™।दंसलेपे ंदक दंजनतंस चीपसवेवचल वूम जीमपत उवेज पउचवतजंदज कपेबवअमतपमे जव जीपे तिनपजनिस उमंदेए ूीपबी पे बंससमक पदकनबजपवदण् छमूजवद ूंे पदकमइजमक जव पज वित ीपे जीमवतमउ व िजीम इपदवउपंस ंदक जीम चतपदबपचसम व िनदपअमतेंस हतंअपजलण् दृ स्।च्स्।ब्म् ऽ 4ण्1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध गण्िातीय चिंतन का एक आधरभूत सि(ांत निगमनिक तवर्फ है।तवर्फशास्त्रा के अध्ययन से उ(ृत एक अनौपचारिक और निगमनिक तवर्फका उदाहरण तीन कथनों में व्यक्त तवर्फ हैः - ;ंद्ध सुकरात एक मनुष्य है। ;इद्ध सभी मनुष्य मरणशील हैं, इसलिए, ;बद्ध सुकरात मरणशील है।यदि कथन;ंद्ध और ;इद्ध सत्य हैं, तो ;बद्ध की सत्यता स्थापित है।इस सरल उदाहरण को गण्िातीय बनाने के लिए हम लिख सकते हैं। ;पद्ध आठ दो से भाज्य है। ;पपद्ध दो से भाज्य कोइर् संख्या सम संख्या है, इसलिए, ळण् च्मंदव ;पपपद्ध आठ एक सम संख्या है।;1858.1932 ।ण्क्ण्द्धइस प्रकार संक्षेप में निगमन एक प्रिया है जिसमें एक कथनसि( करने को दिया जाता है, जिसे गण्िात में प्रायः एक अनुमानित कथन ;बवदरमबजनतमद्ध अथवाप्रमेय कहते हैं, तवर्फ संगत निगमन के चरण प्राप्त किए जाते हैं और एक उपपिा स्थापित की जा सकतीहै, अथवा नहीं की जा सकती है, अथार्त् निगमन व्यापक स्िथति से विशेष स्िथति प्राप्त करने काअनुप्रयोग है।निगमन के विपरीत, आगमन तवर्फ प्रत्येक स्िथति के अध्ययन पर आधरित होता है तथा इसमेंप्रत्येक एवं हर संभव स्िथति को ध्यान में रखते हुए घटनाओं के निरीक्षण द्वारा एक अनुमानित कथनविकसित किया जाता है। इसको गण्िात में प्रायः प्रयोग किया जाता है तथा वैज्ञानिक चिंतन, जहाँ आँकड़ोंका संग्रह तथा विशलेषण मानक होता है, का यह मुख्य आधर है। इस प्रकार, सरल भाषा में हम कह सकते हैं कि आगमन शब्द का अथर् विश्िाष्ट स्िथतियों या तथ्यों से व्यापकीकरण करने से है। बीजगण्िात में या गण्िात की अन्य शाखाओं में, वुफछ ऐसे परिणाम या कथन होते हैं जिन्हें एक ध्न पूणा±क दके पदों में व्यक्त किया जाता है। ऐसे कथनों को सि( करने के लिए विश्िाष्ट तकनीकपर आधरित समुचित सि(ांत है जो गण्िातीय आगमन का सि(ांत ;च्तपदबपचसम व िडंजीमउंजपबंस प्दकनबजपवदद्ध कहलाता है। 4ण्2 प्रेरणा ;डवजपअंजपवदद्ध गण्िात में, हम सम्पूणर् आगमन का एक रूप जिसे गण्िातीय आगमन कहते हैं, प्रयुक्त करते हैं। गण्िातीयआगमन सि(ांत के मूल को समझने के लिए, कल्पना कीजिए कि एक पतली आयताकार टाइलों कासमूह एक सिरे पर रखा है, जैसे आवृफति 4.1 में प्रदश्िार्त है। जब प्रथम टाइल को निदिर्ष्ट दिशा में ध्क्का दिया जाता है तो सभी टाइलें गिर जाएँगी। पूणर्तःसुनिश्िचत होने के लिए कि सभी टाइलें गिर जाएँगी, इतना जानना पयार्प्त है कि;ंद्ध प्रथम टाइल गिरती है, और ;इद्ध उस घटना में जब कोइर् टाइल गिरती है, उसकी उत्तरवत्तीर् अनिवायर्तः गिरती है।यही गण्िातीय आगमन सि(ांत का आधर है।हम जानते हैं कि प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय छ वास्तविक संख्याओं का विशेष क्रमितउपसमुच्चय है। वास्तव में, त् का सबसे छोटा उपसमुच्चय छ है, जिसमें निम्नलिख्िात गुण हैंःएक समुच्चय ै आगमनिक समुच्चय ;प्दकनबजपअम ेमजद्ध कहलाता है यदि 1∈ ै और ग़ 1 ∈ ै जब कभी ग∈ ैण् क्योंकि छए जो कि एक आगमनिक समुच्चय है, त् का सबसे छोटा उपसमुच्चय है, परिणामतः त् के किसी भी ऐसे उपसमुच्चय में जो आगमनिक है, छ अनिवायर् रूप से समाहित होता है। दृष्टांत मान लीजिए कि हम प्रावृफत संख्याओं1ए 2ए 3एण्ण्ण्एदए के योग के लिए सूत्रा प्राप्त करना चाहते हैं अथार्त्एक सूत्रा जो कि दत्र 3 के लिए 1 ़ 2 ़ 3 का मान देता है, दत्र 4 के लिए 1 ़ 2 ़ 3 ़ 4 का मान देता है इत्यादि। और मान लीजिए कि हम किसी प्रकार से यह विश्वास करने के लिए प्रेरित होते ; 1द्ध दद़हैं कि सूत्रा 1 ़ 2 ़ 3़ण्ण्ण़् दत्र सही है।2 यह सूत्रा वास्तव में वैफसे सि( किया जा सकता है? हम, निश्िचत ही द के इच्छानुसार चाहे गए, ध्न पूणा±क मानों के लिए कथन को सत्यापित कर सकते हैं, किंतु इस प्रिया का मान द के सभी मानों के लिए सूत्रा को सि( नहीं कर सकती है। इसके लिए एक ऐसी िया शृंखला की आवश्यकता है, जिसका प्रभाव इस प्रकार का हो कि एक बार किसी ध्न पूणा±क के लिए सूत्रा के सि( हो जाने के बाद आगामी ध्न पूणा±कों के लिए सूत्रा निरंतर अपने आप सि( हो जाता है। इस प्रकार कीिया शृंखला को गण्िातीय आगमन विध्ि द्वारा उत्पन्न समझा जा सकता है। 4ण्3 गण्िातीय आगमन का सि(ांत ;ज्ीम च्तपदबपचसम व िडंजीमउंजपबंस प्दकनबजपवदद्ध कल्पना कीजिए ध्न पूणा±क च्;दद्ध से संब( एक दिया कथन इस प्रकार है कि ;पद्ध द त्र 1ए के लिए कथन सत्य है अथार्त् च्;1द्ध सत्य है और ;पपद्ध यदि द त्र ाए एक प्रावृफत संख्या, के लिए कथन सत्य है तो द त्र ा ़ 1ए के लिए भी कथन सत्य है अथार्त् च्;ाद्ध की सत्यता का तात्पयर् है च् ;ा ़ 1द्ध की सत्यता। अतः सभी प्रावृफत संख्या द के लिए च्;दद्ध सत्य है। गुण ;पद्ध मात्रा तथ्य का कथन है। ऐसी परिस्िथतियाँ भी हो सकती हैं जब द ≥ 4 के सभी मानों के लिए कथन सत्य हो। इस स्िथति में, प्रथम चरण द त्र 4 से प्रारंभ होगा और हम परिणाम को द त्र 4 के लिए अथार्त् च्;4द्ध सत्यापित करेंगे। गुण ;पपद्ध प्रतिबंध्ित गुणध्मर् है। यह निश्चयपूवर्क नहीं कहता कि दिया कथन द त्र ा के लिए सत्य है, परंतु केवल इतना कहता है कि यदि यह द त्र ा के लिए कथन सत्य है, तो द त्र ा ़ 1 के लिए भी सत्य है। इस प्रकार गुणध्मर् की सत्यता सि( करने के लिए केवल प्रतिबंध्ित साध्य ;बवदकपजपवदंस चतवचवेपजपवदद्ध को सि( करते हैंः फ्यदि द त्र ा के लिए कथन सत्य है तो यह द त्र ा ़ 1 के लिए भी सत्य हैय्। इसे कभी - कभी आगमन का चरण ;प्दकनबजपवद ेजमचद्ध कहा जाता है। इस आगमन चरण में ‘द त्र ा के लिए कथन सत्य है’ की अभ्िाधरणा ;ंेेनउचजपवदद्ध आगमन परिकल्पना ;प्दकनबजपवद ीलचवजीमेपेद्ध कहलाती है। उदाहरणाथर्ः गण्िात में बहुध एक सूत्रा खोजा जा सकता है जो किसी पैटनर् के अनुरूप होता है, जैसे 1 त्र 12 त्र1 4 त्र 22 त्र 1 ़ 3 9 त्र 32 त्र 1 ़ 3 ़ 5 16 त्र 42 त्र 1 ़ 3 ़ 5 ़ 7ए इत्यादि। ध्यान दीजिए कि प्रथम दो विषम प्रावृफत संख्याओं का योग द्वितीय प्रावृफत संख्या का वगर् है, प्रथम तीन विषम प्रावृफत संख्याओं का योग तृतीय प्रावृफत संख्या का वगर् है, इत्यादि। अतः इस पैटनर् से प्रतीत होता है कि 1 ़ 3 ़ 5 ़ 7 ़ ण्ण्ण् ़ ;2द दृ 1द्ध त्र द2 ए अथार्त् प्रथम द विषम प्रावृफत संख्याओं का योग द का वगर् है। मान लीजिए कि च्;दद्धरू 1 ़ 3 ़ 5 ़ 7 ़ ण्ण्ण् ़ ;2द दृ 1द्ध त्र द2 हम सि( करना चाहते हैं कि च्;दद्ध, द के सभी मानों के लिए सत्य है। गण्िातीय आगमन केप्रयोग वाली उपपिा के प्रथम चरण में च्;1द्ध को सत्य सि( करते हैं। इस चरण को मूल चरण कहते हैं। प्रत्यक्षतः 1 त्र 12 अथार्त् च्;1द्ध सत्य है। अगला चरण आगमन चरण ;प्दकनबजपवद ेजमचद्ध कहलाता है। यहाँ हम कल्पना करते हैं कि च् ;ाद्ध सत्य है जहाँ ा एएक प्रावृफत संख्या है और हमें च् ;ा ़ 1द्ध की सत्यता सि( करने की आवश्यकता है क्योंकि च् ;ाद्ध सत्य है, अतः च् ;ाद्ध रू 1 ़ 3 ़ 5 ़ 7 ़ ण्ण्ण् ़ ;2ा दृ 1द्ध त्र ा2 ण्ण्ण् ;1द्ध च् ;ा़1द्ध पर विचार कीजिए च् ;ा ़ 1द्ध रू 1 ़ 3 ़ 5 ़ 7 ़ ण्ण्ण् ़ ;2ा दृ 1द्ध ़ क्ष्2;ा ़1द्ध दृ 1द्व ण्ण्ण् ;2द्ध त्र ा2 ़ ;2ा ़ 1द्ध ख्;1द्ध के प्रयोग से, त्र ;ा ़ 1द्ध2 इसलिएए च् ;ा ़ 1द्ध सत्य है और अब आगमनिक उपपिा पूणर् हुइर्। अतः सभी प्रावृफत संख्याओं द के लिए च्;दद्ध सत्य है। उदाहरण 1 सभी द ≥ 1 के लिए, सि( कीजिए ; ़1द्ध;2 ददद ़1द्ध 12 ़ 22 ़ 32 ़ 42 ़३़ द2त्र ण्6 हल मान लीजिए कि दिया कथन च्;दद्ध है, अथार्त् ; ़1द्ध;2 ददद ़1द्ध च्;दद्ध रू 12 ़ 22 ़ 32 ़ 42 ़३़ द2त्र 6 1;1 ़1द्ध;2 1 123 ×़ 1द्ध ×× द त्र 1 के लिए, च्;1द्धरू 1 त्र 6 त्र 6 त्र1 जोकि सत्य है। किसी ध्न पूूणा±क ा के लिए कल्पना कीजिए कि च्;ाद्ध सत्य है, अथार्त् ; ़1द्ध;2 ााा ़1द्ध 12 ़ 22 ़ 32 ़ 42 ़३़ ा2 त्र ण्ण्ण्;1द्ध6 अब हम सि( करेंगे कि च्;ा ़ 1द्ध भी सत्य है, ;12 ़22 ़32 ़42 ़३़ा2 द्ध ़ ;ा ़ 1द्ध 2 ; ़ाा 1द्ध;2 ा ़1द्ध 2़़1द्ध त्र ;ा ख्;1द्ध के प्रयोग से,6 ; ़1द्ध;2 ा ़़ 1द्ध 6; 2ाा ा ़1द्ध त्र 6 ;ा ़1द्ध;2 ा27ा 6द्ध ़़ त्र 6 ;ा ़1द्ध; ा ़़ 1द्धक्ष्2; ा ़़ 1द्व 1 1द्ध त्र 6 इस प्रकारए च्;ा ़ 1द्ध सत्य है जब कभी च् ;ाद्ध सत्य है। अतः गण्िातीय आगमन सि(ांत से सभी प्रावृफत संख्याओं छ के लिए कथन च्;दद्ध सत्य है। उदहारण 2 सभी ध्न पूणा±क द के लिए सि( कीजिए कि 2द झ दण् हल मान लीजिए कि च्;दद्धरू 2दझ द जब दत्र1ए 21झ1ण् अतः च्;1द्ध सत्य है। कल्पना कीजिए कि किसी ध्न पूणा±क ा के लिए च्;ाद्ध सत्य है अथार्त् च्;ाद्ध रू2ा झ ा ण्ण्ण् ;1द्ध अब हम सि( करेंगे कि च्;ा ़1द्ध सत्य है जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। ;1द्ध के दोनों पक्षों में 2 का गुणा करने पर हम 2ण् 2ा झ 2ा प्राप्त करते हैं। अथार्त् 2 ा ़ 1 झ 2ा त्र ा ़ ा झ ा ़ 1 इसलिएए च्;ा ़ 1द्ध सत्य है जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। अतः गण्िातीय आगमन द्वारा, प्रत्येक ध्न पूणार्क द के लिए च्;दद्ध सत्य है। उदाहरण 3 सभी पूणा±क द ≥ 1 के लिए, सि( कीजिएः 111 1 द़़ ण्ण्ण़़् त्र 1ण्2 2ण्3 3ण्4 ; ़1द्ध द ़1ण्दद हल मान लीजिए कि दिया कथन च्;दद्ध है तथा हम 111 1 द़़ ण्ण्ण् ़़ त्रच्;दद्धरू लिखते हैं1ण्2 2ण्3 3ण्4 ; ़1द्ध द ़1दद 11 1इस प्रकार च्;1द्धरू त्रत्र ए जोकि सत्य है। अतः च्;दद्धए द त्र 1 के लिए सत्य है।1ण्2 21़1 कल्पना कीजिए कि पूणा±क ा के लिए च्;ाद्ध सत्य है 111 1 ा़़़ ण्ण्ण् ़त्रअथार्त् ण्ण्ण् ;1द्ध1ण्2 2ण्3 3ण्4 ; ़1द्ध ा़1ाा हमें च्;ा़ 1द्ध को सत्य सि( करना है जब च्;ाद्ध सत्य है। इस हेतु निम्नलिख्िात पर विचार कीजिए। 1111 1़़़ ण्ण्ण् ़़ 1ण्2 2ण्3 3ण्4 ; ़1द्ध ;ा़1द्ध ; ा़ 2द्ध ाा ⎡ 111 1 ⎤ 1़़़ ण्ण्ण़़्त्र ⎢⎥ाा⎣1ण्2 2ण्3 3ण्4 ; ़1द्ध ⎦ ;ा़1द्ध; ा़ 2द्ध ा 1 त्र ़ ख्;1द्ध के प्रयोग से,ा़1; ा़1द्ध; ा़ 2द्ध 2 12; ़ 2द्ध ़ ;ा ़ 2ा़1द्ध ़द्ध 1द्ध ा़1द्धाा 1 ;ा ;ा़;त्रत्र त्र त्र त्र ;ा़1द्ध; ा़2द्ध ;ा़1द्ध; ा़2द्ध ;ा़1द्ध; ा़2द्ध;ा़ 2द्ध;ा़1द्ध़1 इस प्रकार कथनच्;ा़ 1द्ध सत्य है जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। अतः गण्िातीय आगमन सि(ांत द्वारा सभी पूणा±कों द≥ 1 के लिए च्;दद्ध सत्य है। उदाहरण 4 प्रत्येक ध्न पूणा±क दके लिए, सि( कीजिए कि 7ददृ 3द, 4 से विभाजित होता है। हल मान लीजिए दिया कथन च्;दद्ध है अथार्त् च्;दद्ध रू 7ददृ 3द, 4 से विभाजित है। हम पाते हैं च्;1द्धरू 71 दृ 31 त्र 4 जो कि 4 से विभाजित होता है। इस प्रकार च्;दद्धए दत्र 1 के लिए सत्य है। कल्पना कीजिए कि एक ध्न पूणा±क ाके लिए च्;ाद्ध सत्य है, अथार्तए च्;ाद्ध रू 7ादृ 3ाए 4 से विभाजित होता है। अतः हम लिख सकते हैं 7ादृ 3ात्र 4कए जहाँ क∈ छण् अब, हम सि( करना चाहते हैं कि च्;ा़ 1द्ध सत्य है, जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। 7;ाअब ़1द्धदृ 3;ा़ 1द्ध त्र7;ा़ 1द्ध दृ 7ण्3ा़ 7ण्3ादृ 3;ा ़ 1द्ध त्र 7;7ादृ 3ाद्ध ़ ;7 दृ 3द्ध3ा त्र 7;4कद्ध ़ ;7 दृ 3द्ध3ा त्र 7;4कद्ध ़ 4ण्3ा त्र 4;7क़ 3ाद्ध अंतिम पंक्ित से हम देखते हैं कि 7;ा ़ 1द्ध दृ 3;ा ़ 1द्धए 4 से विभाजित होता है। इस प्रकारए च्;ा ़ 1द्ध सत्य है जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। इसलिए, गण्िातीय आगमन सि(ांत से प्रत्येक ध्न पूणा±क द के लिए कथन च्;दद्ध सत्य है। उदाहरण 5 सभी प्रावृफत संख्याओं द के लिए सि( कीजिए कि ;1 ़ गद्धद ≥ ;1 ़ दगद्धए जहाँ ग झ दृ 1ण् हल मान लीजिए कि दिया कथन च्;दद्ध है अथार्त् च्;दद्धरू ;1 ़ गद्धद ≥ ;1 ़ दगद्धए ग झ दृ 1 के लिए जब द त्र 1ए च्;दद्ध सत्य है क्योंकि ; 1़गद्ध ≥ ;1 ़ गद्ध जो ग झ दृ1 के लिए सत्य है कल्पना कीजिए कि च्;ाद्धरू ;1 ़ गद्धा ≥ ;1 ़ ागद्धए ग झ दृ 1 सत्य है। ण्ण्ण् ;1द्ध अब हम सि( करना चाहते हैं कि च्;ा ़ 1द्ध सत्य हैं, ग झ दृ1 के लिए, जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। ण्ण्ण् ;2द्ध सवर्समिका ;1 ़ गद्धा ़ 1 त्र ;1 ़ गद्धा ;1 ़ गद्ध पर विचार कीजिए। दिया है कि ग झ दृ1ए इस प्रकार ;1़गद्ध झ 0ण् इसलिए ;1 ़ गद्धा ≥ ;1 ़ ागद्धए का प्रयोग कर हम पाते हैं, ;1 ़ गद्ध ा ़ 1 ≥ ;1 ़ ागद्ध;1 ़ गद्ध अथार्त् ;1 ़ गद्धा ़ 1 ≥ ;1 ़ ग ़ ाग ़ ाग2द्धण् ण्ण्ण् ;3द्ध यहाँ ा एक प्रावृफत संख्या है और ग2 ≥ 0 इस प्रकार ाग2 ≥ 0ण् इसलिए, ;1 ़ ग ़ ाग ़ ाग2द्ध ≥ ;1 ़ ग ़ ागद्धए और इस प्रकार, हम प्राप्त करते हैं ;1 ़ गद्धा ़ 1 ≥ ;1 ़ ग ़ ागद्ध अथार्त् ;1 ़ गद्धा ़ 1 ≥ ख्1 ़ ;1 ़ ाद्धग, इस प्रकार, कथन ;2द्ध सि( होता है। अतः गण्िातीय आगमन सि(ांत से सभी प्रावृफत संख्याओं द के लिए च्;दद्ध सत्य है। उदाहरण 6 सि( कीजिए कि सभी द ∈ छ के लिए 2ण्7द ़ 3ण्5द दृ 5ए 24 से भाज्य है। हल मान लीजिए कि कथन च्;दद्ध इस प्रकार परिभष्िात है कि च्;दद्ध रू 2ण्7द ़ 3ण्5द दृ 5ए 24 से भाज्य है जब द त्र 1 के लिए च्;दद्ध सत्य है। हम पाते हैं 2ण्7 ़ 3ण्5 दृ 5 त्र 24 जो कि 24 से भाज्य है। कल्पना कीजिए कि च्;ाद्ध सत्य है। अथार्त् 2ण्7ा ़ 3ण्5ा दृ 5 त्र 24ुए जबकि ु ∈ छ ण्ण्ण् ;1द्ध अब हम सि( करना चाहते हैं कि च्;ा ़ 1द्ध सत्य है। जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। हम पाते हैं, 2ण्7ा़1 ़ 3ण्5ा़1 दृ 5 त्र 2ण्7ा ण् 71 ़ 3ण्5ा ण् 51 दृ 5 त्र 7 ख्2ण्7ा ़ 3ण्5ा दृ 5 दृ 3ण्5ा ़ 5, ़ 3ण्5ा ण् 5 दृ 5 त्र 7 ख्24ु दृ 3ण्5ा ़ 5, ़ 15ण्5ा दृ5 त्र 7 × 24ु दृ 21ण्5ा ़ 35 ़ 15ण्5ा दृ 5 त्र 7 × 24ु दृ 6ण्5ा ़ 30 त्र 7 × 24ु दृ 6 ;5ा दृ 5द्ध त्र 7 × 24ु दृ 6 ;4चद्ध ख्;5ा दृ 5द्धए 4 का गुणज है ;क्यों?द्ध, च ∈ छ त्र 7 × 24ु दृ 24च त्र 24 ;7ु दृ चद्ध त्र 24 × तए त त्र 7ु दृ चए कोइर् प्रावृफत संख्या है। ण्ण्ण् ;2द्ध व्यंजक ;1द्ध का दायाँ पक्ष 24 से भाज्य है। इस प्रकार, च्;ा ़ 1द्ध सत्य है, जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। अतः गण्िातीय आगमन सि(ांत से, सभी द ∈ छ के लिए च्;दद्ध सत्य है। उदाहरण 7 सि( कीजिए किः 3 12 ़ 22 ़ ण्ण्ण् ़ द2 झ द ए द ∈ छ3 हल मान लीजिए कि दिया कथन च्;दद्ध है, 3दअथार्त् ए च्;दद्ध रू 12 ़ 22 ़ ण्ण्ण् ़ द2 झ ए द ∈ छ3 2 13 हम ध्यान देते हैं कि द त्र 1 के लिए, च्;दद्ध सत्य है क्योंकि च्;1द्ध रू 1 झ 3 कल्पना कीजिए कि च्;ाद्ध सत्य है, ा3 अथार्त् ए च्;ाद्ध रू 12 ़ 22 ़ ण्ण्ण् ़ ा2 झ ण्ण्ण् ;1द्ध3 अब हम सि( करेंगे कि च्;ा ़ 1द्ध सत्य है जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। हम पाते हैं, 12 ़ 22 ़ 32 ़ ण्ण्ण् ़ ा2 ़ ;ा ़ 1द्ध2 222 2 ा 2 त्र ;1 ़ 2 ़ ण्ण्ण् ़ ा द्ध़;ा ़1द्धझ 3 ़;ा ़1द्ध ख्;1द्धके प्रयोग से,3 1 त्र ख3 ़ 3ा2 ़ 6ा ़ 3,311 त्र ख्;ा ़ 1द्ध3 ़ 3ा ़ 2, झ ;ा ़ 1द्ध3 33इस प्रकार,च्;ा ़ 1द्ध सत्य हुआ जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। अतः गण्िातीय आगमन द्वारा द ∈ छ के लिए च्;दद्ध सत्य है। उदाहरण 8 प्रत्येक प्रावृफत संख्या द के लिए गण्िातीय आगमन सि(ांत द्वारा घातांकों का नियम ;ंइद्धद त्र ंदइद सि( कीजिए। हल मान लीजिए दिया कथन च्;दद्ध है। अथार्त् च्;दद्ध रू ;ंइद्धद त्र ंदइदण् हम ध्यान देते हैं कि द त्र 1 के लिए च्;दद्ध सत्य है, चूँकि ;ंइद्ध1 त्र ं1इ1ण् कल्पना कीजिए च्;ाद्ध सत्य है अथार्त् ;ंइद्धा त्र ंाइा ण्ण्ण् ;1द्ध हम सि( करेंगे कि च्;ा ़ 1द्ध सत्य है जब कि च्;ाद्ध सत्य है। अब, हम पाते हैं, ;ंइद्धा ़ 1 त्र ;ंइद्धा ;ंइद्ध त्र ;ंा इाद्ध ;ंइद्ध ख्;1द्ध से, त्र ;ंा ण् ं1द्ध ;इा ण् इ1द्ध त्र ंा़1 ण् इा़1 इसलिए, च्;ा ़ 1द्ध सत्य है जब कभी च्;ाद्ध सत्य है। अतः गण्िातीय आगमन सि(ांत द्वारा प्रत्येक प्रावृफत संख्या द के लिए च्;दद्ध सत्य है। प्रश्नावली 4ण्1 सभी द ∈ छ के लिए गण्िातीय आगमन सि(ांत के प्रयोग द्वारा सि( कीजिए किः ;3द −1द्ध 1ण् 1 ़ 3 ़ 32 ़ ण्ण्ण् ़ 3द दृ 1 त्र ण्2 ; 1द्ध ⎞2⎛ दद ़2ण् 13 ़ 23 ़ 33 ़ ३ ़द3 त्र ⎜⎟ ण्⎝ 2 ⎠ 11 12द1़़ ़ण्ण्ण़्त्र3ण् ण्;1़ 2द्ध ;1़ 2 ़ 3द्ध ;1़ 2 ़ 3 ़ ण्ण्ण्द द्ध;द ़1द्ध ; ़1द्ध; द ़2द्ध; द ़3द्ध दद4ण् 1ण्2ण्3 ़ 2ण्3ण्4 ़३़ द;द़1द्ध ;द़2द्ध त्र 4 द़1;2द −1द्ध3 ़35ण् 1ण्3 ़ 2ण्32 ़ 3ण्33 ़३़ दण्3द त्र 4 ⎡दद; ़1द्ध; द ़2द्ध ⎤6ण् 1ण्2 ़ 2ण्3 ़ 3ण्4 ़३़ द ;द़1द्ध त्र ⎢⎥⎣ 3 ⎦ दद;42 6द़− 1द्ध 7ण् 1ण्3 ़ 3ण्5 ़ 5ण्7 ़३़ ;2ददृ1द्ध ;2द़1द्ध त्र 8ण् 1ण्2 ़ 2ण्22 ़ 3ण्22 ़ ण्ण्ण़्दण्2द त्र ;ददृ1द्ध 2द ़ 1 ़ 2 3 111 11 9ण् ़़़़ ण्ण्ण् द त्र1− द2482 2 111 1 द़़ ़़ ण्ण्ण् त्र10ण् 2ण्5 5ण्8 8ण्11 ;3 द −1द्ध;3 द ़2द्ध ;6 द ़4द्ध 111 1 दद ़3द्ध ;़़ ण्ण्ण़़् त्र11ण् 1ण्2ण्3 2ण्3ण्4 3ण्4ण्5 दद; ़1द्ध; द ़2द्ध 4; द ़1द्ध; द ़2द्ध ; द −1द्ध ंत12ण् ं ़ ंत ़ ंत2 ़३़ ंतद.1 त्र त −1 ⎛ 3 ⎞⎛ 5 ⎞⎛ 7 ⎞⎛ ;2 द ़1द्ध ⎞ 21़ 1़ 1़ ण्ण्ण् 1़त्र;द ़1द्ध 13ण् ⎜ ⎟⎜ ⎟⎜ ⎟⎜ 2 ⎟⎝ 1 ⎠⎝ 4 ⎠⎝ 9 ⎠⎝ द ⎠ ⎛ 1⎞⎛ 1 ⎞⎛ 1 ⎞⎛ 1 ⎞1़ 1़ 1़ ण्ण्ण् 1़त्र;द ़1द्ध 14ण् ⎜⎟⎜ ⎟⎜⎟⎜ ⎟⎝ 1⎠⎝ 2 ⎠⎝ 3 ⎠⎝ द ⎠ ;2 −1द्ध;2 ददद ़1द्ध 15ण् 12 ़ 32 ़ 52 ़ ३़ ;2ददृ1द्ध2 त्र 3 111 1 द़़ ण्ण्ण् ़़ त्र16ण् 1ण्4 4ण्7 7ण्10 ;3द −2द्ध;3द ़1द्ध ;3द ़1द्ध 111 1 द़़ ण्ण्ण़़् त्र17ण् 3ण्5 5ण्7 7ण्9 ;2 द ़1द्ध;2 द ़3द्ध 3;2 द ़3द्ध 104 गण्िात 118ण् 1 ़ 2 ़ 3 ़३़ द ढ ;2द ़ 1द्ध2 8 19ण् द ;द ़ 1द्ध ;द ़ 5द्ध, संख्या 3 का एक गुणज है। 20ण् 102द दृ 1 ़ 1 संख्या 11 से भाज्य है। 21ण् ग2द दृ ल2दए ; ग ़ ल द्ध से भाज्य है। 22ण् 32द़2 दृ 8द दृ 9ए संख्या 8 से भाज्य है। 23ण् 41द दृ 14द, संख्या 27 का एक गुणज है।24ण् ;2द ़ 7द्ध ढ ;द ़ 3द्ध2 सारांश ऽ गण्िातीय चिंतन का एक मूल आधर निगमनात्मक विवेचन है। निगमन के विपरीत, आगमनिक विवेचन, भ्िान्न दशाओं के अध्ययन द्वारा एक अनुमानित कथन विकसित करने पर निभर्र करता है, जबतक कि हर एक दशा का प्रेक्षण न कर लिया गया हो। ऽ गण्िातीय आगमन सि(ांत एक ऐसा साध्न है जिसका प्रयोग विविध् प्रकार के गण्िातीय कथनों को सि( करने के लिए किया जा सकता है। ध्न पूणा±कों से संबंध्ित इस प्रकार के प्रत्येक कथन को च्;दद्ध मान लेते हैं, जिसकी सत्यता द त्र 1 के लिए जाँची जाती है। इसके बाद किसी ध्न पूणा±क ाए के लिए च्;ाद्ध की सत्यता को मान कर च् ;ा़1द्ध की सत्यता सि( करते हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अन्य संकल्पनाओं और विध्ियों के विपरीत गण्िातीय आगमन द्वारा उपपिा किसी व्यक्ित विशेष द्वारा किसी निश्िचत काल में किया गया आविष्कार नहीं है। यह कहा जाता है कि गण्िातीय आगमन सि(ांत च्ीलजींहवतमंदे को ज्ञात था। गण्िातीय आगमन सि(ांत के प्रारंभ करने का श्रेय प्रफांसीसी गण्िातज्ञ ठसंपेम च्ंेबंस को दिया जाता है। आगमन शब्द का प्रयोग अंग्रेश गण्िातज्ञ श्रवीद ॅंससपे ने किया था। बाद में इस सि(ांत का प्रयोग द्विपद प्रमेय की उपपिा प्राप्त करने में किया गया। क्म डवतहंद ने गण्िात के क्षेत्रा में विभ्िान्न विषयों पर बहुत योगदान किया है। वह पहले व्यक्ित थे, जिन्होंने इसे परिभाष्िात किया है और गण्िातीय आगमन नाम दिया है तथा गण्िातीय श्रेण्िायों के अभ्िासरण ज्ञात करने के लिए क्म डवतहंद का नियम विकसित किया। ळण् च्मंदव ने स्पष्टतया व्यक्त अभ्िाधरणाओं के प्रयोग द्वारा प्रावृफत संख्याओं के गुणों कीव्युत्पिा करने का उत्तरदायित्व लिया, जिन्हें अब पियानों के अभ्िागृहीत कहते हैं। पियानों के अभ्िागृहीत में से एक का पुनवर्फथन गण्िातीय आगमन का सि(ांत है।

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Ganit




अध्याय 4

गणितीय आगमन का सिद्धांत (Principle of Mathematical Induction)

"Analysis and natural philosophy owe their most important discoveries to this fruitful means, which is called induction. Newton was indebted to it for his theorem of the binomial and the principle of universal gravity- Laplace

4.1 भूमिका (Introduction)

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गणितीय चिंतन का एक आधारभूत सिद्धांत निगमनिक तर्क है। तर्कशास्त्र के अध्ययन से उद्धृत एक अनौपचारिक और निगमनिक तर्क का उदाहरण तीन कथनों में व्यक्त तर्क हैः-

(a) सुकरात एक मनुष्य है।

(b) सभी मनुष्य मरणशील हैं, इसलिए,

(c) सुकरात मरणशील है।

यदि कथन (a) और (b) सत्य हैं, तो (c) की सत्यता स्थापित है। इस सरल उदाहरण को गणितीय बनाने के लिए हम लिख सकते हैं।

(i) आठ दो से भाज्य है।

(ii) दो से भाज्य कोई संख्या सम संख्या है, इसलिए,

(iii) आठ एक सम संख्या है।

इस प्रकार संक्षेप में निगमन एक प्रक्रिया है जिसमें एक कथन सिद्ध करने को दिया जाता है, जिसे गणित में प्रायः एक अनुमानित कथन (conjecture) अथवा प्रमेय कहते हैं, तर्क संगत निगमन के चरण प्राप्त किए जाते हैं और एक उपपत्ति स्थापित की जा सकती है, अथवा नहीं की जा सकती है, अर्थात् निगमन व्यापक स्थिति से विशेष स्थिति प्राप्त करने का अनुप्रयोग है।

निगमन के विपरीत, आगमन तर्क प्रत्येक स्थिति के अध्ययन पर आधारित होता है तथा इसमें प्रत्येक एवं हर संभव स्थिति को ध्यान में रखते हुए घटनाओं के निरीक्षण द्वारा एक अनुमानित कथन विकसित किया जाता है। इसको गणित में प्रायः प्रयोग किया जाता है तथा वैज्ञानिक चिंतन, जहाँ आँकड़ों का संग्रह तथा विशलेषण मानक होता है, का यह मुख्य आधार है। इस प्रकार, सरल भाषा में हम कह सकते हैं कि आगमन शब्द का अर्थ विशिष्ट स्थितियों या तथ्यों से व्यापकीकरण करने से है।

बीजगणित में या गणित की अन्य शाखाओं में, कुछ एेसे परिणाम या कथन होते हैं जिन्हें एक धन पूर्णांक n के पदों में व्यक्त किया जाता है। एेसे कथनों को सिद्ध करने के लिए विशिष्ट तकनीक पर आधारित समुचित सिद्धांत है जो गणितीय आगमन का सिद्धांत (Principle of Mathematical Induction) कहलाता है।

4.2 प्रेरणा (Motivation)

गणित में, हम सम्पूर्ण आगमन का एक रूप जिसे गणितीय आगमन कहते हैं, प्रयुक्त करते हैं। गणितीय आगमन सिद्धांत के मूल को समझने के लिए, कल्पना कीजिए कि एक पतली आयताकार टाइलों का समूह एक सिरे पर रखा है, जैसे आकृति 4:1 में प्रदर्शित है।

आकृति 4:1

जब प्रथम टाइल को निर्दिष्ट दिशा में धक्का दिया जाता है तो सभी टाइलें गिर जाएँगी। पूर्णतः सुनिश्चित होने के लिए कि सभी टाइलें गिर जाएँगी, इतना जानना पर्याप्त है कि

(a) प्रथम टाइल गिरती है, और

(b) उस घटना में जब कोई टाइल गिरती है, उसकी उत्तरवर्त्ती अनिवार्यतः गिरती है।

यही गणितीय आगमन सिद्धांत का आधार है।

हम जानते हैं कि प्राकृत संख्याओं का समुच्चय N वास्तविक संख्याओं का विशेष क्रमित उपसमुच्चय है। वास्तव में, R का सबसे छोटा उपसमुच्चय N है, जिसमें निम्नलिखित गुण हैंः

एक समुच्चय S आगमनिक समुच्चय (Inductive set) कहलाता है यदि 1 S और  x + 1 S जब कभी x S. क्योंकि N, जो कि एक आगमनिक समुच्चय है, R का सबसे छोटा उपसमुच्चय है, परिणामतः R के किसी भी एेसे उपसमुच्चय में जो आगमनिक है, N अनिवार्य रूप से समाहित होता है।

दृष्टांत

मान लीजिए कि हम प्राकृत संख्याओं 1, 2, 3,...,n, के योग के लिए सूत्र प्राप्त करना चाहते हैं अर्थात् एक सूत्र जो कि n = 3 के लिए 1 + 2 + 3 का मान देता है, n = 4 के लिए 1 + 2 + 3 + 4 का मान देता है इत्यादि। और मान लीजिए कि हम किसी प्रकार से यह विश्वास करने के लिए प्रेरित होते हैं कि सूत्र 1 + 2 + 3+...+ n = सही है।

यह सूत्र वास्तव में कैसे सिद्ध किया जा सकता है? हम, निश्चित ही n के इच्छानुसार चाहे गए, धन पूर्णांक मानों के लिए कथन को सत्यापित कर सकते हैं, किंतु इस प्रक्रिया का मान n के सभी मानों के लिए सूत्र को सिद्ध नहीं कर सकती है। इसके लिए एक एेसी क्रिया शृंखला की आवश्यकता है, जिसका प्रभाव इस प्रकार का हो कि एक बार किसी धन पूर्णांक के लिए सूत्र के सिद्ध हो जाने के बाद आगामी धन पूर्णांकों के लिए सूत्र निरंतर अपने आप सिद्ध हो जाता है। इस प्रकार की क्रिया शृंखला को गणितीय आगमन विधि द्वारा उत्पन्न समझा जा सकता है।

4.3 गणितीय आगमन का सिद्धांत (The Principle of Mathematical Induction)

कल्पना कीजिए धन पूर्णांक P(n) से संबद्ध एक दिया कथन इस प्रकार है कि

(i) n = 1, के लिए कथन सत्य है अर्थात् P(1) सत्य है और

(ii) यदि n = k, एक प्राकृत संख्या, के लिए कथन सत्य है तो n = k + 1, के लिए भी कथन सत्य है अर्थात् P(k) की सत्यता का तात्पर्य है P (k + 1) की सत्यता।

अतः सभी प्राकृत संख्या n के लिए P(n) सत्य है।

गुण (i) मात्र तथ्य का कथन है। एेसी परिस्थितियाँ भी हो सकती हैं जब n 4 के सभी मानों के लिए कथन सत्य हो। इस स्थिति में, प्रथम चरण n = 4 से प्रारंभ होगा और हम परिणाम को n = 4 के लिए अर्थात् P(4) सत्यापित करेंगे।

गुण (ii) प्रतिबंधित गुणधर्म है। यह निश्चयपूर्वक नहीं कहता कि दिया कथन n = k के लिए सत्य है, परंतु केवल इतना कहता है कि यदि यह n = k के लिए कथन सत्य है, तो n = k + 1 के लिए भी सत्य है। इस प्रकार गुणधर्म की सत्यता सिद्ध करने के लिए केवल प्रतिबंधित साध्य (conditional proposition) को सिद्ध करते हैंः "यदि n = k के लिए कथन सत्य है तो यह n = k + 1 के लिए भी सत्य है"। इसे कभी-कभी आगमन का चरण (Induction step) कहा जाता है। इस आगमन चरण में ‘n = k के लिए कथन सत्य है’ की अभिधारणा (assumption) आगमन परिकल्पना (Induction hypothesis) कहलाती है।

उदाहरणार्थः गणित में बहुधा एक सूत्र खोजा जा सकता है जो किसी पैटर्न के अनुरूप होता है, जैसे

1 = 12 =1

4 = 22 = 1 + 3

9 = 32 = 1 + 3 + 5

16 = 42 = 1 + 3 + 5 + 7, इत्यादि।

ध्यान दीजिए कि प्रथम दो विषम प्राकृत संख्याओं का योग द्वितीय प्राकृत संख्या का वर्ग है, प्रथम तीन विषम प्राकृत संख्याओं का योग तृतीय प्राकृत संख्या का वर्ग है, इत्यादि। अतः इस पैटर्न से प्रतीत होता है कि

1 + 3 + 5 + 7 + ... + (2n – 1) = n2 , अर्थात्

प्रथम n विषम प्राकृत संख्याओं का योग n का वर्ग है।

मान लीजिए कि

P(n): 1 + 3 + 5 + 7 + ... + (2n – 1) = n2

हम सिद्ध करना चाहते हैं कि P(n), n के सभी मानों के लिए सत्य है। गणितीय आगमन के प्रयोग वाली उपपत्ति के प्रथम चरण में P(1) को सत्य सिद्ध करते हैं। इस चरण को मूल चरण कहते हैं। प्रत्यक्षतः

1 = 12 अर्थात् P(1) सत्य है।

अगला चरण आगमन चरण (Induction step) कहलाता है। यहाँ हम कल्पना करते हैं कि P (k) सत्य है जहाँ k ,एक प्राकृत संख्या है और हमें P (k + 1) की सत्यता सिद्ध करने की आवश्यकता है क्योंकि P (k) सत्य है, अतः

P (k) : 1 + 3 + 5 + 7 + ... + (2k – 1) = k2 ... (1)

P (k+1) पर विचार कीजिए

P (k + 1) : 1 + 3 + 5 + 7 + ... + (2k – 1) + {2(k +1) – 1} ... (2)

= k2 + (2k + 1) [(1) के प्रयोग से]

= (k + 1)2

इसलिए, P (k + 1) सत्य है और अब आगमनिक उपपत्ति पूर्ण हुई।

अतः सभी प्राकृत संख्याओं n के लिए P(n) सत्य है।

उदाहरण 1 सभी n 1 के लिए, सिद्ध कीजिए

12 + 22 + 32 + 42 +…+ n2 = .

हल मान लीजिए कि दिया कथन P(n) है, अर्थात्

P(n) : 12 + 22 + 32 + 42 +…+ n2 =

n = 1 के लिए, P(1): 1 = = जोकि सत्य है।

किसी धन पूूर्णांक k के लिए कल्पना कीजिए कि P(k) सत्य है, अर्थात्

12 + 22 + 32 + 42 +…+ k2 = ...(1)

अब हम सिद्ध करेंगे कि P(k + 1) भी सत्य है,

(12 +22 +32 +42 +…+k2 ) + (k + 1) 2

= [(1) के प्रयोग से]

=

=

=

इस प्रकार, P(k + 1) सत्य है जब कभी P (k) सत्य है।

अतः गणितीय आगमन सिद्धांत से सभी प्राकृत संख्याओं N के लिए कथन P(n) सत्य है।

उदहारण 2 सभी धन पूर्णांक n के लिए सिद्ध कीजिए कि 2n > n.

हल मान लीजिए कि P(n): 2n > n

जब n=1, 21>1. अतः P(1) सत्य है।

कल्पना कीजिए कि किसी धन पूर्णांक k के लिए P(k) सत्य है अर्थात्

P(k) : 2k > k ... (1)

अब हम सिद्ध करेंगे कि P(k +1) सत्य है जब कभी P(k) सत्य है।

(1) के दोनों पक्षों में 2 का गुणा करने पर हम

2. 2k > 2k प्राप्त करते हैं।

अर्थात् 2 k + 1 > 2k = k + k > k + 1

इसलिए, P(k + 1) सत्य है जब कभी P(k) सत्य है। अतः गणितीय आगमन द्वारा, प्रत्येक धन पूर्णाक n के लिए P(n) सत्य है।

उदाहरण 3 सभी पूर्णांक n 1 के लिए, सिद्ध कीजिएः

.

हल मान लीजिए कि दिया कथन P(n) है तथा हम

P(n): लिखते हैं

इस प्रकार P(1):, जोकि सत्य है। अतः P(n), n = 1 के लिए सत्य है।

कल्पना कीजिए कि पूर्णांक k के लिए P(k) सत्य है

अर्थात् ... (1)

हमें P(k + 1) को सत्य सिद्ध करना है जब P(k) सत्य है। इस हेतु निम्नलिखित पर विचार कीजिए।

= = [(1) के प्रयोग से]

= = = =

इस प्रकार कथन P(k + 1) सत्य है जब कभी P(k) सत्य है। अतः गणितीय आगमन सिद्धांत द्वारा सभी पूर्णांकों n 1 के लिए P(n) सत्य है।

उदाहरण 4 प्रत्येक धन पूर्णांक n के लिए, सिद्ध कीजिए कि 7n – 3n, 4 से विभाजित होता है।

हल मान लीजिए दिया कथन P(n) है अर्थात्

P(n) : 7n – 3n, 4 से विभाजित है।

हम पाते हैं

P(1): 71 – 31 = 4 जो कि 4 से विभाजित होता है। इस प्रकार P(n), n = 1 के लिए सत्य है।

कल्पना कीजिए कि एक धन पूर्णांक k के लिए P(k) सत्य है,

अर्थात, P(k) : 7k – 3k, 4 से विभाजित होता है।

अतः हम लिख सकते हैं 7k – 3k = 4d, जहाँ d N.

अब, हम सिद्ध करना चाहते हैं कि P(k + 1) सत्य है, जब कभी P(k ) सत्य है।

अब 7(k+1)– 3(k + 1) = 7(k + 1) – 7.3k + 7.3k – 3(k + 1)

= 7(7k – 3k) + (7 – 3)3k

= 7(4d) + (7 – 3)3k

= 7(4d) + 4.3k = 4(7d + 3k)

अंतिम पंक्ति से हम देखते हैं कि 7(k + 1) – 3(k + 1), 4 से विभाजित होता है। इस प्रकार, P(k + 1) सत्य है जब कभी P(k) सत्य है। इसलिए, गणितीय आगमन सिद्धांत से प्रत्येक धन पूर्णांक n के लिए कथन P(n) सत्य है।

उदाहरण 5 सभी प्राकृत संख्याओं n के लिए सिद्ध कीजिए कि (1 + x)n (1 + nx), जहाँ x > – 1.

हल मान लीजिए कि दिया कथन P(n) है

अर्थात् P(n): (1 + x)n (1 + nx), x > – 1 के लिए

जब n = 1, P(n) सत्य है क्योंकि ( 1+x) (1 + x) जो x > –1 के लिए सत्य है

कल्पना कीजिए कि

P(k): (1 + x)k (1 + kx), x > – 1 सत्य है। ... (1)

अब हम सिद्ध करना चाहते हैं कि P(k + 1) सत्य हैं, x > –1 के लिए, जब कभी P(k) सत्य है। ... (2)

सर्वसमिका (1 + x)k + 1 = (1 + x)k (1 + x) पर विचार कीजिए।

दिया है कि x > –1, इस प्रकार (1+x) > 0.

इसलिए (1 + x)k (1 + kx), का प्रयोग कर हम पाते हैं,

(1 + x) k + 1 (1 + kx)(1 + x)

अर्थात् (1 + x)k + 1 (1 + x + kx + kx2). ... (3)

यहाँ k एक प्राकृत संख्या है और x2 0 इस प्रकार kx2 0. इसलिए,

(1 + x + kx + kx2) (1 + x + kx),

और इस प्रकार, हम प्राप्त करते हैं

(1 + x)k + 1 (1 + x + kx)

अर्थात् (1 + x)k + 1 [1 + (1 + k)x]

इस प्रकार, कथन (2) सिद्ध होता है। अतः गणितीय आगमन सिद्धांत से सभी प्राकृत संख्याओं n के लिए P(n) सत्य है।

उदाहरण 6 सिद्ध कीजिए कि सभी n N के लिए 2.7n + 3.5n – 5, 24 से भाज्य है।

हल मान लीजिए कि कथन P(n) इस प्रकार परिभषित है कि

P(n) : 2.7n + 3.5n – 5, 24 से भाज्य है

जब n = 1 के लिए P(n) सत्य है। हम पाते हैं

2.7 + 3.5 – 5 = 24 जो कि 24 से भाज्य है।

कल्पना कीजिए कि P(k) सत्य है।

अर्थात् 2.7k + 3.5k – 5 = 24q, जबकि q ... (1)

अब हम सिद्ध करना चाहते हैं कि P(k + 1) सत्य है। जब कभी P(k) सत्य है।

हम पाते हैं,

2.7k+1 + 3.5k+1 – 5 = 2.7k . 71 + 3.5k . 51 – 5

= 7 [2.7k + 3.5k – 5 – 3.5k + 5] + 3.5k . 5 – 5

= 7 [24q – 3.5k + 5] + 15.5k –5

= 7 × 24q – 21.5k + 35 + 15.5k – 5

= 7 × 24q – 6.5k + 30

= 7 × 24q – 6 (5k – 5)

= 7 × 24q – 6 (4p) [(5k – 5), 4 का गुणज है (क्यों?), p N

= 7 × 24q – 24p

= 24 (7q p)

= 24 × r, r = 7q p, कोई प्राकृत संख्या है। ... (2)

व्यंजक (1) का दायाँ पक्ष 24 से भाज्य है।

इस प्रकार, P(k + 1) सत्य है, जब कभी P(k) सत्य है। अतः गणितीय आगमन सिद्धांत से, सभी
n N के लिए P(n) सत्य है।

उदाहरण 7 सिद्ध कीजिए किः

12 + 22 + ... + n2 > , n N

हल मान लीजिए कि दिया कथन P(n) है,

अर्थात् , P(n) : 12 + 22 + ... + n2 > , n N

हम ध्यान देते हैं कि n = 1 के लिए, P(n) सत्य है क्योंकि P(1) :

कल्पना कीजिए कि P(k) सत्य है,

अर्थात् , P(k) : 12 + 22 + ... + k2 > ... (1)

अब हम सिद्ध करेंगे कि P(k + 1) सत्य है जब कभी P(k) सत्य है।

हम पाते हैं, 12 + 22 + 32 + ... + k2 + (k + 1)2

= [(1)के प्रयोग से]

= [k3 + 3k2 + 6k + 3]

= [(k + 1)3 + 3k + 2] > (k + 1)3

इस प्रकार, P(k + 1) सत्य हुआ जब कभी P(k) सत्य है। अतः गणितीय आगमन द्वारा n N के लिए P(n) सत्य है।

उदाहरण 8 प्रत्येक प्राकृत संख्या n के लिए गणितीय आगमन सिद्धांत द्वारा घातांकों का नियम
(ab)n = anbn सिद्ध कीजिए।

हल मान लीजिए दिया कथन P(n) है।

अर्थात् P(n) : (ab)n = anbn.

हम ध्यान देते हैं कि n = 1 के लिए P(n) सत्य है, चूँकि (ab)1 = a1b1.

कल्पना कीजिए P(k) सत्य है

अर्थात् (ab)k = akbk ... (1)

हम सिद्ध करेंगे कि P(k + 1) सत्य है जब कि P(k) सत्य है।

अब, हम पाते हैं,

(ab)k + 1 = (ab)k (ab)

= (ak bk) (ab) [(1) से]

= (ak . a1) (bk . b1)

= ak+1 . bk+1

इसलिए, P(k + 1) सत्य है जब कभी P(k) सत्य है। अतः गणितीय आगमन सिद्धांत द्वारा प्रत्येक प्राकृत संख्या n के लिए P(n) सत्य है।

प्रश्नावली 4.1

सभी n N के लिए गणितीय आगमन सिद्धांत के प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए किः

1: 1 + 3 + 32 + ... + 3n – 1 = .

2: 13 + 23 + 33 + … +n3 = .

3: .

4: 1.2.3 + 2.3.4 +…+ n(n+1) (n+2) =

5: 1.3 + 2.32 + 3.33 +…+ n.3n =

6: 1.2 + 2.3 + 3.4 +…+ n (n+1) =

7: 1.3 + 3.5 + 5.7 +…+ (2n–1) (2n+1) =

8: 1.2 + 2.22 + 3.22 + ...+n.2n = (n–1) 2n + 1 + 2

9:

10:

11:

12: a + ar + ar2 +…+ arn-1 =

13:

14:

15: 12 + 32 + 52 + …+ (2n–1)2 =

16:

17:

18: 1 + 2 + 3 +…+ n < (2n + 1)2

19: n (n + 1) (n + 5), संख्या 3 का एक गुणज है।

20: 102n – 1 + 1 संख्या 11 से भाज्य है।

21: x2n y2n, ( x + y ) से भाज्य है।

22: 32n+2 – 8n – 9, संख्या 8 से भाज्य है।

23: 41n – 14n, संख्या 27 का एक गुणज है।

24: (2n + 7) < (n + 3)2

सारांशा

  •  गणितीय चिंतन का एक मूल आधार निगमनात्मक विवेचन है। निगमन के विपरीत, आगमनिक विवेचन, भिन्न दशाओं के अध्ययन द्वारा एक अनुमानित कथन विकसित करने पर निर्भर करता है, जबतक कि हर एक दशा का प्रेक्षण न कर लिया गया हो।
  •  गणितीय आगमन सिद्धांत एक एेसा साधन है जिसका प्रयोग विविध प्रकार के गणितीय कथनों को सिद्ध करने के लिए किया जा सकता है। धन पूर्णांकों से संबंधित इस प्रकार के प्रत्येक कथन कोP(n) मान लेते हैं, जिसकी सत्यता n = 1 के लिए जाँची जाती है। इसके बाद किसी धन पूर्णांक k,के लिए P(k) की सत्यता को मान कर P (k+1) की सत्यता सिद्ध करते हैं।

एेतिहासिक पृष्ठभूमि

अन्य संकल्पनाओं और विधियों के विपरीत गणितीय आगमन द्वारा उपपत्ति किसी व्यक्ति विशेष द्वारा किसी निश्चित काल में किया गया आविष्कार नहीं है। यह कहा जाता है कि गणितीय आगमन सिद्धांत Phythagoreans को ज्ञात था। गणितीय आगमन सिद्धांत के प्रारंभ करने का श्रेय फ्रांसीसी गणितज्ञ Blaise Pascal को दिया जाता है। आगमन शब्द का प्रयोग अंग्रेज़ी  गणितज्ञ John Wallis ने किया था। बाद में इस सिद्धांत का प्रयोग द्विपद प्रमेय की उपपत्ति प्राप्त करने में किया गया। De Morgan ने गणित के क्षेत्र में विभिन्न विषयों पर बहुत योगदान किया है। वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने इसे परिभाषित किया है और गणितीय आगमन नाम दिया है तथा गणितीय श्रेणियों के अभिसरण ज्ञात करने के लिए De Morgan का नियम विकसित किया।

G. Peano ने स्पष्टतया व्यक्त अभिधारणाओं के प्रयोग द्वारा प्राकृत संख्याओं के गुणों की व्युत्पत्ति करने का उत्तरदायित्व लिया, जिन्हें अब पियानों के अभिगृहीत कहते हैं। पियानों के अभिगृहीत में से एक का पुनर्कथन गणितीय आगमन का सिद्धांत है।




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