™श्ैजंजपेजपबे उंल इम तपहीजसल बंससमक जीम ेबपमदबम व िंअमतंहमे ंदक जीमपत मेजपउंजमेश् दृ ।ण्स्ण्ठव्ॅस्म्ल् - ।ण्स्ण् ठव्क्क्प्छळज्व्छ ऽ 15ण्1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध हम जानते हैं कि सांख्ियकी का सरोकार किसी विशेष उद्देश्य के लिए एकत्रिात आँकड़ों से होता है। हम आँकड़ों का विश्लेषण एवं व्याख्या कर उनके बारे में निणर्य लेते हैं। हमने पिछली कक्षाओं में आँकड़ों को आलेख्िाक एवं सारणीब( रूप में व्यक्त करने की विध्ियों का अध्ययन किया है। यह निरूपण आँकड़ों के महत्वपूणर् गुणों एवं विशेषताओं को दशार्ता है। हमने दिए गए आँकड़ों का एक प्रतिनिध्िक मान ज्ञात करने की विध्ियों के बारे में भी अध्ययन किया है। इस मूल्य को वेंफद्रीय प्रवृिा की माप कहते हैं। स्मरण कीजिएकि माध्य ;समांतर माध्यद्ध, माियका और बहुलक वेंफद्रीय प्रवृिा की तीन माप हैं। वेंफद्रीय प्रवृिा के माप हमें इस बात का आभास दिलाते हैं कि आँकड़े किस स्थान पर वेंफदि्रत हैं विंफतु आँकड़ों के समुचित अथर् विवेचन के लिए हमें यह भी पता होना चाहिए कि आँकड़ों में कितना बिखराव है या वे वेंफद्रीय प्रवृिा की माप के चारों ओर किस प्रकार एकत्रिात हैं। दो बल्लेबाजों द्वारा पिछले दस मैचों में बनाए गए रनों पर विचार करेंः बल्लेबाज ।: 30, 91, 0, 64, 42, 80, 30, 5, 117, 71 बल्लेबाज ठ: 53, 46, 48, 50, 53, 53, 58, 60, 57, 52 स्पष्टतया आँकड़ों का माध्य व माियका निम्नलिख्िात हैंः बल्लेबाज । बल्लेबाज ठ माध्य 53 53 माियका 53 53 स्मरण कीजिए कि हम प्रेक्षणों का माध्य ;ग द्वारा निरूपितद्ध उनके योग को उनकी संख्या से भाग देकर ज्ञात करते हैं, अथार्त् ग त्र1 ∑ द गपद पत्र1 माियका की गणना के लिए आँकड़ों को पहले आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्िथत किया जाता है और पिफर निम्नलिख्िात नियम लगाया जाता हैः ⎛द ़1⎞यदि प्रेक्षणों की संख्या विषम है तो माियका ⎜⎟वाँ प्रेक्षण होती है। यदि प्रेक्षणों की संख्या⎝2 ⎠दद⎛⎞ ⎛⎞सम है तो माियका ⎜⎟वें और ⎜़1⎟वें प्रेक्षणों का माध्य होती है।22⎝⎠⎝⎠ हम पाते हैं कि दोनों बल्लेबाजों। तथा ठ द्वारा बनाए गए रनों का माध्य व माियका बराबर हैअथार्त् 53 है। क्या हम कह सकते हैं कि दोनों बल्लेबाजों का प्रदशर्न समान है? स्पष्टता नहीं। क्योंकि । के रनों में परिवतर्नशीलता 0 ;न्यूनतमद्ध से 117 ;अध्िकतमद्ध तक है। जबकि ठ के रनों का विस्तार46 ;न्यूनतमद्ध से 60 ;अध्िकतमद्ध तक है।आइए अब उपयुर्क्त स्कोरों को एक संख्या रेखा पर अंकित करें। हमें नीचे दशार्इर् गइर् आवृफतियाँप्राप्त होती हैं ;आवृफति 15.1 और 15.2द्ध।बल्लेबाज । के लिए आवृफति 15ण्1 बल्लेबाज ठ के लिए आवृफति 15ण्2 हम देख सकते हैं कि बल्लेबाज ठ के संगत बिंदु एक दूसरे के पास - पास हैं और वेंफद्रीय प्रवृिा की माप ;माध्य व माियकाद्ध के इदर् गिदर् गुच्िछत हैं जबकि बल्लेबाज । के संगत बिंदुओं में अध्िक बिखराव है या वे अध्िक पैफले हुए हैं। अतः दिए गए आँकड़ों के बारे में संपूणर् सूचना देने के लिए वेंफद्रीय प्रवृिा की माप पयार्प्त नहीं हैं। परिवतर्नशीलता एक अन्य घटक है जिसका अध्ययन सांख्ियकी के अंतगर्त किया जाना चाहिए। वेंफद्रीय प्रवृिा की माप की तरह ही हमें परिवतर्नशीलता के वणर्न के लिए एकल संख्या चाहिए। इस संख्या को ‘प्रकीणर्न की माप ;डमंेनतम व िकपेचमतेपवदद्ध’ कहा जाता है। इस अध्याय में हम प्रकीणर्न की माप के महत्व व उनकी वगीर्वृफत एवं अवगीर्वृफत आँकड़ों के लिए गणना की विध्ियों के बारे में पढ़ेंगे। 15ण्2 प्रकीणर्न की माप ;डमंेनतमे व िकपेचमतेपवदद्ध आँकड़ों में प्रकीणर्न या विक्षेपण का माप प्रेक्षणों व वहाँ प्रयुक्त वेंफद्रीय प्रवृिा की माप के आधर पर किया जाता है। प्रकीणर्न के निम्नलिख्िात माप हैंः ;पद्ध परिसर ;त्ंदहमद्ध ;पपद्ध चतुथर्क विचलन ;फनंतजपसम कमअपंजपवदद्ध ;पपपद्ध माध्य विचलन ;डमंद कमअपंजपवदद्ध ;पअद्ध मानक विचलन;ैजंदकंतक कमअपंजपवदद्धण् इस अध्याय में हम, चतुथर्क विचलन के अतिरिक्त अन्य सभी मापों का अध्ययन करेंगे। 15ण्3 परिसर ;त्ंदहमद्ध स्मरण कीजिए कि दो बल्लेबाजों । तथा ठ द्वारा बनाए गए रनों के उदाहरण में हमने स्कोरों में बिखराव, प्रत्येक शृंखला के अध्िकतम एवं न्यूनतम रनों के आधर पर विचार किया था। इसमें एकल संख्या ज्ञात करने के लिए हम प्रत्येक शृंखला के अध्िकतम व न्यूनतम मूल्यों में अंतर प्राप्त करते हैं। इस अंतर को परिसर कहा जाता है। बल्लेबाज। के लिए परिसर त्र 117 दृ 0 त्र 117 और बल्लेबाज ठए के लिए परिसर त्र 60 दृ 46 त्र 14 स्पष्टतया परिसर । झ परिसर ठए इसलिए । के स्कोरों में प्रकीणर्न या बिखराव अध्िक है जबकि ठ के स्कोर एक दूसरे के अध्िक पास हैं। अतः एक शृंखला का परिसर त्र अध्िकतम मान दृ न्यूनतम मान आँकड़ों का परिसर हमें बिखराव या प्रकीणर्न का मोटा - मोटा ;तवनहीद्ध ज्ञान देता है, विंफतु वेंफद्रीयप्रवृिा की माप, विचरण के बारे में वुफछ नहीं बताता है। इस उद्देश्य के लिए हमें प्रकीणर्न के अन्यमाप की आवश्यकता है। स्पष्टतया इस प्रकार की माप प्रेक्षणों की वेंफद्रीय प्रवृिा से अंतर ;या विचलनद्ध पर आधरित होनी चाहिए। वेंफद्रीय प्रवृिा से प्रेक्षणों के अंतर के आधर पर ज्ञात की जाने वाली प्रकीणर्न की महत्वपूणर् माप माध्य विचलन व मानक विचलन हैं। आइए इन पर विस्तार से चचार् करें। 15ण्4 माध्य विचलन ;डमंद कमअपंजपवदद्ध याद कीजिए कि प्रेक्षण ग का स्िथर मान ं से अंतर ;ग दृ ंद्ध प्रेक्षण ग का ं से विचलन कहलाता है। प्रेक्षण ग का वेंफद्रीय मूल्य श्ंश् से प्रकीणर्न ज्ञात करने के लिए हम ं से विचलन प्राप्त करते हैं। इन विचलनों का माध्य प्रकीणर्न की निरपेक्ष माप होता है। माध्य ज्ञात करने के लिए हमें विचलनों का योग प्राप्त करना चाहिए, विंफतु हम जानते हैं कि वेंफद्रीय प्रवृिा की माप प्रेक्षणों के समुच्चय की अध्िकतम तथा न्यूनतम मूल्यों के मध्य स्िथत होता है। इसलिए वुफछ विचलन )णात्मक तथा वुफछ ध्नात्मक होंगे। अतः विचलनों का योग शून्य हो सकता है। इसके अतिरिक्त माध्य ग से विचलनों का योग शून्य होता है। विचलनांे का यागे 0साथ ही विचलनोंका माध्य = त्रत्र0 प्रक्ष्ेाणों की संख्या द अतः माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने का कोइर् औचित्य नहीं है। स्मरण कीजिए कि प्रकीणर्न की उपयुर्क्त माप ज्ञात करने के लिए हमें प्रत्येक मान की वेंफद्रीयप्रवृिा की माप या किसी स्िथर संख्या श्ंश् से दूरी ज्ञात करनी होती है। याद कीजिए कि किन्हीं दो संख्याओं के अंतर का निरपेक्ष मान उन संख्याओं द्वारा संख्या रेखा पर व्यक्त बिंदुओं के बीच की दूरी को दशार्ता है। अतः स्िथर संख्या श्ंश् से विचलनों के निरपेक्ष मानों का माध्य ज्ञात करते हैं। इस माध्य को ‘माध्य विचलन’ कहते हैं। अतः वेंफद्रीय प्रवृिा श्ंश् के सापेक्ष माध्य विचलन प्रेक्षणों का श्ंश् से विचलनों के निरपेक्ष मानों का माध्य होता है। श्ंश् के सापेक्ष माध्य विचलन को डण्क्ण् ;ंद्ध द्वारा प्रकट किया जाता है। श्श्सं े ेविचलनों वफनिरपक्ष्ेा मान का या ेग डण्क्ण् ;ंद्ध त्र प्रक्ष्ेाणांे की सख्ंया टिप्पणी माध्य विचलन वेंफद्रीय प्रवृिा की किसी भी माप से ज्ञात किया जा सकता है। विंफतु सांख्ियकीय अध्ययन में सामान्यतः माध्य और माियका के सापेक्ष माध्य विचलन का उपयोग किया जाता है। 15ण्4ण्1 अवगीर्वृफत आँकडों के लिए माध्य विचलन ;डमंद कमअपंजपवद वित नदहतवनचमक कंजंद्ध मान लीजिए कि द प्रेक्षणों के आँकड़े ग1ए ग2ए ग3ए ण्ण्ण्ए ग दिए गए हैं। माध्य या माियका केद सापेक्ष माध्य विचलन की गणना में निम्नलिख्िात चरण प्रयुक्त होते हैंः चरण - 1 उस वेंफद्रीय प्रवृिा की माप को ज्ञात कीजिए जिससे हमें माध्य विचलन प्राप्त करना है। मान लीजिए यह ष्ंष् है। चरण - 2 प्रत्येक प्रेक्षण गप का ं से विचलन अथार्त् ग1दृ ंए ग2दृ ंए ग3दृ ंएण् ण् ण् ए ग दृ ं ज्ञात करें।द चरण - 3 विचलनों का निरपेक्ष मान ज्ञात करें अथार्त् यदि विचलनों में )ण चिÉ लगा है तो उसे हटा दें अथार्त् ग1 −ं ए ग2 −ं ए ग3 −ं एण्ण्ण्ण्ए गद −ं ज्ञात करें। चरण - 4 विचलनों के निरपेक्ष मानों का माध्य ज्ञात करें। यही माध्य श्ंश् के सापेक्ष माध्य विचलन है। ∑ द गप −ं पत्र1अथार्त् डण्क्ण्; द्ध त्रं द द गप −गअतः डण्क्ण् ; ग द्ध त्र1 ∑ ए जहाँ ग त्र माध्यद पत्र1 तथा डण्क्ण् ;डद्ध त्र1 ∑ द गप−ड ए जहाँ ड त्र माियकाद पत्र1 द्वारा निरूपित किया गया है जब तक कि अन्यथा नहीं कहा गया हो। आइए अब उपयुर्क्त चरणों को समझने के लिए निम्नलिख्िात उदाहरण लेंः उदाहरण - 1 निम्नलिख्िात आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिएः 6, 7, 10, 12, 13, 4, 8, 12 हल हम क्रमब( आगे बढ़ते हुए निम्नलिख्िात प्राप्त करते हैंः चरण 1 दिए गए आँकड़ों का माध्य 6 ़़ 7 10 ़12 ़13 4 812 ़़़ 72 ग त्र त्रत्र9 है।88 चरण 2 प्रेक्षणों के माध्य गसे क्रमशः विचलन गपदृ ग अथार्त् 6 दृ 9ए 7 दृ 9ए 10 दृ 9ए 12 दृ 9ए 13 दृ 9ए 4 दृ 9ए 8 दृ 9ए 12 दृ 9 हैं। या दृ3ए दृ2ए 1ए 3ए 4ए दृ5ए दृ1ए 3 हंै। चरण 3 विचलनों के निरपेक्ष मान गप−ग 3ए 2ए 1ए 3ए 4ए 5ए 1ए 3 हंै। चरण 4 माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन निम्नलिख्िात हैः 8 ∑गप−ग पत्र1डण्क्ण्ग;द्धत्र 8 32134513 22 ़़़़ ़़़ त्र त्र त्र 2ण्7588 प्रत्येक बार चरणों को लिखने के स्थान पर हम, चरणों का वणर्न किए बिना ही क्रमानुसार परिकलन कर सकते हैं। उदाहरण 2 निम्नलिख्िात आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिएः 12ए 3ए 18ए 17ए 4ए 9ए 17ए 19ए 20ए 15ए 8ए 17ए 2ए 3ए 16ए 11ए 3ए 1ए 0ए 5 हल हमें दिए गए आँकड़ों का माध्य ; गद्ध ज्ञात करना होगा। 1 20 ग 200 ग त्र∑प त्र त्र 1020 पत्र1 20गप −गमाध्य से विचलनों के निरपेक्ष मान अथार्त् इस प्रकार हैंः 2ए 7ए 8ए 7ए 6ए 1ए 7ए 9ए 10ए 5ए 2ए 7ए 8ए 7ए 6ए 1ए 7ए 9ए 10ए 5 20 इसलिए ∑ग −ग त्र124प पत्र1 124और डण्क्ण् ; ग द्ध त्र त्र 6ण्220 उदाहरण 3 निम्नलिख्िात आँकड़ों से माियका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिएः 3ए 9ए 5ए 3ए 12ए 10ए 18ए 4ए 7ए 19ए 21 हल यहाँ प्रक्षेणों की संख्या 11 है जो विषम है। आँकड़ों को आरोही क्रम में लिखने पर हमें 3ए 3ए 4ए 5ए 7ए 9ए 10ए 12ए 18ए 19ए 21 प्राप्त होता है। ⎛11 ़1⎞ अब माियका त्र ⎜⎟वाँ या 6वाँ प्रेक्षण त्र 9 हैै।⎝ 2 ⎠गप ड इस प्रकार से है।विचलनों का क्रमशः निरपेक्ष मान 6ए 6ए 5ए 4ए 2ए0ए 1ए 3ए 9ए 10ए 12 11 गप −ड58 त्रइसलिए ∑ पत्र1 1 11 1तथा ;द्धत्र∑गप −डडण्क्ण् ड त्र×58 त्र5ण्27 11 11पत्र1 15ण्4ण्2 वगीर्वृफत आँकड़ों के लिए माध्य विचलन ;डमंद कमअपंजपवद वित हतवनचमक कंजंद्ध हम जानते हैं कि आँकड़ों को दो प्रकार से वगीर्वृफत किया जाता है। ;ंद्ध असतत बारंबारता बंटन ;क्पेबतमजम तिमुनमदबल कपेजतपइनजपवदद्ध ;इद्ध सतत बारंबारता बंटन ;ब्वदजपदनवने तिमुनमदबल कपेजतपइनजपवदद्ध आइए इन दोनों प्रकार के आँकड़ों के लिए माध्य विचलन ज्ञात करने की विध्ियों पर चचार् करें। ;ंद्ध असतत बारंबारता बंटन मान लीजिए कि दिए गए आँकड़ों में द भ्िान्न पे्रक्षण ग1ए ग2ए ण्ण्ण्ए ग हैंद जिनकी बारंबारताएंँ क्रमशः 1िए 2ि ए ण्ण्ण्ए िहैं। इन आँकड़ों को सारणीब( रूप में निम्नलिख्िात प्रकार सेद व्यक्त किया जा सकता है जिसे असतत बारंबारता बंटन कहते हैंः गरू गगग3 ण्ण्ण् ग12 द रूि िििण्ण्ण् ि12 3द ;पद्ध माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन सवर्प्रथम हम दिए गए आँकड़ों का निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा माध्य ग ज्ञात करते हैंः द गि∑ पप द पत्र11 गत्रत्र गि∑ पपद छ पत्र1∑ पि ए पत्र1 द जहाँ ∑गपप िप्रेक्षणों गका उनकी क्रमशः बारंबारता सिे गुणनपफलों का योग प्रकट करता है।पप पत्र1 द तथाछ त्र∑ पि बारंबारताओं का योग है। पत्र1 तब हम प्रेक्षणों गका माध्य गसे विचलन ज्ञात करते हैं और उनका निरपेक्ष मान लेते हैं अथार्तपगप− गसभी पत्र1ए2एण्ण्ण्ए दके लिए ज्ञात करते हैं। इसके पश्चात् विचलनों के निरपेक्ष मान का माध्य ज्ञात करते हैं, जोकि माध्य के सापेक्ष वांछित माध्य विचलन है। द ;पपद्ध माियका के सापेक्ष माध्य विचलन माियका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने के लिए हम दिए गए असतत बारंबारता बंटन की माियका ज्ञात करते हैं। इसके लिए प्रेक्षणों को आरोही क्रम में व्यवस्िथत करते हैं। इसके पश्चात् संचयी बांरबारताएँ ज्ञात की जाती हैं। तब उस प्रेक्षण का निधर्रण करते हैं जिसकी संचयी बांरबारता छ2 ए के समान या इससे थोड़ी अध्िक है। यहाँ बारंबारताओं का योग छ से दशार्या गया है। प्रेक्षणों का यह मान आँकड़ों के मध्य स्िथत होता है इसलिए यह अपेक्ष्िातमाियका है। माियका ज्ञात करने के बाद हम माियका से विचलनों के निरपेक्ष मानों का माध्य ज्ञातकरते हैं। इस प्रकार डण्क्ण्;डद्ध त्र 1 ∑ दपगिप− ड छ पत्र1 उदाहरण 4 निम्नलिख्िात आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिएः गप 2 5 6 8 10 12 पि 2 8 10 7 8 5 हल आइए दिए गए आँकड़ों की सारणी 15.1 बनाकर अन्य स्तंभ परिकलन के बाद लगाएँ सारणी 15ण्1 गप पि पिगप ग गप− पि ग गप− 2 2 4 5ण्5 11 5 8 40 2ण्5 20 6 10 60 1ण्5 15 8 7 56 0ण्5 3ण्5 10 8 80 2ण्5 20 12 5 60 4ण्5 22ण्5 40 300 92 66 6 छ त्र∑ पि त्र 40 ए ∑ पिगपत्र300 ए ∑ पिगप− गत्र92 पत्र1 पत्र1 पत्र1 इसलिए गत्र 1 ∑ 6 पिपगत्र 1 × 300 त्र 7ण्5छ 40 पत्र1 16 1 गग और डण्क्ण् ;द्ध गत्र∑ पि त्र× 92 त्र 2ण्3प− छ 40 पत्र1 उदाहरण 5 निम्नलिख्िात आँकड़ों के लिए माियका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिएः गप 3 6 9 12 13 15 21 22 पि 3 4 5 2 4 5 4 3 हल दिए गए आँकड़े पहले ही आरोही क्रम में हैं। इन आँकड़ों में संगत संचयी बारंबारता की एक कतार और लगाते हैं ;सारणी 15.2द्ध। सांख्ियकी 375 सारणी 15ण्2 गप पि बण्ण्ि 3 3 3 6 4 7 9 5 12 12 2 14 13 4 18 15 5 23 21 4 27 22 3 30 अबए छ त्र 30 है जो सम संख्या हैए इसलिए माियका 15वीं व 16वीं प्रेक्षणों का माध्य है। यह दोनों प्रेक्षण संचयी बारंबारता 18 में स्िथत हैं जिसका संगत प्रेक्षण 13 है। 15 वाँ पक्ष्े्र ाण ़16वाँ प्रेक्षण 13 ़13 इसलिए माियका ड त्र त्रत्र 13 22 गप डअब माियका से विचलनों का निरपेक्ष मान अथार्त् निम्नलिख्िात सारणी 15.3 में दशार्ए गए है सारणी 15ण्3 डगप − 10 7 4 1 0 2 8 9 पि 3 4 5 2 4 5 4 3 पि डगप − 30 28 20 2 0 10 32 27 88 ∑ पि त्र 30 और ∑ पि गप − ड त्र 149 पत्र1 पत्र1 गिप − डइसलिए डण् क्ण् ;डद्ध त्र 1 ∑ 8 पछ पत्र1 1 त्र ×149 त्र 4ण्9730 ;इद्ध सतत बारंबारता बंटन एक सतत बांरबारता बंटन वह शृंखला होती है जिसमें आँकड़ों को विभ्िान्न बिना अंतर वाले वगो± में वगीर्वृफत किया जाता है और उनकी क्रमशः बारंबारता लिखी जाती है। उदाहरण के लिए 100 छात्रों द्वारा प्राप्ताकों को सतत बांरबारता बंटन में निम्नलिख्िात प्रकार से व्यक्त किया गया हैः ;पद्धमाध्य के सापेक्ष माध्य विचलन एक सतत बांरबारता बंटन के माध्य की गणना के समय हमने यह माना था कि प्रत्येक वगर् ;ब्संेे द्ध की बारंबारता उसके मध्य - बिंदु पर वेंफदि्रत होती है। यहाँ भी हम प्रत्येक वगर् का मध्य - बिंदु लिखते हैं और असतत बारंबारता बंटन की तरह माध्य विचलन ज्ञात करते हैं। आइए निम्नलिख्िात उदाहरण देखें उदाहरण 6 निम्नलिख्िात आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिएः हल दिए गए आँकड़ों से निम्न सारणी 15.4 बनाते हैं। सारणी 15ण्4 प्राप्तांक छात्रों की संख्या पि मध्य - बिंदु गप पिगप ग गप− पि ग गप− 10.20 2 15 30 30 60 20.30 3 25 75 20 60 30.40 8 35 280 10 80 40.50 14 45 630 0 0 50.60 8 55 440 10 80 60.70 3 65 195 20 60 70.80 2 75 150 30 60 40 1800 400 77 7 यहाँ छ त्र∑ पि त्र 40 ए∑ पिप गत्र1800 ए∑ पिगगत्र 400 प− पत्र1 पत्र1 पत्र1 1 7 1800 गत्र गित्रत्र 45इसलिए छ ∑ पप 40 पत्र1 1डण्क्ण् ;द्धत्र ∑प गप −ग त्र×400 त्र10 और ग 17 िछ 40 पत्र1 माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने की लघु विध्ि हम पद विचलन विध्ि ;ैजमचकमअपंजपवद उमजीवकद्ध का प्रयोग करके ग के कठिन परिकलन से बच सकते हैं। स्मरण कीजिए कि इस विध्ि में हम आँकड़ों के मध्य या उसके बिल्वुफल पास किसी प्रेक्षण को कल्िपत माध्य लेते हैं। तब प्रेक्षणों ;या विभ्िान्न वगो± के मध्य - बिंदुओंद्ध का इस कल्िपत माध्य से विचलन ज्ञात करते हैं। यह विचलन संख्या रेखा पर मूल बिंदु ;वतपहपदद्ध को शून्य से प्रतिस्थापित कर कल्िपत माध्य पर ले जाना ही होता है, जैसा कि आवृफति 15.3 में दशायार् गया है। आवृफति 15ण्3 यदि सभी विचलनों में कोइर् सावर् गुणनखंड ;बवउउवद ंिबजवतद्ध है तो विचलनों को सरल करने के लिए इन्हें इस सावर् गुणनखंड से भाग देते हैं। इन नए विचलनों को पद विचलन कहते हैं। पद विचलन लेने की प्रिया संख्या रेखा पर पैमाने का परिवतर्न होता है, जैसा कि आवृफति 15.4 में आवृफति 15ण्4 विचलन और पद विचलन प्रेक्षणों के आकार को छोटा कर देते हैं, जिससे गुणन जैसी गणनाएँ गप −ंसरल हो जाती हैं। मान लीजिए नया चर क त्र हो जाता है, जहाँ ष्ंष् कल्िपत माध्य है व ीपी सावर् गुणनखंड है। तब पद विचलन विध्ि द्वारा ग निम्नलिख्िात सूत्रा से ज्ञात किया जाता हैः 378 गण्िात ∑ दकिपपपत्र1गत्र ं़× ीछ आइए उदाहरण 6 के आँकड़ों के लिए पद विचलन विध्ि लगाएँ। हम कल्िपत माध्य ंत्र 45 और ीत्र 10ए लेते हैं और निम्नलिख्िात सारणी 15.5 बनाते हैं। सारणी 15ण्5 छात्रों की ग− 45प्राप्तांक गप− ग गप− गकप त्र पमध्य - बिंदु किपप पिसंख्या 10 गपि प 10.20 2 15 दृ 3 दृ 6 30 60 20.30 3 25 दृ 2 दृ 6 20 60 30.40 8 35 दृ 1 दृ 8 10 80 40.50 14 45 0 0 0 0 50.60 8 55 1 8 10 80 60.70 3 65 2 6 20 60 70.80 2 75 3 6 30 60 40 0 400 7 ∑ किपप 0पत्र1इसलिए गत्र ं़×ीत्र 45 ़×10 त्र 45 छ 40 17 400 गत्र गप− गत्रत्र 10 और डक्ण्ण् ;द्ध छ ∑ पि 40 पत्र1 ज्ञात करने के लिए किया जाता है। शेष प्रिया ;पपद्ध माियका के सापेक्ष माध्य विचलन दिए गए आँकड़ों के लिए माियका से माध्य विचलन ज्ञात करने की प्रिया वैसी ही है जैसी कि हमने माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने के लिए की थी। इसमें विशेष अंतर केवल विचलन लेने के समय माध्य के स्थान पर माियका लेने में होता है। आइए सतत बारंबारता बटंन के लिए माियका ज्ञात करने की प्रिया का स्मरण करें। आँकड़ोंको पहले आरोही क्रम में व्यवस्िथत करते हैं। तब सतत बारंबारता बंटन की माियका ज्ञात करने केलिए पहले उस वगर् को निधर्रित करते हैं जिसमें माियका स्िथत होती है ;इस वगर् को माियका वगर् कहते हैंद्ध और तब निम्नलिख्िात सूत्रा लगाते हैंः छ −ब् माियका त्ऱ2स ×ीिछजहाँ माियका वगर् वह वगर् है जिसकी संचयी बारंबारता 2 के बराबर या उससे थोड़ी अध्िक हो, बांरबारताओं का योग छ ए माियका वगर् की निम्न सीमा स, माियका वगर् की बांरबारता, ि, माियका वगर् से सटीक पहले वाले वगर् की संचयी बारंबारता ब् और माियका वगर् का विस्तार ी है। माियका ज्ञात करने के पश्चात् प्रत्येक वगर् के मध्य - बिंदुओं गका माियका से विचलनों का निरपेक्ष मान अथार्त्प गप −ड प्राप्त करते हैं। द1डण्क्ण् ;डद्ध त्र∑गि−डतब पपछ पत्र1 इस प्रिया को निम्नलिख्िात उदाहरण से स्पष्ट किया गया हैः उदाहरण 7 निम्नलिख्िात आँकड़ों के लिए माियका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए। हल दिए गए आँकड़ों से निम्न सारणी 15.6 बनाते हैंः सारणी 15.6 वगर् बारंबारता संचयी बारंबारता मध्य - बिंदु डमकण् गप − पि डमकण् गप − पि ;बण्ण्िद्ध गप 0.10 6 6 5 23 138 10.20 7 13 15 13 91 20.30 15 28 25 3 45 30.40 16 44 35 7 112 40.50 4 48 45 17 68 50.60 2 50 55 27 54 50 508 यहाँ छ त्र 50ए इसलिए छ2 वीं या 25वीं मद 20 - 30 वगर् में हैं। इसलिए 20 - 30 माियका वगर् है। हम जानते हैं कि छ ब् माियका त्र स 2 ीियहाँ सत्र 20ए ब्त्र13ए त्रि 15ए ीत्र 10 और छ त्र 50 25−13 इसलिए, माियका त्र20़ 15 ×10 त्र 20 ़ 8 त्र 28 अतः, माियका के सापेक्ष माध्य विचलन 1 6 डण्क्ण् ;डद्ध त्र गिप − ड त्र 1 ×508 त्र 10ण्16 है।छ पत्र1 50∑ प प्रश्नावली 15ण्1 प्रश्न 1 व 2 में दिए गए आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए। 1ण् 4ए 7ए 8ए 9ए 10ए 12ए 13ए 17 2ण् 38ए 70ए 48ए 40ए 42ए 55ए 63ए 46ए 54ए 44 प्रश्न 3 व 4 के आँकड़ों के लिए माियका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए। 3ण् 13ए 17ए 16ए 14ए 11ए 13ए 10ए 16ए 11ए 18ए 12ए 17 4ण् 36ए 72ए 46ए 42ए 60ए 45ए 53ए 46ए 51ए 49 प्रश्न 5 व 6 के आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए। 5ण् गप 5 10 15 20 25 पि 74635 6ण् गप 10 30 50 7090 पि 4 24 28 16 8 प्रश्न 7 व 8 के आँकड़ों के लिए माियका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए। 7ण् गप5 7 9 10 12 15 पि 862226 8ण् गप 15 21 27 30 35 पि 35678 प्रश्न 9 व 10 के आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए। 9ण् आय 0.100 100.200 200.300 300.400 400.500 500.600 600.700 700.800 प्रतिदिन व्यक्ितयों 4 89 10 7 5 4 3 की संख्या 10ण् ऊँचाइर् 95.105 105.115 115.125 125.135 135.145 145.155 ;सेमी मेंद्ध लड़कों की 9 13 26 30 12 10 संख्या 11ण् निम्नलिख्िात आँकड़ों के लिए माियका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिएः अंक 0.10 10.20 20.30 30.40 40.50 50.60 लड़कियों की 6 8 14164 2 संख्या 12ण् नीचे दिए गए 100 व्यक्ितयों की आयु के बंटन की माियका आयु के सापेक्ष माध्य विचलन की गणना कीजिएः आयु 16.20 21.25 26.30 31.35 36.40 41.45 46.50 51.55 संख्या 5 6 12 14 2612 16 ख्संकेत प्रत्येक वगर् की निम्न सीमा में से 0.5 घटा कर व उसकी उच्च सीमा में 0.5 जोड़ कर दिए गए आँकड़ों को सतत बारंबारता बंटन में बदलिए, 15ण्4ण्3 माध्य विचलन की परिसीमाएँ ;स्पउपजंजपवदे व िउमंद कमअपंजपवदद्ध बहुत अध्िक विचरण या बिखराव वाली शृंखलाओं में माियका वेंफद्रीय प्रवृिा की उपयुक्त माप नहीं होती है। अतः इस दशा में माियका के सापेक्ष माध्य विचलन पर पूरी तरह विश्वास नहीं किया जा सकता है।माध्य से विचलनों का योग ;)ण चिÉ को छोड़करद्ध माियका से विचलनों के योग से अध्िक होता है। इसलिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन अध्िक वैज्ञानिक नहीं है। अतः कइर् दशाओं में माध्य विचलन असंतोषजनक परिणाम दे सकता है। साथ ही माध्य विचलन को विचलनों के निरपेक्ष मान पर ज्ञात किया जाता है। इसलिए यह और बीजगण्िातीय गणनाओं के योग्य नहीं होता है। इसका अभ्िाप्राय है कि हमें प्रकीणर्न की अन्य माप की आवश्यकता है। मानक विचलन प्रकीणर्न की ऐसी ही एक माप है। 15ण्5 प्रसरण और मानक विचलन ;टंतपंदबम ंदक ैजंदकंतक क्मअपंजपवदद्ध याद कीजिए कि वेंफद्रीय प्रवृिा की माप के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने के लिए हमने विचलनों के निरपेक्ष मानों का योग किया था। ऐसा माध्य विचलन को साथर्क बनाने के लिए किया था, अन्यथा विचलनों का योग शून्य हो जाता है। विचलनों के चिÉों के कारण उत्प इस समस्या को विचलनों के वगर् लेकर भी दूर किया जा सकता है। निसंदेह यह स्पष्ट है कि विचलनों के यह वगर् )णेतर होते हैं। माना ग1ए ग2ए ग3ए ण्ण्ण्ए ग ए द प्रेक्षण हैं तथा ग उनका माध्य है। तबदद 22 22;गगद्ध;गगद्ध ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् ;गगद्ध;गगद्ध21 दप ण् प 1 यदि यह योग शून्य हो तो प्रत्येक ;गप − गद्ध शून्य हो जाएगा। इसका अथर् है कि किसी प्रकार द ∑त्रप 1 यह इंगित करता है कि प्रेक्षण ग1ए ग2ए ग3एण्ण्ण्एग, माध्य ग के निकट हैं तथा प्रेक्षणों का माध्य ग केदसापेक्ष विचरण कम है । इसके विपरीत यदि यह योग बड़ा है तो प्रेक्षणों का माध्य ग के सापेक्ष विचरण द द्ध2;−का विचरण नहीं है क्योंकि तब सभी प्रेक्षण ग के बराबर हो जाते हैं। यदि गप ग छोटा है तो ∑त्रप 1 प्रकीणर्न या विचरण की माप का एक संतोषजनक प्रतीक है? आइए इसके लिए छः प्रेक्षणों 5ए 15ए 25ए 35ए 45ए 55 का एक समुच्चय । लेते हैं। इन प्रेक्षणों का माध्य 30 है। इस समुच्चय में ग से विचलनों के वगर् का योग निम्नलिख्िात हैः 6 द्ध2;−अध्िक है। क्या हम कह सकते हैं कि योगगप ग सभी प्रेक्षणों का माध्य ग के सापेक्ष ∑त्रप 1 त्र 625 ़ 225 ़ 25 ़ 25 ़ 225 ़ 625 त्र 1750 एक अन्य समुच्चय ठ लेते हैं जिसके 31 प्रेक्षण निम्नलिख्िात हैंः 15ए 16ए 17ए 18ए 19ए 20ए 21ए 22ए 23ए 24ए 25ए 26ए 27ए 28ए 29ए 30ए 31ए 32ए 33ए 34ए 35ए 36ए 37ए 38ए 39ए 40ए 41ए 42ए 43ए 44ए 45ण् इन प्रेक्षणों का माध्य ल त्र 30 है। दोनों समुच्चयों। तथा ठ के माध्य 30 है। समुच्चय ठ के प्रेक्षणों के विचलनों के वगो± का योग निम्नलिख्िात है। द्ध2;गप−ग त्र ;5दृ30द्ध2 ़ ;15दृ30द्ध2 ़ ;25दृ30द्ध2 ़ ;35दृ30द्ध2 ़ ;45दृ30द्ध2 ़;55दृ30द्ध2 31 द्ध2∑; लप − ल त्र ;15दृ30द्ध2 ़;16दृ30द्ध2 ़ ;17दृ30द्ध2 ़ ण्ण्ण़् ;44दृ30द्ध2 ़;45दृ30द्ध2 पत्र1 त्र ;दृ15द्ध2 ़;दृ14द्ध2 ़ ण्ण्ण़् ;दृ1द्ध2 ़ 02 ़ 12 ़ 22 ़ 32 ़ ण्ण्ण़् 142 ़ 152 त्र 2 ख्152 ़ 142 ़ ण्ण्ण् ़ 12, 15 × ;15 ़1द्ध ;30 ़1द्ध त्र 2 × त्र 5 × 16 × 31 त्र 24806 द;द ़1द्ध;2द ़1द्ध;क्योंकि प्रथम द प्रावृफत संख्याओं के वगो± का योग त्र होता है, यहाँ द त्र 15 हैद्ध6 यदि ∑ द ;गप − गद्ध2 ही माध्य के सापेक्ष प्रकीणर्न की माप हो तो हम कहने के लिए प्रेरित होंगेपत्र1 कि 31 प्रेक्षणों के समुच्चय ठ का, 6 प्रेक्षणों वाले समुच्चय । की अपेक्षा माध्य के सापेक्ष अध्िक प्रकीणर्न है यद्यपि समुच्चय । में 6 प्रेक्षणों का माध्य ग के सापेक्ष बिखराव ;विचलनों का परिसर - 25 से 25 हैद्ध समुच्चय ठ की अपेक्षा ;विचलनों का परिसर - 15 से 15 हैद्ध अध्िक है। यह नीचे दिए गए चित्रों से भी स्पष्ट हैः समुच्चय ।ए के लिए हम आवृफति 15.5 पाते हैं। आवृफति 15ण्5 समुच्चय ठए के लिए आवृफति 15.6 हम पाते हैं आवृफति 15ण्6 अतः हम कह सकते हैं कि माध्य से विचलनों के वगो± का योग प्रकीणर्न की उपयुक्त माप नहीं है। 1 द द्ध2इस कठिनाइर् को दूर करने के लिए हम विचलनों के वगो± का माध्य लें अथार्त् हम ∑;गप − ग ण् द पत्र1 लें। समुच्चय ।ए के लिए हम पाते हैं, 11 माध्य त्र × 1750 त्र 291ण्6 है और समुच्चय ठए के लिए यह × 2480 त्र 80 है।6 31 यह इंगित करता है कि समुच्चय। में बिखराव या विचरण समुच्चय ठ की अपेक्षा अध्िक है जो दोनों समुच्चयों के अपेक्ष्िात परिणाम व ज्यामितिय निरूपण से मेल खाता है। 1 द्ध2∑;गप − गअतः हम को प्रकीणर्न की उपयुक्त माप के रूप में ले सकते हैं। यह संख्याद अथार्त् माध्य से विचलनों के वगो± का माध्य प्रसरण;अंतपंदबमद्ध कहलाता है और σ 2;सिगमा का वगर् पढ़ा जाता हैद्ध से दशार्ते हैं। अतः दप्रेक्षणों ग1ए ग2एण्ण्ण्ए ग का प्रसरणद द 21 2σ त्र∑;गप − गद्ध है।द पत्र1 15ण्5ण्1 मानक विचलन ;ैजंदकंतक क्मअपंजपवदद्ध प्रसरण की गणना में हम पाते हैं कि व्यक्ितगत प्रेक्षणों गप तथा गकी इकाइर् प्रसरण की इकाइर् से भ्िान्न है, क्योंकि प्रसरण में ;गप दृ गद्ध के वगो± का समावेश है, इसी कारण प्रसरण के ध्नात्मक वगर्मूल को प्रेक्षणों का माध्य के सापेक्ष प्रकीणर्न की यथोचित माप के रूप में व्यक्त किया जाता है और उसे मानक विचलन कहते हैं। मानक विचलन को सामान्यतः σए द्वारा प्रदश्िार्त किया जाता है तथा निम्नलिख्िात प्रकार से दिया जाता हैः 1 द 2σत्र ∑;गप − गद्ध ण्ण्ण् ;1द्धद पत्र1 आइए अवगीर्वृफत आँकड़ों का प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात करने के लिए वुफछ उदाहरण लेते हैं। उदाहरण 8 निम्नलिख्िात आँकड़ों के लिए प्रसरण तथा मानक विचलन ज्ञात कीजिएः 6ए 8ए 10ए 12ए 14ए 16ए 18ए 20ए 22ए 24 हल दिए गए आँकड़ों को निम्नलिख्िात प्रकार से सारणी 15.7 में लिख सकते हैं। माध्य को पद विचलन विध्ि द्वारा 14 को कल्िपत माध्य लेकर ज्ञात किया गया है। प्रेक्षणों की संख्या दत्र 10 है। सारणी 15ण्7 गप 14 2 प प गक − त्र माध्य से विचलन ;गप दृ ग द्ध ;गप दृ ग द्ध 6 8 10 12 14 16 18 20 22 24 दृ4 दृ3 दृ2 दृ1 0 1 2 3 4 5 दृ9 दृ7 दृ5 दृ3 दृ1 1 3 5 7 9 81 49 25 9 1 1 9 25 49 81 5 330 ∑ द कप इसलिए, माध्य ग त्र कल्िपत माध्य ़ पत्र1 ×ी द 5 त्र 14 ़× 2 त्र15 10 110 21आरैप्रसरण σ2 त्र ∑;गप − गद्धत्र × 330 त्र 33दपत्र1 10 अतः मानक विचलन σ त्र 33 त्र 5ण्74 15ण्5ण्2 एक असतत बारंबारता बंटन का मानक विचलन ;ैजंदकंतक कमअपंजपवद व िं कपेबतमजम तिमुनमदबल कपेजतपइनजपवदद्ध मान लें दिया गया असतत बंटन निम्नलिख्िात हैः ग रू ग1ए ग2ए ग3 एण् ण् ण् ए गद िरू 1िए 2िए एण् ण् ण् ए ि3िद 1 द 2इस बंटन के लिए मानक विचलन σत्र ∑ पि ;गप − गद्ध ए ण्ण्ण् ;2द्धछ पत्र1 द जहाँ छ त्र∑पि ण् पत्र1 आइए निम्नलिख्िात उदाहरण लें। उदाहरण 9 निम्नलिख्िात आँकड़ों के लिए प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात कीजिएः गप 4 8 11 17 20 24 32 पि 3 5 9 5 4 3 1 हल आँकड़ों को सारणी के रूप में लिखने पर हमें निम्नलिख्िात सारणी 15.8 प्राप्त होती हैः सारणी 15ण्8 गप पि पिगप गप दृ ग द्ध2; गगप− पि द्ध2; गगप − 4 3 12 दृ10 100 300 8 5 40 दृ6 36 180 11 9 99 दृ3 9 81 17 5 85 3 9 45 20 4 80 6 36 144 24 3 72 10 100 300 32 1 32 18 324 324 30 420 1374 77 ∑गि त्र420ए ∑;िग −गद्ध2 त्र1374 छ त्र 30ए पप पप पत्र1 पत्र1 7 गि∑पप 1इसलिए पत्र1गत्र त्र×420 त्र14 छ 30 17 2 अत प्रसरण ;σ2द्ध त्र ∑पि;गप− गद्धछ पत्र1 1 त्र × 1374 त्र 45ण्830आरैमानक विचलन σत्र45ण्8 त्र 6ण्77 15ण्5ण्3 एक सतत बारंबारता बंटन का मानक विचलन ;ैजंदकंतक कमअपंजपवद व िं बवदजपदनवने तिमुनमदबल कपेजतपइनजपवदद्ध दिए गए सतत बारंबारता बंटन के सभी वगो± के मध्य मान लेकर उसे असतत बारंबारता बंटन में निरूपित कर सकते हैं। तब असतत बारंबारता बंटन के लिए अपनाइर् गइर् विध्ि द्वारा मानक विचलन ज्ञात किया जाता है। यदि एक दवगो± वाला बारंबारता बंटन जिसमें प्रत्येक अंतराल उसके मध्यमान गतथा बारंबारतापएिद्वारा परिभाष्िात किया गया है, तब मानक विचलन निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा प्राप्त किया जाएगाःप1∑ द प;प− गद्ध2 एσत्र गि छपत्र1 द जहाँ ग, बंटन का माध्य है और छत्र∑ पिण् पत्र1 मानक विचलन के लिए अन्य सूत्रा हमें ज्ञात है कि 1 द 1 द 22प्रसरण 2 त्र ∑ पि;गप− गद्धत्र ∑ पि;गप़ ग− 2गगपद्ध;द्ध 2σछ छपत्र1 पत्र1 द दद1⎡ 22 ⎤ ⎢∑ पिपग़∑गपि−∑2गपिपग⎥त्र छ⎣ पत्र1 पत्र1 पत्र1 ⎦ द दद1⎡ 22 ⎤गि़ गि 2ग गित्र छ ⎢∑ पप ∑ प ∑ पप ⎥⎣ पत्र1 पत्र1 पत्र1 ⎦ द ⎡ 1दद ⎤1⎡ 2 ⎤ त्र ़ि छ2ण्ग ⎢जहाँ ∑गपपत्रि गया गत्रि छग⎢∑ पपग ग − छग⎥ छ ∑ पप ⎥ छ ⎣ पत्र1 पत्र1 ⎦⎣ पत्र1 ⎦ दद11 222 22गि़ ग − 2ग त्र गि− गत्र छ ∑ पप छ∑ पप पत्र1 पत्र1 ⎛ द ⎞2 गि 2द ⎜∑ पप⎟⎡ दद ⎤12 पत्र112 ⎛⎞या σ2त्र गि−⎜ ⎟त्र⎢छ गि−⎜ गि ⎥∑ पप 2 ∑ पप ∑ पप ⎟छप−1 ⎜ छ ⎟ छ⎢ पत्र1 ⎝ पत्र1 ⎠⎥⎣ ⎦⎜⎟⎝⎠ 12 ⎛⎞2 अतः मानक विचलन σ त्रछ∑ द गि −∑ द गि ण्ण्ण् ;3द्धपप ⎜ पप ⎟छ प−1 ⎝ पत्र1 ⎠ उदाहरण 10 निम्नलिख्िात बंटन के लिए माध्य, प्रसरण और मानक विचलन ज्ञात कीजिएः वगर् 30.40 40.50 50.60 60.70 70.80 80.90 90.100 बारंबारता 3 7 12 15 8 3 2 हल दिए गए आँकड़ों से निम्नलिख्िात सारणी 15.9 बनाते हैं। सारणी 15ण्9 वगर् बारंबारता ;पिद्ध मध्य - बिंदु ;गपद्ध पिगप ;गप दृ गद्ध2 पि;गप दृ गद्ध2 30.40 40.50 50.60 60.70 70.80 80.90 90.100 3 7 12 15 8 3 2 35 45 55 65 75 85 95 105 315 660 975 600 255 190 729 289 49 9 169 529 1089 2187 2023 588 135 1352 1587 2178 50 3100 10050 1 7 3100 ग ∑ गि त्रत्र 62अतः माध्य;द्ध त्र पपछ पत्र1 50 ;िग − गद्धप्रसरण ;σ2द्ध त्र छ1 ∑ 7 पप 2 पत्र1 1 त्र ×10050 त्र 20150 आरैमानक विचलन σ त्र 201 त्र 14ण्18 उदाहरण 11 निम्नलिख्िात आँकड़ों के लिए मानक विचलन ज्ञात कीजिएः हल हम आँकड़ों से निम्नलिख्िात सारणी 15.10 बनाते हैंः सारणी 15ण्10 2गगप पि पिगप प पिगप 2 3 7 21 9 63 8 10 80 64 640 13 15 195 169 2535 18 10 180 324 3240 23 6 138 529 317448614 9652 अब सूत्रा ;3द्ध द्वारा 12 द्ध2छ गि− गिσ त्रछ ∑ पप ;∑ पप 12 त्र 48 × 9652 − ;614द्ध 48 1 त्र 463296 − 376996 48 1 त्र ×293 77 ण् त्र 6ण्1248 इसलिए, मानक विचलन σ त्र 6ण्12 15ण्5ण्4ण् प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात करने के लिए लघु विध्ि ;ैीवतजबनज उमजीवक जव पिदक अंतपंदबम ंदक ेजंदकंतक कमअपंजपवदद्ध कभी - कभी एक बारंबारता बंटन के प्रेक्षणों गपअथवा विभ्िान्न वगो± के मध्यमान गके मान बहुत बड़े होते हैं तो माध्य तथा प्रसरण ज्ञात करना कठिन होपजाता है तथा अध्िक समय लेता है। ऐसे बारंबारता बंटन, जिसमें वगर् - अंतराल समान हों, के लिए पद विचलन विध्ि द्वारा इस प्रिया को सरल बनाया जा सकता है। 1 मान लीजिए कि कल्िपत माध्य ष्।ष् है और मापक या पैमाने को गुना छोटा किया गया हैी ;यहाँ ीवगर् अंतराल हैद्ध। मान लें कि पद विचलन या नया चर लहै।पगप − ।अथार्त् ल त्र या गप त्र । ़ ीलप ण्ण्ण् ;1द्धपी द गि∑ पप पत्र1हम जानते हैं कि गत्र ण्ण्ण् ;2द्धछ ;1द्ध से गको ;2द्ध में रखने पर हमें प्राप्त होता हैपद ∑ पि;। ़ ीलपद्ध ग त्र पत्र1 छ दद दद1 ⎛⎞ 1 ⎛ ⎞।ि ़ ीलि । ि़ ी लि त्र ⎜∑ प ∑ पप⎟ त्र ⎜∑ प ∑ पप ⎟छ ⎝ पत्र1 पत्र1 ⎠ छ ⎝ पत्र1 पत्र1 ⎠ द लि∑ पप ⎛ ⎞ त्रछ पत्र1 ⎜ क्योंकि ∑ द पि त्र छ ⎟। ण् ़ ी ⎝ पत्र1 ⎠छछ अतः गत्र। ़ ील ण्ण्ण् ;3द्ध अब, चर गका प्रसरण, σ ग 2 त्र 1 ∑ द पि;गप− गद्ध2 छ पत्र1 1 द त्र ∑ पि;। ़ ीलप− । − ीलद्ध2 ख्;1द्ध और ;3द्ध द्वारा,छ प त्र1 द12 2 त्र ∑ पिीलप− लद्ध;छ पत्र1 2 दी त्र ∑ पि;लप− लद्ध2 त्र ी2 चर लका प्रसरणछ पपत्र1 अथार्त् σ ग 2त्र ी2σ ल 2 या σ ग त्र ीσ ल ण्ण्ण् ;4द्ध ;3द्ध और ;4द्धए से हमें प्राप्त होता है कि ीद 2 ⎛ द ⎞2 σ ग त्रछ छ∑ पिपल−⎜∑ पिपल⎟ ण्ण्ण् ;5द्ध पत्र1 ⎝ पत्र1 ⎠ आइए उदाहरण 11 के आँकड़ों में सूत्रा ;5द्ध के उपयोग द्वारा लघु विध्ि से माध्य, प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात करें। उदाहरण 12 निम्नलिख्िात बंटन के लिए माध्य, प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात कीजिएः वगर् 30.40 40.50 50.60 60.70 70.80 80.90 90.100 बारंबारता 3 7 12 15 8 3 2 हल मान लें कल्िपत माध्य। त्र 65 है। यहाँ ीत्र 10 दिए गए आँकड़ों से निम्नलिख्िात सारणी 15.11 प्राप्त होती है। सारणी 15ण्11 वगर् बारंबारत मध्य - बिंदु लप त्र 65 10 पग− लप 2 पिलप पिलप 2 पि गप 30.40 3 35 दृ 3 9 दृ 9 27 40.50 7 45 दृ 2 4 दृ 14 28 50.60 12 55 दृ 1 1 दृ 12 12 60.70 15 65 0 0 0 0 70.80 8 75 1 1 8 8 80.90 3 85 2 4 6 12 9 0.100 2 95 3 9 6 18 छत्र50 दृ 15 105 ∑ लि 15इसलिए गत्र । ़ पप× ीत्र 65 −× 10 त्र 62 50 50 22 ी ⎡ 22 ⎤प्रसरण σत्र छ∑ लि − ;∑ लिद्ध⎢ पप पप ⎥छ2 ⎣⎦ 10;द्ध2 ⎡ 2 ⎤त्र 50 ×105 −− 15द्ध ;⎢⎣ ⎥⎦;50द्ध2 1 त्र ख्5250 −225, त्र201 25 और मानक विचलन σत्र201 त्र 14ण्18 प्रश्नावली 15ण्2 प्रश्न 1 से 5 तक के आँकड़ों के लिए माध्य व प्रसरण ज्ञात कीजिए।1ण् 6ए 7ए 10ए 12ए 13ए 4ए 8ए 122ण् प्रथम द प्रावृफत संख्याएँ3ण् तीन के प्रथम 10 गुणज6ण् लघु विध्ि द्वारा माध्य व मानक विचलन ज्ञात कीजिए। प्रश्न 7 व 8 में दिए गए बारंबारता बंटन के लिए माध्य व प्रसरण ज्ञात कीजिए।7ण् वगर् 0.30 30.60 60.90 90.120 120.150 150.180 180.210 बारंबारता 2 3 5 10 3 5 2 9ण् लघु विध्ि द्वारा माध्य, प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात कीजिए। 10ण् एक डिशाइन में बनाए गए वृत्तों के व्यास ;मिमी मेंद्ध नीचे दिए गए हैंं। व्यास 33.36 37.40 41.44 45.48 49.52 वृत्तों संख्या 15 17 21 22 25 वृत्तों के व्यासों का मानक विचलन व माध्य व्यास ज्ञात कीजिए। ख् संकेत पहले आँकड़ों को सतत बना लें। वगो± को 32ण्5.36ण्5ए 36ण्5.40ण्5ए 40ण्5.44ण्5ए 44ण्5 . 48ण्5ए 48ण्5 . 52ण्5 लें और पिफर आगे बढ़ें , 15ण्6 बारंबारता बंटनों का विश्लेषण ;।दंसलेपे व िथ्तमुनमदबल क्पेजतपइनजपवदेद्ध इस अध्याय के पूवर् अनुभागों में हमने प्रकीणर्न की वुफछ मापों के बारे में पढ़ा है। माध्य व मानक विचलन की वही इकाइर् होती है जिसमें आँकड़े दिए गए होते हैं। जब हमें दो विभ्िान्न इकाइयों वाले बंटनों की तुलना करनी हो तो केवल प्रकीणर्न की मापों की गणना ही पयार्प्त नहीं होती है अपितु एक ऐसी माप की आवश्यकता होती है जो इकाइर् से स्वतंत्रा हो। इकाइर् से स्वतंत्रा, विचरण की माप को विचरण गुणांक ;बवमपििबपमदज व िअंतपंजपवदद्ध कहते हैं और ब्ण्टण् द्वारा दशार्ते हैं। विचरण गुणांक को निम्नलिख्िात प्रकार से परिभाष्िात करते हैंः σब्ण्टण् त्र×100 ए ग ≠ 0 ग यहाँ σ और ग क्रमशः आँकड़ों के मानक विचलन तथा माध्य हैं। दो शृंखलाओं में विचरण की तुलना के लिए हम प्रत्येक शृंखला का विचरण गुणांक ज्ञात करते हैं। दोनों में से बड़े विचरण गुणांक वाली शृंखला को अध्िक विचरण या बिखराव वाली शृंखला कहते हैं। कम विचरण गुणांक वाली शृंखला को दूसरी से अध्िक संगत ;बवदेपेजमदजद्ध कहते हैं। 15ण्6ण्1 दो समान माध्य वाले बारंबारता बंटनों की तुलना ;ब्वउचंतपेवद व िजूव तिमुनमदबल कपेजतपइनजपवदे ूपजी ेंउम उमंदद्ध मान लें ग1 तथा σ1पहले बंटन के माध्य तथा मानक विचलन हैं और ग2 तथा σ2 दूसरे बंटन वेेफ माध्य और मानक विचलन हैं। तब ब्ण्टण् ;पहला बंटनद्ध त्र σ1 ×100 ग1 σ2 और ब्ण्टण् ;दूसरा बंटनद्ध त्र ×100 ग2 दिया है ग1त्र ग2 त्र ग ;मान लेंद्ध इसलिए ब्ण्टण् ;पहला बंटनद्ध त्र σ1 ×100 ण्ण्ण् ;1द्धग σ और ब्ण्टण् ;दूसरा बंटनद्ध त्र 2 ×100 ण्ण्ण् ;2द्धग ;1द्ध और ;2द्ध से यह स्पष्ट है कि दोनों ब्ण्टण् की तुलना σऔर σके आधर पर ही की जा सकती12 है। अतः हम कह सकते हैं कि समान माध्य वाली शृंखलाओं में से अध्िक मानक विचलन ;या प्रसरणद्ध वाली शृंखला को अध्िक प्रक्षेपित कहा जाता है। साथ ही छोटी मानक विचलन ;या प्रसरणद्ध वाली शृंखला को दूसरी की अपेक्षा अध्िक संगत कहा जाता है। आइए निम्नलिख्िात उदाहरण लें। उदाहरण 13 दो कारखानों। तथा ठ में कमर्चारियों की संख्या और उनके वेतन नीचे दिए गए हैं। ।ठ कमर्चारियों की संख्या 5000 6000 औसत मासिक वेतन 2500 रू 2500 रू वेतनों के बंटन का प्रसरण 81 100 व्यक्ितगत वेतनों में किस कारखाने । अथवा ठ में अध्िक विचरण है? हल कारखाने । में वेतनों के बंटन का प्रसरण ;σ12द्ध त्र 81 इसलिए, कारखाने । में वेतनों के बंटन का मानक विचलन ;σ1द्ध त्र 9 साथ ही कारखाने ठ में वेतनों के बंटन का प्रसरण ;σ22द्ध त्र 100 इसलिए, कारखाने ठ में वेतनों के बंटन का मानक विचलन ;σ2द्ध त्र 10 क्योंकि, दोनों कारखानों में औसत ;माध्यद्ध वेतन समान है अथार्त 2500 रू है, इसलिए बड़े मानक विचलन वाले कारखाने में अध्िक बिखराव या विचलन होगा। अतः कारखाने ठ में व्यक्ितगत वेतनों में अध्िक विचरण है। उदाहरण 14 दो वेतनों का विचरण गुणांक 60 तथा70 है और उनके मानक विचलन क्रमशः 21 और 16 है। उनके माध्य क्या हैं? हल दिया है ब्ण्टण् ;पहला बंटनद्ध त्र 60ए σ त्र 211 ब्ण्टण् ;दूसरा बंटनद्ध त्र 70ए σ त्र 162 मान लें ग1 और ग2 क्रमशः पहली व दूसरी बंटन के माध्य है, तब σ1ब्ण्टण् ;पहला बंटनद्ध त्र × 100ग1 21 21इसलिए 60 त्र ×100 या ग त्र×100 त्र 35 ग1 160 σ 2और ब्ण्टण् ;दूसरी बंटनद्ध त्र ×100ग2 16 16 अथार्त् 70 त्र × 100 या ग2 त्र×100 त्र 22ण्85 ग2 70 अतः ग1त्र 35 और ग2त्र 22.85 उदाहरण 15 कक्षा 11 के एक सेक्शन में छात्रों की ऊँचाइर् तथा भार के लिए निम्नलिख्िात परिकलन किए गए हैंः ऊँचाइर् भार माध्य 162ण्6 सेमी 52ण्36 किग्राप्रसरण 127ण्69 सेमी2 23ण्1361 किग्रा.2 क्या हम कह सकते हैं कि भारों में ऊँचाइर् की तुलना में अध्िक विचरण है? हल विचरणों की तुलना के लिए हमें विचरण गुणांकों की गणना करनी है। दिया है ऊँचाइयों में प्रसरण त्र 127ण्69 सेमी2 इसलिए ऊँचाइयों का मानक विचलन त्र 127ण्69बउ त्र 11ण्3 सेमी पुनः भारों में प्रसरण त्र 23ण्1361 किग्रा.2 इसलिए भारों का मानक विचलन त्र 23ण्1361 किगा्र .त्र 4ण्81 किग्रामानक विचलन अब, ऊँचाइयों का विचरण गुणांक त्र× 100 माध्य 11ण्3 त्र ×100 त्र 6ण्95 162ण्6 ण्आरैभारों का विचरण गुणांक त्र 481 ×100 त्र 9ण्1852 36 ण् स्पष्टतया भारों का विचरण गुणांक ऊँचाइयों के विचरण गुणांक से बड़ा है।इसलिए हम कह सकते हैं कि भारों में ऊँचाइयों की अपेक्षा अध्िक विचरण है। प्रश्नावली 15ण्3 1ण् निम्नलिख्िात आँकड़ों से बताइए कि । या ठ में से किस में अध्िक बिखराव हैः अंक 10.20 20.30 30.40 40.50 50.60 60.70 70.80 समूह । 9 17 32 33 40 10 9 समूह ठ 10 20 30 25 43 15 7 2ण् शेयरोंग् और ल् के नीचे दिए गए मूल्यों से बताइए कि किस के मूल्यों में अध्िक स्िथरता है? 3ण् एक कारखाने की दो पफमो± । और ठए के कमर्चारियों को दिए मासिक वेतन के विश्लेषण का ;पद्ध । और ठ में से कौन सी पफमर् अपने कमर्चारियों को वेतन के रूप में अध्िक राश्िा देती है? ;पपद्ध व्यक्ितगत वेतनों में किस पफमर् । या ठए में अध्िक विचरण हैघ् 4ण् टीम । द्वारा एक सत्रा में खेले गए पुफटबाल मैचों के आँकड़े नीचे दिए गए हैंः टीम ठए द्वारा खेले गए मैचों में बनाए गए गोलों का माध्य 2 प्रति मैच और गोलों का मानक विचलन 1.25 था। किस टीम को अध्िक संगत ;बवदेपेजमदजद्धसमझा जाना चाािहए? 5ण् पचास वनस्पति उत्पादों की लंबाइर् ग ;सेमी मेंद्ध और भार ल ;ग्राम मेंद्ध के योग और वगो± के योग नीचे दिए गए हैंः निम्नलिख्िात परिणाम हैंः पफमर् । पफमर् ठ वेतन पाने वाले कमर्चारियों की संख्या 586 648 मासिक वेतनों का माध्य 5253 रु 5253 रु वेतनों के बंटनों का प्रसरण 100 121 50 50 5050 ∑ गप त्र 212 ए ∑गप 2 त्र 902ण्8 ए ∑ लप त्र 261 ए ∑ लप 2 त्र 1457ण्6 पत्र1 पत्र1 पत्र1 पत्र1 लंबाइर् या भार में किसमें अध्िक विचरण है? विविध् उदाहरण उदाहरण 16 20 प्रेक्षणों का प्रसरण 5 है। यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 2 से गुणा किया गया हो तो प्राप्त प्रेक्षणों का प्रसरण ज्ञात कीजिए। हल मान लीजिए कि प्रेक्षण ग1ए गए ण्ण्ण्ए गऔर ग उनका माध्य है। दिया गया है प्रसरण त्र 5 और220 द त्र 20ण् हम जानते हैं कि 20 20 2121 2प्रसरण σ त्र∑;गप − गद्धए अथार्त् 5 त्र∑;गप − गद्धद 20पत्र1 पत्र1 20 या ∑;गप − गद्ध2 त्र 100 ण्ण्ण् ;1द्ध पत्र1 यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 2 से गुणा किया जाए, तो परिणामी पे्रेक्षण लप ए हैं। 1 स्पष्टतया लप त्र 2गप अथार्त् गप त्र लप2 2020 2011 1 इसलिए ल त्र∑ लप त्र∑2गप त्र 2ण् ∑ गप दपत्र1 20 पत्र1 20 पत्र1 1 अथार्त् ल त्र 2 ग वत ग त्र ल2 गऔर ग के मान ;1द्ध में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है।प 20 20⎛ 11 ⎞2 2∑⎜ लप − ल ⎟त्र100 ए अथार्त् ∑; लप − लद्ध त्र 400 पत्र1 ⎝ 22 ⎠ पत्र1 12×त्रअतः नए पे्रक्षणों का प्रसरण त्र 20 400202 त्र× 5 $टिप्पणी पाठक ध्यान दें कि यदि प्रत्येक प्रेक्षण को ाए से गुणा किया जाए, तो नए बने प्रेक्षणों का प्रसरण, पूवर् प्रसरण का ा2 गुना हो जाता है। उदाहरण 17 पाँच प्रेक्षणों का माध्य 4.4 है तथा उनका प्रसरण 8.24 है। यदि तीन प्रेक्षण 1, 2 तथा 6 हैं, तो अन्य दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए। हल माना शेष दो प्रेक्षण ग तथा ल हैं। इसलिए, शृंखला 1ए 2ए 6ए गए ल है। 126 गलअब, माध्य ग त्र 4ण्4 त्र ़़़़ 5 या 22 त्र 9 ़ ग ़ ल इसलिए ग ़ ल त्र 13 ण्ण्ण् ;1द्ध 15 2साथ ही प्रत्र 8ण्24 त्र ∑;ग −गद्धसरण प दपत्र1 1 2 2222 2 ⎤अथार्त् 8ण्24 त्र ⎣⎡3ण्4 ़2ण्4 ़1ण्6 गल 2 4ण्4 ; गलद्ध2 ;द्ध 4ण्4 ⎦;द्ध;द्ध;द्ध ़़−× ़़× 5 या 41ण्20 त्र 11ण्56 ़ 5ण्76 ़ 2ण्56 ़ ग2 ़ ल2 दृ8ण्8 × 13 ़ 38ण्72 इसलिए ग2 ़ ल2 त्र 97 ण्ण्ण् ;2द्ध लेकिन ;1द्ध सेए हमें प्राप्त होता है ग2 ़ ल2 ़ 2गल त्र 169 ण्ण्ण् ;3द्ध ;2द्ध और ;3द्धए से हमें प्राप्त होता है 2गल त्र 72 ण्ण्ण् ;4द्ध ;2द्ध में से ;4द्धए घटाने पर, ग2 ़ ल2 दृ 2गल त्र 97 दृ 72 अथार्त् ;ग दृ लद्ध2 त्र 25 या ग दृ ल त्र ±5 ण्ण्ण् ;5द्ध अब ;1द्ध और ;5द्ध से, हमें प्राप्त होता है ग त्र 9ए ल त्र 4 जब ग दृ ल त्र 5 या ग त्र 4ए ल त्र 9 जब ग दृ ल त्र दृ 5 अतः शेष दो प्रेक्षण 4 तथा 9 हैं। उदाहरण 18 यदि प्रत्येक प्रेक्षण ग1ए गए ण्ण्ण्एगको ष्ंष्ए से बढ़ाया जाए जहाँ ं एक )णात्मक या2द ध्नात्मक संख्या है, तो दिखाइए कि प्रसरण अपरिवतिर्त रहेगा। हल मान लें प्रेक्षण ग1ए ग2ए ण्ण्ण्एगका माध्य ग है, तो उनका प्रसरणद σ12 त्र 1 ∑ द ;गप − गद्ध2 द्वारा दिया जाता है।द पत्र1 यदि प्रत्येक प्रेक्षण में ं जोड़ा जाए तो नए प्रेक्षण होंगे लप त्र गप ़ ं ण्ण्ण् ;1द्ध मान लीजिए नए प्रेक्षणों का माध्य ल है तब 1 ∑ दल त्र 1 ∑ द ;ग ़ ंद्धल त्र पपददपत्र1 पत्र1 दद द1 ⎡⎤ 1 दं त्र ⎢∑गप ़∑ं⎥ त्र ∑गप ़त्र ग ़ ं द ⎣ पत्र1 पत्र1 ⎦ दपत्र1 द अथार्त् ल त्र ग ़ ं ण्ण्ण् ;2द्ध अतः नए प्रेक्षणों का प्रसरण 1 द 21 द σ22 त्र ∑;लप − लद्धत्र ∑;गप ़ ं − ग − ंद्ध2 ;;1द्ध और ;2द्धके उपयोग सेद्धददपत्र1 पत्र1 1 द 22 त्र ∑;गप − गद्धत्र σ1द पत्र1 अतः नए प्रेक्षणों का प्रसरण वही है जो मूल प्रेक्षणों का था। ध्यान दीजिए कि प्रेक्षणों के किसी समूह में प्रत्येक प्रेक्षण में कोइर् एक संख्या जोड़ने उदाहरण 19 एक विद्याथीर् ने 100 प्रेक्षणों का माध्य 40 और मानक विचलन 5.1 ज्ञात किया, जबकि उसने गलती से प्रेक्षण 40 के स्थान पर 50 ले लिया था। सही माध्य और मानक विचलन क्या है? हल दिया है, प्रेक्षणों की संख्या ;दद्ध त्र 100 गलत माध्य ; ग द्ध त्र 40ए गलत मानक विचलन ;σ द्ध त्र 5ण्1 1 द ग त्र गपहम जानते हैं कि ∑ द पत्र1 100 100 अथार्त् 40 त्र 1 ∑गप या ∑गप त्र 4000100 पत्र1 पत्र1 अथार्त् पे्रक्षणों का गलत योग त्र 4000 अतः पे्रक्षणों का सही योग त्र गलत योग दृ50 ़40 त्र 4000 दृ 50 ़ 40 त्र 3990 सही यागे 3990 इसलिए सही माध्य त्र त्र त्र 39ण्9100 100 दद1 21 ⎛⎞2 साथ ही मानक विचलन σ त्र ∑गप − 2 ⎜∑गप ⎟ द पत्र1 द ⎝पत्र1 ⎠ 1 22∑−गत्र दग ;द्धपद पत्र1 1 22अथार्त् 5ण्1 त्र ×गलत ∑ दग −;40द्ध 100 पत्र1 प द1 या 26ण्01 त्र ×गलत ∑गप 2 दृ 1600100 पत्र1 इसलिए गलत ∑ दग 2 त्र 100 ;26ण्01 ़ 1600द्ध त्र 162601प पत्र1 ग गपअब सही ∑ दप 2त्र गलत ∑ द 2 दृ ;50द्ध2 ़ ;40द्ध2पत्र1 पत्र1 त्र 162601 दृ 2500 ़ 1600 त्र 161701 इसलिए सही मानक विचलन सही ∑ग 2 त्र प− ;सही माध्य द्ध2 द अध्याय 15 पर विविध् प्रश्नावली 1ण् आठ पे्रक्षणों का माध्य तथा प्रसरण क्रमशः 9 और 9.25 हैं। यदि इनमें से छः प्रेक्षण 6, 7, 10, 12, 12 और 13 हैं, तो शेष दो पे्रक्षण ज्ञात कीजिए। 2ण् सात प्रेक्षणों का माध्य तथा प्रसरण क्रमशः 8 तथा 16 हैं। यदि इनमें से पाँच प्रेक्षण 2, 4, 10, 12, 14 हैं तो शेष दो पे्रक्षण ज्ञात कीजिए। 3ण् छः पे्रक्षणों का माध्य तथा मानक विचलन क्रमशः 8 तथा 4 हैं। यदि प्रत्येक पे्रक्षण को तीन से गुणा कर दिया जाए तो परिणामी प्रेक्षणों का माध्य व मानक विचलन ज्ञात कीजिए। 4ण् यदि द प्रेक्षणों ग1ए ग2ए ण्ण्ण्एग का माध्य ग तथा प्रसरण σ2 हैं तो सि( कीजिए कि प्रेक्षणों ंग1एद ंग2ए ंगए ण्ण्ण्ण्ए ंग का माध्य और प्रसरण क्रमशः ंग तथा ं2σ2 ;ं ≠ 0द्ध हैं।3द 5ण् बीस प्रेक्षणों का माध्य तथा मानक विचलन क्रमशः 10 तथा 2 हैं। जाँच करने पर यह पाया गया कि प्रेक्षण 8 गलत है। निम्न में से प्रत्येक का सही माध्य तथा मानक विचलन ज्ञात कीजिए यदि ;पद्ध गलत प्रेक्षण हटा दिया जाए। ;पपद्ध उसे 12 से बदल दिया जाए। 6ण् एक कक्षा के पचास छात्रों द्वारा तीन विषयों गण्िात, भौतिक शास्त्रा व रसायन शास्त्रा मंे प्राप्तांकों का माध्य व मानक विचलन नीचे दिए गए हंैः विषय गण्िात भौतिक रसायन माध्य 42 32 40ण्9 मानक विचलन 12 1520 किस विषय में सबसे अध्िक विचलन है तथा किसमें सबसे कम विचलन है? 7ण् 100 पे्रक्षणों का माध्य और मानक विचलन क्रमशः 20 और 3 हैं। बाद में यह पाया गया कि तीन प्रेक्षण 21, 21 तथा 18 गलत थे। यदि गलत पे्रक्षणों को हटा दिया जाए तो माध्य व मानक विचलन ज्ञात कीजिए। सारांश ऽ प्रकीणर्न की माप आँकड़ों में बिखराव या विचरण की माप। परिसर, चतुथर्क विचलन, माध्य विचलन व मानक विचलन प्रकीणर्न की माप हैं। परिसर त्र अध्िकतम मूल्य - न्यूनतम मूल्य ऽ अवगीर्वृफत आँकड़ों का माध्य विचलन दृ ; गपदृड द्ध; गगद्ध∑ ∑डण्क्ण्; द्ध त्र प ए डण्क्ण् ;डद्ध त्रग द छ जहाँ गत्र माध्य और ड त्र माियका ऽ वगीर्वृफत आँकड़ों का माध्य विचलन गि ग ; गपदृड द्ध; प दृ द्ध∑ प ∑ पि छ त्र ∑ िपगडण्क्ण्; द्ध त्र डण्क्ण् ;डद्ध ए जहत्रँाएछ छ ऽ अवगीर्वृफत आँकड़ों का प्रसरण और मानक विचलन 21 12; −द्ध2 गग द्धत्रσ त्र गि ग ए σत्र ; − द ∑ पप छ ∑ प ऽ असतत बारंबारता बंटन का प्रसरण तथा मानक विचलन 21 212σत्र गि ग ए σत्र गि ग−∑ प; प−द्ध ∑ प; प द्धछ छ ऽ सतत बारंबारता बंटन का प्रसरण तथा मानक विचलन 21 212σ त्र ∑ ;िगग −द्ध ए σत्र छ∑ गि− ;∑ गिद्ध2 पप पपपपछ छ ऽ प्रसरण और मानक विचलन ज्ञात करने की लघु विध्ि 2 ी ⎡ 2 ⎤ ी 22σ त्र छ∑ लि− ;∑ लिद्ध2ए σ छ लि− लि2 ⎢ पप पप ⎥∑ पप ;∑ पपद्धछ ⎣⎦ छ गप− ।जहाँ लप त्र ी ऽ विचरण गुणांक ब्ण्टण् त्रσ×100ए ग≠ 0ण् समान माध्य वाली शृंखलाओं में छोटी मानक विचलन वाली शृंखला अध्िक संगत या कम विचरण वाली होती है। ग ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सांख्ियकी का उद्भव लैटिन शब्द ष्ेजंजनेष् से हुआ है जिसका अथर् एक राजनैतिक राज्य होता है। इससे पता लगता है कि सांख्ियकी मानव सभ्यता जितनी पुरानी है। शायद वषर् 3050 इर्.पूमें यूनान में पहली जनगणना की गइर् थी। भारत में भी लगभग 2000 वषर् पहले प्रशासनिक आँकड़े एकत्रिात करने की वुफशल प्रणाली थी। विशेषतः चंद्रगुप्त मौयर् ;324 - 300 इर्.पू.द्ध के राज्य काल में कौटिल्य ;लगभग 300 इर्.पू.द्धके अथर्शास्त्रा में जन्म और मृत्यु के आँकड़े एकत्रिात करने की प्रणाली का उल्लेख मिला है। अकबर के शासनकाल में किए गये प्रशासनिक सवेर्क्षणों का वणर्न अबुलपफज़ल द्वारा लिख्िात पुस्तक आइने - अकबरी मे दिया गया है। लंदन के केप्टन श्रवीद ळतंनदज ;1620 - 1675द्ध को उनके द्वारा जन्म और मृत्यु की सांख्ियकी के अध्ययन के कारण उन्हें जन्म और मृत्यु संाख्ियकी का जनक माना जाता है। श्रंबवइ ठमतदवनससप ;1654 - 1705द्ध ने 1713 मे प्रकाश्िात अपनी पुस्तक ।ते ब्वदरमबजंदकप में बड़ी संख्याओं के नियम को लिखा है। सांख्ियकी का सै(ांतिक विकास सत्राहवीं शताब्दी के दौरान खेलों और संयोग घटना के सि(ांत के परिचय के साथ हुआ तथा इसके आगे भी विकास जारी रहा। एक अंग्रेश थ्तंदबपे ळंसजवद ;1822 - 1921द्ध ने जीव सांख्ियकी ;ठपवउमजतलद्ध के क्षेत्रा में सांख्ियकी विध्ियों के उपयोग का मागर् प्रशस्त किया। ज्ञंतस च्मंतेवद ;1857 - 1936द्ध ने काइर् वगर् परीक्षण ;ब्ीप ेुनंतम जमेजद्ध तथा इंग्लैंड में सांख्ियकी प्रयोगशाला की स्थापना के साथ सांख्ियकीय अध्ययन के विकास में बहुत योगदान दिया है। ैपत त्वदंसक ंण् थ्पेीमत ;1890 - 1962द्ध जिन्हें आध्ुनिक सांख्ियकी का जनक माना जाता है, ने इसे विभ्िान्न क्षेत्रों जैसे अनुवांश्िाकी, जीव - सांख्ियकी, श्िाक्षा, वृफष्िा आदि में लगाया। कृ ऽ कृ

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Ganit

अध्याय 15

सांख्यिकी (Statistics)

“Statistics may be rightly called the science of averages and their estimates” – A.L.Bowley & A.L. Boddington "

15.1 भूमिका (Introduction)

हम जानते हैं कि सांख्यिकी का सरोकार किसी विशेष उद्देश्य के लिए एकत्रित आँकड़ों से होता है। हम आँकड़ों का विश्लेषण एवं व्याख्या कर उनके बारे में निर्णय लेते हैं। हमने पिछली कक्षाओं में आँकड़ों को आलेखिक एवं सारणीबद्ध रूप में व्यक्त करने की विधियों का अध्ययन किया है। यह निरूपण आँकड़ों के महत्वपूर्ण गुणों एवं विशेषताओं को दर्शाता है। हमने दिए गए आँकड़ों का एक प्रतिनिधिक मान ज्ञात करने की विधियों के बारे में भी अध्ययन किया है। इस मूल्य को केंद्रीय प्रवृत्ति की माप कहते हैं। स्मरण कीजिए कि माध्य (समांतर माध्य), माध्यिका और बहुलक केंद्रीय प्रवृत्ति की तीन माप हैं। केंद्रीय प्रवृत्ति के माप हमें इस बात का आभास दिलाते हैं कि आँकड़े किस स्थान पर केंद्रित हैं किंतु आँकड़ों के समुचित अर्थ विवेचन के लिए हमें यह भी पता होना चाहिए कि आँकड़ों में कितना बिखराव है या वे केंद्रीय प्रवृत्ति की माप के चारों ओर किस प्रकार एकत्रित हैं।

ज्ञंतस च्मंतेवद

(1857-1936 A.D)

दो बल्लेबाजों द्वारा पिछले दस मैचों में बनाए गए रनों पर विचार करें:

बल्लेबाज A : 30, 91, 0, 64, 42, 80, 30, 5, 117, 71

बल्लेबाज B : 53, 46, 48, 50, 53, 53, 58, 60, 57, 52

स्पष्टतया आँकड़ों का माध्य व माध्यिका निम्नलिखित हैं:

Screenshot-2018-6-28 ch-15 pmd - Chapter-15 pdf

स्मरण कीजिए कि हम प्रेक्षणों का माध्य ( द्वारा निरूपित) उनके योग को उनकी संख्या से भाग देकर ज्ञात करते हैं,

अर्थात्

माध्यिका की गणना के लिए आँकड़ों को पहले आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है और फिर निम्नलिखित नियम लगाया जाता है:

यदि प्रेक्षणों की संख्या विषम है तो माध्यिका वाँ प्रेक्षण होती है। यदि प्रेक्षणों की संख्या सम है तो माध्यिका वें और वें प्रेक्षणों का माध्य होती है।

हम पाते हैं कि दोनों बल्लेबाजों A तथा B द्वारा बनाए गए रनों का माध्य व माध्यिका बराबर है अर्थात् 53 है। क्या हम कह सकते हैं कि दोनों बल्लेबाजों का प्रदर्शन समान है? स्पष्टता नहीं। क्योंकि A के रनों में परिवर्तनशीलता 0 (न्यूनतम) से 117 (अधिकतम) तक है। जबकि B के रनों का विस्तार 46 (न्यूनतम) से 60 (अधिकतम) तक है।

आइए अब उपर्युक्त स्कोरों को एक संख्या रेखा पर अंकित करें। हमें नीचे दर्शाई गई आकृतियाँ प्राप्त होती हैं (आकृति 15.1 और 15.2)।

बल्लेबाज A के लिए

आकृति 15.1

बल्लेबाज B के लिए

आकृति 15.2


हम देख सकते हैं कि बल्लेबाज B के संगत बिंदु एक दूसरे के पास-पास हैं और केंद्रीय प्रवृत्ति की माप (माध्य व माध्यिका) के इर्द गिर्द गुच्छित हैं जबकि बल्लेबाज A के संगत बिंदुओं में अधिक बिखराव है या वे अधिक फैले हुए हैं।

अत: दिए गए आँकड़ों के बारे में संपूर्ण सूचना देने के लिए केंद्रीय प्रवृत्ति की माप पर्याप्त नहीं हैं। परिवर्तनशीलता एक अन्य घटक है जिसका अध्ययन सांख्यिकी के अंतर्गत किया जाना चाहिए।

केंद्रीय प्रवृत्ति की माप की तरह ही हमें परिवर्तनशीलता के वर्णन के लिए एकल संख्या चाहिए। इस संख्या को ‘प्रकीर्णन की माप (Measure of dispersion)’ कहा जाता है। इस अध्याय में हम प्रकीर्णन की माप के महत्व व उनकी वर्गीकृत एवं अवर्गीकृत आँकड़ों के लिए गणना की विधियों के बारे में पढ़ेंगे।


15.2 प्रकीर्णन की माप (Measures of dispersion)

अाँकड़ों में प्रकीर्णन या विक्षेपण का माप प्रेक्षणों व वहाँ प्रयुक्त केंद्रीय प्रवृत्ति की माप के आधार पर किया जाता है।

प्रकीर्णन के निम्नलिखित माप हैं:

(i) परिसर (Range) (ii) चतुर्थक विचलन (Quartile deviation) (iii) माध्य विचलन (Mean deviation) (iv) मानक विचलन (Standard deviation).

इस अध्याय में हम, चतुर्थक विचलन के अतिरिक्त अन्य सभी मापों का अध्ययन करेंगे।

15.3 परिसर (Range)

स्मरण कीजिए कि दो बल्लेबाजों A तथा B द्वारा बनाए गए रनों के उदाहरण में हमने स्कोरों में बिखराव, प्रत्येक शृंखला के अधिकतम एवं न्यूनतम रनों के आधार पर विचार किया था। इसमें एकल संख्या ज्ञात करने के लिए हम प्रत्येक शृंखला के अधिकतम व न्यूनतम मूल्यों में अंतर प्राप्त करते हैं। इस अंतर को परिसर कहा जाता है।

बल्लेबाज A के लिए परिसर = 117 – 0 = 117

और बल्लेबाज B, के लिए परिसर = 60 – 46 = 14

स्पष्टतया परिसर A > परिसर B, इसलिए A के स्कोरों में प्रकीर्णन या बिखराव अधिक है जबकि B के स्कोर एक दूसरे के अधिक पास हैं।

अत: एक शृंखला का परिसर = अधिकतम मान न्यूनतम मान

आँकड़ों का परिसर हमें बिखराव या प्रकीर्णन का मोटा-मोटा (rough) ज्ञान देता है, किंतु केंद्रीय प्रवृत्ति की माप, विचरण के बारे में कुछ नहीं बताता है। इस उद्देश्य के लिए हमें प्रकीर्णन के अन्य माप की आवश्यकता है। स्पष्टतया इस प्रकार की माप प्रेक्षणों की केंद्रीय प्रवृत्ति से अंतर (या विचलन) पर आधारित होनी चाहिए।

केंद्रीय प्रवृत्ति से प्रेक्षणों के अंतर के आधार पर ज्ञात की जाने वाली प्रकीर्णन की महत्वपूर्ण माप माध्य विचलन व मानक विचलन हैं। आइए इन पर विस्तार से चर्चा करें।

15.4 माध्य विचलन (Mean deviation)

याद कीजिए कि प्रेक्षण x का स्थिर मान a से अंतर (x a) प्रेक्षण x का a से विचलन कहलाता है। प्रेक्षण x का केंद्रीय मूल्य 'a' से प्रकीर्णन ज्ञात करने के लिए हम a से विचलन प्राप्त करते हैं। इन विचलनों का माध्य प्रकीर्णन की निरपेक्ष माप होता है। माध्य ज्ञात करने के लिए हमें विचलनों का योग प्राप्त करना चाहिए, किंतु हम जानते हैं कि केंद्रीय प्रवृत्ति की माप प्रेक्षणों के समुच्चय की
अधिकतम तथा न्यूनतम मूल्यों के मध्य स्थित होता है। इसलिए कुछ विचलन ऋणात्मक तथा कुछ धनात्मक होंगे। अत: विचलनों का योग शून्य हो सकता है। इसके अतिरिक्त माध्य 
 से विचलनों का योग शून्य होता है।

अत: माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने का कोई औचित्य नहीं है।

स्मरण कीजिए कि प्रकीर्णन की उपर्युक्त माप ज्ञात करने के लिए हमें प्रत्येक मान की केंद्रीय प्रवृत्ति की माप या किसी स्थिर संख्या 'a' से दूरी ज्ञात करनी होती है। याद कीजिए कि किन्हीं दो संख्याओं के अंतर का निरपेक्ष मान उन संख्याओं द्वारा संख्या रेखा पर व्यक्त बिंदुओं के बीच की दूरी को दर्शाता है। अत: स्थिर संख्या 'a' से विचलनों के निरपेक्ष मानों का माध्य ज्ञात करते हैं। इस माध्य को ‘माध्य विचलन’ कहते हैं। अत: केंद्रीय प्रवृत्ति 'a' के सापेक्ष माध्य विचलन प्रेक्षणों का 'a' से विचलनों के निरपेक्ष मानों का माध्य होता है। 'a' के सापेक्ष माध्य विचलन को M.D. (a) द्वारा प्रकट किया जाता है।

M.D. (a)

टिप्पणी माध्य विचलन केंद्रीय प्रवृत्ति की किसी भी माप से ज्ञात किया जा सकता है। किंतु सांख्यिकीय अध्ययन में सामान्यत: माध्य और माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन का उपयोग किया जाता है।

15.4.1 अवर्गीकृत आँकडों के लिए माध्य विचलन (Mean deviation for ungrouped data) 

मान लीजिए कि n प्रेक्षणों के आँकड़े x1, x2, x3, ..., xn दिए गए हैं। माध्य या माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन की गणना में निम्नलिखित चरण प्रयुक्त होते हैं:

चरण-1 उस केंद्रीय प्रवृत्ति की माप को ज्ञात कीजिए जिससे हमें माध्य विचलन प्राप्त करना है। मान लीजिए यह a है।

चरण-2 प्रत्येक प्रेक्षण xi का a से विचलन अर्थात् x1 a, x2 a, x3 a,. . . , xn a ज्ञात करें।

चरण-3 विचलनों का निरपेक्ष मान ज्ञात करें अर्थात् यदि विचलनों में ऋण चिह्न लगा है तो उसे हटा दें अर्थात् ज्ञात करें।

चरण-4 विचलनों के निरपेक्ष मानों का माध्य ज्ञात करें। यही माध्य 'a' के सापेक्ष माध्य विचलन है। 

अर्थात् 

अत: M.D. () =जहाँ  = माध्य

तथा M.D. (M) =, जहाँ M = माध्यिका

टिप्पणी इस अध्याय में माध्यिका को चिह्न M द्वारा निरूपित किया गया है जब तक कि अन्यथा नहीं कहा गया हो। आइए अब उपर्युक्त चरणों को समझने के लिए निम्नलिखित
उदाहरण लें:

उदाहरण-1 निम्नलिखित आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए:

6, 7, 10, 12, 13, 4, 8, 12

हल हम क्रमबद्ध आगे बढ़ते हुए निम्नलिखित प्राप्त करते हैं:

चरण 1 दिए गए आँकड़ों का माध्य

 है।

चरण 2 प्रेक्षणों के माध्य से क्रमश: विचलन xi

अर्थात् 6 – 9, 7 – 9, 10 – 9, 12 – 9, 13 – 9, 4 – 9, 8 – 9, 12 – 9 हैं।

या –3, –2, 1, 3, 4, –5, –1, 3 हैं।

चरण 3 विचलनों के निरपेक्ष मान 

3, 2, 1, 3, 4, 5, 1, 3 हैं।

चरण 4 माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन निम्नलिखित है:


= 

= = 2.75

टिप्पणी प्रत्येक बार चरणों को लिखने के स्थान पर हम, चरणों का वर्णन किए बिना ही क्रमानुसार परिकलन कर सकते हैं।

उदाहरण 2 निम्नलिखित आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए:

12, 3, 18, 17, 4, 9, 17, 19, 20, 15, 8, 17, 2, 3, 16, 11, 3, 1, 0, 5

हल हमें दिए गए आँकड़ों का माध्य () ज्ञात करना होगा।

= = 10

माध्य से विचलनों के निरपेक्ष मान अर्थात्इस प्रकार हैं:

2, 7, 8, 7, 6, 1, 7, 9, 10, 5, 2, 7, 8, 7, 6, 1, 7, 9, 10, 5

इसलिए

और eq2

उदाहरण 3 निम्नलिखित आँकड़ों से माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए:

3, 9, 5, 3, 12, 10, 18, 4, 7, 19, 21

हल यहाँ प्रक्षेणों की संख्या 11 है जो विषम है। आँकड़ों को आरोही क्रम में लिखने पर हमें 3, 3, 4, 5, 7, 9, 10, 12, 18, 19, 21 प्राप्त होता है।

अब माध्यिका =वाँ या 6वाँ प्रेक्षण = 9 हैै।

विचलनों का क्रमश: निरपेक्ष मान इस प्रकार से है।

6, 6, 5, 4, 2,0, 1, 3, 9, 10, 12

इसलिए

तथा


15.4.2 वर्गीकृत आँकड़ों के लिए माध्य विचलन (Mean deviation for grouped data)

हम जानते हैं कि आँकड़ों को दो प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है।

(a) असतत बारंबारता बंटन (Discrete frequency distribution)

(b) सतत बारंबारता बंटन (Continuous frequency distribution)

आइए इन दोनों प्रकार के आँकड़ों के लिए माध्य विचलन ज्ञात करने की विधियों पर चर्चा करें।

(a) असतत बारंबारता बंटन मान लीजिए कि दिए गए आँकड़ों में n भिन्न प्रेक्षण x1, x2, ..., xn हैं जिनकी बारंबारताएंँ क्रमश: f1, f2 , ..., fn हैं। इन आँकड़ों को सारणीबद्ध रूप में निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है जिसे असतत बारंबारता बंटन कहते हैं:

x : x1 x2 x3 ... xn

f : f1 f2 f3 ... fn

(i) माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन सर्वप्रथम हम दिए गए आँकड़ों का निम्नलिखित सूत्र द्वारा माध्य  ज्ञात करते हैं:

,

जहाँ   प्रेक्षणों xi का उनकी क्रमश: बारंबारता fi से गुणनफलों का योग प्रकट करता है। तथा बारंबारताओं का योग है।

तब हम प्रेक्षणों xi का माध्य से विचलन ज्ञात करते हैं और उनका निरपेक्ष मान लेते हैं अर्थात सभी i =1,2,..., n के लिए ज्ञात करते हैं।

इसके पश्चात् विचलनों के निरपेक्ष मान का माध्य ज्ञात करते हैं, जोकि माध्य के सापेक्ष वांछित माध्य विचलन है।

अत: =

(ii) माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने के लिए हम दिए गए असतत बारंबारता बंटन की माध्यिका ज्ञात करते हैं। इसके लिए प्रेक्षणों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करते हैं। इसके  पश्चात् संचयी बांरबारताएँ ज्ञात की जाती हैं। तब उस प्रेक्षण का
निर्धारण करते हैं जिसकी संचयी बांरबारता 
, के समान या इससे थोड़ी अधिक है। यहाँ बारंबारताओं का योग N से दर्शाया गया है। प्रेक्षणों का यह मान आँकड़ों के मध्य स्थित होता है इसलिए यह अपेक्षित माध्यिका है। माध्यिका ज्ञात करने के बाद हम माध्यिका से विचलनों के निरपेक्ष मानों का माध्य ज्ञात करते हैं। इस प्रकार

उदाहरण 4 निम्नलिखित आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए:

294

हल आइए दिए गए आँकड़ों की सारणी 15.1 बनाकर अन्य स्तंभ परिकलन के बाद लगाएँ

सारणी 15.1

295

eq1

इसलिए 

और

उदाहरण 5 निम्नलिखित आँकड़ों के लिए माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए:

296

हल दिए गए आँकड़े पहले ही आरोही क्रम में हैं। इन आँकड़ों में संगत संचयी बारंबारता की एक कतार और लगाते हैं (सारणी 15.2)।

सारणी 15.2

297

अब, N = 30 है जो सम संख्या है,

इसलिए माध्यिका 15वीं व 16वीं प्रेक्षणों का माध्य है। यह दोनों प्रेक्षण संचयी बारंबारता 18 में स्थित हैं जिसका संगत प्रेक्षण 13 है।


अब माध्यिका से विचलनों का निरपेक्ष मान अर्थात् निम्नलिखित
सारणी 15.3 में दर्शाए गए है

सारणी 15.3

298


fi 


इसलिए M. D. (M) =

= = 4.97

(b) सतत बारंबारता बंटन एक सतत बांरबारता बंटन वह शृंखला होती है जिसमें आँकड़ों को विभिन्न बिना अंतर वाले वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है और उनकी क्रमश: बारंबारता लिखी जाती है।

उदाहरण के लिए 100 छात्रों द्वारा प्राप्ताकों को सतत बांरबारता बंटन में निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किया गया है:

6

(i) माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन एक सतत बांरबारता बंटन के माध्य की गणना के समय हमने यह माना था कि प्रत्येक वर्ग (Class ) की बारंबारता उसके मध्य-बिंदु पर केंद्रित होती है। यहाँ भी हम प्रत्येक वर्ग का मध्य-बिंदु लिखते हैं और असतत बारंबारता बंटन की तरह माध्य विचलन ज्ञात करते हैं।

आइए निम्नलिखित उदाहरण देखें

उदाहरण 6 निम्नलिखित आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए:

299

हल दिए गए आँकड़ों से निम्न सारणी 15.4 बनाते हैं।

सारणी 15.4

300


यहाँ 

इसलिए

और

माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने की लघु विधि हम पद विचलन विधि (Step-deviation method) का प्रयोग करके के कठिन परिकलन से बच सकते हैं। स्मरण कीजिए कि इस विधि में हम आँकड़ों के मध्य या उसके बिल्कुल पास किसी प्रेक्षण को कल्पित माध्य लेते हैं। तब प्रेक्षणों (या विभिन्न वर्गों के मध्य-बिंदुओं) का इस कल्पित माध्य से विचलन ज्ञात करते हैं। यह विचलन संख्या रेखा पर मूल बिंदु (origin) को शून्य से प्रतिस्थापित कर कल्पित माध्य पर ले जाना ही होता है, जैसा कि आकृति 15.3 में दशार्या गया है।

यदि सभी विचलनों में कोई सार्व गुणनखंड (common factor) है तो विचलनों को सरल करने के लिए इन्हें इस सार्व गुणनखंड से भाग देते हैं। इन नए विचलनों को पद विचलन कहते हैं। पद विचलन लेने की प्रक्रिया संख्या रेखा पर पैमाने का परिवर्तन होता है, जैसा कि आकृति 15.4 में दर्शाया गया है।

आकृति 15.3

विचलन और पद विचलन प्रेक्षणों के आकार को छोटा कर देते हैं, जिससे गुणन जैसी गणनाएँ सरल हो जाती हैं। मान लीजिए नया चर हो जाता है, जहाँ aकल्पित माध्य है व h सार्व गुणनखंड है। तब पद विचलन विधि द्वारा निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है:

आकृति 15.4

आइए उदाहरण 6 के आँकड़ों के लिए पद विचलन विधि लगाएँ। हम कल्पित माध्य a = 45 और h = 10, लेते हैं और निम्नलिखित सारणी 15.5 बनाते हैं।

सारणी 15.5

301


इसलिए=



और

टिप्पणी पद विचलन विधि का उपयोग ज्ञात करने के लिए किया जाता है। शेष प्रक्रिया वैसी ही है।

(ii) माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन दिए गए आँकड़ों के लिए माध्यिका से माध्य विचलन ज्ञात करने की प्रक्रिया वैसी ही है जैसी कि हमने माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने के लिए की थी। इसमें विशेष अंतर केवल विचलन लेने के समय माध्य के स्थान पर माध्यिका लेने में होता है।

आइए सतत बारंबारता बटंन के लिए माध्यिका ज्ञात करने की प्रक्रिया का स्मरण करें। आँकड़ों को पहले आरोही क्रम में व्यवस्थित करते हैं। तब सतत बारंबारता बंटन की माध्यिका ज्ञात करने के लिए पहले उस वर्ग को निर्धारित करते हैं जिसमें माध्यिका स्थित होती है (इस वर्ग को माध्यिका वर्ग कहते हैं) और तब εनम्नलिखि्ात सूत्र लगाते हैं:

जहाँ माध्यिका वर्ग वह वर्ग है जिसकी संचयी बारंबारता के बराबर या उससे थोड़ी अधिक हो, बांरबारताओं का योग N , माध्यिका वर्ग की निम्न सीमा l, माध्यिका वर्ग की बांरबारता,f , माध्यिका वर्ग से सटीक पहले वाले वर्ग की संचयी बारंबारता C और माध्यिका वर्ग का विस्तार h है। माध्यिका ज्ञात करने के पश्चात् प्रत्येक वर्ग के मध्य-बिंदुओं xi का माध्यिका से विचलनों का निरपेक्ष मान अर्थात् प्राप्त करते हैं।

तब

इस प्रक्रिया को निम्नलिखित उदाहरण से स्पष्ट किया गया है:

उदाहरण 7 निम्नलिखित आँकड़ों के लिए माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए।

302

हल दिए गए आँकड़ों से निम्न सारणी 15.6 बनाते हैं:

सारणी 15.6

303ेेेेेेे


यहाँ N = 50, इसलिए वीं या 25वीं मद 20-30 वर्ग में हैं। इसलिए 20-30 माध्यिका वर्ग है। हम जानते हैं कि

माध्यिका

यहाँ l = 20, C=13, f = 15, h = 10 और N = 50

इसलिए, माध्यिका eq3= 20 + 8 = 28

अत:, माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन

M.D. (M) =eq4 = 10.16 है।

प्रश्नावली 15.1

प्रश्न 1 व 2 में दिए गए आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए।

1. 4, 7, 8, 9, 10, 12, 13, 17

2. 38, 70, 48, 40, 42, 55, 63, 46, 54, 44

प्रश्न 3 व 4 के आँकड़ों के लिए माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए।

3. 13, 17, 16, 14, 11, 13, 10, 16, 11, 18, 12, 17

4. 36, 72, 46, 42, 60, 45, 53, 46, 51, 49

प्रश्न 5 व 6 के आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए।

5. 304

6. 13

प्रश्न 7 व 8 के आँकड़ों के लिए माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए।

7.305

8.306

प्रश्न 9 व 10 के आँकड़ों के लिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए।

9.307

10. 17

11. निम्नलिखित आँकड़ों के लिए माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात कीजिए:

308

12. नीचे दिए गए 100 व्यक्तियों की आयु के बंटन की माध्यिका आयु के सापेक्ष माध्य विचलन की गणना कीजिए:

309

[संकेत प्रत्येक वर्ग की निम्न सीमा में से 0.5 घटा कर व उसकी उच्च सीमा में 0.5 जोड़ कर दिए गए आँकड़ों को सतत बारंबारता बंटन में बदलिए]


15.4.3 माध्य विचलन की परिसीमाएँ (Limitations of mean deviation) 

बहुत अधिक विचरण या बिखराव वाली शृंखलाओं में माध्यिका केंद्रीय प्रवृत्ति की उपयुक्त माप नहीं होती है। अत: इस दशा में माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन पर पूरी तरह विश्वास नहीं किया जा सकता है।

माध्य से विचलनों का योग (ऋण चिह्न को छोड़कर) माध्यिका से विचलनों के योग से अधिक होता है। इसलिए माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन अधिक वैज्ञानिक नहीं है। अत: कई दशाओं में माध्य विचलन असंतोषजनक परिणाम दे सकता है। साथ ही माध्य विचलन को विचलनों के निरपेक्ष मान पर ज्ञात किया जाता है। इसलिए यह और बीजगणितीय गणनाओं के योग्य नहीं होता है। इसका अभिप्राय है कि हमें प्रकीर्णन की अन्य माप की आवश्यकता है। मानक विचलन प्रकीर्णन की एेसी ही
एक माप है।


15.5 प्रसरण और मानक विचलन (Variance and Standard Deviation)

याद कीजिए  कि केंद्रीय प्रवृत्ति की माप के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने के लिए हमने विचलनों के निरपेक्ष मानों का योग किया था। एेसा माध्य विचलन को सार्थक बनाने के लिए किया था, अन्यथा विचलनों का योग शून्य हो जाता है।

विचलनों के चिह्नों के कारण उत्पन्न इस समस्या को विचलनों के वर्ग लेकर भी दूर किया जा सकता है। निसंदेह यह स्पष्ट है कि विचलनों के यह वर्ग ऋणेतर होते हैं।

माना x1, x2, x3, ..., xn , n Ρेक्षण हैं तथा  उनका माध्य है। तब

.

यदि यह योग शून्य हो तो प्रत्येक शून्य हो जाएगा। इसका अर्थ है कि किसी प्रकार का विचरण नहीं है क्योंकि तब सभी प्रेक्षणके बराबर हो जाते हैं। यदि छोटा है तो यह इंगित करता है कि प्रेक्षण x1, x2, x3,...,xn, माध्य  के निकट हैं तथा प्रेक्षणों का माध्य के सापेक्ष विचरण कम है । इसके विपरीत यदि यह योग बड़ा है तो प्रेक्षणों का माध्य के सापेक्ष विचरण अधिक है। क्या हम कह सकते हैं कि योग सभी प्रेक्षणों का माध्य के सापेक्ष प्रकीर्णन या विचरण की माप का एक संतोषजनक प्रतीक है?

आइए इसके लिए छ: प्रेक्षणों 5, 15, 25, 35, 45, 55 का एक समुच्चय A लेते हैं। इन प्रेक्षणों का माध्य 30 है। इस समुच्चय में से विचलनों के वर्ग का योग निम्नलिखित है: = (5–30)2 + (15–30)2 + (25–30)2 + (35–30)2 + (45–30)2 +(55–30)2

= 625 + 225 + 25 + 25 + 225 + 625 = 1750

एक अन्य समुच्चय B लेते हैं जिसके 31 प्रेक्षण निम्नलिखित हैं:

15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29, 30, 31, 32, 33, 34, 35, 36, 37, 38, 39, 40, 41, 42, 43, 44, 45.

इन प्रेक्षणों का माध्य = 30 है।

दोनों समुच्चयों A तथा B के माध्य 30 है।

समुच्चय B के प्रेक्षणों के विचलनों के वर्गों का योग निम्नलिखित है।

= (15–30)2 +(16–30)2 + (17–30)2 + ...+ (44–30)2 +(45–30)2

= (–15)2 +(–14)2 + ...+ (–1)2 + 02 + 12 + 22 + 32 + ...+ 142 + 152

= 2 [152 + 142 + ... + 12]

 = 5 ञ् 16 ञ् 31 = 2480

(क्योंकि प्रथम n प्राकृत संख्याओं के वर्गों का योग होता है, यहाँ n = 15 है)

यदि ही माध्य के सापेक्ष प्रकीर्णन की माप हो तो हम कहने के लिए प्रेरित होंगे कि 31 प्रेक्षणों के समुच्चय B का, 6 प्रेक्षणों वाले समुच्चय A की अपेक्षा माध्य के सापेक्ष अधिक प्रकीर्णन है यद्यपि समुच्चय A में 6 प्रेक्षणों का माध्यके सापेक्ष बिखराव (विचलनों का परिसर -25 से 25 है) समुच्चय B की अपेक्षा (विचलनों का परिसर -15 से 15 है) अधिक है। यह नीचे दिए गए चित्रों से भी स्पष्ट है:

समुच्चय A, के लिए हम आकृति 15.5 पाते हैं।

आकृति 15.5

समुच्चय B, के लिए आकृति 15.6 हम पाते हैं


आकृति 15.6

अत: हम कह सकते हैं कि माध्य से विचलनों के वर्गों का योग प्रकीर्णन की उपयुक्त माप नहीं है। इस कठिनाई को दूर करने के लिए हम विचलनों के वर्गों का माध्य लें अर्थात् हम. लें। समुच्चय A, के लिए हम पाते हैं,

माध्य × 1750 = 291.6 है और समुच्चय B, के लिए यह eq5× 2480 = 80 है।

यह इंगित करता है कि समुच्चय A में बिखराव या विचरण समुच्चय B की अपेक्षा अधिक है जो दोनों समुच्चयों के अपेक्षित परिणाम व ज्याεमतिय निरूपण से मेल खाता है।

अत: हम को प्रकीर्णन की उपयुक्त माप के रूप में ले सकते हैं। यह संख्या अर्थात् माध्य से विचलनों के वर्गों का माध्य प्रसरण (variance) कहलाता है और (सिगमा का वर्ग पढ़ा जाता है) से दर्शाते हैं।

अत: n प्रेक्षणों x1, x2,..., xn का प्रसरण

है।


15.5.1 मानक विचलन (Standard Deviation)

प्रसरण की गणना में हम पाते हैं कि व्यक्तिगत प्रेक्षणों xi तथा की इकाई प्रसरण की इकाई से भिन्न है, क्योंकि प्रसरण में (xi) के वर्गों का समावेश है, इसी कारण प्रसरण के धनात्मक वर्गमूल को प्रेक्षणों का माध्य के सापेक्ष प्रकीर्णन की यथोचित माप के रूप में व्यक्त किया जाता है और उसे मानक विचलन कहते हैं। मानक विचलन को सामान्यत: σ, द्वारा प्रदर्शित εकया जाता है तथा निम्नलिखित प्रकार से दिया जाता है:

      ... (1)

आइए अवर्गीकृत आँकड़ों का प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात करने के लिए कुछ उदाहरण
लेते हैं।

उदाहरण 8 निम्नलिखित अाँकड़ों के लिए प्रसरण तथा मानक विचलन ज्ञात कीजिए:

6, 8, 10, 12, 14, 16, 18, 20, 22, 24

हल दिए गए आँकड़ों को निम्नलिखित प्रकार से सारणी 15.7 में लिख सकते हैं। माध्य को पद विचलन विधि द्वारा 14 को कल्पित माध्य लेकर ज्ञात किया गया है। प्रेक्षणों की संख्या n = 10 है।

सारणी 15.7

310


इसलिए, माध्य= कल्पित माध्य

=

और प्रसरण σ2 ==33

अत: मानक विचलन σ == 5.74


15.5.2 एक असतत बारंबारता बंटन का मानक विचलन (Standard deviation of a discrete frequency distribution) 

मान लें दिया गया असतत बंटन निम्नलिखित है:

x : x1, x2, x3 ,. . . , xn

f : f1, f2, f3 ,. . . , fn

इस बंटन के लिए मानक विचलन ए ... (2)

जहाँ.

आइए निम्नलिखित उदाहरण लें।

उदाहरण 9 निम्नलिखित आँकड़ों के लिए प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात कीजिए:

311

हल आँकड़ों को सारणी के रूप में लिखने पर हमें निम्नलिखित सारणी 15.8 प्राप्त होती है:

सारणी 15.8

22


N = 30, 

इसलिए 

अत प्रसरण =

=ञ् 1374 = 45.8

और मानक विचलन = 6.77


15.5.3 एक सतत बारंबारता बंटन का मानक विचलन (Standard deviation of a continuous frequency distribution) 

 दिए गए सतत बारंबारता बंटन के सभी वर्गों के मध्य मान लेकर उसे असतत बारंबारताबंटन में निरूपित कर सकते हैं। तब असतत बारंबारता बंटन के लिए अपनाई गई विधि द्वारा मानक विचलन ज्ञात किया जाता है।

यदि एक n वर्गों वाला बारंबारता बंटन जिसमें प्रत्येक अंतराल उसके मध्यमान xi तथा बारंबारता fi, द्वारा परिभाषित किया गया है, तब मानक विचलन निम्नलिखित सूत्र द्वारा प्राप्त किया जाएगा:

,

जहाँ, बंटन का माध्य है और .

मानक विचलन के लिए अन्य सूत्र हमें ज्ञात है कि

प्रसरण ==

=

=

=

 

या =

अत: मानक विचलन σ = ... (3)

उदाहरण 10 निम्नलिखित बंटन के लिए माध्य, प्रसरण और मानक विचलन ज्ञात कीजिए:

varg

हल दिए गए आँकड़ों से निम्नलिखित सारणी 15.9 बनाते हैं।

सारणी 15.9

312

अत: माध्य ()=

प्रसरण (σ2) =

= = 201

और मानक विचलन σ == 14.18

उदाहरण 11 निम्नलिखित आँकड़ों के लिए मानक विचलन ज्ञात कीजिए:

313

हल हम आँकड़ों से निम्नलिखित सारणी 15.10 बनाते हैं:

सारणी 15.10

314

अब सूत्र (3) द्वारा

=

=

=

== 6.12

इसलिए, मानक विचलन σ = 6.12

15.5.4. प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात करने के लिए लघु विधि (Shortcut method to find variance and standard deviation) कभी-कभी एक बारंबारता बंटन के प्रेक्षणों xi अथवा विभिन्न वर्गों के मध्यमान xi के मान बहुत बड़े होते हैं तो माध्य तथा प्रसरण ज्ञात करना कठिन हो जाता है तथा अधिक समय लेता है। एेसे बारंबारता बंटन, जिसमें वर्ग-अंतराल समान हों, के लिए पद विचलन विधि द्वारा इस प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकता है।

मान लीजिए कि कल्पित माध्य ‘A’ है और मापक या पैमाने को गुना छोटा किया गया है (यहाँ h वर्ग अंतराल है)। मान लें कि पद विचलन या नया चर yi है।

अर्थात् या xi = A + hyi ... (1)

हम जानते हैं कि ... (2)

(1) से xi को (2) में रखने पर हमें प्राप्त होता है

=

=

=

अत:= A + h ... (3)

अब, चर x का प्रसरण, 

= [(1) और (3) द्वारा]

=

== h2 चर yi का प्रसरण

अर्थात्=

या= ... (4)

(3) और (4), से हमें प्राप्त होता है कि

=              ... (5)

आइए उदाहरण 11 के आँकड़ों में सूत्र (5) के उपयोग द्वारा लघु विधि से माध्य, प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात करें।

उदाहरण 12 निम्नलिखित बंटन के लिए माध्य, प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात कीजिए:

315

हल मान लें कल्पित माध्य A = 65 है। यहाँ h = 10

दिए गए आँकड़ों से निम्नलिखित सारणी 15.11 प्राप्त होती है।

सारणी 15.11

27

इसलिए 

प्रसरण

=

=

और मानक विचलन  = 14.18

प्रश्नावली 15.2

प्रश्न 1 से 5 तक के आँकड़ों के लिए माध्य व प्रसरण ज्ञात कीजिए।

1. 6, 7, 10, 12, 13, 4, 8, 12

2. प्रथम n प्राकृत संख्याएँ

3. तीन के प्रथम 10 गुणज

316

6. लघु विधि द्वारा माध्य व मानक विचलन ज्ञात कीजिए।

317

प्रश्न 7 व 8 में दिए गए बारंबारता बंटन के लिए माध्य व प्रसरण ज्ञात कीजिए।

318

9. लघु विधि द्वारा माध्य, प्रसरण व मानक विचलन ज्ञात कीजिए।

319

10. एक डिज़ाइन में बनाए गए वृत्तों के व्यास (मिमी में) नीचे दिए गए हैं।

320

वृत्तों के व्यासों का मानक विचलन व माध्य व्यास ज्ञात कीजिए।

[ संकेत पहले आँकड़ों को सतत बना लें। वर्गों को 32.5-36.5, 36.5-40.5, 40.5-44.5, 44.5 - 48.5, 48.5 - 52.5 लें और फिर आगे बढ़ें ]


15.6 बारंबारता बंटनों का विश्लेषण (Analysis of Frequency Distributions)

इस अध्याय के पूर्व अनुभागों में हमने प्रकीर्णन की कुछ मापों के बारे में पढ़ा है। माध्य व मानक विचलन की वही इकाई होती है जिसमें आँकड़े दिए गए होते हैं। जब हमें दो विभिन्न इकाइयों वाले बंटनों की तुलना करनी हो तो केवल प्रकीर्णन की मापों की गणना ही पर्याप्त नहीं होती है अपितु एक एेसी माप की आवश्यकता होती है जो इकाई से स्वतंत्र हो। इकाई से स्वतंत्र, विचरण की माप को विचरण गुणांक (coefficient of variation) कहते हैं और C.V. द्वारा दर्शाते हैं।

विचरण गुणांक को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित करते हैं:

,

यहाँ σ और क्रमश: आँकड़ों के मानक विचलन तथा माध्य हैं।

दो शृंखलाओं में विचरण की तुलना के लिए हम प्रत्येक शृंखला का विचरण गुणांक ज्ञात करते हैं। दोनों में से बड़े विचरण गुणांक वाली शृंखला को अधिक विचरण या बिखराव वाली शृंखला कहते हैं। कम विचरण गुणांक वाली शृंखला को दूसरी से अधिक संगत (consistent) कहते हैं।


15.6.1 दो समान माध्य वाले बारंबारता बंटनों की तुलना (Comparison of two frequency distributions with same mean) 

मान लेंतथा σ1पहले बंटन के माध्य तथा मानक विचलन हैं और तथा σ2 दूसरे बंटन केे माध्य और मानक विचलन हैं।

तब C.V. (पहला बंटन) =

और C.V. (दूसरा बंटन) = 

दिया है==(मान लें)

इसलिए C.V. (पहला बंटन) =... (1)

और C.V. (दूसरा बंटन) =      ... (2)

(1) और (2) से यह स्पष्ट है कि दोनों C.V. की तुलना σ1 और σ2 के आधार पर ही की जा सकती है। अत: हम कह सकते हैं कि समान माध्य वाली शृंखलाओं में से अधिक मानक विचलन (या प्रसरण) वाली शृंखला को अधिक प्रक्षेपित कहा जाता है। साथ ही छोटी मानक विचलन (या प्रसरण) वाली शृंखला को दूसरी की अपेक्षा अधिक संगत कहा जाता है।

आइए निम्नलिखित उदाहरण लें।

उदाहरण 13 दो कारखानों A तथा B में कर्मचारियों की संख्या और उनके वेतन नीचे दिए गए हैं।

ab

व्यक्तिगत वेतनों में किस कारखाने A अथवा B में अधिक विचरण है?

हल कारखाने A में वेतनों के बंटन का प्रसरण (σ12) = 81

इसलिए, कारखाने A में वेतनों के बंटन का मानक विचलन (σ1) = 9

साथ ही कारखाने B में वेतनों के बंटन का प्रसरण (σ22) = 100

इसलिए, कारखाने B में वेतनों के बंटन का मानक विचलन (σ2) = 10

क्योंकि, दोनों कारखानों में औसत (माध्य) वेतन समान है अर्थात 2500 रु है, इसलिए बड़े मानक विचलन वाले कारखाने में अधिक बिखराव या विचलन होगा। अत: कारखाने B में व्यक्तिगत वेतनों में अधिक विचरण है।

उदाहरण 14 दो वेतनों का विचरण गुणांक 60 तथा 70 है और उनके मानक विचलन क्रमश: 21 और 16 है। उनके माध्य क्या हैं?

हल दिया है C.V. (पहला बंटन) = 60,= 21

C.V. (दूसरा बंटन) = 70,= 16

मान लेंऔर क्रमश: पहली व दूसरी बंटन के माध्य है, तब C.V. (पहला बंटन) =ञ् 100

इसलिए 60 = 

और C.V. (दूसरी बंटन) = ञ्100

अर्थात् 70 =

अत:= 35 और=22.85

उदाहरण 15 कक्षा 11 के एक सेक्शन में छात्रों की ऊँचाई तथा भार के लिए निम्नलिखित परिकलन किए गए हैं:

ऊँचाई भार

माध्य 162.6 सेमी 52.36 किग्रा.

प्रसरण 127.69 सेमी2 23.1361 किग्रा.2

क्या हम कह सकते हैं कि भारों में ऊँचाई की तुलना में अधिक विचरण है?

हल विचरणों की तुलना के लिए हमें विचरण गुणांकों की गणना करनी है।

दिया है ऊँचाइयों में प्रसरण = 127.69 सेमी2

इसलिए ऊँचाइयों का मानक विचलन= 11.3 सेमी

पुन: भारों में प्रसरण = 23.1361 किग्रा.2

इसलिए भारों का मानक विचलन =

 = 4.81 किग्रा.

अब, ऊँचाइयों का विचरण गुणांक= 

=


और भारों का विचरण गुणांक == 9.18

स्पष्टतया भारों का विचरण गुणांक ऊँचाइयों के विचरण गुणांक से बड़ा है।

इसलिए हम कह सकते हैं कि भारों में ऊँचाइयों की अपेक्षा अधिक विचरण है।


प्रश्नावली 15.3

1. निम्नलिखित आँकड़ों से बताइए कि A या B में से किस में अधिक बिखराव है:

321

2. शेयरों X और Y के नीचे दिए गए मूल्यों से बताइए कि किस के मूल्यों में अधिक स्थिरता है?

322

3. एक कारखाने की दो फर्मों A और B, के कर्मचारियों को दिए मासिक वेतन के विश्लेषण का निम्नलिखित परिणाम हैं:

Screenshot-2018-6-28 ch-15 pmd - Chapter-15 pdf(3)

(i) A और B में से कौन सी फर्म अपने कर्मचारियों को वेतन के रूप में अधिक राशि देती है?

(ii) व्यक्तिगत वेतनों में किस फर्म A या B, में अधिक विचरण है?

4. टीम A द्वारा एक सत्र में खेले गए फुटबाल मैचों के आँकड़े नीचे दिए गए हैं:

Screenshot-2018-6-28 ch-15 pmd - Chapter-15 pdf(2)

टीम B, द्वारा खेले गए मैचों में बनाए गए गोलों का माध्य 2 प्रति मैच और गोलों का मानक विचलन 1.25 था। किस टीम को अधिक संगत (consistent)समझा जाना चाεाहए?

5. पचास वनस्पति उत्पादों की लंबाई x (सेमी में) और भार y (ग्राम में) के योग और वर्गों के योग नीचे दिए गए हैं:

', ,

लंबाई या भार में किसमें अधिक विचरण है?


विविध उदाहरण

उदाहरण 16 20 प्रेक्षणों का प्रसरण 5 है। यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 2 से गुणा किया गया हो तो प्राप्त प्रेक्षणों का प्रसरण ज्ञात कीजिए।

हल मान लीजिए कि प्रेक्षण x1, x2, ..., x20 और उनका माध्य है। दिया गया है प्रसरण = 5 और n = 20. हम जानते हैं कि

प्रसरणअर्थात्

याeq6= 100 ... (1)

यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 2 से गुणा किया जाए, तो परिणामी प्रेेक्षण yi , हैं।

स्पष्टतया yi = 2xi अर्थात् xi =

इसलिएeq7

अर्थात्

= 2 or=

xi और­ ­के मान (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है।

, अर्थात्eq8

अत: नए प्रेक्षणों का प्रसरण =

टिप्पणी पाठक ध्यान दें कि यदि प्रत्येक प्रेक्षण को k, से गुणा किया जाए, तो नए बने प्रेक्षणों का प्रसरण, पूर्व प्रसरण का k2 गुना हो जाता है।

उदाहरण 17 पाँच प्रेक्षणों का माध्य 4.4 है तथा उनका प्रसरण 8.24 है। यदि तीन प्रेक्षण 1, 2 तथा 6 हैं, तो अन्य दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।

हल माना शेष दो प्रेक्षण x तथा y हैं।

इसलिए, शृंखला 1, 2, 6, x, y है।

अब, माध्य = 4.4 =

या 22 = 9 + x + y

इसलिए x + y = 13 ... (1)

साथ ही प्रसरण = 8.24 =

अर्थात्

8.24

या 41.20 = 11.56 + 5.76 + 2.56 + x2 + y2 –8.8 × 13 + 38.72

इसलिए x2 + y2 = 97 ... (2)

लेकिन (1) से, हमें प्राप्त होता है

x2 + y2 + 2xy = 169 ... (3)

(2) और (3), से हमें प्राप्त होता है

2xy = 72 ... (4)

(2) में से (4), घटाने पर,

x2 + y2 – 2xy = 97 – 72 अर्थात् (xy)2 = 25

या xy =5 ... (5)

अब (1) और (5) से, हमें प्राप्त होता है

x = 9, y = 4 जब x – y = 5

या x = 4, y = 9 जब x – y = – 5

अत: शेष दो प्रेक्षण 4 था 9 हैं।

उदाहरण 18 यदि प्रत्येक प्रेक्षण x1, x2, ...,xn को ‘a’, से बढ़ाया जाए जहाँ a एक ऋणात्मक या
धनात्मक संख्या है, तो दिखाइए कि प्रसरण अपरिवर्तित रहेगा।

हल मान लें प्रेक्षण x1, x2, ...,xn का माध्य  है, तो उनका प्रसरण

 द्वारा दिया जाता है।

यदि प्रत्येक प्रेक्षण में a जोड़ा जाए तो नए प्रेक्षण होंगे

yi = xi + a ... (1)

मान लीजिए नए प्रेक्षणों का माध्य है तब

=

=

अर्थात्=+ a ... (2)

अत: नए प्रेक्षणों का प्रसरण

= =  ((1) और (2)के उपयोग से)

==

अत: नए प्रेक्षणों का प्रसरण वही है जो मूल प्रेक्षणों का था।

टिप्पणी ध्यान दीजिए कि प्रेक्षणों के किसी समूह में प्रत्येक प्रेक्षण में कोई एक संख्या जोड़ने अथवा घटाने पर प्रसरण अपरिवर्तित रहता है।

उदाहरण 19 एक विद्यार्थी ने 100 प्रेक्षणों का माध्य 40 और मानक विचलन 5.1 ज्ञात किया, जबकि उसने गलती से प्रेक्षण 40 के स्थान पर 50 ले लिया था। सही माध्य और मानक विचलन क्या है?

हल दिया है, प्रेक्षणों की संख्या (n) = 100

गलत माध्य () = 40ए

गलत मानक विचलन () = 5.1

हम जानते हैं कि

अर्थात्या= 4000

अर्थात् प्रेक्षणों का गलत योग = 4000

अत: प्रेक्षणों का सही योग = गलत योग –50 +40

= 4000 – 50 + 40 = 3990

इसलिए सही माध्य == 39.9

साथ ही मानक विचलन σ =

=

अर्थात् 5.1 = 

या  26.01 =– 1600

इसलिए = 100 (26.01 + 1600) = 162601

अब सही  = गलत – (50)2 + (40)2

= 162601 – 2500 + 1600 = 161701

इसलिए सही मानक विचलन

=

=

 =  = 5



अध्याय 15 पर विविध प्रश्नावली

1. आठ प्रेक्षणों का माध्य तथा प्रसरण क्रमश: 9 और 9.25 हैं। यदि इनमें से छ: प्रेक्षण 6, 7, 10, 12, 12 और 13 हैं, तो शेष दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।

2. सात प्रेक्षणों का माध्य तथा प्रसरण क्रमश: 8 तथा 16 हैं। यदि इनमें से पाँच प्रेक्षण 2, 4, 10, 12, 14 हैं तो शेष दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।

3. छ: प्रेक्षणों का माध्य तथा मानक विचलन क्रमश: 8 तथा 4 हैं। यदि प्रत्येक प्रेक्षण को तीन से गुणा कर दिया जाए तो परिणामी प्रेक्षणों का माध्य व मानक विचलन ज्ञात कीजिए।

4. यदि n प्रेक्षणों x1, x2, ...,xn का माध्य तथा प्रसरण σ2 हैं तो सिद्ध कीजिए कि प्रेक्षणों ax1, ax2, ax3, ...., axn का माध्य और प्रसरण क्रमश:  तथा a2σ2 (a 0) हैं।

5. बीस प्रेक्षणों का माध्य तथा मानक विचलन क्रमश: 10 तथा 2 हैं। जाँच करने पर यह पाया गया कि प्रेक्षण 8 गलत है। निम्न में से प्रत्येक का सही माध्य तथा मानक विचलन ज्ञात कीजिए यदि

(i) गलत प्रेक्षण हटा दिया जाए।

(ii) उसे 12 से बदल दिया जाए।

6. एक कक्षा के पचास छात्रों द्वारा तीन विषयों गणित, भौतिक शास्त्र व रसायन शास्त्र में प्राप्तांकों का माध्य व मानक विचलन नीचे दिए गए हैं:

Screenshot-2018-6-28 ch-15 pmd - Chapter-15 pdf(1)

किस विषय में सबसे अधिक विचलन है तथा किसमें सबसे कम विचलन है?

7. 100 प्रेक्षणों का माध्य और मानक विचलन क्रमश: 20 और 3 हैं। बाद में यह पाया गया कि तीन प्रेक्षण 21, 21 तथा 18 गलत थे। यदि गलत प्रेक्षणों को हटा दिया जाए तो माध्य व मानक विचलन ज्ञात कीजिए


सारांश

  • प्रकीर्णन की माप आँकड़ों में बिखराव या विचरण की माप। परिसर, चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन व मानक विचलन प्रकीर्णन की माप हैं।

परिसर = अधिकतम मूल्य - न्यूनतम मूल्य

  • अवर्गीकृत आँकड़ों का माध्य विचलन


जहाँ = माध्य और M = माध्यिका

  • वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य विचलन


  • अवर्गीकृत आँकड़ों का प्रसरण और मानक विचलन


  • असतत बारंबारता बंटन का प्रसरण तथा मानक विचलन


  • सतत बारंबारता बंटन का प्रसरण तथा मानक विचलन


  • प्रसरण और मानक विचलन ज्ञात करने की लघु विधि

ए 

जहाँ 

  • विचरण गुणांक C.V. 
  • समान माध्य वाली शृंखलाओं में छोटी मानक विचलन वाली शृंखला अधिक संगत या कम विचरण वाली होती है।


एेतिहासिक पृष्ठभूमि

सांख्यिकी का उद्भव लैटिन शब्द ‘status’ से हुआ है जिसका अर्थ एक राजनैतिक राज्य होता है। इससे पता लगता है कि सांख्यिकी मानव सभ्यता जितनी पुरानी है। शायद वर्ष 3050 ई.पू. में यूनान में पहली जनगणना की गई थी। भारत में भी लगभग 2000 वर्ष पहले प्रशासनिक आँकड़े एकत्रित करने की कुशल प्रणाली थी। विशेषत: चंद्रगुप्त मौर्य (324-300 ई.पू.) के राज्य काल में कौटिल्य (लगभग 300 ई.पू.)के अर्थशास्त्र में जन्म और मृत्यु के आँकड़े एकत्रित करने की प्रणाली का उल्लेख मिला है। अकबर के शासनकाल में किए गये प्रशासनिक सर्वेक्षणों का वर्णन अबुलफज़ल द्वारा लिखित पुस्तक आइने-अकबरी मे दिया गया है।

लंदन के केप्टन John Graunt (1620-1675) को उनके द्वारा जन्म और मृत्यु की सांख्यिकी के अध्ययन के कारण उन्हें जन्म और मृत्यु सांख्यिकी का जनक माना जाता है। Jacob Bernoulli (1654-1705) ने 1713 मे प्रकाशित अपनी पुस्तक Ars Conjectandi में बड़ी संख्याओं के नियम को लिखा है।

सांख्यिकी का सैद्धांतिक विकास सत्रहवीं शताब्दी के दौरान खेलों और संयोग घटना के सिद्धांत के परिचय के साथ हुआ तथा इसके आगे भी विकास जारी रहा। एक अंग्रे”ा Francis Galton (1822-1921) ने जीव सांख्यिकी (Biometry) के क्षेत्र में सांख्यिकी विधियों के उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया। Karl Pearson (1857-1936) ने काई वर्ग परीक्षण (Chi square test) तथा इंग्लैंड में सांख्यिकी प्रयोगशाला की स्थापना के साथ सांख्यिकीय अध्ययन के विकास में बहुत योगदान दिया है।

Sir Ronald a. Fisher (1890-1962) जिन्हें आधुनिक सांख्यिकी का जनक माना जाता है, ने इसे विभिन्न क्षेत्रों जैसे अनुवांशिकी, जीव-सांख्यिकी, शिक्षा, कृषि आदि में लगाया।

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