™डंजीमउंजपबे पे जीम ंतज व िेंलपदह उंदल जीपदहे पद उंदल कपमिितमदज ूंलेण् कृ ड।ग्ॅम्स्स्ऽ 6ण्1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध पिछली कक्षाओं में हम एक चर और दो चर राश्िायों के समीकरणों तथा शाब्िदक प्रश्नों को समीकरणों में परिव£तत करके हल करना सीख चुके हैं। अब हमारे मस्ितष्क में स्वभावतः यह प्रश्न उठता है कि फ्क्या शाब्िदक प्रश्नों को सदैव एक समीकरण के रूप में परिव£तत करना संभव है?य् उदाहरणतःआपकी कक्षा के सभी विद्या£थयों की ऊँचाइर् 106 सेमी. से कम है, आपकी कक्षा में अिाकतम 60 मेशें या वुफ£सयाँ या दोनों समा सकती हैं। यहाँ हमें ऐसे कथन मिलते हैं जिनमें ष्ढष् ;से कमद्ध, ष्झष् ;से अध्िकद्धए ष्≤ष् ;से कम या बराबरद्धष्≥ष् ;से अध्िक या बराबरद्धचिÉ प्रयुक्त होते हैं। इन्हें हम असमिकाएँ ;प्दमुनंसपजपमेद्ध कहते हैं। इस अध्याय में, हम एक या दो चर राश्िायों की रैख्िाक असमिकाओं का अध्ययन करेंगे। असमिकाओं का अध्ययन विज्ञान, गण्िात, सांख्ियकी, इष्टतमकारी समस्याओं ;वचजपउपेंजपवद चतवइसमउेद्धए अथर्शास्त्रा, मनोविज्ञान इत्यादि से संबंिात समस्याओं को हल करने में अत्यंत उपयोगी है। 6ण्2 असमिकाएँ ;प्दमुनंसपजपमेद्ध हम निम्नलिख्िात स्िथतियों पर विचार करते हैंः ;पद्ध रवि 200 रुपये लेकर चावल खरीदने के लिए बाशार जाता है, चावल 1 किग्रा॰ के पैकेटों में उपलब्ध हैं। एक किलो चावल के पैकेट का मूल्य 30 रुपये है। यदि ग उसके द्वारा खरीदे गए चावल के पैकेटों की संख्या को व्यक्त करता हो, तो उसके द्वारा खचर् की गइर् धनराश्िा 30 ग रुपये होगी। क्योंकि उसे चावल को पैकेटों में ही खरीदना है इसलिए वह 200 रुपये की पूरी धनराश्िा को खचर् नहीं कर पाएगा ;क्यों?द्ध। अतः 30ग ढ 200 ण्ण्ण् ;1द्ध स्पष्टतः कथन ;पद्ध समीकरण नहीं है, क्योंकि इसमें समता ;मुनंसपजलद्ध का चिÉ ;त्रद्ध नहीं है। ;पपद्ध रेशमा के पास 120 रुपये हैं जिससे वह कुछ रजिस्टर व पेन खरीदना चाहती है। रजिस्टर का मूल्य 40 रुपये और पेन का मूल्य 20 रुपये है। इस स्िथति में यदि रेशमा द्वारा खरीदे गए रजिस्टर की संख्या ग तथा पेन की संख्या ल हो तो उसके द्वारा व्यय की गयी कुल धनराश्िा ;40ग ़20लद्ध रुपये है। इस प्रकार हम पाते हैं कि 40ग ़ 20ल ≤ 120 ण्ण्ण् ;2द्ध क्योंकि इस स्िथति में खचर् की गयी कुल धनराश्िा अिाकतम 120 रुपये है। ध्यान दीजिए कथन ;2द्ध के दो भाग हैं। 40ग ़ 20ल ढ 120 ण्ण्ण् ;3द्ध और 40ग ़ 20ल त्र 120 ण्ण्ण् ;4द्ध कथन ;3द्ध समीकरण नहीं है, जबकि कथन ;4द्ध समीकरण है। उपरोक्त कथन जैसे ;1द्ध, ;2द्ध तथा ;3द्ध असमिका कहलाते हैं। परिभाषा 1 एक असमिका, दो वास्तविक संख्याओं या दो बीजीय व्यंजकों में ष्ढष्ए ष्झष्ए ष्≤ष् या ष्≥ष् के चिÉ के प्रयोग से बनती हैं। 3 ढ 5य 7 झ 5 आदि संख्यांक असमिका के उदाहरण हैं। जबकि ग ढ 5य ल झ 2य ग ≥ 3ए ल ≤ 4 इत्यादि शाब्िदक ;चरांकद्ध असमिका के उदाहरण हैं। 3 ढ 5 ढ 7 ;इसे पढ़ते हैं 5, 3 से बड़ा व 7 से छोटा हैद्धए 3 ढ ग ढ 5 ;इसे पढ़ते हैं गए 3 से बड़ा या बराबर है व 5 से छोटा हैद्ध और 2 ढ ल ढ 4 द्वि - असमिका के उदाहरण हैं। असमिकाओं के कुछ अन्य उदाहरण निम्नलिख्िात हैं: ंग ़ इ ढ 0 ण्ण्ण् ;5द्ध ंग ़ इ झ 0 ण्ण्ण् ;6द्ध ंग ़ इ ≤ 0 ण्ण्ण् ;7द्ध ंग ़ इ ≥ 0 ण्ण्ण् ;8द्ध ंग ़ इल ढ ब ण्ण्ण् ;9द्ध ंग ़ इल झ ब ण्ण्ण् ;10द्ध ंग ़ इल ≤ ब ण्ण्ण् ;11द्ध ंग ़ इल ≥ ब ण्ण्ण् ;12द्ध ंग2 ़ इग ़ ब ≤ 0 ण्ण्ण् ;13द्ध ंग2 ़ इग ़ ब झ 0 ण्ण्ण् ;14द्ध क्रमांक ;5द्ध, ;6द्ध, ;9द्ध, ;10द्ध और ;14द्ध सुनिश्िचत असमिकाएँ तथा क्रमांक ;7द्ध, ;8द्ध, ;11द्ध, ;12द्ध और ;13द्ध असमिकाएँ कहलाती हैं। यदि ं0 हो तो क्रमांक ;5द्ध से ;8द्ध तक की असमिकाएँ एक चर राश्िा ग के रैख्िाक असमिकाएँ हैं और यदि ं0 तथा इ 0 हो तो क्रमांक ;9द्ध से ;12द्ध तक की असमिकाएँ दो चर राश्िायों ग तथा ल के रैख्िाक असमिकाएंँ हैं। क्रमांक ;13द्ध और ;14द्ध की असमिकाएँ रैख्िाक नहीं हैं। वास्तव में यह एक चर राश्िा ग के द्विघातीय असमिकाएँ हैं, जब ं ≠ 0ण् इस अध्याय में हम केवल एक चर और दो चर राश्िायों के रैख्िाक असमिकाओं का अध्ययन करेंगे। 6.3 एक चर राश्िा के रैख्िाक असमिकाओं का बीजगण्िातीय हल और उनका आलेखीय निरूपण ;।सहमइतंपब ैवसनजपवदे व िस्पदमंत प्दमुनंसपजपमे पद व्दम टंतपंइसम ंदक जीमपत ळतंचीपबंस त्मचतमेमदजंजपवदद्ध अनुभाग 6.2 के असमिका ;1द्ध अथार्त् 30ग ढ 200 पर विचार कीजिए। ध्यान दें, कि यहाँ ग चावल के पैकेटों की संख्या को व्यक्त करता है। स्पष्टतः ग एक )णात्मक पूणा±क अथवा भ्िान्न नहीं हो सकता है। इस असमिका का बायाँ पक्ष 30ग और दायाँ पक्ष 200 है। ग त्र 0 के लिए, बायाँ पक्ष त्र 30 ;0द्ध त्र 0 ढ 200 ;दायाँ पक्षद्ध, जोकि सत्य है। ग त्र 1 के लिए, बायाँ पक्ष त्र 30 ;1द्ध त्र 30 ढ 200 दायाँ पक्षद्ध, जोकि सत्य है। ग त्र 2 के लिए, बायाँ पक्ष त्र 30 ;2द्ध त्र 60 ढ 200ए जो कि सत्य है। ग त्र 3 के लिए, बायाँ पक्ष त्र 30 ;3द्ध त्र 90 ढ 200ए जो कि सत्य है। ग त्र 4 के लिए, बायाँ पक्ष त्र 30 ;4द्ध त्र 120 ढ 200ए जो कि सत्य है। ग त्र 5 के लिए, बायाँ पक्ष त्र 30 ;5द्ध त्र 150 ढ 200ए जो कि सत्य है। ग त्र 6 के लिए, बायाँ पक्ष त्र 30 ;6द्ध त्र 180 ढ 200ए जो कि सत्य है। ग त्र 7 के लिए, बायाँ पक्ष त्र 30 ;7द्ध त्र 210 ढ 200ए जो कि असत्य है। उपयुर्क्त स्िथति में हम पाते हैं कि उपयुर्क्त असमिका को सत्य कथन करने वाले ग के मान केवल 0, 1, 2, 3, 4, 5 और 6 हैं। ग के उन मानों को जो दिए असमिका को एक सत्य कथन बनाते हों, उन्हें असमिका का हल कहते हैं। और समुच्चय क्ष्0ए 1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्व को हल समुच्चय कहते हैं। इस प्रकार, एक चर राश्िा के किसी असमिका का हल, चर राश्िा का वह मान है, जो इसे एक सत्य कथन बनाता हो। हमने उपयुर्क्त असमिका का हल ‘प्रयास और भूल वििा’ ;जतपंस ंदक मततवत उमजीवकद्ध से प्राप्त किया है। जो अध्िक सुविधजनक नहीं है। स्पष्टतः यह वििा अिाक समय लेने वाली तथा कभी - कभी संभाव्य नहीं होती है। हमें असमिकाओं के हल के लिए अिाक अच्छी या क्रमब( तकनीक की आवश्यकता है। इससे पहले हमें संख्यांक असमिकाओं के कुछ और गुणधमर् सीखने चाहिए और असमिकाओं को हल करते समय उनका नियमों की तरह पालन करना चाहिए। आपको स्मरण होगा कि रैख्िाक समीकरणों को हल करते समय हम निम्नलिख्िात नियमों का पालन करते हैंः नियम 1 एक समीकरण के दोनों पक्षों में समान संख्याएँ जोड़ी ;अथवा घटाइर्द्ध जा सकती है। नियम 2 एक समीकरण के दोनों पक्षों में समान शून्येतर संख्याओं से गुणा ;अथवा भागद्ध किया जा सकता है। असमिकाओं को हल करते समय हम पुनः इन्हीं नियमों का पालन तथा नियम 2 में कुछ संशोध्न के साथ करते हैं। अंतर मात्रा इतना है कि )णात्मक संख्याओं से असमिका के दोनों पक्षों को गुणा ;या भागद्ध करने पर असमिका के चिÉ विपरीत हो जाते हैं ;अथार्त् ष्ढष् को झए ष्≤ष् को ष्≥ष् इत्यादि कर दिया जाता हैद्ध। इसका कारण निम्नलिख्िात तथ्यों से स्पष्ट हैः 3 झ 2 जबकि दृ 3 ढ दृ 2 दृ 8 ढ दृ 7 जबकि ;दृ8द्ध ;दृ2द्ध झ ;दृ7द्ध ;दृ2द्धए अथार्त् 16 झ 14 इस प्रकार असमिकाओं को हल करने के लिए हम निम्नलिख्िात नियमों का उल्लेख करते हैंः नियम 1 एक असमिका के दोनों पक्षों में, असमिका के चिÉों को प्रभावित किए बिना समान संख्याएँ जोड़ी ;अथवा घटाइर्द्ध जा सकती हैं। नियम 2 किसी असमिका के दोनों पक्षों को समान धनात्मक संख्याओं से गुणा ;या भागद्ध किया जा सकता है। परंतु दोनों पक्षों को समान )णात्मक संख्याओं से गुणा ;या भाग, करते समय असमिका के चिÉ तदनुसार परिव£तत कर दिए जाते हैं। आइए अब हम कुछ उदाहरणों पर विचार करते हैं। उदाहरण 1 30 ग ढ 200ए को हल ज्ञात कीजिए जब ;पद्ध ग एक प्रावृफत संख्या है। ;पपद्ध ग एक पूणा±क है। हल ज्ञात है कि 30 ग ढ 200 30ग 200अथवा ढ ;नियम 2द्ध30 3020अथवाग ढ 3 ;पद्ध जब ग एक प्रावृफत संख्या है। स्पष्टतः इस स्िथति में ग के निम्नलिख्िात मान कथन को सत्य करते हैं। ग त्र 1, 2, 3, 4, 5, 6 असमिका का हल समुच्चय क्ष्1, 2, 3, 4, 5, 6द्व है ;पपद्ध जब ग एक पूणा±क है स्पष्टतः इस स्िथति में दिए गए असमिका के हल हैंः ण्ण्ण्ए दृ 3ए दृ2ए दृ1ए 0ए 1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6 असमिका का हल समुच्चय क्ष्ण्ण्ण्एदृ3ए दृ2एदृ1ए 0ए 1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्व है उदाहरण 2 हल कीजिएः 5ग - 3ढ 3ग़1, जब ;पद्ध गएक पूणा±क है। ;पपद्ध गएक वास्तविक संख्या है। हल दिया है, कि 5गदृ3 ढ 3ग़ 1 अथवा 5गदृ3 ़ 3 ढ 3ग़1 ़3 ;नियम 1द्ध अथवा 5गढ 3ग़4 अथवा 5गदृ 3गढ 3ग़ 4 दृ 3ग ;नियम 1द्ध अथवा 2गढ 4 अथवा गढ 2 ;नियम 2द्ध ;पद्ध जब ग एक पूणा±क है। इस स्िथति में दिए गए असमिका के हल ण्ण्ण्ए दृ 4ए दृ 3ए दृ 2ए दृ 1ए 0ए 1 अतः हल समुच्चय क्ष्ण्ण्ण्ए - 4, - 3, - 2, - 1, 0, 1द्व ;पपद्ध जब गएक वास्तविक संख्या है। इस स्िथति में असमिका का हलगढ 2 से व्यक्त है। इसका अथर् है कि 2 से छोटी समस्त वास्तविक संख्याएँ असमिका के हल हैं। अतः असमिका का हल समुच्चय;दृ ∞ए 2द्धण् है। हमने असमिकाओं के हल प्रावृफत संख्याओं, पूणार्कों तथा वास्तविक संख्याओं के समुच्चयों पर विचार करके ज्ञात किए हैं। आगे जब तक अन्यथा व£णत न हो, हम इस अध्याय में असमिकाओं का हल वास्तविक संख्याओं के समुच्चय में ही ज्ञात करेंगे। उदाहरण 3 हल कीजिए 4ग़ 3 ढ 6ग़7ण् हल ज्ञात है कि 4ग़ 3 ढ 6ग़ 7 अथवा 4गदृ 6गढ 6ग़ 4 दृ 6ग अथवा दृ 2गढ 4 अथवा गझ दृ 2 अथार्त् दृ2 से बड़ी समस्त वास्तविक संख्याएँ, दिए गए असमिका के हल हैं। अतः हल समुच्चय ;दृ2, ∞द्ध है। 52दृग ग उदाहरण 4 हल कीजिए 3 ≤ 6 दृ5 52दृग ग हल हमें ज्ञात है कि 3 ≤ 6 दृ5 या 2 ;5 दृ 2गद्ध ≤ गदृ 30 या 10 दृ 4ग≤ गदृ 30 या दृ 5ग≤ दृ 40ए या ग≥ 8 अथार्त् ऐसी समस्त वास्तविक संख्याएँ जो 8 से बड़ी या बराबर है। अतः इस असमिका के हल ग ∈ ख्8, ∞द्ध उदाहरण 5 हल कीजिए 7ग ़ 3 ढ 5ग ़ 9 तथा इस हल को संख्या रेखा पर आलेख्िात कीजिए। हल हमें ज्ञात है 7ग ़ 3 ढ 5ग ़ 9 या 2ग ढ 6 या ग ढ 3 संख्या रेखा पर इन्हें हम निम्नलिख्िात प्रकार से प्रद£शत कर सकते हैं ;आवृफति 6.1द्ध। आवृफति6ण्1 3ग − 4 ग ़1उदाहरण 6 हल कीजिए 2 ≥ 4 −1 तथा इस हल को संख्या रेखा पर आलेख्िात कीजिए। 3ग − 4 ग ़1 हल ≥−1 24 3ग − 4 ग − 3या ≥ 24 या 2 ;3ग दृ 4द्ध ≥ ;ग दृ 3द्ध या 6ग दृ 8 ≥ ग दृ 3 या 5ग ≥ 5 वत ग ≥ 1 संख्या रेखा पर इन्हें हम निम्नलिख्िात प्रकार से प्रद£शत कर सकते हैं ;आवृफति 6.2द्धः आवृफति6ण्2 उदाहरण 7 कक्षा ग्प् के प्रथम सत्रा व द्वितीय सत्रा की परीक्षाओं में एक छात्रा के प्राप्तांक 62 और 48 हैं। वह न्यूनतम अंक ज्ञात कीजिए, जिसे वा£षक परीक्षा में पाकर वह छात्रा 60 अंक का न्यूनतम औसत प्राप्त कर सके। हल मान लीजिए कि छात्रा वा£षक परीक्षा में ग अंक प्राप्त करता है। 62़ 48़ ग तब ≥ 60 3 या 110 ़ ग ≥ 180 या ग ≥ 70 इस प्रकार उस छात्रा को वा£षक परीक्षा में न्यूनतम 70 अंक प्राप्त करने चाहिए। उदाहरण 8 क्रमागत विषम संख्याओं के ऐसे युग्म ज्ञात कीजिए, जिनमें दोनों संख्याएँ 10 से बड़ी हों, और उनका योगपफल 40 से कम हों। हल मान लिया कि दो क्रमागत विषम प्रावृफत संख्याओं में छोटी विषम संख्या गहै। इस प्रकार दूसरी विषम संख्या ग़ 2 है। प्रश्नानुसार गझ 10 ण्ण्ण् ;1द्ध तथा ग़ ; ग़ 2द्ध ढ 40 ण्ण्ण् ;2द्ध ;2द्ध को हल करने पर हम पाते हैं कि 2 ग़ 2 ढ 40 या गढ 19 ण्ण्ण् ;3द्ध ;1द्ध और ;3द्ध से निष्कषर् यह है कि 10ढ गढ19 इस प्रकार विषम संख्या गके अभीष्ट मान 10 और 19 के बीच हैं। इसलिए सभी संभव अभीष्ट जोड़े ;11ए 13द्धए ;13ए 15द्ध ;15ए 17द्धए ;17ए 19द्ध होंगे। प्रश्नावली 6.1 1.हल कीजिए: 24गढ 100, जब ;पद्ध गएक प्रावृफत संख्या है। ;पपद्ध गएक पूणा±क है। 2.हल कीजिएः - 12गझ 30, जब ;पद्ध गएक प्रावृफत संख्या है। ;पपद्ध गएक पूणा±क है। 3.हल कीजिएः 5ग - 3 ढ 7, जब ;पद्ध ग एक पूणा±क ;पपद्ध गएक वास्तविक संख्या है। 4ण् हल कीजिए: 3ग ़ 8 झ 2ए जब ;पद्ध गएक पूणा±क ;पपद्ध गएक वास्तविक संख्या है। निम्नलिख्िात प्रश्न 5 से 16 तक वास्तविक संख्या गके लिए हल कीजिएः 5ण् 4ग़ 3 ढ 5ग़ 7 6ण् 3गदृ 7 झ 5गदृ 1 7ण् 3;गदृ 1द्ध ≤ 2 ;गदृ 3द्ध 8ण् 3 ;2 दृ गद्ध ≥ 2 ;1 दृ गद्ध गग गग9ण् ग़़ढ 11 10ण् झ़1 23 32 3;ग − 2द्ध 5;2 − गद्ध 13⎛ ग ⎞ 1 11ण् ≤ 12ण् ⎜़ 4⎟≥ ;ग −6द्ध 53 ⎝⎠ 325 13ण् 2 ;2ग ़ 3द्ध दृ 10 ढ 6 ;ग दृ 2द्ध 14ण् 37 दृ ;3ग ़ 5द्ध झ 9ग दृ 8 ;ग दृ 3द्ध ग ;5ग −2द्ध ;7 ग −3द्ध ;2ग −1द्ध ;3 ग − 2द्ध ;2 − गद्ध15ण् ढ− 16ण् ≥− 435 345 प्रश्न 17 से 20 तक की असमिकाओं का हल ज्ञात कीजिए तथा उन्हें संख्या रेखा पर आलेख्िात कीजिए। 17ण् 3ग दृ 2 ढ 2ग ़ 1 18ण् 5ग दृ 3 झ 3ग दृ 5 ग ;5ग 2द्ध ;7 ग 3द्ध 19ण् 3 ;1 दृ गद्ध ढ 2 ;ग ़ 4द्ध 20ण् 23 5 21.रवि ने पहली दो एकक परीक्षा में 70 और 75 अंक प्राप्त किए हैं। वह न्यूनतम अंक ज्ञात कीजिए, जिसे वह तीसरी एकक परीक्षा में पाकर 60 अंक का न्यूनतम औसत प्राप्त कर सके। 22.किसी पाठ्यक्रम में ग्रेड श्।श् पाने के लिए एक व्यक्ित को सभी पाँच परीक्षाओं ;प्रत्येक 100 में सेद्ध में 90 अंक या अिाक अंक का औसत प्राप्त करना चाहिए। यदि सुनीता के प्रथम चार परीक्षाओं के प्राप्तांक 87, 92, 94 और 95 हों तो वह न्यूनतम अंक ज्ञात कीजिए जिसंे पांचवीं परीक्षा में प्राप्त करके सुनीता उस पाठ्यक्रम में ग्रेड श्।श् पाएगी। 23.10 से कम क्रमागत विषम संख्याओं के ऐसे युग्म ज्ञात कीजिए जिनके योगपफल 11 से अिाक हों। 24.क्रमागत सम संख्याओं के ऐसे युग्म ज्ञात कीजिए, जिनमें से प्रत्येक 5 से बड़े हों, तथा उनका योगपफल 23 से कम हो। 25.एक त्रिाभुज की सबसे बड़ी भुजा सबसे छोटी भुजा की तीन गुनी है तथा त्रिाभुज की तीसरी भुजा सबसे बड़ी भुजा से 2 सेमी कम है। तीसरी भुजा की न्यूनतम लंबाइर् ज्ञात कीजिए जबकि त्रिाभुज का परिमाप न्यूनतम 61 सेमी है। 26.एक व्यक्ित 91 सेमी लंबे बोडर् में से तीन लंबाइर्याँ काटना चाहता है। दूसरी लंबाइर् सबसे छोटी लंबाइर् से 3 सेमी अिाक और तीसरी लंबाइर् सबसे छोटी लंबाइर् की दूनी है। सबसे छोटे बोडर् की संभावित लंबाइर्याँ क्या हैं, यदि तीसरा टुकड़ा दूसरे टुकड़े से कम से कम 5 सेमी अिाक लंबा हो? ख्संकेत यदि सबसे छोटे बोडर् की लंबाइर् ग सेमी हो, तब ;ग ़ 3द्ध सेमी और 2ग सेमी क्रमशः दूसरे और तीसरे टुकड़ों की लंबाइर्याँ हैं। इस प्रकार ग ़ ;ग ़ 3द्ध ़ 2ग ≤ 91 और 2ग ≥ ;ग ़ 3द्ध ़ 5, 6.4 दो चर राश्िायों के रैख्िाक असमिकाओं का आलेखीय हल ;ळतंचीपबंस ैवसनजपवद व िस्पदमंत प्दमुनंसपजपमे पद ज्ूव टंतपंइसमेद्ध पहले अनुभाग में हमने देखा है कि एक चर राश्िा के रैख्िाक असमिका का आलेख एक चित्राीय निरूपण है और असमिका के हल का वणर्न करने की एक सरल वििा है। अब हम दो चर राश्िायों की रैख्िाक असमिका के आलेखन का वणर्न करेंगे। हम जानते हैं कि एक रेखा कातीर्य तल को रेखा के अतिरिक्त दो भागों में बाँटती है। प्रत्येक भाग को अधर् - तल कहते हैं। एक ऊध्वार्धर रेखा तल को बायाँ अधर् - तल व दायाँ अधर् - तल में विभाजितकरती है और एक ऊध्वेर्तर ;दवद.अमतजपबंसद्ध रेखा एक तल को निचला अधर् - तल व ऊपरी अधर् - तल में विभाजित करती है। आवृफति 6.3 व आवृफति 6.4द्ध। आवृफति6ण्3 आवृफति6ण्4 कातीर्य तल में एक ¯बदुु या तो रेखा पर स्िथत होगा या अधर् - तल प् या प्प् में स्िथत होगा। अब हम परीक्षण करेंगे कि क्या एक तल में स्िथत ¯बदुु का असमिका ंग ़ इल ढ ब या ंग ़ इल झ ब से कोइर् संबंध है? आइए हम मान लें ंग ़ इल त्र बए ण्ण्ण् ;1द्ध एक रेखा है जहाँ ं ≠ 0 तथा इ ≠ 0 है। अब यहाँ तीन संभावनाएँ हैंः ;पद्ध ंग ़ इल त्र ब ;पपद्ध ंग ़ इल झ ब ;पपपद्ध ंग ़ इल ढ बण् स्पष्टतः स्िथति ;पद्ध में ;पद्ध को संतुष्ट करने वाले सभी ¯बदु ;गए लद्ध ;पद्ध द्वारा निरूपित रेखा पर स्िथत हैं और विलोमतः। स्िथति ;पपद्ध में पहले हम मान लेते हैं कि इ झ 0 और रेखा ंग ़ इल त्र बए इ झ 0ए पर एक ¯बदु च् ;αएβद्ध लेते हैं ताकि ंα ़ इβ त्र बण् माना अधर् - तल प्प् में कोइर् ¯बदु फ;α ए γद्ध है ;आवृफति 6.5द्ध। अब आवृफति 6.5 से हम निष्कषर् निकालते है कि γ झ β ;क्यों?द्ध या इ γ झ इβ या ंα ़ इ γ झ ंα ़ इβ या ंα ़ इ γ झ ब ;क्यों?द्ध या, फ;αए γ द्धए असमिका ंग ़ इल झ ब को संतुष्ट करती है। अथार्त्, रेखा ंग ़ इल त्र ब के ऊपर अधर् - तल प्प् में स्िथत सभी ¯बदु असमिका ंग ़ इल झ ब को संतुष्ट करते हैं। विलोमतः माना रेखा ंग ़ इल त्र ब पर एक ¯बदु च् ;αए βद्ध है और फ;αए γद्ध कोइर् ¯बदु, असमिका ंग ़ इल झ ब को संतुष्ट करता है। ताकि ंα ़ इγ झ ब ⇒ ंα ़ इ γ झ ंα ़ इβ ⇒ γ झ β ;क्योंकि इ झ 0द्ध अथार्र्त् फ;αए γ द्ध अधर् - तल प्प् में स्िथत है अतः अधर् - तल प्प् का कोइर् भी ¯बदु असमिका ंग ़ इल झ ब को संतुष्ट करता है और विलोमतः कोइर् ¯बदु जो असमिका ंग ़ इल झ ब को संतुष्ट करता है, अधर् - तल प्प् में स्िथत होता है। इसी प्रकार हम सि( कर सकते हैं कि इ ढ 0 के लिए वे सभी ¯बदु जो असमिका ंग ़ इल झ ब को संतुष्ट करते हैं, अधर् - तल प् में स्िथत होते हैं और विलोमतः अतः हम इस निष्कषर् पर आते हैं कि वे सभी ¯बदु जो असमिका ंग ़ इल झ ब य इ झ 0 या इ ढ 0 के अनुसार, को संतुष्ट करते हैं वे अधर् - तल प्प् या प् में से किसी एक तल में स्िथत होते हैं और विलोमतः। असमिका ंग ़ इल झ ब का आलेखन इन अधर् - तलों में से एक अधर् - तल होगा ¹;जिसे हल - क्षेत्रा ;ैवसनजपवद तमहपवदद्ध कहते हैंह् और इस अधर् - तल को छायांकित क्षेत्रा ;ैींकमक तमहपवदद्ध द्वारा निरूपित करते हैं। वह क्षेत्रा जिसमें किसी असमिका के संपूणर् हल स्िथत हों, उसे असमिका का 2.किसी असमिका द्वारा निरूपित क्षेत्रा को पहचानने के लिए, किसी अधर् - तल में केवल एक ¯बदु ;ंए इद्ध ;जो रेखा पर स्िथत न होद्ध लेकर जाँचना ही पयार्प्त है कि वह उस असमिका को संतुष्ट करता है अथवा नहीं। यदि यह ¯बदु असमिका को संतुष्ट करता है तो असमिका उस अधर् - तल को निरूपित करती है और उस अधर् - तल को छायांकित कर देते हैं जिसमें यह ¯बदु है। अन्यथा यह असमिका उस अधर् - तल को निरूपित करेगी जिसमें यह ¯बदु नहीं है। अपनी सुविधा की दृष्िट से ¯बदु ;0ए 0द्ध को प्राथमिकता दी जाती है। 3.यदि एक असमिका ंग ़ इल ≥ ब या ंग ़ इल ≤ ब के स्वरूप की है तो रेखा ंग ़ इल त्र ब पर स्िथत सभी ¯बदु भी उसके हल - क्षेत्रा में सम्िमलत होते हैं। इसलिए हल क्षेत्रा पर गहरी काली रेखा खींचते हैं। 4.यदि असमिका ंग ़ इल झ ब या ंग ़ इल ढ ब के स्वरूप की है तो रेखा ंग ़ इल त्र ब पर स्िथत सभी ¯बदु उसके हल - क्षेत्रा में सम्िमलित नहीं होते हैं। इसलिए हल क्षेत्रा पर रेखा को ¯बदुवत् या खंडित खींचते हैं। अनुभाग 6.2 में हमें दो चर राश्िायों ग तथा ल का निम्नलिख्िात रैख्िाक असमिका प्राप्त हुइर् थी। 40ग ़ 20ल ≤ 120 ण्ण्ण् ;1द्ध जब रेशमा द्वारा रजिस्टर और पेन के खरीदने संबंधी शाब्िदक प्रश्न को गण्िातीय रूप में परिव£तत करने से प्राप्त हुइर् थी। चूँकि वस्तुओं की संख्या एक )णात्मक और भ्िान्नात्मक संख्या नहीं हो सकती है, अतः हम इस असमिका का हल ग तथा ल को केवल पूणर् संख्या के रूप में ध्यान रखते हुए करते है। इस अवस्था में हम ग तथा ल के मानों के ऐसे जोड़े ज्ञात करते हैं जिनके संगत कथन ;1द्ध सत्य है। वास्तव में ऐसे युग्मों का समुच्चय असमिका ;1द्ध का हल समुच्चय ;ैवसनजपवद ेमजद्ध होगा। ग त्र 0 लेकर प्रारंभ करने पर हम पाते हैं कि ;1द्ध का बायाँ पक्ष त्र 40ग ़ 20ल त्र 40 ;0द्ध ़ 20ल त्र 20लण् इस प्रकार 20ल ≤ 120 या ल ≤ 6 ण्ण्ण् ;2द्ध अतः ग त्र 0 के संगत ल के मान 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6 मात्रा हो सकते हैं। इस स्िथति में ;1द्ध के हल ;0, 0द्ध, ;0,1द्ध, ;0,2द्ध, ;0,3द्ध, ;0,4द्ध, ;0,5द्ध और ;0,6द्ध हैं। इसी प्रकार जब ग त्र 1, 2, 3 हैं तो ;1द्ध के अन्य हल निम्नलिख्िात हैंः ;1ए 0द्धए ;1ए 1द्धए ;1ए 2द्धए ;1ए 3द्धए ;1ए 4द्ध ;2ए 0द्धए ;2ए 1द्धए ;2ए 2द्धए ;3ए 0द्ध यह आवृफति 6ण्6 में दिखाया गया है। अब हम ग तथा ल के प्रांत ;कवउंपदद्ध को पूणर् संख्याओं से विस्तारित करके वास्तविक संख्याएँ करते आवृफति6ण्6 हैं, और देखते हैं कि इस अवस्था में असमिका ;1द्ध के क्या हल होते हैं। आप देखेंगे कि हल करने की आलेख्िात - वििा ;ळतंचीपबंस उमजीवकद्ध इस स्िथति में अिाक सुविधाजनक है। इस उद्देश्य से, हम ;1द्ध के संगत समीकरण 40ग ़ 20ल त्र 120 ण्ण्ण् ;3द्ध पर विचार करते हैं और इसका आलेख खींचते हैं। यह एक सरल रेखा है जो कातीर्य तल को अधर् - तल प् व अधर् - तल प्प् में विभाजित करती है असमिका ;1द्ध का आलेख खींचने के लिए, हम अधर् - तल - प् में एक ¯बदुु ;0, 0द्ध मान लेते हैं और यह जाँचते हैं कि ग और ल के मान असमिका को संतुष्ट करते हैं या नहीं। आप यह देखेंगे कि ग त्र 0ए ल त्र 0 असमिका को संतुष्ट करते हैं। इस प्रकार हम कहते हैं कि असमिका का आलेखए अधर् - तल प् है ;आवृफति 6.7 में दिखाया गया हैद्ध। चूँकि रेखा के सभी ¯बदु असमिका ;1द्ध को संतुष्ट करते हैं। अतः रेखा भी आलेख का एक भाग है। इस प्रकार दिए गए असमिका का आलेख, रेखा सहित अधर् - तल प् है। स्पष्टतः अधर् - तल प्प् आलेख का भाग नहीं है। इस प्रकार असमिका ;1द्ध का हल इसके आलेख ;रेखा सहित, अधर् - तल प्द्ध के समस्त ¯बदु है। अब हम कुछ उदाहरणों की सहायता से दो चर राश्िायों के रैख्िाक असमिकाओं के हल करने की वििा स्पष्ट करते हैं। उदाहरण 9 3ग ़ 2ल झ 6 को आलेखीय वििा ;ळतंचीपबंससलद्ध से हल कीजिए। हल सवर्प्रथम हम समीकरण 3ग ़ 2ल त्र 6 का ग्रापफ ख्ंाडित रेखा के रूप में खींचते हैं ;आवृफति 6.8द्ध। यह रेखा गल - तल को दो अधर् - तल प् तथा प्प् में विभाजित करती है हम एक ¯बदु ;जो रेखा पर स्िथत नहीं हैद्ध जैसे ;0, 0द्ध का चयन करते हैं जो अधर् - तल प् में स्िथत है ;आवृफति 6.8द्ध। अब जाँच करते हैं कि यह ¯बदु दी गइर् असमिका को संतुष्ट करता है अथवा नहीं। हम पाते हैं कि 3 ;0द्ध ़ 2 ;0द्ध झ 6 या 0 झ 6 ए जो असत्य है। अतः अधर् - तल प्, दिए हुए असमिका का हल - क्षेत्रा नहीं है। स्पष्टतः रेखा पर स्िथत कोइर् भी ¯बदु, दी गइर् असमिका को संतुष्ट नहीं करता है। दूसरे शब्दों में, छायांकित अधर् - तल प्प्, रेखा के ¯बदुओं को छोड़कर, दी गइर् असमिका का हल क्षेत्रा है। उदाहरण 10 द्विविमीय तल में असमिका 3ग दृ 6 ≥ 0 का आलेखन - वििा से हल कीजिए। हल 3ग दृ 6 त्र 0 का आलेख आवृफति 6.9 में दिया गया है। हम एक ¯बदु ;0, 0द्ध का चयन करते हैं और इसे दी गइर् असमिका में रखने पर हम पाते हैं कि 3 ;0द्ध दृ 6 ≥ 0 या दृ 6 ≥ 0 जो कि असत्य है। इस प्रकार दी गइर् असमिका का हल - क्षेत्रा रेखा ग त्र2 के दाहिनी ओर छायांकित भाग है। उदाहरण 11 ल ढ 2 को आलेखन - वििा से हल कीजिए। हल ल त्र2 का आलेख 6.10 में दिया गया है। हम निचले अधर् - तल प् में एक ¯बदु जैसे ;0, 0द्ध का चयन करते हैं और दी गइर् असमिका में ल त्र0 रखने पर हम पाते हैं कि 1 × 0 ढ 2 या 0 ढ 2 जोकि सत्य है। इस प्रकार रेखा ल त्र 2 के नीचे का क्षेत्रा जिसमें मूल ¯बदु ;0, 0द्ध स्िथत है, दी गइर् असमिका का हल - क्षेत्रा है। अतः रेखा ल त्र 2 के नीचे के समस्त ¯बदु ;जिसमें रेखा के ¯बदु सम्िमलित नहीं हैंद्ध दी गइर् असमिका के हल हैं। प्रश्नावली 6.2 निम्नलिख्िात असमिकाओं को आलेखन - वििा से द्विविमीय तल में निरूपित कीजिए। 1ण् ग ़ ल ढ 5 2ण् 2ग ़ ल ≥ 6 3ण् 3ग ़ 4ल ≤ 12 4ण् ल ़ 8 ≥ 2ग 5ण् ग दृ ल ≤ 2 6ण् 2ग दृ 3ल झ 6 7ण् दृ 3ग ़ 2ल ≥ दृ 6 8ण् 3ल दृ 5ग ढ 30 9ण् ल ढ दृ 2 10ण् ग झ दृ 3ण् 6.5 दो चर राश्िायों की असमिका निकाय का हल ;ैवसनजपवद व िैलेजमउ व िस्पदमंत प्दमुनंसपजपमे पद ज्ूव टंतपंइसमेद्ध पिछले अनुभाग में हम दो चर राश्िायों के रैख्िाक असमिकाओं का आलेखन - वििा से हल करना सीख गए हैं। अब हम कुछ उदाहरणों की सहायता से दो चर राश्िायों की असमिका निकाय को हल करने की वििा स्पष्ट करेंगे। उदाहरण 12 निम्नलिख्िात असमिका निकाय ग ़ ल ≥ 5 ण्ण्ण् ;1द्ध ग दृ ल ≤ 3 ण्ण्ण् ;2द्ध को आलेखीय वििा से हल कीजिएः हल रैख्िाक असमिका ग ़ ल त्र 5 का आलेख आवृफति 6.11 में खींचा गया है। हम देखते हैं कि असमिका ;1द्ध का हल, रेखा ग ़ ल त्र 5 के ऊपरी छायांकित क्षेत्रा द्वारा निरूपित होता है जिसमें रेखा पर स्िथत सभी ¯बदुु भी सम्िमलित हैं। उन्हीं निदेर्शांक्षों पर हम समीकरण का भी आलेख खींचते है जैसा कि ;आवृफति 6ण्11द्ध में दिखाया गया है। तब असमिका ;2द्ध का हल रेखा ग दृ ल त्र 3 के ऊपरी छायांकित क्षेत्रा द्वारा निरूपित होता है, जिसमें रेखा पर सभी बिंदु भी सम्िमलित हैं। स्पष्टतः द्विछायांकित क्षेत्रा ;कवनइसम ेींकमक तमहपवदद्ध जो उपयुर्क्त दोनों छायांकित क्षेत्रों में उभयनिष्ठ हैं, वही दिए हुए असमिका निकाय ;1द्ध व ;2द्ध का वांछित हल क्षेत्रा है। उदाहरण 13 निम्नलिख्िात रैख्िाक असमिका निकाय को आलेखन वििा द्वारा हल कीजिए। 5ग ़ 4ल ≤ 40 ण्ण्ण् ;1द्ध ग ≥ 2 ण्ण्ण् ;2द्ध ल ≥ 3 ण्ण्ण् ;3द्ध हल सवर्प्रथम हम समीकरणों 5ग ़ 4ल त्र 40ए ग त्र 2 और त्र 3 द्वारा निरूपित रेखाओं के आलेख खींचते हैं। तब हम देखते हैं कि असमिका ;1द्ध, रेखा 5ग ़ 4ल त्र 40 के नीचे छायांकित क्षेत्रा को निरूपित करता है जिसमें रेखा के सभी ¯बदुु भी सम्िमलित हैं असमिका ;2द्ध, रेखा ग त्र 2 के दाहिनी ओर का छायांकित क्षेत्रा और असमिका ;3द्ध, रेखा ल त्र 3 के ऊपरी छायांकित क्षेत्रा जिनमें इन रेखाओं के सभी ¯बदुु भी सम्िमलित हैं, को निरूपित करता है। अतः सवर्निष्ठ छायांकित क्षेत्रा और रेखाओं पर सभी ¯बदुु ;आवृफति 6.12द्ध दिए हुए रैख्िाक असमिका निकाय के हल हैं। आवृफति6ण्12 बहुत सी व्यावहारिक स्िथतियों में जो असमिका निकाय से युक्त हैं, चर राश्िायाँ ग और ल प्रायः ऐसी राश्िायाँ होती हैं, जो )णात्मक नहीं हो सकती हैं। उदाहरणतः उत्पादित इकाइयों की संख्या, क्रय की गइर् वस्तुओं की संख्या, काम करने में लगे घंटों की संख्या आदि। स्पष्टतः ऐसी परिस्िथति में ग ≥ 0 और ल ≥ 0 हल क्षेत्रा प्रथम चतुथा±श में ही होता है। आइए अब हम कुछ ऐसे असमिका निकाय पर विचार करते हैं, जिनमें ग ≥ 0ए ल ≥ 0 हैं। उदाहरण 14 निम्नलिख्िात असमिका निकाय को आलेखीय वििा से हल कीजिएः 8ग ़ 3ल ≤ 100 ण्ण्ण् ;1द्ध ग ≥ 0 ण्ण्ण् ;2द्ध ल ≥ 0 ण्ण्ण् ;3द्ध हल हम रेखा 8ग ़ 3ल त्र 100 का आलेख खींचते हैं। असमिका 8ग ़ 3ल ≤ 100 इस रेखा के नीचे के छायांकित क्षेत्रा को निरूपित करता है, जिसमें रेखा 8ग ़3ल त्र100 के सभी ¯बदुु सम्िमलित हैं ;आवृफति 6.13द्ध। आवृफति6ण्13 चूंकि 8ग ़ 3ल ≤ 100ए अतः त्रिाविध छायांकित ;ज्तपचसम ेींकमकद्ध क्षेत्रा का प्रत्येक ¯बदुु जो प्रथम चतुथा±श में है, तथा जिसमें रेखाओं के ¯बदुु भी सम्िमलित हैं, दिए हुए असमिका निकाय का हल निरूपित करता है। उदाहरण 15 निम्नलिख्िात असमिका निकाय को आलेखीय वििा से हल कीजिए। ग ़ 2ल ≤ 8 ण्ण्ण् ;1द्ध 2ग ़ ल ≤ 8 ण्ण्ण् ;2द्ध ग झ 0 ण्ण्ण् ;3द्ध ल झ 0 ण्ण्ण् ;4द्ध हल हम रेखाओं ग ़ 2ल त्र 8 और 2ग ़ ल त्र 8 का आलेख खींचते हैं। असमिका ;1द्ध और ;2द्ध दोनों संगत रेखाओं के ¯बदुुओं सहित अपने से नीचे स्िथत क्षेत्रों को निरूपित करते हैं। चूंकि ग ≥ 0ए ल ≥ 0 अतः प्रथम चतुथा±श में स्िथत सवर्निष्ठ छायांकित क्षेत्रा के प्रत्येक ¯बदुु दिए हुए असमिका निकाय के हल को निरूपित करता है आवृफति ;6.14द्ध। आवृफति6ण्14 प्रश्नावली 6.3 प्रश्न 1 से 15 तक निम्नलिख्िात असमिका निकाय को आलेखीय वििा से हल कीजिएः हतंचीपबंससलरू 1ण् ग ≥ 3ए ल ≥ 2 2ण् 3ग ़ 2ल ≤ 12ए ग ≥ 1ए ल ≥ 2 3ण् 2ग ़ ल ≥ 6ए 3ग ़ 4ल ढ 12 4ण् ग ़ ल ≥ 4ए 2ग दृ ल झ 0 5ण् 2ग दृ ल झ1ए ग दृ 2ल ढ दृ 1 6ण् ग ़ ल ≤ 6ए ग ़ ल ≥ 4 7ण् 2ग ़ ल ≥ 8ए ग ़ 2ल ≥ 10 8ण् ग ़ ल ≤ 9ए ल झ गए ग ≥ 0 9ण् 5ग ़ 4ल ≤ 20ए ग ≥ 1ए ल ≥ 2 10ण् 3ग ़ 4ल ≤ 60ए ग ़3ल ≤ 30ए ग ≥ 0ए ल ≥ 0 11ण् 2ग ़ ल ≥ 4ए ग ़ ल ≤ 3ए 2ग दृ 3ल ≤ 6 12ण् ग दृ 2ल ≤ 3ए 3ग ़ 4ल ≥ 12ए ग ≥ 0 ए ल ≥ 1ण् 13ण् 4ग ़ 3ल ≤ 60ए ल ≥ 2गए ग ≥ 3ए गए ल ≥ 0 14ण् 3ग ़ 2ल ≤ 150ए ग ़ 4ल ≤ 80ए ग ≤ 15ए ल ≥ 0ए ग ≥ 0 15ण् ग ़ 2ल ≤ 10ए ग ़ ल ≥ 1ए ग दृ ल ≤ 0ए ग ≥ 0ए ल ≥ 0 विविध उदाहरण उदाहरण 16 हल कीजिए दृ 8 ≤ 5ग दृ 3 ढ 7ण् हल इस स्िथति में हमारे पास दो असमिकाएँ दृ 8 ≤ 5ग दृ 3 और 5ग दृ 3 ढ 7 हैं। इन्हें हम साथ - साथ हल करना चाहते हैं। हम दिए गए असमिका के मध्य में चर राश्िा ग का गुणांक एक बनाना चाहते हैं। हमें ज्ञात है कि दृ 8 ≤ 5ग दृ3 ढ 7 या दृ5 ≤ 5ग ढ 10 या दृ1 ≤ ग ढ 2 53ग− उदाहरण 17 हल कीजिए दृ 5 ≤≤ 8ण्2 53ग− हल ज्ञात है कि दृ 5 ≤≤ 82 या दृ10 ≤ 5 दृ 3ग ≤ 16 या दृ 15 ≤ दृ 3ग ≤ 11 11 या 5 ≥ ग ≥ दृ 3 −11 जिसे हम ≤ ग ≤ 5 के रूप में भी लिख सकते हैं।3 उदाहरण 18 निम्नलिख्िात असमिका - निकाय को हल कीजिएः 3ग दृ 7 ढ 5 ़ ग ण्ण्ण् ;1द्ध 11 दृ 5 ग ≤ 1 ण्ण्ण् ;2द्ध और उन्हें संख्या रेखा पर आलेख्िात कीजिए। हल असमिका ;1द्ध से हम प्राप्त करते हैं 3ग दृ 7 ढ 5 ़ ग या ग ढ 6 ण्ण्ण् ;3द्ध असमिका ;2द्ध से भी हम प्राप्त करते हैं 11 दृ 5 ग ≤ 1 या दृ 5 ग ≤ दृ 10 या ग ≥ 2 ण्ण्ण् ;4द्ध यदि संख्या रेखा पर ;3द्ध तथा ;4द्ध को आलेख्िात करें तो हम पाते हैं कि ग के उभयनिष्ठ मान 2 के बराबर या 2 से बड़े व 6 से छोटे हैं जो आवृफति 6.16 में गहरी काली रेखा द्वारा प्रद£शत किए गए हैं। आवृफति 6ण्16 अतः असमिका निकाय का हल वास्तविक संख्या ग, 2 के बराबर या 2 से बड़ा और 6 से छोटी है। इस प्रकार 2 ≤ ग ढ 6ण् उदाहरण 19 किसी प्रयोग में नमक के अम्ल के एक विलयन का तापमान 30व सेल्िसयस और 35व सेल्िसयस के बीच ही रखना है। पफारेनहाइट पैमाने पर तापमान का परिसर ज्ञात कीजिए, यदि सेंटीग्रेड से पफारेनहाइट पैमाने पर परिवतर्न सूत्रा 5 ब् त्र ;थ् दृ 32द्ध9है, जहाँ ब् और थ् क्रमशः तापमान को अंश सेल्िसयस तथा अंश पफारेनहाइट में निरूपित करते हैं। हल ज्ञात है कि 30 ढ ब् ढ 35 5 ब् त्र ;थ् दृ 32द्धए रखने पर हम पाते हैं,9 5 30 ढ 9 ;थ् दृ 32द्ध ढ 35ए या 9 5 × 30 ढ ;थ् दृ 32द्ध ढ 9 5 × 35 या 54 ढ ;थ् दृ 32द्ध ढ 63 या 86 ढ थ् ढ 95ण् इस प्रकार तापमान का अभीष्ट परिसर 86° थ् से 95° थ् है। उदाहरण 20 एक निमार्ता के पास अम्ल के 12ः विलयन के 600 लिटर हैं। ज्ञात कीजिए कि 30ः अम्ल वाले विलयन के कितने लिटर उसमें मिलाए जाएँ ताकि परिणामी मिश्रण में अम्ल की मात्रा 15ः से अिाक परंतु 18ः से कम हो। हल मान लीजिए कि 30ः अम्ल के विलयन की मात्रा ग लिटर है। तब संपूणर् मिश्रण त्र ;ग ़ 600द्ध लिटर इसलिए 30ः ग ़ 12ः का 600 झ 15ः का ;ग ़ 600द्ध और 30ः ग ़ 12ः का 600 ढ 18ः का ;ग ़ 600द्ध 30ग12 15या ़ ;600द्ध झ ;ग ़ 600द्ध100 10010030ग12 18और ़ ;600द्ध ढ ;ग ़ 600द्ध100 100100या 30ग ़ 7200 झ 15ग ़ 9000 और 30ग ़ 7200 ढ 18ग ़ 10800 या 15ग झ 1800 और 12ग ढ 3600 या ग झ 120 और ग ढ 300ए अथार्त 120 ढ ग ढ 300 इस प्रकार 30ः अम्ल के विलयन की अभीष्ट मात्रा 120 लिटर से अिाक तथा 300 लिटर से कम होनी चाहिए। अध्याय 6 पर विविध प्रश्नावली प्रश्न 1 से 6 तक की असमिकाओं को हल कीजिएः 1ण् 2 ≤ 3ग दृ 4 ≤ 5 2ण् 6 ≤ दृ 3 ;2ग दृ 4द्ध ढ 12 7ग 3;ग −2द्ध 3ण् दृ 34≤− ≤ 18 4ण् −ढ15 ≤0 25 3ग;3ग ़11द्ध 5ण् 12 4 6ण् 7 ≤≤11 ण्−ढ− ≤ 2 −52 प्रश्न 7 से 10 तक की असमिकाओं को हल कीजिए और उनके हल को संख्या रेखा पर निरूपित कीजिए। 7ण् 5ग ़ 1 झ दृ 24ए 5ग दृ 1 ढ 24 8ण् 2 ;ग दृ 1द्ध ढ ग ़ 5ए 3 ;ग ़ 2द्ध झ 2 दृ ग 9ण् 3ग दृ 7 झ 2 ;ग दृ 6द्ध ए 6 दृ ग झ 11 दृ 2ग 10ण् 5 ;2ग दृ 7द्ध दृ 3 ;2ग ़ 3द्ध ≤ 0 ए 2ग ़ 19 ≤ 6ग ़ 47 ण् 11ण् एक विलयन को 68व थ् और 77व थ् के मध्य रखना है। सेल्िसयस पैमाने पर विलयन के तापमान 9 का परिसर ज्ञात कीजिए, जहाँ सेल्िसयस पफारेनहाइट परिवतर्न सूत्रा थ् त्र ब् ़ 32 है।512.8ः बोरिक एसिड के विलयन में 2ः बोरिक एसिड का विलयन मिलाकर तनु ;कपसनजमद्ध किया जाता है। परिणामी मिश्रण में बोरिक एसिड 4ः से अिाक तथा 6ः से कम होना चाहिए। यदि हमारे पास 8ः विलयन की मात्रा 640 लिटर हो तो ज्ञात कीजिए कि 2ः विलयन के कितने लिटर इसमें मिलाने होंगे? 13.45ः अम्ल के 1125 लिटर विलयन में कितना पानी मिलाया जाए कि परिणामी मिश्रण में अम्ल 25ः से अिाक परंतु 30ः से कम हो जाए? 14.एक व्यक्ित के बौिक - लब्िध ;प्फद्ध मापन का सूत्रा निम्नलिख्िात हैः ड। प्फ त्र × 100एब्।जहाँ ड। मानसिक आयु और ब्। कालानुक्रमी आयु है। यदि 12 वषर् की आयु के बच्चों के एक समूह की प्फ, असमिका 80 ≤ प्फ ≤ 140 द्वारा व्यक्त हो, तो उस समूह के बच्चों की मानसिक आयु का परिसर ज्ञात कीजिए। सारांश ऽ एक असमिका, दो वास्तविक संख्याओं या दो बीजीय व्यंजकों में ढए झए ≤ या ≥ के चिÉ के प्रयोग से बनती है। ऽ एक असमिका के दोनों पक्षों में समान संख्या जोड़ी या घटायी जा सकती है। ऽ किसी असमिका के दोनों पक्षों को समान धनात्मक, संख्या से गुणा ;या भागद्ध किया जा सकता है। परंतु दोनों पक्षों को समान )णात्मक संख्याओं से गुणा ;या भागद्ध करने परअसमिका के चिÉ तदनुसार बदल जाते हैं। ऽ ग के उन मानों ;टंसनमेद्ध को जो दिऐ गए असमिका को एक सत्य कथन बनाते हों, उन्हें असमिका का हल कहते हैं। ऽ ग ढ ं ;या ग झ ंद्ध का संख्या रेखा पर आलेख खींचने के लिए संख्या रेखा पर संख्या ं पर एक छोटा सा वृत्त बनाकर, ं से बाईं ;या दाईंद्ध ओर की संख्या रेखा को गहरा काला कर देते हैं। ऽ ग ≤ ं ;या ग ≥ ंद्ध का संख्या रेखा पर आलेख खींचने के लिए संख्या रेखा पर संख्या ं पर एक छोटा काला वृत्त बनाकर ं से बाईं ;या दाईंद्ध ओर की संख्या रेखा को गहरा काला कर देते हैं। ऽ यदि दो चरांकों की एक असमिका के चिÉ ≤ या ≥ हों तो रेखा पर स्िथत ¯बदु, असमिका के हल में सम्िमलित होते हैं और असमिका का आलेख, समता द्वारा निरूपित गहरी मोटी रेखा के बाईं ;नीचेद्ध या दाईं ;ऊपरद्ध होता है जो उस क्षेत्रा का कोइर् भी ¯बदु असमिका को संतुष्ट करता है। ऽ यदि दो चरांकों की एक असमिका के चिÉ ढ या झ हों तो रेखा पर स्िथत ¯बदु, असमिका के हल में सम्िमलित नहीं होते हैं और असमिका का आलेख, समता द्वारा निरूपित दानेदाररेखा के बाईं ;नीचेद्ध या दाईं ;ऊपरद्ध होता है जो उस क्षेत्रा का कोइर् भी ¯बदु, असमिका को संतुष्ट करता है। ऽ असमिकाओं के निकाय का हल क्षेत्रा, वह उभयनिष्ठ क्षेत्रा है जो निकाय में सभी दी गइर् असमिकाओं को संतुष्ट करता है। कृ ऽ कृ

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अध्याय 6

रैखिक असमिकाएँ (Linear Inequalities)

"Mathematics is the art of saying many things in many different ways. — Maxwell"

6.1 भूमिका (Introduction)

पिछली कक्षाओं में हम एक चर और दो चर राशियों के समीकरणों तथा शाब्दिक प्रश्नों को समीकरणों में परिवर्तित करके हल करना सीख चुके हैं। अब हमारे मस्तिष्क में स्वभावतः यह प्रश्न उठता है कि "क्या शाब्दिक प्रश्नों को सदैव एक समीकरण के रूप में परिवर्तित करना संभव है?" उदाहरणतः आपकी कक्षा के सभी विद्यार्थियों की ऊँचाई 106 सेमी. से कम है, आपकी कक्षा में अधिकतम 60 मेज़ें या कुर्सियाँ या दोनों समा सकती हैं। यहाँ हमें एेसे कथन मिलते हैं जिनमें ‘<’ (से कम), ‘>’ (से अधिक), ‘ (से कम या बराबर) (से अधिक या बराबर) चिह्न प्रयुक्त होते हैं। इन्हें हम असमिकाएँ (Inequalities) कहते हैं।

इस अध्याय में, हम एक या दो चर राशियों की रैखिक असमिकाओं का अध्ययन करेंगे। असमिकाओं का अध्ययन विज्ञान, गणित, सांख्यिकी, इष्टतमकारी समस्याओं (optimisation problems), अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान इत्यादि से संबंधित समस्याओं को हल करने में अत्यंत उपयोगी है।

6.2 असमिकाएँ (Inequalities)

हम निम्नलिखित स्थितियों पर विचार करते हैंः

(i) रवि 200 रुपये लेकर चावल खरीदने के लिए बाज़ार  जाता है, चावल 1 किग्रा॰ के पैकेटों में उपलब्ध हैं। एक किलो चावल के पैकेट का मूल्य 30 रुपये है। यदि x उसके द्वारा खरीदे गए चावल के पैकेटों की संख्या को व्यक्त करता हो, तो उसके द्वारा खर्च की गई धनराशि 30 x रुपये होगी। क्योंकि उसे चावल को पैकेटों में ही खरीदना है इसलिए वह 200 रुपये की पूरी धनराशि को खर्च नहीं कर पाएगा (क्यों?)। अतः

30x < 200 ... (1)

स्पष्टतः कथन (i) समीकरण नहीं है, क्योंकि इसमें समता (equality) का चिह्न (=) नहीं है।

(ii) रेशमा के पास 120 रुपये हैं जिससे वह कुछ रजिस्टर व पेन खरीदना चाहती है। रजिस्टर का मूल्य 40 रुपये और पेन का मूल्य 20 रुपये है। इस स्थिति में यदि रेशमा द्वारा खरीदे गए रजिस्टर की संख्या x तथा पेन की संख्या y हो तो उसके द्वारा व्यय की गयी कुल धनराशि (40x +20y) रुपये है। इस प्रकार हम पाते हैं कि

40x + 20y 120 ... (2)

क्योंकि इस स्थिति में खर्च की गयी कुल धनराशि अधिकतम 120 रुपये है। ध्यान दीजिए कथन (2) के दो भाग हैं।

40x + 20y < 120 ... (3)

और 40x + 20y = 120 ... (4)

कथन (3) समीकरण नहीं है, जबकि कथन (4) समीकरण है। उपरोक्त कथन जैसे (1), (2) तथा (3) असमिका कहलाते हैं।

परिभाषा 1 एक असमिका, दो वास्तविक संख्याओं या दो बीजीय व्यंजकों में ‘<’, ‘>’, ‘ या के चिह्न के प्रयोग से बनती हैं।

3 < 5; 7 > 5 आदि संख्यांक असमिका के उदाहरण हैं। जबकि

x < 5; y > 2; x 3, y 4 इत्यादि शाब्दिक (चरांक) असमिका के उदाहरण हैं।

3 < 5 < 7 (इसे पढ़ते हैं 5, 3 से बड़ा व 7 से छोटा है), 3 < x < 5 (इसे पढ़ते हैं x, 3 से बड़ा या बराबर है व 5 से छोटा है) और 2 < y < 4 द्वि-असमिका के उदाहरण हैं।

असमिकाओं के कु अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:

ax + b < 0 ... (5)

ax + b > 0 ... (6)

ax + b 0 ... (7)

ax + b 0 ... (8)

ax + by < c ... (9)

ax + by > c ... (10)

ax + by c ... (11)

ax + by c ... (12)

ax2 + bx + c 0 ... (13)

ax2 + bx + c > 0 ... (14)

क्रमांक (5), (6), (9), (10) और (14) सुनिश्चित असमिकाएँ तथा क्रमांक (7), (8), (11), (12) और (13) असमिकाएँ कहलाती हैं। यदि a 0 हो तो क्रमांक (5) से (8) तक की असमिकाएँ एक चर राशि x के रैखिक असमिकाएँ हैं और यदि a 0 तथा b 0 हो तो क्रमांक (9) से (12) तक की असमिकाएँ दो चर राशियों x तथा y के रैखिक असमिकाएंँ हैं।

क्रमांक (13) और (14) की असमिकाएँ रैखिक नहीं हैं। वास्तव में यह एक चर राशि x के द्विघातीय असमिकाएँ हैं, जब a 0.

इस अध्याय में हम केवल एक चर और दो चर राशियों के रैखिक असमिकाओं का अध्ययन करेंगे।

6.3 एक चर राशि के रैखिक असमिकाओं का बीजगणितीय हल और उनका आलेखीय निरूपण (Algebraic Solutions of Linear Inequalities in One Variable and their Graphical Representation)

अनुभाग 6.2 के असमिका (1) अर्थात् 30x < 200 पर विचार कीजिए। ध्यान दें, कि यहाँ x चावल के पैकेटों की संख्या को व्यक्त करता है।

स्पष्टतः x एक ऋणात्मक पूर्णांक अथवा भिन्न नहीं हो सकता है।

इस असमिका का बायाँ पक्ष 30x और दायाँ पक्ष 200 है।

x = 0 के लिए, बायाँ पक्ष = 30 (0) = 0 < 200 (दायाँ पक्ष), जोकि सत्य है।

x = 1 के लिए, बायाँ पक्ष = 30 (1) = 30 < 200 दायाँ पक्ष), जोकि सत्य है।

x = 2 के लिए, बायाँ पक्ष = 30 (2) = 60 < 200, जो कि सत्य है।

x = 3 के लिए, बायाँ पक्ष = 30 (3) = 90 < 200, जो कि सत्य है।

x = 4 के लिए, बायाँ पक्ष = 30 (4) = 120 < 200, जो कि सत्य है।

x = 5 के लिए, बायाँ पक्ष = 30 (5) = 150 < 200, जो कि सत्य है।

x = 6 के लिए, बायाँ पक्ष = 30 (6) = 180 < 200, जो कि सत्य है।

x = 7 के लिए, बायाँ पक्ष = 30 (7) = 210 < 200, जो कि असत्य है।

उपर्युक्त स्थिति में हम पाते हैं कि उपर्युक्त असमिका को सत्य कथन करने वाले x के मान केवल 0, 1, 2, 3, 4, 5 और 6 हैं। x के उन मानों को जो दिए असमिका को एक सत्य कथन बनाते हों, उन्हें असमिका का हल कहते हैं। और समुच्चय {0, 1, 2, 3, 4, 5, 6} को हल समुच्चय कहते हैं।

इस प्रकार, एक चर राशि के किसी असमिका का हल, चर राशि का वह मान है, जो इसे एक सत्य कथन बनाता हो।

हमने उपर्युक्त असमिका का हल ‘प्रयास और भूल विधि’ (trial and error method) से प्राप्त किया है। जो अधिक सुविधाजनक नहीं है। स्पष्टतः यह विधि अधिक समय लेने वाली तथा कभी-कभी संभाव्य नहीं होती है। हमें असमिकाओं के हल के लिए अधिक अच्छी या क्रमबद्ध तकनीक की आवश्यकता है। इससे पहले हमें संख्यांक असमिकाओं के कुछ और गुणधर्म सीखने चाहिए और असमिकाओं को हल करते समय उनका नियमों की तरह पालन करना चाहिए।

आपको स्मरण होगा कि रैखिक समीकरणों को हल करते समय हम निम्नलिखित नियमों का पालन करते हैंः

नियम 1 एक समीकरण के दोनों पक्षों में समान संख्याएँ जोड़ी (अथवा घटाई) जा सकती हैं।

नियम 2 एक समीकरण के दोनों पक्षों में समान शून्येतर संख्याओं से गुणा (अथवा भाग) किया जा सकता है।

असमिकाओं को हल करते समय हम पुनः इन्हीं नियमों का पालन तथा नियम 2 में कुछ संशोधन के साथ करते हैं। अंतर मात्र इतना है कि ऋणात्मक संख्याओं से असमिका के दोनों पक्षों को गुणा (या भाग) करने पर असमिका के चिह्न विपरीत हो जाते हैं (अर्थात् ‘<’ को >, ‘ को इत्यादि कर दिया जाता है)। इसका कारण निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट हैः

3 > 2 जबकि – 3 < – 2

– 8 < – 7 जबकि (–8) (–2) > (–7) (–2), अर्थात् 16 > 14

इस प्रकार असमिकाओं को हल करने के लिए हम निम्नलिखित नियमों का उल्लेख करते हैंः

नियम 1 एक असमिका के दोनों पक्षों में, असमिका के चिह्नों को प्रभावित किए बिना समान संख्याएँ जोड़ी (अथवा घटाई) जा सकती हैं।

नियम 2 किसी असमिका के दोनों पक्षों को समान धनात्मक संख्याओं से गुणा (या भाग) किया जा सकता है। परंतु दोनों पक्षों को समान ऋणात्मक संख्याओं से गुणा (या भाग, करते समय असमिका के चिह्न तदनुसार परिवर्तित कर दिए जाते हैं।

आइए अब हम कुछ उदाहरणों पर विचार करते हैं।

उदाहरण 1 30 x < 200, को हल ज्ञात कीजिए जब

(i) x एक प्राकृत संख्या है।

(ii) x एक पूर्णांक है।

हल ज्ञात है कि 30 x < 200

अथवा (नियम 2)

अथवा x <

(i) जब x एक प्राकृत संख्या है।

स्पष्टतः इस स्थिति में x के निम्नलिखित मान कथन को सत्य करते हैं।

x = 1, 2, 3, 4, 5, 6

असमिका का हल समुच्चय {1, 2, 3, 4, 5, 6} है

(ii) जब x एक पूर्णांक है

स्पष्टतः इस स्थिति में दिए गए असमिका के हल हैंः

..., – 3, –2, –1, 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6

असमिका का हल समुच्चय {...,–3, –2,–1, 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6} है

उदाहरण 2 हल कीजिएः 5x-3< 3x+1, जब

(i) x एक पूर्णांक है। (ii) x एक वास्तविक संख्या है।

हल दिया है, कि 5x –3 < 3x + 1

अथवा 5x –3 + 3 < 3x +1 +3 (नियम 1)

अथवा 5x < 3x +4

अथवा 5x – 3x < 3x + 4 – 3x (नियम 1)

अथवा 2x < 4

अथवा x < 2 (नियम 2)

(i) जब x एक पूर्णांक है। इस स्थिति में दिए गए असमिका के हल

..., – 4, – 3, – 2, – 1, 0, 1

अतः हल समुच्चय {..., -4, -3, -2, -1, 0, 1}

(ii) जब x एक वास्तविक संख्या है। इस स्थिति में असमिका का हल x < 2 से व्यक्त है। इसका अर्थ है कि 2 से छोटी समस्त वास्तविक संख्याएँ असमिका के हल हैं। अतः असमिका का हल समुच्चय (– , 2). है।

हमने असमिकाओं के हल प्राकृत संख्याओं, पूर्णाकों तथा वास्तविक संख्याओं के समुच्चयों पर विचार करके ज्ञात किए हैं। आगे जब तक अन्यथा वर्णित न हो, हम इस अध्याय में असमिकाओं का हल वास्तविक संख्याओं के समुच्चय में ही ज्ञात करेंगे।

उदाहरण 3 हल कीजिए 4x + 3 < 6x +7.

हल ज्ञात है कि 4x + 3 < 6x + 7

अथवा 4x – 6x < 6x + 4 – 6x

अथवा – 2x < 4 अथवा x > – 2

अर्थात् 2 से बड़ी समस्त वास्तविक संख्याएँ, दिए गए असमिका के हल हैं। अतः हल समुच्चय
(2, ) है।

उदाहरण 4 हल कीजिए

हल हमें ज्ञात है कि

या 2 (5 – 2x) x – 30

या 10 – 4x x – 30

या – 5x – 40,

या x 8

अर्थात् एेसी समस्त वास्तविक संख्याएँ जो 8 से बड़ी या बराबर है। अतः इस असमिका के हल
x
[8, )

उदाहरण 5 हल कीजिए 7x + 3 < 5x + 9 तथा इस हल को संख्या रेखा पर आलेखित कीजिए।

हल हमें ज्ञात है 7x + 3 < 5x + 9

या 2x < 6 या x < 3

संख्या रेखा पर इन्हें हम निम्नलिखित प्रकार से प्रर्शित कर सकते हैं (आकृति 6.1)।

आकृति 6.1

उदाहरण 6 हल कीजिए तथा इस हल को संख्या रेखा पर आलेखित कीजिए।

हल

या

या 2 (3x – 4) (x – 3)

या 6x – 8 x – 3

या 5x 5 or x 1

संख्या रेखा पर इन्हें हम निम्नलिखित प्रकार से प्रर्शित कर सकते हैं (आकृति 6.2)ः

आकृति 6.2

उदाहरण 7 कक्षा XI के प्रथम सत्र व द्वितीय सत्र की परीक्षाओं में एक छात्र के प्राप्तांक 62 और 48 हैं। वह न्यूनतम अंक ज्ञात कीजिए, जिसे वार्षिक परीक्षा में पाकर वह छात्र 60 अंक का न्यूनतम औसत प्राप्त कर सके।

हल मान लीजिए कि छात्र वार्षिक परीक्षा में x अंक प्राप्त करता है।

तब

या 110 + x 180 या x 70

इस प्रकार उस छात्र को वार्षिक परीक्षा में न्यूनतम 70 अंक प्राप्त करने चाहिए।

उदाहरण 8 क्रमागत विषम संख्याओं के एेसे युग्म ज्ञात कीजिए, जिनमें दोनों संख्याएँ 10 से बड़ी हों, और उनका योगफल 40 से कम हों।

हल मान लिया कि दो क्रमागत विषम प्राकृत संख्याओं में छोटी विषम संख्या x है। इस प्रकार दूसरी विषम संख्या x + 2 है। प्रश्नानुसार

x > 10 ... (1)

तथा x + ( x + 2) < 40 ... (2)

(2) को हल करने पर हम पाते हैं कि

2 x + 2 < 40

या x < 19 ... (3)

(1) और (3) से निष्कर्ष यह है कि

10< x <19

इस प्रकार विषम संख्या x के अभीष्ट मान 10 और 19 के बीच हैं। इसलिए सभी संभव अभीष्ट जोड़े

(11, 13), (13, 15) (15, 17), (17, 19) होंगे।

प्रश्नावली 6.1

1. हल कीजिए: 24x < 100, जब

(i) x एक प्राकृत संख्या है। (ii) x एक पूर्णांक है।

2. हल कीजिएः -12x > 30, जब

(i) x एक प्राकृत संख्या है। (ii) x एक पूर्णांक है।

3. हल कीजिएः 5x-3 < 7, जब

(i) x एक पूर्णांक (ii) x एक वास्तविक संख्या है।

4. हल कीजिए: 3x + 8 > 2, जब

(i) x एक पूर्णांक (ii) x एक वास्तविक संख्या है।

निम्नलिखित प्रश्न 5 से 16 तक वास्तविक संख्या x के लिए हल कीजिएः

5. 4x + 3 < 6x + 7 

6. 3x – 7 > 5x – 1

7. 3(x – 1) 2 (x – 3) 

8. 3 (2 – x) 2 (1 x)

9.  

10.

11.  

12.

13. 2 (2x + 3) – 10 < 6 (x – 2) 

14. 37 – (3x + 5) > 9x – 8 (x – 3)

15.  

16.

प्रश्न 17 से 20 तक की असमिकाओं का हल ज्ञात कीजिए तथा उन्हें संख्या रेखा पर आलेखित कीजिए।

17. 3x – 2 < 2x + 1 

18. 5x – 3 > 3x – 5

19. 3 (1 – x) < 2 (x + 4) 

20.

21. रवि ने पहली दो एकक परीक्षा में 70 और 75 अंक प्राप्त किए हैं। वह न्यूनतम अंक ज्ञात कीजिए, जिसे वह तीसरी एकक परीक्षा में पाकर 60 अंक का न्यूनतम औसत प्राप्त कर सके।

22. किसी पाठ्यक्रम में ग्रेड 'A' पाने के लिए एक व्यक्ति को सभी पाँच परीक्षाओं (प्रत्येक 100 में से) में 90 अंक या अधिक अंक का औसत प्राप्त करना चाहिए। यदि सुनीता के प्रथम चार परीक्षाओं के प्राप्तांक 87, 92, 94 और 95 हों तो वह न्यूनतम अंक ज्ञात कीजिए जिसें पांचवीं परीक्षा में प्राप्त करके सुनीता उस पाठ्यक्रम में ग्रेड 'A' पाएगी।

23. 10 से कम क्रमागत विषम संख्याओं के एेसे युग्म ज्ञात कीजिए जिनके योगफल 11 से अधिक हों।

24. क्रमागत सम संख्याओं के एेसे युग्म ज्ञात कीजिए, जिनमें से प्रत्येक 5 से बड़े हों, तथा उनका योगफल 23 से कम हो।

25. एक त्रिभुज की सबसे बड़ी भुजा सबसे छोटी भुजा की तीन गुनी है तथा त्रिभुज की तीसरी भुजा सबसे बड़ी भुजा से 2 सेमी कम है। तीसरी भुजा की न्यूनतम लंबाई ज्ञात कीजिए जबकि त्रिभुज का परिमाप न्यूनतम 61 सेमी है।

26. एक व्यक्ति 91 सेमी लंबे बोर्ड में से तीन लंबाईयाँ काटना चाहता है। दूसरी लंबाई सबसे छोटी लंबाई से 3 सेमी अधिक और तीसरी लंबाई सबसे छोटी लंबाई की दूनी है। सबसे छोटे बोर्ड की संभावित लंबाईयाँ क्या हैं, यदि तीसरा टुकड़ा दूसरे टुकड़े से कम से कम 5 सेमी अधिक लंबा हो?

[संकेत यदि सबसे छोटे बोर्ड की लंबाई x सेमी हो, तब (x + 3) सेमी और 2x सेमी क्रमशः दूसरे और तीसरे टुकड़ों की लंबाईयाँ हैं। इस प्रकार x + (x + 3) + 2x 91 और  2x (x + 3) + 5]

6.4 दो चर राशियों के रैखिक असमिकाओं का आलेखीय हल (Graphical Solution of Linear Inequalities in Two Variables)

पहले अनुभाग में हमने देखा है कि एक चर राशि के रैखिक असमिका का आलेख एक चित्रीय निरूपण है और असमिका के हल का वर्णन करने की एक सरल विधि है। अब हम दो चर राशियों की रैखिक असमिका के आलेखन का वर्णन करेंगे।

हम जानते हैं कि एक रेखा कार्तीय तल को रेखा के अतिरिक्त दो भागों में बाँटती है। प्रत्येक भाग को अर्ध-तल कहते हैं। एक ऊर्ध्वाधर रेखा तल को बायाँ अर्ध-तल व दायाँ अर्ध-तल में विभाजित करती है और एक ऊर्ध्वेतर (non-vertical) रेखा एक तल को निचला अर्ध-तल व ऊपरी अर्ध-तल में विभाजित करती है। आकृति 6.3 व आकृति 6.4)।

आकृति 6.3                                                आकृति 6.4

कार्तीय तल में एक बिंदुु या तो रेखा पर स्थित होगा या अर्ध-तल I या II में स्थित होगा। अब हम परीक्षण करेंगे कि क्या एक तल में स्थित बिंदुु का असमिका ax + by < c या ax + by > c से कोई संबंध है?

आइए हम मान लें ax + by = c, ... (1)

एक रेखा है जहाँ a 0 तथा b 0 है।

अब यहाँ तीन संभावनाएँ हैंः

(i) ax + by = c (ii) ax + by > c (iii) ax + by < c.

स्पष्टतः स्थिति (i) में (i) को संतुष्ट करने वाले सभी बिंदु (x, y) (i) द्वारा निरूपित रेखा पर स्थित हैं और विलोमतः।

स्थिति (ii) में पहले हम मान लेते हैं कि b > 0 और रेखा ax + by = c, b > 0, पर एक बिंदु P (α,β) लेते हैं ताकि aα + bβ = c.

माना अर्ध-तल II में कोई बिंदु Q (α , γ) है (आकृति 6.5)।

आकृति  6.5

अब आकृति 6.5 से हम निष्कर्ष निकालते है कि

γ > β (क्यों?)

या b > bβ

या aα + b γ > aα + bβ

या aα + b γ > c (क्यों?)

या, Q(α,), असमिका ax + by > c को संतुष्ट करती है।

अर्थात्, रेखा ax + by = c के ऊपर अर्ध-तल II में स्थित सभी बिंदु असमिका ax + by > c को संतुष्ट करते हैं।

विलोमतः माना रेखा ax + by = c पर एक बिंदु P (α, β) है और Q(α, γ) कोई बिंदु, असमिका

ax + by > c को संतुष्ट करता है।

ताकि aα + bγ > c

aα + b γ > aα + bβ

γ > β (क्योंकि b > 0)

अर्थात् Q(α, ) अर्ध-तल II में स्थित है

अतः अर्ध-तल II का कोई भी बिंदु असमिका ax + by > c को संतुष्ट करता है और विलोमतः कोई बिंदु जो असमिका ax + by > c को संतुष्ट करता है, अर्ध-तल II में स्थित होता है।

इसी प्रकार हम सिद्ध कर सकते हैं कि b < 0 के लिए वे सभी बिंदु जो असमिका ax + by > c को संतुष्ट करते हैं, अर्ध-तल I में स्थित होते हैं और विलोमतः

अतः हम इस निष्कर्ष पर आते हैं कि वे सभी बिंदु जो असमिका ax + by > c ; b > 0 या b < 0 के अनुसार, को संतुष्ट करते हैं वे अर्ध-तल II या I में से किसी एक तल में स्थित होते हैं और विलोमतः।

असमिका ax + by > c का आलेखन इन अर्ध-तलों में से एक अर्ध-तल होगा [(जिसे हल-क्षेत्र (Solution region) कहते हैं] और इस अर्ध-तल को छायांकित क्षेत्र (Shaded region) द्वारा निरूपित करते हैं।

टिप्पणी 1 वह क्षेत्र जिसमें किसी असमिका के संपूर्ण हल स्थित हों, उसे असमिका का हल-क्षेत्र (Solution region) कहते हैं।

2. किसी असमिका द्वारा निरूपित क्षेत्र को पहचानने के लिए, किसी अर्ध-तल में केवल एक बिंदु (a, b) (जो रेखा पर स्थित न हो) लेकर जाँचना ही पर्याप्त है कि वह उस असमिका को संतुष्ट करता है अथवा नहीं। यदि यह बिंदु असमिका को संतुष्ट करता है तो असमिका उस अर्ध-तल को निरूपित करती है और उस अर्ध-तल को छायांकित कर देते हैं जिसमें यह बिंदु है। अन्यथा यह असमिका उस अर्ध-तल को निरूपित करेगी जिसमें यह बिंदु नहीं है। अपनी सुविधा की दृष्टि से बिंदु (0, 0) को प्राथमिकता दी जाती है।

3. यदि एक असमिका ax + by c या ax + by c के स्वरूप की है तो रेखा ax + by = c पर स्थित सभी बिंदु भी उसके हल-क्षेत्र में सम्मिलत होते हैं। इसलिए हल क्षेत्र पर गहरी काली रेखा खींचते हैं।

4. यदि असमिका ax + by > c या ax + by < c के स्वरूप की है तो रेखा ax + by = c पर स्थित सभी बिंदु उसके हल-क्षेत्र में सम्मिलित नहीं होते हैं। इसलिए हल क्षेत्र पर रेखा को बिंदुवत् या खंडित खींचते हैं।


अनुभाग 6.2 में हमें दो चर राशियों x तथा y का निम्नलिखित रैखिक असमिका प्राप्त हुई थी।

40x + 20y 120 ... (1)

जब रेशमा द्वारा रजिस्टर और पेन के खरीदने संबंधी शाब्दिक प्रश्न को गणितीय रूप में परिवर्तित करने से प्राप्त हुई थी।

चूँकि वस्तुओं की संख्या एक ऋणात्मक और भिन्नात्मक संख्या नहीं हो सकती है, अतः हम इस असमिका का हल x तथा y को केवल पूर्ण संख्या के रूप में ध्यान रखते हुए करते है। इस अवस्था में हम x तथा y के मानों के एेसे जोड़े ज्ञात करते हैं जिनके संगत कथन (1) सत्य है। वास्तव में एेसे युग्मों का समुच्चय असमिका (1) का हल समुच्चय (Solution set) होगा। x = 0 लेकर प्रारंभ करने पर हम पाते हैं कि (1) का

बायाँ पक्ष = 40x + 20y = 40 (0) + 20y = 20y.

इस प्रकार

20y 120 या y 6 ... (2)

आकृति 6.6

अतः x = 0 के संगत y के मान 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6 मात्र हो सकते हैं।

इस स्थिति में (1) के हल (0, 0), (0,1), (0,2), (0,3), (0,4), (0,5) और (0,6) हैं।

इसी प्रकार जब x = 1, 2, 3 हैं तो (1) के अन्य हल निम्नलिखित हैंः

(1, 0), (1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4)

(2, 0), (2, 1), (2, 2), (3, 0)

यह आकृति 6.6 में दिखाया गया है।

अब हम x तथा y के प्रांत (domain) को पूर्ण संख्याओं से विस्तारित करके वास्तविक संख्याएँ करते हैं, और देखते हैं कि इस अवस्था में असमिका (1) के क्या हल होते हैं। आप देखेंगे कि हल करने की आलेखित-विधि (Graphical method) इस स्थिति में अधिक सुविधाजनक है। इस उद्देश्य से, हम (1) के संगत समीकरण

40x + 20y = 120 ... (3)

पर विचार करते हैं और इसका आलेख खींचते हैं।

यह एक सरल रेखा है जो कार्तीय तल को अर्ध-तल I व अर्ध-तल II में विभाजित करती है

असमिका (1) का आलेख खींचने के लिए, हम अर्ध-तल-I में एक बिंदुु (0, 0) मान लेते हैं और यह जाँचते हैं कि
x
और y के मान असमिका को संतुष्ट करते हैं या नहीं।

आकृति 6.7

आप यह देखेंगे कि x = 0, y = 0 असमिका को संतुष्ट करते हैं। इस प्रकार हम कहते हैं कि असमिका का आलेख, अर्ध-तल I है (आकृति 6.7 में दिखाया गया है)। चूँकि रेखा के सभी बिंदु असमिका (1) को संतुष्ट करते हैं। अतः रेखा भी आलेख का एक भाग है।

इस प्रकार दिए गए असमिका का आलेख, रेखा सहित अर्ध-तल I है। स्पष्टतः अर्ध-तल II आलेख का भाग नहीं है। इस प्रकार असमिका (1) का हल इसके आलेख (रेखा सहित, अर्ध-तल I) के समस्त बिंदु है।

अब हम कुछ उदाहरणों की सहायता से दो चर राशियों के रैखिक असमिकाओं के हल करने की विधि स्पष्ट करते हैं।

उदाहरण 9 3x + 2y > 6 को आलेखीय विधि (Graphically) से हल कीजिए।

हल र्वप्रथम हम समीकरण 3x + 2y = 6 का ग्राफ खांडित रेखा के रूप में खींचते हैं (आकृति 6.8)।

आकृति 6.8

यह रेखा xy- - तल को दो अर्ध-तल I तथा II में विभाजित करती है हम एक बिंदु (जो रेखा पर स्थित नहीं है) जैसे (0, 0) का चयन करते हैं जो अर्ध-तल I में स्थित है (आकृति 6.8)। अब जाँच करते हैं कि यह बिंदु दी गई असमिका को संतुष्ट करता है
अथवा नहीं।

हम पाते हैं कि 3 (0) + 2 (0) > 6

या 0 > 6 , जो असत्य है।

अतः अर्ध-तल I, दिए हुए असमिका का हल-क्षेत्र नहीं है। स्पष्टतः रेखा पर स्थित कोई भी बिंदु, दी गई असमिका को संतुष्ट नहीं करता है। दूसरे शब्दों में, छायांकित अर्ध-तल II, रेखा के बिंदुओं को छोड़कर, दी गई असमिका का हल क्षेत्र है।

उदाहरण 10 द्विविमीय तल में असमिका 3x – 6 0 का आलेखन-विधि से हल कीजिए।

हल 3x – 6 = 0 का आलेख आकृति 6.9 में दिया गया है।

आकृति 6.9

हम एक बिंदु (0, 0) का चयन करते हैं और इसे दी गई असमिका में रखने पर हम पाते हैं कि

3 (0) – 6 0 या – 6 0 जो कि असत्य है।

इस प्रकार दी गई असमिका का हल-क्षेत्र रेखा x = 2 के दाहिनी ओर छायांकित भाग है।

उदाहरण 11 y < 2 को आलेखन-विधि से हल कीजिए।

हल y = 2 का आलेख 6.10 में दिया गया है।

आकृति 6.10

हम निचले अर्ध-तल I में एक बिंदु जैसे (0, 0) का चयन करते हैं और दी गई असमिका में y = 0 रखने पर हम पाते हैं कि

1 × 0 < 2 या 0 < 2 जोकि सत्य है।

इस प्रकार रेखा y = 2 के नीचे का क्षेत्र जिसमें मूल बिंदु (0, 0) स्थित है, दी गई असमिका का हल-क्षेत्र है। अतः रेखा y = 2 के नीचे के समस्त बिंदु (जिसमें रेखा के बिंदु सम्मिलित नहीं हैं) दी गई असमिका के हल हैं।

प्रश्नावली 6.2

निम्नलिखित असमिकाओं को आलेखन-विधि से द्विविमीय तल में निरूपित कीजिए।

1. x + y < 5 

2. 2x + y 6 

3. 3x + 4y 12 

4. y + 8 2x 

5. x y 2 

6. 2x – 3y > 6

7. – 3x + 2y – 6 

8. 3y – 5x < 30 

9. y < – 2 

10. x > – 3.

6.5 दो चर राशियों की असमिका निकाय का हल (Solution of System of Linear Inequalities in Two Variables)

पिछले अनुभाग में हम दो चर राशियों के रैखिक असमिकाओं का आलेखन-विधि से हल करना सीख गए हैं। अब हम कुछ उदाहरणों की सहायता से दो चर राशियों की असमिका निकाय को हल करने की विधि स्पष्ट करेंगे।

उदाहरण 12 निम्नलिखित असमिका निकाय

x + y 5 ... (1)

x y 3 ... (2)

को आलेखीय विधि से हल कीजिएः

हल रैखिक असमिका x + y = 5 का आलेख आकृति 6.11 में खींचा गया है।

 

आकृति 6.11

म देखते हैं कि असमिका (1) का हल, रेखा x + y = 5 के ऊपरी छायांकित क्षेत्र द्वारा निरूपित होता है जिसमें रेखा पर स्थित सभी बिंदुु भी सम्मिलित हैं।

उन्हीं निर्देशांक्षों पर हम समीकरण का भी आलेख खींचते है जैसा कि (आकृति 6.11) में दिखाया गया है। तब असमिका (2) का हल रेखा x y = 3 के ऊपरी छायांकित क्षेत्र द्वारा निरूपित होता है, जिसमें रेखा पर सभी बिंदु भी सम्मिलित हैं।

स्पष्टतः द्विछायांकित क्षेत्र (double shaded region) जो उपर्युक्त दोनों छायांकित क्षेत्रों में उभयनिष्ठ हैं, वही दिए हुए असमिका निकाय (1) व (2) का वांछित हल क्षेत्र है।

उदाहरण 13 निम्नलिखित रैखिक असमिका निकाय को आलेखन विधि द्वारा हल कीजिए।

5x + 4y 40 ... (1)

x 2 ... (2)

y 3 ... (3)

हल सर्वप्रथम हम समीकरणों 5x + 4y = 40, x = 2 और = 3 द्वारा निरूपित रेखाओं के आलेख
खींचते हैं।

आकृति 6.12

तब हम देखते हैं कि असमिका (1), रेखा 5x + 4y = 40 के नीचे छायांकित क्षेत्र को निरूपित करता है जिसमें रेखा के सभी बिंदुु भी सम्मिलित हैं असमिका (2), रेखा x = 2 के दाहिनी ओर का छायांकित क्षेत्र और असमिका (3), रेखा y = 3 के ऊपरी छायांकित क्षेत्र जिनमें इन रेखाओं के सभी बिंदुु भी सम्मिलित हैं, को निरूपित करता है। अतः सर्वनिष्ठ छायांकित क्षेत्र और रेखाओं पर सभी बिंदुु (आकृति 6.12) दिए हुए रैखिक असमिका निकाय के हल हैं।

बहुत सी व्यावहारिक स्थितियों में जो असमिका निकाय से युक्त हैं, चर राशियाँ x और y प्रायः एेसी राशियाँ होती हैं, जो ऋणात्मक नहीं हो सकती हैं। उदाहरणतः उत्पादित इकाइयों की संख्या, क्रय की गई वस्तुओं की संख्या, काम करने में लगे घंटों की संख्या आदि। स्पष्टतः एेसी परिस्थिति में x 0 और y 0 हल क्षेत्र प्रथम चतुर्थांश में ही होता है।

आइए अब हम कुछ एेसे असमिका निकाय पर विचार करते हैं, जिनमें x 0, y 0 हैं।

उदाहरण 14 निम्नलिखित असमिका निकाय को आलेखीय विधि से हल कीजिएः

8x + 3y 100 ... (1)


x 0 ... (2)

y 0 ... (3)

हल हम रेखा 8x + 3y = 100 का आलेख खींचते हैं।

असमिका 8x + 3y 100 इस रेखा के नीचे के छायांकित क्षेत्र को निरूपित करता है, जिसमें रेखा 8x +3y =100 के सभी बिंदुु सम्मिलित हैं (आकृति 6.13)।

आकृति 6.13

चूंकि 8x + 3y 100, अतः त्रिविध छायांकित (Triple shaded) क्षेत्र का प्रत्येक बिंदुु जो प्रथम चतुर्थांश में है, तथा जिसमें रेखाओं के बिंदुु भी सम्मिलित हैं, दिए हुए असमिका निकाय का हल निरूपित करता है।

उदाहरण 15 निम्नलिखित असमिका निकाय को आलेखीय विधि से हल कीजिए।

x + 2y 8 ... (1)

2x + y 8 ... (2)

x > 0 ... (3)

y > 0 ... (4)

हल हम रेखाओं x + 2y = 8 और 2x + y = 8 का आलेख खींचते हैं। असमिका (1) और (2) दोनों संगत रेखाओं के बिंदुुओं सहित अपने से नीचे स्थित क्षेत्रों को निरूपित करते हैं।

चूंकि x 0, y 0 अतः प्रथम चतुर्थांश में स्थित सर्वनिष्ठ छायांकित क्षेत्र के प्रत्येक बिंदुु दिए हुए असमिका निकाय के हल को निरूपित करता है आकृति (6.14)।

आकृति 6.14

प्रश्नावली 6.3

प्रश्न 1 से 15 तक निम्नलिखित असमिका निकाय को आलेखीय विधि से हल कीजिएः graphically:

1. x 3, y 2 

2. 3x + 2y 12, x 1, y 2

3. 2x + y 6, 3x + 4y < 12 

4. x + y 4, 2x y < 0

5. 2x y >1, x – 2y < – 1 

6. x + y 6, x + y 4

7. 2x + y 8, x + 2y 10 

8. x + y 9, y > x, x 0

9. 5x + 4y 20, x 1, y 2

10. 3x + 4y 60, x +3y 30, x 0, y 0

11. 2x + y 4, x + y 3, 2x – 3y 6

12. x – 2y 3, 3x + 4y 12, x 0 , y 1.

13. 4x + 3y 60, y 2x, x 3, x, y 0

14. 3x + 2y 150, x + 4y 80, x 15, y 0, x 0

15. x + 2y 10, x + y 1, x y 0, x 0, y 0

विविध उदाहरण

उदाहरण 16 हल कीजिए – 8 5x – 3 < 7.

हल इस स्थिति में हमारे पास दो असमिकाएँ – 8 5x – 3 और 5x – 3 < 7 हैं। इन्हें हम साथ-साथ हल करना चाहते हैं। हम दिए गए असमिका के मध्य में चर राशि x का गुणांक एक बनाना चाहते हैं।

हमें ज्ञात है कि – 8 5x –3 < 7

या –5 5x < 10 या –1 x < 2

उदाहरण 17 हल कीजिए – 5  8.

हल ज्ञात है कि – 5 8

या –10 5 – 3x 16 या – 15 – 3x 11

या 5 x

जिसे हम x 5 के रूप में भी लिख सकते हैं।

दाहरण 18 निम्नलिखित असमिका-निकाय को हल कीजिएः

3x – 7 < 5 + x ... (1)

11 – 5 x 1 ... (2)

और उन्हें संख्या रेखा पर आलेखित कीजिए।

हल असमिका (1) से हम प्राप्त करते हैं

3x – 7 < 5 + x

या x < 6 ... (3)

असमिका (2) से भी हम प्राप्त करते हैं

11 – 5 x 1

या – 5 x – 10

या x 2 ... (4)

यदि संख्या रेखा पर (3) तथा (4) को आलेखित करें तो हम पाते हैं कि x के उभयनिष्ठ मान  2 के बराबर या 2 से बड़े व 6 से छोटे हैं जो आकृति 6.16 में गहरी काली रेखा द्वारा प्रदर्शित किए गए हैं।

आकृति 6.16

अतः असमिका निकाय का हल वास्तविक संख्या x, 2 के बराबर या 2 से बड़ा और 6 से छोटी है। इस प्रकार 2 x < 6.

उदाहरण 19 किसी प्रयोग में नमक के अम्ल के एक विलयन का तापमान 30° सेल्सियस और 35° सेल्सियस के बीच ही रखना है। फारेनहाइट पैमाने पर तापमान का परिसर ज्ञात कीजिए, यदि सेंटीग्रेड से फारेनहाइट पैमाने पर परिवर्तन सूत्र

C = (F – 32)

है, जहाँ C और F क्रमशः तापमान को अंश सेल्सियस तथा अंश फारेनहाइट में निरूपित करते हैं।

हल ज्ञात है कि 30 < C < 35

C = (F – 32), रखने पर हम पाते हैं,

30 < (F – 32) < 35,

या × 30 < (F – 32) < × 35

या 54 < (F – 32) < 63

या 86 < F < 95.

इस प्रकार तापमान का अभीष्ट परिसर 86° F से 95° F है।

उदाहरण 20 एक निर्माता के पास अम्ल के 12% विलयन के 600 लिटर हैं। ज्ञात कीजिए कि 30% अम्ल वाले विलयन के कितने लिटर उसमें मिलाए जाएँ ताकि परिणामी मिश्रण में अम्ल की मात्रा 15% से अधिक परंतु 18% से कम हो।

हल मान लीजिए कि 30% अम्ल के विलयन की मात्रा x लिटर है।

तब संपूर्ण मिश्रण = (x + 600) लिटर

इसलिए 30% x + 12% का 600 > 15% का (x + 600)

और 30% x + 12% का 600 < 18% का (x + 600)

या + (600) > (x + 600)

और + (600) < (x + 600)

या 30x + 7200 > 15x + 9000

और 30x + 7200 < 18x + 10800

या 15x > 1800 और 12x < 3600

या x > 120 और x < 300,

अर्थात 120 < x < 300

इस प्रकार 30% अम्ल के विलयन की अभीष्ट मात्रा 120 लिटर से अधिक तथा 300 लिटर से कम होनी चाहिए।

अध्याय 6 पर विविध प्रश्नावली

प्रश्न 1 से 6 तक की असमिकाओं को हल कीजिएः

1. 2 3x – 4 5 

2. 6 – 3 (2x – 4) < 12

3.  

4.

5.  

6. .

प्रश्न 7 से 10 तक की असमिकाओं को हल कीजिए और उनके हल को संख्या रेखा पर निरूपित कीजिए।

7. 5x + 1 > – 24, 5x – 1 < 24

8. 2 (x – 1) < x + 5, 3 (x + 2) > 2 – x

9. 3x – 7 > 2 (x – 6) , 6 – x > 11 – 2x

10. 5 (2x – 7) – 3 (2x + 3) 0 , 2x + 19 6x + 47 .

11. एक विलयन को 68° F और 77° F के मध्य रखना है। सेल्सियस पैमाने पर विलयन के तापमान का परिसर ज्ञात कीजिए, जहाँ सेल्सियस फारेनहाइट परिवर्तन सूत्र F = C + 32 है।

12. 8% बोरिक एसिड के विलयन में 2% बोरिक एसिड का विलयन मिलाकर तनु (dilute) किया जाता है। परिणामी मिश्रण में बोरिक एसिड 4% से अधिक तथा 6% से कम होना चाहिए। यदि हमारे पास 8% विलयन की मात्रा 640 लिटर हो तो ज्ञात कीजिए कि 2% विलयन के कितने लिटर इसमें मिलाने होंगे?

13. 45% अम्ल के 1125 लिटर विलयन में कितना पानी मिलाया जाए कि परिणामी मिश्रण में अम्ल 25% से अधिक परंतु 30% से कम हो जाए?

14. एक व्यक्ति के बौद्धिक-लब्धि (IQ) मापन का सूत्र निम्नलिखित हैः

IQ = × 100,

जहाँ MA मानसिक आयु और CA कालानुक्रमी आयु है। यदि 12 वर्ष की आयु के बच्चों के एक समूह की IQ, असमिका 80 IQ 140 द्वारा व्यक्त हो, तो उस समूह के बच्चों की मानसिक आयु का परिसर ज्ञात कीजिए।

सारांश

  • एक असमिका, दो वास्तविक संख्याओं या दो बीजीय व्यंजकों में <, >, या के चिह्न के प्रयोग से बनती है।
  • एक असमिका के दोनों पक्षों में समान संख्या जोड़ी या घटायी जा सकती है।
  • किसी असमिका के दोनों पक्षों को समान धनात्मक, संख्या से गुणा (या भाग) किया जा सकता है। परंतु दोनों पक्षों को समान ऋणात्मक संख्याओं से गुणा (या भाग) करने पर असमिका के चिह्न तदनुसार बदल जाते हैं।
  • x के उन मानों (Values) को जो दिएे गए असमिका को एक सत्य कथन बनाते हों, उन्हें असमिका का हल कहते हैं।
  • x < a (या x > a) का संख्या रेखा पर आलेख खींचने के लिए संख्या रेखा पर संख्या a पर एक छोटा सा वृत्त बनाकर, a से बाईं (या दाईं) ओर की संख्या रेखा को गहरा काला कर देते हैं।
  • x a (या x a) का संख्या रेखा पर आलेख खींचने के लिए संख्या रेखा पर संख्या a पर एक छोटा काला वृत्त बनाकर a से बाईं (या दाईं) ओर की संख्या रेखा को गहरा काला कर देते हैं।
  • यदि दो चरांकों की एक असमिका के चिह्न या हों तो रेखा पर स्थित बिंदु, असमिका के हल में सम्मिलित होते हैं और असमिका का आलेख, समता द्वारा निरूपित गहरी मोटी रेखा के बाईं (नीचे) या दाईं (ऊपर) होता है जो उस क्षेत्र का कोई भी बिंदु असमिका को संतुष्ट करता है।
  • यदि दो चरांकों की एक असमिका के चिह्न < या > हों तो रेखा पर स्थित बिंदु, असमिका के हल में सम्मिलित नहीं होते हैं और असमिका का आलेख, समता द्वारा निरूपित दानेदार रेखा के बाईं (नीचे) या दाईं (ऊपर) होता है जो उस क्षेत्र का कोई भी बिंदु, असमिका को संतुष्ट करता है।
  • असमिकाओं के निकाय का हल क्षेत्र, वह उभयनिष्ठ क्षेत्र है जो निकाय में सभी दी गई असमिकाओं को संतुष्ट करता है।

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