी हैं किंतु नि:शेष नहीं हैं।

6. दो पासे फेंके जाते हैं। घटनाएँ A, B और C निम्नलिखित प्रकार से हैं:

A: पहले पासे पर सम संख्या प्राप्त होना

B: पहले पासे पर विषम संख्या प्राप्त होना

C: पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग 5 होना

निम्नलिखित घटनाओं का वर्णन कीजिए:

(i) A (ii) B-नहीं (iii) A या B

(iv) A और B (v) A किंतु C नहीं (vi) B या C

(vii) B और C (viii) A B C

7. उपर्युक्त प्रश्न 6 को देखिए और निम्नलिखित में सत्य या असत्य बताइए (अपने उत्तर का कारण दीजिए):

(i) A और B परस्पर अपवर्जी हैं।

(ii) A और B परस्पर अपवर्जी और नि:शेष हैं।

(iii) A = B

(iv) A और C परस्पर अपवर्जी हैं।

(v) A और B परस्पर अपवर्जी हैं।

(vi) A, B, C परस्पर अपवर्जी और नि:शेष घटनाएँ हैं।


16.4 प्रायिकता की अभिगृहीतीय दृष्टिकोण (Axiomatic Approach to Probability)

इस अध्याय के पहले अनुच्छेदों में हमने यादृच्छिक परीक्षण, प्रतिदर्श समष्टि तथा इन परीक्षणों से संबंधित घटनाओं पर विचार किया है। हम अपने दैनिक जीवन में किसी घटना के घटित होने की संभावना के लिए अनेक शब्दों का उपयोग करते हैं। प्रायिकता सिद्धांत किसी घटना के घटित होने या न होने की संभावना को एक माप देने का प्रयास है।

पिछली कक्षाओं में हमने किसी परीक्षण में कुल संभावित परिणामों की संख्या ज्ञात होने पर, किसी घटना की प्रायिकता ज्ञात करने की कुछ विधियों के बारे में पढ़ा है।

किसी घटना की प्रायिकता ज्ञात करने की एक और विधि अभिगृहीतीय दृष्टिकोण है। इस तरीका में प्रायिकताएँ निर्धारित करने के लिए अभिगृहीतियों या नियमों को बर्णित (depict) किया गया है।

मान लें कि किसी यादृच्छिक परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि S है। प्रायिकता P एक वास्तविक मानीय फलन है जिसका प्रांत S का घात समुच्चय है, और परिसर अंतराल [0,1] है जो निम्नलिखित अभिगृहीतियों को संतुष्ट करता है:

(i) किसी घटना E, के लिए, P (E) 0

(ii) P (S) = 1

(iii) यदि E और F परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हैं तो P(E F) = P(E) + P(F).

अभिगृहित (iii) से यह अनुसरित होता है कि P(φ) = 0. इसे सिद्ध करने के लिए हम F = φ लेते हैं और देखते हैं कि E और φ परस्पर अपवर्जी घटनाएँ है, इसलिए अभिगृहीत (iii) से हम पाते हैं कि

P (E ∪ φ) = P (E) + P ( φ ) या P(E) = P(E) + P (φ) अर्थात् P(φ) = 0

मान लीजिए कि ω1, ω2, ...n प्रतिदर्श समष्टि S के परिणाम हैं अर्थात्

S = {ω1, ω2, ...,ωn}है।

प्रायिकता की अभिगृहीतीय परिभाषा से यह निष्कर्ष निकलता है कि

(i) प्रत्येक ωi S के लिए 0 P (ωi) 1

(ii) P (ω1) + P (ω2) + ... + P (ωn) = 1

(iii) किसी घटना ωi के लिए P(A) = Σ P (ωi), ωi A

टिप्पणी ध्यान दीजिए कि एकल समुच्चय {ωi} को सरल घटना कहते हैं और संकेतन की सुविधा के लिए हम P(क्ष्ωi}) को P(ωi) लिखते हैं।

उदाहरण के लिए एक सिक्के को उछालने के परीक्षण में हम प्रत्येक परिणाम H और T के साथ संख्या निर्धारित कर सकते हैं

अर्थात् P(H) = और P(T) = ... (1)

स्पष्टतया यह निर्धारण दोनों प्रतिबंधों को संतुष्ट करता है अर्थात् प्रत्येक संख्या न तो शून्य से छोटी है और न ही एक से बड़ी है

और P(H) + P(T) = + = 1

इसलिए इस दशा में हम कह सकते हैं कि

H की प्रायिकता = और T की प्रायिकता = .

आइए हम P(H) = और P(T) = लेते हैं। ... (2)

क्या यह निर्धारण अभिगृहीतीय तरीका के प्रतिबंधों को संतुष्ट करता है?

हाँ, इस दशा में H की प्रायिकता = और T की प्रायिकता = है।

हम पाते हैं कि दोनाें प्रायिकता निर्धारण (1) और (2), H और T की प्रायिकताओं के लिए वैध हैं।

वास्तव में दोनों परिणामों H तथा T की प्रायिकताओं के लिए संख्याएँ क्रमश: तथा

(1 – ) निर्धारित कर सकते हैं, जबकि 0 1 और P(H) + P(T) = + (1 – ) = 1

यह प्रायिकता निर्धारण भी अभिगृहीतीय दृष्टिकोण के प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हैं। अत: हम कह सकते हैं कि किसी परीक्षण के परिणामों के साथ प्रायिकता वितरण अनेक (या यह कहना अधिक उचित्त होगा कि अनंत) प्रकार से किया जा सकता है।

आइए अब कुछ उदाहरणों पर विचार करें।

उदाहरण 9 मान लीजिए एक प्रतिदर्श समष्टि S = {ω1, ω2, ...एω6}है। निम्नलिखित में से प्रत्येक परिणाम के लिए कौन-कौन से प्रायिकता निर्धारण वैध हैं?

परिणाम ω1 ω2 ω3 ω4 ω5 ω6

(a)

(b) 1 0 0 0 0 0

(c)

(d)

(e) 0.1 0.2 0.3 0.4 0.5 0.6

हल (a) प्रतिबंध (i): प्रत्येक संख्या p (ωi) धनात्मक है और एक से छोटी है।

प्रतिबंध (ii): प्रायिकताओं का योग

=

इसलिए यह प्रायिकता निर्धारण वैध है।

(b) प्रतिबंध (i): प्रत्येक संख्या p(ωi) या तो 0 है या 1 है।

प्रतिबंध (ii): प्रायिकताओं का योग = 1 + 0 + 0 + 0 + 0 + 0 = 1

इसलिए यह निर्धारण वैध है।

(c) प्रतिबंध (i): दो प्रायिकताएँ (ω5) और (ω6) ऋणात्मक हैं। इसलिए यह निर्धारण वैध
नहीं है।

(d) क्याेंकि p (ω6) = > 1, इसलिए यह प्रायिकता निर्धारण वैध नहीं है।

(e) क्याेंकि प्रायिकताओं का योग = 0.1 + 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 0.6 = 2.1 है इसलिए , यह प्रायिकता निर्धारण वैध नहीं है।


16.4.1 घटना की प्रायिकता (Probability of an event) 

एक मशीन द्वारा निर्मित कलमों में से तीन का परीक्षण उन्हें अच्छा (त्रुटिरहित) और खराब (त्रुटियुक्त) में वर्गीकृत करने के लिए किया गया। मान लीजिए कि इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि S है। इस परीक्षण के पलस्वरूप हमें 0, 1, 2 या 3 खराब कलमें मिल सकती हैं।

इस प्रयोग के संगत प्रतिदर्श समष्टि

S = {BBB, BBG, BGB, GBB, BGG, GBG, GGB, GGG}है।

जहाँ B एक त्रुटियुक्त या खराब कलम को और G एक अच्छे या त्रुटिरहित कलम को प्रकट करता है।

मान लीजिए, कि परिणामों के लिए निम्नलिखित प्रायिकताएँ निर्धारित की गई हैं:

प्रतिदर्श बिंदु: BBB BBG BGB GBB BGG GBG GGB GGG

प्रायिकता:

मान लीजिए घटना ‘तथ्यत: एक त्रुटियुक्त कलम का निकलना’ को A से व घटना ‘न्यूनतम दो त्रुटियुक्त कलमों का निकलना’ को B से प्रकट करते हैं।

स्पष्टत : A = {BGG, GBG, GGB} और B = {BBG, BGB, GBB, BBB}

अब P(A) =

= P(BGG) + P(GBG) + P(GGB) =

और P(B) =

= P(BBG) + P(BGB) + P(GBB) + P(BBB) =

आइए एक अन्य परीक्षण ‘एक सिक्के को दो बार उछालना’ पर विचार करें।

इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि S = {HH, HT, TH, TT} है।

मान लीजिए कि विभिन्न परिणामों के लिए निम्नलिखित प्रायिकताएँ निर्धारित की गई हैं:

P(HH) = , P(HT) = , P(TH) = , P(TT) =

स्पष्टतया यह प्रायिकता निर्धारण अभिगृहीतीय अभिगम के प्रतिबंधों को संतुष्ट करता है। आइए अब हम घटना E ‘दोनों उछालों में एक सा ही परिणाम है’ की प्रायिकता ज्ञात करें।

यहाँ E = {HH, TT}

अब सभी ωi E के लिए P(E) = P(ωi), = P(HH) + P(TT) =

घटना F: ‘तथ्यत: दो चित्त’ के लिए, हम पाते हैं F = {HH}

और P(F) = P(HH) =


16.4.2 सम सम्भाव्य परिणामों की प्रायिकता (Probability of equally likely outcomes)

मान लीजिए कि एक परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि

S = {ω1, ω2, ..., ωn} है

मान लें कि सभी परिणाम सम संभाव्य हैं, अर्थात् प्रत्येक सरल घटना के घटित होने की संभावना समान है।

अर्थात् सभी ωi S के लिए, P(ωi) = p, जहाँ 0 p 1

क्योंकि इसलिए + + ... + ( बार) = 1

या दच = 1 या =

मान लीजिए कि प्रतिदर्श समष्टि S की कोई एक घटना E, इस प्रकार है कि n(S) = n और n(E) = m. यदि प्रत्येक परिणाम सम संभाव्य है तो यह अनुसरित होता है कि

=


16.4.3 घटना 'A या B' की प्रायिकता (Probability of the event ‘A or B’) 

आइए अब हम घटना ‘A या B’, की प्रायिकता अर्थात् P (A B) ज्ञात करें।

मान लीजिए, A = {HHT, HTH, THH} और B = {HTH, THH, HHH}, ‘एक सिक्के की तीन उछालों के परीक्षण की दो घटनाएँ हैं।

स्पष्टतया AB = {HHT, HTH, THH, HHH}

अब P (AB) = P(HHT) + P(HTH) + P(THH) + P(HHH)

यदि सभी परिणाम सम संभाव्य हों तो

P (AB)

साथ ही P(A) = P(HHT) + P(HTH) + P(THH) =

और P(B) = P(HTH) + P(THH) + P(HHH) =

इसलिए P(A) + P(B) =

यह स्पष्ट है कि P(A B) P(A) + P(B)

बिंदुओं HTH और THH, A तथा B में उभयनिष्ठ अवयव हैं। P(A) + P(B) के परिकलन में HTH और THH, (अर्थात् A B के अवयव) की प्रायिकता को दो बार सम्मिलित किया गया है। अत: P(A B) को ज्ञात करने के लिए हमें A B के प्रतिदर्श बिंदुओं की प्रायिकताओं को
P(A) + P(B)
में से घटाना होगा।

अर्थात् Screenshot-2018-6-28 ch - 16 pmd - Chapter-16 pdf(1)

=

अत: =

व्यापकत: यदि A और B किसी परीक्षण की कोई दो घटनाएँ हैं तब किसी घटना की प्रायिकता की परिभाषा के अनुसार हमें प्राप्त होता है कि

.

क्योंकि , इसलिए

P(A B)=

(क्योंकि A–B, A B और B – A परस्पर अपवर्जी हैं। ... (1)

साथ ही

=

= +

+

= [(1) के प्रयोग से]

= .

अत: .

इस सूत्र का वैकल्पिक प्रमाण निम्नलिखित प्रकार से भी दिया जा सकता है।

A B = A (B – A) जहाँ A और B – A परस्पर अपवर्जी हैं।

और B = (A B) (B – A) जहाँ A B और B – A परस्पर अपवर्जी हैं।

प्रायिकता की अभिगृहीत (iii) द्वारा, हमें प्राप्त होता है कि

P (A B) = P (A) + P (B – A) ... (2)

और P(B) = P ( A B) + P (B – A) ... (3)

(2) में से (3) घटाने पर,

P (A B) – P(B) = P(A) – P (A B)

या P(A B) = P(A) + P (B) – P (A B)

उपर्युक्त परिणाम को वेन्-आरेख (आकृति 16.1) का अवलोकन करके भी पुन: सत्यापित किया जा सकता है।

आकृति 16.1

यदि A और B असंयुक्त समुच्चय हों अर्थात् ये दोनों परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हों तो (A B) = φ

इसलिए, P (A B) = P (φ) = 0

अत: परस्पर अपवर्जी घटनाओं A और B, के लिए, हम पाते हैं

P (A B) = P (A) + P (B), जो कि प्रायिकता की अभिगृहीत (iii) ही है।


16.4.4 घटना ‘A-हीं’ की प्रायिकता (Probability of event 'not A') 

1 से 10 तक अंकित पूर्णांकों वाले दस पत्तों के डेक में से एक पत्ता निकालने के परीक्षण की घटना A = {2, 4, 6, 8} पर विचार कीजिए। स्पष्टतया प्रतिदर्श समष्टि S = {1, 2, 3, ...,10} है।

यदि सभी परिणामों 1, 2, 3,...,10 को सम संभाव्य मान लें तो प्रत्येक परिणाम की प्रायिकता
होगी।

अब P(A) = P(2) + P(4) + P(6) + P(8)

=

साथ ही घटना ‘A-नहीं’ = A = {1, 3, 5, 7, 9, 10}

अब P(A) = P(1) + P(3) + P(5) + P(7) + P(9) + P(10)

=

इस प्रकार P(A) =

साथ ही हमें यह भी पता है कि A तथा A परस्पर अपवर्जी और नि:शेष घटनाएँ हैं। अत: A A = φ और A A = S

या P(A A) = P(S)

अब P(A) + P(A) = 1, अभिगृहीतों (ii) और (iii) के प्रयोग द्वारा

या P(A) = P(A नहीं) = 1 – P(A)

आइए सम संभावित परिणामों वाले परीक्षणों के लिए कुछ उदाहरणों व प्रश्नों पर विचार करें, जब तक कि अन्यथा न कहा गया हो।

उदाहरण 10 ताश के 52 पत्तों की एक भली-भाँति फेंटी गई गड्डी में से एक पत्ता निकाला गया है। निकाले गए पत्ते की प्रायिकता ज्ञात कीजिए यदि

(i) पत्ता ईंट का है। (ii) पत्ता इक्का नहीं है।

(iii) पत्ता काले रंग का है (अर्थात् चिड़ी या हुकुम का),

(iv) पत्ता ईंट का नहीं है। (v) पत्ता काले रंग का नहीं है।

हल जब 52 पत्तों की भली-भाँति फेंटी गई गड्डी में एक पत्ता निकाला जाता है तो संभव परिणामों की संख्या 52 है।

(i) मान लीजिए घटना ‘निकाला गया पत्ता ईंट का है, को A से दर्शाया गया है।

स्पष्टतया A में अवयवों की संख्या 13 है।

इसलिए, P(A) =

अर्थात्, एक ईंट का पत्ता निकालने की प्रायिकता =

(ii) मान लीजिए कि घटना ‘निकाला गया पत्ता इक्का है’ को B से दर्शाते हैं।

इसलिए ‘निकाला गया पत्ता इक्का नहीं है’ को B से दर्शाया जाएगा।

अब P(B) = 1 – P(B) =

(iii) मान लीजिए घटना ‘निकाला गया पत्ता काले रंग का है’ को C से दर्शाते हैं।

इसलिए समुच्चय C में अवयवों की संख्या = 26

अर्थात् P(C) =

इस प्रकार काले रंग का पत्ता निकालने की प्रायिकता =

(iv) हमने उपर्युक्त (i) में माना है कि घटना ‘निकाला गया पत्ता ईंट का है’ को A से दर्शाते हैं। इसलिए घटना ‘निकाला गया पत्ता ईंट का नहीं है’ को Aया ‘A-नहीं’ से दर्शाएंगे।

अब P(A-नहीं) = 1 – P(A) =

(v) घटना ‘निकाला गया पत्ता काले रंग का नहीं है’ को C या ‘C-नहीं’ से दर्शाया जा सकता है।

अब हमें ज्ञात है कि P(C-नहीं) = 1 – P(C) =

इसलिए, पत्ता काले रंग का न होने की प्रायिकता =

उदाहरण 11 एक थैले में 9 डिस्क हैं जिनमें से 4 लाल रंग की, 3 नीले रंग की और 2 पीले रंग की हैं। डिस्क आकार एवं माप में समरूप हैं। थैले में से एक डिस्क यादृच्छया निकाली जाती है। प्रायकिता ज्ञात कीजिए कि निकाली गई डिस्क (i) लाल रंग की है (ii) पीले रंग की है (iii) नीले रंग की है (iv) नीले रंग की नहीं है, (v) लाल रंग की है या नीले रंग की है।

हल डिस्काें की कुल संख्या 9 है। इसलिए संभव परिणामों की कुल संख्या 9 हुई।

मान लीजिए घटनाओं A, B C को इस प्रकार से परिभाषित किया गया है।

A: निकाली गई डिस्क लाल रंग की है।

B: निकाली गई डिस्क पीले रंग की है।

C: निकाली गई डिस्क नीले रंग की है।

(i) लाल रंग की डिस्कों की संख्या = 4 अर्थात् (A) = 4

अत: P(A) =

(ii) पीले रंग की डिस्कों की संख्या = 2, अर्थात् n (B) = 2

इसलिए, P(B) =

(iii) नीले रंग की डिस्कों की संख्या = 3, अर्थात् n(C) = 3

इसलिए, P(C) =

(iv) स्पष्टतया घटना ‘डिस्क नीले रंग की नहीं है’ 'C-नहीं' ही है हम जानते हैं कि
P(C-
नहीं) = 1 – P(C)

इसलिए P(C-नहीं) =

(v) घटना ‘लाल रंग की डिस्क या नीले रंग की डिस्क’ का समुच्चय ‘A C’ से वर्णित किया जा सकता है।

क्योंकि, A और C परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हैं, इसलिए

P(A या C) = P (A C) = P(A) + P(C) =

उदाहरण 12 दो विद्यार्थियों अनिल और आशिमा एक परीक्षा में प्रविष्ट हुए। अनिल के परीक्षा में उत्तीर्ण होने की प्रायिकता 0.05 है और आशिमा के परीक्षा में उत्तीर्ण होने की प्रायिकता 0.10 है। दोनों के परीक्षा में उत्तीर्ण होने की प्रायिकता 0.02 है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि

(a) अनिल और आशिमा दोनों परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाएगें।

(b) दोनों में से कम से कम एक परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं होगा।

(c) दोनों में से केवल एक परीक्षा में उत्तीर्ण होगा।

हल मान लीजिए E तथा F घटनाओं ‘अनिल परीक्षा उत्तीर्ण कर लेगा’ और ‘आशिमा परीक्षा उत्तीर्ण कर लेगी’ को क्रमश: दर्शाते हैं।

इसलिए P(E) = 0.05, P(F) = 0.10 और P(E F) = 0.02.

तब

(a) घटना ’दोनों परीक्षा उर्त्तीण नहीं हाेंगे’ को E' F' से दर्शाया जा सकता है।

क्योंकि E' घटना ‘E-नहीं’, अर्थात् ‘अनिल परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करेगा’ तथा F' घटना ‘F-नहीं’, अर्थात् ‘आशिमा परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करेगी’ दर्शाते हैं।

साथ ही E' F' = (E F)' (डी-मोरगन् नियम द्वारा)

अब P(E F) = P(E) + P(F) – P(E F)

या P(E F) = 0.05 + 0.10 – 0.02 = 0.13

इसलिए P(E' F') = P(E F)' = 1 – P(E F) = 1 – 0.13 = 0.87

(b) P(दोनों में से कम से कम एक उत्तीर्ण नहीं होगा)

= 1 – P(दोनों उत्तीर्ण होंगे)

= 1 – 0.02 = 0.98

(c) घटना ‘दोनों मे से केवल एक उत्तीर्ण होगा’ निम्नलिखित घटना के समरूप है:

‘अनिल उत्तीर्ण होगा और आशिमा उत्तीर्ण नहीं होगी’

या ‘अनिल उत्तीर्ण नहीं होगा और आशिमा उत्तीर्ण होगी’

अर्थात् E F' या E' F जहाँ E और F परस्पर अपवर्जी हैं।

इसलिए, P (दोनों में से केवल एक उत्तीर्ण होगा)

= P(E F' या E'F)

= P(E F') + P(E'F) = P (E) – P(E F) + P(F) – P (E F)

= 0.05 – 0.02 + 0.10 – 0.02 = 0.11

उदाहरण 13 दो पुरुषों व दो स्त्रियों के समूह में से दो व्यक्तियों की एक समिति का गठन करना है। प्रायिकता क्या है कि गठित समिति में (a) कोई पुरुष न हो? (b) एक पुरुष हो ? (c) दोनों ही पुरुष हों?

हल समूह में व्यक्तियों की कुल संख्या = 2 + 2 = 4. इन चार व्यक्तियों में से दो को 4C2 तरीके से चुना जा सकता है।

(a) समिति में कोई पुरुष न होने का अर्थ है कि समिति में दो स्त्रियाँ हैं। दो स्त्रियों में से दोनों के चुनने के 2C2 = 1तरीका है।

इसलिए P(कोई पुरुष नहीं)

(b) समिति में एक पुरुष होने का तात्पर्य है कि इसमें एक स्त्री है 2 पुरुषों में से एक पुरुष चुनने के 2C1 तरीके हैं तथा दो स्त्रियों में से एक चुनने के भी 2C1 तरीके हैं। दोनों चुनावों को एक साथ करने के 2C1 ञ् 2C1 तरीके हैं।

इसलिए P(एक पुरूष)

(c) दो पुरुषों को 2C2 तरीकों से चुना जा सकता है।

अत: P(दो पुरुष)


प्रश्नावली 16.3

1. प्रतिदर्श समष्टि S = {ω1, ω2, ω3, ω4, ω5, ω6, ω7}के परिणामों के लिए निम्नलिखित में से कौन से प्रायिकता निर्धारण वैध नहीं है:

परिणाम ω 1 ω 2 ω 3 ω 4 ω 5 ω 6 ω 7

(a) 0.1 0.01 0.05 0.03 0.01 0.2 0.6

(b)

(c) 0.1 0.2 0.3 0.4 0.5 0.6 0.7

(d) – 0.1 0.2 0.3 0.4 – 0.2 0.1 0.3

(e)

2. एक सिक्का दो बार उछाला जाता है। कम से कम एक पट् प्राप्त होने की क्या प्रायिकता है?

3. एक पासा फेंका जाता है। निम्नलिखित घटनाओं की प्रायिकता ज्ञात कीजिए:

(i) एक अभाज्य संख्या प्रकट होना

(ii) 3 या 3 से बड़ी संख्या प्रकट होना

(iii) 1 या 1 से छोटी संख्या प्रकट होना

(iv) छ: से बड़ी संख्या प्रकट होना

(v) छ: से छोटी संख्या प्रकट होना

4. ताश की गड्डी के 52 पत्तों में से एक पत्ता यादृच्छया निकाला गया है।

(a) प्रतिदर्श समष्टि में कितने बिंदु हैं?

(b) पत्ते का हुकुम का इक्का होने की प्रायिकता क्या है?

(c) प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि पत्ता (i) इक्का है (ii) काले रंग का है।

5. एक अनभिनत (unbiased) सिक्का जिसके एक तल पर 1 और दूसरे तल पर 6 अंकित है तथा एक अनभिनत पासा दोनों को उछाला जाता है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि प्रकट संख्याओं का योग (i) 3 है। (ii) 12 है।

6. नगर परिषद् में चार पुरुष व छ: स्त्रियाँ हैं। यदि एक समिति के लिए यादृच्छया एक परिषद् सदस्य चुना गया है तो एक स्त्री के चुने जाने की कितनी संभावना है?

7. एक अनभिनत सिक्के को चार बार उछाला जाता है और एक व्यक्ति प्रत्येक चित्त पर एक रू जीतता है और प्रत्येक पट् पर 1ण्50रू हारता है। इस परीक्षण के प्रतिदर्श समष्टि से ज्ञात कीजिए कि आप चार उछालों में कितनी विभिन्न राशियाँ प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही इन राशियों में से प्रत्येक की प्रायिकता भी ज्ञात कीजिए?

8. तीन सिक्के एक बार उछाले जाते हैं। निम्नलिखित की प्रायिकता ज्ञात कीजिए:

(i) तीन चित्त प्रकट होना (ii) 2 चित्त प्रकट होना

(iii) न्यूनतम 2 चित्त प्रकट होना (iv) अधिकतम 2 चित्त प्रकट होना

(v) एक भी चित्त प्रकट न होना (vi) 3 पट् प्रकट होना

(vii) तथ्यत: 2 पट् प्रकट होना (viii) कोई भी पट् न प्रकट होना

(ix) अधिकतम 2 पट् प्रकट होना

9. यदि किसी घटना A की प्रायिकता है तो घटना ‘A-नहीं’ की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।

10. शब्द 'ASSASSINATION' से एक अक्षर यादृच्छया चुना जाता है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि चुना गया अक्षर (i) एक स्वर (vowel) है (ii) एक व्यंजन (consonant) है।

11. एक लाटरी में एक व्यक्ति 1 से 20 तक की संख्याओं में से छ: भिन्न-भिन्न संख्याएँ यादृच्छया चुनता है और यदि ये चुनी गई छ: संख्याएँ उन छ: संख्याओं से मेल खाती हैं, जिन्हें लाटरी समिति ने पूर्वनिर्धारित कर रखा है, तो वह व्यक्ति इनाम जीत जाता है। लाटरी के खेल में इनाम जीतने की प्रायिकता क्या है? [संकेत: संख्याओं के प्राप्त होने का क्रम महत्वपूर्ण नहीं है]

12. जाँच कीजिए कि निम्न प्रायिकताएँ P(A) और P(B) युक्ति संगत (consistently) परिभाषित की गई हैं:

(i) P(A) = 0.5, P(B) = 0.7, P(AB) = 0.6

(ii) P(A) = 0.5, P(B) = 0.4, P(AB) = 0.8

13. निम्नलिखित सारणी में खाली स्थान भरिए:

Screenshot-2018-6-28 ch - 16 pmd - Chapter-16 pdf(2)

14. P(A) = और P(B) = , दिया गया है। यदि A और B परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हैं, तो
P(A
या B), ज्ञात कीजिए।

15. यदि E और F घटनाएँ इस प्रकार हैं कि P(E) = , P(F) = और P(E और F) = , तो ज्ञात कीजिए (i) P(E या F) (ii) P(E-नहीं और F-नहीं)

16. घटनाएँ E और F इस प्रकार हैं कि P(E -नहीं और F-नहीं) = 0.25, बताइए कि E और F परस्पर अपवर्जी हैं या नहीं?

17. घटनाएँ A और B इस प्रकार हैं कि P(A) = 0.42, P(B) = 0.48 और P(A और B) = 0.16. ज्ञात कीजिए:

(i) P(A-नहीं) (ii) P(B-नहीं) (iii) P(A या B)

18. एक पाठशाला की कक्षा XI के 40% विद्यार्थी गणित पढ़ते हैं और 30% जीव विज्ञान पढ़ते हैं। कक्षा के 10% विद्यार्थी गणित और जीव विज्ञान दोनों पढ़ते हैं। यदि कक्षा का एक विद्यार्थी यादृच्छया चुना जाता है, तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह गणित या जीव विज्ञान पढ़ता होगा।

19. एक प्रवेश परीक्षा को दो परीक्षणों (Tests)के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाता है। किसी यादृच्छया चुने गए विद्यार्थी की पहले परीक्षण में उत्तीर्ण होने की प्रायकिता 0.8 है और दूसरे परीक्षण में उत्तीर्ण होने की प्रायिकता 0.7 है। दोनों में से कम से कम एक परीक्षण उत्तीर्ण करने की प्रायिकता 0.95 है। दोनों परीक्षणों को उत्तीर्ण करने की प्रायिकता क्या है?

20. एक विद्यार्थी के अंतिम परीक्षा के अंग्रेजी और हिंदी दोनों विषयों को उत्तीर्ण करने की प्रायिकता 0.5 है और दोनों में से कोई भी विषय उत्तीर्ण न करने की प्रायिकता 0.1 है। यदि अंग्रेजी की परीक्षा उत्तीर्ण करने की प्रायिकता 0.75 हो तो हिंदी की परीक्षा उत्तीर्ण करने की प्रायिकता क्या है?

21. एक कक्षा के 60 विद्यार्थियों में से 30 ने एनण् सीण् सीण् (NCC), 32 ने एनण् एसण् एसण् (NSS) और 24 ने दोनों को चुना है। यदि इनमें से एक विद्यार्थी यादृच्छया चुना गया है तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि

(i) विद्यार्थी ने एन.सी.सी. या एन.एस.एस. को चुना है।

(ii) विद्यार्थी ने न तो एन.सी.सी. और न ही एन.एस.एस. को चुना है।

(iii) विद्यार्थी ने एन.एस.एस. को चुना है किंतु एन.सी.सी. को नहीं चुना है।


विविध उदाहरण

उदाहरण 14 छुट्टियों  में वीना ने चार शहरों A, B, C और D की यादृच्छया क्रम में यात्रा की। क्या प्रायिकता है कि उसने

(i) A की यात्रा B से पहले की?

(ii) A की यात्रा B से पहले और B की C से पहले की?

(iii) A की सबसे पहले और B की सबसे अंत में यात्रा की?

(iv) A की या तो सबसे पहले या दूसरे स्थान पर यात्रा की?

(v) A की यात्रा B से एकदम पहले की?

हल वीना द्वारा चार शहरों A, B, C, और D की यात्रा के विभिन्न ढंगों की संख्या 4! अर्थात् 24 है। इसलिए n (S) = 24 क्योंकि प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि के अवयवों की संख्या 24 है। ये सभी परिणाम सम संभाव्य माने गए हैं। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि

S = {ABCD, ABDC, ACBD, ACDB, ADBC, ADCB

BACD, BADC, BDAC, BDCA, BCAD, BCDA

CABD, CADB, CBDA, CBAD, CDAB, CDBA

DABC, DACB, DBCA, DBAC, DCAB, DCBA} है।

(i) मान लीजिए घटना ‘वीना A की यात्रा B से पहले करती है,’ को E से दर्शाते हैं।

इसलिए E = {ABCD, CABD, DABC, ABDC, CADB, DACB

ACBD, ACDB, ADBC, CDAB, DCAB, ADCB}

इस प्रकार

(ii) मान लीजिए घटना ‘वीना ने A की यात्रा B से पहले और B की यात्रा C से पहले की’ को F से दर्शाते हैं।

यहाँ F = {ABCD, DABC, ABDC, ADBC}

इसलिए

विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि (iii), (iv) (v) की प्रायिकता स्वयं ज्ञात करें।

उदाहरण 15 जब ताश के 52 पत्तों की गड्डी से 7 पत्तों का एक समूह बनाया जाता है तो इस बात की प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि इसमें (i) सारे बादशाह शामिल हैं (ii) तथ्यत: 3 बादशाह हैं (iii) न्यूनतम 3 बादशाह हैं।

हल समूहों की कुल संभव संख्या = 52C7

(i) 4 बादशाहों सहित समूहों की संख्या = 4C4 × 48C3 (अन्य 3 पत्ते शेष 48 पत्तों में से चुने
जाते हैं
)

अत: P (समूह में चार बादशाह) =

(ii) 3 बादशाह और 4 अन्य पत्तों वाले समूहों की संख्या = 4

इसलिए P (तथ्यत: 3 बादशाह) =

(iii) P(न्यूनतम 3 बादशाह)

= P(तथ्यत: 3 बादशाह) + P(4 बादशाह)

=

उदाहरण 16 यदि A, B, C किसी यादृच्छिक प्रयोग के संगत तीन घटनाएँ हों तो सिद्ध कीजिए कि

हल विचारिए E = B C तब

P(A B C ) = P(A E)

= ... (1)

अब P(E) = P(B C)

= ... (2)

साथ ही = [समुच्चयों के संघ पर सर्वनिष्ठ के वितरण नियम द्वारा]

अत: =

= ... (3)

(2) और (3) को (1) में प्रयोग करने पर

=

P(A B) – P(A C) – P(A B C)

उदाहरण 17 एक रिले दौड़ (relay race) में पाँच टीमों A, B, C, D और E ने भाग लिया।

(a) A, B और C के क्रमश: पहला, दूसरा व तीसरा स्थान पाने की क्या प्रायिकता है?

(b) A, B और C के पहले तीन स्थानों (किसी भी क्रम) पर रहने की क्या प्रायिकता है?

(मान लीजिए कि सभी अंतिम क्रम सम संभाव्य हैं।)

हल यदि हम पहले तीन स्थानों के लिए अंतिम क्रमों के प्रतिदर्श समष्टि पर विचार करें तो पाएँगे कि इसमें , i.e., = 5 × 4 × 3 = 60 प्रतिदर्श बिंदु हैं और प्रत्येक की प्रायिकता है।

(a) A,B और C क्रमश: प्रथम, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहते हैं। इसके लिए एक ही अंतिम क्रम है अर्थात् ABC

अत: P(A, B और C क्रमश: प्रथम, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहते हैं) =

(b) A, B और C पहले तीन स्थानों पर हैं। इसके लिए A, B और C के लिए 3! तरीके हैं। इसलिए इस घटना के संगत 3! प्रतिदर्श बिंदु होंगे।

अत: P (A, B और C पहले तीन स्थानों पर रहते हैं)



विविध प्रश्नावली

1. एक डिब्बे में 10 लाल, 20 नीली व 30 हरी गोलियाँ रखी हैं। डिब्बे से 5 गोलियाँ यादृच्छया निकाली जाती हैं। प्रायिकता क्या है कि

(i) सभी गोलियाँ नीली हैं ? (ii) कम से कम एक गोली हरी है?

2. ताश के 52 पत्तों की एक अच्छी तरह फेंटी गई गड्डी से 4 पत्ते निकाले जाते हैं। इस बात की क्या प्रायिकता है कि निकाले गए पत्तों में 3 ईंट और एक हुकुम का पत्ता है?

3. एक पासे के दो फलकों में से प्रत्येक पर संख्या ‘1’ अंकित है, तीन फलकों में प्रत्येक पर संख्या ‘2’ अंकित है और एक फलक पर संख्या ‘3’ अंकित है। यदि पासा एक बार फेंका जाता है, तो निम्नलिखित ज्ञात कीजिए:

(i) P(2) (ii) P(1 या 3) (iii) P(3-नहीं)

4. एक लाटरी में 10000 टिकट बेचे गए जिनमें दस समान इनाम दिए जाने हैं। कोई भी ईनाम न मिलने की प्रायिकता क्या है यदि आप (a) एक टिकट खरीदते हैं (b) दो टिकट खरीदते हैं
(c)
10 टिकट खरीदते हैं?

5. 100 विद्यार्थियों में से 40 और 60 विद्यार्थियों के दो वर्ग बनाए गए हैं। यदि आप और आपका एक मित्र 100 विद्यार्थियों में हैं तो प्रायिकता क्या है कि

(a) आप दोनों एक ही वर्ग में हों?

(b) आप दोनों अलग-अलग वर्गों में हों?

6. तीन व्यक्तियों के लिए तीन पत्र लिखवाए गए हैं और प्रत्येक के लिए पता लिखा एक लिफाफा है। पत्रों को लिफाफों में यादृच्छया इस प्रकार डाला गया कि प्रत्येक लिफाफे में एक ही पत्र है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि कम से कम एक पत्र अपने सही लिफाफे में डाला गया है।

7. A और B दो घटनाएँ इस प्रकार हैं कि P(A) = 0.54, P(B) = 0.69 और P(A B) = 0.35.

ज्ञात कीजिए:

(i) P(A B) (ii) P(A'B') (iii) P(A B') (iv) P(B A')

8. एक संस्था के कर्मचारियों में से 5 कर्मचारियों का चयन प्रबंध समिति के लिए किया गया है। पाँच कर्मचारियों का ब्योरा निम्नलिखित है:

Screenshot-2018-6-28 ch - 16 pmd - Chapter-16 pdf(3)

इस समूह से प्रवक्ता पद के लिए यादृच्छया एक व्यक्ति का चयन किया गया। प्रवक्ता के पुरुष या 35 वर्ष से अधिक आयु का होने की क्या प्रायिकता है?

9. यदि 0, 1, 3, 5 और 7 अंकों द्वारा 5000 से बड़ी चार अंकों की संख्या का यादृच्छया निर्माण किया गया हो तो पाँच से भाज्य संख्या के निर्माण की क्या प्रायिकता है जब,

(i) अंकों की पुनरावृत्ति नहीं की जाए? (ii) अंकों की पुनरावृत्ति की जाए?

10. किसी अटैची के ताले में चार चक्र लगे हैं जिनमें प्रत्येक पर 0 से 9 तक 10 अंक अंकित हैं। ताला चार अंकों के एक विशेष क्रम (अंकों की पुनरावृत्ति नहीं) द्वारा ही खुलता है। इस बात की क्या प्रायिकता है कि कोई व्यक्ति अटैची खोलने के लिए सही क्रम का पता लगा ले?



सारांश

इस अध्याय में हमने प्रायिकता की अभिगृहीतीय तरीका के विषय में पढ़ा है। इस अध्याय की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

प्रतिदर्श समष्टि: सभी संभावित परिणामों का समुच्चय

प्रतिदर्श बिंदु: प्रतिदर्श समष्टि के अवयव

घटना: प्रतिदर्श समष्टि का एक उपसमुच्चय

असंभव घटना: रिक्त समुच्चय

निश्चित घटना: पूर्ण प्रतिदर्श समष्टि

पूरक घटना या नहीं-घटना : समुच्चय A या S – A

घटना A या B: समुच्चय A B

घटना A और B: समुच्चय A B

घटना A किंतु B नहीं: समुच्चय A – B

परस्पर अपवर्जी घटनाएँ: A और B परस्पर अपवर्जी होती हैं यदि A B =

नि:शेष व परस्पर अपवर्जी घटनाएँ : घटनाएँ E1, E2,..., En परस्पर अपवर्जी व नि:शेष हैं यदि E1 E2 ... En = S और Ei Ej = φ

प्रायिकता : प्रत्येक प्रतिदर्श बिंदु ωi के संगत एक संख्या P (ωi) एेसी है कि

(i) 0 P (ωi) 1 (ii) सभी ωi S = 1

(iii) P(A) = सभी i A

संख्या P(ωi) परिणाम ωiण् की प्रायिकता कहा जाता है।

सम संभावित परिणाम : समान प्रायिकता वाले सभी परिणाम

घटना की प्रायिकता : एक सम संभावित परिणामों वाले परिमित प्रतिदर्श समष्टि के लिए घटना A की प्रायिकता ,जहाँ (A) = समुच्चय A में अवयवों की संख्या और (S) = समुच्चय S में अवयवों की संख्या

यदि A और B कोई दो घटनाएँ हैं, तो

P(A या B) = P (A) + P(B) – P (A और B)

समतुल्यत: P (A B) = P (A) + P (B) – P (A B)

यदि A और B परस्पर अपवर्जी हैं, तो P (A या B) = P(A) + P(B)

किसी घटना A के लिए

P(A–नहीं) = 1 – P(A)



एेतिहासिक पृष्ठभूामि

प्रायिकता सिद्धांत का विकास, गणित की अन्य शाखाओं की भाँति, व्यावहारिक कारणों से हुआ है। इसकी उत्पत्ति 16वीं शताब्दी में हुई थी जब इटली ने एक चिकित्सक तथा गणितज्ञ Jerome Cardan (1501-1576) ने इस विषय पर पहली पुस्तक ‘संयोग के खेलों पर, (Biber de Ludo Aleae) लिखी। यह पुस्तक उनके मरणोपरांत सन् 1633 में प्रकाशित हुई।

सन् 1654 में, Chevaliar de Mere नामक जुआरी ने, पासे से संबधित कुछ समस्याओं को लेकर सुप्रसिद्ध फ्रांसीसी दार्शनिक एवं गणितज्ञ Blaise Pascal (1623-1662) से संपर्क किया। Pascal इस प्रकार की समस्याओं में रुचि लेने लगे और उन्होंने इसकी चर्चा विख्यात फ्रांसीसी गणितज्ञ Pierre de Fermat (1601-1665) से की। Pascal और Fermat दोनों ने स्वतंत्र रूप से समस्याओं को हल किया।

Pascal और Fermat के अतिरिक्त एक डच निवासी Christian Huygenes (1929-1695), एक स्विस निवासी J.Bernoulli (1651-1705), एक फ्रांसीसी A.De Moivre (1667-1754), एक अन्य फ्रांस निवासी Pierre Laplace (1749-1827) तथा रूसी P.L.Chebyechav (1821-1894), A.A.Morkov (1856-1922) और A.N.Kolmogorove ने भी प्रायिकता सिद्धांत में विशिष्ट योगदान दिया। प्रायिकता सिद्धांत के अभिगृहीतिकरण का श्रेय Kolmogorove को मिला है। सन 1933 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘प्रायिकता के आधार’ (Foundation of Probability) में प्रायिकता को समुच्चय फलन के रूप में प्रस्तुत किया गया है और यह पुस्तक एक क्लासिक (Classic) मानी जाती है।


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