एकक.7 व्रफमब( गुणात्मक विश्लेषण विश्लेषण का अथर् हमेशा पदाथर् को इसके चरम अवयवों में तोड़ना नहीं होता। पदाथर् की प्रवृफति ज्ञात करना और इसके अवयवों की पहचान करना भी विश्लेषण होता है और इसे गुणात्मक विश्लेषण कहते हैं। अकाबर्निक लवणों के गुणात्मक विश्लेषण का अथर् लवण में अथवा लवणों के मिश्रण में उपस्िथत ध्नायनों और )णायनों की पहचान करना है। अकाबर्निक लवण, अम्ल के क्षारक द्वारा अथवा विलोम प्रवि्रफया द्वारा संपूणर् अथवा आंश्िाक उदासीनीकरण से प्राप्त होते हैं। लवण बनने में अम्ल द्वारा दियागया भाग )णायन और क्षारक द्वारा प्रदत्त भाग ध्नायन कहलाता है। उदाहरणाथर्, ब्नैव्और छंब्स लवणों4 में ब्न2़और छं़ ध्नायन हैं और ैव्2दृएवं ब्सदृ)णायन हैं। गुणात्मक विश्लेषण अनेक मापव्रफमों पर किए4 जाते हैं। इनमें पदाथर् की अलग - अलग मात्रा प्रयुक्त होती है। बृहत् विश्लेषण ;डंबतव ंदंसलेपेद्ध में 0ण्1 से 0ण्5 ह पदाथर् और लगभग 20 उस् विलयन प्रयुक्त होता है। अंशसूक्ष्म विश्लेषण ;ेमउप उपबतव ंदंसंलेपेद्ध में 0ण्05 ह पदाथर् और 1 उस् विलयन की आवश्यकता होती है जबकि सूक्ष्म विश्लेषण के लिए बहुत कम मात्रा की आवश्यकता होती है। विश्लेषण ऐसी अभ्िावि्रफयाओं द्वारा किया जाता है जिनका बोध् हमें अपनी देखने और सूंघने वाली ज्ञानेंदि्रयों द्वारा हो सकता हैं। ऐसी अभ्िावि्रफयाओं मेंμ ;कद्ध अवक्षेप बनना ;खद्ध रंग में परिवतर्न और ;गद्ध गैस निकलना इत्यादि सम्िमलित होता है। अकाबर्निक लवण का व्रफमब( विश्लेषण निम्नलिख्िात चरणों में होता है - ;पद्ध ठोस लवण और उसके विलयन का प्राथमिक परीक्षण। ;पपद्ध विलयन में अभ्िावि्रफयाओं द्वारा )णायन का निधर्रण ;आद्रर् परीक्षणद्ध और संपुष्िट परीक्षण। ;पपपद्ध विलयन में अभ्िावि्रफयाओं द्वारा ध्नायन का निधर्रण ;आद्रर् परीक्षणद्ध और संपुष्िट परीक्षण। ठोस लवण का प्राथमिक परीक्षण कभी - कभी बहुत महत्वपूणर् जानकारी देता है, जिससे आगे का विश्लेषण आसान हो जाता है। यद्यपि यह परीक्षण परिणाम नहीं देते परन्तु कभी - कभी किन्हीं )णायनों अथवा ध्नायनों की उपस्िथति का महत्वपूणर् संकेत देते हैं। यह परीक्षण 10 - 15 मिनट में किए जा सकते हैं। इनमें रंग, गंध् और विलेयता इत्यादि जैसे सामान्य रंग - रूप और भौतिक गुणों को नोट करना और ठोस लवण के शुष्क - परीक्षण नामक परीक्षण करना सम्िमलित होता है। इन्हें शुष्क परीक्षण कहते हैं। शुष्क लवण को गरम करना, ब्लो पाइप परीक्षण, ज्वाला परीक्षण, सुहागा मनका परीक्षण ;इवतमग इमंक जमेजद्ध, सोडियम काबोर्नेट मनका परीक्षण, चारकोल कोटरिका परीक्षण ;बींतबवंस बंअपजल जमेजद्ध इत्यादि शुष्क परीक्षण के अंतगर्त आते हैं। इनमें से वुफछ परीक्षण इसी एकक में बाद में दिये गए हैं। लवण की जल मंे विलेयता और जलीय विलयन की चभ् से लवण में उपस्िथत आयनों के विषय में महत्वपूणर् जानकारी मिलती है। यदि लवण का विलयन अम्लीय अथवा क्षारकीय प्रवृफति का हो तो इसका अथर् है कि यह जलीय विलयन में जल अपघटित हो रहा है। यदि विलयन क्षारकीय प्रवृफति का हो तो लवण कोइर् काबोर्नेट या सल्पफाइड इत्यादि हो सकता है। यदि विलयन अम्लीय प्रवृफति दशार्ता है तो यह अम्लीय लवण अथवा दुबर्ल क्षार और प्रबल अम्ल से बना लवण हो सकता है। इस स्िथति में विलयन को )णायनोंके परीक्षण से पहले सोडियम काबोर्नेट से उदासीन कर लेना सवोर्त्तम होता है। तनु भ्2ैव्4ध्तनु भ्ब्स और सांद्र भ्2ैव्4 द्वारा प्राथमिक परीक्षण में निकलने वाली गैसें भी अम्लीय मूलकों के विषय में अच्छा संकेत देती हैं ;देखें सारणी 7.1 और 7.3द्ध। आयनों के संपुष्िट परीक्षणों से पहले प्राथमिक परीक्षण अवश्य करने चाहिए। उद्देश्य निम्नलिख्िात मंे से एक ध्नायन और एक )णायन का परीक्षण करनाμ ध्नायन . च्इ2़ए ब्न2़ए ।े3़ए ।स3़ए थ्म3़ए डद2़ए छप2़ए र्द2़ए ब्व2़ए ब्ं2़ए ैत2़ए ठं2़ए डह2़ए छभ़् 4 2दृ दृ दृ)णायन . ब्व्2दृए ै2दृए ैव्ए ैव्2दृएछव्दृए छव्ए ब्सदृ ए ठतदृए प्ए च्व्3दृए ब्व्2दृ ए ब्भ्ब्व्व्दृ 3 3 423 4243;अघुलनशील लवण सम्िमलित नहीं होंगेद्ध सि(ांत विश्लेषण में अत्यन्त उपयोगी दो मूल सि(ांत निम्नलिख्िात हैं - ;पद्ध विलेयता गुणनपफल और ;पपद्ध उभयनिष्ठ आयन प्रभाव जब लवण का आयनिक गुणनपफल विलेयता गुणनपफल से अध्िक हो जाता है तो अवक्षेपण हो जाता है। लवण के आयनिक गुणनपफल को उभयनिष्ठ आयन प्रभाव द्वारा नियंत्रिात किया जाता है जिसके विषय में आप रसायन की पाठ्यपुस्तक में पढ़ चुके हैं। आवश्यक सामग्री )णायनों का क्रमब( विश्लेषण चरण प् - तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल द्वारा प्राथमिक परीक्षण इस परीक्षण में लवण पर तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल की अभ्िावि्रफया ;जिसकी प्रवि्रफया नीचे दी गइर् हैद्ध कक्ष ताप पर और गरम करके नोट की जाती है। काबो±नेट ;ब्व्2दृद्ध, सल्पफाइड ;ै2दृ द्ध, सल्पफाइट ;ैव्2दृद्ध, नाइट्राइट 3 3 ;छव्2दृ द्ध और ऐसीटेट ;ब्भ्3ब्व्व्दृद्ध तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ अभ्िावि्रफया करके अलग - अलग गैस देते हैं। निकली हुइर् गैसों के गुणध्मो± के अध्ययन से )णायनों के विषय में सूचना प्राप्त होती है। गैसों के अभ्िालक्षण्िाक गुणध्मर् संक्षेप में सारणी 7.1 में नीचे दिए गए हैं। प्रवि्रफया परखनली में 0ण्1 ह लवण लेकर उसमें 1.2 उस् तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल चित्रा 7.1 - गैस का परीक्षण मिलाएं। यदि कमरे के ताप पर अभ्िावि्रफया मिश्रण में कोइर् परिवतर्न हो तो ध्यान दें। यदि कोइर् गैस न निकले तो परखनली की सामग्री को गरम करें ;चित्रा 7.1द्ध और निकली हुइर् गैस की पहचान सारणी 7.1 देखकर करें। सारणी 7.1 - तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल द्वारा प्राथमिक परीक्षण अनुमानप्रेक्षण निकली गैस संभावित )णायन 2दृद्धकाबोर्नेट;ब्व्तेज बुदबुदाहट के साथ एक रंगहीन गंध्हीन गैस निकलती 3ब्व्2 है जो चूने के पानी को दूध्िया कर देती है। भ्2ैसड़े अंडे जैसी गंध् वाली एक रंगहीन गैस निकलती है सल्पफाइड;ै2दृ द्ध जो लेड ऐसीटेट पत्रा को काला कर देती है। 2दृद्धजलती हुइर् गंध्क की तीखी गंध् वाली एक रंगहीन गैस सल्पफाइट;ैव्ैव्2 3 निकलती है, जो पोटैश्िायम डाइव्रफोमेट के अम्लीय विलयन को हरा कर देती है। नाइट्राइट;छव्दृद्धछव्2भूरे धूम निकलते हैं, जो स्टाचर् युक्त अम्लीय पोटैश्िायम 2 आयोडाइड विलयन को नीला कर देते हैं। ब्भ्3ब्व्व्भ् के धमूऐसीटेट;ब्भ्ब्व्व्दृद्धसिरके की गंध् वाले रंगहीन धूम निकलते हैं, जो नीले 3लिटमस को लाल कर देते हैं। 2.2दृ2.दृ ब्व्3 ैए ैव्3ए छव्2 और ब्भ्3ब्व्व्दृ के संपुष्िट परीक्षण यदि लवण जल में घुलनशील हो तो अम्लीय मूलकों के संपुष्िट परीक्षण ;आद्रर् परीक्षणद्ध जलीय निष्कषर् 2दृद्धद्वारा और यदि लवण अघुलनशील हो तो सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् द्वारा किए जाते हैं। काबोर्नेट ;ब्व्3 का संपुष्िट परीक्षण लवण के जलीय विलयन में किया जाता है अथवा ठोस लवण प्रयुक्त करते हैं क्योंकि सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् में काबोर्नेट आयन होते हैं। जलीय निष्कषर् लवण को जल में घोल कर बनाया जाता है। सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् बनाना नीचे दिया गया है - सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् बनाना पाॅसिर्लेन प्याली अथवा क्वथन नली में 1ह लवण लें। इसमें लगभग 3 ह ठोस सोडियम काबोर्नेट और 15 उस् आसुत जल मिलाएं। सामग्री को विलोडित करते हुए 10 मिनट तक उबालें। ठंडा करके निस्यंदित करें और निस्यंद को सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् लेबल करें। तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ अभ्िावि्रफया करने वाले )णायनों के संपुष्िट परीक्षण नीचे सारणी 7.2 में दिए गए हैं। दृ3 323 सारणी 7.2 - ब्व्2दृए ै2दृए ैव्2दृ ए छव्और ब्भ् ब्व्व्दृ के निधर्रण परीक्षण)णायन काबोर्नेट;ब्व्3 2दृ द्ध परखनली में 0ण्1 ह लवण लेकर तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल मिलाएं। तेज बुदबुदाहट के साथ ब्व्2 गैस निकलती है, जो चूने के पानी को दूध्िया कर देती है। वुफछ अिाक समय तक गैस प्रवाहित करने से दूध्ियापन विलुप्त हो जाता है। संपुष्िट परीक्षण सल्पफाइड ;ै2दृ द्ध 1 उस् जलीय विलयन या सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् लेकर इसमें एक बूँद सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड विलयन मिलाएं। नीललोहित अथवा बैंगनी रंग प्राप्त होता है। ’सल्पफाइट;ैव्3 2दृ द्ध ;कद्ध एक परखनली में 1 उस् जलीय विलयन अथवा सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् लेकर बेरियम क्लोराइड विलयन मिलाएं। श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है जो तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुल जाता है और सल्पफर डाइआॅक्साइड गैस भी निकलती है। ;खद्ध एक परखनली में चरण ‘क’ का अवक्षेप लेकर उसमें तनु भ्2ैव्4 से अम्लीवृफत पोटैश्िायम परमैंगनेट विलयन की वुफछ बूँदें मिलाएं। पोटैश्िायम परमैंगनेट विलयन का रंग विलुप्त हो जाता है। नाइट्राइट ;छव्2 दृ द्ध ;कद्ध एक परखनली में 1 उस् जलीय विलयन अथवा सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् लेकर वुफछ बूँदें पोटैश्िायम आयोडाइड विलयन की और वुफछ बूँदें स्टाचर् विलयन की मिलाने के बाद ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत करने से नीला रंग प्राप्त होता है। ;खद्ध 1 उस् जलीय विलयन को ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत करें। 2 - 3 बूँदेंसल्पैफनिलिक अम्ल के विलयन की मिलाने के बाद 2 - 3 बूँदें 1 - नैफ्रथाइल ऐमीन अभ्िाकमर्क की मिलाएं। लाल रंग प्राप्त होना नाइट्राइट आयन की उपस्िथति इंगित करता है। ’ ब्व्गैस की भाँति सल्पफर डाइआॅक्साइड गैस भी चूने के पानी को दूध्िया कर देती है। परन्तु ब्व्रंगहीन और गंध्हीन गैस होती22 है और ैव्गैस की अभ्िालक्षण्िाक गंध् होती है।2 ’’ उदासीन पेफरिक क्लोराइड विलयन बनाना - 1 उस् पेफरिक क्लोराइड विलयन में हिलाते हुए तनु छंव्भ् विलयन को बूँद - बूँद कर स्थाइर् परन्तु थोड़ा अवक्षेप आने तक डालें। इसे निस्यंदित कर लें और विश्लेषण के लिए निस्यंद का उपयोग करें। संपुष्िट परीक्षणों का रसायन 1.काबोर्नेट आयन ख्ब्व्2दृ , का परीक्षण3 यदि ठोस लवण में तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल मिलाने से तेश बुदबुदाहट के साथ रंगहीन और गंध्हीन गैस निकले तो इससे काबोर्नेट आयन की उपस्िथति इंगित होती है। गैस चूने के पानी को ब्ंब्व्3 बनने के कारण दूिाया कर देती है ;चित्रा 7.1द्ध। छं2ब्व्3 ़ भ्2ैव्4 ⎯→ छं2ैव्4 ़ भ्2व् ़ब्व्2 ब्ं;व्भ्द्ध ़ ब्व्⎯→ ब्ंब्व् ़ भ्व्22 32यदि चूने के पानी से अध्िक ब्व्प्रवाहित की जाए तो जल में घुलनशील वैफल्िसयम हाइड्रोजन काबोर्नेट2 बनने के कारण, दूिाया रंग विलुप्त हो जाता है। ब्ंब्व् ़ ब्व् ़ भ्व् ⎯→ ब्ं ;भ्ब्व्द्ध32232 2. सल्पफाइड आयन ख्ै2दृ, का परीक्षण ;कद्ध तनु भ्2ैव्4 के साथ गरम करने पर सल्पफाइड लवण हाइड्रोजन सल्पफाइड गैस देते हैं जिसकी गंध् सड़े अंडे जैसी होती है। लेड ऐसीटेट विलयन से भीगा हुआ निस्यंद - पत्रा इसके संपवर्फ में आने पर लेड सल्पफाइड बनने के कारण काला हो जाता है। छंै ़ भ्ैव्⎯→ छंैव् ़ भ्ै224 242हाइड्रोजन सल्पफाइड ;ब्भ्ब्व्व्द्धच्इ ़ भ्ै ⎯→ च्इै ़ 2ब्भ्ब्व्व्भ्3223लेड सल्पफाइड काला अवक्षेप ;खद्ध यदि लवण जल में घुलनशील हो तो लवण का जलीय विलयन लेकर इसे अमोनियम हाइड्राॅक्साइड द्वारा क्षारकीय बना लें और सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड विलयन मिलाएं। यदि यह जल में घुलनशील न हो तो सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् को लेकर इसमें सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड विलयन की वुफछ बूँदें मिलाएं। संवुफल यौगिक छं4ख्थ्म;ब्छद्ध5छव्ै, बनने के कारण नीललोहित अथवा बैंगनी रंग प्राप्त होना लवण में सल्पफाइड आयन की उपस्िथति सुनिश्िचत करता है। छंै ़ छं ख्थ्म;ब्छद्धछव्, ⎯→ छं ख्थ्म;ब्छद्धछव्ै,22545सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड नीललोहित रंग का संवुफल दृ3.सल्पफाइट आयन ख्ैव्2 , का परीक्षण3 ;कद्ध सल्पफाइट लवण को तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ गरम करने पर ैव्गैस निकलती है जो2 गंधक के जलने जैसी गंध् वाली दमघोंटू गैस होती है। छंैव् ़ भ्ैव् ⎯→ छंैव् ़ भ्व् ़ ैव्23242422 यह गैस तनु भ्2ैव्4 से अम्लीवृफत किए गए पोटैश्िायम डाइव्रफोमेट पत्रा को हरा कर देती है। ज्ञ2ब्त2व्7 ़ भ्2ैव्4 ़ 3ैव्2 ⎯→ ज्ञ2ैव्4 ़ ब्त2 ;ैव्4द्ध3 ़ भ्2व् व्रफोमियम सल्पेफट;हराद्ध ;खद्ध लवण का जलीय विलयन अथवा सोडियम काबोर्नेट निष्कषर्, बेरियम क्लोराइड विलयन में मिलाने पर बेरियम सल्पफाइट का श्वेत अवक्षेप देता है। यह अवक्षेप निम्नलिख्िात परीक्षण देता है - छंैव् ़ ठंब्स⎯→ 2छंब्स ़ ठंैव्232 3 ;पद्ध तनु भ्ब्स में सल्पफाइट के अपघटन के कारण अवक्षेप इसमें घुल जाता है। निकलने वाली बेरियम के ैव्2 गैस का परीक्षण किया जा सकता है। यौगिक ठंैव् ़ 2भ्ब्स ⎯→ ठंब्स ़ भ्व् ़ ैव्32 22 ;पपद्ध सल्पफाइट का अवक्षेप अम्लीवृफत पोटैश्िायम परमैंगनेट विलयन को रंगहीन कर देता है। पोटैश्िायमठंैव् ़ भ्ैव्⎯→ ठंैव् ़ भ्व् ़ ैव्324 422 परमैंगनेट2ज्ञडदव्4 ़ 3भ्2ैव्4 ⎯→ ज्ञ2ैव्4 ़ 2डदैव्4 ़ 3भ्2व् ़ 5 ख्व्, ैव् ़ भ्व् ़ ख्व्, ⎯→ भ्ैव्2224 4.नाइट्राइट आयन ख्छव्2दृ, का परीक्षण ;कद्ध ठोस नाइट्राइट लवण में तनु भ्2ैव्4 मिलाकर गरम करने से छव्2 गैस के भूरे - लाल धूम निकलते हैं। लवण के विलयन में पोटैश्िायम आयोडाइड विलयन मिलाने के बाद ताशा बना स्टाचर् विलयन मिलाकर ऐसीटिक अम्ल द्वारा अम्लीवृफत करने पर नीला रंग प्राप्त होता है। वैकल्िपक रूप से पोटैश्िायम आयोडाइड और स्टाचर् के विलयन तथा ऐसीटिक अम्ल की वुफछ बूँदों से भीगा हुआ पिफल्टर पत्रा गैस के संपवर्फ में आने पर निकली हुइर् आयोडीन की स्टाचर् द्वारा अन्योन्यवि्रफया के कारण नीला हो जाता है। ;पद्ध 2छंछव् ़ भ्ैव्⎯→ छंैव् ़ 2भ्छव्224 242 3भ्छव्2 ⎯→ भ्छव्3 ़ 2छव् ़ भ्2व् 2छव् ़ व्2 ⎯→ 2छव्2 भूरी गैस ;पपद्ध 2भ्छव्2 ़ 2ज्ञप् ़ 2ब्भ्3ब्व्व्भ् ⎯→ 2ब्भ्3 ब्व्व्ज्ञ ़ 2भ्2व् ़ 2छव् ़ प्2 प्2 ़ ैजंतबी ⎯→ नीला संवुुफल ;खद्ध सल्पैफनिलिक अम्ल - 1 - नै.फ्रथाइलऐमीन अभ्िाकमर्क ;ग्रीस - इलाॅस्वे परीक्षणद्ध ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत जलीय विलयन अथवा सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् में सल्पैफनिलिक अम्ल और 1 - नै.फ्रथाइलऐमीन मिलने पर अभ्िावि्रफया में बने नाइट्रस अम्ल द्वारा सल्पैफनिलिक अम्ल डाइऐजोवृफत हो जाता है। डाइऐजोवृफत अम्ल 1 - नै.फ्रथाइलऐमीन से युग्िमत होकर लाल रंजक बनाता है। छव्2दृ ़ ब्भ्3ब्व्व्भ् ⎯→ भ्छव्2 ़ ब्भ्3ब्व्व्दृ परीक्षण विलयन बहुत तनुवृफत होना चाहिए। सांद्र विलयन में अभ्िावि्रफया डाइऐजोकरण से आगे नहीं बढ़ती। 5.ऐसीटेट आयन ख्ब्भ्ब्व्व्दृ, का परीक्षण3;कद्ध यदि लवण की तनु भ्2ैव्4 से अभ्िावि्रफया करने से सिरके जैसी गंध् आती है तो यह ऐसीटेट आयन की उपस्िथति इंगित करता है। चाइना डिश में 0ण्1 ह लवण लेकर इसमें 1 उस् एथेनाॅल मिलाएं। इसके बाद 0ण्2 उस् सांद्र भ्ैव्मिलाकर गरम करें। ऐथ्िाल ऐसीटेट की पफलों जैसी24 गंध् ब्भ्3ब्व्व्दृ आयन की उपस्िथति इंगित करती है। 2 ब्भ्ब्व्व्छं ़ भ्ैव्⎯→ छंैव् ़ 2 ब्भ्ब्व्व्भ्324 243़भ्ब्भ्3ब्व्व्भ् ़ ब्2भ्5व्भ् ⎯→ ब्भ्3ब्व्व्ब्2भ्5 ़ भ्2व्ऐथ्िाल ऐसीटेट पफलों जैसी गंध् ;खद्ध ऐसीटेट उदासीन पेफरिक क्लोराइड विलयन से अभ्िावि्रफया द्वारा संवुफल आयन बनने के कारण गहरा लाल रंग देता है। गरम करने पर संवुफल टूट जाता है और आयरन;प्प्प्द्धडाइहाइड्राॅक्सीऐसीटेट का भूरा - लाल अवक्षेप प्राप्त होता है। ,़6 ब्भ्3ब्व्व्दृ ़ 3थ्म3़ ़ 2भ्2व् ⎯→ ख्थ्म3;व्भ्द्ध2 ;ब्भ्3ब्व्व्द्ध6 ़ 2भ़् ख्थ्म3;व्भ्द्ध2 ;ब्भ्3ब्व्व्द्ध6,़ ़ 4भ्2व् ⎯→ 3ख्थ्म ;व्भ्द्ध2 ;ब्भ्3ब्व्व्द्ध, ़ 3ब्भ्3ब्व्व्भ् ़ भ़् आयरन;प्प्प्द्धडाइहाइड्राॅक्सीऐसीटेट ;भूरा - लाल अवक्षेपद्ध चरण प्प् - सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल द्वारा प्राथमिक परीक्षण यदि तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल द्वारा परीक्षण से कोइर् सकारात्मक परिणाम प्राप्त न हो तो परखनली में 0ण्1 ह लवण लेकर सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल की 3 - 4 बूँदें मिलाएं। अभ्िावि्रफया मिश्रण में होने वाले परिवतर्न का अवलोकन पहले ठंडे में करें और पिफर गरम करें। निकलने वाली गैस की पहचान करें। ;देखें सारणी 7.3द्ध। सारणी 7.3 - सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल द्वारा प्राथमिक परीक्षण प्रेक्षण तीखी गंध् वाली रंगहीन गैस निकलती है, जो अमोनियम हाइड्राॅक्साइड से भीगी कांच की छड़ परखनली के मुँह के पास लाने पर सघन और श्वेत धूम देती है। अनुमान निकली गैस / धूम भ्ब्स संभावित )णायन क्लोराइड ;ब्स दृद्ध तीखी गंध् वाली लाल - भूरी गैस निकलती है। अभ्िावि्रफया मिश्रण में ठोस डदव्2 मिलाकर गरम करने पर लालपन लिए गैस सघन हो जाती है। विलयन का रंग भी लाल हो जाता है। ठत2 के धूम ब्रोमाइड ;ठत दृद्ध बैंगनी रंग के धूम निकलते हैं जो स्टाचर् पत्रा को नीला कर देते हैं और परखनली की दीवारों पर बैंगनी रंग के उफध्वर्पातज ;ेनइसपउंजमद्ध की परत बन जाती है। अभ्िावि्रफया मिश्रण में डदव्2 मिलाने पर धूम और सघन हो जाते हैं। प्2 के धूम आयोडाइड ;प् दृद्ध भूरे धूम निकलते हैं जो अभ्िावि्रफया मिश्रण को ताँबे की छीलन मिलाकर गरम करने से सघन हो जाते हैं और विलयन नीला हो जाता है। छव्2 नाइट्रेट ;छव्3 दृद्ध रंगहीन गंध्हीन गैस निकलती है जो चूने के पानी को दूध्िया कर देती है। चूने के पानी से बाहर निकली गैस जलाने पर नीली ज्वाला से जलती है। ब्व् और ब्व्2 आॅक्सैलेट;ब्2व्4 2दृद्ध दृ3 24 सारणी 7.4 - ब्सदृए ठतदृए प्दृए छव्और ब्व्2दृ के संपुष्िट परीक्षण)णायन क्लोराइड ;ब्स दृद्ध ;कद्ध परखनली में 0ण्1 ह लवण लेकर एक चुटकी मैंगनीज डाइआॅक्साइड और 2.3 बूँदें सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल की मिलाकर अभ्िावि्रफया मिश्रण को गरम करें। हरित - पीली क्लोरीन गैस निकलती है जो तीखी गंध् और विरंजक गुण द्वारा पहचानी जाती है। ;खद्ध एक परखनली में 1 उस् सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् लेकर उसे तनु भ्छव् 3 से अम्लीवृफत करें ;या जलीय विलयन लेंद्ध और सिल्वर नाइट्रेट विलयन मिलाएं। दही जैसा श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है, जो अमोनियम हाइड्राॅक्साइड विलयन में घुलनशील होता है। ;गद्ध एक परखनली में 0ण्1 ह लवण और एक चुटकी ठोस पोटैश्िायम डाइव्रफोमेट लेकर सांद्र भ्2ैव्4 मिलाएं और गरम करें और निकलने वाली गैस को सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन में से प्रवाहित करें। यह पीला हो जाता है। विलयन को दो भागों में बाँट लें एक भाग को ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत करें और लेड ऐसीटेट विलयन मिलाएं। पीला अवक्षेप प्राप्त होता है। दूसरेभाग को सल्फ्रयूरिक अम्ल से अम्लीवृफत करें और 1 उस् ऐमिल ऐल्कोहाॅल मिलाने के बाद 1 उस्ए 10ः हाइड्रोजन पराॅक्साइड मिलाएं। हल्का सा हिलाने से काबर्निक परत नीली हो जाती है। संपुष्िट परीक्षण ब्रोमाइड ;ठत दृद्ध ;कद्ध एक परखनली में 0ण्1 ह लवण और एक चुटकी डदव् 2 लेकर 3.4 बूँदेंसांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल की मिलाकर गरम करें। सघन भूरे धूम निकलते हैं। ;खद्ध 1 उस् सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् लेकर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अम्लीवृफत करें ;या जलीय निष्कषर् लेंद्ध। 1 उस् काबर्नटेट्राक्लोराइड ;ब्ब्स4द्धध् क्लोरोपफाॅमर् ;ब्भ्ब्स3द्धध् काबर्न डाइसल्पफाइड मिलाएं। अब बूँद - बूँद करके क्लोरीन जल अध्िक्य में मिलाएं और परखनली को हिलाएं। काबर्निक परत का भूरा रंग ब्रोमीन की उपस्िथति संपुष्ट करता है। ;गद्ध 1 उस् सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् को तनु भ्छव्3 से अम्लीवृफत करें ;या 1 उस् जलीय निष्कषर् लेंद्ध और सिल्वर नाइट्रेट विलयन मिलाएं। अमोनियम हाइड्राॅक्साइड विलयन में कठिनाइर् से घुलने वाला हल्के पीले रंग का अवक्षेप प्राप्त होता है। आयोडाइड ;प् दृद्ध ;कद्ध लवण का हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अम्लीवृफत 1 उस् विलयन लेकर क्लोरोपफाॅमर् /काबर्न टेट्राक्लोराइड/काबर्न डाइसल्पफाइड मिलाएं। अब परखनली को हिलाते हुए बूँद - बूँद करके क्लोरीन जल आध्िक्य में मिलाएं। काबर्निक परत में बैंगनी रंग उत्पन्न होता है। ;खद्ध 1 उस् सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् को तनु भ्छव्3 से अम्लीवृफत करें ;या जलीय निष्कषर् लेंद्ध और सिल्वर नाइट्रेट विलयन मिलाएं। अमोनियम हाइड्राॅक्साइड विलयन में अविलेय पीले रंग का अवक्षेप प्राप्त होता है। संपुष्िट परीक्षणों का रसायन 1. क्लोराइड ख्ब्सदृ, आयन का परीक्षण ;कद्ध यदि लवण को सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ गरम करने से एक तीखी गंध् वाली रंगहीन गैस निकलती है जो अमोनिया विलयन के संपवर्फ से सघन सपेफद धूम देती है तो लवण में ब्सदृ आयन हो सकते हैं और निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफया होती है। छंब्स ़ भ्ैव्⎯→ छंभ्ैव् ़ भ्ब्स मैंगनीज 24 4सोडियम हाइड्रोजन हाइड्रोजन क्लोराइड डाइआॅक्साइड सल्पेफट रंगहीन गैस भ्ब्स ़ छभ्3 ⎯→ छभ्4ब्ससिल्वर नाइट्रेटअमोनियम क्लोराइड सपेफद धूम ;खद्ध यदि लवण सांद्र भ्2ैव्4 और डदव्2 के साथ गरम करने पर पेफन देता है और तीखी गंध् वाली हरित - पीली गैस निकलती है तो इससे आवश्यक रूप ब्सदृ आयनों की उपस्िथति इंगित होती है। डदव्2 ़ 2छंब्स ़ 2भ्2⎯→ छं2ैव्4 ़ डदैव्4 ़ 2भ्2व् ़ ब्स2ैव्4 ;गद्ध लवण के तनु भ्छव्से अम्लीवृफत विलयन में सिल्वर नाइट्रेट विलयन मिलाने पर दही जैसा3 श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है, जो अमोनियम हाइड्राॅक्साइड विलयन में घुल जाता है। यह क्लोराइड आयनों की उपस्िथति दशार्ता है। छंब्स ़ ।हछव्⎯→ छंछव् ़ ।हब्स33सिल्वर क्लोराइड ;श्वेत अवक्षेपद्ध ।हब्स ़ 2छभ्व्भ् ⎯→ ख्।ह;छभ्द्ध ,ब्स ़ 2भ्व्4322डाइऐमीनसिल्वर;प्द्ध क्लोराइड ’ यह परीक्षण पहले पेफरस सल्पेफट विलयन और बाद में सांद्र भ्ैव्विलयन मिलाकर भी किया जा सकता है।24 ;घद्ध एक परखनली में थोड़ी सी लवण की मात्रा लें और बराबर मात्रा में ठोस पोटैश्िायम डाइव्रफोमेट ;ज्ञ2ब्त2व्7द्ध तथा सांद्र भ्2ैव्4 मिलाकर परखनली को गरम करें और निकली हुइर् गैस को सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन में से प्रवाहित करें। यदि पीला विलयन प्राप्त हो तो इसे दो भागों में बाँट लें। पहले भाग को ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत करें और इसमें लेड ऐसीटेट का विलयन मिलाएं। पीले रंग का लेड व्रफोमेट का अवक्षेप बनना क्लोराइड आयनों की उपस्िथति सुनिश्िचत करता है। इस परीक्षण को व्रफोमिल क्लोराइड परीक्षण’ कहते हैं। 4छंब्स ़ ज्ञ2ब्त2व्7 ़ 6भ्2ैव्4 ⎯→ 2ज्ञभ्ैव्4 ़ 2ब्तव्2ब्स2 ़ 4छंभ्ैव्4 ़ 3भ्2व् व्रफोमिल व्रफोमिल क्लोराइड क्लोराइड ब्तव्2ब्स2 ़ 4छंव्भ् ⎯→ छं2ब्तव्4 ़ 2छंब्स ़ 2भ्2व् ;ब्भ्ब्व्व्द्धच्इ ़ छंब्तव् ⎯→ च्इब्तव् ़ 2ब्भ्ब्व्व्छं322443लेड सोडियम लेड ऐसीटेट व्रफोमेट व्रफोमेट ;पीला अवक्षेपद्ध दूसरे भाग को तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल से अम्लीवृफत करें और थोड़ी सी ऐमिल ऐल्कोहाॅल मिलाने के बाद, 10ः हाइड्रोजन पराॅक्साइड का 1 उस् विलयन मिलाएं। हल्का सा हिलाने पर काबर्निक परत नीली हो जाती है। सोडियम हाइड्राॅक्साइड और व्रफोमिल क्लोराइड की अभ्िावि्रफया में बना ब्तव्2दृ आयन हाइड्रोजन पराॅक्साइड4 ;ब्तव्5द्ध ;संरचना देखेंद्ध से अभ्िावि्रफया करके व्रफोमियम पेन्टाॅक्साइड बनता है जो ऐमिल ऐल्कोहाॅल में घुलकर नीला रंग देता है। ब्तव्2दृ ़ 2भ़् ़ 2भ्व् ⎯→ ब्त व् ़ 3भ्व्4 2252व्रफोमियम पेन्टाॅक्साइड दृ2. ब्रोमाइड आयन ;ठत द्ध का परीक्षण लवण को सांद्र भ्2ैव्4 के साथ गरम करने से लाल - भूरे रंग के ब्रोमीन के धूम अिाकता में निकलते हैं दृयह ठतआयनों की उपस्िथति इंगित करता है। डदव्मिलाने से धूम सघन हो जाते हैं। ब्रोमीन के वाष्प2 स्टाचर् पत्रा को पीला कर देते हैं। 2छंठत ़ 2भ्2ैव्4 ⎯→ ठत2 ़ ैव्2 ़ छं2ैव्4 ़ 2भ्2व् 2छंठत ़ डदव् ़ 2भ्ैव्⎯→ छंैव् ़ डदैव् ़ 2भ्व् ़ ठत224 24422 ;कद्ध लवण के जलीय विलयन अथवा सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् को तनु भ्ब्स द्वारा उदासीन करने ब्रोमीन सूंघने के बाद 1 उस् काबर्न टेट्राक्लोराइड ;ब्ब्सद्धध्क्लोरोपफाॅमर् ;ब्भ्ब्सद्ध’’ मिलाएं और ताशा बना43से अत्यध्िक क्लोरीन जल बूँद - बूँद करके मिलाएं। परखनली को अच्छी तरह हिलाएं। काबर्निक परत में ब्रोमीनविषैली होती घुलने के कारण भूरे रंग का उभरना ठत दृ आयनों की उपस्िथति सुनिश्िचत करता है।है और 2छंठत ़ ब्स2 ⎯→ 2छंब्स ़ ठत2संक्षारक है ’ व्रफोमिल क्लोराइड परीक्षण लवण की न्यूनतम मात्रा से करना चाहिए जिससे ब्त3़ आयनों से पयार्वरण को नुकसान न हो। ’’ काबर्न टेट्राक्लोराइड और क्लोरोपफाॅमर् के स्थान पर काबर्न डाइर् सल्पफाइड और डाइक्लोरोमेथेन ;ब्भ्ब्सद्ध भी काम में लाए जा सकते हैं।22;खद्ध लवण के सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् को तनु भ्छव्से अम्लीवृफत करें इसमें ।हछव्विलयन3 3 मिलाएं और परखनली को हिलाएं। हल्के पीले रंग का अवक्षेप प्राप्त होता है जो अमोनियम हाइड्राॅक्साइड मंे कठिनाइर् से घुलता है। छंठत ़ ।हछव्3 ⎯→ छंछव़् ।हठत3 सिल्वर ब्रोमाइड हल्का पीला अवक्षेप दृ3. आयोडाइड आयन ; प् द्ध के परीक्षण ;कद्ध यदि लवण को सांद्र भ्2ैव्4 के साथ गरम करने से तीखी गंध् वाले बैंगनी धूम निकलते हैं, जो स्टाचर् पत्रा को नीला कर देते है और परखनली की दीवारों पर उफध्वर्पातज जम जाता है तो इससे प्दृ आयनों की उपस्िथति इंगित होती है। वुफछ भ्प्, सल्पफर डाइआॅक्साइड, हाइड्रोजन सल्पफाइड और सल्पफर भी निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफयाओं के कारण बनती है।आयोडीन सूंघने 2छंप् ़ 2भ्ैव्⎯→ छं2ैव़् ैव्2 ़ 2भ्व् ़ प्2और त्वचा के24 42संपवर्फ में आनेप्2 ़ स्टाचर् विलयन ⎯→ नीला रंग पर हानिकारक छंप् ़ भ्ैव्⎯→ छंभ्ैव् ़ भ्प्24 4क्लोरीन सूंघने2भ्प् ़ भ्2ैव्4 ⎯→ 2भ्2व् ़ प्2 ़ ैव्2 पर विषैली 6छंप् ़ 4भ्2ैव्4 ⎯→ 3प्2 ़ 4भ्2व् ़ै ़ 3छं2ैव्4 क्लोरोपफाॅमर्8छंप् ़ 5 भ्2ैव्4 ⎯→ 4प्2 ़ भ्2ै ़ 4छं2ैव्4 ़ 4भ्2व् संूघने पर विषैली एवंअभ्िावि्रफया मिश्रण में डदव्2 मिलाने पर बैंगनी ध्ूम सघन हो जाते हैं। हानिकारक 2छंप् ़ डदव् ़ 2भ्ैव्⎯→ प् ़ डदैव् ़ छंैव् ़ 2भ्व्224 24242;खद्ध लवण का तनु भ्ब्स से उदासीन किया गया सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् अथवा जलीय विलयन लेकर 1 उस् क्लोरोपफाॅमर् ;ब्भ्ब्स3द्ध अथवा काबर्न टेट्राक्लोराइड मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं। काबर्निक परत मे बैंगनी रंग का उभरना प्दृ आयनों की उपस्िथति की संपुष्िट करता है। 2छंप् ़ ब्स2 ⎯→ 2छंब्स ़ प्2 आयोडीन के काबर्निक विलायक में घुलने से विलयन का रंग बैंगनी हो जाता है। ;गद्ध लवण के सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् को तनु भ्छव्3 से अम्लीवृफत करने के बाद ।हछव्3 विलयन मिलाएं। अमोनियम हाइड्राॅक्साइड विलयन के आध्िक्य में अघुलनशील पीले रंग का दृअवक्षेप बनना प् आयनों की उपस्िथति सुनिश्िचत करता है। छंप् ़ ।हछव्3 ⎯→ ।हप् ़ छंछव्3 सिल्वर आयोडाइड ;पीला अवक्षेपद्ध 4. नाइट्रेट आयन ख्छव् दृ, का परीक्षण3 ;कद्ध यदि लवण सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ गरम करने पर हल्के भूरे रंग के धूम देता है तो लवण में ताँबे की छीलन अथवा चिप्स और सांद्र भ्ैव्मिलाकर गरम करें। अत्यध्िक भूरे धूम24 निकलना छव्3दृ आयनों की उपस्िथति इंगित करता है। विलयन का रंग ब्नैव्4 बनने से नीला हो जाता है।काॅपर सल्पेफट छंछव् ़ भ्ैव्⎯→ छंभ्ैव् ़ भ्छव्324 43 4भ्छव्3 ⎯→ 4छव्2 ़ व्2 ़ 2भ्2व् नाइटिªक 2छंछव् ़ 4भ्ैव् ़ 3ब्न ⎯→ 3ब्नैव् ़ छंैव् ़ 4भ्व् ़2छव् 3244242अम्ल काॅपर सल्पेफट ;नीलाद्ध 2छव् ़ व्2 ⎯→ 2छव्2;भूरे ध्ूमद्धआॅक्सैलेट ;खद्ध लवण का 1 उस् जलीय विलयन अथवा सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् लेकर 2 उस् सांद्र भ्ैव्24 ध्ीरे - ध्ीरे मिलाएं। दोनों विलयनों को अच्छी तरह मिलाकर परखनली को नल के नीचे ठंडा करें। अब पेफरस सल्पेफट का ताशा बना विलयन परखनली की दीवार के सहारे बूँद - बूँद कर मिलाएं जिससे यह परखनली में उपस्िथति द्रव के उफपर एक परत बना ले। दोनों विलयनों के मिलन स्थल पर नाइट्रोसोपेफरस सल्पेफट बनने के कारण एक भूरा वलय बन जाता है ;चित्रा 7.2द्ध।वैकल्िपक रूप से पहले पेफरस सल्पेफट मिलाया जाता है और पिफर सल्फ्रयूरिक अम्ल मिलाते हैं। चित्रा 7.2 - भूरे वलय बनना छंछव्3 ़ भ्2ैव्4 ⎯→ छंभ्ैव्4 ़ भ्छव्3 6 थ्मैव्4 ़ 3भ्2ैव्4 ़ 2भ्छव्3 ⎯→ 3थ्म2 ;ैव्4द्ध3 ़ 4भ्2व् ़ 2छव् थ्मैव़् छव् ⎯→ ख्थ्म;छव्द्ध,ैव्4 4नाइट्रोसोपेफरस सल्पेफट ;भूरा रंगद्ध 5. आॅक्सैलेट आयन ख्ब्2व्2दृ, का परीक्षण4 यदि सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल द्वारा प्राथमिक परीक्षण में काबर्न डाइआॅक्साइड गैस के साथ काबर्न मोनोक्साइड गैस भी निकलती है तो यह आॅक्सैलेट आयन की उपस्िथति इंगित करती ह।ै;ब्व्व्छंद्ध2 ़ सांद्र भ्2ैव्4 ⎯→ छं2ैव्4 ़ भ्2व् ़ ब्व्2 ↑ ़ ब्व् ↑ आॅक्सैलेट निम्नलिख्िात परीक्षणों से सुनिश्िचत होता है। ;कद्ध सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् को ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत करने के बाद वैफल्िसयम क्लोराइड विलयन मिलाएं। अमोनियम आॅक्सैलेट और आॅक्सैलिक अम्ल के विलयन में अविलेय श्वेत अवक्षेप प्राप्त होना आॅक्सैलेट आयन की उपस्िथति इंगित करता है।ब्ंब्स ़ छंब्व् ⎯→ ब्ंब्व् ़ 2छंब्स 222424वैफल्िशयम आॅक्सैलेट ;श्वेत अवक्षेपद्ध ;खद्ध ज्ञडदव्परीक्षण4 परीक्षण ;कद्ध से प्राप्त अवक्षेप को निस्यंदित करने के बाद उसमें तनु भ्2ैव्4 विलयन मिलने के बाद तनु ज्ञडदव्विलयन मिलाएं और गरम करें। ज्ञडदव्का गुलाबी रंग विलुप्त हो4 4 जाता है। ब्ंब्2व्4 ़ भ्2ैव्4 ⎯→ ब्ंैव्4 ़ भ्2ब्2व्4वैफल्िसयम सल्पेफट आॅक्सैलिक अम्ल 2 ज्ञडदव्4 ़ 3भ्2ैव्4 ़ 5भ्2ब्2व्4 ⎯→2डदैव्4 ़ ज्ञ2ैव्4 ़ 8भ्2व् ़ 10ब्व्2 निकली हुइर् गैस को चूने के पानी में से प्रवाहित करने से श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है जो अिाक समय तक गैस प्रवाहित करने से घुल जाता है। चरण प्प्प् - सल्पेफट एवं पफाॅस्प़्ोफट का परीक्षण़यदि प् और प्प् चरण मंे कोइर् सकारात्मक परिणाम नहीं प्राप्त होता तो सल्पेफट और पफाॅस्प़्ोफट आयनों के परीक्षण़किए जाते हैं। यह परीक्षण सारणी 7.5 में संक्षेप में दिए हैं। संपुष्िट परीक्षणों का रसायन 1. सल्पेफट ख्ैव्2दृ, आयन का परीक्षण4 ;कद्ध ऐसीटिक अम्ल द्वारा अम्लीवृफत लवण का जलीय विलयन अथवा सोडियम काबोर्नेट निष्कषर्, बेरियम क्लोराइड मिलाने पर सांद्र भ्ब्स या सांद्र भ्छव्में अविलेय बेरियम सल्पेफट का अवक्षेप3 देता है। छंैव् ़ ठंब्स ⎯→ ठंैव् ़ 2छंब्स2424बेरियम सल्पेफट ;श्वेत अवक्षेपद्ध ;खद्ध जब ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत जलीय विलयन अथवा सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् में लेड ऐसीटेट मिलाया जाता है तो लेड सल्पेफट का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है। छंैव् ़ ;ब्भ्ब्व्व्द्धच्इ ⎯→ च्इैव् ़ 2ब्भ्ब्व्व्छं243243लेड सल्पेफट ;श्वेतअवक्षेपद्ध ़़3दृ2. पफाॅस्पेफट ख्च्व्4 , ;कद्ध पफास्प़्ोफट आयन युक्त परीक्षण विलयन में सांद्र नाइटिªक अम्ल और अमोनियम मोलिब्डेट विलयऩमिलाकर उबालें। विलयन में पीला रंग अथवा अमोनियम प़्द्ध3व्10द्ध4,ाफास्पफोमोलिब्डेट ;छभ्4ख्च् ;डव3का वैफनेरी - पीत रंग अथवा वैफनेरी - पीत अवक्षेप बनता है। प़़्ाफास्पेफट की प्रत्येक आॅक्सीजन डव3व्10 समूह से विस्थापित हो जाती है। छंभ्च्व् ़ 12;छभ्द्ध डवव् ़ 23 भ्छव्⎯→ ;छभ्द्धख्च् ;डवव्द्ध, ़ 2छंछव़् 21छभ्छव् ़ 12भ्व्244243 4331043 432अमोनियम प़़्ाफास्पफोमोलिब्डेट ;वैफनेरी - पीत अवक्षेपद्ध ध्नायनों का विश्लेषण निम्नलिख्िात योजना के अनुसार किया जा सकता है। चरण प् - ध्नायन की पहचान लिए लवण का प्राथमिक परीक्षण 1. रंग परीक्षण लवण का रंग ध्यानपूवर्क देखें। यह ध्नायनों के संबंध् में महत्वपूणर् जानकारी दे सकता है। सारणी 7.6 में वुफछ ध्नायनों के लवणों के अभ्िालक्षण्िाक रंग दिए हैं। 2. शुष्क गरम करने का परीक्षण ;पद्ध एक सापफ और सूखी परखनली में 0ण्1 ह शुष्क लवण लें। ;पपद्ध उपरोक्त परखनली को लगभग एक मिनट तक गरम करें और अवशेष के रंग का अवलोकन करें जब यह गरम हो और पिफर जब यह ठंडा हो जाए। परिवतर्न के प्रेक्षण ध्नायनों की उपस्िथति के विषय में सूचना देते हैंऋ इन्हें निणार्यक संकेत नहीं मानना चाहिए ;देखें सारणी 7.7द्ध। 3. ज्वाला परीक्षण कइर् धतुओं के क्लोराइड ज्वाला को अभ्िालक्षण्िाक रंग प्रदान करते हैं क्योंकि यह अदीप्त ;दवद.सनउपदवनेद्ध ज्वाला में वाष्पशील होते हैं। यह परीक्षण प्लैटिनम के तार की सहायता से निम्नलिख्िात प्रकार से किया जाता है। ;पद्ध प्लैटिनम के तार के सिरे पर एक छोटा सा छल्ला बनाएं। ;पपद्ध छल्ले को सापफ करने के लिए इसे सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डुबोएं और इसे अदीप्त ज्वाला में रखें ;चित्रा 7.3द्ध। ;पपपद्ध पद - ;पपद्ध को तब तक दोहराएं जब तक तार ज्वाला को रंग प्रदान करना बंद न कर दे। ;पअद्ध एक सापफ वाॅच ग्लास में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की 2 - 3 बूँदें लेकर उसमें लवण की थोड़ी सी मात्रा़से लेप ;पेस्टद्ध बनाएं। ;अद्ध प्लैटिनम के तार के सापफ किए गए छल्ले को पेस्ट में डुबा कर अदीप्त ;आॅक्सीकारकद्ध ज्वाला में़ले जाएं ;चित्रा 7.3 गद्ध ;अपद्ध पहले ज्वाला के रंग को यूँ ही देखें और पिफर नीले काँच में से देखें और सारणी 7.8 की सहायता से धतु आयन की पहचान करें। चित्रा 7.3 - ज्वाला परीक्षण करना 4. बोरेक्स मनका परीक्षण यह परीक्षण केवल रंगीन लवणों के लिए किया जाता है, क्योंकि बोरेक्स धतु लवणों के साथ अभ्िावि्रफया करके धतु बोरेट या धतु बनाता है जिनके अभ्िालक्षण्िाक रंग होते हैं। ;पद्ध यह परीक्षण करने के लिए प्लैटिनम के तार के एक सिरे पर छल्ला बनाएं और ज्वाला में तब तक गरम करें जब तक यह तप्त लाल न हो जाए। ;पपद्ध गरम छल्ले को बोरेक्स पाउडर में डुबोएं और दोबारा तब तक गरम करें जब तक बोरेक्स छल्ले पर रंगहीन पारदशीर् मनका न बना ले। बोरेक्स के मनके को लवण में डुबोने से पहले सुनिश्िचत कर लें कि मनका रंगहीन और पारदशीर् है। यदि यह रंगीन है तो इसका अथर् यह है कि प्लैटिनम का तार सापफ नहीं है। तब तार को साप़्ाफ करने के बाद दोबारा मनका बनाएं। ;पपपद्ध मनके को शुष्क लवण की थोड़ी सी मात्रा में डुबाकर दोबारा ज्वाला में ले जाएं। ;पअद्ध मनके के रंग को अदीप्त और दीप्त ज्वाला में तथा जब यह गरम हो और जब ठंडा हो, देखें ;चित्रा 7.4द्ध। चित्रा 7.4 - बोरेक्स मनका परीक्षण - ;अद्ध प्लैटिनम तार से मनका निकालने के लिए इसे लाल ;कद्ध अपचायी ज्वाला में गरम होने तक गरम करें और प्लैटिनम तार को उंगली से करना। ;खद्ध आॅक्सीकारक थपकी दें ;चित्रा 7.5द्ध। ज्वाला में गरम करना। बोरेक्स को गरम करने से यह वि्रफस्टलन जल को छोड़ देता है और सोडियम मेटाबोरेट और बोरिक ऐनहाइड्राइड में अपघटित हो जाता है। छंठव् ण्10भ्व् ⎯→ छंठव् ़ 10भ्व्2 4 7 2 2 4 7 2 बोरेक्स छं2ठ4व्7 ⎯→2छंठव्2 ़ ठ2व्3 सोडियम मेटाबोरेट बोरिक ऐनहाइड्राइड धतु लवण के साथ ऐनहाइड्राइड धतु का मेटाबोरेट बनाता है जो आॅक्सीकारक और अपचायी ज्वाला में अलग - अलग रंग देता है। काॅपर सल्पेफट के उदाहरण में निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफयाएं होती हैं। अदीप्त ज्वालाब्नैव् ़ ठ व् ⎯⎯⎯⎯⎯⎯ब्न;ठव् द्ध ़ ैव्→423 22 3 काॅपर मेटाबोरेट ;नीला - हराद्ध अपचायी ज्वाला में दो अभ्िावि्रफयाएं संभव हैं - ;पद्ध नीला ब्न;ठव्द्ध, रंगहीन क्यूप्रस मेटाबोरेट में निम्नलिख्िात प्रकार से अपचित हो जाता है।22 दीप्त ज्वाला2ब्न;ठव् द्ध ़ 2छंठव् ़ ब्⎯⎯⎯⎯⎯→ 2ब्नठव् ़ छंठव् ़ ब्व्22 2 2247 अथवा ;पपद्ध क्यूपि्रक मेटाबोरेट धत्िवक काॅपर में अपचित हो सकता है और मनका लाल और अपारदशीर् प्रतीत होता है। दीप्त ज्वाला2ब्न;ठव् द्ध ़ 4छंठव् ़ 2ब्⎯⎯⎯⎯⎯→ 2ब्ऩ 2छं ठ व् ़ 2ब्व्222 247 धतु आयन की प्राथमिक पहचान सारणी 7.9 द्वारा की जा सकती है। चित्रा 7.5 - बोरेक्स मनका हटाना सारणी 7.9 - बोरेक्स मनका परीक्षण से अनुमान आॅक्सीकारक ज्वाला ;अदीप्त ज्वालाद्ध में गरम करना अपचायी ज्वाला ;दीप्त ज्वालाद्ध में गरम करना लवण मनके का रंग लवण मनके का रंग ठंडे में नीला भूरा - लाल हल्का बैंगनी पीला गरम होने पर हरा बैंगनी हल्का बैंगनी पीला - भूरा ठंडे में अपारदशीर् लाल सलेटी रंगहीन हरा गरम होने पर रंगहीन सलेटी रंगहीन हरा अनुमान ब्न2़ छप2़ डद2़ थ्म3़ 5. चारकोल कोटरिका परीक्षण धत्िवक काबोर्नेट चारकोल कोटरिका में गरम करने पर संगत आॅक्साइडों में विघटित हो जाते हैं। आॅक्साइड कोटरिका में एक रंगीन अवशेष जैसा प्रतीत होता है। कभी - कभी चारकोल कोटरिका के काबर्न द्वारा आॅक्साइड धतु में अपचित हो जाता है। परीक्षण को निम्नलिख्िात प्रकार से किया जा सकता हैμ ;पद्ध चारकोल के ब्लाॅक में चारकोल बेध्क की सहायता से छोटी सी कोटरिका बनाएं। दबाव न डालें अन्यथा यह टूट जाएगी ;चित्रा 7.6 कद्ध। ;पपद्ध कोटरिका को लगभग 0ण्2 ह लवण और 0ण्5 ह निजर्ल सोडियम काबोर्नेट के मिश्रण से भरें। ;कद्ध ;खद्ध चित्रा 7.6 - ;कद्ध चारकोल कोटरिका बनाना ;खद्ध लवण को कोटरिका में गरम करना ;पपपद्ध कोटरिका के लवण को एक - दो बूँद जल से गीला करें अन्यथा लवण/मिश्रण उड़ जाएगा। ;पअद्ध लवण को दीप्त ;अपचायीद्ध ज्वाला में गरम करने के लिए पूँफकनी ;ब्लोपाइपद्ध का प्रयोग करें और कोटरिका में बने आॅक्साइड/धत्िवक मनके के रंग का अवलोकन गरम रहने पर और ठंडा होने पर करें ;चित्रा 7.6 खद्ध। आॅक्सीकारक और अपचायी ज्वाला चित्रा 7.7 ‘क’ एवं ‘ख’ में दिखलाए के अनुसार प्राप्त करें। नोट - ऽ आॅक्सीकारक ज्वाला प्राप्त करने के लिए पूँफकनी की नाॅशल लगभग एक तिहाइर् ज्वाला के अन्दर रखें। ऽ अपचायी ज्वाला प्राप्त करने के लिए पूँफकनी की नाॅशल को बाहर रखें। ;कद्ध ;खद्ध चित्रा 7.7 - आॅक्सीकारक एवं अपचायी ज्वाला प्राप्त करना ;कद्ध अपचायी ज्वाला ;खद्ध आॅक्सीकारक ज्वाला ;अद्ध नए लवण के परीक्षण के लिए सदैव नयी कोटरिका बनाएं। ब्नैव्4 से परीक्षण करने पर निम्नलिख्िात परिवतर्न होते हैं। तापन ब्नैव्4 ़ छं2ब्व्3 ⎯⎯⎯→ब्नब्व्3 ़ छं2 ैव्4 तापनब्नब्व्3 ⎯⎯⎯→ ब्नव् ़ ब्व्2 तापनब्नव् ़ ब् ⎯⎯⎯→ ब्न ़ ब्व्लाल रंग र्दैव्4 के केस में - तापन र्दैव्4 ़ छं2ब्व्3 ⎯⎯⎯→र्दब्व्3 ़ छं2 ैव्4 तापनर्दब्व्3 ⎯⎯⎯→ र्दव् ़ ब्व्2गरम रहने पर पीला, ठंडा होने पर श्वेत धत्िवक आयन का अनुमान सारणी 7.10 से लगाया जा सकता है। 6. कोबाल्ट नाइट्रेट परीक्षण यदि चारकोल कोटरिका का अवशेष श्वेत हो तो कोबाल्ट नाइट्रेट परीक्षण किया जाता है। ;पद्ध अवशेष में दो या तीन बूँदें कोबाल्ट नाइट्रेट विलयन की मिलाएं। ;पपद्ध इसे अदीप्त ज्वाला में एक पूँफकनी की सहायता से गरम करें और अवशेष के रंग का अवलोकन करें। गरम करने पर कोबाल्ट नाइट्रेट, कोबाल्ट ;प्प्द्ध आॅक्साइड में विघटित हो जाता है जो कोटरिका में उपस्िथत धत्िवक लवण के साथ अभ्िालक्षण्िाक रंग देता है। इस प्रकार से र्दव्ए ।स2व्3 और डहव् के साथ निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफयाएं होती हैं। तापन 32 ⎯⎯⎯→ 2ब्वव़् 4छव् 2 ़ व् 22ब्व;छव् द्ध ब्वव् ़ र्दव् ⎯→ ब्वव्ण्र्दव्हरा ब्वव् ़ डहव् ⎯→ ब्वव्ण् डहव्गुलाबी ब्वव् ़ ।सव्⎯→ ब्वव्ण् ।सव्23 23नीला चरण प्प् - ध्नायनों की पहचान के लिए आद्रर् परीक्षण ;ॅमज जमेजेद्ध उपरोक्त प्राथमिक परीक्षणों में सूचित क्षारकीय मूलक निम्नलिख्िात व्रफमब( विश्लेषण द्वारा सुनिश्िचत किए जाते हैं। प्रथम आवश्यक चरण, लवण का पारदशीर् विलयन बनाना है। इसे मूल विलयन कहते हैं। यह निम्नलिख्िात प्रकार से बनाया जाता है - मूल विलयन बनाना मूल विलयन बनाने के लिए व्रफमवार एक के बाद एक निम्नलिख्िात पद अपनाए जाते हैं। यदि लवण किसी विशेष विलायक में गरम करने पर भी नहीं घुलता तो अगला विलायक आजमाया जाता है। निम्नलिख्िात विलायकों को आजमाया जाता है - 1.सापफ क्वथन नली में थोड़ा - सा लवण लेकर उसमें वुफछ़उस् आसुत जल मिलाकर हिलाएं। यदि लवण न घुले तो क्वथन नली की सामग्री को तब तक गरम करें जब तक लवण पूणर्तः न घुल जाए। 2.यदि लवण उपरोक्त विवरण के अनुसार जल में न घुले तो सापफ परखनली में पिफर से लवण लेकर उसमें वुफछ उस् तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के मिलाएं। यदि लवण ठंडे में न घुले तो क्वथन नली को लवण के पूणर्तः घुलने तक गरम करें। 3.यदि लवण जल अथवा तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में गरम करने पर भी न घुले तो इसे वुफछ उस् सांद्र भ्ब्स में गरम करके घोलने का प्रयास करें। 4.यदि लवण सांद्र भ्ब्स में न घुले तो इसे तनु नाइटिªक अम्ल में घोलें। 5.यदि लवण नाइटिªक अम्ल में भी नहीं घुलता तो सांद्र भ्ब्स और सांद्र भ्छव् के 3ः1 मिश्रण में3घोलने का प्रयास करें। यह मिश्रण ऐक्वारेजिया कहलाता है। ऐक्वा रेजिया में न घुलने वाले लवण को अघुलनशील लवण माना जाता है। समूह विश्लेषण ;प्द्ध शून्य समूह के ध्न आयन ;छभ़् आयनद्ध का विश्लेषण4 ;कद्ध परखनली में 0ण्1 ह लवण लेकर इसमें 1.2 उस्ए छंव्भ् विलयन मिलाएं और गरम करें। यदि अमोनिया की गंध् आए तो यह अमोनियम आयनों की उपस्िथति की सूचना देती है। परखनली के मुँह के पास हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से भीगी एक काँच की छड़ लाएं। सप़्ोफद ध्ूम दिखाइर् पड़ते हैं। ;खद्ध गैस को नेस्लर अभ्िाकमर्क में से प्रवाहित करें। भूरा अवक्षेप प्राप्त होता है। छभ़्4 आयन के संपुष्िट परीक्षण का रसायन ;कद्ध सोडियम हाइड्राॅक्साइड की अमोनियम लवण पर वि्रफया से निकली अमोनिया गैस हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभ्िावि्रफया करके अमोनियम क्लोराइड देती है जिसके श्वेत रंग के घने ध्ूम दिखाइर् देते हैं। ;छभ्4द्ध2 ैव्4 ़ 2छंव्भ् ⎯→ छं2ैव्4 ़ 2छभ्3 ़ 2भ्2व् छभ्3 ़ भ्ब्स → छभ्ब्स4नेस्लर अभ्िाकमर्क में से गैस को प्रवाहित करने पर क्षारकीय मरक्यूरी ;प्प्द्ध ऐमीडो - आयोडीन का भूरा रंग या अवक्षेप प्राप्त होता है। मरक्यूरी 2ज्ञभ्हप् ़ छभ् ़ 3ज्ञव्भ् ⎯→ भ्हव्ण्भ्ह;छभ्द्धप् ़ 7ज्ञप् ़ 2भ्व्24322लवणक्षारकीय मरक्यूरी ;प्प्द्ध ऐमीडो - आयोडीन ;भूरा अवक्षेपद्ध प् से टप् तक समूहांे के क्षारकीय मूलकों के विश्लेषण के लिए प्रवाह संचित्रा में दशार्इर् गइर् व्यवस्था के अनुसार अभ्िाकमर्कों का प्रयोग करके ध्नायन मूल विलयन से अवक्षेपित कर लिए जाते हैं। ;देखें सारणी 7.11द्ध। छः समूहों के ध्नायनों को पृथक करना निम्नलिख्िात प्रकार से प्रदश्िार्त किया गया है। प्रवाह संचित्रा’ ’ यह प्रवाह संचित्रा केवल एक ध्नायन ज्ञात करने के लिए है। एक से अध्िक ध्नायन ज्ञात करने के लिए इसमें परिवतर्न की आवश्यकता होगी। ;प्प्द्ध समूह - प् के ध्नायन का विश्लेषण एक परखनली में मूल विलयन की थोड़ी सी मात्रा लें ;यदि गरम सांद्र भ्ब्स में बनाया होद्ध और ठंडा जल मिलाने के बाद परखनली को नल के नीचे ठंडा करें। यदि श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है तो यह च्इ2़ आयनों की उपस्िथति दशार्ता है। दूसरी ओर यदि मूल विलयन जल में बनाया गया हो और तनु भ्ब्स मिलाने पर श्वेत अवक्षेप प्राप्त हो, तब भी यह च्इ2़ आयनों की उपस्िथति दशार्ता है। संपुष्िट परीक्षणों का विवरण सारणी 7.12 में दिया गया है। च्इ2़ आयन के संपुष्िट परीक्षण का रसायन लेड प्रथम समूह में लेड क्लोराइड के रूप में अवक्षेपित होता है। अवक्षेप गरम जल में घुलनशील होता है। 1.पोटैश्िायम आयोडाइड ;ज्ञप्द्ध मिलाने पर, लेड आयोडाइड का पीला अवक्षेप प्राप्त होता है जो च्इ2़ आयनों की उपस्िथति की संपुष्िट करता है। यह पीला अवक्षेप ;च्इप्द्ध उबलते हुए जल2में घुल जाता है और ठंडा करने पर चमकदार वि्रफस्टलों के रूप में पुनः प्रकट हो जाता है। च्इब्स ़ 2ज्ञप् ⎯→ च्इप् ़ 2ज्ञब्स22;गरम विलयनद्ध पीला अवक्षेप ’ यहाँ केवल वे ही ध्नायन दिए हैं, जो पाठ्यव्रफम में हैं। 2.पोटेश्िायम व्रफोमेट ;ज्ञब्तव्द्ध विलयन मिलाने पर लेड व्रफोमेट का पीला अवक्षेप प्राप्त होता24है। यह च्इ2़ आयनों की उपस्िथति की संपुष्िट करता है।च्इब्स2 ़ ज्ञ2ब्तव्4 ⎯→ च्इब्तव्4 ़ 2ज्ञब्स;गरम विलयनद्ध लेड व्रफोमेट ;पीला अवक्षेपद्ध पीला अवक्षेप ;च्इब्तव्द्ध गरम छंव्भ् विलयन में घुलनशील होता है।4च्इब्तव् ़ 4छंव्भ् छंख्च्इ;व्भ्द्ध, ़ छंब्तव्42424सोडियम टेट्राहाइड्राॅक्सीप्लम्बेट;प्प्द्ध 3.ऐल्कोहाॅल के बाद तनु भ्ैव्मिलाने पर लेड सल्पेफट ;च्इैव्द्ध का श्वेत अवक्षेप प्राप्त24 4होता है। च्इब्स2 ़ भ्2⎯→ च्इैव्4 ़ 2 भ्ब्सैव्4 लेड सल्पेफट ;श्वेत अवक्षेपद्ध टेट्राऐसीटोप्लम्बेट;प्प्द्ध आयन बनने के कारण लेड सल्पेफट, अमोनियम ऐसीटेट विलयन में घुलनशील होता है। ऐसीटिक अम्ल की वुफछ बूँदें मिला देने से अभ्िावि्रफया प्रवतिर्त होती है। च्इैव्4 ़ 4 ब्भ्3ब्व्व्छभ्4 ⎯→ ;छभ्4द्ध2 ख्च्इ;ब्भ्3ब्व्व्द्ध4, ़ ;छभ्4द्ध ैव्4 अमोनियम टेट्राऐसीटोप्लम्बेट ;प्प्द्ध ;प्प्प्द्ध समूहदृप्प् के ध्नायनों का विश्लेषण यदि ग्रुप - प् अनुपस्िथत हो तो उसी परखनली में जल आध्िक्य में मिलाएं। विलयन को गरम करने के बाद हाइड्रोजन 1 - 2 मिनट तक उसमें से भ्2ै गैस प्रवाहित करें ;चित्रा 7.6द्ध। यदि कोइर् अवक्षेप प्राप्त हो तो यह समूह - प्प् सल्पफाइड के ध्नायनों की उपस्िथति को इंगित करता है। संपूणर् अवक्षेपण सुनिश्िचत करने के लिए विलयन में से और अिाक भ्ै गैस प्रवाहित करें। यदि अवक्षेप का रंग काला हो तो यह2ब्न2़ अथवा च्इ2़ आयनों की उपस्िथति इंगित करता है। यदि यह पीले रंग का हो तो ।े3़ आयनों की उपस्िथति इंगित होती है। गु्रप - प्प् के अवक्षेप को एक परखनली में लेकर इसमें पीत अमोनियम सल्पफाइड ;लमससवू ंउउवदपनउ ेनसचीपकमद्ध का विलयन आध्िक्य में मिलाएं। परखनली को हिलाएं, यदि अवक्षेप अघुलनशील हो तो समूह - प्प्.। ;काॅपर समूहद्ध उपस्िथत है। यदि अवक्षेप घुलनशील हो तो यह गु्रप - प्प्.ठ ;आसेर्निक समूहद्ध की उपस्िथति इंगित करता है। समूह - प्प् । और प्प् ठ के संपुष्िट परीक्षण सारणी 7.13 में दिए गए हैं। चित्रा 7.8 - भ्ै गैस बनाने के लिए किप उपकरण2सारणी 7.13 - समूह - प्प् । और प्प् ठ के ध्नायनों के संपुष्िट परीक्षण समूह - प्प् । के ध्नायनों ;चइ2़ए ब्न2़द्ध का पीत अमोनियम सल्पफाइड में अघुलनशील काला अवक्षेप प्राप्त होता है। यदि पीत अमोनियम सल्पफाइड में घुलनशील पीला अवक्षेप प्राप्त होता है तो ।े3़ आयन उपस्िथत है। समूह - प्प् । के अवक्षेप को तनु नाइटिªक अम्ल में घोलने के बाद वुफछ बूँदें ऐल्कोहाॅल की और तनु भ्2ैव्4 को मिलाएं। विलयन को तनु भ्ब्स से अम्लीवृफत करें। एक पीला अवक्षेप बनता है। अवक्षेप को सांद्र नाइटिªक अम्ल के साथ गरम करें और अमोनियम माॅलिब्डेट विलयन मिलाएं। वैफनरीपीत अवक्षेप प्राप्त होता है। यदि कोइर् अवक्षेप प्राप्त नहीं होता तो अमोनियम हाइड्राॅक्साइड विलयन को आध्िक्य में मिलाएं। नीले रंग का विलयन प्राप्त होता है। इसे ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत करें और पोटेश्िायम पैफरोसायनाइड विलयन मिलाएं। चाकलेटी भूरा अवक्षेप प्राप्त होता है। श्वेत अवक्षेप च्इ2़ आयनों की उपस्िथति संपुष्ट करता है। अवक्षेप को अमोनियम ऐसीटेट विलयन में घोल लें। ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत करें और विलयन को दो भागों में बाँट लें। ;पद्ध पहले भाग में पोटेश्िायम व्रफोमेट विलयन मिलाएं, इससे पीला अवक्षेप बनता है। ;पपद्धदूसरे भाग में पोटेश्िायम आयोडाइड विलयन मिलाएं, इससे पीला अवक्षेप प्राप्त होता है। समूह.प्प् । ;काॅपर समूहद्ध समूह.प्प् । के ध्नायनों के संपुष्िट परीक्षणों का रसायन 1. लेड;च्इ2़ द्ध आयन का परीक्षण अवक्षेपित लेड सल्पफाइड तनु भ्छव्में घुल जाता है। इस विलयन में तनुभ्ैव्और ऐल्कोहाॅल की वुफछ3 24 बूँदें मिलाने पर लेड सल्पेफट का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है। यह लेड आयनों की उपस्िथति इंगित करता है। 3च्इै ़ 8भ्छव् ⎯→ 3च्इ ;छव्द्ध ़ 2छव् ़ 4भ्व् ़ 3ै3322ऐल्कोहाॅल च्इ;छव्द्ध ़ भ्ैव्⎯→ च्इैव् ़ 2भ्छव्3224 43 श्वेत अवक्षेप अमोनियम ऐसीटेट विलयन के साथ उबालने से घुल जाता है। जब इस विलयन को ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत किया जाता है और पोटेश्िायम व्रफोमेट विलयन मिलाया जाता है तो च्इब्तव्का पीला4 अवक्षेप बनता है। पोटेश्िायम आयोडाइड विलयन मिलाने पर लेड आयोडाइड का पीला अवक्षेप प्राप्त होता है। च्इैव् ़ 4ब्भ्ब्व्व्छभ्⎯→ ;छभ्द्धख्च्इ ;ब्भ्ब्व्व्द्ध, ़ ;छभ्द्धैव्434 4234424 अमोनियम टेट्राऐसीटोप्लम्बेट;प्प्द्ध दृ च्इ2़ ़ ब्तव्42दृ ⎯→ च्इब्तव्4 च्इ2़ ़ 2प् ⎯→ च्इप्2 लेड व्रफोमेट लेड आयोडाइड ;पीला अवक्षेपद्ध ;पीला अवक्षेपद्ध 2. काॅपर ;ब्न2़द्ध आयन का परीक्षण ;कद्ध काॅपर नाइट्रेट बनने के कारण काॅपर सल्पफाइड नाइटिªक अम्ल में घुल जाता है। 3ब्नै ़ 8भ्छव्⎯→ 3ब्न;छव्द्ध ़ 2छव् ़ 3ै ़ 4भ्व्3322अध्िक समय तक गरम करने से सल्पफर, सल्प़़्ेोफट ़ाफट में आक्सीवृफत हो जाता है और काॅपर सल्प्बनता है तथा विलयन नीला हो जाता है। छभ्व्भ् की थोड़ी सी मात्रा क्षारकीय काॅपर सल्पेफट ़4अवक्षेपित कर देती है जो टेट्राऐमीनकाॅपर;प्प्द्ध संवुफल बनने के कारण अमोनियम हाइड्राॅक्साइड में घुल जाता है। ै ़ 2भ्छव्⎯→ भ्ैव् ़ 2छव्3 242दृ़2ब्न2़़ ैव्4 ़ 2छभ्3 ़ 2भ्2व् ⎯→ ब्न;व्भ्द्ध2ण् ब्नैव्4़ 2छभ्4 ब्न;व्भ्द्धण्ब्नैव् ़ 8छभ्⎯→ 2 ख्ब्न;छभ्द्ध,ैव् ़ 2व्भ्दृ ़ ैव्2दृ 243 3444 टेट्राऐमीनकाॅपर;प्प्द्धसल्पेफट ;गहरा नीलाद्ध ;खद्ध नीला विलयन ऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफत करने के बाद पोटैश्िायम पेफरोसायनाइड, ख्ज्ञथ्म;ब्छद्ध,46विलयन मिलाने पर काॅपर पेफरोसायनाइड बनने के कारण चाॅकलेटी रंग देता है। ख्ब्न;छभ्द्ध, ैव् ़ 4ब्भ्ब्व्व्भ्⎯→ ब्नैव् ़ 4ब्भ्ब्व्व्छभ्3443434 2ब्नैव्4 ़ ज्ञ4ख्थ्म;ब्छद्ध6, ⎯→ ब्न2ख्थ्म;ब्छद्ध6, ़ 2ज्ञ2ैव्4 पोटैश्िायम काॅपर हेक्सासायनोपेफरेट;प्प्द्ध हेक्सासायनोपेफरेट;प्प्द्ध ;चाॅकलेट - भूरा अवक्षेपद्ध समूह.प्प् ठ ;आसेर्निक समूहद्ध यदि गु्रप - प्प् का अवक्षेप पीत अमोनियम सल्पफाइड में घुल जाए और विलयन का रंग पीला हो तो यह़।े3़ आयनों की उपस्िथति प्रदश्िार्त करता है। ।े2ै3 के घुलने से बना अमोनियम थायोआसेर्नाइड तनु भ्ब्स से विघटित हो जाता है और आसेर्निक ;टद्ध सल्पफाइड का पीला अवक्षेप बनता है, जो सांद्र नाइटिªक अम्ल में गरम ़करने पर आसेर्निक अम्ल बनने के कारण घुल जाता है। अभ्िावि्रफया मिश्रण में अमोनियम मोलिब्डेट विलयन मिलाकर गरम करने से वैफनेरी - पीत अवक्षेप बनता है। यह ।े3़ आयनों की उपस्िथति की संपुष्िट करता है। ।ेै ़ 3 ;छभ्द्धै⎯→ 2 ;छभ्द्ध।े ै ़ ै23422 434पीत अमोनियम सल्पफाइड 2;छभ्द्ध।ेै़ 6भ्ब्स ⎯→ ।ेै ़ 3भ्ै ़ 6छभ्ब्स43425243।े2ै5 ़ 10भ्छव्3 ़ 4भ्2व् ⎯→ 6भ्3।ेव्4 ़ 10छव् ़ 15ै आसेर्निक अम्ल ।ेव्4 ़ 12;छभ्4 डवव्4 ़ 21भ्छव्3 ⎯→ ;छभ्4ख्।े ;डव3 , ़ 21छभ्4 ़ 12भ्2व्भ्3द्ध2द्ध3व्10द्ध4छव्3 आसेर्निक अम्ल अमोनियम मोलिब्डेट अमोनियम आसीर्नोमोलिब्डेट ;पीला अवक्षेपद्ध ;प्टद्ध समूहदृप्प्प् के ध्नायनों का विश्लेषण यदि समूह - प्प् अनुपस्िथत हो तो थ्म2़ आयनों को थ्म3़ आयनों में परिवतिर्त करने के लिएमूल विलयन लेकर सांद्र भ्छव्3 की 2 - 3 बूँदें मिलाएं। विलयन को वुफछ मिनट तक गरम करें। ठंडा करने के बाद थोड़ा सा ठोस अमोनियम क्लोराइड ;छभ्ब्सद्ध और अमोनियम हाइड्राॅक्साइड ;छभ्व्भ्द्ध विलयन अमोनिया की गंध 44आने तक आध्िक्य में मिलाएं। परखनली को हिलाएं। यदि भूरा अथवा श्वेत अवक्षेप बने तो यह समूह - प्प्प् के ध्नायनों की उपस्िथति इंगित करता है। समूह - प्प्प् के ध्नायनों के संपुष्िट परीक्षण सारणी 7.14 में संक्षेप में दिए हैं। अवक्षेप के रंग एवं प्रवृफति का अवलोकन करें। श्वेत रंग का जिलेटनी अवक्षेप ऐलुमिनियम आयनों ;।स3़ द्ध की उपस्िथति दशार्ता है। यदि अवक्षेप भूरे रंग का हो तो यह पेफरिक आयनों ;थ्म3़द्ध की उपस्िथति दशार्ता है। समूह.प्प्प् के ध्नायनों के संपुष्िट परीक्षणों का रसायन जब मूल विलयन को सांद्र नाइटिªक अम्ल के साथ गरम किया जाता है तो पेफरस आयन पेफरिक आयनों में आॅक्सीवृफत हो जाते हैं। 2थ्मब्स ़ 2भ्ब्स ़ ख्व्, ⎯→ 2थ्मब्स ़ भ्व्232तृतीय समूह के ध्नायन अपने हाइड्राॅक्साइड के रूप में अवक्षेपित होते हैं। समकक्ष क्लोराइड बनने के कारण अवक्षेप तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुल जाता है। 1. ऐलुमिनियम ;।13़द्ध आयनों का परीक्षण ;कद्ध जब ऐलुमिनियम क्लोराइड युक्त विलयन की वि्रफया सोडियम हाइड्राॅक्साइड से होती है तो ऐलुमिनियम हाइड्राॅक्साइड का श्वेत जिलेटिनी अवक्षेप बनता है, जो सोडियम मेटाऐलुमिनेट बनने के कारण सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन के आिाक्य में घुल जाता है। ।सब्स ़ 3छंव्भ् ⎯→ ।स;व्भ्द्ध ़ 3छंब्स3 3।स;व्भ्द्ध3 ़ छंव्भ् ⎯→ छं।सव्2 ़ 2भ्2व्श्वेत जिलेटिनी अवक्षेप सोडियम मेटाऐलुमिनेट ;खद्ध दूसरे परीक्षण में जब विलयन में नीला लिटमस मिलाया जाता है तो विलयन की अम्लीय प्रवृफति के कारण लाल रंग प्राप्त होता है। बूँद - बूँद कर छभ्4व्भ् विलयन मिलाने से यह विलयन क्षारकीय हो जाता है और ऐलुमिनियम हाइड्राॅक्साइड अवक्षेपित हो जाता है। ऐलुमिनियम हाइड्राॅक्साइड का अवक्षेप विलियन में से नीला रंग अध्िशोष्िात कर लेता है और ‘लेक’ नामक अघुलनशील अिाशोषण संवुफल बनाता है। इसलिए रंगहीन विलयन में तैरता हुआ नीला पदाथर् प्राप्त होता है। इसीलिए परीक्षण को ‘लेक परीक्षण’ कहते हैं। 2. पेफरिक ;थ्म3़ द्ध आयनों का परीक्षण पेफरिक हाइड्राॅक्साइड का लाल - भूरा अवक्षेप हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुल जाता है और पेफरिक क्लोराइड बनता है। थ्म;व्भ्द्ध3 ़ 3भ्ब्स ⎯→ थ्मब्स3 ़ 3भ्2व् ;कद्ध जब पेफरिक क्लोराइड युक्त विलयन की वि्रफया पोटैश्िायम पेफरोसायनाइड विलयन से होती है तो नीला अवक्षेप/रंग प्राप्त होता है। अवक्षेप का रंग प्रश्िायन नीला होता है। यह पेफरिक पेफरोसायनाइड होता है। अभ्िावि्रफया निम्नलिख्िात प्रकार से होती है। 4थ्मब्स ़ 3ज्ञख्थ्म;ब्छद्ध, ⎯→ थ्मख्थ्म;ब्छद्ध, ़ 12ज्ञब्स3 4 6 4 63 पोटैश्िायम प्रश्िायन नील पेफरोसायनाइड का अवक्षेप यदि पोटैश्िायम हेक्सासायनोपेफरेट;प्प्द्ध ;यानी पोटैश्िायम पेफरोसायनाइडद्ध आिाक्य में मिलाया जाए तो ज्ञथ्मख्थ्म;ब्छद्ध, संघटन का उत्पाद बनता है। यह कोलाॅइडी विलयन ;घुलनशील6प्रश्िायन नीलद्ध बनाने की प्रवृति के कारण निस्यंदित नहीं किया जा सकता। थ्मब्स3 ़ ज्ञ4ख्थ्म;ब्छद्ध6, ⎯→ ज्ञथ्मख्थ्म;ब्छद्ध6, ़ 3ज्ञब्स;घुलनशील प्रश्िायन नीलद्ध ;खद्ध विलयन के दूसरे भाग में पोटैश्िायम थायोसायनेट ;पोटैश्िायम सल्पफोसायनाइडद्ध विलयन मिलाएं। रक्त - लाल रंग का प्रकट होना थ्म3़ आयनों की उपस्िथति संपुष्ट करता है। थ्म3़ ़ ैब्छदृ ⎯→ ख्थ्म;ैब्छद्ध,2़रक्त - लाल रंग ;टद्ध समूहदृप्ट के ध्नायनों का विश्लेषण यदि समूह - प्प्प् अनुपस्िथत हो तो समूह - प्प्प् के विलयन में से वुफछ मिनट तक भ्2ै गैस प्रवाहित करें। यदि ;श्वेत, काला अथवा मांसवणीर्द्ध अवक्षेप प्राप्त हो तो यह समूह - प्ट के ध्नायनों की उपस्िथति इंगित करता है। सारणी 7.15 में समूह - प्ट के ध्नायनों के संपुष्िट परीक्षण संक्षेप में दिए हैं। समूहदृप्ट के ध्नायनों के संपुष्िट परीक्षणों का रसायन चतुथर् समूह के ध्नायन सल्पफाइडों के रूप में अवक्षेपित होते हैं। अवक्षेप के रंग का अवलोकन करें। अवक्षेप का श्वेत रंग िांक आयनों की उपस्िथति इंगित करता है, मांसवणीर् अवक्षेप मैंगनीज आयनों की उपस्िथति इंगित करता है और काला रंग छप2़ अथवा ब्व2़ आयनों की उपस्िथति इंगित करता है। 1. िांक ;र्द2़द्ध आयन का परीक्षण िांक सल्पफाइड हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुलकर िांक क्लोराइड बनाता है। र्दै ़ 2भ्ब्स ⎯→ र्दब्स2 ़ भ्2ै ;कद्ध सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन मिलाने पर यह िांक हाइड्राॅक्साइड का श्वेत अवक्षेप देता है, जो छंव्भ् विलयन के आध्िक्य में गरम करने से सोडियम जिंकेट बनने के कारण घुलनशील होता है। यह र्द2़ आयनों की उपस्िथति संपुष्ट करता है। र्दब्स2 ़ 2छंव्भ् ⎯→ र्द;व्भ्द्ध2 ़ 2छंब्स र्द;व्भ्द्ध़ 2छंव्भ् ⎯→ छंर्दव् ़ 2भ्व्2 222सोडियम िांकेट ;खद्ध छभ्4व्भ् विलयन से उदासीन करने के बाद जब ज्ञ4थ्म ;ब्छद्ध6 विलयन मिलाया जाता है तो िांक पेफरोसायनाइड का श्वेत अथवा नीलापन लिए श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है। 2 र्दब्स2 ़ ज्ञ4 ख्थ्म;ब्छद्ध6, ⎯→ र्द2 ख्थ्म;ब्छद्ध6, ़ 4 ज्ञब्स िांक पेफरोसायनाइड 2. मैंगनीज ;डद2़ द्ध आयन का परीक्षण मैंगनीज सल्पफाइड का अवक्षेप तनु भ्ब्स में उबालने पर घुल जाता है। छंव्भ् विलयन आध्िक्य में मिलाने पर मैंगनीज हाइड्राॅक्साइड का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है जो वायुमंडलीय आॅक्सीकरण द्वारा जलयोजित मैंगनीज डाइआॅक्साइड बनने के कारण भूरा हो जाता है। डदै ़ 2भ्ब्स ⎯→ डदब्स2 ़ भ्2ै डदब्स2 ़ 2छंव्भ् ⎯→ डद;व्भ्द्ध2 ़ 2छंब्स;श्वेत अवक्षेपद्ध डद ;व्भ्द्ध ़ ख्व्, → डदव्;व्भ्द्ध2 2जलयोजित मैंगनीज डाइआॅक्साइड ;भूरा रंगद्ध 3. निवैफल ;छप2़ द्ध आयन का परीक्षण निवैफल सल्प़्ाफाइड का काला अवक्षेप ऐक्वारेजिया में घुल जाता है और निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफया होती है। 3छपै ़ 2भ्छव्3 ़ 6भ्ब्प् ⎯→ 3छपब्स2 ़ 2छव् ़ 3ै ़ 4भ्2व् ऐक्वारेजिया से वि्रफया के पश्चात निवैफल क्लोराइड प्राप्त होता है जो जल में घुलनशील होता है। जब निवैफल क्लोराइड के जलीय विलयन को क्षारकीय बना कर डाइमेथ्िाल ग्लाइआॅक्िसम मिलाया जाता है तो चमकदार लाल अवक्षेप प्राप्त होता है। लाल रंग का संवुफल ;संवुफल का स्थाइर् रूपद्ध 4. कोबाल्ट ;ब्व2़ द्ध आयन का परीक्षण निवैफल सल्पफाइड के समान कोबाल्ट क्लोराइड भी ऐक्वारेजिया में घुल जाता है। जब ऐक्वारेजिया की वि्रफया़के पश्चात् अवशेष के जलीय विलयन को अमोनियम हाइड्राॅक्साइड द्वारा उदासीन करके पोटैश्िायम नाइट्राइट का विलयन मिलाने के बादऐसीटिक अम्ल से अम्लीवृफतकिया जाता है तो पोटैश्िायमहेक्सानाइट्राइटोकोबाल्टेट;प्प्प्द्ध नामक कोबाल्ट का संवुफल बनता है। ब्वै ़ भ्छव्3 ़ 3भ्ब्स ⎯→ ब्वब्स2 ़ छव्ब्स ़ ै ़ 2भ्2व् ब्वब्स2 ़ 7ज्ञछव्2 ़ 2ब्भ्3ब्व्व्भ् ⎯→ ज्ञ3 ख्ब्व;छव्2द्ध6, ़ 2ज्ञब्स ़ 2ब्भ्3ब्व्व्ज्ञ ़ छव् ़ भ्2व्पोटैश्िायम हेक्सानाइट्राइटोकोबाल्टेट;प्प्प्द्ध ;पीला अवक्षेपद्ध ;टप्द्ध समूहदृट के ध्नायनों का विश्लेषण यदि समूह - प्ट अनुपस्िथत हो तो मूल विलयन लें और थोड़ा सा ठोस छभ्4ब्स मिलाएं और छभ्4व्भ् विलयन को आध्िक्य में मिलाने के पश्चात ठोस ;छभ्द्धब्व् मिलाएं। यदि श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है तो यह423समूह - ट के ध्नायनों की उपस्िथति इंगित करता है। श्वेत अवक्षेप को तनु ऐसीटिक अम्ल के साथ उबाल कर घोल लें और विलयन को ठं2़ए ैत2़ और ब्ं2़आयनों के परीक्षण के लिए तीन भागों में बाँट लें। थोड़ा सा अवक्षेप ज्वाला परीक्षण के लिए सुरक्ष्िात रखें। संपुष्िट परीक्षणों को संक्षेप में सारणी 7.16 में दिया गया है। अवक्षेप को तनु ऐसीटिक अम्ल के साथ उबाल कर घोल लें और विलयन को ठं2़ए ैत2़ और ब्ं2़ आयनों के परीक्षण के लिए तीन भागों में बाँट लें। सारणी 7.16 - समूह - ट के ध्नायनों के संपुष्िट परीक्षण ठं2़ आयन ैत2़ आयन ब्ं2़ आयन ;कद्ध पहले भाग में पोटैश्िायम व्रफोमेट विलयन मिलाएं। पीला अवक्षेप प्राप्त होता है। ;खद्ध सुरक्ष्िात रखे गए अवक्षेप से ज्वाला परीक्षण करें। घास के हरे रंग जैसी ज्वाला प्राप्त होती है। ;कद्ध यदि बेरियम अनुपस्िथत हो तो विलयन का दूसरा भाग लें और अमोनियम सल्पेफट विलयन मिलाएं। गरम करें और परखनली की दीवारों को काँच की छड़ से खरोचें और ठंडा करें। सप़्ोफद अवक्षेप प्राप्त होता है। ;खद्ध सुरक्ष्िात रखे गए अवक्षेप से ज्वाला परीक्षण करें किरमिजी लाल ज्वाला ैत2़ आयनों की उपस्िथति संपुष्ट करती है। ;कद्ध यदि बेरियम और स्ट्राॅन्िशयम दोनों अनुपस्िथत हों तो विलयन का तीसरा भाग लें। इसमें अमोनियम आॅक्सैलेट विलयन मिलाएं और अच्छी तरह हिलाएं। वैफल्िसयम आॅक्सैलेट का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है। ;खद्ध सुरक्ष्िात रखे गए अवक्षेप से ज्वाला परीक्षण करें। ईंट जैसे लाल रंग की ज्वाला जो नीले काँच में से हरित - पीली दिखाइर् पड़ती है, ब्ं2़ आयनों की उपस्िथति संपुष्ट करती है। समूहदृट के ध्नायनों के संपुष्िट परीक्षण समूह - ट के ध्नायन काबोर्नेट के रूप में अवक्षेपित किए जाते हैं, जो संगत ऐसीटेट बनने के कारण ऐसीटिक अम्ल में घुल जाते हैं। 1. बेरियम आयन ;ठं2़द्ध का परीक्षण ;कद्ध पाँचवें समूह के अवक्षेप को ऐसीटिक अम्ल में घोलकर बने विलयन में पोटैश्िायम व्रफोमेट का विलयन मिलाने से बोरियम व्रफोमेट का पीला अवक्षेप प्राप्त होता है। ठंब्व्3 ़ 2ब्भ्3ब्व्व्भ् ⎯→ ;ब्भ्3ब्व्व्द्ध2 ठं ़ भ्2व् ़ ब्व्2 ;ब्भ्ब्व्व्द्धठं ़ ज्ञब्तव्⎯→ ठंब्तव् ़ 2ब्भ्ब्व्व्ज्ञ3224 43बेरियम व्रफोमेट ;पीला अवक्षेपद्ध ;खद्ध ज्वाला परीक्षण: प्लैटिनम तार को सांद्र भ्ब्स में डुबोने के बाद तब तक तेश गरम करें जब तक यह अदीप्त ज्वाला को रंग देना बंद कर दे। अब तार को समूह - ट के अवक्षेप के सांद्र भ्ब्स में बने पेस्ट में डुबोएं और ज्वाला में गरम करें। घास के रंग जैसी हरी ज्वाला ठं2़ आयनों की उपस्िथति संपुष्ट करती है। 2. स्ट्राॅन्िशयम आयन ;ैत2़द्ध का परीक्षण ;कद्ध पाँचवें समूह के अवक्षेप का ऐसीटिक अम्ल में बना विलयन, अमोनियम सल्पेफट, ;छभ्द्धैव्424 विलयन के साथ गरम करने और परखनली की दीवारों को काँच की छड़ से खरोंचने पर स्ट्राॅन्िशयम सल्प़्ोफट का श्वेत अवक्षेप देता है। ैतब्व् ़ 2ब्भ्ब्व्व्भ् ⎯→ ;ब्भ्ब्व्व्द्ध ैत ़ भ्व् ़ ब्व्333222 ;ब्भ्3ब्व्व्द्ध2 ैत ़ ;छभ्4द्ध2ैव्4 ⎯→ ैतैव्4 ़ 2ब्भ्3ब्व्व्छभ्4 स्ट्राॅन्िशयम सल्पेफट ;श्वेत अवक्षेपद्ध ;खद्ध ज्वाला परीक्षण: जैसे ठं2़ आयनों के लिए दिया गया है वैसे ही ज्वाला परीक्षण करें। किरमिजी लाल ज्वाला ैत2़ आयनों की उपस्िथति की संपुष्िट करती है। 3. वैफल्िसयम आयन ;ब्ं2़ द्ध का परीक्षण ;कद्ध पाँचवें समूह के अवक्षेप का ऐसीटिक अम्ल में बना विलयन अमोनियम आॅक्सैलेट विलयन के साथ वैफल्िसयम आॅक्सैलेट का श्वेत अवक्षेप देता है। ब्ंब्व् ़ 2ब्भ्ब्व्व्भ् ⎯→ ;ब्भ्ब्व्व्द्ध ब्ं ़ भ्व् ़ ब्व्333222 ;ब्भ्ब्व्व्द्धब्ं ़ ;छभ्द्धब्व् ⎯→ ;ब्व्व्द्धब्ं ़ 2ब्भ्ब्व्व्छभ्324224234 अमोनियम वैफल्िसयम आॅक्सैलेट आॅक्सैलेट ;श्वेत अवक्षेपद्ध ;खद्ध ज्वाला परीक्षण: उपरोक्त विध्ि के अनुसार ज्वाला परीक्षण करें। वैफल्िसयम ज्वाला को ईंट जैसा लाल रंग प्रदान करता है जो नीले काँच से हरित - पीली दिखाइर् पड़ता है। ;टप्प्द्ध समूहदृटप् के ध्नायन का विश्लेषण यदि समूह.ट अनुपस्िथत हो तो डह2़ आयनों का परीक्षण निम्नलिख्िात प्रकार से करें। समूहदृटप् के ध्नायन के संपुष्िट परीक्षण मैग्नीश्िायम आयन ;डह2़ द्ध का परीक्षण ;कद्ध यदि समूह - ट अनुपस्िथति हो तो विलयन में मैग्नीश्िायम काबोर्नेट हो सकता है, जो अमोनियम लवणों की उपस्िथति में जल में घुलनशील होता है क्योंकि साम्य दाहिनी ओर विस्थापित हो नोट - जाता है।कभी - कभी मैग्नीश्िायम ़2दृ दृछभ् ़ ब्व् छभ् ़ भ्ब्व्43 33अमोनियम प़्ाफाॅस्प़्ोफट का अवक्षेप बनने के लिए काबोर्नेट आयनों की आवश्यक सांद्रता प्राप्त नहीं हो पाती। जबअवक्षेप वुफछ देर बाद प्राप्त डाइसोडियम हाइड्रोजनप़़्ाफास्पेफट विलयन मिलाया जाता है और परखनली की भीतरी दीवारों कोहोता है। इसलिए सोडियम हाइड्रोजन प़़्काँच की छड़ से खरोंचा जाता है तो मैग्नीश्िायम अमोनियम पफास्प़्ोफट का वि्रफस्टलीय अवक्षेप़ाफाॅस्पेफट विलयन मिलाने के पश्चात विलयन बनता है जो डह2़ आयनों की उपस्िथति इंगित करता है। को गरम करें और परखनली डह2़ ़ छंभ्च्व्⎯→ डह ;छभ्द्धच्व् ़ छभ्व्भ् ़ 2छं़ ़ भ्व्244442की दीवारों को खुरचें। मैग्नीश्िायम अमोनियम पफास्प़्ोफट़ ;श्वेत अवक्षेपद्ध गुणात्मक विश्लेषण के प्रेक्षणों और अनुमानों को पृष्ठ 116 - 117 पर दिए गए नमूना रेकाडर् के अनुसार लिखें। ;पद्ध गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण में क्या अंतर है? ;पपद्ध क्या हम ज्वाला परीक्षण में प्लैटिनम तार के स्थान पर काँच की छड़ का प्रयोग कर सकते हैं? अपने उत्तर का कारण बताएं। ;पपपद्ध ज्वाला परीक्षण में अन्य धतुओं की अपेक्षा प्लैटिनम धतु को प्रमुखता क्यों दी जाती है? ;पअद्ध तनु भ्ैव्की सहायता से ज्ञात किए जाने वाले )णायनों का नाम लिख्िाए।;अद्ध )णायनों को ज्ञात करते समय तनु भ्ब्स की अपेक्षा तनु भ्ैव्को वरीयता क्यों दी जाती है?;अपद्ध सांद्र भ्ैव्द्वारा ज्ञात किए जाने वाले )णायनों का नाम लिख्िाए।24 24 24 ;अपपद्ध सोडियम काबोर्नेट निष्कषर् वैफसे बनाया जाता है? ;अपपपद्ध चूने का पानी क्या होता है और इसमें से काबर्न डाइआॅक्साइड गैस प्रवाहित करने से क्या होता है? ;पगद्ध काबर्न डाइआॅक्साइड गैस और सल्प़्ाफर डाइआॅक्साइड गैस, दोनों ही चूने के पानी को दूध्िया कर देती हैं। आप दोनों में अन्तर वैफसे करेंगे? ;गद्ध आप काबोर्नेट आयनों की उपस्िथति का परीक्षण वैफसे करेंगे? ;गपद्ध नाइट्रेटों के वलय परीक्षण में दो परतों के बीच बनने वाली भूरी वलय का संघटन क्या होता है? ;गपपद्ध सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड परीक्षण द्वारा संपुष्ट किए जाने वाले आयन का नाम बताइए। ;गपपपद्ध व्रफोमिल क्लोराइड परीक्षण क्या है? आप वैफसे सि( करेंगे कि ब्तव्ब्सअम्लीय प्रवृफति का है?22 ;गपअद्ध ब्रोमाइड और आयोडाइड व्रफोमिल क्लोराइड जैसे परीक्षण क्यों नहीं देते? ;गअद्ध ब्रोमाइड और आयोडाइड आयनों के लिए परत - परीक्षण का विवरण दीजिए। ;गअपद्ध सिल्वर नाइट्रेट विलयनों को गहरे रंग की बोतलों में क्यों रखा जाता है? ;गअपपद्ध आप सल्पफाइड आयन की उपस्िथति का परीक्षण वैफसे करेंगे? ;गअपपपद्ध आयोडीन स्टाचर् विलयन के साथ नीला रंग क्यों देती है? ;गपगद्ध नेस्लर अभ्िाकमर्क क्या है? ;गगद्ध ध्नायनों के लिए मूल विलयन सांद्र भ्छव्3 या भ्2ैव्4 में क्यों नहीं बनाया जाता? ;गगपद्ध प्रथम समूह के ध्नायनों को अवक्षेपित करने के लिए तनु भ्ब्स के स्थान पर सांद्र भ्ब्स का प्रयोग क्यों नहीं कर सकते? ;गगपपद्ध द्वितीय समूह के साथ समूह - प्ट के आयनों का अवक्षेपण वैफसे रोका जा सकता है? ;गगपपपद्ध समूह - प्प्प् के आयनों को अवक्षेपित करने से पहले भ्2ै गैस को विलयन में से उबालकर निकालना आवश्यक क्यों है? ;गगपअद्ध समूह - प्प्प् को अवक्षेपित करने से पहले सांद्र नाइटिªक अम्ल के साथ क्यों उबाला जाता है? ;गगअद्ध क्या समूह - प्प्प् में अमोनियम क्लोराइड के स्थान पर अमोनियम सल्प़्ाफाइड का प्रयोग किया जा सकता है? ;गगअपद्ध समूह - ट के ध्नायनों को अवक्षेपित करने के लिए ;छभ्4द्ध2ब्व्3 से पहले छभ्4व्भ् को क्यों मिलाया जाता है? ;गगअपपद्ध कभी - कभी लवण में डह2़ मूलक न होने पर भी समूह - टप् में श्वेत अवक्षेप क्यों प्राप्त हो जाता है? ;गगअपपपद्ध ऐक्वारेजिया क्या है? ;गगपगद्ध एक ऐसे ध्नायन का नाम लिख्िाए जो धतु से प्राप्त नहीं होता। ;गगगद्ध आप अमोनियम आयन की उपस्िथति का परीक्षण वैफसे कर सकते हैं? ;गगगपद्ध समूह - ट के आयनों के परीक्षणों को ठं2़ए ैत2़ और ब्ं2़ व्रफम में क्यों किया जाता है? ;गगगपपद्ध बोतल में रखा हुआ सांद्र भ्छव्पीला क्यों हो जाता है?3 ;गगगपपपद्ध समूह - ट के परीक्षण से पहले विलयन को सांदि्रत क्यों कर लेना चाहिए? ;गगगपअद्ध सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन की अभ्िाकमर्क बोतल को बंद क्यों नहीं रखा जाता? ;गगगअद्ध समान आयन प्रभाव से आप क्या समझते हैं? ;गगगअपद्ध िांक सल्पफाइड समूह - प्प् में अवक्षेपित क्यों नहीं होता? लवण विश्लेषण का नमूना रिकाॅडर् उद्देश्य दिए गए लवण में उपस्िथत एक )णायन और एक ध्नायन को ज्ञात करने के लिए विश्लेषण करना। आवश्यक सामग्री परिणाम व्रफ. सं1 प्रयोग दिए गए लवण का रंग नोट किया प्रेक्षण श्वेत अनुमान ब्न2़ए थ्म2़ए छप2़एब्व2़ ए डद2़ अनुपस्िथत हैं। 2 लवण की गंध् नोट की कोइर् विशेष गंध् नहीं। ै2ए ैव्3 2दृ ए ब्भ्3ब्व्व् दृ अनुपस्िथत हो सकते हैं। 3 0ण्5 ह शुष्क लवण को शुष्क परखनली में गरम किया और निकलने वाली गैस के रंग को नोट किया तथा गरम और ठंडे अवशेष के रंग परिवतर्न को नोट किया। ;पद्ध कोइर् गैस नहीं निकलती। ;पपद्धगरम और ठंडे अवशेष के रंग में कोइर् विशेष रंग परिवतर्न नहीं दिखा। ;पद्ध ब्व्3 2दृ उपस्िथत हो सकता है, छव्3 दृ ए छव्2 दृ ए ठत दृ अनुपस्िथत हो सकते हैं। ;पपद्धर्द2़ अनुपस्िथत हो सकता है। 4 लवण का सांद्र भ्ब्स में लेप बनाया और ज्वाला परीक्षण किया। ज्वाला का कोइर् विशेष रंग नहीं दिखाइर् देता। ब्ं2़ ए ैत2़ए ठं2़ ब्न2़ अनुपस्िथत हो सकते हैं। 5 लवण सप़्ोफद होने के कारण बोरेक्स मनका परीक्षण नहीं किया। कृ कृ 6 0ण्1 हलवण को 1 उस् तनु भ्2ैव्4 के साथ गरम किया। बुदबुदाहट नहीं होती और वाष्प नहीं निकलते। ब्व् 3 2दृए ैव्3 2दृए ै2दृ ए और छव् 2 दृ ए ब्भ्3 व्व् दृ अनुपस्िथत। 7 0ण्1 ह लवण को 1 उस् सांद्र भ्2ैव्4 के साथ गरम किया। कोइर् गैस नहीं निकली ब्स दृ ए ठत दृ ए प् दृ ए छव्3 दृ ए ब्2व्4 दृ अनुपस्िथत हैं। 8 1उस् जलीय विलयन को सांद्र भ्छव्3 से अम्लीवृफत किया और सामग्री को 4 - 5 बूँदें अमोनियम मोलिब्डेट विलयन की मिलाने के बाद गरम किया। पीला अवक्षेप प्राप्त नहीं होता। च्व्4 3दृ अनुपस्िथत। 9 लवण के जलीय विलयन को तनु भ्ब्स से अम्लीवृफत करने के बाद 2उस् ठंब्स2 विलयन मिलाया। श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है जो सांद्र भ्छव्3 एवं सांद्र भ्ब्स में अविलेय है। ैव्4 2दृ उपस्िथत। 10 0ण्1 ह लवण को 2 उस् छंव्भ् विलयन के साथ गरम किया। अमोनिया गैस नहीं निकलती। छभ्4 ़ अनुपस्िथत 11 1 ह लवण को 20 उस् जल में घोल कर मूल विलयन बनाया। पारदशीर् विलयन बना। लवण जल में घुलनशील है। 12 उपरोक्त जलीय विलयन के थोड़े से भाग में 2 उस् तनु भ्ब्स मिलाया। श्वेत अवक्षेप नहीं बनता समूह - प् अनुपस्िथत 13 चरण - 12 के एक भाग मेंभ्2ैगैस प्रवाहित की। कोइर् अवक्षेप नहीं बनता समूह - प्प् अनुपस्िथत 14 लवण श्वेत है अतः सांद्र भ्छव् 3के साथ गरम करने की आवश्यकता नहीं है। चरण 12 के विलयन में 0ण्2 ह ठोस अमोनियम क्लोराइड मिलाने के बाद अमोनियम हाइड्राॅक्साइड मिलाया। कोइर् अवक्षेप नहीं बनता समूह - प्प्प् अनुपस्िथत 15 उपरोक्त विलयन में से भ्2ै गैस प्रवाहित की। कोइर् अवक्षेप नहीं बनता समूह - प्ट अनुपस्िथत 16 मूल विलयन में अमोनियम हाइड्राॅक्साइड आिाक्य में मिलाया और पिफर 0ण्5 ह अमोनियम काबोर्नेट मिलाया। कोइर् अवक्षेप नहीं समूह - ट अनुपस्िथत 17 मूल विलयन में अमोनियम हाइड्राॅक्साइड मिलाने के बाद डाइसोडियम हाइड्रोजन पफाॅस्पेफट विलयन मिलाया, गरम किया और परखनली की सतह को खरोंचा। श्वेत अवक्षेप डह2़ संपुष्ट दिए गए लवण में निम्नलिख्िात आयन उपस्िथत हैं - )णायन - ैव्42ध्नायन - डह2़

RELOAD if chapter isn't visible.