™डंजीमउंजपबे पे जीम पदकपेचमदेंइसम पदेजतनउमदज व िंसस चीलेपबंस तमेमंतबीण्दृ ठम्त्ज्भ्म्स्व्ज् ऽ 2ण्1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध गण्िात का अध्िकांश भाग पैटनर् अथार्त् परिवतर्नशील राश्िायों के बीच अभ्िाज्ञेय ;पहचान योग्यद्धकडि़यों को ज्ञात करने के बारे में है। हमारेदैनिक जीवन में, हम संबंधें को चित्रिात करने वाले अनेक पैटनो± के बारे में जानते हंै, जैसे भाइर् और बहन, पिता और पुत्रा, अध्यापक औरविद्याथीर् इत्यादि। गण्िात में भी हमें बहुत से संबंध् मिलते हैं जैसे ‘संख्या उए संख्या दए से छोटी है’, ‘रेखा सए रेखा उए के समांतर है’,‘समुच्चय ।ए समुच्चयठ का उपसमुच्चय है’। इन सभी में हम देखते हैं कि किसी संबंध् मं ऐसे युग्म सम्िमलित होते हैं जिनके घटक एकनिश्िचत क्रम में होते हैं। इस अध्याय में हम सीखेंगे कि किस प्रकारदो समुच्चयों के सदस्यों के युग्म बनाए जा सकते हैं और पिफर उनळण्ॅण्स्मपइदपज्र युग्मों में आने वाले दोनों सदस्यों के बीच बनने वाले संबंधें को सुस्पष्ट;1646.1716 ।ण्क्ण्द्धकरेंगे। अंत में, हम ऐसे विशेष संबंधें के बारे में जानेंगे, जो पफलन बननेके योग्य हैं। पफलन की परिकल्पना गण्िात में अत्यंत महत्त्वपूणर् है क्योंकि यह एक वस्तु से दूसरी वस्तु के बीच गण्िातानुसार यथातथ्य संगतता के विचार का अभ्िाग्रहण करती है। 2ण्2 समुच्चयों का कातीर्य गुणन ;ब्ंतजमेपंद च्तवकनबज व िैमजेद्ध मान लीजिए कि ।ए दो प्रकार के रंगों का और ठए तीन वस्तुओं का समुच्चय है, अथार्त् । त्र क्ष्लाल, नीलाद्वऔर ठ त्र क्ष्इए बए ेद्वए जहाँ इए ब और े क्रमशः किसी विशेष बैग, कोट और कमीज को निरूपित करते हैं। इन दोनों समुच्चयों से कितने प्रकार की रंगीन वस्तुओं के युग्म बनाए जा सकते हैं? क्रमब( तरीके से प्रगति करते हुए हम देखते हैं कि निम्नलिख्िात 6 भ्िान्न - भ्िान्न युग्म प्राप्त होते हैं। ;लालए इद्धए ;लालए बद्धए ;लालए ेद्धए ;नीलाए इद्धए ;नीलाए बद्धए ;नीलाए ेद्ध। इस प्रकार हमें 6 भ्िान्न - भ्िान्न वस्तुएँ प्राप्त होती हैं ;आवृफति 2.1द्ध। आवृफति 2ण्1 पिछली कक्षाओं से स्मरण कीजिए कि, एक क्रमित युग्म, अवयवों का वह युग्म है, जिसे वक्र कोष्ठक में लिखते हैं और जिनको एक दूसरे से किसी विशेष क्रम में समूहित किया जाता है अथार्त् ;चएुद्धए च ∈ च् और ु ∈ फ। इसे निम्नलिख्िात परिभाषा से स्पष्ट किया जा सकता है। परिभाषा 1 दो अरिक्त समुच्चयों च् तथा फ का कातीर्य गुणन च् × फ उन सभी क्रमित युग्मों का समुच्चय है, जिनको प्रथम घटक च् से तथा द्वितीय घटक फए से लेकर बनाया जा सकता है। अतः च् × फ त्र क्ष् ;चएुद्ध रू च ∈ च्ए ु ∈ फ द्व यदि च् या फ में से कोइर् भी रिक्त समुच्चय है, तो उनका कातीर्य गुणन भी रिक्त समुच्चय होता है, अथार्त् च् × फ त्र φ उपरोक्त दृष्टांत से हम जानते हैं कि । × ठ त्र क्ष्;लालएइद्धए ;लालएबद्धए ;लालऐद्धए ;नीलाएइद्धए ;नीलाएबद्धए ;नीलाऐद्धद्व। पुनः निम्नलिख्िात दो समुच्चयों पर विचार कीजिए। । त्र क्ष्क्स्ए डच्ए ज्ञ।द्वए जहाँ क्स्ए डच्ए ज्ञ। दिल्ली, मध्य प्रदेश, तथा कनार्टक को निरूपित करते हैं और ठ त्र क्ष्01ए02ए 03द्वक्रमशः दिल्ली, मध्य प्रदेश और कनार्टक द्वारा गाडि़यों के लिए जारी लाइसेंस प्लेट की सांकेतिक संख्याएँ प्रकट करते हैं। यदि तीन राज्य दिल्ली, मध्य प्रदेश और कनार्टक, गाडि़यों के आवृफति 2ण्2लाइसेंस प्लेट के लिए संकेत प(ति ;संकेतिकीद्ध इस प्रतिबंध् के साथ बना रहे हों कि संकेत प(ति, समुच्चय । के अवयव से प्रारंभ हो, तो इन समुच्चयों से प्राप्त होने वाले युग्म कौन से हैं तथा इन युग्मों की वुफल संख्या कितनी है ;आवृफति 2.2द्ध? प्राप्त होने वाले युग्म इस प्रकार हैं, ;क्स्ए01द्धए ;क्स्ए02द्धए ;क्स्ए03द्धए ;डच्ए01द्धए ;डच्ए02द्धए ;डच्ए03द्धए ;ज्ञ।ए01द्धए ;ज्ञ।ए02द्धए ;ज्ञ।ए03द्ध और समुच्चय। तथा समुच्चय ठ का कातीर्य गुणन इस प्रकार होगा, । × ठ त्र क्ष्;क्स्ए01द्धए ;क्स्ए02द्धए ;क्स्ए03द्धए ;डच्ए01द्धए ;डच्ए02द्धए ;डच्ए03द्धए ;ज्ञ।ए01द्धए ;ज्ञ।ए02द्धए ;ज्ञ।ए03द्धद्वण् यह सरलता से देखा जा सकता है कि कातीर्य गुणन में इस प्रकार 9 युग्म हैं क्योंकि समुच्चय । और ठ में से प्रत्येक में 3 अवयव हैं। इससे हमें 9 संभव संकेत प(तियाँ मिलती हैं। यह भी नोट कीजिए कि इन अवयवों के युग्म बनाने का क्रममहत्त्वपूणर् ;निणार्यकद्ध है। उदाहरण के लिए सांकेतिक संख्या ;क्स्ए 01द्ध वही नहीं है जो सांकेतिक संख्या ;01ए क्स्द्ध है। अंत में स्पष्टीकरण के लिए समुच्चय ।त्र क्ष्ं1ए ं2द्व और आवृफति 2ण्3 ठ त्र क्ष्इ1ए इ2ए इ3ए इ4द्व पर विचार कीजिए ;आवृफति 2.3द्ध। यहाँ । × ठत्रक्ष्; ं1ए इ1द्धए ;ं1ए इ2द्धए ;ं1ए इ3द्धए ;ं1ए इ4द्धए ;ं2ए इ1द्धए ;ं2ए इ2द्धए ;ं2ए इ3द्धए ;ं2ए इ4द्धद्वण् यदि । और ठ, वास्तविक संख्याओं के समुच्चय के उपसमुच्चय हों, तो इस प्रकार प्राप्त 8 क्रमित युग्म किसी समतल के बिंदुओं की स्िथति निरूपित करते हैं तथा यह स्पष्ट है कि ;ं1ए इद्ध पर स्िथत2बिंदु, ;इ2ए ंद्ध पर स्िथत बिंदु से भ्िान्न हैं।1;पद्ध दो क्रमित युग्म समान होते हैं, यदि और केवल यदि उनके संगत प्रथम घटक समान हों और संगत द्वितीय घटक भी समान हों। ;पपद्ध यदि । में च अवयव तथा ठ में ु अवयव हैं, तो । × ठ में चु अवयव होते हैं अथार्त् यदि द;।द्ध त्र च तथा द;ठद्ध त्र ुए तो द;। × ठद्ध त्र चुण् ;पपपद्ध यदि । तथा ठ अरिक्त समुच्चय हैं और । या ठ में से कोइर् अपरिमित है, तो । × ठ भी अपरिमित समुच्चय होता है। ;पअद्ध । ×। ×। त्र क्ष्;ंए इए बद्ध रू ंए इए ब ∈ ।द्वण् यहाँ ;ंए इए बद्ध एक क्रमित त्रिाक कहलाता है। उदाहरण 1 यदि ;ग ़ 1ए ल दृ 2द्ध त्र ;3ए1द्धए तो ग और ल के मान ज्ञात कीजिए। हल क्योंकि क्रमित युग्म समान है, इसलिए संगत घटक भी समान होंगे। अतः ग ़ 1 त्र 3 और ल दृ 2 त्र 1ण् सरल करने परग त्र 2 और ल त्र 3ण् उदाहरण 2 यदि च् त्र क्ष्ंए इए बद्व औरफ त्र क्ष्तद्वए तो च् × फ तथा फ × च् ज्ञात कीजिए। क्या दोनों कातीर्य गुणन समान हैं? हल कातीर्य गुणन की परिभाषा से च् × फ त्र क्ष्;ंए तद्धए ;इए तद्धए ;बए तद्धद्व और फ × च् त्र क्ष्;तए ंद्धए ;तए इद्धए ;तए बद्धद्व क्योंकि, क्रमित युग्मों की समानता की परिभाषा से, युग्म ;ंए तद्ध युग्म ;तए ंद्धए के समान नहीं है और यह बात कातीर्य गुणन के प्रत्येक युग्म के लिए लागू होती है, जिससे हम निष्कषर् निकालते हैं कि च् × फ ≠ फ × च्ण् तथापि, प्रत्येक समुच्चय में अवयवों की संख्या समान है। उदाहरण 3 मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए2ए3द्वए ठ त्र क्ष्3ए4द्व और ब् त्र क्ष्4ए5ए6द्वण् निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । × ;ठ ∩ ब्द्ध ;पपद्ध ;। × ठद्ध ∩ ;। × ब्द्ध ;पपपद्ध । × ;ठ ∪ ब्द्ध ;पअद्ध ;। × ठद्ध ∪ ;। × ब्द्ध हल ;पद्ध दो समुच्चयों के सवर्निष्ठ की परिभाषा से ;ठ ∩ ब्द्ध त्र क्ष्4द्वण् अतः । × ;ठ ∩ ब्द्ध त्र क्ष्;1ए4द्धए ;2ए4द्धए ;3ए4द्धद्वण् ;पपद्ध अब ;। × ठद्ध त्र क्ष्;1ए3द्धए ;1ए4द्धए ;2ए3द्धए ;2ए4द्धए ;3ए3द्धए ;3ए4द्धद्व और ;। × ब्द्ध त्र क्ष्;1ए4द्धए ;1ए5द्धए ;1ए6द्धए ;2ए4द्धए ;2ए5द्धए ;2ए6द्धए ;3ए4द्धए ;3ए5द्धए ;3ए6द्धद्व इसलिए ;। × ठद्ध ∩ ;। × ब्द्ध त्र क्ष्;1ए 4द्धए ;2ए 4द्धए ;3ए 4द्धद्वण् ;पपपद्ध क्योंकि ;ठ ∪ ब्द्ध त्र क्ष्3ए 4ए 5ए 6द्व अतः । × ;ठ ∪ ब्द्ध त्र क्ष्;1ए3द्धए ;1ए4द्धए ;1ए5द्धए ;1ए6द्धए ;2ए3द्धए ;2ए4द्धए ;2ए5द्धए ;2ए6द्धए ;3ए3द्धए ;3ए4द्धए ;3ए5द्धए ;3ए6द्धद्वण् ;पअद्ध भाग ;पपद्ध से । × ठ तथा । × ब् समुच्चयों के प्रयोग से हमें निम्नलिख्िात प्राप्त होता हैः ;। × ठद्ध ∪ ;। × ब्द्ध त्र क्ष्;1ए3द्धए ;1ए4द्धए ;1ए5द्धए ;1ए6द्धए ;2ए3द्धए ;2ए4द्धए ;2ए5द्धए ;2ए6द्धए ;3ए3द्धए ;3ए4द्धए ;3ए5द्धए ;3ए6द्धद्वण् उदाहरण 4 यदि च् त्र क्ष्1ए 2द्वए तो समुच्चय च् × च् × च् ज्ञात कीजिए। हल च् × च् × च् त्र क्ष्;1ए1ए1द्धए ;1ए1ए2द्धए ;1ए2ए1द्धए ;1ए2ए2द्धए ;2ए1ए1द्धए ;2ए1ए2द्धए ;2ए2ए1द्धए ;2ए2ए2द्धद्वण् उदाहरण 5 यदि त् समस्त वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है, तो कातीर्य गुणन त् × त् और त् × त् × त् क्या निरूपित करते हंैघ् हल कातीर्य गुणन त् × त् समुच्चय त् × त्त्रक्ष्;गए लद्ध रू गए ल ∈ त्द्व को निरूपित करता है, जिसका प्रयोग द्विविम समष्िट के बिंदुओं के निदेर्शांकों को प्रकट करने के लिए किया जाता है। त् × त् × त् समुच्चय त् × त् × त् त्रक्ष्;गए लए ्रद्ध रू गए लए ्र ∈ त्द्व को निरूपित करता है, जिसका प्रयोग त्रिाविमीय आकाश के बिंदुओं के निदेर्शांकों को प्रकट करने के लिए किया जाता है। उदाहरण 6 यदि । × ठ त्रक्ष्;चए ुद्धए;चए तद्धए ;उए ुद्धए ;उए तद्धद्वए तो। और ठ को ज्ञात कीजिए। हल । त्र प्रथम घटकों का समुच्चय त्र क्ष्चए उद्व ठ त्र द्वितीय घटकों का समुच्चय त्र क्ष्ुए तद्वण् प्रश्नावली 2.1 ⎛ ग 2 ⎞ ⎛ 51 ⎞1ण् यदि ⎜़ 1एल दृ ⎟त्र⎜ ए ⎟ ए तो ग तथा ल ज्ञात कीजिए।⎝ 33 ⎠ ⎝ 33 ⎠ 2ण् यदि समुच्चय । में 3 अवयव हैं तथा समुच्चय ठ त्र क्ष्3ए 4ए 5द्वए तो ;।×ठद्ध में अवयवों की संख्या ज्ञात कीजिए। 3ण् यदि ळ त्र क्ष्7ए 8द्व और भ् त्र क्ष्5ए 4ए 2द्वए तो ळ × भ् और भ् × ळ ज्ञात कीजिए। 4ण् बतलाइए कि निम्नलिख्िात कथनों में से प्रत्येक सत्य है अथवा असत्य है। यदि कथन असत्य है, तो दिए गए कथन को सही बना कर लिख्िाए। ;पद्ध यदि च् त्र क्ष्उए दद्व और फ त्र क्ष् दए उद्वए तो च् × फ त्र क्ष्;उए दद्धए;दए उद्धद्वण् ;पपद्ध यदि । और ठ अरिक्त समुच्चय हैं, तो । × ठ क्रमित युग्मों ;गए लद्ध का एक अरिक्त समुच्चय है, इस प्रकार कि ग ∈ । तथा ल ∈ ठण् ;पपपद्ध यदि । त्र क्ष्1ए 2द्वए ठ त्र क्ष्3ए 4द्वए तो। × ;ठ ∩ φद्ध त्र φण् 5ण् यदि । त्र क्ष्दृ1ए 1द्वए तो । × । × । ज्ञात कीजिए। 6ण् यदि । × ठ त्र क्ष्;ंए गद्धए;ं ए लद्धए ;इए गद्धए ;इए लद्धद्व तो । तथा ठ ज्ञात कीजिए। 7ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2द्वए ठ त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्वए ब् त्र क्ष्5ए 6द्व तथा क् त्र क्ष्5ए 6ए 7ए 8द्वण् सत्यापित कीजिए कि ;पद्ध । × ;ठ ∩ ब्द्ध त्र ;। × ठद्ध ∩ ;। × ब्द्धण् ;पपद्ध । × ब्ए ठ × क् का एक उपसमुच्चय है। 8ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2द्व और ठ त्र क्ष्3ए 4द्वण् । × ठ लिख्िाए। । × ठ के कितने उपसमुच्चय होंगे? उनकी सूची बनाइए। 9ण् मान लीजिए कि । और ठ दो समुच्चय हैं, जहाँ द;।द्ध त्र 3 और द;ठद्ध त्र 2ण् यदि ;गए 1द्धए ;लए 2द्धए ;्रए 1द्धए । × ठ में हैं, तो । और ठए को ज्ञात कीजिए, जहाँ गए ल और ्र भ्िान्न - भ्िान्न अवयव हैं। 10ण् कातीर्य गुणन । × । में 9 अवयव हैं, जिनमें ;दृ1ए0द्ध तथा ;0ए1द्ध भी है। समुच्चय । ज्ञात कीजिए तथा । × । के शेष अवयव भी ज्ञात कीजिए। 2ण्3 संबंध् ;त्मसंजपवदद्ध दो समुच्चयों च् त्र क्ष्ंएइएबद्व तथा फ त्र क्ष्।सपए ठींदनए ठपदवलए ब्ींदकतंए क्पअलंद्व पर विचार कीजिए। च् तथा फ के कातीर्य गुणन में 15 क्रमित युग्म हैं, जिन्हें इस प्रकार सूचीब( किया जा सकता है, च् × फ त्र क्ष्;ंए ।सपद्धए ;ंएठींदनद्धए ;ंए ठपदवलद्धए ण्ण्ण्ए ;बए क्पअलंद्धद्वण् अब हम प्रत्येक क्रमित युग्म ;गए लद्ध के प्रथम घटक ग तथा द्वितीय घटक ल के बीच एक संबंध् त् स्थापित कर च् × फ का एक उपसमुच्चय इस प्रकार प्राप्त कर सकते हैं। त्त्र क्ष् ;गएलद्धरू गए नाम ल का प्रथम अक्षर हैए ग ∈ च्ए ल ∈ फद्व इस प्रकार त्त्र क्ष्;ंए ।सपद्धए ;इए ठींदनद्धए ;इए ठपदवलद्धए ;बए ब्ींदकतंद्धद्व संबंध् त् का एक दृष्िट - चित्राण, जिसे तीर आरेख कहते हैं, आकृति 2.4 में प्रदश्िार्त है। परिभाषा 2 किसी अरिक्त समुच्चय । से अरिक्त समुच्चय ठ में संबंध् कातीर्य गुणन । × ठ का एक उपसमुच्चय होता है यह उपसमुच्चय । × ठ के क्रमति युग्मों के प्रथम तथा द्वितीय घटकों के मध्य एक संबंध् स्थापित करने से प्राप्त होता है। द्वितीय घटक, प्रथम घटक का प्रतिबिंब कहलाता है। परिभाषा 3 समुच्चय। से समुच्चय ठ में संबंध् त् के क्रमित युग्मों के सभी प्रथम घटकों के समुच्चय को संबंध् त् का प्रांत कहते हैं। परिभाषा 4 समुच्चय । से समुच्चय ठ में संबंध् त् के क्रमित युग्मों के सभी द्वितीय घटकों के समुच्चय को संबंध् त् का परिसर कहते हैं। समुच्चय ठ संबंध् त् का सह - प्रांत कहलाता है। नोट कीजिए कि, परिसर ⊆ सहप्रांत ;पद्ध एक संबंध् का बीजीय निरूपण या तो रोस्टर विध्ि या समुच्चय निमार्ण विध्ि द्वारा किया जा सकता है। ;पपद्धएक तीर आरेख किसी संबंध् का एक दृष्िट चित्राण है। उदाहरण 7 मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्वण् त् त्र क्ष्;गए लद्ध रू ल त्र ग ़ 1 द्व द्वारा । से । में एक संबंध् परिभाष्िात कीजिए। ;पद्ध इस संबंध् को एक तीर आरेख द्वारा दशार्इए। ;पपद्ध त् के प्रांत, सहप्रांत तथा परिसर लिख्िाए। हल ;पद्ध परिभाषा द्वारा त् त्र क्ष्;1ए2द्धए ;2ए3द्धए ;3ए4द्धए ;4ए5द्धए ;5ए6द्धद्वण् संगत तीर आरेख आवृफति 2.5 में प्रदश्िार्त है। ;पपद्ध हम देख सकते हैं कि प्रथम घटकों का समुच्चय अथार्त् प्रांतत्रक्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5एद्व इसी आवृफति 2ण्5प्रकार, द्वितीय घटकों का समुच्चय अथार्त् परिसर त्र क्ष्2ए 3ए 4ए 5ए 6द्वतथा सहप्रांत त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्वण् उदाहरण 8 नीचे आवृफति 2.6 में समुच्चय च् और फ के बीच एक संबंध् दशार्या गया है। इस संबंध् को ;पद्ध समुच्चय निमार्ण रूप में ;पपद्ध रोस्टर रूप में लिख्िाए। इसके प्रांत तथा परिसर क्या हैं? हल स्पष्टतः संबंध् त्ए श्गए ल का वगर् हैश् ;पद्ध समुच्चय निमार्ण रूप मेंए त् त्र क्ष्;गए लद्धरू गए ल का वगर् है, ग ∈ च्ए ल ∈ फद्व ;पपद्ध रोस्टर रूप मेंए त् त्र क्ष्;9ए 3द्धए ;9ए दृ3द्धए ;4ए 2द्धए ;4ए दृ2द्धए ;25ए 5द्धए ;25ए दृ5द्धद्व इस संबंध् का प्रांत क्ष्4ए 9ए 25द्व है। इस संबंध् का परिसर क्ष्दृ 2ए 2ए दृ3ए 3ए दृ5ए 5द्वण् नोट कीजिए कि अवयव 1ए च् के किसी भी अवयव से संबंध्ित नहीं है तथा समुच्चय फ इस संबंध् का सहप्रांत है। आवृफति 2ण्6 किसी समुच्चय। से समुच्चय ठ में संबंधें की कुल संख्या, । × ठ के संभव उपसमुच्चयों की संख्या के बराबर होती है। यदि द;। द्ध त्र च और द;ठद्ध त्र ुए तो द;। × ठद्ध त्र चु और संबंधें की वुफल संख्या 2चु होती है। उदाहरण 9 मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2द्व और ठ त्र क्ष्3ए 4द्वण् । से ठ में संबंधें की संख्या ज्ञात कीजिए। हल यहाँ । × ठ त्र क्ष्;1ए 3द्धए ;1ए 4द्धए ;2ए 3द्धए ;2ए 4द्धद्वण् क्योंकि द ;।×ठ द्ध त्र 4ए इसलिए ।×ठ के उपसमुच्चयों की संख्या 24 है। इसलिए । से ठ के संबंधें की संख्या 24 है। । से । के संबंध् को ‘। पर संबंध्’ भी कहते हैं। प्रश्नवाली 2ण्2 1ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3एण्ण्ण्ए14द्वण्त् त्र क्ष्;गए लद्ध रू 3ग दृ ल त्र 0ए जहाँ गए ल ∈ ।द्व द्वारा, । से । का एक संबंध् त् लिख्िाए। इसके प्रांत, सहप्रांत और परिसर लिख्िाए। 2ण् प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय पर त् त्र क्ष्;गए लद्ध रू ल त्र ग ़ 5ए ग संख्या 4 से कम, एक प्रावृफत संख्या है, गए ल ∈छद्वद्वारा एक संबंध् त् परिभाष्िात कीजिए। इस संबंध् को ;पद्ध रोस्टर रूप में इसके प्रांत और परिसर लिख्िाए। 3ण् । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 5द्व और ठ त्र क्ष्4ए 6ए 9द्वण् । से ठ में एक संबंध् त् त्र क्ष्;गए लद्धरू ग और ल का अंतर विषम है, ग ∈ ।ए ल ∈ ठद्व द्वारा परिभाष्िात कीजिए। त् को रोस्टर रूप में लिख्िाए। 4ण् आवृफति 2.7, समुच्चय च् से फ का एक संबंध् दशार्ती है। इस संबंध् को ;पद्ध समुच्चय निमार्ण रूप ;पपद्ध रोस्टर रूप में लिख्िाए। इसके प्रांत तथा परिसर क्या हैं? 5ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 6द्वण् मान लीजिए कि त्ए । पर क्ष्;ंए इद्धरू ं ए इ ∈।ए संख्या ं संख्या इ को यथावथ विभाजित आवृफति 2ण्7करती हैद्वद्वारा परिभाष्िात एक संबंध् है। ;पद्ध त् को रोस्टर रूप में लिख्िाए ;पपद्ध त् का प्रांत ज्ञात कीजिए ;पपपद्ध त् का परिसर ज्ञात कीजिए। 6ण् त् त्र क्ष्;गए ग ़ 5द्ध रू ग ∈ क्ष्0ए 1ए 2ए 3ए 4ए 5द्वद्वद्वारा परिभाष्िात संबंध् त् के प्रांत और परिसर ज्ञात कीजिए। 7ण् संबंध् त् त्र क्ष्;गए ग3द्ध रू ग संख्या 10 से कम एक अभाज्य संख्या हैद्व को रोस्टर रूप में लिख्िाए। 8ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष्गए लए ्रद्व और ठ त्र क्ष्1ए 2द्वए । से ठ के संबंधें की संख्या ज्ञात कीजिए। 9ण् मान लीजिए कित्ए र् पर, त् त्र क्ष्;ंएइद्धरू ंए इ ∈ र्ए ं दृ इ एक पूणार्ंक हैद्वए द्वारा परिभाष्िात एक संबंध् है। त् के प्रांत तथा परिसर ज्ञात कीजिए। 2ण्4 पफलन ;थ्नदबजपवदद्ध इस अनुच्छेद में, हम एक विशेष प्रकार के संबंध् का अध्ययन करेंगे, जिसे पफलन कहते हैं। हम पफलन को एक नियम के रूप में देख सकते हैं, जिससे वुफछ दिए हुए अवयवों से नए अवयव उत्पन्न होते हैं। पफलन को सूचित करने के लिए अनेक पद प्रयुक्त किए जाते हैं, जैसे ‘प्रतिचित्रा’ अथवा ‘प्रतिचित्राण’ परिभाषा 5 एक समुच्चय । से समुच्चय ठ का संबंध्, िएक पफलन कहलाता है, यदि समुच्चय । के प्रत्येक अवयव का समुच्चय ठ में, एक और केवल एक प्रतिबिंब होता है। दूसरे शब्दों में, पफलन एि किसी अरिक्त समुच्चय । से एक अरिक्त समुच्चय ठ का है, इस प्रकार का संबंध् कि िका प्रांत । है तथा िके किसी भी दो भ्िान्न क्रमित युग्मों के प्रथम घटक समान नहीं हैं। यदि एि । से ठ का एक पफलन है तथा ;ंए इद्ध ∈ एि तो ि;ंद्ध त्र इए जहाँ इ को िके अंतगर्त ं का प्रतिबम्ब तथा ं को इ का ‘पूवर् प्रतिबिंब’ कहते हैं। । से ठ के पफलन िको प्रतीकात्मक रूप में रूि । Æ ठ से निरूपित करते हैं। पिछले उदाहरणों पर ध्यान देने से हम सरलता से देखते हैं कि उदाहरण 7 में दिया संबंध् एक पफलन नहीं है, कयोंकि अवयव 6 का कोइर् प्रतिबिंब नहीं है। पुनः उदाहरण 8 में दिया संबंध् एक पफलन नहीं है क्येांकि इसके प्रांत के वुफछ अवयवों के एक से अध्िक प्रतिबिंब हैं। उदहारण 9 भी पफलन नहीं है ;क्यों?द्ध। नीचे दिए उदाहरणों में बहुत से संबंधें पर विचार करेंगे, जिनमें से वुफछ पफलन हैं और दूसरे पफलन नहीं हैं। उदाहरण 10 मान लीजिए कि छ प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय हे और छ पर परिभाष्िात एक संबंध् त् इस प्रकार है कि त् त्र क्ष्;गए लद्ध रू ल त्र 2गए गए ल ∈ छद्वण् त् के प्रांत, सहप्रांत तथा परिसर क्या हैंघ् क्या यह संबंध्, एक पफलन है? हल त् का प्रांत, प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय छ है। इसका सहप्रांत भी छ है। इसका परिसर सम प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय है। क्योंकि प्रत्येक प्रावृफत संख्या द का एक और केवल एक ही प्रतिबिंब है, इसलिए यह संबंध् एक पफलन है। उदाहरण 11 नीचे दिए संबंधें में से प्रत्येक का निरीक्षण कीजिए और प्रत्येक दशा में कारण सहित बतलाइए कि क्या यह पफलन है अथवा नहीं? ;पद्ध त् त्र क्ष्;2ए1द्धए;3ए1द्धए ;4ए2द्धद्वए ;पपद्ध त् त्र क्ष्;2ए2द्धए;2ए4द्धए;3ए3द्धए ;4ए4द्धद्व ;पपपद्ध त् त्र क्ष्;1ए2द्धए;2ए3द्धए;3ए4द्धए ;4ए5द्धए ;5ए6द्धए ;6ए7द्धद्व हल ;पद्ध क्योंकित् के प्रांत के प्रत्येक अवयव 2, 3, 4 के प्रतिबिंब अद्वितीय हैं, इसलिए यह संबंध् एक पफलन है। ;पपद्ध क्यांकि एक ही प्रथम अवयव 2, दो भ्िान्न - भ्िान्न प्रतिबिंबों 2 और 4 से संबंध्ित है, इसलिए यह संबंध् एक पफलन नहीं हैं। ;पपपद्ध क्योंकि प्रत्येक अवयव का एक और केवल एक प्रतिबिंब है, इसलिए यह संबंध् एक पफलन है। परिभाषा 6 एक ऐसे पफलन को जिसका परिसर वास्तविक संख्याओं का समुच्चय या उसका कोइर् उपसमुच्चय हो, वास्तविक मान पफलन कहते हैं। यदि वास्तविक चर वाले किसी वास्तविक मान पफलन का प्रांत भी वास्तविक संख्याओं का समुच्चय अथवा उसका कोइर् उपसमुच्चय हो तो इसे वास्तविक पफलन भी कहते हैं। उदाहरण 12 मान लीजिए कि छ वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है। िरू छ ऽ छए ि;गद्ध त्र 2ग ़ 1ए द्वारा परिभाष्िात एक वास्तविक मान पफलन है। इस परिभाषा का प्रयोग करके, नीचे दी गइर् सारणी को पूणर् कीजिए। ग 1 2 3 4 5 6 7 ल ि;1द्ध त्र ण्ण्ण् ि;2द्ध त्र ण्ण्ण् ि;3द्ध त्र ण्ण्ण् ि;4द्ध त्र ण्ण्ण् ि;5द्ध त्र ण्ण्ण् ि;6द्ध त्र ण्ण्ण् ि;7द्ध त्र ण्ण्ण् हल पूणर् की हुइर् सारणी नीचे दी गइर् हैः ग 1 2 3 4 5 6 7 ल ि;1द्ध त्र 3 ि;2द्ध त्र 5 ि;3द्ध त्र 7 ि;4द्ध त्र 9 ि;5द्ध त्र 11 ि;6द्ध त्र 13 ि;7द्ध त्र15 2ण्4ण्1 वुफछ पफलन और उनके आलेख ;ैवउम निदबजपवदे ंदक जीमपत हतंचीेद्ध ;पद्ध तत्समक पफलन ;प्कमदजपजल निदबजपवदद्ध मान लीजिए त् वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है। ल त्र ;िगद्धए प्रत्येक ग ∈ त् द्वारा परिभाष्िात वास्तविक मान पफलन िरू त् → त् है। इस प्रकार के पफलन को तत्समक पफलन कहते हैं। यहाँ पर िके प्रांत तथा परिसर त् हैं। इसका आलेख एक सरल रेखा होता है ;आवृफति 2.8द्ध। यह रेखा मूल बिंदु से हो कर जाती है। आवृफति 2ण्8 ;पपद्ध अचर पफलन ;ब्वदेजंदज निदबजपवदद्ध ल त्र ि;गद्ध त्र ब जहाँ ब एक अचर है और प्रत्येक ग ∈ त् द्वारा परिभाष्िात एक वास्तविक मान पफलन रूि त् → त् है। यहाँ पर िका प्रांत त् है और उसका परिसर क्ष्बद्व है। िका आलेख ग.अक्ष के समांतर एक रेखा है, उदाहरण के लिए यदि ;िगद्धत्र3 प्रत्येक ग ∈ त् है, तो इसका आलेख आवृफति 2.9 में दशार्इर् रेखा है। आवृफति 2ण्9 ;पपपद्ध बहुपद पफलन या बहुपदीय पफलन ;च्वसलदवउपंस निदबजपवदद्ध पफलन िरू त् → त्ए एक बहुपदीय पफलन कहलाता है, यदि त् के प्रत्येक ग के लिए, ल त्र ि;गद्ध त्र ं0 ़ ं1ग ़ ं2ग2 ़ ण्ण्ण़् ं गदए जहाँ द एक )णेतर पूणार्ंक है तथा ं0ए ं1ए ं2एण्ण्ण्एं ∈त्ण् द द ;िगद्ध त्र ग3 दृ ग2 ़ 2ए और ह;गद्ध त्र ग4 ़ 2 गए द्वारा परिभाष्िात पफलन एक बहुपदीय पफलन है जब कि 2 ी;गद्ध त्र ग3़ 2ग द्वारा परिभाष्िात पफलन ीए बहुपदीय पफलन नहीं है। ;क्यों?द्ध उदाहरण 13 ल त्र ;िगद्ध त्र ग2ए ग ∈ त् द्वारा पफलन रूि त् → त्ए की परिभाषा कीजिए। इस परिभाषा का प्रयोग करके नीचे दी गइर् तालिका को पूरा कीजिए। इस पफलन का प्रांत तथा परिसर क्या हैं? िका आलेख भी खींचिए। हल पूरी की हुइर् तालिका नीचे दी गइर् हैः ग दृ 4 दृ3 दृ2 दृ1 0 1 2 3 4 ल त्र ि;गद्ध त्र ग2 16 9 4 1 0 1 4 9 16 िका प्रांत त्र क्ष्ग रू ग∈त्द्वए िका परिसर त्र क्ष्ग2रूग ∈ त्द्वण् िका आलेख आवृफति 2.10 में प्रदश्िार्त है। आवृफति 2ण्10 उदाहरण 14 ि;गद्ध त्र ग3ए ग∈त् द्वारा परिभाष्िात पफलन िरूत् → त् का आलेख खींचिए। हल यहाँ पर ;ि0द्ध त्र 0ए ;ि1द्ध त्र 1ए ;िदृ1द्ध त्र दृ1ए ;ि2द्ध त्र 8ए ;िदृ2द्ध त्र दृ8ए ;ि3द्ध त्र 27य ;िदृ3द्ध त्र दृ27ए इत्यादि। ित्र क्ष्;गएग3द्धरू ग∈त्द्व िका आलेख आवृफति 2.11 में खींचा गया है। आवृफति 2ण्11 ;द्ध;पअद्ध परिमेय पफलन ;त्ंजपवदंस निदबजपवदेद्ध गि ए के प्रकार के पफलन जहाँ ;िगद्ध तथा ह;गद्ध;द्धहग एक प्रांत में, गके परिभाष्िात बहुपदीय पफलन हंै, जिसमें ह;गद्ध ≠ 0 परिमेय पफलन कहलाते हैं। गिउदाहरण 15 एक वास्तविक मान पफलन रूि त् दृ क्ष्0द्व → त् की परिभाषा ;द्धत्र1 एगग∈ त् दृक्ष्0द्व द्वारा कीजिए। इस परिभाषा का प्रयोग करके निम्नलिख्िात तालिका को पूणर् कीजिए। इस पफलन का प्रांत तथा परिसर क्या हैं? ग दृ2 दृ1ण्5 दृ1 दृ0ण्5 0ण्25 0ण्5 1 1ण्5 2 लत्र 1 ग ण्ण्ण् ण्ण्ण् ण्ण्ण् ण्ण्ण् ण्ण्ण् ण्ण्ण् ण्ण्ण् ण्ण्ण् ण्ण्ण् हल पूणर् की गइर् तालिका इस प्रकार हैः ग दृ2 दृ1ण्5 दृ1 दृ0ण्5 0ण्25 0ण्5 1 1ण्5 2 लत्र 1 ग दृ 0ण्5 दृ 0ण्67 दृ1 दृ 2 4 2 1 0ण्67 0ण्5 इसका प्रांत, शून्य के अतिरिक्त समस्त वास्तविक संख्याएँ हैं तथा इसका परिसर भी शून्य के अतिरिक्त समस्त वास्तविक संख्याएँ हैं। िका आलेख आवृफति 2.12 में प्रदश्िार्त है। आवृफति 2ण्12 ;अद्ध मापांक पफलन ;डवकनसने निदबजपवदेद्ध ;िगद्ध त्र द्यगद्य प्रत्येक ग ∈ त् द्वारा परिभाष्िात पफलन रूि त्→त्ए मापांक पफलन कहलाता है। ग के प्रत्येक )णेत्तर मान के लिए ;िगद्धए ग के बराबर होता है। परंतु ग के )ण मानों के लिएए ;िगद्ध का मान गए के मान के )ण के बराबर होता है, अथार्त् ⎧गएग ≥ 0;द्ध त्र⎨गि ⎩−गएग ढ 0 मापांक पफलन का आलेख आवृफति 2.13 में दिया है। मापांक पफलन को निरपेक्ष मान पफलन भी कहते हैं। आवृफति 2ण्13 ;अपद्ध चिÉ पफलन ;ैपहदनउ निदबजपवदेद्ध प्रत्येक ग ∈त्, के लिए द्वारा परिभाष्िात पफलन रूित्→त् चिÉ पफलन कहलाता है।चिÉ पफलन का प्रांत त् है। परिसर समुच्चय क्ष्दृ1ए 0ए 1द्वहै।आवृफति 2.14 में चिÉ पफलन का आलेख दशार्या गया है। यदि ग 0 तथा0 यदि ग 0 ;अपपद्ध महत्तम पूणा±क पफलन ;ळतमंजमेज पदजमहमत आवृफति 2ण्14निदबजपवदेद्ध ;िगद्ध त्र ख्ग,ए ग ∈त् द्वारा परिभाष्िात पफलन 1एयदि ग 0 ;द्ध0 0गि एयदि ग 1एयदि ग 0 रूि त् → त्ए ग से कम या ग के बराबर महत्तम पूणार्ंक का मान ग्रहण ;धरणद्ध करता है ऐसा पफलनमहत्तम पूणार्ंक पफलन कहलाता है। ख्ग,ए की परिभाषा से हम देख सकते हैं कि ख्ग,त्र दृ1 यदि दृ1 ≤ ग ढ 0 ख्ग,त्र 0 यदि 0 ≤ ग ढ 1 ख्ग,त्र 1 यदि 1 ≤ ग ढ 2 ख्ग, त्र 2 यदि 2 ≤ ग ढ 3 इत्यदि इस पफलन का आलेख आवृफति 2.15 में दशार्या गया है। आवृफति 2ण्15 2ण्4ण्2 वास्तविक पफलनों का बीजगण्िात ;।सहमइतं व ितमंस निदबजपवदेद्ध इस अनुच्छेद में, हम सीखेंगे कि किस प्रकार दो वास्तविक पफलनों को जोड़ा जाता है, एक वास्तविक पफलन को दूसरे में से घटाया जाता है, एक वास्तविक पफलन को किसी अदिश ;यहाँ आदिश का अभ्िाप्राय वास्तविक संख्या से हैद्ध से गुणा किया जाता है, दो वास्तविक पफलनों का गुणा किया जाता है तथा एक वास्तविक पफलन को दूसरे से भाग दिया जाता है। ;पद्ध दो वास्तविक पफलनों का योग मान लीजिए कि िरू ग् → त् तथा ह रू ग् → त् कोइर् दो वास्तविक पफलन हैं, जहाँ ग् ⊂ त्ण् तब हम ; ि़ हद्धरू ग् → त् को, सभी ग ∈ ग् के लिए, ; ि़ हद्ध ;गद्ध त्र ि;गद्ध ़ ह ;गद्धए द्वारा परिभाष्िात करते हैं। ;पपद्ध एक वास्तविक पफलन में से दूसरे को घटाना मान लीजिए कि िरूग् → त् तथा हरूग् → त् कोइर् दो वास्तविक पफलन हैं, जहाँ ग् ⊂ त्ण् तब हम ; िदृ हद्ध रू ग्→त् को सभी ग ∈ ग्ए के लिए ;िहद्ध ;गद्ध त्र ;िगद्ध दृह;गद्धए द्वारा परिभाष्िात करते हैं। ;पपपद्ध एक अदिश से गुणा मान लीजिए कि िरू ग्→त् एक वास्तविक मान पफलन है तथा α एक अदिश है। यहाँ अदिश से हमारा अभ्िाप्राय किसी वास्तविक संख्या से है। तब गुणनपफल α िए ग् से त् में एक पफलन है, जो ;α िद्ध ;गद्ध त्र α ि;गद्धए ग ∈ग् से परिभाष्िात होता है। ;पअद्ध दो वास्तविक पफलनों का गुणन दो वास्तविक पफलनों रूि ग् → त् तथा हरू ग्→त् का गुणनपफल ;या गुणाद्ध एक पफलन हिरू ग्→त् है, जो सभी ;हिद्ध ;गद्ध त्र ;िगद्ध ह;गद्धए ग ∈ ग् द्वारा परिभाष्िात है। इसे बिंदुशः गुणन भी कहते हैं। ;अद्ध दो वास्तविक पफलनों का भागपफल मान लीजिए कि ितथा हए ग्→त् द्वारा परिभाष्िात, िदोवास्तविक पफलन हैं, जहाँ ग् ⊂त्ण् िका ह से भागपफल, जिसे ह से निरूपित करते हैं, एक पफलन ⎛⎞िगि;द्धग त्रहै, जो सभी ग ∈ ग् जहाँ ह;गद्ध ≠0ए के लिए, ⎜⎟;द्ध हग ए द्वारा परिभाष्िात है।ह ;द्ध⎝⎠ उदाहरण 16 मान लीजिए कि ;िगद्ध त्र ग 2 तथा ह;गद्ध त्र 2ग ़ 1 दो वास्तविक पफलन हैं। ⎛⎞िग; ि़ हद्ध ;गद्धए ; िदृहद्ध ;गद्धए ;हिद्ध ;गद्धए ⎜⎟;द्ध ज्ञात कीजिए।ह⎝⎠ हल स्पष्टतः ; ि़ हद्ध ;गद्ध त्र ग 2 ़ 2ग ़ 1ए ; िदृहद्ध ;गद्ध त्र ग 2 दृ 2ग दृ 1ए ⎛⎞ ग 1232 गि2 ;हिद्ध ;गद्ध त्र ग ;2ग ़ 1द्ध त्र 2ग ़ ग ए ⎜⎟;द्ध त्र ए ग ≠ −ह 2ग ़⎝⎠12 उदाहरण 17 मान लीजिए कि ;िगद्ध त्र ग तथा ह;गद्ध त्र ग )णेत्तर वास्तविक संख्याओं के लिए ⎛⎞िपरिभाष्िात दो पफलन हैं, तो ; ि़ हद्ध ;गद्धए ; िदृ हद्ध ;गद्ध ;हिद्ध ;गद्ध और ⎜⎟;गद्ध ज्ञात कीजिए।ह⎝⎠हल यहाँ हमें निम्नलिख्िात परिणाम मिलते हैंः ; ि़ हद्ध ;गद्ध त्र ग ़ गए ; िदृ हद्ध ;गद्ध त्र ग दृ ग ए 13 ि⎛⎞ दृ 2;हिद्ध ग त्र ग;गद्ध त्रग2 और ⎜⎟;द्धग त्र ग त्रगएग ≠0ह⎝⎠ ग प्रश्नावली 2ण्3 1ण् निम्नलिख्िात संबंधें में कौन से पफलन हैं? कारण का उल्लेख कीजिए। यदि संबंध् एक पफलन है, तो उसका परिसर निधर्रित कीजिएः ;पद्ध क्ष्;2ए1द्धए ;5ए1द्धए ;8ए1द्धए ;11ए1द्धए ;14ए1द्धए ;17ए1द्धद्व ;पपद्ध क्ष्;2ए1द्धए ;4ए2द्धए ;6ए3द्धए ;8ए4द्धए ;10ए5द्धए ;12ए6द्धए ;14ए7द्धद्व ;पपपद्ध क्ष्;1ए3द्धए ;1ए5द्धए ;2ए5द्धद्वण् 2ण् निम्नलिख्िात वास्तविक पफलनों के प्रांत तथा परिसर ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ;िगद्ध त्र दृ ग ;पपद्ध ;िगद्ध त्र 3ण् एक पफलन ;िगद्ध त्र 2ग दृ5 द्वारा परिभाष्िात है। निम्नलिख्िात के मान लिख्िाएः ;पद्ध ि;0द्धए ;पपद्ध ि;7द्धए ;पपपद्ध ि;दृ3द्धण् 4ण् पफलन ष्जष् सेल्िसयस तापमान का पफारेनहाइट तापमान में प्रतिचित्राण करता है, जो9ब् ज;ब्द्ध त्र 5 ़ 32 द्वारा परिभाष्िात हैं निम्नलिख्िात को ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ज ;0द्ध ;पपद्ध ज ;28द्ध ;पपपद्ध ज ;दृ10द्ध ;पअद्ध ब् का मान, जब ज ;ब्द्ध त्र 212ण् 5ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक पफलन का परिसर ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ि;गद्ध त्र 2 दृ 3गए ग ∈ त्ए ग झ 0ण् ;पपद्ध ि;गद्ध त्र ग2 ़ 2एग एक वास्तविक संख्या है। ;पपपद्ध ि;गद्ध त्र गए ग एक वास्तविक संख्या है। विविध् उदाहरण उदाहरण 18 मान लीजिए कि त् वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है। एक वास्तविक पफलन उदाहरण 19 मान लीजिए कि त्ए फ से फ में त् त्र क्ष्;ंएइद्धरू ंएइ ∈ फ तथा ं दृ इ ∈ र्द्वण् द्वारा परिभाष्िात, एक संबंध् है। सि( कीजिए कि ;पद्ध ;ंएंद्ध ∈ त् सभी ं ∈ फ के लिए ;पपद्ध ;ंएइद्ध ∈ त् का तात्पयर् है कि ;इए ंद्ध ∈ त् ;पपपद्ध ;ंएइद्ध ∈ त् और ;इएबद्ध ∈ त् का तात्पयर् है कि ;ंएबद्ध ∈त् हल ;पद्ध क्योंकि ं दृ ं त्र 0 ∈ र्ए जिससे निष्कषर् निकलता है कि ;ंए ंद्ध ∈ त्ण् ;पपद्ध ;ंएइद्ध ∈ त् का तात्पयर् है कि ं दृ इ ∈ र्ण् इसलिएए इ दृ ं ∈ र्ण् अतःए ;इए ंद्ध ∈ त् ;पपपद्ध ;ंए इद्ध तथा ;इए बद्ध ∈ त् तात्पयर् है कि ं दृ इ ∈ र्ण् इ दृ ब ∈ र्ण् इसलिएए ं दृ ब त्र ;ं दृ इद्ध ़ ;इ दृ बद्ध ∈ र्ण् अतःए ;ंएबद्ध ∈ त् उदाहरण 20 यदि ित्र क्ष्;1ए1द्धए ;2ए3द्धए ;0ए दृ1द्धए ;दृ1ए दृ3द्धद्वए र् से र्ण्में एक ‘रैख्िाक पफलन है, तो ;िगद्ध ज्ञात कीजिए। हल क्योंकि िएक रैख्िाक पफलन है, इसलिए ि;गद्ध त्र उग ़ बण् पुनः क्योंकि ;1ए 1द्धए ;0ए दृ 1द्ध ∈ त् है। इसलिए, ि;1द्ध त्र उ ़ ब त्र 1 तथा ि;0द्ध त्र ब त्र दृ1ण् इससे हमें उ त्र 2 मिलता है और इस प्रकार;िगद्ध त्र 2ग दृ 1ण् ग2 ़ 3ग ़ 5गि 2गदृ 5ग ़ 4उदाहरण 21 पफलन ;द्धत्र का प्रांत ज्ञात कीजिए। हल क्योंकि ग 2 दृ5ग ़ 4 त्र ;ग दृ 4द्ध ;ग दृ1द्धए इसलिए पफलन एि ग त्र 4 और ग त्र 1 के अतिरिक्त अन्य सभी वास्तविक संख्याओं के लिए परिभाष्िात है। अतः िका प्रांत त् दृ क्ष्1ए 4द्व है। उदाहरण 22 पफलन िए ⎧1− गएगढ0 ⎪⎨1 एग त्र0ि;गद्ध त्र ⎪ग ़1एग झ0⎩ द्वारा परिभाष्िात है। ि;गद्ध का आलेख खींचिए। हल यहाँ ;िगद्ध त्र1 दृ गए ग ढ 0ए से ;िदृ 4द्ध त्र1 दृ ;दृ 4द्ध त्र 5य ;िदृ 3द्ध त्र1 दृ ;दृ 3द्ध त्र 4ए ;िदृ 2द्ध त्र1 दृ ;दृ 2द्ध त्र 3 ;िदृ1द्ध त्र1 दृ ;दृ1द्ध त्र 2य इत्यादि और ;ि1द्ध त्र 2ए ;ि2द्ध त्र 3ए ;ि3द्ध त्र 4 ;ि4द्ध त्र 5 इत्यादि, क्योंकि ;िगद्ध त्र ग़ 1ए गझ 0ण् अतः किा आलेख आवृफति 2.17 में दशार्ए रूप का होगा। अध्याय 2 पर विविध् प्रश्नावली ⎧2⎪गए0 ग 3 ए गि ⎩33गए ग10 1ण् संबंध् ;िद्धत्र ⎨ ≤≤ द्वारा परिभाष्िात है।⎪≤≤ ⎪ग2ए0 ग 2⎧ ≤≤ हग ⎨ ⎩3ए2 गग 10 संबंध् हए ;द्धत्र द्वारा परिभाष्िात है।⎪≤≤ दशार्इए कि क्यों िएक पफलन है और हपफलन नहीं है। 2 ;ि1 1द्ध ण्दृ ि;1द्ध 2ण् यदि ;िगद्ध त्र गए तो ज्ञात कीजिए।;1 1 ण्दृ1द्ध ग2 ़2ग़13ण् पफलन ;िगद्ध त्र का प्रांत ज्ञात कीजिए।28 ़12 गदृग 4ण् ;िगद्ध त्र ;ग−1द्ध द्वारा परिभाष्िात वास्तविक पफलन किा प्रांत तथा परिसर ज्ञात कीजिए। 5ण् ;िगद्ध त्र गदृ1 द्वारा परिभाष्िात वास्तविक पफलन किा प्रांत तथा परिसर ज्ञात कीजिए। ⎧⎛ 2 ⎞⎫⎪ ग ⎪ 6ण् मान लीजिए कि त्रि⎨⎜गए2 ⎟एरू ग∈त्⎬त् से त् में एक पफलन है। किा परिसर⎪ 1़ग ⎪⎩⎝ ⎠⎭ निधर्रित कीजिए। 7ण् मान लीजिए कि एि ह रू त्→त् क्रमशः ;िगद्ध त्र ग ़ 1ए ह;गद्ध त्र 2ग दृ 3ण् द्वारा परिभाष्िात है। िि़ हए िदृ ह और ह ज्ञात कीजिए। 8ण् मान लीजिए कि ित्र क्ष्;1ए1द्धए ;2ए3द्धए ;0एदृ1द्धए ;दृ1ए दृ3द्धद्व र् से र् में, ;िगद्ध त्र ंग ़ इए द्वारा परिभाष्िात एक पफलन है, जहाँ ंए इण् कोइर् पूणार्ंक हैं। ंए इ को निधर्रित कीजिए। 9ण् त् त्र क्ष्;ंए इद्ध रू ंए इ ∈छ तथा ं त्र इ2द्व द्वारा परिभाष्िात छ से छ में, एक संबंध् त् है। क्या निम्नलिख्िात कथन सत्य हैं? ;पद्ध ;ंएंद्ध ∈ त्ए सभी ं ∈ छए ;पपद्ध ;ंएइद्ध ∈ त्ए का तात्पयर् है कि ;इएंद्ध ∈ त् ;पपपद्ध ;ंएइद्ध ∈ त्ए ;इएबद्ध ∈ त् का तात्पयर् है कि ;ंएबद्ध ∈ त्घ् प्रत्येक दशा में अपने उत्तर का औचित्य भी बतलाइए। 10ण् मान लीजिए कि । त्रक्ष्1ए2ए3ए4द्वए ठ त्र क्ष्1ए5ए9ए11ए15ए16द्व और ित्र क्ष्;1ए5द्धए ;2ए9द्धए ;3ए1द्धए ;4ए5द्धए ;2ए11द्धद्वण् क्या निम्नलिख्िात कथन सत्य हैं? ;पद्ध िए । से ठ में एक संबंध् है। ;पपद्ध िए । से ठ में एक पफलन है। प्रत्येक दशा में अपने उत्तर का औचित्य बतलाइए। 11ण् मान लीजिए कि िए ित्र क्ष्;ंइए ं ़ इद्ध रू ंए इ ∈ र्द्व द्वारा परिभाष्िात र् × र् का एक उपसमुच्चय है। क्या एि र् से र् में एक पफलन है? अपने उत्तर का औचित्य भी स्पष्ट कीजिए। 12ण् मान लीजिए कि। त्र क्ष्9ए10ए11ए12ए13द्वतथा िरू ।→छए ि;दद्ध त्र द का महत्तम अभाज्य गुणक द्वारा, परिभाष्िात है। िका परिसर ज्ञात कीजिए। सारांश इस अध्याय में हमनें संबंध् तथा पफलन का अध्ययन किया है। इस अध्याय की मुख्य बातों को नीचे दिया जा रहा है। ऽ क्रमित युग्म किसी विशेष क्रम में समूहित अवयवों का एक युग्म। ऽ कातीर्य गुणन समुच्चयों । तथा ठ का कातीर्य गुणन, समुच्चय । × ठ त्र क्ष्;ंएइद्धरू ं ∈ ।ए इ ∈ ठद्व होता है। विशेष रूप से त् × त् त्र क्ष्;गए लद्धरू गए ल ∈ त्द्व और त् × त् × त् त्र ;गए लए ्रद्धरू गए लए ्र ∈ त्द्व ऽ यदि ;ंए इद्ध त्र ;गए लद्धए तो ं त्र ग तथा इ त्र लण् ऽ यदि द;।द्ध त्र च तथा द;ठद्ध त्र ुए तो द;। × ठद्ध त्र चुण् ऽ । × φ त्र φ ऽ सामान्यतः । × ठ ≠ ठ × ।ण् ऽ संबंध् समुच्चय। से समुच्चय ठ में संबंध् त्ए कातीर्य गुणन । × ठ का एक उपसमुच्चय होता है, जिसे । × ठ के क्रमित युग्मों के प्रथम घटक ग तथा द्वितीय घटक ल के बीच किसी संबंध् को वण्िार्त करके प्राप्त किया जाता है। ऽ किसी अवयव ग का, संबंध् त् के अंतगर्त, प्रतिबिंब ल होता है, जहाँ ;गए लद्ध ∈ त्ए ऽ संबंध् त् के क्रमित युग्मों के प्रथम घटकों का समुच्चय, संबंध् त् का प्रांत होता है। ऽ संबंध् त् के क्रमित युग्मों के द्वितीय घटकों का समुच्चय, संबंध् त् का परिसर होता है। ऽ पफलन समुच्चय । से समुच्चय ठ में पफलन िएक विश्िाष्ट प्रकार का संबंध् होता है, जिसमें समुच्चय । के प्रत्येक अवयव ग का समुच्चय ठ में एक और केवल एक प्रतिबिंब ल होता है इस बात को हम रूि ।→ठ जहाँ ;िगद्ध त्र ल लिखते हैं। । ऽ । पफलन िका प्रांत तथा ठ उसका सहप्रांत होता है। ऽ पफलन िका परिसर, िके प्रतिबिंबों का समुच्चय होता है। ऽ किसी वास्तविक पफलन के प्रांत तथा परिसर दोनों ही वास्तविक संख्याओं का समुच्चय अथवा उसका एक उपसमुच्चय होता हैः ऽ पफलनों का बीजगण्िात पफलन िरू ग् → त् तथा ह रू ग् → त्ए के लिए हम निम्नलिख्िात परिभाषाएँ देते हैं। ; ि़ हद्ध ;गद्ध त्र ;िगद्ध ़ ह;गद्धए ग ∈ ग् ; िदृ हद्ध ;गद्ध त्र ि;गद्ध दृ ह;गद्धए ग ∈ ग्;ण्िहद्ध;गद्ध त्र ि;गद्ध ण्ह ;गद्धए ग ∈ ग्ए ा कोइर् अचर है। ;ाद्धि ;गद्ध त्र ा ि;गद्धए ग ∈ ग् िि;द्धग ग;द्ध त्र ए ग ∈ ग्ए ह;गद्ध ≠ 0ह;द्धहग ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पफलन शब्द सवर्प्रथम ळवजजतिपमक ॅपसीमसउ स्मपइदपज्र ;1646 - 1716 इर्úद्ध द्वारा सन् 1673 में लिख्िात लैटिन पाण्डुलिपि ष्डमजीवकने जंदहमदजपनउ पदअमतेंए ेमन कम निबजपवदपइनेष् में परिलक्ष्िात हुआ है। स्मपइदपज्र ने इस शब्द का प्रयोग अविश्लेषणात्मक भाव में किया है। उन्होंने पफलन को ‘गण्िातीय कायर्’ तथा ‘कमर्चारी’ के पदों द्वारा उत्प मात्रा एक वक्र के रूप में अध्िकल्िपत किया है। जुलाइर् 5, सन् 1698 में श्रवीद ठमतदवनससप नें स्मपइदपज्र को लिखे एक प्रत्रा में पहली बार सुविचारित रूप से पफलन शब्द का विश्लेषणात्मक भाव में विश्िाष्ट प्रयोग निधर्रित किया है। उसी माह में स्मपइदपज्र ने अपनी सहमति दशार्ते हुए उत्तर भी दे दिया था। अंग्रेशी भाषा में पफलन ;थ्नदबजपवदद्ध शब्द सन् 1779 के ब्ींउइमतश्े ब्लबसवचंमकपं में पाया जाता है। बीजगण्िात में पफलन शब्द का प्रयोग चर राश्िायों और संख्याओं अथवा स्िथर राश्िायों द्वारा संयुक्त रूप से बने विश्लेषणात्मक व्यंजको के लिए किया गया है। कृ ऽ कृ

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Ganit







अध्याय 2


संबंध एवं फलन (Relations and Functions)

"Mathematics is the indispensable instrument of all physical research. BERTHELOT"

2.1 भूमिका (Introduction)

गणित का अधिकांश भाग पैटर्न अर्थात् परिवर्तनशील राशियों के बीच अभिज्ञेय (पहचान योग्य)कड़ियों को ज्ञातImg01 करने के बारे में है। हमारे दैनिक जीवन में, हम संबंधों को चित्रित करने वाले अनेक पैटर्नों के बारे में जानते हैं, जैसे भाई और बहन, पिता और पुत्र, अध्यापक और विद्यार्थी इत्यादि। गणित में भी हमें बहुत से संबंध मिलते हैं जैसे ‘संख्या m, संख्या n, से छोटी है’, ‘रेखा l, रेखा m, के समांतर है’, ‘समुच्चय A, समुच्चय B का उपसमुच्चय है’। इन सभी में हम देखते हैं कि किसी संबंध मं एेसे युग्म सम्मिलित होते हैं जिनके घटक एक निश्चित क्रम में होते हैं। इस अध्याय में हम सीखेंगे कि किस प्रकार दो समुच्चयों के सदस्यों के युग्म बनाए जा सकते हैं और फिर उन युग्मों में आने वाले दोनों सदस्यों के बीच बनने वाले संबंधों को सुस्पष्ट करेंगे। अंत में, हम एेसे विशेष संबंधों के बारे में जानेंगे, जो फलन बनने के योग्य हैं। फलन की परिकल्पना गणित में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह एक वस्तु से दूसरी वस्तु के बीच गणितानुसार यथातथ्य संगतता के विचार का अभिग्रहण करती है।

2.2 समुच्चयों का कार्तीय गुणन (Cartesian Product of Sets)

मान लीजिए कि A, दो प्रकार के रंगों का और B, तीन वस्तुओं का समुच्चय है, अर्थात् A = {लाल, नीला}और B = {b, c, s},

जहाँ b, c और s क्रमशः किसी विशेष बैग, कोट और कमीज को निरूपित करते हैं। इन दोनों समुच्चयों से कितने प्रकार की रंगीन वस्तुओं के युग्म बनाए जा सकते हैं? क्रमबद्ध तरीके से प्रगति करते हुए हम देखते हैं कि निम्नलिखित 6 भिन्न-भिन्न युग्म प्राप्त होते हैं। (लाल, b), (लाल, c), (लाल, s), (नीला, b), (नीला, c), (नीला, s) इस प्रकार हमें 6 भिन्न-भिन्न वस्तुएँ प्राप्त होती हैं (आकृति 2.1)।

आकृति 2.1

पिछली कक्षाओं से स्मरण कीजिए कि, एक क्रमित युग्म, अवयवों का वह युग्म है, जिसे वक्र कोष्ठक में लिखते हैं और जिनको एक दूसरे से किसी विशेष क्रम में समूहित किया जाता है अर्थात् (p,q), p P और q Q इसे निम्नलिखित परिभाषा से स्पष्ट किया जा सकता है।

परिभाषा 1 दो अरिक्त समुच्चयों P तथा Q का कार्तीय गुणन P × Q उन सभी क्रमित युग्मों का समुच्चय है, जिनको प्रथम घटक P से तथा द्वितीय घटक Q, से लेकर बनाया जा सकता है। अतः

P × Q = { (p,q) : p P, q Q }

यदि P या Q में से कोई भी रिक्त समुच्चय है, तो उनका कार्तीय गुणन भी रिक्त समुच्चय होता है, अर्थात् P × Q = φ

उपरोक्त दृष्टांत से हम जानते हैं कि

A × B = {(लाल,b), (लाल,c), (लाल,s), (नीला,b), (नीला,c), (नीला,s)}

पुनः निम्नलिखित दो समुच्चयों पर विचार कीजिए।

A = {DL, MP, KA}, जहाँ DL, MP, KA दिल्ली, मध्य प्रदेश, तथा कर्नाटक को निरूपित करते हैं और B = {01,02, 03}क्रमशः दिल्ली, मध्य प्रदेश और कर्नाटक द्वारा गाड़ियों के लिए जारी लाइसेंस प्लेट की सांकेतिक संख्याएँ प्रकट करते हैं।

यदि तीन राज्य दिल्ली, मध्य प्रदेश और कर्नाटक, गाड़ियों के लाइसेंस प्लेट के लिए संकेत पद्धति (संकेतिकी) इस प्रतिबंध के साथ बना रहे हों कि संकेत पद्धति, समुच्चय A के अवयव से प्रारंभ हो, तो इन समुच्चयों से प्राप्त होने वाले युग्म कौन से हैं तथा इन युग्मों की कुल संख्या कितनी है (आकृति 2.2)?

आकृति 2.2

प्राप्त होने वाले युग्म इस प्रकार हैं, (DL,01), (DL,02), (DL,03), (MP,01), (MP,02), (MP,03), (KA,01), (KA,02), (KA,03) और समुच्चय A तथा समुच्चय B का कार्तीय गुणन इस प्रकार होगा,

A × B = {(DL,01), (DL,02), (DL,03), (MP,01), (MP,02), (MP,03), (KA,01), (KA,02),(ज्ञ।ए03)द्व.

यह सरलता से देखा जा सकता है कि कार्तीय गुणन में इस प्रकार 9 युग्म हैं क्योंकि समुच्चय A और B में से प्रत्येक में 3 अवयव हैं। इससे हमें 9 संभव संकेत पद्धतियाँ मिलती हैं। यह भी नोट कीजिए कि इन अवयवों के युग्म बनाने का क्रम महत्त्वपूर्ण (निर्णायक) है। उदाहरण के लिए सांकेतिक संख्या (DL, 01) वही नहीं है जो सांकेतिक संख्या (01, DL) है।

आकृति 2.3

अंत में स्पष्टीकरण के लिए समुच्चय A= {a1, a2} और

B = {b1, b2, b3, b4} पर विचार कीजिए (आकृति 2.3)। यहाँ

A × B = {( a1, b1), (a1, b2), (a1, b3), (a1, b4), (a2, b1), (a2, b2), (a2, b3), (a2, b4)}.

यदि A और B, वास्तविक संख्याओं के समुच्चय के उपसमुच्चय हों, तो इस प्रकार प्राप्त 8 क्रमित युग्म किसी समतल के बिंदुओं की स्थिति निरूपित करते हैं तथा यह स्पष्ट है कि (a1, b2) पर स्थित बिंदु, (b2, a1) पर स्थित बिंदु से भिन्न हैं।

टिप्पणी

(i) दो क्रमित युग्म समान होते हैं, यदि और केवल यदि उनके संगत प्रथम घटक समान हों और संगत द्वितीय घटक भी समान हों।

(ii) यदि A में p अवयव तथा B में q अवयव हैं, तो A × B में pq अवयव होते हैं अर्थात् यदि n(A) = p तथा n(B) = q, तो n(A × B) = pq.

(iii) यदि A तथा B अरिक्त समुच्चय हैं और A या B में से कोई अपरिमित है, तो A × B भी अपरिमित समुच्चय होता है।

(iv) A × A × A = {(a, b, c) : a, b, c A}. यहाँ (a, b, c) एक क्रमित त्रिक कहलाता है।

उदाहरण 1 यदि (x + 1, y – 2) = (3,1), तो x और y के मान ज्ञात कीजिए।

हल क्योंकि क्रमित युग्म समान है, इसलिए संगत घटक भी समान होंगे।

अतः x + 1 = 3 और y – 2 = 1.

सरल करने पर x = 2 और y = 3.

उदाहरण 2 यदि P = {a, b, c} और Q = {r}, तो P × Q तथा Q × P ज्ञात कीजिए। क्या दोनों कार्तीय गुणन समान हैं?

हल कार्तीय गुणन की परिभाषा से

P × Q = {(a, r), (b, r), (c, r)} और Q × P = {(r, a), (r, b), (r, c)}

क्योंकि, क्रमित युग्मों की समानता की परिभाषा से, युग्म (a, r) युग्म (r, a), के समान नहीं है और यह बात कार्तीय गुणन के प्रत्येक युग्म के लिए लागू होती है, जिससे हम निष्कर्ष निकालते हैं कि P × Q Q × P.

तथापि, प्रत्येक समुच्चय में अवयवों की संख्या समान है।

दाहरण 3 मान लीजिए कि A = {1,2,3}, B = {3,4} और C = {4,5,6}. निम्नलिखित ज्ञात कीजिएः

(i) A × (B C) (ii) (A × B) (A × C)

(iii) A × (B C) (iv) (A × B) (A × C)

हल (i) दो समुच्चयों के सर्वनिष्ठ की परिभाषा से (B C) = {4}.

अतः A × (B C) = {(1,4), (2,4), (3,4)}.

(ii) अब (A × B) = {(1,3), (1,4), (2,3), (2,4), (3,3), (3,4)}

और (A × C) = {(1,4), (1,5), (1,6), (2,4), (2,5), (2,6), (3,4), (3,5), (3,6)}

इसलिए (A × B) (A × C) = {(1, 4), (2, 4), (3, 4)}.

(iii) क्योंकि (B C) = {3, 4, 5, 6}

अतः A × (B C) = {(1,3), (1,4), (1,5), (1,6), (2,3), (2,4), (2,5), (2,6), (3,3),

(3,4), (3,5), (3,6)}.

(iv) भाग (ii) से A × B तथा A × C समुच्चयों के प्रयोग से हमें निम्नलिखित प्राप्त होता हैः

(A × B) (A × C) = {(1,3), (1,4), (1,5), (1,6), (2,3), (2,4), (2,5), (2,6),

(3,3), (3,4), (3,5), (3,6)}.

उदाहरण 4 यदि P = {1, 2}, तो समुच्चय P × P × P ज्ञात कीजिए।

हल P × P × P = {(1,1,1), (1,1,2), (1,2,1), (1,2,2), (2,1,1), (2,1,2), (2,2,1), (2,2,2)}.

उदाहरण 5 यदि R समस्त वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है, तो कार्तीय गुणन R × R और  R × R × R क्या निरूपित करते हैं?

हल कार्तीय गुणन R × R समुच्चय R × R={(x, y) : x, y R}

को निरूपित करता है, जिसका प्रयोग द्विविम समष्टि के बिंदुओं के निर्देशांकों को प्रकट करने के लिए किया जाता है। R × R × R समुच्चय R × R × R ={(x, y, z) : x, y, z Rको निरूपित करता है, जिसका प्रयोग त्रिविमीय आकाश के बिंदुओं के निर्देशांकों को प्रकट करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण 6 यदि A × B ={(p, q),(p, r), (m, q), (m, r)}, तो A और B को ज्ञात कीजिए।

हल A = प्रथम घटकों का समुच्चय = {p, m}

B = द्वितीय घटकों का समुच्चय = {q, r}.

प्रश्नावली 2.1

1. यदि , तो x तथा y ज्ञात कीजिए।

2. यदि समुच्चय A में 3 अवयव हैं तथा समुच्चय B = {3, 4, 5}, तो (A×B) में अवयवों की संख्या ज्ञात कीजिए।

3. यदि G = {7, 8} और H = {5, 4, 2}, तो G × H और H × G ज्ञात कीजिए।

4. बतलाइए कि निम्नलिखित कथनों में से प्रत्येक सत्य है अथवा असत्य है। यदि कथन असत्य है, तो दिए गए कथन को सही बना कर लिखिए।

(i) यदि P = {m, n} और Q = { n, m}, तो P × Q = {(m, n),(n, m)}.

(ii) यदि A और B अरिक्त समुच्चय हैं, तो A × B क्रमित युग्मों (x, y) का एक अरिक्त समुच्चय है, इस प्रकार कि x A तथा y B.

(iii) यदि A = {1, 2}, B = {3, 4}, तो A × (B φ) = φ.

5. यदि A = {–1, 1}, तो A × A × A ज्ञात कीजिए।

6. यदि A × B = {(a, x),(a , y), (b, x), (b, y)} तो A तथा B ज्ञात कीजिए।

7. मान लीजिए कि A = {1, 2}, B = {1, 2, 3, 4}, C = {5, 6} तथा D = {5, 6, 7, 8}. सत्यापित कीजिए कि

(i) A × (B C) = (A × B) (A × C). (ii) A × C, B × D का एक उपसमुच्चय है।

8. मान लीजिए कि A = {1, 2} और B = {3, 4}. A × B लिखिए। A × B के कितने उपसमुच्चय होंगे? उनकी सूची बनाइए।

9. मान लीजिए कि A और B दो समुच्चय हैं, जहाँ n(A) = 3 और n(B) = 2. यदि (x, 1), (y, 2), (z, 1), A × B में हैं, तो A और B, को ज्ञात कीजिए, जहाँ x, y और z भिन्न-भिन्न अवयव हैं।

10. कार्तीय गुणन A × A में 9 अवयव हैं, जिनमें (–1,0) तथा (0,1) भी है। समुच्चय A ज्ञात कीजिए तथा A × A के शेष अवयव भी ज्ञात कीजिए।

2.3 संबंध (Relation)

दो समुच्चयों P = {a,b,c} तथा Q = {Ali, Bhanu, Binoy, Chandra, Divya} पर विचार कीजिए। P तथा Q के कार्तीय गुणन में 15 क्रमित युग्म हैं, जिन्हें इस प्रकार सूचीबद्ध किया जा सकता है,

P × Q = {(a, Ali), (a,Bhanu), (a, Binoy), ..., (c, Divya)}.


आकृति 2.4

अब हम प्रत्येक क्रमित युग्म (x, y) के प्रथम घटक x तथा द्वितीय घटक y के बीच एक संबंध R स्थापित कर P × Q का एक उपसमुच्चय इस प्रकार प्राप्त कर सकते हैं।

R = { (x,y): x, नाम y का प्रथम अक्षर है, x P, y Q} इस प्रकार

R = {(a, Ali), (b, Bhanu), (b, Binoy), (c, Chandra)}

संबंध R का एक दृष्टि-चित्रण, जिसे तीर आरेख कहते हैं, आकृति 2.4 में प्रदर्शित है।

परिभाषा 2 किसी अरिक्त समुच्चय A से अरिक्त समुच्चय B में संबंध कार्तीय गुणन A × B का एक उपसमुच्चय होता है यह उपसमुच्चय A × B के क्रमति युग्मों के प्रथम तथा द्वितीय घटकों के मध्य एक संबंध स्थापित करने से प्राप्त होता है। द्वितीय घटक, प्रथम घटक का प्रतिबिंब कहलाता है।

परिभाषा 3 समुच्चय A से समुच्चय B में संबंध R के क्रमित युग्मों के सभी प्रथम घटकों के समुच्चय को संबंध R का प्रांत कहते हैं।

परिभाषा 4 समुच्चय A से समुच्चय B में संबंध R के क्रमित युग्मों के सभी द्वितीय घटकों के समुच्चय को संबंध R का परिसर कहते हैं। समुच्चय B संबंध R का सह-प्रांत कहलाता है। नोट कीजिए कि, परिसर सहप्रांत

टिप्पणी (i) एक संबंध का बीजीय निरूपण या तो रोस्टर विधि या समुच्चय निर्माण विधि द्वारा किया जा सकता है।

(ii) एक तीर आरेख किसी संबंध का एक दृष्टि चित्रण है।

उदाहरण 7 मान लीजिए कि A = {1, 2, 3, 4, 5, 6}. R = {(x, y) : y = x + 1 } द्वारा A से A में एक संबंध परिभाषित कीजिए।

(i) इस संबंध को एक तीर आरेख द्वारा दर्शाइए।

(ii) R के प्रांत, सहप्रांत तथा परिसर लिखिए।

हल (i) परिभाषा द्वारा
R
= {(1,2), (2,3), (3,4), (4,5), (5,6)}.

आकृति 2.5

संगत तीर आरेख आकृति 2.5 में प्रदर्शित है।

(ii) हम देख सकते हैं कि प्रथम घटकों का समुच्चय अर्थात् प्रांत={1, 2, 3, 4, 5,} इसी प्रकार, द्वितीय घटकों का समुच्चय अर्थात् परिसर = {2, 3, 4, 5, 6}तथा सहप्रांत = {1, 2, 3, 4, 5, 6}.

उदाहरण 8 नीचे आकृति 2.6 में समुच्चय P और Q के बीच एक संबंध दर्शाया गया है। इस संबंध को (i) समुच्चय निर्माण रूप में (ii) रोस्टर रूप में लिखिए। इसके प्रांत तथा परिसर क्या हैं?

हल स्पष्टतः संबंध R, “x, y का वर्ग है

(i) समुच्चय निर्माण रूप में, R = {(x, y): x, y का वर्ग है, x P, y Q}

(ii) रोस्टर रूप में, R = {(9, 3), (9, –3), (4, 2), (4, –2), (25, 5), (25, –5)}

आकृति 2.6

इस संबंध का प्रांत {4, 9, 25} है।

इस संबंध का परिसर {– 2, 2, –3, 3, –5, 5}.

नोट कीजिए कि अवयव 1, P के किसी भी अवयव से संबंधित नहीं है तथा समुच्चय Q इस संबंध का सहप्रांत है।

टिप्पणी किसी समुच्चय A से समुच्चय B में संबंधों की कुल संख्या, A × B के संभव उपसमुच्चयों की संख्या के बराबर होती है। यदि n(A ) = p और n(B) = q, तो n(A × B) = pq और संबंधों की कुल संख्या 2pq होती है।


उदाहरण 9 मान लीजिए कि A = {1, 2} और B = {3, 4}. A से B में संबंधों की संख्या ज्ञात कीजिए।

हल यहाँ A × B = {(1, 3), (1, 4), (2, 3), (2, 4)}.

क्योंकि n (A×B ) = 4, इसलिए A×B के उपसमुच्चयों की संख्या 24 है। इसलिए A से B के संबंधों की संख्या 24 है।

टिप्पणी A से A के संबंध को ‘A पर संबंध भी कहते हैं।


प्रश्नवाली 2.2

1. मान लीजिए कि A = {1, 2, 3,...,14}.R = {(x, y) : 3x y = 0, जहाँ x, y A} द्वारा, A से A का एक संबंध R लिखिए। इसके प्रांत, सहप्रांत और परिसर लिखिए।

2. प्राकृत संख्याओं के समुच्चय पर R = {(x, y) : y = x + 5, x संख्या 4 से कम, एक प्राकृत संख्या है, x, y }द्वारा एक संबंध R परिभाषित कीजिए। इस संबंध को (i) रोस्टर रूप में इसके प्रांत और परिसर लिखिए।

3. A = {1, 2, 3, 5} और B = {4, 6, 9}. A से B में एक संबंध R = {(x, y): x और y का अंतर विषम है, x A, y B} द्वारा परिभाषित कीजिए। R को रोस्टर रूप में लिखिए।

4. आकृति 2.7, समुच्चय P से Q का एक संबंध दर्शाती है। इस संबंध को

(i) समुच्चय निर्माण रूप (ii) रोस्टर रूप में लिखिए। इसके प्रांत तथा परिसर क्या हैं?

5. मान लीजिए कि A = {1, 2, 3, 4, 6}. मान लीजिए कि R, A पर {(a, b): a , b A, संख्या a संख्या b को यथावथ विभाजित करती है}द्वारा परिभाषित एक संबंध है।

(i) R को रोस्टर रूप में लिखिए

(ii) R का प्रांत ज्ञात कीजिए

(iii) R का परिसर ज्ञात कीजिए।

आकृति 2.7

6. R = {(x, x + 5) : x {0, 1, 2, 3, 4, 5}}द्वारा परिभाषित संबंध R के प्रांत और परिसर ज्ञात कीजिए।

7. संबंध R = {(x, x3) : x संख्या 10 से कम एक अभाज्य संख्या है} को रोस्टर रूप में लिखिए।

8. मान लीजिए कि A = {x, y, z} और B = {1, 2}, A से B के संबंधों की संख्या ज्ञात कीजिए।

9. मान लीजिए कि R, Z पर, R = {(a,b): a, b Z, a b एक पूर्णांक है}, द्वारा परिभाषित एक संबंध है। R के प्रांत तथा परिसर ज्ञात कीजिए।

2.4 फलन (Function)

इस अनुच्छेद में, हम एक विशेष प्रकार के संबंध का अध्ययन करेंगे, जिसे फलन कहते हैं। हम फलन को एक नियम के रूप में देख सकते हैं, जिससे कुछ दिए हुए अवयवों से नए अवयव उत्पन्न होते हैं। फलन को सूचित करने के लिए अनेक पद प्रयुक्त किए जाते हैं, जैसे ‘प्रतिचित्र’ अथवा ‘प्रतिचित्रण’

परिभाषा 5 एक समुच्चय A से समुच्चय B का संबंध, f एक फलन कहलाता है, यदि समुच्चय A के प्रत्येक अवयव का समुच्चय B में, एक और केवल एक प्रतिबिंब होता है।

दूसरे शब्दों में, फलन f, किसी अरिक्त समुच्चय A से एक अरिक्त समुच्चय B का है, इस प्रकार का संबंध कि f का प्रांत A है तथा f के किसी भी दो भिन्न क्रमित युग्मों के प्रथम घटक समान नहीं हैं।

यदि f, A से B का एक फलन है तथा (a, b) f, तो f (a) = b, जहाँ b को f के अंतर्गत a का प्रतिबम्ब तथा a को b का ‘पूर्व प्रतिबिंब’ कहते हैं।

A से B के फलन f को प्रतीकात्मक रूप में f: A →B से निरूपित करते हैं।

पिछले उदाहरणों पर ध्यान देने से हम सरलता से देखते हैं कि उदाहरण 7 में दिया संबंध एक फलन नहीं है, कयोंकि अवयव 6 का कोई प्रतिबिंब नहीं है।

पुनः उदाहरण 8 में दिया संबंध एक फलन नहीं है क्येांकि इसके प्रांत के कुछ अवयवों के एक से अधिक प्रतिबिंब हैं। उदहारण 9 भी फलन नहीं है (क्यों?)। नीचे दिए उदाहरणों में बहुत से संबंधों पर विचार करेंगे, जिनमें से कुछ फलन हैं और दूसरे फलन नहीं हैं।

उदाहरण 10 मान लीजिए कि N प्राकृत संख्याओं का समुच्चय हे और N पर परिभाषित एक संबंधR इस प्रकार है कि R = {(x, y) : y = 2x, x, y N}.

R के प्रांत, सहप्रांत तथा परिसर क्या हैं? क्या यह संबंध, एक फलन है?

हल R का प्रांत, प्राकृत संख्याओं का समुच्चय N है। इसका सहप्रांत भी N है। इसका परिसर सम प्राकृत संख्याओं का समुच्चय है।

क्योंकि प्रत्येक प्राकृत संख्या n का एक और केवल एक ही प्रतिबिंब है, इसलिए यह संबंध एक फलन है।

उदाहरण 11 नीचे दिए संबंधों में से प्रत्येक का निरीक्षण कीजिए और प्रत्येक दशा में कारण सहित बतलाइए कि क्या यह फलन है अथवा नहीं?

(i) R = {(2,1),(3,1), (4,2)}, (ii) R = {(2,2),(2,4),(3,3), (4,4)}

(iii) R = {(1,2),(2,3),(3,4), (4,5), (5,6), (6,7)}

हल (i) क्योंकि R के प्रांत के प्रत्येक अवयव 2, 3, 4 के प्रतिबिंब अद्वितीय हैं, इसलिए यह संबंध एक फलन है।

(ii) क्यांकि एक ही प्रथम अवयव 2, दो भिन्न-भिन्न प्रतिबिंबों 2 और 4 से संबंधित है, इसलिए यह संबंध एक फलन नहीं हैं।

(iii) क्योंकि प्रत्येक अवयव का एक और केवल एक प्रतिबिंब है, इसलिए यह संबंध एक फलन है।

परिभाषा 6 एक एेसे फलन को जिसका परिसर वास्तविक संख्याओं का समुच्चय या उसका कोई उपसमुच्चय हो, वास्तविक मान फलन कहते हैं। यदि वास्तविक चर वाले किसी वास्तविक मान फलन का प्रांत भी वास्तविक संख्याओं का समुच्चय अथवा उसका कोई उपसमुच्चय हो तो इसे वास्तविक फलन भी कहते हैं।

उदाहरण 12 मान लीजिए कि N वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है। f : N Nf (x) = 2x + 1, द्वारा परिभाषित एक वास्तविक मान फलन है। इस परिभाषा का प्रयोग करके, नीचे दी गई सारणी को पूर्ण कीजिए।

x
1 2 3 4 5 6 7
y f (1) = ..... f (2) = ...... f (3) = ...... f (4) = .... f (5) = ...... f (6) = ..... f (7) =......

हल पूर्ण की हुई सारणी नीचे दी गई हैः

x
1 2 3 4 5 6 7
y f (1) = 3 f (2) = 5 f (3) = 7 f (4) = 9 f (5) = 11 f (6) = 13 f (7) =15

       

2.4.1 कुछ फलन और उनके आलेख (Some functions and their graphs)

(i) तत्समक फलन (Identity function) मान लीजिए R वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है। y = f(x), प्रत्येक x R द्वारा परिभाषित वास्तविक मान फलन f : R R है। इस प्रकार के फलन को तत्समक फलन कहते हैं। यहाँ पर f के प्रांत तथा परिसर R हैं। इसका आलेख एक सरल रेखा होता है (आकृति 2.8)। यह रेखा मूल बिंदु से हो कर जाती है।

आकृति 2.8

(ii) अचर फलन (Constant function) y = f (x) = c जहाँ c एक अचर है और प्रत्येक x R द्वारा परिभाषित एक वास्तविक मान फलन f: R R है। यहाँ पर f का प्रांत R है और उसका परिसर {c} है। f का आलेख x-अक्ष के समांतर एक रेखा है, उदाहरण के लिए यदि f(x)=3 प्रत्येक x R है, तो इसका आलेख आकृति 2.9 में दर्शाई रेखा है।

आकृति 2.9

(iii) बहुपद फलन या बहुपदीय फलन (Polynomial function) फलन f : R R, एक बहुपदीय फलन कहलाता है, यदि R के प्रत्येक x के लिए, y = f (x) = a0 + a1x + a2x2 + ...+ an xn, जहाँ n एक ऋणेतर पूर्णांक है तथा a0, a1, a2,...,anR.

f(x) = x3 x2 + 2, और g(x) = x4 + x, द्वारा परिभाषित फलन एक बहुपदीय फलन है जब कि h(x) = + 2x द्वारा परिभाषित फलन h, बहुपदीय फलन नहीं है। (क्यों?)

उदाहरण 13 y = f(x) = x2, x R द्वारा फलन f: R R, की परिभाषा कीजिए। इस परिभाषा का प्रयोग करके नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। इस फलन का प्रांत तथा परिसर क्या हैं? f का आलेख भी खींचिए।
x
-4 -3 -2 -1 0 1 2 1 2
y = f(x) = x2









हल पूरी की हुई तालिका नीचे दी गई हैः


-4 -3 -2 -1 0 1 2 1 2
y = f(x) = x2
16 9 4 1 0 1 4 9 16

f का प्रांत = {x : xR}, f का परिसर = {x2: x R}. f का आलेख आकृति 2.10 में प्रदर्शित है।

आकृति 2.10

उदाहरण 14 f (x) = x3, xR द्वारा परिभाषित फलन f :R R का आलेख खींचिए।

हल यहाँ पर

f(0) = 0, f(1) = 1, f(–1) = –1, f(2) = 8, f(–2) = –8, f(3) = 27; f(–3) = –27, इत्यादि।

f = {(x,x3): xR} f का आलेख आकृति 2.11 में खींचा गया है।

आकृति 2.11

(iv) परिमेय फलन (Rational functions) , के प्रकार के फलन जहाँ f(x) तथा g(x) एक प्रांत में, x के परिभाषित बहुपदीय फलन हैं, जिसमें g(x) 0 परिमेय फलन कहलाते हैं।

उदाहरण 15 एक वास्तविक मान फलन f : R – {0} R की परिभाषा x R –{0} द्वारा कीजिए। इस परिभाषा का प्रयोग करके निम्नलिखित तालिका को पूर्ण कीजिए। इस फलन का प्रांत तथा परिसर क्या हैं?

x
-2 -1.5 -1 -0.5 0.25 0.5 1 1.5 2
y 
.... ..... .... .... .... ... ... .... ....

हल पूर्ण की गई तालिका इस प्रकार हैः

x
-2 -1.5 -1 -0.5 0.25 0.5 1 1.5 2
y 
– 0.5
– 0.67
–1
– 2
4 2 1 0.67
0.5

इसका प्रांत, शून्य के अतिरिक्त समस्त वास्तविक संख्याएँ हैं तथा इसका परिसर भी शून्य के अतिरिक्त समस्त वास्तविक संख्याएँ हैं। f का आलेख आकृति 2.12 में प्रदर्शित है।

आकृति 2.12

(v) मापांक फलन (Modulus functions) f(x) = |x| प्रत्येक x R द्वारा परिभाषित फलन f: RR, मापांक फलन कहलाता है। x के प्रत्येक ऋणेत्तर मान के लिए f(x), x के बराबर होता है। परंतु x के ऋण मानों के लिए, f(x) का मान x, के मान के ऋण के बराबर होता है, अर्थात्

मापांक फलन का आलेख आकृति 2.13 में दिया है। मापांक फलन को निरपेक्ष मान फलन भी कहते हैं।

आकृति 2.13

(vi) चिह्न फलन (Signum functions) प्रत्येक x R, के लिए

द्वारा परिभाषित फलन f:RR चिह्न फलन कहलाता है। चिह्न फलन का प्रांत R है। परिसर समुच्चय {–1, 0, 1}है। आकृति 2.14 में चिह्न फलन का आलेख दर्शाया गया है।


आकृति 2.14

(vii) महत्तम पूर्णांक फलन (Greatest integer functions) f(x) = [x], x R द्वारा परिभाषित फलन f: R R, x से कम या x के बराबर महत्तम पूर्णांक का मान ग्रहण (धारण) करता है एेसा फलन महत्तम पूर्णांक फलन कहलाता है।

[x], की परिभाषा से हम देख सकते हैं कि

[x] = –1 यदि –1 x < 0

[x] = 0 यदि 0 x < 1

[x] = 1 यदि 1 x < 2

[x] = 2 यदि 2 x < 3 इत्यदि

इस फलन का आलेख आकृति 2.15 में दर्शाया गया है।

आकृति 2.15

2.4.2 वास्तविक फलनों का बीजगणित (Algebra of real functions)

इस अनुच्छेद में, हम सीखेंगे कि किस प्रकार दो वास्तविक फलनों को जोड़ा जाता है, एक वास्तविक फलन को दूसरे में से घटाया जाता है, एक वास्तविक फलन को किसी अदिश (यहाँ आदिश का अभिप्राय वास्तविक संख्या से है) से गुणा किया जाता है, दो वास्तविक फलनों का गुणा किया जाता है तथा एक वास्तविक फलन को दूसरे से भाग दिया जाता है।

(i) दो वास्तविक फलनों का योग मान लीजिए कि f : X R तथा g : X R कोई दो वास्तविक फलन हैं, जहाँ X R. तब हम (f + g): X R को, सभी x X के लिए, (f + g) (x) = f (x) + g (x), द्वारा परिभाषित करते हैं।

(ii) एक वास्तविक फलन में से दूसरे को घटाना मान लीजिए कि f : X R तथा g: X R कोई दो वास्तविक फलन हैं, जहाँ X R. तब हम (f g) : XR को सभी x X, के लिए (fg) (x) = f(x) –g(x), द्वारा परिभाषित करते हैं।

(iii) एक अदिश से गुणा मान लीजिए कि f : XR एक वास्तविक मान फलन है तथा α एक अदिश है। यहाँ अदिश से हमारा अभिप्राय किसी वास्तविक संख्या से है। तब गुणनफल α f , X से R में एक फलन है, जो (α f ) (x) = α f (x), x X से परिभाषित होता है।

(iv) दो वास्तविक फलनों का गुणन दो वास्तविक फलनों f: X R तथा g: XR का गुणनफल (या गुणा) एक फलन fg: XR है, जो सभी (fg) (x) = f(x) g(x), x X द्वारा परिभाषित है। इसे बिंदुशः गुणन भी कहते हैं।

(v) दो वास्तविक फलनों का भागफल मान लीजिए कि f तथा g, XR द्वारा परिभाषित, दो वास्तविक फलन हैं, जहाँ XR. f का g से भागफल, जिसे से निरूपित करते हैं, एक फलन है, जो सभी x X जहाँ g(x)0, के लिए, , द्वारा परिभाषित है।

उदाहरण 16 मान लीजिए कि f(x) = x2 तथा g(x) = 2x + 1 दो वास्तविक फलन हैं।

(f + g) (x), (f g) (x), (fg) (x), ज्ञात कीजिए।

हल स्पष्टतः

(f + g) (x) = x2 + 2x + 1, (f g) (x) = x2 – 2x – 1,

(fg) (x) = x2 (2x + 1) = 2x3 + x2, = , x

उदाहरण 17 मान लीजिए कि f(x) =  तथा g(x) = x ऋणेत्तर वास्तविक संख्याओं के लिए परिभाषित दो फलन हैं, तो (f + g) (x), (f g) (x) (fg) (x) और (x) ज्ञात कीजिए।

हल यहाँ हमें निम्नलिखित परिणाम मिलते हैंः

(f + g) (x) = + x, (f g) (x) = x ,

(fg) x  Img02 और

प्रश्नावली 2.3

1. निम्नलिखित संबंधों में कौन से फलन हैं? कारण का उल्लेख कीजिए। यदि संबंध एक फलन है, तो उसका परिसर निर्धारित कीजिएः

(i) {(2,1), (5,1), (8,1), (11,1), (14,1), (17,1)}

(ii) {(2,1), (4,2), (6,3), (8,4), (10,5), (12,6), (14,7)}

(iii) {(1,3), (1,5), (2,5)}.

2. निम्नलिखित वास्तविक फलनों के प्रांत तथा परिसर ज्ञात कीजिएः

(i) f(x) = – (ii) f(x) = .

3. एक फलन f(x) = 2x –5 द्वारा परिभाषित है। निम्नलिखित के मान लिखिएः

(i) f (0), (ii) f (7), (iii) f (–3).

4. फलन t सेल्सियस तापमान का फारेनहाइट तापमान में प्रतिचित्रण करता है, जो
t
(C) = + 32 द्वारा परिभाषित हैं निम्नलिखित को ज्ञात कीजिएः

(i) t (0) (ii) t (28) (iii) t (–10) (iv) C का मान, जब t (C) = 212.

5. निम्नलिखित में से प्रत्येक फलन का परिसर ज्ञात कीजिएः

(i) f (x) = 2 – 3x, x R, x > 0.

(ii) f (x) = x2 + 2, x एक वास्तविक संख्या है।

(iii) f (x) = x, x एक वास्तविक संख्या है।

विविध उदाहरण

उदाहर 18 मान लीजिए कि R वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है। एक वास्तविक फलन f: RR को f(x) = x + 10

द्वारा परिभाषित कीजिए ओर इस फलन का आलेख खींचिए।

हल यहाँ, हम देखते हैं कि f(0) = 10, f(1) = 11,
f
(2) = 12, ..., f(10) = 20, आदि और f(–1) = 9,
f
(–2) = 8, ..., f(–10) = 0, इत्यादि।

आकृति 2.16

अतः दिए हुए फलन के आलेख का आकार आकृति 2.16 में दर्शाए गए रूप का होगा।

टिप्पणी f(x) = mx + c , x R, एक रैखिक फलन कहलाता है, जहाँ m एवं c अचर हैं। उपरोक्त फलन रैखिक फलन का एक उदाहरण है।

उदाहरण 19 मान लीजिए कि R, Q से Q में R = {(a,b): a,b Q तथा a b Z}. द्वारा परिभाषित, एक संबंध है। सिद्ध कीजिए कि

(i) (a,a) R सभी a Q के लिए

(ii) (a,b) R का तात्पर्य है कि (b, a) R

(iii) (a,b) R और (b,c) R का तात्पर्य है कि (a,c) R

हल (i) क्योंकि a a = 0 Z, जिससे निष्कर्ष निकलता है कि (a, a) R.

(ii) (a,b) R का तात्पर्य है कि a b Z. इसलिए, b a Z.  अतः, (b, a) R

(iii) (a, b) तथा (b, c) R तात्पर्य है कि a b Z. b c Z. इसलिएa c = (a – b) + (b – c) Z. अतः, (a,c) R

उदाहरण 20 यदि f = {(1,1), (2,3), (0, –1), (–1, –3)}, Z से Z.में एक ‘रैखिक फलन है, तो f(x) ज्ञात कीजिए।

हल क्योंकि f एक रैखिक फलन है, इसलिए f (x) = mx + c. पुनः क्योंकि (1, 1), (0, – 1) R है। इसलिए, f (1) = m + c = 1 तथा f (0) = c = –1. इससे हमें m = 2 मिलता है और इस प्रकार
f
(x) = 2x – 1.

उदाहरण 21 फलन का प्रांत ज्ञात कीजिए।

हल क्योंकि x2 –5x + 4 = (x – 4) (x –1), इसलिए फलन f, x = 4 और x = 1 के अतिरिक्त अन्य सभी वास्तविक संख्याओं के लिए परिभाषित है। अतः f का प्रांत R – {1, 4} है।

उदाहरण 22 फलन f ,

f (x) =

द्वारा परिभाषित है। f (x) का आलेख खींचिए।

हल यहाँ f(x) = 1 – x, x < 0, से

f(– 4) = 1 – (– 4) = 5;

f(– 3) = 1 – (– 3) = 4,
f
(– 2) = 1 – (– 2) = 3

f(–1) = 1 – (–1) = 2; इत्यादि

और f(1) = 2, f (2) = 3, f (3) = 4

आकृति 2.17

f(4) = 5 इत्यादि, क्योंकि f(x) = x + 1, x > 0.

अतः f का आलेख आकृति 2.17 में दर्शाए रूप का होगा।

अध्याय 2 पर विविध प्रश्नावली

1. संबंध f , द्वारा परिभाषित है।

संबंध g, द्वारा परिभाषित है।

दर्शाइए कि क्यों f एक फलन है और g फलन नहीं है।

2. यदि f (x) = x2, तो ज्ञात कीजिए।

3. फलन f (x) का प्रांत ज्ञात कीजिए।

4. f (x) = द्वारा परिभाषित वास्तविक फलन f का प्रांत तथा परिसर ज्ञात कीजिए।

5. f (x) = द्वारा परिभाषित वास्तविक फलन f का प्रांत तथा परिसर ज्ञात कीजिए।

6. मान लीजिए कि R से R में एक फलन है। f का परिसर निर्धारित कीजिए।

7. मान लीजिए कि f, g : RR क्रमशः f(x) = x + 1, g(x) = 2x – 3. द्वारा परिभाषित है।
f
+ g, f – g और ज्ञात कीजिए।

8. मान लीजिए कि f = {(1,1), (2,3), (0,–1), (–1, –3)} Z से Z में, f(x) = ax + b, द्वारा परिभाषित एक फलन है, जहाँ a, b. कोई पूर्णांक हैं। a, b को निर्धारित कीजिए।

9. R = {(a, b) : a, b N तथा a = b2} द्वारा परिभाषित N से N में, एक संबंध R है। क्या निम्नलिखित कथन सत्य हैं?

(i) (a,a) R, सभी a N, (ii) (a,b) R, का तात्पर्य है कि (b,a) R

(iii) (a,b) R, (b,c) R का तात्पर्य है कि (a,c) R?

प्रत्येक दशा में अपने उत्तर का औचित्य भी बतलाइए।

10. मान लीजिए कि A ={1,2,3,4}, B = {1,5,9,11,15,16} और f = {(1,5), (2,9), (3,1), (4,5), (2,11)}. क्या निम्नलिखित कथन सत्य हैं?

(i) f , A से B में एक संबंध है। (ii) f , A से B में एक फलन है।

प्रत्येक दशा में अपने उत्तर का औचित्य बतलाइए।

11. मान लीजिए कि f , f = {(ab, a + b) : a, b Z} द्वारा परिभाषित Z × Z का एक उपसमुच्चय है। क्या f, Z से Z में एक फलन है? अपने उत्तर का औचित्य भी स्पष्ट कीजिए।

12. मान लीजिए कि A = {9,10,11,12,13}तथा f : AN, f (n) = n का महत्तम अभाज्य गुणक द्वारा, परिभाषित है। ε का परिसर ज्ञात कीजिए।

सारांश

इस अध्याय में हमनें संबंध तथा फलन का अध्ययन किया है। इस अध्याय की मुख्य बातों को नीचे दिया जा रहा है।

  • क्रमित युग्म किसी विशेष क्रम में समूहित अवयवों का एक युग्म।
  • कार्तीय गुणन समुच्चयों A तथा B का कार्तीय गुणन, समुच्चय

A × B = {(a,b): a A, b B} होता है। विशेष रूप से

R × R = {(x, y): x, y R} और R × R × R = (x, y, z): x, y, z R}

  • यदि (a, b) = (x, y), तो a = x तथा b = y.
  • यदि n(A) = p तथा n(B) = q, तो n(A × B) = pq.
  • A × φ = φ
  • सामान्यतः A × B B × A.
  • संबंध समुच्चय A से समुच्चय B में संबंध R, कार्तीय गुणन A × B का एक उपसमुच्चय होता है, जिसे A × B के क्रमित युग्मों के प्रथम घटक x तथा द्वितीय घटक y के बीच किसी संबंध को वर्णित करके प्राप्त किया जाता है।
  • किसी अवयव x का, संबंध R के अंतर्गत, प्रतिबिंब y होता है, जहाँ (x, y) R,
  • संबंध R के क्रमित युग्मों के प्रथम घटकों का समुच्चय, संबंध R का प्रांत होता है।
  • संबंध R के क्रमित युग्मों के द्वितीय घटकों का समुच्चय, संबंध R का परिसर होता है।
  • फलन समुच्चय A से समुच्चय B में फलन f एक विशिष्ट प्रकार का संबंध होता है, जिसमें समुच्चय A के प्रत्येक अवयव x का समुच्चय B में एक और केवल एक प्रतिबिंब y होता है इस बात को हम f: AB जहाँ f(x) = y लिखते हैं। ।
  • A फलन f का प्रांत तथा B उसका सहप्रांत होता है।
  • फलन f का परिसर, f के प्रतिबिंबों का समुच्चय होता है।
  • किसी वास्तविक फलन के प्रांत तथा परिसर दोनों ही वास्तविक संख्याओं का समुच्चय अथवा उसका एक उपसमुच्चय होता हैः
  • फलनों का बीजगणित फलन f : X R तथा g : X R, के लिए हम निम्नलिखित परिभाषाएँ देते हैं।

(f + g) (x) = f(x) + g(x), x X

(f g) (x) = f (x) – g(x), x X

(f.g) (x) = f (x) .g (x), x X, k कोई अचर है।

(kf) (x) = k ( f (x) ), x X

= , x X, g(x) 0


एेतिहासिक पृष्ठभूमि

फलन शब्द सर्वप्रथम Gottfried Wilhelm Leibnitz (1646-1716 ई०) द्वारा सन् 1673 में लिखित लैटिन पा.डुलिपि "Methodus tangentium inversa, seu de fuctionibus" में परिलक्षित हुआ है। Leibnitz ने इस शब्द का प्रयोग अविश्लेषणात्मक भाव में किया है। उन्होंने फलन को ‘गणितीय कार्य’ तथा ‘कर्मचारी’ के पदों द्वारा उत्पन्न मात्र एक वक्र के रूप में
अधिकल्पित किया है।

जुलाई 5, सन् 1698 में John Bernoulli नें Leibnitz को लिखे एक प्रत्र में पहली बार सुविचारित रूप से फलन शब्द का विश्लेषणात्मक भाव में विशिष्ट प्रयोग निर्धारित किया है। उसी माह में Leibnitz ने अपनी सहमति दर्शाते हुए उत्तर भी दे दिया था।

अंग्रेज़ी भाषा में फलन (Function) शब्द सन् 1779 के Chamber's Cyclopaedia में पाया जाता है। बीजगणित में फलन शब्द का प्रयोग चर राशियों और संख्याओं अथवा स्थिर राशियों द्वारा संयुक्त रूप से बने विश्लेषणात्मक व्यंजको के लिए किया गया है।

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