™प्द जीमेम कंले व िबवदसिपबज इमजूममद ंदबपमदज ंदक उवकमतद ेजनकपमेय जीमतम उनेज चनतमसल इम ेवउमजीपदह जव इम ेंपक वित ं ेजनकल ूीपबी कपक दवज इमहपद ूपजी च्लजींहवतंे ंदक ूपसस दवज मदक ूपजी म्पदेजमपदय इनज पे जीम वसकमेज ंदक जीम लवनदहमेज कृ ळण्भ्ण्भ्।त्क्ल् ऽ 1ण्1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध वतर्मान समय में गण्िात के अध्ययन में समुच्चय की परिकल्पना आधरभूत है। आजकल इस परिकल्पना का प्रयोग गण्िात की प्रायः सभी शाखाओं में होता है। समुच्चय का प्रयोग संबंध् एवं पफलन को परिभाष्िात करने के लिए किया जाता है। ज्यामितीय, अनुक्रम, प्रायिकता आदि के अध्ययन में समुच्चय के ज्ञान की आवश्यकता पड़ती है। समुच्चय सि(ांत का विकास जमर्न गण्िातज्ञ ळमवतह ब्ंदजवत ;1845 - 1918द्ध द्वारा किया गया था। त्रिाकोणमितीय श्रेणी के प्रश्नों को सरल करते समय उनका समुच्चय से पहली बार परिचय हुआ था। इस अध्याय में हम समुच्चय से संबंध्ित वुफछ मूलभूत परिभाषाओं और संियाओं पर विचार करेंगे। 1ण्2 समुच्चय और उनका निरूपण ;ैमजे ंदक जीमपत त्मचतमेमदजंजपवदेद्ध दैनिक जीवन में हम बहुध वस्तुओं के संग्रह की चचार् करते हैं, जैसे ताश की गड्डी, व्यक्ितयों की भीड़, िकेट टीम आदि। गण्िात में भी हम विभ्िान्न संग्रहों, की चचार् करते हैं, उदाहरणाथर्, प्रावृफत संख्याओं का संग्रह बिंदुओं का संग्रह, अभाज्य संख्याओं का संग्रह आदि। विशेषतः, हम निम्नलिख्िात संग्रह पर विचार करेंगेः ;पद्ध 10 से कम विषम प्रावृफत संख्याएँ, अथार्त् 1, 3, 5, 7, 9 ;पपद्ध भारत की नदियाँ, ;पपपद्ध अंग्रेशी वणर्माला के स्वर, यानी, ंए मए पए वए नए ;पअद्ध विभ्िान्न प्रकार के त्रिाभुज, ;अद्ध संख्या 210 के अभाज्य गुणनखंड, अथार्त्, 2, 3, 5 तथा 7, ;अपद्ध समीकरण ग2 दृ 5ग ़ 6 त्र 0ए के मूल अथार्त्, 2 तथा 3 यहाँ हम यह देखते हैं कि उपयुर्क्त प्रत्येक उदाहरणों में से वस्तुओं का एक सुपरिभाष्िात संग्रह इस अथर् में है कि किसी वस्तु के संबंध् में हम यह निणर्य निश्िचत रूप से ले सकते हैं कि वह वस्तुएक प्रदत्त संग्रह में है अथवा नहीं है। उदाहरणतः हम यह निश्िचत रूप से कह सकते हैं कि ‘नील नदी’, भारत की नदियों के संग्रह में नहीं है। इसके विपरीत गंगा नदी इस संग्रह में निश्िचतरूप से है। हम नीचे ऐसे समुच्चय के कुछ और उदाहरण दे रहे हैं, जिनका प्रयोग गण्िात में विशेषरूप से किया जाता हैऋ छरू प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय र्रू पूणा±कों का समुच्चय फरू परिमेय संख्याओं का समुच्चय त्रू वास्तविक संख्याओं का समुच्चय ऱ् रू ध्न पूणा±कों का समुच्चय फ़रू ध्न परिमेय संख्याओं का समुच्चय त़् रू ध्न वास्तविक संख्याओं का समुच्चय इन विशेष समुच्चयों के लिए निधर्रित उपयुर्क्त प्रतीकों का प्रयोग हम इस पुस्तक में निरंतर करते रहेंगे। इसके अतिरिक्त विश्व के पाँच सवार्ध्िक विख्यात गण्िातज्ञों का संग्रह एक सुपरिभाष्िात समुच्चय नहीं है, क्योंकि सवार्ध्िक विख्यात गण्िातज्ञों के निणर्य करने का मापदंड एक व्यक्ित से दूसरे व्यक्ित के लिए भ्िान्न - भ्िान्न हो सकता है। अतः यह एक सुपरिभाष्िात संग्रह नहीं है। अतः ‘वस्तुओं के सुपरिभाष्िात संग्रह’ को हम एक समुच्चय कहते हैं। यहाँ पर हमें निम्नलिख्िात बिंदुओं पर ध्यान देना हैः ;पद्ध समुच्यय के लिए वस्तुएँ, अवयव तथा सदस्य पयार्यवाची पद हैं। ;पपद्ध समुच्यय को प्रायः अंग्रेशी वणर्माला के बड़े अक्षरों से निरूपित करते हैं, जैसे ।ए ठए ब्ए ग्ए ल्ए र् आदि ;पपपद्ध समुच्चय के अवयवों को अंग्रेशी वणर्माला के छोटे अक्षरों द्वारा प्रदश्िार्त करते हैं, जैसे ंए इए बए गए लए ्र आदि यदि ंए समुच्चय । का एक अवयव है, तो हम कहते हंै कि ‘ं समुच्चय । में है’। वाक्यांश ‘अवयव है’ ‘सदस्य है’ या ‘में है’ को सूचित करने के लिए यूनानी प्रतीक ‘‘∈ ;मचेपसवदद्ध’’ का प्रयोग किया जाता है। अतः हम ष्ं ∈ ।ष् लिखते हैं। यदि इए समुच्चय । का अवयव नहीं है, तो हम ष्इ ∉ ।ष् लिखते हैं और इसे ‘‘इ समुच्चय । में नहीं है’’ पढ़ते हैं। इस प्रकार अंग्रेशी वणर्माला के स्वरों के समुच्चय ट के सम्बंध् में ं ∈ ट विंफतु इ ∉ टण् इसी प्रकार संख्या 30 के अभाज्य गुणनखंडों के समुच्चय च् के लिए, 3 ∈ च् विंफतु 15 ∉ च्ण् किसी समुच्चय को निरूपित करने की दो विध्ियाँ हैंः ;पद्ध रोस्टर या सारणीब( रूप ;पपद्ध समुच्चय निमार्ण रूप ;पद्ध रोस्टर रूप में, समुच्चय के सभी अवयवों को सूचीब( किया जाता है, अवयवों को, एक दूसरे से, अध्र् - विराम द्वारा पृथक किया जाता है और उन सभी को एक मझले कोष्ठक के भीतर लिखते हैं। उदाहरणाथर्, 7 से कम सभी सम ध्न पूणा±कों के समुच्चय का वणर्न रोस्टर रूप में क्ष्2ए 4ए 6द्व द्वारा किया जाता है। किसी समुच्चय को रोस्टर रूप में प्रदश्िार्त करने के कुछ और उदाहरण नीचे दिए हैंः ;ंद्ध संख्या 42 को विभाजित करने वाली सभी प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय क्ष्1ए 2ए 3ए 6ए 7ए 14ए 21ए 42द्व है। ;इद्ध अंग्रेशी वणर्माला के सभी स्वरों का समुच्चय क्ष्ंए मए पए वए नद्व है। ;बद्ध विषम प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय क्ष्1ए 3ए 5ए ण् ण् ण्द्व है। अंत के बिंदु, जिनकी संख्या तीन होती है, यह बतलाते हैं कि इन विषम संख्याओं की सूची अंतहीन है। नोट कीजिए कि रोस्टर रूप में अवयवों को सूचीब( करने में उनके क्रम का महत्व नहीं होता है। इस प्रकार उपयर्ुक्त समुच्चय को क्ष्1ए 3ए 7ए 21ए 2ए 6ए 14ए 42द्वप्रकार भी प्रदश्िार्त कर सकते हैं। यह ध्यान रखना चाहिए कि समुच्चय को रोस्टर रूप में लिखते समय किसी अवयव को सामान्यतः दोबारा नहीं लिखते हैं, अथार्त्, प्रत्येक अवयव दूसरे से भ्िान्न होता है। उदाहरण के लिए शब्द ष्ैब्भ्व्व्स्ष् में प्रयुक्त अक्षरों का समुच्चय क्ष् ैए ब्ए भ्ए व्ए स्द्व है। ;पपद्ध समुच्चय निमार्ण रूप में, किसी समुच्चय के सभी अवयवों में एक सवर्निष्ठ गुणध्मर् होता है जो समुच्चय से बाहर के किसी अवयव में नहीं होता है। उदाहरणार्थ समुच्चय क्ष्ंए मए पए वए नद्व के सभी अवयवों में एक सवर्निष्ठ गुणध्मर् है कि इनमें से प्रत्येक अवयव अंग्रेशी वणर्माला का एक स्वर है और इस गुणध्मर् वाला कोइर् अन्य अक्षर नहीं है। इस समुच्चय को ट से निरूपित करते हुए हम लिखते हैं कि, ट त्र क्ष्ग रू ग अंग्रेशी वणर्माला का एक स्वर हैद्व। यहाँ ध्यान देना चाहिए कि किसी समुच्चय के अवयवों का वणर्न करने के लिए हम प्रतीक ष्गष् का प्रयोग करते हैं, ;ग के स्थान पर किसी अन्य प्रतीक का भी प्रयोग किया जा सकता है, जैसे, अक्षर लए ्र आदि।द्ध जिसके उपरांत कोलन का चिÉ फ्ःय् लिखते हैं। कोलन के चिÉ के बाद समुच्चय के अवयवों के विश्िाष्ट गुणध्मर् को लिखते हैं और पिफर संपूणर् कथन को मझले कोष्ठक क्ष्द्व के भीतर लिखते हैं। समुच्चय ट के उपयुर्क्त वणर्न को निम्नलिख्िात प्रकार से पढ़ा जाता है, फ्सभी ग का समुच्चय जहाँ ग अंग्रेशी वणर्माला का एक स्वर है।य् इस वणर्न में कोष्ठक का प्रयोग फ्सभी ग का समुच्चयय् के लिए और कोलन का प्रयोग ‘जहाँ ग’ के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 3 ढ ग ढ 10द्व को निम्नलिख्िात प्रकार से पढ़ते हैं: ‘‘सभी ग का समुच्चय, जहाँ ग एक प्रावृफत संख्या है और गए3 और 10 के बीच में हैं। अतः संख्याएं 4,5,6,7,8 और 9 समुच्चय । के अवयव हैं।यदि हम ऊपर ;ंद्धए ;इद्ध और ;बद्ध में रोस्टर रूप में वण्िार्त समुच्चयों को क्रमशः ।ए ठए ब् से प्रकट करें, तो ।ए ठ औरब् को समुच्चय निमार्ण रूप में, निम्नलिख्िात प्रकार से भी निरूपित किया जा सकता है। । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है जो संख्या 42 को विभाजित करती हैद्व ठ त्र क्ष्ल रू ल अंग्रेशी वणर्माला का एक स्वर हैद्व ब् त्र क्ष््र रू ्र एक विषम प्रावृफत संख्या हैद्व उदाहरण 1 समीकरण ग2 ़ ग दृ 2 त्र 0 का हल समुच्चय रोस्टर रूप में लिख्िाए। हल प्रदत्त समीकरण इस प्रकार लिखा जा सकता है, ;ग दृ 1द्ध ;ग ़ 2द्ध त्र 0ए अथार्त् ग त्र 1ए दृ 2 अतः प्रदत्त समीकरण का हल समुच्चय रोस्टर रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है क्ष्1ए दृ 2द्वण् उदाहरण 2 समुच्चय क्ष्ग रू ग एक ध्न पूणा±क है और ग2 ढ 40द्व को रोस्टर रूप में लिख्िाए। हल 1ए 2ए 3ए 4ए 5ए और 6 अभीष्ट संख्याएँ हैं। अतः क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्व प्रदत्त समुच्चय का रोस्टर रूप है। उदाहरण 3 समुच्चय । त्र क्ष्1ए 4ए 9ए 16ए 25ए ण् ण् ण् द्व को समुच्चय निमार्ण रूप में लिख्िाए। हल समुच्चय । को हम इस प्रकार लिख सकते हैं, । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या का वगर् हैद्व विकल्पतः हम इस प्रकार भी लिख सकते हैं, । त्र क्ष्ग रू ग त्र द2ए जहाँ द ∈ छद्व 123456 उदाहरण 4 समुच्चय क्ष् एएएएए द्व को समुच्चय निमार्ण रूप में लिख्िाए।2345 67 हल हम देखते हंै कि दिए गए समुच्चय के प्रत्येक अवयव का अंश उसके हर से 1 कम है। यहभी कि अंश एक प्रावृफत संख्या है जो 1 से प्रारंभ होकर उत्तरोत्तर एक से अध्िक होती जाती है और 6 से अध्िक नहीं है। अतः समुच्चय निमार्ण रूप में इसे इस प्रकार लिखते हैं, दक्ष् गरूग त्र एदए एक प्रावृफत संख्या है और 1 ≤ द ≤ 6द्वद ़1 उदाहरण 5बाईं ओर रोस्टर रूप में वण्िार्त प्रत्येक समुच्चय का दाईं ओर समुच्चय निमार्ण रूप में वण्िार्त समुच्चय से सही मिलान कीजिएः ;पद्ध क्ष्च्ए त्ए प्ए छए ब्ए ।ए स्द्व ;ंद्ध क्ष् ग रू ग एक ध्न पूणा±क है तथा 18 का भाजक हैद्व ;पपद्ध क्ष् 0 द्व ;इद्ध क्ष् ग रू ग एक पूणा±क है और ग2 दृ 9 त्र 0द्व ;पपपद्ध क्ष्1ए 2ए 3ए 6ए 9ए 18द्व ;बद्ध क्ष्ग रू ग एक पूणा±क है और ग ़ 1त्र 1द्व ;पअद्ध क्ष्3ए दृ3द्व ;कद्ध क्ष्ग रू ग शब्द च्त्प्छब्प्च्।स् का एक अक्षर हैद्व हल चूँकि ;कद्ध में, शब्द च्त्प्छब्प्च्।स् में 9 अक्षर हैं और दो अक्षर च् और प् की पुनरावृिा हुइर् है, अतः ;पद्ध का सही मिलान ;कद्ध से होता है। इसी प्रकार ;पपद्ध का सही मिलान ;बद्ध से होता है, क्योंकि ग ़ 1 त्र 1 का तात्पयर् है कि ग त्र 0ण् यह भी कि, 1, 2, 3, 6, 9 और 18 में से प्रत्येक 18 का भाजक है, इसलिए ;पपपद्ध का सही मिलान ;ंद्ध से होता है। अंत में ग2 दृ 9 त्र 0 अथार्त् ग त्र 3ए दृ3 और इसलिए ;पअद्ध का सही मिलान ;इद्ध से होता है। प्रश्नावली 1ण्1 1ण् निम्नलिख्िात में कौन से समुच्चय हैं? अपने उत्तर का औचित्य बताइए। ;पद्ध श्र अक्षर से प्रारंभ होने वाले वषर् के सभी महीनों का संग्रह। ;पपद्ध भारत के दस सबसे अध्िक प्रतिभाशाली लेखकों का संग्रह। ;पपपद्ध विश्व के सवर्श्रेष्ठ ग्यारह बल्लेवाजों का संग्रह। ;पअद्ध आपकी कक्षा के सभी बालकों का संग्रह। ;अद्ध 100 से कम सभी प्रावृफत संख्याओं का संग्रह। ;अपद्ध लेखक प्रेमचंद द्वारा लिख्िात उपन्यासों का संग्रह। ;अपपद्ध सभी सम पूणा±कों का संग्रह। ;अपपपद्ध इस अध्याय में आने वाले प्रश्नों का संग्रह। ;पगद्ध विश्व के सबसे अध्िक खतरनाक जानवरों का संग्रह। 2ण् मान लीजिए । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्वए रिक्त स्थानों में उपयुक्त प्रतीक ∈ अथवा ∉ भरिए। ;पद्ध 5ण्ण्ण्। ;पपद्ध 8 ण् ण् ण्। ;पपपद्ध 0ण्ण्ण्।;पअद्ध 4ण् ण् ण् । ;अद्ध 2ण् ण् ण्। ;अपद्ध 10ण् ण् ण्। 3ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों को रोस्टर रूप में लिख्िाएः ;पद्ध । त्र क्ष्ग रू ग एक पूणा±क है और दृ3 ढ ग ढ 7द्व ;पपद्ध ठ त्र क्ष्ग रू ग संख्या 6 से कम एक प्रावृफत संख्या हैद्व ;पपपद्ध ब् त्र क्ष्ग रू ग दो अंकों की ऐसी प्रावृफत संख्या है जिसके अंकों का योगपफल 8 हैद्व ;पअद्ध क् त्र क्ष्ग रू ग एक अभाज्य संख्या है जो संख्या 60 की भाजक हैद्व ;अद्ध म् त्र ज्त्प्ळव्छव्डम्ज्त्ल् शब्द के सभी अक्षरों का समुच्चय ;अपद्ध थ् त्र ठम्ज्ज्म्त् शब्द के सभी अक्षरों का समुच्चय 4ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों को समुच्चय निमार्ण रूप में व्यक्त कीजिएः ;पद्ध ;3ए 6ए 9ए 12द्व ;पपद्ध क्ष्2ए4ए8ए16ए32द्व ;पपपद्ध क्ष्5ए 25ए 125ए 625द्व ;पअद्ध क्ष्2ए 4ए 6ए ण् ण् ण्द्व ;अद्ध क्ष्1ए4ए9ए ण् ण् ण्ए100द्व 5ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों के सभी अवयवों ;सदस्योंद्ध को सूचीब( कीजिएः ;पद्ध । त्र क्ष्ग रू ग एक विषम प्रावृफत संख्या हैद्व 19;पपद्ध ठ त्र क्ष्ग रू ग एक पूणा±क है, −2 ढ ग ढ 2 द्व ;पपपद्ध ब् त्र क्ष्ग रू ग एक पूणा±क है, ग2 ≤ 4द्व ;पअद्ध क् त्र क्ष्ग रू गए स्व्ल्।स् शब्द का एक अक्षर हैद्व ;अद्ध म् त्र क्ष्ग रू ग वषर् का एक ऐसा महीना है, जिसमें 31 दिन नहीं होते हैंद्व ;अपद्ध थ् त्र क्ष्ग रू ग अंग्रेशी वणर्माला का एक व्यंजन है, जो ा से पहले आता हैद्व। 6ण् बाईं ओर रोस्टर रूप में लिख्िात और दाईं ओर समुच्चय निमार्ण रूप में वण्िार्त समुच्चयों का सही मिलान कीजिएः ;पद्ध क्ष्1ए 2ए 3ए 6द्व ;ंद्ध क्ष्ग रू ग एक अभाज्य संख्या है और 6 की भाजक हैद्व ;पपद्ध क्ष्2ए 3द्व ;इद्ध क्ष्ग रू ग संख्या 10 से कम एक विषम प्रावृफत संख्या हैद्व ;पपपद्ध क्ष्डए।एज्एभ्एम्एप्एब्एैद्व ;बद्ध क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 6 की भाजक हैद्व ;पअद्ध क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए 9द्व ;कद्ध क्ष्ग रू ग ड।ज्भ्म्ड।ज्प्ब्ै शब्द का एक अक्षर हैद्व। 1ण्3 रिक्त समुच्चय ;ज्ीम म्उचजल ैमजद्ध समुच्चय । त्र क्ष् ग रू ग किसी स्कूल की कक्षा ग्प् में अध्ययनरत एक विद्याथीर् है द्व हम उस स्कूल में जा कर कक्षा ग्प् में अध्ययनरत विद्याथ्िार्यों को गिन कर उनकी संख्या ज्ञात कर सकते हैं। अतः समुच्चय । के अवयवयों की संख्या सीमित है। अब नीचे लिखे समुच्चय ठ पर विचार कीजिएः ठ त्र क्ष् ग रू ग वतर्मान में कक्षा ग् तथा ग्प् दोनों में अध्ययनरत विद्याथीर् हैंद्व हम देखते हैं कि एक विद्याथीर् एक साथ दोनों कक्षाओं ग् तथा ग्प् में अध्ययन नहीं कर सकता है। अतः समुच्चय ठ में कोइर् भी अवयव नहीं है। परिभाषा 1 एक समुच्चय जिसमें एक भी अवयव नहीं होता है, रिक्त समुच्चय या शून्य समुच्चय कहलाता है। इस परिभाषा के अनुसार ठ एक रिक्त समुच्चय है जब कि । एक रिक्त समुच्चय नहीं है। रिक्त समुच्चय को प्रतीक φ अथवा क्ष् द्व से प्रदश्िार्त करते हैं। हम नीचे रिक्त समुच्चयों के कुछ उदाहरण दे रहे हैंः ;पद्ध मान लीजिए कि । त्र क्ष्ग रू 1 ढ ग ढ 2ए ग एक प्रावृफत संख्या हैद्वण्यहाँ । रिक्त समुच्चय है, क्योंकि 1 और 2 के मध्य कोइर् प्रावृफत संख्या नहीं होती है। ;पपद्ध ठ त्र क्ष्ग रू ग2 दृ 2 त्र 0 और ग एक परिमेय संख्या हैद्वण् यहाँ ठ रिक्त समुच्चय है, क्योंकि समीकरण ग2 दृ 2 त्र 0ए ग के किसी भी परिमेय मान से संतुष्ट नहीं होता है। ;पपपद्ध ब् त्र क्ष्ग रू ग संख्या 2 से अध्िक एक सम अभाज्य संख्या हैद्व तो ब् रिक्त समुच्चय है, क्योंकि केवल संख्या 2 ही सम अभाज्य संख्या है। ;पअद्ध क् त्र क्ष् ग रू ग2 त्र 4ए ग विषम हैद्वण् तो क् रिक्त समुच्चय है, क्योंकि समीकरण ग2 त्र 4ए ग के किसी विषम मान से संतुष्ट नहीं होता है। 1ण्4 परिमित और अपरिमित समुच्चय ;थ्पदपजम ंदक प्दपिदपजम ैमजेद्ध मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5द्वए ठ त्र क्ष्ंए इए बए कए मए हद्व तथा ब् त्र क्ष् इस समय विश्व के विभ्िान्न भागों में रहने वाले पुरुषद्व हम देखते हैं कि । में 5 अवयव हैं और ठ में 6 अवयव हैं। ब् में कितने अवयव हैं? जैसा कि स्पष्ट है कि ब् के अवयवों की संख्या हमें ज्ञात नहीं है, विंफतु यह एक प्रावृफत संख्या है, जो बहुत बड़ी हो सकती है। किसी समुच्चय ै के अवयवों की संख्या से हमारा अभ्िाप्राय समुच्चय के भ्िान्न अवयवों की संख्या से है और इसे हम प्रतीक द ;ैद्ध द्वारा प्रदश्िार्त करते हैं। यदि द ;ैद्ध एक प्रावृफत संख्या है, तो ै एक आरिक्त परिमित समुच्चय होता है। आइए प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय छ पर विचार करें। हम देखते हैं इस समुच्चय के अवयवों की संख्या सीमित नहीं है, क्योंकि प्रावृफत संख्याओं की संख्या असीमित होती है। इस प्रकार हम कहते हैं कि प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय एक अपरिमित समुच्चय होता है। उपयुर्क्त समुच्चय ।ए ठ तथा ब् परिमित समुच्चय हैं और द;।द्ध त्र 5ए द;ठद्ध त्र 5 और द;ब्द्ध त्र कोइर् सीमित संख्या। परिभाषा 2 एक समुच्चय, जो रिक्त है अथवा जिसके अवयवों की संख्या निश्िचत होती है, परिमित समुच्चय कहलाता है, अन्यथा समुच्चय अपरिमित समुच्चय कहलाता है। आइए कुछ उदाहरणों पर विचार करेंः ;पद्ध यदि ॅ सप्ताह के दिनों का समुच्चय है, तो ॅ परिमित है। ;पपद्ध मान लीजिए कि ैए समीकरण ग2 दृ16 त्र 0 के हलों का समुच्चय है, तो ै परिमित है। ;पपपद्ध मान लीजिए कि ळए किसी रेखा पर स्िथत सभी बिंदुओं का समुच्चय है, तो ळ अपरिमित है। जब हम किसी समुच्चय को रोस्टर रूप में निरूपित करते हैं, तो हम उस समुच्चय के सभी अवयवों को कोष्ठक क्ष् द्व के भीतर लिखते हैं। किसी अपरिमित समुच्चय के सभी अवयवों को कोष्ठक क्ष् द्व के भीतर लिखना संभव नहीं है, क्योंकि ऐसे समुच्चय के अवयवों की संख्या सीमित नहीं होती है। अतः हम किसी अपरिमित समुच्चय को रोस्टर रूप में प्रकट करने के लिए उसके कम से कम इतने अवयवों को लिखते है, जिससे उस समुच्चय की संरचना स्पष्ट हो सके और तदोपरांत तीन बिंदु लगाते हैं। उदाहरणाथर्ए क्ष्1ए 2ए 3 ण् ण् ण्द्व प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय हैए क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए ण् ण् ण्द्व विषम प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय है और क्ष्ण् ण् ण्एदृ3ए दृ2ए दृ1ए 0ए1ए 2 ए3ए ण् ण् ण्द्व पूणा±कों का समुच्चय है। ये सभी समुच्चय अपरिमित हैं। सभी अपरिमित समुच्चय का वणर्न रोस्टर रूप में नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के लिए वास्तविक संख्याओं के समुच्चय का वणर्न इस रूप में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इस समुच्चय के अवयवों का कोइर् विशेष पैटनर् ;प्रतिमानद्ध नहीं होता है। उदाहरण 6 बतलाइए कि निम्नलिख्िात समुच्चयों में कौन परिमित है और कौन अपरिमित हैः ;पद्ध क्ष्ग रू ग ∈ छ और ;ग दृ 1द्ध ;ग दृ2द्ध त्र 0द्व ;पपद्ध क्ष्ग रू ग ∈ छ और ग2 त्र 4द्व ;पपपद्ध क्ष्ग रू ग ∈ छ और 2ग दृ1 त्र 0द्व ;पअद्ध क्ष्ग रू ग ∈ छ और ग एक अभाज्य संख्या हैद्व ;अद्ध क्ष्ग रू ग ∈ छ और ग विषम हैद्व हल ;पद्ध प्रदत्त समुच्चय त्र क्ष्1ए 2द्वण् अतः यह परिमित है। ;पपद्ध प्रदत्त समुच्चय त्र क्ष्2द्वण् अतः यह परिमित है। ;पपपद्ध प्रदत्त समुच्चय त्र φण् अतः यह परिमित है। ;पअद्ध दिया हुआ समुच्चय सभी अभाज्य संख्याओं का समुच्चय है और क्योंकि अभाज्य संख्याओं का समुच्चय अनंत हैऋ अतः प्रदत्त समुच्चय अपरिमित है। ;अद्ध क्योंकि विषम प्रावृफत संख्याएँ अनंत हैं, अतः प्रदत्त समुच्चय अपरिमित है। 1ण्5 समान समुच्चय ;म्ुनंस ैमजेद्ध दो दिए गए समुच्चयों । और ठए में, यदि । का प्रत्येक अवयव ठ का भी अवयव है तथा ठ का प्रत्येक अवयव । का भी अवयव है, तो समुच्चय । और ठए समान कहलाते हैं। स्पष्टतया दोनों समुच्चयों में तथ्यतः समान अवयव होते हैं। परिभाषा 3 दो समुच्चय । और ठ समान कहलाते हैं, यदि उनमें तथ्यतः समान अवयव हों और हम लिखते हैं । त्र ठए अन्यथा समुच्चय असमान कहलाते हैं और हम लिखते हैं । ≠ ठण् आइए हम निम्नलिख्िात उदाहरणों पर विचार करेंः ;पद्ध मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्व औरठ त्र क्ष्3ए 1ए 4ए 2द्वण् तो । त्र ठण् ;पपद्ध मान लीजिए कि ।, 6 से कम अभाज्य संख्याओं तथा च्ए 30 के अभाज्य गुणनखंडों के समुच्चय हैं। स्पष्ट है कि समुच्चय । और च् समान हैं, क्योंकि केवल 2, 3 और 5 ही संख्या 30 के अभाज्य गुणनखंड हैं और 6 से कम भी हैं। उदाहरण 7 समान समुच्चयों के युग्म छाँटिए, यदि ऐसा कोइर् युग्म है, और कारण भी बतलाइएः । त्र क्ष्0द्वए ठ त्र क्ष्ग रू ग झ 15 और ग ढ 5द्वए ब् त्र क्ष्ग रू ग दृ 5 त्र 0 द्वए क् त्र क्ष्ग रू ग2 त्र 25द्वए म् त्र क्ष्ग रू ग समीकरण ग2 दृ 2ग दृ15 त्र 0 का एक ध्न पूणा±क मूल हैद्वण् हल यहाँ 0 ∈ । और 0 समुच्चयों ठए ब्ए क् और म्ए में से किसी में भी नहीं है, अतः । ≠ ठए । ≠ ब्ए । ≠ क्ए । ≠ म्ण् क्योंकि ठ त्र φ विंफतु और कोइर् समुच्चय रिक्त नहीं है। अतः ठ ≠ ब्ए ठ ≠ क् तथा ठ ≠ म्ण् ब् त्र क्ष्5द्व परंतु दृ5 ∈ क्ए इसलिए ब् ≠ क् यहाँ क्योंकि म् त्र क्ष्5द्वए ब् त्र म् ए क् त्र क्ष्दृ5ए 5द्व और म् त्र क्ष्5द्वए अतः क् ≠ म्ण् इस प्रकार समान समुच्चयों का युग्म केवल ब् तथा म् है। उदाहरण 8 निम्नलिख्िात समुच्चय युग्मों में से कौन से समान हैं? अपने उत्तर का औचित्य बताइए। ;पद्ध ग्ए शब्द श्।स्स्व्ल्श् के अक्षरों का समुच्चय तथा ठए शब्द श्स्व्ल्।स्श् के अक्षरों का समुच्चय। ;पपद्ध । त्र क्ष्द रू द ∈ र् तथा द2 ≤ 4द्व और ठ त्र क्ष्ग रू ग ∈ त् तथा ग2 दृ 3ग ़ 2 त्र 0द्वण् हल ;पद्ध यहाँ ग् त्र क्ष्।ए स्ए स्ए व्ए ल्द्वए ठ त्र क्ष्स्ए व्ए ल्ए।ए स्द्वण् अतः ग् और ठ समान समुच्चयहैं, क्योंकि किसी समुच्चय के अवयवों की पुनरावृिा से समुच्चय बदलता नहीं है। अतः ग् त्र क्ष्।ए स्ए व्ए ल्द्व त्र ठ ;पपद्ध । त्रक्ष्दृ2ए दृ1ए 0ए 1ए 2द्वए ठ त्र क्ष्1ए 2द्वण् क्योंकि 0 ∈ । और 0 ∉ ठए इसलिए । और ठ समान नहीं हैं। प्रश्नावली 1ण्2 1ण् निम्नलिख्िात में से कौन से रिक्त समुच्चय के उदाहरण हैं? ;पद्ध 2 से भाज्य विषम प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय। ;पपद्ध सम अभाज्य संख्याओं का समुच्चय। ;पपपद्ध क्ष् ग रू ग एक प्रावृफत संख्या हैए ग ढ 5 और साथ ही साथ ग झ 7 द्व ;पअद्ध क्ष् ल रू ल किन्हीं भी दो समांतर रेखाओं का उभयनिष्ठ बिंदु हैद्व 2ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों में से कौन परिमित और कौन अपरिमित हैं? ;पद्ध वषर् के महीनों का समुच्चय। ;पपद्ध क्ष्1ए 2ए 3ए ण् ण् ण्द्व ;पपपद्ध क्ष्1ए 2ए 3ए ण् ण् ण्99ए 100द्व ;पअद्ध 100 से बड़े ध्न पूणा±कों का समुच्चय। ;अद्ध 99 से छोटे अभाज्य पूणा±कों का समुच्चय। 3ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों में से प्रत्येक के लिए बताइए कि कौन परिमित है और कौन अपरिमित है? ;पद्ध ग.अक्ष के समांतर रेखाओं का समुच्चय। ;पपद्ध अंग्रेशी वणर्माला के अक्षरों का समुच्चय। ;पपपद्ध उन संख्याओं का समुच्चय जो 5 के गुणज हैं। ;पअद्ध पृथ्वी पर रहने वाले जानवरों का समुच्चय। ;अद्ध मूल बिंदु ;0,0द्ध से हो कर जाने वाले वृत्तों का समुच्चय। 4ण् निम्नलिख्िात में बतलाइए कि । त्र ठ है अथवा नहीं हैः ;पद्ध । त्र क्ष् ंए इए बए क द्व ठ त्र क्ष् कए बए इए ं द्व ;पपद्ध । त्र क्ष् 4ए 8ए12ए 16 द्व ठ त्र क्ष् 8ए 4ए 16ए 18द्व ;पपपद्ध । त्रक्ष्2ए 4ए 6ए 8ए 10द्व ठ त्र क्ष् ग रू ग सम ध्न पूणा±क है और ग ≤ 10द्व ;पअद्ध । त्र क्ष्ग रू ग संख्या 10 का एक गुणज हैद्वए ठ त्र क्ष् 10ए 15ए 20ए 25ए 30ए ण् ण् ण् द्व 5ण् क्या निम्नलिख्िात समुच्चय युग्म समान हैं? कारण सहित बताइए। ;पद्ध । त्र क्ष्2ए 3द्वए ठ त्र क्ष्ग रू ग समीकरण ग2 ़ 5ग ़ 6 त्र 0 का एक हल हैद्व ;पपद्ध । त्र क्ष् ग रू ग शब्द ष्थ्व्स्स्व्ॅष् का एक अक्षर हैद्व ठ त्र क्ष् ल रू ल शब्द ष्ॅव्स्थ्ष् का एक अक्षर हैद्व 6ण् नीचे दिए हुए समुच्चयों में से समान समुच्चयों का चयन कीजिएः । त्र क्ष् 2ए 4ए 8ए 12द्वए ठ त्र क्ष् 1ए 2ए 3ए 4द्वए ब् त्र क्ष् 4ए 8ए 12ए 14द्वए क् त्र क्ष् 3ए 1ए 4ए 2द्वए म् त्र क्ष्दृ1ए 1द्वए थ् त्र क्ष् 0ए ंद्वए ळ त्र क्ष्1ए दृ1द्वए भ् त्र क्ष् 0ए 1द्व 1ण्6 उपसमुच्चय ;ैनइेमजेद्ध नीचे दिए समुच्चयों पर विचार कीजिएः ग् त्र आपके विद्यालय के सभी विद्याथ्िार्यों का समुच्चय, ल् त्र आपकी कक्षा के सभी विद्याथ्िार्यों का समुच्चय। हम देखते हंै कि ल् का प्रत्येक अवयव, ग् का भी एक अवयव है, हम कहते हैं कि ल्ए ग् का एक उपसमुच्चय हैं ग् का एक उपसमुच्चय है, प्रतीकों में ग् ⊂ ल् द्वारा प्रकट करते हैं। प्रतीक ⊂ए कथन ‘एक उपसमुच्चय है’, अथवा ‘अंतविर्ष्ट है’ के लिए प्रयुक्त होता है। परिभाषा 4 यदि समुच्चय । का प्रत्येक अवयव, समुच्चय ठ का भी एक अवयव है, तो ।, ठ का उपसमुच्चय कहलाता है। दूसरे शब्दों में, । ⊂ ठ, यदि जब कभी ं ∈ ।ए तो ं ∈ ठण् बहुध प्रतीक ‘⇒’, जिसका अथर् ‘तात्पयर् है’ होता है, का प्रयोग सुविधजनक होता है। इस प्रतीक का प्रयोग कर के, हम उपसमुच्चय की परिभाषा इस प्रकार लिख सकते हैंः । ⊂ ठए यदि ं ∈ । ⇒ ं ∈ ठ हम उपयुर्क्त कथन को इस प्रकार पढ़ते हैं, श्।ए ठ का एक उपसमुच्चय है, यदि इस तथ्य का, कि ंए । का एक अवयव है तात्पयर् है कि ंए ठ का भी एक अवयव है’’। यदि ।ए ठ का एक उपसमुच्चय नहीं है, तो हम लिखते हैं कि । ⊄ ठ । हमें ध्यान देना चाहिए कि । को ठए का समुच्चय होने के लिए केवल मात्रा यह आवश्यक है कि । का प्रत्येक अवयव ठ में है। यह संभव है कि ठ का प्रत्येक अवयव । में हो या न हो। यदि ऐसा होता है कि ठ का प्रत्येक अवयव । में भी है, तो ठ ⊂ ।ण् इस दशा में, । और ठ समान समुच्चय हैं और इस प्रकार । ⊂ ठ और ठ ⊂ । ⇔ । त्र ठए जहाँ ‘⇔’ द्विध तात्पयर् ;जूव ूंल पउचसपबंजपवदेद्ध के लिए प्रतीक है और जिसे प्रायः ‘यदि और केवल यदि’ पढ़ते हैं तथा संक्षेप में ष्पिि लिखते हैं। परिभाषा से निष्कषर् निकलता है कि प्रत्येक समुच्चय स्वयम् का उपसमुच्चय है, अथार्त् । ⊂ । । चूँकि रिक्त समुच्चय φ में कोइर् अवयव नहीं होता है अतः हम इस बात से सहमत हैं कि φ प्रत्येक समुच्चय का एक उपसमुच्चय है। अब हम कुछ उदाहरणों पर विचार करते हैंः ;पद्ध परिमेय संख्याओं का समुच्चय फए वास्तविक संख्याओं के समुच्चय त् का एक उपसमुच्चय है और हम लिखते हैं कि फ ⊂ त्ण् ;पपद्ध यदि ।ए संख्या 56 के सभी भाजकों का समुच्चय है और ठए संख्या 56 के सभी अभाज्य भाजकों का समुच्चय है, तो ठए । का एक उपसमुच्चय है और हम लिखते हैं कि ठ ⊂ ।ण् ;पपपद्ध मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 3ए 5द्व और ठ त्र क्ष्ग रू ग संख्या 6 से कम एक विषम प्रावृफत संख्या हैद्व तो । ⊂ ठ तथा ठ ⊂ ।ए अतः । त्र ठ ;पअद्ध मान लीजिए कि । त्र क्ष् ंए मए पए वए नद्व और ठ त्र क्ष् ंए इए बए कद्वण् तो ।ए ठ का एक उपसमुच्चय नहीं है तथा ठ भी । का उपसमुच्चय नहीं है। मान लीजिए कि । और ठ दो समुच्चय हैं। यदि । ⊂ ठ तथा । ≠ ठ ए तो ।ए ठ का उचित उपसमुच्चय कहलाता हैऔर ठए । का अध्िसमुच्चय कहलाता है। उदाहरणाथर्,μ । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्वए ठ त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्व का एक उचित उपसमुच्चय है। यदि समुच्चय । में केवल एक अवयव हो, तो हम इसे एक एकल समुच्चय कहते हैं। अतः क्ष् ं द्व एक एकल समुच्चय है। उदाहरण 9 नीचे लिखे समुच्चयों पर विचार कीजिएः φए । त्र क्ष् 1ए 3 द्वए ठ त्र क्ष्1ए 5ए 9द्वए ब् त्र क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए 9द्वण् प्रत्येक समुच्चय युग्म के बीच सही प्रतीक ⊂ अथवा ⊄ भरिएऋ ;पद्ध φ ण् ण् ण् ठ ;पपद्ध । ण् ण् ण् ठ ;पपपद्ध । ण् ण् ण् ब् ;पअद्ध ठ ण् ण् ण् ब् हल ;पद्ध φ⊂ ठए क्योंकि φ प्रत्येक समुच्चय का उपसमुच्चय होता है। ;पपद्ध । ⊄ ठ क्योंकि 3 ∈ । और 3 ∉ ठ ;पपपद्ध । ⊂ ब् क्योंकि 1ए 3 ∈ । तथा 1ए 3 ∈ ब् ;पअद्ध ठ ⊂ ब् क्योंकि ठ का प्रत्येक अवयव ब् में भी है। उदाहरण 10 मान लीजिए । त्र क्ष् ंए मए पए वए नद्वए ठ त्र क्ष् ंए इए बए कद्वण् क्या ।ए ठ का एक उपसमुच्चय है? नहीं ;क्यों?द्ध। क्या ।ए ठ का उप समुच्चय हैं? नहीं ;क्यों?द्ध उदाहरण 11 मान लीजिए ।ए ठ और ब् तीन समुच्चय हैं। यदि । ∈ ठ तथा ठ ⊂ ब्ए तो क्या यह सत्य है कि । ⊂ ब्घ् यदि नहीं तो एक उदाहरण दीजिए। हल मान लीजिए कि । त्र क्ष्1द्वए ठ त्र क्ष्क्ष्1द्वए 2द्व और ब् त्र क्ष्क्ष्1द्वए 2ए 3द्व स्पष्टतया यहाँ । ∈ ठ क्योंकि । त्र क्ष्1द्ध तथा ठ ⊂ ब् सत्य है। परंतु । ⊄ ब् क्योंकि 1 ∈ । और 1 ∉ ब्ण् नोट कीजिए कि किसी समुच्चय का एक अवयव उस समुच्चय का उपसमुच्चय नहीं हो सकता है। 1ण्6ण्1 वास्तविक संख्याओं के समुच्चय के उपसमुच्चय जैसा कि अनुच्छेद 1.6 से स्पष्ट होता है कि समुच्चय त् के बहुत से महत्वपूणर् उपसमुच्चय हैं। इनमें श्फ उन सभी संख्याओं ग का समुच्चय इस प्रकार है, कि ग भागपफल ए के बराबर है, जहाँ च और से वुफछ के नाम हम नीचे दे रहे हैंः प्रावृफत सख्याओं का समुच्चय छ त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए ण् ण् ण्द्व पूणा±कों का समुच्चय र् त्र क्ष्ण् ण् ण्ए दृ3ए दृ2ए दृ1ए 0ए 1ए 2ए 3ए ण् ण् ण्द्व परिमेय संख्याओं का समुच्चय फ त्र क्ष् ग रू ग त्र च ए चए ु ∈ र् तथा ु ≠ 0द्व, जिनको इसु प्रकार पढ़ते हैंः च ु ु पूणा±क है और ु शून्य नहीं है।’’ फ के अवयवों में दृ5 ;जिसे दृ15 से भी प्रदश्िार्त किया जा सकता 517 11हैद्ध ए7ए3 ;जिसे से भी प्रदश्िार्त किया जा सकता हैद्ध और दृ आदि सम्िमलित हैं।22 3 अपरिमेय संख्याओं का समुच्चय, जिसे ज्ए से निरूपित करते हैं, शेष अन्य वास्तविक संख्याओं ;परिमेय संख्याओं को छोड़करद्ध से मिलकर बनता है। अतः ज् त्र क्ष्ग रू ग ∈ त् औरग ∉ फद्व त्र त् दृ फ अथार्त् वह सभी वास्तविक संख्याएँ जो परिमेय नहीं है। ज् के सदस्यों में और π आदि सम्िमलित हैं। इन समुच्चयों के मध्य कुछ स्पष्ट संबंध् इस प्रकार हैंऋ छ ⊂ र् ⊂ फए फ ⊂ त्ए ज् ⊂ त्ए छ ⊄ ज्ण् 1ण्6ण्2 अंतराल त् के उपसमुच्चय के रूप में ;प्दजमतअंस ंे ेनइेमजे व ित्द्ध मान लीजिए कि ंए इ ∈ त् और ं ढ इण् तब वास्तविक संख्याओं का समुच्चय क्ष् ल रू ं ढ ल ढ इद्व एक विवृत अंतराल कहलाता है और प्रतीक ;ंए इद्ध द्वारा निरूपित होता है। ं और इ के बीच स्िथत सभी बिंदु इस अंतराल में होते हैं परंतु ं और इ स्वयं इस अंतराल में नहीं होते हैं। वह अंतराल जिसमें अंत्य बिंदु भी होते हैं, संवृत ;बंदद्ध अंतराल कहलाता है और प्रतीक ख् ंए इ , द्वारा निरूपित होता है। अतः ख् ंए इ , त्र क्ष्ग रू ं ≤ ग ≤ इद्व ऐसे अंतराल भी हैं जो एक अंत्य बिंदु पर बंद और दूसरे पर खुले होते हैं ख् ंए इ द्ध त्र क्ष्ग रू ं ≤ ग ढ इद्वए ं से इए तक एक खुला अंतराल है, जिसमें ं अंतविर्ष्ट है विंफतु इ अपवजिर्त है। ; ंए इ , त्र क्ष् ग रू ं ढ ग ≤ इ द्व ं से इए तक एक खुला अंतराल है, जिसमें इ सम्िमलित है विंफतु ं अपवजिर्त है। इन संकेतों द्वारा वास्तविक संख्याओं के समुच्चय के उपसमुच्चयों के उल्लेख करने की एक वैकल्िपक विध्ि मिलती है। उदाहरण के लिए, यदि । त्र ;दृ3ए 5द्ध और ठ त्र ख्दृ7ए 9,ए तो । ⊂ ठण् समुच्चय ख् 0ए ∞द्ध )णेतर वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को दशार्ता है, जबकि ; दृ ∞ए 0 द्ध )ण वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को दशार्ता है। ; दृ ∞ए ∞ द्धए दृ ∞ से ∞ तक विस्तृत रेखा से संबंध्ित वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को प्रदश्िार्त करता है। वास्तविक रेखा पर त् के उपसमुच्चयों के रूप में वण्िार्त उपयुर्क्त अंतरालों को आवृफति 1ण्1 में दशार्या गया हैः आवृफति 1ण्1 यहाँ हम ध्यान देते हैं कि एक अंतराल में असंख्य असीम मात्रा में अनेक बिंदु होते हैं। उदाहरणाथर्, समुच्चय समुच्चय क्ष्ग रू ग ∈ त् रू दृ5 ढ ग ≤ 7द्व को अंतराल ;दृ5ए 7, रूप में लिख सकते हैं तथा अंतराल ख्दृ3ए 5द्ध को समुच्चय निमार्ण रूप में क्ष्ग रू दृ3 ≤ ग ढ 5द्व द्वारा लिख सकते हैं। संख्या ;इ दृ ंद्ध को अंतराल ;ंए इद्धए ख्ंए इ,ए ख्ंए इद्ध तथा ;ंए इ, में से किसी की भी लंबाइर् कहते हैं। 1ण्7 घात समुच्चय ;च्वूमत ैमजद्ध समुच्चय क्ष्1ए 2द्व पर विचार कीजिए। समुच्चय क्ष्1ए 2द्व के सभी उपसमुच्चयों को लिख्िाए। हमें ज्ञात है कि φ सभी समुच्चयों का उपसमुच्चय होता है। इसलिए φए समुच्चय क्ष्1ए 2द्व का एक उपसमुच्चय है। हम देखते हैं कि क्ष्1द्व और क्ष् 2 द्व भी समुच्चय क्ष्1ए 2द्वके उपसमुच्चय हैं। हमें यह भी ज्ञात है कि प्रत्येक समुच्चय स्वयं का उपसमुच्चय होता है। इसलिए क्ष् 1ए 2 द्व भी समुच्चय क्ष्1ए 2द्व का एक उपसमुच्चय है। अतः समुच्चय क्ष् 1ए 2 द्व के कुल मिला कर चार उपसमुच्चय हैं, नामतः φए क्ष् 1 द्वए क्ष् 2 द्व और क्ष् 1ए 2 द्व. इन सभी उपसमुच्चयों के समुच्चय को समुच्चय क्ष् 1ए 2 द्व का घात समुच्चय कहते हैं। परिभाषा 5 समुच्चय । के उपसमुच्चयों के संग्रह को । का घात समुच्चय कहते हैं। इसे च्;।द्ध से निरूपित करते है। च्;।द्ध का प्रत्येक अवयव एक समुच्चय होता है। अतः उपयुर्क्त विवरण में, यदि । त्र क्ष् 1ए 2 द्वए तो च्; । द्ध त्र क्ष् φएक्ष् 1 द्वए क्ष् 2 द्वए क्ष् 1ए2 द्वद्व यह भी नोट कीजिए कि द ख् च् ;।द्ध , त्र 4 त्र 22 व्यापकरूप से, यदि । एक ऐसा समुच्चय है कि द;।द्ध त्र उए तो यह सि( किया जा सकता है कि द ख् च्;।द्ध, त्र 2उण् 1ण्8 सावर्त्रिाक समुच्चय ;न्दपअमतेंस ैमजद्ध सामान्यतः किसी विशेष संदभर् में हमें एक आधरभूत समुच्चय के अवयवों और उपसमुच्चयों पर विचार करना पड़ता है, जो कि उस विशेष संदभर् में प्रासंगिक होते हैं। उदाहरण के लिए, संख्या - प्रणाली का अध्ययन करते समय हमें प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय और उसके उपसमुच्चयों में रुचि होती है, जैसे अभाज्य संख्याओं का समुच्चय, सम संख्याओं का समुच्चय इत्यादि। यह आधरभूत समुच्चय ‘सावर्त्रिाक समुच्चय’ कहलाता है। सावर्त्रिाक समुच्चय को सामान्यतः प्रतीक न् से निरूपित करते हैं और इसके उपसमुच्चयों को अक्षर ।ए ठए ब्ए आदि द्वारा। उदाहरणाथर्, पूणा±कों के समुच्चय र् के लिए, परिमेय संख्याओं का समुच्चय फ, एक सावर्त्रिाक समुच्चय हो सकता है, या वास्तविक संख्याओं का समुच्चय त् भी एक सावर्त्रिाक समुच्चय हो सकता है। एक अन्य उदाहरण में मानव जनसंख्या अध्ययन के लिए विश्व के समस्त मानव का समुच्चय, सावर्त्रिाक समुच्चय होगा। प्रश्नावली 1ण्3 1ण् रिक्त स्थानों में प्रतीक ⊂ या ⊄ को भर कर सही कथन बनाइएः ;पद्ध क्ष् 2ए 3ए 4 द्व ण् ण् ण् क्ष् 1ए 2ए 3ए 4ए5 द्व ;पपद्ध क्ष् ंए इए ब द्व ण् ण् ण् क्ष् इए बए क द्व ;पपपद्ध क्ष्ग रू ग आपके विद्यालय की कक्षा ग्प् का एक विद्याथीर् हैद्वण् ण् ण्क्ष्ग रू ग आपके विद्यालय का एक विद्याथीर् हैद्व ;पअद्ध क्ष्ग रू ग किसी समतल में स्िथत एक वृत्त हैद्व ण् ण् ण्क्ष्ग रू ग एक समान समतल में वृत्त है जिसकी त्रिाज्या 1 इकाइर् है।द्व ;अद्ध क्ष्ग रू ग किसी समतल में स्िथत एक त्रिाभुज हैद्व ण् ण् ण् क्ष्ग रू ग किसी समतल में स्िथत एक आयत हैद्व ;अपद्ध क्ष्ग रू ग किसी समतल में स्िथत एक समबाहु त्रिाभुज हैद्व ण् ण् ण् क्ष्ग रू ग किसी समतल में स्िथत एक त्रिाभुज हैद्व ;अपपद्ध क्ष्ग रू ग एक सम प्रावृफत संख्या हैद्व ण् ण् ण् क्ष्ग रू ग एक पूणा±क हैद्व 2ण् जाँचिए कि निम्नलिख्िात कथन सत्य हैं अथवा असत्य हैंः ;पद्ध क्ष् ंए इ द्व ⊄ क्ष् इए बए ं द्व ;पपद्ध क्ष् ंए म द्व ⊂ क्ष् ग रू ग अंग्रेशी वणर्माला का एक स्वर हैद्व ;पपपद्ध क्ष् 1ए 2ए 3 द्व ⊂ क्ष्1ए 3ए 5 द्व ;पअद्ध क्ष् ं द्व ⊂ क्ष् ंए इए ब द्व ;अद्ध क्ष् ं द्व ∈ क्ष् ंए इए ब द्व ;अपद्ध क्ष् ग रू ग संख्या 6 से कम एक सम प्रावृफत संख्या हैद्व ⊂ क्ष् ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है, जो संख्या 36 को विभाजित करती हैद्व 3ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष् 1ए 2ए क्ष् 3ए 4 द्वए 5 द्व । निम्नलिख्िात में से कौन सा कथन सही नहीं है और क्यों? ;पद्ध क्ष्3ए 4द्व ⊂ । ;पपद्ध क्ष्3ए 4द्व ∈। ;पपपद्ध क्ष्क्ष्3ए 4द्वद्व ⊂ । ;पअद्ध 1 ∈ । ;अद्ध 1 ⊂ ।;अपद्ध क्ष्1ए 2ए 5द्व ⊂ । ;अपपद्ध क्ष्1ए 2ए 5द्व ∈। ;अपपपद्ध क्ष्1ए 2ए 3द्व ⊂ । ;पगद्ध φ∈ । ;गद्ध φ⊂ । ;गपद्ध क्ष्φद्व ⊂ । 4ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों के सभी उपसमुच्चय लिख्िाएः ;पद्ध क्ष्ंद्व ;पपद्ध क्ष्ंए इद्व ;पपपद्ध क्ष्1ए 2ए 3द्व ;पअद्ध φ 5ण् च्;।द्ध के कितने अवयव हैं, यदि । त्र φघ् 6ण् निम्नलिख्िात को अंतराल रूप में लिख्िाएः ;पद्ध क्ष्ग रू ग ∈ त्ए दृ 4 ढ ग ≤ 6द्व ;पपद्ध क्ष्ग रू ग ∈ त्ए दृ 12 ढ ग ढ दृ10द्व ;पपपद्ध क्ष्ग रू ग ∈ त्ए 0 ≤ ग ढ 7द्व ;पअद्ध क्ष्ग रू ग ∈ त्ए 3 ≤ ग ≤ 4द्व 7ण् निम्नलिख्िात अंतरालों को समुच्चय निमार्ण रूप में लिख्िाएः ;पद्ध ;दृ 3ए 0द्ध ;पपद्ध ख्6 ए 12, ;पपपद्ध ;6ए 12, ;पअद्ध ख्दृ23ए 5द्ध 8ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक के लिए आप कौन - सा सावर्त्रिाक समुच्चय प्रस्तावित करेंगे? ;पद्ध समकोण त्रिाभुजों का समुच्चय। ;पपद्ध समद्विबाहु त्रिाभुजों का समुच्चय। 9ण् समुच्चय । त्र क्ष्1ए 3ए 5द्वए ठ त्र क्ष्2ए 4ए 6द्व और ब् त्र क्ष्0ए 2ए 4ए 6ए 8द्व प्रदत्त हैं। इन तीनों समुच्चय ।ए ठ और ब् के लिए निम्नलिख्िात में से कौन सा ;सेद्ध सावर्त्रिाक समुच्चय लिए जा सकते हैं? ;पद्ध क्ष्0ए 1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्व ;पपद्ध φ ;पपपद्ध क्ष्0ए1ए2ए3ए4ए5ए6ए7ए8ए9ए10द्व ;पअद्ध क्ष्1ए2ए3ए4ए5ए6ए7ए8द्व 1ण्9 वेन आरेख ;टमदद क्पंहतंउेद्ध समुच्चयों के बीच अध्िकांश संबंधें को आरेखों द्वारा निरूपित किया जा सकता है जिन्हें वेन आरेख कहते हैं। वेन आरेख का नाम अंग्रेज तवर्फशास्त्राी श्रवीद टमदद ;1834 इर्॰μ 1883 इर्॰द्ध के नाम पर रखागया है। इन आरेखों में आयत और बंद वक्र सामान्यतः वृत्त होते हैं। किसी सावर्त्रिाक समुच्चय को प्रायःएक आयत द्वारा और उसके उपसमुच्चयों को एक वृत्त द्वारा प्रदश्िार्त करते हैं। किसी वेन आरेख में समुच्चयों के अवयवों को उनके विशेष समुच्चय में लिखा जाता है जैसे आवृफति 1.2 और 1.3 में दृष्टांत 1 आवृफति 1ण्2 मेंए न् त्र क्ष्1ए2ए3ए ण्ण्ण्ए 10द्व एक सावर्त्रिाक समुच्चय है और । त्र क्ष्2ए4ए6ए8ए10द्व उसका एक उपसमुच्चय है, दृष्टांत 2 आवृफति 1ण्3 मेंए न् त्र क्ष्1ए2ए3ए ण्ण्ण्ए 10द्व एक सावर्त्रिाक समुच्चय है, जिसके । त्र क्ष्2ए4ए6ए8ए10द्व और ठ त्र क्ष्4ए 6द्व उपसमुच्चय हैं और ठ ⊂ ।ण् पाठक वेन आरेखों का विस्तृत प्रयोग देखेंगे जब हम समुच्चयों के सम्िमलन, सवर्निष्ठ और अंतर पर विचार करेंगे। 1ण्10 समुच्चयों पर संियाएँ ;व्चमतंजपवदे वद ैमजेद्ध पिछली कक्षाओं में हम सीख चुके हैं कि संख्याओं पर योग, अंतर, गुणा और भाग की संियाएँ किस प्रकार संपन्न की जाती हैं। इनमें से प्रत्येक संिया को दो संख्याओं पर संपन्न किया गया था, जिससे एक अन्य संख्या प्राप्त हुइर् थी। उदाहरण के लिए दो संख्याओं 5 और 13 पर योग की संिया संपन्न करने से हमें संख्या 18 प्राप्त होती है। पुनः संख्याओं 5 और 13 पर गुणा की संिया संपन्न करने पर हमें संख्या 65 प्राप्त होती है। इसी प्रकार, कुछ ऐसी संियाएँ है, जिनको दो समुच्चयों पर संपन्न करने से, एक अन्य समुच्चय बन जाता है। अब हम समुच्चयों पर होने वाली कुछ संियाओं को परिभाष्िात करेंगे और उनके गुणध्मो± की जाँच करेंगे। यहाँ से आगे हम समुच्चयों का उल्लेख किसी सावर्त्रिाक समुच्चय के उपसमुच्चयों के रूप में करेंगे। 1ण्10ण्1 समुच्चयों का सम्िमलन ;न्दपवद व िेमजेद्ध मान लीजिए कि । और ठ कोइर् दो समुच्चय हैं। । और ठ का सम्िमलन वह समुच्चय है जिसमें । के सभी अवयवों के साथ ठ के भी सभी अवयव हों, तथा उभयनिष्ठ अवयवों को केवल एक बार लिया गया हो। प्रतीक ष्∪ष् का प्रयोग सम्िमलन को निरूपित करने के लिए किया जाता है। प्रतीकात्मक रूप में हम । ∪ ठ लिखते हैं और इसे ष्। सम्िमलन ठष् पढ़ते हैं। उदाहरण 12 मान लीजिए कि । त्र क्ष्2ए 4ए 6ए 8द्व और ठ त्र क्ष् 6ए 8ए 10ए 12द्व.। ∪ ठ ज्ञात कीजिए। हल हम देखते हैं कि । ∪ ठ त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8ए 10ए 12द्व नोट कीजिए कि । ∪ ठ लिखते समय उभयनिष्ठ अवयव 6 और 8 को केवल एक बार लिखते हैं। उदाहरण 13 मान लीजिए कि । त्र क्ष् ंए मए पए वए न द्व और ठ त्र क्ष् ंए पए न द्वण् दशार्इए कि । ∪ ठ त्र ।ण् हल स्पष्टतया । ∪ ठ त्र क्ष् ंए मए पए वए न द्व त्र ।ण् इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि किसी समुच्चय । और उसके उपसमुच्चय ठ का सम्िमलन समुच्चय । स्वयं होता है, अथार्त् यदि ठ ⊂ ।ए तो । ∪ ठ त्र ।ण् उदाहरण 14 मान लीजिए कि ग् त्र क्ष्राम, गीता, अकबरद्व कक्षा ग्प् के विद्याथ्िार्यों का जो विद्यालय की हाकी टीम में हैं, एक समुच्चय है। मान लीजिए कि ल् त्र क्ष्गीता, डेविड, अशोकद्व कक्षा ग्प् के विद्याथ्िार्यों का, जो विद्यालय की पफुटबाल टीम में हैं, एक समुच्चय है। ग् ∪ ल् ज्ञात कीजिए और इस समुच्चय की व्याख्या कीजिए। हल यहाँ ग् ∪ ल् त्र क्ष्राम, गीता, अकबर, डेविड, अशोकद्वण् यह कक्षा ग्प् के उन विद्याथ्िार्यों का समुच्चय है, जो या तो विद्यालय की हाकी टीम में हैं या पफुटबाल टीम में हैं या दोनों टीमों में हैं। अतः हम दो समुच्चयों के सम्िमलन की परिभाषा इस प्रकार कर सकते हैंः परिभाषा 6 दो समुच्चयों । और ठ का सम्िमलन समुच्चय, वह समुच्चय है जिसमें वे सभी अवयव हैं, जो या तो । में हैं या ठ में हैं ;उन अवयवों को सम्िमलित करते हुए जो दोनों में हैंद्ध। प्रतीकात्मक रूप में हम लिखते हैं कि । ∪ ठ त्र क्ष् ग रू ग ∈। या ग ∈ठ द्व है। दो समुच्चयों के सम्िमलन को आवृफति 1.4 में दिखाए गए वेन आरेख से प्रदश्िार्त किया जा सकता है। आवृफति 1.4 में छायांकित भाग । ∪ ठ को प्रदश्िार्त करता है। आवृफति 1ण्4 सम्िमलन की संिया के कुछ गुणध्मर्ः ;पद्ध । ∪ ठ त्र ठ ∪ ।;क्रम विनिमय नियमद्ध ;पपद्ध ; । ∪ ठ द्ध ∪ ब् त्र । ∪ ; ठ ∪ ब्द्ध ;साहचयर् नियमद्ध ;पपपद्ध । ∪φ त्र । ;तत्समक नियम, φ संिया ∪ का तत्समक अवयव हैद्ध ;पअद्ध । ∪ । त्र। ;वगर्सम नियमद्ध ;अद्ध न् ∪ । त्र न् ;न् का नियमद्ध 1ण्10ण्2 समुच्चयों का सवर्निष्ठ ;प्दजमतेमबजपवद व िेमजेद्ध समुच्चय । और ठ का सवर्निष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो । और ठ दोनों में उभयनिष्ठ है। प्रतीक ष्∩ष् का प्रयोग सवर्निष्ठ को निरूपित करने के लिए किया जाता है। समुच्चय । और ठ का सवर्निष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो । और ठ दोनों में हों। प्रतीकात्मक रूप में हम लिखते हैं कि । ∩ ठ त्र क्ष्ग रू ग ∈ । और ग ∈ ठद्व उदाहरण 15 उदाहरण 12 के समुच्चय । और ठ पर विचार कीजिए। । ∩ ठ ज्ञात कीजिए। हल हम देखते हैं कि केवल 6 और 8 ही ऐसे अवयव हैं जो । और ठ दोनों में उभयनिष्ठ हैं। अतः । ∩ ठ त्र क्ष् 6ए 8 द्व उदाहरण 16 उदाहरण 14 के समुच्चय ग् और ल् पर विचार कीजिए। ग् ∩ ल् ज्ञात कीजिए। हल हम देखते हैं केवल ‘गीता’ ही एक मात्रा ऐसा अवयव है, जो दोनों में उभयनिष्ठ है। अतः ग् ∩ ल् त्र क्ष्गीताद्व उदाहरण 17 मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6ए 7ए 8ए 9ए 10द्व और ठ त्र क्ष् 2ए 3ए 5ए 7 द्व । ∩ ठ ज्ञात कीजिए और इस प्रकार दिखाइए कि । ∩ ठ त्र ठण् हल हम देखते हैं कि । ∩ ठ त्र क्ष् 2ए 3ए 5ए 7 द्व त्र ठ हम ध्यान देते हैं कि ठ ⊂ । और । ∩ ठ त्र ठ परिभाषा 7 समुच्चय । और ठ का सवर्निष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो । और ठ दोनों में हो। प्रतीकात्मक रूप में, हम लिखते हैं कि । ∩ ठ त्र क्ष्ग रू ग ∈ । और ग ∈ ठद्व आवृफति 1.5 में छायांकित भाग, । और ठ के सवर्निष्ठ को प्रदश्िार्त करता है। यदि । और ठ ऐसे दो समुच्चय हों कि । ∩ ठ त्र φए तो । और ठ असंयुक्त समुच्चय कहलाते हैं। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि । त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8 द्व और आवृफति1ण्5 ठ त्र क्ष् 1ए 3ए 5ए 7 द्व, तो । और ठ असंयुक्त समुच्चय हैं, क्योंकि । और ठ में कोइर् भी अवयव उभयनिष्ठ नहीं है। असंयुक्त समुच्चयों को वेन आरेख द्वारा निरूपित किया जा सकता है, जैसा आवृफति 1.6 में प्रदश्िार्त है। उपयुर्क्त आरेख में । और ठ असंयुक्त समुच्चय हैं। सवर्निष्ठ संिय के कुछ गुणध्मर्;पद्ध । ∩ ठ त्र ठ ∩ । ;पपद्ध ; । ∩ ठ द्ध ∩ ब् त्र । ∩ ; ठ ∩ ब् द्ध ;साहचयर् नियमद्ध ;पपपद्ध φ∩ । त्र φए न् ∩ । त्र। ;φ और न् के नियमद्ध। ;पअद्ध । ∩ । त्र । ;वगर्सम नियमद्ध;अद्ध । ∩ ;ठ ∪ ब्द्ध त्र ; । ∩ ठ द्ध ∪ ; । ∩ ब् द्ध ;वितरण या बंटन नियमद्ध अथार्त् ∩ वितरित होता है ∪ पर। नीचे बने वेन आरेखों ख्आवृफतियों 1.7 ;पद्ध - ;अद्ध, द्वारा इस बात को सरलता से देख सकते हैं। ;पद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध;पपद्ध ;अद्ध थ्पहेण् 1ण्7 ;पद्ध जव ;अद्ध 1ण्10ण्3 समुच्चयों का अंतर ;क्पमिितमदबम व िेमजेद्ध समुच्चयों । और ठ का अंतर उन अवयवों का समुच्चय है जो । में हैं विंफतु ठ में नहीं हैं, जब कि । और ठ को इसी क्रम में लिया जाए। प्रतीतात्मक रूप में इसे ।दृठ लिखते हैं और श् । अंतर ठश् पढ़ते हैं। उदाहरण 18 मान लीजिए कि । त्र क्ष् 1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्वए ठ त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8 द्व । दृ ठ और ठ दृ । ज्ञात कीजिए । हल हम प्राप्त करते हैं किए । दृ ठ त्र क्ष् 1ए 3ए 5 द्वए क्योंकि अवयव 1ए 3ए 5 समुच्चय । में हैंविंफतु ठ में नहीं हैं तथा ठ दृ । त्र क्ष् 8 द्वए क्योंकि अवयव 8, ठ में है विंफतु । में नहीं है। हम देखते हैं कि । दृ ठ ≠ ठ दृ । उदाहरण 19 मान लीजिए कि ट त्र क्ष् ंए मए पए वए न द्व तो ठ त्र क्ष् ंए पए ाए नद्व, तो ट दृ ठ और ठ दृ ट ज्ञात कीजिए। हल यहाँए ट दृ ठ त्र क्ष् मए व द्वए क्योंकि अवयव मए व समुच्चय ट में हैं विंफतु ठ में नहीं है तथा ठ दृ ट त्र क्ष् ा द्वए क्योंकि अवयव ा समुच्चय ठ में है परंतु ट में नहीं है। हम नोट करते हैं कि ट दृ ठ ≠ ठ दृ ट समुच्चय निमार्ण संकेतन का प्रयोग करते हुए हम समुच्चयों के अंतर की परिभाषा को पुनः इस प्रकार लिख सकते हैंः । दृ ठ त्र क्ष् ग रू ग ∈ । और ग ∉ ठ द्व आवृफति 1ण्8दो समुच्चयों । और ठ के अंतर को वेन आरेख द्वारा दशार्या जा सकता है जैसा कि आवृफति 1.8 में प्रदश्िार्त है। छायांकित भाग दो समुच्चय । और ठ के अंतर को दशार्ता है। टिप्पणी समुच्चय । दृ ठए । ∩ ठ और ठ दृ । परस्पर असंयुक्त होते हैं अथार्त् इनमें से किसी दो समुच्चयों का सवर्निष्ठ समुच्चय एक रिक्त समुच्चय होता है जैसा कि आवृफति 1.9 में प्रदश्िार्त है। आवृफति1ण्9 प्रश्नावली 1ण्4 1ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक समुच्चय युग्म का सम्िमलन ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ग् त्र क्ष्1ए 3ए 5द्वए ल् त्र क्ष्1ए 2ए 3द्व ;पपद्ध । त्र ख् ंए मए पए वए नद्वए ठ त्र क्ष्ंए इए बद्व ;पपपद्ध । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 3 का गुणज हैद्व ठ त्र क्ष्ग रू ग संख्या 6 से कम एक प्रावृफत संख्या हैद्व ;पअद्ध । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 1 ढ ग ≤ 6 द्व ठ त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 6 ढ ग ढ 10 द्व ;अद्ध । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्वए ठ त्र φ 2ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष् ंए इ द्वए ठ त्र क्ष्ंए इए बद्वण् क्या । ⊂ ठ घ् । ∪ ठ ज्ञात कीजिए। 3ण् यदि । और ठ दो ऐसे समुच्चय हैं कि । ⊂ ठए तो । ∪ ठ क्या है घ् 4ण् यदि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्वए ठ त्र क्ष्3ए 4ए 5ए 6द्वए ब् त्र क्ष्5ए 6ए 7ए 8 द्व और क् त्र क्ष् 7ए 8ए 9ए 10द्वए तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । ∪ ठ ;पपद्ध । ∪ ब् ;पपपद्ध ठ ∪ ब् ;पअद्ध ठ ∪ क् ;अद्ध । ∪ ठ ∪ ब् ;अपद्ध । ∪ ठ ∪ क् ;अपपद्ध ठ ∪ ब् ∪ क् 5ण् प्रश्न 1 में दिए प्रत्येक समुच्चय युग्म का सवर्निष्ठ समुच्चय ज्ञात कीजिए। 6ण् यदि । त्र क्ष् 3ए 5ए 7ए 9ए 11 द्वए ठ त्र क्ष्7ए 9ए 11ए 13द्वए ब् त्र क्ष्11ए 13ए 15द्वऔर क् त्र क्ष्15ए 17द्वय तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । ∩ ठ ;पपद्ध ठ ∩ ब् ;पपपद्ध । ∩ ब् ∩ क् ;पअद्ध । ∩ ब् ;अद्ध ठ ∩ क् ;अपद्ध । ∩ ;ठ ∪ ब्द्ध ;अपपद्ध । ∩ क् ;अपपपद्ध । ∩ ;ठ ∪ क्द्ध ;पगद्ध ;। ∩ ठ द्ध ∩ ; ठ ∪ ब् द्ध ;गद्ध ; । ∪ क्द्ध ∩ ; ठ ∪ ब्द्ध 7ण् यदि । त्र क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या हैद्वए ठ त्र क्ष्ग रू ग एक सम प्रावृफत संख्या हैद्व ब् त्र क्ष्ग रू ग एक विषम प्रावृफत संख्या हैद्वक् त्र क्ष्ग रू ग एक अभाज्य संख्या हैद्वए तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । ∩ ठ ;पपद्ध । ∩ ब् ;पपपद्ध । ∩ क् ;पअद्ध ठ ∩ ब् ;अद्ध ठ ∩ क् ;अपद्ध ब् ∩ क् 8ण् निम्नलिख्िात समुच्चय युग्मों में से कौन से युग्म असंयुक्त हैं? ;पद्ध क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्व तथा क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत संख्या है और 4 ≤ ग ≤ 6 द्व ;पपद्ध क्ष् ंए मए पए वए न द्व तथा क्ष् बए कए मए िद्व ;पपपद्ध क्ष्ग रू ग एक सम पूणा±क हैद्व और क्ष्ग रू ग एक विषम पूणा±क हैद्व 9ण् यदि । त्र क्ष्3ए 6ए 9ए 12ए 15ए 18ए 21द्वए ठ त्र क्ष् 4ए 8ए 12ए 16ए 20 द्वए ब् त्र क्ष्2ए 4ए 6ए 8ए 10ए 12ए 14ए 16 द्वए क् त्र क्ष्5ए 10ए 15ए 20 द्वय तो निम्नलिख्िात को ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । दृ ठ ;पपद्ध । दृ ब् ;पपपद्ध ।दृक् ;पअद्ध ठ दृ। ;अद्ध ब् दृ। ;अपद्ध क्दृ। ;अपपद्ध ठ दृ ब् ;अपपपद्ध ठदृक् ;पगद्ध ब् दृ ठ ;गद्ध क्दृठ ;गपद्ध ब्दृक् ;गपपद्ध क् दृ ब् 10ण् यदि ग्त्र क्ष् ंए इए बए क द्व और ल् त्र क्ष् एि इए कए हद्वए तो निम्नलिख्िात को ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ग्दृल् ;पपद्ध ल् दृ ग् ;पपपद्ध ग् ∩ ल् 11ण् यदि त् वास्तविक संख्याओं और फ परिमेय संख्याओं के समुच्चय हैं, तो त् दृ फ क्या होगा घ् 12ण् बताइए कि निम्नलिख्िात कथनों में से प्रत्येक सत्य है या असत्य? अपने उत्तर का औचित्य भी बताइएः ;पद्ध क्ष् 2ए 3ए 4ए 5 द्व तथा क्ष् 3ए 6द्व असंयुक्त समुच्चय हैं। ;पपद्ध क्ष् ंए मए पए वए न द्व तथा क्ष् ंए इए बए क द्वअसंयुक्त समुच्चय हैं। ;पपपद्ध क्ष् 2ए 6ए10ए 14 द्व तथा क्ष् 3ए 7ए 11ए 15द्व असंयुक्त समुच्चय हैं। ;पअद्ध क्ष् 2ए 6ए 10 द्व तथा क्ष् 3ए 7ए 11द्व असंयुक्त समुच्चय हैं। 1ण्11 समुच्चय का पूरक ;ब्वउचसमउमदज व िं ैमजद्ध मान लीजिए कि सभी अभाज्य संख्याओं का सावर्त्रिाक समुच्चय न् है तथा ।ए न् का वह उपसमुच्चय है, जिसमें वे सभी अभाज्य संख्याएँ हैं जो 42 की भाजक नहीं हैं। इस प्रकार । त्र क्ष्ग रू ग ∈ न् और ग संख्या 42 का भाजक नहीं हैद्व। हम देखते हैं कि 2 ∈ न् विंफतु 2 ∉ ।ए क्योंकि 2 संख्या 42 का एक भाजक है। इसी प्रकार 3 ∈ न् विंफतु 3 ∉ ।ए तथा 7 ∈ न् विंफतु 7 ∉ । अब केवल 2, 3 तथा 7 ही न् के ऐसे अवयव हैं जो ।में नहीं हैं। इन तीन अभाज्य संख्याओं का समुच्चय अथार्त् समुच्चय क्ष्2ए 3ए 7द्वए न् के सापेक्ष। का पूरक समुच्चय कहलाता है और इसे प्रतीक ।′ से निरूपित किया जाता है। अतः ।′ त्र क्ष्2ए 3ए 7द्व इस प्रकार हम देखते हैं कि ।′ त्र क्ष्ग रू ग ∈ न् और ग ∉ । द्व है। इससे निम्नलिख्िात परिभाषा प्राप्त होती हैः परिभाषा 8 मान लीजिए कि न् एक सावर्त्रिाक समुच्चय है और ।ए न् का एक उपसमुच्चय है, तो । का पूरक समुच्चय न् के उन अवयवों का समुच्चय है, जो । के अवयव नहीं हैं। प्रतीकात्मक रूप में हम न् के सापेक्ष । के पूरक को प्रतीक ।′ से निरूपित करते हैं। अतः ।′ त्र क्ष्ग रू ग ∈ न् और ग ∉ । द्व हम लिख सकते हैं। । त्र न् दृ । ध्यान दीजिए कि । के पूरक समुच्चय को, विकल्पतः, सावर्त्रिाक समुच्चय न् तथा समुच्चय । के अंतर के रूप में देखा जा सकता है। उदाहरण 20 मान लीजिए कि न् त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6ए 7ए 8ए 9ए 10द्व और । त्र क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए 9द्व है तो ।′ ज्ञात कीजिए। हल हम नोट करते हैं केवल 2, 4, 6, 8, 10 ही न् के ऐसे अवयव हैं जो । में नहीं हैं। अतः ।′ त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8ए10 द्वण् उदाहरण 21 मान लीजिए कि न् एक सह श्िाक्षा विद्यालय के कक्षा ग्प् के सभी विद्याथ्िार्यों का सावर्त्रिाक समुच्चय है और ।ए कक्षा ग्प् की सभी लड़कियों का समुच्चय है तो ।′ ज्ञात कीजिए। हल क्योंकि ।ए कक्षा ग्प् की सभी लड़कियों का समुच्चय है, अतः ।′ स्पष्टतया कक्षा के सभी लड़कों का समुच्चय है। यदि । सावर्त्रिाक समुच्चय न् का एक उपसमुच्चय है, तो इसका पूरक ।′ भी न् का एक उपसमुच्चय होता है। पुनः उपयुर्क्त उदाहरण 20 में, ।′ त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8ए 10 द्व अतः ;।′द्ध′ त्र क्ष्ग रू ग ∈ न् और ग ∉ ।′द्व त्र क्ष्1ए 3ए 5ए 7ए 9द्व त्र । पूरक समुच्चय की परिभाषा से स्पष्ट है कि सावर्त्रिाक समुच्चय न् के किसी उपसमुच्चय ।′ के लिए ;।′द्ध′ त्र । अब निम्नलिख्िात उदाहरण में हम ; । ∪ ठद्ध′ तथा ।′∩ ठ′ के हल निकालेंगे। उदाहरण 22 मान लीजिए कि न् त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6द्वए । त्र क्ष्2ए 3द्व और ठ त्र क्ष्3ए 4ए 5द्व, ।′ए ठ′ ए ।′ ∩ ठ′ए । ∪ ठ ज्ञात कीजिए और पिफर सि( कीजिए कि ; । ∪ ठद्ध′ त्र।′∩ ठ′ण् हल स्पष्टतया ।′ त्र क्ष्1ए 4ए 5ए 6द्वए ठ′ त्र क्ष् 1ए 2ए 6 द्व। अतः ।′ ∩ ठ′ त्र क्ष् 1ए 6 द्व पुनः । ∪ ठ त्र क्ष् 2ए 3ए 4ए 5 द्व है। इसलिए ;। ∪ ठद्ध′ त्र क्ष् 1ए 6 द्व ;। ∪ ठद्ध′ त्र क्ष् 1ए 6 द्व त्र ।′ ∩ ठ′ इस प्रकार हम देखते हैं कि ; । ∪ ठद्ध′ त्र।′∩ ठ′ण् यह सि( किया जा सकता है कि उपयुर्क्त परिणाम व्यापक रूप से सत्य होता है यदि । और ठ सावर्जनिक समुच्चय न् के कोइर् दो उपसमुच्चय हैं, तो ; । ∪ ठद्ध′ त्र।′∩ ठ′ण् इसी प्रकार ; । ∩ ठद्ध′ त्र ।′ ∪ ठ′ इन परिणामों को शब्दों में इस प्रकार व्यक्त करते हैंः ‘‘दो समुच्चयों के सम्िमलन का पूरक उनके पूरक समुच्चयों का सावर्निष्ठ होता है तथा दोनों समुच्चयों के सावर्निष्ठ का पूरक उनके पूरक समुच्चयों का सम्िमलन होता है।’’ इनको क्म डवतहंद के नियम कहते हैं। यह नाम गण्िातज्ञ क्म डवतहंद के नाम पर रखा गया है। किसी समुच्चय । के पूरक ।′ को वेन आरेख द्वारा निरूपित किया जा सकता है जैसा कि आवृफति 1.10 में प्रदश्िार्त है। छायांकित भाग समुच्चय । के पूरक ।′ को दशार्ता है। आवृफति1ण्10 पूरकों के कुछ गुणध्मर् 1ण् पूरक नियम रू ;पद्ध । ∪ ।′ त्र न् ;पपद्ध । ∩ ।′ त्र φ 2ण्क्म डवतहंद का नियम रू ;पद्ध ;। ∪ ठद्ध´ त्र ।′∩ ठ′ ;पपद्ध ;। ∩ ठ त्र ।′∪ ठ′ 3ण् द्वि - पूरक नियम रू ;।′द्ध′ त्र । 4ण् φ′ और न् के नियम: φ′ त्र न् और न्′ त्र φण् इन नियमों का सत्यापन वेन आरेखों द्वारा किया जा सकता है। प्रश्नावली 1ण्5 1ण् मान लीजिए कि न् त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6ए 7ए 8ए 9 द्वए । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4द्वए ठ त्र क्ष्2ए 4ए 6ए 8 द्व और ब् त्र क्ष् 3ए 4ए 5ए 6 द्व तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ।′ ;पपद्ध ठ′ ;पपपद्ध ;। ∪ ब्द्ध′ ;पअद्ध ;। ∪ ठद्ध′ ;अद्ध ;।′द्ध′ ;अपद्ध ;ठ दृ ब्द्ध′ 2ण् प् िन् त्र क्ष् ंए इए बए कए मए एि हए ीद्व, तो निम्नलिख्िात समुच्चयों के पूरक ज्ञात कीजिएः ;पद्ध । त्र क्ष्ंए इए बद्व ;पपद्ध ठ त्र क्ष्कए मए एि हद्व ;पपपद्ध ब् त्र क्ष्ंए बए मए हद्व ;पअद्ध क् त्र क्ष् एि हए ीए ंद्व 3ण् प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय को सावर्त्रिाक समुच्चय मानते हुए, निम्नलिख्िात समुच्चयों के पूरक लिख्िाएः ;पद्ध क्ष्ग रू ग एक प्रावृफत सम संख्या हैद्व ;पपद्ध क्ष् ग रू ग एक प्रावृफत विषम संख्या हैद्व ;पपपद्ध क्ष्ग रू ग संख्या 3 का एक ध्न गुणज हैद्व ;पअद्ध क्ष् ग रू ग एक अभाज्य संख्या हैद्व ;अद्ध क्ष्ग रू गए 3 और 5 से विभाजित होने वाली एक संख्या हैद्व ;अपद्ध क्ष् ग रू ग एक पूणर् वगर् संख्या हैद्व ;अपपद्ध क्ष् ग रू ग एक पूणर् घन संख्या हैद्व ;अपपपद्ध क्ष् ग रू ग ़ 5 त्र 8 द्व ;पगद्ध क्ष् ग रू 2ग ़ 5 त्र 9द्व ;गद्ध क्ष् ग रू ग ≥ 7 द्व ;गपद्ध क्ष् ग रू ग ∈ छ और 2ग ़ 1 झ 10 द्व 4ण् यदि न् त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6ए 7ए 8ए 9 द्वए । त्र क्ष्2ए 4ए 6ए 8द्व और ठ त्र क्ष् 2ए 3ए 5ए 7द्व, तो सत्यापित कीजिए किः ;पद्ध ;। ∪ ठद्ध′ त्र ।′∩ ठ′ ;पपद्ध ;। ∩ ठद्ध′ त्र ।′∪ ठ′ 5ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक के लिए उपयुर्क्त वेन आरेख खींचिएः ;पद्ध ;। ∪ ठद्ध′ ;पपद्ध ।′∩ ठ′ ;पपपद्ध ;। ∩ ठद्ध′ ;पअद्ध ।′∪ ठ′ 6ण् मान लीजिए कि किसी समतल में स्िथत सभी त्रिाभुजों का समुच्चय सावर्त्रिाक समुच्चय न् है। यदि । उन सभी त्रिाभुजों का समुच्चय है जिनमें कम से कम एक कोण 600 से भ्िान्न है, तो ।′ क्या है? 7ण् निम्नलिख्िात कथनों को सत्य बनाने के लिए रिक्त स्थानों को भरिएः ;पद्ध । ∪ ।′ त्र ण् ण् ण् ;पपद्ध φ′ ∩ । त्र ण् ण् ण् ;पपपद्ध । ∩ ।′ त्र ण् ण् ण् ;पअद्ध न्′ ∩ । त्र ण् ण् ण् 1ण्12 दो समुच्चयों के सम्िमलन और सवर्निष्ठ पर आधरित व्यावहारिक प्रश्न च्तंबजपबंस च्तवइसमउे वद न्दपवद ंदक प्दजमतेमबजपवद व िज्ूव ैमजे पहले के अनुच्छेदों में हम दो समुच्चयों के सम्िमलन, सवर्निष्ठ तथा अंतर के बारे में सीख चुके हैं। इस अनुच्छेद में हम अपने प्रतिदिन के जीवन से सम्बन्िध्त कुछ प्रश्नों को सरल करेंगे। इस अनुच्छेद में प्राप्त सूत्रों का प्रयोग आगे आने वाले अध्यायों, जैसे प्रायिकता ;अध्याय 16द्ध में भी किया जाएगा। ;पद्ध मान लीजिए कि । और ठ परिमित समुच्चय हैं। यदि । ∩ ठ त्र φए तो द ; । ∪ ठ द्ध त्र द ; । द्ध ़ द ; ठ द्ध ण्ण्ण् ;1द्ध आवृफति 1ण्11 । ∪ ठ के अवयव या तो । में हैं या ठ में हैं परंतु दोनों में नहीं हैं, क्योंकि । ∩ ठ त्र φण् अतः परिणाम ;1द्ध तत्काल प्राप्त होता है। ;पपद्ध व्यापक रूप से यदि । और ठ परिमित समुच्चय है, तो द ; । ∪ ठ द्ध त्र द ; । द्ध ़ द ; ठ द्धदृ द ; । ∩ ठ द्ध ण्ण्ण् ;2द्ध नोट कीजिए कि समुच्चय । दृ ठए । ∩ ठ तथा ठ दृ । असंयुक्त हैं और इनका सम्िमलन । ∪ठ है ;आवृफति 1.11द्ध। इसलिए द ; । ∪ ठद्ध त्र द ;। दृ ठद्ध ़ द ; । ∩ ठ द्ध ़ द ; ठ दृ । द्ध त्र द ;। दृ ठद्ध ़ द ; । ∩ठ द्ध ़ द ; ठ दृ । द्ध ़ द ; । ∩ ठ द्ध दृ द ; । ∩ ठद्ध त्र द ;। द्ध ़ द ; ठ द्ध दृ द ; । ∩ ठद्धए जो परिणाम ;2द्ध को सत्यापित करता है। ;पपपद्ध पुनः यदि ।ए ठ और ब् परिमित समुच्चय हैं, तो द ; । ∪ ठ ∪ ब् द्धत्र द ; । द्ध ़ द ; ठ द्ध ़ द ; ब् द्ध दृ द ; । ∩ ठ द्ध दृ द ; ठ ∩ ब्द्धदृ द ; । ∩ ब् द्ध ़ द ; । ∩ ठ ∩ ब् द्ध ण्ण्ण् ;3द्ध वास्तव में हम देखते हैं कि द ; । ∪ ठ ∪ ब् द्ध त्र द ;।द्ध ़ द ; ठ ∪ ब् द्ध दृ द ख् । ∩ ; ठ ∪ ब् द्ध , ख् ;2द्ध द्वारा , त्र द ;।द्ध ़ द ; ठ द्ध ़ द ; ब् द्ध दृ द ; ठ ∩ ब् द्ध दृ द ख् । ∩ ; ठ ∪ ब् द्ध, ख् ;2द्ध द्वारा , क्योंकि । ∩ ; ठ ∪ ब् द्ध त्र ; । ∩ ठ द्ध ∪ ; । ∩ ब् द्धए हमें प्राप्त होता है कि द ख् । ∩ ; ठ ∪ ब् द्ध , त्र द ; । ∩ ठ द्ध ़ द ; । ∩ ब् द्ध दृ द ख् ; । ∩ ठद्ध ∩ ;। ∩ ब्द्ध, त्र द ; । ∩ ठ द्ध ़ द ; । ∩ ब् द्ध दृ द ;। ∩ ठ ∩ ब्द्ध अतः द ; । ∪ ठ ∪ ब् द्ध त्र द ;।द्ध ़ द ; ठ द्ध ़ द ; ब् द्ध दृ द ; । ∩ ठ द्ध दृ द ; ठ ∩ ब्द्ध दृ द ; । ∩ ब् द्ध ़ द ; । ∩ ठ ∩ ब् द्ध इस प्रकार परिणाम ;3द्ध सि( हुआ। उदाहरण 23 यदि ग् और ल् दो ऐसे समुच्चय हैं कि ग् ∪ ल् में 50 अवयव हैं, ग् में 28 अवयव हैं और ल् में 32 अवयव हैं, तो ग् ∩ ल् में कितने अवयव हैं? हल दिया है कि द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र 50ए द ;ग्द्ध त्र 28एद ;ल्द्ध त्र 32ए द ;ग ∩ ल्द्ध त्र घ् सूत्रा द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र द ;ग्द्ध ़ द ;ल्द्ध दृ द ;ग् ∩ ल्द्ध के प्रयोग द्वारा हम देखते हैं कि द ;ग् ∩ ल्द्ध त्र द ;ग्द्ध ़ द ;ल्द्ध दृ द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र28 ़ 32 दृ 50 त्र 10 विकल्पतः मान लीजिए कि द ; ग् ∩ ल् द्ध त्र ाए तो आवृफति1ण्12 द ;ग् दृ ल्द्ध त्र 28 दृ ा ए द ;ल् दृ ग्द्ध त्र 32 दृ ा ;आवृफति 1.12 के वेन आरेख द्वाराद्ध इससे मिलता है कि 50 त्र द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र द ;ग् दृ ल्द्ध ़ द ;ग् ∩ ल्द्ध ़ द ;ल् दृ ग्द्ध त्र ;28 दृ ाद्ध ़ ा ़ ;32 दृ ाद्ध अतः ा त्र 10ण् उदाहरण 24 एक विद्यालय में 20 अध्यापक हैं जो गण्िात या भौतिकी पढ़ाते हैं। इनमें से 12 गण्िात पढ़ाते हैं और 4 भौतिकी और गण्िात दोनों को पढ़ाते हैं। कितने अध्यापक भौतिकी पढ़ाते हैं? हल मान लीजिए कि ड उन अध्यापकों का समुच्चय निरूपित करता है, जो गण्िात पढ़ाते हैं और च् उन अध्यापकों का समुच्चय निरूपित करता है, जो भौतिकी पढ़ाते हैं। हमें प्रश्न के कथन में आने वाले शब्द ‘या’ से सम्िमलन तथा शब्द ‘और’ से सवर्निष्ठ का संकेत मिलता है। इसलिए द ; ड ∪ च् द्ध त्र 20 ए द ; ड द्ध त्र 12 और द ; ड ∩ च् द्ध त्र 4 हम द ; च् द्ध ज्ञात करना चाहते हैं। परिणाम द ; ड ∪ च् द्ध त्र द ; ड द्ध ़ द ; च् द्ध दृ द ; ड ∩ च् द्धए के प्रयोग द्वारा, 20 त्र 12 ़ द ; च् द्ध दृ 4 अतः द ; च् द्ध त्र 12 अतएव 12 अध्यापक भौतिकी पढ़ाते हैं। उदाहरण 25 35 विद्याथ्िार्यों की एक कक्षा में, 24 िकेट खेलना पसंद करते हैं और 16 पफुटबाल खेलना पसंद करते हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विद्याथीर् कम से कम एक खेल अवश्य खेलना पसंद करता है। कितने विद्याथीर् िकेट और पफुटबाल दोनों खेलना पसंद करते हैं? हल मान लीजिए कि िकेट खेलना पसंद करने वाले विद्याथ्िार्यों का समुच्चय ग् है। मान लीजिए कि पुफटबाल खेलना पसंद करने वाले विद्याथ्िार्यों का समुच्चय ल् है। इस प्रकार ग् ∪ ल् उन विद्याथ्िार्यों का समुच्चय है, जो कम से कम एक खेलना पसंद करते हैं और ग् ∩ ल् उन विद्याथ्िार्यों का समुच्चय है, जो दोनों ही खेल खेलना पसंद करते हैं। दिया है कि द ;ग्द्ध त्र 24ए द ;ल्द्ध त्र 16ए द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र 35ए द ;ग् ∩ ल्द्ध त्र घ् सूत्रा द ;ग् ∪ ल्द्ध त्र द ;ग्द्ध ़ द ;ल्द्ध दृ द ;ग् ∩ ल्द्धए के प्रयोग द्वारा, हम प्राप्त करते हैं। 35 त्र 24 ़ 16 दृ द ;ग् ∩ ल्द्ध इसलिएए द ;ग् ∩ ल्द्ध त्र 5 अथार्त् 5 विद्याथीर् दोनों खेल खेलना पसंद करते हैं। उदाहरण 26 किसी स्कूल के 400 विद्याथ्िार्यों के सवेर्क्षण में 100 विद्याथीर् सेब का रस, 150 विद्याथीर् संतरे का रस और 75 विद्याथीर् सेब तथा संतरे दोनों का रस पीने वाले पाए जाते हैं। ज्ञात कीजिए कि कितने विद्याथीर् न तो सेब का रस पीते हैं और न संतरे का ही? हल मान लीजिए कि न् सवेर्क्षण किए गए विद्याथ्िार्यों के समुच्चय को निरूपित करता है। तथा । सेब का रस पीने वाले और ठ संतरे का रस पीने वाले विद्याथ्िार्यों के समुच्चयों को निरूपित करते है। इस प्रकार द ;न्द्ध त्र 400ए द ;।द्ध त्र 100ए द ;ठद्ध त्र 150 और द ;। ∩ ठद्ध त्र 75ण् अब द ;।′∩ ठ′द्धत्र द ;। ∪ ठद्ध′ त्र द ;न्द्ध दृ द ;। ∪ ठद्ध त्र द ;न्द्ध दृ द ;।द्ध दृ द ;ठद्ध ़ द ;। ∩ ठद्ध त्र400 दृ 100 दृ 150 ़ 75 त्र 225 अतः 225 विद्याथीर् न तो सेब का और न संतरे का रस पीते हैं। उदाहरण 27 200 व्यक्ित किसी चमर् रोग से पीडि़त हैं, इनमें 120 व्यक्ित रसायन ब्ए 50 व्यक्ित1रसायन ब्2ए और 30 व्यक्ित रसायन ब्1 और ब्2 दोनों ही से प्रभावित हुए हैं, तो ऐसे व्यक्ितयों की संख्या ज्ञात कीजिए जो प्रभावित हुए हों: ;पद्ध रसायन ब्1 विंफतु रसायन ब्2 से नहीं, ;पपद्ध रसायन ब्2 विंफतु रसायन ब्1 से नहीं, ;पपपद्ध रसायन ब्अथवा रसायन ब्से प्रभावित हुए हैं।12 हल मान लीजिए कि न्ए चमर् रोग से पीडि़त व्यक्ितयों के सावर्त्रिाक समुच्चय को निरूपित करता है, ।ए रसायन ब्1 से प्रभावित व्यक्ितयों के समुच्चय को तथा ठए रसायन ब्2 से प्रभावित व्यक्ितयों के समुच्चय को निरूपित करते हैं। यहाँ पर द ; न्द्ध त्र 200ए द ; । द्ध त्र 120ए द ; ठ द्ध त्र 50 तथा द ; । ∩ ठ द्ध त्र 30 ;पद्ध दिए हुए वेन आरेख ;आवृफति 1.13द्ध में हम देखते हैं कि । त्र ; । दृ ठ द्ध ∪ ; । ∩ ठ द्धण् अतः द ;।द्ध त्र द;। दृ ठ द्ध ़ द; । ∩ ठ द्ध ;क्योंकि । दृ ठद्ध और । ∩ ठ असंयुक्त हैंद्ध अथवा द ; । दृ ठ द्ध त्र द ; । द्ध दृ द ; । ∩ ठ द्ध त्र 120 दृ30 त्र 90 अतः रसायन ब्1 विंफतु रसायन ब्2 से नहीं प्रभावित व्यक्ितयों की संख्या 90 है। आवृफति1ण्13 ;पपद्ध आवृफति 1.13 से ठ त्र ; ठ दृ ।द्ध ∪ ; । ∩ ठद्धण् इसलिए द ;ठद्ध त्र द ;ठ दृ ।द्ध ़ द ; । ∩ ठद्ध ;क्योंकि । दृ ठ तथा । दृ ठ अंसयुक्त हैं।द्ध अथवा द ; ठ दृ । द्ध त्र द ; ठ द्ध दृ द ; । ∩ ठ त्र 50 दृ 30 त्र 20 अतः रसायन ब्2 विंफतु रसायन ब्1 से नहीं प्रभावित व्यक्ितयों की संख्या 20 है। ;पपपद्ध रसयान ब्1 अथवा रसायन ब्2 से प्रभावित व्यक्ितयों की संख्या अथार्त् द ; । ∪ ठ द्ध त्र द ; । द्ध ़ द ; ठ द्ध दृ द ; । ∩ ठ द्ध त्र 120 ़ 50 दृ 30 त्र 140ण् प्रश्नावली 1ण्6 1ण् यदि ग् और ल् दो ऐसे समुच्चय हैं कि द ; ग् द्ध त्र 17ए द ; ल् द्ध त्र 23 तथा द ; ग् ∪ ल् द्ध त्र 38ए तो द ; ग् ∩ ल् द्ध ज्ञात कीजिए। 2ण् यदि ग् और ल् दो ऐसे समुच्चय हैं कि ग् ∪ ल् में 18, ग् में 8 और ल् में 15 अवयव हों, तो ग् ∩ ल् में कितने अवयव होंगे? 3ण् 400 व्यक्ितयों के समूह में, 250 हिंदी तथा 200 अंग्रेशी बोल सकते हैं। कितने व्यक्ित हिंदी तथा अंग्रेशी दोनों बोल सकते हैं? 4ण् यदि ै और ज् दो ऐसे समुच्चय हैं कि ै में 21, ज् में 32 और ै ∩ ज् में 11 अवयव हों, तो ै ∪ ज् में कितने अवयव होंगे? 5ण् यदि ग् और ल् दो ऐसे समुच्चय हैं कि ग् में 40, ग् ∪ ल् में 60 और ग् ∩ ल् में 10 अवयव हों, तो ल् में कितने अवयव होंगे? 6ण् 70 व्यक्ितयों के समूह में, 37 काॅप़फी, 52 चाय पसंद करते हैं और प्रत्येक व्यक्ित दोनों में से कम से कम एक पेय पसंद करता है, तो कितने व्यक्ित काॅप़फी और चाय दोनों को पसंद करते हैं? 7ण् 65 व्यक्ितयों के समूह में, 40 व्यक्ित िकेट, और 10 व्यक्ित िकेट तथा टेनिस दोनों को पसंद करते हैं, तो कितने व्यक्ित केवल टेनिस को पसंद करते हैं विंफतु िकेट को नहीं? कितने व्यक्ित टेनिस को पसंद करते हैं? 8ण् एक कमेटी में, 50 व्यक्ित प्रेंफच, 20 व्यक्ित स्पेनिश और 10 व्यक्ित स्पेनिश और प्रेंफच दोनों ही भाषाओं को बोल सकते हैं। कितने व्यक्ित इन दोनों ही भाषाओं में से कम से कम एक भाषा बोल सकते हैं? विविध् उदाहरण उदाहरण 28 दिखाइए कि शब्द श् ब्।ज्।त्।ब्ज् श् के वणर् विन्यास के अक्षरों का समुच्चय तथा शब्द श् ज्त्।ब्ज्श् के वणर्विन्यास के अक्षरों का समुच्चय समान है। हल मान लीजिए कि ग् श्ब्।ज्।त्।ब्ज्श् के अक्षरों का समुच्चय है, तो ग् त्र क्ष् ब्ए ।ए ज्ए।ए त्ए ।ए ब्ए ज् द्व त्र क्ष् ब्ए ।ए ज्ए त् द्व मान लीजिए कि ल् श् ज्त्।ब्ज्श् के अक्षरों का समुच्चय है, तो ल् त्र क्ष् ज्ए त्ए ।ए ब् द्व क्योंकि ग् का प्रत्येक अवयव ल् में है तथा ल् का प्रत्येक अवयव ग् में है, अतः ग् त्र ल् उदाहरण 29 समुच्चय क्ष् दृ1ए 0ए 1 द्व के सभी उपसमुच्चयों की सूची बनाइए। हल माना । त्र क्ष्दृ1ए 0ए 1द्व है। समुच्चय । का वह उपसमुच्चय जिसमें कोइर् भी अवयव नहीं है रिक्त समुच्चय φ है। । के एक अवयव वाले उपसमुच्चय क्ष् दृ1 द्वए क्ष् 0 द्वए क्ष् 1 द्व हैं। । के दो अवयव वाले समुच्चय क्ष् दृ1ए 0 द्वए क्ष्दृ1ए 1द्व एक्ष्0ए 1द्व हैं। । के तीन अवयव वाला उपसमुच्चय । स्वयं है। इस प्रकार । के सभी उपसमुच्चय φए क्ष् दृ1 द्वए क्ष् 0 द्वए क्ष् 1 द्वए क्ष्दृ1ए 0द्वए क्ष्दृ1ए 1द्व एक्ष्0ए 1द्व तथा क्ष्दृ1ए 0ए 1द्व हैं। उदाहरण 30 सि( कीजिए कि । ∪ ठ त्र । ∩ ठ का तात्पयर् है कि । त्र ठ हल यदि कोइर् अवयव ं ∈ ।ए तो ं ∈ । ∪ ठण् क्योंकि । ∪ ठ त्र । ∩ ठ ए इसलिए ं ∈ । ∩ ठण् अतः ं ∈ ठण् इस प्रकार । ⊂ ठण् इसी प्रकार यदि इ ∈ ठए तो इ ∈ । ∪ ठण् क्योंकि । ∪ ठ त्र । ∩ ठ इसलिएए इ ∈ । ∩ ठण् इस प्रकार इ ∈ ।ण् अतः ठ ⊂ । अतएव । त्र ठण् उदाहरण 31 समुच्चयों ।ए ठ के लिए सि( कीजिए कि च् ;। ∩ ठ द्ध त्र च् ; । द्ध ∩ च् ; ठ द्धण् हल मान लीजिए कि ग् ∈ च् ;।∩ ठद्ध, तो ग्⊂ ।∩ठण् इसलिए ग्∈ च्;।द्ध तथा ग्∈ च्;ठद्धए जिसका तात्पयर् हुआ कि ग् ∈ ख्च् ;। द्ध ∩ च् ;ठद्ध,. इस प्रकार च् ;।∩ ठ द्ध ⊂ ख्च् ;।द्ध ∩ च् ; ठ द्ध,. मान लीजिए कि ल् ∈ ख्च् ; । द्ध ∩ च् ; ठ द्ध,, तो ल् ∈ च् ;।द्ध तथा ल् ∈ च् ; ठ द्ध, इस प्रकार ल् ⊂ । और ल् ⊂ ठण् इसलिए ल् ⊂ । ∩ ठए जिसका तात्पयर् है कि ल् ∈ च् ;। ∩ ठ द्धए अतएव ख्च् ; । द्ध ∩ च् ; ठ द्ध, ⊂ च् ;। ∩ ठद्धए अतः च् ;। ∩ ठ द्ध त्र च् ; । द्ध ∩ च् ; ठ द्धण् उदाहरण 32 एक बाजार अनुसंधन समूह ने 1000 उपभोक्ताओं का सवेर्क्षण किया और सूचित किया कि 720 उपभोक्ताओं ने उत्पाद । तथा 450 उपभोक्ताओं ने उत्पाद ठ पसंद किया। दोनों उत्पादों को पसंद करने वाले उपभोक्ताओं की न्यूनतम संख्या क्या है? हल मान लीजिए कि न् सवेर्क्षण उपभोक्ताओं का समुच्चय है, ै उन उपभोक्ताओं का समुच्चय है जिन्होनें उत्पाद । पसंद किया और ज् उन उपभोक्ताओं का समुच्चय है जिन्होंने उत्पाद ठ पसंद किया। दिया है कि, द ; न् द्ध त्र 1000ए द ; ै द्ध त्र 720ए द ; ज् द्ध त्र 450 इस प्रकार द ; ै ∪ ज् द्ध त्र द ; ै द्ध ़ द ; ज् द्ध दृ द ; ै ∩ ज् द्ध त्र 720 ़ 450 दृ द ;ै ∩ ज्द्ध त्र 1170 दृ द ; ै ∩ ज् द्ध स्पष्ट है कि द ; ै ∪ ज् द्ध अध्िकतम तब होगा जब द ; ै ∩ ज् द्ध न्यूनतम है, विंफतु ै ∪ ज् ⊂ न्ए जिसका तात्पयर् है कि द ; ै ∪ ज् द्ध ≤ द ; न् द्ध त्र 1000 । इस प्रकार द ; ै ∪ ज् द्ध का अध्िकतम मान 1000 है। इसलिए द ; ै ∩ ज् द्ध का न्यूनतम मान 170 है। अतः दोनों उत्पादों को पसंद करने वाले उपभोक्ताओं की न्यूनतम संख्या 170 है। उदाहरण 33 500 कार मालिकों से पूछताछ करनें पर पाया गया कि 400 लोग । प्रकार की कार के, 200 लोग ठ प्रकार की कार के तथा 500 लोग । और ठ दोनों प्रकार की कारों के मालिक थे। क्या ये आँकड़े सही हैं? हल मान लीजिए कि पूछताछ किए गए कार मालिकों का समुच्चय न् है, । प्रकार की कार के मालिकों का समुच्चय ड है और ठ प्रकार की कार के मालिकों का समुच्चय ै है। दिया है कि द ; न् द्ध त्र 500ए द ;ड द्ध त्र 400ए द ; ै द्ध त्र 200 और द ; ै ∩ ड द्ध त्र 50ण् इस प्रकार द ; ै ∪ ड द्ध त्र द ; ै द्ध ़ द ; ड द्ध दृ द ; ै ∩ ड द्ध त्र 200 ़ 400 दृ 50 त्र 550 विंफतु ै ∪ ड ⊂ न् जिसका तात्पयर् है कि द ; ै ∪ ड द्ध ≤ द ; न् द्धण् यह एक विरोधेक्ित है। अतः प्रदत्त आँकड़े सही नहीं है। उदाहरण 34 एक महाविद्यालय में पुफटबाल के लिए 38, बास्केट बाल के लिए 15 और िकेट के लिए 20 पदक प्रदान किए गए। यदि ये पदक कुल 58 लोगों को मिले और केवल तीन लोगों को तीनों खेलों के लिए मिले, तो कितने लोगों को तीन में से ठीक - ठीक दो खेलों के लिए मिले? हल मान लीजिए कि थ्ए ठ तथा ब् उन लोगों के समुच्चय निरूपित करते हैं जिन्हें क्रमशः पुफटबाल, बास्केटबाल तथा िकेट के लिए पदक मिले। यहाँ द ;थ्द्ध त्र 38ए द ; ठ द्ध त्र 15ए द ; ब् द्ध त्र 20ए द ;थ् ∪ ठ ∪ ब् द्ध त्र 58 और द ;थ् ∩ ठ ∩ ब् द्ध त्र 3 पुनः द ;थ् ∪ ठ ∪ ब् द्ध त्र द ; थ् द्ध ़ द ; ठ द्ध ़ द ; ब् द्ध दृ द ;थ् ∩ ठ द्ध दृ द ;थ् ∩ ब् द्ध दृ द ;ठ ∩ ब् द्ध ़ द ; थ् ∩ ठ ∩ ब् द्धए इस प्रकार द ; थ् ∩ ठ द्ध ़ द ; थ् ∩ ब् द्ध ़ द ; ठ ∩ ब् द्ध त्र 18 आवृफति 1.14 में दिए वेन आरेख पर विचार कीजिएः यहाँ ं उन लोगों की संख्या है, जिनको केवल पुफटबाल तथा बास्केटबाल के लिए पदक मिले, इ उन लोगों की संख्या है, जिनको केवल पुफटबाल तथा िकेट के लिए पदक मिले और ब उन लोगों की संख्या है, जिनको केवल बास्केटबाल तथा िकेट के लिए पदक मिले। क उन लोगों की संख्या है आवृफति1ण्14 जिनको तीनो ही खेलों के लिए पदक मिले। इस प्रकार क त्र द ; थ् ∩ ठ ∩ ब् द्ध त्र 3 और ं ़ क ़ इ ़ क ़ ब ़ क त्र 18 अतः ं ़ इ ़ ब त्र 9ए जोकि उन लोगों की संख्या है, जिनकों तीनों खेलों में से दो खेलों के लिए पदक मिले। अध्याय 1 पर विविध् प्रश्नावली 1ण् निम्नलिख्िात समुच्चयों में से कौन किसका उपसमुच्चय है, इसका निणर्य कीजिएः । त्र क्ष्ग रू ग ∈ त् तथा ग2 दृ 8ग ़ 12 त्र 0 को संतुष्ट करने वाली सभी वास्तविक संख्याएँ ग द्वए ठ त्र क्ष्2ए 4ए 6द्वए ब् त्र क्ष् 2ए 4ए 6ए 8ए ण् ण् ण् द्वए क् त्र क्ष् 6 द्वण् 2ण् ज्ञात कीजिए कि निम्नलिख्िात में से प्रत्येक कथन सत्य है या असत्य है। यदि सत्य है, तो उसे सि( कीजिए। यदि असत्य है, तो एक उदाहरण दीजिए। ;पद्ध यदि ग ∈ । तथा । ∈ ठ ए तो ग ∈ ठ ;पपद्ध यदि । ⊂ ठ तथा ठ ∈ ब् ए तो । ∈ ब् ;पपपद्ध यदि । ⊂ ठ तथा ठ ⊂ ब् ए तो । ⊂ ब् ;पअद्ध यदि । ⊄ ठ तथा ठ ⊄ ब् ए तो । ⊄ ब् ;अद्ध यदि ग ∈ । तथा । ⊄ ठ ए तो ग ∈ ठ ;अपद्ध यदि । ⊂ ठ तथा ग ∉ ठ ए तो ग ∉ । 3ण् मान लीजिए ।ए ठए और ब् ऐसे समुच्चय हैं कि । ∪ ठ त्र । ∪ ब् तथा । ∩ ठ त्र । ∩ ब्, तो दशार्इए कि ठ त्र ब्ण् 4ण् दिखाइए कि निम्नलिख्िात चार प्रतिबंध् तुल्य हैंः ;पद्ध । ⊂ ठ ;पपद्ध । दृ ठ त्र φ ;पपपद्ध । ∪ ठ त्र ठ ;पअद्ध । ∩ ठ त्र । 5ण् दिखाइए कि यदि । ⊂ ठए तो ब् दृ ठ ⊂ ब् दृ ।ण् 6ण् मान लीजिए कि च् ; । द्ध त्र च् ; ठ द्धए सि( कीजिए कि । त्र ठ 7ण् किन्हीं भी समुच्चयों । तथा ठ के लिए, क्या यह सत्य है कि च् ;। द्ध ∪ च् ; ठ द्ध त्र च् ; । ∪ ठ द्धघ् अपने उत्तर का औचित्य बताइए। 8ण् किन्हीं दो समुच्चयों । तथा ठ के लिए सि( कीजिए किए । त्र ; । ∩ ठ द्ध ∪ ; । दृ ठ द्ध और । ∪ ; ठ दृ । द्ध त्र ; । ∪ ठ द्ध 9ण् समुच्चयों के गुणध्मो± का प्रयोग करके सि( कीजिए किः ;पद्ध । ∪ ; । ∩ ठ द्ध त्र। ;पपद्ध । ∩ ; । ∪ ठ द्ध त्र ।ण् 10ण् दिखलाइए कि । ∩ ठ त्र । ∩ ब् का तात्पयर् ठ त्र ब् आवश्यक रूप से नहीं होता है। 11ण् मान लीजिए कि । और ठ समुच्चय हैं। यदि किसी समुच्चय ग् के लिए । ∩ ग् त्र ठ ∩ ग् त्र φ तथा । ∪ ग् त्र ठ ∪ ग्ए तो सि( कीजिए कि । त्र ठण् ;संकेतः । त्र। ∩ ; । ∪ ग् द्ध ए ठ त्र ठ ∩ ; ठ ∪ ग् द्ध और वितरण नियम का प्रयोग कीजिएद्ध 12ण् ऐसे समुच्चय ।ए ठ और ब् ज्ञात कीजिए ताकि । ∩ ठए ठ ∩ ब् तथा । ∩ ब् आरिक्त समुच्चय हों और । ∩ ठ ∩ ब् त्र φण् 13ण् किसी विद्यालय के 600 विद्याथ्िार्यों के सवेर्क्षण से ज्ञात हुआ कि 150 विद्याथीर् चाय, 225 विद्याथीर् काॅप़फी तथा 100 विद्याथीर् चाय और काॅप़फी दोनों पीते हैं। ज्ञात कीजिए कि कितने विद्याथीर् न तो चाय पीते हैं और न काॅप़फी पीते हैं। 14ण् विद्याथ्िार्यों के एक समूह में, 100 विद्याथीर् हिंदी, 50 विद्याथीर् अंग्रेशी तथा 25 विद्याथीर् दोनों भाषाओं को जानते हैं। विद्याथ्िार्यों में से प्रत्येक या तो हिंदी या अंग्रेशी जानता है। समूह में कुल कितने विद्याथीर् हैं? 15ण् 60 लोगों के सवेर्क्षण में पाया गया कि 25 लोग समाचार पत्रा भ्ए 26 लोग समाचार पत्रा ज्ए 26 लोग समाचार पत्रा प्ए 9 लोग भ् तथा प् दोनों, 11 लोग भ् तथा ज् दोनों, 8 लोग ज् तथा प् दोनों और 3 लोग तीनों ही समाचार पत्रा पढ़ते हैं, तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध कम से कम एक समाचार पत्रा पढ़ने वालों की संख्या। ;पपद्ध ठीक - ठीक केवल एक समाचार पत्रा पढ़ने वालों की संख्या। 16ण् एक सवेर्क्षण में पाया गया कि 21 लोग उत्पाद ।ए 26 लोग उत्पाद ठए 29 लोग उत्पाद ब् पसंद करते हैं। यदि 14 लोग उत्पाद । तथा ठए 12 लोग उत्पाद ब् तथा ।ए 14 लोग उत्पाद ठ तथा ब् और 8 लोग तीनो ही उत्पादों को पसंद करते हैं। ज्ञात कीजिए कि कितने लोग केवल उत्पाद ब् को पसंद करते हैं। सारांश इस अध्याय में समुच्चयों से संबंध्ित वुफछ मूलभूत परिभाषाओं और संियाओं पर विचार किया गया है। जिसका सार नीचे दिया है। ऽ एक समुच्चय वस्तुओं का सुपरिभाष्िात संग्रह होता है। ऽ एक समुच्चय जिसमें एक भी अवयव नहीं होता है, रिक्त समुच्चय कहलाता है। ऽ एक समुच्चय जिसमें अवयवों की संख्या निश्िचत होती है परिमित समुच्चय कहलाता है अन्यथा अपरिमित समुच्चय कहलाता है। ऽ दो समुच्चय । और ठ समान कहलाते हैं यदि उनमें तथ्यतः समान अवयव हों। ऽ एक समुच्चय । किसी समुच्चय ठ का उपसमुच्चय कहलाता है, यदि । का प्रत्येक अवयव ठ का भी अवयव हो। अंतराल समुच्चय त् के उपसमुच्चय होते हैं। ऽ किसी समुच्चय । का घात समुच्चय । के सभी उपसमुच्चयों का संग्रह होता है। ऽ दो समुच्चय । और ठ का सम्िमलन उन सभी अवयवों का समुच्चय होता है जो या तो । में हों या ठ में हों। ऽ दो समुच्चय । और ठ का सवर्निष्ठ उन सभी अवयवों का समुच्चय होता है जो । और ठ दोनों में उभयनिष्ठ हों।दो समुच्चय । और ठ का अंतर, जब । तथा ठ इसी क्रम में हो, उन सभी अवयवों का समुच्चय है, जो । में हों विंफतु ठ में नहीं हों। ऽ किन्हीं दो समुच्चय । तथा ठ के लिए, ;। ∪ ठद्ध′ त्र ।′∩ ठ′ तथा ;। ∩ ठद्ध′ त्र ।′∪ ठ′ ऽ यदि । और ठ ऐसे परिमित समुच्चय हैं कि । ∩ ठ त्र φए तो, द ;। ∪ ठद्ध त्र द ;।द्ध ़ द ;ठद्ध और यदि । ∩ ठ ≠φए तो द ;। ∪ ठद्ध त्र द ;।द्ध ़ द ;ठद्ध दृ द ;। ∩ ठद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जमर्न गण्िात ळमवतह ब्ंदजवत ;1845 इर्॰ - 1918 इर्॰ द्ध को आध्ुनिक समुच्चय सि(ांत के अध्िकांश भाग का जन्मदाता माना जाता है। समुच्चय सि(ांत पर उनके शोध् पत्रा 1874 इर्॰ से 1897 इर्॰ के बीच के किसी समय में प्रकाश में आए। उनका समुच्चय सि(ांत का अध्ययन उस समय हुआ जब वे ं ेपद ग ़ ं ेपद 2ग ़ ं ेपद 3ग ़ ण्ण्ण् के रूप की त्रिाकोणमितीय श्रेणी123का अध्ययन कर रहे थे। 1874 इर्॰ में अपने एक शोध् पत्रा में यह प्रकाश्िात किया कि वास्तविक संख्याओं को पूणा±कों के साथ एक - एक संगतता में नहीं रखा जा सकता है। 1879 इर्॰ के उत्तराध्र् में अमूतर् समुच्चयों के विभ्िान्न गुणध्मो± को दशार्ने वाले उनके अनेक शोध् पत्रा प्रकाश्िात हुए। कृऽकृ

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