™प्द जीमेम कंले व िबवदसिपबज इमजूममद ंदबपमदज ंदक उवकमतद ेजनकपमेय जीमतम उनेज चनतमसल इम ेवउमजीपदह जव इम ेंपक वित ं ेजनकल ूीपबी कपक दवज इमहपद ूपजी च्लजींहवतंे ंदक ूपसस दवज मदक ूपजी म्पदेजमपदय इनज पे जीम वसकमेज ंदक जीम लवनदहमेज कृ ळण्भ्ण्भ्।त्क्ल् ऽ 1ण्1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध वतर्मान समय में गण्िात के अध्ययन में समुच्चय की परिकल्पना आधरभूत है। आजकल इस परिकल्पना का प्रयोग गण्िात की प्रायः सभी शाखाओं में होता है। समुच्चय का प्रयोग संबंध् एवं पफलन को परिभाष्िात करने के लिए किया जाता है। ज्यामितीय, अनुक्रम, प्रायिकता आदि के अध्ययन में समुच्चय के ज्ञान की आवश्यकता पड़ती है। समुच्चय सि(ांत का विकास जमर्न गण्िातज्ञ ळमवतह ब्ंदजवत ;1845 - 1918द्ध द्वारा किया गया था। त्रिाकोणमितीय श्रेणी के प्रश्नों को सरल करते समय उनका समुच्चय से पहली बार परिचय हुआ था। इस अध्याय में हम समुच्चय से संबंध्ित वुफछ मूलभूत परिभाषाओं और संियाओं पर विचार करेंगे। 1ण्2 समुच्चय और उनका निरूपण ;ैमजे ंदक जीमपत त्मचतमेमदजंजपवदेद्ध दैनिक जीवन में हम बहुध वस्तुओं के संग्रह की चचार् करते हैं, जैसे ताश की गड्डी, व्यक्ितयों की भीड़, िकेट टीम आदि। गण्िात में भी हम विभ्िान्न संग्रहों, की चचार् करते हैं, उदाहरणाथर्, प्रावृफत संख्याओं का संग्रह बिंदुओं का संग्रह, अभाज्य संख्याओं का संग्रह आदि। विशेषतः, हम निम्नलिख्िात संग्रह पर विचार करेंगेः ;पद्ध 10 से कम विषम प्रावृफत संख्याएँ, अथार्त् 1, 3, 5, 7, 9 ;पपद्ध भारत की नदियाँ, ;पपपद्ध अंग्रेशी वणर्माला के स्वर, यानी, ंए मए पए वए नए ;पअद्ध विभ्िान्न प्रकार के त्रिाभुज, ;अद्ध संख्या 210 के अभाज्य गुणनखंड, अथार्त्, 2, 3, 5 तथा 7, ;अपद्ध समीकरण ग2 दृ 5ग ़ 6 त्र 0ए के मूल अथार्त्, 2 तथा 3 यहाँ हम यह देखते हैं कि उपयुर्क्त प्रत्येक उदाहरणों में से वस्तुओं का एक सुपरिभाष्िात संग्रह इस अथर् में है कि किसी वस्तु के संबंध् में हम यह निणर्य निश्िचत रूप से ले सकते हैं कि वह वस्तुएक प्रदत्त संग्रह में है अथवा नहीं है। उदाहरणतः हम यह निश्िचत रूप से कह सकते हैं कि ‘नील नदी’, भारत की नदियों के संग्रह में नहीं है। इसके विपरीत गंगा नदी इस संग्रह में निश्िचतरूप से है। हम नीचे ऐसे समुच्चय के कुछ और उदाहरण दे रहे हैं, जिनका प्रयोग गण्िात में विशेषरूप से किया जाता हैऋ छरू प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय र्रू पूणा±कों का समुच्चय फरू परिमेय संख्याओं का समुच्चय त्रू वास्तविक संख्याओं का समुच्चय ऱ् रू ध्न पूणा±कों का समुच्चय फ़रू ध्न परिमेय संख्याओं का समुच्चय त़् रू ध्न वास्तविक संख्याओं का समुच्चय इन विशेष समुच्चयों के लिए निधर्रित उपयुर्क्त प्रतीकों का प्रयोग हम इस पुस्तक में निरंतर करते रहेंगे। इसके अतिरिक्त विश्व के पाँच सवार्ध्िक विख्यात गण्िातज्ञों का संग्रह एक सुपरिभाष्िात समुच्चय नहीं है, क्योंकि सवार्ध्िक विख्यात गण्िातज्ञों के निणर्य करने का मापदंड एक व्यक्ित से दूसरे व्यक्ित के लिए भ्िान्न - भ्िान्न हो सकता है। अतः यह एक सुपरिभाष्िात संग्रह नहीं है। अतः ‘वस्तुओं के सुपरिभाष्िात संग्रह’ को हम एक समुच्चय कहते हैं। यहाँ पर हमें निम्नलिख्िात बिंदुओं पर ध्यान देना हैः ;पद्ध समुच्यय के लिए वस्तुएँ, अवयव तथा सदस्य पयार्यवाची पद हैं। ;पपद्ध समुच्यय को प्रायः अंग्रेशी वणर्माला के बड़े अक्षरों से निरूपित करते हैं, जैसे ।ए ठए ब्ए ग्ए ल्ए र् आदि ;पपपद्ध समुच्चय के अवयवों को अंग्रेशी वणर्माला के छोटे अक्षरों द्वारा प्रदश्िार्त करते हैं, जैसे ंए इए बए गए लए ्र आदि यदि ंए समुच्चय । का एक अवयव है, तो हम कहते हंै कि ‘ं समुच्चय । में है’। वाक्यांश ‘अवयव है’ ‘सदस्य है’ या ‘में है’ को सूचित करने के लिए यूनानी प्रतीक ‘‘∈ ;मचेपसवदद्ध’’ का प्रयोग किया जाता है। अतः हम ष्ं ∈ ।ष् लिखते हैं। यदि इए समुच्चय । का अवयव नहीं है, तो हम ष्इ ∉ ।ष् लिखते हैं और इसे ‘‘इ समुच्चय । में नहीं है’’ पढ़ते हैं। इस प्रकार अंग्रेशी वणर्माला के स्वरों के समुच्चय ट के सम्बंध् में ं ∈ ट विंफतु इ ∉ टण् इसी प्रकार संख्या 30 के अभाज्य गुणनखंडों के समुच्चय च् के लिए, 3 ∈ च् विंफतु 15 ∉ च्ण् किसी समुच्चय को निरूपित करने की दो विध्ियाँ हैंः ;पद्ध रोस्टर या सारणीब( रूप ;पपद्ध समुच्चय निमार्ण रूप ;पद्ध रोस्टर रूप में, समुच्चय के सभी अवयवों को सूचीब( किया जाता है, अवयवों को, एक दूसरे से, अध्र् - विराम द्वारा पृथक किया जाता है और उन सभी को एक मझले कोष्ठक के भीतर लिखते हैं। उदाहरणाथर्, 7 से कम सभी सम ध्न पूणा±कों के समुच्चय का वणर्न रोस्टर रूप में क्ष्2ए 4ए 6द्व द्वारा किया जाता है। किसी समुच्चय को रोस्टर रूप में प्रदश्िार्त करने के कुछ और उदाहरण नीचे दिए हैंः ;ंद्ध संख्या 42 को विभाजित करने वाली सभी प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय क्ष्1ए 2ए 3ए 6ए 7ए 14ए 21ए 42द्व है। ;इद्ध अंग्रेशी वणर्माला के सभी स्वरों का समुच्चय क्ष्ंए मए पए वए नद्व है। ;बद्ध विषम प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय क्ष्1ए 3ए 5ए ण् ण् ण्द्व है। अंत के बिंदु, जिनकी संख्या तीन होती है, यह बतलाते हैं कि इन विषम संख्याओं की सूची अंतहीन है। नोट कीजिए कि रोस्टर रूप में अवयवों को सूचीब( करने में उनके क्रम का महत्व नहीं होता है। इस प्रकार उपयर्ुक्त समुच्चय को क्ष्1ए 3ए 7ए 21ए 2ए 6ए 14ए 42द्वप्रकार भी प्रदश्िार्त कर सकते हैं। यह ध्यान रखना चाहिए कि समुच्चय को रोस्टर रूप में लिखते समय किसी अवयव को सामान्यतः दोबारा नहीं लिखते हैं, अथार्त्, प्रत्येक अवयव दूसरे से भ्िान्न होता है। उदाहरण के लिए शब्द ष्ैब्भ्व्व्स्ष् में प्रयुक्त अक्षरों का समुच्चय क्ष् ैए ब्ए भ्ए व्ए स्द्व है। ;पपद्ध समुच्चय निमार्ण रूप में, किसी समुच्चय के सभी अवयवों में एक सवर्निष्ठ गुणध्मर् होता है जो समुच्चय से बाहर के किसी अवयव में नहीं होता है। उदाहरणार्थ समुच्चय क्ष्ंए मए पए वए नद्व के सभी अवयवों में एक सवर्निष्ठ गुणध्मर् है कि इनमें से प्रत्येक अवयव अंग्रेशी वणर्माला का एक स्वर है और इस गुणध्मर् वाला कोइर् अन्य अक्षर नहीं है। इस समुच्चय को ट से निरूपित करते हुए हम लिखते हैं कि, ट त्र क्ष्ग रू ग अंग्रेशी वणर्माला का एक स्वर हैद्व। यहाँ ध्यान देना चाहिए कि किसी समुच्चय के अवयवों का वणर्न करने के लिए हम प्रतीक ष्गष् का प्रयोग करते हैं, ;ग के स्थान पर किसी अन्य प्रतीक का भी प्रयोग किया जा सकता है, जैसे, अक्षर लए ्र आदि।द्ध जिसके उपरांत कोलन का चिÉ फ्ःय् लिखते हैं। कोलन के चिÉ के बाद समुच्चय के अवयवों के विश्िाष्ट गुणध्मर् को लिखते हैं और पिफर संपूणर् कथन को मझले कोष्ठक क्ष्द्व के भीतर लिखते हैं। समुच्चय ट के उपयुर्क्त वणर्न को निम्नलिख्िात प्रकार से पढ़ा जाता है, फ्सभी ग का समुच्चय जहाँ ग अंग्रेशी वणर्माला का एक स्वर है।य् इस वणर्न में कोष्ठक का प्रयोग फ्सभी ग का समुच्चयय् के लिए और कोलन का प्रयोग ‘जहाँ ग’ के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 3 ढ ग ढ 10द्व को निम्नलिख्िात प्रकार से पढ़ते हैं: ‘‘सभी ग का समुच्चय, जहाँ ग एक प्रावृफत संख्या है और गए3 और 10 के बीच में हैं। अतः संख्याएं 4,5,6,7,8 और 9 समुच्चय । के अवयव हैं।यदि हम ऊपर ;ंद्धए ;इद्ध और ;बद्ध में रोस्टर रूप में वण्िार्त समुच्चयों को क्रमशः ।ए ठए ब् से प्रकट करें, तो ।ए ठ औरब् को समुच्चय निमार्ण रूप में, निम्नलिख्िात प्रकार से भी निरूपित किया जा सकता है। । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है जो संख्या 42 को विभाजित करती हैद्व ठ त्र क्ष्ल रू ल अंग्रेशी वणर्माला का एक स्वर हैद्व ब् त्र क्ष््र रू ्र एक विषम प्रावृफत संख्या हैद्व उदाहरण 1 समीकरण ग2 ़ ग दृ 2 त्र 0 का हल समुच्चय रोस्टर रूप में लिख्िाए। हल प्रदत्त समीकरण इस प्रकार लिखा जा सकता है, ;ग दृ 1द्ध ;ग ़ 2द्ध त्र 0ए अथार्त् ग त्र 1ए दृ 2 अतः प्रदत्त समीकरण का हल समुच्चय रोस्टर रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है क्ष्1ए दृ 2द्वण् उदाहरण 2 समुच्चय क्ष्ग रू ग एक ध्न पूणा±क है और ग2 ढ 40द्व को रोस्टर रूप में लिख्िाए। हल 1ए 2ए 3ए 4ए 5ए और 6 अभीष्ट संख्याएँ हैं। अतः क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्व प्रदत्त समुच्चय का रोस्टर रूप है। उदाहरण 3 समुच्चय । त्र क्ष्1ए 4ए 9ए 16ए 25ए ण् ण् ण् द्व को समुच्चय निमार्ण रूप में लिख्िाए। हल समुच्चय । को हम इस प्रकार लिख सकते हैं, । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या का वगर् हैद्व विकल्पतः हम इस प्रकार भी लिख सकते हैं, । त्र क्ष्ग रू ग त्र द2ए जहाँ द ∈ छद्व 123456 उदाहरण 4 समुच्चय क्ष् एएएएए द्व को समुच्चय निमार्ण रूप में लिख्िाए।2345 67 हल हम देखते हंै कि दिए गए समुच्चय के प्रत्येक अवयव का अंश उसके हर से 1 कम है। यहभी कि अंश एक प्रावृफत संख्या है जो 1 से प्रारंभ होकर उत्तरोत्तर एक से अध्िक होती जाती है और 6 से अध्िक नहीं है। अतः समुच्चय निमार्ण रूप में इसे इस प्रकार लिखते हैं, दक्ष् गरूग त्र एदए एक प्रावृफत संख्या है और 1 ≤ द ≤ 6द्वद ़1 उदाहरण 5बाईं ओर रोस्टर रूप में वण्िार्त प्रत्येक समुच्चय का दाईं ओर समुच्चय निमार्ण रूप में वण्िार्त समुच्चय से सही मिलान कीजिएः ;पद्ध क्ष्च्ए त्ए प्ए छए ब्ए ।ए स्द्व ;ंद्ध क्ष् ग रू ग एक ध्न पूणा±क है तथा 18 का भाजक हैद्व ;पपद्ध क्ष् 0 द्व ;इद्ध क्ष् ग रू ग एक पूणा±क है और ग2 दृ 9 त्र 0द्व ;पपपद्ध क्ष्1ए 2ए 3ए 6ए 9ए 18द्व ;बद्ध क्ष्ग रू ग एक पूणा±क है और ग ़ 1त्र 1द्व ;पअद्ध क्ष्3ए दृ3द्व ;कद्ध क्ष्ग रू ग शब्द च्त्प्छब्प्च्।स् का एक अक्षर हैद्व हल चूँकि ;कद्ध में, शब्द च्त्प्छब्प्च्।स् में 9 अक्षर हैं और दो अक्षर च् और प् की पुनरावृिा हुइर् है, अतः ;पद्ध का सही मिलान ;कद्ध से होता है। इसी प्रकार ;पपद्ध का सही मिलान ;बद्ध से होता है, क्योंकि ग ़ 1 त्र 1 का तात्पयर् है कि ग त्र 0ण् यह भी कि, 1, 2, 3, 6, 9 और 18 में से प्रत्येक 18 का भाजक है, इसलिए ;पपपद्ध का सही मिलान ;ंद्ध से होता है। अंत में ग2 दृ 9 त्र 0 अथार्त् ग त्र 3ए दृ3 और इसलिए ;पअद्ध का सही मिलान ;इद्ध से होता है। प्रश्नावली 1ण्1 1ण् निम्नलिख्िात में कौन से समुच्चय हैं? अपने उत्तर का औचित्य बताइए। ;पद्ध श्र अक्षर से प्रारंभ होने वाले वषर् के सभी महीनों का संग्रह। ;पपद्ध भारत के दस सबसे अध्िक प्रतिभाशाली लेखकों का संग्रह। ;पपपद्ध विश्व के सवर्श्रेष्ठ ग्यारह बल्लेवाजों का संग्रह। ;पअद्ध आपकी कक्षा के सभी बालकों का संग्रह। ;अद्ध 100 से कम सभी प्रावृफत संख्याओं का संग्रह। ;अपद्ध लेखक प्रेमचंद द्वारा लिख्िात उपन्यासों का संग्रह। ;अपपद्ध सभी सम पूणा±कों का संग्रह। ;अपपपद्ध इस अध्याय में आने वाले प्रश्नों का संग्रह। ;पगद्ध विश्व के सबसे अध्िक खतरनाक जानवरों का संग्रह। 2ण् मान लीजिए । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्वए रिक्त स्थानों में उपयुक्त प्रतीक ∈ अथवा ∉ भरिए। ;पद्ध 5ण्ण्ण्। ;पपद्ध 8 ण् ण् ण्। ;पपपद्ध 0ण्ण्ण्।;पअद्ध 4ण् ण् ण् । ;अद्ध 2ण् ण् ण्। ;अपद्ध 10ण् ण् ण्। 3ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों को रोस्टर रूप में लिख्िाएः ;पद्ध । त्र क्ष्ग रू ग एक पूणा±क है और दृ3 ढ ग ढ 7द्व ;पपद्ध ठ त्र क्ष्ग रू ग संख्या 6 से कम एक प्रावृफत संख्या हैद्व ;पपपद्ध ब् त्र क्ष्ग रू ग दो अंकों की ऐसी प्रावृफत संख्या है जिसके अंकों का योगपफल 8 हैद्व ;पअद्ध क् त्र क्ष्ग रू ग एक अभाज्य संख्या है जो संख्या 60 की भाजक हैद्व ;अद्ध म् त्र ज्त्प्ळव्छव्डम्ज्त्ल् शब्द के सभी अक्षरों का समुच्चय ;अपद्ध थ् त्र ठम्ज्ज्म्त् शब्द के सभी अक्षरों का समुच्चय 4ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों को समुच्चय निमार्ण रूप में व्यक्त कीजिएः ;पद्ध ;3ए 6ए 9ए 12द्व ;पपद्ध क्ष्2ए4ए8ए16ए32द्व ;पपपद्ध क्ष्5ए 25ए 125ए 625द्व ;पअद्ध क्ष्2ए 4ए 6ए ण् ण् ण्द्व ;अद्ध क्ष्1ए4ए9ए ण् ण् ण्ए100द्व 5ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों के सभी अवयवों ;सदस्योंद्ध को सूचीब( कीजिएः ;पद्ध । त्र क्ष्ग रू ग एक विषम प्रावृफत संख्या हैद्व 19;पपद्ध ठ त्र क्ष्ग रू ग एक पूणा±क है, −2 ढ ग ढ 2 द्व ;पपपद्ध ब् त्र क्ष्ग रू ग एक पूणा±क है, ग2 ≤ 4द्व ;पअद्ध क् त्र क्ष्ग रू गए स्व्ल्।स् शब्द का एक अक्षर हैद्व ;अद्ध म् त्र क्ष्ग रू ग वषर् का एक ऐसा महीना है, जिसमें 31 दिन नहीं होते हैंद्व ;अपद्ध थ् त्र क्ष्ग रू ग अंग्रेशी वणर्माला का एक व्यंजन है, जो ा से पहले आता हैद्व। 6ण् बाईं ओर रोस्टर रूप में लिख्िात और दाईं ओर समुच्चय निमार्ण रूप में वण्िार्त समुच्चयों का सही मिलान कीजिएः ;पद्ध क्ष्1ए 2ए 3ए 6द्व ;ंद्ध क्ष्ग रू ग एक अभाज्य संख्या है और 6 की भाजक हैद्व ;पपद्ध क्ष्2ए 3द्व ;इद्ध क्ष्ग रू ग संख्या 10 से कम एक विषम प्रावृफत संख्या हैद्व ;पपपद्ध क्ष्डए।एज्एभ्एम्एप्एब्एैद्व ;बद्ध क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 6 की भाजक हैद्व ;पअद्ध क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए 9द्व ;कद्ध क्ष्ग रू ग ड।ज्भ्म्ड।ज्प्ब्ै शब्द का एक अक्षर हैद्व। 1ण्3 रिक्त समुच्चय ;ज्ीम म्उचजल ैमजद्ध समुच्चय । त्र क्ष् ग रू ग किसी स्कूल की कक्षा ग्प् में अध्ययनरत एक विद्याथीर् है द्व हम उस स्कूल में जा कर कक्षा ग्प् में अध्ययनरत विद्याथ्िार्यों को गिन कर उनकी संख्या ज्ञात कर सकते हैं। अतः समुच्चय । के अवयवयों की संख्या सीमित है। अब नीचे लिखे समुच्चय ठ पर विचार कीजिएः ठ त्र क्ष् ग रू ग वतर्मान में कक्षा ग् तथा ग्प् दोनों में अध्ययनरत विद्याथीर् हैंद्व हम देखते हैं कि एक विद्याथीर् एक साथ दोनों कक्षाओं ग् तथा ग्प् में अध्ययन नहीं कर सकता है। अतः समुच्चय ठ में कोइर् भी अवयव नहीं है। परिभाषा 1 एक समुच्चय जिसमें एक भी अवयव नहीं होता है, रिक्त समुच्चय या शून्य समुच्चय कहलाता है। इस परिभाषा के अनुसार ठ एक रिक्त समुच्चय है जब कि । एक रिक्त समुच्चय नहीं है। रिक्त समुच्चय को प्रतीक φ अथवा क्ष् द्व से प्रदश्िार्त करते हैं। हम नीचे रिक्त समुच्चयों के कुछ उदाहरण दे रहे हैंः ;पद्ध मान लीजिए कि । त्र क्ष्ग रू 1 ढ ग ढ 2ए ग एक प्रावृफत संख्या हैद्वण्यहाँ । रिक्त समुच्चय है, क्योंकि 1 और 2 के मध्य कोइर् प्रावृफत संख्या नहीं होती है। ;पपद्ध ठ त्र क्ष्ग रू ग2 दृ 2 त्र 0 और ग एक परिमेय संख्या हैद्वण् यहाँ ठ रिक्त समुच्चय है, क्योंकि समीकरण ग2 दृ 2 त्र 0ए ग के किसी भी परिमेय मान से संतुष्ट नहीं होता है। ;पपपद्ध ब् त्र क्ष्ग रू ग संख्या 2 से अध्िक एक सम अभाज्य संख्या हैद्व तो ब् रिक्त समुच्चय है, क्योंकि केवल संख्या 2 ही सम अभाज्य संख्या है। ;पअद्ध क् त्र क्ष् ग रू ग2 त्र 4ए ग विषम हैद्वण् तो क् रिक्त समुच्चय है, क्योंकि समीकरण ग2 त्र 4ए ग के किसी विषम मान से संतुष्ट नहीं होता है। 1ण्4 परिमित और अपरिमित समुच्चय ;थ्पदपजम ंदक प्दपिदपजम ैमजेद्ध मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5द्वए ठ त्र क्ष्ंए इए बए कए मए हद्व तथा ब् त्र क्ष् इस समय विश्व के विभ्िान्न भागों में रहने वाले पुरुषद्व हम देखते हैं कि । में 5 अवयव हैं और ठ में 6 अवयव हैं। ब् में कितने अवयव हैं? जैसा कि स्पष्ट है कि ब् के अवयवों की संख्या हमें ज्ञात नहीं है, विंफतु यह एक प्रावृफत संख्या है, जो बहुत बड़ी हो सकती है। किसी समुच्चय ै के अवयवों की संख्या से हमारा अभ्िाप्राय समुच्चय के भ्िान्न अवयवों की संख्या से है और इसे हम प्रतीक द ;ैद्ध द्वारा प्रदश्िार्त करते हैं। यदि द ;ैद्ध एक प्रावृफत संख्या है, तो ै एक आरिक्त परिमित समुच्चय होता है। आइए प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय छ पर विचार करें। हम देखते हैं इस समुच्चय के अवयवों की संख्या सीमित नहीं है, क्योंकि प्रावृफत संख्याओं की संख्या असीमित होती है। इस प्रकार हम कहते हैं कि प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय एक अपरिमित समुच्चय होता है। उपयुर्क्त समुच्चय ।ए ठ तथा ब् परिमित समुच्चय हैं और द;।द्ध त्र 5ए द;ठद्ध त्र 5 और द;ब्द्ध त्र कोइर् सीमित संख्या। परिभाषा 2 एक समुच्चय, जो रिक्त है अथवा जिसके अवयवों की संख्या निश्िचत होती है, परिमित समुच्चय कहलाता है, अन्यथा समुच्चय अपरिमित समुच्चय कहलाता है। आइए कुछ उदाहरणों पर विचार करेंः ;पद्ध यदि ॅ सप्ताह के दिनों का समुच्चय है, तो ॅ परिमित है। ;पपद्ध मान लीजिए कि ैए समीकरण ग2 दृ16 त्र 0 के हलों का समुच्चय है, तो ै परिमित है। ;पपपद्ध मान लीजिए कि ळए किसी रेखा पर स्िथत सभी बिंदुओं का समुच्चय है, तो ळ अपरिमित है। जब हम किसी समुच्चय को रोस्टर रूप में निरूपित करते हैं, तो हम उस समुच्चय के सभी अवयवों को कोष्ठक क्ष् द्व के भीतर लिखते हैं। किसी अपरिमित समुच्चय के सभी अवयवों को कोष्ठक क्ष् द्व के भीतर लिखना संभव नहीं है, क्योंकि ऐसे समुच्चय के अवयवों की संख्या सीमित नहीं होती है। अतः हम किसी अपरिमित समुच्चय को रोस्टर रूप में प्रकट करने के लिए उसके कम से कम इतने अवयवों को लिखते है, जिससे उस समुच्चय की संरचना स्पष्ट हो सके और तदोपरांत तीन बिंदु लगाते हैं। उदाहरणाथर्ए क्ष्1ए 2ए 3 ण् ण् ण्द्व प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय हैए क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए ण् ण् ण्द्व विषम प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय है और क्ष्ण् ण् ण्एदृ3ए दृ2ए दृ1ए 0ए1ए 2 ए3ए ण् ण् ण्द्व पूणा±कों का समुच्चय है। ये सभी समुच्चय अपरिमित हैं। सभी अपरिमित समुच्चय का वणर्न रोस्टर रूप में नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के लिए वास्तविक संख्याओं के समुच्चय का वणर्न इस रूप में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इस समुच्चय के अवयवों का कोइर् विशेष पैटनर् ;प्रतिमानद्ध नहीं होता है। उदाहरण 6 बतलाइए कि निम्नलिख्िात समुच्चयों में कौन परिमित है और कौन अपरिमित हैः ;पद्ध क्ष्ग रू ग ∈ छ और ;ग दृ 1द्ध ;ग दृ2द्ध त्र 0द्व ;पपद्ध क्ष्ग रू ग ∈ छ और ग2 त्र 4द्व ;पपपद्ध क्ष्ग रू ग ∈ छ और 2ग दृ1 त्र 0द्व ;पअद्ध क्ष्ग रू ग ∈ छ और ग एक अभाज्य संख्या हैद्व ;अद्ध क्ष्ग रू ग ∈ छ और ग विषम हैद्व हल ;पद्ध प्रदत्त समुच्चय त्र क्ष्1ए 2द्वण् अतः यह परिमित है। ;पपद्ध प्रदत्त समुच्चय त्र क्ष्2द्वण् अतः यह परिमित है। ;पपपद्ध प्रदत्त समुच्चय त्र φण् अतः यह परिमित है। ;पअद्ध दिया हुआ समुच्चय सभी अभाज्य संख्याओं का समुच्चय है और क्योंकि अभाज्य संख्याओं का समुच्चय अनंत हैऋ अतः प्रदत्त समुच्चय अपरिमित है। ;अद्ध क्योंकि विषम प्रावृफत संख्याएँ अनंत हैं, अतः प्रदत्त समुच्चय अपरिमित है। 1ण्5 समान समुच्चय ;म्ुनंस ैमजेद्ध दो दिए गए समुच्चयों । और ठए में, यदि । का प्रत्येक अवयव ठ का भी अवयव है तथा ठ का प्रत्येक अवयव । का भी अवयव है, तो समुच्चय । और ठए समान कहलाते हैं। स्पष्टतया दोनों समुच्चयों में तथ्यतः समान अवयव होते हैं। परिभाषा 3 दो समुच्चय । और ठ समान कहलाते हैं, यदि उनमें तथ्यतः समान अवयव हों और हम लिखते हैं । त्र ठए अन्यथा समुच्चय असमान कहलाते हैं और हम लिखते हैं । ≠ ठण् आइए हम निम्नलिख्िात उदाहरणों पर विचार करेंः ;पद्ध मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्व औरठ त्र क्ष्3ए 1ए 4ए 2द्वण् तो । त्र ठण् ;पपद्ध मान लीजिए कि ।, 6 से कम अभाज्य संख्याओं तथा च्ए 30 के अभाज्य गुणनखंडों के समुच्चय हैं। स्पष्ट है कि समुच्चय । और च् समान हैं, क्योंकि केवल 2, 3 और 5 ही संख्या 30 के अभाज्य गुणनखंड हैं और 6 से कम भी हैं। उदाहरण 7 समान समुच्चयों के युग्म छाँटिए, यदि ऐसा कोइर् युग्म है, और कारण भी बतलाइएः । त्र क्ष्0द्वए ठ त्र क्ष्ग रू ग झ 15 और ग ढ 5द्वए ब् त्र क्ष्ग रू ग दृ 5 त्र 0 द्वए क् त्र क्ष्ग रू ग2 त्र 25द्वए म् त्र क्ष्ग रू ग समीकरण ग2 दृ 2ग दृ15 त्र 0 का एक ध्न पूणा±क मूल हैद्वण् हल यहाँ 0 ∈ । और 0 समुच्चयों ठए ब्ए क् और म्ए में से किसी में भी नहीं है, अतः । ≠ ठए । ≠ ब्ए । ≠ क्ए । ≠ म्ण् क्योंकि ठ त्र φ विंफतु और कोइर् समुच्चय रिक्त नहीं है। अतः ठ ≠ ब्ए ठ ≠ क् तथा ठ ≠ म्ण् ब् त्र क्ष्5द्व परंतु दृ5 ∈ क्ए इसलिए ब् ≠ क् यहाँ क्योंकि म् त्र क्ष्5द्वए ब् त्र म् ए क् त्र क्ष्दृ5ए 5द्व और म् त्र क्ष्5द्वए अतः क् ≠ म्ण् इस प्रकार समान समुच्चयों का युग्म केवल ब् तथा म् है। उदाहरण 8 निम्नलिख्िात समुच्चय युग्मों में से कौन से समान हैं? अपने उत्तर का औचित्य बताइए। ;पद्ध ग्ए शब्द श्।स्स्व्ल्श् के अक्षरों का समुच्चय तथा ठए शब्द श्स्व्ल्।स्श् के अक्षरों का समुच्चय। ;पपद्ध । त्र क्ष्द रू द ∈ र् तथा द2 ≤ 4द्व और ठ त्र क्ष्ग रू ग ∈ त् तथा ग2 दृ 3ग ़ 2 त्र 0द्वण् हल ;पद्ध यहाँ ग् त्र क्ष्।ए स्ए स्ए व्ए ल्द्वए ठ त्र क्ष्स्ए व्ए ल्ए।ए स्द्वण् अतः ग् और ठ समान समुच्चयहैं, क्योंकि किसी समुच्चय के अवयवों की पुनरावृिा से समुच्चय बदलता नहीं है। अतः ग् त्र क्ष्।ए स्ए व्ए ल्द्व त्र ठ ;पपद्ध । त्रक्ष्दृ2ए दृ1ए 0ए 1ए 2द्वए ठ त्र क्ष्1ए 2द्वण् क्योंकि 0 ∈ । और 0 ∉ ठए इसलिए । और ठ समान नहीं हैं। प्रश्नावली 1ण्2 1ण् निम्नलिख्िात में से कौन से रिक्त समुच्चय के उदाहरण हैं? ;पद्ध 2 से भाज्य विषम प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय। ;पपद्ध सम अभाज्य संख्याओं का समुच्चय। ;पपपद्ध क्ष् ग रू ग एक प्रावृफत संख्या हैए ग ढ 5 और साथ ही साथ ग झ 7 द्व ;पअद्ध क्ष् ल रू ल किन्हीं भी दो समांतर रेखाओं का उभयनिष्ठ बिंदु हैद्व 2ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों में से कौन परिमित और कौन अपरिमित हैं? ;पद्ध वषर् के महीनों का समुच्चय। ;पपद्ध क्ष्1ए 2ए 3ए ण् ण् ण्द्व ;पपपद्ध क्ष्1ए 2ए 3ए ण् ण् ण्99ए 100द्व ;पअद्ध 100 से बड़े ध्न पूणा±कों का समुच्चय। ;अद्ध 99 से छोटे अभाज्य पूणा±कों का समुच्चय। 3ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों में से प्रत्येक के लिए बताइए कि कौन परिमित है और कौन अपरिमित है? ;पद्ध ग.अक्ष के समांतर रेखाओं का समुच्चय। ;पपद्ध अंग्रेशी वणर्माला के अक्षरों का समुच्चय। ;पपपद्ध उन संख्याओं का समुच्चय जो 5 के गुणज हैं। ;पअद्ध पृथ्वी पर रहने वाले जानवरों का समुच्चय। ;अद्ध मूल बिंदु ;0,0द्ध से हो कर जाने वाले वृत्तों का समुच्चय। 4ण् निम्नलिख्िात में बतलाइए कि । त्र ठ है अथवा नहीं हैः ;पद्ध । त्र क्ष् ंए इए बए क द्व ठ त्र क्ष् कए बए इए ं द्व ;पपद्ध । त्र क्ष् 4ए 8ए12ए 16 द्व ठ त्र क्ष् 8ए 4ए 16ए 18द्व ;पपपद्ध । त्रक्ष्2ए 4ए 6ए 8ए 10द्व ठ त्र क्ष् ग रू ग सम ध्न पूणा±क है और ग ≤ 10द्व ;पअद्ध । त्र क्ष्ग रू ग संख्या 10 का एक गुणज हैद्वए ठ त्र क्ष् 10ए 15ए 20ए 25ए 30ए ण् ण् ण् द्व 5ण् क्या निम्नलिख्िात समुच्चय युग्म समान हैं? कारण सहित बताइए। ;पद्ध । त्र क्ष्2ए 3द्वए ठ त्र क्ष्ग रू ग समीकरण ग2 ़ 5ग ़ 6 त्र 0 का एक हल हैद्व ;पपद्ध । त्र क्ष् ग रू ग शब्द ष्थ्व्स्स्व्ॅष् का एक अक्षर हैद्व ठ त्र क्ष् ल रू ल शब्द ष्ॅव्स्थ्ष् का एक अक्षर हैद्व 6ण् नीचे दिए हुए समुच्चयों में से समान समुच्चयों का चयन कीजिएः । त्र क्ष् 2ए 4ए 8ए 12द्वए ठ त्र क्ष् 1ए 2ए 3ए 4द्वए ब् त्र क्ष् 4ए 8ए 12ए 14द्वए क् त्र क्ष् 3ए 1ए 4ए 2द्वए म् त्र क्ष्दृ1ए 1द्वए थ् त्र क्ष् 0ए ंद्वए ळ त्र क्ष्1ए दृ1द्वए भ् त्र क्ष् 0ए 1द्व 1ण्6 उपसमुच्चय ;ैनइेमजेद्ध नीचे दिए समुच्चयों पर विचार कीजिएः ग् त्र आपके विद्यालय के सभी विद्याथ्िार्यों का समुच्चय, ल् त्र आपकी कक्षा के सभी विद्याथ्िार्यों का समुच्चय। हम देखते हंै कि ल् का प्रत्येक अवयव, ग् का भी एक अवयव है, हम कहते हैं कि ल्ए ग् का एक उपसमुच्चय हैं ग् का एक उपसमुच्चय है, प्रतीकों में ग् ⊂ ल् द्वारा प्रकट करते हैं। प्रतीक ⊂ए कथन ‘एक उपसमुच्चय है’, अथवा ‘अंतविर्ष्ट है’ के लिए प्रयुक्त होता है। परिभाषा 4 यदि समुच्चय । का प्रत्येक अवयव, समुच्चय ठ का भी एक अवयव है, तो ।, ठ का उपसमुच्चय कहलाता है। दूसरे शब्दों में, । ⊂ ठ, यदि जब कभी ं ∈ ।ए तो ं ∈ ठण् बहुध प्रतीक ‘⇒’, जिसका अथर् ‘तात्पयर् है’ होता है, का प्रयोग सुविधजनक होता है। इस प्रतीक का प्रयोग कर के, हम उपसमुच्चय की परिभाषा इस प्रकार लिख सकते हैंः । ⊂ ठए यदि ं ∈ । ⇒ ं ∈ ठ हम उपयुर्क्त कथन को इस प्रकार पढ़ते हैं, श्।ए ठ का एक उपसमुच्चय है, यदि इस तथ्य का, कि ंए । का एक अवयव है तात्पयर् है कि ंए ठ का भी एक अवयव है’’। यदि ।ए ठ का एक उपसमुच्चय नहीं है, तो हम लिखते हैं कि । ⊄ ठ । हमें ध्यान देना चाहिए कि । को ठए का समुच्चय होने के लिए केवल मात्रा यह आवश्यक है कि । का प्रत्येक अवयव ठ में है। यह संभव है कि ठ का प्रत्येक अवयव । में हो या न हो। यदि ऐसा होता है कि ठ का प्रत्येक अवयव । में भी है, तो ठ ⊂ ।ण् इस दशा में, । और ठ समान समुच्चय हैं और इस प्रकार । ⊂ ठ और ठ ⊂ । ⇔ । त्र ठए जहाँ ‘⇔’ द्विध तात्पयर् ;जूव ूंल पउचसपबंजपवदेद्ध के लिए प्रतीक है और जिसे प्रायः ‘यदि और केवल यदि’ पढ़ते हैं तथा संक्षेप में ष्पिि लिखते हैं। परिभाषा से निष्कषर् निकलता है कि प्रत्येक समुच्चय स्वयम् का उपसमुच्चय है, अथार्त् । ⊂ । । चूँकि रिक्त समुच्चय φ में कोइर् अवयव नहीं होता है अतः हम इस बात से सहमत हैं कि φ प्रत्येक समुच्चय का एक उपसमुच्चय है। अब हम कुछ उदाहरणों पर विचार करते हैंः ;पद्ध परिमेय संख्याओं का समुच्चय फए वास्तविक संख्याओं के समुच्चय त् का एक उपसमुच्चय है और हम लिखते हैं कि फ ⊂ त्ण् ;पपद्ध यदि ।ए संख्या 56 के सभी भाजकों का समुच्चय है और ठए संख्या 56 के सभी अभाज्य भाजकों का समुच्चय है, तो ठए । का एक उपसमुच्चय है और हम लिखते हैं कि ठ ⊂ ।ण् ;पपपद्ध मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 3ए 5द्व और ठ त्र क्ष्ग रू ग संख्या 6 से कम एक विषम प्रावृफत संख्या हैद्व तो । ⊂ ठ तथा ठ ⊂ ।ए अतः । त्र ठ ;पअद्ध मान लीजिए कि । त्र क्ष् ंए मए पए वए नद्व और ठ त्र क्ष् ंए इए बए कद्वण् तो ।ए ठ का एक उपसमुच्चय नहीं है तथा ठ भी । का उपसमुच्चय नहीं है। मान लीजिए कि । और ठ दो समुच्चय हैं। यदि । ⊂ ठ तथा । ≠ ठ ए तो ।ए ठ का उचित उपसमुच्चय कहलाता हैऔर ठए । का अध्िसमुच्चय कहलाता है। उदाहरणाथर्,μ । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्वए ठ त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्व का एक उचित उपसमुच्चय है। यदि समुच्चय । में केवल एक अवयव हो, तो हम इसे एक एकल समुच्चय कहते हैं। अतः क्ष् ं द्व एक एकल समुच्चय है। उदाहरण 9 नीचे लिखे समुच्चयों पर विचार कीजिएः φए । त्र क्ष् 1ए 3 द्वए ठ त्र क्ष्1ए 5ए 9द्वए ब् त्र क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए 9द्वण् प्रत्येक समुच्चय युग्म के बीच सही प्रतीक ⊂ अथवा ⊄ भरिएऋ ;पद्ध φ ण् ण् ण् ठ ;पपद्ध । ण् ण् ण् ठ ;पपपद्ध । ण् ण् ण् ब् ;पअद्ध ठ ण् ण् ण् ब् हल ;पद्ध φ⊂ ठए क्योंकि φ प्रत्येक समुच्चय का उपसमुच्चय होता है। ;पपद्ध । ⊄ ठ क्योंकि 3 ∈ । और 3 ∉ ठ ;पपपद्ध । ⊂ ब् क्योंकि 1ए 3 ∈ । तथा 1ए 3 ∈ ब् ;पअद्ध ठ ⊂ ब् क्योंकि ठ का प्रत्येक अवयव ब् में भी है। उदाहरण 10 मान लीजिए । त्र क्ष् ंए मए पए वए नद्वए ठ त्र क्ष् ंए इए बए कद्वण् क्या ।ए ठ का एक उपसमुच्चय है? नहीं ;क्यों?द्ध। क्या ।ए ठ का उप समुच्चय हैं? नहीं ;क्यों?द्ध उदाहरण 11 मान लीजिए ।ए ठ और ब् तीन समुच्चय हैं। यदि । ∈ ठ तथा ठ ⊂ ब्ए तो क्या यह सत्य है कि । ⊂ ब्घ् यदि नहीं तो एक उदाहरण दीजिए। हल मान लीजिए कि । त्र क्ष्1द्वए ठ त्र क्ष्क्ष्1द्वए 2द्व और ब् त्र क्ष्क्ष्1द्वए 2ए 3द्व स्पष्टतया यहाँ । ∈ ठ क्योंकि । त्र क्ष्1द्ध तथा ठ ⊂ ब् सत्य है। परंतु । ⊄ ब् क्योंकि 1 ∈ । और 1 ∉ ब्ण् नोट कीजिए कि किसी समुच्चय का एक अवयव उस समुच्चय का उपसमुच्चय नहीं हो सकता है। 1ण्6ण्1 वास्तविक संख्याओं के समुच्चय के उपसमुच्चय जैसा कि अनुच्छेद 1.6 से स्पष्ट होता है कि समुच्चय त् के बहुत से महत्वपूणर् उपसमुच्चय हैं। इनमें श्फ उन सभी संख्याओं ग का समुच्चय इस प्रकार है, कि ग भागपफल ए के बराबर है, जहाँ च और से वुफछ के नाम हम नीचे दे रहे हैंः प्रावृफत सख्याओं का समुच्चय छ त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए ण् ण् ण्द्व पूणा±कों का समुच्चय र् त्र क्ष्ण् ण् ण्ए दृ3ए दृ2ए दृ1ए 0ए 1ए 2ए 3ए ण् ण् ण्द्व परिमेय संख्याओं का समुच्चय फ त्र क्ष् ग रू ग त्र च ए चए ु ∈ र् तथा ु ≠ 0द्व, जिनको इसु प्रकार पढ़ते हैंः च ु ु पूणा±क है और ु शून्य नहीं है।’’ फ के अवयवों में दृ5 ;जिसे दृ15 से भी प्रदश्िार्त किया जा सकता 517 11हैद्ध ए7ए3 ;जिसे से भी प्रदश्िार्त किया जा सकता हैद्ध और दृ आदि सम्िमलित हैं।22 3 अपरिमेय संख्याओं का समुच्चय, जिसे ज्ए से निरूपित करते हैं, शेष अन्य वास्तविक संख्याओं ;परिमेय संख्याओं को छोड़करद्ध से मिलकर बनता है। अतः ज् त्र क्ष्ग रू ग ∈ त् औरग ∉ फद्व त्र त् दृ फ अथार्त् वह सभी वास्तविक संख्याएँ जो परिमेय नहीं है। ज् के सदस्यों में और π आदि सम्िमलित हैं। इन समुच्चयों के मध्य कुछ स्पष्ट संबंध् इस प्रकार हैंऋ छ ⊂ र् ⊂ फए फ ⊂ त्ए ज् ⊂ त्ए छ ⊄ ज्ण् 1ण्6ण्2 अंतराल त् के उपसमुच्चय के रूप में ;प्दजमतअंस ंे ेनइेमजे व ित्द्ध मान लीजिए कि ंए इ ∈ त् और ं ढ इण् तब वास्तविक संख्याओं का समुच्चय क्ष् ल रू ं ढ ल ढ इद्व एक विवृत अंतराल कहलाता है और प्रतीक ;ंए इद्ध द्वारा निरूपित होता है। ं और इ के बीच स्िथत सभी बिंदु इस अंतराल में होते हैं परंतु ं और इ स्वयं इस अंतराल में नहीं होते हैं। वह अंतराल जिसमें अंत्य बिंदु भी होते हैं, संवृत ;बंदद्ध अंतराल कहलाता है और प्रतीक ख् ंए इ , द्वारा निरूपित होता है। अतः ख् ंए इ , त्र क्ष्ग रू ं ≤ ग ≤ इद्व ऐसे अंतराल भी हैं जो एक अंत्य बिंदु पर बंद और दूसरे पर खुले होते हैं ख् ंए इ द्ध त्र क्ष्ग रू ं ≤ ग ढ इद्वए ं से इए तक एक खुला अंतराल है, जिसमें ं अंतविर्ष्ट है विंफतु इ अपवजिर्त है। ; ंए इ , त्र क्ष् ग रू ं ढ ग ≤ इ द्व ं से इए तक एक खुला अंतराल है, जिसमें इ सम्िमलित है विंफतु ं अपवजिर्त है। इन संकेतों द्वारा वास्तविक संख्याओं के समुच्चय के उपसमुच्चयों के उल्लेख करने की एक वैकल्िपक विध्ि मिलती है। उदाहरण के लिए, यदि । त्र ;दृ3ए 5द्ध और ठ त्र ख्दृ7ए 9,ए तो । ⊂ ठण् समुच्चय ख् 0ए ∞द्ध )णेतर वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को दशार्ता है, जबकि ; दृ ∞ए 0 द्ध )ण वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को दशार्ता है। ; दृ ∞ए ∞ द्धए दृ ∞ से ∞ तक विस्तृत रेखा से संबंध्ित वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को प्रदश्िार्त करता है। वास्तविक रेखा पर त् के उपसमुच्चयों के रूप में वण्िार्त उपयुर्क्त अंतरालों को आवृफति 1ण्1 में दशार्या गया हैः आवृफति 1ण्1 यहाँ हम ध्यान देते हैं कि एक अंतराल में असंख्य असीम मात्रा में अनेक बिंदु होते हैं। उदाहरणाथर्, समुच्चय समुच्चय क्ष्ग रू ग ∈ त् रू दृ5 ढ ग ≤ 7द्व को अंतराल ;दृ5ए 7, रूप में लिख सकते हैं तथा अंतराल ख्दृ3ए 5द्ध को समुच्चय निमार्ण रूप में क्ष्ग रू दृ3 ≤ ग ढ 5द्व द्वारा लिख सकते हैं। संख्या ;इ दृ ंद्ध को अंतराल ;ंए इद्धए ख्ंए इ,ए ख्ंए इद्ध तथा ;ंए इ, में से किसी की भी लंबाइर् कहते हैं। 1ण्7 घात समुच्चय ;च्वूमत ैमजद्ध समुच्चय क्ष्1ए 2द्व पर विचार कीजिए। समुच्चय क्ष्1ए 2द्व के सभी उपसमुच्चयों को लिख्िाए। हमें ज्ञात है कि φ सभी समुच्चयों का उपसमुच्चय होता है। इसलिए φए समुच्चय क्ष्1ए 2द्व का एक उपसमुच्चय है। हम देखते हैं कि क्ष्1द्व और क्ष् 2 द्व भी समुच्चय क्ष्1ए 2द्वके उपसमुच्चय हैं। हमें यह भी ज्ञात है कि प्रत्येक समुच्चय स्वयं का उपसमुच्चय होता है। इसलिए क्ष् 1ए 2 द्व भी समुच्चय क्ष्1ए 2द्व का एक उपसमुच्चय है। अतः समुच्चय क्ष् 1ए 2 द्व के कुल मिला कर चार उपसमुच्चय हैं, नामतः φए क्ष् 1 द्वए क्ष् 2 द्व और क्ष् 1ए 2 द्व. इन सभी उपसमुच्चयों के समुच्चय को समुच्चय क्ष् 1ए 2 द्व का घात समुच्चय कहते हैं। परिभाषा 5 समुच्चय । के उपसमुच्चयों के संग्रह को । का घात समुच्चय कहते हैं। इसे च्;।द्ध से निरूपित करते है। च्;।द्ध का प्रत्येक अवयव एक समुच्चय होता है। अतः उपयुर्क्त विवरण में, यदि । त्र क्ष् 1ए 2 द्वए तो च्; । द्ध त्र क्ष् φएक्ष् 1 द्वए क्ष् 2 द्वए क्ष् 1ए2 द्वद्व यह भी नोट कीजिए कि द ख् च् ;।द्ध , त्र 4 त्र 22 व्यापकरूप से, यदि । एक ऐसा समुच्चय है कि द;।द्ध त्र उए तो यह सि( किया जा सकता है कि द ख् च्;।द्ध, त्र 2उण् 1ण्8 सावर्त्रिाक समुच्चय ;न्दपअमतेंस ैमजद्ध सामान्यतः किसी विशेष संदभर् में हमें एक आधरभूत समुच्चय के अवयवों और उपसमुच्चयों पर विचार करना पड़ता है, जो कि उस विशेष संदभर् में प्रासंगिक होते हैं। उदाहरण के लिए, संख्या - प्रणाली का अध्ययन करते समय हमें प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय और उसके उपसमुच्चयों में रुचि होती है, जैसे अभाज्य संख्याओं का समुच्चय, सम संख्याओं का समुच्चय इत्यादि। यह आधरभूत समुच्चय ‘सावर्त्रिाक समुच्चय’ कहलाता है। सावर्त्रिाक समुच्चय को सामान्यतः प्रतीक न् से निरूपित करते हैं और इसके उपसमुच्चयों को अक्षर ।ए ठए ब्ए आदि द्वारा। उदाहरणाथर्, पूणा±कों के समुच्चय र् के लिए, परिमेय संख्याओं का समुच्चय फ, एक सावर्त्रिाक समुच्चय हो सकता है, या वास्तविक संख्याओं का समुच्चय त् भी एक सावर्त्रिाक समुच्चय हो सकता है। एक अन्य उदाहरण में मानव जनसंख्या अध्ययन के लिए विश्व के समस्त मानव का समुच्चय, सावर्त्रिाक समुच्चय होगा। प्रश्नावली 1ण्3 1ण् रिक्त स्थानों में प्रतीक ⊂ या ⊄ को भर कर सही कथन बनाइएः ;पद्ध क्ष् 2ए 3ए 4 द्व ण् ण् ण् क्ष् 1ए 2ए 3ए 4ए5 द्व ;पपद्ध क्ष् ंए इए ब द्व ण् ण् ण् क्ष् इए बए क द्व ;पपपद्ध क्ष्ग रू ग आपके विद्यालय की कक्षा ग्प् का एक विद्याथीर् हैद्वण् ण् ण्क्ष्ग रू ग आपके विद्यालय का एक विद्याथीर् हैद्व ;पअद्ध क्ष्ग रू ग किसी समतल में स्िथत एक वृत्त हैद्व ण् ण् ण्क्ष्ग रू ग एक समान समतल में वृत्त है जिसकी त्रिाज्या 1 इकाइर् है।द्व ;अद्ध क्ष्ग रू ग किसी समतल में स्िथत एक त्रिाभुज हैद्व ण् ण् ण् क्ष्ग रू ग किसी समतल में स्िथत एक आयत हैद्व ;अपद्ध क्ष्ग रू ग किसी समतल में स्िथत एक समबाहु त्रिाभुज हैद्व ण् ण् ण् क्ष्ग रू ग किसी समतल में स्िथत एक त्रिाभुज हैद्व ;अपपद्ध क्ष्ग रू ग एक सम प्रावृफत संख्या हैद्व ण् ण् ण् क्ष्ग रू ग एक पूणा±क हैद्व 2ण् जाँचिए कि निम्नलिख्िात कथन सत्य हैं अथवा असत्य हैंः ;पद्ध क्ष् ंए इ द्व ⊄ क्ष् इए बए ं द्व ;पपद्ध क्ष् ंए म द्व ⊂ क्ष् ग रू ग अंग्रेशी वणर्माला का एक स्वर हैद्व ;पपपद्ध क्ष् 1ए 2ए 3 द्व ⊂ क्ष्1ए 3ए 5 द्व ;पअद्ध क्ष् ं द्व ⊂ क्ष् ंए इए ब द्व ;अद्ध क्ष् ं द्व ∈ क्ष् ंए इए ब द्व ;अपद्ध क्ष् ग रू ग संख्या 6 से कम एक सम प्रावृफत संख्या हैद्व ⊂ क्ष् ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है, जो संख्या 36 को विभाजित करती हैद्व 3ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष् 1ए 2ए क्ष् 3ए 4 द्वए 5 द्व । निम्नलिख्िात में से कौन सा कथन सही नहीं है और क्यों? ;पद्ध क्ष्3ए 4द्व ⊂ । ;पपद्ध क्ष्3ए 4द्व ∈। ;पपपद्ध क्ष्क्ष्3ए 4द्वद्व ⊂ । ;पअद्ध 1 ∈ । ;अद्ध 1 ⊂ ।;अपद्ध क्ष्1ए 2ए 5द्व ⊂ । ;अपपद्ध क्ष्1ए 2ए 5द्व ∈। ;अपपपद्ध क्ष्1ए 2ए 3द्व ⊂ । ;पगद्ध φ∈ । ;गद्ध φ⊂ । ;गपद्ध क्ष्φद्व ⊂ । 4ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों के सभी उपसमुच्चय लिख्िाएः ;पद्ध क्ष्ंद्व ;पपद्ध क्ष्ंए इद्व ;पपपद्ध क्ष्1ए 2ए 3द्व ;पअद्ध φ 5ण् च्;।द्ध के कितने अवयव हैं, यदि । त्र φघ् 6ण् निम्नलिख्िात को अंतराल रूप में लिख्िाएः ;पद्ध क्ष्ग रू ग ∈ त्ए दृ 4 ढ ग ≤ 6द्व ;पपद्ध क्ष्ग रू ग ∈ त्ए दृ 12 ढ ग ढ दृ10द्व ;पपपद्ध क्ष्ग रू ग ∈ त्ए 0 ≤ ग ढ 7द्व ;पअद्ध क्ष्ग रू ग ∈ त्ए 3 ≤ ग ≤ 4द्व 7ण् निम्नलिख्िात अंतरालों को समुच्चय निमार्ण रूप में लिख्िाएः ;पद्ध ;दृ 3ए 0द्ध ;पपद्ध ख्6 ए 12, ;पपपद्ध ;6ए 12, ;पअद्ध ख्दृ23ए 5द्ध 8ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक के लिए आप कौन - सा सावर्त्रिाक समुच्चय प्रस्तावित करेंगे? ;पद्ध समकोण त्रिाभुजों का समुच्चय। ;पपद्ध समद्विबाहु त्रिाभुजों का समुच्चय। 9ण् समुच्चय । त्र क्ष्1ए 3ए 5द्वए ठ त्र क्ष्2ए 4ए 6द्व और ब् त्र क्ष्0ए 2ए 4ए 6ए 8द्व प्रदत्त हैं। इन तीनों समुच्चय ।ए ठ और ब् के लिए निम्नलिख्िात में से कौन सा ;सेद्ध सावर्त्रिाक समुच्चय लिए जा सकते हैं? ;पद्ध क्ष्0ए 1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्व ;पपद्ध φ ;पपपद्ध क्ष्0ए1ए2ए3ए4ए5ए6ए7ए8ए9ए10द्व ;पअद्ध क्ष्1ए2ए3ए4ए5ए6ए7ए8द्व 1ण्9 वेन आरेख ;टमदद क्पंहतंउेद्ध समुच्चयों के बीच अध्िकांश संबंधें को आरेखों द्वारा निरूपित किया जा सकता है जिन्हें वेन आरेख कहते हैं। वेन आरेख का नाम अंग्रेज तवर्फशास्त्राी श्रवीद टमदद ;1834 इर्॰μ 1883 इर्॰द्ध के नाम पर रखागया है। इन आरेखों में आयत और बंद वक्र सामान्यतः वृत्त होते हैं। किसी सावर्त्रिाक समुच्चय को प्रायःएक आयत द्वारा और उसके उपसमुच्चयों को एक वृत्त द्वारा प्रदश्िार्त करते हैं। किसी वेन आरेख में समुच्चयों के अवयवों को उनके विशेष समुच्चय में लिखा जाता है जैसे आवृफति 1.2 और 1.3 में दृष्टांत 1 आवृफति 1ण्2 मेंए न् त्र क्ष्1ए2ए3ए ण्ण्ण्ए 10द्व एक सावर्त्रिाक समुच्चय है और । त्र क्ष्2ए4ए6ए8ए10द्व उसका एक उपसमुच्चय है, दृष्टांत 2 आवृफति 1ण्3 मेंए न् त्र क्ष्1ए2ए3ए ण्ण्ण्ए 10द्व एक सावर्त्रिाक समुच्चय है, जिसके । त्र क्ष्2ए4ए6ए8ए10द्व और ठ त्र क्ष्4ए 6द्व उपसमुच्चय हैं और ठ ⊂ ।ण् पाठक वेन आरेखों का विस्तृत प्रयोग देखेंगे जब हम समुच्चयों के सम्िमलन, सवर्निष्ठ और अंतर पर विचार करेंगे। 1ण्10 समुच्चयों पर संियाएँ ;व्चमतंजपवदे वद ैमजेद्ध पिछली कक्षाओं में हम सीख चुके हैं कि संख्याओं पर योग, अंतर, गुणा और भाग की संियाएँ किस प्रकार संपन्न की जाती हैं। इनमें से प्रत्येक संिया को दो संख्याओं पर संपन्न किया गया था, जिससे एक अन्य संख्या प्राप्त हुइर् थी। उदाहरण के लिए दो संख्याओं 5 और 13 पर योग की संिया संपन्न करने से हमें संख्या 18 प्राप्त होती है। पुनः संख्याओं 5 और 13 पर गुणा की संिया संपन्न करने पर हमें संख्या 65 प्राप्त होती है। इसी प्रकार, कुछ ऐसी संियाएँ है, जिनको दो समुच्चयों पर संपन्न करने से, एक अन्य समुच्चय बन जाता है। अब हम समुच्चयों पर होने वाली कुछ संियाओं को परिभाष्िात करेंगे और उनके गुणध्मो± की जाँच करेंगे। यहाँ से आगे हम समुच्चयों का उल्लेख किसी सावर्त्रिाक समुच्चय के उपसमुच्चयों के रूप में करेंगे। 1ण्10ण्1 समुच्चयों का सम्िमलन ;न्दपवद व िेमजेद्ध मान लीजिए कि । और ठ कोइर् दो समुच्चय हैं। । और ठ का सम्िमलन वह समुच्चय है जिसमें । के सभी अवयवों के साथ ठ के भी सभी अवयव हों, तथा उभयनिष्ठ अवयवों को केवल एक बार लिया गया हो। प्रतीक ष्∪ष् का प्रयोग सम्िमलन को निरूपित करने के लिए किया जाता है। प्रतीकात्मक रूप में हम । ∪ ठ लिखते हैं और इसे ष्। सम्िमलन ठष् पढ़ते हैं। उदाहरण 12 मान लीजिए कि । त्र क्ष्2ए 4ए 6ए 8द्व और ठ त्र क्ष् 6ए 8ए 10ए 12द्व.। ∪ ठ ज्ञात कीजिए। हल हम देखते हैं कि । ∪ ठ त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8ए 10ए 12द्व नोट कीजिए कि । ∪ ठ लिखते समय उभयनिष्ठ अवयव 6 और 8 को केवल एक बार लिखते हैं। उदाहरण 13 मान लीजिए कि । त्र क्ष् ंए मए पए वए न द्व और ठ त्र क्ष् ंए पए न द्वण् दशार्इए कि । ∪ ठ त्र ।ण् हल स्पष्टतया । ∪ ठ त्र क्ष् ंए मए पए वए न द्व त्र ।ण् इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि किसी समुच्चय । और उसके उपसमुच्चय ठ का सम्िमलन समुच्चय । स्वयं होता है, अथार्त् यदि ठ ⊂ ।ए तो । ∪ ठ त्र ।ण् उदाहरण 14 मान लीजिए कि ग् त्र क्ष्राम, गीता, अकबरद्व कक्षा ग्प् के विद्याथ्िार्यों का जो विद्यालय की हाकी टीम में हैं, एक समुच्चय है। मान लीजिए कि ल् त्र क्ष्गीता, डेविड, अशोकद्व कक्षा ग्प् के विद्याथ्िार्यों का, जो विद्यालय की पफुटबाल टीम में हैं, एक समुच्चय है। ग् ∪ ल् ज्ञात कीजिए और इस समुच्चय की व्याख्या कीजिए। हल यहाँ ग् ∪ ल् त्र क्ष्राम, गीता, अकबर, डेविड, अशोकद्वण् यह कक्षा ग्प् के उन विद्याथ्िार्यों का समुच्चय है, जो या तो विद्यालय की हाकी टीम में हैं या पफुटबाल टीम में हैं या दोनों टीमों में हैं। अतः हम दो समुच्चयों के सम्िमलन की परिभाषा इस प्रकार कर सकते हैंः परिभाषा 6 दो समुच्चयों । और ठ का सम्िमलन समुच्चय, वह समुच्चय है जिसमें वे सभी अवयव हैं, जो या तो । में हैं या ठ में हैं ;उन अवयवों को सम्िमलित करते हुए जो दोनों में हैंद्ध। प्रतीकात्मक रूप में हम लिखते हैं कि । ∪ ठ त्र क्ष् ग रू ग ∈। या ग ∈ठ द्व है। दो समुच्चयों के सम्िमलन को आवृफति 1.4 में दिखाए गए वेन आरेख से प्रदश्िार्त किया जा सकता है। आवृफति 1.4 में छायांकित भाग । ∪ ठ को प्रदश्िार्त करता है। आवृफति 1ण्4 सम्िमलन की संिया के कुछ गुणध्मर्ः ;पद्ध । ∪ ठ त्र ठ ∪ ।;क्रम विनिमय नियमद्ध ;पपद्ध ; । ∪ ठ द्ध ∪ ब् त्र । ∪ ; ठ ∪ ब्द्ध ;साहचयर् नियमद्ध ;पपपद्ध । ∪φ त्र । ;तत्समक नियम, φ संिया ∪ का तत्समक अवयव हैद्ध ;पअद्ध । ∪ । त्र। ;वगर्सम नियमद्ध ;अद्ध न् ∪ । त्र न् ;न् का नियमद्ध 1ण्10ण्2 समुच्चयों का सवर्निष्ठ ;प्दजमतेमबजपवद व िेमजेद्ध समुच्चय । और ठ का सवर्निष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो । और ठ दोनों में उभयनिष्ठ है। प्रतीक ष्∩ष् का प्रयोग सवर्निष्ठ को निरूपित करने के लिए किया जाता है। समुच्चय । और ठ का सवर्निष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो । और ठ दोनों में हों। प्रतीकात्मक रूप में हम लिखते हैं कि । ∩ ठ त्र क्ष्ग रू ग ∈ । और ग ∈ ठद्व उदाहरण 15 उदाहरण 12 के समुच्चय । और ठ पर विचार कीजिए। । ∩ ठ ज्ञात कीजिए। हल हम देखते हैं कि केवल 6 और 8 ही ऐसे अवयव हैं जो । और ठ दोनों में उभयनिष्ठ हैं। अतः । ∩ ठ त्र क्ष् 6ए 8 द्व उदाहरण 16 उदाहरण 14 के समुच्चय ग् और ल् पर विचार कीजिए। ग् ∩ ल् ज्ञात कीजिए। हल हम देखते हैं केवल ‘गीता’ ही एक मात्रा ऐसा अवयव है, जो दोनों में उभयनिष्ठ है। अतः ग् ∩ ल् त्र क्ष्गीताद्व उदाहरण 17 मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6ए 7ए 8ए 9ए 10द्व और ठ त्र क्ष् 2ए 3ए 5ए 7 द्व । ∩ ठ ज्ञात कीजिए और इस प्रकार दिखाइए कि । ∩ ठ त्र ठण् हल हम देखते हैं कि । ∩ ठ त्र क्ष् 2ए 3ए 5ए 7 द्व त्र ठ हम ध्यान देते हैं कि ठ ⊂ । और । ∩ ठ त्र ठ परिभाषा 7 समुच्चय । और ठ का सवर्निष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो । और ठ दोनों में हो। प्रतीकात्मक रूप में, हम लिखते हैं कि । ∩ ठ त्र क्ष्ग रू ग ∈ । और ग ∈ ठद्व आवृफति 1.5 में छायांकित भाग, । और ठ के सवर्निष्ठ को प्रदश्िार्त करता है। यदि । और ठ ऐसे दो समुच्चय हों कि । ∩ ठ त्र φए तो । और ठ असंयुक्त समुच्चय कहलाते हैं। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि । त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8 द्व और आवृफति1ण्5 ठ त्र क्ष् 1ए 3ए 5ए 7 द्व, तो । और ठ असंयुक्त समुच्चय हैं, क्योंकि । और ठ में कोइर् भी अवयव उभयनिष्ठ नहीं है। असंयुक्त समुच्चयों को वेन आरेख द्वारा निरूपित किया जा सकता है, जैसा आवृफति 1.6 में प्रदश्िार्त है। उपयुर्क्त आरेख में । और ठ असंयुक्त समुच्चय हैं। सवर्निष्ठ संिय के कुछ गुणध्मर्;पद्ध । ∩ ठ त्र ठ ∩ । ;पपद्ध ; । ∩ ठ द्ध ∩ ब् त्र । ∩ ; ठ ∩ ब् द्ध ;साहचयर् नियमद्ध ;पपपद्ध φ∩ । त्र φए न् ∩ । त्र। ;φ और न् के नियमद्ध। ;पअद्ध । ∩ । त्र । ;वगर्सम नियमद्ध;अद्ध । ∩ ;ठ ∪ ब्द्ध त्र ; । ∩ ठ द्ध ∪ ; । ∩ ब् द्ध ;वितरण या बंटन नियमद्ध अथार्त् ∩ वितरित होता है ∪ पर। नीचे बने वेन आरेखों ख्आवृफतियों 1.7 ;पद्ध - ;अद्ध, द्वारा इस बात को सरलता से देख सकते हैं। ;पद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध;पपद्ध ;अद्ध थ्पहेण् 1ण्7 ;पद्ध जव ;अद्ध 1ण्10ण्3 समुच्चयों का अंतर ;क्पमिितमदबम व िेमजेद्ध समुच्चयों । और ठ का अंतर उन अवयवों का समुच्चय है जो । में हैं विंफतु ठ में नहीं हैं, जब कि । और ठ को इसी क्रम में लिया जाए। प्रतीतात्मक रूप में इसे ।दृठ लिखते हैं और श् । अंतर ठश् पढ़ते हैं। उदाहरण 18 मान लीजिए कि । त्र क्ष् 1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्वए ठ त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8 द्व । दृ ठ और ठ दृ । ज्ञात कीजिए । हल हम प्राप्त करते हैं किए । दृ ठ त्र क्ष् 1ए 3ए 5 द्वए क्योंकि अवयव 1ए 3ए 5 समुच्चय । में हैंविंफतु ठ में नहीं हैं तथा ठ दृ । त्र क्ष् 8 द्वए क्योंकि अवयव 8, ठ में है विंफतु । में नहीं है। हम देखते हैं कि । दृ ठ ≠ ठ दृ । उदाहरण 19 मान लीजिए कि ट त्र क्ष् ंए मए पए वए न द्व तो ठ त्र क्ष् ंए पए ाए नद्व, तो ट दृ ठ और ठ दृ ट ज्ञात कीजिए। हल यहाँए ट दृ ठ त्र क्ष् मए व द्वए क्योंकि अवयव मए व समुच्चय ट में हैं विंफतु ठ में नहीं है तथा ठ दृ ट त्र क्ष् ा द्वए क्योंकि अवयव ा समुच्चय ठ में है परंतु ट में नहीं है। हम नोट करते हैं कि ट दृ ठ ≠ ठ दृ ट समुच्चय निमार्ण संकेतन का प्रयोग करते हुए हम समुच्चयों के अंतर की परिभाषा को पुनः इस प्रकार लिख सकते हैंः । दृ ठ त्र क्ष् ग रू ग ∈ । और ग ∉ ठ द्व आवृफति 1ण्8दो समुच्चयों । और ठ के अंतर को वेन आरेख द्वारा दशार्या जा सकता है जैसा कि आवृफति 1.8 में प्रदश्िार्त है। छायांकित भाग दो समुच्चय । और ठ के अंतर को दशार्ता है। टिप्पणी समुच्चय । दृ ठए । ∩ ठ और ठ दृ । परस्पर असंयुक्त होते हैं अथार्त् इनमें से किसी दो समुच्चयों का सवर्निष्ठ समुच्चय एक रिक्त समुच्चय होता है जैसा कि आवृफति 1.9 में प्रदश्िार्त है। आवृफति1ण्9 प्रश्नावली 1ण्4 1ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक समुच्चय युग्म का सम्िमलन ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ग् त्र क्ष्1ए 3ए 5द्वए ल् त्र क्ष्1ए 2ए 3द्व ;पपद्ध । त्र ख् ंए मए पए वए नद्वए ठ त्र क्ष्ंए इए बद्व ;पपपद्ध । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 3 का गुणज हैद्व ठ त्र क्ष्ग रू ग संख्या 6 से कम एक प्रावृफत संख्या हैद्व ;पअद्ध । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 1 ढ ग ≤ 6 द्व ठ त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 6 ढ ग ढ 10 द्व ;अद्ध । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्वए ठ त्र φ 2ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष् ंए इ द्वए ठ त्र क्ष्ंए इए बद्वण् क्या । ⊂ ठ घ् । ∪ ठ ज्ञात कीजिए। 3ण् यदि । और ठ दो ऐसे समुच्चय हैं कि । ⊂ ठए तो । ∪ ठ क्या है घ् 4ण् यदि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्वए ठ त्र क्ष्3ए 4ए 5ए 6द्वए ब् त्र क्ष्5ए 6ए 7ए 8 द्व और क् त्र क्ष् 7ए 8ए 9ए 10द्वए तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । ∪ ठ ;पपद्ध । ∪ ब् ;पपपद्ध ठ ∪ ब् ;पअद्ध ठ ∪ क् ;अद्ध । ∪ ठ ∪ ब् ;अपद्ध । ∪ ठ ∪ क् ;अपपद्ध ठ ∪ ब् ∪ क् 5ण् प्रश्न 1 में दिए प्रत्येक समुच्चय युग्म का सवर्निष्ठ समुच्चय ज्ञात कीजिए। 6ण् यदि । त्र क्ष् 3ए 5ए 7ए 9ए 11 द्वए ठ त्र क्ष्7ए 9ए 11ए 13द्वए ब् त्र क्ष्11ए 13ए 15द्वऔर क् त्र क्ष्15ए 17द्वय तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । ∩ ठ ;पपद्ध ठ ∩ ब् ;पपपद्ध । ∩ ब् ∩ क् ;पअद्ध । ∩ ब् ;अद्ध ठ ∩ क् ;अपद्ध । ∩ ;ठ ∪ ब्द्ध ;अपपद्ध । ∩ क् ;अपपपद्ध । ∩ ;ठ ∪ क्द्ध ;पगद्ध ;। ∩ ठ द्ध ∩ ; ठ ∪ ब् द्ध ;गद्ध ; । ∪ क्द्ध ∩ ; ठ ∪ ब्द्ध 7ण् यदि । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या हैद्वए ठ त्र क्ष्ग रू ग एक सम प्रावृफत संख्या हैद्व ब् त्र क्ष्ग रू ग एक विषम प्रावृफत संख्या हैद्वक् त्र क्ष्ग रू ग एक अभाज्य संख्या हैद्वए तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । ∩ ठ ;पपद्ध । ∩ ब् ;पपपद्ध । ∩ क् ;पअद्ध ठ ∩ ब् ;अद्ध ठ ∩ क् ;अपद्ध ब् ∩ क् 8ण् निम्नलिख्िात समुच्चय युग्मों में से कौन से युग्म असंयुक्त हैं? ;पद्ध क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्व तथा क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 4 ≤ ग ≤ 6 द्व ;पपद्ध क्ष् ंए मए पए वए न द्व तथा क्ष् बए कए मए िद्व ;पपपद्ध क्ष्ग रू ग एक सम पूणा±क हैद्व और क्ष्ग रू ग एक विषम पूणा±क हैद्व 9ण् यदि । त्र क्ष्3ए 6ए 9ए 12ए 15ए 18ए 21द्वए ठ त्र क्ष् 4ए 8ए 12ए 16ए 20 द्वए ब् त्र क्ष्2ए 4ए 6ए 8ए 10ए 12ए 14ए 16 द्वए क् त्र क्ष्5ए 10ए 15ए 20 द्वय तो निम्नलिख्िात को ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । दृ ठ ;पपद्ध । दृ ब् ;पपपद्ध ।दृक् ;पअद्ध ठ दृ। ;अद्ध ब् दृ। ;अपद्ध क्दृ। ;अपपद्ध ठ दृ ब् ;अपपपद्ध ठदृक् ;पगद्ध ब् दृ ठ ;गद्ध क्दृठ ;गपद्ध ब्दृक् ;गपपद्ध क् दृ ब् 10ण् यदि ग्त्र क्ष् ंए इए बए क द्व और ल् त्र क्ष् एि इए कए हद्वए तो निम्नलिख्िात को ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ग्दृल् ;पपद्ध ल् दृ ग् ;पपपद्ध ग् ∩ ल् 11ण् यदि त् वास्तविक संख्याओं और फ परिमेय संख्याओं के समुच्चय हैं, तो त् दृ फ क्या होगा घ् 12ण् बताइए कि निम्नलिख्िात कथनों में से प्रत्येक सत्य है या असत्य? अपने उत्तर का औचित्य भी बताइएः ;पद्ध क्ष् 2ए 3ए 4ए 5 द्व तथा क्ष् 3ए 6द्व असंयुक्त समुच्चय हैं। ;पपद्ध क्ष् ंए मए पए वए न द्व तथा क्ष् ंए इए बए क द्वअसंयुक्त समुच्चय हैं। ;पपपद्ध क्ष् 2ए 6ए10ए 14 द्व तथा क्ष् 3ए 7ए 11ए 15द्व असंयुक्त समुच्चय हैं। ;पअद्ध क्ष् 2ए 6ए 10 द्व तथा क्ष् 3ए 7ए 11द्व असंयुक्त समुच्चय हैं। 1ण्11 समुच्चय का पूरक ;ब्वउचसमउमदज व िं ैमजद्ध मान लीजिए कि सभी अभाज्य संख्याओं का सावर्त्रिाक समुच्चय न् है तथा ।ए न् का वह उपसमुच्चय है, जिसमें वे सभी अभाज्य संख्याएँ हैं जो 42 की भाजक नहीं हैं। इस प्रकार । त्र क्ष्ग रू ग ∈ न् और ग संख्या 42 का भाजक नहीं हैद्व। हम देखते हैं कि 2 ∈ न् विंफतु 2 ∉ ।ए क्योंकि 2 संख्या 42 का एक भाजक है। इसी प्रकार 3 ∈ न् विंफतु 3 ∉ ।ए तथा 7 ∈ न् विंफतु 7 ∉ । अब केवल 2, 3 तथा 7 ही न् के ऐसे अवयव हैं जो ।में नहीं हैं। इन तीन अभाज्य संख्याओं का समुच्चय अथार्त् समुच्चय क्ष्2ए 3ए 7द्वए न् के सापेक्ष। का पूरक समुच्चय कहलाता है और इसे प्रतीक ।′ से निरूपित किया जाता है। अतः ।′ त्र क्ष्2ए 3ए 7द्व इस प्रकार हम देखते हैं कि ।′ त्र क्ष्ग रू ग ∈ न् और ग ∉ । द्व है। इससे निम्नलिख्िात परिभाषा प्राप्त होती हैः परिभाषा 8 मान लीजिए कि न् एक सावर्त्रिाक समुच्चय है और ।ए न् का एक उपसमुच्चय है, तो । का पूरक समुच्चय न् के उन अवयवों का समुच्चय है, जो । के अवयव नहीं हैं। प्रतीकात्मक रूप में हम न् के सापेक्ष । के पूरक को प्रतीक ।′ से निरूपित करते हैं। अतः ।′ त्र क्ष्ग रू ग ∈ न् और ग ∉ । द्व हम लिख सकते हैं। । त्र न् दृ । ध्यान दीजिए कि । के पूरक समुच्चय को, विकल्पतः, सावर्त्रिाक समुच्चय न् तथा समुच्चय । के अंतर के रूप में देखा जा सकता है। उदाहरण 20 मान लीजिए कि न् त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6ए 7ए 8ए 9ए 10द्व और । त्र क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए 9द्व है तो ।′ ज्ञात कीजिए। हल हम नोट करते हैं केवल 2, 4, 6, 8, 10 ही न् के ऐसे अवयव हैं जो । में नहीं हैं। अतः ।′ त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8ए10 द्वण् उदाहरण 21 मान लीजिए कि न् एक सह श्िाक्षा विद्यालय के कक्षा ग्प् के सभी विद्याथ्िार्यों का सावर्त्रिाक समुच्चय है और ।ए कक्षा ग्प् की सभी लड़कियों का समुच्चय है तो ।′ ज्ञात कीजिए। हल क्योंकि ।ए कक्षा ग्प् की सभी लड़कियों का समुच्चय है, अतः ।′ स्पष्टतया कक्षा के सभी लड़कों का समुच्चय है। यदि । सावर्त्रिाक समुच्चय न् का एक उपसमुच्चय है, तो इसका पूरक ।′ भी न् का एक उपसमुच्चय होता है। पुनः उपयुर्क्त उदाहरण 20 में, ।′ त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8ए 10 द्व अतः ;।′द्ध′ त्र क्ष्ग रू ग ∈ न् और ग ∉ ।′द्व त्र क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए 9द्व त्र । पूरक समुच्चय की परिभाषा से स्पष्ट है कि सावर्त्रिाक समुच्चय न् के किसी उपसमुच्चय ।′ के लिए ;।′द्ध′ त्र । अब निम्नलिख्िात उदाहरण में हम ; । ∪ ठद्ध′ तथा ।′∩ ठ′ के हल निकालेंगे। उदाहरण 22 मान लीजिए कि न् त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्वए । त्र क्ष्2ए 3द्व और ठ त्र क्ष्3ए 4ए 5द्व, ।′ए ठ′ ए ।′ ∩ ठ′ए । ∪ ठ ज्ञात कीजिए और पिफर सि( कीजिए कि ; । ∪ ठद्ध′ त्र।′∩ ठ′ण् हल स्पष्टतया ।′ त्र क्ष्1ए 4ए 5ए 6द्वए ठ′ त्र क्ष् 1ए 2ए 6 द्व। अतः ।′ ∩ ठ′ त्र क्ष् 1ए 6 द्व पुनः । ∪ ठ त्र क्ष् 2ए 3ए 4ए 5 द्व है। इसलिए ;। ∪ ठद्ध′ त्र क्ष् 1ए 6 द्व ;। ∪ ठद्ध′ त्र क्ष् 1ए 6 द्व त्र ।′ ∩ ठ′ इस प्रकार हम देखते हैं कि ; । ∪ ठद्ध′ त्र।′∩ ठ′ण् यह सि( किया जा सकता है कि उपयुर्क्त परिणाम व्यापक रूप से सत्य होता है यदि । और ठ सावर्जनिक समुच्चय न् के कोइर् दो उपसमुच्चय हैं, तो ; । ∪ ठद्ध′ त्र।′∩ ठ′ण् इसी प्रकार ; । ∩ ठद्ध′ त्र ।′ ∪ ठ′ इन परिणामों को शब्दों में इस प्रकार व्यक्त करते हैंः ‘‘दो समुच्चयों के सम्िमलन का पूरक उनके पूरक समुच्चयों का सावर्निष्ठ होता है तथा दोनों समुच्चयों के सावर्निष्ठ का पूरक उनके पूरक समुच्चयों का सम्िमलन होता है।’’ इनको क्म डवतहंद के नियम कहते हैं। यह नाम गण्िातज्ञ क्म डवतहंद के नाम पर रखा गया है। किसी समुच्चय । के पूरक ।′ को वेन आरेख द्वारा निरूपित किया जा सकता है जैसा कि आवृफति 1.10 में प्रदश्िार्त है। छायांकित भाग समुच्चय । के पूरक ।′ को दशार्ता है। आवृफति1ण्10 पूरकों के कुछ गुणध्मर् 1ण् पूरक नियम रू ;पद्ध । ∪ ।′ त्र न् ;पपद्ध । ∩ ।′ त्र φ 2ण्क्म डवतहंद का नियम रू ;पद्ध ;। ∪ ठद्ध´ त्र ।′∩ ठ′ ;पपद्ध ;। ∩ ठ त्र ।′∪ ठ′ 3ण् द्वि - पूरक नियम रू ;।′द्ध′ त्र । 4ण् φ′ और न् के नियम: φ′ त्र न् और न्′ त्र φण् इन नियमों का सत्यापन वेन आरेखों द्वारा किया जा सकता है। प्रश्नावली 1ण्5 1ण् मान लीजिए कि न् त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6ए 7ए 8ए 9 द्वए । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्वए ठ त्र क्ष्2ए 4ए 6ए 8 द्व और ब् त्र क्ष् 3ए 4ए 5ए 6 द्व तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ।′ ;पपद्ध ठ′ ;पपपद्ध ;। ∪ ब्द्ध′ ;पअद्ध ;। ∪ ठद्ध′ ;अद्ध ;।′द्ध′ ;अपद्ध ;ठ दृ ब्द्ध′ 2ण् प् िन् त्र क्ष् ंए इए बए कए मए एि हए ीद्व, तो निम्नलिख्िात समुच्चयों के पूरक ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । त्र क्ष्ंए इए बद्व ;पपद्ध ठ त्र क्ष्कए मए एि हद्व ;पपपद्ध ब् त्र क्ष्ंए बए मए हद्व ;पअद्ध क् त्र क्ष् एि हए ीए ंद्व 3ण् प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय को सावर्त्रिाक समुच्चय मानते हुए, निम्नलिख्िात समुच्चयों के पूरक लिख्िाएः ;पद्ध क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत सम संख्या हैद्व ;पपद्ध क्ष् ग रू ग एक प्रावृफत विषम संख्या हैद्व ;पपपद्ध क्ष्ग रू ग संख्या 3 का एक ध्न गुणज हैद्व ;पअद्ध क्ष् ग रू ग एक अभाज्य संख्या हैद्व ;अद्ध क्ष्ग रू गए 3 और 5 से विभाजित होने वाली एक संख्या हैद्व ;अपद्ध क्ष् ग रू ग एक पूणर् वगर् संख्या हैद्व ;अपपद्ध क्ष् ग रू ग एक पूणर् घन संख्या हैद्व ;अपपपद्ध क्ष् ग रू ग ़ 5 त्र 8 द्व ;पगद्ध क्ष् ग रू 2ग ़ 5 त्र 9द्व ;गद्ध क्ष् ग रू ग ≥ 7 द्व ;गपद्ध क्ष् ग रू ग ∈ छ और 2ग ़ 1 झ 10 द्व 4ण् यदि न् त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6ए 7ए 8ए 9 द्वए । त्र क्ष्2ए 4ए 6ए 8द्व और ठ त्र क्ष् 2ए 3ए 5ए 7द्व, तो सत्यापित कीजिए किः ;पद्ध ;। ∪ ठद्ध′ त्र ।′∩ ठ′ ;पपद्ध ;। ∩ ठद्ध′ त्र ।′∪ ठ′ 5ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक के लिए उपयुर्क्त वेन आरेख खींचिएः ;पद्ध ;। ∪ ठद्ध′ ;पपद्ध ।′∩ ठ′ ;पपपद्ध ;। ∩ ठद्ध′ ;पअद्ध ।′∪ ठ′ 6ण् मान लीजिए कि किसी समतल में स्िथत सभी त्रिाभुजों का समुच्चय सावर्त्रिाक समुच्चय न् है। यदि । उन सभी त्रिाभुजों का समुच्चय है जिनमें कम से कम एक कोण 600 से भ्िान्न है, तो ।′ क्या है? 7ण् निम्नलिख्िात कथनों को सत्य बनाने के लिए रिक्त स्थानों को भरिएः ;पद्ध । ∪ ।′ त्र ण् ण् ण् ;पपद्ध φ′ ∩ । त्र ण् ण् ण् ;पपपद्ध । ∩ ।′ त्र ण् ण् ण् ;पअद्ध न्′ ∩ । त्र ण् ण् ण् 1ण्12 दो समुच्चयों के सम्िमलन और सवर्निष्ठ पर आधरित व्यावहारिक प्रश्न च्तंबजपबंस च्तवइसमउे वद न्दपवद ंदक प्दजमतेमबजपवद व िज्ूव ैमजे पहले के अनुच्छेदों में हम दो समुच्चयों के सम्िमलन, सवर्निष्ठ तथा अंतर के बारे में सीख चुके हैं। इस अनुच्छेद में हम अपने प्रतिदिन के जीवन से सम्बन्िध्त कुछ प्रश्नों को सरल करेंगे। इस अनुच्छेद में प्राप्त सूत्रों का प्रयोग आगे आने वाले अध्यायों, जैसे प्रायिकता ;अध्याय 16द्ध में भी किया जाएगा। ;पद्ध मान लीजिए कि । और ठ परिमित समुच्चय हैं। यदि । ∩ ठ त्र φए तो द ; । ∪ ठ द्ध त्र द ; । द्ध ़ द ; ठ द्ध ण्ण्ण् ;1द्ध आवृफति 1ण्11 । ∪ ठ के अवयव या तो । में हैं या ठ में हैं परंतु दोनों में नहीं हैं, क्योंकि । ∩ ठ त्र φण् अतः परिणाम ;1द्ध तत्काल प्राप्त होता है। ;पपद्ध व्यापक रूप से यदि । और ठ परिमित समुच्चय है, तो द ; । ∪ ठ द्ध त्र द ; । द्ध ़ द ; ठ द्धदृ द ; । ∩ ठ द्ध ण्ण्ण् ;2द्ध नोट कीजिए कि समुच्चय । दृ ठए । ∩ ठ तथा ठ दृ । असंयुक्त हैं और इनका सम्िमलन । ∪ठ है ;आवृफति 1.11द्ध। इसलिए द ; । ∪ ठद्ध त्र द ;। दृ ठद्ध ़ द ; । ∩ ठ द्ध ़ द ; ठ दृ । द्ध त्र द ;। दृ ठद्ध ़ द ; । ∩ठ द्ध ़ द ; ठ दृ । द्ध ़ द ; । ∩ ठ द्ध दृ द ; । ∩ ठद्ध त्र द ;। द्ध ़ द ; ठ द्ध दृ द ; । ∩ ठद्धए जो परिणाम ;2द्ध को सत्यापित करता है। ;पपपद्ध पुनः यदि ।ए ठ और ब् परिमित समुच्चय हैं, तो द ; । ∪ ठ ∪ ब् द्धत्र द ; । द्ध ़ द ; ठ द्ध ़ द ; ब् द्ध दृ द ; । ∩ ठ द्ध दृ द ; ठ ∩ ब्द्धदृ द ; । ∩ ब् द्ध ़ द ; । ∩ ठ ∩ ब् द्ध ण्ण्ण् ;3द्ध वास्तव में हम देखते हैं कि द ; । ∪ ठ ∪ ब् द्ध त्र द ;।द्ध ़ द ; ठ ∪ ब् द्ध दृ द ख् । ∩ ; ठ ∪ ब् द्ध , ख् ;2द्ध द्वारा , त्र द ;।द्ध ़ द ; ठ द्ध ़ द ; ब् द्ध दृ द ; ठ ∩ ब् द्ध दृ द ख् । ∩ ; ठ ∪ ब् द्ध, ख् ;2द्ध द्वारा , क्योंकि । ∩ ; ठ ∪ ब् द्ध त्र ; । ∩ ठ द्ध ∪ ; । ∩ ब् द्धए हमें प्राप्त होता है कि द ख् । ∩ ; ठ ∪ ब् द्ध , त्र द ; । ∩ ठ द्ध ़ द ; । ∩ ब् द्ध दृ द ख् ; । ∩ ठद्ध ∩ ;। ∩ ब्द्ध, त्र द ; । ∩ ठ द्ध ़ द ; । ∩ ब् द्ध दृ द ;। ∩ ठ ∩ ब्द्ध अतः द ; । ∪ ठ ∪ ब् द्ध त्र द ;।द्ध ़ द ; ठ द्ध ़ द ; ब् द्ध दृ द ; । ∩ ठ द्ध दृ द ; ठ ∩ ब्द्ध दृ द ; । ∩ ब् द्ध ़ द ; । ∩ ठ ∩ ब् द्ध इस प्रकार परिणाम ;3द्ध सि( हुआ। उदाहरण 23 यदि ग् और ल् दो ऐसे समुच्चय हैं कि ग् ∪ ल् में 50 अवयव हैं, ग् में 28 अवयव हैं और ल् में 32 अवयव हैं, तो ग् ∩ ल् में कितने अवयव हैं? हल दिया है कि द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र 50ए द ;ग्द्ध त्र 28एद ;ल्द्ध त्र 32ए द ;ग ∩ ल्द्ध त्र घ् सूत्रा द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र द ;ग्द्ध ़ द ;ल्द्ध दृ द ;ग् ∩ ल्द्ध के प्रयोग द्वारा हम देखते हैं कि द ;ग् ∩ ल्द्ध त्र द ;ग्द्ध ़ द ;ल्द्ध दृ द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र28 ़ 32 दृ 50 त्र 10 विकल्पतः मान लीजिए कि द ; ग् ∩ ल् द्ध त्र ाए तो आवृफति1ण्12 द ;ग् दृ ल्द्ध त्र 28 दृ ा ए द ;ल् दृ ग्द्ध त्र 32 दृ ा ;आवृफति 1.12 के वेन आरेख द्वाराद्ध इससे मिलता है कि 50 त्र द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र द ;ग् दृ ल्द्ध ़ द ;ग् ∩ ल्द्ध ़ द ;ल् दृ ग्द्ध त्र ;28 दृ ाद्ध ़ ा ़ ;32 दृ ाद्ध अतः ा त्र 10ण् उदाहरण 24 एक विद्यालय में 20 अध्यापक हैं जो गण्िात या भौतिकी पढ़ाते हैं। इनमें से 12 गण्िात पढ़ाते हैं और 4 भौतिकी और गण्िात दोनों को पढ़ाते हैं। कितने अध्यापक भौतिकी पढ़ाते हैं? हल मान लीजिए कि ड उन अध्यापकों का समुच्चय निरूपित करता है, जो गण्िात पढ़ाते हैं और च् उन अध्यापकों का समुच्चय निरूपित करता है, जो भौतिकी पढ़ाते हैं। हमें प्रश्न के कथन में आने वाले शब्द ‘या’ से सम्िमलन तथा शब्द ‘और’ से सवर्निष्ठ का संकेत मिलता है। इसलिए द ; ड ∪ च् द्ध त्र 20 ए द ; ड द्ध त्र 12 और द ; ड ∩ च् द्ध त्र 4 हम द ; च् द्ध ज्ञात करना चाहते हैं। परिणाम द ; ड ∪ च् द्ध त्र द ; ड द्ध ़ द ; च् द्ध दृ द ; ड ∩ च् द्धए के प्रयोग द्वारा, 20 त्र 12 ़ द ; च् द्ध दृ 4 अतः द ; च् द्ध त्र 12 अतएव 12 अध्यापक भौतिकी पढ़ाते हैं। उदाहरण 25 35 विद्याथ्िार्यों की एक कक्षा में, 24 िकेट खेलना पसंद करते हैं और 16 पफुटबाल खेलना पसंद करते हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विद्याथीर् कम से कम एक खेल अवश्य खेलना पसंद करता है। कितने विद्याथीर् िकेट और पफुटबाल दोनों खेलना पसंद करते हैं? हल मान लीजिए कि िकेट खेलना पसंद करने वाले विद्याथ्िार्यों का समुच्चय ग् है। मान लीजिए कि पुफटबाल खेलना पसंद करने वाले विद्याथ्िार्यों का समुच्चय ल् है। इस प्रकार ग् ∪ ल् उन विद्याथ्िार्यों का समुच्चय है, जो कम से कम एक खेलना पसंद करते हैं और ग् ∩ ल् उन विद्याथ्िार्यों का समुच्चय है, जो दोनों ही खेल खेलना पसंद करते हैं। दिया है कि द ;ग्द्ध त्र 24ए द ;ल्द्ध त्र 16ए द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र 35ए द ;ग् ∩ ल्द्ध त्र घ् सूत्रा द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र द ;ग्द्ध ़ द ;ल्द्ध दृ द ;ग् ∩ ल्द्धए के प्रयोग द्वारा, हम प्राप्त करते हैं। 35 त्र 24 ़ 16 दृ द ;ग् ∩ ल्द्ध इसलिएए द ;ग् ∩ ल्द्ध त्र 5 अथार्त् 5 विद्याथीर् दोनों खेल खेलना पसंद करते हैं। उदाहरण 26 किसी स्कूल के 400 विद्याथ्िार्यों के सवेर्क्षण में 100 विद्याथीर् सेब का रस, 150 विद्याथीर् संतरे का रस और 75 विद्याथीर् सेब तथा संतरे दोनों का रस पीने वाले पाए जाते हैं। ज्ञात कीजिए कि कितने विद्याथीर् न तो सेब का रस पीते हैं और न संतरे का ही? हल मान लीजिए कि न् सवेर्क्षण किए गए विद्याथ्िार्यों के समुच्चय को निरूपित करता है। तथा । सेब का रस पीने वाले और ठ संतरे का रस पीने वाले विद्याथ्िार्यों के समुच्चयों को निरूपित करते है। इस प्रकार द ;न्द्ध त्र 400ए द ;।द्ध त्र 100ए द ;ठद्ध त्र 150 और द ;। ∩ ठद्ध त्र 75ण् अब द ;।′∩ ठ′द्धत्र द ;। ∪ ठद्ध′ त्र द ;न्द्ध दृ द ;। ∪ ठद्ध त्र द ;न्द्ध दृ द ;।द्ध दृ द ;ठद्ध ़ द ;। ∩ ठद्ध त्र400 दृ 100 दृ 150 ़ 75 त्र 225 अतः 225 विद्याथीर् न तो सेब का और न संतरे का रस पीते हैं। उदाहरण 27 200 व्यक्ित किसी चमर् रोग से पीडि़त हैं, इनमें 120 व्यक्ित रसायन ब्ए 50 व्यक्ित1रसायन ब्2ए और 30 व्यक्ित रसायन ब्1 और ब्2 दोनों ही से प्रभावित हुए हैं, तो ऐसे व्यक्ितयों की संख्या ज्ञात कीजिए जो प्रभावित हुए हों: ;पद्ध रसायन ब्1 विंफतु रसायन ब्2 से नहीं, ;पपद्ध रसायन ब्2 विंफतु रसायन ब्1 से नहीं, ;पपपद्ध रसायन ब्अथवा रसायन ब्से प्रभावित हुए हैं।12 हल मान लीजिए कि न्ए चमर् रोग से पीडि़त व्यक्ितयों के सावर्त्रिाक समुच्चय को निरूपित करता है, ।ए रसायन ब्1 से प्रभावित व्यक्ितयों के समुच्चय को तथा ठए रसायन ब्2 से प्रभावित व्यक्ितयों के समुच्चय को निरूपित करते हैं। यहाँ पर द ; न्द्ध त्र 200ए द ; । द्ध त्र 120ए द ; ठ द्ध त्र 50 तथा द ; । ∩ ठ द्ध त्र 30 ;पद्ध दिए हुए वेन आरेख ;आवृफति 1.13द्ध में हम देखते हैं कि । त्र ; । दृ ठ द्ध ∪ ; । ∩ ठ द्धण् अतः द ;।द्ध त्र द;। दृ ठ द्ध ़ द; । ∩ ठ द्ध ;क्योंकि । दृ ठद्ध और । ∩ ठ असंयुक्त हैंद्ध अथवा द ; । दृ ठ द्ध त्र द ; । द्ध दृ द ; । ∩ ठ द्ध त्र 120 दृ30 त्र 90 अतः रसायन ब्1 विंफतु रसायन ब्2 से नहीं प्रभावित व्यक्ितयों की संख्या 90 है। आवृफति1ण्13 ;पपद्ध आवृफति 1.13 से ठ त्र ; ठ दृ ।द्ध ∪ ; । ∩ ठद्धण् इसलिए द ;ठद्ध त्र द ;ठ दृ ।द्ध ़ द ; । ∩ ठद्ध ;क्योंकि । दृ ठ तथा । दृ ठ अंसयुक्त हैं।द्ध अथवा द ; ठ दृ । द्ध त्र द ; ठ द्ध दृ द ; । ∩ ठ त्र 50 दृ 30 त्र 20 अतः रसायन ब्2 विंफतु रसायन ब्1 से नहीं प्रभावित व्यक्ितयों की संख्या 20 है। ;पपपद्ध रसयान ब्1 अथवा रसायन ब्2 से प्रभावित व्यक्ितयों की संख्या अथार्त् द ; । ∪ ठ द्ध त्र द ; । द्ध ़ द ; ठ द्ध दृ द ; । ∩ ठ द्ध त्र 120 ़ 50 दृ 30 त्र 140ण् प्रश्नावली 1ण्6 1ण् यदि ग् और ल् दो ऐसे समुच्चय हैं कि द ; ग् द्ध त्र 17ए द ; ल् द्ध त्र 23 तथा द ; ग् ∪ ल् द्ध त्र 38ए तो द ; ग् ∩ ल् द्ध ज्ञात कीजिए। 2ण् यदि ग् और ल् दो ऐसे समुच्चय हैं कि ग् ∪ ल् में 18, ग् में 8 और ल् में 15 अवयव हों, तो ग् ∩ ल् में कितने अवयव होंगे? 3ण् 400 व्यक्ितयों के समूह में, 250 हिंदी तथा 200 अंग्रेशी बोल सकते हैं। कितने व्यक्ित हिंदी तथा अंग्रेशी दोनों बोल सकते हैं? 4ण् यदि ै और ज् दो ऐसे समुच्चय हैं कि ै में 21, ज् में 32 और ै ∩ ज् में 11 अवयव हों, तो ै ∪ ज् में कितने अवयव होंगे? 5ण् यदि ग् और ल् दो ऐसे समुच्चय हैं कि ग् में 40, ग् ∪ ल् में 60 और ग् ∩ ल् में 10 अवयव हों, तो ल् में कितने अवयव होंगे? 6ण् 70 व्यक्ितयों के समूह में, 37 काॅप़फी, 52 चाय पसंद करते हैं और प्रत्येक व्यक्ित दोनों में से कम से कम एक पेय पसंद करता है, तो कितने व्यक्ित काॅप़फी और चाय दोनों को पसंद करते हैं? 7ण् 65 व्यक्ितयों के समूह में, 40 व्यक्ित िकेट, और 10 व्यक्ित िकेट तथा टेनिस दोनों को पसंद करते हैं, तो कितने व्यक्ित केवल टेनिस को पसंद करते हैं विंफतु िकेट को नहीं? कितने व्यक्ित टेनिस को पसंद करते हैं? 8ण् एक कमेटी में, 50 व्यक्ित प्रेंफच, 20 व्यक्ित स्पेनिश और 10 व्यक्ित स्पेनिश और प्रेंफच दोनों ही भाषाओं को बोल सकते हैं। कितने व्यक्ित इन दोनों ही भाषाओं में से कम से कम एक भाषा बोल सकते हैं? विविध् उदाहरण उदाहरण 28 दिखाइए कि शब्द श् ब्।ज्।त्।ब्ज् श् के वणर् विन्यास के अक्षरों का समुच्चय तथा शब्द श् ज्त्।ब्ज्श् के वणर्विन्यास के अक्षरों का समुच्चय समान है। हल मान लीजिए कि ग् श्ब्।ज्।त्।ब्ज्श् के अक्षरों का समुच्चय है, तो ग् त्र क्ष् ब्ए ।ए ज्ए।ए त्ए ।ए ब्ए ज् द्व त्र क्ष् ब्ए ।ए ज्ए त् द्व मान लीजिए कि ल् श् ज्त्।ब्ज्श् के अक्षरों का समुच्चय है, तो ल् त्र क्ष् ज्ए त्ए ।ए ब् द्व क्योंकि ग् का प्रत्येक अवयव ल् में है तथा ल् का प्रत्येक अवयव ग् में है, अतः ग् त्र ल् उदाहरण 29 समुच्चय क्ष् दृ1ए 0ए 1 द्व के सभी उपसमुच्चयों की सूची बनाइए। हल माना । त्र क्ष्दृ1ए 0ए 1द्व है। समुच्चय । का वह उपसमुच्चय जिसमें कोइर् भी अवयव नहीं है रिक्त समुच्चय φ है। । के एक अवयव वाले उपसमुच्चय क्ष् दृ1 द्वए क्ष् 0 द्वए क्ष् 1 द्व हैं। । के दो अवयव वाले समुच्चय क्ष् दृ1ए 0 द्वए क्ष्दृ1ए 1द्व एक्ष्0ए 1द्व हैं। । के तीन अवयव वाला उपसमुच्चय । स्वयं है। इस प्रकार । के सभी उपसमुच्चय φए क्ष् दृ1 द्वए क्ष् 0 द्वए क्ष् 1 द्वए क्ष्दृ1ए 0द्वए क्ष्दृ1ए 1द्व एक्ष्0ए 1द्व तथा क्ष्दृ1ए 0ए 1द्व हैं। उदाहरण 30 सि( कीजिए कि । ∪ ठ त्र । ∩ ठ का तात्पयर् है कि । त्र ठ हल यदि कोइर् अवयव ं ∈ ।ए तो ं ∈ । ∪ ठण् क्योंकि । ∪ ठ त्र । ∩ ठ ए इसलिए ं ∈ । ∩ ठण् अतः ं ∈ ठण् इस प्रकार । ⊂ ठण् इसी प्रकार यदि इ ∈ ठए तो इ ∈ । ∪ ठण् क्योंकि । ∪ ठ त्र । ∩ ठ इसलिएए इ ∈ । ∩ ठण् इस प्रकार इ ∈ ।ण् अतः ठ ⊂ । अतएव । त्र ठण् उदाहरण 31 समुच्चयों ।ए ठ के लिए सि( कीजिए कि च् ;। ∩ ठ द्ध त्र च् ; । द्ध ∩ च् ; ठ द्धण् हल मान लीजिए कि ग् ∈ च् ;।∩ ठद्ध, तो ग्⊂ ।∩ठण् इसलिए ग्∈ च्;।द्ध तथा ग्∈ च्;ठद्धए जिसका तात्पयर् हुआ कि ग् ∈ ख्च् ;। द्ध ∩ च् ;ठद्ध,. इस प्रकार च् ;।∩ ठ द्ध ⊂ ख्च् ;।द्ध ∩ च् ; ठ द्ध,. मान लीजिए कि ल् ∈ ख्च् ; । द्ध ∩ च् ; ठ द्ध,, तो ल् ∈ च् ;।द्ध तथा ल् ∈ च् ; ठ द्ध, इस प्रकार ल् ⊂ । और ल् ⊂ ठण् इसलिए ल् ⊂ । ∩ ठए जिसका तात्पयर् है कि ल् ∈ च् ;। ∩ ठ द्धए अतएव ख्च् ; । द्ध ∩ च् ; ठ द्ध, ⊂ च् ;। ∩ ठद्धए अतः च् ;। ∩ ठ द्ध त्र च् ; । द्ध ∩ च् ; ठ द्धण् उदाहरण 32 एक बाजार अनुसंधन समूह ने 1000 उपभोक्ताओं का सवेर्क्षण किया और सूचित किया कि 720 उपभोक्ताओं ने उत्पाद । तथा 450 उपभोक्ताओं ने उत्पाद ठ पसंद किया। दोनों उत्पादों को पसंद करने वाले उपभोक्ताओं की न्यूनतम संख्या क्या है? हल मान लीजिए कि न् सवेर्क्षण उपभोक्ताओं का समुच्चय है, ै उन उपभोक्ताओं का समुच्चय है जिन्होनें उत्पाद । पसंद किया और ज् उन उपभोक्ताओं का समुच्चय है जिन्होंने उत्पाद ठ पसंद किया। दिया है कि, द ; न् द्ध त्र 1000ए द ; ै द्ध त्र 720ए द ; ज् द्ध त्र 450 इस प्रकार द ; ै ∪ ज् द्ध त्र द ; ै द्ध ़ द ; ज् द्ध दृ द ; ै ∩ ज् द्ध त्र 720 ़ 450 दृ द ;ै ∩ ज्द्ध त्र 1170 दृ द ; ै ∩ ज् द्ध स्पष्ट है कि द ; ै ∪ ज् द्ध अध्िकतम तब होगा जब द ; ै ∩ ज् द्ध न्यूनतम है, विंफतु ै ∪ ज् ⊂ न्ए जिसका तात्पयर् है कि द ; ै ∪ ज् द्ध ≤ द ; न् द्ध त्र 1000 । इस प्रकार द ; ै ∪ ज् द्ध का अध्िकतम मान 1000 है। इसलिए द ; ै ∩ ज् द्ध का न्यूनतम मान 170 है। अतः दोनों उत्पादों को पसंद करने वाले उपभोक्ताओं की न्यूनतम संख्या 170 है। उदाहरण 33 500 कार मालिकों से पूछताछ करनें पर पाया गया कि 400 लोग । प्रकार की कार के, 200 लोग ठ प्रकार की कार के तथा 500 लोग । और ठ दोनों प्रकार की कारों के मालिक थे। क्या ये आँकड़े सही हैं? हल मान लीजिए कि पूछताछ किए गए कार मालिकों का समुच्चय न् है, । प्रकार की कार के मालिकों का समुच्चय ड है और ठ प्रकार की कार के मालिकों का समुच्चय ै है। दिया है कि द ; न् द्ध त्र 500ए द ;ड द्ध त्र 400ए द ; ै द्ध त्र 200 और द ; ै ∩ ड द्ध त्र 50ण् इस प्रकार द ; ै ∪ ड द्ध त्र द ; ै द्ध ़ द ; ड द्ध दृ द ; ै ∩ ड द्ध त्र 200 ़ 400 दृ 50 त्र 550 विंफतु ै ∪ ड ⊂ न् जिसका तात्पयर् है कि द ; ै ∪ ड द्ध ≤ द ; न् द्धण् यह एक विरोधेक्ित है। अतः प्रदत्त आँकड़े सही नहीं है। उदाहरण 34 एक महाविद्यालय में पुफटबाल के लिए 38, बास्केट बाल के लिए 15 और िकेट के लिए 20 पदक प्रदान किए गए। यदि ये पदक कुल 58 लोगों को मिले और केवल तीन लोगों को तीनों खेलों के लिए मिले, तो कितने लोगों को तीन में से ठीक - ठीक दो खेलों के लिए मिले? हल मान लीजिए कि थ्ए ठ तथा ब् उन लोगों के समुच्चय निरूपित करते हैं जिन्हें क्रमशः पुफटबाल, बास्केटबाल तथा िकेट के लिए पदक मिले। यहाँ द ;थ्द्ध त्र 38ए द ; ठ द्ध त्र 15ए द ; ब् द्ध त्र 20ए द ;थ् ∪ ठ ∪ ब् द्ध त्र 58 और द ;थ् ∩ ठ ∩ ब् द्ध त्र 3 पुनः द ;थ् ∪ ठ ∪ ब् द्ध त्र द ; थ् द्ध ़ द ; ठ द्ध ़ द ; ब् द्ध दृ द ;थ् ∩ ठ द्ध दृ द ;थ् ∩ ब् द्ध दृ द ;ठ ∩ ब् द्ध ़ द ; थ् ∩ ठ ∩ ब् द्धए इस प्रकार द ; थ् ∩ ठ द्ध ़ द ; थ् ∩ ब् द्ध ़ द ; ठ ∩ ब् द्ध त्र 18 आवृफति 1.14 में दिए वेन आरेख पर विचार कीजिएः यहाँ ं उन लोगों की संख्या है, जिनको केवल पुफटबाल तथा बास्केटबाल के लिए पदक मिले, इ उन लोगों की संख्या है, जिनको केवल पुफटबाल तथा िकेट के लिए पदक मिले और ब उन लोगों की संख्या है, जिनको केवल बास्केटबाल तथा िकेट के लिए पदक मिले। क उन लोगों की संख्या है आवृफति1ण्14 जिनको तीनो ही खेलों के लिए पदक मिले। इस प्रकार क त्र द ; थ् ∩ ठ ∩ ब् द्ध त्र 3 और ं ़ क ़ इ ़ क ़ ब ़ क त्र 18 अतः ं ़ इ ़ ब त्र 9ए जोकि उन लोगों की संख्या है, जिनकों तीनों खेलों में से दो खेलों के लिए पदक मिले। अध्याय 1 पर विविध् प्रश्नावली 1ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों में से कौन किसका उपसमुच्चय है, इसका निणर्य कीजिएः । त्र क्ष्ग रू ग ∈ त् तथा ग2 दृ 8ग ़ 12 त्र 0 को संतुष्ट करने वाली सभी वास्तविक संख्याएँ ग द्वए ठ त्र क्ष्2ए 4ए 6द्वए ब् त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8ए ण् ण् ण् द्वए क् त्र क्ष् 6 द्वण् 2ण् ज्ञात कीजिए कि निम्नलिख्िात में से प्रत्येक कथन सत्य है या असत्य है। यदि सत्य है, तो उसे सि( कीजिए। यदि असत्य है, तो एक उदाहरण दीजिए। ;पद्ध यदि ग ∈ । तथा । ∈ ठ ए तो ग ∈ ठ ;पपद्ध यदि । ⊂ ठ तथा ठ ∈ ब् ए तो । ∈ ब् ;पपपद्ध यदि । ⊂ ठ तथा ठ ⊂ ब् ए तो । ⊂ ब् ;पअद्ध यदि । ⊄ ठ तथा ठ ⊄ ब् ए तो । ⊄ ब् ;अद्ध यदि ग ∈ । तथा । ⊄ ठ ए तो ग ∈ ठ ;अपद्ध यदि । ⊂ ठ तथा ग ∉ ठ ए तो ग ∉ । 3ण् मान लीजिए ।ए ठए और ब् ऐसे समुच्चय हैं कि । ∪ ठ त्र । ∪ ब् तथा । ∩ ठ त्र । ∩ ब्, तो दशार्इए कि ठ त्र ब्ण् 4ण् दिखाइए कि निम्नलिख्िात चार प्रतिबंध् तुल्य हैंः ;पद्ध । ⊂ ठ ;पपद्ध । दृ ठ त्र φ ;पपपद्ध । ∪ ठ त्र ठ ;पअद्ध । ∩ ठ त्र । 5ण् दिखाइए कि यदि । ⊂ ठए तो ब् दृ ठ ⊂ ब् दृ ।ण् 6ण् मान लीजिए कि च् ; । द्ध त्र च् ; ठ द्धए सि( कीजिए कि । त्र ठ 7ण् किन्हीं भी समुच्चयों । तथा ठ के लिए, क्या यह सत्य है कि च् ;। द्ध ∪ च् ; ठ द्ध त्र च् ; । ∪ ठ द्धघ् अपने उत्तर का औचित्य बताइए। 8ण् किन्हीं दो समुच्चयों । तथा ठ के लिए सि( कीजिए किए । त्र ; । ∩ ठ द्ध ∪ ; । दृ ठ द्ध और । ∪ ; ठ दृ । द्ध त्र ; । ∪ ठ द्ध 9ण् समुच्चयों के गुणध्मो± का प्रयोग करके सि( कीजिए किः ;पद्ध । ∪ ; । ∩ ठ द्ध त्र। ;पपद्ध । ∩ ; । ∪ ठ द्ध त्र ।ण् 10ण् दिखलाइए कि । ∩ ठ त्र । ∩ ब् का तात्पयर् ठ त्र ब् आवश्यक रूप से नहीं होता है। 11ण् मान लीजिए कि । और ठ समुच्चय हैं। यदि किसी समुच्चय ग् के लिए । ∩ ग् त्र ठ ∩ ग् त्र φ तथा । ∪ ग् त्र ठ ∪ ग्ए तो सि( कीजिए कि । त्र ठण् ;संकेतः । त्र। ∩ ; । ∪ ग् द्ध ए ठ त्र ठ ∩ ; ठ ∪ ग् द्ध और वितरण नियम का प्रयोग कीजिएद्ध 12ण् ऐसे समुच्चय ।ए ठ और ब् ज्ञात कीजिए ताकि । ∩ ठए ठ ∩ ब् तथा । ∩ ब् आरिक्त समुच्चय हों और । ∩ ठ ∩ ब् त्र φण् 13ण् किसी विद्यालय के 600 विद्याथ्िार्यों के सवेर्क्षण से ज्ञात हुआ कि 150 विद्याथीर् चाय, 225 विद्याथीर् काॅप़फी तथा 100 विद्याथीर् चाय और काॅप़फी दोनों पीते हैं। ज्ञात कीजिए कि कितने विद्याथीर् न तो चाय पीते हैं और न काॅप़फी पीते हैं। 14ण् विद्याथ्िार्यों के एक समूह में, 100 विद्याथीर् हिंदी, 50 विद्याथीर् अंग्रेशी तथा 25 विद्याथीर् दोनों भाषाओं को जानते हैं। विद्याथ्िार्यों में से प्रत्येक या तो हिंदी या अंग्रेशी जानता है। समूह में कुल कितने विद्याथीर् हैं? 15ण् 60 लोगों के सवेर्क्षण में पाया गया कि 25 लोग समाचार पत्रा भ्ए 26 लोग समाचार पत्रा ज्ए 26 लोग समाचार पत्रा प्ए 9 लोग भ् तथा प् दोनों, 11 लोग भ् तथा ज् दोनों, 8 लोग ज् तथा प् दोनों और 3 लोग तीनों ही समाचार पत्रा पढ़ते हैं, तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध कम से कम एक समाचार पत्रा पढ़ने वालों की संख्या। ;पपद्ध ठीक - ठीक केवल एक समाचार पत्रा पढ़ने वालों की संख्या। 16ण् एक सवेर्क्षण में पाया गया कि 21 लोग उत्पाद ।ए 26 लोग उत्पाद ठए 29 लोग उत्पाद ब् पसंद करते हैं। यदि 14 लोग उत्पाद । तथा ठए 12 लोग उत्पाद ब् तथा ।ए 14 लोग उत्पाद ठ तथा ब् और 8 लोग तीनो ही उत्पादों को पसंद करते हैं। ज्ञात कीजिए कि कितने लोग केवल उत्पाद ब् को पसंद करते हैं। सारांश इस अध्याय में समुच्चयों से संबंध्ित वुफछ मूलभूत परिभाषाओं और संियाओं पर विचार किया गया है। जिसका सार नीचे दिया है। ऽ एक समुच्चय वस्तुओं का सुपरिभाष्िात संग्रह होता है। ऽ एक समुच्चय जिसमें एक भी अवयव नहीं होता है, रिक्त समुच्चय कहलाता है। ऽ एक समुच्चय जिसमें अवयवों की संख्या निश्िचत होती है परिमित समुच्चय कहलाता है अन्यथा अपरिमित समुच्चय कहलाता है। ऽ दो समुच्चय । और ठ समान कहलाते हैं यदि उनमें तथ्यतः समान अवयव हों। ऽ एक समुच्चय । किसी समुच्चय ठ का उपसमुच्चय कहलाता है, यदि । का प्रत्येक अवयव ठ का भी अवयव हो। अंतराल समुच्चय त् के उपसमुच्चय होते हैं। ऽ किसी समुच्चय । का घात समुच्चय । के सभी उपसमुच्चयों का संग्रह होता है। ऽ दो समुच्चय । और ठ का सम्िमलन उन सभी अवयवों का समुच्चय होता है जो या तो । में हों या ठ में हों। ऽ दो समुच्चय । और ठ का सवर्निष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय होता है जो । और ठ दोनों में उभयनिष्ठ हों।दो समुच्चय । और ठ का अंतर, जब । तथा ठ इसी क्रम में हो, उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो । में हों विंफतु ठ में नहीं हों। ऽ किन्हीं दो समुच्चय । तथा ठ के लिए, ;। ∪ ठद्ध′ त्र ।′∩ ठ′ तथा ;। ∩ ठद्ध′ त्र ।′∪ ठ′ ऽ यदि । और ठ ऐसे परिमित समुच्चय हैं कि । ∩ ठ त्र φए तो, द ;। ∪ ठद्ध त्र द ;।द्ध ़ द ;ठद्ध और यदि । ∩ ठ ≠φए तो द ;। ∪ ठद्ध त्र द ;।द्ध ़ द ;ठद्ध दृ द ;। ∩ ठद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जमर्न गण्िात ळमवतह ब्ंदजवत ;1845 इर्॰ - 1918 इर्॰ द्ध को आध्ुनिक समुच्चय सि(ांत के अध्िकांश भाग का जन्मदाता माना जाता है। समुच्चय सि(ांत पर उनके शोध् पत्रा 1874 इर्॰ से 1897 इर्॰ के बीच के किसी समय में प्रकाश में आए। उनका समुच्चय सि(ांत का अध्ययन उस समय हुआ जब वे ं ेपद ग ़ ं ेपद 2ग ़ ं ेपद 3ग ़ ण्ण्ण् के रूप की त्रिाकोणमितीय श्रेणी123का अध्ययन कर रहे थे। 1874 इर्॰ में अपने एक शोध् पत्रा में यह प्रकाश्िात किया कि वास्तविक संख्याओं को पूणा±कों के साथ एक - एक संगतता में नहीं रखा जा सकता है। 1879 इर्॰ के उत्तराध्र् में अमूतर् समुच्चयों के विभ्िान्न गुणध्मो± को दशार्ने वाले उनके अनेक शोध् पत्रा प्रकाश्िात हुए। कृऽकृ

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Ganit





अध्याय 1


समुच्चय (Sets)


"In these days of conflict between ancient and modern studies; there must purely be something to be said for a study which did not begin with Pythagoras and will not end with Einstein; but is the oldest and the youngest — G.H.Hardy "

1.1 भूमिका (Introduction)

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वर्तमान समय में गणित के अध्ययन में समुच्चय की परिकल्पना आधारभूत है। आजकल इस परिकल्पना का प्रयोग गणित की प्रायः सभी शाखाओं में होता है। समुच्चय का प्रयोग संबंध एवं फलन को परिभाषित करने के लिए किया जाता है। ज्यामितीय, अनुक्रम, प्रायिकता आदि के अध्ययन में समुच्चय के ज्ञान की आवश्यकता पड़ती है।

समुच्चय सिद्धांत का विकास जर्मन गणितज्ञ Georg Cantor (1845-1918) द्वारा किया गया था। त्रिकोणमितीय श्रेणी के प्रश्नों को सरल करते समय उनका समुच्चय से पहली बार परिचय हुआ था। इस अध्याय में हम समुच्चय से संबंधित कुछ मूलभूत परिभाषाओं और संक्रियाओं पर विचार करेंगे।

1.2 समुच्चय और उनका निरूपण (Sets and their Representations)

दैनिक जीवन में हम बहुधा वस्तुओं के संग्रह की चर्चा करते हैं, जैसे ताश की गड्डी, व्यक्तियों की भीड़, क्रिकेट टीम आदि। गणित में भी हम विभिन्न संग्रहों, की चर्चा करते हैं, उदाहरणार्थ, प्राकृत संख्याओं का संग्रह बिंदुओं का संग्रह, अभाज्य संख्याओं का संग्रह आदि। विशेषतः, हम निम्नलिखित संग्रह पर विचार करेंगेः

(i) 10 से कम विषम प्राकृत संख्याएँ, अर्थात् 1, 3, 5, 7, 9

(ii) भारत की नदियाँ,

(iii) अंग्रेज़ी वर्णमाला के स्वर, यानी, a, e, i, o, u,

(iv) विभिन्न प्रकार के त्रिभुज,

(v) संख्या 210 के अभाज्य गुणनखंड, अर्थात्, 2, 3, 5 तथा 7,

(vi) समीकरण x2 – 5x + 6 = 0, के मूल अर्थात्, 2 तथा 3

यहाँ हम यह देखते हैं कि उपर्युक्त प्रत्येक उदाहरणों में से वस्तुओं का एक सुपरिभाषित संग्रह इस अर्थ में है कि किसी वस्तु के संबंध में हम यह निर्णय निश्चित रूप से ले सकते हैं कि वह वस्तु एक प्रदत्त संग्रह में है अथवा नहीं है। उदाहरणतः हम यह निश्चित रूप से कह सकते हैं कि ‘नील नदी’, भारत की नदियों के संग्रह में नहीं है। इसके विपरीत गंगा नदी इस संग्रह में निश्चितरूप से है।

हम नीचे एेसे समुच्चय के कुछ और उदाहरण दे रहे हैं, जिनका प्रयोग गणित में विशेषरूप से किया जाता है;

N : प्राकृत संख्याओं का समुच्चय

ρ रू पूर्णांकों का समुच्चय

η रू परिमेय संख्याओं का समुच्चय

त् रू वास्तविक संख्याओं का समुच्चय

Z+ : धन पूर्णांकों का समुच्चय

Q+ : धन परिमेय संख्याओं का समुच्चय

R+ : धन वास्तविक संख्याओं का समुच्चय

इन विशेष समुच्चयों के लिए निर्धारित उपर्युक्त प्रतीकों का प्रयोग हम इस पुस्तक में निरंतर करते रहेंगे।

इसके अतिरिक्त विश्व के पाँच सर्वाधिक विख्यात गणितज्ञों का संग्रह एक सुपरिभाषित समुच्चय नहीं है, क्योंकि सर्वाधिक विख्यात गणितज्ञों के निर्णय करने का मापदंड एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के लिए भिन्न-भिन्न हो सकता है। अतः यह एक सुपरिभाषित संग्रह नहीं है।

अतः ‘वस्तुओं के सुपरिभाषित संग्रह’ को हम एक समुच्चय कहते हैं। यहाँ पर हमें निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना हैः

(i) समुच्यय के लिए वस्तुएँ, अवयव तथा सदस्य पर्यायवाची पद हैं।

(ii) समुच्यय को प्रायः अंग्रेज़ी वर्णमाला के बड़े अक्षरों से निरूपित करते हैं, जैसे A, B, C, X, Y, Z आदि

(iii) समुच्चय के अवयवों को अंग्रेज़ी वर्णमाला के छोटे अक्षरों द्वारा प्रदर्शित करते हैं, जैसे a, b, c, x, y, z आदि

यदि a, समुच्चय A का एक अवयव है, तो हम कहते हैं कि ‘a समुच्चय A में है’। वाक्यांश ‘अवयव है’ ‘सदस्य है’ या ‘में है’ को सूचित करने के लिए यूनानी प्रतीक ‘‘ (epsilon)’’ का प्रयोग किया जाता है। अतः हम ‘a A’ लिखते हैं। यदि b, समुच्चय A का अवयव नहीं है, तो हम ‘b A’ लिखते हैं और इसे ‘‘b समुच्चय A में नहीं है’’ पढ़ते हैं।

इस प्रकार अंग्रेज़ी वर्णमाला के स्वरों के समुच्चय V के सम्बंध में a V किंतु b V. इसी प्रकार संख्या 30 के अभाज्य गुणनखंडों के समुच्चय P के लिए, 3 P किंतु 15 P.

किसी समुच्चय को निरूपित करने की दो विधियाँ हैंः

(i) रोस्टर या सारणीबद्ध रूप

(ii) समुच्चय निर्माण रूप

(i) रोस्टर रूप में, समुच्चय के सभी अवयवों को सूचीबद्ध किया जाता है, अवयवों को, एक दूसरे से, अर्ध-विराम द्वारा पृथक किया जाता है और उन सभी को एक मझले कोष्ठक के भीतर लिखते हैं। उदाहरणार्थ, 7 से कम सभी सम धन पूर्णांकों के समुच्चय का वर्णन रोस्टर रूप में {2, 4, 6} द्वारा किया जाता है। किसी समुच्चय को रोस्टर रूप में प्रदर्शित करने के कुछ और उदाहरण नीचे दिए हैंः

(a) संख्या 42 को विभाजित करने वाली सभी प्राकृत संख्याओं का समुच्चय {1, 2, 3, 6, 7, 14, 21, 42} है।

(b) अंग्रेज़ी वर्णमाला के सभी स्वरों का समुच्चय {a, e, i, o, u} है।

(c) विषम प्राकृत संख्याओं का समुच्चय {1, 3, 5, . . .} है। अंत के बिंदु, जिनकी संख्या तीन होती है, यह बतलाते हैं कि इन विषम संख्याओं की सूची अंतहीन है।

नोट कीजिए कि रोस्टर रूप में अवयवों को सूचीबद्ध करने में उनके क्रम का महत्व नहीं होता है। इस प्रकार उपर्युक्त समुच्चय को {1, 3, 7, 21, 2, 6, 14, 42}प्रकार भी प्रदर्शित कर सकते हैं।

टिप्पणी यह ध्यान रखना चाहिए कि समुच्चय को रोस्टर रूप में लिखते समय किसी अवयव को सामान्यतः दोबारा नहीं लिखते हैं, अर्थात्, प्रत्येक अवयव दूसरे से भिन्न होता है। उदाहरण के लिए शब्द School में प्रयुक्त अक्षरों का समुच्चय { S, C, H, O, L} है।

(ii) समुच्चय निर्माण रूप में, किसी समुच्चय के सभी अवयवों में एक सर्वनिष्ठ गुणधर्म होता है जो समुच्चय से बाहर के किसी अवयव में नहीं होता है। उदाहरर्णाथ समुच्चय {a, e, i, o, u} के सभी अवयवों में एक सर्वनिष्ठ गुणधर्म है कि इनमें से प्रत्येक अवयव अंग्रेज़ी वर्णमाला का एक स्वर है और इस गुणधर्म वाला कोई अन्य अक्षर नहीं है।

इस समुच्चय को V से निरूपित करते हुए हम लिखते हैं कि,

V = {x : x अंग्रेज़ी वर्णमाला का एक स्वर है}

यहाँ ध्यान देना चाहिए कि किसी समुच्चय के अवयवों का वर्णन करने के लिए हम प्रतीक ‘x’ का प्रयोग करते हैं, (x के स्थान पर किसी अन्य प्रतीक का भी प्रयोग किया जा सकता है, जैसे, अक्षर y, z आदि।) जिसके उपरांत कोलन का चिह्न "ः" लिखते हैं। कोलन के चिह्न के बाद समुच्चय के अवयवों के विशिष्ट गुणधर्म को लिखते हैं और फिर संपूर्ण कथन को मझले कोष्ठक { } के भीतर लिखते हैं। समुच्चय V के उपर्युक्त वर्णन को निम्नलिखित प्रकार से पढ़ा जाता है, "सभी x का समुच्चय जहाँ x अंग्रेज़ी वर्णमाला का एक स्वर है।"

इस वर्णन में कोष्ठक का प्रयोग "सभी x का समुच्चय" के लिए और कोलन का प्रयोग ‘जहाँ x’ के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए

A = {x : x एक प्राकृत संख्या है और 3 < x < 10} को निम्नलिखित प्रकार से पढ़ते हैं:

‘‘सभी x का समुच्चय, जहाँ x एक प्राकृत संख्या है और x,3 और 10 के बीच में हैं। अतः संख्याएं 4,5,6,7,8 और 9 समुच्चय A के अवयव हैं।

यदि हम ऊपर (a), (b) और (c) में रोस्टर रूप में वर्णित समुच्चयों को क्रमशः A, B, C से प्रकट करें, तो A, B और C को समुच्चय निर्माण रूप में, निम्नलिखित प्रकार से भी निरूपित किया जा सकता है।

A = {x : x एक प्राकृत संख्या है जो संख्या 42 को विभाजित करती है}

B = {y : y अंग्रेज़ी वर्णमाला का एक स्वर है}

C = {z : z एक विषम प्राकृत संख्या है}

उदाहरण 1 समीकरण x2 + x – 2 = 0 का हल समुच्चय रोस्टर रूप में लिखिए।

हल प्रदत्त समीकरण इस प्रकार लिखा जा सकता है,

(x – 1) (x + 2) = 0, अर्थात् x = 1, – 2

अतः प्रदत्त समीकरण का हल समुच्चय रोस्टर रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है {1, – 2}.

उदाहरण 2 समुच्चय {x : x एक धन पूर्णांक है और x2 < 40} को रोस्टर रूप में लिखिए।

हल 1, 2, 3, 4, 5, और 6 अभीष्ट संख्याएँ हैं। अतः {1, 2, 3, 4, 5, 6} प्रदत्त समुच्चय का रोस्टर रूप है।

उदाहरण 3 समुच्चय A = {1, 4, 9, 16, 25, . . . } को समुच्चय निर्माण रूप में लिखिए।

हल समुच्चय A को हम इस प्रकार लिख सकते हैं,

A = {x : x एक प्राकृत संख्या का वर्ग है}

विकल्पतः हम इस प्रकार भी लिख सकते हैं,

A = {x : x = n2, जहाँ n N}

उदाहरण 4 समुच्चय 2 को समुच्चय निर्माण रूप में लिखिए।

हल हम देखते हैं कि दिए गए समुच्चय के प्रत्येक अवयव का अंश उसके हर से 1 कम है। यह भी कि अंश एक प्राकृत संख्या है जो 1 से प्रारंभ होकर उत्तरोत्तर एक से अधिक होती जाती है और 6 से अधिक नहीं है। अतः समुच्चय निर्माण रूप में इसे इस प्रकार लिखते हैं,

{n, एक प्राकृत संख्या है और 1 n 6}

उदाहरण 5 बाईं ओर रोस्टर रूप में वर्णित प्रत्येक समुच्चय का दाईं ओर समुच्चय निर्माण रूप में वर्णित समुच्चय से सही मिलान कीजिएः

(i) {P, R, I, N, C, A, L}   (a) { x : x एक धन पूर्णांक है तथा 18 का भाजक है}

(ii) { 0 }   (b) { x : x एक पूर्णांक है और x2 – 9 = 0}

(iii) {1, 2, 3, 6, 9, 18} (c) {x : x एक पूर्णांक है और x + 1= 1}

(iv) {3, –3}   (d) {x : x शब्द PRINCIPAL का एक अक्षर है}

हल चूँकि (d) में, शब्द PRINCIPAL में 9 अक्षर हैं और दो अक्षर P और I की पुनरावृत्ति हुई है, अतः (i) का सही मिलान (d) से होता है। इसी प्रकार (ii) का सही मिलान (c) से होता है, क्योंकि x + 1 = 1 का तात्पर्य है कि x = 0. यह भी कि, 1, 2, 3, 6, 9 और 18 में से प्रत्येक 18 का भाजक है, इसलिए (iii) का सही मिलान (a) से होता है। अंत में x2 – 9 = 0 अर्थात् x = 3, –3 और इसलिए (iv) का सही मिलान (b) से होता है।

प्रश्नावली 1.1

1. निम्नलिखित में कौन से समुच्चय हैं? अपने उत्तर का औचित्य बताइए।

(i) J अक्षर से प्रारंभ होने वाले वर्ष के सभी महीनों का संग्रह।

(ii) भारत के दस सबसे अधिक प्रतिभाशाली लेखकों का संग्रह।

(iii) विश्व के सर्वश्रेष्ठ ग्यारह बल्लेवाजों का संग्रह।

(iv) आपकी कक्षा के सभी बालकों का संग्रह।

(v) 100 से कम सभी प्राकृत संख्याओं का संग्रह।

(vi) लेखक प्रेमचंद द्वारा लिखित उपन्यासों का संग्रह।

(vii) सभी सम पूर्णांकों का संग्रह।

(viii) इस अध्याय में आने वाले प्रश्नों का संग्रह।

(ix) विश्व के सबसे अधिक खतरनाक जानवरों का संग्रह।

2. मान लीजिए A = {1, 2, 3, 4, 5, 6}, रिक्त स्थानों में उपयुक्त प्रतीक अथवा भरिए।

(i) 5. . .A (ii) 8 . . . A (iii) 0. . .A

(iv) 4. . . A (v) 2. . .A (vi) 10. . .A

3. निम्नलिखित समुच्चयों को रोस्टर रूप में लिखिएः

(i) A = {x : x एक पूर्णांक है और –3 < x < 7}

(ii) B = {x : x संख्या 6 से कम एक प्राकृत संख्या है}

(iii) C = {x : x दो अंकों की एेसी प्राकृत संख्या है जिसके अंकों का योगफल 8 है}

(iv) D = {x : x एक अभाज्य संख्या है जो संख्या 60 की भाजक है}

(v) E = TRIGONOMETRY शब्द के सभी अक्षरों का समुच्चय

(vi) F = BETTER शब्द के सभी अक्ष्ारों का समुच्चय

4. निम्नलिखित समुच्चयों को समुच्चय निर्माण रूप में व्यक्त कीजिएः

(i) (3, 6, 9, 12} (ii) {2,4,8,16,32} (iii) {5, 25, 125, 625}

(iv) {2, 4, 6, . . .} (v) {1,4,9, . . .,100}

5. निम्नलिखित समुच्चयों के सभी अवयवों (सदस्यों) को सूचीबद्ध कीजिएः

(i) A = {x : x एक विषम प्राकृत संख्या है}

(ii) B = {x : x एक पूर्णांक है,  4< x < }

(iii) C = {x : x एक पूर्णांक है, x2 4}

(iv) D = {x : x, LOYAL शब्द का एक अक्षर है}

(v) E = {x : x वर्ष का एक एेसा महीना है, जिसमें 31 दिन नहीं होते हैं}

(vi) F = {x : x अंग्रेज़ी वर्णमाला का एक व्यंजन है, जो k से पहले आता है}

6. बाईं ओर रोस्टर रूप में लिखित और दाईं ओर समुच्चय निर्माण रूप में वर्णित समुच्चयों का सही मिलान कीजिएः

(i) {1, 2, 3, 6} (a) {x : x एक अभाज्य संख्या है और 6 की भाजक है}

(ii) {2, 3} (b) {x : x संख्या 10 से कम एक विषम प्राकृत संख्या है}

(iii) {M,A,T,H,E,I,C,S} (c) {x : x एक प्राकृत संख्या है और 6 की भाजक है}

(iv) {1, 3, 5, 7, 9} (d) {x : x MATHEMATICS शब्द का एक अक्षर है}

1.3 रिक्त समुच्चय (The Empty Set)

समुच्चय A = { x : x किसी स्कूल की कक्षा XI में अध्ययनरत एक विद्यार्थी है }

हम उस स्कूल में जा कर कक्षा XI में अध्ययनरत विद्यार्थियों को गिन कर उनकी संख्या ज्ञात कर सकते हैं। अतः समुच्चय A के अवयवयों की संख्या सीमित है।

अब नीचे लिखे समुच्चय B पर विचार कीजिएः

B = { x : x वर्तमान में कक्षा X तथा XI दोनों में अध्ययनरत विद्यार्थी हैं}

हम देखते हैं कि एक विद्यार्थी एक साथ दोनों कक्षाओं X तथा XI में अध्ययन नहीं कर सकता है। अतः समुच्चय B में कोई भी अवयव नहीं है।

परिभाषा 1 एक समुच्चय जिसमें एक भी अवयव नहीं होता है, εरक्त समुच्चय या शून्य समुच्चय कहलाता है। इस परिभाषा के अनुसार B एक रिक्त समुच्चय है जब कि A एक रिक्त समुच्चय नहीं है। रिक्त समुच्चय को प्रतीक φ अथवा { } से प्रदर्शित करते हैं।

हम नीचे रिक्त समुच्चयों के कुछ उदाहरण दे रहे हैंः

(i) मान लीजिए कि A = {x : 1 < x < 2, x एक प्राकृत संख्या है}. A रिक्त समुच्चय है, क्योंकि 1 और 2 के मध्य कोई प्राकृत संख्या नहीं होती है।

(ii) B = {x : x2 – 2 = 0 और x एक परिमेय संख्या है}. यहाँ B रिक्त समुच्चय है, क्योंकि समीकरण x2 – 2 = 0, x के किसी भी परिमेय मान से संतुष्ट नहीं होता है।

(iii) C = {x : x संख्या 2 से अधिक एक सम अभाज्य संख्या है} तो C रिक्त समुच्चय है, क्योंकि केवल संख्या 2 ही सम अभाज्य संख्या है।

(iv) D = { x : x2 = 4, x विषम है}. तो D रिक्त समुच्चय है, क्योंकि समीकरण
x
2 = 4, x के किसी विषम मान से संतुष्ट नहीं होता है।

1.4 परिमित और अपरिमित समुच्चय (Finite and Infinite Sets)

मान लीजिए कि A = {1, 2, 3, 4, 5}, B = {a, b, c, d, e, g}

तथा C = { इस समय विश्व के विभिन्न भागों में रहने वाले पुरुष}

हम देखते हैं कि A में 5 अवयव हैं और B में 6 अवयव हैं। C में कितने अवयव हैं? जैसा कि स्पष्ट है कि C के अवयवों की संख्या हमें ज्ञात नहीं है, किंतु यह एक प्राकृत संख्या है, जो बहुत बड़ी हो सकती है। किसी समुच्चय S के अवयवों की संख्या से हमारा अभिप्राय समुच्चय के भिन्न अवयवों की संख्या से है और इसे हम प्रतीक n (S) द्वारा प्रदर्शित करते हैं। यदि n (S) एक प्राकृत संख्या है, तो S एक आरिक्त परिमित समुच्चय होता है।

आइए प्राकृत संख्याओं के समुच्चय N पर विचार करें। हम देखते हैं इस समुच्चय के अवयवों की संख्या सीमित नहीं है, क्योंकि प्राकृत संख्याओं की संख्या असीमित होती है। इस प्रकार हम कहते हैं कि प्राकृत संख्याओं का समुच्चय एक अपरिमित समुच्चय होता है। उपर्युक्त समुच्चय A, B तथा C परिमित समुच्चय हैं और n(A) = 5, n(B) = 5 और n(C) = कोई सीमित संख्या।

परिभाषा 2 एक समुच्चय, जो रिक्त है अथवा जिसके अवयवों की संख्या निश्चित होती है, परिमित समुच्चय कहलाता है, अन्यथा समुच्चय अपरिमित समुच्चय कहलाता है।

आइए कुछ उदाहरणों पर विचार करेंः

(i) यदि W सप्ताह के दिनों का समुच्चय है, तो W परिमित है।

(ii) मान लीजिए कि S, समीकरण x2 –16 = 0 के हलों का समुच्चय है, तो S परिमित है।

(iii) मान लीजिए कि G, किसी रेखा पर स्थित सभी बिंदुओं का समुच्चय है, तो G
अपरिमित है।

जब हम किसी समुच्चय को रोस्टर रूप में निरूपित करते हैं, तो हम उस समुच्चय के सभी अवयवों को कोष्ठक { } के भीतर लिखते हैं। किसी अपरिमित समुच्चय के सभी अवयवों को कोष्ठक { } के भीतर लिखना संभव नहीं है, क्योंकि एेसे समुच्चय के अवयवों की संख्या सीमित नहीं होती है। अतः हम किसी अपरिमित समुच्चय को रोस्टर रूप में प्रकट करने के लिए उसके कम से कम इतने अवयवों को लिखते है, जिससे उस समुच्चय की संरचना स्पष्ट हो सके और तदोपरांत तीन बिंदु लगाते हैं।

उदाहरणार्थ, {1, 2, 3 . . .} प्राकृत संख्याओं का समुच्चय है, {1, 3, 5, 7, . . .} विषम प्राकृत संख्याओं का समुच्चय है और {. . .,–3, –2, –1, 0,1, 2 ,3, . . .} पूर्णांकों का समुच्चय है। ये सभी समुच्चय अपरिमित हैं।

टिप्पणी सभी अपरिमित समुच्चय का वर्णन रोस्टर रूप में नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के लिए वास्तविक संख्याओं के समुच्चय का वर्णन इस रूप में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इस समुच्चय के अवयवों का कोई विशेष पैटर्न (प्रतिमान) नहीं होता है।

उदाहरण 6 बतलाइए कि निम्नलिखित समुच्चयों में कौन परिमित है और कौन अपरिमित हैः

(i) {x : x N और (x – 1) (x –2) = 0}

(ii) {x : x N और x2 = 4}

(iii) {x : x N और 2x –1 = 0}

(iv) {x : x N और x एक अभाज्य संख्या है}

(v) {x : x N और x विषम है}

हल (i) प्रदत्त समुच्चय = {1, 2}. अतः यह परिमित है।

(ii) प्रदत्त समुच्चय = {2}. अतः यह परिमित है।

(iii) प्रदत्त समुच्चय = φ. अतः यह परिमित है।

(iv) दिया हुआ समुच्चय सभी अभाज्य संख्याओं का समुच्चय है और क्योंकि अभाज्य संख्याओं का समुच्चय अनंत है; अतः प्रदत्त समुच्चय अपरिमित है।

(v) क्योंकि विषम प्राकृत संख्याएँ अनंत हैं, अतः प्रदत्त समुच्चय अपरिमित है।

1.5 समान समुच्चय (Equal Sets)

दो दिए गए समुच्चयों A और B, में, यदि A का प्रत्येक अवयव B का भी अवयव है तथा B का प्रत्येक अवयव A का भी अवयव है, तो समुच्चय A और B, समान कहलाते हैं। स्पष्टतया दोनों समुच्चयों में तथ्यतः समान अवयव होते हैं।

परिभाषा 3 दो समुच्चय A और B समान कहलाते हैं, यदि उनमें तथ्यतः समान अवयव हों और हम लिखते हैं A = B, अन्यथा समुच्चय असमान कहलाते हैं और हम लिखते हैं A B.

आइए हम निम्नलिखित उदाहरणों पर विचार करेंः

(i) मान लीजिए कि A = {1, 2, 3, 4} और B = {3, 1, 4, 2}. तो A = B.

(ii) मान लीजिए कि A, 6 से कम अभाज्य संख्याओं तथा P, 30 के अभाज्य गुणनखंडों के समुच्चय हैं। स्पष्ट है कि समुच्चय A और P समान हैं, क्योंकि केवल 2, 3 और 5 ही संख्या 30 के अभाज्य गुणनखंड हैं और 6 से कम भी हैं।

टिप्पणी यदि किसी समुच्चय के एक या एक से अधिक अवयवों की पुनरावृत्ति होती है, तो समुच्चय बदलता नहीं है। उदाहरण के लिए समुच्चय A = {1, 2, 3} और B = {2, 2, 1, 3, 3} समान हैं, क्योंकि A का प्रत्येक अवयव B में हैं और इसका विलोम भी सत्य है। इसी कारण हम प्रायः किसी समुच्चय का वर्णन करते समय उसके अवयवों की पुनरावृत्ति नहीं करते हैं।

उदाहरण 7 समान समुच्चयों के युग्म छाँटिए, यदि एेसा कोई युग्म है, और कारण भी बतलाइएः

A = {0}, B = {x : x > 15 और x < 5},

C = {x : x – 5 = 0 }, D = {x : x2 = 25},

E = {x : x समीकरण x2 – 2x –15 = 0 का एक धन पूर्णांक मूल है}.

हल यहाँ 0 A और 0 समुच्चयों B, C, D और E, में से किसी में भी नहीं है, अतः A B, A C, A D, A E.

क्योंकि B = φ किंतु और कोई समुच्चय रिक्त नहीं है।

अतः B C, B D तथा B E.

C = {5} परंतु –5 D, इसलिए C D

यहाँ क्योंकि E = {5}, C = E , D = {–5, 5} और E = {5}, अतः D E.

इस प्रकार समान समुच्चयों का युग्म केवल C तथा E है।

उदाहरण 8 निम्नलिखित समुच्चय युग्मों में से कौन से समान हैं? अपने उत्तर का औचित्य बताइए।

(i) X, शब्द “ALLOY” के अक्षरों का समुच्चय तथा B, शब्द “LOYAL” के अक्षरों का समुच्चय।

(ii) A = {n : n Z तथा n2 4} और B = {x : x R तथा x2 – 3x + 2 = 0}.

हल (i) यहाँ X = {A, L, L, O, Y}, B = {L, O, Y, A, L}. अतः X और B समान समुच्चय हैं, क्योंकि किसी समुच्चय के अवयवों की पुनरावृत्ति से समुच्चय बदलता नहीं है। अतः

X = {A, L, O, Y} = B

(ii) A = {–2, –1, 0, 1, 2}, B = {1, 2}. क्योंकि 0 A और 0 B, इसलिए A और B समान नहीं हैं।

प्रश्नावली 1.2

1. निम्नलिखित में से कौन से रिक्त समुच्चय के उदाहरण हैं?

(i) 2 से भाज्य विषम प्राकृत संख्याओं का समुच्चय।

(ii) सम अभाज्य संख्याओं का समुच्चय।

(iii) { x : x एक प्राकृत संख्या है, x < 5 और साथ ही साथ x > 7 }

(iv) { y : y किन्हीं भी दो समांतर रेखाओं का उभयनिष्ठ बिंदु है}

2.  निम्नलिखित समुच्चयों में से कौन परिमित और कौन अपरिमित हैं?

(i) वर्ष के महीनों का समुच्चय।

(ii) {1, 2, 3, . . .}

(iii) {1, 2, 3, . . .99, 100}

(iv) 100 से बड़े धन पूर्णांकों का समुच्चय।

(v) 99 से छोटे अभाज्य पूर्णांकों का समुच्चय।

3. निम्नलिखित समुच्चयों में से प्रत्येक के लिए बताइए कि कौन परिमित है और कौन अपरिमित है?

(i) x-अक्ष के समांतर रेखाओं का समुच्चय।

(ii) अंग्रेज़ी वर्णमाला के अक्षरों का समुच्चय।

(iii) उन संख्याओं का समुच्चय जो 5 के गुणज हैं।

(iv) पृथ्वी पर रहने वाले जानवरों का समुच्चय।

(v) मूल बिंदु (0,0) से हो कर जाने वाले वृत्तों का समुच्चय।

4. निम्नलिखित में बतलाइए कि A = B है अथवा नहीं हैः

(i) A = { a, b, c, d } B = { d, c, b, a }

(ii) A = { 4, 8, 12, 16 } B = { 8, 4, 16, 18}

(iii) A = {2, 4, 6, 8, 10} B = { x : x सम धन पूर्णांक है और x 10}

(iv) A = {x : x संख्या 10 का एक गुणज है}, B = { 10, 15, 20, 25, 30, . . . }

5. क्या निम्नलिखित समुच्चय युग्म समान हैं? कारण सहित बताइए।

(i) A = {2, 3}, B = {x : x समीकरण x2 + 5x + 6 = 0 का एक हल है}

(ii) A = { x : x शब्द ‘FOLLOW’ का एक अक्षर है}

B = { y : y शब्द ‘WOLF’ का एक अक्षर है}

6. नीचे दिए हुए समुच्चयों में से समान समुच्चयों का चयन कीजिएः

A = { 2, 4, 8, 12}, B = { 1, 2, 3, 4}, C = { 4, 8, 12, 14}, D = { 3, 1, 4, 2},

E = {–1, 1}, F = { 0, a}, G = {1, –1}, H = { 0, 1}

1.6 उपसमुच्चय (Subsets)

नीचे दिए समुच्चयों पर विचार कीजिएः

X = आपके विद्यालय के सभी विद्यार्थियों का समुच्चय,

Y = आपकी कक्षा के सभी विद्यार्थियों का समुच्चय।

हम देखते हैं कि Y का प्रत्येक अवयव, X का भी एक अवयव है, हम कहते हैं कि Y, X का एक उपसमुच्चय हैं X का एक उपसमुच्चय है, प्रतीकों में X Y द्वारा प्रकट करते हैं। प्रतीक ⊂ , कथन ‘एक उपसमुच्चय है’, अथवा ‘अंतर्विष्ट है’ के लिए प्रयुक्त होता है।

परिभाषा 4 दि समुच्चय A का प्रत्येक अवयव, समुच्चय B का भी एक अवयव है, तो A, B का उपसमुच्चय कहलाता है।

दूसरे शब्दों में, A B, यदि जब कभी a A, तो a B. बहुधा प्रतीक , जिसका अर्थ ‘तात्पर्य है’ होता है, का प्रयोग सुविधाजनक होता है। इस प्रतीक का प्रयोग कर के, हम उपसमुच्चय की परिभाषा इस प्रकार लिख सकते हैंः

A B, यदि a A a B

हम उपर्युक्त कथन को इस प्रकार पढ़ते हैं, “A, B का एक उपसमुच्चय है, यदि इस तथ्य का, कि a, A का एक अवयव है तात्पर्य है कि a, B का भी एक अवयव है’’। यदि A, B का एक उपसमुच्चय नहीं है, तो हम लिखते हैं कि A B

हमें ध्यान देना चाहिए कि A को B, का समुच्चय होने के लिए केवल मात्र यह आवश्यक है कि A का प्रत्येक अवयव B में है। यह संभव है कि B का प्रत्येक अवयव A में हो या न हो। यदि एेसा होता है कि B का प्रत्येक अवयव A में भी है, तो B A. इस दशा में, A और B समान समुच्चय हैं और इस प्रकार A B और B A A = B, जहाँ द्विधा तात्पर्य (two way implications) के लिए प्रतीक है और जिसे प्रायः ‘यदि और केवल यदि’ पढ़ते हैं तथा संक्षेप में ‘iff’ लिखते हैं।

परिभाषा से निष्कर्ष निकलता है कि प्रत्येक समुच्चय स्वयम् का उपसमुच्चय है, अर्थात्
A
A । चूँकि रिक्त समुच्चय φ में कोई अवयव नहीं होता है अतः हम इस बात से सहमत हैं कि φ प्रत्येक समुच्चय का एक उपसमुच्चय है। अब हम कुछ उदाहरणों पर विचार करते हैंः

(i) परिमेय संख्याओं का समुच्चय Q, वास्तविक संख्याओं के समुच्चय R का एक उपसमुच्चय है और हम लिखते हैं कि Q R.

(ii) यदि A, संख्या 56 के सभी भाजकों का समुच्चय है और B, संख्या 56 के सभी अभाज्य भाजकों का समुच्चय है, तो B, A का एक उपसमुच्चय है और हम लिखते हैं कि B A.

(iii) मान लीजिए कि A = {1, 3, 5} और B = {x : x संख्या 6 से कम एक विषम प्राकृत संख्या है} तो A B तथा B A, अतः A = B

(iv) मान लीजिए कि A = { a, e, i, o, u} और B = { a, b, c, d}. तो A, B का एक उपसमुच्चय नहीं है तथा B भी A का उपसमुच्चय नहीं है।

मान लीजिए कि A और B दो समुच्चय हैं। यदि A B तथा A B , तो A, B का उचित उपसमुच्चय कहलाता है और B, A का अधिसमुच्चय कहलाता है। उदाहरणार्थ, -

A = {1, 2, 3}, B = {1, 2, 3, 4} का एक उचित उपसमुच्चय है।

यदि समुच्चय A में केवल एक अवयव हो, तो हम इसे एक एकल समुच्चय कहते हैं। अतः { a } एक एकल समुच्चय है।

उदाहरण 9 नीचे लिखे समुच्चयों पर विचार कीजिएः

φ, A = { 1, 3 }, B = {1, 5, 9}, C = {1, 3, 5, 7, 9}.

प्रत्येक समुच्चय युग्म के बीच सही प्रतीक अथवा भरिए;

(i) φ . . . B (ii) A . . . B (iii) A . . . C (iv) B . . . C

हल (i) φ B, क्योंकि φ प्रत्येक समुच्चय का उपसमुच्चय होता है।

(ii) A B क्योंकि 3 A और 3 B

(iii) A C क्योंकि 1, 3 A तथा 1, 3 C

(iv) B C क्योंकि B का प्रत्येक अवयव C में भी है।

उदाहरण 10 मान लीजिए A = { a, e, i, o, u}, B = { a, b, c, d}. क्या A, B का एक उपसमुच्चय है? नहीं (क्यों?)। क्या A, B का उप समुच्चय हैं? नहीं (क्यों?)

उदाहरण 11 मान लीजिए A, B और C तीन समुच्चय हैं। यदि A B तथा B C, तो क्या यह सत्य है कि A C? यदि नहीं तो एक उदाहरण दीजिए।

हल मान लीजिए कि A = {1}, B = {{1}, 2} और C = {{1}, 2, 3} स्पष्टतया यहाँ
A
B क्योंकि A = {1) तथा B C सत्य है। परंतु A C क्योंकि 1 A और 1 C.

नोट कीजिए कि किसी समुच्चय का एक अवयव उस समुच्चय का उपसमुच्चय नहीं हो सकता है।

1.6.1 वास्तविक संख्याओं के समुच्चय के उपसमुच्चय

जैसा कि अनुच्छेद 1.6 से स्पष्ट होता है कि समुच्चय R के बहुत से महत्वपूर्ण उपसमुच्चय हैं। इनमें से कुछ के नाम हम नीचे दे रहे हैंः

प्राकृत सख्याओं का समुच्चय = {1, 2, 3, 4, 5, . . .}

पूर्णांकों का समुच्चय ρ = {. . ., –3, –2, –1, 0, 1, 2, 3, . . .}

परिमेय संख्याओं का समुच्चय η = { x : x =, p, q ρ तथा q 0}, जिनको इस प्रकार पढ़ते हैंः

Q उन सभी संख्याओं x का समुच्चय इस प्रकार है, कि x भागफल6, के बराबर है, जहाँ p और q पूर्णांक है और q शून्य नहीं है।’’ Q के अवयवों में –5 (जिसे  से भी प्रदर्शित किया जा सकता है) , (जिसे  से भी प्रदर्शित किया जा सकता है) और आदि सम्मिलित हैं।

अपεरमेय संख्याओं का समुच्चय, जिसे T, से निरूपित करते हैं, शेष अन्य वास्तविक संख्याओं (परिमेय संख्याओं को छोड़कर) से मिलकर बनता है।

अतः T = {x : x R और x Q} = R Q अर्थात् वह सभी वास्तविक संख्याएँ जो परिमेय नहीं है। T के सदस्यों में , π आदि सम्मिलित हैं।

इन समुच्चयों के मध्य कुछ स्पष्ट संबंध इस प्रकार हैं;

N Z Q, Q R, T R, N T.

1.6.2 अंतराल R के उपसमुच्चय के रूप में (Interval as subsets of R) 

मान लीजिए कि a, b R और a < b. तब वास्तविक संख्याओं का समुच्चय { y : a < y < b} एक विवृत अंतराल कहलाता है और प्रतीक (a, b) द्वारा निरूपित होता है। a और b के बीच स्थित सभी बिंदु इस अंतराल में होते हैं परंतु a और b स्वयं इस अंतराल में नहीं होते हैं।

वह अंतराल जिसमें अंत्य बिंदु भी होते हैं, संवृत (बंद) अंतराल कहलाता है और प्रतीक [ a, b ] द्वारा निरूपित होता है। अतः [ a, b ] = {x : a x b}

एेसे अंतराल भी हैं जो एक अंत्य बिंदु पर बंद और दूसरे पर खुले होते हैं

[ a, b ) = {x : a x < b}, a से b, तक एक खुला अंतराल है, जिसमें a अंतर्विष्ट है किंतु b अपवर्जित है।

( a, b ] = { x : a < x b } a से b, तक एक खुला अंतराल है, जिसमें b सम्मिलित है किंतु a अपवर्जित है।

इन संकेतों द्वारा वास्तविक संख्याओं के समुच्चय के उपसमुच्चयों के उल्लेख करने की एक वैकल्पिक विधि मिलती है। उदाहरण के लिए, यदि A = (–3, 5) और B = [–7, 9], तो A B. समुच्चय [ 0, ) ऋणेतर वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को दर्शाता है, जबकि ( – , 0 ) ऋण वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को दर्शाता है। ( – , ), – से तक विस्तृत रेखा से संबंधित वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को प्रदर्शित करता है।

वास्तविक रेखा पर R के उपसमुच्चयों के रूप में वर्णित उपर्युक्त अंतरालों को आकृति 1.1 में दर्शाया गया हैः

आकृति 1.1

यहाँ हम ध्यान देते हैं कि एक अंतराल में असंख्य असीम मात्रा में अनेक बिंदु होते हैं। उदाहरणार्थ, समुच्चय समुच्चय {x : x त् : –5 < x 7} को अंतराल (–5, 7] रूप में लिख सकते हैं तथा अंतराल [–3, 5) को समुच्चय निर्माण रूप में {x : –3 x < 5} द्वारा लिख सकते हैं। संख्या (b – a) को अंतराल (a, b), [a, b], [a, b) तथा (a, b] में से किसी की भी लंबाई कहते हैं

1.7 घात समुच्चय (Power Set)

समुच्चय {1, 2} पर विचार कीजिए। समुच्चय {1, 2} के सभी उपसमुच्चयों को लिखिए। हमें ज्ञात है कि φ सभी समुच्चयों का उपसमुच्चय होता है। इसलिए φ, समुच्चय {1, 2} का एक उपसमुच्चय है। हम देखते हैं कि {1} और { 2 } भी समुच्चय {1, 2}के उपसमुच्चय हैं। हमें यह भी ज्ञात है कि प्रत्येक समुच्चय स्वयं का उपसमुच्चय होता है। इसलिए { 1, 2 } भी समुच्चय {1, 2} का एक उपसमुच्चय है। अतः समुच्चय { 1, 2 } के कुल मिला कर चार उपसमुच्चय हैं, नामतः φ, { 1 }, { 2 } और { 1, 2 }. इन सभी उपसमुच्चयों के समुच्चय को समुच्चय { 1, 2 } का घात समुच्चय कहते हैं।

परिभाषा 5 समुच्चय A के उपसमुच्चयों के संग्रह को A का घात समुच्चय कहते हैं। इसे P(A) से निरूपित करते है। P(A) का प्रत्येक अवयव एक समुच्चय होता है।

अतः उपर्युक्त विवरण में, यदि A = { 1, 2 }, तो

P( A ) = { φ,{ 1 }, { 2 }, { 1,2 }}

यह भी नोट कीजिए कि n [ P (A) ] = 4 = 22

व्यापकरूप से, यदि A एक एेसा समुच्चय है कि n(A) = m, तो यह सिद्ध किया जा सकता है कि n [ P(A)] = 2m.

1.8 सार्वत्रिक समुच्चय (Universal Set)

सामान्यतः किसी विशेष संदर्भ में हमें एक आधारभूत समुच्चय के अवयवों और उपसमुच्चयों पर विचार करना पड़ता है, जो कि उस विशेष संदर्भ में प्रासंगिक होते हैं। उदाहरण के लिए, संख्या-प्रणाली का अध्ययन करते समय हमें प्राकृत संख्याओं के समुच्चय और उसके उपसमुच्चयों में रुचि होती है, जैसे अभाज्य संख्याओं का समुच्चय, सम संख्याओं का समुच्चय इत्यादि। यह आधारभूत समुच्चय ‘सार्वत्रिक समुच्चय’ कहलाता है। सार्वत्रिक समुच्चय को सामान्यतः प्रतीक U से निरूपित करते हैं और इसके उपसमुच्चयों को अक्षर A, B, C, आदि द्वारा।

उदाहरणार्थ, पूर्णांकों के समुच्चय Z के लिए, परिमेय संख्याओं का समुच्चय Q, एक सार्वत्रिक समुच्चय हो सकता है, या वास्तविक संख्याओं का समुच्चय R भी एक सार्वत्रिक समुच्चय हो सकता है। एक अन्य उदाहरण में मानव जनसंख्या अध्ययन के लिए विश्व के समस्त मानव का समुच्चय, सार्वत्रिक समुच्चय होगा।

प्रश्नावली 1.3

1. रिक्त स्थानों में प्रतीक या को भर कर सही कथन बनाइएः

(i) { 2, 3, 4 } . . . { 1, 2, 3, 4,5 } (ii) { a, b, c } . . . { b, c, d }

(iii) {x : x आपके विद्यालय की कक्षा XI का एक विद्यार्थी है}. . .{x : x आपके विद्यालय का एक विद्यार्थी है}

(iv) {x : x किसी समतल में स्थित एक वृत्त है} . . .{x : x एक समान समतल में वृत्त है जिसकी त्रिज्या 1 इकाई है।}

(v) {x : x किसी समतल में स्थित एक त्रिभुज है} . . . {x : x किसी समतल में स्थित एक आयत है}

(vi) {x : x किसी समतल में स्थित एक समबाहु त्रिभुज है} . . . {x : x किसी समतल में स्थित एक त्रिभुज है}

(vii) {x : x एक सम प्राकृत संख्या है} . . . {x : x एक पूर्णांक है}

2. जाँचिए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य हैंः

(i) { a, b } { b, c, a }

(ii) { a, e } { x : x अंग्रेज़ी वर्णमाला का एक स्वर है}

(iii) { 1, 2, 3 } { 1, 3, 5 }

(iv) { a } { a, b, c }

(v) { a } { a, b, c }

(vi) { x : x संख्या 6 से कम एक सम प्राकृत संख्या है} { x : x एक प्राकृत संख्या है, जो संख्या 36 को विभाजित करती है}

3. मान लीजिए कि A = { 1, 2, { 3, 4 }, 5 } । निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है और क्यों?

(i) {3, 4} A (ii) {3, 4} A (iii) {{3, 4}} A

(iv) 1 A (v) 1 A (vi) {1, 2, 5} A

(vii) {1, 2, 5} A (viii) {1, 2, 3} A

(ix) φ A (x) φ A (xi) {φ} A

4. निम्नलिखित समुच्चयों के सभी उपसमुच्चय लिखिएः

(i) {a} (ii) {a, b} (iii) {1, 2, 3} (iv) φ

5. P(A) के कितने अवयव हैं, यदि A = φ?

6. निम्नलिखित को अंतराल रूप में लिखिएः

(i) {x : x R, – 4 < x 6} (ii) {x : x R, – 12 < x < –10}

(iii) {x : x R, 0 x < 7} (iv) {x : x R, 3 x 4}

7. निम्नलिखित अंतरालों को समुच्चय निर्माण रूप में लिखिएः

(i) (– 3, 0) (ii) [6 , 12] (iii) (6, 12] (iv) [–23, 5)

8. निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए आप कौन-सा सार्वत्रिक समुच्चय प्रस्तावित करेंगे?

(i) समकोण त्रिभुजों का समुच्चय। (ii) समद्विबाहु त्रिभुजों का समुच्चय।

9. समुच्चय A = {1, 3, 5}, B = {2, 4, 6} और C = {0, 2, 4, 6, 8} प्रदत्त हैं। इन तीनों समुच्चय A, B और C के लिए निम्नलिखित में से कौन सा (से) सार्वत्रिक समुच्चय लिए जा सकते हैं?

(i) {0, 1, 2, 3, 4, 5, 6} (ii) φ

(iii) {0,1,2,3,4,5,6,7,8,9,10} (iv) {1,2,3,4,5,6,7,8}

1.9 वेन आरेख (Venn Diagrams)

समुच्चयों के बीच अधिकांश संबंधों को आरेखों द्वारा निरूपित किया जा सकता है जिन्हें वेन आरेख कहते हैं। वेन आरेख का नाम अंग्रेज तर्कशास्त्री John Venn (1834 ई॰– 1883 ई॰) के नाम पर रखा गया है। इन आरेखों में आयत और बंद वक्र सामान्यतः वृत्त होते हैं। किसी सार्वत्रिक समुच्चय को प्रायः एक आयत द्वारा और उसके उपसमुच्चयों को एक वृत्त द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

किसी वेन आरेख में समुच्चयों के अवयवों को उनके विशेष समुच्चय में लिखा जाता है जैसे आकृति 1.2 और 1.3 में

आकृति 1.2

आकृति 1.3

दृष्टांत 1 आकृति 1.2 में, U = {1,2,3, ..., 10} एक सार्वत्रिक समुच्चय है और A = {2,4,6,8,10} उसका एक उपसमुच्चय है,

दृष्टांत 2 आकृति 1.3 में, U = {1,2,3, ..., 10} एक सार्वत्रिक समुच्चय है, जिसके A = {2,4,6,8,10} और B = {4, 6} उपसमुच्चय हैं और B A.

पाठक वेन आरेखों का विस्तृत प्रयोग देखेंगे जब हम समुच्चयों के सम्मिलन, सर्वनिष्ठ और अंतर पर विचार करेंगे।

1.10 समुच्चयों पर संεक्रयाएँ (Operations on Sets)

पिछली कक्षाओं में हम सीख चुके हैं कि संख्याओं पर योग, अंतर, गुणा और भाग की संक्रियाएँ किस प्रकार संपन्न की जाती हैं। इनमें से प्रत्येक संक्रिया को दो संख्याओं पर संपन्न किया गया था, जिससे एक अन्य संख्या प्राप्त हुई थी। उदाहरण के लिए दो संख्याओं 5 और 13 पर योग की संक्रिया संपन्न करने से हमें संख्या 18 प्राप्त होती है। पुनः संख्याओं 5 और 13 पर गुणा की संक्रिया संपन्न करने पर हमें संख्या 65 प्राप्त होती है। इसी प्रकार, कुछ एेसी संक्रियाएँ है, जिनको दो समुच्चयों पर संपन्न करने से, एक अन्य समुच्चय बन जाता है। अब हम समुच्चयों पर होने वाली कुछ संक्रियाओं को परिभाषित करेंगे और उनके गुणधर्मों की जाँच करेंगे। यहाँ से आगे हम समुच्चयों का उल्लेख किसी सार्वत्रिक समुच्चय के उपसमुच्चयों के रूप में करेंगे।

1.10.1 समुच्चयों का सम्मिलन (Union of sets) 

मान लीजिए कि A और B कोई दो समुच्चय हैं। A और B का सम्मिलन वह समुच्चय है जिसमें A के सभी अवयवों के साथ B के भी सभी अवयव हों, तथा उभयनिष्ठ अवयवों को केवल एक बार लिया गया हो। प्रतीक का प्रयोग सम्मिलन को निरूपित करने के लिए किया जाता है। प्रतीकात्मक रूप में हम A B लिखते हैं और इसे ‘A सम्मिलन B’ पढ़ते हैं।

उदाहरण 12 मान लीजिए कि A = {2, 4, 6, 8} और B = { 6, 8, 10, 12}. A B ज्ञात कीजिए।

हल हम देखते हैं कि A B = { 2, 4, 6, 8, 10, 12}

नोट कीजिए कि A B लिखते समय उभयनिष्ठ अवयव 6 और 8 को केवल एक बार लिखते हैं।

उदाहरण 13 मान लीजिए कि A = { a, e, i, o, u } और B = { a, i, u }. दर्शाइए कि  A B = A.

हल स्पष्टतया A B = { a, e, i, o, u } = A.

इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि किसी समुच्चय A और उसके उपसमुच्चय B का सम्मिलन समुच्चय A स्वयं होता है, अर्थात् यदि B A, तो A B = A.

उदाहरण 14 मान लीजिए कि X = {राम, गीता, अकबर} कक्षा XI के विद्यार्थियों का जो विद्यालय की हाकी टीम में हैं, एक समुच्चय है। मान लीजिए कि Y = {गीता, डेविड, अशोक} कक्षा XI के विद्यार्थियों का, जो विद्यालय की फुटबाल टीम में हैं, एक समुच्चय है। X Y ज्ञात कीजिए और इस समुच्चय की व्याख्या कीजिए।

हल यहाँ X Y = {राम, गीता, अकबर, डेविड, अशोक}. यह कक्षा XI के उन विद्यार्थियों का समुच्चय है, जो या तो विद्यालय की हाकी टीम में हैं या फुटबाल टीम में हैं या दोनों टीमों में हैं।

अतः हम दो समुच्चयों के सम्मिलन की परिभाषा इस प्रकार कर सकते हैंः

परिभाषा 6 दो समुच्चयों A और B का सम्मिलन समुच्चय, वह समुच्चय है जिसमें वे सभी अवयव हैं, जो या तो A में हैं या B में हैं (उन अवयवों को सम्मिलित करते हुए जो दोनों में हैं)। प्रतीकात्मक रूप में हम लिखते हैं कि A B = { x : x A या x B } है।

दो समुच्चयों के सम्मिलन को आकृति 1.4 में दिखाए गए वेन आरेख से प्रदर्शित किया जा सकता है।

आकृति 1.4 में छायांकित भाग A B को प्रदर्शित करता है।

आकृति 1.4

सम्मिलन की संक्रिया के कुछ गुणधर्मः

(i) A B = B A (क्रम विनिमय नियम)

(ii) ( A B ) C = A ( B C)

(साहचर्य नियम)

(iii) A φ = A (तत्समक नियम, φ संक्रिया का तत्समक अवयव है)

(iv) A A = A (वर्गसम नियम)

(v) U A = U (U का नियम)

1.10.2 समुच्चयों का सर्वनिष्ठ (Intersection of sets) 

समुच्चय A और B का सर्वनिष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो A और B दोनों में उभयनिष्ठ है। प्रतीक का प्रयोग सर्वनिष्ठ को निरूपित करने के लिए किया जाता है। समुच्चय A और B का सर्वनिष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो A और B दोनों में हों। प्रतीकात्मक रूप में हम लिखते हैं कि

A B = {x : x A और x B}

उदाहरण 15 उदाहरण 12 के समुच्चय A और B पर विचार कीजिए। A B ज्ञात कीजिए।

हल हम देखते हैं कि केवल 6 और 8 ही एेसे अवयव हैं जो A और B दोनों में उभयनिष्ठ हैं। अतः A B = { 6, 8 }

उदाहरण 16 उदाहरण 14 के समुच्चय X और Y पर विचार कीजिए। X Y ज्ञात कीजिए।

हल हम देखते हैं केवल ‘गीता’ ही एक मात्र एेसा अवयव है, जो दोनों में उभयनिष्ठ है। अतः  X Y = {गीता}

उदाहरण 17 मान लीजिए कि A = {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10} और B = { 2, 3, 5, 7 } A B ज्ञात कीजिए और इस प्रकार दिखाइए कि A B = B.

हल हम देखते हैं कि A B = { 2, 3, 5, 7 } = B हम ध्यान देते हैं कि B A और A B = B

परिभाषा 7 समुच्चय A और B का सर्वनिष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो A और B दोनों में हो। प्रतीकात्मक रूप में, हम लिखते हैं कि

A B = {x : x A और x B}

आकृति 1.5 में छायांकित भाग, A और B के सर्वनिष्ठ को प्रदर्शित करता है।

आकृति 1.5

यदि A और B एेसे दो समुच्चय हों कि A B = φ, तो A और B असंयुक्त समुच्चय कहलाते हैं। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि A = { 2, 4, 6, 8 } और
B = { 1, 3, 5, 7 }, तो A और B असंयुक्त समुच्चय हैं, क्योंकि A और B में कोई भी अवयव उभयनिष्ठ नहीं है।

असंयुक्त समुच्चयों को वेन आरेख द्वारा निरूपित किया जा सकता है, जैसा आकृति 1.6 में प्रदर्शित है।

उपर्युक्त आरेख में A और B असंयुक्त समुच्चय हैं।

सर्वनिष्ठ संक्रिय के कुछ गुणधर्म

(i) A B = B A (क्रम विनिमय नियम)

(ii) ( A B ) C = A ( B C ) (साहचर्य नियम)

(iii) φ A = φ, U A = A (φ और U के नियम)

(iv) A A = A (वर्गसम नियम)

(v) A (B C) = ( A B ) ( A C ) (वितरण या बंटन नियम)

अर्थात् वितरित होता है पर।

आकृति 1.6

नीचे बने वेन आरेखों [आवृηतियों 1.7 (i)-(v)] द्वारा इस बात को सरलता से देख सकते हैं।

Img02

1.10.3 समुच्चयों का अंतर (Difference of sets) 

समुच्चयों A और B का अंतर उन अवयवों का समुच्चय है जो A में हैं किंतु B में नहीं हैं, जब कि A और B को इसी क्रम में लिया जाए। प्रतीतात्मक रूप में इसे A–B लिखते हैं और “ A अंतर B” पढ़ते हैं।

उदाहरण 18 मान लीजिए कि A = { 1, 2, 3, 4, 5, 6}, B = { 2, 4, 6, 8 } A – B और  B – A ज्ञात कीजिए ।

हल हम प्राप्त करते हैं कि, A – B = { 1, 3, 5 }, क्योंकि अवयव 1, 3, 5 समुच्चय A में हैं
किंतु
B में नहीं हैं तथा B – A = { 8 }, क्योंकि अवयव 8, B में है किंतु A में नहीं है।

हम देखते हैं कि A – B B – A

उदाहरण 19 मान लीजिए कि V = { a, e, i, o, u } तो B = { a, i, k, u}, तो V – B और B – V ज्ञात कीजिए।

हल यहाँ, V – B = { e, o }, क्योंकि अवयव e, o समुच्चय V में हैं किंतु B में नहीं है तथा B – V = { k }, क्योंकि अवयव k समुच्चय B में है परंतु V में नहीं है।

आकृति 1.8

हम नोट करते हैं कि V – B B – V समुच्चय निर्माण संकेतन का प्रयोग करते हुए हम समुच्चयों के अंतर की परिभाषा को पुनः इस प्रकार लिख सकते हैंः

A – B = { x : x A और x B }

दो समुच्चयों A और B के अंतर को वेन आरेख द्वारा दर्शाया जा सकता है जैसा कि आकृति 1.8 में प्रदर्शित है।

छायांकित भाग दो समुच्चय A और B के अंतर को दर्शाता है।

आकृति 1.9

टिप्पणी समुच्चय A – B, A B और B – A परस्पर असंयुक्त होते हैं अर्थात् इनमें से किसी दो समुच्चयों का सर्वनिष्ठ समुच्चय एक रिक्त समुच्चय होता है जैसा कि आकृति 1.9 में प्रदर्शित है।


प्रश्नावली 1.4


1. निम्नलिखित में से प्रत्येक समुच्चय युग्म का सम्मिलन ज्ञात कीजिएः

(i) X = {1, 3, 5}, Y = {1, 2, 3}

(ii) A = [ a, e, i, o, u}, B = {a, b, c}

(iii) A = {x : x एक प्राकृत संख्या है और 3 का गुणज है}

B = {x : x संख्या 6 से कम एक प्राकृत संख्या है}

(iv) A = {x : x एक प्राकृत संख्या है और 1 < x 6 }

B = {x : x एक प्राकृत संख्या है और 6 < x < 10 }

(v) A = {1, 2, 3}, B = φ

2. मान लीजिए कि A = { a, b }, B = {a, b, c}. क्या A B ? A B ज्ञात कीजिए।

3. यदि A और B दो एेसे समुच्चय हैं कि A B, तो A B क्या है ?

4. यदि A = {1, 2, 3, 4}, B = {3, 4, 5, 6}, C = {5, 6, 7, 8 } और D = { 7, 8, 9, 10}, तो निम्नलिखित ज्ञात कीजिएः

(i) A B (ii) A C (iii) B C (iv) B D

(v) A B C (vi) A B D (vii) B C D

5. प्रश्न 1 में दिए प्रत्येक समुच्चय युग्म का सर्वनिष्ठ समुच्चय ज्ञात कीजिए।

6. यदि A = { 3, 5, 7, 9, 11 }, B = {7, 9, 11, 13}, C = {11, 13, 15}और D = {15, 17}; तो निम्नलिखित ज्ञात कीजिएः

(i) A B (ii) B C (iii) A C D

(iv) A C (v) B D (vi) A (B C)

(vii) A D (viii) A (B D) (ix) ( A B ) ( B C ) (x) ( A D) ( B C)

7. यदि A = {x : x एक प्राकृत संख्या है}, B = {x : x एक सम प्राकृत संख्या है}

C = {x : x एक विषम प्राकृत संख्या है} D = {x : x एक अभाज्य संख्या है}, तो निम्नलिखित ज्ञात कीजिएः

(i) A B (ii) A C (iii) A D

(iv) B C (v) B D (vi) C D

8. निम्नलिखित समुच्चय युग्मों में से कौन से युग्म असंयुक्त हैं?

(i) {1, 2, 3, 4} तथा {x : x एक प्राकृत संख्या है और 4 x 6 }

(ii) { a, e, i, o, u } तथा { c, d, e, f }

(iii) {x : x एक सम पूर्णांक है} और {x : x एक विषम पूर्णांक है}

9. यदि A = {3, 6, 9, 12, 15, 18, 21}, B = { 4, 8, 12, 16, 20 },

C = { 2, 4, 6, 8, 10, 12, 14, 16 }, D = {5, 10, 15, 20 }; तो निम्नलिखित को ज्ञात कीजिएः

(i) A – B (ii) A – C (iii) A – D (iv) B – A

(v) C – A (vi) D – A (vii) B – C (viii) B – D

(ix) C – B (x) D – B (xi) C – D (xii) D – C

10. यदि X= { a, b, c, d } और Y = { f, b, d, g}, तो निम्नलिखित को ज्ञात कीजिएः

(i) X – Y (ii) Y – X (iii) X Y

11. यदि R वास्तविक संख्याओं और Q परिमेय संख्याओं के समुच्चय हैं, तो R Q क्या होगा ?

12. बताइए कि निम्नलिखित कथनों में से प्रत्येक सत्य है या असत्य? अपने उत्तर का औचित्य भी बताइएः

(i) { 2, 3, 4, 5 } तथा { 3, 6} असंयुक्त समुच्चय हैं।

(ii) { a, e, i, o, u } तथा { a, b, c, d }असंयुक्त समुच्चय हैं।

(iii) { 2, 6, 10, 14 } तथा { 3, 7, 11, 15} असंयुक्त समुच्चय हैं।

(iv) { 2, 6, 10 } तथा { 3, 7, 11} असंयुक्त समुच्चय हैं।

1.11 समुच्चय का पूरक (Complement of a Set)

मान लीजिए कि सभी अभाज्य संख्याओं का सार्वत्रिक समुच्चय U है तथा A, U का वह उपसमुच्चय है, जिसमें वे सभी अभाज्य संख्याएँ हैं जो 42 की भाजक नहीं हैं। इस प्रकार A = {x : x U और x संख्या 42 का भाजक नहीं है}। हम देखते हैं कि 2 U किंतु 2 A, क्योंकि 2 संख्या 42 का एक भाजक है। इसी प्रकार 3 U किंतु 3 A, तथा 7 U किंतु 7 A अब केवल 2, 3 तथा 7 ही U के एेसे अवयव हैं जो Aमें नहीं हैं। इन तीन अभाज्य संख्याओं का समुच्चय अर्थात् समुच्चय {2, 3, 7}, U के सापेक्ष A का पूरक समुच्चय कहलाता है और इसे प्रतीक A से निरूपित किया जाता है। अतः A = {2, 3, 7} इस प्रकार हम देखते हैं कि A = {x : x U और x A } है। इससे निम्नलिखित परिभाषा प्राप्त होती हैः

परिभाषा 8 मान लीजिए कि U एक सार्वत्रिक समुच्चय है और A, U का एक उपसमुच्चय है, तो A का पूरक समुच्चय U के उन अवयवों का समुच्चय है, जो A के अवयव नहीं हैं। प्रतीकात्मक रूप में हम U के सापेक्ष A के पूरक को प्रतीक A से निरूपित करते हैं। अतः A = {x : x U और x A } हम लिख सकते हैं। A = U – A

ध्यान दीजिए कि A के पूरक समुच्चय को, विकल्पतः, सार्वत्रिक समुच्चय U तथा समुच्चय A के अंतर के रूप में देखा जा सकता है।

उदाहरण 20 मान लीजिए कि U = {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10} और A = {1, 3, 5, 7, 9} है तो A ज्ञात कीजिए।

हल हम नोट करते हैं केवल 2, 4, 6, 8, 10 ही U के एेसे अवयव हैं जो A में नहीं हैं। 

अतः A = { 2, 4, 6, 8,10 }.

उदाहरण 21 मान लीजिए कि U एक सह शिक्षा विद्यालय के कक्षा XI के सभी विद्यार्थियों का सार्वत्रिक समुच्चय है और A, कक्षा XI की सभी लड़कियों का समुच्चय है तो A ज्ञात कीजिए।

हल क्योंकि A, कक्षा XI की सभी लड़कियों का समुच्चय है, अत A स्पष्टतया कक्षा के सभी लड़कों का समुच्चय है।

टिप्पणी दि A सार्वत्रिक समुच्चय U का एक उपसमुच्चय है, तो इसका पूरक A भी U का एक उपसमुच्चय होता है।

पुनः उपर्युक्त उदाहरण 20 में,

A = { 2, 4, 6, 8, 10 }

अतः (A) = {x : x U और x A}

= {1, 3, 5, 7, 9} = A

पूरक समुच्चय की परिभाषा से स्पष्ट है कि सार्वत्रिक समुच्चय U के किसी उपसमुच्चय A के लिए (A) = A

अब निम्नलिखित उदाहरण में हम ( A B) तथा A B के हल निकालेंगे।

उदाहरण 22 मान लीजिए कि U = {1, 2, 3, 4, 5, 6}, A = {2, 3} और B = {3, 4, 5},
A
, B , A B, A B ज्ञात कीजिए और फिर सिद्ध कीजिए कि ( A B) = A B.

हल स्पष्टतया A = {1, 4, 5, 6}, B = { 1, 2, 6 }। अतः A′ ∩ B = { 1, 6 }

पुनः A B = { 2, 3, 4, 5 } है। इसलिए (A B) = { 1, 6 }

( A B) = { 1, 6 } = A′ ∩ B

इस प्रकार हम देखते हैं कि ( A B) = A B. यह सिद्ध किया जा सकता है कि उपर्युक्त परिणाम व्यापक रूप से सत्य होता है यदि A और B सार्वजनिक समुच्चय U के कोई दो उपसमुच्चय हैं, तो ( A B) = A B. इसी प्रकार ( A B) = A B इन परिणामों को शब्दों में इस प्रकार व्यक्त करते हैंः

‘‘दो समुच्चयों के सम्मिलन का पूरक उनके पूरक समुच्चयों का सार्वनिष्ठ होता है तथा दोनों समुच्चयों के सार्वनिष्ठ का पूरक उनके पूरक समुच्चयों का सम्मिलन होता है।’’ इनको De Morgan के नियम कहते हैं।

आकृति 1.10

यह नाम गणितज्ञ De Morgan के नाम पर रखा गया है।

किसी समुच्चय A के पूरक A को वेन आरेख द्वारा निरूपित किया जा सकता है जैसा कि आकृति 1.10 में प्रदर्शित है।

छायांकित भाग समुच्चय A के पूरक A को दर्शाता है।

पूरकों के कुछ गुणधर्म

1. पूरक नियम : (i) A A = U (ii) A A = φ

2. De Morgan का नियम : (i) (A B)´ = A B (ii) (A B = A B

3. द्वि-पूरक नियम : (A) = A

4. φ′ और U के नियम: φ′ = U और U = φ.

इन नियमों का सत्यापन वेन आरेखों द्वारा किया जा सकता है।

प्रश्नावली 1.5

1. मान लीजिए कि U = {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 }, A = {1, 2, 3, 4}, B = {2, 4, 6, 8 } और C = { 3, 4, 5, 6 } तो निम्नलिखित ज्ञात कीजिएः

(i) A (ii) B (iii) (A C) (iv) (A B) (v) (A) (vi) (B – C)

2. If U = { a, b, c, d, e, f, g, h}, तो निम्नलिखित समुच्चयों के पूरक ज्ञात कीजिएः

(i) A = {a, b, c} (ii) B = {d, e, f, g}

(iii) C = {a, c, e, g} (iv) D = { f, g, h, a}

3. प्राकृत संख्याओं के समुच्चय को सार्वत्रिक समुच्चय मानते हुए, निम्नलिखित समुच्चयों के पूरक लिखिएः

(i) {x : x एक प्राकृत सम संख्या है} (ii) { x : x एक प्राकृत विषम संख्या है}

(iii) {x : x संख्या 3 का एक धन गुणज है} (iv) { x : x एक अभाज्य संख्या है}

(v) {x : x, 3 और 5 से विभाजित होने वाली एक संख्या है}

(vi) { x : x एक पूर्ण वर्ग संख्या है} (vii) { x : x एक पूर्ण घन संख्या है}

(viii) { x : x + 5 = 8 } (ix) { x : 2x + 5 = 9}

(x) { x : x 7 } (xi) { x : x N और 2x + 1 > 10 }

4. यदि U = {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 }, A = {2, 4, 6, 8} और B = { 2, 3, 5, 7}, तो सत्यापित कीजिए किः

(i) (A B) = A B (ii) (A B) = A B

5. निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए उपर्युक्त वेन आरेख खींचिएः

(i) (A B) (ii) A B (iii) (A B) (iv) A B

6. मान लीजिए कि किसी समतल में स्थित सभी त्रिभुजों का समुच्चय सार्वत्रिक समुच्चय U है। यदि A उन सभी त्रिभुजों का समुच्चय है जिनमें कम से कम एक कोण 600 से भिन्न है, तो A क्या है?

7. निम्नलिखित कथनों को सत्य बनाने के लिए रिक्त स्थानों को भरिएः

(i) A A = . . . (ii) φ′ ∩ A = . . .

(iii) A A = . . . (iv) U′ ∩ A = . . .

1.12 दो समुच्चयों के सम्मिलन और सर्वनिष्ठ पर आधारित व्यावहारिक प्रश्न Practical Problems on Union and Intersection of Two Sets

पहले के अनुच्छेदों में हम दो समुच्चयों के सम्मिलन, सर्वनिष्ठ तथा अंतर के बारे में सीख चुके हैं। इस अनुच्छेद में हम अपने प्रतिदिन के जीवन से सम्बन्धित कुछ प्रश्नों को सरल करेंगे। इस अनुच्छेद में प्राप्त सूत्रों का प्रयोग आगे आने वाले अध्यायों, जैसे प्रायिकता (अध्याय 16) में भी किया जाएगा।

आकृति 1.11

(i) मान लीजिए कि A और B परिमित समुच्चय हैं। यदि A B = φ, तो

n ( A B ) = n ( A ) + n ( B ) ... (1)

A B के अवयव या तो A में हैं या B में हैं परंतु दोनों में नहीं हैं, क्योंकि A B = φ. अतः परिणाम (1) तत्काल प्राप्त होता है।

(ii) व्यापक रूप से यदि A और B परिमित समुच्चय है, तो n ( A B ) = n ( A ) + n ( B )
n ( A B ) ... (2)

नोट कीजिए कि समुच्चय A – B, A B तथा B – A असंयुक्त हैं और इनका सम्मिलन A B है (आकृति 1.11)। इसलिए

n ( A B) = n ( A – B) + n ( A B ) + n ( B – A )

= n ( A – B) + n ( A B ) + n ( B – A ) + n ( A B ) – n ( A B)

= n ( A ) + n ( B ) – n ( A B), जो परिणाम (2) को सत्यापित करता है।

(iii) पुनः यदि A, B और C परिमित समुच्चय हैं, तो

n ( A B C ) = n ( A ) + n ( B ) + n ( C ) – n ( A B ) – n ( B C)

n ( A C ) + n ( A B C ) ... (3)

वास्तव में हम देखते हैं कि

n ( A B C ) = n (A) + n ( B C ) – n [ A ( B C ) ] [ (2) द्वार ]

= n (A) + n ( B ) + n ( C ) – n ( B C ) – n [ A ( B C ) ] [ (2) द्वारा ]

क्योंकि A ( B C ) = ( A B ) ( A C ), हमें प्राप्त होता है कि

n [ A ( B C ) ] = n ( A B ) + n ( A C ) – n [ ( A B) (A C)]

= n ( A B ) + n ( A C ) – n (A B C)

अतः n ( A B C ) = n (A) + n ( B ) + n ( C ) – n ( A B ) – n ( B C)

n ( A C ) + n ( A B C )

इस प्रकार परिणाम (3) सिद्ध हुआ।

उदाहरण 23 यदि X और Y दो एेसे समुच्चय हैं कि X Y में 50 अवयव हैं, X में
28 अवयव हैं और
Y में 32 अवयव हैं, तो X Y में कितने अवयव हैं?

हल दिया है कि n (X Y) = 50, n (X) = 28,
n
(Y) = 32, n (x Y) = ?

आकृति 1.12

सूत्र n (X Y) = n (X) + n (Y) – n (X Y) के प्रयोग द्वारा हम देखते हैं कि

n (X Y) = n (X) + n (Y) – n (X Y)

= 28 + 32 – 50 = 10

विकल्पतः मान लीजिए कि n ( X Y ) = k, तो

n (X – Y) = 28 – k , n (Y – X) = 32 – k (आकृति 1.12 के वेन आरेख द्वारा)

इससे मिलता है कि 50 = n (X Y) = n (X – Y) + n (X Y) + n (Y – X)

= (28 – k) + k + (32 – k)

अतः k = 10.

उदाहरण 24 एक विद्यालय में 20 अध्यापक हैं जो गणित या भौतिकी पढ़ाते हैं। इनमें से 12 गणित पढ़ाते हैं और 4 भौतिकी और गणित दोनों को पढ़ाते हैं। कितने अध्यापक भौतिकी पढ़ाते हैं?

हल मान लीजिए कि M उन अध्यापकों का समुच्चय निरूपित करता है, जो गणित पढ़ाते हैं और P उन अध्यापकों का समुच्चय निरूपित करता है, जो भौतिकी पढ़ाते हैं। हमें प्रश्न के कथन में आने वाले शब्द ‘या’ से सम्मिलन तथा शब्द ‘और’ से सर्वनिष्ठ का संकेत मिलता है। इसलिए

n ( M P ) = 20 , n ( M ) = 12 और n ( M P ) = 4

हम n ( P ) ज्ञात करना चाहते हैं।

परिणाम n ( M P ) = n ( M ) + n ( P ) – n ( M P ), के प्रयोग द्वारा,

20 = 12 + n ( P ) – 4

अतः n ( P ) = 12

अतएव 12 अध्यापक भौतिकी पढ़ाते हैं।

उदाहरण 25 35 विद्यार्थियों की एक कक्षा में, 24 क्रिकेट खेलना पसंद करते हैं और 16 फुटबाल खेलना पसंद करते हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विद्यार्थी कम से कम एक खेल अवश्य खेलना पसंद करता है। कितने विद्यार्थी क्रिकेट और फुटबाल दोनों खेलना पसंद करते हैं?

हल मान लीजिए कि क्रिकेट खेलना पसंद करने वाले विद्यार्थियों का समुच्चय X है। मान लीजिए कि फुटबाल खेलना पसंद करने वाले विद्यार्थियों का समुच्चय Y है। इस प्रकार X Y उन विद्यार्थियों का समुच्चय है, जो कम से कम एक खेलना पसंद करते हैं और X Y उन विद्यार्थियों का समुच्चय है, जो दोनों ही खेल खेलना पसंद करते हैं।

दिया है कि n (X) = 24, n (Y) = 16, n (X Y) = 35, n (X Y) = ?

सूत्र n (X Y) = n (X) + n (Y) – n (X Y), के प्रयोग द्वारा, हम प्राप्त करते हैं।

35 = 24 + 16 – n (X Y)

इसलिए, n (X Y) = 5

अर्थात् 5 विद्यार्थी दोनों खेल खेलना पसंद करते हैं।

उदाहरण 26 किसी स्कूल के 400 विद्यार्थियों के सर्वेक्षण में 100 विद्यार्थी सेब का रस, 150 विद्यार्थी संतरे का रस और 75 विद्यार्थी सेब तथा संतरे दोनों का रस पीने वाले पाए जाते हैं। ज्ञात कीजिए कि कितने विद्यार्थी न तो सेब का रस पीते हैं और न संतरे का ही?

हल मान लीजिए कि U सर्वेक्षण किए गए विद्यार्थियों के समुच्चय को निरूपित करता है। तथा A सेब का रस पीने वाले और B संतरे का रस पीने वाले विद्यार्थियों के समुच्चयों को निरूपित करते है। इस प्रकार n (U) = 400, n (A) = 100, n (B) = 150 और n (A B) = 75.

अब n (A B) = n (A B)

= n (U) – n (A B)

= n (U) – n (A) – n (B) + n (A B)

= 400 – 100 – 150 + 75 = 225

अतः 225 विद्यार्थी न तो सेब का और न संतरे का रस पीते हैं।

उदाहरण 27 200 व्यक्ति किसी चर्म रोग से पीड़ित हैं, इनमें 120 व्यक्ति रसायन C1, 50 व्यक्ति रसायन C2, और 30 व्यक्ति रसायन C1 और C2 दोनों ही से प्रभावित हुए हैं, तो एेसे व्यक्तियों की संख्या ज्ञात कीजिए जो प्रभावित हुए हों:

(i) रसायन C1 किंतु रसायन C2 से नहीं,

(ii) रसायन C2 किंतु रसायन C1 से नहीं,

(iii) रसायन C1 अथवा रसायन C2 से प्रभावित हुए हैं।

हल मान लीजिए कि U, चर्म रोग से पीड़ित व्यक्तियों के सार्वत्रिक समुच्चय को निरूपित करता है, A, रसायन C1 से प्रभावित व्यक्तियों के समुच्चय को तथा B, रसायन C2 से प्रभावित व्यक्तियों के समुच्चय को निरूपित करते हैं।

यहाँ पर n ( U) = 200, n ( A ) = 120, n ( B ) = 50 तथा n ( A B ) = 30

(i) दिए हुए वेन आरेख (आकृति 1.13) में हम देखते हैं कि

A = ( A – B ) ( A B ).

अतः n (A) = n( A – B ) + n( A B )

(क्योंकि A – B) और A B असंयुक्त हैं)

अथवा n ( A – B ) = n ( A ) – n ( A B ) =
120 –30 = 90

आकृति 1.13

अतः रसायन C1 किंतु रसायन C2 से नहीं प्रभावित व्यक्तियों की संख्या 90 है।

(ii) आकृति 1.13 से B = ( B – A) ( A B).

इसलिए n (B) = n (B – A) + n ( A B) (क्योंकि A – B तथा A – B अंसयुक्त हैं।)

अथवा n ( B – A ) = n ( B ) – n ( A B

= 50 – 30 = 20
अतः रसायन C2 किंतु रसायन C1 से नहीं प्रभावित व्यक्तियों की संख्या 20 है।

(iii) रसयान C1 अथवा रसायन C2 से प्रभावित व्यक्तियों की संख्या अर्थात्

n ( A B ) = n ( A ) + n ( B ) – n ( A B )

= 120 + 50 – 30 = 140.


प्रश्नावली 1.6

1. यदि X और Y दो एेसे समुच्चय हैं कि n ( X ) = 17, n ( Y ) = 23 तथा  n ( X Y ) = 38, तो n ( X Y ) ज्ञात कीजिए।

2. यदि X और Y दो एेसे समुच्चय हैं कि X Y में 18, X में 8 और Y में 15 अवयव हों, तो X Y में कितने अवयव होंगे?

3. 400 व्यक्तियों के समूह में, 250 हिंदी तथा 200 अंग्रेज़ी बोल सकते हैं। कितने व्यक्ति हिंदी तथा अंग्रेज़ी दोनों बोल सकते हैं?

4. यदि S और T दो एेसे समुच्चय हैं कि S में 21, T में 32 और S T में 11 अवयव हों, तो S T में कितने अवयव होंगे?

5. यदि X और Y दो एेसे समुच्चय हैं कि X में 40, X Y में 60 और X Y में 10 अवयव हों, तो Y में कितने अवयव होंगे?

6. 70 व्यक्तियों के समूह में, 37 कॉηी, 52 चाय पसंद करते हैं और प्रत्येक व्यक्ति दोनों में से कम से कम एक पेय पसंद करता है, तो कितने व्यक्ति कॉηी और चाय दोनों को पसंद
करते हैं?

7. 65 व्यक्तियों के समूह में, 40 व्यक्ति क्रिकेट, और 10 व्यक्ति क्रिकेट तथा टेनिस दोनों को पसंद करते हैं, तो कितने व्यक्ति केवल टेनिस को पसंद करते हैं किंतु क्रिकेट को नहीं? कितने व्यक्ति टेनिस को पसंद करते हैं?

8. एक कमेटी में, 50 व्यक्ति फ्रेंच, 20 व्यक्ति स्पेनिश और 10 व्यक्ति स्पेनिश और फ्रेंच दोनों ही भाषाओं को बोल सकते हैं। कितने व्यक्ति इन दोनों ही भाषाओं में से कम से कम एक भाषा बोल सकते हैं?

विविध उदाहरण

उदाहरण 28 दिखाइए कि शब्द “ CATARACT ” के वर्ण विन्यास के अक्षरों का समुच्चय तथा शब्द “ TRACT” के वर्णविन्यास के अक्षरों का समुच्चय समान है।

हल मान लीजिए कि X “CATARACT” के अक्षरों का समुच्चय है, तो

X = { C, A, T, A, R, A, C, T } = { C, A, T, R }

मान लीजिए कि Y “ TRACT” के अक्षरों का समुच्चय है, तो

Y = { T, R, A, C }

क्योंकि X का प्रत्येक अवयव Y में है तथा Y का प्रत्येक अवयव X में है, अतः X = Y

उदाहरण 29 समुच्चय { –1, 0, 1 } के सभी उपसमुच्चयों की सूची बनाइए।

हल माना A = {–1, 0, 1} है। समुच्चय A का वह उपसमुच्चय जिसमें कोई भी अवयव नहीं है रिक्त समुच्चय φ है। A के एक अवयव वाले उपसमुच्चय { –1 }, { 0 }, { 1 } हैं। A के दो अवयव वाले समुच्चय { –1, 0 }, {–1, 1} ,{0, 1} हैं। A के तीन अवयव वाला उपसमुच्चय A स्वयं है। इस प्रकार A के सभी उपसमुच्चय φ, { –1 }, { 0 }, { 1 }, {–1, 0}, {–1, 1} ,{0, 1} तथा {–1, 0, 1} हैं।

उदाहरण 30 सिद्ध कीजिए कि A B = A B का तात्पर्य है कि A = B

हल यदि कोई अवयव a A, तो a A B. क्योंकि A B = A B , इसलिए
a A B. अतः a B. इस प्रकार A B. इसी प्रकार यदि b B, तो b A B. क्योंε
A
B = A B इसलिए, b A B. इस प्रकार b A. अतः B A अतएव A = B.

उदाहरण 31 समुच्चयों A, B के लिए सिद्ध कीजिए कि

P ( A B ) = P ( A ) P ( B ).

हल मान लीजिए कि X P (A B), तो X A B. इसलिए X P (A) तथा X P (B), जिसका तात्पर्य हुआ कि X [P ( A ) P (B)]. इस प्रकार P ( A B ) [P ( A ) P ( B )]. मान लीजिए कि Y [P ( A ) P ( B )], तो Y P ( A ) तथा Y P ( B ), इस प्रकार Y A और Y B. इसलिए Y A B, जिसका तात्पर्य है कि Y P ( A B ), अतएव [P ( A ) P ( B )]
P ( A B), अतः P ( A B ) = P ( A ) P ( B ).

दाहरण 32 एक बाजार अनुसंधान समूह ने 1000 उपभोक्ताओं का सर्वेक्षण किया और सूचित किया कि 720 उपभोक्ताओं ने उत्पाद A तथा 450 उपभोक्ताओं ने उत्पाद B पसंद किया। दोनों उत्पादों को पसंद करने वाले उपभोक्ताओं की न्यूनतम संख्या क्या है?

हल मान लीजिए कि U सर्वेक्षण उपभोक्ताओं का समुच्चय है, S उन उपभोक्ताओं का समुच्चय है जिन्होनें उत्पाद A पसंद किया और T उन उपभोक्ताओं का समुच्चय है जिन्होंने उत्पाद B पसंद किय। दिया है कि,

n ( U ) = 1000, n ( S ) = 720, n ( T ) = 450

इस प्रकार n ( S T ) = n ( S ) + n ( T ) – n ( S T )

= 720 + 450 – n (S T) = 1170 – n ( S T )

स्पष्ट है कि n ( S T ) अधिकतम तब होगा जब n ( S T ) न्यूनतम है, किंतु S T U, जिसका तात्पर्य है कि n ( S T ) n ( U ) = 1000 । इस प्रकार n ( S T ) का अधिकतम मान 1000 है। इसलिए n ( S T ) का न्यूनतम मान 170 है। अतः दोनों उत्पादों को पसंद करने वाले उपभोक्ताओं की न्यूनतम संख्या 170 है।

उदाहरण 33 500 कार मालिकों से पूछताछ करनें पर पाया गया कि 400 लोग A प्रकार की कार के, 200 लोग B प्रकार की कार के तथा 500 लोग A और B दोनों प्रकार की कारों के मालिक थे। क्या ये आँकड़े सही हैं?

हल मान लीजिए कि पूछताछ किए गए कार मालिकों का समुच्चय U है, A प्रकार की कार के मालिकों का समुच्चय M है और B प्रकार की कार के मालिकों का समुच्चय S है।

दिया है कि n ( U ) = 500, n (M ) = 400, n ( S ) = 200 और n ( S M ) = 50.

इस प्रकार n ( S M ) = n ( S ) + n ( M ) – n ( S M ) = 200 + 400 – 50 = 550

किंतु S M U जिसका तात्पर्य है कि n ( S M ) n ( U ).

यह एक विरोधोक्ति है। अतः प्रदत्त आँकड़े सही नहीं है।

उदाहरण 34 एक महाविद्यालय में फुटबाल के लिए 38, बास्केट बाल के लिए 15 और क्रिकेट के लिए 20 पदक प्रदान किए गए। यदि ये पदक कुल 58 लोगों को मिले और केवल तीन लोगों को तीनों खेलों के लिए मिले, तो कितने लोगों को तीन में से ठीक-ठीक दो खेलों के लिए मिले?

हल मान लीजिए कि F, B तथा C उन लोगों के समुच्चय निरूपित करते हैं जिन्हें क्रमशः फुटबाल, बास्केटबाल तथा क्रिकेट के लिए पदक मिले।

यहाँ n ( F ) = 38, n ( B ) = 15, n ( C ) = 20, n (F B C ) = 58 और n (F B C ) = 3

पुनः n (F B C ) = n ( F ) + n ( B ) + n ( C ) – n (F B ) – n (F C ) – n (B C )
+
n ( F B C ),

इस प्रकार n ( F B ) + n ( F C ) + n ( B C ) = 18

आकृति 1.14 में दिए वेन आरेख पर विचार कीजिएः

आकृति 1.14

यहाँ a उन लोगों की संख्या है, जिनको केवल फुटबाल तथा बास्केटबाल के लिए पदक मिले, b उन लोगों की संख्या है, जिनको केवल फुटबाल तथा क्रिकेट के लिए पदक मिले और c उन लोगों की संख्या है, जिनको केवल बास्केटबाल तथा क्रिकेट के लिए पदक मिले। d उन लोगों की संख्या है जिनको तीनो ही खेलों के लिए पदक मिले। इस प्रकार d = n ( F B C ) = 3 और
a
+ d + b + d + c + d = 18

अतः a + b + c = 9, जोकि उन लोगों की संख्या है, जिनकों तीनों खेलों में से दो खेलों के लिए
पदक मिले।

अध्याय 1 पर विविध प्रश्नावली

1. निम्नलिखित समुच्चयों में से कौन किसका उपसमुच्चय है, इसका निर्णय कीजिएः

A = {x : x R तथा x2 – 8x + 12 = 0 को संतुष्ट करने वाली सभी वास्तविक

संख्याएँ x }, B = {2, 4, 6}, C = { 2, 4, 6, 8, . . . }, D = { 6 }.


2. ज्ञात कीजिए कि निम्नलिखित में से प्रत्येक कथन सत्य है या असत्य है। यदि सत्य है, तो उसे सिद्ध कीजिए। यदि असत्य है, तो एक उदाहरण दीजिए।

(i) यदि x A तथा A B , तो x B

(ii) यदि A B तथा B C , तो A C

(iii) यदि A B तथा B C , तो A C

(iv) यदि A B तथा B C , तो A C

(v) यदि x A तथा A B , तो x B

(vi) यदि A B तथा x B , तो x A

3. मान लीजिए A, B, और C एेसे समुच्चय हैं कि A B = A C तथा A B = A C, तो दर्शाइए कि B = C.

4. दिखाइए कि निम्नलिखित चार प्रतिबंध तुल्य हैंः

(i) A B (ii) A – B = φ (iii) A B = B (iv) A B = A

5. दिखाइए कि यदि A B, तो C – B C – A.

6. मान लीजिए कि P ( A ) = P ( B ), सिद्ध कीजिए कि A = B

7. किन्हीं भी समुच्चयों A तथा B के लिए, क्या यह सत्य है कि

P ( A ) P ( B ) = P ( A B )? अपने उत्तर का औचित्य बताइए।

8. किन्हीं दो समुच्चयों A तथा B के लिए सिद्ध कीजिए कि,

A = ( A B ) ( A – B ) और A ( B – A ) = ( A B )

9. समुच्चयों के गुणधर्मों का प्रयोग करके सिद्ध कीजिए किः

(i) A ( A B ) = A (ii) A ( A B ) = A.

10. दिखलाइए कि A B = A C का तात्पर्य B = C आवश्यक रूप से नहीं होता है।

11. मान लीजिए कि A और B समुच्चय हैं। यदि किसी समुच्चय X के लिए
A
X = B X = φ तथा A X = B X, तो सिद्ध कीजिए कि A = B.

(संकेतः A = A ( A X ) , B = B ( B X ) और वितरण नियम का प्रयोग कीजिए)

12. एेसे समुच्चय A, B और C ज्ञात कीजिए ताकि A B, B C तथा A C आरिक्त समुच्चय हों और A B C = φ.

13. किसी विद्यालय के 600 विद्यार्थियों के सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ कि 150 विद्यार्थी चाय, 225 विद्यार्थी कॉफ़ी तथा 100 विद्यार्थी चाय और कॉफ़ी दोनों पीते हैं। ज्ञात कीजिए कि कितने विद्यार्थी न तो चाय पीते हैं और न कॉफ़ी पीते हैं।

14. विद्यार्थियों के एक समूह में, 100 विद्यार्थी हिंदी, 50 विद्यार्थी अंग्रेज़ी तथा 25 विद्यार्थी दोनों भाषाओं को जानते हैं। विद्यार्थियों में से प्रत्येक या तो हिंदी या अंग्रेज़ी जानता है। समूह में कुल कितने विद्यार्थी हैं?

15. 60 लोगों के सर्वेक्षण में पाया गया कि 25 लोग समाचार पत्र H, 26 लोग समाचार पत्र T, 26 लोग समाचार पत्र I, 9 लोग H तथा I दोनों, 11 लोग H तथा T दोनों, 8 लोग T तथा I दोनों और 3 लोग तीनों ही समाचार पत्र पढ़ते हैं, तो निम्नलिखित ज्ञात कीजिएः

(i) कम से कम एक समाचार पत्र पढ़ने वालों की संख्या।

(ii) ठीक-ठीक केवल एक समाचार पत्र पढ़ने वालों की संख्या।

16. एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 21 लोग उत्पाद A, 26 लोग उत्पाद B, 29 लोग उत्पाद C पसंद करते हैं। यदि 14 लोग उत्पाद A तथा B, 12 लोग उत्पाद C तथा A, 14 लोग उत्पाद B तथा C और 8 लोग तीनो ही उत्पादों को पसंद करते हैं। ज्ञात कीजिए कि कितने लोग केवल उत्पाद C को पसंद करते हैं।

सारांश

इस अध्याय में समुच्चयों से संबंधित कुछ मूलभूत परिभाषाओं और संक्रियाओं पर विचार किया गया है। जिसका सार नीचे दिया है।

  • एक समुच्चय वस्तुओं का सुपरिभाषित संग्रह होता है।
  • एक समुच्चय जिसमें एक भी अवयव नहीं होता है, रिक्त समुच्चय कहलाता है।
  • एक समुच्चय जिसमें अवयवों की संख्या निश्चित होती है परिमित समुच्चय कहलाता है अन्यथा अपरिमित समुच्चय कहलाता है।
  • दो समुच्चय A और B समान कहलाते हैं यदि उनमें तथ्यतः समान अवयव हों।
  • एक समुच्चय A किसी समुच्चय B का उपसमुच्चय कहलाता है, यदि A का प्रत्येक अवयव B का भी अवयव हो। अंतराल समुच्चय R के उपसमुच्चय होते हैं।
  • किसी समुच्चय A का घात समुच्चय A के सभी उपसमुच्चयों का संग्रह होता है।
  • दो समुच्चय A और B का सम्मिलन उन सभी अवयवों का समुच्चय होता है जो या तो A में हों या B में हों।
  • दो समुच्चय A और B का सर्वनिष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय होता है जो A और B दोनों में उभयनिष्ठ हों। दो समुच्चय A और B का अंतर, जब A तथा B इसी क्रम में हो, उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो A में हों किंतु B में नहीं हों।
  • किन्हीं दो समुच्चय A तथा B के लिए, (A B) = A B तथा (A B) = A B
  • यदि A और B एेसे परिमित समुच्चय हैं कि A B = φ, तो,

n (A B) = n (A) + n (B) और

यदि A B φ, तो

n (A B) = n (A) + n (B) – n (A B)


एेतिहासिक पृष्ठभूमि

जर्मन गणित Georg Cantor (1845 ई॰ - 1918 ई॰ ) को आधुनिक समुच्चय सिद्धांत के अधिकांश भाग का जन्मदाता माना जाता है। समुच्चय सिद्धांत पर उनके शोध पत्र 1874 ई॰ से 1897 ई॰ के बीच के किसी समय में प्रकाश में आए। उनका समुच्चय सिद्धांत का अध्ययन उस समय हुआ जब वे a1 sin x + a2 sin 2x + a3 sin 3x + ... के रूप की त्रिकोणमितीय श्रेणी का अध्ययन कर रहे थे।

1874 ई॰ में अपने एक शोध पत्र में यह प्रकाशित किया कि वास्तविक संख्याओं को पूर्णांकों के साथ एक-एक संगतता में नहीं रखा जा सकता है। 1879 ई॰ के उत्तरार्ध में अमूर्त समुच्चयों के विभिन्न गुणधर्मों को दर्शाने वाले उनके अनेक शोध पत्र प्रकाεशत हुए।

Cantor के शोध को एक अन्य विख्यात गणितज्ञ Richard Dedekind (1831ई॰-1916ई॰) ने प्रशंसनीय ढंग से स्वीकार किया। लेकिन Kronecker (1810-1893 ई॰) ने अपरिमित समुच्चयों को, उसी प्रकार से लेने के लिए जिस प्रकार परिमित समुच्चयों को लिया जाता है, उनकी भर्त्सना की। एक दूसरे जर्मन गणितज्ञ Gottlob Frege ने शताब्दी की समाप्ति पर समुच्चय सिद्धांत को तर्कशास्त्र के नियमों के रूप में प्रस्तुत किया। उस समय तक संपूर्ण समुच्चय सिद्धांत सभी समुच्चयों के समुच्चय के अस्तित्व की कल्पना पर आधारित था। यह विख्यात अंग्रेज दार्शिनिक Bertand Russell (1872 ई.-1970 ) थे जिन्होंने 1902 ई॰ में बतलाया कि सभी समुच्चयों के समुच्चय के अस्तित्व की कल्पना एक विरोधोक्ति को जन्म देती है। इस प्रकार Russell की विख्यात विरोधोक्ति मिली। Paul R.Halmos ने इसके बारे में अपनी पुस्तक ‘Naïve Set Theory’ में लिखा है कि ‘‘कुछ नहीं में सब कुछ समाहित है’’।

इन सभी विरोधोक्तियों के परिणामस्वरूप समुच्चय सिद्धांत का पहला अभिगृहीतीकरण 1908 ई॰ में Ernst Zermelo द्वारा प्रकाशित किया गया। 1922 ई॰ में Abraham Fraenkel ने एक दूसरा प्रस्ताव भी दिया। 1925 ई॰ में John Von Neumann ने नियमितीकरण का अभिगृहीत स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। इसके बाद 1937 ई॰ में Paul Bernays ने सन्तोषजनक अभिगृहीतिकरण प्रस्तुत किया। इन अभिगृहीतों में सुधार, Kurt Gödel द्वारा 1940 ई॰ में अपने मोनोग्राफ में प्रस्तुत किया गया। इस सुधार को Von Neumann-Bernays (VNB) अथवा Gödel-Bernays (GB) का समुच्चय सिद्धांत कहते हैं।

इन सभी कठिनाइयों के बावजूद, Cantor के समुच्चय सिद्धांत को वर्तमान काल के गणित में प्रयोग किया जाता है। वास्तव में आजकल गणित के अधिकांश संकल्पनाएँ तथा परिणामों को समुच्चय सैद्धांतिक भाषा में प्रस्तुत करते हैं।

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