रासकता है। उत्व्रफमणीय अभ्िावि्रफयाएं एक समान ताप और दाब पर एक ही पात्रा में एक साथ अग्र और पश्चगामी दिशा में बढ़ती हैं, साथ ही उत्व्रफमणीय अभ्िावि्रफयाओं में एक ऐसी अवस्था प्राप्त होती है जब अग्रगामी अभ्िावि्रफया की गति पश्चगामी अभ्िावि्रफया की गति के बराबर हो जाती है और ऐसा प्रतीत होता है जैसे अभ्िावि्रफया रुक गइर् हो। इस अवस्था को गतिक साम्य कहते हैं। किसी ताप ज् पर होने वाली निम्नलिख्िात सामान्य उत्व्रफमणीय अभ्िावि्रफया की ओर ध्यान दें। । ़ ठ ब् ़ क् द्रव्यानुपाती वि्रफया नियम के अनुसार अग्र अभ्िावि्रफया की गति, त1ए । और ठ की सांद्रता के गुणनपफल के अनुव्रफमानुपाती होगी तथा पश्चगामी अभ्िावि्रफया की गति, तए ब् तथा क् की सांद्रता के गुणनपफल के2अनुव्रफमानुपाती होगी। अतः त1 त्र ा ख्।,ख्ठ, तथा त त्र ा ख्ब्,ख्क्,1 22 यहाँ ाऔर ाव्रफमशः अग्र और पश्चगामी अभ्िावि्रफया के वेग स्िथरांक हैं एवं ख्।,ए ख्ठ,ए ख्ब्, तथा ख्क्,12 व्रफमशः ।ए ठए ब् और क् की सांद्रताएं हैं। साम्यावस्था पर त1 और त2 बराबर होंगे। ा ख्।,ख्ठ, त्र ा ख्ब्,ख्क्,12 ा1 ख्ब्,ख्क्,त्र⇒ ा2 ख्।,ख्ठ, ा1 ज्ञ त्र रखने पर हम पाते हैं किाब2 ख्ब्,ख्क्,ज्ञब त्र ख्।,ख्ठ, ज्ञ को साम्य स्िथरांक कहते हैं। इसका मान अभ्िाकमर्कों की प्रारंभ्िाक सांद्रता पर निभर्र नहीं करता औरब ताप का पफलन होता है परंतु यह मान निश्िचत ताप पर निश्िचत होता है। यदि किसी ताप पर किसी भी अभ्िावि्रफयक अथवा अभ्िाकमर्क की सांद्रता में परिवतर्न कर दिया जाए तो साम्यावस्था विचलित हो जाती है और ले शातैलिए के नियमानुसार, अभ्िावि्रफया उस दिशा की ओर अग्रसर होती है जिससे सांद्रता परिवतर्न का प्रतिकार हो और साम्यावस्था यथावत बनी रहे। किसी भी अभ्िावि्रफया में साम्यावस्था को किसी दिखने वाले गुणध्मर् ;स्थूलदशीर्य गुणध्मर्द्ध, जैसे विलयन के रंग की तीव्रता इत्यादि से पहचाना जाता है। इस एकक में हम विभ्िान्न साम्य अभ्िावि्रफयाओं की साम्यावस्था के विस्थापन के विषय में पढ़ेंगे। प्रयोगशाला पुस्ितका, रसायन पेफरिक क्लोराइड ऽ त्वचा और आँखों का बचाव करें। प्रिया ;पद्ध एक बीकर में 100 उस् जल में 0ण्1 ह थ्मब्स3 घोलें और दूसरे बीकर में 100 उस् जल में 0ण्1 ह पोटैश्िायम थायोसायनेट घोलें। ;पपद्ध 20 उस् पेफरिक क्लोराइड विलयन में 20 उस् पोटैश्िायम थायोसायनेट विलयन मिलाएं। रक्त - लाल रंग का विलयन प्राप्त होगा। इस विलयन को एक ब्यूरेट में भर लें। ;पपपद्ध पाँच क्वथन नलियाँ लेकर उन्हें ‘क’, ‘ख’, ‘ग’, ‘घ’ और ‘च’ नामांकित करें। ;पअद्ध ब्यूरेट से प्रत्येक क्वथन नली में 2ण्5 उस् रक्त - लाल रंग का विलयन भर लें। ;अद्ध क्वथन नली ‘क’ में 17ण्5 उस् जल डालें जिससे इसमें विलयन का वुफल आयतन 20 उस् हो जाए। इसे संदभर् के लिए रख लें। ;अपद्ध अब तीन ब्यूरेट लेकर उन पर ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ लिखें। ;अपपद्ध ब्यूरेट ‘क’ में पेफरिक क्लोराइड विलयन, ब्यूरेट ‘ख’ में पोटैश्िायम थायोसायनेट विलयन और ब्यूरेट ‘ग’ में जल भर लें। ;अपपपद्ध क्वथन नली ‘ख’, ‘ग’, ‘घ’, एवं ‘च’ में ब्यूरेट ‘क’ से व्रफमशः 1ण्0 उस्ए 2ण्0 उस्ए 3ण्0 उस् और 4ण्0 उस् पेफरिक क्लोराइड विलयन मिलाएं। ;पगद्ध अब ब्यूरेट ‘ग’ से क्वथन नलियों ‘ख’, ‘ग’, ‘घ’ एवं ‘च’ में व्रफमशः 16ण्5 उस्ए 15ण्5 उस्ए 14ण्5 उस् और 13ण्5 उस् जल मिलाएं जिससे प्रत्येक क्वथन नली में विलयन का वुफल आयतन 20 उस् हो जाए। चित्रा 4.1 - साम्यावस्था का विस्थापन देखने के लिए प्रयोग की व्यवस्था। प्रत्येक क्वथन नली में 20 उस् विलयन है। नोट - ऽ तनुकरण से विलयन के रंग की तीव्रता अत्यध्िक कम हो जाएगी। यह गहरे रक्त लाल रंग का नहीं रहेगा। ऽ प्रत्येक परखनली में विलयन का वुफल आयतन 20 उस् है। ऽ प्रत्येक परखनली में 2ण्5 उस् साम्यावस्था मिश्रण है। ऽ परखनलियों में थ्मब्स3 की मात्रा ‘ख’ परखनली से ‘च’ परखनली की ओर बढ़ रही है। रासायनिक साम्य ;विलयन में आयनिक साम्यद्ध ;गद्ध प्रत्येक क्वथन नली के विलयन के रंग की तीव्रता की तुलना क्वथन नली ‘क’ में रखे संदभर् विलयन से करें। ;गपद्ध चार क्वथन नलियों का दूसरा सेट लेकर उन पर ख′, ग′, घ′ एवं च′ नामांकित करें। क्वथन नलियों में ब्यूरेट ‘ख’ से व्रफमशः 1ण्0 उस्ए 2ण्0 उस्ए 3ण्0 उस् और 4ण्0 उस् पोटैश्िायम थायोसायनेट विलयन मिलाने के बाद व्रफमशः 16ण्5 उस्ए 15ण्5 उस्ए 14ण्5 उस् और 13ण्5 उस् जल मिलाकर प्रयोग दोहराएं। दोबारा विलयन के रंग की तीव्रता की तुलना क्वथन नली ‘क’ में रखे संदभर् विलयन से करें। ;गपपद्ध अपने परिणामों को सारणी 4.1 और 4.2 में सारणीब( करें। ;गपपपद्ध आप अपने प्रेक्षणों को पोटैश्िायम थायोसायनेट और पेफरिक क्लोराइड विलयनों की विभ्िान्न मात्राएं लेकर और संदभर् विलयन से आवश्यक मिलान करके दोहरा सकते हैं। सारणी 4.1 - पेफरिक आयनों की सांद्रता बढ़ाने से साम्यावस्था में विस्थापन क्वथन नली क निकाय में लिए गए थ्मब्स3 विलयन की मात्रा उस् में क्वथन नली ‘क’ के संदभर् विलयन से मिलान करने पर रंग की तीव्रता में परिवतर्न मिलान करने के लिए संदभर् विलयन जिसमें 2ण्5 उस् रक्त लाल विलयन ़ 17ण्5 उस् जल है ;20 उस् साम्यावस्था मिश्रणद्ध साम्यावस्था के विस्थापन की दिशा साम्यावस्था ख 1ण्0 ग 2ण्0 घ 3ण्0 च 4ण्0 सारणी 4.2 - थायोसायनेट आयनों की सांद्रता बढ़ाने से साम्यावस्था में विस्थापन क्वथन नली क निकाय में लिए गए थायोसायनेट विलयन की मात्रा उस् में क्वथन नली ‘क’ के संदभर् विलयन से मिलान करने पर रंग की तीव्रता में परिवतर्न मिलान करने के लिए संदभर् विलयन जिसमें 2ण्5 उस् रक्त लाल विलयन ़ 17ण्5 उस् जल है ;20 उस् साम्यावस्था मिश्रणद्ध साम्यावस्था के विस्थापन की दिशा साम्यावस्था ख′ 1ण्0 ग′ 2ण्0 घ′ 3ण्0 च′ 4ण्0 प्रयोगशाला पुस्ितका, रसायन विवेचनात्मक प्रश्न ;पद्ध समझाइए कि पेफरिक और थायोसायनेट आयनों के बीच पुस्तक में लिखी हुइर् निम्नलिख्िात रासायनिक समीकरण थ्म3़ ;ंुद्ध ़ ैब्छदृ;ंुद्ध ख्थ्म ;ैब्छद्ध,2़ ;ंुद्ध को निम्नलिख्िात प्रकार से लिखना अध्िक उचित क्यों है? ,3़ख्थ्म ;भ्2व्द्ध6 ़ ैब्छदृ;ंु द्ध ख्थ्म ;भ्2व्द्ध5 ;ैब्छद्ध,2़ ़ भ्2व् ;पपद्ध क्या रंग की तीव्रता का स्थायित्व साम्य की गतिक प्रवृफति प्रदश्िार्त करता है? अपना उत्तर उचित कारणों द्वारा समझाएं। ;पपपद्ध साम्य स्िथरांक क्या होता है और यह वेग स्िथरांक से किस प्रकार भ्िान्न है? ;पअद्ध उपरोक्त प्रयोग को हमेशा तनु विलयनों से करने की सलाह क्यों दी जाती है? ;अद्ध साम्यावस्था पर निकाय में ठोस पोटैश्िायम क्लोराइड डालने का क्या प्रभाव होगा? अपने उत्तर की पुष्िट प्रयोग द्वारा करें। ;अपद्ध प्रयोग में एक ही आमाप की क्वथन नलियाँ क्यों प्रयोग की जाती हैं? उद्देश्य ख्ब्व;भ्2व्द्ध6,2़ तथा ब्सदृ आयनों के मध्य अभ्िावि्रफया में इनमें से किसी भी आयन की सांद्रता में परिवतर्न करने से साम्यावस्था के विस्थापन का अध्ययन। सि(ांत ख्ब्व ;भ्व्द्ध,2़ तथा ब्सदृ आयनों के मध्य निम्नलिख्िात विस्थापन अभ्िावि्रफया होती है।26,2़,2दृख्ब्व;भ्2व्द्ध6 ़ 4ब्सदृ ख्ब्वब्स4 ़ 6भ्2व् गुलाबी नीला रासायनिक साम्य ;विलयन में आयनिक साम्यद्ध यह अभ्िावि्रफया लिगन्ड विस्थापन अभ्िावि्रफया कहलाती है और इसके लिए साम्य स्िथरांक, ज्ञए को निम्नलिख्िात प्रकार से लिखा जा सकता है - 2दृख्ख्ब्वब्स , , ज्ञ त्र4 2़ दृ4ख्ख्ब्व;भ् व्द्ध , , ख्ब्स , 26 क्योंकि अभ्िावि्रफया जलीय माध्यम में होती है अतः माना जाता है कि जल की सांद्रता लगभग स्िथर रहती है और यह ज्ञ के मान में समाहित है तथा इसे साम्य स्िथरांक के व्यंजक में अलग से नहीं लिखा जाता। दृअब यदि ख्ब्व ;भ्2व्द्ध6,2़ अथवा ब्सआयन में से किसी की भी सांद्रता बढ़ा दी जाए तो ख्ब्वब्स4,2दृ आयनों की सांद्रता बढ़ जाएगी और इस प्रकार ज्ञ का मान स्िथर बना रहेगा। दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि साम्य अग्र दिशा में विस्थापित हो जाएगा। परिणामस्वरूप रंग में तदनुरूप परिवतर्न होगा। आवश्यक सामग्री प्रिया ;पद्ध एक शंक्वाकार फ्रलास्क में 60 उस् ऐसीटोन लेकर उसमें 0ण्6000 ह ब्वब्स2 पूणर्तः घोल लें जिससे नीले रंग का विलयन प्राप्त हो जाएगा। ;पपद्ध पाँच परखनलियाँ लेकर उन पर ‘क’, ‘ख’, ‘ग’, ‘घ’ तथा ‘च’ चिित कर लें। ‘क’ से ‘च’ तक प्रत्येक परखनली में 3ण्0 उस् कोबाल्ट क्लोराइड विलयन भर लें। अब इनमें व्रफमशः 1ण्0 उस्ए 0ण्8 उस्ए 0ण्6 उस्ए 0ण्4 उस्ए 0ण्2 उस् ऐसीटोन मिलाएं। परखनली ख से च तक व्रफमशः 0ण्2 उस्ए 0ण्4 उस्ए 0ण्6उस् और 0ण्8 उस् जल मिलाएं, जिससे प्रत्येक परखनली में विलयन का वुफल आयतन 4ण्0 उस् रहे। ;पपपद्ध जल की मात्रा बढ़ाने पर मिश्रण के रंग में नीले रंग से गुलाबी रंग की ओर व्रफमशः होने वाले परिवतर्न की ओर ध्यान दें। ;पअद्ध कोबाल्ट क्लोराइड के ऐसीटोन में बनाए गए विलयन के 10 उस् लेकर उसमें 5 उस् आसुत जल मिलाएं। गुलाबी रंग का विलयन प्राप्त होगा। ;अद्ध पाँच अलग - अलग परखनलियों में जिन पर ‘क′’, ‘ख′’, ‘ग′’, ‘घ′’ एवं ‘च′’ नामांकित हो व्रफमशः चरण ;पअद्ध का 1ण्5 उस् गुलाबी विलयन भर लें। ‘क′’ नोट - ऽ प्रयोग के पहले सेट में क्लोरो संवुफल की सांद्रता स्िथर है और जल की सांद्रता बदल रही है। ऽ दूसरे सेट में एक्वा संवुफल की सांद्रता स्िथर है और क्लोराइड आयनों की सांद्रता बढ़ रही है। 51 प्रयोगशाला पुस्ितका, रसायन से ‘घ′’ तक परखनलियों में व्रफमशः 2ण्0 उस्ए 1ण्5 उस्ए 1ण्0 उस् और 0ण्5 उस् जल मिलाएं और पिफर परखनलियों ‘क′’ से ‘च′’ तक व्रफमशः 0ण्5 उस्ए 1ण्0 उस्ए 2ण्0 उस् और 2ण्5 उस् सांद्र भ्ब्स डालें जिससे प्रत्येक परखनली में विलयन का वुफल आयतन 4 उस् रहे। ;अपद्ध सांद्र भ्ब्स की मात्रा बढ़ने के साथ - साथ गुलाबी विलयन के रंग में व्रफमशः हल्के नीले रंग की ओर आने वाले परिवतर्न पर ध्यान दें। अपने प्रेक्षणों को सारणीब( करें ;सारणी 4.2 तथा 4.3द्ध। दृसारणी 4.4 - ब्सआयन मिलाने पर साम्यावस्था विस्थापन

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