™। उंजीमउंजपबपंद ादवूे ीवू जव ेवसअम ं चतवइसमउए ीम बंद दवज ेवसअम पजण् दृ डप्स्छम् ऽ 3ण्1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध शब्द ‘टिªगोनोमेट्री’की व्युत्पिा ग्रीक शब्दों ‘टिªगोन’ तथा ‘मेट्रोन’ से हुइर् है तथा इसका अथर् ‘त्रिाभुज की भुजाओं को मापना’ होता है। इस विषय का विकास मूलतः त्रिाभुजों से संबंध्ित ज्यामितीय समस्याओं को हल करने के लिए किया गया था। इसका अध्ययन समुद्री यात्राओं के कप्तानों, सवेर्यरों, जिन्हें नए भू - भागों का चित्रा तैयार करना होता था तथा अभ्िायंताओं आदि के द्वारा किया गया। वतर्मान में इसका उपयोग बहुत सारे क्षेत्रों जैसे विज्ञान, भूकंप शास्त्रा, विद्युत परिपथ ;सविर्फटद्ध के डिजाइन तैयार करने, अणु की अवस्था का वणर्न करने, समुद्र में आनेवाले ज्वार की ऊँचाइर् के विषय में पूवार्नुमान लगाने में, सांगीतिक ।तलं ठींजज;476.550 ठण्ब्ण्द्धलय ;टोनद्ध का विश्लेषण करने तथा अन्य दूसरे क्षेत्रों में होता है। पिछली कक्षाओं में हमने न्यून कोणों के त्रिाकोणमितीय अनुपात के विषय में अध्ययन किया है, जिसे समकोणीय त्रिाभुजों की भुजाओं के अनुपात के रूप में बताया गया है। हमने त्रिाकोणमितीय सवर्समिकाओं तथा उनके त्रिाकोणमितीय अनुपातों के अनुप्रयोगों को ऊँचाइर् तथा दूरी के प्रश्नों को हल करने में किया है। इस अध्याय में, हम त्रिाकोणमितीय अनुपातों के संबंधें का त्रिाकोणमितीय पफलनों के रूप में व्यापकीकरण करेंगे तथा उनके गुणध्मो± का अध्ययन करेंगे। 3ण्2 कोण ;।दहसमेद्ध एक कोण वह माप हेै जो एक किरण के उसके प्रारंभ्िाक बिंदु के परितः घूमने पर बनता है। किरण के घूणर्न की मूल स्िथति को प्रारंभ्िाक भुजा तथा घूणर्न के अंतिम स्िथति को कोण की अंतिम भुजा कहते हैं। घूणर्न बिंदु को शीषर् कहते हैं। यदि घूणर्न वामावत्तर् है तो कोण ध्नात्मक तथा यदि घूणर्न आवृफति 3.1 की वह मात्रा है जो भुजा को प्रारंभ्िाक स्िथति से अंतिम स्िथति तक घुमाने पर प्राप्त होता है। कोण को मापने के लिए अनेक इकाइयाँ हैं। कोण की परिभाषा इसकी इकाइर् का संकेत देती है, उदाहरण के लिए प्रारंभ्िाक रेखा की स्िथति से एक पूणर् घुमाव को कोंण की एक इकाइर् लिया जा सकता है जैसा, आवृफति 3.2 में आवृफति 3.2दशार्या गया है। यह सवर्दा बड़े कोणों के लिए सुविधजनक है। उदाहरणतः एक घूमते हुए पहिये के घुमाव में बनाए गए कोण के विषय में कह सकते हैं कि यह 15 परिक्रमा प्रति सेकंड है। हम कोण के मापने की दो अन्य इकाइयों के विषय में बताएँगे जिनका सामान्यतः प्रयोग किया जाता है, ये डिग्री माप तथा रेडियन माप हैं। 3ण्2ण्1 डिग्री माप ;क्महतमम उमंेनतमद्ध यदि प्रारंभ्िाक भुजा से अंतिम भुजा का घुमाव एक पूणर् 1परिक्रमण का ; द्धवाँ भाग हो तो हम कोण का माप एक डिग्री कहते हैं, इसे 1° से लिखते हैं।360 एक डिग्री को मिनट में तथा एक मिनट को सेकंड में विभाजित किया जाता है। एक डिग्री का साठवाँ भाग एक मिनट कहलाता है, इसे 1′ से लिखते हैं तथा एक मिनट का साठवाँ भाग एक सेकंड कहलाता है, इसे 1′′ से लिखते हैं। अथार्त् 1° त्र 60′ए 1′ त्र 60″ वुफछ कोण जिनका माप 360°, 180°, 270°, 420°, दृ 30°, दृ 420° है उन्हें आवृफति 3.3 में दशार्या गया है। आवृफति 3.3 3ण्2ण्2 रेडियन माप ;त्ंकपंद उमंेनतमद्ध कोण को मापने के लिए एक दूसरी इकाइर् भी है, जिसे रेडियन माप कहते हैं। इकाइर् वृत्त ;वृत्त की त्रिाज्या एक इकाइर् होद्ध के वेंफद्र पर एक इकाइर् लंबाइर् के चाप द्वारा बने कोण को एक रेडियन माप कहते हैं। आवृफति 3.4 ;पद्ध - ;पअद्ध में, व्। प्रारंभ्िाक भुजा है तथा व्ठ अंतिम भुजा है। आवृफतियों में कोण दिखाए गए हैं जिनके माप 1 रेडियन, दृ1 रेडियन, 11 रेडियन तथा - 11 रेडियन हैं।22;पपद्ध;पद्ध ;पपपद्ध आवृफति 3.4 ;पद्ध दृ ;पअद्ध हम जानते हैं कि इकाइर् त्रिाज्या के वृत्त की परिध्ि 2π होती है। अतः प्रारंभ्िाक भुजा की एक पूणर् परिक्रमा वेंफद्र पर 2π रेडियन का कोण अंतरित करती है। यह सवर्विदित है कि त त्रिाज्या वाले एक वृत्त में, त लंबाइर् का चाप वेंफद्र पर एक रेडियन का कोण अंतरित करता है। हम जानते हैं कि वृत्त के समान चाप वेंफद्र पर समान कोण अंतरित करते हैं। चूंकि त त्रिाज्या के वृत्त में त लंबाइर् का चाप वेंफद्र पर एक रेडियन का कोण अंतरित करता है, इसलिए स लंबाइर् का चाप वेंफद्र पर स रेडियन का कोण अंतरित करेगा। अतः यदि एक वृत्त, जिसकी त्रिाज्यातस त है, चाप की लंबाइर् स तथा वेंफद्र पर अंतरित कोण θ रेडियन है, तो हम पाते हैं कि θ त्र त या स त्र त θण् 3ण्2ण्3 रेडियन तथा वास्तविक संख्याओं के मध्य संबंध् ;त्मसंजपवद इमजूममद तंकपंद ंदक तमंस दनउइमतेद्ध माना कि इकाइर् वृत्त वफा वेंफद्र, व् पर हैं तथा वृत्त पर वफोइर् बिंदु । है। माना वफोण की प्रारंभ्िावफ भुजा व्। है, तो वृत्त के चाप की लंबाइर् से वृत्त के वेंफद्र पर चाप द्वारा अंतरित कोण की माप रेडियन में प्राप्त होती है। मान लीजिए वृत्त के बिंदु । पर स्पशर् रेखा च्।फ है। माना बिंदु । वास्तविक संख्या शून्य प्रदश्िार्त करता है, ।च् ध्नात्मक वास्तविक संख्या दशार्ता है तथा ।फ ट्टणात्मक वास्तविक संख्या दशार्ता है ;आवृफिा 3.5द्ध। यदि हम वृत्त की ओर रेखा ।च् को घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाने पर तथा रेखा ।फ को घड़ी की दिशा में घुमाएँ तो प्रत्येक वास्तविक संख्या के संगत रेडियन माप होगा तथा विलोमतः। इस प्रकार रेडियन माप तथा वास्तविक संख्याओं को एक तथा समान मान सकते हैं। 3ण्2ण्4 डिग्री तथा रेडियन के मध्य संबंध् ;त्मसंजपवद इमजूममद कमहतमम ंदक तंकपंदद्ध क्योंकि वृत्त, वेंफद्र पर एक कोण बनाता है जिसकी माप 2π रेडियन है तथा यह 360° डिग्री माप है, इसलिए 2π रेडियन = 360° या π रेडियन = 180° उपयुर्क्त संबंध् हमें रेडियन माप को डिग्री माप तथा डिग्री माप को रेडियन माप में व्यक्त करते हैं। 22π का निकटतम मान का उपयोग करके, हम पाते हैं कि7180° 1 रेडियन = = 57°16′ निकटतमπ πपुनः 1° = रेडियन = 0ण्01746 रेडियन ;निकटतमद्ध180कुछ सामान्य कोणों के डिग्री माप तथा रेडियन माप के संबंध् निम्नलिख्िात सारणी में दिए गए हैंः डिग्री 30° 45° 60° 90° 180° 270° 360° रेडियन ￀ 6 ￀ 4 π3 ￀ 2 π 3￀ 2 2π सांकेतिक प्रचलन चूँकि कोणों की माप या तो डिग्री में या रेडियन में होती है, अतः प्रचलित परिपाटी के अनुसार जब हम कोण θ° लिखते हैं, हम समझते हैं कि कोण का माप θ डिग्री है तथा जब हम कोण β लिखते हैं, हम समझते हैं कि कोण का माप β रेडियन हैै। ध्यान दीजिए जब कोण को रेडियन माप में व्यक्त करते हैं, तो प्रायः रेडियन लिखना छोड़ देते π त्र180 ° आरै 4 ππहैं अथार्त् त्र 45 ° को इस विचार को ध्यान में रखकर लिखते हैं कि π तथा की4 π माप रेडियन है। अतः हम कह सकते हैं कि 180 × डिग्री मापरेडियन माप त्र 180 डिग्री माप त्र × रेडियन मापπउदाहरण 1 40° 20′ को रेडियन माप में बदलिए। हल हम जानते हैं कि 180° त्र π रेडियन 1211π121πइसलिए, 40° 20′ त्र 40 डिग्री त्र रेडियनरेडियन× त्र 3 180 3 540 121πइसलिए 40° 20′ त्र 540 रेडियन उदाहरण 2 6 रेडियन को डिग्री माप में बदलिए। हल हम जानते हैं कि π रेडियन त्र 180° 180 1080 ×7इसलिए 6 रेडियन× 6 डिग्रीडिग्रीत्र त्र 22π7 760 × त्र 343 डिग्री त्र 343° ़ मिनट ख्क्योंकि 1° त्र 60′,1111 2 त्र 343° ़ 38′ ़ मिनट ख्क्योंकि 1′ त्र 60″,11 त्र 343° ़ 38′ ़ 10ण्9″ त्र 343°38′ 11″ निकटतम इसलिए 6 रेडियन त्र 343° 38′ 11″ निकटतम उदाहरण 3 उस वृत्त की त्रिाज्या ज्ञात कीजिए जिसमें 60° का केंद्रीय कोण परिध्ि पर 37.4 सेमी लंबाइर् का चाप काटता है ;π त्र22 का प्रयोग करेंद्ध।7 60ππ हल यहाँ स त्र 37.4 सेमी तथा θ त्र 60° त्र रेडियन त्र 180 3 अतः त त्र θ स , से हम पाते हैं 37ण्4×3 37ण्4×3×7 त त्रत्र त्र 35.7 सेमीπ 22उदाहरण 4 एक घड़ी में मिनट की सुइर् 1ण्5 सेमी लंबी है। इसकी नोक 40 मिनट में कितनी दूर जा सकती हैं ;π त्र 3.14 का प्रयोग करेंद्ध? हल 60 मिनट में घड़ी की मिनट वाली सुइर् एक परिक्रमण पूणर् करती है, अतः 40 मिनट में मिनट 2की सुइर् एक परिक्रमण का 3 भाग पूरा करती है। इसलिए θ त्र 2 × 360° या 4π रेडियन33 अतः तय की गइर् वांछित दूरी 4πस त्र त θ त्र 1ण्5 × सेमी त्र 2π सेमी त्र 2 × 3ण्14 सेमी त्र 6ण्28 सेमी 3 उदाहरण 5 यदि दो वृत्तों के चापों की लंबाइर् समान हो और वे अपने केंद्र पर क्रमशः 65° तथा 110° का कोण बनाते हैं, तो उनकी त्रिाज्याओं का अनुपात ज्ञात कीजिए। हल माना दो वृत्तों की त्रिाज्याएँ क्रमशः त1 तथा त2 हैं तो π 13πθ1 त्र 65° त्र ×65 त्र रेडियन180 36 π 22πतथा θ त्र 110° त्र ×110 त्र रेडियन2180 36 माना कि प्रत्येक चाप की लंबाइर् स है, तो स त्र त1θ1 त्र त2θ2ए जिससे 13π 22π त1 22 × त1 त्र × त2 ए अथार्त््, त्र 36 36 त2 13 इसलिए त रू तत्र 22 रू 13ण्1 2 प्रश्नावली 3ण्1 1ण् निम्नलिख्िात डिग्री माप के संगत रेडियन माप ज्ञात कीजिएः ;पद्ध 25° ;पपद्ध दृ 47°30′ ;पपपद्ध 240° ;पअद्ध 520° 2ण् निम्नलिख्िात रेडियन माप के संगत डिग्री माप ज्ञात कीजिए ;π त्र 22 का प्रयोग करेंद्धः7 11 5π 7π;पद्ध ;पपद्ध दृ 4 ;पपपद्ध ;पअद्ध16 36 3ण् एक पहिया एक मिनट में 360° परिक्रमण करता है तो एक सेकंड में कितने रेडियन माप का कोण बनाएगा? 4ण् एक वृत्त, जिसकी त्रिाज्या 100 सेमी है, की 22 सेमी लंबाइर् की चाप वृत्त के वेंफद्र पर कितने 22डिग्री माप का कोण बनाएगी ;π त्र 7 का प्रयोग कीजिएद्ध। 5ण् एक वृत्त, जिसका व्यास 40 सेमी है, की एक जीवा 20 सेमी लंबाइर् की है तो इसके संगत छोटे चाप की लंबाइर् ज्ञात कीजिए। 6ण् यदि दो वृत्तों के समान लंबाइर् वाले चाप अपने वेंफद्रों पर क्रमशः 60° तथा 75° के कोण बनाते हों, तो उनकी त्रिाज्याओं का अनुपात ज्ञात कीजिए। 7ण् 75 सेमी लंबाइर् वाले एक दोलायमान दोलक का एक सिरे से दूसरे सिरे तक दोलन करने से जो कोण बनता है, उसका माप रेडियन में ज्ञात कीजिए, जबकि उसके नोक द्वारा बनाए गए चाप की लंबाइर् निम्नलिख्िात हैंः ;पद्ध 10 सेमी ;पपद्ध 15 सेमी ;पपपद्ध 21 सेमी 3ण्3 त्रिाकोणमितीय पफलन ;ज्तपहवदवउमजतपब थ्नदबजपवदद्ध पूवर् कक्षाओं में, हमने न्यून कोणों के त्रिाकोणमितीय अनुपातों को समकोण त्रिाभुज की भुजाओं के रूप में अध्ययन किया है। अब हम किसी कोण के त्रिाकोणमितीय अनुपात की परिभाषा को रेडियन माप के पदों में तथा त्रिाकोणमितीय पफलन के रूप में अध्ययन करेंगे। मान लीजिए कि एक इकाइर् वृत्त, जिसका वेंफद्र निदेर्शांक अक्षों का मूल बिंदु हो। माना कि च् ;ंए इद्ध वृत्त पर कोइर् बिंदु है तथा कोण ।व्च् त्र ग रेडियन अथार्त् चाप की लंबाइर् ।च् त्र ग ;आवृफति 3.6द्ध है। हम परिभाष्िात करते हैंः बवे ग त्र ं तथा ेपद ग त्र इ चूँकि Δव्डच् समकोण त्रिाभुज है, हम पाते हैं, π व्ड2 ़ डच्2 त्र व्च्2 या ं2 ़ इ2 त्र 1 इस प्रकार इकाइर् वृत्त पर प्रत्येक बिंदु के लिए, हम पाते हैं कि ं2 ़ इ2 त्र 1 या बवे2 ग ़ ेपद2 ग त्र 1 क्योंकि एक पूणर् परिक्रमा ;घूणर्नद्ध द्वारा वृत्त के केंद्र पर 2π रेडियन का कोण अंतरित होता है, 2ए ∠।व्ब् त्र π तथा ∠।व्क् त्र 3ππइसलिए ∠।व्ठ त्र । के प्रांत गुणज वाले सभी कोणों2 2को चतुथा±शीय कोण या वृत्तपादीय कोण ;ुनंकतंदजंस ंदहसमेद्ध कहते हैं। बिंदुओं ।ए ठए ब् तथा क् के निदेर्शांक क्रमशः ;1ए 0द्धए ;0ए 1द्धए ;दृ1ए 0द्ध तथा ;0ए दृ1द्ध हैं, इसलिए चतुथा±शीय कोणों के लिए हम पाते हैं, बवे 0°त्र 1 ेपद 0°त्र 0 ππत्र 0 ेपद त्र 1बवे 2 2 बवेπ त्र − 1 ेपदπ त्र 0 3π3त्र 0 ेपदπत्र दृ1बवे 2 2 बवे 2π त्र 1 ेपद 2π त्र 0 अब, यदि हम बिंदु च् से एक पूणर् परिक्रमा लेते हैं, तो हम उसी बिंदु च् पर पहुँचते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि यदि गए 2π के पूणार्ंक गुणज में बढ़ते ;या घटतेद्ध हैं, तो त्रिाकोणमितीय पफलनों के मानों में कोइर् परिवतर्न नहीं होता है। इस प्रकार ेपद ;2दπ ़ गद्ध त्र ेपद गए द ∈ र् बवे ;2दπ ़ गद्ध त्र बवे गए द ∈ र् पुनः ेपद ग त्र 0ए यदि ग त्र 0ए ± πए ± 2π ए ± 3πए ण्ण्ण्अथार्त् गए π का पूणार्ंक गुणज है। 5π 2 π3ππ तथा बवे ग त्र 0ए यदि ग त्र ± ए ± ए ± ए ण्ण्ण् अथार्त् बवे ग त्र 0एजब गए का विषम गुणज2 22 π π है। इस प्रकार ेपद ग त्र 0 से प्राप्त होता है कि ग त्र दπए जहाँ द कोइर् पूणार्ंक है। बवे ग त्र 0 से प्राप्त होता है कि ग त्र ;2द ़ 1द्ध π 2ए जहाँ द कोइर् पूणार्ंक है। अब हम अन्य त्रिाकोणमितीय पफलनों को ेपदम तथा बवेपदम के पदों में परिभाष्िात करते हैंः 1 बवेमब ग त्र ए ग ≠ दπए जहाँ द कोइर् पूणार्ंक है।ेपद ग 2ए जहाँ द कोइर् पूणार्ंक है। 2ए जहाँ द कोइर् पूणार्ंक है। 1 ेमब ग त्रए ग ≠ ;2द ़ 1द्धबवे ग ेपद ग जंद ग त्र ए ग ≠ ;2द ़1द्धबवे ग बवे ग ए ग ≠ द πए जहाँ द कोइर् पूणार्ंक है।बवज ग त्र ेपद ग हम सभी वास्तविक ग के लिए देखते हैं कि ेपद2 ग ़ बवे2 ग त्र 1 इस प्रकार 1 ़ जंद2 ग त्र ेमब2 ग ;क्यों?द्ध 1 ़ बवज2 ग त्र बवेमब2 ग ;क्यों?द्ध पूवर् कक्षाओं में, हम 0°ए 30°ए 45°ए 60° तथा 90° के त्रिाकोणमितीय अनुपातों के मानों की चचार्कर चुके हैं। इन कोणों के त्रिाकोणमितीय पफलनों के मान वही हैं जो पिछली कक्षाओं में पढ़ चुके त्रिाकोणमितीय अनुपातों के हैं। इस प्रकार, हम निम्नलिख्िात सारणी पाते हैंः 0° ￀ 6 ￀ 4 ￀ 3 ￀ 2 π 3￀ 2 2π ेपद 0 1 2 1 2 3 2 1 0 दृ 1 0 बवे 1 3 2 1 2 1 2 0 दृ 1 0 1 जंद 0 1 3 1 3 अपरिभाष्िात 0 अपरिभाष्िात 0 बवेमब गए ेमब ग तथा बवज ग का मान क्रमशः ेपद गए बवे ग तथा जंद ग के मान से उल्टा ;विलोमद्ध है। 3.3.1 त्रिाकोणमितीय पफलनों के चिÉ ;ैपहदे व िजतपहवदवउमजतपब निदबजपवदेद्ध माना कि इकाइर् वृत्त पर च् ;ंए इद्ध कोइर् बिंदु हैं, जिसका केंद्र मूल बिंदु हैं, तथा ∠।व्च् त्र गए यदि ∠।व्फ त्र दृ गए तो बिंदु फ के निदेर्शांक ;ंए दृ इद्ध होंगे ;आवृफति 3.7द्ध। इसलिए बवे ;दृ गद्ध त्र बवे ग तथा ेपद ;दृ गद्ध त्र दृ ेपद ग चूँकि इकाइर् वृत्त के प्रत्येक बिंदु च् ;ंए इद्ध के लिए दृ 1 ≤ ं ≤ 1 तथा दृ 1 ≤ इ ≤ 1ए अतः, हम ग के सभी मानों के लिए दृ 1 ≤ बवे ग ≤ 1 तथा दृ1 ≤ ेपद ग ≤ 1ए पाते हैं। पिछली कक्षाओं से हमको ज्ञात है कि प्रथम πचतुथा±श ;0 ढ ग ढ द्ध में ं तथा इ दोनों2 πध्नात्मक हैं, दूसरे चतुथा±श ;ढ ग ढπद्ध में23ं )णात्मक तथा इ ध्नात्मक हैं, तीसरे चतुथा±श ;π ढ ग ढ πद्ध में ं तथा इ दोनों )णात्मक हैं, तथा2 3चतुथर् चतुथा±श ;π ढ ग ढ 2πद्ध में ं ध्नात्मक तथा इ )णात्मक है। इसलिए 0 ढ ग ढ π के लिए2πेपद ग ध्नात्मक तथा π ढ ग ढ 2π के लिए )णात्मक होता है। इसी प्रकार, 0 ढ ग ढ 2 के लिए π3π3π बवे ग ध्नात्मक, ढ ग ढ22 के लिए )णात्मक तथा ढ ग ढ 2π के लिए ध्नात्मक होता2 है। इसी प्रकार, हम अन्य त्रिाकोणमितीय पफलनों के चिÉ विभ्िान्न चतुथा±शों में ज्ञात कर सकते हैं। इसके लिए हमारे पास निम्नलिख्िात सारणी हैः प् प्प् प्प्प् प्ट ेपद ग ़ ़ दृ दृ बवे ग ़ दृ दृ ़ जंद ग ़ दृ ़ दृ बवेमब ग ़ ़ दृ दृ ेमब ग ़ दृ दृ ़ बवज ग ़ दृ ़ दृ π 3ण्3ण्2 त्रिाकोणमितीय पफलनों का प्रांत तथा परिसर ;क्वउंपद ंदक तंदहम व िजतपहवदवउमजतपब निदबजपवदेद्ध ेपदम तथा बवेपदम पफलनों की परिभाषा से, हम यह पाते हैं कि वे सभी वास्तविक संख्याओं के लिए परिभाष्िात हैं। पुनः, हम यह भी पाते हैं कि प्रत्येक वास्तविक संख्या ग के लिए, दृ 1 ≤ ेपद ग ≤ 1 तथा दृ 1 ≤ बवे ग ≤ 1 अतः ल त्र ेपद ग तथा ल त्र बवे ग का प्रांत सभी वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है तथा परिसर अंतराल ख्दृ1ए 1,ए अथार्त्, दृ 1 ≤ ल ≤ 1 है। 1 चूँकि, बवेमब ग त्र ए ल त्र बवेमब ग का प्रांत, समुच्चय क्ष् ग रू ग ∈ त् तथाेपद ग ग ≠ द πए द ∈ र्द्व तथा परिसर समुच्चय क्ष्ल रू ल ∈ त्ए ल ≥ 1 या ल ≤ दृ 1द्व है। इसी प्रकार, ल त्र ेमबग 2ए द ∈ र्द्व तथा, परिसर, समुच्चय का प्रांत, समुच्चय क्ष्ग रू ग ∈ त् तथा ग ≠ ;2द ़ 1द्ध π क्ष्ल रू ल ∈ त्ए ल ≤ दृ 1 या ल ≥ 1द्व है। ल त्र जंद ग का प्रांत, समुच्चय क्ष्ग रू ग ∈ त् तथा 2ए द ∈ र्द्व तथा परिसर सभी वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है। ल त्र बवज ग का प्रांत,ग ≠ ;2द ़ 1द्ध हम देखते हैं कि प्रथम चतुथा±श में, जब गए 0 सेπ 2 की ओर बढ़ता है, तो ेपद ग भी0 से 1 की ओर बढ़ता है, दूसरे चतुथा±श में जब गए π 2 से π की ओर बढ़ता है तो ेपद गए 1 से 0 की ओर घटता 3है। तीसरे चतुथा±श में जब गए π सेπ 2 की ओर बढ़ता है तो ेपद गए 0 से दृ1 की ओर घटता है तथा अंत में कोण 3π 2 से 2π की ओर बढ़ता है तो ेपद गए दृ1 से 0 की ओर बढ़ता जाता है। इसी प्रकार हम अन्य त्रिाकोणमितीय पफलनों के विषय में विचार कर सकते हैं। वस्तुतः हमारे पास निम्नलिख्िात सारणी हैः प् चतुथा±श प्प् चतुथा±श प्प्प् चतुथा±श प्ट चतुथा±श ेपद 0 से 1 की ओर बढ़ता है 1 से 0 की ओर घटता है 0 से - 1 की ओर घटता है दृ1 से 0 की ओर बढ़ता है बवे 1 से 0 की ओर घटता है 0 से - 1 की ओर घटता है - 1 से 0 की ओर बढ़ता है 0 से 1 की ओर बढ़ता है जंद 0 से ∞ की ओर बढ़ता है दृ∞ से 0 की ओर बढ़ता है 0 से ∞ की ओर बढ़ता है दृ∞ से 0 की ओर बढ़ता है बवज ∞ से 0 की ओर घटता है 0 से दृ∞ की ओर घटता है ∞ से 0 की ओर घटता है 0 से दृ∞ की ओर घटता है ेमब 1 से ∞ की ओर बढ़ता है दृ∞ से दृ1की ओर बढ़ता है दृ1 से दृ∞ की ओर घटता है ∞ से 1 की ओर घटता है बवेमब ∞ से 1 की ओर घटता है 1 से ∞ की ओर बढ़ता है दृ∞ से दृ1की ओर बढ़ता है दृ1 से दृ∞ की ओर घटता है टिप्पणी उपयुर्क्त सारणी में, यह कथन कि अंतराल 0 ढ ग ढ π 2 में जंद ग का मान 0 से ∞ ;अनंतद्ध तक बढ़ता है का अथर् है कि जैसे - जैसे ग का मानπ 2की ओर बढ़ता है वैसे - वैसे जंद ग का मान बहुत अध्िक हो जाता है। इसी प्रकार, जब हम यह कह सकते हैं कि चतुथर् चतुथा±श में बवेमब ग का 3मान दृ1 से दृ ∞ ;)णात्मक अनंतद्ध तक में घटता है तो इसका अथर् है कि जब ग ∈ ;π 2 ए 2πद्ध तब जैसे - जैसे गए2π की ओर अग्रसर होता है, बवेमब ग बहुत अध्िक )णात्मक मान लेता है। साधरणतःचिÉ ∞ तथा दृ ∞ पफलनों तथा चरों के विशेष प्रकार के व्यवहार को बताते हैं। हमने देखा कि ेपद ग तथा बवे ग के मानों का अंतराल 2π के पश्चात् पुनरावृिा होती है। जैसे, बवेमब ग तथा ेमब ग के मानों की भी अंतराल 2π के बाद पुनरावृिा होती है। हम अगले अनुच्छेद में जंद ;π ़ गद्ध त्र जंद ग देखते हैं। जैसे, जंद ग के मानों में अंतराल π के पश्चात् पुनरावृिा होती है, क्योंकि बवज गए जंद ग का पूरक है, इसके मानो में भी अंतराल π के पश्चात् पुनरावृिा होती है। त्रिाकोणमितीय पफलनों में इस ज्ञान ;गुणध्मर्द्ध तथा व्यवहार का उपयोग करने पर, हम पफलनों का आलेख खींच सकते हैं। इन पफलनों का आलेख नीचे दिए गए हैंः आवृफति 3.8 आवृफति 3.9 उदाहरण 6 यदि बवे ग त्र दृ 3 हो और ग तृतीय चतुथा±श में स्िथत है, तो अन्य पाँच त्रिाकोणमितीय 5 पफलनों के मानों को ज्ञात कीजिए। 53हल क्योंकि बवे ग त्र दृ ए हम पाते हैं कि ेमब ग त्र − 35अब ेपद2 ग ़ बवे2 ग त्र 1 या ेपद2 ग त्र 1 दृ बवे2 ग 9 16या ेपद2 ग त्र 1 दृ त्र 2525 4अतः ेपद ग त्र ± 5 चूँकि ग तृतीय चतुथा±श में है, तो ेपद ग का मान )णात्मक होगा। इसलिए 4ेपद ग त्र दृ 5 इससे यह भी प्राप्त होता है कि 5 बवेमब ग त्र दृ 4 पुनः, हम पाते हैं ेपद ग 4 बवे ग 3 जंद ग त्र त्र तथा बवज ग त्र त्र बवे ग3 ेपद ग4 उदाहरण 7 यदि बवज ग त्र दृ 125 हो औरग द्वितीय चतुथा±श में स्िथत हैं, तो अन्य पाँच त्रिाकोणमितीय पफलनों को ज्ञात कीजिए। 5 12 हल क्योंकि बवज गत्र दृ ए हम पाते हैं जंद ग त्र दृ12 5 144 169 अब ेमब2 ग त्र 1 ़ जंद2 ग त्र 1 ़ त्र 2525 13अतः ेमब ग त्र± 5 चूँकि ग द्वितीय चतुथा±श में स्िथत है, ेमब ग का मान )णात्मक होगा। इसलिए 13 ेमब ग त्रदृ 5 इससे यह भी प्राप्त होता है कि 5 बवे ग त्र− 13 पुनः हम पाते हैं 12 512ेपद ग त्र जंद ग बवे ग त्र ;दृ द्ध × ;दृ द्ध त्र5 13 13 1 13तथा बवेमब ग त्रत्र ेपद ग 12 31πउदाहरण 8 ेपद 3 का मान ज्ञात कीजिए। हल हम जानते हैं कि ेपद ग के मानों में अंतराल 2π के पश्चात् पुनरावृिा होती है। इसलिए 31π ππेपद त्र ेपद ;10π ़ द्ध त्र ेपद त्र ण्3332 उदाहरण 9 बवे ;दृ1710°द्ध का मान ज्ञात कीजिए। हल हम जानते हैं कि बवे ग के मानों में अंतराल 2π या360° के पश्चात् पुनरावृिा होती है। इसलिए बवे ;दृ1710°द्ध त्र बवे ;दृ1710° ़ 5 × 360°द्ध त्र बवे ;दृ1710° ़ 1800°द्ध त्र बवे 90° त्र 0 प्रश्नावली 3.2 निम्नलिख्िात प्रश्नों में पाँच अन्य त्रिाकोणमितीय पफलनों का मान ज्ञात कीजिएः 1 1ण् बवे ग त्र दृ 2ए ग तीसरे चतुथा±श में स्िथत है। 2ण् ेपद ग त्र 5ए ग दूसरे चतुथा±श में स्िथत है। 3ण् बवज ग त्र ए ग तृतीय चतुथा±श में स्िथत है। 4ण् ेमब ग त्र 135 ए ग चतुथर् चतुथा±श में स्िथत है। 5ण् जंद ग त्र दृ 12ए ग दूसरे चतुथा±श में स्िथत है। 3 34 5 प्रश्न संख्या 6 से 10 के मान ज्ञात कीजिएः 6ण् ेपद 765° 7ण् बवेमब ;दृ 1410°द्ध 19π 11π8ण् जंद 9ण् ेपद ;दृ द्ध33 15π10ण् बवज ;दृ द्ध4 3ण्4 दो कोणों के योग और अंतर का त्रिाकोणमितीय पफलन ;ज्तपहवदवउमजतपब थ्नदबजपवदे व िैनउ ंदक क्पमिितमदबम व िजूव ।दहसमेद्ध इस भाग में हम दो संख्याओं ;कोणोंद्ध के योग एवं अंतर के लिए त्रिाकोणमितीय पफलनों तथा उनसे संबंध्ित व्यंजकों को व्युत्पन्न करेंगे। इस संबंध् में इन मूल परिणामों को हम त्रिाकोणमितीय सवर्समिकाएँ कहेंगे। हम देखते हैं कि 1ण् ेपद ;दृ गद्ध त्र दृ ेपद ग 2ण् बवे ;दृ गद्ध त्र बवे ग अब हम वुफछ और परिणाम सि( करेंगेः 3ण् बवे ;ग ़ लद्ध त्र बवे ग बवे ल दृ ेपद ग ेपद ल इकाइर् वृत्त पर विचार कीजिए, जिसका केंद्र मूल बिंदु पर हो। माना कि कोण च्व्च्1ए ग तथा4कोण च्व्च्2ए ल हैं तो कोण च्व्च्ए ;ग ़ लद्ध होगा। पुनः माना कोण च्व्च्ए ;दृ लद्ध हैं। अतः च्ए च्2ए142431आवृफति 3.14 च्तथा च्के निदेर्शांक च्;बवे गए ेपद गद्धए च् ख्बवे ;ग ़ लद्धए ेपद ;ग ़ लद्ध,ए च्ख्बवे ;दृ लद्धए ेपद34123 ;दृ लद्ध, और च् ;1ए 0द्ध होंगे ;आवृफति 3.14द्ध।4त्रिाभुजों च्1व्च्3 तथा च्2व्च्4 पर विचार कीजिए। वे सवा±गासम हैं ;क्योंद्ध। इसलिए च्1च्3 और च्2च्4 बराबर हैं। दूरी सूत्रा का उपयोग करने पर च्1च्32 त्र ख्बवे ग दृ बवे ;दृ लद्ध,2 ़ ख्ेपद ग दृ ेपद;दृलद्ध,2 त्र ;बवे ग दृ बवे लद्ध2 ़ ;ेपद ग ़ ेपद लद्ध2 त्र बवे2ग ़ बवे2 ल दृ 2 बवे ग बवे ल ़ ेपद2 ग ़ ेपद2 ल ़ 2ेपद ग ेपद ल त्र 2 दृ 2 ;बवे ग बवे ल दृ ेपद ग ेपद लद्ध;क्योंघ्द्ध पुनः च्च्2 त्र ख्1 दृ बवे ;ग ़ लद्ध, 2 ़ ख्0 दृ ेपद ;ग ़ लद्ध,2 24 त्र 1 दृ 2बवे ;ग ़ लद्ध ़ बवे2 ;ग ़ लद्ध ़ ेपद2 ;ग ़ लद्ध त्र 2 दृ 2 बवे ;ग ़ लद्ध क्योंकि च्च्त्र च्च्4ए हम पाते हैंऋ च्च्2 त्र च्च्2 13 21324 इसलिएए 2 दृ2 ;बवे ग बवे ल दृ ेपद ग ेपद लद्ध त्र 2 दृ 2 बवे ;ग ़ लद्ध अतः बवे ;ग ़ लद्ध त्र बवे ग बवे ल दृ ेपद ग ेपद ल 4ण् बवे ;गदृ लद्ध त्र बवे ग बवे ल ़ ेपद ग ेपद ल सवर्समिका 3 में ल के स्थान पर दृ ल रखने पर बवे ;ग ़ ;दृ लद्धद्ध त्र बवे ग बवे ;दृ लद्ध दृ ेपद ग ेपद ;दृ लद्ध या बवे ;ग दृ लद्ध त्र बवे ग बवे ल ़ ेपद ग ेपद ल π5ण् बवे; दृ ग द्ध त्र ेपद ग2 πसवर्समिका 4 में ग के स्थान पर तथा ल के स्थान पर ग रखने पर हम पाते हैं2 πππ− ग द्ध त्र बवेबवे ;बवे ग ़ ेपद ेपद ग त्र ेपद ग2 22π6ण् ेपद ; दृ ग द्ध त्र बवे ग2 सवर्समिका 5 का उपयोग करने पर हम पाते हैं ⎡ππ⎤⎛ ⎞π− − ग− ग द्ध त्र बवेेपद ;⎜⎝ ⎟⎠⎢⎣ ⎥ त्र बवे गण्⎦2 22 7ण् ेपद ;ग ़ लद्ध त्र ेपद ग बवे ल ़ बवे ग ेपद ल हम जानते हैं किππ 2 ⎛ ;गलद्ध−़ ⎞⎛ ⎟ त्र बवे ⎜⎠⎝ ⎞; − गद्ध −ेपद ;ग ़ लद्ध त्र बवे ल⎜⎝ ⎟⎠2 π− ग द्ध बवे ल ़ ेपद ;π 2 − गद्धत्र बवे ;ेपद ल2 त्र ेपद ग बवे ल ़ बवे ग ेपद ल 8ण् ेपद ;ग दृ लद्ध त्र ेपद ग बवे ल दृ बवे ग ेपद ल यदि हम सवर्समिका 7 में ल के स्थान पर दृ ल रखें तो उपरोक्त परिणाम पाते हैं। 9ण् ग और ल के उपयुर्क्त मानों को सवर्समिकाओं 3, 4, 7 और 8 में रखने पर हम निम्नलिख्िात परिणाम निकाल सकते हैंः π πबवे ;़ गद्ध त्र दृ ेपद ग ेपद ;़ गद्ध त्र बवे ग2 2बवे ;πदृ गद्ध त्र दृ बवे ग ेपद ;πदृ गद्ध त्र ेपद ग बवे ;π़ गद्ध त्र दृ बवे ग ेपद ;π़ गद्ध त्र दृ ेपद ग बवे ;2πदृ गद्ध त्र बवे ग ेपद ;2πदृ गद्ध त्र दृ ेपद ग इसी प्रकार के संगत परिणाम जंद गए बवज गए ेमब ग एवं बवेमब ग के लिए ेपद ग और बवे ग के पफलनों के परिणामों से आसानी से निकाले जा सकते हैं। π10ण् यदि गए ल और ;ग ़ लद्ध में से कोइर् का विषम गुणांक नहीं हैं तो,2 जंद ग ़ जंद लजंद ;ग ़ लद्ध त्र 1दृ जंद ग जंद ल क्योंकि गए ल तथा ;ग ़ लद्ध में से कोइर्π 2 का विषम गुणांक नहीं हैं, इसलिए बवे गए बवे ल तथा बवे ;ग ़ लद्ध शून्य नहीं हैं। अबेपद;ग ़ लद्ध ेपद गबवे ल ़ बवे गेपद लजंद ;ग ़ लद्धत्र त्र बवे;ग ़लद्ध बवे ग बवे ल − ेपद गेपद ल अंश और हर में बवे ग बवे लए से विभाजित करने पर हम पाते हैं।ेपद ग बवे ल बवे ग ेपद ल़ बवे ग बवे ल बवे ग बवे लजंद ;ग ़ लद्धत्र बवे ग बवे ल ेपद ग ेपद ल− बवे ग बवे ल बवे ग बवे ल जंद ग ़ जंद ल त्र 1दृ जंद ग जंद ल जंद ग दृ जंद ल11ण् जंद ; ग दृ लद्धत्र 1़ जंद ग जंद ल यदि सवर्समिका 10 में ल के स्थान पर दृ ल रखने पर, हम पाते हैं जंद ;ग दृ लद्ध त्र जंद ख्ग ़ ;दृ लद्ध, जंद ग ़ जंद ;−लद्ध जंद ग − जंद लत्र त्र 1जंद ग जंद ;−लद्ध ़ ग जंद ल− 1जंद 12ण् यदि गए ल तथा ;ग ़ लद्ध में से कोइर् भी कोण πए का गुणांक नहीं हैं, तोबवज ग बवज ल दृ1 बवज ; ग ़ लद्ध त्र बवज ल ़बवज ग क्योंकि गए ल तथा ;ग ़ लद्ध कोणों में से कोइर् भी πए का गुणांक नहीं हैं, इसलिए ेपद गए ेपद ल तथा ेपद ;ग ़ लद्ध शून्य नहीं हैं। अब बवे ; ग ़ लद्ध बवे ग बवे ल दृ ेपद ग ेपद लबवज ; ग ़ लद्धत्र त्र ेपद ; ग ़ लद्ध ेपद ग बवे ल ़ बवे ग ेपद ल अंश और हर को ेपद ग ेपद लए से विभाजित करने पर, हम पाते हैं बवज ग बवज ल दृ1बवज ;ग ़ लद्धत्र बवज ल ़ बवज ग बवज ग बवज ल ़1 13ण् बवज ;ग दृ लद्धत्र बवज ल दृ बवज ग यदि सवर्समिका 12 में ल के स्थान पर दृल रखते हैं तो हम उपरोक्त परिणाम पाते हैं। 1दृ जंद 2 ग14ण् बवे 2ग त्र बवे2ग दृ ेपद2 ग त्र 2 बवे2 ग दृ 1 त्र 1 दृ 2 ेपद2 ग त्र21़ जंद ग हम जानते हैं कि बवे ;ग ़ लद्ध त्र बवे ग बवे ल दृ ेपद ग ेपद ल ल के स्थान पर गए रखें तो, हम पाते हैंबवे 2ग त्र बवे2ग दृ ेपद2 ग त्र बवे2 ग दृ ;1 दृ बवे2 गद्ध त्र 2 बवे2ग दृ 1 पुनः बवे 2ग त्र बवे2 ग दृ ेपद2 ग त्र 1 दृ ेपद2 ग दृ ेपद2 ग त्र 1 दृ 2 ेपद2 गण् बवे 2 ग −ेपद 2 गअतः हम पाते हैं बवे 2ग त्र बवे2 ग दृ ेपद 2 ग त्र बवे2 ग ़ेपद 2 ग अंश और हर को बवे2 ग से विभाजित करने पर, हम पाते हैं 1दृ जंद 2 गबवे 2ग त्र21़ जंद ग 2जंद ग 15ण् ेपद 2ग त्र 2 ेपदग बवे ग त्र 21़ जंद ग हम जानते हैं कि ेपद ;ग ़ लद्ध त्र ेपद ग बवे ल ़ बवे ग ेपद ल ल के स्थान पर ग रखने पर, हम पाते हैंः ेपद 2ग त्र 2 ेपद ग बवे गण् 2ेपद गबवे ग पुनः ेपद 2ग त्र 2 2बवे ग ़ेपद ग प्रत्येक पद को बवे2 ग से विभाजित करने पर, हम पाते हैंः 2जंद ग ेपद 2ग त्र 2़1जंद ग 2जंद ग 16ण् जंद 2ग त्र21दृ जंद ग हम जानते हैं कि जंद ग ़ जंद लजंद ;ग ़ लद्ध त्र 1जंद ग जंद दृल 2 जंद ग ल के स्थान पर ग रखने पर, हम पाते हैं, जंद 2 ग त्र 1जंद 2 ग− 17ण् ेपद 3ग त्र 3 ेपद ग दृ 4 ेपद3 ग हम पाते हैं, ेपद 3ग त्र ेपद ;2ग ़ गद्ध त्र ेपद 2ग बवे ग ़ बवे 2ग ेपद ग त्र 2 ेपद ग बवे ग बवे ग ़ ;1 दृ 2ेपद2 गद्ध ेपद ग त्र 2 ेपद ग ;1 दृ ेपद2 गद्ध ़ ेपद ग दृ 2 ेपद3 ग त्र 2 ेपद ग दृ 2 ेपद3 ग ़ ेपद ग दृ 2 ेपद3 ग त्र 3 ेपद ग दृ 4 ेपद3 ग 18ण् बवे 3ग त्र 4 बवे3 ग दृ 3 बवे ग हम पाते हैं,बवे 3ग त्र बवे ;2ग ़गद्ध त्र बवे 2ग बवे ग दृ ेपद 2ग ेपद ग त्र ;2बवे2 ग दृ 1द्ध बवे ग दृ 2ेपद ग बवे ग ेपद ग त्र ;2बवे2 ग दृ 1द्ध बवे ग दृ 2बवे ग ;1 दृ बवे2 गद्ध त्र 2बवे3 ग दृ बवे ग दृ 2बवे ग ़ 2 बवे3 ग त्र 4बवे3 ग दृ 3बवे ग 3 जंद ग दृ जंद 3 गजंद 3 ग त्र19ण् 21दृ 3जंद ग हम पाते हैं, जंद 3ग त्र जंद ;2ग ़ गद्ध 2जंद ग ़ जंद ग दृजंद 2 ग ़ जंद ग 1जंद 2 ग त्रत्र 1 दृ जंद 2 ग जंद ग 2जंद गण् जंद ग1 दृ 1जंद 2 गदृ 2जंद ग ़ जंद गदृ जंद 3 ग 3 जंद गदृ जंद 3 ग त्रत्र 22 21 दृ जंद गदृ 2जंद ग 1 दृ 3जंद ग गल ग दृ़ ल20ण् ;पद्ध बवे ग ़ बवे ल त्र 2बवे बवे 22 गल ग दृ़ ल;पपद्ध बवे ग दृ बवे ल त्र दृ 2ेपद ेपद 22 गल ग दृ़ ल;पपपद्ध ेपद ग ़ ेपद ल त्र 2ेपद बवे 22 गल ग दृ़ ल;पअद्ध ेपद ग दृ ेपद ल त्र 2बवे 2ेपद 2 हम जानते हैं कि बवे ;ग ़ लद्ध त्र बवे ग बवे ल दृ ेपद ग ेपद ल ण्ण्ण् ;1द्ध और बवे ;ग दृ लद्ध त्र बवे ग बवे ल ़ ेपद ग ेपद ल ण्ण्ण् ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध को जोड़ने एवं घटाने पर, हम पाते हैं, बवे ;ग ़ लद्ध ़ बवे;ग दृ लद्ध त्र 2 बवे ग बवे ल ण्ण्ण् ;3द्ध और बवे ;ग ़ लद्ध दृ बवे ;ग दृ लद्ध त्र दृ 2 ेपद ग ेपद ल ण्ण्ण् ;4द्ध और भी ेपद ;ग ़ लद्ध त्र ेपद ग बवे ल ़ बवे ग ेपद ल ण्ण्ण् ;5द्ध और ेपद ;ग दृ लद्ध त्र ेपद ग बवे ल दृ बवे ग ेपद ल ण्ण्ण् ;6द्ध ;5द्ध और ;6द्ध को जोड़ने एवं घटाने पर, हम पाते हैं, ेपद ;ग ़ लद्ध ़ ेपद ;ग दृ लद्ध त्र 2 ेपद ग बवे ल ण्ण्ण् ;7द्ध ेपद ;ग ़ लद्ध दृ ेपद ;ग दृ लद्ध त्र 2बवे ग ेपद ल ण्ण्ण् ;8द्ध माना कि ग ़ ल त्र θ तथा ग दृ ल त्र φ, इसलिए ⎛ θ़φ⎞ ⎛ θ−φ ⎞ ग त्र तथा ल त्र⎜⎟ ⎜⎟⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠ ;3द्धए ;4द्धए ;7द्ध तथा ;8द्ध में ग और ल के मान रखने पर, हम पाते हैं, ⎛ θ़φ⎞ ⎛ θ−φ ⎞ बवे θ ़ बवे φ त्र 2 बवे ⎜⎟बवे ⎜⎟⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠ ⎛ θ़φ⎞ ⎛ θदृ φ⎞ बवे θ दृ बवे φ त्र दृ 2 ेपद ेपद⎜ ⎟⎜ ⎟⎝ 2 ⎠ ⎝2⎠ ⎛ θ़φ⎞ ⎛ θ−φ ⎞ेपद θ ़ ेपद φ त्र 2 ेपद ⎜⎟बवे ⎜⎟⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠ ⎛ θ़φ⎞ ⎛ θ−φ ⎞ेपद θ दृ ेपद φ त्र 2 बवे ⎜⎟ेपद ⎜⎟⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠ क्योंकि θ तथा φ को कोइर् वास्तविक संख्या मान सकते हैं। हम θ के स्थान पर ग तथा φ के स्थान पर ल रखने पर, हम पाते हैंः ग ़ लग − लग ़ लग − लबवे ग ़ बवे ल त्र 2 बवे बवे य बवे ग दृ बवे ल त्र दृ 2 ेपद ेपद ए22 22 ग ़ लग − लग ़ लग − लेपद ग ़ ेपद ल त्र 2 ेपद बवे य ेपद ग दृ ेपद ल त्र 2 बवे ेपद 22 22 सवर्समिका 20 से हम निम्न परिणाम पाते हैंः 21ण् ;पद्ध 2 बवे ग बवे ल त्र बवे ;ग ़ लद्ध ़ बवे ;ग दृ लद्ध ;पपद्ध दृ2 ेपद ग ेपद ल त्र बवे ;ग ़ लद्ध दृ बवे ;ग दृ लद्ध ;पपपद्ध 2 ेपद ग बवे ल त्र ेपद ;ग ़ लद्ध ़ ेपद ;ग दृ लद्ध ;पअद्ध 2 बवे ग ेपद ल त्र ेपद ;ग ़ लद्ध दृ ेपद ;ग दृ लद्ध उदाहरण 10 सि( कीजिएः ππ 5ππ3ेपद ेमब −4ेपद बवज त्र1 63 64 ππ 5ππ हल बायाँ पक्ष त्र 3ेपद ेमब −4ेपद बवज 63 64 1 ⎛π⎞ πत्र3 × × 2 दृ 4 ेपद ⎜π− ⎟ × 1 त्र 3 दृ 4 ेपद2⎝ 6 ⎠ 6 त्र3 दृ 4 × 12 त्र 1 त्र दायाँ पक्ष उदाहरण 11 ेपद 15° का मान ज्ञात कीजिए। हल ेपद 15° त्र ेपद ;45° दृ 30°द्ध त्र ेपद 45° बवे 30° दृ बवे 45° ेपद 30° 1 31 1 3 −1 त्र ×− ×त्र 22 2222 13πउदाहरण 12 जंद 12 का मान ज्ञात कीजिए। 13π ⎛π⎞ π ⎛ππ⎞जंद हल जंद त्र जंद ⎜π़ ⎟ त्र जंद त्र ⎜−⎟12 ⎝ 12 ⎠12 ⎝ 46 ⎠ ππ 1 जंद − जंद 1− −4 6 331 त्रत्र 2 − 3त्र त्र ππ 1 31़1जंद जंद ़़ 146 3 उदाहरण 13 सि( कीजिएः ेपद ; ग ़ लद्ध जंद ग ़ जंद लत्र ण्ेपद ; ग − लद्ध जंद ग − जंद ल हल हम पाते हैं, ेपद ; ग ़ लद्ध ेपद गबवे ल ़बवे गेपद लबायाँ पक्ष त्रत्र ेपद ; ग − लद्ध ेपद गबवे ल −बवे गेपद ल अंश और हर को बवे ग बवे ल से विभाजित करने पर, हम पाते हैं, ेपद ; ग ़ लद्ध जंद ग ़ जंद लत्रबायाँ पक्ष त्र त्र दायाँ पक्षेपद ; ग − लद्ध जंद ग − जंद ल उदाहरण 14 दिखाइएजंद 3 ग जंद 2 ग जंद ग त्र जंद 3ग दृ जंद 2 ग दृ जंद ग हल हम जानते हैं कि 3ग त्र 2ग ़ ग इसलिए जंद 3ग त्र जंद ;2ग ़ गद्ध जंद 2 ग ़ जंद गजंद3 ग त्रया 1दृजंद 2 ग जंद ग या जंद 3ग दृ जंद 3ग जंद 2ग जंद ग त्र जंद 2ग ़ जंद ग या जंद 3ग दृ जंद 2ग दृ जंद ग त्र जंद 3ग जंद 2ग जंद ग या जंद 3ग जंद 2ग जंद ग त्र जंद 3ग दृ जंद 2ग दृ जंद ग उदाहरण 15 सि( कीजिएः ⎛π⎞ ⎛π⎞ बवे ़ ग ़बवे − ग त्र 2 बवे ग⎜⎟⎜⎟⎝ 4 ⎠⎝ 4 ⎠ हल सवर्समिका 20;पद्ध का उपयोग करने पर, हम पाते हैं, ⎛π⎞ ⎛π⎞बायाँ पक्ष त्र बवे ⎜़ ग ⎟़ बवे ⎜− ग ⎟⎝ 4 ⎠⎝ 4 ⎠ ⎛π π⎞⎛π π⎞ ग −़़ ग ़ गदृ ; − गद्ध⎜⎟⎜ ⎟44 44त्र 2बवे⎜⎟बवे⎜⎟22⎜⎟⎜ ⎟ ⎝⎠⎝ ⎠ π1 त्र 2 बवे बवे ग त्र 2× बवे ग त्र 2 बवे ग त्र दायाँ पक्ष42बवे 7ग ़ बवे 5ग त्र बवज गउदाहरण 16 सि( कीजिए ेपद 7ग दृ ेपद 5ग हल सवर्समिकाओं 20;पद्ध तथा 20;पअद्ध का उपयोग करने पर, हम पाते हैं, 7ग ़ 5ग 7ग − 5ग2बवे बवे बवे गबायाँ पक्ष त्र2 2 त्र त्रबवज ग त्र दायाँ पक्ष7ग ़ 5ग 7ग −5ग ेपद ग2बवे ेपद22 ेपद5 ग −2ेपद3ग ़ ेपद गउदाहरण 17 सि( कीजिए त्र जंद ग बवे5ग −बवे ग हल हम पाते हैं, ेपद 5 ग − 2ेपद3ग ़ ेपद ग ेपद 5 ग ़ेपद ग − 2ेपद3गबायाँ पक्ष त्र त्र बवे5ग −बवे ग बवे5ग −बवे ग 2ेपद3 ग बवे2 ग − 2ेपद3 ग ेपद 3 ग ;बवे 2 ग −1द्ध त्र दृ त्र ग ेपद3 ेपद2 गदृ2ेपद3 ेपद2 ग ग 1बवे 2 ग 2ेपद 2− ग त्रत्र त्र जंद ग त्र दायाँ पक्षेपद 2 ग 2ेपद गबवे ग प्रश्नावली 3ण्3 सि( कीजिएः π ππ 1 π 7π 2 π 31ण् ेपद2 ़ बवे2 दृ जंद2 त्र दृ 2ण् 2ेपद2 ़ बवेमब2 बवे त्र 6 342 6 632 2 π 5π 2 π 23π 2 π 2 π3ण् बवज ़बवेमब ़3जंद त्र 6 4ण् 2ेपद ़ 2बवे ़ 2ेमब त्र10 666 443 5ण् मान ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ेपद 75° ;पपद्ध जंद 15° निम्नलिख्िात को सि( कीजिएः ⎛π⎞⎛π⎞ ⎛π⎞⎛π⎞ बवे − ग बवे − ल − ेपद − ग ेपद − ल त्र ेपद ; ग ़ लद्ध6ण् ⎜⎟⎜ ⎟⎜⎟⎜ ⎟⎝ 4 ⎠⎝ 4 ⎠⎝ 4 ⎠⎝ 4 ⎠ ⎛ π ⎞जंद ़ ग 2⎜⎟⎝ 4 ⎠⎛1जंद ़ ग ⎞ त्र7ण् ⎜⎟⎛ π ⎞ 1जंद − ग⎝ ⎠जंद − ग⎜⎟⎝ 4 ⎠ बवे ; π़ गद्ध बवे ; − गद्ध2त्र बवज ग8ण् ⎛π ⎞ेपद ; π− गद्ध बवे ⎜़ ग ⎟⎝ 2 ⎠ ⎛ 3π ⎞ ⎡⎛ 3π ⎞⎤9ण् बवे ़ ग ⎟ बवे ;2π़ गद्धबवज − ग ⎟़ बवज ;2π़ गद्ध त्र 1⎜ ⎢⎜⎥⎝ 2 ⎠ ⎣⎝ 2 ⎠⎦ 10ण् ेपद ;द ़ 1द्धग ेपद ;द ़ 2द्धग ़ बवे ;द ़ 1द्धग बवे ;द ़ 2द्धग त्र बवे ग ⎛ 3π⎞ ⎛ 3π⎞ बवे ़ ग − बवे − ग त्र− 2 ेपद ग11ण् ⎜ ⎟⎜⎟⎝ 4 ⎠⎝ 4 ⎠ 12ण् ेपद2 6ग दृ ेपद2 4ग त्र ेपद 2ग ेपद 10ग 13ण् बवे2 2ग दृ बवे2 6ग त्र ेपद 4ग ेपद 8ग 14ण् ेपद2 ग ़ 2 ेपद 4ग ़ ेपद 6ग त्र 4 बवे2 ग ेपद 4ग 15ण् बवज 4ग ;ेपद 5ग ़ ेपद 3गद्ध त्र बवज ग ;ेपद 5ग दृ ेपद 3गद्ध बवे9ग − बवे 5ग ेपद 2ग ेपद5ग ़ ेपद 3ग 16ण् त्र− 17ण् त्र जंद 4ग ेपद17ग − ेपद 3ग बवे 10ग बवे5ग ़ बवे 3ग ेपद ग − ेपद लग − ल ेपद ग ़ ेपद 3ग 18ण् त्र जंद 19ण् त्र जंद 2ग बवे ग ़ बवे ल 2 बवे ग ़ बवे 3ग ेपद ग − ेपद 3ग बवे 4ग ़ बवे 3ग ़ बवे 2ग 20ण् 22 त्र 2 ेपद ग 21ण् त्र बवज 3ग ेपद ग − बवे ग ेपद 4ग ़ ेपद 3ग ़ ेपद 2ग 22ण् बवज ग बवज 2ग दृ बवज 2ग बवज 3ग दृ बवज 3ग बवज ग त्र 1 4जंद ग ;1 − जंद 2 गद्ध23ण् जंद 4 ग त्र 24 24ण् बवे 4ग त्र 1 दृ 8ेपद2 ग बवे2 ग 16 जंद ग ़ जंद − ग 25ण् बवे 6ग त्र 32 बवे6 ग दृ 48बवे4 ग ़ 18 बवे2 ग दृ 1 3ण्5 त्रिाकोणमितीय समीकरण ;ज्तपहवदवउमजतपब म्ुनंजपवदेद्ध एक चर राश्िा में त्रिाकोणमितीय पफलनों वाले समीकरण को त्रिाकोणमितीय समीकरण कहते हैं। इस अनुच्छेद में, हम ऐसे समीकरणों के हल ज्ञात करेंगे। हम पहले पढ़ चुके हैं कि ेपद ग तथा बवे ग के मानों में 2π अंतराल के पश्चात् पुनरावृिा होती है तथा जंद ग के मानों में π अंतराल के पश्चात् पुनरावृिा होती है। त्रिाकोणमितीय समीकरण के ऐसे हल जहाँ 0 ≤ ग ढ 2π होता है, मुख्य हल ;चतपदबपचंस ेवसनजपवदद्ध कहलाते हैं। पूणार्ंक ष्दष् से युक्त व्यंजक जो किसी त्रिाकोणमितीय समीकरण के सभी हल व्यक्त करता है, उसे व्यापक हल ;हमदमतंस ेवसनजपवदद्ध कहते हैं। हम पूणार्ंकों के समुच्चय को ष्र्ष् से प्रदश्िार्त करेंगे। निम्नलिख्िात उदाहरण त्रिाकोणमितीय समीकरणों को हल करने में सहायक होंगेः उदाहरण 18 समीकरण ेपद ग त्र 3 का मुख्य हल ज्ञात कीजिए।2 2π ⎛ π⎞ π 3 हल हम जानते हैं कि ेपद π त्र 3 तथा ेपद त्र ेपद ⎜ π− ⎟त्र ेपद त्र 32 3 ⎝ 3 ⎠ 32 इसलिए, मुख्य हल ग त्र π 3 तथा 23 π है। 1 उदाहरण 19 समीकरण जंद ग त्र− 3 का मुख्य हल ज्ञात कीजिए। π 1 ⎛ π⎞ π 1 हल हम जानते हैं कि जंद त्र ण् इस प्रकार, जंद ⎜ π दृ ⎟ त्रदृजंद त्रदृ 63 ⎝ 6 ⎠ 63 ⎛ π ⎞ π 1तथा जंद 2π − त्र− जंद त्र− ⎜⎟⎝ 6 ⎠ 63 5π 11π 1इस प्रकार जंद त्र जंद त्र− 6 63 5π 11πइसलिए, मुख्य हल 6 तथा 6 हैं। अब, हम त्रिाकोणमितीय समीकरणों का व्यापक हल ज्ञात करेंगे। हम देखते हैं कि ेपद ग त्र 0 तो ग त्र दπए जहाँ द ∈ र् बवे ग त्र 0 तो ग त्र ;2द ़ 1द्ध π 2ए जहाँ द ∈ र् अब हम निम्न परिणाम सि( करेंगेः प्रमेय 1 किन्हीं वास्तविक संख्याएँ ग तथा ल के लिए ेपद ग त्र ेपद ल सेे ग त्र दπ ़ ;दृ1द्धदलए जहाँ द ∈ र् प्राप्त होता है। उपपिा यदि ेपद ग त्र ेपद लए तो ग ़ लग −लेपद ग दृ ेपद ल त्र 0 या 2बवे ेपद त्र 022 ग ़ लग − लअथार्त् बवे त्र 0 या ेपद त्र 022ग ़ लπ ग − लइसलिए त्र ;2द ़ 1द्ध या त्र दπए जहाँ द ∈ र्2 22 अथार्त् ग त्र ;2द ़ 1द्ध π दृ ल या ग त्र 2दπ ़ लए जहाँ द∈र् अतः ग त्र ;2द ़ 1द्धπ ़ ;दृ1द्ध2द ़ 1 ल या ग त्र 2दπ ़;दृ1द्ध2दलए जहाँ द ∈ र् उपयुर्क्त दोनों परिणामों को मिलाने पर, हम पाते हैंः ग त्र दπ ़ ;दृ1द्धदलए जहाँ द ∈ र् प्रमेय 2 कोइर् वास्तविक संख्याएँ ग तथा ल के लिए, बवे ग त्र बवे ल से ग त्र 2दπ± लए जहाँ द ∈ र् प्राप्त होता है। उपपिा यदि बवे ग त्र बवे लए तो ग ़ लग − ल बवे ग दृ बवे ल त्र 0 अथार्त् दृ2 ेपद ेपद त्र 022ग ़ लग − लइस प्रकार ेपद त्र 0 या ेपद त्र 022ग ़ लग − लइसलिए त्र दπ या त्र दπए जहाँ द ∈ र्22अथार्त् ग त्र2दπ दृ ल या ग त्र 2दπ ़ लए जहाँ द ∈ र् अतः ग त्र2दπ± लए जहाँ द ∈ र् πप्रमेय 3 सि( कीजिए कि यदि ग तथा ल का 2 विषम गुणज नहीं है तो जंद ग त्र जंद ल से ग त्र दπ ़ लए जहाँ द ∈ र् प्राप्त होता है। उपपिा यदि जंद ग त्र जंद लए तो जंद ग दृ जंद ल त्र 0 ेपद ग बवे ल − बवे ग ेपद ल त्र 0या बवे ग बवे ल या ेपद ;ग दृ लद्ध त्र 0 ;क्यों?द्ध इसलिए ग दृ ल त्र दπ अथार्त् ग त्र दπ ़ लए जहाँ द ∈ र् उदाहरण 20 ेपद ग त्र दृ 3 का हल ज्ञात कीजिए।2 π ⎛ π⎞ 4π− ेपद त्र ेपद π़त्र ेपद हल हम पाते हैं ेपद ग त्र दृ 3 त्र ⎜⎟23 ⎝ 3 ⎠ 3 4πअतः ेपद ग त्र ेपद 3 त्र ;1द्ध इसलिए गदπ़− द 43 π ए जहाँ द ∈ र् 4π 3ए ग का एक ऐसा मान है जिसके संगत ेपद ग त्र− 3 है। ग का कोइर् भी2 अन्य मान लेकर समीकरण हल किया जा सकता है, जिसके लिए ेपद ग त्र− 3 हो, यह सभी2 विध्ियों से प्राप्त हल एक ही होंगे यद्यपि वे प्रत्यक्षतः विभ्िान्न दिखाइर् पड़ सकते हैं। 1उदाहरण 21 बवे ग त्र को हल कीजिए।2 हल हम पाते हैं बवे ग त्र 12 त्र बवे π 3 πइसलिए ग त्र 2दπ ± 3ए जहाँ द ∈ र्ण् ⎛ π⎞उदाहरण 22 जंद 2 ग त्र− बवज ⎜ ग ़⎟ को हल कीजिए।⎝ 3 ⎠ ⎛ π⎞⎛ ππ⎞⎟ जंद ़़ ⎟हल हम पाते हैं, जंद 2 ग त्र− बवज ⎜ ग ़ त्र ⎜ ग ⎝ 3 ⎠⎝ 23 ⎠ ⎛ 5π⎞ या जंद 2ग त्र जंद ⎜ग ़⎟⎝6 ⎠2गदπ़इसलिए त्र ग ़ 56 π ए जहाँ द∈र् 5π त्रया गदπ़ 6ए जहाँ द∈र् उदाहरण 23 हल कीजिए ेपद 2ग दृ ेपद 4ग ़ ेपद 6ग त्र 0 हल समीकरण को लिख सकते हैं, ेपद 6ग ़ ेपद 2ग − ेपद 4 ग त्र 0 या 2 ेपद 4ग बवे 2ग − ेपद 4ग त्र 0 अथार्त् ेपद 42ग; बवे 2ग − 1द्ध त्र 0 इसलिए ेपद 4ग त्र 0 या बवे 2 ग त्र 1 2 πअथार्त् ेपद4 ग त्र 0 या बवे 2 ग त्र बवे 3 πअतः 4ग त्रदπ या 2ग त्र 2दπ± 3ए जहाँ द∈र् दππअथार्त् ग त्र 4 या ग त्र दπ± 6ए जहाँ द∈र् उदाहरण 24 हल कीजिए 2 बवे2 ग ़ 3 ेपद ग त्र 0 हल समीकरण को इस प्रकार लिख सकते हैं ;− ेपद गद्ध़ 3ेपद ग त्र 021 2 या 2 ेपद2 ग − 3ेपद ग − 2 त्र 0 या ;2ेपद ग ़1द्ध ;ेपद ग − 2द्ध त्र0 अतः ेपद ग त्र − 1 या ेपद ग त्र 22 परंतु ेपद ग त्र 2 असंभव है ;क्यों?द्ध 17πइसलिए ेपद ग त्र −2 त्र ेपद 6 द 7π गद−अतः, हलः त्र π़ ;1द्ध 6 हैए जहाँ द ∈ र् प्रश्नावली 3.4 निम्नलिख्िात समीकरणों का मुख्य तथा व्यापक हल ज्ञात कीजिएः 3 2ण् ेमब ग त्र 21ण् जंद ग त्र 3ण् बवज ग त्र− 3 4ण् बवेमब ग त्र दृ 2 निम्नलिख्िात प्रत्येक समीकरणों का व्यापक हल ज्ञात कीजिएः 5ण् बवे 4 ग त्र बवे 2 ग 6ण् बवे 3ग ़ बवे ग दृ बवे 2ग त्र 0 7ण् ेपद 2ग ़ बवे ग त्र 0 8ण् ेमब2 2ग त्र 1दृ जंद 2ग 9ण् ेपद ग ़ ेपद 3ग ़ ेपद 5ग त्र 0 विविध् उदाहरण 3 12उदाहरण 25 यदि ेपद ग त्र ए बवे ल त्र − हैै, जहाँ ग तथा ल दोनों द्वितीय चतुथा±श में स्िथत 5 13 हों तो ेपद ;ग ़ लद्ध का मान ज्ञात कीजिए। हल हम जानते हैं कि ेपद ;ग ़ लद्ध त्र ेपद ग बवे ल ़ बवे ग ेपद ल ण्ण्ण् ;1द्ध 9 16 अब बवे2 ग त्र 1 दृ ेपद2 ग त्र 1 दृ त्र 2525 4इसलिए बवे ग त्र ± 5 क्योंकि ग द्वितीय चतुथा±श में स्िथत है, अतः बवे ग )णात्मक है। 4अतः बवे ग त्र − 5 144 25 अब ेपद2ल त्र 1 दृ बवे2ल त्र 1 दृ त्र 169 169 5अथार्त् ेपद ल त्र ± 13 5क्योंकि ल द्वितीय चतुथा±श में स्िथत है, ेपद ल ध्नात्मक है। इसलिए ेपद ल त्र है। ेपद गए ेपद लए13 बवे ग तथा बवे ल का मान समीकरण ;1द्ध में रखने पर, हम पाते हैं, 3 ⎛ 12 ⎞⎛ 4 ⎞ 5 36 20 56 ेपद ; गलद्ध त्र×− ़−× − त्र− ़ ⎜ ⎟⎜⎟ त्र −5 ⎝ 13 ⎠⎝ 5 ⎠13 6565 65 ग 9ग 5गउदाहरण 26 सि( कीजिएः बवे 2 ग बवे − बवे 3 ग बवे त्र ेपद 5 ग ेपद 22 2 हल हम पाते हैं, 1 ⎡ ग 9ग ⎤बायाँ पक्ष त्र 2बवे 2 ग बवे − 2बवे बवे 3 ग⎢⎥2 ⎣ 22 ⎦ 1 ⎡⎛ ग ⎞⎛ ग ⎞⎛ 9ग ⎞⎛ 9ग ⎞⎤ बवे 2ग ़़ बवे 2ग −− बवे ़ 3ग − बवे − 3गत्र ⎢⎜⎟⎜⎟⎜ ⎟⎜ ⎟⎥2 ⎣⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠⎦ 1 ⎡ 5ग 3ग 15ग 3ग ⎤ 1 ⎡ 5ग 15ग ⎤ त्र बवे ़ बवे − बवे − बवे त्र बवे − बवे ⎣⎢ ⎦⎥⎣⎢ ⎦⎥222 2 222 2 ⎡⎧ 5ग 15 ग ⎫⎧ 5ग 15 ग ⎫⎤़−1 ⎢⎪ ⎪⎪ ⎪⎥22 22⎢−2ेपद ⎨⎬ ेपद ⎨ ⎬⎥ त्र22 2⎢⎪ ⎪⎪ ⎪⎥ ⎢⎣⎩ ⎭⎩ ⎭⎥⎦ ⎛ 5ग ⎞ 5गत्र − ेपद5ग ेपद ⎜− ⎟त्र ेपद5ग ेपद त्र दायाँ पक्ष⎝2 ⎠2 उदाहरण 27 जंद 8 π का मान ज्ञात कीजिए। ππ हल मान लीजिए ग त्र 8 हो तो 2ग त्र 4 2 जंद ग अब जंद 2ग त्र 1 − जंद2 ग π2जंद π 8जंद त्र या 42 π1जंद − 8 π 2लमान लीजिए ल त्र जंद तो 1 त्र 281− ल या ल2 ़ 2ल दृ 1 त्र 0 22इसलिए ल त्र −± 2 त्र− 1± 2 2 क्योंकि 8 π प्रथम चतुथा±श में स्िथत है, ल त्र जंद 8 π ध्नात्मक है। अतः πजंद त्र 2 −1 8 33π गग गउदाहरण 28 यदि जंद ग त्रए π ढढग ए तो ेपद ए बवे तथा जंद के मान ज्ञात कीजिए।4 222 2 π गहल क्योंकि ढढ32 π है इसलिए बवे ग )णात्मक है। π ग3πपुनः ढढ ण्22 4 गगइसलिए ेपद ध्नात्मक होगा तथा बवे )णात्मक होगा।22 9 25 अब ेमब2 ग त्र 1 ़ जंद2 ग त्र 1 ़त्र 16 16 16 4इसलिए बवे2 ग त्र या बवे ग त्र दृ ;क्यों?द्ध25 5 ग 49 अब 2ेपद2 त्र 1 दृ बवे ग त्र 1 ़त्र 2 55 ग 9इसलिए ेपद2 त्र 210 ग 3 या ेपद त्र ;क्यों?द्ध210 ग 41 पुनः 2बवे2 त्र 1़ बवे ग त्र 1 −त्र 255 ग 1 ग 1 इसलिए बवे2 त्र या बवे त्र − ;क्यों?द्ध210 210 ग ⎞ग ेपद2 3 ⎛− 10अतः जंद त्र त्र ×⎜ ⎟ त्र दृ 32बवे ग 10 ⎝ 1 ⎠ 2 ⎛ π⎞⎛ π⎞ 3उदाहरण 29 सि( कीजिएः बवे2 ग ़ बवे2 ग ़़ बवे2 ग −त्र⎜⎟ ⎜⎟⎝ 3 ⎠⎝ 3 ⎠ 2 हल हम पाते हैं, ⎛ 2π⎞⎛ 2π⎞़़ ग1बवे 2ग ़ 1 बवे 2 −⎜⎟ ⎜⎟1बवे 2 ग ⎝ 3 ⎠ ⎝⎠बायाँ पक्ष त्र ़़ ़ 3 22 2 1 ⎡⎛ 2π⎞⎛ 2π⎞⎤3 ़ बवे 2 ग ़ बवे 2ग ़़ बवे 2ग −त्र ⎢ ⎜⎟⎜⎟⎥2 ⎣⎝ 3 ⎠⎝ 3 ⎠⎦ 1 ⎡ 2π⎤3 ़ बवे 2 ग ़ 2बवे 2 ग बवे त्र ⎢⎥2 ⎣ 3 ⎦ 1 ⎡⎛ π⎞⎤3बवे 2 ग ़ 2बवे 2 ग बवे π़−त्र ⎢ ⎜⎟⎥2 ⎣⎝ 3 ⎠⎦ 1 ⎡ π⎤3 ़ बवे 2 ग − 2बवे 2 ग बवे त्र ⎢ ⎥2 ⎣ 3 ⎦ 133बवे 2 ग − बवे 2 ़ ग त्रत्र ख्, त्र दायाँ पक्ष2 2 अध्याय 3 पर विविध् प्रश्नावली सि( कीजिएः π 9π 3π 5π1ण् 2बवे बवे ़ बवे ़ बवे त्र 0 1313 13 13 2ण् ;ेपद 3ग ़ ेपद गद्ध ेपद ग ़ ;बवे 3ग दृ बवे गद्ध बवे ग त्र 0 ग ़ ल3ण् ;बवे ग ़ बवे लद्ध2 ़ ;ेपद ग दृ ेपद लद्ध2 त्र 4 बवे2 2 ग − ल4ण् ;बवे ग दृ बवे लद्ध2 ़ ;ेपद ग दृ ेपद लद्ध2 त्र 4 ेपद2 5ण् ेपद ग ़ ेपद 3ग ़ ेपद 5ग ़ ेपद 7ग त्र 4 बवे ग बवे 2ग ेपद 4ग 2 ;ेपद 7ग ़ ेपद 5गद्ध ़ ;ेपद 9ग ़ ेपद 3गद्ध6ण् त्रजंद 6ग ;बवे7ग ़ बवे5गद्ध ़ ;बवे9ग ़ बवे3गद्ध ग 3ग 7ण् ेपद 3ग ़ ेपद 2ग दृ ेपद ग त्र 4ेपद ग बवे बवे22 गग गनिम्नलिख्िात प्रत्येक प्रश्न में ेपद ए बवे तथा जंद ज्ञात कीजिएः22 2 4 8ण् जंद ग त्र − ए ग द्वितीय चतुथा±श में है। 9ण् बवे ग त्र − 3 10ण् ेपद ग त्र 14 ए ग द्वितीय चतुथा±श में है। सारांश ऽ यदि एक वृत्त, जिसकी त्रिाज्या तए चाप की लंबाइर्स तथा केंद्र पर अंतरित कोण θ रेडियन हैं,तो स त्र त θ ऽ रेडियन माप त्र 180 × डिग्री माप π 1 ए ग तृतीय चतुथा±श में है।3180 ऽ डिग्री मापत्र × रेडियन मापπ बवे2 ग ़ ेपद2 ग त्र 1ऽ ऽ 1 ़ जंद2 ग त्र ेमब2 ग ऽ 1 ़ बवज2 ग त्र बवेमब2 ग ऽ बवे ;2दπ ़ गद्ध त्र बवे ग ऽ ेपद ;2दπ ़ गद्ध त्र ेपद ग ऽ ेपद ;दृ गद्ध त्र दृ ेपद ग ऽ बवे ;दृ गद्ध त्र बवे ग ऽ बवे ;ग ़ लद्ध त्र बवे ग बवे ल दृ ेपद ग ेपद ल ऽ बवे ;ग दृ लद्ध त्र बवे ग बवे ल ़ ेपद ग ेपद ल π− गऽ बवे ;द्ध त्र ेपद ग2 π− गऽ ेपद ;द्ध त्र बवे ग2 ऽ ेपद ;ग ़ लद्ध त्र ेपद ग बवे ल ़ बवे ग ेपद ल ऽ ेपद ;ग दृ लद्ध त्र ेपद ग बवे ल दृ बवे ग ेपद ल ऽ बवे π़π⎛ ⎞ ⎛ ⎞़ गग त्र दृ ेपद ग ेपद⎜⎝ ⎟⎠ ⎜⎝ ⎟⎠त्र बवे ग2 2 बवे ;π दृ गद्ध त्र दृ बवे ग ेपद ;π दृ गद्ध त्र ेपद ग बवे ;π ़ गद्ध त्र दृ बवे ग ेपद ;π ़ गद्ध त्र दृ ेपद ग बवे ;2π दृ गद्ध त्र बवे ग ेपद ;2π दृ गद्ध त्र दृ ेपद ग π ऽ यदि गए ल और ;ग ± लद्ध में से कोइर् कोण का विषम गुणांक नहीं हैं, तो2 जंद ग ़ जंद लजंद ;ग ़ लद्ध त्र 1जंद ग जंद − ल जंद ग − जंद ल ऽ जंद ;ग दृ लद्ध त्र 1जंद ग जंद ़ ल ऽ यदि गए ल और ;ग ± लद्ध में से कोइर् कोण π का विषम गुणांक नहीं हैं, तो बवजग बवज ल −1 बवज ;ग ़ लद्ध त्र बवजल ़ बवज ग बवज ग बवज ल ़ 1 ऽ बवज ;ग दृ लद्ध त्र बवज ल − बवज ग ऽ बवे 2ग त्र बवे2 ग दृ ेपद2 ग त्र 2बवे2 ग दृ 1 त्र 1 दृ 2 ेपद2 ग 2जंद ग ऽ ेपद 2ग त्र 2 ेपद ग बवे ग त्र 21जंद ग़ 2जंद ग ऽ जंद 2ग त्र 2−1जंद ग ऽ ेपद 3ग त्र 3ेपद ग दृ 4ेपद3 ग ऽ बवे 3ग त्र 4बवे3 ग दृ 3बवे ग 3जंद ग − जंद 3 ग ऽ जंद 3ग त्र 213जंद ग− ऽ ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध ऽ ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध ऽ ेपद गबवे गऽ ग ़ लग − लबवे ग ़ बवे ल त्र 2बवे बवे 22 ग ़ लग − लबवे ग दृ बवे ल त्र दृ 2ेपद ेपद 22 ग ़ लग − लेपद ग ़ ेपद ल त्र 2 ेपद बवे 22 ग ़ लग − लेपद ग दृ ेपद ल त्र 2बवे ेपद 22 2बवे ग बवे ल त्र बवे ;ग ़ लद्ध ़ बवे ; ग दृ लद्ध दृ 2ेपद ग ेपद ल त्र बवे ;ग ़ लद्ध दृ बवे ;ग दृ लद्ध 2ेपद ग बवे ल त्र ेपद ;ग ़ लद्ध ़ ेपद ;ग दृ लद्ध 2 बवे ग ेपद ल त्र ेपद ;ग ़ लद्ध दृ ेपद ;ग दृ लद्ध त्र 0 हो तो ग त्र दπए जहाँ द ∈ र् त्र 0 हो तो ग त्र ;2द ़ 1द्ध π 2ए जहाँ द ∈ र् ेपद ग त्र ेपद ल हो तो ग त्र दπ ़ ;दृ 1द्धदलए जहाँ द ∈ र् ऽ बवे ग त्र बवे लए हो तो ग त्र 2दπ± लए जहाँ द ∈ र् ऽ जंद ग त्र जंद ल हो तो ग त्र दπ ़ लए जहाँ द ∈ र् 1जंद 2 गदृ त्र 1जंद 2 ग़ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ऐसा विश्वास किया जाता है कि त्रिाकोणमिती का अध्ययन सवर्प्रथम भारत में आरंभ हुआ था। आयर्भट्ट्ट ;476 इर्.द्ध, ब्रह्मगुप्त ;598 इर्.द्ध भास्कर प्रथम ;600 इर्.द्ध तथा भास्कर द्वितीय ;1114 इर्.द्धने प्रमुख परिणामों को प्राप्त किया था। यह संपूणर् ज्ञान भारत से मध्यपूवर् और पुनः वहाँ से यूरोप गया। यूनानियों ने भी त्रिाकोणमिति का अध्ययन आरंभ किया परंतु उनकी कायर् विध्ि इतनी अनुपयुक्त थी, कि भारतीय विध्ि के ज्ञात हो जाने पर यह संपूणर् विश्व द्वारा अपनाइर् गइर्। भारत में आध्ुनिक त्रिाकोणमितीय पफलन जैसे किसी कोण की ज्या ;ेपदमद्ध और पफलन के परिचय का पूवर् विवरण सि(ांत ;संस्वृफत भाषा में लिखा गया ज्योतिषीय कायर्द्ध में दिया गया है जिसका योगदान गण्िात के इतिहास में प्रमुख है। भास्कर प्रथम ;600 इर्.द्ध ने 90° से अध्िक, कोणों के ेपदम के मान के लए सूत्रा दिया था। सोलहवीं शताब्दी का मलयालम भाषा में कायर् युक्ित भाषा में ेपद ;। ़ ठद्ध के प्रसार कीएक उपपिा है। 18°ए 36°ए 54°ए 72°ए आदि के ेपदम तथा बवेपदम के विशु( मान भास्कर द्वितीय द्वारा दिए गए हैं। ेपददृ1 गए बवेदृ1 गए आदि को चाप ेपद गए चाप बवे गए आदि के स्थान पर प्रयोग करने का सुझाव ज्योतिषविद ैपत श्रवीद थ्ण्ॅण् भ्मतेमीमस ;1813 इर्.द्ध द्वारा दिए गए थे। ऊँचाइर् और दूरी संबंध्ित प्रश्नों के साथ ज्ींसमे ;600 इर्. पूवर्द्ध का नाम अपरिहाय रूप से जुड़ा हुआ है। उन्हेंमिश्र के महान पिरामिड की ऊँचाइर् के मापन का श्रेय प्राप्त है। इसके लिए उन्होंने एक ज्ञातऊँचाइर् के सहायक दंड तथा पिरामिड की परछाइयों को नापकर उनके अनुपातों की तुलना का प्रयोग किया था। ये अनुपात हैं भ् ी ै त्र े त्र जंद ;सूयर् का उन्नतांशद्ध ज्ींसमे को समुद्री जहाश की दूरी की गणना करने का भी श्रेय दिया जाता है। इसकेलिए उन्होंने समरूप त्रिाभुजों के अनुपात का प्रयोग किया था। ऊँचाइर् और दूरी संबध्ी प्रश्नों का हल समरूप त्रिाभुजों की सहायता से प्राचीन भारतीय कायो± में मिलते हैं। कृ ऽ कृ

RELOAD if chapter isn't visible.