प्रसोडा - लाइम काँच और बोरोसिलीकेट काँच। सोडा - लाइम काँच, जो सोडा, लाइमस्टोन और सिलिका को एक साथ गरम करके बनाया जाता हैऋ बनर्र की ज्वाला में लगभग 300 दृ 400°ब् पर आसानी से मुलायम पड़ने लगता है। इसलिए इस काँच से बनी हुइर् नली गरम करने पर आसानी से मुलायम पड़ जाती है और इसे मोड़ा जा सकता है। सोडा - काँच का प्रसार गुणांक बहुत अिाक होता है इसलिए अचानक गरम या ठंडा करने से यह टूट सकता है। टूटना रोकने के लिए इसे ध्ीरे - ध्ीरे गरम करना चाहिए। हल्का गरम करके अनीलन करने से और पिफर एकसमान ठंडा करने से इसका टूटने से बचाव होता है। ऐसा काँच यदि गरम हो तो पर ठंडी सतह पर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि अचानक ठंडा करने से यह टूट सकता है। बोरोसिलीकेट काँच 700 दृ 800°ब् ताप से नीचे मुलायम नहीं पड़ता तथा इससे कायर् करने के लिए आॅक्सीजन - प्रावृफतिक गैस की ज्वाला की आवश्यकता होती है। आॅक्सीजन - प्रावृफतिक गैस ज्वाला प्राप्त करने के लिए आॅक्सीजन मिश्रित प्रावृफतिक गैस जलाइर् जाती है। इस काँच का प्रसार गुणांक कम होता है और इससे बने उपकरण ताप का अचानक परिवतर्न झेल सकते हैं, इसलिए गरम करने के प्रयोजन से बनाए जाने वाले उपकरण इस काँच से बनाए जाते हैं। बोरोसिलिकेट काँच से बना उपकरण गरम करने पर नहीं मुड़ता। आगे के पृष्ठों में आप अपने आप को हानि पहुँचाए बिना, काँच की नलियों और छड़ों का उपयोग करने की तकनीक सीखेंगे। आप प्रयोगशाला के उपकरणों और उपस्करों का उपयोग करना भी सीखेंगे। 2.1 काँच की छड़ और काँच की नली को काटना आवश्यक सामग्री प्रवि्रफया ;पद्ध काँच की छड़ अथवा नली को मेज पर बाएं हाथ से दबा कर पकड़ें। प्रयोगशाला की मूलभूत तकनीक ;पपद्ध नली/छड़ पर निशान डालने के लिए त्रिाकोणी रेती के निचले भाग को धार वाले किनारे की ओर से नली/छड़ पर लंबवत रखें और रेती को अपनी ओर खींचे जिससे नली/छड़ के उफपर इच्िछत दूरी पर एक गहरा खंरोच का निशान पड़ जाए ;चित्रा 2.1 कद्ध। ;पपपद्ध अब हाथों के अंगूठे एक साथ काँच की नली पर पड़े निशान के दूसरी ओर दोनों तरपफ रख कर नली को चित्रा 2.1 ख के अनुसार पकड़ें तथा अंगूठों से अपने से दूर दबाव डालते हुए नली को तोड़ दें ;चित्रा 2.1 गद्ध। तोड़ने का कायर् नली/छड़ को कपड़े से पकड़ कर करें जिससे हाथों में चोट न लगे। ;पअद्ध यदि काँच की नली न टूटे तो पहले डाले गए निशान पर ही और गहरा निशान बनाएं और दोबारा तोड़ने की कोश्िाश करें। ;अद्ध कटे स्थान पर बने वुफछ टेढ़े - मेढ़े किनारों को तार की जाली के प्रहार से तोड़कर बराबर कर लें ;चित्रा 2.2 कद्ध। ;अपद्ध काटे गए किनारे एकसमान और गोल करने के लिए बनर्र की ज्वाला में धीरे - धीरे गरम करें ;चित्रा 2.2 खद्ध। इसे अग्िन पाॅलिशन कहते हैं। अग्िन पाॅलिशन के लिए पहले कटे हुए किनारे को बनर्र की ज्वाला में लगातार गरम करें और पिफर घुमाते हुए तब तक गरम करें जब तक किनारे गोलाइर् प्राप्त न कर लें। अत्यध्िक गरम चित्रा 2.1 - ;कद्ध काँच की नली अथवा छड़ पर निशान डालना ;खद्ध अंगूठों को एक साथ खंरोच के निशान के ठीक दूसरी ओर रखना ;गद्ध काँच की नली अथवा छड़ को तोड़ना कटे हुए किनारे को बुन्सेन ज्वाला में कटा हुआ अग्िन पाॅलिशन के अत्यध्िकलगातार हल्का गरम करने के बाद आगे किनारा पश्चात उचित गरम कियाऔर पीछे, किनारे गोल होने तक घुमाएं गोलाइर् प्राप्त किनारे हुआ सिरा ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध चित्रा 2.2 - ;कद्ध टेढ़े मेढ़े किनारों को काटना ;खद्ध किनारों को गोल बनाना ;गद्ध अच्छे और खराब गोल हुए किनारे सावधनियाँ ;कद्ध इच्िछत दूरी पर रेती से एक ही झटके से एक गहरा निशान बनाएं। ;खद्ध हाथ पर चोट लगने से बचाने के लिए काँच की नली/छड़ पर निशान लगाते समय और तोड़ने के लिए चेहरे से यथा संभव दूरी पर रखें और कपड़े के टुकड़े से पकड़कर तोड़ें। विवेचनात्मक प्रश्न ;पद्ध काँच का गलनांक निश्िचत क्यों नहीं होता? ;पपद्ध काँच की नली/छड़ के कटे हुए किनारों को गोल बनाना आवश्यक क्यों होता है? 2.2 काँच की नली को मोड़ना आवश्यक सामग्री ऽ काँच की नली - 20 दृ 25 बउ लम्बी ऽ त्रिाकोणी रेती - एक प्रवि्रफया ;पद्ध प्रयोग 2.1 में वण्िार्त विध्ि के अनुसार त्रिाकोणी रेती की सहायता से आवश्यक लंबाइर् की काँच की छड़ काटें। ;पपद्ध अब जहाँ से नली को मोड़ना है उस भाग को बुन्सेन बनर्र की ज्वाला के सबसे गरम भाग में रखें और गरम करें ;चित्रा 2.3 कद्ध। ;पपपद्ध ज्वाला में गरम करते समय नली को ध्ीरे - ध्ीरे तब तक घुमाते रहें जब तक मोड़ा जाने वाला भाग तप्त - लाल और मुलायम होकर अपने ही भार से मुड़ने न लगे ;चित्रा 2.3 खद्ध। ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध चित्रा 2.3 - ;कद्ध नली को गरम करना ;खद्ध नली का मुलायम होकर अपने ही भार से मुड़ना ;गद्ध मोड़ को समतलीय करना प्रयोगशाला की मूलभूत तकनीक ;पअद्ध नली को ज्वाला से बाहर लाकर ग्लेश टाइल के सहारे ध्ीरे - ध्ीरे इच्िछत कोण पर मोड़ दें जिससे मोड़ सुनिश्िचत रूप से समतलीय हो। जैसा ;चित्रा 2.3 गद्ध में दिखाया गया है। धीरे - धीरे मोड़ने से काँच की नली चपटी होने से बच जाती है ;चित्रा 2.4द्ध। ;अद्ध इसे ग्लेश टाइल पर रखकर ठंडा करें ;चित्रा 2.3 गद्ध। ;अपद्ध नलियों को चित्रा 2.5 में दिखाए गए कोणों पर मोड़ें। आवश्यक सामग्री प्रवि्रफया ;पद्ध जेट बनाने के लिए उपयुक्त व्यास की काँच की नली का चयन करें। ;पपद्ध त्रिाकोणी रेती की सहायता से इच्िछत लम्बाइर् की काँच की नली काटें। ;पपपद्ध नली को दोनों ओर से पकड़कर बीच के भाग को बुन्सेन बनर्र की ज्वाला के सबसे गरम भाग में रखकर गरम करें। ;पअद्ध नली को घुमाते हुए तब तक गरम करते रहें, जब तक ज्वाला में रखा भाग तप्त - लाल होकर मुलायम न पड़ने लगे। ;अद्ध नली को ज्वाला से बाहर लाकर नली के दोनों किनारों को ध्ीरे - ध्ीरे अलग करते हुए तब तक खींचे जब तक बीच वाला भाग ख्िांच कर पतला न हो जाए, जैसा चित्रा 2.6 ख में दिखाया गया है। ;अपद्ध नली को बीच में से काटें ;चित्रा 2.6 गद्ध और जेट को रेगमाल पत्रा से रगड़कर और अग्िन पाॅलिशन द्वारा एकसमान और चिकना बना लें। ;खद्ध ;कद्ध ;गद्ध चित्रा 2.6 - ;कद्ध नली को जेट बनाने के लिए गरम करना ;खद्ध काटने से पहले ;गद्ध काटने के बाद सावधनी ;कद्ध जेट खींचते समय तप्त - लाल नली के सिरों को ध्ीरे - ध्ीरे खींचे जिससे यह एकसमान पतली हो। विवेचनात्मक प्रश्न ;पद्ध जेट बनाने के लिए किस प्रकार के काँच का चयन करना चाहिए? ;पपद्ध जेट बनाने के लिए कम व्यास की काँच की नली का चयन क्यों किया जाता है? 2.4 काॅवर्फ में छेद करना आवश्यक सामग्री ऽ रबर काॅवर्फ - आवश्यकतानुसार ऽ ग्िलसरीन का घोल - आवश्यकतानुसार ऽ काॅवफ वेध्क सेट र् - एक ;शेल्पफ अभ्िाकमर्कद्ध प्रिया ;पद्ध जहाँ छिद्र बनाना हो वहाँ काॅवर्फ पर दोनों ओर निशान बनाएं ;चित्रा 2.7 कद्ध। ;पपद्ध काॅवर्फ के छिद्र में जो काँच की नली डालनी हो उसके व्यास से वुफछ छोटे व्यास के वेध्क का चयन करें ;चित्रा 2.7 खद्ध। ;पपपद्ध रबर काॅवर्फ को मेज पर इस प्रकार रखें कि छोटे किनारे वाला भाग उफपर की ओर रहे जैसा कि चित्रा 2.7 ग में दिखाया गया है। ;पअद्ध अब बाएं हाथ से काॅवर्फ को इसी स्िथति में पकड़ें तथा उपयुक्त वेध्क को जल अथवा ग्िलसरीन से भ्िागोकर चिकना कर लें और उस स्थान पर रखें जहाँ छिद्र करना हो ;चित्रा 2.7 गद्ध। वेधक को पानी अथवा ग्िलसरीन से चिकना कर देने से छिद्र एकसार बनता है। ;अद्ध अब वेध्क पर दबाव डालते हुए और इसे घुमाते हुए काॅवर्फ के अन्दर सीध्े घुसाते जाएं और छिद्र बना लें। ;अपद्ध एक ही काॅवर्फ में दो छिद्र बनाने हों तो छिद्रों के बीच उपयुक्त दूरी रखें और उचित आकार के वेध्क का उपयोग करें। ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध चित्रा 2.7 - ;कद्ध चिित काॅवर्फ ;खद्ध वेध्क का चयन करना ;गद्ध वेध्न प्रव्रफम विवेचनात्मक प्रश्न ;पद्ध छेद करने की प्रवि्रफया में ग्िलसरीन की क्या भूमिका है? ;पपद्ध वेध्क का व्यास छिद्र में डाली जाने वाली नली के व्यास से छोटा क्यों होना चाहिए? चित्रा 2.8 - विलयन को परखनली में गरम करना चित्रा 2.9 - विलयन को बीकर में गरम करना यदि कोइर् विलयन परखनली में गरम करना हो तो, परखनली को परखनली होल्डर से एक कोण पर पकड़कर द्रव की सतह से थोड़ा नीचे गरम करें, परंतु पेंदे से गरम न करें ;चित्रा 2.8द्ध। गरम करते हुए परखनली को यदा - कदा हिलाते रहें। यदि परखनली को पेंदे से गरम किया जाए तो बुलबुला बन सकता है और परखनली की सारी सामग्री तेजी से बाहर बिखर सकती हैं। इसे उच्छलन ;इनउचपदहद्ध कहते हैं। यदि परखनली का मुँह आपकी ओर या आपके आसपास कायर् कर रहे किसी अन्य की ओर हो तो इससे गंभीर दुघर्टना हो सकती है। इसलिए जब आप परखनली को बनर्र पर गरम करें तो ध्यान रखें कि परखनली का मुख आपकी या अन्य किसी की ओर न हो। यदि परखनली की सामग्री को क्वथनांक तक गरम करना हो तो परखनली का केवल एक तिहाइर् भाग ही भरना चाहिए। यदि द्रव को बीकर अथवा फ्रलास्क में गरम करना हो तो इन्हें तिपाए स्टैंड पर रखी जाली पर रखकर गरम करना चाहिए ;चित्रा 2.9द्ध। सुरक्ष्िात क्वथन के लिए सुझाव है कि विलयन में टूटी चीनी मिट्टðी की डिश का कोइर् छोटा सा टुकड़ा, काबोर्रन्डम, माबर्ल, एक तरपफ से बंद वैफपिलरी का टुकड़ा अथवा प्यूमिक पत्थर जैसे अवि्रफय पदाथर् का छोटा सा टुकड़ा डाल देना चाहिए जिससे उच्छलन न हो। नोट - ;पद्ध मोटी दीवारों वाले उपकरणों को कभी गरम न करें क्योंकि ये टूट सकते हैं। सामान्यतः बोरोसिलिकेट काँच से बने उपकरण पदाथो± को गरम करने के काम में लाए जाते हैं। ;पपद्ध जो उपकरण आयतन मापने के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं उन्हें भी गरम नहीं करना चाहिए क्योंकि गरम करने से ये विवृफत हो जाते हैं और उनके अंकन अमान्य हो जाते हैं। निस्यंदन की वि्रफया में ठोस को द्रव से अलग करने के लिए द्रव को एक संरध््र पदाथर् की सहायता से निकालकर अलग कर लिया जाता है। निस्यंदन में संरध्र पदाथर्, कपड़े का टुकड़ा, कागश, सिंटरित काँच, ऐस्बेस्टाॅस इत्यादि हो सकता है। विभ्िान्न आकारों के संरध्र वाले निस्यंदक उपलब्ध हैं। यदि निस्यंदक - पत्रा ;पिसजमत चंचमतद्ध के रंघ्र बड़े हों तो द्रव इसमें से अिाक आसानी से निकल जाएगा तथा निस्यंदन जल्दी होगा, परन्तु छोटे आकार के ठोस कण भी निस्यंदक - पत्रा से निकल सकते हैं। इसलिए निस्यंदन की वििा और निस्यंदक पदाथर् का चयन निस्यंदक पर रुकने वाले पदाथर् के कणों के आकार पर निभर्र करता है। आवश्यक सामग्री प्रिया ;पद्ध निस्यंदक - पत्रा को मोड़कर पफनल में ठीक से बैठा दें जैसा चित्रा 2.10 में दिखाया गया है। ऐसा करने के लिए गोल पिफल्टर पत्रा को ठीक बीच से मोड़ लें। एक कोने से छोटा सा टुकड़ा पफाड़ने के बाद एक बार पिफर मोड़ लें। ;पपद्ध अब मोड़े गए निस्यंदक - पत्रा के तीन हिस्से एक ओर और एक हिस्सा दूसरी ओर रख कर इसे खोल कर इस प्रकार से कोन बना लें कि पफाड़ा गया हिस्सा बाहर की तरपफ रहे। कोन को पफनल में ठीक से बैठा दें। ध्यान रखें कि कोन पफनल के किनारे से एक सेन्टीमीटर नीचे पिफट आए। ;पपपद्ध निस्यंदक - पत्रा को विलायक से भ्िागोएं, जो अिाकतर जल होता है, और इसे इस तरह समायोजित करें कि पूरा कोन पफनल की भीतरी सतह पर अच्छी तरह चिपक जाए और कागश के कोन तथा पफनल की सतह के बीच वायु अन्तराल न रह जाए। ;पअद्ध अब पफनल में थोड़ा और अिाक जल डालें। जिससे इसकी नली पानी से भर जाए। ठीक से पिफट किया गया निस्यंदक - पत्रा पफनल की नली में जल का स्तम्भ बनने में सहायक होता है। इस जल स्तम्भ का भार हल्का सा चूषण उत्पन्न करता है जिससे निस्यंदन जल्दी होता है ;चित्रा 2.11द्ध। नोट - ;पद्ध निस्यंदन जल्दी से करने के लिए झिरीदार निस्यंदक पत्रा सुविधापूवर्क प्रयोग में लाया जा सकता है। सामान्य निस्यंदक - पत्रा में 4 की बजाए 6 या 16 मोड़ बनाए जाते हैं और एंकातर में अंदर और बाहर मोड़ लिए जाते हैं। पेपर को खोलने पर हमें एक झिरीदार निस्यंदक - पत्रा का शंवुफ प्राप्त हो जाता है जिसके मोड़ एक शीषर् पर मिलते हैं। निस्यंदन के लिए अिाक सतह उपलब्ध होने के कारण निस्यंदन जल्दी होता है ;चित्रा 2.12द्ध। चित्रा 2.12 - निस्यंद - पत्रा को मोड़कर झिरीदार निस्यंद - पत्रा का कोन तैयार करना ;पपद्ध ठोस को द्रव से अलग करने के लिए, निस्यंदन को दो चरणों में करना चाहिए। पहले अिाकतर द्रव, हिलाने वाली छड़ के सहारे सावधानीपूवर्क उड़ेल लेना चाहिए ;चित्रा 2.11द्ध। जब बीकर में वुफछ ही मिलीलीटर मिश्रण रह जाए तो बीकर को हल्के से हिलाकर द्रव पफनल में उड़ेल लेना चाहिए। इसके बाद बीकर की दीवार को पानी की धार से खंगाल कर सामग्री को एक बार पिफर पफनल में उड़ेल लेना चाहिए। खंगालने की प्रवि्रफया को तब तक दोहराना चाहिए जब तक बीकर और हिलाने वाली छड़ सापफ न हो जाए। अच्छा होगा कि ठोस - जल मिश्रण को काँच की छड़ के सहारे उड़ेला जाए ;चित्रा 2.11द्ध। तथापि़सावधानी रखनी चाहिए कि निस्यंद - पत्रा काँच की छड़ से पफटे नहीं। चूषण निस्यंदन - उपरोक्त प्रकार से निस्यंदन करना एक धीमा प्रव्रफम होता है। चूषण द्वारा घटे हुए दाब पर निस्यंदन करके इसकी गति को बढ़ाया जा सकता है। चूषण के लिए जल - चूष्िात्रा अथवा निवार्त पंप का प्रयोग किया जा सकता है। जल - चूष्िात्रा ;चित्रा 2.13द्ध को रबर ट्यूब की सहायता से नल पर लगाया जा सकता है। इसमें जल की तेजधार का उपयोग चूषक की भुजा के माध्यम से वायु खींचने के लिए किया जाता है। चूषण अत्यािाक शक्ितशाली होता है, इसलिए निस्यंदन के लिए विशेष प्रकार की पफनल जिसे बुकनर पफनल कहते हैं, का उपयोग किया जाता है। इसे रबर कावर्फ की सहायता से निस्यंदनफ्रलास्क के मुँह पर लगा दिया जाता है ;चित्रा 2.13द्ध। सामान्यतः द्रवों का आयतन मापने के लिए आयतनमितीय फ्रलास्क अंशांकित सिलिंडर,पिपेट और ब्यूरेट उपयोग में लाए जाते हैं। आयतनमितीय फ्रलास्क और सिलिंडर किसी निश्िचत ताप पर द्रव का आयतन मापने के लिए अंशांकित होते हैं। पिपेट और ब्यूरेट निश्िचत ताप पर द्रव के किसी निश्िचत आयतन के निकास के लिए अंशांकित होते हैं। साधरणतयाः उपस्कर के काँच पर क्षमता का निशान बना रहता है। जलीय विलयन काँच की सतह को गीला करते हैं, इसलिए जब यह इन उपस्करों में भरे जाते हैं तो अवतल मेनिस्कस ;बवदबंअम उमदपेबनेद्ध बनाते हैं। मेनिस्कस के मध्य वाला भाग वुफछ चपटा होता है ;चित्रा 2.14 कद्ध। उपस्कर का इस चपटे भाग ;कद्ध चित्रा 2.14 - ;कद्ध काँच के उपस्कर में जल की वव्रफ सतह ;खद्ध पाठ्यांक पढ़ना चित्रा 2.15 - मापक सिलिंडर चित्रा 2.16 - ब्यूरेट से संपाती पाठ्यांक द्रव के आयतन का माप देता है। इसलिए आयतन का अन्ितम समायोजन करते समय या पाठ्यांक नोट करते समय जब बने हुए निशान को आँखों के ठीक सामने रखकर देखा जाए, तो द्रव की ववि्रफत सतह निशान को छूती हुइर् प्रतीत होनी चाहिए ;चित्रा 2.14 खद्ध। इससे पैरेलैक्स त्राुटि से, जो देखने वाले की स्िथति परिवतर्न के कारण होती है, बचाव होता है। ध्यान दें कि यदि द्रव उत्तल मेनिस्कस बनाता हो या रंगीन और अपारदशीर् हो तो उफपर की ओर वाले भाग से संपाती पाठ्यांक पढ़ा जाताहै। मेनिस्कस पढ़ने में गलती को न्यूनतम रखने के लिए फ्रलास्क और पिपेट में क्षमता का निशान इन उपस्करों के संकरे भाग पर बना रहता है। मापक सिलिंडर अत्यिाक परिशु(ता के मापन में प्रयुक्त नहीं किए जाते इसलिए इनका संकरा होना आवश्यक नहीं होता। ब्यूरेट और पिपेट द्रव के आयतन को परिशु(ता से मापने के लिए प्रयुक्त होते हैं। ;कद्ध मापक सिलिंडर का उपयोग करना मापने के लिए सदैव एक सापफ मापक सिलिंडर ;चित्रा 2.15द्ध प्रयोग में लाना चाहिए क्योंकि मापे जाने वाले पदाथर् को धूल रासायनिक रूप से संदूष्िात कर सकती है और आयतन के सही निधार्रण में बाधा डाल सकती है। गंदे काँच के सामान पर द्रव का बहाव ठीक से नहीं होता और निकासित आयतन अंशांकित आयतन के बराबर नहीं भी हो सकता। 5 उस्ए 10 उस्ए 25 उस्ए 100 उस्ए 250 उस्ए 500 उस्ए 1000 उस् और 2000 उस् क्षमता के मापक सिलिंडर उपलब्ध हैं। द्रव के किसी आयतन के निकास के लिए बनाए गए मापक सिलिंडरों की क्षमता पाठ्यांक से वुफछ अिाक होती है। यह मात्रा, द्रव निकाल देने के बाद दीवारों पर चिपके रह गए द्रव की पतली परत की क्षतिपूतिर् कर देती है। ;खद्ध ब्यूरेट का उपयोग करना ब्यूरेट एक समान छिद्र वाली साधारण अंशांकित लम्बी नली होती है जिसके एक सिरे पर रोधनी या पिंच काॅक लगा रहता है ;चित्रा 2.16द्ध। यह मात्रात्मक ;आयतनमितीद्ध आकलन में आयतन मापने के लिए प्रयुक्त होता है। ब्यूरेट का पाठ्यांक द्रव को निकालने से पहले और बाद में पढ़ा जाता है। इन दोनांे पाठ्यांकों के मध्य अन्तर, निकाले गए द्रव का आयतन होता है। द्रव को बूँद - बूँद करके निकालना चाहिए। यदि द्रव को बहुत तेजी से निकाला जाए तो ब्यूरेट की दीवारों से द्रव का निष्कासन अच्छी तरह नहीं होता और वुफछ द्रव दीवार की सतह पर लगा रह जाता है, जिससे गलत पाठ्यांक प्राप्त हो सकता है। प्रयोगशाला में प्रयुक्त होने वाले ब्यूरेट की क्षमता सामान्यतः 50 उस् होती है। ब्यूरेट में विलयन भरने से पहले इसे भरे जाने वाले विलयन से खंगाल लेना चाहिए। खंगालने के लिए ब्यूरेट में वुफछ मिलीलिटर विलयन लेकर ब्यूरेट को घुमाते हुए इसकी पूरी सतह को विलयन से गीला कर लिया जाता है। खंगालने के बाद विलयन को ब्यूरेट की नाॅशॅल से निकाल देते हैं ;चित्रा 2.17द्ध। चित्रा 2.17 - ब्यूरेट को खंगालना खंगालने के बाद पफनल की सहायता से ब्यूरेट में शून्य निशान से वुफछ उफपर तक विलयन भर लिया जाता है तथा रोध्नी को पूरा खोलकर विलयन को नाॅशॅल से तब तक निकाला जाता है जब तक उसमें वायु का कोइर् बुलबुला नहीं रह जाता ;चित्रा 2.18द्ध। चित्रा 2.18 - ब्यूरेट भरना 27 ब्यूरेट में द्रव का स्तर पढ़ने के लिए आधा काला - आधा सपेफद काडर्, जिसे ऐन्टीपैरेैलक्स काडर् कहते हैं, मेनिस्कस के स्तर के पीछे इस तरह पकड़ें कि काला भाग मेनिस्कस को केवल छूता हुआ प्रतीत हो ;चित्रा 2.19 क, खद्ध। पैरेैलक्स दोष से बचने के लिए आँखें मेनिस्कस के स्तर के ठीक सामने होनी चाहिए। ब्यूरेट के उस अंशांकन को पढ़ें जो काडर् के काले भाग को छूता हो ;चित्रा 2.19 खद्ध। हमेशा याद रखें कि ब्यूरेट में सभी पारदशीर् विलयनों के लिए निचले मेनिस्कस से समायोजित पाठ्यांक पढ़ा जाता है और सभी गहरे रंग के विलयनों के लिए ;उदाहरण - पोटैश्िायम परमैंगनेट विलयनद्ध उफपरी मेनिस्कस से समायोजित पाठ्यांक पढ़ते हैं। ब्यूरेट का पाठ्यांक पढ़ने से पहले पफनल हटाना न भूलें और सुनिश्िचत कर लें कि नाॅशॅल पूरी भरी है। पाठ्यांक पढ़ते समय सावधानी रखें कि ब्यूरेट की नाॅशॅल से बूँद न लटक रही हो। ;गद्ध पिपेट का उपयोग करना सामान्यतः 1 उस्ए 2 उस्ए 5 उस्ए 10 उस्ए 20 उस्ए 25 उस् इत्यादि क्षमता की पिपेट प्रयुक्त की जाती हैं। प्रयोगशाला कायर् में अंशांकित पिपेट भी प्रयुक्त होती हैं ;चित्रा 1.3द्ध। पिपेट ;चित्रा 2.20 कद्ध का उपयोग द्रवों का आयतन मापने के लिएतब करते हैं जब इन्हें किसी फ्रलास्क अथवा अन्य उपकरण में डालना हो। मुँह अथवा पिपेट भरने वाले बल्ब अथवा पिपेट भरने के पंप की सहायता से चूषण ;ेनबजपवदद्ध द्वारा द्रव को पिपेट में भर लेते हैं। पिपेट को भरने के लिए पिपेट भरने वाले बल्ब अथवा पिपेट भरने वाले पंप का उपयोग सदैव सुरक्ष्िात होता है। जब विषैले और संक्षारक विलयन पिपेट में खींचने हों तो मुँह से चूषण कभी न करें। पिपेट में द्रव खींचने के लिए पिपेट भरने वाले बल्ब का प्रयोग करें। पिपेट को एक हाथ से मजबूती से पकड़ें। पिपेट के जेट को निकाले जाने वाले विलयन में डुबोएं और दूसरे हाथ से पिपेट बल्ब को दबाएं ;चित्रा 2.20 खद्ध। अब ;खद्ध बल्ब पर अपनी पकड़ ढीली करें जिससे द्रव पिपेट में ख्िांच जाए। जब द्रव पिपेट पर बने निशान से उफपर चला जाए तो बल्ब निकाल दें और चित्रा 2.19 - ;कद्धब्यूरेट पर ऐन्टीपैरेलैक्स काडर् चढ़ाना इसके स्थान पर हाथ की तजर्नी उंगली रख दें जैसा चित्रा 2.20 ग में;खद्धसही पाठ्यांक पढ़ने के लिए दिखाया गया है। अतिरिक्त द्रव को निकालने के लिए उंगली की पकड़ऐन्टीपैरेलैक्स काडर् का उपयोग को सावधानीपूवर्क ढीला करें जिससे द्रव के मेनिस्कस का वव्रफ, पिपेट पर बने निशान तक पहुँच जाए। अब सावधानी से उंगली हटा लें और द्रव को फ्रलास्क में बह जाने दें ;चित्रा 2.20 घद्ध। पिपेट खाली हो जाने के बाद बचे हुए द्रव को पूंफक कर बाहर न निकालें। पिपेट की बनावट ऐसी होती है कि थोड़ा सा बचा हुआ द्रव, जो निकालने से बच जाता है, ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध अंशांकन में नहीं लिया जाता ;चित्रा 2.20 चद्ध। पूरा द्रव निकालने के बाद अिाकतम आयतन प्राप्त करने के लिए पिपेट को उस पात्रा की दीवार अथवा तल से छुएं जिसमें द्रव डाला जा रहा हो ;चित्रा 2.20 घद्ध। पिपेट को भी उस विलयन से खंगालना चाहिए जिसको इससे मापना है। इसके लिए वुफछ मिलीलिटर विलयन पिपेट में भर कर इसे घुमाते हुए पिपेट की पूरी भीतरी सतह को विलयन से भ्िागो दें ;चित्रा 2.21द्ध। खंगालने के बाद इसमें से पूरा विलयन नाॅशॅल से बाहर निकाल दें। अब यह पिपेट विलयन मापने के लिए तैयार है। ध्यान रखें कि पिपेट से कायर् करते समय हाथ पूरी तरह सूखे हों, जिससे दाब आसानी से नियंत्रिात किया जा सके। पिपेट की नाॅशॅल भी टूटी हुइर् नहीं होनी चाहिए। चित्रा 2.20 - ;कद्ध पिपेट ;खद्ध पिपेट पिफलर बल्ब का उपयोग ;गद्ध बल्ब निकालने के बाद पिपेट पकड़ना;घद्ध फ्रलास्क में द्रव स्थानांतरित करना ;चद्ध विलयन मापने के बाद पिपेट की नाॅशॅल ;घद्ध ;चद्ध चित्रा 2.21 - पिपेट को खंगालना चित्रा 2.22 - मापक फ्रलास्क ;घद्ध मापक फ्रलास्क का उपयोग करना यह विलयनों का निधार्रित आयतन बनाने के काम में लाए जाते हैं। इसे अंशांकित फ्रलास्कअथवा आयतनमिती फ्रलास्क भी कहते हैं। यह नाशपाती के आकार वाला पात्रा होता है,जिसकी गदर्न लम्बी और तला चपटा होता है ;चित्रा 2.22द्ध। इसकी गदर्न पर बना वृत्ताकार निशान द्रव के उस आयतन को इंगित करता है, जो निश्िचत ताप पर इसमें आता है।ताप और उस ताप पर फ्रलास्क की क्षमता फ्रलास्क पर लिखी रहती है। गदर्न पर बना निशान मेनिस्कस का अन्ितम समायोजन करते समय पैरेलैक्स के कारण होने वाली त्राुटि से बचने में सहायक होता है। मेनिस्कस का निचला भाग अंशांकन के निशान पर टेन्जेन्टहोना चाहिए। अन्ितम समायोजन करते समय वृत्ताकार निशान का अगला और पिछला भागएक लाइन में दिखना चाहिए। मेनिस्कस के समायोजन में त्राुटि कम करने के लिए फ्रलास्क की गदर्न पतली बनाइर् जाती है। कम जगह में छोटा सा आयतन परिवतर्न भी मेनिस्कस की उफँचाइर् पर अत्यध्िक प्रभाव डालता है।विभ्िान्न क्षमताओं के मापक फ्रलास्क उपलब्ध हैं। सामान्यतः इस स्तर के प्रयोगों के लिए 50 उस्ए 100 उस्ए और 250 उस् के मापक फ्रलास्क काम में लाए जाते हैं। इसअध्याय में आगे दिए गए प्रयोग 2.1 में मापक फ्रलास्क का उपयोग करके विलयन बनाने की वििा का वणर्न किया गया है। 2.9 तोलने की तकनीक ;कद्ध वैश्लेष्िाक तुला ;रासायनिक तुलाद्ध से परिचय रासायनिक तुला की संरचना और कायर् करने का सि(ांत वही है जो भौतिक तुला का होता है। तथापि, अिाक संवेदनशीलता के कारण इसकी यथाथर्ता अिाक होती है। रासायनिक तुला द्वारा दशमलव के चतुथर् स्थान तक यथाथर्ता से तोला जा सकता है। वैश्लेष्िाक तुला से किसी पदाथर् का द्रव्यमान ±0ण्0002 ह यथाथर्ता तक तोला जा सकता है। इसे तुला का अल्पतमांक ;समंेज बवनदजद्ध कहते हैं। दो पलड़ों वाली संपूणर् वैश्लेष्िाक तुला चित्रा 2.23 में दिखाइर् गइर् है। इस प्रकार की तुला में बीम एक कठोर परन्तु हल्के पदाथर् की बनी होती है। बीम अपने वेंफद्र पर एक क्षुरधार ;ादपमि मकहमद्ध कीलक पर झूलती है जो ऐगेट अथवा कोरंडम जैसे अत्यिाकप्रयोगशाला की मूलभूत तकनीक कठोर पदाथर् की प्लेट पर स्िथत होता है। प्लेट वेंफद्रीय बीम - आधार ;वेंफद्रीय स्तंभद्ध से जुड़ी रहती है। वेंफद्रीय क्षुर - धार से दोनों तरपफ बराबर दूरी पर, दोनों किनारों पर, ऐगेट की क्षुर - धार स्िथत होती है इनमें से प्रत्येक एक अनुलंबन को, जिसे रकाब कहते हैं सहारा देती है, जिससे पलड़े लटकाए जाते हैं। बीम के वेंफद्र पर एक नुकीला संकेतक जुड़ा रहता है ;चित्रा 2.24 कद्ध। संकेतक स्तंभ के निचले हिस्से पर जुड़ी स्केल पर घूमता है तथा तुला की वि्रफयाशील स्िथति में बीम का वेंफद्रीय स्िथति से विक्षेपण दशार्ता है ;चित्रा 2.24 खद्ध। बीम को सीधी स्िथति में समायोजित करने के लिए इसके दोनों ओर समंजन पेंच होते हैं। तुला के नीचे तीन समतलन पेंच होते हैं जिससे इसे क्षैतिज करा जा सके। वेंफद्रीय स्तंभ के पास एक प्लम्ब लाइन भी लटकती रहती है जो तुला को क्षैतिज रखने में सहायता करती है। तुला को वि्रफयाशील करने के लिए आधार के वेंफद्र पर एक घुंडी होती है। ;कद्ध ;खद्ध चित्रा 2.24 - ;कद्ध तुलादण्ड से संलग्न संकेतक ;खद्ध संकेतक का चालन ;खद्ध भ्िान्नात्मक भार तथा राइडर सहित बाट पेटी रासायनिक तुला की बाट पेटी में सामान्यतः निम्नलिख्िात बाट होते हैं - ;कद्ध ग्राम में तोलने के लिए बाट - 100ए 50ए 20ए 20ए 10ए 5ए 2ए 2ए 1 ;खद्ध मिलीग्राम में तोलने के लिए बाट - 500ए 200ए 200ए 100ए 50ए 20ए 20ए 10 ;गद्ध राइडर - 0ण्2 उह से 10 उह तक तोलने के लिए रासायनिक तुला में तोलने के लिए तीनों वगो± के बाट चित्रा 2.25 में दिखाए गए हैं। इन बाटों को बनाने के लिए प्रयुक्त होने वाले पदाथर् नीचे दिए गए हैं - ग्राम के बाट - व्रफोमियम से विलेपित अथवा अविलेपित काॅपर और निवैफल से बने हुए। मिलीग्राम के बाट - ऐलुमिनियम/जमर्न सिल्वर/स्टेनलेस स्टील से बने हुए। राइडर - 10ण्0 उह भार का ऐलुमिनियम अथवा प्लैटिनम तार का बना विपाश ;लूपद्ध। ;खद्ध ;गद्ध ;घद्ध चित्रा 2.25 - ;कद्ध बाट पेटी ;खद्ध भ्िान्नात्मक भार ;गद्ध राइडर ;घद्ध चिमटी ;गद्ध रासायनिक तुला का व्यवस्थापन और तोलना आवश्यक सामग्री प्रिया रासायनिक तुला का उपयोग करते समय निम्नलिख्िात चरणों का अनुसरण किया जाता है - ;पद्ध समतलन पेंचों और प्लम्ब लाइन की सहायता से तुला को समतल करें। ;पपद्ध सुनिश्िचत कर लें कि बीम क्षैतिज है। संकेतक को बीम के दोनों ओर लगे पेंचों की सहायता से शून्य ¯बदुु पर समायोजित कर लें। यदि यह समायोजित है, तो तुलादंड विराम ;इमंउ ंततमेजद्ध को मुक्त करने पर, संकेतक आधार पर लगे स्केल के शून्य ¯बदुु के दोनों ओर बराबर प्रभागों तक जाता है। ;पपपद्ध बाएं पलड़े में वाॅच ग्लास/तोलने की बोतल रखें जिसमें पदाथर् तोला जाएगा। बाट पेटी से चिमटी की सहायता से अनुमान से लगभग समान भार के बाट निकालकर दाहिने पलड़े में रखें। विवेचनात्मक प्रश्न ;पद्ध वैश्लेष्िाक तुला भौतिक तुला से वैफसे भ्िान्न है? ;पपद्ध राइडर से तोलना किस सि(ांत पर आधारित है? ;पपपद्ध रासायनिक तुला पर अिाकतम कितना भार तोला जा सकता है? ;पअद्ध कौन से बाट भ्िान्नात्मक भार कहलाते हैं? ;अद्ध बाटों को पकड़ने के लिए हमेशा चिमटी का प्रयोग क्यों किया जाता है? ;अपद्ध यदि बाट दाईं ओर के पलड़े पर रखे गए हों और राइडर बाईं ओर के पाठ्यांक 3.4 पर रखा हो तो यह तोले जाने वाले पदाथर् के भार में क्या योगदान देगा? ;अपपद्ध क्या आप रासायनिक तुला से 0ण्0023 ह तोल सकते हैं? अपने उत्तर का कारण लिख्िाए। उद्देश्यआॅक्सैलिक अम्ल आॅक्सैलिक अम्ल के 0ण्01 ड मानक विलयन’ के 250 उस् बनाना। सि(ांत ऐसा विलयन जिसकी सांद्रता यथाथर्ता से ज्ञात हो, मानक विलयन माना जाता है। मानक विलयन की सांद्रता अनेक प्रकार से बताइर् जाती है। अम्ल अथवा क्षारक के मानक विलयन, आयतनमिती में क्षारक/अम्ल की अज्ञात सांद्रता ज्ञात करने में प्रयुक्त किए जाते हैं। उदाहरणाथर्, आॅक्सैलिक अम्ल का मानक विलयन क्षारक विलयन की अज्ञात सांद्रता ज्ञात करने हेतु प्रयुक्त किया जा सकता है। सामान्यतः मानक विलयन की सांद्रता मोल प्रति लिटर में बताइर् जाती है। जलयोजित वि्रफस्टलीवृफत आॅक्सैलिक अम्ल का सूत्रा है - और इसका मोलर द्रव्यमान 126 ह होता है। यदि एक लिटर विलयन में 126 ह आॅक्सैलिक अम्ल उपस्िथत हो, तो यह एक मोलर ;1ण्0 डद्ध विलयन कहलाता है। 126 0ण्1ड आॅक्सैलिक अम्ल का एक लिटर विलयन बनाने के लिए हमें त्र 12ण्6 ह 10 जलयोजित आॅक्सैलिक अम्ल चाहिए। इसलिए 0ण्1 ड आॅक्सैलिक अम्ल विलयन के ’ मानक विलयन के बारे में अध्िक जानकारी इकाइर् - 6 में प्राप्त करें। 250 उस् बनाने के लिए हमें चाहिए - 12ण्6ह× 250 उस् त्र3ण्1500ह जलयोजित आॅक्सैलिक अम्ल1000 उस्सामान्यतः आवश्यक मोलरता का विलयन बनाने के लिए पदाथर् की तोली जाने वाली मात्रा की गणना निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा की जा सकती है - े क ा दव्यमान गाम म× ;बनाए जान ेवालविलयन कविलय्र्रंे ेमोलरता ;डद्ध त्र विलये का मोलर द्रव्यमान × 1000 आवश्यक सामग्री प्रिया ;पद्ध एक खाली, सापफ और सूखे वाॅच ग्लास/तोलने की बोतल का यथाथर् ;बिल्वुफल ठीकद्ध भार तोलें ;भार - 1द्ध। ;पपद्ध उपरोक्त वाॅच ग्लास/तोलने की बोतल में 3ण्1500 ह आॅक्सैलिक अम्ल तोलें ;भार - 2द्ध। हमेशा दशमलव के चैथे स्थान तक भार नोट करें और तोलने से पहले और बाद में तुला को सापफ करें। ;पपपद्ध वाॅच ग्लास/तोलने की बोतल से आॅक्सैलिक अम्ल को पफनल द्वारा एक सापफऔर सूखे मापक फ्रलास्क में पलट लें। खाली वाॅच ग्लास को दोबारा तोलें ;भार - 3द्ध और इसके द्रव्यमान को ;भार - 3द्ध आॅक्सैलिक अम्ल सहित वाॅचग्लास के द्रव्यमान ;भार - 2द्ध में से घटाकर मापक फ्रलास्क में स्थानांतरित किए गए आॅक्सैलिक अम्ल के द्रव्यमान को ज्ञात करें। इस द्रव्यमान से विलयन की यथाथर् मोलरता की गणना करें। धावन बोतल की सहायता से बार - बार धेकरपफनल पर चिपके कणों को मापक फ्रलास्क में पहुँचा दें। पफनल धेते समय जलथोड़ा - थोड़ा करके डालें जिससे फ्रलास्क में इसका आयतन फ्रलास्क के आयतन के ( भाग से अिाक न हो जैसा कि चित्रा 2.27 क एवं ख में दिखाया गया है। आॅक्सैलिक अम्ल ;पअद्ध मापक फ्रलास्क को घुमाते हुए तब तक हिलाएं जब तक आॅक्सैलिक अम्ल पूरी तरह घुल न जाए और पिफर आसुत जल से इसे बने हुए निशान तक भरने के लिए अन्ितम वुफछ उस् बूंद - बूंदकर डालें। फ्रलास्क को डाट से बंद करके अच्छी तरह से हिलाएं जिससे विलयन हर तरपफ एक समान हो जाए ;चित्रा 2.27 ग, घद्ध। इस पर 0ण्1ड आॅक्सैलिक अम्ल विलयन लिखें। ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध ;घद्ध चित्रा 2.27 - ;कद्ध आॅक्सैलिक अम्ल अंतरित करना ;खद्ध विलयन का तनुकरण ;गद्ध अन्ितम वुफछ उस् बूंद - बूंद करके मिलाना ;घद्ध मानक विलयन सावधानियाँ ;कद्ध तुला का पलड़ा तोलने से पहले और बाद में साप़्ाफ करना चाहिए। ;खद्ध बाटों को हाथ से कभी न छुएं। तुला के पलड़े पर बाटों की पेटी से बाट निकालकर रखने के लिए चिमटी का उपयोग करें। ;गद्ध अभ्िाकमर्क को बोतल से निकाल कर वाॅच ग्लास पर रखने के लिए स्पैचुला का प्रयोग करें। ;घद्ध पदाथर् निकालने के बाद बोतल को तुरंत बंद कर दें। ;चद्ध मानक विलयन बनाने के लिए हमेशा आसुत जल का ही प्रयोग करें। ;छद्ध पदाथर् तोलने से पहले तुला का समायोजन सुनिश्िचत कर लें। ;जद्ध रसायनों को तोलते हुए सावधन रहना चाहिए। इन्हें तुला के पलड़े पर नहीं गिराना चाहिए। ;झद्ध वाॅच ग्लास/तोलने की बोतल और पफनल को कइर् बार जल की थोड़ी - थोड़ी मात्रा से धेना चाहिए। ;टद्ध विलयन बनाते समय जल सावधनी से मिलाना चाहिए, जिससे मेनिस्कस का निचला भाग फ्रलास्क पर बने निशान को सिपर्फ छुए। ;ठद्ध विलयन का एकसमान संघटन सुनिश्िचत करने लिए फ्रलास्क पर डाट लगाकर सावधनीपूवर्क अच्छी तरह से हिलाएं। विवेचनात्मक प्रश्न ;पद्ध जलयोजित और निजर्ल आॅक्सैलिक अम्ल का सूत्रा और क्षारकता क्या होती हैं? ;पपद्ध मोलर विलयन से आप क्या समझते हैं? ;पपपद्ध मानक विलयन हमेशा आयतनमिती फ्रलास्क में क्यों बनाए जाते हैं? ;पअद्ध आप 0ण्05 ड आॅक्सैलिक अम्ल के विलयन के 250 उस् वैफसे बनाएंगें? ;अद्ध क्या ठोस छंव्भ् से इसका मानक विलयन बनाया जा सकता है? ;अपद्ध मानक विलयन बनाने के लिए किस प्रकार का पदाथर् प्रयोग में लाया जा सकता है? ;अपपद्ध अंतरण द्वारा तोलने का क्या अथर् है? यह कब प्रयोग में लाया जाता है? 37

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