™डंजीमउंजपबे पे इवजी जीम ुनममद ंदक जीम ींदक.उंपकमद व िंसस ेबपमदबमे दृ म्ण्ज्ण् ठम्स्स्ऽ 12.1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध हम जानते हैं, कि किसी तल में स्िथत एक बिंदु की स्िथति निधार्रण के लिए हमें उस तल में दो परस्पर लंब एवं प्रतिच्छेदित रेखाओं से लांबिक दूरियों की आवश्यकता होती है। इन रेखाओं को निदेर्शांक्ष और उन दो लांबिक दूरियों को अक्षों के सापेक्ष उस बिंदु के निदेर्शांक ;बववतकपदंजमद्ध कहते हैं। वास्तविक जीवन में हमारा केवल एक तल में स्िथत बिंदुओं से ही संबंध नहीं रह जाता है। उदाहरणतः अंतरिक्ष में पफेंके गए एक गेंद की विभ्िान्न समय में स्िथति अथवा एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के दौरान वायुयान की एक स्मवदींतक म्नसमतविश्िाष्ट समय में स्िथति आदि, को भी जानने की आवश्यकता पड़ती है। ;1707.1783 ।ण्क्ण्द्धइसी प्रकार एक कमरे की छत से लटकते हुए एक विद्युत बल्ब की निचली नोक अथवा छत के पंखे की नोक की स्िथति का निधार्रण करने के लिए हमें उन बिंदुओं की दो परस्पर लंब दीवारों से दूरियाँ मात्रा ही पयार्प्त नहीं है बल्िक उस बिंदु की, कमरे के पफशर् से ऊँचाइर्, की भी आवश्यकता पड़ती है। अतः हमें केवल दो नहीं बल्िक तीन परस्पर लांबिक तलों से लंबवत् दूरियों को निरूपित करने के लिए तीन संख्याओं की आवश्यकता होती है, जो बिंदु की दो परस्पर लंब दीवारों से दूरियाँ, तथा उस कमरे के पफशर् से ऊँचाइर् को व्यक्त करती हैं। कमरे की परस्पर लंब दीवारों तथा उस क्षैतिज का पफशर् तीन परस्पर प्रतिच्छेदित करने वाले तल हैं। इन परस्पर प्रतिच्छेदित करने वाले तलों से लंब दूरियों को व्यक्त करने वाली तीन संख्याएँ उस बिंदु के तीन निदेर्शांक तलों के सापेक्ष निदेर्शांक कहलाते हैं। इस प्रकार अंतरिक्ष ;ेचंबमद्ध में स्िथत एक बिंदु के तीन निदेर्शांक होते हैं। इस अध्याय में हम त्रिाविमीय अंतरिक्ष में ज्यामिति की मूलभूत संकल्पनाओं का अध्ययन करेंगे। 12.2 त्रिाविमीय अंतरिक्ष में निदेर्शांक्ष और निदेर्शांक - तल ;ब्ववतकपदंजम ।गमे ंदक ब्ववतकपदंजम च्संदमे पद ज्ीतमम क्पउमदेपवदंस ैचंबमद्ध बिंदु व् पर प्रतिच्छेदित करने वाले तीन परस्पर लंब तलोंकी कल्पना कीजिए ;आवृफति 12.1द्ध। ये तीनों तलरेखाओं ग्श्व्ग्ए ल्श्व्ल् और र्श्व्र् पर प्रतिच्छेदित करतेहैं जिन्हें क्रमशः ग - अक्ष, ल - अक्ष और ्र - अक्ष कहते हैं।हम स्पष्टतः देखते हैं कि ये तीनों रेखाएँ परस्पर लंब हैं।इन्हें हम समकोण्िाक निदेर्शांक निकाय कहते हैं। ग्व्ल्ए ल्व्र् और र्व्ग्ए तलों को क्रमशः ग्ल् - तल, ल्र् - तल,तथा र्ग् - तल, कहते हैं। ये तीनों तल निदेर्शांक तलकहलाते हैं।हम कागज के तल को ग्व्ल् तल लेते हैं। औरर्श्व्र् रेखा को तल ग्व्ल् पर लंबवत लेते हैं। यदिकागज के तल को क्षैतिजतः रखें तो र्श्व्र् रेखा ऊध्वार्रतःहोती है। ग्ल्.तल से व्र् की दिशा में ऊपर की ओर नापीगइर् दूरियाँ धनात्मक और व्र्श् की दिशा में नीचे की ओर नापी गइर् दूरियाँ )णात्मक होती हैं। ठीकउसी प्रकार र्ग्.तल के दाहिने व्ल् दिशा में नापी गइर् दूरियाँ धनात्मक और र्ग् तल के बाएँ व्ल्श् की दिशा में नापी गइर् दूरियाँ )णात्मक होती हैं। ल्र्.तल के सम्मुख व्ग् दिशा में नापी गइर् दूरियाँधनात्मक तथा इसके पीछे व्ग्श् की दिशा में नापी गइर् दूरियाँ )णात्मक होती हैं। बिंदु व् को निदेर्शांक निकाय का मूल बिंदु कहते हैं। तीन निदेर्शांक तल अंतरिक्ष को आठ भागों में बांटते हैं, इन अष्टाशोंके नाम ग्व्ल्र्ए ग्श्व्ल्र्ए ग्श्व्ल्श्र्ए ग्व्ल्श्र्ए ग्व्ल्र्श्ए ग्श्व्ल्श्र्श्ए ग्श्व्ल्श्र्श् और ग्व्ल्श्र्श् हैं।और जिन्हें क्रमशः प्ए प्प्ए प्प्प्ए ण्ण्ण्ण्ए टप्प्प् द्वारा प्रदश्िार्त करते हैं। 12.3 अंतरिक्ष में एक बिंदु के निदेर्शांक ;ब्ववतकपदंजमे व िं च्वपदज पद ैचंबमद्ध अंतरिक्ष में निश्िचत निदेर्शांक्षों, निदेर्शांक तलों और मूल बिंदु सहित निदेर्शांक्ष निकाय के चयन के पश्चात््दिए बिंदु के तीन निदेर्शांक ;ग ए लए ्रद्ध को ज्ञात करने की वििा तथा विलोमतः तीन संख्याओं के त्रिादिक;ज्तपचसमजद्ध दिए जाने पर अंतरिक्ष में संगत बिंदु ;गए लए ्रद्ध के निधार्रण करने की वििा की अब हमविस्तार से व्याख्या करते हैं। अंतरिक्ष में दिए गए बिंदु च् से ग्ल् - तल पर च्ड लंब खींचते हैं जिसका पाद ड है ;आवृफति 12.2द्ध। तब ड से गदृअक्ष पर डस् लंब खींचिए, जो उससे स् पर मिलता है। मान लीजिए व्स्त्रगए स्ड त्र ल और च्ड त्र ्र तब ;गए लए ्रद्ध बिंदु च् के निदेर्शांक कहलाते हैं। इसमें गएलए ्र को क्रमशः बिंदु च् के ग - निदेर्शांक, ल - निदेर्शांक, तथा ्र - निदेर्शांक कहते हैं। आवृफति 12.2 में हम देखते हैं कि बिंदु च्;गए लए ्रद्ध अष्टांश ग्व्ल्र् में स्िथत है, अतः गए ल और ्र सभी धनात्मक हैं। आवृफति12ण्2 यदि च् किसी अन्य अष्टांश में हो तो गए ल और ्र के चिÉ तदनुसार परिव£तत हो जाते हैं। इस प्रकार अंतरिक्ष में स्िथत किसी बिंदु च् की संगतता वास्तविक संख्याओं के क्रमित त्रिादिक ;गए लए ्रद्ध से किया जाता है। विलोमतः, किसी त्रिादिक ;गए लए ्रद्ध के दिए जाने पर हम ग के संगत ग - अक्ष पर बिंदु स् निधार्रित करते हैं। पुनः ग्ल् - तल में बिंदु ड निधार्रित करते हैं, जहाँ इसके निदेर्शांक ;गए लद्ध हैं। ध्यान दीजिए कि स्ड या तो ग - अक्ष पर लंब है अथवा ल - अक्ष के समांतर है। बिंदु ड पर पहुँचने के पश्चात्् हम ग्ल् - तल पर डच् लंब खींचते हैं, इसपर बिंदु च् को ्र के संगत आवृफति12ण्3 निधार्रण करते हैं। इस प्रकार निधार्रित बिंदु च् के निदेर्शांक ;गए लए ्रद्ध हैं। अतः अंतरिक्ष में स्िथत बिंदुओं की वास्तविक संख्याओं के क्रमित त्रिादिक ;गए लए ्रद्ध से सदैव एकेक - संगतता रखते हैं। विकल्पतः, अंतरिक्ष में स्िथत बिंदु च् से हम निदेर्शांक तलों के समांतर तीन तल खींचते हैं, जो ग - अक्ष, ल - अक्ष और ्र - अक्ष को क्रमशः ।ए ठ तथा ब् बिंदुओं पर प्रतिच्छेदित करते हैं ;आवृफति 12.3द्ध। यदि व्।त्रगए व्ठत्रल तथा व्ब्त्र्र हो तो बिंदु च् के निदेर्शांक गए ल और ्र होते हैं और इसे हम च्;गए लए ्रएद्ध के रूप में लिखते हैं। विलोमतः गए ल और ्र के दिए जाने पर हम निदेर्शांक्षों पर बिंदु ।ए ठ तथा ब् निधार्रित करते हैं। बिंदु ।ए ठ तथा ब् से हम क्रमशः ल्र् - तल, र्ग् - तल तथा ग्ल् - तल के समांतर तीन तल खींचते हैं। इन तीनों तलों को ।क्च्थ्ए ठक्च्म् तथा ब्म्च्थ् का प्रतिच्छेदन बिंदु स्पष्टतः च् है, जो क्रमित - त्रिादिक ; गए ल ्रद्ध के संगत है। हम देखते हैं कि यदि अंतरिक्ष में कोइर् बिंदु च् ;गए लए ्रद्ध है, तो ल्र्ए र्ग् तथा ग्ल् तलों से लंबवत् दूरियाँ क्रमशः गए ल तथा ्र हैं। टिप्पणी एक बिंदु के निदेर्शांकों के चिÉ उस अष्टांश को निधार्रित करते हैं जिसमें बिंदु स्िथत होता है। निम्नलिख्िात सारणी आठों अष्टांशों में निदेर्शांकों के चिÉ दशार्ती है। सारणी 12ण्1 अष्टांशनिदेर्शांक प् प्प् प्प्प् प्ट ट टप् टप्प् टप्प्प् ग ़ दृ दृ ़ ़ दृ दृ ़ ल ़ ़ दृ दृ ़ ़ दृ दृ ्र ़ ़ ़ ़ दृ दृ दृ दृ उदाहरण 1 आवृफति 12.3 में, यदि च् के निदेर्शांक ;2, 4, 5द्ध हैं तो थ् के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। हल बिंदु थ् के लिए व्ल् के अनुदिश नापी गयी दूरी शून्य है। अतः थ् के निदेर्शांक ;2, 0, 5द्ध हैं। उदाहरण 2 वे अष्टांश ज्ञात कीजिए जिसमें बिंदु ; - 3, 1, 2द्ध और ; - 3, 1, - 2द्ध स्िथत हैं। हल सारणी 12.1 से, बिंदु ; - 3, 1, 2द्ध दूसरे अष्टांश में तथा बिंदु ; - 3, 1, - 2द्ध छठे अष्टांश में स्िथत हैं। प्रश्नावली 12ण्1 1ण् एक बिंदु गदृअक्ष पर स्िथत है। इसके ल - निदेर्शांक तथा ्र - निदेर्शांक क्या हैं? 2ण् एक बिंदु ग्र्दृतल में है। इसके ल - निदेर्शांक के बारे में आप क्या कह सकते हैं? 3ण् उन अष्टांशों के नाम बताइए, जिनमें निम्नलिख्िात बिंदु स्िथत हैं। ;1ए 2ए 3द्धए ;4ए दृ2ए 3द्धए ;4ए दृ2ए दृ5द्धए ;4ए 2ए दृ5द्धए ;दृ 4ए 2ए दृ5द्धए ;दृ 4ए 2ए 5द्धए ;दृ3ए दृ1ए 6द्ध ;2ए दृ 4ए दृ7द्ध 4ण् रिक्त स्थान की पू£त कीजिएः ;पद्ध ग.अक्ष और ल.अक्ष दोनों एक साथ मिल कर एक तल बनाते हैं, उस तल को ऋऋऋऋऋऋऋ कहते हैं। ;पपद्ध ग्ल् - तल में एक बिंदु के निदेर्शांक ऋऋऋऋऋऋऋ रूप के होते हैं। ;पपपद्ध निदेर्शांक तल अंतरिक्ष को ऋऋऋऋऋऋऋ अष्टांश में विभाजित करते हैं। 12.4 दो बिंदुओं के बीच की दूरी ;क्पेजंदबम इमजूममद ज्ूव च्वपदजेद्ध द्विविमीय निदेर्शांक निकाय में हमने दो बिंदुओं के बीच की दूरी का अध्ययन कर चुके हैं। आइए अब हम अपने अध्ययन का विस्तार त्रिाविमीय निकाय के लिए करते हैं। मान लीजिए, समकोण्िाक अक्ष व्ग्ए व्ल् तथा व्र् के सापेक्ष दो बिंदु च्;ग1ए ल1ए ्रद्ध तथा1फ ;ग2ए ल2ए ्र2द्ध हैं। च् तथा फ बिंदुओं से निदेर्शांक तलों के समांतर तल खींचिए, जिससे हमें ऐसा घनाभ मिलता है जिसका विकणर् च्फ है ;देख्िाए आवृफति 12.4द्ध क्योंकि ∠च्।फ एक समकोण है अतः च्।फ में, च्फ2 त्र च्।2 ़ ।फ2 ण्ण्ण् ;1द्ध पुनः क्योंकि ∠।छफ त्र एक समकोण, इसलिए ।छफ में, ।फ2 त्र ।छ2 ़ छफ2 ण्ण्ण् ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध से हमें प्राप्त होता है, कि च्फ2 त्र च्।2 ़ ।छ2 ़ छफ2 अब, च्। त्र ल2 दृ ल1ए ।छ त्र ग2 दृ ग1 और छफ त्र ्र2 दृ ्र1 इस प्रकार, च्फ2 त्र ;ग2 दृ ग1द्ध2 ़ ;ल2 दृ ल1द्ध2 ़ ;्र2 दृ ्र1द्ध2 यह दो बिंदुओं च्;ग1ए ल1ए ्र1द्ध और फ;ग2ए ल2ए ्र2द्ध के बीच की दूरी च्फ के लिए सूत्रा है। विशेषतः यदि ग1 त्र ल1 त्र ्र1 त्र 0ए अथार्त् बिंदु च्ए मूल बिंदु व् हो तो 2 22व्फ त्र ग ़ल ़्र ए2 22 जिससे हमें मूल बिंदु व् और किसी बिंदु फ;ग2ए ल2ए ्रद्ध के बीच की दूरी प्राप्त होती है। 2उदाहरण 3 बिंदुओं च् ;1, - 3, 4द्ध और फ ; - 4, 1, 2द्ध के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए। हल च्फ बिंदुओं च् ;1एदृ3ए 4द्ध और फ ;दृ 4ए 1ए 2द्ध के बीच की दूरी है। त्र 45 त्र 35 इकाइर् उदाहरण 4 दशार्इए कि च् ;दृ2ए 3ए 5द्धए फ ;1ए 2ए 3द्ध और त् ;7ए 0ए दृ1द्ध संरेख हैं। हल हम जानते हैं कि संरेख ¯बदु, एक ही रेखा पर स्िथत होते हैं। 222यहाँ च्फत्र ;1़ 2द्ध ़ ;2 − 3द्ध ़ ;3 − 5द्ध त्र 9 ़1़ 4 त्र 14 22 2फत्त्र ;7 −1द्ध ़ ;0 − 2द्ध ़ ;−1− 3द्ध त्र 36 ़ 4 ़16 त्र 56 त्र 2 14 22 2और च्त् त्र ;7 ़ 2द्ध ़ ;0 − 3द्ध ़ ;−1− 5द्ध त्र 81़ 9 ़ 36 त्र 126 त्र 3 14 इस प्रकार च्फ ़ फत् त्र च्त् अतः बिंदु च्ए फ और त् संरेख हैं। उदाहरण 5 क्या बिंदु । ;3ए 6ए 9द्धए ठ ;10ए 20ए 30द्ध और ब् ;25ए दृ 41ए 5द्ध एक समकोण त्रिाभुज के शीषर् हैं? हल दूरी - सूत्रा से हमें प्राप्त होता है कि ।ठ2 त्र;10 दृ 3द्ध2 ़ ;20 दृ 6द्ध2 ़ ;30 दृ 9द्ध2 त्र 49 ़ 196 ़ 441 त्र 686 ठब्2 त्र ;25 दृ 10द्ध2 ़ ;दृ 41 दृ 20द्ध2 ़ ;5 दृ 30द्ध2 त्र 225 ़ 3721 ़ 625 त्र 4571 ब्।2 त्र;3 दृ 25द्ध2 ़ ;6 ़ 41द्ध2 ़ ;9 दृ 5द्ध2 त्र 484 ़ 2209 ़ 16 त्र 2709 हम पाते हैं कि ब्।2 ़ ।ठ2 ≠ ठब्2 अतः Δ।ठब् एक समकोण त्रिाभुज नहीं है। उदाहरण 6 दो बिंदुओं । तथा ठ के निदेर्शांक क्रमशः ;3, 4, 5द्ध और ; - 1, 3, - 7द्ध हैं। गतिशील ¯बदु च् के पथ का समीकरण ज्ञात कीजिए, जबकि च्।2 ़ च्ठ2 त्र 2ा2ण् हल माना गतिशील बिंदु च् के निदेर्शांक ;गए लए ्रद्ध हैं। अब च्।2 त्र;ग दृ 3द्ध2 ़ ;ल दृ 4द्ध2 ़ ; ्र दृ 5द्ध2 च्ठ2 त्र;ग ़ 1द्ध2 ़ ;ल दृ 3द्ध2 ़ ;्र ़ 7द्ध2 दिए गए प्रतिबन्ध के अनुसार, च्।2 ़ च्ठ2 त्र 2ा2, हमें प्राप्त होता हैः ;ग दृ 3द्ध2 ़ ;ल दृ 4द्ध2 ़ ;्र दृ 5द्ध2 ़ ;ग ़ 1द्ध2 ़ ;ल दृ 3द्ध2 ़ ;्र ़ 7द्ध2 त्र 2ा2 या 2ग2 ़ 2ल2 ़ 2्र2 दृ 4ग दृ 14ल ़ 4्र त्र 2ा2 दृ 109ण् प्रश्नावली 12.2 1.निम्नलिख्िात बिंदु - युग्मों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ;2ए 3ए 5द्ध और ;4ए 3ए 1द्ध ;पपद्ध ;दृ3ए 7ए 2द्ध और ;2ए 4ए दृ1द्ध ;पपपद्ध ;दृ1ए 3ए दृ 4द्ध और ;1ए दृ3ए 4द्ध ;पअद्ध ;2ए दृ1ए 3द्ध और ;दृ2ए 1ए 3द्ध 2.दशार्इए कि बिंदु ; - 2, 3, 5द्ध ;1, 2, 3द्ध और ;7, 0, - 1द्ध संरेख हैं। 3.निम्नलिख्िात को सत्यापित कीजिएः ;पद्ध ;0ए 7ए दृ10द्धए ;1ए 6ए दृ 6द्ध और ;4ए 9ए दृ 6द्ध एक समद्विबाहु त्रिाभुज के शीषर् हैं। ;पपद्ध ;0ए 7ए 10द्धए ;दृ1ए 6ए 6द्ध और ;दृ 4ए 9ए 6द्ध एक समकोण त्रिाभुज के शीषर् हैं। ;पपपद्ध ;दृ1ए 2ए 1द्धए ;1ए दृ2ए 5द्धए ;4ए दृ7ए 8द्ध और ;2ए दृ3ए 4द्ध एक समांतर चतुभुर्ज के शीषर् हैं। 4.ऐसे बिंदुओं के समुच्चय का समीकरण ज्ञात कीजिए जो बिंदु ;1, 2, 3द्ध और ;3, 2, - 1द्ध से समदूरस्थ हैं। 5.बिंदुओं च् से बने समुच्चय का समीकरण ज्ञात कीजिए जिनकी बिंदुओं । ;4, 0, 0द्ध और ठ ; - 4, 0, 0द्ध से दूरियों का योगपफल 10 है। 12.5 विभाजन सूत्रा ;ैमबजपवद थ्वतउनसंद्ध स्मरण कीजिए द्विविमीय ज्यामिति में हमने सीखा है कि किस प्रकार समकोण्िाक कातीर्य निकाय में एक रेखा खंड को दिए अनुपात में अंतः विभाजित करने वाले बिंदु के निदेर्शांक ज्ञात करते हैं। अब हम इस संकल्पना का विस्तार त्रिाविमीय ज्यामिति के लिए करते हैं। मान लीजिए अंतरिक्ष में दो बिंदु च्;ग1ए ल1ए ्रद्ध व1फ ;ग2ए ल2ए ्रद्ध हैं। माना त् ;गए लए ्रद्ध रेखा खंड च्फ को2उरू दअनुपात में अंतः विभाजित करता है। ग्ल् - तल पर च्स्ए फड और त्छ लंब खींचिए। स्पष्टतः च्स् 11 फड 11 त्छ हैं तथा इन तीन लंबों के पाद ग्ल्दृतल में स्िथत आवृफति12ण्5 हैं बिंदु स्ए ड और छ उस रेखा पर स्िथत हैं जो उस तल और ग्ल् - तल के प्रतिच्छेदन से बनती है। बिंदु त् से रेखा स्ड के समांतर रेखा ैज् खींचिए। ैज् रेखा खींचे गए लंब के तल में स्िथत है तथा रेखा स्च् ;विस्तारितद्ध को ै और डफ को ज् पर प्रतिच्छेदित करती है। जैसा आवृफति 12.5 में प्रद£शत है। स्पष्टतः चतुर्भुज स्छत्ै और छडज्त् समांतर चतुर्भुज हैं। त्रिाभुजों च्ैत् और फज्त् स्पष्टतः समरूप हैं। इसलिए उ च्त् ैच् ैस् − च्स् छत्दृच्स् ्र्र1− त्रत्र त्रत्र त्र फत् फज्फड − ज्ड फडदृछत् ्र्र −द2 उ्र द्ऱइस प्रकार ्र त्र2 1 उद़ ठीक इसी प्रकार ग्र् - तल और ल्र् - तल पर लंब खींचने पर हमें प्राप्त होता है, उल ़ दल उग ़ दग21 21ल त्र और ग त्र उ ़ दउ ़ द अतः बिंदु त् जो बिंदु च् ;ग1ए ल1ए ्र1द्ध और फ ;ग2ए ल2ए ्र2द्ध को मिलाने वाले रेखा खंड को उ रू द के अनुपात में अंतः विभाजित करता है, के निदेर्शांक हैं, ⎛ उग ़ दग उल ़ दल उ्र ़ द्र ⎞2 12 121⎜⎜ एए ⎟⎟ उ ़ दउ ़ दउ ़ द⎝⎠ यदि बिंदु त्ए रेखा खंड च्फ को उ रू द अनुपात में बाह्य विभाजित करता हो तो इसके निदेर्शांक उपयुर्क्त सूत्रा में द को - द से विस्थापित करके प्राप्त किए जाते हैं। इस प्रकार त् के निदेर्शांक होंगें, ⎛ उग2 − दग1 उल2 − दल1 उ्र2 − द्र1 ⎞⎜ एए ⎟ ⎝ उ − दउ − दउ − द ⎠ स्िथति 1 मध्य - बिंदु के निदेर्शांक यदि त्ए रेखाखंड च्फ का मध्य - बिंदु है तो उ रू द त्र 1रू1 रखने पर ग ़ गल ़ ल्र ़ ्र1212 12ग त्र ए ल त्र और ्र त्रत्र 22 2 ये च् ;ग1ए ल1ए ्रद्ध और फ ;ग2ए ल2ए ्रद्ध को मिलाने वाली रेखा खंड के मध्य - बिंदु के निदेर्शांक हैं।12स्िथति 2 रेखा खंड च्फ को ा रू 1 के अनुपात में अंतः विभाजित करने वाले बिंदु त् के निदेर्शांक उा त्र रखने पर प्राप्त किए जा सकते हैंःद ⎛ ाग ़ग ाल ़ल ा्र ़्र ⎞21 2121⎜⎜ एए ⎟⎟ 1़ा 1़ा 1़ा⎝⎠ यह परिणाम प्रायः दो बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा पर व्यापक बिंदु संबंधी प्रश्नों के हल करने में प्रयुक्त होता है। उदाहरण 7 बिंदुओं ;1, - 2, 3द्ध और ;3, 4, - 5द्ध को मिलाने से बने रेखा खंड को अनुपात 2ः3 में ;पद्ध अंतः ;पपद्ध बाह्य विभाजित करने वाले बिंदु के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। हल ;पद्ध मान लीजिए च् ;गए लए ्रद्धए । ;1ए दृ2ए 3द्ध और ठ;3ए 4ए दृ5द्ध को मिलाने वाले रेखा खंड को अंतः 2ः3 में विभक्त करता है। 2;3द्ध ़3;1द्ध 9 2;4द्ध ़ 3;−2द्ध2 2;−5द्ध ़ 3;3द्ध −1इसलिए, ग त्रत्र ए ल त्रत्र ए और ्र त्रत्र 2 ़ 35 2 ़ 35 2 ़ 35 ⎛ 92 −1⎞अतः अभीष्ट बिंदु ⎜ एए ⎟ है।⎝ 55 5 ⎠ ;पपद्ध मान लीजिए च् ;गए लए ्रद्धए ।;1ए दृ2ए 3द्ध और ठ;3ए 4ए दृ5द्ध को मिलाने वाले रेखा खंड को बाह्य अनुपात 2 रू 3 में बाह्य विभक्त करता है। 2;3द्ध ़;−3द्ध;1द्ध 2;4द्ध ़;−3द्ध;−2द्धइसलिए, ग त्र त्र−3ए ल त्र त्र−14 2 ़;−3द्ध 2 ़;−3द्ध 2;−5द्ध ़;−3द्ध;3द्धऔर ्र त्रत्र19 2 ़;−3द्ध अतः अभीष्ट बिंदु ;दृ3ए दृ14ए 19द्धण् है। उदाहरण 8 विभाजन सूत्रा का प्रयोग करके सि( कीजिए कि बिंदु ;.4ए 6ए 10द्धए ;2ए 4ए 6द्ध और ;14ए 0ए दृ2द्ध संरेख हैं। हल मान लीजिए । ;दृ 4ए 6ए 10द्धए ठ ;2ए 4ए 6द्ध और ब्;14ए 0ए दृ 2द्ध दिए गए बिंदु हैं। मान लीजिए बिंदु च्ए ।ठ को ा रू 1 में विभाजित करता है। तो च् के निदेर्शांक हैंः 2 ा 44 ा 66 ा 10 एएा 1 ा 1 ा 1 आइये अब हम जाँच करें कि ा के किसी मान के लिए बिंदु च्ए बिंदु ब् के संपाती हैं। 2ा−43त्र14 रखने पर प्राप्त होता है ा त्र−ा ़12 34; − द्ध ़634ा ़6जब ा त्र− हो तो त्र 2 त्र0 2 ा ़13−़1236; − द्ध ़106ा ़10 2त्र त्र− 2और ा ़13−़12 इसलिए ब् ;14ए 0ए दृ2द्ध वह बिंदु है जो ।ठ को 3 रू 2 अनुपात में बाह्य विभक्त करता है और वही च् है। अतः ।ए ठ व ब् संरेख है। उदाहरण 9 त्रिाभुज जिसके शीषर् ;ग1ए ल1ए ्रद्धए ;ग2ए ल2ए ्रद्ध तथा ;ग3ए ल3ए ्रद्ध हैं। इसके केंद्रक;ब्मदजतवपकद्ध के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। 123हल मान लीजिए ।ठब् एक त्रिाभुज है जिसके शीषर् ।ए ठए ब् के निदेर्शांक क्रमशः ;ग1ए ल1ए ्रद्धए ;ग2ए ल2ए ्र2द्ध तथा ;ग3ए ल3ए ्र3द्धए हैं।मान लीजिए ठब् का मध्य - बिंदु क् है। इसलिए क् के निदेशांक हैंः ⎛ग ़गल ़ल्र ़्र ⎞232 323⎜ एए ⎟ ⎝ 222 ⎠ माना त्रिाभुज का केंद्रक ळ है जो मियका ।क् को अंत 2 रू1 में विभाजन करता है। इसलिए ळ के निदेर्शांक हैंः ⎛⎛ग2 ़ग3 ⎞⎛ल2 ़ल3 ⎞⎛्र2 ़्र3 ⎞⎞2 ़ग 2 ़ल 2 ़्र⎜⎜ ⎟ 1 ⎜⎟ 1 ⎜⎟ 1 ⎟⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠⎜ एए ⎟ ़़ ⎜⎟ ⎜ 21 212 ़1 ⎟ ⎝⎠ ⎛ग1 ़ग2 ़ग3 ल1 ़ल2 ़ल3 ्र1 ़्र2 ़्र3 ⎞या ⎜⎟⎝ 3 ए 3 ए 3 ⎠ उदाहरण 10 बिंदुओं ;4, 8, 10द्ध और ;6, 10, - 8द्ध को मिलाने वाले रेखा खंड, ल्र् - तल द्वारा जिस अनुपात में विभक्त होता है, उसे ज्ञात कीजिए। हल मान लीजिए ल्र् - तल बिंदु च्;गए लए ्रद्ध परए । ;4ए 8ए 10द्ध और ठ ;6ए 10ए दृ8द्ध को मिलाने वाला रेखा खंड को ा रू1 में विभक्त करता है। तो बिंदु च् के निदेर्शंाक हैंऋ ⎛4 ़6ा 8 ़10ा 10 −8ा ⎞⎜ एए ⎟ ⎝ ा ़1 ा ़1 ा ़1 ⎠ क्योंकि च्ए ल्र् - तल पर स्िथत है इसलिए इसका ग - निदेर्शांक शून्य है। 4 ़6ाअतः त्र0ा ़1 या ा त्र−2 3 इसलिए ल्र् - तल ।ठ को 2 रू 3 के अनुपात में बाह्य विभाजित करता है। प्रश्नावली 12ण्3 1.बिंदुओं ; - 2, 3, 5द्ध और ;1, - 4, 6द्ध को मिलाने से बने रेखा खंड को अनुपात ;पद्ध 2ः3 में अंतः ;पपद्ध 2ः 3 में बाह्यतः विभाजित करने वाले बिंदु के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। 2.दिया गया है कि बिंदु च्;3, 2, - 4द्धए फ;5, 4, - 6द्ध और त्;9, 8, - 10द्ध संरेख हैं। वह अनुपात ज्ञात कीजिए जिसमें फए च्त् को विभाजित करता है। 3.बिंदुओं ; - 2, 4, 7द्ध और ;3, - 5, 8द्ध को मिलाने वाली रेखा खंड, ल्र् - तल द्वारा जिस अनुपात में विभक्त होता है, उसे ज्ञात कीजिए। 4.विभाजन सूत्रा का प्रयोग करके दिखाइए कि बिंदु ।;2, - 3, 4द्ध, ठ; - 1, 2, 1द्ध तथा ⎛ 1 ⎞ब्0एए2⎜⎟ संरेख हैं।⎝ 3⎠5.च्;4, 2, - 6द्ध और फ;10, - 16, 6द्ध के मिलाने वाली रेखा खंड च्फ को सम त्रिा - भाजित करने वाले बिंदुओं के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। विविध उदाहरण उदाहरण 11 दशार्इए कि बिंदु । ;1ए 2ए 3द्धए ठ ;दृ1ए दृ2ए दृ1द्धए ब् ;2ए 3ए 2द्ध और क् ;4ए 7ए 6द्ध एक समांतर चतुभुर्ज के शीषर् हैं परंतु यह एक आयत नहीं है। हल यह दशार्ने के लिए कि ।ठब्क् एक समांतर चतुभुर्ज है, हमें सम्मुख भुजाओं को समान दिखाने की आवश्यकता है। 2 22 त्र 416 ़16 त्र 6।ठ त्र ;−1−1द्ध ़;−2 − 2द्ध ़;−1− 3द्ध ़ 2 22ठब् त्र ;2 ़1द्ध ़;3 ़ 2द्ध ़;2 ़1द्ध त्र 9 ़25 ़ 9 त्र 43 22 2ब्क् त्र ;4 −2द्ध ़;7 − 3द्ध ़;6 − 2द्ध त्र 4 ़16 ़16 त्र 6 2 22क्। त्र ;1−4द्ध ;2 − 7द्ध ;3 − 6द्ध त्र ़़़ 925 ़ 9 त्र 43 क्योंकि ।ठ त्र ब्क् और ठब् त्र ।क्ए इसलिए ।ठब्क् एक समांतर चतुभुर्ज है। अब यह सि( करने के लिए कि ।ठब्क् आयत नहीं है, हमें दिखाना है कि इसके विकणर् ।ब् और ठक् समान नहीं हैं, हम पाते हैं: 222।ब् त्र ;2 −1द्ध ़;3 − 2द्ध ़;2 − 3द्ध त्र 1़1़1त्र 3 2 22ठक् त्र ;4 ़1द्ध ़;7 ़ 2द्ध ़;6 ़1द्ध त्र 25 ़ 81़ 49त्र 155 ण् क्योंकि ।ब् ≠ ठक् । अतः ।ठब्क् एक आयत नहीं है। उदाहरण 12 बिंदु च् से बने समुच्चय का समीकरण ज्ञात कीजिए जो इस प्रकार चलता है कि उसकी बिंदुओं ।;3, 4, - 5द्ध व ठ; - 2, 1, 4द्ध से दूरी समान है। हल कोइर् बिंदु च् ;गए लए ्रद्ध इस प्रकार है कि च्। त्र च्ठ 2 22 222अतः ;ग − 3द्ध ़ ; ल − 4द्ध ़ ;्र ़ 5द्ध त्र ;ग ़ 2द्ध ़ ; ल −1द्ध ़ ;्र − 4द्ध 2 22 222या ;ग − 3द्ध ़ ; ल − 4द्ध ़ ;्र ़ 5द्ध त्र ;ग ़ 2द्ध ़ ; ल −1द्ध ़ ;्र − 4द्ध या 10 ग़ 6ल दृ 18्र दृ 29 त्र 0ण् उदाहरण 13 एक त्रिाभुज ।ठब् का केंद्रक ;1, 1, 1द्ध है। यदि । और ठ के निदेर्शांक क्रमशः ;3, दृ5, 7द्ध व ;दृ1, 7, दृ6द्ध हैं। बिंदु ब् के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। हल माना ब् के निदेर्शांक ;गए लए ्रद्ध है और केंद्रक ळ के निदेर्शांक ;1ए 1ए 1द्ध दिए हैं। 31ग ़−इसलिए 3 त्र1ए या ग त्र 1 ल −़57 त्र1ए या ल त्र 13 ्र ़−76 त्र1ए या ्र त्र 2ण्3 अतः ब् के निदेर्शांक ;1ए 1ए 2द्ध हैं। अध्याय 12 पर विविध प्रश्नावली 1.समांतर चतुभुर्ज के तीन शीषर् ।;3, - 1, 2द्ध ठ;1, 2, - 4द्ध व ब्; - 1, 1, 2द्ध है। चैथे शीषर् क् के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। 2.एक त्रिाभुज ।ठब् के शीषोंर् के निदेर्शांक क्रमशः ।;0, 0, 6द्ध ठ;0, 4, 0द्ध तथा ब्;6, 0, 0द्ध हैं। त्रिाभुज की माियकाओं की लंबाइर् ज्ञात कीजिए। 3.यदि त्रिाभुज च्फत् का केंद्रक मूल बिंदु है और शीषर् च्;2ं, 2, 6द्ध, फ; - 4, 3इ - 10द्ध और त्;8, 14, 2बद्ध हैं तो ंए इ और ब का मान ज्ञात कीजिए। 4.ल - अक्ष पर उस बिंदु के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए जिसकी बिंदु च्;3, - 2, 5द्ध से दूरी 52 2है। 5.च्;2, - 3, 4द्ध और फ;8, 0, 10द्ध को मिलाने वाली रेखाखंड पर स्िथत एक बिंदु त् का ग - निदेर्शांक 4 है। बिंदु त् के निदेर्शांक ज्ञात कीजिए। ;संकेत मान लीजिए त्ए च्फ को ा रू 1 में विभाजित करता है। बिंदु त् के निदेर्शांक ⎛8ा ़2 −3 10 ा ़4 ⎞ ⎜ एए ⎟हैं।द्ध⎝ा ़1 ा ़1 ा ़1 ⎠6.यदि बिंदु । और ठ क्रमशः ;3, 4, 5द्ध तथा ; - 1, 3, - 7द्ध हैं। चर बिंदु च् द्वारा निमिर्त समुच्चय से संबध्ित समीकरण ज्ञात कीजिए, जहाँ च्।2 ़ च्ठ2 त्र ा2 जहाँ ा अचर है। सारांश ऽ त्रिाविमीय ज्यामिति के समकोण्िाक कातीर्य निदेर्शांक निकाय में निदेर्शांक्ष तीन परस्पर लंबवत् रेखाएँ होती हैं। ऽ निदेर्शांक्षों के युग्म, तीन तल निधार्रित करते हैं जिन्हें निदेर्शांक्ष तल ग्ल् - तल, ल्र् - तल व र्ग् - तल कहते हैं। ऽ तीन निदेर्शांक्ष तल अंतरिक्ष को आठ भागों में बाँटते हैं जिन्हें अष्टांश कहते हैं। ऽ त्रिाविमीय ज्यामिति में किसी बिंदु च् के निदेर्शांकों को सदैव एक त्रिादिक ;गए लए ्रद्ध के रूप में लिखा जाता है। यहाँ गए ल्र् - तल से, लए र्ग् तल से व ्र, ग्ल् तल से दूरी है। ऽ दो बिंदुओं च्;ग1ए ल1ए ्र1द्ध तथा फ ;ग2ए ल2ए ्र2द्ध के बीच का दूरी सूत्रा हैः ऽ दो बिंदुओं च् ;ग1 ल1 ्र1द्ध तथा फ ;ग2ए ल2ए ्र2द्ध को मिलाने वाले रेखा खंड को उ रू द अनुपात में अंतः और बाह्यः विभाजित करने वाले बिंदु त् के निदेर्शांक क्रमशः ऽ ;पद्ध ग - अक्ष पर किसी बिंदु के निदेर्शांक ;गए 0ए 0द्ध हैं। ;पपद्ध ल - अक्ष पर किसी बिंदु के निदेर्शांक ;0ए लए 0द्ध हैं। ;पपपद्ध ्र - अक्ष पर किसी बिंदु के निदेर्शांक ;0ए 0ए ्रद्ध हैं। ⎛ उग ़ दग उल ़ दल उ्र ़ द्र ⎞⎛ उग दृदग उल दृदल उ्र दृद्र ⎞212121 212121 एए एए⎜ ⎟⎜ ⎟ हंै।उद उ़ दउ ़द उदृद उदृद उदृद ़⎝ ⎠⎝ ⎠ऽ दो बिंदुओं च्;ग1ए ल1ए ्र1द्ध और फ;ग2ए ल2ए ्र2द्ध को मिलाने वाले रेखा खंड च्फ के मध्य - बिंदु के निदेर्शांक हैंः ⎛ ग ़ गल ़ ल्र ़ ्र ⎞1 21 212⎜ ⎟⎝ 2 ए 2 ए 2 ⎠ ऽ एक त्रिाभुज जिसके शीषोर्ं के निदेर्शांक ;ग1ए ल1ए ्र1द्धए ;ग2ए ल2ए ्र2द्ध और ;ग3ए ल3ए ्र3द्ध हैं, के केंद्रक के निदेर्शांक हैः ⎛ ग ़़ गल ़ ल ़ ल्र ़ग ्र ़ ग ⎞1 2312 3123⎜ ⎟ ण्⎝ 3 ए 3 ए 3 ⎠ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 1637 इर्॰ में वैश्लेष्िाक ज्यामिति के जनक त्मदमश् क्मेबंतजमे ;1596कृ1650 ।ण्क्ण्द्ध ने तलीय ज्यामिति के क्षेत्रा में उल्लेखनीय कायर् किया, इनके सहआविष्कारक च्पंततम थ्मतउंज ;1601कृ1665 ।ण्क्ण्द्ध और स्ं भ्पतम ;1640कृ1718 ।ण्क्ण्द्ध ने भी इस क्षेत्रा में कायर् किया। यद्यपि इन लोगों के कायो± में त्रिाविमीय ज्यामिति के संबंध में सुझाव है, परंतु विशद विवेचन नहीं है। क्मेबंतजमे को त्रिाविमीय अंतरिक्ष में बिंदु के निदेर्शांको के विषय में जानकारी थी परंतु उन्होंने इसे विकसित नहीं किया। 1715 इर्॰ में श्रण् ठमतदवनससप ;1667कृ1748 ।ण्क्ण्द्ध ने स्मपइदपज्र को लिखे पत्रा में तीन निदेर्शांक तलों का परिचय उल्लेख्िात है जिसे हम आज प्रयोग कर रहे हैं। सवर्प्रथम सन 1700 इर्॰ में प्रंेफच ऐकेडमी को प्रस्तुत किए गए ।दजवपददम च्ंतमदज ;1666कृ1716 ।ण्क्ण्द्ध के लेख में वैश्लेष्िाक ठोस ज्यामिति के विषय में विस्तृत विवेचन है। स्ण् म्नसमतए ;1707कृ1783 ।ण्क्ण्द्ध ने सन् 1748 में प्रकाश्िात अपनी पुस्तक ‘ज्यामिति का परिचय’ के दूसरे खंड के परिश्िाष्ट के 5वें अध्याय में त्रिाविमीय निदेर्शांक ज्यामिति का सुव्यवस्िथत एंव क्रमब( वणर्न प्रस्तुत किया। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य के बाद ही ज्यामिति का तीन से अिाक आयामों में विस्तारकिया गया, जिसका सवोर्त्तम प्रयोग म्पदेजमपद के सापेक्षवाद के सि(ांत में स्थान - समय अनुक्रमण ;ैचंबम.ज्पउम ब्वदजपदननउद्ध में द्रष्टव्य है। कृ ऽ कृ

>12>

Ganit

अध्याय 12

त्रिविमीय ज्यामिति का परिचय

(Introduction to Three Dimensional Geometry)

"Mathematics is both the queen and the hand-maiden of  all sciences"

-E.T.Bell

12.1 भूमिका (Introduction)

जानते हैं, कि किसी तल में स्थित एक बिंदु की स्थिति निर्धारण के लिए हमें उस तल में दो परस्पर लंब एवं प्रतिच्छेदित रेखाओं से लांबिक दूरियों की आवश्यकता होती है। इन रेखाओं को निर्देशांक्ष और उन दो लांबिक दूरियों को अक्षोें के सापेक्ष उस बिंदु के निर्देशांक (coordinate) कहते हैं। वास्तविक जीवन में हमारा केवल एक तल में स्थित बिंदुओं से ही संबंध नहीं रह जाता है। उदाहरणत: अंतरिक्ष में फेंके गए एक गेंद की विभिन्न समय में स्थिति अथवा एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के दौरान वायुयान की एक विशिष्ट समय में स्थिति आदि, को भी जानने की आवश्यकता पड़ती है।


स्मवदींतक म्नसमत
(1707-1783 A.D.)

इसी प्रकार एक कमरे की छत से लटकते हुए एक विद्युत बल्ब की निचली नोक अथवा छत के पंखे की नोक की स्थिति का निर्धारण करने के लिए हमें उन बिंदुओं की दो परस्पर लंब दीवारों से दूरियाँ मात्र ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उस बिंदु की, कमरे के फर्श से ऊँचाई, की भी आवश्यकता पड़ती है। अत: हमें केवल दो नहीं बल्कि तीन परस्पर लांबिक तलों से लंबवत् दूरियों को निरूपित करने के लिए तीन संख्याओं की आवश्यकता होती है, जो बिंदु की दो परस्पर लंब दीवारों से दूरियाँ, तथा उस कमरे के फर्श से ऊँचाई को व्यक्त करती हैं। कमरे की परस्पर लंब दीवारों तथा उस क्षैतिज का फर्श तीन परस्पर प्रतिच्छेदित करने वाले तल हैं। इन परस्पर प्रतिच्छेदित करने वाले तलों से लंब दूरियों को व्यक्त करने वाली तीन संख्याएँ उस बिंदु के तीन निर्देशांक तलों के सापेक्ष निर्देशांक कहलाते हैं। इस प्रकार अंतरिक्ष (space) में स्थित एक बिंदु के तीन निर्देशांक होते हैं। इस अध्याय में हम त्रिविमीय अंतरिक्ष में ज्यामिति की मूलभूत संकल्पनाओं का अध्ययन करेंगे।

12.2 त्रिविमीय अंतरिक्ष में निर्देशांक्ष और निर्देशांक-तल (Coordinate Axes and Coordinate Planes in Three Dimensional Space)

बिंदु O पर प्रतिच्छेदित करने वाले तीन परस्पर लंब तलों की कल्पना कीजिए (आकृति 12.1)। ये तीनों तल रेखाओं X'OX, Y'OY और Z'OZ पर प्रतिच्छेदित करते हैं जिन्हें क्रमश: x-अक्ष, y-अक्ष और z-अक्ष कहते हैं। हम स्पष्टत: देखते हैं कि ये तीनों रेखाएँ परस्पर लंब हैं। इन्हें हम समकोणिक निर्देशांक निकाय कहते हैं। XOY, YOZ और ZOX, तलों को क्रमश: XY-तल, YZ-तल, तथा ZX-तल, कहते हैं। ये तीनों तल निर्देशांक तल कहलाते हैं।

आकृति 12.1

हम कागज के तल को XOY तल लेते हैं। और Z'OZ रेखा को तल XOY पर लंबवत लेते हैं। यदि कागज के तल को क्षैतिजत: रखें तो Z'OZ रेखा ऊर्ध्वारत: होती है। XY-तल से OZ की दिशा में ऊपर की ओर नापी गई दूरियाँ धनात्मक और OZ' की दिशा में नीचे की ओर नापी गई दूरियाँ ऋणात्मक होती हैं। ठीक उसी प्रकार ZX-तल के दाहिने OY दिशा में नापी गई दूरियाँ धनात्मक और ZX तल के बाएँ OY' की दिशा में नापी गई दूरियाँ ऋणात्मक होती हैं। YZ-तल के सम्मुख OX दिशा में नापी गई दूरियाँ धनात्मक तथा इसके पीछे OX' की दिशा में नापी गई दूरियाँ ऋणात्मक होती हैं। बिंदु O को निर्देशांक निकाय का मूल बिंदु कहते हैं। तीन निर्देशांक तल अंतरिक्ष को आठ भागों में बांटते हैं, इन अष्टाशों के नाम XOYZ, X'OYZ, X'OY'Z, XOY'Z, XOYZ', X'OY'Z', X'OY'Z' और XOY'Z' हैं। और जिन्हें क्रमश: I, II, III, ...., VIII द्वारा प्रदर्शित करते हैं।


12.3 अंतरिक्ष में एक बिंदु के निर्देशांक (Coordinates of a Point in Space)

अंतरिक्ष में निश्चित निर्देशांक्षों, निर्देशांक तलों और मूल बिंदु सहित निर्देशांक्ष निकाय के चयन के पश्चात् दिए बिंदु के तीन निर्देशांक (x , y, z) को ज्ञात करने की विधि तथा विलोमत: तीन संख्याओं के त्रिदिक (Triplet) दिए जाने पर अंतरिक्ष में संगत बिंदु (x, y, z) के निर्धारण करने की विधि की अब हम विस्तार से व्याख्या करते हैं।

अंतरिक्ष में दिए गए बिंदु P से XY-तल पर PM लंब खींचते हैं जिसका पाद M है (आकृति 12.2)। तब M से x–अक्ष पर ML लंब खींचिए, जो उससे L पर मिलता है। मान लीजिए OL=x, LM = y और PM = z तब (x, y, z) बिंदु P के निर्देशांक कहलाते हैं। इसमें x,y, z को क्रमश: बिंदु P के x-निर्देशांक, y-निर्देशांक, तथा z-निर्देशांक कहते हैं। आकृति 12.2 में हम देखते हैं कि बिंदु P(x, y, z) अष्टांश XOYZ में स्थित है, अत: x, y और z सभी धनात्मक हैं।

आकृति 12.2

यदि P किसी अन्य अष्टांश में हो तो x, y और z के चिह्न तदनुसार परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार अंतरिक्ष में स्थित किसी बिंदु P की संगतता वास्तविक संख्याओं के क्रमित त्रिदिक (x, y, z) से किया जाता है।

विलोमत:, किसी त्रिदिक (x, y, z) के दिए जाने पर हम x के संगत x-अक्ष पर बिंदु L निर्धारित करते हैं। पुन: XY-तल में बिंदु M निर्धारित करते हैं, जहाँ इसके निर्देशांक (x, y) हैं। ध्यान दीजिए कि LM या तो x-अक्ष पर लंब है अथवा y-अक्ष के समांतर है। बिंदु M पर पहुँचने के पश्चात्् हम XY-तल पर MP लंब खींचते हैं, इसपर बिंदु P को z के संगत निर्धारण करते हैं। इस प्रकार निर्धारित बिंदु P के निर्देशांक (x, y, z) हैं। अत: अंतरिक्ष में स्थित बिंदुओं की वास्तविक संख्याओं के क्रमित त्रिदिक (x, y, z) से सदैव एकेक-संगतता रखते हैं।

आकृति 12.3

विकल्पत:, अंतरिक्ष में स्थित बिंदु P से हम निर्देशांक तलों के समांतर तीन तल खींचते हैं, जो x-अक्ष, y-अक्ष और z-अक्ष को क्रमश: A, B तथा C बिंदुओं पर प्रतिच्छेदित करते हैं
(आकृति
12.3)। यदि OA=x, OB=y तथा OC=z हो तो बिंदु P के निर्देशांक x, y और z होते हैं और इसे हम P(x, y, z,) के रूप में लिखते हैं। विलोमत: x, y और z के दिए जाने पर हम निर्देशांक्षों पर बिंदु A, B तथा C निर्धारित करते हैं। बिंदु A, B तथा C से हम क्रमश: YZ-तल, ZX-तल तथा XY-तल के समांतर तीन तल खींचते हैं। इन तीनों तलों को ADPF, BDPE तथा CEPF का प्रतिच्छेदन बिंदु स्पष्टत: P है, जो क्रमित-त्रिदिक ( x, y z) के संगत है।

हम देखते हैं कि यदि अंतरिक्ष में कोई बिंदु P (x, y, z) है, तो YZ, ZX तथा XY तलों से लंबवत् दूरियाँ क्रमश: x, y तथा z हैं।


टिप्पणी बिंदु O के निर्देशांक (0, 0, 0) हैं। x-अक्ष पर स्थित किसी बिंदु के निर्देशांक (x, 0, 0) और YZ तल में स्थित किसी बिंदु के निर्देशांक (0, y, z) होते हैं।

टिप्पणी एक बिंदु के निर्देशांकों के चिह्न उस अष्टांश को निर्धारित करते हैं जिसमें बिंदु स्थित होता है। निम्नलिखित सारणी आठों अष्टांशों में निर्देशांकों के εचह्न दर्शाती है।

सारणी 12.1

tb1

उदाहरण 1 आकृति 12.3 में, यदि P के निर्देशांक (2, 4, 5) हैं तो F के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।

हल बिंदु F के लिए OY के अनुदिश नापी गयी दूरी शून्य है। अत: F के निर्देशांक (2, 0, 5) हैं।

उदाहरण 2 वे अष्टांश ज्ञात कीजिए जिसमें बिंदु (-3, 1, 2) और (-3, 1, -2) स्थित हैं।

हल सारणी 12.1 से, बिंदु (-3, 1, 2) दूसरे अष्टांश में तथा बिंदु (-3, 1, -2) छठे अष्टांश में स्थित हैं।


प्रश्नावली 12.1

1. एक बिंदु x–अक्ष पर स्थित है। इसके y-निर्देशांक तथा z-निर्देशांक क्या हैं?

2. एक बिंदु XZ–तल में है। इसके y-निर्देशांक के बारे में आप क्या कह सकते हैं?

3. उन अष्टांशों के नाम बताइए, जिनमें निम्नलिखित बिंदु स्थित हैं।

(1, 2, 3), (4, –2, 3), (4, –2, –5), (4, 2, –5), (– 4, 2, –5), (– 4, 2, 5), (–3, –1, 6) (–2, – 4, –7)

4. रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए:

(i) x-अक्ष और y-अक्ष दोनों एक साथ मिल कर एक तल बनाते हैं, उस तल को _______ कहते हैं।

(ii) XY-तल में एक बिंदु के निर्देशांक _______ रूप के होते हैं।

(iii) निर्देशांक तल अंतरिक्ष को _______ अष्टांश में विभाजित करते हैं।


12.4 दो बिंदुओं के बीच की दूरी (Distance between Two Points)

द्विविमीय निर्देशांक निकाय में हमने दो बिंदुओं के बीच की दूरी का अध्ययन कर चुके हैं। आइए अब हम अपने अध्ययन का विस्तार त्रिविमीय निकाय के लिए करते हैं।

मान लीजिए, समकोणिक अक्ष OX, OY तथा OZ के सापेक्ष दो बिंदु P(x1, y1, z1) तथा Q (x2, y2, z2) हैं।

P तथा Q बिंदुओं से निर्देशांक तलों के समांतर तल खींचिए, जिससे हमें एेसा घनाभ मिलता है जिसका विकर्ण PQ है (देखिए आकृति 12.4)

क्योंकि PAQ  एक समकोण है अत:  PAQ में,

PQ2 = PA2 + AQ2 ... (1)

पुन: क्योंकि ANQ = एक समकोण, इसलिए ANQ में,

AQ2 = AN2 + NQ2 ... (2)

(1) और (2) से हमें प्राप्त होता है, कि

PQ2 = PA2 + AN2 + NQ2

अब, PA = y2y1, AN = x2x1 और NQ = z2 z1

इस प्रकार, PQ2 = (x2x1)2 + (y2y1)2 + (z2z1)2

आकृति 12.4

अत: PQ =

यह दो बिंदुओं P(x1, y1, z1) और Q(x2, y2, z2) के बीच की दूरी PQ के लिए सूत्र है।

विशेषत: यदि x1 = y1 = z1 = 0, अर्थात् बिंदु P, मूल बिंदु O हो तो

OQ = ,

जिससे हमें मूल बिंदु O और किसी बिंदु Q (x2, y2, z2) के बीच की दूरी प्राप्त होती है।

उदाहरण 3 बिंदुओं P (1, -3, 4) और Q (-4, 1, 2) के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।

हल PQ बिंदुओं P (1,–3, 4) और Q (– 4, 1, 2) के बीच की दूरी है।

eq1

उदाहरण 4 दर्शाइए कि P (–2, 3, 5), Q (1, 2, 3) और R (7, 0, –1) संरेख हैं।

हल हम जानते हैं कि संरेख बिंदु, एक ही रेखा पर स्थित होते हैं।

यहाँ 

eq2


और eq3

इस प्रकार PQ + QR = PR

अत: बिंदु P, Q और R संरेख हैं।

उदाहरण 5 क्या बिंदु A (3, 6, 9), B (10, 20, 30) और C (25, – 41, 5) एक समकोण त्रिभुज के शीर्ष हैं?

हल दूरी-सूत्र से हमें प्राप्त होता है कि

AB2 = (10 – 3)2 + (20 – 6)2 + (30 – 9)2

= 49 + 196 + 441 = 686

BC2 = (25 – 10)2 + (– 41 – 20)2 + (5 – 30)2

= 225 + 3721 + 625 = 4571

CA2 = (3 – 25)2 + (6 + 41)2 + (9 – 5)2

= 484 + 2209 + 16 = 2709

हम पाते हैं कि CA2 + AB2 BC2

अत: ABC एक समकोण त्रिभुज नहीं है।

उदाहरण 6 दो बिंदुओं A तथा B के निर्देशांक क्रमश: (3, 4, 5) और (-1, 3, -7) हैं। गतिशील बिंदु P के पथ का समीकरण ज्ञात कीजिए, जबकि PA2 + PB2 = 2k2.

हल माना गतिशील बिंदु P के निर्देशांक (x, y, z) हैं।

अब PA2 = (x – 3)2 + (y – 4)2 + ( z – 5)2

PB2 = (x + 1)2 + (y – 3)2 + (z + 7)2

दिए गए प्रतिबन्ध के अनुसार, PA2 + PB2 = 2k2, हमें प्राप्त होता है:

(x – 3)2 + (y – 4)2 + (z – 5)2 + (x + 1)2 + (y – 3)2 + (z + 7)2 = 2k2

या 2x2 + 2y2 + 2z2 – 4x – 14y + 4z = 2k2 – 109.

प्रश्नावली 12.2

1. निम्नलिखित बिंदु-युग्मों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए:

(i) (2, 3, 5) और (4, 3, 1) (ii) (–3, 7, 2) और (2, 4, –1)

(iii) (–1, 3, – 4) और (1, –3, 4) (iv) (2, –1, 3) और (–2, 1, 3)

2. दर्शाइए कि बिंदु (-2, 3, 5) (1, 2, 3) और (7, 0, -1) संरेख हैं।

3. निम्नलिखित को सत्यापित कीजिए:

(i) (0, 7, –10), (1, 6, – 6) और (4, 9, – 6) एक समद्विबाहु त्रिभुज के शीर्ष हैं।

(ii) (0, 7, 10), (–1, 6, 6) और (– 4, 9, 6) एक समकोण त्रिभुज के शीर्ष हैं।

(iii) (–1, 2, 1), (1, –2, 5), (4, –7, 8) और (2, –3, 4) एक समांतर चतुर्भुज के शीर्ष हैं।

4. एेसे बिंदुओं के समुच्चय का समीकरण ज्ञात कीजिए जो बिंदु (1, 2, 3) और
(
3, 2, -1) से समदूरस्थ हैं।

5. बिंदुओं P से बने समुच्चय का समीकरण ज्ञात कीजिए जिनकी बिंदुओं A (4, 0, 0) और B (-4, 0, 0) से दूरियों का योगफल 10 है।


12.5 विभाजन सूत्र (Section Formula)

स्मरण कीजिए द्विविमीय ज्यामिति में हमने सीखा है कि किस प्रकार समकोणिक कार्तीय निकाय में एक रेखा खंड को दिए अनुपात में अंत: विभाजित करने वाले बिंदु के निर्देशांक ज्ञात करते हैं। अब हम इस संकल्पना का विस्तार त्रिविमीय ज्यामिति के लिए करते हैं।

आकृति 12.5

मान लीजिए अंतरिक्ष में दो बिंदु P(x1, y1, z1)Q (x2, y2, z2) हैं। माना R (x, y, z) रेखा खंड PQ को m : n अनुपात में अंत: विभाजित करता है। XY-तल पर PL, QM और RN लंब खींचिए। स्पष्टत: PL 11 QM 11 RN हैं तथा इन तीन लंबों के पाद XY–तल में स्थित हैं बिंदु L, M और N उस रेखा पर स्थित हैं जो उस तल और XY-तल के प्रतिच्छेदन से बनती है। बिंदु R से रेखा LM के समांतर रेखा ST खींचिए। ST रेखा खींचे गए लंब के तल में स्थित है तथा रेखा LP (विस्तारित) को S और MQ को T पर प्रतिच्छेदित करती है। जैसा आकृति 12.5 में प्रदर्शित है।

स्पष्टत: चर्तुभुज LNRS और NMTR समांतर चर्तुभुज हैं। त्रिभुजों PSR और QTR स्पष्टत: समरूप हैं। इसलि

=

इस प्रकार z =

ठीक इसी प्रकार XZ-तल और YZ-तल पर लंब खींचने पर हमें प्राप्त होता है,

eq4

अत: बिंदु R जो बिंदु P (x1, y1, z1) और Q (x2, y2, z2) को मिलाने वाले रेखा खंड को
m
: n के अनुपात में अंत: विभाजित करता है, के निर्देशांक हैं,

eq5

यदि εबंदु R, रेखा खंड PQ को m : n अनुपात में बाह्य विभाजित करता हो तो इसके निर्देशांक उपर्युक्त सूत्र में n को -n से विस्थापित करके प्राप्त किए जाते हैं। इस प्रकार R के निर्देशांक होंगें,

eq6

स्थिति 1 मध्य-बिंदु के निर्देशांक यदि R, रेखाखंड PQ का मध्य-बिंदु है तो m : n = 1:1 रखने पर

x = = और z =

ये P (x1, y1, z1) और Q (x2, y2, z2) को मिलाने वाली रेखा खंड के मध्य-बिंदु के निर्देशांक हैं।

स्थिति 2 रेखा खंड PQ को k : 1 के अनुपात में अंत: विभाजित करने वाले बिंदु R के निर्देशांक रखने पर प्राप्त किए जा सकते हैं:

eq7

यह परिणाम प्राय: दो बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा पर व्यापक बिंदु संबंधी प्रश्नों के हल करने में प्रयुक्त होता है।

उदाहरण 7 बिंदुओं (1, -2, 3) और (3, 4, -5) को मिलाने से बने रेखा खंड को अनुपात 2:3 में (i) अंत: (ii) बाह्य विभाजित करने वाले बिंदु के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।

हल (i) मान लीजिए P (x, y, z), A (1, –2, 3) और B(3, 4, –5) को मिलाने वाले रेखा खंड को अंत: 2:3 में विभक्त करता है।

इसलिए, , , और

अत: अभीष्ट बिंदु है।

(ii) मान लीजिए P (x, y, z), A (1, –2, 3) और B(3, 4, –5) को मिलाने वाले रेखा खंड को बाह्य अनुपात 2 : 3 में बाह्य विभक्त करता है।

eq8

अत: अभीष्ट बिंदु (–3, –14, 19). है।

उदाहरण 8 विभाजन सूत्र का प्रयोग करके सिद्ध कीजिए कि बिंदु (-4, 6, 10), (2, 4, 6) और
(14, 0, –2)
संरेख हैं।

हल मान लीजिए A (– 4, 6, 10), B (2, 4, 6) और C(14, 0, – 2) दिए गए बिंदु हैं। मान लीजिए बिंदु P, AB को k : 1 में विभाजित करता है। तो P के निर्देशांक हैं:

eq9

आइये अब हम जाँच करें कि k के किसी मान के लिए बिंदु P, बिंदु C के संपाती हैं।

eq10 रखने पर प्राप्त होता है

जब हो तो

और

इसलिए C (14, 0, –2) वह बिंदु है जो AB को 3 : 2 अनुपात में बाह्य विभक्त करता है और वही P है। अत: A, B C संरेख है।

उदाहरण 9 त्रिभुज जिसके शीर्ष (x1, y1, z1), (x2, y2, z2) तथा (x3, y3, z3) हैं। इसके केंद्रक (Centroid) के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।

हल मान लीजिए ABC एक त्रिभुज है जिसके शीर्ष A, B, C के निर्देशांक क्रमश: (x1, y1, z1),
(
x2, y2, z2) तथा (x3, y3, z3), हैं।

मान लीजिए BC ा मध्य-बिंदु D है। इसलिए D के निदेशांक हैं:

माना त्रिभुज का केंद्रक G है जो मध्यिका AD को अंत 2 : 1 में विभाजन करता है। इसलिए G के निर्देशांक हैं:

या

उदाहरण 10 बिंदुओं (4, 8, 10) और (6, 10, -8) को मिलाने वाले रेखा खंड, YZ-तल द्वारा जिस अनुपात में विभक्त होता है, उसे ज्ञात कीजिए।

हल मान लीजिए YZ-तल बिंदु P(x, y, z) पर, A (4, 8, 10) और B (6, 10, –8) को मिलाने वाला रेखा खंड को k :1 में विभक्त करता है। तो बिंदु P के निर्देशांक हैं;

eq11

क्योंकि P, YZ-तल पर स्थित है इसलिए इसका x-निर्देशांक शून्य है।

अत:

या

इसलिए YZ-तल AB को 2 : 3 के अनुपात में बाह्य विभाजित करता है।


प्रश्नावली 12.3

1. बिंदुओं (-2, 3, 5) और (1, -4, 6) को मिलाने से बने रेखा खंड को अनुपात (i) 2:3 में अंत: (ii) 2: 3 में बाह्यत: विभाजित करने वाले बिंदु के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।

2. दिया गया है कि बिंदु P(3, 2, -4), Q(5, 4, -6) और R(9, 8, -10) संरेख हैं। वह अनुपात ज्ञात कीजिए जिसमें Q, PR को विभाजित करता है।

3. बिंदुओं (-2, 4, 7) और (3, -5, 8) को मिलाने वाली रेखा खंड, YZ-तल द्वारा जिस अनुपात में विभक्त होता है, उसे ज्ञात कीजिए।

4. विभाजन सूत्र का प्रयोग करके दिखाइए कि बिंदु A(2, -3, 4), B(-1, 2, 1) तथा संरेख हैं।

5. P(4, 2, -6) और Q(10, -16, 6) के मिलाने वाली रेखा खंड PQ को सम त्रि-भाजित करने वाले बिंदुओं के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।


विविध उदाहरण

उदाहरण 11 दर्शाइए कि बिंदु A (1, 2, 3), B (–1, –2, –1), C (2, 3, 2) और D (4, 7, 6) एक समांतर चतुर्भुज के शीर्ष हैं परंतु यह एक आयत नहीं है।

हल यह दर्शाने के लिए कि ABCD एक समांतर चतुर्भुज है, हमें सम्मुख भुजाओं को समान दिखाने की आवश्यकता है।

AB = = = 6

BC = eq12 =

CD = eq13त्र्6

DA = =

क्योंकि AB = CD और BC = AD, इसलिए ABCD एक समांतर चतुर्भुज है।

अब यह सिद्ध करने के लिए कि ABCD आयत नहीं है, हमें दिखाना है कि इसके विकर्ण AC और BD समान नहीं हैं, हम पाते हैं :

AC =

BD = eq14

क्योंकि AC BD । अत: ABCD एक आयत नहीं है।

टिप्पणी विकर्ण AC तथा BD परस्पर समद्विभाजित करते हैं, के गुण का प्रयोग करके भी ABCD को समांतर चतुर्भुज सिद्ध किया जा सकता है।

उदाहरण 12 बिंदु P से बने समुच्चय का समीकरण ज्ञात कीजिए जो इस प्रकार चलता है कि उसकी बिंदुओं A(3, 4, -5) व B(-2, 1, 4) से दूरी समान है।

हल कोई बिंदु P (x, y, z) इस प्रकार है कि PA = PB

अत:

या

या 10+ 6y – 18z – 29 = 0.

उदाहरण 13 एक त्रिभुज ABC का केंद्रक (1, 1, 1) है। यदि A और B के निर्देशांक क्रमश: (3, –5, 7) व (–1, 7, –6) हैं। बिंदु C के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।

हल माना C के निर्देशांक (x, y, z) है और केंद्रक G के निर्देशांक (1, 1, 1) दिए हैं।

इसलिए , या x = 1

, या y = 1

, या z = 2.

अत: C के निर्देशांक (1, 1, 2) हैं।


अध्याय 12 पर विविध प्रश्नावली

1. समांतर चतुर्भुज के तीन शीर्ष A(3, -1, 2) B(1, 2, -4) व C(-1, 1, 2) है। चौथे शीर्ष D के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।

2. एक त्रिभुज ABC के शीर्षों के निर्देशांक क्रमश: A(0, 0, 6) B(0, 4, 0) तथा
C
(6, 0, 0) हैं। त्रिभुज की माध्यिकाओं की लंबाई ज्ञात कीजिए।

3. यदि त्रिभुज PQR का केंद्रक मूल बिंदु है और शीर्ष P(2a, 2, 6), Q(-4, 3b -10) और R(8, 14, 2c) हैं तो a, b और c का मान ज्ञात कीजिए।

4. y-अक्ष पर उस बिंदु के निर्देशांक ज्ञात कीजिए जिसकी बिंदु P(3, -2, 5) से दूरी
5
है।

5. P(2, -3, 4) और Q(8, 0, 10) को मिलाने वाली रेखाखंड पर स्थित एक बिंदु R का
x
-निर्देशांक 4 है। बिंदु R के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।

(संकेत मान लीजिए R, PQ को k : 1 में विभाजित करता है। बिंदु R के निर्देशांक हैं।)

6. यदि बिंदु A और B क्रमश: (3, 4, 5) तथा (-1, 3, -7) हैं। चर बिंदु P द्वारा निर्मित समुच्चय से संबधित समीकरण ज्ञात कीजिए, जहाँ PA2 + PB2 = k2 जहाँ k अचर है।


सारांश

त्रिविमीय ज्यामिति के समकोणिक कार्तीय निर्देशांक निकाय में निर्देशांक्ष तीन परस्पर लंबवत् रेखाएँ होती हैं।

निर्देशांक्षों के युग्म, तीन तल निर्धारित करते हैं जिन्हें निर्देशांक्ष तल XY-तल, YZ-तल व ZX-तल कहते हैं।

तीन निर्देशांक्ष तल अंतरिक्ष को आठ भागों में बाँटते हैं जिन्हें अष्टांश कहते हैं।

त्रिविमीय ज्यामिति में किसी बिंदु P के निर्देशांकों को सदैव एक त्रिदिक (x, y, z) के रूप में लिखा जाता है। यहाँ x, YZ-तल से, y, ZX तल से व z, XY तल से दूरी है।

(i) x-अक्ष पर किसी बिंदु के निर्देशांक (x, 0, 0) हैं।

(ii) y-अक्ष पर किसी बिंदु के निर्देशांक (0, y, 0) हैं।

(iii) z-अक्ष पर किसी बिंदु के निर्देशांक (0, 0, z) हैं।

दो बिंदुओं P(x1, y1, z1) तथा Q (x2, y2, z2) के बीच का दूरी सूत्र है:

दो बिंदुओं P (x1 y1 z1) तथा Q (x2, y2, z2) को मिलाने वाले रेखा खंड को m : n अनुपात में अंत: और बाह्य: विभाजित करने वाले बिंदु R के निर्देशांक क्रमश: हैं।

दो बिंदुओं P(x1, y1, z1) और Q(x2, y2, z2) को मिलाने वाले रेखा खंड PQ के मध्य-बिंदु के निर्देशांक हैं:

एक त्रिभुज जिसके शीर्षों के निर्देशांक (x1, y1, z1), (x2, y2, z2) और (x3, y3, z3) हैं, के केंद्रक के निर्देशांक है:

.


एेतिहासिक पृष्ठभूमि

1637 ई॰ में वैश्लेषिक ज्यामिति के जनक Rene' Descartes (1596—1650 A.D.) ने तलीय ज्यामिति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया, इनके सहआविष्कारक Piarre Fermat
(1601—1665 A.D.)
और La Hire (1640—1718 A.D.) ने भी इस क्षेत्र में कार्य किया। यद्यपि इन लोगों के कार्यों में त्रिविमीय ज्यामिति के संबंध में सुझाव है, परंतु विशद विवेचन नहीं है। Descartes को त्रिविमीय अंतरिक्ष में बिंदु के निर्देशांको के विषय में जानकारी थी परंतु उन्होंने इसे विकसित नहीं किया।

1715 ई॰ में J. Bernoulli (1667—1748 A.D.) ने Leibnitz को लिखे पत्र में तीन निर्देशांक तलों का परिचय उल्लेखित है जिसे हम आज प्रयोग कर रहे हैं।

सर्वप्रथम सन 1700 ई॰ में फ्रेंच एेकेडमी को प्रस्तुत किए गए Antoinne Parent (1666—1716 A.D.) के लेख में वैश्लेषिक ठोस ज्यामिति के विषय में विस्तृत विवेचन है।

L. Euler, (1707—1783 A.D.) ने सन् 1748 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘ज्यामिति का परिचय’ के दूसरे खंड के परिशिष्ट के 5वें अध्याय में त्रिविमीय निर्देशांक ज्यामिति का सुव्यवस्थित एंव क्रमबद्ध वर्णन प्रस्तुत किया।

उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य के बाद ही ज्यामिति का तीन से अधिक आयामों में विस्तार किया गया, जिसका सर्वोत्तम प्रयोग Einstein के सापेक्षवाद के सिद्धांत में स्थान-समय अनुक्रमण (Space-Time Continuum) में द्रष्टव्य है।

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