आपको विदित है कि पदाथर् का गुणात्मक और मात्रात्मक रासायनिक संघटन स्थापित करने के लिए इसका विश्लेषण किया जाता है। इस प्रकार से रासायनिक विश्लेषण को दो संवगो± में बाँटा जा सकता है μ गुणात्मक विश्लेषण एवं मात्रात्मक विश्लेषण। इस एकक में आप विलयन में पदाथर् की मात्रा निधर्रित करना सीखेंगे। विलयन में पदाथर् की मात्रा के निधर्रण के लिए अपनाइर् गइर् विध्ि के अनुसार मात्रात्मक विश्लेषण मुख्यतः दो प्रकार का होता है - अनुमापनमितीय विश्लेषण एवं भारात्मक विश्लेषण। अनुमापनमितीय विश्लेषण में केवल आयतनों का मापन सम्िमलित होता है जबकि भारात्मक विश्लेषण में आयतन और द्रव्यमान दोनों का मापन सम्िमलित होता है। अनुमापनमितीय विश्लेषण में परिशु(ता से ज्ञात सांद्रता वाले विलयन के उस आयतन को ज्ञात किया जाता है जो किसी अन्य पदाथर् के विलयन के निश्िचत आयतन से मात्रात्मक रूप से अभ्िावि्रफया करता है और जिसकी सांद्रता का निधर्रण किया जाना है। परिशु(ता से ज्ञात सांद्रता वाले विलयन को मानक विलयन कहते हैं। पदाथर् का द्रव्यमान मानक विलयन के प्रयुक्त हुए आयतन, रासायनिक समीकरण तथा अभ्िावि्रफया करने वाले यौगिकों के आपेक्ष्िाक आण्िवक द्रव्यमानों से ज्ञात किया जा सकता है। ज्ञात सांद्रता वाले विलयन को अनुमापक कहते हैं और जिस पदाथर् का अनुमापन किया जा रहा हो उसे अनुमापेय कहते हैं। अनुमापनमितीय विश्लेषण करने के लिए मानक विलयन सामान्यतः ब्यूरेट नामक एक लम्बी अंशांकित ट्यूब से, डाला जाता है। मानक विलयन को अज्ञात सांद्रता वाले विलयन में अभ्िावि्रफया संपूणर् होने तक मिलाने के प्रव्रफम को अनुमापन कहते हैं। वह ¯बदु जिस पर अभ्िावि्रफया संपूणर् हो जाती है तुल्यता ¯बदु ;मुनपअंसमदबम चवपदजद्ध या सै(ांतिक अथवा स्टाॅइकियोमीट्री अंत्य ¯बदु कहलाता है। मानक विलयन को सदैव ब्यूरेट में लेना संभव नहीं होता। इस विषय में आप बाद में इसी एकक में, सोडियम हाइड्राॅक्साइड के आॅक्सैलिक अम्ल के साथ अनुमापन में जानेंगे। 6.1 अंत्य ¯बदु ज्ञात करना अंत्य ¯बदु या तो अभ्िावि्रफया मिश्रण में किसी भौतिक परिवतर्न के द्वारा अथवा किसी सहायक अभ्िाकमर्क, जिसे सूचक कहते हैं, को मिलाकर ज्ञात किया जा सकता है। वैकल्िपक रूप से कोइर् अन्य भौतिक मापन प्रयुक्त किया जा सकता है। अभ्िावि्रफया के समापन पर अनुमापित किए जाने वाले विलयन में सूचक, दिखाइर् देने वाला बदलाव ख्जैसे रंग में परिवतर्न अथवा अविलता ;जनतइपकपजलद्ध, प्रदश्िार्त करता है। आदशर् अनुमापन में अंत्य ¯बदु स्टाॅकियोमीट्री अथवा सै(ांतिक अंत्य¯बदु के संपाती ;बवपदबपकमदजद्ध होता है परन्तु सामान्यतया वास्तविकता में इनमें बहुत सूक्ष्म अन्तर रहता है। यह अनुमापन त्राुटि प्रदश्िार्त करता है। सूचक और चयनित प्रायोगिक अवस्थाएं ऐसी होनी चाहिए कि दिखाइर् देने वाले और सै(ांतिक अंत्य¯बदु में न्यूनतम अन्तर हो। ;पद्ध अनुमापनमितीय विश्लेषण द्वारा जिस पदाथर् की मात्रा का निधर्रण किया जाना है उसे दूसरे अभ्िाकमर्क के साथ स्टाॅकियोमीट्री अनुपात में संपूणर्तः अभ्िावि्रफया करनी चाहिए। ;पपद्ध अभ्िावि्रफया तीव्र गति से होनी चाहिए तथा अंत्य ¯बदु के निकट विलयन के भौतिक या रासायनिक गुण में ऐसा परिवतर्न होना चाहिए जिसे सूचक द्वारा, विभवान्तर से अथवा विद्युत् धरा इत्यादि द्वारा ज्ञात किया जा सके। अनुमापनमितीय विश्लेषण विभ्िान्न प्रकार की अभ्िावि्रफयाओं के लिए किया जा सकता है। इस एकक में आप केवल उदासीनीकरण अभ्िावि्रफयाओं के विषय में जानेंगे। इनमें अम्लों और क्षारों के अनुमापन सम्िमलित होते हैं। इन विश्लेषणों में अम्ल ;अम्लमितिद्ध या क्षारक ;क्षारमितिद्ध के मानक विलयन प्रयुक्त होते हैं। अनुमापनमितीय विश्लेषण द्वारा मात्रात्मक विश्लेषण के लिए विलयन की सांद्रता को मोलरता में व्यक्त किया जाता है। यह एक लिटर विलयन में घुले विलेय के मोलों की संख्या होती है। विलये वफेेांमाले की सख्या मोलरता, ड त्र विलयन का आयतन लिटर मंे मानक विलयन यथाथर्ता से ज्ञात सांद्रता वाला विलयन मानक विलयन कहलाता है। कोइर् भी पदाथर्, जो कक्ष ताप पर विघटित नहीं होता और उस विलायक से अभ्िावि्रफया नहीं करता जिसमें इसे घोला जाता है, मानक विलयन बनाने के लिए सीध्े तोला जा सकता है। इन विलयनों का विवरण और इन्हें बनाने की विध्ि निम्नलिख्िात है। प्राथमिक एवं द्वितीयक मानक प्राथमिक मानक पयार्प्त शु(ता वाला यौगिक होता है जिसमें अशुियों की मात्रा 0.01 - 0.02» से अध्िक नहीं होती। प्राथमिक मानक के प्रतिदशर् ;ेंउचसमद्ध को सीधे तोलकर और इसे जल ;विलायकद्ध में घोलकर मानक विलयन का निश्िचत आयतन बनाया जा सकता है। प्राथमिक मानक के समान प्रयुक्त होने वाले पदाथर् में निम्नलिख्िात विशेषताएं भी होनी चाहिएμ 1.यह शु( और शुष्क अवस्था में आसानी से उपलब्ध् होना चाहिए। 2.यह वायु में परिवतिर्त नहीं होना चाहिए अथार्त्, यह आद्रर्ताग्राही, वायु द्वारा आॅक्सीवृफत अथवा वायुमंडल में उपस्िथत काबर्न डाइआॅक्साइड जैसी गैसों से प्रभावित अथवा वि्रफस्टलीकरण जल छोड़ने वाला नहीं होना चाहिए। जिससे इसे सुरक्ष्िात रूप से भंडारित किया जा सके। 3.इसमें उपस्िथत अशुियों को जाँचना सरल होना चाहिए। 4.इसका आपेक्ष्िाक आण्िवक द्रव्यमान अध्िक होना चाहिए जिससे तोलने की त्राुटियाँ नगण्य हों। 5.इसकी दूसरे पदाथर् के साथ अभ्िावि्रफया द्रुत एवं स्टाॅइकियोमीटिªक होनी चाहिए। 6.पदाथर् जल में आसानी से घुलनशील होना चाहिए। एक आदशर् प्राथमिक मानक उपलब्ध् होना कठिन होता है अतः साधरणतया वह पदाथर् प्रयुक्त किए जाते हैं जिनके गुण प्राथमिक मानक के गुणों के अिाक निकट होते हैं। नियमानुसार अस्थाइर् जलयोजित पदाथर् प्राथमिक मानक के समान प्रयुक्त नहीं किए जाते तथापि सोडियम काबोर्नेट, सोडियम टेट्राबोरेट, पोटैश्िायम हाइड्रोजनथैलेट, आॅक्सैलिक अम्ल पेफरस अमोनियम सल्पेफट इत्यादि पयार्प्त स्थायित्व के कारण प्राथमिक मानक के समान प्रयुक्त किए जा सकते हैं। द्वितीयक मानक विलयन वह होता है जिसकी यथाथर् सांद्रता, प्राथमिक मानक विलयन से अनुमापन द्वारा पता लगाने के उपरान्त, इसे मानकीकरण के लिए उपयोग में लाया जाता है। द्वितीयक मानक को सीध्े तोलकर मानक विलयन बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता। सोडियम हाइड्राॅक्साइड और पोटैश्िायम परमैंगनेट द्वितीयक मानकों के उदाहरण हैं। अनुमापनमितीय विश्लेषण करने से पहले आपको वुफछ तकनीकों, जैसे कि वैश्लेष्िाक तुला ;रासायनिक तुलाद्ध से तोलना, मानक विलयन बनाना और ब्यूरेट एवं पिपेट द्वारा आयतन मापन से परिचित हो जाना चाहिए। 6.4 अम्ल - क्षारक अनुमापनमिती में सूचक अम्ल - क्षारक सूचक चभ् परिवतर्न के प्रति संवेदनशील होते हैं। अध्िकतर अम्ल - क्षारक अनुमापनमितियों में ऐसे सूचकों का चयन करना संभव होता है जो तुल्यता ¯बदु के निकट वाली चभ् पर रंग में परिवतर्न दशार्ते हैं। यहाँ हम केवल दो सूचकों μ प़्ाफीनाॅल.फ्रथेलीन और मेथ्िाल ओरेन्ज का विवरण देंगे। पफीनाॅल.़फ्रथेलीन प़्ाफीनाॅल.फ्रथेलीन एक दुबर्ल अम्ल है अतः यह अम्लीय माध्यम में वियोजित नहीं होती और अनायनित रूप में रहती है, जो रंगहीन होता है। भ्च्ी भ़् ़ च्ीदृ अनायनित आयनित ;रंगहीनद्ध ;गुलाबीद्ध पफीनाॅल.फ्रथेलीन के आयनित और अनायनित रूप नीचे दिए गए हैंμ़;अम्लीय माध्यम में रंगहीनद्ध ;क्षारकीय माध्यम मंे गहरा लालद्ध चित्रा 6.1 - प़्ाफीनाॅल.फ्रथेलीन अम्लीय और क्षारकीय माध्यम में अम्लीय माध्यम में आयनित और अनआयनित रूपों के मध्य साम्य बायीं ओर रहता दृहै। क्षारीय माध्यम में क्षार के व्भ् आयनों द्वारा भ्च्ी में से भ़् आयन निकाल लिए जाने से पफीनाॅल.फ्रथेलीन का आयनन अत्यध्िक बढ़ जाता है अतः विलयन में़च्ीदृ आयनों की सांद्रता बढ़ जाती है जिससे विलयन गुलाबी रंग का हो जाता है। भ़्भ्च्ी ़ च्ीदृ दृछंव्भ् ⎯→ छं़ ़ व्भ्भ़़् व्भ् दृ ⎯→ भ्2व् दुबर्ल अम्ल और प्रबल क्षार के मध्य अनुमापन के लिए पफीनाॅल.़फ्रथेलीन सबसे अिाक उपयुक्त सूचक होता है। ऐसा इसलिए होता है कि क्षार की मिलाइर् गइर् अन्ितम बूँद विलयन की चभ् को उस परास में पहुँचा देती है जिसमें पफीनाॅल.़फ्रथलीन तीक्ष्ण रंगेपरिवतर्न दशार्ती है। मेथ्िाल ओरेन्ज मेथ्िाल ओरेन्ज एक दुबर्ल क्षारक होता है और अनआयनित रूप में पीले रंग का होता है। इसके सोडियम लवण की संरचना निम्न प्रकार से प्रदश्िार्त की जाती है - सूचक से बना )णायन एक सवि्रफय स्पीशीश होता है जो प्रोटाॅन प्राप्त करने के पश्चात्ं;यानी ब्रसटेद लाॅरी क्षारक के समान कायर् करता हैद्ध बेन्जीनाॅइड रूप से क्िवनोनाॅइड रूप में परिवतिर्त हो जाता है। क्िवनोनाॅइड रूप गहरे रंग का होता है अतःअंत्य ¯बदु पर रंग परिवतर्न के लिए उत्तरदायी होता है। इसे अग्रलिख्िात प्रकार से प्रदश्िार्त करते हैं - )णायन का बेन्जीनाॅइड रूप ;पीला रंगद्ध )णायन का क्िवनोनाॅइड रूप ;गुलाबी - लाल रंगद्ध;ब्रंसटेद लाॅरी क्षारकद्ध चित्रा 6.2 - मेथ्िाल ओरेन्ज की संरचनाएं सूचक का चयन प्रबल अम्ल के प्रति दुबर्ल क्षार के अनुमापन में मेथ्िाल ओरेन्ज को सूचक की तरह चयनित किया जाता है। जब प्रबल क्षारक तथा दुबर्ल अम्ल के मध्य अनुमापन करना होता है तो पफीनाॅल.़फ्रथेलीन एक उत्तम सूचक है। इस अनुमापन में क्षार ब्यूरेट से डाला जाता है और अम्लको अनुमापन फ्रलास्क में लिया जाता है। अनुमापन फ्रलास्क में लिए गए विलयन का रंग रंगहीन से गुलाबी हो जाता है। इस रंग परिवतर्न का बोध् आँखों द्वारा आसानी से हो जाताहै। यदि हम क्षार को अनुमापन फ्रलास्क में लें तो रंग परिवतर्न गुलाबी से रंगहीन की ओर होगा। इस रंग परिवतर्न को यथाथर्ता से नोट नहीं किया जा सकता। प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षारक के अनुमापन में उपरोक्त में से कोइर् भी सूचक प्रयुक्त किया जा सकता है। दुबर्ल अम्ल और दुबर्ल क्षारक के मध्य अनुमापन के लिए कोइर् भी सूचक उपलब्ध् नहीं है। उद्देश्य आॅक्सैलिक अम्ल के मानक विलयन द्वारा अनुमापन करके दिए गए सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन की सांद्रता ;सामथ्यर्द्ध ज्ञात करना। सि(ांत अंत्य बिंदु पर किसी प्रबल अम्ल के प्रबल क्षारक द्वारा अनुमापन में अथवा विलोमतः अम्ल और क्षारक की मात्रा रासायनिक रूप से समतुल्य हो जाती है। इस अभ्िावि्रफया को उदासीनीकरण अभ्िावि्रफया कहते हैं। अंत्य बिंदु के निकट चभ् में एकाएक परिवतर्न होता है। यदि अंत्य बिंदु के उपरान्त अम्ल/क्षारक की सूक्ष्म मात्रा मिलाइर् जाए तो विलयन हल्का सा अम्लीय/क्षारीय हो जाता है। आॅक्सैलिक अम्ल ;दुबर्ल अम्लद्ध और सोडियम हाइड्राॅक्साइड ;प्रबल क्षारकद्ध के बीच निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफया होती है। इस अनुमापन में पफीनाॅल.फ्रथेलीन ;़भ्च्ीद्धसूचक के रूप में प्रयुक्त की जाती है। विलयन की अज्ञात सांद्रता की गणना ग्राम प्रति लिटर ;हध्स्द्ध में की जाती है। विलयन की मोलरता की गणना निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा की जा सकती है - ं1 ड1 ट1 त्र ं2 ड2 ट2 ण्ण्ण्;4द्ध जहाँ ं ए डए टव्रफमशः अम्ल की क्षारकता मोलरता और प्रयुक्त हुआ आयतन हैं11 1 तथा ं2 एड2 और ट2 व्रफमशः क्षार की अम्लता, मोलरता और अनुमापन में प्रयुक्त हुआ क्षारक का आयतन हैं। आवश्यक सामग्री आॅक्सैलिक अम्ल सोडियम हाइड्राॅक्साइड प्रवि्रफया ;कद्ध आॅक्सैलिक अम्ल का 0ण्1 ड मानक विलयन बनाना प्रयोग 2.1 में दी गइर् प्रवि्रफया का अनुसरण करें। ;खद्ध सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन का आॅक्सैलिक अम्ल द्वारा अनुमापन ;पद्ध ब्यूरेट को अच्छी तरह से सापफ करें, इसे आसुत जल से धेएं और अंत में सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन से खंगालें। ब्यूरेट को सदैव उस विलयन से खंगालें जिसे इसमें लेना हो ;चित्रा 2.17द्ध। ब्यूरेट को ब्यूरेट स्टैंड में उफध्वार्धर कसें। ;पपद्ध सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन को ब्यूरेट में शून्य के निशान से उफपर तक भर लें। ;पपपद्ध ब्यूरेट की नाॅशॅल में उपस्िथत किसी भी वायु अन्तराल को हटाने के लिए, विलयन को इसमें से तेजी से बहने दें। ;पअद्ध ब्यूरेट के प्रारंभ्िाक पाठ्यांक को नोट करने से पहले पफनल हटा दें और पाठ्यांक नोट करते समय सुनिश्िचत कर लें कि ब्यूरेट के नाॅशॅल से कोइर् बूँद न लटक रही हो। अनुमापनमितीय विश्लेषण ;अद्ध प्रारंभ्िाक पाठ्यांक को विलयन के मेनिस्कस के तल के ठीक सामने आँख रखकर नोट करें। ;अपद्ध एक ध्ुले हुए और सूखे शंक्वाकार फ्रलास्क में पिपेट से नाप कर आॅक्सैलिक अम्ल का 10 उस् विलयन लें। विलयन मापने से पहले पिपेट को जल से धोने के बाद सदैव उस विलयन से खंगाल लें ;चित्रा 2.21द्ध जिसे इससे मापना है। ;अपपद्ध शंक्वाकार फ्रलास्क में पफीनाॅल.फ्रथेलीन सूचक की 1 - 2 बूँदें डालें। फ्रलास्क को ़चित्रा 6.3 के अनुसार ग्लेश की हुइर् टाइल पर रखें। अम्ल का सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन से तब तक अनुमापन करें जब तक स्थाइर् तथा बहुत हल्का गुलाबी रंग प्राप्त न हो जाए। प्रारंभ मंे सोडियम हाइड्राॅक्साइड थोड़ी - थोड़ी मात्रा में और पिफर बूँद - बूँद करके डालना चाहिए। नोट - ऽ द्रव का बहाव अंगूठे और दो उंगलियों के बीच रोधनी पर अंदर की ओर दबाव डालते हुए समायोजित करें जिससे रिसाव न हो। ऽ अनुमापन करते समय द्रव को घुमाकर हिलाते रहें। ;अपपपद्ध ब्यूरेट मंे विलयन का निचला मेनिस्कस पुनः पढ़ें और इस अंतिम पाठ्यांक को नोट करें। ;पगद्ध यह प्रवि्रफया तब तक दोहराएं जब तक तीन सुसंगत पाठ्यांक प्राप्त न हो जाएं। अपने पाठ्यांकों को सारणी 6.1 के अनुसार रिकाॅडर् करें। सारणी 6.1 - सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन का आॅक्सैलिक अम्ल के विलयन से अनुमापन व्रफम. सं शंक्वाकार फ्रलास्क में प्रत्येक बार लिये गए आॅक्सैलिक अम्ल के विलयन का आयतन ट 1 उस् ब्यूरेट के पाठ्यांक सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन का प्रयुक्त हुआ आयतन ट2 उस् त्र ;ल दृ गद्ध उस् सुसंगत पाठ्यांक प्रारंभ्िाक पाठ्यांक ;गद्ध अन्ितम पाठ्यांक ;लद्ध गणना छंव्भ् विलयन की मोलरता की गणना निम्नलिख्िात समीकरण द्वारा की जा सकती है - आॅक्सैलिक अम्ल सोडियम हाइड्राॅक्साइड ं1 ड1ट1 त्र ं2 ड2ट2 जहांड1 और ट1 व्रफमशः आॅक्सैलिक अम्ल के विलयन की मोलरता और आयतन हैं और डतथा टव्रफमशः सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन की मोलरता तथा आयतन हैं। ं22 1 औरं2 व्रफमशः आॅक्सैलिक अम्ल की क्षारकता एवं सोडियम हाइड्राॅक्साइड की अम्लता हैं। यहाँ ंत्र 2 और ं त्र1 है।1 2इसके अतिरिक्त, आॅक्सैलिक अम्ल, ;ब्व्व्भ्द्धण्2भ्व् का मोलर द्रव्यमान22126 ह उवसदृ1 और सोडियम हाइड्राॅक्साइड, छंव्भ् का मोलर द्रव्यमान 40 ह उवसदृ1 है। सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन की सांद्रता की गणना हध्स् में निम्नलिख्िात समीकरण द्वारा करें। हध्स् में सांद्रता ;सामथ्यर्द्ध त्र मोलरता × मोलर द्रव्यमान परिणाम सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन की सांद्रता ;सामथ्यर्द्ध कृकृकृकृकृकृहध्स् है। ;पद्ध ब्यूरेट और पिपेट को उन विलयनों से क्यों खंगाला जाता है जिन्हें इनमें भरना है? ;पपद्ध सूचक क्या होता है? आॅक्सैलिक अम्ल तथा सोडियम हाइड्राॅक्साइड के मध्य अनुमापन में कौन सा सूचक प्रयुक्त किया जाता है? क्या इस अनुमापन में कोइर् अन्य सूचक प्रयुक्त किया जा सकता है? ;पपपद्ध पारदशीर् विलयनों का निचला मेनिस्कस और गहरे रंग के विलयनों का उफपरी मेनिस्कस क्यों पढ़ा जाता है? ;पअद्ध ‘अंत्य ¯बदु’ शब्द की व्याख्या कीजिए। ;अद्ध 1ण्0 ड विलयन से आप क्या समझते हैं? ;अपद्ध पिपेट से विलयन की अन्ितम बूँद पूंफककर क्यों नहीं निकालनी चाहिए? ;अपपद्ध अम्ल की क्षारकता और क्षार की अम्लता शब्दों की व्याख्या कीजिए। ;अपपपद्ध समझाइए कि छंव्भ् तथा भ्ब्स के मध्य अनुमापन में पफीनाॅल.फ्रथेलीन और मेथ्िाल ओरेन्ज दोनों ही उपयुक्त सूचक ़क्यों हैं? ;पगद्ध ‘सुसंगत पाठ्यांक’ शब्द से क्या आशय है? ;गद्ध क्या आॅक्सैलिक अम्ल का विलयन ब्यूरेट में और सोडियम हाइड्राॅक्साइड का विलयन अनुमापन फ्रलास्क में लिया जा सकता है? यदि ऐसा करने में कोइर् सीमा बंध्न हो तो इंगित कीजिए। उद्देश्य सोडियम काबोर्नेट का 0ण्1 ड मानक विलयन बनाना। सि(ांत सोडियम काबोर्नेट के गुणध्मर् प्राथमिक मानकों के निकट होते हैं इसलिए इसे सीध्े तोलकर मानक विलयन बनाया जा सकता है। छं2ब्व्3 का 0ण्1 ड विलयन बनाने के लिए प्रति लिटर विलयन में 10ण्6000 ह सोडियम काबोर्नेट घोलना होगा ;सोडियम काबोर्नेट का मोलर द्रव्यमान 106 ह उवसदृ1 हैद्ध इसलिए छं2ब्व्3 के 0ण्1 ड विलयन के 100 उस् बनाने के लिए 1ण्0600 ह सोडियम काबोर्नेट को आसुत जल की न्यूनतम मात्रा में घोलकर विलयन को ठीक 100 उस् तक आसुत जल से तनुवृफत किया जाता है। आवश्यक सामग्री प्रवि्रफया प्रयोग 2.1 में दी गइर् प्रवि्रफया का अनुसरण करें। उद्देश्य सोडियम काबोर्नेट के मानक विलयन से अनुमापन द्वारा दिए गए तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विलयन की सामथ्यर् ज्ञात करना। सि(ांत हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की सांद्रता सोडियम काबोर्नेट के मानक विलयन द्वारा अनुमापन से ज्ञात की जाती है। इसमें निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफया होती है - छंब्व् ़ 2भ्ब्स ⎯→ 2 छंब्स ़ ब्व़् भ्व्232 2इस अनुमापन में एक दुबर्ल क्षारक, मेथ्िाल ओरेन्ज ;अनायनित अवस्था में पीला रंगद्ध सूचक की तरह प्रयुक्त किया जाता है। इस प्रयोग में भी अनुमापन सामान्य पथ ही अपनाता है यानी अम्ल द्वारा दिए गए प्रोटाॅन पहले विलयन में उपस्िथत सोडियम काबोर्नेट को उदासीन करते हैं। जब संपूणर् सोडियम काबोर्नेट उदासीन हो जाता है तो ब्यूरेट से डाली गइर् अन्ितम बूँद इच्िछत गुलाबी - लाल रंग परिवतर्न कर देती है, यही अंत्य ¯बदु होता है। विलयन की सांद्रता ;सामथ्यर्द्ध की गणना हध्स् में की जाती है। इसकी गणना विलयन की मोलरता से की जाती है। यहाँ मोलरता की समीकरण निम्न प्रकार से लिखी जाती है।क्षारक अम्ल ंडट त्र ंडट111222 जहाँ, ं1 और ं2 व्रफमशः क्षारक और अम्ल की अम्लता और क्षारकता हैं। ड1 और ड2 व्रफमशः मोलरता और टएवं टव्रफमशः क्षारक और अम्ल के एक दूसरे को उदासीन1 2 करने के लिए प्रयुक्त हुए आयतन हैं। आवश्यक सामग्री प्रवि्रफया ;कद्ध सोडियम काबोर्नेट का 0ण्1 ड मानक विलयन बनाना प्रयोग 2.1 में दिए गए प्रव्रफम का अनुसरण करें। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ;खद्ध हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विलयन का सोडियम काबोर्नेट विलयन द्वारा अनुमापन प्रयोग 6.1 में दिए प्रव्रफम का अनुसरण करें। इसमें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ब्यूरेट में और सोडियम काबोर्नेट विलयन शंक्वाकारफ्रलास्क में लिया जाता है। मेथ्िाल ओरेन्ज सूचक की तरह उपयोग में लाया जाता है। अंत्य ¯बदु पर रंग परिवतर्न पीले से गुलाबी - लाल रंग में होता है। अपने प्रेक्षणों को सारणी 6.2 के अनुसार रिकाॅडर् करें। सारणी 6.2 - हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का सोडियम काबोर्नेट विलयन द्वारा अनुमापन व्रफम. सं प्रत्येक बार फ्रलास्क में लिये गए छं 2 ब्व् 3 विलयन का आयतन ट1उस् ब्यूरेट के पाठ्यांक भ्ब्स विलयन का प्रयुक्त हुआ आयतन ट2 उस् त्र ल दृ ग उस् सुसंगत पाठ्यांक/उस् प्रारंभ्िाक पाठ्यांक ;गद्ध अन्ितम पाठ्यांक ;लद्ध गणना भ्ब्स विलयन की प्रबलता की गणना निम्नलिख्िात प्रकार से करें - छं2ब्व्3 विलयन भ्ब्स विलयन ंडट त्र ंडट111222 जहाँ डऔर टसोडियम काबोर्नेट विलयन की व्रफमशः मोलरता और आयतन हैं एवं1 1 ं1 क्षारक के एक मोल द्वारा प्रदत्त व्भ्दृ ;ंुद्ध आयनों के मोलों की संख्या है ;यानी छंब्व्विलयन की अम्लताद्ध23 ∴ ं1 त्र 2 डऔर टहाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विलयन की व्रफमशः मोलरता और आयतन हैं।2 2 ंएक मोल अम्ल द्वारा प्रदत्त भ़् ;ंुद्ध आयनों के मोलों की संख्या है। ;यानी2 भ्ब्स की क्षारकताद्ध। ∴ ं2 त्र 1 छंब्व्का मोलर द्रव्यमान त्र 106 ह उवसदृ1ए23 भ्ब्स का मोलर द्रव्यमान त्र 36ण्5 ह उवसदृ1 ∴ भ्ब्स विलयन की सांद्रता ;सामथ्यर्द्ध हध्स् में त्र मोलरता × मोलर द्रव्यमान परिणाम दिए गए भ्ब्स विलयन की सांद्रता ;प्रबलताद्ध कृकृकृकृकृकृहध्स् है। विवेचनात्मक प्रश्न ;पद्ध सोडियम काबोर्नेट तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के अनुमापन में अंत्य ¯बदु पर परिवतिर्त रंग कौन सा होता है? ;पपद्ध आप सोडियम काबोर्नेट के 0ण्05 ड विलयन के 250 उस् वैफसे बनाएंगे? ;पपपद्ध यद्यपि सोडियम काबोर्नेट एक लवण है पिफर भी इसका जलीय विलयन दुबर्ल क्षारक प्रवृफति का होता है। समझाएं क्यों? ;पअद्ध आप सोडियम काबोर्नेट की अम्लता वैफसे ज्ञात करेंगे। ;अद्ध मेथ्िाल ओरेन्ज आरेर्नियस क्षारक क्यों नहीं है? ;अपद्ध आप छं2ब्व्3 और छंभ्ब्व्3 के मिश्रण के विलयन को भ्ब्स से वैफसे अनुमापित कर सकते हैं? ;अपपद्ध अंत्य ¯बदु और तुल्यता ¯बदु में क्या अंतर है? ;अपपपद्ध क्या आप भ्ब्सए भ्छव्और भ्ैव्का मानक विलयन सीध्े बना सकते हैं?3 24

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