™ज्ीमतम ंतम मिू जीपदहे ूीपबी ूम ादवू ूीपबी ंतम दवज बंचंइसम व िउंजीमउंजपबंस तमंेवदपदह ंदक ूीमद जीमेम बंद दवजए पज पे ं ेपहद जींज वनत ादवूसमकहम व िजीमउ पे अमतल ेउंसस ंदक बवदनिेमक ंदक ूीमतम ं उंजीमउंजपबंस तमंेवदपदह बंद इम ींकए पज पे ंे हतमंज ं विससल जव उंाम नेम व िंदवजीमतए ंे जव हतवचम वित ं जीपदह पद जीम कंता ूीमद लवन ींअम ं बंदकसम ेजपबा ेजंदकपदह इल लवनण् दृ ।त्ज्भ्म्छठव्ज् ऽ 14ण्1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध इस अध्याय में हम गण्िातीय विवेचन से संबंध्ित वुफछ मौलिक धारणाओं पर चचार् करेंगे। हमें ज्ञात है कि मनुष्य, अनेकों सहस्त्राब्िदयों में, निम्न स्तर की प्रजातियों से, विकसित हुआ है। मनुष्य में विवेचन करने के गुण ने उसे अन्य प्रजातियों से श्रेष्ठ बनाया है। एक व्यक्ित इस गुण को कितनी अच्छी तरह प्रयोग कर सकता है, उसके विवेचन क्षमता पर निभर्र करता है। इस क्षमता को केसे विकसित किया जाए? यहाँ पर हम विवेचन की प्रिया की चचार् विशेष रूप से गण्िात के संदभर् में करेंगे। गण्िातीय भाषा में विवेचन दो प्रकार के होते हैं - आगमनात्मक ;आगमिकद्ध विवेचन तथा निगमनात्मक ;निगमनिकद्ध विवेचन। गण्िातीय आगमन ;डंजीमउंजपबंस प्दकनबजपवदद्ध के संदभर् ळमवतहम ठववसम ;1815 . 1864 ।ण्क्ण्द्धमें हम आगमनात्मक विवेचन की चचार् पहले कर चुके हैं। इस अध्याय में हम वुफछ मूलभूत निगमनात्मक विवेचन पर चचार् करेंगे। 14.2 कथन ;ैजंजमउमदजेद्ध गण्िातीय विवेचन की मौलिक इकाइर् गण्िातीय कथन की संकल्पना है। हम निम्नलिख्िात दो वाक्यों में प्रारंभ करेंगे। फ्सन् 2003 में भारत की राष्ट्रपति एक महिला थीं।य् फ्किसी हाथी का भार एक मनुष्य के भार से अध्िक होता है।य् इन वाक्यों को पढ़ते ही हम तुरन्त निणर्य ले सकते हैं कि प्रथम वाक्य गलत ;असत्यद्ध तथा दूसरा वाक्य सही ;सत्यद्ध है। इस संबंध् में कोइर् भ्रांति नहीं है। गण्िात में ऐसे वाक्यों को कथन कहते हैं। इसके विपरीत निम्नलिख्िात वाक्य पर विचार कीजिएः फ्महिलाएँ, पुरुषों से अध्िक बुिमान होती हैं।य् वुफछ लोगों के विचार से यह वाक्य सत्य हो सकता है परंतु वुफछ अन्य इससे असहमत हो सकते हैं। इस वाक्य के बारे में हम यह नहीं कह सकते कि यह सत्य या असत्य है। इसका तात्पयर् है कि यह वाक्य द्वयथर्क है। इस प्रकार का वाक्य गण्िात में कथन के रूप में स्वीकायर् नहीं है। ‘एक वाक्य गण्िातानुसार कथन कहलाता है। यदि वह या तो सत्य हो अथवा असत्य हो परंतु दोनों ;सत्य और असत्यद्ध न हो।’ अब जब भी हम कथन का उल्लेख करेंगे हमारा तात्पयर् फ्गण्िातानुसार स्वीकायर्य् कथन से होगा। गण्िात के अध्ययन के दौरान हमें इस प्रकार के अनेक वाक्य मिलते हैं। वुफछ उदाहरण इस प्रकार हैंः दो ध्न दो बराबर चार। दो ध्न संख्याओं का योगपफल ध्न होता है। सभी अभाज्य संख्याएँ विषम संख्याएं होती हैं। इनमें से प्रथम दो वाक्य सत्य हैं और तीसरा वाक्य असत्य है। इन वाक्यों के बारे में कोइर् भी संदिग्धता नहीं है। अतः ये ;वाक्यद्ध कथन हैं। क्या आप किसी ऐसे वाक्य का उदाहरण सोच सकते हैं जो अस्पष्ट हो? निम्नलिख्िात वाक्य पर विचार कीजिएः ग और ल का योगपफल 0 से अध्िक है। यहाँ हम यह सुनिश्िचत नहीं कर सकते कि वाक्य सत्य है अथवा असत्य है, जब तक हमें यह ज्ञात न हो कि ग और ल क्या हैं। उदाहरणाथर्, ग त्र 1ए ल त्र दृ3 के लिए यह असत्य है तथा ग त्र 1ए ल त्र 0 के लिए यह सत्य है। अतः यह वाक्य एक कथन नहीं है। किंतु निम्नलिख्िात वाक्य एक कथन है प्रत्येक प्रावृफत संख्याओं ग और ल का योगपफल 0 से अध्िक है, एक कथन है। अब निम्नलिख्िात वाक्यों पर विचार कीजिएः आहा, कितना सुंदर! द्वार ;दरवाजाद्ध खोलिए। आप कहाँ जा रहे हैं? क्या ये कथन हैं? नहीं, क्योंकि पहला विस्मयादिबोध्क ;विस्मयबोध्कद्ध वाक्य है, दूसरा एक आदेश है तथा तीसरा एक प्रश्न है। गण्िातीय भाषा में इनमें से किसी को भी कथन नहीं माना जाता है। ऐसे वाक्य जिनमें चर ;अनिश्िचतद्ध समय हो जैसे फ्आजय्, फ्कलय् फ्बीता हुआ कलय्, कथन नहीं होते हैं। यह इसलिए कि हमें यह ज्ञात नहीं होता कि किसी समय की चचार् हो रही है। उदाहरणाथर्, वाक्य ‘कल शुक्रवार है।’ एक कथन नहीं है। यह वाक्य किसी बृहस्पतिवार के लिए तो सत्य होगा परंतु अन्य दिनों के लिए सत्य नहीं होगा। यह बात उन वाक्यों के लिए भी लागू होती है जिनमें सवर्नाम का प्रयोग बिना संबंध्ित संज्ञा को बताए किया गया हो और ऐसे वाक्यों के लिए भी जिनमें चर ;अनिश्िचतद्ध स्थानों का प्रयोग किया गया हो, जैसे ‘यहाँ’, ‘वहाँ’ आदि। तात्पयर् यह हुआ कि वाक्य वह गण्िात की एक स्नातक है कश्मीर यहाँ से बहुत दूर है। कथन नहीं है। यहाँ एक अन्य वाक्य पर विचार कीजिएः एक महीने ;माहद्ध में 40 दिन होते हैं। क्या आप इसे एक कथन कहेंगे? नोट कीजिए कि यहाँ पर उल्िलख्िात समय फ्अनिश्िचत ;चरद्धय् है अथार्त्् 12 महीनों में से कोइर् एक। किंतु हमें ज्ञात है कि यह वाक्य सदैव ;महीने का ध्यान किए बिनाद्ध असत्य होता है क्योंकि एक महीने में दिनों की संख्या 31 से अध्िक नहीं हो सकती है। अतः यह वाक्य एक कथन है। इसलिए यह तथ्य कि एक वाक्य या तो सत्य हो या असत्य हो किंतु दोनों न हो सके एक कथन बनाता है। सामान्यतः हम कथनों को छोटे अक्षर चए ुए तए ण्ण्ण् से निरूपित ;निदिर्ष्टद्ध करते हैं उदाहरण के लिए, कथन फ्आग सदैव गमर् होती हैय् को हम च द्वारा दशार्ते हैं। इस बात को निम्नलिख्िात प्रकार से भी दशार्ते हैंः च: आग सदैव गमर् होती है। उदाहरण 1 जाँचिए कि क्या निम्नलिख्िात वाक्य कथन हैं। अपने उत्तर को कारण सहित लिख्िाए। ;पद्ध 8, 6 से कम है। ;पपद्ध प्रत्येक समुच्चय एक परिमित समुच्चय होता है। ;पपपद्ध सूयर् एक तारा है। ;पअद्ध गण्िात एक कौतुक है। ;अद्ध बिना बादल के वषार् नहीं होती। ;अपद्ध यहाँ से चेन्नइर् कितनी दूर है? हल ;पद्ध यह वाक्य असत्य है क्योंकि 8 अध्िक होता है 6 से। अतः यह एक कथन है। ;पपद्ध यह वाक्य भी सदैव असत्य है क्योंकि ऐसे भी समुच्चय हैं जो कि परिमित नहीं होते हैं अतः यह एक कथन है। ;पपपद्ध यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाण्िात है कि सूयर् एक तारा है और इसलिए यह वाक्य सत्य है। अतः यह एक कथन है। ;पअद्ध यह वाक्य व्यक्ितनिष्ठ है क्योंकि जिन्हें गण्िात में रुचि है उनके लिए यह कौतुक हो सकता है किंतु अन्य के लिए ऐसा नहीं हो सकता है। इसका अथर् हुआ कि यह वाक्य सत्य या असत्य नहीं है। अतः यह एक कथन नहीं है। ;अद्ध यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाण्िात प्रावृफतिक तथ्य है कि वषार् होने से पहले बादल बनते हैं। इसलिए यह सदैव सत्य है। अतः यह एक कथन है। ;अपद्ध यह एक प्रश्न है, जिसमें शब्द ‘यहाँ’ भी आता है। अतः यह एक कथन नहीं है। उपरोक्त उदाहरण यह दशार्ते हैं कि जब कभी हम किसी वाक्य को कथन कहते हैं तो हमें यह भीबतलाना चाहिए कि ऐसा क्यों है प्रश्न के उत्तर की अपेक्षा यह ‘क्यों’ अध्िक महत्वपूणर् है। प्रश्नावली 14ण्1 1.निम्नलिख्िात वाक्यों में से कौन सा कथन हैं? अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइए। ;पद्ध एक महीने में 35 दिन होते हैं। ;पपद्ध गण्िात एक कठिन विषय है। ;पपपद्ध 5 और 7 का योगपफल 10 से अध्िक है। ;पअद्ध किसी संख्या का वगर् एक सम संख्या होती है। ;अद्ध किसी चतुभुर्ज की भुजाएँ बराबर ;समानद्ध लंबाइर् की होती हैं। ;अपद्ध इस प्रश्न का उत्तर दीजिए। ;अपपद्ध - 1 और 8 का गुणनपफल 8 है। ;अपपपद्ध किसी त्रिाभुज के सभी अंतः कोणों का योगपफल 180॰ होता है। ;पगद्ध आज एक तूपफानी दिन है। ;गद्ध सभी वास्तविक संख्याएं सम्िमश्र संख्याएँ होती हैं। 2.वाक्यों के तीन ऐसे उदाहरण दीजिए जो कथन नही हैं। उत्तर के लिए कारण भी बतलाइए। 14.3 पूवर् ज्ञात कथनों से नए कथन बनाना ;छमू ैजंजमउमदजे तिवउ व्सकद्ध अब हम पूवर् ज्ञात कथनों से नए कथन बनाने की विध्ि पर विचार करेंगे। सन् 1854 में एक अंगरेश गण्िातज्ञ ळमवतह ठववसम ने अपनी पुस्तक ज्ीम संूे व िज्ीवनहीजे में इन विध्ियों पर विचार - विमशर् किया है। यहाँ, हम दो तकनीकों पर विचार - विमशर् करेंगे। कथन के अध्ययन में प्रथम चरण के रूप में हम एक महत्वपूणर् तकनीक पर दृष्िट डालेंगे जिसके प्रयोग से हम गण्िातीय वाक्यों की अपनी समझ को गहन कर सकेंगे। इस तकनीक में हम अपने आप से न केवल यह प्रश्न पूछेंगे कि एक दिए हुए वाक्य के सत्य होने का क्या अथर् होता है बल्िक यह भी कि उस वाक्य के सत्य नहीं होने का क्या अथर् होता है। 14.3.1 किसी कथन का निषेध्न ;छमहंजपवद व िं ेजंजमउमदजद्ध किसी कथन का नकारना उस कथन का निषेध्न कहलाता है। वाक्य ‘नइर् दिल्ली एक नगर है।’ इसका निषेध्न निम्नलिख्िात प्रकार से लिखा जा सकता है। यह वस्तुस्िथति नहीं है कि नइर् दिल्ली एक नगर है।’ इसे इस प्रकार भी लिख सकते हैं। कि ‘यह असत्य है कि नइर् दिल्ली एक नगर है।’ सरलता से यह भी कह सकते हैं कि ‘नइर् दिल्ली एक नगर नहीं है।’ परिभाषा 1 यदि च एक कथन है, तो च का निषेध्न वह कथन है जो च को नकारता है और इसे प्रतीक ्च से दशार्ते ;निदिर्ष्ट करतेद्ध हैं जिसे फ्च - नहींय् पढ़ते हैं। किसी कथन के निषेध्न की रचना करते समय ‘यह वस्तु स्िथति नहीं है’ अथवा ‘यह असत्य है कि’ यहाँ एक उदाहरण से यह स्पष्ट किया गया है कि किस प्रकार एक कथन के निषेधन का अवलोकन करके, हम उसके संबंध् में अपनी समझ सुधर सकते हैं। वाक्य ‘जमर्नी में हर कोइर् ;प्रत्येक व्यक्ितद्ध जमर्न भाषा बोलता है।’ पर विचार करें। इस वाक्य को नकारने से हमें वाक्य ‘जमर्नी में हर कोइर् जमर्न भाषा नहीं बोलता है।’ इसका यह तात्पयर् नहीं हुआ कि ‘जमर्नी में कोइर् भी व्यक्ित जमर्न भाषा नहीं बोलता है।’ यह केवल यह बतलाता है कि ‘जमर्नी में कम से कम एक व्यक्ित ऐसा है जो जमर्न भाषा नहीं बोलता है। हम वुफछ और उदाहरणों पर विचार करेंगे। उदाहरण 2 निम्नलिख्िात कथनों का निषेध्न लिख्िाए। ;पद्ध किसी आयत के दोनों विकणो± की लंबाइर् समान होती है। ;पपद्ध 7 एक परिमेय संख्या है। हल ;पद्ध यह कथन यह बतलाता है कि सभी आयतों में दोनों विकणो± की लंबाइर् समान होती है। इसका तत्पयर् यह हुआ कि यदि हम कोइर् आयत लें तो इसके दोनों विकणेर् की लंबाइर् समान होगी। इस कथन का निषेध्न, फ्यह असत्य है कि किसी आयत के दोनों विकणो± की लंबाइर् समान होती हैय् है। अथार्त्् ‘कम से कम एक आयत ऐसा है, जिसके दोनांे विकणो± की लंबाइर् समान नहीं है।’ ;पपद्ध इस कथन का निषेध्न निम्नलिख्िात प्रकार लिखा जा सकता है ‘यह वस्तुस्िथति नहीं है कि 7 एक परिमेय संख्या है।’ इसे निम्नलिख्िात प्रकार से भी लिख सकते हैंः एक परिमेय संख्या नहीं है।’ उदाहरण 3 निम्नलिख्िात कथन के निषेध्न लिख्िाए और जाँचिए कि क्या परिणामी कथन सत्य है? ;पद्ध आस्ट्रेलिया एक महाद्वीप है। ;पपद्ध ऐसे किसी चतुभुर्ज का अस्ितत्व नहीं है जिसकी चारों भुजाएँ बराबर हों। ;पपपद्ध प्रत्येक प्रावृफत संख्या 0 से अध्िक होती है। ;पअद्ध 3 और 4 का योगपफल 9 है। हल ;पद्ध ‘यह असत्य है कि आस्ट्रेलिया एक महाद्वीप है’, दिये हुए कथन का निषेध्न है। इसे इस प्रकार भी लिख सकते हैं कि ‘आस्ट्रेलिया एक महाद्वीप नहीं है।’ हमें ज्ञात है कि यह कथन असत्य है। ;पपद्ध इस कथन का निषेध्न इस प्रकार है, ‘यह वस्तुस्िथति नहीं है कि किसी चतुभुर्ज का अस्ितत्व नहीं है जिसकी चारों भुजाएँ बराबर हैं।’ इसका तात्पयर् हुआ कि ‘एक ऐसे चतुभुर्ज का अस्ितत्व है, जिसकी चारों भुजाएँ बराबर होती हैं। यह कथन सत्य है क्योंकि हमें ज्ञात है कि वगर् एक ऐसा चतुभुर्ज होता है, जिसकी चारों भुजाएँ बराबर होती हैं। ;पपपद्ध इस कथन का निषेध्न इस प्रकार है, ‘यह असत्य है कि प्रत्येक प्रावृफत संख्या 0 से अध्िक होती हैं। इसको इस प्रकार भी लिख सकते हैं कि ‘एक ऐसी प्रावृफत संख्या का अस्ितत्व है जो 0 से अध्िक नहीं है।’ यह कथन असत्य है। ;पअद्ध अभीष्ट निषेध्न इस प्रकार है, ‘यह असत्य है कि 3 और 4 का योगपफल 9 है।’ इसे इस प्रकार भी लिखा जा सकता है कि, ‘3 और 4 का योगपफल 9 नहीं हेाता है।’ यह कथन सत्य है। 14.3.2 मिश्र कथन ;संयुक्त कथनद्ध ;ब्वउचवनदक ेजंजमउमदजेद्ध ‘और ;तथाद्ध’, ‘या ;अथवाद्ध’ आदि प्रकार के संयोजक शब्दों द्वारा एक या एक से अध्िक कथन को जोड़ कर अनेक गण्िातीय कथन प्राप्त किए जा सकते हैं। निम्नलिख्िात कथन पर विचार कीजिएः ‘बल्ब या बिजली के तार में वुफछ खराबी है’ यह कथन बतलाता है कि बल्ब में वुफछ खराबीहै या बिजली के तार में वुफछ खराबी है। इसका तात्पयर् यह है कि प्रदत्त कथन वास्तव में दो संक्ष्िाप्त ;छोटेद्ध कथन से मिल कर बना है, जो इस प्रकार हैंः ुरू ‘बल्ब में वुफछ खराबी है’ तरू बिजली के तार में वुफछ खराबी है’ और जिनको शब्द ‘या’ द्वारा जोड़ा गया है। अब मान लीजिए कि निम्नलिख्िात दो कथन दिए हैं, चरू ‘7 एक विषम संख्या है।’ ुरू ‘7 एक अभाज्य संख्या है।’ इन दोनों को शब्द ‘और’ द्वारा जोड़ने से निम्नलिख्िात कथन प्राप्त होगा तरू ‘7 विषम और अभाज्य, दोनों ही प्रकार की संख्या है।’ यह एक मिश्र कथन है। उपरोक्त परिचचार् से निम्नलिख्िात परिभाषा प्राप्त होती हैः परिभाषा 2 एक मिश्र कथन वह है, जो दो या दो से अध्िक ऐसे कथनों द्वारा बना हो, इस स्िथति में प्रत्येक कथन को घटक कथन कहते हैं। आइए अब हम वुफछ उदाहरणों पर विचार करें। उदाहरण 4 निम्नलिख्िात मिश्र कथन के घटक कथन ज्ञात कीजिए। ;पद्ध आकाश नीला है और घास हरी है। ;पपद्ध वषार् हो रही है और ठण्डक है। ;पपपद्ध सभी परिमेय संख्याएँ, वास्तविक संख्याएँ होती हैं और सभी वास्तविक संख्याएँ, सम्िमश्र संख्याएँ होती हैं। ;पअद्ध 0 एक ध्न संख्या है या एक )ण संख्या है। हल इनमें से प्रत्येक पर हम बारी - बारी से विचार करेंगे। ;पद्ध घटक कथन इस प्रकार हैं चरू आकाश नीला है। ुरू घास हरी है। संयोजक शब्द ‘और’ है। ;पपद्ध घटक कथन नीचे दिए गए हैं, चरू वषार् हो रही है। ुरू ठंडक है। संयोजक शब्द ‘और’ है। ;पपपद्ध घटक कथन नीचे लिखे हैं, चरू सभी परिमेय संख्याएँ वास्तविक संख्याएँ होती हैं। ुरू सभी वास्तविक संख्याएँ सम्िमश्र संख्याएँ होती हैं। संयोजक शब्द ‘और’ है। ;पअद्ध घटक कथन इस प्रकार हैं। चरू 0 एक ध्न संख्या हैं। ुरू 0 एक )ण संख्या है। संयोजक शब्द ‘या’ है। उदाहरण 5 निम्नलिख्िात कथन के घटक कथन ज्ञात कीजिए और जाँचिए कि वे सत्य हैं या नहीं। ;पद्ध एक वगर् एक चतुभुर्ज होता है और इसकी चारों भुजाएँ बराबर होती हैं। ;पपद्ध सभी अभाज्य संख्याएँ या तो सम या विषम होती हैं। ;पपपद्ध एक व्यक्ित, जिसने गण्िात या वंफप्यूटर विज्ञान का चयन किया है, वंफप्यूटर अनुप्रयोग मेंस्नाकोत्तर डिग्री पाठ्यक्रम ;डब्।द्ध में प्रवेश ले सकता है। ;पअद्ध चंडीगढ़ हरिणाणा और उत्तर प्रदेश की राजधनी है। ;अद्ध 2 एक परिमेय संख्या या एक अपरिमेय संख्या है। ;अपद्ध 2, 4, और 8 का एक गुणज 24 है। हल ;पद्ध यहाँ घटक कथन इस प्रकार हैं, चरू ‘एक वगर् एक चतुभुर्ज होता है। ुरू एक वगर् की चारों भुजाएँ बराबर होती हैं। हमें ज्ञात है कि दोनों कथन सत्य हैं। यहाँ पर संयोजक शब्द ‘और’ है। ;पपद्ध यहाँ घटक कथन इस प्रकार हैं, चरू सभी अभाज्य संख्याएँ सम होती हैं। ुरू सभी अभाज्य संख्याएँ विषम होती हैं। यह दोनांे कथन असत्य हैं। यहाँ संयोजक शब्द ‘या’ है। ;पपपद्ध यहाँ घटक कथन नीचे लिखे हैं, चरू एक व्यक्ित, जिसने गण्िात का चयन किया है, एम.सी.ए. में प्रवेश ले सकता है। ुरू एक व्यक्ित, जिसने वंफप्यूटर विज्ञान का चयन किया है, एम॰सी॰ए॰ में प्रवेश ले सकता है। यह दोनों ही कथन सत्य हैं। यहाँ संयोजक शब्द ‘या’ है। ;पअद्ध यहाँ घटक कथन इस प्रकार हैं, चरू चंडीगढ़ हरियाणा की राजधनी है।’ ुरू चंडीगढ़ उत्तर प्रदेश की राजधनी है।’ इस प्रश्न में प्रथम घटक कथन सत्य है और दूसरा असत्य है। यहाँ संयोजक शब्द ‘और’ है। ;अद्ध अभीष्ट घटक कथन नीचे लिख हैं, चरू 2 एक परिमेय संख्या है। ुरू 2 एक अपरिमेय संख्या है। यहाँ प्रथम घटक कथन असत्य है और दूसरा सत्य है। यहाँ संयोजक शब्द ‘या’ है। ;अपद्ध इसमें घटक कथन नीचे लिखे हैं, चरू 2 का एक गुणज 24 है। ुरू 4 का एक गुणज 24 है। तरू 8 का एक गुणज 24 है। यह तीनों ही घटक कथन सत्य है। यहाँ संयोजक शब्द ‘और’ है। अतः हम देखते हैं कि मिश्र कथन वास्तव में दो या दो से अध्िक कथनों को ‘और’, ‘या’ प्रकार के शब्दों द्वारा जोड़ने से बनते हैं। ये शब्द गण्िात में विश्िाष्ट महत्व रखते हैं। अगले अनुच्छेद में हम इनके बारे में परिचचार् करेंगे। प्रश्नावली 14ण्2 1.निम्नलिख्िात कथन के निषेध्न लिख्िाएः ;पद्ध चेÂइर्, तमिलनाडु की राजधनी है। ;पपद्ध 2 एक सम्िमश्र संख्या नहीं है। ;पपपद्ध सभी त्रिाभुज समबाहु त्रिाभुज नहीं होते हैं। ;पअद्ध संख्या 2 संख्या 7 से अध्िक है। ;अद्ध प्रतयेक प्रावृफत संख्या एक पूणा±क होती है। 2.क्या निम्नलिख्िात कथन युग्म ;कथन के जोड़ेद्ध एक दूसरे के निषेध्न हैं? ;पद्ध संख्या ग एक परिमेय संख्या नहीं है। संख्या ग एक अपरिमेय संख्या नहीं है। ;पपद्ध संख्या ग एक परिमेय संख्या है। संख्या ग एक अपरिमेय संख्या है। 3.निम्नलिख्िात मिश्र कथन के घटक कथन ज्ञात कीजिए और जाँचिए कि वे सत्य हैं या असत्य हैं? ;पद्ध संख्या 3 अभाज्य है या विषम है। ;पपद्ध समस्त ;सभीद्ध पूणा±क ध्न हैं या )ण हैं। ;पपपद्ध संख्या 100, संख्याओं 3, 11 और 5 से भाज्य है 14.4 विशेष शब्द/वाक्यांश ;ैचमबपंस ॅवतकेफध्च्ीतंेमेद्ध मिश्र कथन में प्रयुक्त ‘और’, ‘या’ प्रकार के वुफछ संयोजक शब्दों का प्रयोग बहुध गण्िातीय कथन में होता है। इन्हें ‘संयोजक’ कहते हैं। जब कभी हम मिश्र कथन का प्रयोग करते हैं तब यह आवश्यक हो जाता है कि हम इन शब्दों की भूमिका समझ सकें। यहाँ हम इस पर परिचचार् करेंगे। 14.4.1 संयोजक ‘और’ ;ज्ीम ूवतक श्।दकश्द्ध संयोजक ‘और’ के प्रयोग द्वारा बने निम्नलिख्िात मिश्र कथन पर विचार करते हैंः चरू किसी बिंदु का एक स्थान होता है और उसकी स्िथति निधर्रित की जा सकती है। इस कथन को निम्नलिख्िात दो घटक कथन में विघटित किया जा सकता हैः ुरू किसी बिंदु का एक स्थान होता है। तरू उसकी स्िथति निधर्रित की जा सकती है। उपरोक्त दोनों कथन सत्य हैं। एक अन्य कथन पर विचार कीजिए। चरू संख्या 42 संख्याओं 5, 6 और 7 से भाज्य है। इस कथन का विघटन इस प्रकार है, ुरू संख्या 42 संख्या 5 से भाज्य है। तरू संख्या 42 संख्या 6 से भाज्य है। ेरू संख्या 42 संख्या 7 से भाज्य है। यहाँ हमें ज्ञात है कि प्रथम कथन असत्य है और शेष दो सत्य हैं। अतः हमें निम्नलिख्िात नियम प्राप्त होता है 1. संयोजक फ्औरय् के प्रयोग द्वारा बना मिश्र कथन सत्य होगा यदि उसके सभी घटक कथन सत्य हों। 2. संयोजक फ्औरय् के प्रयोग द्वारा बना मिश्र कथन असत्य होगा यदि इसका एक भी घटक कथन असत्य हो ;इसमें वह स्िथति भी सम्िमलित है जिसमें इसके वुफछ घटक कथन या सभी घटक कथन असत्य हों।द्ध उदाहरण 6 निम्नलिख्िात मिश्र कथन के घटक कथन लिख्िाए और जाँचिए कि मिश्र कथन सत्य है अथवा असत्य है। ;पद्ध एक रेखा सीध्ी होती है और दोनों दिशाओं में अनंत तक विस्तृत होती है। ;पपद्ध 0 प्रत्येक ध्न पूणा±क और प्रत्येक )ण पूणा±क से कम होता है। ;पपपद्ध प्रत्येक सजीव के दो पैर और दो आँखें होती हैं। हल ;पद्ध घटक कथन निम्नलिख्िात हैं, चरू एक रेखा सीध्ी होती हैं।’ ुरू एक रेखा दोनों दिशाओं में अनंत तक विस्तृत होती है। उपरोक्त दोनों कथन सत्य हैं और इसलिए मिश्र कथन भी सत्य है। ;पपद्ध यहाँ घटक कथन इस प्रकार हैं, चरू 0 प्रत्येक ध्न पूणा±क से कम होता है। ुरू 0 प्रत्येक )ण पूणा±क से कम होता है। इनमें से दूसरा कथन असत्य है। अतः मिश्र कथन भी असत्य है। ;पपपद्ध अभीष्ट घटक कथन नीचे लिखे हैं, ‘प्रत्येक सजीव के दो पैर होते हैं।’ ‘प्रत्येक सजीव की दो आँखें होती हैं।’ गण्िातीय विवेचन 349 ये दोनों ही कथन असत्य हैं। अतः मिश्र कथन भी असत्य है। अब निम्नलिख्िात कथन पर विचार कीजिएः चरू ऐलकोहाॅल और पानी के मिश्रण को रासायनिक विध्ियों द्वारा अलग - अलग किया जा सकता है।’ इस कथन को शब्द फ्औरय् से प्रयुक्त मिश्र कथन नहीं माना जा सकता है। यहाँ पर शब्द फ्औरय् दो वस्तुओं, ऐलकोहाॅल तथा पानी का उल्लेख करता है। इससे हम एक महत्वपूणर् निष्कषर् निकालते हैं जो नीचे लिखी टिप्पणी में दिया हैः $टिप्पणी यह नहीं समझना चाहिए कि शब्द ‘और’ से प्रयुक्त वाक्य सदैव एक मिश्र कथन होता है जैसा कि उपरोक्त उदाहरण में स्पष्ट किया गया है। यहाँ पर शब्द ‘और’, दो वाक्यों के संयोजन के लिए प्रयुक्त नहीं है। 14.4.2 शब्द ‘या’ से प्रयुक्त वाक्य ;ज्ीम ूवतक श्व्तश्द्ध नीचे लिखे कथन पर विचार कीजिए। चरू एक समतल पर स्िथत दो रेखाएँ या तो एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती हैं या वे समांतर होती हैं। हमें ज्ञात है कि यह एक सत्य कथन है। इसका क्या अथर् है? इसका अथर् यह है कि एक समतल पर स्िथत दो रेखाएँ यदि एक दूसरे को काटती हैं, तो वे समांतर नहीं हैं। इसके विपरीत यदि ऐसी दोनों रेखाएँ समांतर नहीं हैं, तो वे एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती है’, अथार्त्् यह कथन दोनों ही स्िथतियों में सत्य है। शब्द ‘या’ से प्रयुक्त कथन समझने के लिए हम पहले यह देखते हैं कि अंग्रेशी भाषा में ‘या’ का प्रयोग दो प्रकार से किया जाता है। पहले हम निम्नलिख्िात कथन पर विचार करेंगेः ‘किसी आहार गृह ;रेस्ताराँद्ध में एक ‘थाली’ के साथ आइसक्रीम या पेप्सी भी उपलब्ध् की जाती है।’ इसका अथर् यह हुआ कि एक व्यक्ित जो आइसक्रीम नहीं चाहता वह ‘थाली’ के साथ पेप्सी ले सकता है अन्यथा वह ‘थाली’ के साथ आइसक्रीम ले सकता है। अथार्त्् यदि जो पेप्सी नहीं चाहते वे आइसक्रीम ले सकते हैं। किंतु एक व्यक्ित दोनों वस्तुएँ अथार्त्् आइसक्रीम और पेप्सी नहीं ले सकता। यह ‘अपवजिर्त’ ‘या’ कहलाता है। यहाँ एक अन्य कथन पर विचार कीजिए। ‘एक विद्याथीर्, जिसने जीवविज्ञान या रसायन विज्ञान विषयों का चयन किया है वह सूक्ष्मजीवविज्ञान के स्नाकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकता है।’ यहाँ पर हम यह मानते हैं कि वे विद्याथीर् जिन्होंने जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान दोनों ही विषयों का चयन किया है। वे सूक्ष्म जीवविज्ञान पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं, साथ ही साथ वे विद्याथीर् जिन्होंने इन विषयों में से केवल एक विषय का चयन किया है वे भी इस पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं। इस स्िथति में हम अंतविर्ष्ट ‘या’ का प्रयोग कर रहे हैं। उपरोक्त दो प्रयोगों का अंतर जान लेना महत्वपूणर् है क्योंकि हम इसकी आवश्यकता उस समय जब हम यह जाँचेंगे कि कोइर् कथन सत्य है अथवा नहीं। आइए हम एक उदाहरण पर विचार करें। उदाहरण 7 निम्नलिख्िात प्रत्येक कथन में ज्ञात कीजिए क्या ‘अंतविर्ष्ट’ ‘या’ अथवा ‘अपवजिर्त’‘या’ का प्रयोग किया गया है। अपना उत्तर कारण सहित बतलाइए। ;पद्ध किसी देश में प्रवेश करने के लिए आपको पासपोटर् या मतदाता पहचानपत्रा की आवश्यकता पड़ती है। ;पपद्ध अवकाश या रविवार के दिन विद्यालय बंद रहता है। ;पपपद्ध दो रेखाएँ एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती हैं या समांतर होती हैं। ;पअद्ध तृतीय भाषा के रूप में कोइर् विद्याथीर् प्रेंफच ;प्रफांसीसीद्ध भाषा या संस्वृफत भाषा का चयन कर सकता है। हल ;पद्ध यहाँ पर ‘या’ अंतविर्ष्ट है, क्योंकि किसी देश में प्रवेश करने के लिए एक व्यक्ित के पास पासपोटर् और मतदाता पहचान पत्रा दोनों ही हो सकते हैं। ;पपद्ध यहाँ पर भी ‘या’ अंतविर्ष्ट है, क्योंकि विद्यालय अवकाश के दिन और साथ ही साथ रविवार को बंद रहता है। ;पपपद्ध यहाँ पर ‘या’ अपवजिर्त है क्योंकि कि दोनों रेखाओं के लिए यह संभव नहीं है कि वे एक दूसरे को काटें और साथ ही साथ समांतर भी हों। ;पअद्ध यहाँ भी ‘या’ अपवजिर्त है क्योंकि कोइर् विद्याथीर् तृतीय भाषा के रूप में प्रेंफच और संस्वृफत दोनों नहीं ले सकता है। उपरोक्त उदाहरण के सूक्ष्म निरीक्षण से निम्नलिख्िात नियम प्राप्त होता है। संयोजक फ्याय् प्रयुक्त मिश्र कथन के लिए नियम 1.अंतविर्ष्ट ‘या’ प्रयुक्त मिश्र कथन सत्य होता है।, जब उसका कोइर् एक घटक कथन सत्य हो’ या उसके दोनों ही घटक कथन सत्य हों। 2.अंतविर्ष्ट ‘या’ प्रयुक्त मिश्र कथन असत्य होता है, जब उसके दोनों ही घटक कथन असत्य होते हैं। उदाहरण के लिए नीचे लिखे कथन पर विचार कीजिए, ‘दो रेखाएँ एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती हैं या वे समांतर हैंः इसके घटक कथन निम्नलिख्िात हैंः च रू दो रेखाएँ एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती हैं। ु रू वे ;दो रेखाएँद्ध समांतर हैं। यहाँ यदि च सत्य हैं तो ु असत्य है और यदि च असत्य है तो ु सत्य है। अतः मिश्र कथन सत्य है। एक अन्य कथन पर विचार कीजिए। ‘संख्या 125, संख्या 7 या संख्या 8 का गुणज है।’ इसके घटक कथन इस प्रकार हैं, च रू संख्या 125, संख्या 7 का गुणज है। ु रू संख्या 125, संख्या 8 का गुणज है। यहाँ च और ु दोनों ही असत्य हैं। अतः मिश्र कथन भी असत्य है। एक और कथन पर विचार कीजिए जो नीचे दिया है, ‘विद्यालय बंद है, यदि आज अवकाश का दिन है या रविवार है।’ इसके घटक कथन नीचे दिए हैं, च रू विद्यालय बंद है, यदि आज अवकाश का दिन है। ु रू विद्यालय बंद है, यदि आज रविवार है। च और ु दोनों ही सत्य हैं। अतः मिश्र कथन सत्य है। एक और कथन पर विचार कीजिए, ‘मुंबइर् कोलकाता या कनार्टक की राजधनी है।’ इसके घटक नीचे लिखे हैं, च रू मुंबइर्, कोलकाता की राजधनी है। ु रू मुंबइर्, कनार्टक की राजधनी है। उपरोक्त दोनों ही कथन असत्य हैं। अतः मिश्र कथन भी असत्य है। आइए अब हम वुफछ उदाहरणों पर विचार करेंः उदाहरण 8 निम्नलिख्िात कथनों में पहचानिए कि किस प्रकार के ‘या’ का प्रयोग किया गया है और जाँचिए कि कथन सत्य है अथवा असत्य है। ;पद्ध 2 एक परिमेय संख्या है या अपरिमेय संख्या है। ;पपद्ध किसी सावर्जनिक पुस्तकालय में प्रवेश हेतु बच्चों को विद्यालय द्वारा प्रदत्त पहचान पत्रा या विद्यालय अध्िकारियों द्वारा लिख्िात पत्रा की आवश्यकता पड़ती है। ;पपपद्ध आयत एक चतुभुर्ज या एक पाँच भुजीय बहुभुज होता है। हल ;पद्ध घटक कथन नीचे दिए हैं। च रू 2 एक परिमेय संख्या है। ु रू 2 एक अपरिमेय संख्या है। यहाँ हमें ज्ञात है कि प्रथम कथन असत्य है और द्वितीय कथन सत्य है और इस प्रकार ‘या’ अपवजिर्त है। ;पपद्ध घटक कथन निम्नलिख्िात हैं च रू किसी सावर्जनिक पुस्तकालय में प्रवेश हेतु बच्चों को विद्यालय द्वारा प्रदत्त पहचान पत्रा की आवश्यकता पड़ती है। ु रू किसी सावर्जनिक पुस्तकालय में प्रवेश हेतु बच्चों को विद्यालय अध्िकारियों द्वारा लिख्िात पत्रा की आवश्यकता पड़ती है। यहाँ पुस्तकालय में प्रवेश के लिए बच्चों के पास या तो पहचान पत्रा होना चाहिए अथवा विद्यालय के अध्िकारियों द्वारा लिख्िात पत्रा होना चाहिए अथवा दोनों की प्रलेख ;कागज़ातद्ध हो सकते हैं। अतः यहाँ पर ‘या’ अंतविर्ष्ट है। ;पपपद्ध यहाँ ‘या’ अपवजिर्त है। घटक कथनों के आधर पर यह कथन सत्य है। 14.4.3 परिमाणवाचक वाक्यांश ;सूक्ितद्ध ;फनंदजपपिमते च्ीतंेमेद्ध फ्एक ऐसे का अस्ितत्वहैय् और फ्सभी के लिए/प्रत्येक के लिएय् इन दोनों विशेष वाक्यांशों को ‘परिमाणवाचकवाक्यांश कहते है।गण्िातीय कथन में बहुध आने वाले वाक्यांशांे में एक वाक्यांश ‘एक ऐसे का अस्ितत्व है’ है। उदाहरणके लिए कथन ‘एक ऐसे आयत का अस्ितत्व है जिसकी भुजाएँ समान लंबाइर् की हैं।’ पर विचारकीजिए। इस कथन का तात्पयर् है कि कम से कम एक ऐसा आयत है जिसकी सभी भुजाओं की लंबाइर्समान है।वाक्यांश ‘एक ऐसे का अस्ितत्व’ से निकटस्थ वाक्यांश ‘प्रत्येक के लिए ;या सभी कि लिएद्ध’ है। आइए इस प्रकार के एक कथन पर विचार करें, ‘प्रत्येक अभाज्य संख्या च के लिए, च एक अपरिमेय संख्या है।’ इसका अथर् हुआ कि यदि ै अभाज्य संख्याओं का समुच्चय है, तो समुच्चय ै के सभी अवयव च के लिए, च एक अपरिमेय संख्या है। व्यापक रूप से किसी गणतीय कथन में ‘प्रत्येक के लिए’ वाक्यांश के प्रयोग से यह अथर् होता है कि यदि किसी समुच्चय में कोइर् विशेषता है तो उस समुच्चय के सभी अवयवों में वह विशेषता होनी चाहिए। हमें यह भी ध्यान देना चाहिए कि इस बात का जानना भी महत्वपूणर् है कि किसी वाक्य में संयोजक को ठीक - ठीक किस स्थान पर लिखना चाहिए। उदाहरण के लिए निम्नलिख्िात दो वाक्यों की तुलना कीजिएः 1.प्रत्येक ध्न पूणा±क ग के लिए एक ऐसे ध्न पूणा±क ल का अस्ितत्व है कि ल ढ ग 2.एक ध्न पूणा±क ल का ऐसा अस्ितत्व है कि प्रत्येक ध्न पूणा±क ग के लिए ल ढ गण् यद्यपि ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों वाक्यों का एक ही अथर् है किंतु ऐसा नहीं है। वास्तविकता तो यह है। कि कथन ;1द्ध सत्य है जबकि ;2द्ध असत्य है। किसी गण्िातीय वाक्य ;कथनद्ध के अथर्पूणर् होने के लिए प्रतीकों ;वाक्याशों, संयोजकोंद्ध का सही स्थान पर ठीक - ठीक प्रयोग किया जाना आवश्यक है। शब्द फ्औरय् तथा ‘या’ संयोजक कहलाते है तथा फ्एक ऐसा का अस्ितत्व हैय् और फ्प्रत्येक के लिएय् को परिमाणवाचक वाक्यांश कहते हैं। इस प्रकार हमने देखा कि अनेकों गण्िातीय कथनों में वुफछ विश्िाष्ट शब्दों/वाक्यांशों का प्रयोग होता है जिनके अथर् को समझना महत्वपूणर् है, विशेष रूप से जब हमें विभ्िान्न कथनों की वैध्ता की जाँच करनी है। प्रश्नावली 14ण्3 1.निम्नलिख्िात मिश्र कथनों में पहले संयोजक शब्दों को पहचानिए और पिफर उनको घटक कथनों में विघटित कीजिएः ;पद्ध सभी परिमेय संख्याएँ वास्तविक संख्याएँ होती हैं और सभी वास्तविक संख्याएँ सम्िमश्र संख्याएँ नहीं होती हैं। ;पपद्ध किसी पूणा±क का वगर् ध्न या )ण होता है। ;पपपद्ध रेत ;बालूद्ध ध्ूप में शीघ्र गमर् हो जाती है और रात्रिा में शीघ्र ठंडी नहीं होती है। ;पअद्ध ग त्र 2 और ग त्र 3ए समीकरण 3ग2 दृ गदृ10 त्र 0 के मूल हैं। 2.निम्नलिख्िात कथनों में परिमाणवाचक वाक्यांश पहचानिए और कथनों के निषेध्न लिख्िाएः ;पद्ध एक ऐसी संख्या का अस्ितत्व है, जो अपने वगर् के बराबर है। ;पपद्ध प्रत्येक वास्तविक संख्या ग के लिए, गए ;ग ़ 1द्ध से कम होता है। ;पपपद्ध भारत के हर एक राज्य/प्रदेश के लिए एक राजधनी का अस्ितत्व है। 3.जाँचिए कि क्या नीचे लिखे कथनों के जोड़े ;युग्मद्ध एक - दूसरे के निषेध्न हैं। अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइएः ;पद्ध प्रत्येक वास्तविक संख्याओं ग और ल के लिए ग ़ ल त्र ल ़ ग सत्य है। ;पपद्ध ऐसी वास्तविक संख्याओं ग और ल का अस्ितत्व है जिनके लिए ग ़ ल त्र ल ़ ग सत्य है। 4.बतलाइए कि निम्नलिख्िात कथनों में प्रयुक्त ‘या’ ‘अपवजिर्त’ है अथवा ‘अंतविर्ष्ट’ है। अपनेउत्तर के लिए कारण भी बतलाइएः ;पद्ध सूयर् उदय होता है या चंद्रमा अस्त होता है। ;पपद्ध ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन हेतु आपके पास राशन काडर् या पासपोटर् होना चाहिए। ;पपपद्ध सभी पूणा±क ध्न या )ण होते हैं। 14.5 अंतभार्व/सप्रतिबंध् कथन ;प्उचसपबंजपवदेध्ब्वदकपजपवदंस ैजंजमउमदजेद्ध इस अनुच्छेद हम अंतभार्व फ्यदि - तोय्, फ्केवल यदिय् और फ्यदि और केवल यदिय् पर विचार - विमशर् करेंगे। फ्यदि - तोय् से युक्त कथनों का प्रयोग बहुत सामान्य है। उदाहरण के लिए नीचे लिखे कथन पर विचार कीजिए तरू यदि आपका जन्म किसी देश में हुआ है, तो आप उस देश के नागरिक हैं। हम देखते हैं कि यह निम्नलिख्िात दो कथनों च और ु के सदृश है, च: आपका जन्म किसी देश में हुआ है। ु: आप उस देश के नागरिक हैं। तब कथन फ्यदि च तो ुय् यह बतलाता है कि उस दशा में जब च सत्य हो, तो ु अनिवायर् रूप से सत्य होगा। कथन ‘यदि च तो ु’ से संबंध्ित एक सबसे महत्वपूणर् तथ्य यह है कि यदि च असत्य है तो यह ु के बारे में वुफछ नहीं कहता। उदाहरणाथर् उपरोक्त कथन में यदि आपका जन्म किसी देश में नहीं हुआ है तो आप ु के संबंध् में वुफछ नहीं कह सकते हैं। दूसरे शब्दों में च के घटित नहीं होने का ु के घटित होने पर कोइर् प्रभाव नहीं पड़ता है। कथन फ्यदि चए तो ु’’ के बारे में एक अन्य तथ्य भी नोट कीजिए कि इस कथन में यह अंतनिर्हित नहीं है कि च घटित होता है। कथन फ्यदि चए तो ुय् को समझने के अनेक तरीके हैं। हम इन तरीकों को निम्नलिख्िात कथन के माध्यम से स्पष्ट करेंगे। यदि कोइर् संख्या 9 की गुणज है, तो वह 3 की भी गुणज है। मान लीजिए कि च और ु निम्नलिख्िात कथनों को प्रगट करते हैं, च रू कोइर् संख्या 9 की गुणज है। ु रू वह संख्या 3 की भी गुणज है। इस प्रकार कथन ‘यदि चए तो ु’ निम्नलिख्िात कथनों के समान हैः 1.‘च अंतभार्व ु’ को च ⇒ ु से प्रकट किया जाता है। प्रतीक ‘⇒ ’ अंतभार्व ;सप्रतिबंध् कथनद्ध के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका अथर् यह कि कथन ‘कोइर् संख्या 9 की गुणज है’ में यह कथन अंतनिर्हित है कि ‘वह संख्या 3 की भी गुणज है’। 2.‘च पयार्प्त प्रतिबंध् है ु के लिए’। इसका अथर् हुआ कि यह ज्ञात होना कि संख्या 9 की गुणज है, पयार्प्त है यह निष्कषर् निकालने के लिए कि वह संख्या 3 की भी गुणज है। 3.‘च केवल यदि ु’ इसका अथर् हुआ कि कोइर् संख्या 9 की गुणज है, केवल यदि वह संख्या 3 की भी गुणज है। 4.‘ु अनिवायर् प्रतिबंध् है च के लिए।’ इसका अथर् हुआ कि जब कोइर् संख्या 9 की गुणज है, तो वह संख्या अनिवायर् रूप से 3 की भी गुणज है। 5.‘् ु अंतभार्व ् च’ इसका अथर् हुआ कि यदि कोइर् संख्या 3 की गुणज नहीं है, तो वह संख्या 9 की भी गुणज नहीं है। 14.5.1 प्रतिध्नात्मक और विलोम ;ब्वदजतंचवेपजपअम ंदक ब्वदअमतेमद्ध प्रतिध्नात्मक और विलोम निश्िचत रूप से वुफछ अन्य कथन हैं, जिन्हें वाक्यांश ‘यदि - तो’ से प्रयुक्त कथन से ;द्वाराद्ध रचित किया जा सकता है। उदाहरणाथर् नीचे दिए वाक्यांश ‘यदि - तो’ वाले कथन पर विचार कीजिए, यदि भौतिक वातावरण में परिवतर्न होता है तब जैविक वातावरण परिवतिर्त हो जाता है। इस कथन का प्रतिधनात्मक कथन ‘‘यदि जैविक वातावरण में परिवतर्न नहीं होता है तब भौतिक वातावरण परिवतिर्त नहीं होता है।’’ नोट कीजिए कि ये दोनों कथन एक ही ;समानद्ध अथर् व्यक्त करते हैं। इस बात को समझने के लिए आइए वुफछ और उदाहरणों पर विचार करें। उदाहरण 9 निम्नलिख्िात कथनों के प्रतिध्नात्मक कथन लिख्िाएः ;पद्ध यदि एक संख्या 9 से भाज्य है, तो वह 3 से भी भाज्य है। ;पपद्ध यदि आप भारत में जन्मे हैं, तो आप भारत के एक नागरिक हैं। ;पपपद्ध यदि एक त्रिाभुज समबाहु है, तो समद्विबाहु भी है। हल उपरोक्त तीन कथनों के प्रतिध्नात्मक कथन इस प्रकार है, ;पद्ध यदि एक संख्या 3 से भाज्य नहीं है, तो वह 9 से भी भाज्य नहीं है। ;पपद्ध यदि आप भारत के नागरिक नहीं हैं, तो आप भारत में नहीं जन्मे हैं। ;पपपद्ध यदि एक त्रिाभुज समद्विबाहु नहीं है, तो वह समबाहु भी नहीं है। उपरोक्त उदाहरण दशार्ते हैं कि कथन ‘यदि चए तो ु’ का प्रतिध्नात्मक कथन ‘यदि ु - नहीं, तो च.नहीं’ अथार्त्् ‘यदि ् ुए तो ् च’ है। इसके बाद हम ‘विलोम’ कहलाने वाले एक और पद पर विचार करेंगे। दिए हुए कथन ‘यदि चए तो ु’ का विलोम कथन, यदि ु तब च है। उदाहरण के लिए कथन च‘यदि एक संख्या 10 से भाज्य है तो वह ;संख्याद्ध 5 से भी भाज्य है।’ का विलोम कथन ु’ यदि एक संख्या 5 से भाज्य है, तो वह ;संख्याद्ध 10 से भी भाज्य है।’ उदाहरण 10 निम्नलिख्िात कथनों के विलोम लिख्िाएः ;पद्ध यदि एक संख्या द सम है, तो द2 भी सम है। ;पपद्ध यदि आप सभी प्रश्नों को पुस्ितका में हल करें, तो आपको कक्षा में ।.ग्रेड मिलेगा। ;पपपद्ध यदि दो पूणा±क ं और इ इस प्रकार हैं कि ं झ इ, तो ;ं दृ इद्ध सदैव एक ध्न पूणा±क है। हल इन कथनों के विलोम नीचे लिखे हैं, ;पद्ध यदि संख्या द2 सम है, तो द भी सम है। ;पपद्ध यदि आपको कक्षा में ।.ग्रेड मिला है, तो आपने सभी प्रश्नों को पुस्ितका में हल किया है। ;पपपद्ध यदि दो पूणा±क ं और इ इस प्रकार हैं कि ;ं दृ इद्ध सदैव एक ध्न पूणा±क है, तो ं झ इण् आइए वुफछ और उदाहरणों पर विचार करें। उदाहरण 11 निम्नलिख्िात मिश्र कथनों में से प्रत्येक के लिए पहले संगत घटक कथनों को पहचानिए और पिफर जाँचिए कि क्या कथन सत्य है अथवा नहीं। ;पद्ध यदि त्रिाभुज ।ठब् समबाहु है, तो वह ;त्रिाभुजद्ध समद्विबाहु है। ;पपद्ध यदि ं और इ पूणा±क हैं, तो ंइ एक परिमेय संख्या है। हल ;पद्ध घटक कथन नीचे लिखें हैं, च रू त्रिाभुज ।ठब् समबाहु है। ु रू त्रिाभुज समद्विबाहु है। क्योंकि एक समबाहु त्रिाभुज समद्विबाहु भी होता है, अतः दिया हुआ कथन सत्य है। ;पपद्ध यहाँ घटक कथन इस प्रकार है, च रू ं और इ पूणा±क हैं। ु रू ंइ एक परिमेय संख्या है। क्योंकि दो पूणा±कों का गुणनपफल एक पूणा±क होता है और इसलिए एक परिमेय संख्या भी होता है, अतः मिश्र कथन सत्य है। वाक्यांश ‘यदि और केवल यदि’, प्रतीक द्वारा प्रकट किया जाता है और दिए हुए कथन च और ु के लिए इसके निम्नलिख्िात समतुल्य रूप हैं। ;पद्ध ‘च यदि और केवल यदि ु’ ;पपद्ध ‘ु यदि और केवल यदि च’ ;पपपद्ध ‘च अनिवायर् और पयार्प्त प्रतिबंध् है ु के लिए’ और इसका विलोम ;उलटाद्ध ;पअद्ध चु यहाँ निम्नलिख्िात उदाहरण पर विचार करते हैं। उदाहरण 12 नीचे दो कथन युग्म दिए हैं। प्रत्येक कथन युग्म वाक्यांश ‘यदि और केवल यदि’ के प्रयोग द्वारा सम्िमलित कीजिए। ;पद्ध चरू यदि कोइर् आयत एक वगर् है, तो उसकी चारों भुजाएँ बराबर लंबाइर् की हैं। यदि किसी आयत की चारों भुजाएँ बराबर लंबाइर् की है, तो आयत एक वगर् है। ;पपद्ध ुरू यदि किसी संख्या के अंकों का योगपफल 3 से भाज्य है, तो वह संख्या भी 3 से भाज्य है। ुरू यदि एक संख्या 3 से भाज्य है, तो उस संख्या के अंकों का योगपफल भी 3 से भाज्य है। हल ;पद्ध कोइर् आयत एक वगर् है यदि और केवल यदि उसकी चारों भुजाओं की लंबाइर् बराबर है। ;पपद्ध एक संख्या 3 से भाज्य है यदि और केवल यदि उस संख्या के अंकों का योगपफल 3 से भाज्य है। प्रश्नावली 14ण्4 1. निम्नलिख्िात कथन को वाक्यांश ‘यदि - तो’ का प्रयोग करते हुए पाँच विभ्िान्न रूप में इस प्रकार लिख्िाए कि उनके अथर् समान हों। यदि एक प्रावृफत संख्या विषम है तो उसका वगर् भी विषम है। 2. निम्नलिख्िात कथनों के प्रतिध्नात्मक और विलोम कथन लिख्िाएः ;पद्ध यदि ग एक अभाज्य संख्या है, तो ग विषम है। ;पपद्ध यदि दो रेखाएँ समांतर हैं, तो वे एक दूसरे को एक समतल में नहीं काटती हैं। ;पपपद्ध किसी वस्तु के ठंडे होने का तात्पयर् ;अंतभार्वद्ध है कि उसका तापक्रम कम है। ;पअद्ध आप ज्यामिति विषय को आत्मसात नहीं कर सकते यदि आपको यह ज्ञान नहीं है कि निगमनात्मक विवेचन किस प्रकार किया जाता है। ;अद्ध ग एक सम संख्या है से तात्पयर् ;अंतभार्वद्ध है कि ग संख्या 4 से भाज्य है। 3.निम्नलिख्िात कथनों में से प्रत्येक को ‘यदि - तो’ रूप में लिख्िाएः ;पद्ध आपको नौकरी ;कामद्ध मिलने का तात्पयर् ;अंतभार्वद्ध है कि आपकी विश्वसनियता अच्छी है। ;पपद्ध केले का पेड़ पूफलेगा यदि वह एक माह तक गरम बना रहे। ;पपपद्ध एक चतुभुर्ज समांतर चतुभुर्ज है यदि उसके विकणर् एक - दूसरे को समद्विभाजित करें। ;पअद्ध कक्षा में । ग्रेड पाने के लिए यह अनिवायर् है कि आप पुस्तक के सभी प्रश्नों को सरल कर लेते हैं। 4.नीचे ;ंद्ध और ;इद्ध में प्रदत्त कथनों में से प्रत्येक के ;पद्ध में दिए कथन का प्रतिध्नात्मक और विलोम कथन पहचानिए। ;ंद्ध यदि आप दिल्ली में रहते हैं तो आपके पास जाड़े के कपड़े हैं। ;पद्ध यदि आपके पास जाड़े के कपड़े नहीं हैं, तो आप दिल्ली में नहीं रहते हैं। ;पपद्ध यदि आपके पास जाड़े के कपड़े हैं, तो आप दिल्ली में रहते हैं। ;इद्ध यदि एक चतुभुर्ज समांतर चतुभुर्ज है, तो उसके विकणर् एक - दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। ;पद्ध यदि किसी चतुभुर्ज के विकणर् एक - दूसरे को समद्विभाजित नहीं करते हैं, तो चतुभुर्ज एक समांतर चतुभुर्ज नहीं हैं। ;पपद्ध यदि चतुभुर्ज के विकणर् एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं तो वह समांतर चतुभुर्ज है। 14.6 कथनों की वैध्ता को प्रमाण्िात ;सत्यापितद्ध करना ;टंसपकंजपदह ैजंजमउमदजेद्ध इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि एक कथन किन स्िथतियों में सत्य होता है। उपरोक्तप्रश्न का उत्तर जानने के लिए हमें निम्नलिख्िात प्रश्नों का उत्तर जानना आवश्यक है।प्रदत्त कथन का अथर् क्या हैं? यह कहने का क्या अथर् है कि कब कथन सत्य है और कब असत्य है? ऊपर लिखे प्रश्नों के उत्तर इस बात पर निभर्र करते हैं कि प्रदत्त कथन में फ्औरय् तथा ‘या’ में से संयोजक शब्द का अथवा फ्यदि और केवल यदिय् तथा फ्यदि - तोय् में से किस प्रतिबंध् का अथवा फ्प्रत्येक के लिएय् तथा फ्एक ऐसा का अस्ितत्व हैय् में से किस परिमाणवाचक वाक्यांश का प्रयोग किया गया है। यहाँ पर इन किसी कथन की वैध्ता ज्ञात करने के लिए वुफछ प्रियाओं पर विचार करेंगे। अब हम यह जाँचने के लिए कि कोइर् कथन सत्य है या नहीं, वुफछ सामान्य नियमों की सूची बनाते हैं। नियम 1 यदि च तथा ु गण्िातीय कथन हैं, तो यह सि( करने के लिए कि कथन फ्च और ुय् सत्य है, हम निम्नलिख्िात चरणों का अनुसरण करते हैं। चरण 1 दशार्इए कि कथन च सत्य है चरण 2 दशार्इए कि कथन ु सत्य है नियम 2 ‘संयोजक ‘या’ से प्रयुक्त कथन’ यदि च तथा ु गण्िातीय कथन हैं, तो कथन फ्च या ुय् को सत्य सि( करने के लिए हम निम्नलिख्िात स्िथतियों में से किसी एक को सत्य प्रमाण्िात करते हैं। स्िथति 1 यह मानते हुए कि च असत्य है, ु को अनिवायर्तः सत्य प्रमाण्िात कीजिए। स्िथति 2 यह मानते हुए कि ु असत्य है, च को अनिवायर्तः सत्य प्रमाण्िात कीजिए। नियम 3 वाक्यांश ‘‘यदि - तो’’ से प्रयुक्त कथन कथन ‘यदि चए तो ु’ को सत्य सि( करने के लिए हम निम्नलिख्िात स्िथतियों में से किसी एक को सत्य प्रमाण्िात करते हैं। स्िथति 1 यह मानते हुए कि च सत्य है, ु को अनिवायर्तः सत्य प्रमाण्िात कीजिए ;प्रत्यक्ष विध्िद्ध। स्िथति 2 यह मानते हुए कि ु असत्य है, च को भी अनिवायर्तः असत्य प्रमाण्िात कीजिए ;प्रतिध्नात्मक विध्िद्ध। नियम 4 वाक्यांश ;प्रतिबंध्द्ध फ्यदि और केवल यदिय् से प्रयुक्त कथन कथन फ्चए यदि और केवल यदि ुय् को सत्य सि( करने के लिए हमें यह प्रमाण्िात करने की आवश्यकता है कि, ;पद्ध यदि च सत्य है तो ु सत्य है और ;पपद्ध यदि ु सत्य है, तो च सत्य है। आइए हम वुफछ उदाहरणों पर विचार करेंः उदाहरण 13 जाँचिए कि नीचे दिया गया कथन सत्य हैं अथवा नहीं। यदि गए ल ∈ र् इस प्रकार हैं कि ग तथा ल विषम हैं, तो गल भी विषम है। हल यहाँ च रू गए ल ∈ र्ए इस प्रकार हैं कि ग तथा ल विषम हैं। ु रू गल विषम हैं।प्रदत्त कथन की वैध्ता को जाँचने के लिए हम नियम 3 की स्िथति 1 का प्रयोग करते हैं अथार्त्् यह मानते हुए कि च सत्य है हम ु को अनिवायर्तः सत्य प्रमाण्िात करते हैं। च सत्य है अथार्त्् ग तथा ल विषम पूणा±क हैं। अतः ग त्र2उ ़ 1 किसी पूणा±क उ के लिए। ल त्र2उ ़ 1 किसी पूणा±क द के लिए। अतः गल त्र;2उ ़ 1द्ध ;2द ़ 1द्ध त्र 2;2उद ़ उ ़ दद्ध ़ 1 इससे स्पष्ट है कि गल भी विषम है। इसलिए प्रदत्त कथन सत्य है। मान लीजिए कि हम नियम 3 की स्िथति 2 के प्रयोग द्वारा जाँच करना चाहते हैं, तो हमें, निम्नलिख्िात विध्ि का प्रयोग करना चाहिए। हम मानते हैं कि ु सत्य नहीं है। इसका तात्पयर् है कि हमें कथन ु के निषेध्न पर विचार करना चाहिए। इस प्रकार निम्नलिख्िात कथन प्राप्त होता है, ् ु रू गुणनपफल ग ल सम है। यह केवल तभी संभव है जब ग अथवा ल सम हों जिससे यह प्रमाण्िात होता है कि च सत्य नहीं है। अतः हमने यह दशार् दिया कि ् ु ⇒ ् च उपरोक्त उदाहरण यह स्पष्ट करता है कि कथन च ⇒ ु को सि( करने के लिएकथन ् ु ⇒ ् च सि( कर देना पयार्प्त है, जो कि प्रदत्त कथन का प्रतिध्नात्मक कथन है। उदाहरण 14 निम्नलिख्िात कथन के प्रतिध्नात्मक कथन का जाँच कर यह ज्ञात कीजिए कि प्रदत्तकथन सत्य है अथवा असत्य हैऋ‘यदि गए ल ∈ र् इस प्रकार कि गल विषम हैं, तो ग तथा ल भी विषम है।’ हल आइए हम कथनों को नीचे दिए नाम से संबोध्ित करें, च रू ग ल विषम हैं। ु रू ग तथा ल दोनों ही विषम हैं।हमें प्रतिध्नात्मक कथन ् ु ⇒ ् च को जाँच कर ज्ञात करना है कि कथन च ⇒ ु सत्य है अथवा नहीं।अब, ् ु त्र यह असत्य है कि ग तथा ल दोनों विषम है।इसका अथर् यही हुआ कि ग ;अथवा लद्ध सम है। तो, ग त्र 2द जहाँ द एक पूणा±क है। अतः गल त्र 2दलए यह दशार्ता है कि गल सम है। अथार्त्् ् च सत्य है। इस प्रकार हमने ् ु ⇒ ् च को सि( कर दिया है, अतः प्रदत्त कथन सत्य है। अब हम विचार करते हैं कि जब एक सप्रतिबंध् कथन और उसके विलोम कथन को मिलाते हैं तो क्या होता है। निम्नलिख्िात कथनों पर विचार कीजिए च रू एक गिलास आध खाली है। ु रू एक गिलास आध भरा है। हमें ज्ञात है कि यदि पहला कथन घटित होगा तो दूसरा भी घटित होगा। इस तथ्य को निम्नलिख्िात प्रकार से व्यक्त कर सकते हैं। यदि एक गिलास आध खाली है, तो वह आध भरा है, यदि एक गिलास आध भरा है, तो वह आधा खाली है। हम इन दोनों कथनों को मिलाते हैं और निम्नलिख्िात कथन प्राप्त करते हैं। एक गिलास आध खाली है यदि और केवल यदि यह आध भरा है। इसके बाद हम एक अन्य विध्ि पर विचार करेंगे। 14.6.1 विरोधेक्ित द्वारा ;ठल ब्वदजतंकपबजपवदद्ध इस विध्ि में यह सि( करने के लिए कि कोइर्;प्रदत्तद्ध कथन च सत्य है हम यह मान लेते हैं कि च सत्य नहीं है। अथार्त्् ् च सत्य है। इस प्रकार हम एक ऐसे निष्कषर् पर पहुँचते हैं जो हमारी मान्यता ;पूवर्धरणाद्ध का खंडन करता है। परिणामतः च को सत्य होना चाहिए। नीचे सरल किए उदाहरण को देख्िाएः उदाहरण 15 विरोधेक्ित द्वारा निम्नलिख्िात कथन को सत्यापित कीजिए, 7 एक अपरिमेय संख्या है।’ हल इस विध्ि में हम यह मान लेते हैं कि प्रदत्त कथन असत्य है। अथार्त्् ‘ 7 एक अपरिमेय संख्या नहीं है।’ तात्पयर् यह हुआ कि ‘ 7 परिमेय है।’ ंअतः दो ऐसे पूणा±क ं तथा इ का अस्ितत्व है कि 7 त्र इ , जहाँ ं तथा इ में कोइर् समापवतर्क ;उभयनिष्ठ गुणनखंडद्ध नहीं है। उपरोक्त समीकरण का वगर् करने पर 2ं7 त्र⇒ ं2 त्र 7इ2 ⇒ संख्या 7, संख्या ं को विभाजित करती है। इसलिए एक ऐसे पूणा±क बइ2 का अस्ितत्व है कि ं त्र 7ब इस प्रकार ं2 त्र 49ब2 और ं2 त्र 7इ2 अतः 7इ2 त्र 49ब2 ⇒ इ2 त्र 7ब2 ⇒ संख्या 7, संख्या इ को विभाजित करती है। किंतु हमें ज्ञात है कि संख्या 7, संख्या ं को भी विभाजित करती है। इसका तात्पयर् हुआ कि संख्या 7, संख्याओं ं तथा इ का समापवतर्क है, जो हमारी मान्यता कि ‘ं तथा इ में कोइर् समापवर्तक नहीं है’ का खंडन है। इससे स्पष्ट होता है कि यह मान्यता कि ‘ 7 परिमेय है’ असत्य है। अतः प्रदत्त कथन कि ‘ 7 एक अपरिमेय संख्या है’ सत्य है। इसके उपरांत हम एक और विध्ि पर विचार करेंगे, जिसके द्वारा हम सि( कर सकते हैं किएक प्रदत्त कथन असत्य है। इस विध्ि में हम एक ऐसी दशा ;स्िथतिद्ध का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं,जिसमें प्रदत्त कथन वैध् नहीं होता है। इस प्रकार के उदाहरण को ‘‘प्रत्युदाहरण’’ कहते है। यह नामस्वयं ही संकेत करता है कि यह उदाहरण प्रदत्त कथन का खंडनकरता है। उदाहरण 16 एक प्रत्युदाहरण द्वारा सि( कीजिए कि निम्नलिख्िात कथन असत्य है, ‘यदि द एक विषम पूणा±क है, तो द एक अभाज्य संख्या है।’ हल प्रदत्त कथन ‘यदि चए तो ु’ के रूप का है। हमें इसे असत्य सि( करना है जिसके लिए हमें यह दशार्ना है कि ‘यदि चए तो ् ु’ है। इसके लिए हमें किसी एक ऐसे विषम पूणा±क को खोजना है, जो अभाज्य नहीं हो। संख्या 9 इस प्रकार का एक विषम पूणा±क है। अतः संख्या 9 एक प्रत्युदाहरण है और हम निष्कषर् निकालते हैं कि प्रदत्त कथन असत्य है। इस प्रकार हमनें वुफछ विध्ियों पर विचार किया जिनके प्रयोग द्वारा हम यह ज्ञात करते हैं किएक प्रदत्त कथन सत्य है अथवा नहीं। गण्िात में प्रत्युदाहरणों का प्रयोग किसी कथन को अस्वीकार करने के लिए किया जाता है। तथापि किसी कथन के अनुमोदन में उदाहरणों को प्रस्तुत करने से कथन की वैध्ता प्रमाण्िात नहीं होती है। प्रश्नावली 14ण्5 1 सि( कीजिए कि कथन यदि ग एक ऐसी वास्तविक संख्या है कि ग3 ़ 4ग त्र 0ए तो ग त्र 0 ;पद्ध प्रत्यक्ष विध्ि द्वारा ;पपद्ध विरोधेक्ित द्वारा ;पपपद्ध प्रतिध्नात्मक कथन द्वारा। 2 प्रत्युदाहरण द्वारा सि( कीजिए कि कथन फ्किसी भी ऐसी वास्तविक संख्याओं ं और इ के लिए, जहाँ ं2 त्र इ2ए का तात्पयर् है कि ं त्र इय् सत्य नहीं है। 3 प्रतिध्नात्मक विध्ि द्वारा सि( कीजिए कि निम्नलिख्िात कथन सत्य है, चरू यदि ग एक पूणा±क है और ग2 सम है, तो ग भी सम है।’ 4 प्रत्युदाहरण द्वारा सि( कीजिए कि निम्नलिख्िात कथन सत्य नहीं है, ;पद्ध चरू यदि किसी त्रिाभुज के कोण समान हैं, तो त्रिाभुज एक अध्िक कोण त्रिाभुज है। ;पपद्ध ुरू समीकरण ग2 दृ 1 त्र 0 के मूल 0 और 2 के बीच स्िथत नहीं है। 5.निम्नलिख्िात कथनों में से कौन से सत्य हैं और कौन से असत्य हैं? प्रत्येक दशा में अपने उत्तर के लिए वैध् कारण बतलाइएः ;पद्ध चरू किसी वृत्त की प्रत्येक त्रिाज्या वृत्त की जीवा होती है। ;पपद्ध ुरू किसी वृत्त का केंद्र वृत्त की प्रत्येक जीवा को समद्विभाजित करता है। ;पपपद्ध तरू एक वृत्त, किसी दीघर्वृत्त की एक विशेष स्िथति है। ;पअद्ध ेरू यदि ग और ल ऐसे पूणा±क है कि ग झ लए तो दृग ढ दृल है। ;अद्ध जरू 11 एक परिमेय संख्या है। विविध् उदाहरण उदाहरण 17 जाँचिए कि निम्नलिख्िात मिश्र कथन में प्रयुक्त ‘या’ अपवजिर्त है अथवा अंतविर्ष्ट है।अपने उत्तर को तवर्फ संगत ;उचितद्ध सि( कीजिएः जरू जब वषार् होती है, आप भीग जाते हैं, या जब आप नदी में होते हैं, आप भीग जाते हैं।’ तदोपरांत मिश्र कथन के घटक कथन लिख्िाए और उनका प्रयोग यह जाँचने के लिए कीजिए कि मिश्र कथन सत्य है अथवा नहीं। हल प्रदत्त कथन में प्रयुक्त ‘या’ अंतविर्ष्ट है, क्योंकि यह संभव है कि वषार् हो रही है और आप नदी में हों।प्रदत्त कथन के घटक कथन नीचे दिए हैं, च रू जब वषार् होती है आप भीग जाते हैं। ु रू जब आप नदी में होते हैं आप भीग जाते हैं। यहाँ दोनों घटक कथन सत्य हैं और इसलिए मिश्र कथन भी सत्य है। उदाहरण 18 निम्नलिख्िात कथनों के निषेध्न लिख्िाएः ;पद्ध चरू प्रत्येक वास्तविक संख्या ग के लिए, ग2 झ ग ;पपद्ध ुरू एक ऐसी परिमेय संख्या ग का अस्ितत्व है ताकि ग2 त्र 2 ;पपपद्ध तरू प्रत्येक पक्षी के पंख होते हैं। ;पअद्ध ेरू प्रारंभ्िाक स्तर पर प्रत्येक विद्याथीर् गण्िात का अध्ययन करता है। हल मान लीजिए कि दिए गए कथन को च निरूपित किया जाता है। तब च का निषेध्न ‘‘यह असत्य है कि च सत्य है’’ होगा, अथार्त्् प्रतिबंध् ग2 झ ग प्रत्येक वास्तविक संख्या के लिए लागू नहीं होता है। इस बात को इस प्रकार व्यक्त कर सकते हैं, ्चरू एक ऐसी वास्तविक संख्या ग का अस्ितत्व है ताकि ग2 ढ ग है। ;पपद्ध मान लीजिए कि ु त्र एक ऐसी परिमेय संख्या ग का अस्ितत्व है कि ग2 त्र 2 अतः ∼ु त्र ऐसी ;किसीद्ध परिमेय संख्या ग का अस्ितत्व नहीं है कि ग2 त्र 2 जिसे इस प्रकार भी लिखा जा सकता है, ्चरू प्रत्येक ;सभीद्ध परिमेय संख्या ग के लिए ग2 ≠ 2 ;पपपद्ध प्रदत्त कथन का निषेध्न नीचे लिखा है, ्तरू एक ऐसे पक्षी का अस्ितत्व है, जिसके पंख नहीं होते हैं।’ ;पअद्ध प्रदत्त कथन का निषेध्न इस प्रकार है, ्ेरू एक ऐसे विद्याथीर् का अस्ितत्व है जो प्रारंभ्िाक स्तर पर गण्िात का अध्ययन नहीं करता है।’ उदाहरण 19 वाक्यांश ‘‘अनिवायर् और पयार्प्त’’ का प्रयोग करके निम्नलिख्िात कथन को पुनः लिख्िाए। तथा इसकी वैध्ता की जाँच भी कीजिए। ‘‘पूणा±क द विषम है यदि और केवल यदि द2 विषम है।’’ हल पूणा±क द के विषम होने के लिए अनिवायर् और पयार्प्त प्रतिबंध् है कि द2 अनिवायर्तः विषम हो। मान लीजिए कि च तथा ु निम्नलिख्िात कथनों को निरूपित करते हैं, च रू पूणा±क द विषम है। ु रू द2 विषम है। तो ‘च यदि और केवल यदि ु’ प्रदत्त कथन को निरूपित करता है और जिसकी वैध्ता जाँचने के लिए हमें यह जाँचना पड़ेगा कि क्या कथन ‘‘यदि चए तो ु’’ तथा ‘‘यदि ुए तो च’’ सत्य है। स्िथति 1 ‘यदि चए तो ु’ यदि चए तो ु कथन ‘यदि पूणा±क द विषम है, तो द2 विषम है।’ को निरूपित करता है। हमें ज्ञात करना है कि क्या यह कथन सत्य है। मान लीजिए कि द विषम है। तब द त्र 2ा ़ 1 जहाँ ा एक पूणा±क है। इस प्रकार द2 त्र;2ा ़ 1द्ध2 त्र4ा2 ़ 4ा ़ 1 त्र 2;2ा2 ़ 2ाद्ध ़ 1 अतः द2 विषम है। स्िथति 2 यदि ुए तो च कथन ‘यदि द एक पूणा±क है और द2 विषम है, तो द विषम है।’ यदि ुए तो च द्वारा निरूपित होता है। हमें ज्ञात करना है कि क्या यह कथन सत्य है। इसे ज्ञात करने के लिए हम प्रतिध्नात्मक विध्ि का प्रयोग करेंगे। ;अथार्त्् ् च ⇒ ् ुद्ध उपरोक्त कथन का प्रतिध्नात्मक कथन नीचे लिखा है, ‘यदि द एक सम पूणा±क है, तो द2 भी एक सम पूणा±क है।’ द एक सम पूणा±क है इसलिए द त्र 2ाए जहाँ ा एक पूणा±क है। अतः द2 त्र 4ा2 त्र 2;2ा2द्ध निष्कषर्तः द2 सम है। उदाहरण 20 निम्नलिख्िात कथन के लिए अनिवायर् तथा पयार्प्त प्रतिबंधें को ज्ञात कीजिए। जरू यदि आप 80 ाउ प्रति घंटा की अध्िक गति से गाड़ी चलाते हैं तो आपको जुमार्ना लगेगा। हल मान लीजिए कि च और ु निम्नलिख्िात कथनों को प्रकट करते हैं। चरू यदि आप 80 ाउ प्रति घंटा की अध्िक गति से गाड़ी चलाते हैं। ुरू आपको जुमार्ना होगा। प्रतिबंध् यदि च तो ु दशार्ता है कि चए ु के लिए पयार्प्त प्रतिबंध् है। अथार्त्् जुमार्ना होने के लिए, 80 कि.मी. प्रति घंटा की अध्िक गति से गाड़ी चलाना पयार्प्त कथन है। यहाँ श्80 ाउ प्रतिघंटा की अध्िक गति से गाड़ी चलानाश् पयार्प्त प्रतिबंध् है। इसी प्रकार, यदि च तब ु दशार्ता है कि ुए च के लिए अनिवायर् प्रतिबंध् है। अथार्त्् श्जब आप 80 ाउ प्रतिघंटा की अध्िक गति से गाड़ी चलाते हैं तो अनिवायर् रूप से आपको जुमार्ना होगा।श् यहाँ श्जुमार्ना होनाश् अनिवायर् प्रतिबंध् है। अध्याय 14 पर विविध् प्रश्नावली 1. निम्नलिख्िात कथनों के निषेध्न लिख्िाएः ;पद्ध प्रत्येक ध्न वास्तविक संख्या ग के लिए, संख्या ग दृ 1 भी ध्न संख्या है। ;पपद्ध सभी बिल्िलयाँ खरोंचती हैं। ;पपपद्ध प्रत्येक वास्तविक संख्या ग के लिए या तो ग झ 1 या ग ढ 1 ;पअद्ध एक ऐसी संख्या ग का अस्ितत्व है कि 0 ढ ग ढ 1 2.निम्नलिख्िात सप्रतिबंध् कथनों ;अंतभार्वद्ध में से प्रत्येक का विलोम तथा प्रतिध्नात्मक कथन लिख्िाएः ;पद्ध एक ध्न पूणा±क अभाज्य संख्या है केवल यदि 1 और पूणा±क स्वयं के अतिरिक्त उसका कोइर् अन्य भाजक नहीं है। ;पपद्ध मैं समुद्र तट पर जाता हूँ जब कभी ध्ूप वाला दिन होता है। ;पपपद्ध यदि बाहर गरम है, तो आपको प्यास लगती है। 3.निम्नलिख्िात कथनों में से प्रत्येक को फ्यदि चए तो ुय् के रूप में लिख्िाए। ;पद्ध सवर्र पर लाग आन करने के लिए पासवडर् का होना आवश्यक है। ;पपद्ध जब कभी वषार् होती है यातायात में अवरोध् उत्पन्न होता है। ;पपपद्ध आप वेबसाइट में प्रवेश कर सकते हैं केवल यदि आपने निधर्रित शुल्क का भुगतान किया हो। 4.निम्नलिख्िात कथनों में से प्रत्येक को श्च यदि और केवल यदि ुश् के रूप में पुनः लिख्िाएः ;पद्ध यदि आप दूरदशर्न ;टेलीविज़नद्ध देखते हैं, तो आपका मन मुक्त होता है तथा यदि आपका मन मुक्त है, तो आप दूरदशर्न देखते हैं। ;पपद्ध आपके द्वारा । - ग्रेड प्राप्त करने के लिए यह अनिवायर् और पयार्प्त है कि आप गृहकायर् नियमित रूप से करते हैं। ;पपपद्ध यदि एक चतुभुर्ज समान कोण्िाक है, तो वह एक आयत होता है तथा यदि एक चतुभुर्ज आयत है, तो वह समान कोण्िाक होता है। 5.नीचे दो कथन दिए हैं, च रू 25 संख्या 5 का एक गुणज है। ु रू 25 संख्या 8 का एक गुणज है। उपरोक्त कथनों का संयोजक ‘और’ तथा ‘या’ द्वारा संयोजक करके मिश्र कथन लिख्िाए। दोनों दशाओं में प्राप्त मिश्र कथनों की वैध्ता जाँचिए। 6. नीचे लिखे कथनों की वैध्ता की जाँच उनके सामने लिख्िात विध्ि द्वारा कीजिए। ;पद्ध च रू एक अपरिमेय संख्या और एक परिमेय संख्या का योगपफल अपरिमेय होता है ;विरोधोक्ित विध्िद्ध। ;पपद्ध ु रू यदि द एक ऐसी वास्तविक संख्या है कि द झ 3ए तो द2 झ 9 ;विरोधेक्ित विध्िद्ध। 7.निम्नलिख्िात कथन को पाँच भ्िान्न - भ्िान्न तरीकों से इस प्रकार व्यक्त कीजिए कि उनके अथर् समान हों, ु रू‘यदि एक त्रिाभुज समान कोण्िाक है, तो वह एक अध्िक कोण त्रिाभुज है।’ सारांश इस अध्याय में हमने निम्नलिख्िात बिंदुओं की व्याख्या की हैः ऽ गण्िातीय रूप से स्वीकायर् कथन एक ऐसा वाक्य है जो या तो सत्य हो या असत्य हो। ऽ निम्नलिख्िात पदों की व्याख्या की हैः दृ किसी कथन का निषेध्न: यदि च एक कथन है तो ‘च असत्य है’ कथन च का निषेध् न है, इसको प्रतीक ∼ च से प्रकट करते हैं। दृ मिश्र कथन और संगत घटक कथनः दो या अध्िक सरल कथनों के संयोजन से बने कथन को मिश्र कथन कहते हैं। सरल कथनों को मिश्र कथन के घटक कथन कहते हैं। दृ संयोजक ‘और’ तथा ‘या’ की तथा वाक्यांश ‘एक ऐसे का अस्ितत्व है’ तथा ‘प्रत्येक के लिए’ की भूमिका। दृ अंतभार्व ;प्रतिबंध्द्ध ‘यदि’, ‘केवल यदि’ तथा ‘यदि और केवल यदि’ कथन ‘यदि’ च तो ु को निम्नलिख्िात तरीकों से लिखा जा सकता है, दृ च अंतभार्व ु ;प्रतीक च ⇒ ु से निरूपितद्ध दृ च पयार्प्त प्रतिबंध् है ु के लिए। दृ ु अनिवायर् प्रतिबंध् है च के लिए। दृ च केवल यदि ु दृ ∼ु अंतभार्व ∼च दृ कथन च ⇒ ु का प्रतिध्नात्मक कथन ∼ ु ⇒ ∼च कथन च ⇒ ु का विलोम कथन ु ⇒ च है। कथन च ⇒ ु तथा इसके विलोम को संयुक्त रूप से कथन च यदि और केवल यदि ु’ कहते हैं। ऽ किसी कथन की वैध्ता ज्ञात करने के लिए निम्नलिख्िात विध्ियों का प्रयोग करते हैं। ;पद्ध प्रत्यक्ष विध्ि ;पपद्ध प्रतिध्नात्मक विध्ि ;पपपद्ध विरोधेक्ित विध्ि ;पअद्ध प्रत्युदाहरण के प्रयोग की विध्ि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तवर्फशास्त्रा पर पहला शोध् - प्रबन्ध् ।तपेजवजसम ;384 इर्॰ पू॰μ322 इर्॰पू॰द्ध द्वारा लिखा गया था। यह शोध् - प्रबन्ध् निगमनात्मक विवेचन के लिए नियमों का एक संग्रह था, जिसका अभ्िाप्राय ज्ञान की प्रत्येक शाखा के अध्ययन हेतु एक आधर प्रदान करना था। इसके बाद सत्राहवीं सदी में जमर्न गण्िातज्ञ ळण् ॅण् स्मपइदपज्र ;1646 दृ 1716 इर्॰द्ध ने निगमनात्मक विवेचन की प्रिया को यांत्रिाक बनाने के लिए तवर्फशास्त्रा में प्रतीकों के प्रयोग की कल्पना की थी। उन्नीसवीं सदी में अंग्रेश गण्िातज्ञ ळमवतहम ठववसम ;1815दृ1864 इर्॰द्ध तथा ।नहनेजने क्म डवतहंद ;1806दृ1871 इर्॰द्ध ने उनकी कल्पना को साकार किया और प्रतीकात्मक तवर्फशास्त्रा विषय की स्थापना की। कृ ऽ कृ

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Ganit





अध्याय 14

णितीय विवेचन

(Mathematical Reasoning)

"There are few things which we know which are not capable of mathematical reasoning and when these can not, it is a sign that our knowledge of them is very small and confused and where a mathematical reasoning can be had, it is as great a folly to make use of another, as to grope for a thing in the dark when you have a candle stick standing by you. – Arthenbot"


14.1 भूमिका (Introduction)

स अध्याय में हम गणितीय विवेचन से संबंधित कुछ मौलिक धारणाओं पर चर्चा करेंगे। हमें ज्ञात है कि मनुष्य, अनेकों सहस्त्राब्दियों में, निम्न स्तर की प्रजातियों से, विकसित हुआ है। मनुष्य में विवेचन करने के गुण ने उसे अन्य प्रजातियों से श्रेष्ठ बनाया है। एक व्यक्ति इस गुण को कितनी अच्छी तरह प्रयोग कर सकता है, उसके विवेचन क्षमता पर निर्भर करता है। इस क्षमता को केसे विकसित किया जाए? यहाँ पर हम विवेचन की प्रक्रिया की चर्चा विशेष रूप से गणित के संदर्भ में करेंगे। गणितीय भाषा में विवेचन दो प्रकार के होते हैं- आगमनात्मक (आगमिक) विवेचन तथा निगमनात्मक (निगमनिक) विवेचन। गणितीय आगमन (Mathematical Induction) के संदर्भ में हम आगमनात्मक विवेचन की चर्चा पहले कर चुके हैं। इस अध्याय में हम कुछ मूलभूत निगमनात्मक विवेचन पर चर्चा करेंगे।

George Booke 
(1815 . 1864 A.D.)

14.2 कथन (Statements)

गणितीय विवेचन की मौलिक इकाई गणितीय कथन की संकल्पना है।

हम निम्नलिखित दो वाक्यों में प्रारंभ करेंगे।

"सन् 2003 में भारत की राष्ट्रपति एक महिला थीं।"

"किसी हाथी का भार एक मनुष्य के भार से अधिक होता है।"

इन वाक्यों को पढ़ते ही हम तुरन्त निर्णय ले सकते हैं कि प्रथम वाक्य गलत (असत्य) तथा दूसरा वाक्य सही (सत्य) है। इस संबंध में कोई भ्रांति नहीं है। गणित में एेसे वाक्यों को कथन
कहते हैं।

इसके विपरीत निम्नलिखित वाक्य पर विचार कीजिएः

"महिलाएँ, पुरुषों से अधिक बुद्धिमान होती हैं।"

कुछ लोगों के विचार से यह वाक्य सत्य हो सकता है परंतु कुछ अन्य इससे असहमत हो सकते हैं। इस वाक्य के बारे में हम यह नहीं कह सकते कि यह सत्य या असत्य है। इसका तात्पर्य है कि यह वाक्य द्वयर्थक है।

इस प्रकार का वाक्य गणित में कथन के रूप में स्वीकार्य नहीं है।

‘एक वाक्य गणितानुसार कथन कहलाता है। यदि वह या तो सत्य हो अथवा असत्य हो परंतु दोनों (सत्य और असत्य) न हो।’ अब जब भी हम कथन का उल्लेख करेंगे हमारा तात्पर्य "गणितानुसार स्वीकार्य" कथन से होगा।

गणित के अध्ययन के दौरान हमें इस प्रकार के अनेक वाक्य मिलते हैं। कुछ उदाहरण इस
प्रकार हैंः

दो धन दो बराबर चार।

दो धन संख्याओं का योगफल धन होता है।

सभी अभाज्य संख्याएँ विषम संख्याएं होती हैं।

इनमें से प्रथम दो वाक्य सत्य हैं और तीसरा वाक्य असत्य है। इन वाक्यों के बारे में कोई भी संदिग्धता नहीं है। अत:ये (वाक्य) कथन हैं।

क्या आप किसी एेसे वाक्य का उदाहरण सोच सकते हैं जो अस्पष्ट हो? निम्नलिखित वाक्य पर विचार कीजिएः

x और y का योगफल 0 से अधिक है।

यहाँ हम यह सुनिश्चित नहीं कर सकते कि वाक्य सत्य है अथवा असत्य है, जब तक हमें यह ज्ञात न हो कि x और y क्या हैं। उदाहरणार्थ, x = 1, y = –3 के लिए यह असत्य है तथा
x
= 1, y = 0 के लिए यह सत्य है। अत:यह वाक्य एक कथन नहीं है। किंतु निम्नलिखित वाक्य एक कथन है

प्रत्येक प्राकृत संख्याओं x और y का योगफल 0 से अधिक है, एक कथन है।

अब निम्नलिखित वाक्यों पर विचार कीजिएः

आहा, कितना सुंदर!

द्वार (दरवाजा) खोलिए।

आप कहाँ जा रहे हैं?

क्या ये कथन हैं? नहीं, क्योंकि पहला विस्मयादिबोधक (विस्मयबोधक) वाक्य है, दूसरा एक आदेश है तथा तीसरा एक प्रश्न है। गणितीय भाषा में इनमें से किसी को भी कथन नहीं माना जाता है। एेसे वाक्य जिनमें चर (अनिश्चित) समय हो जैसे "आज", "कल" "बीता हुआ कल", कथन नहीं होते हैं। यह इसलिए कि हमें यह ज्ञात नहीं होता कि किसी समय की चर्चा हो रही है।
उदाहरणार्थ, वाक्य

‘कल शुक्रवार है।’

एक कथन नहीं है।

यह वाक्य किसी बृहस्पतिवार के लिए तो सत्य होगा परंतु अन्य दिनों के लिए सत्य नहीं होगा। यह बात उन वाक्यों के लिए भी लागू होती है जिनमें सर्वनाम का प्रयोग बिना संबंधित संज्ञा को बताए किया गया हो और एेसे वाक्यों के लिए भी जिनमें चर (अनिश्चित) स्थानों का प्रयोग किया गया हो, जैसे ‘यहाँ’, ‘वहाँ’ आदि। तात्पर्य यह हुआ कि वाक्य

वह गणित की एक स्नातक है

कश्मीर यहाँ से बहुत दूर है।

कथन नहीं है।

यहाँ एक अन्य वाक्य पर विचार कीजिएः

एक महीने (माह) में 40 दिन होते हैं।

क्या आप इसे एक कथन कहेंगे? नोट कीजिए कि यहाँ पर उल्लिखित समय "अनिश्चित (चर)" है अर्थात्् 12 महीनों में से कोई एक। किंतु हमें ज्ञात है कि यह वाक्य सदैव (महीने का ध्यान किए बिना) असत्य होता है क्योंकि एक महीने में दिनों की संख्या 31 से अधिक नहीं हो सकती है। अत:यह वाक्य एक कथन है। इसलिए यह तथ्य कि एक वाक्य या तो सत्य हो या असत्य हो किंतु दोनों न हो सके एक कथन बनाता है।

सामान्यत:हम कथनों को छोटे अक्षर p, q, r, ... से निरूपित (निर्दिष्ट) करते हैं

उदाहरण के लिए, कथन "आग सदैव गर्म होती है" को हम p द्वारा दर्शाते हैं। इस बात को निम्नलिखित प्रकार से भी दर्शाते हैंः

p :आग सदैव गर्म होती है।

उदाहरण 1 जाँचिए कि क्या निम्नलिखित वाक्य कथन हैं। अपने उत्तर को कारण सहित लिखिए।

(i) 8, 6 से कम है।

(ii) प्रत्येक समुच्चय एक परिमित समुच्चय होता है।

(iii) सूर्य एक तारा है।

(iv) गणित एक कौतुक है।

(v) बिना बादल के वर्षा नहीं होती।

(vi) यहाँ से चेन्नई कितनी दूर है?

हल (i) यह वाक्य असत्य है क्योंकि 8 अधिक होता है 6 से। अत:यह एक कथन है।

(ii) यह वाक्य भी सदैव असत्य है क्योंकि एेसे भी समुच्चय हैं जो कि परिमित नहीं होते हैं अत:यह एक कथन है।

(iii) यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है कि सूर्य एक तारा है और इसलिए यह वाक्य सत्य है। अत:यह एक कथन है।

(iv) यह वाक्य व्यक्तिनिष्ठ है क्योंकि जिन्हें गणित में रुचि है उनके लिए यह कौतुक हो सकता है किंतु अन्य के लिए एेसा नहीं हो सकता है। इसका अर्थ हुआ कि यह वाक्य सत्य या असत्य नहीं है। अत:यह एक कथन नहीं है।

(v) यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्राकृतिक तथ्य है कि वर्षा होने से पहले बादल बनते हैं। इसलिए यह सदैव सत्य है। अत:यह एक कथन है।

(vi) यह एक प्रश्न है, जिसमें शब्द ‘यहाँ’ भी आता है। अत:यह एक कथन नहीं है।

उपरोक्त उदाहरण यह दर्शाते हैं कि जब कभी हम किसी वाक्य को कथन कहते हैं तो हमें यह भी बतलाना चाहिए कि एेसा क्यों है प्रश्न के उत्तर की अपेक्षा यह ‘क्यों’ अधिक महत्वपूर्ण है।

प्रश्नावली 14.1

1. निम्नलिखित वाक्यों में से कौन सा कथन हैं? अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइए।

(i) एक महीने में 35 दिन होते हैं।

(ii) गणित एक कठिन विषय है।

(iii) 5 और 7 का योगफल 10 से अधिक है।

(iv) किसी संख्या का वर्ग एक सम संख्या होती है।

(v) किसी चतुर्भुज की भुजाएँ बराबर (समान) लंबाई की होती हैं।

(vi) इस प्रश्न का उत्तर दीजिए।

(vii) -1 और 8 का गुणनफल 8 है।

(viii) किसी त्रिभुज के सभी अंत:कोणों का योगफल 180 होता है।

(ix) आज एक तूफानी दिन है।

(x) सभी वास्तविक संख्याएं सम्मिश्र संख्याएँ होती हैं।

2. वाक्यों के तीन एेसे उदाहरण दीजिए जो कथन नही हैं। उत्तर के लिए कारण भी बतलाइए।


14.3 पूर्व ज्ञात कथनों से नए कथन बनाना (New Statements from Old)

अब हम पूर्व ज्ञात कथानों से नए कथन बनाने की विधि पर विचार करेंगे। सन् 1854 में एक अँगरेज़  गणितज्ञ Georg Boole ने अपनी पुस्तक The laws of Thoughts में इन विधियों पर विचार-विमर्श किया है। यहाँ, हम दो तकनीकों पर विचार-विमर्श करेंगे।

कथन के अध्ययन में प्रथम चरण के रूप में हम एक महत्वपूर्ण तकनीक पर दृष्टि डालेंगे जिसके प्रयोग से हम गणितीय वाक्यों की अपनी समझ को गहन कर सकेंगे। इस तकनीक में हम अपने आप से न केवल यह प्रश्न पूछेंगे कि एक दिए हुए वाक्य के सत्य होने का क्या अर्थ होता है बल्कि यह भी कि उस वाक्य के सत्य नहीं होने का क्या अर्थ होता है।

14.3.1 किसी कथन का निषेधन (Negation of a statement)

किसी कथन का नकारना उस कथन का निषेधन कहलाता है।

वाक्य ‘नई दिल्ली एक नगर है।’

इसका निषेधन निम्नलिखित प्रकार से लिखा जा सकता है।

यह वस्तुस्थिति नहीं है कि नई दिल्ली एक नगर है।’ इसे इस प्रकार भी लिख सकते हैं। कि

‘यह असत्य है कि नई दिल्ली एक नगर है।’

सरलता से यह भी कह सकते हैं कि

‘नई दिल्ली एक नगर नहीं है।’

परिभाषा 1 यदि p एक कथन है, तो p का निषेधन वह कथन है जो p को नकारता है और इसे प्रतीक ~p से दर्शाते (निर्दिष्ट करते) हैं जिसे "p-नहीं" पढ़ते हैं।

टिप्पणी किसी कथन के निषेधन की रचना करते समय ‘यह वस्तु स्थिति नहीं है’ अथवा ‘यह असत्य है कि’ यहाँ एक उदाहरण से यह स्पष्ट किया गया है कि किस प्रकार एक कथन के निषेधन का अवलोकन करके, हम उसके संबंध में अपनी समझ सुधार सकते हैं।

वाक्य ‘जर्मनी में हर कोई (प्रत्येक व्यक्ति) जर्मन भाषा बोलता है।’ पर विचार करें।

इस वाक्य को नकारने से हमें वाक्य ‘जर्मनी में हर कोई जर्मन भाषा नहीं बोलता है।’ इसका यह तात्पर्य नहीं हुआ कि ‘जर्मनी में कोई भी व्यक्ति जर्मन भाषा नहीं बोलता है।’ यह केवल यह बतलाता है कि ‘जर्मनी में कम से कम एक व्यक्ति एेसा है जो जर्मन भाषा नहीं बोलता है।

हम कुछ और उदाहरणों पर विचार करेंगे।

उदाहरण 2 निम्नलिखित कथनों का निषेधन लिखिए।

(i) किसी आयत के दोनों विकर्णों की लंबाई समान होती है।

(ii) एक परिमेय संख्या है।

हल (i) यह कथन यह बतलाता है कि सभी आयतों में दोनों विकर्णों की लंबाई समान होती है। इसका तत्पर्य यह हुआ कि यदि हम कोई आयत लें तो इसके दोनों विकर्णे की लंबाई समान होगी। इस कथन का निषेधन, "यह असत्य है कि किसी आयत के दोनों विकर्णों की लंबाई समान होती है" है। अर्थात्् ‘कम से कम एक आयत एेसा है, जिसके दोनाें विकर्णों की लंबाई समान नहीं है।’

(ii) इस कथन का निषेधन निम्नलिखित प्रकार लिखा जा सकता है

‘यह वस्तुस्थिति नहीं है कि एक परिमेय संख्या है।’

इसे निम्नलिखित प्रकार से भी लिख सकते हैंः

एक परिमेय संख्या नहीं है।’

उदाहरण 3 निम्नलिखित कथन के निषेधन लिखिए और जाँचिए कि क्या परिणामी कथन सत्य है?

(i) अास्ट्रेलिया एक महाद्वीप है।

(ii) एेसे किसी चतुर्भुज का अस्तित्व नहीं है जिसकी चारों भुजाएँ बराबर हों।

(iii) प्रत्येक प्राकृत संख्या 0 से अधिक होती है।

(iv) 3 और 4 का योगफल 9 है।

हल (i) ‘यह असत्य है कि आस्ट्रेलिया एक महाद्वीप है’, दिये हुए कथन का निषेधन है। इसे इस प्रकार भी लिख सकते हैं कि ‘आस्ट्रेलिया एक महाद्वीप नहीं है।’ हमें ज्ञात है कि यह कथन असत्य है।

(ii) इस कथन का निषेधन इस प्रकार है, ‘यह वस्तुस्थिति नहीं है कि किसी चतुर्भुज का अस्तित्व नहीं है जिसकी चारों भुजाएँ बराबर हैं।’

इसका तात्पर्य हुआ कि ‘एक एेसे चतुर्भुज का अस्तित्व है, जिसकी चारों भुजाएँ बराबर होती हैं। यह कथन सत्य है क्योंकि हमें ज्ञात है कि वर्ग एक एेसा चतुर्भुज होता है, जिसकी चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।

(iii) इस कथन का निषेधन इस प्रकार है, ‘यह असत्य है कि प्रत्येक प्राकृत संख्या 0 से
अधिक होती हैं।

इसको इस प्रकार भी लिख सकते हैं कि ‘एक एेसी प्राकृत संख्या का अस्तित्व है जो 0 से अधिक नहीं है।’ यह कथन असत्य है।

(iv) अभीष्ट निषेधन इस प्रकार है, ‘यह असत्य है कि 3 और 4 का योगफल 9 है।’

इसे इस प्रकार भी लिखा जा सकता है कि, ‘3 और 4 का योगफल 9 नहीं हेाता है।’ यह कथन सत्य है।

14.3.2 मिश्र कथन (संयुक्त कथन) 

(Compound statements) ‘और (तथा)’, ‘या (अथवा)’ आदि प्रकार के संयोजक शब्दों द्वारा एक या एक से अधिक कथन को जोड़ कर अनेक गणितीय कथन प्राप्त किए जा सकते हैं। निम्नलिखित कथन पर विचार कीजिएः

‘बल्ब या बिजली के तार में कुछ खराबी है’ यह कथन बतलाता है कि बल्ब में कुछ खराबी है या बिजली के तार में कुछ खराबी है। इसका तात्पर्य यह है कि प्रदत्त कथन वास्तव में दो संक्षिप्त (छोटे) कथन से मिल कर बना है, जो इस प्रकार हैंः

q: ‘बल्ब में कुछ खराबी है’

r: बिजली के तार में कुछ खराबी है’ और

जिनको शब्द ‘या’ द्वारा जोड़ा गया है।

अब मान लीजिए कि निम्नलिखित दो कथन दिए हैं,

p: 7 एक विषम संख्या है।’

q: 7 एक अभाज्य संख्या है।’

इन दोनों को शब्द ‘और’ द्वारा जोड़ने से निम्नलिखित कथन प्राप्त होगा

r: 7 विषम और अभाज्य, दोनों ही प्रकार की संख्या है।’

यह एक मिश्र कथन है।

उपरोक्त परिचर्चा से निम्नलिखित परिभाषा प्राप्त होती हैः

परिभाषा 2 एक मिश्र कथन वह है, जो दो या दो से अधिक एेसे कथनों द्वारा बना हो, इस स्थिति में प्रत्येक कथन को घटक कथन कहते हैं।

आइए अब हम कुछ उदाहरणों पर विचार करें।

उदाहरण 4 निम्नलिखित मिश्र कथन के घटक कथन ज्ञात कीजिए।

(i) आकाश नीला है और घास हरी है।

(ii) वर्षा हो रही है और ठ.डक है।

(iii) सभी परिमेय संख्याएँ, वास्तविक संख्याएँ होती हैं और सभी वास्तविक संख्याएँ, सम्मिश्र संख्याएँ होती हैं।

(iv) 0 एक धन संख्या है या एक ऋण संख्या है।

हल इनमें से प्रत्येक पर हम बारी-बारी से विचार करेंगे।

(i) घटक कथन इस प्रकार हैं

p: आकाश नीला है।

q: घास हरी है।

संयोजक शब्द ‘और’ है।

(ii) घटक कथन नीचे दिए गए हैं,

p: वर्षा हो रही है।

q: ठंडक है।

संयोजक शब्द ‘और’ है।

(iii) घटक कथन नीचे लिखे हैं,

p: सभी परिमेय संख्याएँ वास्तविक संख्याएँ होती हैं।

q: सभी वास्तविक संख्याएँ सम्मिश्र संख्याएँ होती हैं।

संयोजक शब्द ‘और’ है।

(iv) घटक कथन इस प्रकार हैं।

p:  एक धन संख्या हैं।

q:  एक ऋण संख्या है।

संयोजक शब्द ‘या’ है।

उदाहरण 5 निम्नलिखित कथन के घटक कथन ज्ञात कीजिए और जाँचिए कि वे सत्य हैं या नहीं।

(i) एक वर्ग एक चतुर्भुज होता है और इसकी चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।

(ii) सभी अभाज्य संख्याएँ या तो सम या विषम होती हैं।

(iii) एक व्यक्ति, जिसने गणित या कंप्यूटर विज्ञान का चयन किया है, कंप्यूटर अनुप्रयोग में स्नाकोत्तर डिग्री पाठ्यक्रम (MCA) में प्रवेश ले सकता है।

(iv) चंडीगढ़ हरिणाणा और उत्तर प्रदेश की राजधानी है।

(v एक परिमेय संख्या या एक अपरिमेय संख्या है।

(vi) 2, 4, और 8 का एक गुणज 24 है।

हल (i) यहाँ घटक कथन इस प्रकार हैं,

p: ‘एक वर्ग एक चतुर्भुज होता है।

q: एक वर्ग की चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।

हमें ज्ञात है कि दोनों कथन सत्य हैं। यहाँ पर संयोजक शब्द ‘और’ है।

(ii) यहाँ घटक कथन इस प्रकार हैं,

p: सभी अभाज्य संख्याएँ सम होती हैं।

q: सभी अभाज्य संख्याएँ विषम होती हैं।

यह दोनाें कथन असत्य हैं। यहाँ संयोजक शब्द ‘या’ है।

(iii) यहाँ घटक कथन नीचे लिखे हैं,

p: एक व्यक्ति, जिसने गणित का चयन किया है, एम.सी.ए. में प्रवेश ले सकता है।

q: एक व्यक्ति, जिसने कंप्यूटर विज्ञान का चयन किया है, एम॰सी॰ए॰ में प्रवेश ले सकता है।

यह दोनों ही कथन सत्य हैं। यहाँ संयोजक शब्द ‘या’ है।

(iv) यहाँ घटक कथन इस प्रकार हैं,

p: चंडीगढ़ हरियाणा की राजधानी है।’

q: चंडीगढ़ उत्तर प्रदेश की राजधानी है।’

इस प्रश्न में प्रथम घटक कथन सत्य है और दूसरा असत्य है। यहाँ संयोजक शब्द ‘और’ है।

(v) अभीष्ट घटक कथन नीचे लिख हैं,

p:एक परिमेय संख्या है।

q:एक अपरिमेय संख्या है।

यहाँ प्रथम घटक कथन असत्य है और दूसरा सत्य है। यहाँ संयोजक शब्द ‘या’ है।

(vi) इसमें घटक कथन नीचे लिखे हैं,

p: 2 का एक गुणज 24 है।

q: 4 का एक गुणज 24 है।

r: 8 का एक गुणज 24 है।

यह तीनों ही घटक कथन सत्य है। यहाँ संयोजक शब्द ‘और’ है।

अत:हम देखते हैं कि मिश्र कथन वास्तव में दो या दो से अधिक कथनों को ‘और’, ‘या’ प्रकार के शब्दों द्वारा जोड़ने से बनते हैं। ये शब्द गणित में विशिष्ट महत्व रखते हैं। अगले अनुच्छेद में हम इनके बारे में परिचर्चा करेंगे।

प्रश्नावली 14.2

1. निम्नलिखित कथन के निषेधन लिखिएः

(i) चेन्नई, तमिलनाडु की राजधानी है।

(ii)एक सम्मिश्र संख्या नहीं है।

(iii) सभी त्रिभुज समबाहु त्रिभुज नहीं होते हैं।

(iv) संख्या 2 संख्या 7 से अधिक है।

(v) प्रतयेक प्राकृत संख्या एक पूर्णांक होती है।

2. क्या निम्नलिखित कथन युग्म (कथन के जोड़े) एक दूसरे के निषेधन हैं?

(i) संख्या x एक परिमेय संख्या नहीं है।

संख्या x एक अपरिमेय संख्या नहीं है।

(ii) संख्या x एक परिमेय संख्या है।

संख्या x एक अपरिमेय संख्या है।

3. निम्नलिखित मिश्र कथन के घटक कथन ज्ञात कीजिए और जाँचिए कि वे सत्य हैं या असत्य हैं?

(i) संख्या 3 अभाज्य है या विषम है।

(ii) समस्त (सभी) पूर्णांक धन हैं या ऋण हैं।

(iii) संख्या 100, संख्याओं 3, 11 और 5 से भाज्य है


14.4 विशेष शब्द/वाक्यांश (Special WordsQ/Phrases)

मिश्र कथन में प्रयुक्त ‘और’, ‘या’ प्रकार के कुछ संयोजक शब्दों का प्रयोग बहुधा गणितीय कथन में होता है। इन्हें ‘संयोजक’ कहते हैं। जब कभी हम मिश्र कथन का प्रयोग करते हैं तब यह आवश्यक हो जाता है कि हम इन शब्दों की भूमिका समझ सकें।

यहाँ हम इस पर परिचर्चा करेंगे।


14.4.1 संयोजक ‘और’ (The word 'And') 

संयोजक ‘और’ के प्रयोग द्वारा बने निम्नलिखित मिश्र कथन पर विचार करते हैंः

p: किसी बिंदु का एक स्थान होता है और उसकी स्थिति निर्धारित की जा सकती है।

इस कथन को निम्नलिखित दो घटक कथन में विघटित किया जा सकता हैः

q: किसी बिंदु का एक स्थान होता है।

r: उसकी स्थिति निर्धारित की जा सकती है।

उपरोक्त दोनों कथन सत्य हैं।

एक अन्य कथन पर विचार कीजिए।

p: संख्या 42 संख्याओं 5, 6 और 7 से भाज्य है।

इस कथन का विघटन इस प्रकार है,

q: संख्या 42 संख्या 5 से भाज्य है।

r: संख्या 42 संख्या 6 से भाज्य है।

s: संख्या 42 संख्या 7 से भाज्य है।

यहाँ हमें ज्ञात है कि प्रथम कथन असत्य है और शेष दो सत्य हैं।

अत:हमें निम्नलिखित नियम प्राप्त होता है

1. संयोजक "और" के प्रयोग द्वारा बना मिश्र कथन सत्य होगा यदि उसके सभी घटक कथन सत्य हों।

2. संयोजक "और" के प्रयोग द्वारा बना मिश्र कथन असत्य होगा यदि इसका एक भी घटक कथन असत्य हो (इसमें वह स्थिति भी सम्मिलित है जिसमें इसके कुछ घटक कथन या सभी घटक कथन असत्य हों।)

उदाहरण 6 निम्नलिखित मिश्र कथन के घटक कथन लिखिए और जाँचिए कि मिश्र कथन सत्य है अथवा असत्य है।

(i) एक रेखा सीधी होती है और दोनों दिशाओं में अनंत तक विस्तृत होती है।

(ii) 0 प्रत्येक धन पूर्णांक और प्रत्येक ऋण पूर्णांक से कम होता है।

(iii) प्रत्येक सजीव के दो पैर और दो आँखें होती हैं।

हल (i) घटक कथन निम्नलिखित हैं,

p: एक रेखा सीधी होती हैं।’

q: एक रेखा दोनों दिशाओं में अनंत तक विस्तृत होती है।

उपरोक्त दोनों कथन सत्य हैं और इसलिए मिश्र कथन भी सत्य है।

(ii) यहाँ घटक कथन इस प्रकार हैं,

p:  प्रत्येक धन पूर्णांक से कम होता है।

q:  प्रत्येक ऋण पूर्णांक से कम होता है।

इनमें से दूसरा कथन असत्य है। अत:मिश्र कथन भी असत्य है।

(iii) अभीष्ट घटक कथन नीचे लिखे हैं,

‘प्रत्येक सजीव के दो पैर होते हैं।’

‘प्रत्येक सजीव की दो आँखें होती हैं।’

ये दोनों ही कथन असत्य हैं। अत:मिश्र कथन भी असत्य है।

अब निम्नलिखित कथन पर विचार कीजिएः

p: एेलकोहॉल और पानी के मिश्रण को रासायनिक विधियों द्वारा अलग-अलग किया जा सकता है।’

इस कथन को शब्द "और" से प्रयुक्त मिश्र कथन नहीं माना जा सकता है। यहाँ पर शब्द "और" दो वस्तुओं, एेलकोहॉल तथा पानी का उल्लेख करता है।

इससे हम एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकालते हैं जो नीचे लिखी टिप्पणी में दिया हैः

टिप्पणी यह नहीं समझना चाहिए कि शब्द ‘और’ से प्रयुक्त वाक्य सदैव एक मिश्र कथन होता है जैसा कि उपरोक्त उदाहरण में स्पष्ट किया गया है। यहाँ पर शब्द ‘और’, दो वाक्यों के संयोजन के लिए प्रयुक्त नहीं है।

14.4.2 ब्द ‘या’ से प्रयुक्त वाक्य 

(The word 'Or') नीचे लिखे कथन पर विचार कीजिए।

p: एक समतल पर स्थित दो रेखाएँ या तो एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती हैं या 
वे समांतर होती हैं।

हमें ज्ञात है कि यह एक सत्य कथन है। इसका क्या अर्थ है? इसका अर्थ यह है कि एक समतल पर स्थित दो रेखाएँ यदि एक दूसरे को काटती हैं, तो वे समांतर नहीं हैं। इसके विपरीत यदि एेसी दोनों रेखाएँ समांतर नहीं हैं, तो वे एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती है’, अर्थात  यह कथन दोनों ही स्थितियों में सत्य है।

शब्द ‘या’ से प्रयुक्त कथन समझने के लिए हम पहले यह देखते हैं कि अंग्रेजी  भाषा में ‘या’ का प्रयोग दो प्रकार से किया जाता है।

पहले हम निम्नलिखित कथन पर विचार करेंगेः

‘किसी आहार गृह (रेस्ताराँ) में एक ‘थाली’ के साथ आइसक्रीम या पेप्सी भी उपलब्ध की
जाती है।’

इसका अर्थ यह हुआ कि एक व्यक्ति जो आइसक्रीम नहीं चाहता वह ‘थाली’ के साथ पेप्सी ले सकता है अन्यथा वह ‘थाली’ के साथ आइसक्रीम ले सकता है। अर्थात् यदि जो पेप्सी नहीं चाहते वे आइसक्रीम ले सकते हैं। किंतु एक व्यक्ति दोनों वस्तुएँ अर्थात् आइसक्रीम और पेप्सी नहीं ले सकता। यह ‘अपवर्जित’ ‘या कहलाता है। यहाँ एक अन्य कथन पर विचार कीजिए।

‘एक विद्यार्थी, जिसने जीवविज्ञान या रसायन विज्ञान विषयों का चयन किया है वह सूक्ष्म जीवविज्ञान के स्नाकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकता है।’

यहाँ पर हम यह मानते हैं कि वे विद्यार्थी जिन्होंने जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान दोनों ही विषयों का चयन किया है। वे सूक्ष्म जीवविज्ञान पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं, साथ ही साथ वे विद्यार्थी जिन्होंने इन विषयों में से केवल एक विषय का चयन किया है वे भी इस पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं। इस स्थिति में हम अंतर्विष्ट ‘या का प्रयोग कर रहे हैं।

उपरोक्त दो प्रयोगों का अंतर जान लेना महत्वपूर्ण है क्योंकि हम इसकी आवश्यकता उस समय जब हम यह जाँचेंगे कि कोई कथन सत्य है अथवा नहीं।

आइए हम एक उदाहरण पर विचार करें।

उदाहरण 7 निम्नलिखित प्रत्येक कथन में ज्ञात कीजिए क्या ‘अंतर्विष्ट’ ‘या’ अथवा ‘अपवर्जित’ ‘या’ का प्रयोग किया गया है। अपना उत्तर कारण सहित बतलाइए।

(i) किसी देश में प्रवेश करने के लिए आपको पासपोर्ट या मतदाता पहचानपत्र की आवश्यकता पड़ती है।

(ii) अवकाश या रविवार के दिन विद्यालय बंद रहता है।

(iii) दो रेखाएँ एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती हैं या समांतर होती हैं।

(iv) तृतीय भाषा के रूप में कोई विद्यार्थी फ्रेंच (फ्रांसीसी) भाषा या संस्कृत भाषा का चयन कर सकता है।

हल (i) यहाँ पर ‘या’ अंतर्विष्ट है, क्योंकि किसी देश में प्रवेश करने के लिए एक व्यक्ति के पास पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र दोनों ही हो सकते हैं।

(ii) यहाँ पर भी ‘या’ अंतर्विष्ट है, क्योंकि विद्यालय अवकाश के दिन और साथ ही साथ रविवार को बंद रहता है।

(iii) यहाँ पर ‘या’ अपवर्जित है क्योंकि कि दोनों रेखाओं के लिए यह संभव नहीं है कि वे एक दूसरे को काटें और साथ ही साथ समांतर भी हों।

(iv) यहाँ भी ‘या’ अपवर्जित है क्योंकि कोई विद्यार्थी तृतीय भाषा के रूप में फ्रेंच और संस्कृत दोनों नहीं ले सकता है।

उपरोक्त उदाहरण के सूक्ष्म निरीक्षण से निम्नलिखित नियम प्राप्त होता है।

संयोजक "या" प्रयुक्त मिश्र कथन के लिए नियम

1. अंतर्विष्ट ‘या’ प्रयुक्त मिश्र कथन सत्य होता है।, जब उसका कोई एक घटक कथन सत्य हो’ या उसके दोनों ही घटक कथन सत्य हों।

2. अंतर्विष्ट ‘या’ प्रयुक्त मिश्र कथन असत्य होता है, जब उसके दोनों ही घटक कथन असत्य होते हैं।

उदाहरण के लिए नीचे लिखे कथन पर विचार कीजिए, ‘दो रेखाएँ एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती हैं या वे समांतर हैंः

इसके घटक कथन निम्नलिखित हैंः

p : दो रेखाएँ एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती हैं।

q : वे (दो रेखाएँ) समांतर हैं।

यहाँ यदि p सत्य हैं तो q असत्य है और यदि p असत्य है तो q सत्य है। अत:मिश्र कथन सत्य है।

एक अन्य कथन पर विचार कीजिए।

‘संख्या 125, संख्या 7 या संख्या 8 का गुणज है।’

इसके घटक कथन इस प्रकार हैं,

p : संख्या 125, संख्या 7 का गुणज है।

q : संख्या 125, संख्या 8 का गुणज है।

यहाँ p और q दोनों ही असत्य हैं। अत:मिश्र कथन भी असत्य है।

एक और कथन पर विचार कीजिए जो नीचे दिया है,

‘विद्यालय बंद है, यदि आज अवकाश का दिन है या रविवार है।’

इसके घटक कथन नीचे दिए हैं,

p : विद्यालय बंद है, यदि आज अवकाश का दिन है।

q : विद्यालय बंद है, यदि आज रविवार है।

p और q दोनों ही सत्य हैं। अत:मिश्र कथन सत्य है।

एक और कथन पर विचार कीजिए,

‘मुंबई कोलकाता या कर्नाटक की राजधानी है।’

इसके घटक नीचे लिखे हैं,

p : मुंबई, कोलकाता की राजधानी है।

q : मुंबई, कर्नाटक की राजधानी है।

उपरोक्त दोनों ही कथन असत्य हैं। अत:मिश्र कथन भी असत्य है।

आइए अब हम कुछ उदाहरणों पर विचार करेंः

उदाहरण 8 निम्नलिखित कथनों में पहचानिए कि किस प्रकार के ‘या’ का प्रयोग किया गया है और जाँचिए कि कथन सत्यै अथवा असत्य है।

(i) एक परिमेय संख्या है या अपरिमेय संख्या है।

(ii) किसी सार्वजनिक पुस्तकालय में प्रवेश हेतु बच्चों को विद्यालय द्वारा प्रदत्त पहचान पत्र या विद्यालय अधिकारियों द्वारा लिखित पत्र की आवश्यकता पड़ती है।

(iii) आयत एक चतुर्भुज या एक पाँच भुजीय बहुभुज होता है।

हल (i) घटक कथन नीचे दिए हैं।

p : एक परिमेय संख्या है।

q : एक अपरिमेय संख्या है।

यहाँ हमें ज्ञात है कि प्रथम कथन असत्य है और द्वितीय कथन सत्य है और इस प्रकार ‘या’ अपवर्जित है।

(ii) घटक कथन निम्नलिखित हैं

p : किसी सार्वजनिक पुस्तकालय में प्रवेश हेतु बच्चों को विद्यालय द्वारा प्रदत्त पहचान पत्र की आवश्यकता पड़ती है।

q : किसी सार्वजनिक पुस्तकालय में प्रवेश हेतु बच्चों को विद्यालय अधिकारियों द्वारा लिखित पत्र की आवश्यकता पड़ती है।

यहाँ पुस्तकालय में प्रवेश के लिए बच्चों के पास या तो पहचान पत्र होना चाहिए अथवा विद्यालय के अधिकारियों द्वारा लिखित पत्र होना चाहिए अथवा दोनों की प्रलेख (कागज़ात) हो सकते हैं। अत:यहाँ पर ‘या’ अंतर्विष्ट है।

(iii) यहाँ ‘या’ अपवर्जित है। घटक कथनों के आधार पर यह कथन सत्य है।

14.4.3 परिमाणवाचक वाक्यांश (सूक्ति)

(Quantifiers Phrases) "एक एेसे का अस्तित्व है" और "सभी के लिए/प्रत्येक के लिए" इन दोनों विशेष वाक्यांशों को ‘परिमाणवाचक वाक्यांश कहते है।

गणितीय कथन में बहुधा आने वाले वाक्यांशाें में एक वाक्यांश ‘एक एेसे का अस्तित्व है’ है। उदाहरण के लिए कथन ‘एक एेसे आयत का अस्तित्व है जिसकी भुजाएँ समान लंबाई की हैं।’ पर विचार कीजिए। इस कथन का तात्पर्य है कि कम से कम एक एेसा आयत है जिसकी सभी भुजाओं की लंबाई समान है।

वाक्यांश ‘एक एेसे का अस्तित्व’ से निकटस्थ वाक्यांश ‘प्रत्येक के लिए (या सभी कि लिए)’ है।

आइए इस प्रकार के एक कथन पर विचार करें,

‘प्रत्येक अभाज्य संख्या p के लिए, एक अपरिमेय संख्या है।’

इसका अर्थ हुआ कि यदि S अभाज्य संख्याओं का समुच्चय है, तो समुच्चS के सभी अवयव p के लिए, एक अपरिमेय संख्या है।

व्यापक रूप से किसी गणतीय कथन में ‘प्रत्येक के लिए’ वाक्यांश के प्रयोग से यह अर्थ होता है कि यदि किसी समुच्चय में कोई विशेषता है तो उस समुच्चय के सभी अवयवों में वह विशेषता होनी चाहिए।

हमें यह भी ध्यान देना चाहिए कि इस बात का जानना भी महत्वपूर्ण है कि किसी वाक्य में संयोजक को ठीक-ठीक किस स्थान पर लिखना चाहिए। उदाहरण के लिए निम्नलिखित दो वाक्यों की तुलना कीजिएः

1. प्रत्येक धन पूर्णांक x के लिए एक एेसे धन पूर्णांक y का अस्तित्व है कि y < x

2. एक धन पूर्णांक y का एेसा अस्तित्व है कि प्रत्येक धन पूर्णांक x के लिए y < x.

यद्यपि एेसा प्रतीत होता है कि दोनों वाक्यों का एक ही अर्थ है किंतु एेसा नहीं है। वास्तविकता तो यह है। कि कथन (1) सत्य है जबकि (2) असत्य है। किसी गणितीय वाक्य (कथन) के अर्थपूर्ण होने के लिए प्रतीकों (वाक्याशों, संयोजकों) का सही स्थान पर ठीक-ठीक प्रयोग किया जाना आवश्यक है।

शब्द "और" तथा ‘या’ संयोजक कहलाते है तथा "एक एेसा का अस्तित्व है" और "प्रत्येक के लिए" को परिमाणवाचक वाक्यांश कहते हैं।

इस प्रकार हमने देखा कि अनेकों गणितीय कथनों में कुछ विशिष्ट शब्दों/वाक्यांशों का प्रयोग होता है जिनके अर्थ को समझना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से जब हमें विभिन्न कथनों की वैधता की जाँच करनी है।

प्रश्नावली 14.3

1. निम्नलिखित मिश्र कथनों में पहले संयोजक शब्दों को पहचानिए और फिर उनको घटक कथनों में विघटित कीजिएः

(i) सभी परिमेय संख्याएँ वास्तविक संख्याएँ होती हैं और सभी वास्तविक संख्याएँ सम्मिश्र संख्याएँ नहीं होती हैं।

(ii) किसी पूर्णांक का वर्ग धन या ऋण होता है।

(iii) रेत (बालू) धूप में शीघ्र गर्म हो जाती है और रात्रि में शीघ्र ठंडी नहीं होती है।

(iv) x = 2 और x = 3, समीकरण 3x2 x–10 = 0 के मूल हैं।

2. निम्नलिखित कथनों में परिमाणवाचक वाक्यांश पहचानिए और कथनों के निषेधन लिखिएः

(i) एक एेसी संख्या का अस्तित्व है, जो अपने वर्ग के बराबर है।

(ii) प्रत्येक वास्तविक संख्या x के लिए, x, (x + 1) से कम होता है।

(iii) भारत के हर एक राज्य/प्रदेश के लिए एक राजधानी का अस्तित्व है।

3. जाँचिए कि क्या नीचे लिखे कथनों के जोड़े (युग्म) एक-दूसरे के निषेधन हैं। अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइएः

(i) प्रत्येक वास्तविक संख्याओं x और y के लिए x + y = y + x सत्य है।

(ii) एेसी वास्तविक संख्याओं x और y का अस्तित्व है जिनके लिए x + y = y + x सत्य है।

4. बतलाइए कि निम्नलिखित कथनों में प्रयुक्त ‘या’ ‘अपवर्जित’ है अथवा ‘अंतर्विष्ट’ है। अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइएः

(i) सूर्य उदय होता है या चंद्रमा अस्त होता है।

(ii) ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन हेतु आपके पास राशन कार्ड या पासपोर्ट होना चाहिए।

(iii) सभी पूर्णांक धन या ऋण होते हैं।


14.5 अंतर्भाव/सप्रतिबंध कथन (Implications/Conditional Statements)

इस अनुच्छेद हम अंतर्भाव "यदि-तो", "केवल यदि" और "यदि और केवल यदि" पर विचार-विमर्श करेंगे।

"यदि-तो" से युक्त कथनों का प्रयोग बहुत सामान्य है। उदाहरण के लिए नीचे लिखे कथन पर विचार कीजिए

r: यदि आपका जन्म किसी देश में हुआ है, तो आप उस देश के नागरिक हैं। हम देखते हैं कि यह निम्नलिखित दो कथनों p और q के सदृश है,

p :आपका जन्म किसी देश में हुआ है।

q :आप उस देश के नागरिक हैं।

तब कथन "यदि p तो q" यह बतलाता है कि उस दशा में जब p सत्य हो, तो q अनिवार्य रूप से सत्य होगा।

कथन ‘यदि p तो q’ से संबंधित एक सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यदि p असत्य है तो यह q के बारे में कुछ नहीं कहता। उदाहरणार्थ उपरोक्त कथन में यदि आपका जन्म किसी देश में नहीं हुआ है तो आप q के संबंध में कुछ नहीं कह सकते हैं। दूसरे शब्दों में p के घटित नहीं होने का q के घटित होने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

कथन "यदि p, तो q’ के बारे में एक अन्य तथ्य भी नोट कीजिए कि इस कथन में यह अंतर्निहित नहीं है कि p घटित होता है।

कथन "यदि p, तो q" को समझने के अनेक तरीके हैं। हम इन तरीकों को निम्नलिखित कथन के माध्यम से स्पष्ट करेंगे।

यदि कोई संख्या 9 की गुणज है, तो वह 3 की भी गुणज है।

मान लीजिए कि p और q निम्नलिखित कथनों को प्रगट करते हैं,

p : कोई संख्या 9 की गुणज है।

q : वह संख्या 3 की भी गुणज है।

इस प्रकार कथन ‘यदि p, तो qनिम्नलिखित कथनों के सान हैः

1. ‘p अंतर्भाव q’ को p q से प्रकट किया जाता है। प्रतीक ‘’ अंतर्भाव (सप्रतिबंध कथन) के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका अर्थ यह कि कथन ‘कोई संख्या 9 की गुणज है’ में यह कथन अंतर्निहित है कि ‘वह संख्या 3 की भी गुणज है’।

2. ‘p पर्याप्त प्रतिबंध है q के लिए’। इसका अर्थ हुआ कि यह ज्ञात होना कि संख्या 9 की गुणज है, पर्याप्त है यह निष्कर्ष निकालने के लिए कि वह संख्या 3 की भी गुणज है।

3. ‘p केवल यदि q

इसका अर्थ हुआ कि कोई संख्या 9 की गुणज है, केवल यदि वह संख्या 3 की भी गुणज है।

4. ‘q अनिवार्य प्रतिबंध है p के लिए।’

इसका अर्थ हुआ कि जब कोई संख्या 9 की गुणज है, तो वह संख्या अनिवार्य रूप से 3 की भी गुणज है।

5. ‘~ q अंतर्भाव ~ p

इसका अर्थ हुआ कि यदि कोई संख्या 3 की गुणज नहीं है, तो वह संख्या 9 की भी गुणज नहीं है।

14.5.1 प्रतिधनात्मक और विलोम (Contrapositive and Converse) 

प्रतिधनात्मक और विलोम निश्चित रूप से कुछ अन्य कथन हैं, जिन्हें वाक्यांश ‘यदि-तो’ से प्रयुक्त कथन से (द्वारा) रचित किया जा सकता है।

उदाहरणार्थ नीचे दिए वाक्यांश ‘यदि-तो’ वाले कथन पर विचार कीजिए,

यदि भौतिक वातावरण में परिवर्तन होता है तब जैविक वातावरण परिवर्तित हो जाता है।

इस कथन का प्रतिधनात्मक कथन

‘‘यदि जैविक वातावरण में परिवर्तन नहीं होता है तब भौतिक वातावरण परिवर्तित नहीं होता है।’’

नोट कीजिए कि ये दोनों कथन एक ही (समान) अर्थ व्यक्त करते हैं।

इस बात को समझने के लिए आइए कुछ और उदाहरणों पर विचार करें।

उदाहरण 9 निम्नलिखित कथनों के प्रतिधनात्मक कथन लिखिएः

(i) यदि एक संख्या 9 से भाज्य है, तो वह 3 से भी भाज्य है।

(ii) यदि आप भारत में जन्मे हैं, तो आप भारत के एक नागरिक हैं।

(iii) यदि एक त्रिभुज समबाहु है, तो समद्विबाहु भी है।

हल उपरोक्त तीन कथनों के प्रतिधनात्मक कथन इस प्रकार है,

(i) यदि एक संख्या 3 से भाज्य नहीं है, तो वह 9 से भी भाज्य नहीं है।

(ii) यदि आप भारत के नागरिक नहीं हैं, तो आप भारत में नहीं जन्मे हैं।

(iii) यदि एक त्रिभुज समद्विबाहु नहीं है, तो वह समबाहु भी नहीं है।

उपरोक्त उदाहरण दर्शाते हैं कि कथन ‘यदि p, तो q’ का प्रतिधनात्मक कथन ‘यदि q-नहीं, तो
p-
नहीं’ अर्थात् ‘यदि ~ q, तो ~ p’ है। इसके बाद हम ‘विलोम’ कहलाने वाले एक और पद पर विचार करेंगे।

दिए हुए कथन ‘यदि p, तो q’ का विलोम कथन, यदि q तब p है।

उदाहरण के लिए कथन p‘यदि एक संख्या 10 से भाज्य है तो वह (संख्या) 5 से भी भाज्य है।’ का विलोम कथन q’ यदि एक संख्या 5 से भाज्य है, तो वह (संख्या) 10 से भी भाज्य है।’

उदाहरण 10 निम्नलिखित कथनों के विलोम लिखिएः

(i) यदि एक संख्या n सम है, तो n2 भी सम है।

(ii) यदि आप सभी प्रश्नों को पुस्तिका में हल करें, तो आपको कक्षा में A-ग्रेड मिलेगा।

(iii) यदि दो पूर्णांक a और b इस प्रकार हैं कि a > b, तो (a – b) सदैव एक धन पूर्णांक है।

हल इन कथनों के विलोम नीचे लिखे हैं,

(i) यदि संख्या n2 सम है, तो n भी सम है।

(ii) यदि आपको कक्षा में A-ग्रेड मिला है, तो आपने सभी प्रश्नों को पुस्तिका में हल किया है।

(iii) यदि दो पूर्णांक a और b इस प्रकार हैं कि (a – b) सदैव एक धन पूर्णांक है, तो a > b. आइए कुछ और उदाहरणों पर विचार करें।

उदाहरण 11 निम्नलिखित मिश्र कथनों में से प्रत्येक के लिए पहले संगत घटक कथनों को पहचानिए और फिर जाँचिए कि क्या कथन सत्य है अथवा नहीं।

(i) यदि त्रिभुज ABC समबाहु है, तो वह (त्रिभुज) समद्विबाहु है।

(ii) यदि a और b पूर्णांक हैं, तो ab एक परिमेय संख्या है।

हल (i) घटक कथन नीचे लिखें हैं,

p : त्रिभुज ABC समबाहु है।

q : त्रिभुज समद्विबाहु है।

क्योंकि एक समबाहु त्रिभुज समद्विबाहु भी होता है, अत:दिया हुआ कथन सत्य है।

(ii) यहाँ घटक कथन इस प्रकार है,

p : a और b पूर्णांक हैं।

q : ab एक परिमेय संख्या है।

क्योंकि दो पूर्णांकों का गुणनफल एक पूर्णांक होता है और इसलिए एक परिमेय संख्या भी होता है, अत:मिश्र कथन सत्य है।

वाक्य।ंश ‘यदि और केवल यदि’, प्रतीक द्वारा प्रकट किया जाता है और दिए हुए कथन p और q के लिए इसके निम्नलिखित समतुल्य रूप हैं।

(i) p यदि और केवल यदि q

(ii) q यदि और केवल यदि p

(iii) p अनिवार्य और पर्याप्त प्रतिबंध है q के लिए’और इसका विलोम (उलटा)

(iv) p q

यहाँ निम्नलिखित उदाहरण पर विचार करते हैं।

उदाहरण 12 नीचे दो कथन युग्म दिए हैं। प्रत्येक कथन युग्म वाक्यांश ‘यदि और केवल यदि’ के प्रयोग द्वारा सम्मिलित कीजिए।

(i) p: यदि कोई आयत एक वर्ग है, तो उसकी चारों भुजाएँ बराबर लंबाई की हैं।

यदि किसी आयत की चारों भुजाएँ बराबर लंबाई की है, तो आयत एक वर्ग है।

(ii) q: यदि किसी संख्या के अंकों का योगफल 3 से भाज्य है, तो वह संख्या भी 3 से भाज्य है।

q: यदि एक संख्या 3 से भाज्य है, तो उस संख्या के अंकों का योगफल भी 3 से भाज्य है।

हल (i) कोई आयत एक वर्ग है यदि और केवल यदि उसकी चारों भुजाओं की लंबाई बराबर है।

(ii) एक संख्या 3 से भाज्य है यदि और केवल यदि उस संख्या के अंकों का योगफल 3 से भाज्य है।

प्रश्नावली 14.4

1. निम्नलिखित कथन को वाक्यांश ‘यदि-तो’ का प्रयोग करते हुए पाँच विभिन्न रूप में इस प्रकार लिखिए कि उनके अर्थ समान हों।

यदि एक प्राकृत संख्या विषम है तो उसका वर्ग भी विषम है।

2. निम्नलिखित कथनों के प्रतिधनात्मक और विलोम कथन लिखिएः

(i) यदि x एक अभाज्य संख्या है, तो x विषम है।

(ii) यदि दो रेखाएँ समांतर हैं, तो वे एक दूसरे को एक समतल में नहीं काटती हैं।

(iii) किसी वस्तु के ठंडे होने का तात्पर्य (अंतर्भाव) है कि उसका तापक्रम कम है।

(iv) आप ज्यामिति विषय को आत्मसात नहीं कर सकते यदि आपको यह ज्ञान नहीं है कि निगमनात्मक विवेचन किस प्रकार किया जाता है।

(v) x एक सम संख्या है से तात्पर्य (अंतर्भाव) है कि x संख्या 4 से भाज्य है।

3. निम्नलिखित कथनों में से प्रत्येक को ‘यदि-तो’ रूप में लिखिएः

(i) आपको नौकरी (काम) मिलने का तात्पर्य (अंतर्भाव) है कि आपकी विश्वसनियता
अच्छी है।

(ii) केले का पेड़ फूलेगा यदि वह एक माह तक गरम बना रहे।

(iii) एक चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज है यदि उसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करें।

(iv) कक्षा में A ग्रेड पाने के लिए यह अनिवार्य है कि आप पुस्तक के सभी प्रश्नों को सरल कर लेते हैं।

4. नीचे (a) और (b) में प्रदत्त कथनों में से प्रत्येक के (i) में दिए कथन का प्रतिधनात्मक और विलोम कथन पहचानिए।

(a) यदि आप दिल्ली में रहते हैं तो आपके पास जाड़े के कपड़े हैं।

(i) यदि आपके पास जाड़े के कपड़े नहीं हैं, तो आप दिल्ली में नहीं रहते हैं।

(ii) यदि आपके पास जाड़े के कपड़े हैं, तो आप दिल्ली में रहते हैं।

(b) यदि एक चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज है, तो उसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित
करते हैं।

(i) यदि किसी चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित नहीं करते हैं, तो चतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज नहीं हैं।

(ii) यदि चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं तो वह समांतर चतुर्भुज है।


14.6 कथनों की वैधता को प्रमाणित (सत्यापित) करना (Validating Statements)

इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि एक कथन किन स्थितियों में सत्य होता है। उपरोक्त प्रश्न का उत्तर जानने के लिए हमें निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर जानना आवश्यक है।

प्रदत्त कथन का अर्थ क्या हैं? यह कहने का क्या अर्थ है कि कब कथन सत्य है और कब असत्य है?

ऊपर लिखे प्रश्नों के उत्तर इस बात पर निर्भर करते हैं कि प्रदत्त कथन में "और" तथा ‘या’ में से संयोजक शब्द का अथवा "यदि और केवल यदि" तथा "यदि-तो" में से किस प्रतिबंध का अथवा "प्रत्येक के लिए" तथा "एक एेसा का अस्तित्व है" में से किस परिमाणवाचक वाक्यांश का प्रयोग किया गया है।

यहाँ पर इन किसी कथन की वैधता ज्ञात करने के लिए कुछ प्रक्रियाओं पर विचार करेंगे।

अब हम यह जाँचने के लिए कि कोई कथन सत्य है या नहीं, कुछ सामान्य नियमों की सूची बनाते हैं।

नियम 1 यदि p तथा q गणितीय कथन हैं, तो यह सिद्ध करने के लिए कि कथन "p और q" सत्य है, हम निम्नलिखित चरणों का अनुसरण करते हैं।

चरण 1 दर्शाइए कि कथन p सत्य है

चरण 2 दर्शाइए कि कथन q सत्य है

नियम 2 ‘संयोजक ‘या’ से प्रयुक्त कथन’

यदि p तथा q गणितीय कथन हैं, तो कथन "p या q" को सत्य सिद्ध करने के लिए हम निम्नलिखित स्थितियों में से किसी एक को सत्य प्रमाणित करते हैं।

स्थिति 1 यह मानते हुए कि p असत्य है, q को अनिवार्यत:सत्य प्रमाणित कीजिए।

स्थिति 2 यह मानते हुए कि q असत्य है, p को अनिवार्यत:सत्य प्रमाणित कीजिए।

नियम 3 वाक्यांश ‘‘यदि-तो’’ से प्रयुक्त कथन

कथन ‘यदि p, तो q’ को सत्य सिद्ध करने के लिए हम निम्नलिखित स्थितियों में से किसी एक को सत्य प्रमाणित करते हैं।

स्थिति 1 यह मानते हुए कि p सत्य है, q को अनिवार्यत:सत्य प्रमाणित कीजिए
(प्रत्यक्ष विधि)।

स्थिति 2 यह मानते हुए कि q असत्य है, p को भी अनिवार्यत:असत्य प्रमाणित कीजिए (प्रतिधनात्मक विधि)।

नियम 4 वाक्यांश (प्रतिबंध) "यदि और केवल यदि" से प्रयुक्त कथन

कथन "p, यदि और केवल यदि q" को सत्य सिद्ध करने के लिए हमें यह प्रमाणित करने की आवश्यकता है कि,

(i) यदि p सत्य है तो q सत्य है और (ii) यदि q सत्य है, तो p सत्य है।

आइए हम कुछ उदाहरणों पर विचार करेंः

उदाहरण 13 जाँचिए कि नीचे दिया गया कथन सत्य हैं अथवा नहीं।

यदि x, y Zρ इस प्रकार हैं कि x तथा y विषम हैं, तो xy भी विषम है।

हल यहाँ p : x, y Z, इस प्रकार हैं कि x तथा y विषम हैं।

q : xy विषम हैं।

प्रदत्त कथन की वैधता को जाँचने के लिए हम नियम 3 की स्थिति 1 का प्रयोग करते हैं अर्थात्् यह मानते हुए कि p सत्य है हम q को अनिवार्यत:सत्य प्रमाणित करते हैं।

p सत्य है अर्थात् x तथा y विषम पूर्णांक हैं। अतः

x = 2m + 1 किसी पूर्णांक m के लिए।

y = 2m + 1 किसी पूर्णांक n के लिए।

अतः

xy = (2m + 1) (2n + 1)

= 2(2mn + m + n) + 1

इससे स्पष्ट है कि xy भी विषम है। इसलिए प्रदत्त कथन सत्य है।

मान लीजिए कि हम नियम 3 की स्थिति 2 के प्रयोग द्वारा जाँच करना चाहते हैं, तो हमें, निम्नलिखित विधि का प्रयोग करना चाहिए।

हम मानते हैं कि q सत्य नहीं है। इसका तात्पर्य है कि हमें कथन q के निषेधन पर विचार करना चाहिए।

इस प्रकार निम्नलिखित कथन प्राप्त होता है,

~ q : गुणनफल x y सम है।

यह केवल तभी संभव है जब x अथवा y सम हों जिससे यह प्रमाणित होता है कि p सत्य नहीं है। अत:हमने यह दर्शा दिया कि

~ q ~ p

टिप्पणी उपरोक्त उदाहरण यह स्पष्ट करता है कि कथन p q को सिद्ध करने के लिए कथन ~ q ~ p सिद्ध कर देना पर्याप्त है, जो कि प्रदत्त कथन का प्रतिधनात्मक कथन है।

उदाहरण 14 निम्नलिखित कथन के प्रतिधनात्मक कथन का जाँच कर यह ज्ञात कीजिए कि प्रदत्त कथन सत्य है अथवा असत्य है;

‘यदि x, y Z इस प्रकार कि xy विषम हैं, तो x तथा y भी विषम है।’

हल आइए हम कथनों को नीचे दिए नाम से संबोधित करें,

p : x y विषम हैं।

q : x तथा y दोनों ही विषम हैं।

हमें प्रतिधनात्मक कथन ~ q ~ p को जाँच कर ज्ञात करना है कि कथन p q सत्य है अथवा नहीं।

अब, ~ q = यह असत्य है कि x तथा y दोनों विषम है।

इसका अर्थ यही हुआ कि x (अथवा y) सम है।

तो, x = 2n जहाँ n एक पूर्णांक है।

अत: xy = 2ny, यह दर्शाता है कि xy सम है। अर्थात्् ~ p सत्य है।

इस प्रकार हमने ~ q ~ p को सिद्ध कर दिया है, अत:प्रदत्त कथन सत्य है।

अब हम विचार करते हैं कि जब एक सप्रतिबंध कथन और उसके विलोम कथन को मिलाते हैं तो क्या होता है।

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए

p : एक गिलास आधा खाली है।

q : एक गिलास आधा भरा है।

हमें ज्ञात है कि यदि पहला कथन घटित होगा तो दूसरा भी घटित होगा। इस तथ्य को निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त कर सकते हैं।

यदि एक गिलास आधा खाली है, तो वह आधा भरा है, यदि एक गिलास आधा भरा है, तो वह आधा खाली है। हम इन दोनों कथनों को मिलाते हैं और निम्नलिखित कथन प्राप्त करते हैं।

एक गिलास आधा खाली है यदि और केवल यदि यह आधा भरा है।

इसके बाद हम एक अन्य विधि पर विचार करेंगे।

14.6.1 विरोधोक्ति द्वारा (By Contradiction)

इस विधि में यह सिद्ध करने के लिए कि कोई (प्रदत्त) कथन p सत्य है हम यह मान लेते हैं कि p सत्य नहीं है। अर्थात ~ p सत्य है। इस प्रकार हम एक एेसे निष्कर्ष पर पहुँचते हैं जो हमारी मान्यता (पूर्वधारणा) का खंडन करता है। परिणामत:p को सत्य होना चाहिए।

नीचे सरल किए उदाहरण को देखिए :

उदाहरण 15 विरोधोक्ति द्वारानिम्नलिखित कथन को सत्यापित कीजिए,

एक अपरिमेय संख्या है।’

हल इस विधि में हम यह मान लेतेैं कि प्रदत्त कथन असत्य है। अर्थात एक अपरिमेसंख्या नहीं है।’ तात्पर्य यह हुआ कि ‘परिमेय है।’

अत:दो एसे पूर्णांक a तथा b का अस्तित्व है कि, जहाँ a तथा b में कोई समापवर्तक (उभयनिष्ठ गुणनखंड) नहीहै।

उपरोक्समीकरण का वर्ग करने पर

a2 = 7b2 संख्या 7, संख्या a को विभाजित करती है। इसलिए एक एेसे पूर्णांक c का अस्तित्व है कि a = 7c

इस प्रकार a2 = 49c2 a2 = 7b2

अत:7b2 = 49c2 b2 = 7c2 संख्या 7, संख्या b को विभाजित करती है। किंतु हमें ज्ञात है कि संख्या 7, संख्या a को भी विभाजित करती है। इसका तात्पर्य हुआ कि संख्या 7, संख्याओं a तथा b का समापवर्तक है, जो हमारी मान्यता कि ‘a तथा b में कोई समापर्वतक नहीं है’ का खंडन है।इससे स्पष्ट होता है कि यह मान्यता कि ‘पमिेय है’ असत्य है। अत:प्रदत्त कथन कि ‘एक अपरिमेय संख्या है’ सत्य है।

इसके उपरांत हम एक और विधि पर विचार करेंगे, जिसके द्वारा हम सिद्ध कर सकते हैं कि एक प्रदत्त कथन असत्य है। इस विधि में हम एक एेसी दशा (स्थिति) का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, जिसमें प्रदत्त कथन वैध नहीं होता है। इस प्रकार के उदाहरण को ‘‘प्रत्युदाहर.ा’’ कहते है। यह नाम स्वयं ही संकेत करता है कि यह उदाहरण प्रदत्त कथन का खंडन करता है।

उदाहरण 16 एक प्रत्युदाहरण द्वारा सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित कथन असत्य है,

‘यदि n एक विषम पूर्णांक है, तो n एक अभाज्य संख्या है।’

हल प्रदत्त कथन ‘यदि p, तो q’ के रूप का है। हमें इसे असत्य सिद्ध करना है जिसके लिए हमें यह दर्शाना है कि ‘यदि p, तो ~ q’ है। इसके लिए हमें किसी एक एेसे विषम पूर्णांक को खोजना है, जो अभाज्य नहीं हो। संख्या 9 इस प्रकार का एक विषम पूर्णांक है। अत:संख्या 9 एक प्रत्युदाहरण है और हम निष्कर्ष निकालते हैं कि प्रदत्त कथन असत्य है।

इस प्रकार हमनें कुछ विधियों पर विचार किया जिनके प्रयोग द्वारा हम यह ज्ञात करते हैं कि एक प्रदत्त कथन सत्य है अथवा नहीं।

टिप्पणी गणित में प्रत्युदाहरणों का प्रयोग किसी कथन को अस्वीकार करने के लिए किया जाता है। तथापि किसी कथन के अनुमोदन में उदाहरणों को प्रस्तुत करने से कथन की वैधता प्रमाणित नहीं होती है।

प्रश्नावली 14.5

1. सिद्ध कीजिए कि कथन यदि x एक एेसी वास्तविक संख्या है कि x3 + 4x = 0, तो x = 0

(i) प्रत्यक्ष विधि द्वारा (ii) विरोधोक्ति द्वारा (iii) प्रतिधनात्मक कथन द्वारा।

2. प्रत्युदाहरण द्वारा सिद्ध कीजिए कि कथन "किसी भी एेसी वास्तविक संख्याओं और b के लिए, जहाँ a2 = b2, का तात्पर्य है कि a = b" सत्य नहीं है।

3. प्रतिधनात्मक विधि द्वारा सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित कथन सत्य है,

p: यदि x एक पूर्णांक है और x2 सम है, तो x भी सम है।’

4. प्रत्युदाहरण द्वारा सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित कथन सत्य नहीं है,

(i) p: यदि किसी त्रिभुज के कोण समान हैं, तो त्रिभुज एक अधिक कोण त्रिभुज है।

(ii) q: समीकरण x2 – 1 = 0ेη मूल 0 और 2 के बीच स्थित नहीं है।

5. निम्नलिखित कथनों में से कौन से सत्य हैं और कौन से असत्य हैं? प्रत्येक दशा में अपने उत्तर के लिए वैध कारण बतलाइएः

(i) p: किसी वृत्त की प्रत्येक त्रिज्या वृत्त की जीवा होती है।

(ii) q: किसी वृत्त का केंद्र वृत्त की प्रत्येक जीवा को समद्विभाजित करता है।

(iii) r: एक वृत्त, किसी दीर्घवृत्त की एक विशेष स्थिति है।

(iv) s: यदि x और y एेसे पूर्णांकहै कि x > y, तो –x < –y है।

(v) t: एक परिमेय संख्या है।

विविध उदाहरण

उदाहरण 17 जाँचिए कि निम्नलिखित मिश्र कथन में प्रयुक्त ‘या’ अपवर्जित है अथवा अंतर्विष्ट है। अपने उत्तर को तर्क संगत (उचित) सिद्ध कीजिएः

t: जब वर्षा होती है, आप भीग जाते हैं, या जब आप नदी में होते हैं, आप भीग जाते हैं।’

तदोपरांत मिश्र कथन के घटक कथन लिखिए और उनका प्रयोग यह जाँचने के लिए कीजिए कि मिश्र कथन सत्य है अथवा नहीं।

हल प्रदत्त कथन में प्रयुक्त ‘या’ अंतर्विष्ट है, क्योंकि यह संभव है कि वर्षा हो रही है और आप नदी में हों।

प्रदत्त कथन के घटक कथन नीचे दिए हैं,

p : जब वर्षा होती है आप भीग जाते हैं।

q : जब आप नदी में होते हैं आप भीग जाते हैं।

यहाँ दोनों घटक कथन सत्य हैं और इसलिए मिश्र कथन भी सत्य है।

उदाहरण 18 निम्नलिखित कथनों के निषेधन लिखिएः

(i) p: प्रत्येक वास्तविक संख्या x के लिए, x2 > x

(ii) q: एक एेसी परिमेय संख्या x का अस्तित्व है ताकि x2 = 2

(iii) r: प्रत्येक पक्षी के पंख होते हैं।

(iv) s: प्रारंभिक स्तर पर प्रत्येक विद्यार्थी गणित का अध्ययन करता है।

हल मान लीजिए कि दिए गए कथन को p निरूपित किया जाता है। तब p का निषेधन ‘‘यह असत्य है कि p सत्य है’’ होगा, अर्थात्् प्रतिबंध x2 > x प्रत्येक वास्तविक संख्या के लिए लागू नहीं होता है। इस बात को इस प्रकार व्यक्त कर सकते हैं,

~p: एक एेसी वास्तविक संख्या x का अस्तित्व है ताकि x2 < x है।

(ii) मान लीजिए कि

q = एक एेसी परिमेय संख्या x का अस्तित्व है कि x2 = 2

अत:q = एेसी (किसी) परिमेय संख्या x का अस्तित्व नहीं है कि x2 = 2

जिसे इस प्रकार भी लिखा जा सकता है,

~p प्रत्येक (सभी) परिमेय संख्या x के लिए x2 2

(iii) प्रदत्त कथन का निषेधन नीचे लिखा है,

~r: एक एेसे पक्षी का अस्तित्व है, जिसके पंख नहीं होते हैं।’

(iv) प्रदत्त कथन का निषेधन इस प्रकार है,

~s: एक एेसे विद्यार्थी का अस्तित्व है जो प्रारंभिक स्तर पर गणित का अध्ययन नहीं
करता है।’

उदाहरण 19 वाक्यांश ‘‘अनिवार्य और पर्याप्त’’ का प्रयोग करके निम्नलिखित कथन को पुन:लिखिए। तथा इसकी वैधता की जाँच भी कीजिए।

‘‘पूर्णांक n विषम है यदि और केवल यदि n2 विषम है।’’

हल पूर्णांक n के विषम होने के लिए अनिवार्य और पर्याप्त प्रतिबंध है कि n2 अनिवार्यत:विषम हो।

मान लीजिए कि p तथा q निम्नलिखित कथनों को निरूपित करते हैं,

p : पूर्णांक n विषम है।

q : n2 विषम है।

तो ‘p यदि और केवल यदि q’ प्रदत्त कथन को निरूपित करता है और जिसकी वैधता जाँचने के लिए हमें यह जाँचना पड़ेगा कि क्या कथन ‘‘यदि p, तो q’’ तथा ‘‘यदि q, तो p’’ सत्य है।

स्थिति 1 ‘यदि p, तो q

यदि p, तो q कथन ‘यदि पूर्णांक n विषम है, तो n2 विषम है।’ को निरूपित करता है। हमें ज्ञात करना है कि क्या यह कथन सत्य है।

मान लीजिए कि n विषम है। तब n = 2k + 1 जहाँ k एक पूर्णांक है।

इस प्रकार n2 = (2k + 1)2

= 4k2 + 4k + 1 = 2(2k2 + 2k) + 1

अत: n2 विषम है।

स्थिति 2 यदि q, तो p

कथन ‘यदि n एक पूर्णांक है और n2 विषम है, तो n विषम है।’ यदि q, तो p द्वारा निरूपित होता है। हमें ज्ञात करना है कि क्या यह कथन सत्य है। इसे ज्ञात करने के लिए हम प्रतिधनामक विधि का प्रयोग करेंगे। (अर्थात् ~ p ~ q)

उपरोक्त कथन का प्रतिधनात्मक कथन नीचे लिखा है,

‘यदि n एक सम पूर्णांक है, तो n2 भी एक सम पूर्णांक है।’

n एक सम पूर्णांक है इसलिए n = 2k, जहाँ k एक पूर्णांक है। अत:n2 = 4k2 = 2(2k2) निष्कर्षत:n2 सम है।

उदाहरण 20 निम्नलिखित कथन के लिए अनिवार्य तथा पर्याप्त प्रतिबंधों को ज्ञात कीजिए।

t: यदि आप 80 km प्रति घंटा की अधिक गति से गाड़ी चलाते हैं तो आपको जुर्माना लगेगा।

हल मान लीजिए कि p और q निम्नलिखित कथनों को प्रकट करते हैं।

p: यदि आप 80 km प्रति घंटा की अधिक गति से गाड़ी चलाते हैं।

q: आपको जुर्माना होगा।

प्रतिबंध यदि p तो q दर्शाता है कि p, q के लिए पर्याप्त प्रतिबंध है। अर्थात्् जुर्माना होने के लिए, 80 कि.मी. प्रति घंटा की अधिक गति से गाड़ी चलाना पर्याप्त कथन है।

यहाँ “80 km प्रतिघंटा की अधिक गति से गाड़ी चलानापर्याप्त प्रतिबंध है।

इसी प्रकार, यदि p तब q दर्शाता है कि q, p के लिए अनिवार्य प्रतिबंध है। अर्थात्् जब आप 80 km प्रतिघंटा की अधिक गति से गाड़ी चलाते हैं तो अनिवार्य रूप से आपको जुर्माना होगा।यहाँ जुर्माना होनाअनिवार्य प्रतिबंध है।

अध्याय 14 पर विविध प्रश्नावली

1. निम्नलिखित कथनों के निषेधन लिखिएः

(i) प्रत्येक धन वास्तविक संख्या x के लिए, संख्या x -  1 भी धन संख्या है।

(ii) सभी बिल्लियाँ खरोंचती हैं।

(iii) प्रत्येक वास्तविक संख्या x के लिए या तो x > 1 या x < 1

(iv) एक एेसी संख्या x का अस्तित्व है कि 0 < x < 1

2. निम्नलिखित सप्रतिबंध कथनों (अंतर्भाव) में से प्रत्येक का विलोम तथा प्रतिधनात्मक कथन लिखिएः

(i) एक धन पूर्णांक अभाज्य संख्या है केवल यदि 1 और पूर्णांक स्वयं के अतिरिक्त उसका कोई अन्य भाजक नहीं है।

(ii) मैं समुद्र तट पर जाता हूँ जब कभी धूप वाला दिन होता है।

(iii) यदि बाहर गरम है, तो आपको प्यास लगती है।

3. निम्नलिखित कथनों में से प्रत्येक को "यदि p, तो q" के रूप में लिखिए।

(i) सर्वर पर लाग आन करने के लिए पासवर्ड का होना आवश्यक है।

(ii) जब कभी वर्षा होती है यातायात में अवरोध उत्पन्न होता है।

(iii) आप वेबसाइट में प्रवेश कर सकते हैं केवल यदि आपने निर्धारित शुल्क का भुगतान
किया हो।

4. निम्नलिखित कथनों में से प्रत्येक को p यदि और केवल यदि q के रूप में पुन:लिखिएः

(i) यदि आप दूरदर्शन (टेलीविज़न) देखते हैं, तो आपका मन मुक्त होता है तथा यदि आपका मन मुक्त है, तो आप दूरदर्शन देखते हैं।

(ii) आपके द्वारा A-ग्रेड प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य और पर्याप्त है कि आप गृहकार्य नियमित रूप से करते हैं।

(iii) यदि एक चतुर्भुज समान कोणिक है, तो वह एक आयत होता है तथा यदि एक चतुर्भुज आयत है, तो वह समान कोणिक होता है।

5. नीचे दो कथन दिए हैं,

p : 25 संख्या 5 का एक गुणज है।

q : 25 संख्या 8 का एक गुणज है।

उपरोक्त कथनों का संयोजक ‘और’ तथा ‘या’ द्वारा संयोजक करके मिश्र कथन लिखिए। दोनों दशाओं में प्राप्त मिश्र कथनों की वैधता जाँचिए।

6. नीचे लिखे कथनों की वैधता की जाँच उनके सामने लिखित विधि द्वारा कीजिए।

(i) p : एक अपरिमेय संख्या और एक परिमेय संख्या का योगफल अपरिमेय होता है (विरोधोक्ति विधि)।

(ii) q : यदि n एक एेसी वास्तविक संख्या है कि n > 3, तो n2 > 9 (विरोधोक्ति विधि)।

7. निम्नलिखित कथन को पाँच भिन्न-भिन्न तरीकों से इस प्रकार व्यक्त कीजिए कि उनके अर्थ समान हों,

q :‘यदि एक त्रिभुज समान कोणिक है, तो वह एक अधिक कोण त्रिभुज है।’


सारांश

इस अध्याय में हमने निम्नलिखित बिंदुओं की व्याख्या की हैः

  • गणितीय रूप से स्वीकार्य कथन एक एेसा वाक्य है जो या तो सत्य हो या असत्य हो।
  • निम्नलिखित पदों की व्याख्या की हैः

किसी कथन का निषेधन :यदि p एक कथन है तो ‘p असत्य है’ कथन p का निषेधन है, इसको प्रतीक p से प्रकट करते हैं।

मिश्र कथन और संगत घटक कथनः

दो या अधिक सरल कथनों के संयोजन से बने कथन को मिश्र कथन कहते हैं। सरल कथनों को मिश्र कथन के घटक कथन कहते हैं।

संयोजक ‘और’ तथा ‘या’ की तथा वाक्यांश ‘एक एेसे का अस्तित्व है’ तथा ‘प्रत्येक के लिए’ की भूमिका।

अंतर्भाव (प्रतिबंध) ‘यदि’, ‘केवल यदि’ तथा ‘यदि और केवल यदि’

कथन ‘यदि’ p तो q को निम्नलिखित तरीकों सेलिखा जा सकता है,

p अंतर्भाव q (प्रतीक p q से निरूपित)

p पर्याप्त प्रतिबंध है q के लिए।

q अनिवार्य प्रतिबंध है p के लिए।

p केवल यदि q

q अंतर्भव p

– कथन pq का प्रतिधनात्मक कथन qp

कथन p q का विलोम कथन q p है।

कथन pq तथा इसके विलोम को संयुक्त रूप से कथन p यदि और केवल यदि q’ कहते हैं।

  • किसी कथन की वैधता ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित विधियों का प्रयोग करते हैं।

(i) प्रत्यक्ष विधि

(ii) प्रतिधनात्मक विधि

(iii) विरोधोक्ति विधि

(iv) प्रत्युदाहरण के प्रयोग की विधि


एेतिहासिक पृष्ठभूमि

तर्कशास्त्र पर पहला शोध-प्रबन्ध Aristotle (384 ई॰ पू॰-322 ई॰पू॰) द्वारा लिखा गया था। यह शोध-प्रबन्ध निगमनात्मक विवेचन के लिए नियमों का एक संग्रह था, जिसका अभिप्राय ज्ञान की प्रत्येक शाखा के अध्ययन हेतु एक आधार प्रदान करना था। इसके बाद सत्रहवीं सदी में जर्मन गणितज्ञ G. W. Leibnitz (1646 – 1716 ई॰) ने निगमनात्मक विवेचन की प्रक्रिया को यांत्रिक बनाने के लिए तर्कशास्त्र में प्रतीकों के प्रयोग की कल्पना की थी। उन्नीसवीं सदी में अंग्रे”ा गणितज्ञ George Boole (1815–1864 ई॰) तथा Augustus De Morgan (1806–1871 ई॰) ने उनकी कल्पना को साकार किया और प्रतीकात्मक तर्कशास्त्र विषय की स्थापना की।

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