एकक 12 काबर्निक रसायन: वुफछ आधरभूत सि(ांत तथा तकनीवेंफ व्त्ळ।छप्ब् ब्भ्म्डप्ैज्त्ल्रू ैव्डम् ठ।ैप्ब् च्त्प्छब्प्च्स्म्ै - ज्म्ब्भ्छप्फन्म्ै पिछले एकक में आपने सीखा कि काबर्न का एक अद्वितीय गुण होता है, जिसे ‘शृंखलन’ ;ब्ंजमदंजपवदद्ध कहते हैं। इस कारण यह अन्य काबर्न परमाणुआंे के साथ सहसंयोजक आबंध बनाता है। यह अन्य तत्त्वों, जैसेμहाइड्रोजन, आॅक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्पफर, पफास्पफोरस तथा हैलोजेनों के परमाणुओं के साथ भी सहसंयोजक आबंध बनाता है। इस प्रकार के यौगिकों का अध्ययन रसायन शास्त्रा की एक अलग शाखा के अंतगर्त किया जाता है, जिसे काबर्निक रसायन कहते हैं। इस एकक में वुफछ आधारभूत सि(ांत तथा विश्लेषण - तकनीवेंफ सम्िमलित हंै, जो काबर्निक यौगिकों के विरचन तथा गुणों को समझने के लिए आवश्यक हैं। 12.1 सामान्य प्रस्तावना पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए काबर्निक यौगिक अनिवायर् हैं। इसके अंतगर्त जटिल अणु हैं, जैसेμआनुवंाश्िाक सूचना वाले डीआॅक्सी राइबोन्यूक्लीक अम्ल ;डी.एन.ए.द्ध तथा प्रोटीन, जो हमारे रक्त, माँसपेशी एवं त्वचा के आवश्यक यौगिक बनाते हैं। काबर्निक रसायन कपड़ों, इर्धनों, बहुलकों, रंजकों, दवाओंआदि पदाथो± में होते हैं। इन यौगिकों के अनुप्रयोगों के ये वुफछ महत्त्वपूणर् क्षेत्रा हैं। काबर्निक रसायन का विज्ञान लगभग 200 वषर् पुराना है। सन् 1780 के आसपास रसायनज्ञों ने पादपों तथा जंतुओं से प्राप्त काबर्निक यौगिकों एवं खनिजड्डोतों से विरचित अकाबर्निक यौगिकों के बीच विभेदन करना आरंभ कर दिया था। स्वीडिश वैज्ञानिक ब£जलियस ने प्रतिपादित किया कि ‘जैवशक्ित’ ;टपजंस वितबमद्ध काबर्निक यौगिकों के निमार्ण के लिए उत्तरदायी है, जब सन् 1828 में एपफ. वोलर ने काबर्निक यौगिक यूरिया का संश्लेषण अकाबर्निक यौगिक अमोनियम सायनेट से किया, तब यह धरणा निमूर्ल सि( हो गइर्। गरम करनेपर →छभ् ब्छव् ⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯ छभ् ब्व्छभ् 4 22 अमोनियम सायनेट यूरिया कोल्बे ;सन् 1845द्ध द्वारा ऐसिटिक अम्ल तथा बथर्लोट ;सन् 1856द्ध द्वारा मेथैन के नवीन संश्लेषण के परिणामस्वरूप दशार्या गया कि काबर्निकयौगिकों को अकाबर्निक ड्डोतों से प्रयोगशाला में संश्लेष्िात किया जा सकता है। उद्देश्य इस एकक के अध्ययन के बाद आप μ ऽ काबर्न की चतुस±योजकता तथा काबर्निकअणुआंे की आकृतियों को समझ सवेंफगेऋ ऽ काबर्निक अणुओं की संरचनाओं को विभ्िान्न प्रकार से लिख सवंेफगेऋ ऽ काबर्निक यौगिकों का वगीर्करण कर सवंेफगेऋ ऽ नामांकरण की प्न्च्।ब् प(ति के अनुसार यौगिकों को नाम दे सवंेफगे तथा उन नामों के आधार पर उनकी संरचना लिख सवंेफगेऋ ऽ काबर्निक अभ्िाियाओं की ियावििा की धारणा को समझ सवंेफगेऋ ऽ काबर्निक यौगिकों की संरचना तथा अभ्िाियाशीलता पर इलेक्ट्राॅन - विस्थापन के प्रभाव की व्याख्या कर सवंेफगेऋ ऽ काबर्निक अभ्िाियाओं के प्रकार को पहचान सवंेफगेऋ ऽ काबर्निक यौगिकों के शुिकरण की तकनीकों को सीख सवंेफगेऋ ऽ काबर्निक यौगिकों के गुणात्मक विश्लेषण में सम्िमलित रासायनिक अभ्िाियाओं को लिख सवंेफगेऋ ऽ काबर्निक यौगिकों के मात्रात्मक विश्लेषण में सम्िमलित सि(ांतों को समझ सवंेफगे। सहसंयोजक आबंधन के इलेक्ट्राॅनिक सि(ांत के विकास ने काबर्निक रसायन को आधुनिक रूप दिया। 12.2 काबर्न की चतुस±योजकता:काबर्निक यौगिकों की आकृतियाँ 12.2.1 काबर्निक यौगिकों की आकृतियाँ आण्िवक संरचना की मौलिक अवधारणाओं का ज्ञान काबर्निक यौगिकों के गुणों को समझने और उनकी प्रागुक्ित करने में सहायक होता है। संयोजकता सि(ांत एवं आण्िवक संरचना को आप एकक - 4 में समझ चुके हैं। आप यह भी जानते हैं कि काबर्न की चतुस±योजकता तथा इसके द्वारा सहसंयोजक आबंध - निमार्ण को इलेक्ट्राॅनीय विन्यास तथा े और च कक्षकों के संकरण ;भ्लइतपकपेंजपवदद्ध के आधार पर समझाया जा सकता है। आपको यह याद होगा कि मेथैन ;ब्भ्द्धए एथीन ;ब्भ्द्ध424तथा एथाइन ;ब्2भ्द्ध के समान अणुओं की आकृतियों को2काबर्न परमाणुओं द्वारा नि£मत क्रमशः ेच3ए ेच2 तथा ेच संकर कक्षकों की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है। संकरण किसी काबर्निक यौगिक में आबंध लंबाइर् तथा आबंध एंथैल्पी ;आबंध - सामथ्यर्द्ध को प्रभावित करता है। ेच संकरित कक्षक में े गुण अिाक होने के कारण यह नाभ्िाक के समीप होता है। अतः ेच संकरित कक्षक द्वारा नि£मत आबंध ेच3 संकरित कक्षक द्वारा नि£मत आबंध की अपेक्षा अिाक निकट तथा अिाक सामथ्यर्वान होता है। ेच2 संकरित कक्षक ेच तथा ेच3 संकरित कक्षक के मध्यवतीर् होता है। अतः इससे बनने वाले आबंध की लंबाइर् तथा एंथैल्पीμदोनों के मध्यवतीर् होती हैं। संकरण का परिवतर्न काबर्न की विद्युत्् )णात्मकता को प्रभावित करता है। काबर्न पर स्िथत संकरित कक्षक की े प्रकृति बढ़ने पर उसकी विद्युत् )णात्मकता में वृि हो जाती है। अतः ेच संकरित कक्षक ;जिसमें े.प्रकृति 50ः हैद्ध ेच2 तथा ेच3 संकरित कक्षकों की अपेक्षा अिाक विद्युत् )णात्मक होते हंै। संकरित कक्षकों की अपेक्ष्िात विद्युत् )णात्मकता का प्रभाव काबर्निक यौगिकों के भौतिक तथा रासायनिक गुणों पर भी पड़ता है, जिनका वणर्न आगामी एककों में किया गया है। 12.1.2 πआबंधों के वुफछ अभ्िालक्षण π ;पाइद्ध आबंध के निमार्ण में दो निकटवतीर् परमाणुओं के च कक्षकों का समानांतर अभ्िाविन्यास समुचित पाश्वर् अतिव्यापन के लिए आवश्यक है। अतः ब्भ्त्र ब्भ् अणु में सभी परमाणु22एक ही तल में होने चाहिए। इस अणु के प्रत्येक काबर्न पर उपस्िथत च.कक्षक समानांतर तथा अणु के तल के लंबवत होते हैं। एक ब्भ्को दूसरे के सापेक्ष में घुमाने पर च.कक्षकों2 के अिाकतम अतिव्यापन में बाधा उत्पन्न होती है। पफलतः ;ब्त्रब्द्ध काबर्न - काबर्न द्विआबंध के चारों ओर घूणर्न प्रतिबंिात हो जाता है। π आबंध का इलेक्ट्राॅन आवेशअभ्र आबंिातपरमाणुओं के तल के ऊपर एवं नीचे स्िथत होता है। सामान्यतः π आबंध बहुआबंधयुक्त यौगिकों में मुख्य सिय वेंफद्र उपलब्ध कराते हैं। यह आक्रामक अभ्िाकमर्कों के लिए इलेक्ट्राॅनों को आसानी से उपलब्ध कराता है। उदाहरण 12.1 निम्नलिख्िात अणुओं में से प्रत्येक में कितने σ तथा π आबंध हैं? भ् ;कद्ध भ् − ब् ≡ ब् − ब्द्य त्र ब्भ् − ब्भ्3 ;खद्ध ब्भ्2त्र ब्त्रब्भ् ब्भ्3 हल ;कद्ध σ ब्.ब्रू 4य σ ब्.भ्रू 6य π ब् त्र ब्रूप्य πब् ≡ ब्रू2 ;खद्ध σ ब्.ब्रू3य σ ब्.भ्रू 6य π ब् त्र ब्य2 उदाहरण 12.2 निम्नलिख्िात यौगिकों में प्रत्येक काबर्न की संकरण अवस्था क्या है? ;कद्ध ब्भ्3ब्सए ;खद्ध ;ब्भ्3द्ध2ब्व्ए ;गद्ध ब्भ्3ब्छए ;घद्ध भ्ब्व्छभ्2ए ;घद्ध ब्भ्3 ब्भ्त्रब्भ्ब्छ हल 3 323;कद्ध ेच ए ;खद्ध ेच ए ेच ए ;गद्ध ेच ए ेचए 2 322;घद्ध ेच ए ;घद्ध ेच ए ेच ए ेच ए ेच उदाहरण 12.3 निम्नलिख्िात यौगिकों में काबर्न की संकरण अवस्था एवंअणुओं की आकृतियाँ क्या हैं? ;कद्ध भ्2ब् त्र व्ए ;खद्ध ब्भ्3थ्ए ;गद्ध भ्ब् ≡ छ हल ;कद्ध ेच 2 संकरित काबर्न, त्रिाकोणीय समतल, ;खद्ध ेच 3 संकरित काबर्न, चतुष्पफलकीय, ;गद्ध ेच 3 संकरित काबर्न, रैखीय। 12.3 काबर्निक यौगिक का संरचनात्मक निरूपण 12.3.1 पूणर् संघनित तथा आबंध - रेखा संरचनात्मक सूत्रा काबर्निक यौगिकों के संरचनात्मक सूत्रा लिखने की कइर् वििायाँ हैं। इनमें वुफछ विध्ियाँ लूइस - संरचना अथवा ¯बदु - संरचना, लघु आबंध संरचना ;क्ंेी ेजतनबजनतमद्धए संघनित संरचना ;ब्वदकमदेमक ेजतनबजनतमद्ध तथा आबंध रेखा संरचना है। लघु रेखा ;μद्ध द्वारा इलेक्ट्राॅन - युग्म सहसंयोजक आबंध को दशार्कर लूइस संरचना सरल की जा सकती है। आबंध बनाने वाले इलेक्ट्राॅनों पर ऐसे संरचनात्मक सूत्रा वेंफित होते हैं। एकल आबंध, द्विआबंध तथा त्रिाआबंध को क्रमशः एक लघु रेखा ;μद्ध, द्विलघु रेखा ;त्रद्ध तथा त्रिालघु रेखा ;≡ द्ध द्वारा दशार्या जाता है। विषम परमाणुओं ;जैसेμआॅक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्पफर, हैलोजेन आदिद्ध पर उपस्िथत एकाकी इलेक्ट्राॅनμयुग्म को दो ¯बदुओं ;..द्ध द्वारा दशार्या जाता है, परंतु कभी - कभी ऐसा नहीं भी होता है। अतः एथेन ;ब्भ्द्धए एथीन ;ब्भ्द्धए एथाइन2624;ब्भ्द्ध तथा मेथेनाॅल ;ब्भ् व्भ्द्ध के संरचनात्मक सूत्रों को223निम्नलिख्िात प्रणाली द्वारा निरूपित किया जाता है। ऐसे संरचनात्मक निरूपणों को ‘पूणर् संरचनात्मक सूत्रा’ ;ब्वउचसमजम ेजतनबजनतम वितउनसंद्ध कहा जाता है। एथेन एथीन एथाइन मेथेनाॅल इन संरचनाμसूत्रों को वुफछ या सारे सहसंयोजक आबंधों को हटाकर तथा एक परमाणु से जुड़े समान समूह को कोष्ठक में लिखकर उनकी संख्या को पादांक में प्रद£शत कर, संक्ष्िाप्त किया जा सकता है। इन संक्ष्िाप्त सूत्रों को ‘संघनित संरचनात्मक सूत्रा’ ;ब्वदकमदेजतनबजनतंस वितउनसंद्ध कहते हैं। अतः एथेन, एथीन, एथाइन तथा मेथेनाॅल को इस प्रकार लिखा जा सकता हैμ ब्भ्3 ब्भ्3 भ्2ब्त्रब्भ्2 भ्ब् ≡ ब्भ् ब्भ्3व्भ् ऐथेन ऐथीन ऐथाइन मेथेनाॅल रसायन विज्ञान इस प्रकार, ब्भ्ब्भ्ब्भ्ब्भ्ब्भ्ब्भ्ब्भ्ब्भ् को32222223और भी संघनित रूप ब्भ् ;ब्भ्द्ध ब्भ् द्वारा प्रद£शत किया3263जा सकता है। इसे और सरल बनाने के लिए काबर्निक रसायनज्ञों ने संरचनाओं को निरूपित करने हेतु केवल रेखाओं का उपयोग किया। इसे आबंध - रेखा संरचनात्मक सूत्रा ;इवदकसपदम ेजतनबजनतंसद्ध में काबर्न तथा हाइड्रोजन परमाणुओं को नहीं लिखा जाता, बल्िक काबर्न - काबर्न आबंधों को टेढ़ी - मेढ़ी ;जिग - जैगद्ध रेखाओं द्वारा दशार्या जाता है। केवल आॅक्सीजन, क्लोरीन, नाइट्रोजन इत्यादि परमाणुओं को विशेष रूप से लिखा जाता है। सिरे पर स्िथत रेखा मेथ्िाल ;कृब्भ्द्ध समूह इंगित3करती है ;जब तक किसी ियात्मक समूह द्वारा नहीं दशार्या गया होद्ध। आंतरिक रेखाएँ उन काबर्न परमाणुओं को इंगित करती हैं, जो अपनी संयोजकता को पूणर् करने के लिए आवश्यक हाइड्रोजन से आबंिात होते हैं। जैसेμ ;पद्ध 3 - मेथ्िालआॅक्टेन को निम्नलिख्िात रूपों में दशार्या जा सकता हैμ ;कद्ध ब्भ्3ब्भ्ब्भ्ब्भ्2ब्भ्ब्भ्2ब्भ्ब्भ्3222द्यब्भ्3 ;खद्ध ;पपद्ध 3μब्रोमोब्यूटेन को दशार्ने के विभ्िान्न तरीके: ;कद्ध ब्भ्ब्भ् ठतब्भ्ब्भ्323 ;खद्ध ;गद्ध चक्रीय यौगिकों में आबंध - रेखा सूत्रों को इस प्रकार दशार्या जा सकता हैμ≡ साइक्लोप्रोपेन साइक्लोपेन्टेन क्लोरोसाइक्लोहेक्सेन उदाहरण 12.4 निम्नलिख्िात संघनित सूत्रों को पूणर् संरचनात्मक सूत्रों में लिख्िाएμ ;कद्ध ब्भ्3ब्भ्2ब्व्ब्भ्2ब्भ्3 ;खद्ध ब्भ्3ब्भ्त्रब्भ्;ब्भ्2द्ध3ब्भ्3 हल ;कद्ध ;खद्ध उदाहरण 12.5 निम्नलिख्िात यौगिकों का संरचनाμसूत्रा संघनित रूप में लिख्िाए तथा उनका आबंध - रेखा सूत्रा भी दीजिएμ ;कद्ध भ्व्ब्भ्2 ब्भ्2ब्भ्2ब्भ् ;ब्भ्3द्ध ब्भ् ;ब्भ्3द्ध ब्भ्3 ;खद्ध हल संघनित सूत्राः ;कद्ध भ्व्;ब्भ्2द्ध3 ब्भ्ब्भ्3 ब्भ्;ब्भ्3द्ध2 ;खद्ध भ्व्ब्भ्;ब्छद्ध2 आबंध रेखा सूत्रा ;कद्ध ;खद्ध उदाहरण 12.6 निम्नलिख्िात आबंध रेखा - सूत्रों को विस्तारित रूप में काबर्न तथा हाइड्रोजन सहित सभी परमाणुओं को दशार्ते हुए लिख्िाएμ ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध ;घद्ध हल ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध ;घद्ध 12.3.2 काबर्निक यौगिकों का त्रिाविमी सूत्रा कागज पर काबर्निक यौगिकों के त्रिाविमी ;3क्द्ध सूत्रा में वुफछ प(तियों का प्रयोग किया जाता है। उदाहरणाथर्μद्विविमी संरचना को त्रिाविमी संरचना में देखने के लिए ठोस तथा डैश वेज सूत्रा का उपयोग किया जाता है। इन सूत्रों में ठोस वेज उस आबंध को दशार्ता है, जो कागज के तल से दशर्क की ओर प्रक्षेपी है और डैश वेज विपरीत दिशा में, अथार्त्् दशर्क के दूर जाने वाले आबंध को दशार्ता है। कागज के तल में स्िथत आबंध को साधारण रेखा ;μद्ध द्वारा प्रद£शत किया जाता है। चित्रा 12.1 में मेथैन अणु का त्रिाविमी सूत्रा दशार्या गया है। चित्रा 12.1 ब्भ्4 के वेज तथा डैश सूत्रा प्रदशर्न 12.4 काबर्निक यौगिकों का वगीर्करण काबर्निक यौगिकों की वतर्मान बड़ी संख्या और बढ़ती हुइर्संख्या के कारण इन्हें संरचनाओं के आधार पर वगीर्कृत करना आवश्यक हो गया है। काबर्निक यौगिकों को मोटे तौर पर इसप्रकार वगीर्कृत किया गया हैμ रसायन विज्ञान आण्िवक माॅडल काबर्निक अणुओं की त्रिाविमी आकृति आण्िवक माॅडलों की सहायता से भली - भाँति समझी जा सकती है। लकड़ी या प्लास्िटक या धातु के बने ये माॅडल बाशार में उपलब्ध होते है। सामान्यतः तीन प्रकार के आण्िवक माॅडलों का उपयोग किया जाता हैμ ;1द्ध प्रेफमवकर्, अथार्त् ढाँचागत माॅडल, ;2द्ध बाॅल तथा स्िटक, अथार्त् गंेद और छड़ी माॅडल तथा ;3द्ध स्पेस पिफ¯लग, अथार्त् स्थानीय पूरक माॅडल। प्रेफमवकर् माॅडल अणु में केवल आबंधों को दशार्ता है। इसमें परमाणु नहीं दिखाए जाते। यह माॅडल अणु के परमाणुओं के आकार की अनदेखी करते हुए आबंधों का प्रारूप दशार्ता है। बाॅल तथा स्िटक माॅडल में आबंध तथा परमाणुμदोनांे को दशार्या जाता है। बाॅल परमाणु को दशार्ते हैं, जबकि स्िटक आबंध को दशार्ती है। असंतृप्त अणुओं ;जैसे ब्त्रब्द्ध को दशार्ने के लिए स्िटक के स्थान पर ¯स्प्रग प्रयुक्त की जाती है। स्पेस - पिफ¯लग माॅडल में प्रत्येक परमाणु का आपेक्ष्िाक आकार प्रद£शत किया जाता है, जो उसकी वांडरवाल्स त्रिाज्या पर आधारित होता है। इस माॅडल में आबंध नहीं दशार्ए जाते हैं। यह अणु में प्रत्येक परमाणु द्वारा घेरे गए आयतन को प्रद£शत करता है। इन माॅडलों के अतिरिक्त आण्िवक माॅडल के लिए कंप्यूटर ग्रापिफक्स का उपयोग किया जा सकता है। चित्रा 12.2 प् अचक्रीय अथवा विवृत शृंखला यौगिक इन यौगिकों को ऐलिपेफटिक ;वसीय यौगिकद्ध भी कहा जाता है, जिनमें सीधा या शाख्िात शृंखला यौगिक होते हैं। जैसेμ ब्भ्3ब्भ्3 एथेन ऐसीटैल्िडहाइड ऐसीटिक अम्ल प्प् ऐलिसाइक्िलक यौगिक या बंद शृंखला या वलय यौगिक ऐलिसाइक्िलक ;ऐलिपेफटिक चक्रीयद्ध यौगिकों में काबर्न परमाणु जुड़कर एक समचक्रीय ;भ्वउवबलबसपबद्ध वलय बनाते हैं। कभी कभी वलय में काबर्न परमाणु के अलावा अन्य परमाणु जुड़कर विषमचक्रीय वलय बनाते हैं। इस प्रकार के यौगिकों के वुफछ उदाहरण इस प्रकार हैंμ साइक्लोप्रोपेन साइल्कोहेक्सेन साइक्लोहेक्सीन टेट्राहाइड्रोफ्रयूरैन ये एलिपेफटिक यौगिकों के समान वुफछ गुणधमर् प्रद£शत करते हैं। ऐरोमैटिक यौगिक ऐरोमैटिक यौगिक एक विशेष प्रकार के यौगिक हैं, जिनके विषय में आप एकक 13 में विस्तार से अध्ययन करेंगे। इनमें बंेशीन तथा अन्य संबंिात चक्रीय यौगिक ;बेन्िशनाॅइडद्ध सम्िमलित हैं। ऐलिसाइक्िलक यौगिक के समान ऐरोमैटिक यौगिकों की वलय में विषम परमाणु हो सकते हैं। ऐसे यौगिकों को ‘विषमचक्रीय ऐरोमैटिक यौगिक’ कहा जाता है। इन यौगिकों के वुफछ उदाहरण ये हैंμ बेन्िशनाॅइड ऐरोमैटिक यौगिकबेन्जीन ऐनीलीन नेप्थैलीन अबेन्िशनाॅइड यौगिक ट्रोपोलोन विषमचक्रीय ऐरौमेटिक यौगिक फ्रयूरैन थायोपफीन पिरीडीन काबर्निक यौगिकों को ियात्मक समूहों के आधार पर सजातीय श्रेण्िायों ;भ्वदवसवहवने ेमतपमेद्ध में वगीर्कृत किया जाता है। ियात्मक समूह या प्रकायार्त्मक समूह किसी काबर्निक यौगिक में विश्िाष्ट प्रकार से जुड़ा परमाणु या परमाणुओं का समूह, जो काबर्निक यौगिकों में अभ्िालाक्षण्िाकरासायनिक गुणों के लिए उत्तरदायी होता है, ियात्मक समूह या प्रकायार्त्मक समूह ;थ्नदबजपवदंस ळतवनचद्ध कहलाता है। उदाहरणाथर्μ हाइड्राॅक्िसल समूह ;. व्भ्द्ध ऐल्िडहाइड समूह ;. ब्भ्व्द्ध काबोर्क्िसलिक अम्ल - समूह ;. ब्व्व्भ्द्ध आदि। सजातीय श्रेण्िायाँ काबर्निक यौगिकों के समूह अथवा ऐसी श्रेणी, जिसमें एक विश्िाष्ट ियात्मक समूह हो, सजातीय श्रेणी बनाते हैं। इसके सदस्यों को ‘सजात’ ;भ्वउवसवहवनेद्ध कहते हैं। सजातीय श्रेणी के सदस्यों को एक सामान्य सूत्रा द्वारा प्रद£शत किया जा सकता है। इसके क्रमागत सदस्यों के अणुस्त्रों में मध्य . ब्भ् इकाइर् का अंतर होता है। काबर्निक यौगिकों की कइर् सजातीय श्रेण्िायाँ हैं। इनमें से वुफछ हैंμऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन, ऐल्िकल हैलाइड, ऐल्केनाॅल, ऐल्कनैल, ऐल्केनोन, ऐल्केनाॅइक अम्ल, ऐमीन इत्यादि। 12.5 काबर्निक यौगिकों की नामप(ति काबर्निक रसायन लाखों काबर्निक यौगिकों से संबंिात है। उनकी स्पष्ट पहचान के लिए यौगिकों के नामांकन की एक सुव्यवस्िथत वििा विकसित की गइर् है, जिसे आइर्.यू.पी.ए.सी;प्न्च्।ब् प्दजमतदंजपदंस न्दपवद व िच्नतम ।दक ।चचसपमक ब्ीमउपेजतलद्ध वििा कहते हैं। इस सुव्यवस्िथत नामांकन प्रणाली में यौगिकों के नाम को उसकी संरचना से सहसंबंिात किया गया है, जिससे पढ़ने या सुनने वाला व्यक्ित यौगिक के नाम के आधार पर उसकी संरचना उत्पन्न कर सके। आइर्.यू.पी.ए.सी. प(ति से पूवर् काबर्निक यौगिकों का नाम उनके ड्डोत अथवा किसी गुण के आधार पर दिया जाता था। उदाहरणाथर्μ सिटिªक अम्ल का नाम उसके सिट्रस पफलों में पाए जाने के कारण दिया गया है। लाल चींटी में पाए जाने वाले अम्ल का नाम ‘पफाॅ£मक अम्ल’ दिया गया है, क्योंकि चींटी के लिए लैटिन शब्द ‘पफा£मका’ ;थ्वतउपबंद्ध है। यह नाम पारंपरिक है। ये रूढ़ ;जतपअपंसद्ध अथवा सामान्य ;ब्वउउवदद्ध नाम कहलाते हैं। वतर्मान समय में भी वुफछ यौगिकों को सामान्य नाम दिए जाते हैं। उदाहरणाथर्μ वुफछ वषर् पूवर् प्राप्त काबर्न के एक नवीन रूप ब् गुच्छे ;क्लस्टरद्ध का नाम60‘बक¯मस्टर पुफलेरीन’ ;ठनबाउपदेजमत निससमतमदमद्ध रखा गया,क्योंकि इसकी आकृति अल्पांतरी गुंबदों ;ळमवकमेपब क्वउमेद्ध से मिलती - जुलती है। प्रसि( अमेरिकी वास्तुश्िाल्पी आर.बुक¯मस्टर पुफलेर ;त्ण् ठनबाउपदेजमत निससमतद्ध ने इन्हें लोकपि्रय बनाया था। वुफछ यौगिकों के संबंध में आइर्.यू.पी.ए.सी. नाम अिाक लंबे अथवा जटिल होते हैं। इस कारण भी उनका सामान्य नाम रखना आवश्यक हो जाता है। वुफछ काबर्निक यौगिकों के सामान्य नाम सारणी 12.1 में दिए गए हैं। 12.5.1 आइर्.यू.पी.ए.सी. नामकरण किसी काबर्निक यौगिक को सुव्यवस्िथत नाम देने के लिए मूल हाइड्रोकाबर्न तथा उससे जुड़े ियात्मक समूहों की पहचान करनी होती है। नीचे दिए गए उदाहरण को देख्िाए।जनक हाइड्रोकाबर्न के नाम में उपयुक्त पूवर्लग्न, अंतलर्ग्न तथा अनुलग्न को संयुक्त करके वास्तविक यौगिक का नाम प्राप्त किया जा सकता है। केवल काबर्न तथा हाइड्रोजन युक्त यौगिक ‘हाइड्रोकाबर्न’ कहलाते हैं। काबर्न - काबर्न एकल आबंधवाले हाइड्रोकाबर्न को ‘संतृप्त हाइड्रोकाबर्न’ कहते हैं। ऐसे यौगिकों की सजातीय श्रेणी के सुव्यवस्िथत प्न्च्।ब् नाम को ऐल्केन ;ंसांदमद्ध कहते हैं। इनका पूवर् नाम ‘पैरापिफन’ ;लैटिन: लिटिल, ऐपिफनिटी, अथार्त्् कम ियाशीलद्ध था। असंतृप्त हाइड्रोकाबर्न में कम से कम एक काबर्न - काबर्न द्विआबंध या त्रिाआबंध होता है। 12.5.2 ऐल्केनों की प्न्च्।ब् नामप(ति सीधी शृंखलायुक्त हाइड्रोकाबर्न: मेथैन और ब्यूटेन केअतिरिक्त शेष यौगिकों के नाम सीधी शृंखला - संरचना पर आधारित है, जिनके पश्चलग्न में ‘ऐन’ ;ंदमद्ध तथा इससे पूवर् शृंखला में उपस्िथत काबर्न परमाणु की संख्या से संगित किया जाता है। वुफछ संतृप्त सीधी शृंखला हाइड्रोकाबर्नों के प्न्च्।ब् सारणी 12.1 वुफछ काबर्निक यौगिकों के सामान्य अथवा रूढ़ नाम यौगिक सामान्य नाम यौगिक सामान्य नाम ब्भ्4 मेथेन ब्भ्ब्स3 क्लोरोपफामर् भ्3ब्ब्भ्2ब्भ्2ब्भ्3 दकृब्यूटेन ब्भ्3ब्व्व्भ् ऐसीटिक अम्ल ;भ्3ब्द्ध2 ब्भ् ब्भ्3 आइसोब्यूटेन ब्6भ्6 बेन्जीन ;भ्3ब्द्ध4ब् निओपेन्टेन ब्6भ्5व्ब्भ्3 ऐनीसाॅल भ्3ब्ब्भ्2ब्भ्2व्भ् दकृप्रोपिल ऐल्कोहाॅल ब्6भ्5छभ्2 ऐनिलीन भ्ब्भ्व् पफामेर्ल्िडहाइड ब्0भ्5ब्व्ब्भ्3 ऐसीटोप़फीनोन ;भ्3ब्द्ध2 ब्व् ऐसीटोन ब्भ्3व्ब्भ्2ब्भ्3 एथ्िाल मेथ्िाल इर्थर नाम सारणी 12.2 में दिए गए हैं। इस सारणी में दिए गए ऐल्केनों के दो क्रमागत सदस्यों के मध्य केवल ब्भ् समूह का 2अंतर है। ये ऐल्केन श्रेणी के सजात ;भ्वउवसवहनमेद्ध हैं। सारणी 12.2 शाख्िात शृंखलायुक्त हाइड्रोकाबर्न शाख्िात शृंखला ;ठतंदबमक ब्ींपदद्ध से युक्त यौगिकों में काबर्न परमाणुओं की छोटी शृंखलाएँ जनक के शृंखला एक याकइर् काबर्नों के साथ जुड़ी रहती हैं। ये छोटी काबर्न - शृंखला ;शाखाएँद्ध ‘ऐल्िकल समूह’ कहलाती है। उदाहरणाथर्μ ;कद्ध ;खद्ध ऐसे यौगिक का नाम देने के लिए ऐल्िकल समूह का नाम पूवर्लग्न के रूप में जनक ऐल्केन के नाम के साथ संयुक्त कर देते हैं। संतृप्त हाइड्रोकाबर्न के काबर्न से एक हाइड्रोजन परमाणु हटाने पर ऐल्िकल समूह प्राप्त होता है। इस प्रकार ब्भ्4 से दृब्भ्3 प्राप्त होता है। इसे ‘मेथ्िाल समूह’ कहा जाता है। ऐल्िकल समूह का नाम प्राप्त करने के लिए संबंिात ऐल्केन के नाम से ऐन ;ंदमद्ध को ;इलद्ध ;लसद्ध द्वारा विस्थापित करते हैं। वुफछ ऐल्िकल समूहों के नाम सारणी 12.3 में दिए गए हैं। वुफछ ऐल्िकल समूहों के नाम लघु रूप में भी लिखे जाते हैं। जैसेμ मेथ्िाल को डमए एथ्िाल को म्ज, प्रोपिल को च्त तथा ब्यूटिल को ठन लिखते हैं। ऐल्िकल समूह शाख्िात भी होती है, जैसा नीचे दिखाया गया है। साधारण शाख्िात समूहों के विश्िाष्ट रूढ़ नाम होते हैं। उदाहरणाथर्μ ब्यूटिल समूहों के नाम द्वितीयक ;ेमबद्ध - ब्यूटिल, आइसोब्यूटिल तथा तृतीयक;जमतजद्ध - ब्यूटिल हैं। कृब्भ्दृब्;ब्भ्द्ध संरचना के लिए ‘निओपेन्िटल समूह’ नाम233का प्रयुक्त किया जाता है। आइसोप्रोपिल ेमब - ब्यूटिल आइसो ब्यूटिल जमतज - ब्यूटिल निओपेन्िटल शाख्िात शृंखला ऐल्केनों का नामकरण हमें शाख्िात शृंखला वाले ऐल्केन बड़ी संख्या में मिलते हैं। उनके नामकरण के नियम निम्नलिख्िात हैंμ 1.सवर्प्रथम अणु में दीघर्तम काबर्न शृंखला का चयन किया जाता हैै। अग्रलिख्िात उदाहरण ;प्द्ध में दीघर्तम शृंखला में नौकाबर्न हैं। यही जनक शृंखला ;च्ंतमदज ब्ींपदद्ध है। संरचना प्प् में प्रद£शत जनक शृंखला का चयन सही नहीं है, क्योंकि इसमें केवल आठ ही काबर्न हैं। 2.जनक ऐल्केन को पहचानने के लिए जनक शंृखला के काबर्न परमाणुओं का अंकन किया जाता है तथा हाइड्रोजन परमाणु को प्रतिस्थापित करने वाले ऐल्िकल समूह के कारण शाख्िात होनेवाले काबर्न परमाणु के स्थान का पता लगाया जाता है। क्रमांकन उस छोर से प्रारंभ करते हैं, जिससे शाख्िात काबर्न परमाणुओं को लघुतम अंक मिले। अतः उपयुर्क्त उदाहरण में क्रमांकन बाईं से दाईं ओर होना चाहिए ;काबर्न 2 और 6 पर शाखनद्ध, न कि दाईं से बाईं ओर ;जब शाख्िात काबर्न परमाणुओं को 4 और 8 संख्या मिलेंगीद्ध। 3.मूल ऐल्केन के नाम में शाखा के रूप में ऐल्िकल समूहों के नाम पूवर्लग्न के रूप में संयुक्त करते हैं और प्रतिस्थापी समूहों की स्िथति को उचित संख्या द्वारा दशार्ते हैं। भ्िान्न ऐल्िकल - समूहों के नामों को अंग्रेजी वणर्माला के क्रम में लिखा जाता है। अतः उपयुर्क्त यौगिक का नाम 6 - एथ्िाल - 2 - मेथ्िालनोनेन होगा। ;ध्यान देने योग्य बात यह है कि समूह तथा संख्या के मध्य संयोजक - रेखा ;भ्लचीमदद्ध तथा मेथ्िाल और नोनेन को साथ मिलाकर लिखा जाता है।द्ध 4.यदि दो या दो से अिाक समान प्रतिस्थापी समूह हों, तो उनकी संख्याओं के मध्य अल्पविराम ;, द्ध लगाया जाता है। समान प्रतिस्थापी समूहांे के नाम को दुबारा न लिखकर उचित पूवर्लग्न, जैसेμ डाइ ;2 के लिएद्ध, ट्राइ ;3 के लिएद्ध, टेट्रा ;4 के लिएद्ध, पेंटा ;5 के लिएद्ध, हेक्सा ;6 के लिएद्ध आदि प्रयुक्त करते हैं, परंतु नाम लिखते समय प्रतिस्थापी समूहों के नामों को अंग्रेजी वणर्माला के क्रम में लिखते हैं। निम्नलिख्िात उदाहरण इन नियमों को स्पष्ट करते हैंμ ब्भ् ब्भ् ब्भ् ब्भ्333 3 ⏐⏐ ⏐⏐ ब्भ्दृब्भ्दृब्भ्दृब्भ्दृब्भ् ब्भ्दृब्दृब्भ्दृब्भ्दृब्भ्323323⏐ब्भ्3 2, 4 - डाइमेथ्िालपेन्टेन 2, 2, 4 - ट्राइमेथ्िालपेन्टेनभ्3ब् भ्2ब् ब्भ्3⏐ ⏐ब्भ्दृब्भ्दृब्भ्दृब्दृब्भ्दृब्भ्दृब्भ्32223⏐ब्भ्3 3 - एथ्िाल - 4, 4 - डाइमेथ्िालहेप्टेन 5.यदि दो प्रतिस्थापियों की स्िथतियाँ तुल्य हों, तो अंग्रेजी वणर्माला के क्रम में पहले आनेवाले अक्षर को लघु अंक रसायन विज्ञान दिया जाता है। अतः निम्नलिख्िात यौगिक का सही नाम 3 - एथ्िाल - 6 - मेथ्िालआॅक्टेन है, न कि 6 - एथ्िाल - 3 - मेथ्िालआॅक्टेन। 1 2 3 4 5 6 7 8 ब्भ्कृ ब्भ्कृब्भ्कृब्भ्कृब्भ्कृब्भ्कृब्भ्कृब्भ्3 2222 3⏐ ⏐ब्भ्2ब्भ्3 ब्भ्3 6.शाख्िात ऐल्िकल समूह का नाम उपयुर्क्त नियमों की सहायता से प्राप्त किया जा सकता है, परंतु शाख्िात शृंखला वफा काबर्न परमाणु, जो जनक शृंखला से बंिात होता है, को इस उदाहरण की तरह संख्या 1 दी जाती है।4 3 2 1 ब्भ्3दृब्भ्दृब्भ्2दृब्भ्दृ⏐ ⏐ब्भ्ब्भ्3 3 1, 3 - डाइमेथ्िालब्यूटिल ऐसे शाख्िात शृंखला समूह के नाम को कोष्ठक में लिखा जाता है। प्रतिस्थापी समूहों के रूढ़ नाम वणर्माला - क्रम में लिखते समय आइसो ;पेवद्ध और निओ ;दमवद्ध पूवर्लग्नों को मूल ऐल्िकल समूह के नाम का भाग माना जाता है। परंतु द्वितीयक ;ेमबदृद्ध तथा तृतीयक ;जमतजदृद्ध पूवर्लग्नों को मूल ऐल्िकल समूह के नाम का भाग नहीं माना जाता। आइसो और अन्य संबंिात पूवर्लग्नों का उपयोग आइर्.यू.पी.ए.सी. प(ति में भी किया जाता है, लेकिन तभी तक, जब तक ये और आगे शाख्िात न हों। बहुप्रतिस्थापित यौगिकों में निम्नलिख्िात नियमों को आप याद रखेंμ ऽ यदि समान संख्या की दो शृंखलाएँ हों, तो अिाक पाश्वर्शृंखलाओं वाली शृंखला का चयन करना चाहिए। ऽ शृंखला के चयन के बाद क्रमांकन उस छोर से आरंभ करना चाहिए, जिस छोर से प्रतिस्थापी समीप हो। उपयुर्क्त यौगिक का नाम 5μ;2μएथ्िालब्यूटिलद्धμ3, 3μ डाइमेथ्िालडेकेन हैं, न कि 5μ;2,2μडाइमेथ्िालब्यूटिलद्धμ 3μऐथ्िालडेकेन 5 - ेमब - ब्यूटिल - 4 - आइसोप्रोपिल डेकेन 5 - ;2, 2 - डाइमेथ्िालप्रोपिलद्ध - नोनेन चक्रीय यौगिक: एकलचक्रीय संतृप्त यौगिक का नामसंबंिात विवृतμ शृंखला ऐल्केन के नाम के प्रारंभ में ‘साइक्लो’पूवर्लग्न लगाकर प्राप्त करते हैं। यदि पाश्वर् - शृंखलाएँ उपस्िथत हों, तो उपयुर्क्त नियमांे का पालन हम करते हैं। वुफछ चक्रीय यौगिकों के नाम नीचे दिए गए हैंμ ;1 - एथ्िाल - 3, 3 - डाइमेथ्िालसाइक्लोहेक्सेन गलत हैद्ध उदाहरण 12.7 वुफछ हाइड्रोकाबर्नों के प्न्च्।ब् नाम तथा संरचनाएँ नीचे दी गइर् हैं। कारणसहित बताइए कि कोष्ठक में दिए गए नाम अशु( क्यों हैंμ 2, 5, 6, ट्राइमेथ्िालआॅक्टेन ¹3, 4, 7 - ट्राइमेथ्िालआॅक्टेन गलत हैह् 3 - एथ्िाल - 5 - मेथ्िालहेप्टेन ¹5 - एथ्िाल - 3 - मेथ्िालहेप्टेन गलत हैह् हल ;कद्ध 2, 5, 6 लघुतम अंक 3, 5, 7 की अपेक्षा न्यून है। ;खद्ध प्रतिस्थापी समूह तुल्य स्िथतियों में हैं। इस दशा में क्रमांकन उस छोर से आरंभ करते हैं, जिस छोर से वणर्माला क्रम में पहले आने वाले समूह को न्यून अंक मिले। 12.5.3 ियात्मक समूह से युक्त काबर्निक यौगिकों की नामप(ति किसी काबर्निक यौगिक में परमाणु अथवा परमाणुओं का समूह, जिसके कारण वह यौगिक विश्िाष्ट रासायनिक अभ्िाियाशीलता प्रद£शत करता है, ‘ियात्मक समूह’ ;थ्नदबजपवदंस ळतवनचद्ध कहलाता है। समान ियात्मक समूहवाले यौगिक समान अभ्िाियाएँ देते हैं। उदाहरणाथर्μ ब्भ्व्भ्ए ब्भ्ब्भ्व्भ्332तथा ;ब्भ्3द्ध2ब्भ्व्भ् इन सभी में दृव्भ् ियात्मक समूह है, जिसके कारण वे सभी सोडियम धातु के साथ अभ्िािया करके हाइड्रोजन मुक्त करते हैं। ियात्मक समूह की उपस्िथति के कारण काबर्निक यौगिकों को क्रमानुसार विभ्िान्न वगोर् मेंवगीर्कृत किया जा सकता है। वुफछ ियात्मक समूह उनके पूवर्लग्न और अनुलग्न तथा वुफछ काबर्निक यौगिकों के नाम, जिनमें वे उपस्िथत हैं, सारणी 12.4 में दिए गए हैं। सवर्प्रथम उपस्िथत ियात्मक समूह की पहचान की जाती है, ताकि उपयुक्त अनुलग्न का चयन हो सके। ियात्मक समूह की स्िथति दशार्ने के लिए दीघर्तम शृंखला का क्रमांकन उस छोर से करते हैं, ताकि उस काबर्न जिससे ियात्मक समूह बंिात है को न्यूनतम अंक मिले। सारणी 2.4 में दिए गए अनुलग्न का उपयोग करके यौगिक का नाम प्राप्त कर लिया जाता है। बहुियात्मक समूह वाले यौगिकों में उनमें से एक ियात्मक समूह को मुख्य ियात्मक समूह मान लिया जाता है और उस आधार पर यौगिक का नाम दिया जाता है। उचित पूवर्लग्नों का उपयोग करके बचे हुए ियात्मक समूहों को प्रतिस्थापी के रूप में नाम दिया जाता है। मुख्य ियात्मक समूह का चयन प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है। वुफछ ियात्मक समूहों का घटता हुआ प्राथमिकता क्रम इस प्रकार हैμ दृब्व्व्भ्ए दृैव्भ्ए दृब्व्व्त् ;त् त्र ऐल्िकल समूहद्धए दृब्व्ब्सए3दृब्व्छभ्2 दृब्छए दृभ्ब् त्र व्ए झब् त्र व्ए दृव्भ्ए दृछभ्2ए झब् त्र ब्ढए दृब् ≡ ब्दृ त्ए ब् भ्दृए हैलोजेन ;थ्ए ब्सए ठतए प्द्धए छव्ए ऐल्काॅक्सी652;व्त्द्ध आदि को हमेशा प्रतिस्थापी पूवर्लग्न के रूप में लिखा जाता है। अतः यदि किसी यौगिक में ऐल्कोहाॅल और कीटो समूहμदोनों हों, तो उसे ‘हाइड्रोक्सीएल्केनोन’ नाम ही दिया जाएगा, क्योंकि हाइड्राॅक्सी समूह की अपेक्षा कीटो समूह को उच्च प्राथमिकता प्राप्त है। उदाहरणाथर्μभ्व् ब्भ् ;ब्भ्द्ध ब्भ् ब्व् ब्भ्का नाम22323 7 - हाइड्राॅक्सीहेप्टेन - 2 - ओन होगा, न कि 2 - ओक्सोहेप्टेन - 7 - आॅल हैं। इसी प्रकार ठत ब्भ् ब्भ् त्र ब्भ्का सही नाम 3 - ब्रोमोप्रोप22 - 1 - इर्न है, न कि 1 - ब्रोमोप्रोप - 2 - इर्न। यदि एक ही प्रकार के ियात्मक समूहों की संख्या एक से अिाक हो, तो उनकी संख्या दशार्ने के लिए उपयुक्त पूवर्लग्न, डाइ, ट्राइर् आदि वगर् - अनुलग्न के पूवर् लिखा जाता है। ऐसे में वगर् - अनुलग्न के पूवर् मूल ऐल्केन का पूणर् नाम लिखते हैं। उदाहरणाथर् - ब्भ्;व्भ्द्ध ब्भ्;व्भ्द्ध का नाम एथेन - 1, 2 22डाइआॅल है, परंतु एक से अिाक द्विआबंध या त्रिाआबंध होने पर ऐल्केन का ‘न’ प्रयुक्त नहीं किया जाता है। जैसेμब्भ् त्र 2ब्भ् दृ ब्भ् त्र ब्भ् का नाम ब्यूटा - 1, 3 - डाइइर्न है।2उदाहरण 12.8 निम्नलिख्िात यौगिकों ;प.पअद्ध के प्न्च्।ब् नाम लिख्िाएμ हल ¹हाइड्राॅक्सी ;व्भ्द्ध ियात्मक समूह होने के कारण अनुलग्न आॅल होगा। दीघर्तम शृंखला में आठ काबर्न हैं। अतः मूल हाइड्रोकाबर्न आॅक्टेन है। व्भ् काबर्न - संख्या 3 पर है। एक अन्य प्रतिस्थापी मेथ्िाल समूह काबर्न - 6 पर है। अतः यौगिक का नाम 6 - मेथ्िालआॅक्टेन - 3 - आॅल है।ह् हल ियात्मक समूह कीटोन ;झ ब् त्र व्द्ध होने के कारण अनुलग्न ‘ओन’ होगा। दो कीटो - समूह होने के कारण ‘डाइओन’ अनुलग्न प्रयुक्त करेंगे। कीटो समूहों की स्िथतियाँ 2 और 4 हैं। दीघर्तम शृंखला में 6 काबर्न परमाणु होने के कारण मूल ऐल्केन हेक्सेन है। अतः सही नाम हेक्सेन - 2, 4 - डाइओन है।ह् हल ¹इसमें दो ियात्मक समूह ;कीटो तथा काबोर्क्सीद्ध हैं, जिनमें काॅबोर्क्सी - समूह मुख्य ियात्मक समूह है। अतः मूल शृंखला में अनुलग्न ‘ओइक’ अम्ल लगेगा। शृंखला का क्रमांकन उस काबर्न से आरंभ होगा, जिसमें - ब्व्व्भ् ियात्मक समूह है। काबर्न - संख्या 5 पर स्िथत कीटो को ‘आॅक्सो’ नाम दिया जाता है। दीघर्तम शृंखला, जिसमें ियात्मक समूह है, में 6 काबर्न परमाणु हैं। पफलतः इसके मूल हाइड्रोकाबर्न का नाम ‘हैक्सेन’ है। अतः यौगिक का नाम 5 - आॅक्सोहेक्सोनोइक अम्ल है।ह् हल दो ियात्मक समूह ब्ब् काबर्न 1 तथा 3 पर हैं,त्रजबकि ब्ब् समूह - स्िथति काबर्न - संख्या 5 पर ह।≡ैइसके लिए क्रमशः डाइइर्न तथा ‘आइन’ अनुलग्न प्रयुक्त करंगे। दीघ्ेार्तम ाृंखला में 6 काबर्न हैं। इसलिए इसका मश्लूहाइड्रोकाबर्न हेक्सेन है। अतः नाम हैक्सा - 1, 3 - डाइइर्न - 5 - आइन होगा। उदाहरण 12.9 निम्नलिख्िात की संरचनाएँ लिख्िाएμ ;पद्ध 2 - क्लोरोहेक्सेन, ;पपद्ध पेंट - 4 - इर्न - 2 - आॅल ;पपपद्ध 3 - नाइट्रोसाइक्लोहेक्सीन, ;पअद्ध साइक्लोहेक्स - 2 - इर्न - 1 - आॅल ;अद्ध 6 - हाइड्राॅक्सीहेप्टेनैल हल ;पद्ध हेक्सेन से स्पष्ट है कि दीघर्तम शृंखला में 6 काबर्न परमाणु हैं। ियात्मक समूह क्लोरो की स्िथति 2 है। अतः यौगिक की संरचना ब्भ्3 ब्भ्2 ब्भ्2 ब्भ्2 ब्भ् ;ब्सद्ध ब्भ्3 है। ;पपद्धपेंट से स्पष्ट है कि मूल हाइड्रोकाबर्न में 5 काबर्न परमाणु की शृंखला है। इर्न तथा ‘आॅल’ क्रमश ब्ब्झत्रढ तथा दृव्भ् ियात्मक समूह के द्योतक हैं, जो क्रमशः 4 तथा 2 स्िथतियों पर उपस्िथत हैं। अतः यौगिक की संरचना ब्भ्2 त्र ब्भ् ब्भ्2 ब्भ् ;व्भ्द्ध ब्भ्3 है। ;पपपद्ध साइक्लोहेक्सीन से स्पष्ट है कि छःसदस्यीय वलय में ब्ब् उपस्िथत है, जिसका क्रमांकन संरचना ;प्द्ध मेंत्रप्रद£शत है। पूवर्लग्न 3 - नाइट्रो यह इंगित करता है कि स्िथति 3 पर नाइट्रो समूह है। अतः यौगिक की संरचना प्प् है। द्विबंध् अनुलग्नक ियात्मक समूह है, जबकि छव्2 पूवर्लग्नक ियात्मक समूह है, इसलिए द्विबंध् को छव्2 समूह से अध्िक प्राथमिकता दी जाती है। ब्ब् आबंध पर इसकी वरीयता होगी। इस प्रकारत्रयौगिक की संरचना ;प्प्द्ध हैμ ;अद्ध ‘हेप्टेनैल’ से स्पष्ट है कि यौगिक एक ऐल्िडहाइड है, जिसमें 7 काबर्न परमाणुओं की शंृखला है। ‘6 - हाइड्राॅक्सी’ यह दशार्ता है कि स्िथति 6 पर - व्भ् समूह है। अतः यौगिक का संरचनात्मक सूत्रा निम्नलिख्िात हैμ ब्भ्3 ब्भ् ;व्भ्द्ध ब्भ्2 ब्भ्2 ब्भ्2 ब्भ्2 ब्भ्व् काबर्न शृंखला के क्रमांकन में - ब्भ्व् समूह का काबर्न परमाणु सम्िमलित होता है। 12.5.4 बेन्जीन व्युत्पन्नों की नामपद्वति प्न्च्।ब् प(ति में बेन्जीन व्युत्पन्न का नाम प्राप्त करने के लिए प्रतिस्थापी समूह का नाम पूवर्लग्न के रूप में ‘बेन्जीन’ शब्द से पूवर् लिखते हैं, परंतु उनके यौगिकों के रूढ़ नाम ;जो कोष्ठक में दिए गए हैंद्ध भी कापफी प्रचलित हैं। मेथ्िाल बेन्जीन मेथाॅक्सीबेन्जीन एमीनोबेन्जीन;टाॅलूइर्नद्ध ;ऐनीसाॅलद्ध ;ऐनीलीनद्ध नाइट्रोबेन्जीन ब्रोमोबेन्जीन द्विप्रतिस्थापी बेन्जीन व्युत्पन्न में प्रतिस्थापी समूहों की स्िथतियाँ संख्याओं द्वारा दशार्इर् जाती हैं। क्रमांकन इस प्रकार किया जाता है कि प्रतिस्थापी समूह वाली स्िथतियों को न्यूनतम संख्या मिले। जैसेμ इस यौगिक ;खद्ध का नाम 1, 3 - डाइब्रोमोबेन्जीन होगा, न कि 1, 5 - डाइब्रोमोबेन्जीन।;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध 1, 2 - डाइब्रोमोबेन्जीन 1, 3 - डाइब्रोमोबेन्जीन 1, 4 - डाइब्रोमोबेन्जीन नामंाकरण की रूढ़ प(ति में 1, 2 - ऋ 1, 3 - और 1, 4 - स्िथतियों को क्रमशः आॅथोर् ;वद्ध, मेटा ;उद्ध तथा पैरा ;चद्ध पूवर्लग्नों द्वारा भी दशार्या जाता है। अतः 1, 3 - डाइब्रोमोबेन्जीन का नाम मेटा डाइब्रोमोबेन्जीन भी है ;‘मेटा’ का संक्ष्िाप्त रूप उ हैद्ध और डाइब्रोमोबेन्जीन के अन्य समावयवों ;कद्ध 1, 2 - तथा ;गद्ध 1, 4 - डाइब्रोमोबेन्जीन को क्रमशः आॅथोर् ;वद्ध तथा पैरा ;चद्ध डाइब्रोमोबेन्जीन कहेंगे। इन पूवर्लग्नों का उपयोग त्रिा तथा बहुप्रतिस्थापी बेन्जीन के नामांकरण में नहीं किया जाता है। प्रतिस्थापियों की स्िथतियाँ निम्नतम संख्या के नियम का पालन करते हुए की जाती हैं। कभी - कभी बेन्जीन व्युत्पन्न के रूढ़ नाम को मूल यौगिक लिया जाता है। मूल यौगिक के प्रतिस्थापी की स्िथति को संख्या 1देकर इस प्रकार क्रमांकन करते हंै कि शेष प्रतिस्थापियों कोनिम्नतम संख्याएं मिलें। प्रतिस्थापियों के नाम अंग्रेशी वणर्माला क्रम में लिखे जाते हैं। इसके वुफछ उदाहरण नीचे दिए जा रहे हैंμ 1 - क्लोरो - 2, 4 - डाइनाइट्रोबेन्जीन ;न कि 4 - क्लोरो - 1, 3 - डाइनाइट्रोबेन्जीनद्ध 2 - क्लोरो - 1 - मेथ्िाल - 4 - नाइट्रोबेन्जीन ;न कि 4 - मेथ्िाल - 5 - क्लोरोनाइट्रोबेन्जीनद्ध 2 - क्लोरो - 4 - मेथ्िालएनीसोल 4 - एथ्िाल - 2 - मेथ्िालएनीलीन 3, 4 - डाइमेथ्िालपफीनाॅल जब बेन्जीन वलय एवं ियात्मक समूह ऐल्केन से जुड़े रहते हैं तब बेन्जीन को मूल न मानकर प्रतिस्थापी के रूप में माना जाता है। ;प्रतिस्थापी के रूप में बेन्जीन का नाम पेफनिल है तथा ब्भ्दृ को लघु रूप में च्ी लिखा जाता हैद्ध।65 उदाहरण 12.10 निम्नलिख्िात के संरचनात्मक सूत्रा लिख्िाएμ ;कद्ध व - एथ्िालऐनिसोल, ;खद्ध चदृ नाइट्रोऐनिलीन ;गद्ध2, 3 - डाइब्रोमो - 1 - पेफनिलपेन्टेन;घद्ध 4 - एथ्िाल - 1 - फ्रलुओरो - 2 - नाइट्रोबेन्जीन हल;कद्ध ;खद्ध;गद्ध ;घद्ध 12.6 समावयवता दो या दो से अिाक यौगिक ;जिनके अणुसूत्रा समान होते हैं, ¯कतु गुण भ्िान्न होते हैंद्ध ‘समावयव’ कहलाते हैं और इस परिघटना को ‘समावयवता’ ;पेवउमतपेउद्ध कहते हैं। विभ्िान्न प्रकार की समावयवता को इस तालिका में दशार्या गया है। ब्भ्3⏐ ब्भ्3⎯ ब्⎯ ब्भ्3 ⏐ब्भ्3 नीओपेन्टेन ;2, 2 - डाइमेथ्िालप्रोपेनद्ध12.6.1 संरचनात्मक समावयवता यौगिक, जिनके अणुसूत्रा समान होते हैं, ¯कतु संरचना ;अथार्त् परमाणुओं का अणु के अंदर परस्पर आबंिात होने का क्रमद्धभ्िान्न होती है, उन्हें संरचनात्मक समावयवों में वगीर्कृत किया जाता है। विभ्िान्न प्रकार की संरचनात्मक समावयवों का उदाहरणसहित वणर्न यहाँ दिया जा रहा हैμ ;पद्ध शृंखला समावयवता: समान अणुसूत्रा एवं भ्िान्न काबर्न ढाँचे वाले दो या दो से अिाक यौगिक शृंखला समावयवबनाते हैं। इस परिघटना को ‘ शृंखला समावयवता’ कहते हैं। उदाहरणाथर्μ ब्5भ्12 के निम्नलिख्िात तीन शृंखला समावयव हंैμ ब्भ्3⏐ ब्भ्ब्भ्ब्भ्ब्भ्ब्भ्ब्भ्−ब्भ्ब्भ्ब्भ्32223 323पेन्टेन आइसोपेन्टेन ;2 - मेथ्िालब्यूटेनद्धब्भ्3 ब्भ्3कृब्कृब्भ्3ब्भ्3 नीओपेन्टेन ;2ए2 डाइर्मेथ्िालप्रोपेनद्ध ;पपद्ध स्िथति - समावयवता: यदि समावयवों में भ्िान्नता प्रतिस्थापी परमाणु या समूह की स्िथति - भ्िान्नता के कारण होती है, तो उन्हें ‘स्िथति - समावयव’ तथा इस परिघटना को ‘स्िथति - समावयवता’ ;च्वेपजपवद प्ेवउमतपेउद्ध कहते हैं। उदाहरणाथर्μब्3भ्8व् अणुसूत्रा से निम्नलिख्िात दो ‘स्िथति - समावयव’ ऐल्कोहाॅल संभव हंैμव्भ्⏐ब्भ्ब्भ्ब्भ्व्भ् ब्भ्−ब्भ्.ब्भ्32233प्रोपेन - 1 - आॅल प्रोपेन - 2 - आॅल रसायन विज्ञान ;पपपद्ध ियात्मक समूह समावयवता: यदि दो या दो से अिाक यौगिकों के अणुसुत्रा समान हों, परंतु ियात्मक समूह भ्िान्न - भ्िान्न हों, तो ऐसे समावयवियों को ‘ियात्मक समूह समावयव’ कहते हैं और यह परिघटना ‘ियात्मक समूह समावयवता’ ;थ्नदबजपवदंस हतवनच पेवउमतपेउद्ध कहलाती है। उदाहरण के लिएμ ब्3भ्6व् अणुसूत्रा निम्नलिख्िात ऐल्िडहाइड तथा कीटोन प्रद£शत करता हैμ व् भ् ल गब्भ्3−ब्.ब्भ्3 ब्भ्3−ब्भ्2दृ ब्त्र व्प्रोपेनोन प्रोपेनैल ;पअद्ध मध्यावयवता: ियात्मक समूह से लगी भ्िान्नऐल्िकल शृंखलाओं के कारण यह समावयवता उत्पन्न होती है। उदाहरणाथर्μ ब्4भ्10व् मध्यावयवी मेथाॅक्सीप्रोपेन ;ब्भ्3दृव्दृब्3भ्7द्ध और एथाॅक्सीएथेन ;ब्2 भ्5दृव्दृब्2 भ्5द्ध प्रद£शत करता है। 12.6.2 त्रिाविम समावयवता त्रिाविम समावयव वे यौगिक हैं, जिनमें संरचना एवं परमाणुओं के आबंधन का क्रम तो समान रहता है, परंतु उनके अणुओं में परमाणुओं अथवा समूहों की त्रिाविम स्िथतियाँ भ्िान्न रहती हंै। यह विश्िाष्ट प्रकार की समावयवता ‘त्रिाविम समावयवता’ ;ैजमतमवपेवउमतपेउद्ध कहलाती है। इसे ज्यामितीय एवं प्रकाशीय समावयवता में वगीर्कृत किया जाता है। 12.7 काबर्निक अभ्िाियाओं की ियावििा में मूलभूत संकल्पनाएँ किसी काबर्निक अभ्िािया में काबर्निक अणु ;जो ‘ियाधारक’ भी कहलाता हैद्ध किसी उचित अभ्िाकमर्क से अभ्िािया करके पहले एक या अिाक मध्यवतीर् और अंत में एक या अिाक उत्पाद देता है। एक सामान्य अभ्िािया को इस रूप में प्रद£शत किया जाता हैμ आव्रफमणकारीअभ्िाकमकर्र् नक अणु ⎯⎯⎯⎯⎯⎯¹मध्यवतीह्→काबि र् उत्पाद ;ियाधरद्ध ↓ उप - उत्पाद नए आबंध में काबर्न की आपू£त करनेवाला ‘अभ्िाियक ियाधार’ ;ेनइेजतंजमद्ध और दूसरा ‘अभ्िाियक अभ्िाकमर्क’ ;तमंहमदजद्ध कहलाता है। यदि दोनों अभ्िाियक ;अभ्िाकारकद्ध नए आबंध में काबर्न की आपू£त करते हैं, तो यह चयन किसी भी तरीके से किया जा सकता है। इस स्िथति में मुख्य अणु ‘ियाधार’ कहलाता है। ऐसी अभ्िािया में दो काबर्न परमाणुओं अथवा एक काबर्न और एक अन्य परमाणु के बीच सहसंयोजक आबंध टूटकर एक नया आबंध बनता है। किसी अभ्िािया में इलेक्ट्राॅनों का संचलन, आबंध - विदलन और आबंध - निमार्ण के समय की औ£जकी तथा उत्पाद बनने के समय की विस्तृत जानकारी और क्रमब( अध्ययन उस अभ्िािया की ियावििा ;डमबींदपेउद्ध कहलाती है। ियावििा की सहायता से यौगिकों की ियाशीलता को समझने में तथा नवीन काबर्निक यौगिकों के संश्लेषण की रूपरेखा तैयार करने में सहायता मिलती है। निम्नलिख्िात भागों में इन अभ्िाियाओं से संबंिात अवधारणाओं की व्याख्या की गइर् है। 12.7.1 सहसंयोजक आबंध् का विदलन सहसंयोजक आबंध का विदलन ;बसमंअंहमद्ध दो प्रकार से संभव हैμ ;पद्ध विषम अपघटनी विदलन तथा ;पपद्ध समापघटनी विदलन। विषमअपघटनी विदलन में विदलित होने वाले आबंध के दोनों इलेक्ट्राॅन उनमें से किसी एक परमाणु पर चले जाते हैं, जो अभ्िाकारक से आबंिात थे। विषमअपघटन के पश्चात् एक परमाणु पर षष्टक तथा धनावेश होता है और दूसरे का पूणर् अष्टक एवं कम से कम एक एकाकी युग्म तथा )णावेश होता है। अतः ब्रोमोमेथेन के विषम अपघटनी - विदलन से़ब्भ् तथा ठतदृ प्राप्त होता है।3धनावेश्िात स्पीशीश, जिसमें काबर्न पर षष्टक होता है, ‘काबर्धनायन’ कहलाती है ;इसे पहले ‘काबोर्नियम आयन’ कहा जाता थाद्ध। ़ब्भ् आयन को ‘मेथ्िाल धनायन’ अथवा3‘मेथ्िाल काबोर्नियम आयन’ कहते हैं। धनावेश्िात काबर्न के साथ बंिात काबर्न परमाणुओं की संख्या के आधार परकाबर्धनायनों को प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक में वगीर्कृत किया जा सकता है। काबर्धनायनों के वुफछ उदाहरण हैंμ़ब्भ् ब्भ् ;एथ्िाल धनायनμएक प्राथमिक काबर्धनायनद्ध,3233़आइसोप्रोपिल धनायन ;एक द्वितीयक;ब्भ्द्ध ब्भ् काबर्धनायनद्ध एवं ;ब्भ् द्ध ब् ़ ;ब्यूटिल धनायनμएक तृतीयक33काबर्धनायनद्ध। काबर्धनायन अत्यिाक अस्थायी तथा ियाशील स्पीशीश हैं। धनावेश्िात काबर्न के साथ आबंिात ऐल्िकल समूह काबर्धनायन के स्थायित्व में प्रेरण्िाक प्रभाव और अतिसंयुग्मन द्वारा वृि करते हैं, जिसके विषय में आप भाग 12.7.5 और 12.7.9 में अध्ययन करेंगे। काबर्धनायन के स्थायित्व का क्रम़़़ इस प्रकार हैμ ़ब्भ् ढढ ढब्भ्ब्भ् ;ब्भ्द्धब्भ् ;ब्भ्द्धब् ।332 32 33 इन काबर्धनायनों की आकृति त्रिापफलकीय समतल होती है, जिसमें धनावेश्िात काबर्न की संकरण - अवस्था ेच2होती है। ़अतः ब्भ् में काबर्न के तीन ;ेच2द्ध संकरित कक्षक हाइड्रोजन3के से कक्षकों के साथ अतिव्यापित होकर ब्;ेच2द्धदृभ् ;सेद्ध सिग्मा आबंध बनाते हैं। असंकरित काबर्न कक्षक इस तल के लंबवत रहता है। इसमें कोइर् इलेक्ट्राॅन नहीं होता ;चित्रा 12.3द्ध। चित्रा 12.3 मेथ्िाल धनायन की आकृति विषम अपघटनी विदलन से ऐसी स्पीशीश नि£मत हो सकती है, जिसमें काबर्न को सहभाजित इलेक्ट्राॅन युग्म प्राप्त होता है। उदाहरणाथर्μजब काबर्न से आबंिात र् समूह बिना इलेक्ट्राॅन युग्म लिये पृथव्फ होता है, तब मेथ्िाल )णायन दृ⎡⎤भ्ब्रू बनता है।3⎣⎦ऐसी स्पीशीश, जिसमें काबर्न पर )णावेश होता है, काबर्)णायन ;ब्ंतइंदपवदद्ध कहलाती है। काबर्)णायन भी अस्थायी और ियाशील स्पीशीश होती हैं। ऐसी काबर्निक अभ्िाियाएँ, जिनमें विषमांश विदलन होता है, आयनी अथवा विषम ध्रुवीय अथवा ध्रुवीय अभ्िाियाएँ कहलाती हैं। समापघटनी विदलन में सहभाजित युग्म का एक - एक इलेक्ट्राॅन उन दोनों परमाणुओं पर चला जाता है, जो अभ्िाकारक में आबंिात होते हैं। अतः समापघटनी विदलन में इलेक्ट्राॅन युग्म के स्थान पर एक ही इलेक्ट्राॅन का संचलन होता है। एक इलेक्ट्राॅन के संचलन को अधर् - शीषर् तीर ;पिफशहुक, पिेी ीववाद्ध द्वारा दशार्ते हैं। इस विदलन के पफलस्वरूप उदासीन स्पीशीश ;परमाणु अथवा समूहद्ध बनती हैं, जिन्हें ‘मुक्त मूलक’ ;तिमम तंकपबंसेद्ध कहते हैं। काबर्धनायन एवं काबर्)णायन की भाँति मुक्त मूलक भी अतिियाशील होते हैं। वुफछ समापघटनी विदलन नीचे दिखाए गए हैंμ ऐल्िकल मुक्त मूलकों को प्राथमिक, द्वितीयक अथवातृतीयक में वगीर्कृत किया जा सकता है। ऐल्िकल मुक्त मूलक प्राथमिक से तृतीयक की ओर बढ़ने पर ऐल्िकल मूलक का स्थायित्व बढ़ता है। समांश विदलन द्वारा होने वाली काबर्निक अभ्िाियाएँ मुक्त मूलक या समध्रुवीय या अध्रुवीय अभ्िाियाएँ कहलाती हैं। 12.7.2 नाभ्िाकस्नेही और इलेक्ट्राॅनस्नेही इलेक्ट्राॅन युग्म प्रदान करनेवाला अभ्िाकमर्क ‘नाभ्िाकस्नेही’ या या नाभ्िाकरागी;छनबसमवचीपसमए छनरूद्ध ;अथार्त् नाभ्िाक खोजने वालाद्ध कहलाता है, तथा अभ्िािया ‘नाभ्िाकस्नेही अभ्िािया’ अथवा ‘नाभ्िाकरागी अभ्िािया’ कहलाती है। इलेक्ट्राॅन युग्म ले जानेवाले अभ्िाकमर्क को इलेक्ट्राॅनस्नेही ;म्समबजतवचीपसमए म़्द्धए अथार्त् ‘इलेक्ट्राॅन चाहने वाला’ या इलेक्ट्रानरागी कहते हैं और अभ्िािया ‘इलेक्ट्राॅनस्नेही अभ्िािया’ अथवा ‘इलेक्ट्रानरागी अभ्िािया’ कहलाती है। ध्रुवीय काबर्निक अभ्िाियाओं में ियाधारक के इलेक्ट्राॅनस्नेही वेंफद्र पर नाभ्िाकस्नेही आक्रमण करता है। यह ियाधारक का विश्िाष्ट परमाणु अथवा इलेक्ट्राॅन न्यून भाग होता है। इसी प्रकार ियाधारकों के इलेक्ट्राॅनधनी नाभ्िाकस्नेही वेंफद्र पर इलेक्ट्राॅनस्नेही आक्रमण करता है। अतः आबंधन अन्योन्य िया के पफलस्वरूप इलेक्ट्राॅनस्नेही नाभ्िाकस्नेही से इलेक्ट्राॅन - युग्म प्राप्त करता है। नाभ्िाकस्नेही से इलेक्ट्राॅनस्नेही की ओर इलेक्ट्राॅनों का संचलन वक्र तीर द्वारा प्रद£शत किया जाता है। हाइड्राॅक्साइड ;व्भ्दृद्ध, सायनाइड आयन ;छब्दृद्ध तथा काबर्)णायन ;त्ब्दृरूद्ध3- - - वुफछ उदाहरण हैं। उदासीन अणु ;जैसेμभ् व्रूएत् छरूएत् व्रू232आदिद्ध भी एकाकी इलेक्ट्राॅन युग्म की उपस्िथति के कारण नाभ्िाकस्नेही की भाँति कायर् करते हैं। इलेक्ट्राॅनस्नेही के उदाहरणों में काबर्धनायन ़3 और काबोर्निल समूह ;झ ब् त्र व्द्ध;ब्भ् द्ध अथवा ऐल्िकल हैलाइड ;त् ब्दृग्ए ग् त्र हैलोजेन परमाणुद्ध3वाले उदासीन अणु सम्िमलित हैं। काबर्धनायन का काबर्न केवल रसायन विज्ञान षष्टक होने के कारण इलेक्ट्राॅन - न्यून होता है तथा नाभ्िाकस्नेही से इलेक्ट्राॅन - युग्म ग्रहण कर सकता है। ऐल्िकल हैलाइड का काबर्न आबंध ध्रुवता के कारण इलेक्ट्राॅनस्नेही - वेंफद्र बन जाता है, जिसपर नाभ्िाकस्नेही आक्रमण कर सकता है। उदाहरण 12.11 निम्नलिख्िात अणुओं में सहसंयोजी आबंध के विषम अपघटनी विदलन से सिय मध्यवतीर् का निमार्ण वक्र तीर की सहायता से प्रद£शत कीजिए। ;कद्ध ब्भ्3 दृ ैब्भ्3ए ;खद्ध ब्भ्3 दृ ब्छए ;गद्धब्भ्3 दृ ब्न हल उदाहरण 12.12 कारण स्पष्ट करते हुए निम्नलिख्िात को नाभ्िाकस्नेहीतथा इलेक्ट्राॅनस्नेही में वगीर्कृत कीजिएμ भ्ै− एठथ्एब् भ् व्− ए;ब्भ् द्ध छ रूए325 3 3 ़़ ़ .ब्सएब्भ् ब्त्रव्एभ् छ रूएछव्3 22 हल −− −नाभ्िाकस्नेही: भ्ैएब्भ्व् ए;ब्भ् द्ध छरूएभ्छ य25 332इन स्पीशीश पर एकाकी इलेक्ट्राॅन युग्म हैं, जो इलेक्ट्राॅनस्नेही द्वारा प्रदान किए जा सकते हैं। ़ ü़़इलेक्ट्राॅनस्नेही: ठथ्एब्सएब्भ् ब्त्रव्एछव् रू इनपर33 2 इलेक्ट्राॅनों का केवल षष्टक है, जिसके कारण ये नाभ्िाकस्नेही से इलेक्ट्राॅन युग्म ग्रहण कर सकते हैं। उदाहरण 12.13 निम्नलिख्िात में इलेक्ट्राॅनस्नेही वेंफद्र इंगित कीजिए। ब्भ्3 ब्भ् त्र व्ए ब्भ्3ब्छ एवं ब्भ्3प् हल तारांकित काबर्न इलेक्ट्राॅनस्नेही वेंफद्र हैं, क्योंकि आबंध ध्रुवता के कारण इनपर आंश्िाक धनावेश उत्पन्न हो जाता है। ’ ’’ ब्भ् ब्भ् त्रव्एभ् ब्ब्≡ छ एवं भ् ब्दृप्33 3 12.7.3 काबर्निक अभ्िाियाओं में इलेक्ट्राॅन संचलन काबर्निक अभ्िाियाओं में इलेक्ट्राॅनों का संचलन ;डवअमउमदजद्ध मुड़े हुए तीरों ;ब्नतअमक ।दवूेद्ध द्वारा दशार्या जा सकता है। अभ्िािया में इलेक्ट्राॅनों के पुन£वतरण के कारण होने वाले आबंधन परिवतर्नों को यह दशार्ता है। इलेक्ट्राॅन युग्म की स्िथति में परिवतर्न को दिखाने के लिए तीर उस इलेक्ट्राॅनयुग्म से आरंभ होता है, जो अभ्िािया में उस स्िथति से संचलन कर रहा है। जहाँ यह युग्म संचलित हो जाता है, वहाँ तीर का अंत होता है। इलेक्ट्राॅनयुग्म के विस्थापन इस प्रकार होते हैंμ ;पद्ध π आबंध से निकटवतीर् आबंध स्िथति पर ;पपद्ध π आबंध से निकटवतीर् परमाणु पर ;पपपद्ध परमाणु से निकटवतीर् आबंध स्िथति पर एक इलेक्ट्राॅन के संचलन को अधर् - शीषर् तीर ;ैपदहसम ठंतइमक भ्ंस िभ्मंकमकद्ध ‘पिफश हुक’ द्वारा दशार्या जाता है। उदाहरणाथर्μहाइड्राॅक्साइड से एथेनाॅल प्राप्त होने में और क्लोरो - मेथैन के विघटन में मुड़े तीरों का उपयोग करके इलेक्ट्राॅन के संचलन को इस प्रकार दशार्या जा सकता हैμ 12.7.4 सहसंयोजी आबंधें में इलेक्ट्राॅनविस्थापन के प्रभाव काबर्निक अणु में इलेक्ट्राॅन का विस्थापन या तो परमाणु से प्रभावित तलस्थ अवस्था अथवा प्रतिस्थापी समूह अथवा उपयुक्त आक्रमणकारी अभ्िाकमर्क की उपस्िथति में हो सकता है। किसी अणु में किसी परमाणु अथवा प्रतिस्थापी समूह के प्रभाव से इलेक्ट्राॅन का स्थानांतरण आबंध् में स्थायी ध््रुवणता उत्पन्न करता है। प्रेरण्िाक प्रभाव ;प्दकनबजपअम ममििबजद्ध एवं अनुनाद प्रभाव ;त्मेवदंदबम ममििबजद्ध इस प्रकार के इलेक्ट्राॅन स्थानांतरण के उदाहरण हैं। अभ्िाकमर्क की उपस्िथति में किसी अणु में उत्पन्न अस्थायी इलेक्ट्राॅन - प्रभाव को हम ध््रुवणता - प्रभाव भी कहते हैं। इस प्रकार के इलेक्ट्राॅन स्थानांतरण को ‘इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव’ कहते हैं। हम निम्नलिख्िात खंडों में इन इलेक्ट्राॅन स्थानांतरणों का अध्ययन करेंगे। 12.7.5 प्रेरण्िाक प्रभाव भ्िान्न विद्युत् - )णात्मकता के दो परमाणुओं के मध्य नि£मत सहसंयोजक आबंध में इलेक्ट्राॅन असमान रूप से सहभाजित होते हंै। इलेक्ट्राॅन घनत्व उच्च विद्युत् )णात्मकता के परमाणु की ओर अिाक होता हैै। इस कारण सहसंयोजक आबंध ध्रुवीय हो जाता है। आबंध ध्रुवता के कारण काबर्निक अणुओं में विभ्िान्न इलेक्ट्राॅनिक प्रभाव उत्पन्न होते हैं। उदाहरणाथर्μक्लोरोएथेन ;ब्भ्3ब्भ्2ब्सद्ध में ब्दृब्स बंध ध्रुवीय है। इसकी ध्रुवता के कारण काबर्न क्रमांकμ1 पर आंश्िाक धनावेश ;δ़द्ध तथा क्लोरीन पर आंश्िाक )णावेश ;δदृद्ध उत्पन्न हो जाता है। आंश्िाक आवेशों को दशार्ने के लिए δ ;डेल्टाद्ध चिÉ प्रयुक्त करते हैं। आबंध में इलेक्ट्राॅन - विस्थापन दशार्ने के लिए तीर ;→द्ध का उपयोग किया जाता है, जो δ़ से δदृ की ओर आमुख होता है। δδ़ δ़ δ− ब्भ्3 ⎯→⎯ब्भ्2⎯→⎯ब्स 21 काबर्नμ1 अपने आंश्िाक धनावेश के कारण पास के ब्दृब् आबंध के इलेक्ट्राॅनों को अपनी ओर आक£षत करने लगता है। पफलस्वरूप काबर्नदृ2 पर भी वुफछ धनावेश ;δδ़द्ध उत्पन्न हो जाता है। ब्दृ1 पर स्िथत धनावेश की तुलना में δδ़ अपेक्षाकृत कम धनावेश दशार्ता है। दूसरे शब्दों में, ब्दृब्स की ध्रुवता के कारण पास के आबंध में ध्रुवता उत्पन्न हो जाती है। समीप के σ आबंध के कारण अगले σदृ आबंध के ध्रुवीय होने की प्रिया प्रेरण्िाक प्रभाव ;प्दकनबजपअम म्मििबजद्ध कहलाती है। यह प्रभाव आगे के आबंधोें तक भी जाता हैै, लेकिन आबंधों की संख्या बढ़ने के साथ - साथ यह प्रभाव कम होता जाता है और तीन आबंधों के बाद लगभग लुप्त हो जाता है। प्रेरण्िाक प्रभाव का संबंध प्रतिस्थापी से बंिात काबर्न परमाणु को इलेक्ट्राॅन प्रदान करने अथवा अपनी ओर आकष्िार्त कर लेने की योग्यता से है। इस योग्यता के आधार पर प्रतिस्थापियों को हाइड्रोजन के सापेक्ष इलेक्ट्राॅन - आकषीर् ;म्समबजतवददृूपजीकतंूपदहद्ध या इलेक्ट्राॅनदाता समूह के रूप में वगीर्कृत किया जाता है। हैलोजेन तथा वुफछ अन्य समूह, जैसेμनाइट्रो ;दृछव्द्ध, सायनो ;दृब्छद्धए काबोर्क्सी ;दृब्व्व्भ्द्धए एस्टर2;दृब्व्व्त्द्ध ऐरिलाॅक्सी ;दृव्।तद्ध इलेक्ट्राॅन - आकषीर् समूह हैं, जबकि ऐल्िकल समूह, जैसेμ मेथ्िाल ;ब्भ्द्ध, एथ्िाल3;दृब्भ्दृब्भ्द्ध आदि इलेक्ट्राॅनदाता - समूह हैं।23उदाहरण 12.14 इन युग्मांे में कौन - सा आबंध अिाक ध्रुवीय है? ;कद्ध भ्3ब्दृभ्ए भ्3ब्दृठत ;खद्ध भ्3ब्दृछभ्2ए भ्3ब्दृव्भ् ;गद्धभ्3ब्दृव्भ्ए भ्3ब्दृैभ् हल ;कद्ध भ्3ब्दृठतए क्योंकि भ् की अपेक्षा ठत अिाक विद्युत्)णी है। ;खद्ध ब्दृव्ए ;गद्ध ब्दृव् उदाहरण 12.15 ब्भ्3दृब्भ्2दृब्भ्2दृठत के किस आबंध में ध्रुवता न्यूनतम होगी? हल जैसे - जैसे दूरी बढ़ती है, वैसे - वैसे प्रेरण्िाक प्रभाव की तीव्रता कम होती जाती है। इसलिए काबर्न 3 एवं हैलोजेन आबंध के मध्य ध््रुवता सबसे कम होगी। 12.7.6 अनुनाद - संरचना ऐसे अनेक काबर्निक यौगिक हैं, जिनका व्यवहार केवल एक लूइस संरचना के द्वारा नहीं समझाया जा सकता है। इसका एक उदाहरण बेंशीन है। एकांतर ब्दृब् तथा ब्त्रब् आबंधयुक्त बेंशीन की चक्रीय संरचना इसके विश्िाष्ट गुणों की व्याख्या करने के लिए पयार्प्त नहीं है। उपयुर्क्त निरूपण के अनुसार, बेंशीन में एकल ब्दृब् तथा ब्त्रब् द्विआबंधों के कारण दो भ्िान्न आबंध लंबाइयाँ होनी चाहिए, लेकिन प्रयोगात्मक निधार्रण से यह पता चला कि बेंशीन में समान ब् दृ ब् समान आबंध लंबाइर् 139चउ है, जो एकल ब्दृब् आबंध ;154चउद्ध और द्विआबंध ;ब् त्र ब्द्ध का मध्यवतीर् मान है। अतः बेंशीन की संरचना उपयुर्क्त संरचना द्वारा प्रद£शत नहीं की जा सकती। बेंशीन को निम्नलिख्िात तथा प्प् समान ऊजार् - संरचनाओं द्वारा प्रद£शत किया जा सकता है। रसायन विज्ञान अतः अनुनाद सि(ांत ;एकक 4द्ध के अनुसार बेंशीन की वास्तविक संरचना को उपरोक्त दोनों में से किसी एक संरचना द्वारा हम पूणर् रूप से प्रद£शत नहीं कर सकते। वास्तविक तौर पर यह दो संरचनाओं ;प् तथा प्प्द्ध की संकर ;भ्लइतपकद्ध होती है, जिन्हें ‘अनुनाद - संरचनाएँ’ ;त्मेवदंदबम ैजतनबजनतमेद्ध कहते हैं। अनुनाद - संरचनाएँ ;केनोनिकल संरचना या योगदान करनेवाली संरचनाद्ध काल्पनिक हैं। ये वास्तविक संरचना का प्रतिनििात्व अकेले नहीं कर सकती हैं। ये अपने स्थायित्व - अनुपात के आधार पर वास्तविक संरचना में योगदान करती हैं। अनुनाद का एक अन्य उदाहरण नाइट्रोमेथैन में मिलता है, जिसे दो लूइस संरचनाओं ;प् व प्प्द्ध द्वारा प्रद£शत किया जा सकता है। इन संरचनाओं में दो प्रकार के छदृव् आबंध हैं। परंतु यह ज्ञात है कि दोनों छदृव् आबंधों की लंबाइयाँ समान हैं, ;जो छदृव् एकल आबंध तथा छत्रव् द्विआबंध की मध्यवतीर् हैंद्ध। अतः नाइट्रोमेथैन की वास्तविक संरचना दो केनोनिकल रूपों प् व प्प् की अनुनाद संकर हैं। वास्तविक अणु ;अनुनाद संकरद्ध की ऊजार् किसी भी केनोनिकल संरचना से कम होती है। वास्तविक संरचना तथान्यूनतम ऊजार्वाली अनुनाद - संरचना की ऊजार् के अंतर को‘अनुनाद - स्थायीकरण ऊजार्’ ;त्मेवदंदबम ैजंइपसपेंजपवद म्दमतहलद्ध या ‘अनुनाद ऊजार्’ कहते हैं। अनुनादी संरचनाएँजितनी अिाक होंगी, उतनी ही अिाक अनुनाद ऊजार् होगी।समतुल्य ऊजार् वाली संरचनाओं के लिए अनुनाद विशेष रूप सेमहत्त्वपूणर् हैं। अनुनाद - संरचनाओं को लिखते समय निम्नलिख्िात नियमों का पालन किया जाता है - ;पद्ध अनुनाद - संरचनाओं में नाभ्िाक की स्िथति समान रहती है। ;पपद्ध अनुनाद संरचनाओं में अयुग्िमत इलेक्ट्राॅनों की संख्या समान रहती है। अनुनाद - संरचनाओं में वह संरचना अिाक स्थायी होती हैं, जिसमें अिाक सहसंयोजी आबंध होते हैं। इसमें सारे परमाणु इलेक्ट्रानों के अष्टक ;हाइड्राॅजन परमाणु को छोड़कर, जिसमें दो इलेक्ट्राॅन होते हैंद्ध। विपरीत आवेश का पृथक्करण कम होताहै। यदि )णात्मक आवेश है, तो अिाक विद्युत््)णी तत्त्व पर होता है। धनात्मक आवेश यदि है, तो वह अिाक विद्युत््धनीतत्त्व पर होता है तथा अिाक आवेश प्रसार होता है। उदाहरण 12.16 ब्भ्3ब्व्व्दृ की अनुनाद - संरचनाएँ लिखें और वक्र तीरों द्वारा इलेक्ट्राॅन का संचलन दशार्एँ। हल सवर्प्रथम संरचना लिखकर उपयुक्त परमाणुओं पर असहभाजित इलेक्ट्राॅन तथा इलेक्ट्राॅन का संचलन तीर द्वारा दशार्इए। उदाहरण 12.17 ब्भ्2 त्र ब्भ् दृ ब्भ्व् की अनुनाद - संरचनाएँ लिखें तथा विभ्िान्न अनुनाद - संरचनाओं के आपेक्ष्िाक स्थायित्व को दशार्एँ। हल स्थायित्व: प् झ प्प् झ प्प्प् प् रू सवार्िाक स्थायी है, क्योंकि प्रत्येक काबर्न तथा आॅक्सीजन का अष्टक पूणर् है तथा काबर्न और आॅक्सीजन पर विपरीत आवेशों का पृथक्करण नहीं है। प्प् रू )णावेश अिाक )णविद्युत्ी परमाणु पर तथा धनावेश अिाक धनविद्युती परमाणु पर है। प्प्प् रू न्यूनतम स्थायी है, क्योंकि धनावेश अिाक )णविद्युती परमाणु पर उपस्िथत है, जबकि अिाक धनविद्युती काबर्न पर )णावेश उपस्िथत है। उदाहरण 12.18 निम्नलिख्िात संरचनाएँ ;प् तथा प्प्द्ध ब्भ्3 ब्व्व्ब्भ्3 की वास्तविक संरचना में कोइर् विशेष योगदान क्यों नहीं करती हैं? हल दोनों संरचनाओं का विशेष योगदान नहीं होगा, क्योंकि इनमें विपरीत आवेशों का पृथक्करण है। इसके अतिरिक्त संरचना प् में काबर्न का अष्टक पूणर् नहीं है। 12.7.7 अनुनाद - प्रभाव दो π - आबंधों की अन्योन्य िया अथवा π.बंध एवं समीप के परमाणु पर उपस्िथत एकाकी इलेक्ट्राॅन युग्म के बीच अन्योन्य िया के कारण अणु में उत्पन्न ध्रुवता को ‘अनुनाद - प्रभाव’ ;त्मेवदंदबम म्मििबजद्ध कहा जाता है। यह प्रभाव शंृखला में संचारित होता है। दो प्रकार के अनुनाद अथवा मेसोमेरिक प्रभाव होते हैं, जिन्हें ‘त् प्रभाव’ अथवा ‘ड प्रभाव’ कहा जाता है। ;पद्ध धनात्मक अनुनाद - प्रभाव ;़ त् प्रभावद्ध इस प्रभाव में इलेक्ट्राॅन विस्थापन संयुग्िमत अणु में बंिात परमाणु यह प्रतिस्थापी समूह से दूर होता है। इस इलेक्ट्राॅन - विस्थापन के कारण अणु में वुफछ स्िथतियाँ उच्च इलेक्ट्राॅन घनत्व की हो जाती हैं। ऐनिलीन में इस प्रभाव को इस प्रकार दशार्या जाता हैμ ;पपद्ध )णात्मक अनुनाद - प्रभाव ;दृत् प्रभावद्ध यह प्रभाव तब प्रद£शत होता है, जब इलेक्टाॅन का विस्थापन संयुग्िमत अणु में बंिात परमाणु अथवा प्रतिस्थापी समूह की ओर होता है। उदाहरणाथर्μनाइट्रोबेंशीन में इस इलेक्ट्राॅन - विस्थापन को इस प्रकार दशार्या जाता हैμ ़त् अथवा दृत् इलेक्ट्राॅन विस्थापन प्रभाव दशार्नेवाले परमाणु अथवा प्रतिस्थापी - समूह निम्नलिख्िात हैंμ ़त् रूदृ हैलोजेन, व्भ्ए व्त्ए व्ब्व्त्ए छभ्ए छभ्त्ए2छत्2ए छभ्ब्व्त् दृत् रूदृ ब्व्व्भ्ए दृब्भ्व्ए झब् त्र व्ए दृब्छए दृछव्2 किसी विवृत शृंखला अथवा चक्रीय निकाय में एकांतरी एकल और द्विआबंधों की उपस्िथति को ‘संयुग्िमत निकाय’ कहते हैं। ये बहुधा असामान्य व्यवहार दशार्ते हैं। 1ए 3दृ ब्यूटाडाइइर्न, ऐनिलीन, नाइट्रोबेंशीन इत्यादि इसके उदाहरण हैं। ऐसे निकायों में π.इलेक्ट्राॅन विस्थापित ;क्मसवबंसपेमकद्ध हो जाते हैं तथा ध्रुवता उत्पन्न होती है। 12.7.8 इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव ;म् प्रभावद्ध यह एक अस्थायी प्रभाव है। केवल आक्रमणकारी अभ्िाकारकों की उपस्िथति में यह प्रभाव बहुआबंध ;द्विआबंध अथवा त्रिाआबंधद्ध वाले काबर्निक यौगिकों में प्रद£शत होता है। इस प्रभाव में आक्रमण करनेवाले अभ्िाकारक की माँग के कारण बहु - आबंध से बंिात परमाणुओं में एक सहभाजित π इलेक्ट्राॅन युग्म का पूणर् विस्थापन होता है। अभ्िािया की परििा से आक्रमणकारी अभ्िाकारक को हटाते ही यह प्रभाव शून्य हो जाता है। इसे म् द्वारा दशार्या जाता है, जबकि इलेक्ट्राॅन के संचलन को वक्र तीर ;द्ध द्वारा प्रद£शत किया जाता है। स्पष्टतः दो प्रकार के इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव होते हैंμ ;पद्ध धनात्मक इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव ;़ म् प्रभावद्धः इस प्रभाव में बहुआबंध के π.इलेक्ट्राॅनों का स्थानांतरण उस परमाणु पर होता है, जिससे आक्रमणकारी अभ्िाकमर्क बंिात होता है। उदाहरणाथर्μ ;पपद्ध )णात्मक इलेक्ट्रोमेरी - प्रभाव ;दृम् प्रभावद्धः इस प्रभाव में बहु - आबंध के π.इलेक्ट्राॅनों का स्थानांतरण उस परमाणु पर होता है, जिससे आक्रमणकारी अभ्िाकमर्क बंिात नहीं होता है। इसका उदाहरण यह हैμ रसायन विज्ञान जब प्रेरण्िाक तथा इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव एक - दूसरे की विपरीत दिशाओं में कायर् करते हैं, तब इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव प्रबल होता है। 12.7.9 अतिसंयुग्मन अतिसंयुग्मन एक सामान्य स्थायीकरण अन्योन्य िया है। इसमें किसी असंतृप्त निकाय के परमाणु से सीधे वांछित ऐल्िकल समूह के ब्दृभ् आबंध अथवा असहभाजित च कक्षक वाले परमाणु के σइलेक्ट्राॅनों का विस्थानीकरण हो जाता है। ऐल्िकल समूह के ब्दृभ्ए आबंध के σइलेक्ट्राॅन निकटवतीर् असंतृप्त निकाय अथवा असहभाजित च कक्षक के साथ आंश्िाक संयुग्मन ;च्ंतजपंस ब्वदरनहंजपवदद्ध दशार्ते हैं। अतिसंयुग्मन एक स्थायी प्रभाव है।़अतिसंयुग्मन को समझने के लिए हमब्भ् ब्भ् ;एथ्िाल32धनायनद्ध का उदाहरण लेते हैं, जिसमें धनावेश्िात काबर्न पर एक रिक्त πकक्षक है। मेथ्िाल समूह का एक ब्दृभ् आबंध रिक्त π कक्षक के तल के संरेखण में हो जाता है, जिसके कारण ब्दृभ् आबंध के इलेक्ट्राॅन रिक्त πकक्षक में विस्थानीकृत हो जाते हैं, जैसा चित्रा 12.4 ;कद्ध में दशार्या गया है। चित्रा 12.4 ;कद्ध एथ्िाल धनायन में अतिसंयुग्मन दशार्ता कक्षक आरेख इस प्रकार के अतिव्यापन से काबर्धनायन का स्थायित्व बढ़ जाता है, क्योंकि निकटवतीर् σ आबंध धनावेश के विस्थानीकरण में सहायता करता है। सामान्यतया धनावेश्िात काबर्न से संयुक्त ऐल्िकल समूहों की संख्या बढ़ने पर अतिसंयुग्मन अन्योन्य िया अिाक होती है, जिसके कारण काबर्धनायन का स्थायित्व बढ़ता है। विभ्िान्न काबर्धनायन के स्थायित्व का क्रम इस प्रकार हैμ ऐल्कीनों तथा ऐल्िकलऐरीनों में भी अतिसंयुग्मन संभव है। ऐल्कीनों में अतिसंयुग्मन द्वारा इलेक्ट्राॅनों का विस्थानीकरण इस चित्रा ;12.4 खद्ध में दशार्या गया है। चित्रा 12.4 ;खद्ध प्रोपीन में अतिसंयुग्मन का कक्षक चित्रा अतिसंयुग्मन प्रभाव को समझने के कइर् तरीके हैं। उनमें से एक तरीके में अनुनाद के कारण ब्दृभ् आबंध में आंश्िाक आयनीकरण होना माना गया है। अतिसंयुग्मन आबंधरहित अनुनाद भी कहलाता है। उदाहरण 12.19 ब़् ़;ब्भ्3द्ध332की अपेक्षा अिाक स्थायी क्योंएब्भ् ब्भ् है और ़ब्भ्3का स्थायित्व न्यूनतम क्यों है? हल ;ब्भ्3द्ध3ब़्में नौ ;ब्दृभ्द्ध बंध होने के कारण उसमें ़ अतिसंयुग्मन अन्योन्य िया की मात्रा ब्भ् ब्भ् की32तुलना में कापफी अिाक होती है। ़ब्भ्3में रिक्त च कक्षक ब् दृ भ् आबंध के तल के लंबवत होने के कारण इसके साथ अतिव्यापन नहीं कर सकते हैं। अतः ़ब्भ्3 में अतिसंयुग्मन नहीं होता है। 12.7.10 काबर्निक अभ्िाियाएँ और उनकी ियाविध्ियाँ काबर्निक अभ्िाियाओं को निम्नलिख्िात वगोर्ं में वगीर्कृत किया जा सकता हैμ ;पद्ध प्रतिस्थापन अभ्िाियाएँ ;पपद्ध संकलन यानी योगज अभ्िाियाएँ ;पपपद्ध विलोपन अभ्िाियाएँ ;पअद्ध पुन£वन्यास अभ्िाियाएँ आप इन अभ्िाियाओं के बारे में इस पुस्तक के एकक - 13 एवं कक्षा ग्प्प् में पढ़ेंगे। 12.8 काबर्निक यौगिकों के शोधन की वििायाँ किसी प्राकृतिक स्रोत से निष्कषर्ण ;म्गजतंबजपवदद्ध अथवा प्रयोगशाला में संश्लेषण के पश्चात् काबर्निक यौगिक का शोधन ;च्नतपपिबंजपवदद्ध आवश्यक होता है। शोधन के लिए प्रयुक्तविभ्िान्न वििायों का चुनाव यौगिक की प्रकृति तथा उसमें उपस्िथत अशुियों के अनुसार किया जाता है। शोधन के लिए साधाारणतः निम्नलिख्िात वििायाँ उपयोग में लाइर् जाती हैंμ ;पद्ध ऊध्वर्पातन ;ैनइसपउंजपवदद्ध ;पपद्ध िस्टलन ;ब्तलेजंससपेंजपवदद्ध ;पपपद्ध आसवन ;क्पेजपससंजपवदद्ध ;पअद्ध विभेदी निष्कषर्ण ;क्पमिितमदजपंस म्गजतंबजपवदद्ध तथा ;अद्ध वणर्लेखन ;क्रोमेटोग्रापफी, ब्ीतवउवजवहतंचीलद्ध अंततः यौगिक का गलनांक अथवा क्वथनांक ज्ञात करके उसकी शु(ता की जाँच की जाती है। अिाकांश शु( यौगिकों का गलनांक या क्वथनांक सुस्पष्ट, अथार्त् तीक्ष्ण होता है। शु(ता की जाँच की नवीन वििायाँ विभ्िान्न प्रकार के वणर्लेखन तथा स्पेक्ट्रमिकी तकनीकों पर आधारित हैं। 12.8.1 ऊध्वर्पातन आपने पूवर् में सीखा है कि वुफछ ठोस पदाथर् गरम करने पर बिना द्रव अवस्था में आए, वाष्प में परिव£तत हो जाते हैं। उपरोक्तसि(ांत पर आधारित शोधन तकनीक को ‘ऊध्वर्पातन’ कहते हैं।इसका उपयोग ऊध्वर्पातनीय यौगिक का दूसरे विशु( यौगिकों;जो ऊध्वर्पातनीय नहीं होतेद्ध से पृथक् करने में होता है। 12.8.2 िस्टलन यह ठोस काबर्निक पदाथोर्ं के शोघन की प्रायः प्रयुक्त वििा है। यह वििा काबर्निक यौगिक तथा अशुि की किसी उपयुक्त विलायक में इनकी विलेयताओं में निहित अंतर पर आधाारित होती है। अशु( यौगिक को किसी ऐसे विलायक में घोलते हैं, जिसमें यौगिक सामान्य ताप पर अल्प - विलेय ;ैचंतपदहसल ैवसनइसमद्ध होता है, परंतु उच्चतर ताप पर यथेष्ट मात्रा में वह घुल जाता है। तत्पश्चात् विलयन को इतना सांदि्रत करते हैं कि वह लगभग संतृप्त ;ैंजनतंजमद्ध हो जाए। विलयन को ठंडा रसायन विज्ञान करने पर शु( पदाथर् िस्टलित हो जाता है, जिसे निस्यंदन द्वारा पृथक् कर लेते हैं। निस्यंद ;मात्रा द्रवद्ध में मुख्य रूप से अशुियाँ तथा यौगिक की अल्प मात्रा रह जाती है। यदि यौगिक किसी एक विलायक में अत्यिाक विलेय तथा किसी अन्य विलायक में अल्प विलेय होता है, तब िस्टलन उचित मात्रा में इन विलायकों की मिश्रण करके किया जाता है। सियित काष्ठ कोयले ;।बीतंजमक ब्ींतबवंसद्ध की सहायता से रंगीन अशुियाँं निकाली जाती हैं। यौगिक तथा अशुियों की विलेयताओं में कम अंतर होने की दशा में बार - बार िस्टलन द्वारा शु( यौगिक प्राप्त किया जाता है। 12.8.3 आसवन इस महत्त्वपूणर् वििा की सहायता से ;पद्ध वाष्पशील ;टवसंजपसमद्ध द्रवों को अवाष्पशील अशुियों एवं ;पपद्ध ऐसे द्रवों, जिनके क्वथनांकों में पयार्प्त अंतर हो, को पृथक् कर सकते हैं। भ्िान्न क्वथनांकों वाले द्रव भ्िान्न ताप पर वाष्िपत होते हैं। वाष्पों को ठंडा करने से प्राप्त द्रवों को अलग - अलग एकत्रा कर लेते हैं। क्लोरोपफामर् ;क्वथनांक 334ज्ञद्ध और ऐनिलीन ;क्वथनांक 457ज्ञद्ध को आसवन वििा द्वारा आसानी से पृथक् कर सकतेहैं ;चित्रा 12.5द्ध। द्रव - मिश्रण को गोल पेंदे वाले फ्रलास्क में लेकर हम सावधानीपूवर्क गरम करते हैं। उबालने पर कम चित्रा 12.5 साधारण आसवन। पदाथर् की वाष्प को संघनित कर द्रव के शंक्वाकार फ्रलास्क में एकत्रा किया जाता है। क्वथनांक वाले द्रव की वाष्प पहले बनती है। वाष्प को संघनित्रा की सहायता से संघनित करके प्राप्त द्रव को ग्राही में एकत्रा कर लेते हैं। उच्च क्वथनांक वाले घटक के वाष्प बाद में बनते हैं। इनमें संघनन से प्राप्त द्रव को दूसरे ग्राही में एकत्रा कर लेते हैं। प्रभाजी आसवन: दो द्रवों के क्वथनांकों में पयार्प्त अंतर न होने की दशा में उन्हें साधारण आसवन द्वारा पृथक् नहीं किया जा सकता। ऐसे द्रवों के वाष्प इसी ताप परास में बन जाते हैं तथा साथ - साथ संघनित हो जाते हैं। ऐसी दशा में प्रभाजी आसवन की तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस तकनीकमें गोल पेंदे वाले फ्रलास्क के मुख में लगे हुए प्रभाजी काॅलम से द्रव मिश्रण की वाष्प को प्रवाहित करते हैं ;चित्रा 12.6द्ध। उच्चतर क्वथनांक वाले द्रव के वाष्प निम्नतर क्वथनांक वाले द्रव के वाष्प की तुलना में पहले संघनित होती है। इसप्रकार प्रभाजी काॅलम में ऊपर उठने वाले वाष्प में अिाक वाष्पशील पदाथर् की मात्रा अिाक होती जाती है। प्रभाजी काॅलम के शीषर् तक पहुँचते - पहुँचते वाष्प में मुख्यतः अिाक वाष्पशील अवयव ही रह जाता है। विभ्िान्न डिशाइन एवं आकार के प्रभाजी काॅलम चित्रा 12.7 में दिखाए गए हैं। प्रभाजी काॅलम ऊपर उठती वाष्प तथा नीचे गिरते द्रव के बीच ऊष्मा - विनिमय के लिए कइर् पृष्ठ ;ैनतंिबमद्ध उपलब्ध कराता है। प्रभाजीकाॅलम में संघनित द्रव ऊपर उठती वाष्प से ऊष्मा लेकर पुनः वाष्िपत हो जाता है। इस प्रकार वाष्प में कम क्वथनांक वाले द्रव की मात्रा बढ़ती जाती है। इस तरह की क्रमिक आसवन श्रेणी के उपरांत निम्नतर क्वथनांक वाले अवयव के शु( वाष्प काॅलम के शीषर् पर पहुँचते हैं। संघनित्रा में संघनित होकर यह शु( द्रव के रूप में ग्राही में एकत्रा कर ली जाती है। क्रमिकआसवन श्रेणी के उपरांत आसवन फ्रलास्क के शेष द्रव में उच्चतर क्वथनांक वाले द्रव की मात्रा बढ़ती जाती है। प्रत्येक क्रमिक संघनन तथा वाष्पन को सै(ांतिक प्लेट ;ज्ीमवतमजपबंस च्संजमद्ध कहते हैं। व्यापारिक स्तर पर उपयोग के लिए सैकड़ों प्लेटों वाले काॅलम उपलब्ध हैं। प्रभाजी आसवन का एक तकनीकी उपयोग पेट्रोलियम उद्योग में कच्चे तेल के विभ्िान्न प्रभाजों को पृथव्फ करने में किया जाता है। निम्न दाब पर आसवन: यह वििा उन द्रवों के शोधन के लिए प्रयुक्त की जाती है, जिनके क्वथनांक अति उच्च होते हैं चित्रा 12.6 प्रभाजी आसवन निम्न क्वथन प्रभाज की वाष्प काॅलम के शीषर् तक पहले चित्रा 12.7 विभ्िान्न प्रकार के प्रभाजी काॅलमपहुँचती है। तत्पश्चात् उच्च क्वथन की वाष्प पहुँचती है। अथवा जो अपने क्वथनांक या उनसे भी कम ताप पर अपघटित हो जाते हैं। ऐसे द्रवों के पृष्ठ पर दाब कम करके उनके क्वथनांक से कम ताप पर उबाला जाता है। कोइर् भी द्रव उस ताप पर उबलता है, जिसपर उसका वाष्प दाब बाह्य दाब के समान होता है। दाब कम करने के लिए जल पंप अथवा निवार्त पंप का उपयोग किया जाता है ;चित्रा 12.8द्ध। साबुन उद्योग में युक्त शेष लाइर् ;ैचमदज स्लमद्ध से ग्िलसराॅल पृथव्फ करने के लिए इस वििा का उपयोग किया जाता है। भाप आसवन: यह तकनीक उन पदाथोर्ं के शोधन के लिए प्रयुक्त की जाती है, जो भाप वाष्पशील हांे, परंतु जल मेंअमिश्रणीय हों। भाप आसवन में अशु( द्रव को फ्रलास्क में गरम करते हुए इसमें भाप प्रवाहित की जाती है। भाप तथा वाष्पशील द्रव का मिश्रण संघनित कर एकत्रा कर लिया जाता है। तत्पश्चात् द्रव तथा जल को पृथक्कारी कीप द्वारा पृथव्फ कर लेते हैं। भाप आसवन में काबर्निक द्रव ;च1द्ध तथा जल ;च2द्ध के वाष्प दाब का योग वायुमंडलीय दाब ;चद्ध के समान होने पर द्रव उबलता है, अथार्त् च त्र च ़ च। चूँकि चका मान चसे कम है, अतः द्रव121अपने क्वथनांक की अपेक्षा निम्नतर ताप पर ही वाष्िपत हो जाता है। इस प्रकार जल तथा उसमें अविलेय पदाथर् का मिश्रण 373ज्ञ के पास उससे निम्न ताप पर ही उबल जाता है। प्राप्त होने वाले पदाथर् तथा जल के मिश्रण को पृथक्कारी कीप की सहायता से अलग कर लेते हैं। ऐनिलीन को इस वििा की सहायता से ऐनिलीन जल के मिश्रण में से पृथव्फ किया जाता है ;चित्रा 12.9द्ध। 12.8.4 विभेदी निष्कषर्ण इस वििा की सहायता से काबर्निक यौगिक को उसके जलीय विलयन में से ऐसे काबर्निक विलायक द्वारा निष्क£षत किया जाता है, जिसमें काबर्निक यौगिक की विलेयता जल की अपेक्षा अिाक होती है। जलीय विलयन तथा काबर्निक विलायक अमिश्रणीय होने चाहिए, ताकि वे दो परत बना सवेंफ, जिन्हें पृथक्कारी कीप द्वारा पृथव्फ किया जा सके। तत्पश्चात् यौगिक के विलयन में से काबर्निक विलायक को आसवन द्वारा दूर करके शु( यौगिक प्राप्त कर लिया जाता है। विभेदी निष्कषर्ण एक पृथक्कारी कीप में किया जाता है, जैसा चित्रा 12.10 में दशार्या गया है। काबर्निक विलायक में यौगिक की विलेयता अल्प होने की दशा में इस वििा में विलायक की कापफी मात्राकी आवश्यकता पड़ेगी। इस दशा में एक परिष्कृत तकनीक का उपयोग हम करते हैं, जिसे सतत निष्कषर्ण ;ब्वदजपदवने रसायन विज्ञान म्गजतंबजपवदद्धकहते हैंै। इस तकनीक से उसी विलायक का उपयोग बार - बार होता है। 12.8.5 वणर्लेखन ;क्रोमेटोगै्रपफीद्ध ‘वणर्लेखन’ ;क्रोमेटोग्रैपफीद्ध शोधन की एक अत्यंत महत्त्वपूणर् तकनीक है, जिसका उपयोग यौगिकों का शोधन करने में, किसी मिश्रण के अवयवों को पृथव्फ करने तथा यौगिकों की शु(ता की जाँच करने के लिए विस्तृत रूप से किया जाता है। क्रोमेटोग्रैपफी वििा का उपयोग सवर्प्रथम पादपों में पाए जाने वाले रंगीन पदाथो± को पृथव्फ करने के लिए किया गया था। ‘क्रोमेटोग्रैपफी’ शब्द ग्रीक शब्द ‘क्रोमा’ ;ब्ीतवउंद्ध से बना है, जिसका अथर् है ‘रंग’। इस तकनीक में सवर्प्रथम यौगिकों के मिश्रण को स्िथर प्रावस्था ;ैजंजपवदंतल च्ींेमद्ध पर अिाशोष्िात कर दिया जाता है। स्िथर प्रावस्था ठोस अथवा द्रव हो सकती है। इसके पश्चात् स्िथर प्रावस्था में से उपयुक्त विलायक, विलायकों के मिश्रण अथवा गैस को धीरे - धीरे प्रवाहित किया जाता है। इस प्रकार मिश्रण के अवयव क्रमशः एक - दूसरे से पृथव्फ हो जाते हैं। गति करनेवाली प्रावस्था को ‘गतिशील प्रावस्था’ ;डवइपसम च्ींेमद्ध कहते हैं। अंतगर््रस्त सि(ांतों के आधार पर वणर्लेखन को विभ्िान्नवगो± में वगीर्कृत किया गया है। इनमें से दो हैंμ ;कद्ध अिाशोषण - वणर्लेखन ;।केवतचजपवद ब्ीतवउंजवहतंचीलद्ध ;खद्ध वितरण - वणर्लेखन ;च्ंतजपजपवद ब्ीतवउंजवहतंचीलद्ध चित्रा 12.10 विभेदी निष्कषर्ण। अवयवों का पृथक्करण विलेयता में अंतर पर आधाारित होता है। चित्रा 12.8 कम दाब पर आसवन। निम्न दाब पर द्रव अपने क्वथनांक की अपेक्षा निम्न ताप पर उबलने लगता है। चित्रा 12.9 भाप आसवन। भाप वाष्पशील अवयव वाष्पीकृत होकर संघनित्रा में संघनित होता हैै। तब द्रव को शंक्वाकार फ्रलास्क में एकत्रा कर लिया जाता है। ;कद्ध अिाशोषण - वणर्लेखन: यह इस सि(ांत पर आधारित है कि किसी विश्िाष्ट अिाशोषक ;।केवतइमदजद्ध पर विभ्िान्न यौगिक भ्िान्न अंशों में अिाशोष्िात होते हैं। साधारणतः ऐलुमिना तथा सिलिका जेल अिाशोषक के रूप में प्रयुक्त किए जाते हैं। स्िथर प्रावस्था ;अिाशोषकद्ध पर गतिशील प्रावस्था प्रवाहित करने के उपरांत मिश्रण के अवयव स्िथर प्रावस्था पर अलग - अलग दूरी तय करते हैं। निम्नलिख्िात दो प्रकार की वणर्लेखन - तकनीवेंफ हैं, जो विभेदी - अिाशोषण सि(ांत पर आधारित हैंμ ;कद्ध काॅलम - वणर्लेखन, अथार्त् स्तंभ - वणर्लेखन ;ब्वसनउद ब्ीतवउंजवहतंचीलद्ध ;खद्ध पतली परत वणर्लेखन ;ज्ीपद स्ंलमत ब्ीतवउंजव हतंचीलद्ध काॅलम वणर्लेखन: इस तकनीक में काँच की एक लंबी नली में अिाशोषक ;स्िथर प्रावस्थाद्ध भरा जाता है। नली के निचले सिरे पर रोधनी लगी रहती है ;चित्रा 12.11द्ध। यौगिक के मिश्रण को उपयुक्त विलायक की न्यूनतम मात्रा में घोलकरकाॅलम के ऊपरी भाग में अिाशोष्िात कर देते हैं। तत्पश्चात् एक उपयुक्त निक्षालक ;जो द्रव या द्रवों का मिश्रण होता हैद्ध को काॅलम में धीमी गति से नीचे की ओर बहने दिया जाता है। विभ्िान्न यौगिकों के अिाशोषण की मात्रा के आधार पर उनका आंश्िाक या पूणर् पृथक्करण हो जाता है। अिाक अिाशोष्िात यौगिक काॅलम के ऊपर अिाक सरलता से अिाशेष रह जाते हैं, जबकि अन्य यौगिक काॅलम में विभ्िान्न दूरियों तक नीचे आ जाते हैं ;चित्रा 12.11द्ध। रसायन विज्ञान पतली परत वणर्लेखन: पतली परत वणर्लेखन ;थ्िान लेयर क्रोमेटोग्रैपफी, टी.एल.सी.द्ध एक अन्य प्रकार का अिाशोषण वणर्लेखन है। इसमें एक अिाशोषक की पतली परत पर मिश्रण के अवयवों का पृथक्करण होता है। इस तकनीक में काँच की उपयुक्त आमाप की प्लेट पर अिाशोषक ;सिलिका जेल या ऐलुमिनाद्ध की पतली ;लगभग 0ण्2 उउ कीद्ध परत पफैला दी जाती है। इसे ‘पतली परत क्रोमेटोग्रैपफी प्लेट’ कहते हैं। मिश्रण के विलयन का छोटा - सा ¯बदु प्लेट के एक सिरे से लगभग 2 बउ ऊपर लगाते हैं। प्लेट को अब वुफछ ऊँचाइर् तक विलायक से भरे एक बंद जार में खड़ा कर देते हैं। जिसे चित्रा 12.12 ;कद्ध। निक्षालक जैसे - जैसे प्लेट पर आगे बढ़ता है, वैसे - वैसे मिश्रण के अवयव भी निक्षालक के साथ - साथ प्लेट पर आगे बढ़ते हैं, परंतु अिाशोषण की तीव्रता के आधार परऊपर बढ़ने की उनकी गति भ्िान्न होती है। इस कारण वे पृथव्फ हो जाते हैं। विभ्िान्न यौगिकों के सापेक्ष अिाशोषण को मन्दन - गुणक ;त्मजंतकंजपवद थ्ंबजवतद्धए अथार्त् त् मान द्वारािप्रद£शत किया जाता है ;12.12 खद्ध। आधर - रेखा स े यागिक के बढने की दूरी ;द्धै़ग त् ित्र आधर - रखा से विलायक अगां;द्धे ्रत की दरूी ल चित्रा 12.12 ;कद्ध थ्िान लेयर क्रोमेटोग्रैपफी में क्रोमेटोग्राम का विकसित होना। चित्रा 12.11 काॅलम क्रोमेटोग्रैपफी। किसी मिश्रण के अवयवों के पृथक्करण की विभ्िान्न स्िथतियाँ। चित्रा 12.12 ;खद्ध विकसित क्रोमेटोग्राम रंगीन यौगिकों के ¯बदुओं को प्लेट पर बिना किसी कठिनाइर् के देखा जा सकता है। परंतु रंगहीन एवं पराबैगंनी प्रकाश में प्रतिदीप्त ;थ्सनवतमेबमद्ध होने वाले यौगिकों के ¯बदुओं को प्लेट पर पराबैगनी प्रकाश के नीचे रखकर देखा जा सकता है। एक अन्य तकनीक में जार में वुफछ आयोडीन के िस्टल रखकर भी रंगहीन ¯बदुओं को देखा जा सकता है। जो यौगिक आयोडीन अवशोष्िात करते हैं, उनके ¯बदु भूरे दिखाइर् देने लगते हैं। कभी - कभी उपयुक्त अभ्िाकमर्क के विलयन को प्लेट पर छिड़ककर भी ¯बदुओं को देखा जाता है। जैसेμऐमीनो अम्लों के ¯बदुओं को प्लेट पर निनहाइडिªन विलयन छिड़ककर देखते हैं। वितरण क्रोमेटोग्रैपफी: वितरण क्रोमेटोग्रैपफी स्िथर तथा गतिशील प्रावस्थाओं के मध्य मिश्रण के अवयवों के सतत विभेदी वितरण पर आधारित है। कागश वणर्लेखन ;च्ंचमत ब्ीतवउंजवहतंचीलद्ध इसका एक उदाहरण है। इसमें एक विश्िाष्ट प्रकार का क्रोमेटोग्रैपफी कागश का इस्तेमाल किया जाता है। इस कागश के छिद्रों में जल - अणु पाश्िात रहते हैं, जो स्िथर प्रावस्था का कायर् करते हैं। क्रोमेटोग्रैपफी कागश की एक पट्टी ;ैजतपचद्ध के आधार पर मिश्रण का ¯बदु लगाकर उसे जार में लटका देते हैं ;चित्रा12.13द्ध। जार में वुफछ ऊँचाइर् तक उपयुक्त विलायक अथवा विलायकों का मिश्रण भरा होता है, जो गतिशील प्रावस्था का कायर् करता है। केश्िाका िया के कारण पेपर की पट्टी परविलायक ऊपर की ओर बढ़ता है तथा ¯बदु पर प्रवाहित होता है। विभ्िान्न यौगिकों का दो प्रावस्थाओं में वितरण भ्िान्न - भ्िान्न होने के कारण वे अलग - अलग दूरियों तक आगे बढ़ते हैं। इस प्रकार विकसित पट्टी को ‘क्रोमेटोग्राम’ ;ब्ीतवउंजवहतंउद्ध कहते हैं। पतली परत की भाँति पेपर की पट्टी पर विभ्िान्न ¯बदुओं की स्िथतियों को या तो पराबैगनी प्रकाश के नीचे रखकर या उपयुक्त अभ्िाकमर्क के विलयन को छिड़ककर हम देख लेते हैं। 12.9 काबर्निक यौगिकों का गुणात्मक विश्लेषण काबर्निक यौगिकों में काबर्न तथा हाइड्रोजन उपस्िथत रहते हैं। इनके अतिरिक्त इनमें आॅक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्पफर, हैलोजेन तथा पफाॅस्पफोरस भी उपस्िथत हो सकते हैं। 12.9.1 काबर्न तथा हाइड्रोजन की पहचान इसके लिए यौगिक को काॅपर ;प्प्द्ध आॅक्साइड के साथ गरम किया जाता है। यौगिक में उपस्िथत काबर्न तथा हाइड्रोजन क्रमशः काबर्न डाइआॅक्साइड ;जो चूने के पानी को दूिाया कर देती हैद्ध तथा जल ;जो निजर्ल काॅपर सल्पेफट को नीला कर देता हैद्ध में परिव£तत हो जाते हैं। ब् ़⎯⎯2ब्न ़ब्व् 22ब्नव् Δ→2भ् ब्नव् ⎯ब्न ़2़⎯Δ→भ्व् ब्व् ब्ं;व्भ्द्ध ब्ंब्व् भ् व् ़→़ 2232 5भ्व् ब्नैव् ब्नैव् 5भ्व् ़→⋅ 2442 श्वेत नीला 12.9.2 अन्य तत्त्वों की पहचान किसी काबर्निक यौगिक में उपस्िथत नाइट्रोजन, सल्पफर, हैलोजेन तथा पफाॅस्प.फोरस की पहचान ‘लैसें - परीक्षण’ ;स्ंेेंपहदमश्े ज्मेजद्ध द्वारा की जाती है। यौगिक को सोडियम धातु के साथ संगलित करने पर ये तत्त्व सहसंयोजी रूप से चित्रा 12.13 कागश क्रोमेटोग्रैपफी। दो भ्िान्न आकृतियों का क्रोमेटोग्रैपफी पेपर। आयनिक रूप में परिव£तत हो जाते हैं। इनमें निम्नलिख्िात अभ्िाियाएँ होती हैंμ Δछं ़ ब् ़ छ ⎯⎯→ छंब्छ Δ2छं ़ ै ⎯⎯→ छं ै 2 Δछं ़ ग् ⎯⎯→ छंग् ;ग् त्र ब्सए ठत अथवा प्द्ध ब्ए छए ै तथा ग् काबर्निक यौगिक में उपस्िथत तत्त्व हैं। सोडियम संगलन से प्राप्त अवशेष को आसुत जल के साथ उबालने पर सोडियम सायनाइड सल्पफाइड तथा हैलाइड जल में घुल जाते हैं। इस निष्कषर् को ‘सोडियम संगलन निष्कषर्’ ;ैवकपनउ थ्नेपवद म्गजतंबजद्ध कहते हैं। ;कद्ध नाइट्रोजन का परीक्षण सोडियम संगलन निष्कषर् को आयरन ;प्प्द्ध सल्पेफट के साथ उबालकर विलयन को सल्फ्रयूरिक अम्ल द्वारा अम्लीकृत किया जाता है। प्रश्िायन ब्लू ;च्तनेेपंद ठसनमद्ध रंग का बनना नाइट्रोजन की उपस्िथति निश्िचत करता है। सोडियम सायनाइड आयरन ;प्प्द्ध सल्पेफट के साथ अभ्िािया करके सोडियम हैक्सासायनोपफैरेट ;प्प्द्ध बनाता है। सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ गरम करने पर वुफछ आयरन ;प्प्द्ध आयरन ;प्प्प्द्ध में आॅक्सीकृत हो जाता है। यह सोडियम हैक्सासायनोपेफरेट ;प्प्द्ध के साथ अभ्िािया करके आयरन ;प्प्प्द्ध हैक्सासायनोपैफरेट ;प्प्द्ध ;पेफरिपेफरोसायनाइडद्ध बनाता है, जिसका रंग प्रश्िायन ब्लू होता है। − 2़ 4−6ब्छ ़ थ्म → ख्थ्म ;ब्छद्ध , 6 3़3 थ्म;ब्छद्ध ख्,4−़ 4थ्म ⎯⎯→ थ्म ख्थ्म ;ब्छद्ध ,6 46 3 प्रश्िायन ब्लू ;खद्ध सल्पफर का परीक्षण ;पद्ध सोडियम संगलन निष्कषर् को ऐसीटिक अम्ल द्वाराअम्लीकृत कर लैड ऐसीटेट मिलाने पर यदि लैड सल्पफाइड का काला अवक्षेप बने, तो सल्पफर की उपस्िथति की पुष्िट होती है। 2− 2़ै ़ च्इ → च्इै काला ;पपद्ध सोडियम संगलन निष्कषर् को सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड केसाथ अभ्िाकृत करने पर बैगनी रंग का बनना भी सल्पफर की उपस्िथति को दशार्ता है। 2− 4−ै2−़ थ्म;ब्छद्धछव् →थ्म;ब्छद्धछव्ै ख् ,ख् 5 ,5 बैगनी रसायन विज्ञान काबर्निक यौगिक में नाइट्रोजन तथा सल्पफर μ दोनों ही जब उपस्िथत हांे, तब सोडियम थायोसायनेट बनता है, जो आयरन ;प्प्द्ध सल्पेफट के साथ गरम करने पर रक्त की भाँति लाल रंग उत्पन्न करता है। मुक्त सायनाइट आयनों की अनुपस्िथति होने के कारण प्रश्िायन ब्लू रंग नहीं बनता है। छं ़ ब् ़ छ ़ ै → छंैब्छ ,2़थ्म3़़ 3ब्छ − →ख्थ्म;ैब्छद्ध रक्त की भाँति लाल यदि सोडियम की अिाक मात्रा को सोडियम संगलन में लिया जाता है, तो सायनाइड तथा सल्पफाइड आयनों में थायोसायनेट अपघटित हो जाता है। ये आयन अपने सामान्य परीक्षण देते हैं। छंैब्छ ़ 2छं → छंब्छ ़ छं ै 2 ;गद्ध हैलोजनों का परीक्षण सोडियम संगलन निष्कषर् को नाइटिªक अम्ल द्वारा अम्लीकृत कर उसमें सिल्वर नाइट्रेट मिलाया जाता है। तब अमोनियम हाइड्राॅक्साइड में विलेय श्वेत अवक्षेप क्लोरीन की उपस्िथति को, अमोनियम हाइड्राॅक्साइड में अल्प - विलेय पीले अवक्षेप ब्रोमीन की उपस्िथति को तथा अमोनियम हाइड्राॅक्साइड में अविलेय पीले अवक्षेप आयोडीन की उपस्िथति को दशार्ता है। ग्दृ ़ ।ह़ → ।हग् ख्ग् त्र ब्सए ठत या प्, यौगिक में नाइट्रोजन अथवा सल्पफर की उपस्िथति होने की स्िथति में उपयर्ुक्त परीक्षण के पूवर् सोडियम संगलन निष्कषर् को नाइटिªक अम्ल के साथ उबाला जाता है, ताकि सायनाइड अथवा सल्पफाइड विघटित हो जाएं, अन्यथा ये आयन हैलोजनों के सिल्वर नाइट्रेट परीक्षण में बाधा उत्पन्न करते हैं। ;घद्ध प.फाॅस्पफोरस का परीक्षण आॅक्सीकारक ;सोडियम पराॅक्साइडद्ध के साथ गरम करने पर यौगिक में उपस्िथत प.फाॅस्पफोरस, पफाॅस्पेफट में परिव£तत हो जाता़है। विलयन को नाइटिªक अम्ल के साथ उबालकर अमोनियम माॅलिब्डेट मिलाने पर पीला रंग अथवा अवक्षेप बनता है, जो प.फाॅस्पफोरस की उपस्िथति को निश्िचत करता है। छंच्व् ़ 3भ्छव्→ भ्च्व् ़ 3छंछव्343343 भ्च्व् ़ 12;छभ्द्ध डवव् ़ 2भ्छव्→344243 अमोनियम माॅलिब्डेट डाइआॅक्साइड पोटैश्िायम हाइड्राॅक्साइड द्वारा अवशोष्िात हो जाती है। नाइट्रोजन अंशांकित नली ;ळतंकनंजमक ज्नइमद्ध के ऊपरी भाग में एकत्रा हो जाती है ;चित्रा 12.15द्ध। माना कि काबर्निक यौगिक का द्रव्यमान त्र उ ह एक नाइट्रोजन का आयतन त्र ट1उस् कक्ष का ताप त्र ज् ज्ञ1मानक ताप तथा दाब ;ैज्च्द्ध पर नाइट्रोजन का आयतन च्ट × 273 त्र 11 760 × ज्1 ;माना कि इसका मान ट उस् हैद्ध च्1 तथा ट1 क्रमशः नाइट्रोजन के दाब तथा आयतन हैं। च्1 दाब, जिसपर नाइट्रोजन एकत्रा की गइर् है, वायुमंडलीय दाब से भ्िान्न है। च् का मान इस संबंध द्वारा प्राप्त किया जाता हैμ1च्त्र वायुमंडलीय दाब - जलीय तनाव1 ैज्च् पर 22400 उस् छ का द्रव्यमान 28ह है228 × टअतः ैज्च् पर ट उस् छ का द्रव्यमान त्र ह222400 28 × ट × 100 नाइट्रे न की प्रत्राजतिशतता 22400 × उ उदाहरण 12.21 नाइट्रोजन अणुमापन की ड्यूमा वििा में 0ण्3 ह काबर्निक यौगिक 300ज्ञ ताप तथा 715 उउ दाब पर 50 उस् नाइट्रोजन देता है। यौगिक में नाइट्रोजन के प्रतिशत की गणना कीजिए ;300 ज्ञ ताप पर जलीय तनाव त्र 15 उउद्ध। हल 300 ज्ञ ताप तथा 715 उउ पर एकत्रा नाइट्रोजन का आयतन त्र 50 उस् वास्तविक दाब त्र 715 दृ 15 त्र 700 उउ 273 × 700 × 50 ैज्च् पर नाइट्रोजन का आयतन त्र 300 × 760 त्र 41ण्9 उस् 22400 उस् नाइट्रोजन का ैज्च् पर भार त्र 28 ह अतः 41ण्9 उस् का नाइट्रोजन का ैज्च् पर द्रव्यमान 28 × 41ण्9 त्रह22400 नाइट्रोजन की प्रतिशतता 28 × 41ण्9 × 100 त्रत्र 17ण्46ः 22400 × 0ण्3 चित्रा 12.15 ड्यूमा वििा। काबर्निक यौगिक को ब्व्2 गैस की उपस्िथति में ब्न;प्प्द्ध आॅक्साइड के साथ गरम करने पर नाइट्रोजन गैस उत्पन्न होती है। गैसों के मिश्रण को पोटैश्िायम हाइड्राॅक्साइड विलयन में से प्रवाहित किया जाता है, जहाँ ब्व्2 अवशोष्िात हो जाती है तथा नाइट्रोजन का आयतन माप लिया जाता है। ;पपद्ध वैफल्डाॅल वििा: इस वििा में नाइट्रोजनयुक्त यौगिकको सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ गरम किया जाता है। पफलस्वरूप यौगिक की नाइट्रोजन, अमोनियम सल्पेफट में परिव£तत हो जाती है। तब प्राप्त अम्लीय मिश्रण को सोडियम हाइड्राॅक्साइड के आिाक्य के साथ गरम करने पर अमोनिया मुक्त होती है,जिसे मानक सल्फ्रयूरिक अम्ल विलयन के ज्ञात आयतन मेंअवशोष्िात कर लिया जाता है। तत्पश्चात् अवश्िाष्ट सल्फ्रयूरिक अम्ल को क्षार के मानक विलयन द्वारा अनुमापित कर लिया जाता है। अम्ल की आरंभ्िाक मात्रा और अभ्िािया के बाद शेषमात्रा के बीच अंतर से अमोनिया के साथ अभ्िाकृत अम्ल की मात्रा प्राप्त होती है। काबर्निक यौगिक ़ भ्2ैव्4 ⎯→ ;छभ्4द्ध2ैव्4 2छंव्भ् ⎯⎯⎯⎯⎯→छं ैव् ़ 2छभ् ़ 2भ् व् 24 32 2छभ् ़ भ् ैव् → ;छभ् द्धैव् 3 24 424 माना कि काबर्निक यौगिक का द्रव्यमान त्र उ ह ड मोलरतावाले भ्2ैव्4 का लिया गया आयतन त्र ट उस् अवश्िाष्ट भ्2ैव्4 के अनुमापन हेतु प्रयुक्त ड मोलरता के छंव्भ् का आयतन त्र ट1 उस् ड मोलरता का ट1उस् छंव्भ् त्र ड मोलरता का ट1ध्2उस् भ्2ैव्4 353 ड मोलरता का ;ट दृ ट1ध्2द्धउस् भ्2ैव्4 त्र ड मोलरता का 2;ट दृ ट1ध्ट2द्ध छभ्3 विलयन 1ड छभ्3 विलयन के 1000 उस् में उपस्िथत छभ्3 त्र 17 ह या 14ह नाइट्रोजन 1ड छभ्3 विलयन का 2;ट दृ ट1ध्2द्ध उस् त्र 14 × ड × 2 ;ट − 1ट ध्2द्ध ह नाइट्रोजन1000 14 × ड × 2 ;ट − ट ध्2द्ध 100नाइट्रोजन की प्रतिशतता त्र 1 × 1000 उ 1ण्4 × ड × 2 ;ट − ट ध्2द्ध त्र 1 उ नाइट्रोजनयुक्त नाइट्रो तथा ऐशो समूह और वलय में उपस्िथत नाइट्रोजन ;उदाहरणाथर्μपिरिडीनद्ध में वैफल्डाॅल वििा लागू नहीं होती, क्योंकि इन परिस्िथतियों में ये यौगिक नाइट्रोजनको अमोनियम सल्फ्रेट में परिव£तत नहीं कर सकते हैं। उदाहरण 12.22 नाइट्रोजन आकलन की वैफल्डाॅल वििा में 0ण्5 ह यौगिक में मुक्त अमोनिया 10 उस् 1 ड भ्2ैव्4 को उदासीन करती है। यौगिक में नाइट्रोजन की प्रतिशतता ज्ञात करें। चित्रा 12.16 वैफल्डाॅल वििा - नाइट्रोजनयुक्त यौगिक को सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ गरम करने पर अमोनियम सल्पेफट बनता है, जो छंव्भ् द्वारा अभ्िाकृत करने पर अमोनिया मुक्त करता है। इसेे मानक अम्ल के ज्ञात आयतन में अवशोष्िात किया जाता है। हल 1ड 10 उस् भ्2ैव्4 ≡ 1ड 20 उस् छभ्3 1000 उस् 1ड अमोनिया में उपस्िथत नाइट्रोजन त्र 14ह अतः 20 उस् 1ड अमोनिया में उपस्िथत नाइट्रोजन 14 × 20 त्र नाइट्रोजन1000 अतः नाइट्रोजन की प्रतिशतता 14 × 20 × 100 त्रत्र 56ण्0ः 1000 × 0ण्5 12.10.3 हैलोजन वैफरिअस वििा: काबर्निक यौगिक की निश्िचत मात्रा को वैफरिअस नली ;कठोर काँच की नलीद्ध में लेकर सिल्वर नाइट्रेट की उपस्िथति में सधूम नाइटिªक अम्ल के साथ भट्ठी में गरम किया जाता है ;चित्रा 12.17द्ध। यौगिक में उपस्िथत काबर्न तथा हाइड्रोजन इन परिस्िथतियों में क्रमशः काबर्नडाइआॅक्साइड तथा जल में आॅक्सीकृत हो जाते हैं, जबकि हैलोजन संगत सिल्वर हैलाइड ;।हग्द्ध में परिव£तत हो जाता है। चित्रा 12.17 केरीयस विध्ि - हैलोजनयुक्त काबर्निक यौगिक को सिल्वर नाइट्रेट की उपस्िथति में सध्ूम नाइटिªक अम्ल के साथ गरम किया जाता है। अवक्षेप को छानकर सुखाने के बाद तोल लिया जाता है। माना कि यौगिक का द्रव्यमान त्र उ ह प्राप्त ।हग् का द्रव्यमान त्र उ1 ह 1 मोल ।हग् में 1 मोल ग् की मात्रा उपलब्ध है। उह ।हग् में हैलोजन का द्रव्यमान1 ग् का परमाण्िवक दव््रयमान ×उह1 त्र ।हग् का आण्िवक दव््रयमान हैलोजन का प्रतिशत ग् का परमाण्िवक द्रव्यमान ×उ1 × 100 त्र ।हग् का आण्िवक द्र×व्यमान उ उदाहरण 12.23 हैलोजन के आकलन की वैफरिअस वििा में 0ण्15 ह काबर्निक यौगिक 0ण्12 ह ।हठत देता है। यौगिक में ब्रोमीन की प्रतिशत ज्ञात कीजिए। हल ।हठत का आण्िवक द्र्रव्यमान त्र 108 ़ 80 त्र 188 ह उवसदृ1 188 ह ।हठत में उपस्िथत ब्रोमीन त्र 80 ह 80 × 0ण्12 0ण्12 ह ।हठत में उपस्िथत ब्रोमीन त्र 188 ह 80 × 0ण्12 ×100ब्रोमीन का प्रतिशत त्र त्र 42ण्55ः 188 × 0ण्15 12.10.4 सल्पफर वैफरिअस नली में काबर्निक यौगिक की ज्ञात मात्रा को सधूम नाइटिªक अम्ल अथवा सोडियम पराॅक्साइड के साथ गरम करनेपर सल्फ्रयूरिक अम्ल में सल्पफर आॅक्सीकृत हो जाता है, जिसे बेरियम क्लोराइड के जलीय विलयन का आिाक्य मिलाकर हम बेरियम सल्पेफट के रूप में अवक्षेपित कर लेते हैं। अवक्षेप को छानने, धोने और सुखाने के पश्चात् तौल लेते हैं। बेरियम सल्पेफट के द्रव्यमान से सल्पफर की प्रतिशतता ज्ञात की जा सकती है। माना कि लिये गए काबर्निक यौगिक का द्रव्यमान त्र उ ह अतः बेरियम सल्पेफट का द्रव्यमान त्र उह1 1 मोल ठंैव् त्र 233 ह ठंैव्त्र 32 ह सल्पफर44 32 × उ हठंैव्उह में सल्पफर की मात्रा त्र1 4 1 233 32 ×उ1 ×100सल्पफर का प्रतिशत त्र 233 ×उ उदाहरण 12.24 सल्पफर आकलन में 0ण्157 ह काबर्निक यौगिक से 0ण्4813 ह बेरियम सल्पेफट प्राप्त हुआ। यौगिक में सल्पफर का प्रतिशत क्या है? हल ठंैव्4 का आण्िवक द्रव्यमान त्र137 ़ 32 ़ 64 त्र 233ह 233ह ठंैव्4 में उपस्िथत सल्पफर त्र 32ह 0ण्4813ह ठंैव्4 में उपस्िथत सल्पफर 32 × 0ण्4813 त्र ह233 32 × 0ण्4813 ×100सल्पफर का प्रतिशत त्र 233 × 0ण्157 त्र 42ण्10ः 12.10.5 प़्ाफाॅस्प़्ाफोरस काबर्निक यौगिक की एक ज्ञात मात्रा को सधूम नाइटिªक अम्ल के साथ गरम करने पर उसमें उपस्िथत प.फाॅस्प.फोरस, प.फाॅस्पफोरिक़ अम्ल में आॅक्सीकृत हो जाता है। इसे अमोनिया तथा अमोनियम माॅलिब्डेट मिलाकर अमोनियम पफाॅस्प़ेफटोमाॅलिब्डेट, ;छभ्द्धच्व्⋅12डवव् के रूप में हम अवक्षेपित कर लेते हैं,4343अन्यथा प़फाॅस्प़फोरिक अम्ल में मेग्नेसिया मिश्रण मिलाकर डहछभ्च्व् के रूप में अवक्षेपित किया जा सकता है,44जिसके ज्वलन से डहच्व् प्राप्त होता है।227माना कि काबर्निक यौगिक का द्रव्यमान त्र उ ह और अमोनियम पफाॅस्प़फोमाॅलिब्डेट त्र उह1 ;छभ्द्ध च्व्⋅12 डवव्का मोलर द्रव्यमानत्र 1877 ह है।4343 31 × उ1 ×100पफाॅस्पफोरस का प्रतिशत त्र: 1877 × उ यदि पफाॅस्पफोरस का डहच्व् के रूप में आकलन2 2762 × उ ×100 किया जाए तो, पफाॅस्पफोरस का प्रतिशत त्र 1ः 222 × उ जहाँ डहच्व् का मोलर द्रव्यमान 222 न, लिये गए227काबर्निक पदाथर् का द्रव्यमान उए बने हुए डहच्व् का227द्रव्यमान उ1 तथा डह2च्2व्7 यौगिक में उपस्िथत दो प.फॅास्पफोरस परमाणुओं का द्रव्यमान 62 है। 355 12.10.6 आॅक्सीजन काबर्निक यौगिक में आॅक्सीजन की प्रतिशतता की गणना वुफल प्रतिशतता ;100द्ध में से अन्य तत्त्वों की प्रतिशतताओं के योग को घटाकर की जाती है। आॅक्सीजन का प्रत्यक्ष आकलन निम्नलिख्िात वििा से भी किया जा सकता हैμ काबर्निक यौगिक की एक निश्िचत मात्रा नाइट्रोजन गैस के प्रवाह में गरम करके अपघटित की जाती हैं। आॅक्सीजन सहित उत्पन्न गैसीय मिश्रण को रक्त - तप्त कोक ;ब्वामद्ध पर प्रवाहित करने पर पूरी आॅक्सीजन काबर्न मोनोआॅक्साइड मेंपरिव£तत हो जाती है। तत्पश्चात् गैसीय मिश्रण को ऊष्ण आयोडीन पेन्टाआॅक्साइड ;प्व्द्ध में प्रवाहित करने पर काबर्न25मोनोआॅक्साइड काबर्न डाइआॅक्साइड में आॅक्सीकृत हो जाती है और आयोडीन भी उत्पन्न होती है। ऊष्मायौगिक ⎯⎯⎯→व्2 ़ अन्य गैसीय उत्पाद 1373ज्ञ2ब् ़ व् ⎯⎯⎯⎯→2ब्व् , × 5 ;कद्ध 2 प्व् ़ 5ब्व् → प् ़ 5ब्व् , × 2 ;खद्ध 25 22 समीकरण ;कद्ध एवं ;खद्ध को क्रमशः 5 एवं 2 से गुणा करके समीकरण ;कद्ध में उत्पन्न ब्व् की मात्रा समीकरण ;खद्ध में प्रयुक्त ब्व् की मात्रा के बराबर करने पर हम पाते हैं कि यौगिक से निकली आॅक्सीजन के प्रत्येक मोल से दो मोल ब्व्2 प्राप्त होगी। अतः 88ह काबर्न डाइआॅक्साइड यौगिक से निकली 32ह आॅक्सीजन से प्राप्त होगी। माना कि काबर्निक यौगिक का द्रव्यमान त्र उ ह उत्पन्न काबर्न डाइआॅक्साइड का द्रव्यमान त्र उ1 ह 32 ×उ1∴उह काबर्न डाइआॅक्साइड ह आॅक्सीजन से1 88 प्राप्त होगी। 32 ×उ1 ×100 त्र∴ यौगिक में आॅक्सीजन का प्रतिशत 88 ×उ आॅक्सीजन के प्रतिशत का आकलन आयोडीन की मात्रा से भी किया जा सकता है।आजकल काबर्निक यौगिक में तत्त्वों का आकलन स्वचालित तकनीक की सहायता से पदाथा±े की सूक्ष्म ;माइक्रोद्ध मात्रा लेकर करते हैं। यौगिकों में उपस्िथत काबर्न, हाइड्रोजनतथा नाइट्रोजन तत्त्वों का आकलन ब्भ्छ तत्त्व विश्लेषक ;ब्भ्छ म्समउमदजंस ।दंसल्रमतद्ध से करते हैं। इस उपकरण में पदाथर् की माइक्रो मात्रा ;1 दृ 3 उहद्ध की आवश्यकता होतीहै तथा वुफछ समय में इन तत्त्वों का प्रतिशत स्क्रीन पर आ जाती हैं। इन वििायों का विस्तृत विवरण इस पुस्तक के स्तरसे ऊपर है। 12.1 12.2 12.3 12.4 निम्नलिख्िात यौगिकों में प्रत्येक काबर्न की संकरण अवस्था बताइएμ ब्भ्2 त्र ब् त्र व्ए ब्भ्3ब्भ् त्र ब्भ्2ए ;ब्भ्3द्ध2ब्व्ए ब्भ्2 त्र ब्भ् ब्छए ब्6भ्6 निम्नलिख्िात अणुओं में σ तथा π आबंध दशार्इएμ ब्6भ्6ए ब्6भ्12ए ब्भ्2ब्स2ए ब्भ्2 त्र ब् त्र ब्भ्2ए ब्भ्3 छव्2ए भ्ब्व्छभ्ब्भ्3 निम्नलिख्िात यौगिकों के आबंध - रेखा - सूत्रा लिख्िाएμ आइसोप्रोपिल ऐल्कोहाॅल, 2ए 3दृ डाइमेथ्िाल ब्यूटेनैल, हेप्टेन - 4 - ओन निम्नलिख्िात यौगिकों के प्न्च्।ब् नाम लिख्िाएμ ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध ;घद्ध ;घद्ध;चद्ध ब्सब्भ्ब्भ्व्भ्2212.5 निम्नलिख्िात यौगिकों में से कौन सा नाम प्न्च्।ब् प(ति के अनुसार सही है? ;कद्ध 2ए 2 - डाइएथ्िालपेन्टेन अथवा 2 - डाइमेथ्िालपेन्टेन ;खद्ध 2ए 4ए 7 - ट्राइमेथ्िालआॅक्टेन अथवा 2ए 5ए 7 - ट्राइमेथ्िालआॅक्टेन ;गद्ध 2 - क्लोरो - 4 - मेथ्िालपेन्टेन अथवा 4 - क्लोरो - 2 - मेथ्िालपेन्टेन ;घद्ध ब्यूट - 3 - आइन - 1 - आॅल अथवा ब्यूट - 4 - आॅल - 1 - आइन 12.6 निम्नलिख्िात दो सजातीय श्रेण्िायों में से प्रत्येक के प्रथम पाँच सजातों के संरचना - सूत्रा लिख्िाएμ ;कद्ध भ् दृ ब्व्व्भ् ;खद्ध ब्भ्3ब्व्ब्भ्3 ;गद्ध भ् दृ ब्भ् त्र ब्भ्2 12.7 निम्नलिख्िात के संघनित और आबंध रेखा - सूत्रा लिख्िाए तथा उनमें यदि कोइर् ियात्मक समूह हो, तो उसे पहचानिएμ ;कद्ध 2ए 2ए 4 - ट्राइमेथ्िालपेन्टेन ;खद्ध 2 - हाइड्राॅक्सी - 1ए 2ए 3 - प्रोपेनट्राइकाबार्ेक्िसलिक अम्ल ;गद्ध हेक्सेनडाइऐल 12.8 निम्नलिख्िात यौगिकों में ियात्मक समूह पहचानिएμ ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध 12.9 निम्नलिख्िात में से कौन अिाक स्थायी है तथा क्यों? व्छब्भ्ब्भ्व्दृ और ब्भ् ब्भ्व्दृ 2223212.10 π - निकाय से आबंिात होने पर ऐल्िकल समूह इलेक्ट्राॅनदाता की तरह व्यवहार प्रद£शत क्यों करते हैं? समझाइए। 12.11 निम्नलिख्िात यौगिकों की अनुनाद - संरचना लिख्िाए तथा इलेक्ट्राॅनों का विस्थापन मुड़े तीरों की सहायता से दशार्इएμ ;कद्ध ब्भ्व्भ् ;खद्ध ब्भ्छव्65 652 ;गद्ध ब्भ्ब्भ् त्र ब्भ्ब्भ्व् ;घद्ध ब्भ्दृ ब्भ्व्3 65 ़;घद्ध ब्भ् दृ ब्भ़् ;चद्ध ब्भ् ब्भ् त्र ब्भ्ब् भ् 652 32 12.12 इलेक्ट्राॅनस्नेही तथा नाभ्िाकस्नेही क्या हैं? उदाहरणसहित समझाइए। 12.13 निम्नलिख्िात समीकरणों में मोटे अक्षरों में लिखे अभ्िाकमर्कों को नाभ्िाकस्नेही तथा इलेक्ट्राॅनस्नेही मेंवगीर्कृत कीजिएμ ;कद्ध ब्भ् ब्व्व्भ् − −़ 23 ़ भ्व्→ ब्भ्ब्व्व् 3 भ्व् दृ;खद्ध ब्भ् ब्व्ब्भ् ़ ब्छ → ;ब्भ् द्ध ब्;ब्छद्ध;व्भ्द्ध 3 3 32 ;गद्ध ब्भ्6 ़ ब्भ्3 ब्व् → 56 ़ ब्भ् ब्व्ब्भ् 6 3 12.14 निम्नलिख्िात अभ्िाियाओं को वगीर्कृत कीजिएμ ;कद्ध ब्भ्ब्भ् ठत ़ भ्ै −→ ब्भ् ब्भ् ैभ् ़ ठत − 32 32 ;खद्ध ;ब्भ् द्धब् त्ऱ भ्ब्स → ;ब्भ् द्ध ब्सब् − ब्भ् 332 ब्भ् 2 32 ;गद्ध ब्भ् ब्भ् ठत ़ भ्व् −→ ब्भ् त्र ब्भ् ़ भ्व् ़ ठत− 32 222 ;घद्ध ;ब्भ् द्धब् − ब्भ् व्भ् ़ भ्ठत → ;ब्भ् द्ध ब्ठतब्भ् ब्भ् ़ भ्व् 332 32 232 12.15 निम्नलिख्िात युग्मों में सदस्य - संरचनाओं के मध्य वैफसा संबंध है? क्या ये संरचनाएँ संरचनात्मक या ज्यामितीय समावयव अथवा अनुनाद संरचनाएँ हैं? ;वफद्ध ;खद्ध ;गद्ध 12.16 निम्नलिख्िात आबंध विदलनों के लिए इलेक्ट्राॅन - विस्थापन को मुड़े तीरों द्वारा दशार्इए तथा प्रत्येकविदलन को समांश अथवा विषमांश में वगीर्कृत कीजिए। साथ ही नि£मत सिय मध्यवतीर् उत्पादों में मुक्त - मूलक, काबर्धनायन तथा काबर्)णायन पहचानिएμ ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध ;घद्ध 12.17 निम्नलिख्िात काबार्ेक्िसलिक अम्लों की अम्लता का सही क्रम कौन सा इलेक्ट्राॅन - विस्थापन व£णत करता है? प्रेरण्िाक तथा इलेक्ट्रोमेरी प्रभावों की व्याख्या कीजिएμ ;कद्ध ब्सब्ब्व्व्भ् झ ब्सब्भ्ब्व्व्भ् झ ब्सब्भ्ब्व्व्भ्32 2;खद्ध ब्भ्ब्भ्ब्व्व्भ् झ ;ब्भ्द्धब्भ्ब्व्व्भ् झ ;ब्भ्द्धब्ण्ब्व्व्भ्3232 3312.18 प्रत्येक का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिख्िात प्रक्रमों के सि(ांतों का संक्ष्िाप्त विवरण दीजिएμ ;कद्ध िस्टलन ;खद्ध आसवन ;गद्ध क्रोमेटोग्रैपफी 12.19 ऐसे दो यौगिकों, जिनकी विलेयताएँ विलायक े, में भ्िान्न हैं, को पृथव्फ करने की वििा की व्याख्या कीजिए। 12.20 आसवन, निम्न दाब पर आसवन तथा भाप आसवन में क्या अंतर है? विवेचना कीजिए। 12.21 लैंसे - परीक्षण का रसायन - सि(ांत समझाइए। 12.22 किसी काबर्निक यौगिक में नाइट्रोजन के आकलन की ;पद्ध ड्यूमा वििा तथा ;पपद्ध वैफल्डाॅल वििा के सि(ांत की रूप - रेखा प्रस्तुत कीजिए। 12.23 किसी यौगिक में हैलोजेन, सल्पफर तथा प.फाॅस्पफोरस के आकलन के सि(ांत की विवेचना कीजिए। 12.24 पेपर क्रोमेटोग्रैपफी के सि(ांत को समझाइए। 12.25 ‘सोडियम संगलन निष्कषर्’ में हैलोजेन के परीक्षण के लिए सिल्वर नाइट्रेट मिलाने से पूवर् नाइटिªक अम्ल क्यों मिलाया जाता है? 12.26 नाइट्रोजन, सल्पफर तथा प.फाॅस्पफोरस के परीक्षण के लिए सोडियम के साथ काबर्निक यौगिक का संगलन क्यों किया जाता है? 12.27 वैफल्िसयम सल्पेफट तथा कपूर के मिश्रण के अवयवों को पृथव्फ करने के लिए एक उपयुक्त तकनीक बताइए। 12.28 भाप - आसवन करने पर एक काबर्निक द्रव अपने क्वथनांक से निम्न ताप पर वाष्पीकृत क्यों हो जाता है? 12.29 क्या ब्ब्स सिल्वर नाइट्रेट के साथ गरम करने पर ।हब्स का श्वेत अवक्षेप देगा? अपने उत्तर को4कारण सहित समझाइए। 12.30 किसी काबर्निक यौगिक में काबर्न का आकलन करते समय उत्पन्न काबर्न डाइआॅक्साइड को अवशोष्िात करने के लिए पोटैश्िायम हाइड्राॅक्साइड विलयन का उपयोग क्यों किया जाता है? 12.31 सल्पफर के लेड ऐसीटेट द्वारा परीक्षण में ‘सोडियम संगलन निष्कषर्’ को ऐसीटिक अम्ल द्वारा उदासीनकिया जाता है, न कि सल्फ्रयूरिक अम्ल द्वारा। क्यों? 360 रसायन विज्ञान 12.32 एक काबर्निक यौगिक में 69ः काबर्न, 4ण्8ः हाइड्रोजन तथा शेष आॅक्सीजन है। इस यौगिक के 0ण्20 ह के पूणर् दहन के पफलस्वरूप उत्पन्न काबर्न डाइआॅक्साइड तथा जल की मात्राओं की गणना कीजिए। 12.33 0ण्50 ह काबर्निक यौगिक को वैफल्डाॅल वििा के अनुसार उपचारित करने पर प्राप्त अमोनिया को 0ण्5 ड भ्ैव्24 के 50 उस् में अवशोष्िात किया गया। अवश्िाष्ट अम्ल के उदासीनीकरण के लिए 0ण्5 ड छंव्भ् के 50 उस् की आवश्यकता हुइर्। यौगिक में नाइट्रोजन प्रतिशतता की गणना कीजिए। 12.34 वैफरिअस आकलन में 0ण्3780 ह काबर्निक क्लोरो यौगिक से 0ण्5740 ह सिल्वर क्लोराइड प्राप्त हुआ। यौगिक में क्लोरीन की प्रतिशतता की गणना कीजिए। 12.35 वैफरिअस वििा द्वारा सल्पफर के आकलन में 0ण्468 ह सल्पफरयुक्त काबर्निक यौगिक से 0ण्668 ह बेरियम सल्पेफट प्राप्त हुआ। दिए गए काबर्न यौगिक में सल्पफर की प्रतिशतता की गणना कीजिए। 12.36 ब्भ् त्र ब्भ् दृ ब्भ् दृ ब्भ् दृ ब् ≡ ब्भ्ए काबर्निक यौगिक में ब् दृ ब् आबंध किन संकरित कक्षकों के युग्म222 23से नि£मत होता है? ;कद्ध ेच दृ ेच2 ;खद्ध ेच दृ ेच3 ;गद्ध ेच2 दृ ेच3 ;घद्ध ेच3 दृ ेच3 12.37 किसी काबर्निक यौगिक में लैंसे - परीक्षण द्वारा नाइट्रोजन की जाँच में प्रश्िायन ब्लू रंग निम्नलिख्िात में से किसके कारण प्राप्त होता है? ;कद्ध छंख्थ्म;ब्छद्ध, ;खद्ध थ्मख्थ्म;ब्छद्ध,;गद्ध थ्मख्थ्म;ब्छद्ध, ;घद्ध थ्मख्थ्म;ब्छद्ध,46 463 26 364 12.38 निम्नलिख्िात काबर्धनायनों में से कौन सा सबसे अिाक स्थायी है? ;कद्ध ⋅ ़ ;खद्ध ़ ;ब्भ् द्धब्ब्भ् ;ब्भ् द्ध ब् 332 33़़;गद्ध ब्भ् ब्भ् ब्भ् ;घद्ध ब्भ् ब्भ्ब्भ् ब्भ् 222 323 12.39 काबर्निक यौगिकों के पृथक्करण और शोधन की सवार्ेत्तम तथा आधुनिकतम तकनीक कौन - सी है? ;कद्ध िस्टलन ;खद्ध आसवन ;गद्ध ऊध्वर्पातन ;घद्ध क्रामेटोगै्रेपफी 12.40 ब्भ्ब्भ्प़्ज्ञव्भ् ;ंुद्ध → ब्भ् ब्भ् व्भ़्ज्ञप् अभ्िािया को नीचे दिए गए प्रकार में वगीर्कृत कीजिएμ32 32 ;कद्ध इलेक्ट्राॅनस्नेही प्रतिस्थापन ;खद्ध नाभ्िाकस्नेही प्रतिस्थापन ;गद्ध विलोपन ;घद्ध संकलन

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