एकक 1 रसायन विज्ञान की वुफछ मूल अवधरणाएँैव्डम् ठ।ैप्ब् ब्व्छब्म्च्ज्ै व्थ् ब्भ्म्डप्ैज्त्ल् उद्देश्य इस एकक के अध्ययन के बाद आप - ऽ जीवन के विभ्िान्न क्षेत्रों में रसायन विज्ञान केमहत्त्व को समझ सवेंफगेऋ ऽ द्रव्य की तीन अवस्थाओं के अभ्िालक्षणों कीव्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ पदाथो± को तत्त्वों, यौगिकों और मिश्रणों मेंवगीर्कृत कर सवेंफगेऋ ऽ ैप् आधर मात्राकों को परिभाष्िात कर सवेंफगेऔर सामान्यतया प्रयुक्त वुफछ पूवर्लग्नों कोसूचीब( कर सवेंफगेऋ ऽ वैज्ञानिक - संकेतन का प्रयोग और संख्याओं परसरल गण्िातीय प्रचालन कर सवेंफगेऋ ऽ परिशु(ता और यथाथर्ता में भ्िान्नता स्पष्टकर सवेंफगेऋ ऽ साथर्क अंक निधर्रित कर सवेंफगेऋ ऽ भौतिक राश्िायों के मात्राकों को एक प्रणालीसे दूसरी प्रणाली में रूपांतरित कर सवेंफगेऋ ऽ रासायनिक संयोजन के विभ्िान्न नियमों कीव्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ परमाणु द्रव्यमान, औसत परमाणु द्रव्यमान,अणु द्रव्यमान और सूत्रा द्रव्यमान की साथर्कताबता सवेंफगेऋ ऽ मोल और मोलर द्रव्यमान - पदों का वणर्नकर सवेंफगेऋ ऽ किसी यौगिक के घटक विभ्िान्न तत्त्वों का द्रव्यमान - प्रतिशत परिकलित कर सवेंफगेऋ ऽ दिए गए प्रायोगिक आँकड़ों से किसी यौगिकके लिए मूलानुपाती सूत्रा और अणु - सूत्रानिधर्रित कर सवेंफगेऋ ऽ स्टाॅइकियोमीट्री गणनाएँ कर सवेंफगे। सौ तत्त्वों का विज्ञान है, अपितु उनसे निमिर्त होने वाले असंख्य प्रकार के अणुओं रोअल्ड हाॅपफमैन रसायन विज्ञान पदाथर् के संघटन, संरचना, गुणध्मर् से संबंध्ित है, जिन्हें पदाथर् के मौलिक अवयवों - परमाणुओं तथा अणुओं के माध्यम से अच्छी प्रकार समझा जा सकता है। यही कारण है कि रसायन विज्ञान ‘परमाणुओं तथा अणुओं का विज्ञान’ कहलाता है। क्या हम कणों को देख सकते हैं, उनका भार माप सकते हैं और उनकी उपस्िथति को अनुभव कर सकते हैं? क्या किसी पदाथर् की निश्िचत मात्रा में परमाणुओं और अणुओं की संख्या ज्ञात कर सकते हैं और क्या हम इन कणों ;परमाणुओं तथा अणुओंद्ध की संख्या एवं उनके द्रव्यमान के मध्यमात्रात्मक संबंध् दशार् सकते हैं? इस एकक में हम ऐसे ही वुफछ प्रश्नों के उत्तर पाएँगे। इसके अतिरिक्त हम यहाँ पर यह भी वणर्न करेंगे कि किसी पदाथर् के भौतिक गुणों को उपयुक्त इकाइयों की सहायता से मात्रात्मक रूप से किस प्रकार दशार्या जा सकता है। 1.1 रसायन विज्ञान का महत्त्व मानव द्वारा प्रकृति को समझने और उसका वणर्न करने के लिए ज्ञान को क्रमब( करने की निरंतर चेष्टा ही ‘विज्ञान’ है। सुविध के लिए विज्ञान को विभ्िान्न विधओं ;जैसेμरसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, भू - विज्ञान आदिद्ध मेंवगीर्कृत किया गया है। रसायन विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें पदाथर् के संघटन, गुणध्मर् और अन्योन्य ियाओं का अध्ययन किया जाता है। रसायनज्ञ निरंतर यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि रासायनिक रूपांतरण किस प्रकार हो रहे हैं।विज्ञान में रसायन विज्ञान की महत्त्वपूणर् भूमिका है, जो प्रायः विज्ञान की अन्य शाखाओं ;जैसेμभौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, भू - विज्ञान आदिद्ध के साथ अभ्िान्नरूप से जुड़ी हुइर् है। दैनिक जीवन में भी रसायन विज्ञान की महत्त्वपूणर् भूमिका है। रसायन विज्ञान के सि(ांतों का व्यावहारिक उपयोग मौसम विज्ञान, नाड़ी - तंत्रा और वंफप्यूटर प्रचालन सदृश विभ्िान्न क्षेत्रोंमें होता है। राष्ट्रीय अथर्व्यवस्था में महत्त्वपूणर् योगदान उवर्रकों, क्षारों, अम्लों, लवणों, रंगों, बहुलकों, दवाओं, साबुनों, अपमाजर्कों, धातुओं, मिश्र धतुओं तथा अन्य काबर्निक और अकाबर्निक रसायनों सहित नवीन सामग्री के निमार्ण में लगे रासायनिक उद्योगों का है।मानव के जीवन - स्तर को ऊँचा उठाने हेतु भोजन, स्वास्थ्य - सुविध की वस्तुएँ और अन्य सामग्री की आवश्यकताओं कोपूरा करने में रसायन विज्ञान ने महत्त्वपूणर् भूमिका निभाइर् है।विभ्िान्न उवर्रकों, जीवाणुनाशकों तथा कीटनाशकों की उत्तम किस्मों का उच्च स्तर पर उत्पादन इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इसी प्रकार वैफन्सर की चिकित्सा में प्रभावी औषध्ियाँ ;जैसेμ सिसप्लाटिन तथा टैक्सोलद्ध और एड्स से ग्रस्त रोगियों के उपचार हेतु उपयोग में आनेवाली औषध्ि एजिडोथाइर्मिडिन ;।र्ज्द्ध सदृश अनेक जीवनरक्षक औषध्ियाँ पौधें और प्राणी - स्रोतों से प्राप्त या संश्लेष्िात की गइर् हैं। रासायनिक सि(ांत भली - भाँति होने के बाद अब विश्िाष्ट चुंबकीय, विद्युतीय और प्रकाशीय गुणध्मर्युक्त पदाथर् संश्लेष्िात करना संभव हो गया है, जिसके पफलस्वरूप अतिचालक सिरेमिक, सुचालक बहुलक, प्रकाशीय पफाइबर ;तंतुद्ध सदृश पदाथर् संश्लेष्िात किए जा सकते हैं और ठोस अवस्थीय पदाथो± को लघु रूप में विकसित किया जा सकता है। पिछले वुफछ वषो± में रसायन शास्त्रा की सहायता से पयार्वरणीय प्रदूषण से संबंध्ित वुफछ गंभीर समस्याओं को कापफी सीमा तक नियंत्रिात किया जा सका है। उदाहरणस्वरूपμसमतापमंडल ;ेजतंजवेचीमतमद्ध में ओजोन अवक्षय ;व््रवदम कमचसमजपवदद्ध उत्पन्न करनेवाले एवंपयार्वरण - प्रदूषक क्लोरोफ्रलोरो काबर्न, अथार्त् सी.एपफ.सी.;ब्थ्ब्द्ध सदृश पदाथो± के विकल्प सपफलतापूवर्क संश्लेष्िात कर लिये गए हैं, परंतु अभी भी पयार्वरण की अनेक समस्याएँ रसायनविदों के लिए गंभीर चुनौती बनी हुइर् हैं। ऐसी ही एक समस्या ग्रीन - हाउस गैसों ;जैसेμमेथैन, काबर्न डाइआॅक्साइड आदिद्ध का प्रबंध्न है। रसायनविदों की भावी पीढि़यों के लिए जैव - रासायनिक प्रियाओं की समझ, रसायनों के व्यापक स्तर पर उत्पादन हेतु एंजाइमों का उपयोग और नवीन मोहक पदाथो± का उत्पादन वुफछेक बौिक चुनौतियाँ हैं। ऐसी चुनौतियों का सामना करने के लिए हमारे देश तथा अन्य विकासशील देशों को मेधवी और सृजनात्मक रसायनविदों की आवश्यकता है। रसायन विज्ञान 1.2 द्रव्य की प्रकृति अपनी पूवर् कक्षाओं से आप ‘द्रव्य’ शब्द से परिचित हैं। कोइर् भी वस्तु, जिसका द्रव्यमान होता है और जो स्थान घेरती है, द्रव्य कहलाती है। हमारे आसपास की सभी वस्तुएँ द्रव्य द्वारा बनी होती हैं। उदाहरण के लिएμपुस्तक, कलम, पेन्िसल, जल, वायु, सभी जीव आदि द्रव्य से बने होते हैं। आप जानते हैं कि इन सभी का द्रव्यमान होता है और ये स्थान घेरती हैं। आप यह भी जानते हैं कि द्रव्य की तीन भौतिक अवस्थाएँ संभव हैंμ ठोस, द्रव और गैस। इन तीनों अवस्थाओं में द्रव्य के घटक - कणों को चित्रा 1.1 में दशार्या गया है। चित्रा 1.1 ठोस, द्रव और गैस में कणों की व्यवस्था ठोसों में ये कण एक - दूसरे के बहुत पास क्रमब( रूप से व्यवस्िथत रहते हैं। ये बहुत गतिशील नहीं होते। द्रवों में कण पास - पास होते हैं, पिफर भी ये गति कर सकते हैं, लेकिन ठोसों या द्रवों की अपेक्षा गैसों में कण बहुत दूर - दूर होते हैं। वे बहुत आसानी तथा तेशी से गति कर सकते हैं। कणों की इन व्यवस्थाओं के कारण द्रव्य की विभ्िान्न अवस्थाओं के निम्नलिख्िात अभ्िालक्षण होते हैंμ ;पद्ध ठोस का निश्िचत आयतन और निश्िचत आकार होता है। ;पपद्ध द्रव का निश्िचत आयतन होता है, परंतु आकार निश्िचत नहीं होता है। वह उसी पात्रा का आकार ले लेता है, जिसमें उसे रखा जाता है। ;पपपद्ध गैस का आयतन या आकार वुफछ भी निश्िचत नही रहता। वह उस पात्रा के आयतन में पूरी तरह पफैल जाती है, जिसमें उसे रखा जाता है। ताप और दाब की परिस्िथतियों के परिवतर्न द्वारा द्रव्य की इन तीन अवस्थाओं को एक - दूसरे में परिवतिर्त किया जा सकता है। गरम गरमठोस द्रव गैसठंडा ठंडा सामान्यतया एक ठोस को गरम करने पर वह द्रव में परिवतिर्त हो जाता है और द्रव को गरम करने पर वह गैसीय ;वाष्पद्ध अवस्था में परिवतिर्त हो जाता है। इसके विपरीत अभ्िािया में गैस को ठंडा करने पर वह द्रवित होकर द्रव में परिवतिर्त हो जाती है और अध्िक ठंडा करने पर द्रव जमकर ठोस में परिवतिर्त हो जाता है। स्थूल या बड़े स्तर पर द्रव्य को मिश्रण या शु( पदाथर्के रूप में वगीर्कृत किया जा सकता है। इन्हें और आगे चित्रा 1.2 के अनुसार उप - विभाजित किया जा सकता है। चित्रा 1.2 द्रव्य का वगीर्करण आपके आसपास उपस्िथत अध्िकांश पदाथर् मिश्रण हैं। उदाहरण के लिएμ जल में चीनी का विलयन, हवा, चाय आदि सभी मिश्रण होते हैं। किसी मिश्रण में दो या अध्िक पदाथर् अथवा घटक किसी भी अनुपात में उपस्िथत हो सकते हैं। कोइर् मिश्रण समांगी या विषमांगी हो सकता है। किसी समांगी मिश्रण में घटक एक - दूसरे में पूणर्तया मिश्रित होते हैं और पूरे मिश्रण का संघटन एक समान होता है। अतः ‘जल में चीनी का विलयन’ और ‘हवा’ समांगी मिश्रण के उदाहरण हैं। इसके विपरीत विषमांगी मिश्रण में संघटन पूरे मिश्रण में एक समान नहीं होता। कभी - कभी तो विभ्िान्न घटकों को अलग - अलग देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए चीनी और नमक तथा दाल के दानों और गंदगी ;प्रायः छोटे वंफकड़द्ध के कणों के मिश्रण विषमांगी मिश्रण हैं। आप अपने दैनिक जीवन में प्रयुक्त मिश्रणों के कइर् अन्य उदाहरणों के बारे में सोच सकते हैं। यहाँ यह बताना उचित होगा कि किसी मिश्रण के घटकों को हाथ से छानने, िस्टलन, आसवन आदि भौतिक विध्ियों के उपयोग द्वारा अलग किया जा सकता है। शु( पदाथो± के अभ्िालक्षण मिश्रणों से भ्िान्न होते हैं। उनका संघटन निश्िचत होता है, जबकि मिश्रणों में घटक किसी भी अनुपात में उपस्िथत हो सकते हैं और उनका संघटन भ्िान्न हो सकता है। ताँबा, चाँदी, सोना, जल, ग्लूकोस आदि शु( पदाथो± के वुफछ उदाहरण हैं। ग्लूकोस में काबर्न, हाइड्रोजन और आॅक्सीजन एक निश्िचत अनुपात में होते हैं। इसमें अन्य शु( पदाथो± की तरह निश्िचत संघटन होता है। शु( पदाथर् के संघटकों को सामान्य भौतिक विध्ियों द्वारा पृथव्फ नहीं किया जा सकता। शु( पदाथो± को पुनःतत्त्वों तथा यौगिकों में वगीर्कृत किया जा सकता है। किसी तत्त्व में एक ही प्रकार के कण होते हैं। ये कण परमाणु या अणु हो सकते हैं। आप अपनी पिछली कक्षाओं से परमाणुओं और अणुओं से परिचित होंगे, लेकिन आप उनके बारे में एकक - 2 में विस्तार से पढ़ेंगे। सोडियम, हाइड्रोजन, आॅक्सीजन ताँबा,चाँदी, आदि तत्त्वों के वुफछ उदाहरण हैं। इन सब में एक हीप्रकार के परमाणु होते हैं, परंतु विभ्िान्न तत्त्वों के परमाणु एक - दूसरे से भ्िान्न होते हैं। सोडियम अथवा ताँबे जैसे वुफछतत्त्वों में एकल परमाणु घटक कणों के रूप में उपस्िथत होतेहैं, जबकि वुफछ अन्य तत्त्वों में दो या अध्िक परमाणु संयोजितहोकर उस तत्त्व के अणु बनाते हैं। अतः हाइड्रोजन, नाइट्रोजनतथा आॅक्सीजन गैसों में इन तत्त्वों के अणु उपस्िथत होते हैं, जो क्रमशः इनके दो - दो परमाणुओं के संयोजन से बनते हैं। इसे चित्रा 1.3 में दिखाया गया है। चित्रा 1.3 परमाणुओं और अणुओं का निरूपण जब भ्िान्न तत्त्वों के दो या दो से अध्िक परमाणु संयोजित होते हैं, तब यौगिक का एक अणु प्राप्त होता है। जल, अमोनिया, काबर्न - डाइआॅक्साइड, चीनी आदि यौगिकों के वुफछ उदाहरण हैं। जल और काबर्न डाइआॅक्साइड के अणुओं को चित्रा 1.4 में निरूपित किया गया है। रसायन विज्ञान जल का अणु काबर्न डाइआॅक्साइड का अणु ;भ्2व्द्ध ;ब्व्2द्ध चित्रा 1.4 जल और काबर्न डाइआॅक्साइड के अणुओं का निरूपण आपने चित्रा 1.4 में देखा कि जल के एक अणु में दो हाइड्रोजन परमाणु और एक आॅक्सीजन परमाणु उपस्िथत होते हंै। इसी प्रकार, काबर्न डाइआॅक्साइड के अणु में आॅक्सीजन के दो परमाणु काबर्न के एक परमाणु से संयोजित होते हैं।अतः किसी यौगिक में विभ्िान्न तत्त्वों के परमाणु एक निश्िचत और स्िथर अनुपात में उपस्िथत होते हैं। यह अनुपात किसी यौगिक का अभ्िालाक्षण्िाक गुण होता है। इसके साथ हीकिसी यौगिक के गुणध्मर् उसके घटक तत्त्वों के गुणध्मो± से भ्िान्न होते हैं। उदाहरण के लिएμ हाइड्रोजन और आॅक्सीजन गैसें हैं, परंतु उनके संयोजन से बना यौगिक, अथार्त् जल एक द्रव है। यह भी जानना रोचक होगा कि हाइड्रोजन एक तेज ;चवचद्ध ध्वनि के साथ जलती है और आॅक्सीजन दहन में सहायक होती है, परंतु जल का उपयोग एक अग्िनशामक के रूप में किया जाता है। इसके अतिरिक्त किसी यौगिक के घटकों को भौतिक विध्ियों द्वारा सरल पदाथो± में पृथव्फ नहीं किया जा सकता है। उन्हें पृथव्फ करने के लिए रासायनिक विध्ियों का प्रयोग करना पड़ता है। 1.3 द्रव्य के गुणध्मर् और उनका मापन प्रत्येक पदाथर् के विश्िाष्ट या अभ्िालाक्षण्िाक गुणध्मर् होते हैं। इनगुणध्मो± को दो वगो± में वगीर्कृत किया जा सकता हैμ भौतिक गुणध्मर् और रासायनिक गुणध्मर्। भौतिक गुणध्मर् वे गुणध्मर् होते हैं, जिन्हें पदाथर् की पहचान या संघटन को परिवतिर्त किए बिना मापा या देखा जा सकता है। भौतिक गुणध्मो± के वुफछ उदाहरण रंग, गंध्, गलनांक, क्वथनांक, घनत्व आदि हैं। रासायनिक गुणध्मो± को मापने या देखने के लिए रासायनिक परिवतर्न का होना आवश्यक होता है। विभ्िान्न पदाथो± की अभ्िालाक्षण्िाक अभ्िाियाएँ ;जैसे दृ अम्लता, क्षारता, दाह्यता आदिद्ध रासायनिक गुणध्मो± के उदाहरण हैं। द्रव्य के अनेक गुणध्मर् ;जैसे दृ लंबाइर्, क्षेत्रापफल, आयतन आदिद्ध मात्रात्मक प्रकृति के होते हैं। किसी मात्रात्मक प्रेक्षण या मापन को कोइर् संख्या और उसके बाद वह इकाइर् लिखकर निरूपित किया जाता है, जिसमें उसे मापा गया है। उदाहरण के लिएμ किसी कमरे की लंबाइर् को 6 उ लिखकर बताया जा सकता है, जिसमें 6 एक संख्या है और उ मीटर को व्यक्त करता है, जो वह इकाइर् है, जिसमें लंबाइर् नापी गइर् है। विश्व के विभ्िान्न भागों में मापन की दो विभ्िान्न प(तियाँμ ‘अंग्रेजी प(ति’ ;जीम म्दहसपेी ैलेजमउद्ध और ‘मीटिªक प(ति’ ;जीम डमजतपब ैलेजमउद्ध प्रयुक्त की जाती है।मीटिªक प(ति, जो Úांस में अठारहवीं शताब्दी के उत्तरा( में विकसित हुइर्, अिाक सुविधाजनक थी, क्योंकि वह दशमलव प्रणाली पर आधारित थी। वैज्ञानिकों ने एक सवर्मान्य मानक प(ति की आवश्यकता अनुभव की। ऐसी एक प(ति सन् 1960 में प्रस्तुत की गइर्, जिसकी विस्तृत चचार् नीचे की जा रही है। 1.3.1 मात्राकों की अंतरार्ष्ट्रीय प(ति ;ैप्द्ध मात्राकों की अंतरार्ष्ट्रीय प(ति ;Úांसीसी में स्म ैलेजमउ प्दजमतदंजपवदंस कश्न्दपजेद्धए जिसे संक्षेप में ैण्प्ण् ;एस.आइर्.द्ध कहा जाता है, को सन् 1960 में भार और माप के ग्यारहवें सवर् - सम्मेलन ;बवदमितमदबम ळमदमतंसम कमे च्वपवे मज डमंेनतमेए ब्ळच्डद्ध में स्वीकृत किया गया था। ब्ळच्ड एक सरकारी संस्था है, जिसका गठन एक रासायनिक समझौते ;जिसे मीटर परिपाटी कहते हैं और जिसपर सन् 1875 में पेरिस में हस्ताक्षर किए गएद्ध के अंतगर्त किया गया। ैप् प(ति में सात आधार मात्राक हैं। इन्हें तालिका 11 में सूचीब( किया गया है। ये मात्राक सात आधारभूत वैज्ञानिक राश्िायों से संबंिात हैं। अन्य भौतिक राश्िा ;जैसे दृ गति, आयतन, घनत्व आदिद्ध इन राश्िायों से व्युत्पन्न की जा सकती हैं। ैप् आधार मात्राकों की परिभाषाएँ तालिका 1.2 में दी गइर् हैं। ैप् प(ति में अपवत्यो± और अपवतर्कों को व्यक्त करने के लिए पूवर्लग्नों का उपयोग किया जाता है। इन्हें तालिका 1.3 में सूचीब( किया गया है। इनमें से वुफछ राश्िायों का प्रयोग हम इस पुस्तक में करेंगे। 1.3.2 द्रव्यमान और भार किसी पदाथर् का द्रव्यमान उसमें उपस्िथत द्रव्य की मात्रा है, जबकि किसी वस्तु का भार उसपर लगनेवाला गुरुत्व बल है। किसी पदाथर् का द्रव्यमान स्िथर होता है, परंतु उसका भार गुरुत्व में परिवतर्न के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान पर अलग - अलग हो सकता है। आपको इन दोनों शब्दों के प्रयोग पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। तालिका 1.1 आधर भौतिक राश्िायाँ और उनके मात्राक आधर भौतिक राश्िा राश्िा के लिए प्रतीक ैप् मात्राक का नाम ैप् मात्राक का प्रतीक लंबाइर् द्रव्यमान समय विद्युत्धरा ऊष्मागतिक तापक्रम पदाथर् की मात्रा ज्योति - तीव्रता स उ ज प् ज् द प् अ मीटर किलोग्राम सेवंफड ऐम्पीयर केल्िवन मोल केन्डेला उ ाह े । ज्ञ उवस बक तालिका 1.2 ैप् आधर मात्राकों की परिभाषाएँ लंबाइर् का मात्राक मीटर प्रकाश द्वारा निवार्त् में एक सेवंफड के 1 299792458 समय अंतराल में तय किए गए पथ की लंबाइर् एक मीटर है। द्रव्यमान का मात्राक किलोग्राम ‘किलोग्राम’ द्रव्यमान का मात्राक है। यह अंतरार्ष्ट्रीय मानक किलोग्राम द्रव्यमान के बराबर है। समय का मात्राक सेवंफड एक सेवंफड सीजियम दृ 133 परमाणु की मूल अवस्था के दो अतिसूक्ष्म स्तरों के बीच होने वाले संक्रमण के संगत विकिरण के 91 92 631 770 आवतो± की अवध्ि है। विद्युत्धरा का मात्राक ऐम्िपयर एक ऐम्िपयर वह स्िथर विद्युत्धरा है, जो निवार्त् में 1 मीटर दूरी पर स्िथत दो अनंत लंबाइर् वाले समांतर एवं नगण्य अनुप्रस्थ काट वाले चालकों के बीच प्रवाहित होने पर 2 10दृ7 न्यूटन प्रति मीटर लंबाइर् का बल उत्पन्न करती है। ऊष्मागतिक तापक्रम का मात्राक केल्िवन केल्िवन, ऊष्मागतिक ताप का मात्राक, जल के त्रिाक ¯बदु के ऊष्मागतिक ताप का 1 273ण्16 वाँ भाग होता है। पदाथर् की मात्रा का मात्राक मोल 1. मोल किसी निकाय में पदाथर् की वह मात्रा है, जिसमें मूल कणों ;मसमउमदजंतल मदजपजपमेद्ध की संख्या उतनी ही होती है, जितनी 0.012 ाह काबर्न - 12 में उपस्िथत परमाणुओं की संख्या। इसका संकेत मोल ;उवसद्ध है। 2. जब मोल का प्रयोग किया जाता है, तब मूल कणों को इंगित ;ेचमबपलिद्ध करना चाहिए कि ये परमाणु, अणु, आयन, इलेक्ट्राॅन, अथवा अन्य कणों के विश्िाष्ट समूह हो सकते हैं। दीप्त - तीव्रता का मात्राक केन्डेला ‘केन्डेला’ किसी दी गइर् दिशा में 540 1012 हट्जर् आवृिा वाले स्रोत की ज्योति - तीव्रता है, जो उस दिशा में 1 683 वाट प्रति स्िटरेडियन की विकिरण - तीव्रता का एकवणीर्य प्रकाश उत्स£जत करता है। रसायन विज्ञान प्रयोगशाला में किसी पदाथर् के द्रव्यमान के अिाक यथाथर्परक मापन के लिए वैश्लेष्िाक तुला ;चित्रा 1.5द्ध का उपयोग किया जाता है। गुणक पूवर्लग्न संकेत 10दृ24 10दृ21 10दृ18 10दृ15 10दृ12 10दृ9 10दृ6 10दृ3 10दृ2 10दृ1 10 102 103 106 109 1012 1015 1018 1021 1024 योक्टो जेप्टो ऐटो पेफम्टो पिको नैनो माइक्रो मिली सेंटी डेसी डेका हेक्टो किलो मेगा गीगा टेरा पेटा एक्सा जेटा योटा ल ्र ं िच द μ उ ब क कं ी ा ड ळ ज् च् म् र् ल् चित्रा 1.5 वैश्लेष्िाक तुला जैसा तालिका 1.1 में दिया गया है, द्रव्यमान का ैप् मात्राक ‘किलोग्राम’ है, परंतु प्रयोगशाला में इसके छोटे मात्राक ‘ग्राम’ ;1 किलोग्राम त्र 1000 ग्रामद्ध का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि रासायनिक अभ्िाियाओं में रासायनिक पदाथो± की थोड़ी मात्रा का ही उपयोग किया जाता है। आयतन आयतन के मात्राक लम्बाइर् के मात्राक होते हैं। अतः ैप् प(ति में आयतन का मात्राक उ3 होता है, परंतु रासायनिक प्रयोगशालाओं में इतने अिाक आयतनों का उपयोग नहीं किया जाता है। अतः आयतन को आम तौर पर बउ3 या कउ3 के मात्राकों में व्यक्त किया जाता है। द्रवों के आयतन को मापने के लिए प्रायः लिटर ;स्द्ध मात्राक का उपयोग किया जाता है, जो ैप् मात्राक नहीं है। 1स् त्र 1000 उस् अथवा 1000 बउ3 त्र स कउ3 चित्रा 1.6 में आप इन संबंधों को आसानी से देख सकते हैं। प्रयोगशाला में द्रवों या विलयनों के आयतन को मापने के लिए अंशांकित सि¯लडर, ब्यूरेट, पिपेट आदि का उपयोग कियाजाता है। आयतनमापी फ्रलास्क का उपयोग ज्ञात आयतन का विलयन बनाने के लिए किया जाता है। मापन के इन उपकरणों को चित्रा 1.7 में दिखाया गया है। घनत्व किसी पदाथर् का घनत्व उसके प्रति इकाइर् आयतन का द्रव्यमान होता है। अतः घनत्व के ैप् मात्राक इस प्रकार प्राप्त किए जा सकते हैं दृ घनत्व का ैप् मात्राक त्र ाहत्र या ाह उदृ3 3उयह मात्राक बहुत बड़ा है। रसायनज्ञ प्रायः घनत्व को ह बउदृ3में व्यक्त करते हैं, जहाँ द्रव्यमान को ग्राम ;हद्ध में और आयतन को बउ3 में व्यक्त किया जाता है। ताप ताप को मापने के तीन सामान्य पैमाने हैं दृ°ब् ;डिग्री सेल्िसयसद्ध, °थ् ;डिग्री पफारेनहाइटद्ध और ज्ञ ;केल्िवनद्ध। यहाँ ज्ञ ;केल्िवनद्ध ैप् मात्राक है। इन पैमानों पर आधारित तापमापियों को चित्रा 1.8 में दिखाया गया है। साधारणतया सेल्िसयस पैमाने वाले तापमापियों को 0° से 100° तक अंशांकित किया जाता है, जहाँ ये दोनों ताप क्रमशः जल के हिमांक और क्वथनांक हैं। पफाॅरेनहाइट पैमाने को 32°थ् और 212° के मध्य व्यक्त किया जाता है। इन दोनों पैमानों पर ताप एक - दूसरे से निम्नलिख्िात रूप में संबंिात हैμ9°त्रथ्ब्;द्ध32 °़ 5 केल्िवन पैमाना सेल्िसयस पैमाने से इस प्रकार संबंिात हैμ ज्ञ त्र°़273ण्15 ब् यह जानना रुचिकर होगा कि 0°ब् से कम ताप ;अथार्त् ट्टणात्मक मानद्ध सेल्िसयस पैमाने पर तो संभव है, परंतु केल्िवन पैमाने पर ताप का ट्टणात्मक मान संभव नहीं है। 1.4 मापन में अनिश्िचतता रसायन के अध्ययन में अनेक बार हमें प्रायोगिक आँकड़ों के साथ साथ सै(ांतिक गणनाओं पर विचार करना होता है। संख्याओं का सरलता से संचालन करना तथा आँकड़ों को यथा - संभव निश्िचतता के साथ यथाथर् प्रस्तुति करने के अथर्पूणर् तरीके भी हैं। इन्हीं मतों पर नीचे विस्तार से विचार किया जा रहा है। चित्रा 1.6 आयतन को व्यक्त करने के विभ्िान्न मात्राक चित्रा 1.7 आयतन मापने के विभ्िान्न उपकरण चित्रा 1.8 ताप के भ्िान्न - भ्िान्न पैमानों वाले तापमापी रसायन विज्ञान 1.4.1 वैज्ञानिक संकेतनसंदभर् - मानक किलोग्राम या मीटर सदृश मापन के मात्राक की परिभाषा निश्िचत करने के पश्चात् वैज्ञानिकों ने संदभर् - मात्राकों की आवश्यकता अनुभव की, ताकि सभी मापन - उपकरणों को मानकीकृत किया जा सके। मीटर - छड़ों, विश्लेषीय तुलाओं आदि उपकरणों को उनके निमार्ताओं द्वारा अंशांकित किया गया है, ताकि वे विश्वसनीय मापन दे सवेंफ, परंतु इनमें से प्रत्येक उपकरण को किसी संदभर् के सापेक्ष मानकीकृत किया गया था। सन् 1889 से द्रव्यमान का मानक किलोग्राम है, जो Úान्स के सेब्रेस में प्लेटिनम - इरिडियम ;च्ज.प्तद्ध सिलिंडर के द्रव्यमान के रूप में परिभाष्िात किया गया है, जो भार तथा मापन के अंतरार्ष्ट्रीय ब्यूरो में एक हवाबंद डिब्बे में रखा हुआ है। इस मानक के लिए च्ज.प्त की मिश्रधातु का चयन किया गया, क्योंकि यह रासायनिक अभ्िािया के प्रति अवरोधी है और अति दीघर् काल तक इसके द्रव्यमान में कोइर् परिवतर्न नहीं आएगा। द्रव्यमान के नए मात्राक के लिए वैज्ञानिकगण प्रयत्नशील हैं। इसके लिए आवोगाद्रो स्िथरांक का यथाथर्परक निधार्रण किया जा रहा है। एक प्रतिदशर् की सुपरिभाष्िात द्रव्यमान में परमाणुओं की संख्या के यथाथर् मापन पर इस नए मानक पर कायर् वेंफदि्रत है। ऐसी एक प(ति, जिसमें अतिविशु( सिलिकाॅन के िस्टल के परमाणवीय घनत्व को एक्स - रे द्वारा मापा जाता है, की शु(ता 106 में एक अंश है। इसे अभी तक मानक के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। और भी प(तियाँ हैं, परंतु इनमें से कोइर् भी प(ति अभी च्ज . प्त छड़ के विकल्प के रूप में समथर् नहीं है। ऐसी आशा की जा सकती है कि वतर्मान दशक में कोइर् समुचित वैकल्िपक मानक विकसित किया जा सकेगा। आरंभ में 0°ब् ;273ण्15 ज्ञद्ध पर रखी एक च्ज.प्त छड़ पर दो निश्िचत चिÉों के मध्य की लंबाइर् को ‘मीटर’ परिभाष्िात किया गया था। सन् 1960 में मीटर की लंबाइर् को िप्टाॅन लेजर ;स्ंेमतद्ध से उत्सजिर्त प्रकाश की तरंग - दैघ्यर् का 1ण्65076373106 गुना माना गया। यद्यपि यह एक असुविधाजनक संख्या थी, ¯वफतु यह मीटर की पूवर् सहमति लंबाइर् को सही रूप में दशार्ती है। सन् 1983 में ब्ळच्ड द्वारा मीटर पुनपर्रिभाष्िात किया गया, जो निवार्त में प्रकाश द्वारा 1/299.792 458 सेवंफड में तय की गइर् दूरी है। लंबाइर् और द्रव्यमान की भाँति अन्य भौतिक राश्िायों के लिए भी संदभर् मानक है। रसायन विज्ञान परमाणुओं और अणुओं के अध्ययन से संबंिात है, जिनके अत्यंत कम द्रव्यमान होते हैं और अत्यिाक संख्या होती है। अतः किसी रसायनज्ञ को 2ह हाइड्रोजन के अणुओं के लिए 662, 200, 000, 000, 000, 000, 000, 000 जैसी बड़ी संख्या या हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान के लिए 0.00000000000000000000000166 ह जैसी छोटी संख्या के साथ काम करना पड़ सकता है। इसी प्रकार प्लांक नियतांक,प्रकाश का वेग, कणों पर आवेश आदि में भी ऊपर दिए गए परिमाण वाली संख्याएँ होती हैं। एक क्षण के लिए इतनी सारी शून्यों वाली संख्याओं को लिखना और गिनना मशेदार लग सकता है, परंतु इन संख्याओं के साथ सरल गण्िातीय प्रचालन ;जैसे दृ जोड़ना, घटाना, गुणा करना या भाग देनाद्ध सचमुच एकचुनौती है। ऊपर दी गईं किन्हीं दो प्रकार की संख्याओं को आप लिख्िाए और उनपर कोइर् भी गण्िातीय प्रचालन कीजिए, ताकि आप सही प्रकार से यह समझ सवेंफ कि संख्याओं के साथ कायर् करना वस्तुतः कितना कठिन है। इस कठिनाइर् को इन संख्याओं के लिए वैज्ञानिक, अथार्त् चरघातांकी संकेतन के उपयोग द्वारा हल किया जा सकता है। इस संकेतन में किसी भी संख्या को छ 10द के रूप में लिखा जाता है, जिसमें द चरघातांक है। इसका मान धनात्मकया ट्टणात्मक हो सकता है और छ का मान 1.000... और 9.999... के मध्य कोइर् भी संख्या हो सकती है। छ को डिजिट टमर् करते हैं। अतः वैज्ञानिक संकेतन में 232ण्508 को 2ण्32508 102 के रूप में लिखा जाता है। ध्यान दीजिए कि ऐसा लिखते समय दशमलव को दो स्थान बाईं ओर ले जाया गया है और वैज्ञानिक संकेतन में वह ;2द्ध 10 का चरघातांक है। इसी प्रकार 0.00016 को 1ण्6 10दृ4 की तरह लिखा जा सकता है। यहाँ ऐसा करते समय दशमलव को चार स्थान दाईं ओर ले जाया गया है और वैज्ञानिक संकेतन में ;दृ4द्ध चरघातांक है। वैज्ञानिक संकेतन में व्यक्त संख्याओं पर गण्िातीय प्रचालन करते समय हमें निम्नलिख्िात बातों को ध्यान में रखना चाहिएदृ गुणा और भाग करना इन दो कायो± के लिए चरघातांकी संख्या वाले नियम लागू होते हैं। जैसे दृ 58 585ण्610 ×6ण्910 × त्र5ण्6 × ×6ण्9 10 त्र5ण्6 ×6ण्9 ×10 13 त्र 38ण्64 ×10 13 त्र 3ण्864 ×10 14 और 102 69ण्8 10× 2 × 2ण्5 ×10 6 त्र 9ण्8 ×2ण्5 त्र9ण्8 ×2ण्5 10 26 त्र 24ण्50 ×10 8 त्र 2ण्450 × 10 7 तथा 2ण्7 ×10 −3 −− दृ7 4त्र;2ण्7 झ्5ण्5 द्ध;1034 द्धत्र 0ण्4909 × 10 5ण्5 ×10 त्र 4ण्909 × 10 दृ8 योग करना और घटाना इन दो कायो± के लिए पहले संख्याओं को इस प्रकार लिखना पड़ता है कि उनके चरघातांक समान हों। उसके बाद संख्याओं को जोड़ा या घटाया जा सकता है। अतः 6ण्65 104 और 8ण्95 103 का योग करने के लिए पहले उनका चरघातांक समान करके इस प्रकार लिखा जाता हैμ 6ण्65 104 ़ 0ण्895 104 इसके बाद संख्याओं को इस प्रकार जोड़ा जा सकता हैμ ;6ण्65 ़ 0ण्895द्ध 104 त्र 7ण्545 104 इसी प्रकार दो संख्याओं को यों घटाया जा सकता हैμ 2ण्5 10दृ2 दृ 4ण्8 10दृ3 त्र ;2ण्5 10दृ2द्ध दृ ;0ण्48 10दृ2द्ध त्र ;2ण्5 दृ 0ण्48द्ध 10.2 त्र 2ण्02 10दृ2 1.4.2 साथर्क अंक प्रत्येक प्रायोगिक मापन में वुफछ न वुफछ अनिश्िचतता अवश्य होती है, परंतु परिणाम सदैव परिशु( और यथाथर्परक होने चाहिए। जब भी हम मापन की बात करते हैं, तब परिशु(ता और यथाथर् को भी ध्यान में रखा जाता है। परिशु(ता किसी भी राश्िा के विभ्िान्न मापनों के सामीप्य को व्यक्त करती है। परंतु यथाथर्परकता किसी विश्िाष्ट प्रायोगिक मान के वास्तविक मान से मेल रखने को व्यक्त करती है। उदाहरण के लिएμ यदि किसी परिणाम का सही मान 2ण्00 ह है और एक विद्याथीर् ‘क’ दो मापन करता है, उसे 1ण्95 ह और 1ण्93 ह परिणाम प्राप्त होते हैं। एक - दूसरे के बहुत पास होने के कारण ये मान परिशु( हैं, परंतु यथाथर्परक नहीं हैं। दूसरा विद्याथीर् ‘ख’ इन्हीं दो मापनों के लिए 1ण्94 ह और 2ण्05 ह परिणाम प्राप्त करता है। ये दोनों परिणाम न तो परिशु( हैं और न ही यथाथर्परक। तीसरे विद्याथीर् ‘ग’ को इन मापनों के लिए 2ण्01 ह और 1ण्99 ह परिणाम प्राप्त होते हैं। ये मान परिशु( भी हैं और यथाथर्परक भी। इसे तालिका 1ण्4 में दिखाए गए रूप से और आसानी से समझा जा सकता है। तालिका 1.4 आँकड़ों की परिशु(ता और यथाथर्ता का निरूपण मापनध्ह 1 2 औसत ;हद्ध छात्रा क 1ण्95 1ण्93 1ण्940 छात्रा खछात्रा ग 1ण्94 2ण्01 2ण्05 1ण्99 1ण्995 2ण्000 प्रायोगिक या परिकलित मानों में अनिश्िचतता को साथर्क अंकों की संख्या द्वारा व्यक्त किया जाता है। साथर्क अंक वे अथर्पूणर् अंक होते हैं, जो निश्िचत रूप से ज्ञात हों। अनिश्िचतताको व्यक्त करने के लिए पहले निश्िचत अंक लिखे जाते हैं औरअनिश्िचतता अंक को अंतिम अंक के रूप में लिखा जाता है,अथार्त् यदि हम किसी परिणाम को 11ण्2 उस् के रूप में लिखें, तो हम यह समझते हैं कि 11 निश्िचत और 2 अनिश्िचतहै तथा अंतिम अंक में ±1 की अनिश्िचतता होगी। यदि वुफछऔर न बताया गया हो, तो अंतिम अंक में सदैव ±1 की अनिश्िचतता निहित मानी जाती है।साथर्क अंकों को निधार्रित करने के वुफछ नियम हैं। जो,यहाँ दिए जा रहे हैं दृ ;1द्ध सभी गैर - शून्य अंक साथर्क होते हैं। उदाहरण के लिएμ 285 बउ मंे तीन साथर्क अंक और 0ण्25 उस् में दो साथर्क अंक हैं। ;2द्ध प्रथम गैर - शून्य अंक से पहले आने वाले शून्य साथर्कनहीं होते। ऐसे शून्य केवल दशमलव की स्िथति कोबताते हैं। अत: 0.03 में केवल एक साथर्क अंक और0.0052 में दो साथर्क अंक हैं। ;3द्ध दो गैर - शून्य अंकों के मध्य स्िथत शून्य साथर्क होते हैं।अतः 2.005 में चार साथर्क अंक हैं। ;4द्ध किसी अंक की दाईं ओर या अंत में आने वाले शून्यसाथर्क होते हैं, परंतु उनके लिए शतर् यह है कि वेदशमलव की दाईं ओर स्िथत हों। उदाहरण के लिए0.200 में तीन साथर्क अंक हैं, परंतु दशमलव विहीनसंख्याओं में दाईं ओर के शून्य साथर्क नहीं होते। उदाहरणके लिए 100 में केवल एक साथर्क अंक है।यद्यपि 100में तीन साथर्क अंक है तथा 100.0 में चार साथर्क अंकहै। ऐसी संख्याओं को वैज्ञानिक संकेतन में प्रदश्िार्त करनाउपयुक्त होता है। हम एक साथर्क अंक के लिए 100 को 1 102ए दो साथर्क अंकों के लिए 1ण्0 102 एवं तीन साथर्क अंकों के लिए 1ण्00 102 लिख सकते हैं। ;5द्ध वस्तुओं की गिनती, उदाहरण के लिए 2 गेंदों या 20 अंडोंमें साथर्क अंकों की संख्या अनंत है, क्यांेकि ये दोनों हीयथाथर्परक संख्याएँ हैं और इन्हें दशमलव लिखकर उसकेबाद अनंत शून्य लिखकर व्यक्त किया जा सकता है, जैसेμ 2 त्र 2ण्000000 या 20 त्र 20ण्000000 वैज्ञानिक संकेतन में लिखी संख्याओं में सभी अंक साथर्क होते हैं। अतः 4ण्01 102 में तीन और 8ण्256 10दृ3 में चार साथर्क अंक हैं। साथर्क अंकों को जोड़ना और घटाना जोड़ने या घटाने के बाद प्राप्त परिणाम में दशमलव की दाईं ओर जोड़ने या घटाने वाली किसी भी संख्या से अिाक अंक नहीं होने चाहिए। जैसे μ 12ण्11 18ण्0 1ण्012 31ण्122 ऊपर दिए गए उदाहरण में 18ण्0 में दशमलव के बाद केवल एक अंक है, अतः परिणाम भी दशमलव के बाद एक ही अंक तक, अथार्त् 31.1 के रूप में ही व्यक्त करना चाहिए। साथर्क अंकों को गुणा या भाग करना उन प्रचालनों के परिणाम में साथर्क अंकों की संख्या उतनी ही होनी चाहिए, जितनी न्यूनतम साथर्क अंक वाली संख्या में होती है। जैसे μ 2ण्5 ×1ण्25 3ण्125 चूँकि 2.5 में केवल दो साथर्क अंक हैं, इसलिए परिणाम में भी दो साथर्क अंक ;3.1द्ध होने चाहिए। जैसा उपरोक्त गण्िातीय प्रिया में किया गया है, परिणाम को आवश्यक साथर्क अंकों तक व्यक्त करने के लिए संख्याओं के निकटतम ;तवनदकपदह वद्धिि में निम्नलिख्िात बातों का ध्यान रखना चाहिए दृ 1.यदि सबसे दाईं ओर वाला अंक ;जिसे हटाना होद्ध 5 से अिाक हो, तो उससे पहले वाले अंक का मान एक अिाक कर दिया जाता है। जैसे दृ यदि 1.386 में 6 को हटाना हो, तो हम निकटतम के पश्चात् 1.39 लिखेंगे। 2.यदि सबसे दाईं ओर का हटाया जाने वाला अंक 5 से कम हो, तो उससे पहले वाले अंक को बदला नहीं जाएगा। जैसेμ 4.334 में यदि अंतिम 4 को हटाना हो, तो परिणाम को 4.33 के रूप में लिखा जाएगा। 3.यदि सबसे दाईं ओर का हटाया जाने वाला अंक 5 हो, तो उससे पहला अंक सम होने की स्िथति में बदला नहीं जाएगा, परंतु विषम होने पर एक बढ़ा दिया जाता है। जैसेμ यदि 6.35 को 5 हटाकर निकटतम करना हो, तो हमें 3 को बढ़ाकर 4 करना होगा और इस प्रकार परिणाम 6.4 व्यक्त किया जाएगा, परंतु यदि 6.25 का निकटतम करना हो, तो इसे 6.2 लिखा जाएगा। रसायन विज्ञान 1.4.3 विमीय विश्लेषण परिकलन करते समय कभी - कभी हमें मात्राकों को एक प(ति से दूसरी प(ति में रूपांतरित करना पड़ता है। ऐसा करने के लिए गुणक लेबल वििा ;ंिबजवत संइमस उमजीवकद्धए इकाइर् गुणक वििा ;नदपज ंिबजवत उमजीवकद्ध या विमीय विश्लेषण ;कपउमदेपवदंस ंदंसलेपेद्ध का उपयोग किया जाता है। उदाहरण 1 धातु का एक टुकड़ा 3 इंच ;पदबीद्ध लंबा है। बउ में इसकी लंबाइर् क्या होगी? हल हम जानते हैं कि 1 पदबी त्र 2ण्54 बउ इस समीकरण के आधर पर हम लिख सकते हैं कि 1पदबी त्रत्र1 2ण्54 बउ 2ण्54बउ 1पदबी 1पदबी 2ण्54बउ अतः 2ण्54बउ और 1पदबी दोनों 1 के बराबर हैं। इन दोनों को इकाइर् गुणक कहते हैं। यदि किसी संख्या का गुण इन इकाइर् गुणकों ;अथार्त् 1द्ध से किया जाए, तो वह परिवतिर्त नहीं होगी। मान लीजिए किऊपर दिए गए 3 का गुणा इकाइर् गुणक से किया जाता है। अतः 2ण्54बउ 3 पद त्र3 पद × त्र3×2ण्54बउ त्र7ण्62बउ 1पदबी यहाँ उस इकाइर् गुणक से गुणा किया जाता है ;ऊपर 2ण्54बउ सेद्ध, जिससे वांछित मात्राक प्राप्त हो जाएँ,1पद अथार्त् गुणक के अंश में वह मात्राक होना चाहिए, जो परिणाम में प्राप्त हो।ऊपर दिए गए उदाहरण में आप देख सकते हैं कि मात्राकों के साथ भी संख्याओं की तरह काम किया जा सकता है। उन्हें काटा जा सकता है और भाग, गुणा, वगर् आदि किया जा सकता है। आइए, वुफछ और उदाहरण देखें। उदाहरण 2 एक जग में 2स् दूध है। दूध का आयतन उ3 में परिकलित कीजिए। हल हम जानते हैं कि 1स् त्र 1000 बउ3 और 1उ त्र100बउ 1उ 100बउ जिससे 1 प्राप्त होता है।100बउ 1उइन इकाइर् गुणकों से उ3 प्राप्त करने के लिए पहले इकाइर् गुणक का घन लेना पड़ता है। ⎛ 1उ ⎞3 1उ3 ⇒त्र 13 त्र1⎜⎟ 63 ;द्ध100बउ 10 बउ ⎝⎠ अब 2स् त्र 2 ×1000बउ 3 इसे इकाइर् गुणक से गुणा करने पर हम पाते हैं 1उ3 2उ 3 3 3321000बउ × त्र × उ× त्र210 63 310बउ 10 उदाहरण 3 2 दिनों में कितने सेवंफड ;ेद्ध होते हैं? हल हम जानते हैं कि 1 दिन ;कंलद्ध त्र 24 घंटे ;ीद्ध 1कंल 24 ी या 1 और 1ी त्र60 उपद 24 ी 1कंल1ी 60 उपद या 1 60 उपद 1ी अतः दो दिनों को सेवंफड में परिवतिर्त करने के लिए 2 दिन −−−−−−त्र−−−−−−े इकाइर् गुणकों को एक ही चरण में श्रेणीब( रूप से इस प्रकार गुणा किया जा सकता हैμ 24ी 60उपद 60े 2कंल × × × 1कंल 1ी 1उपद 2×24×60×60े 172800े 1.5 रासायनिक संयोजन के नियम तत्त्वों के संयोजन से यौगिकों का बनाना निम्नलिख्िात पाँच मूल नियमों के अंतगर्त होता हैμ 1.5.1 द्रव्यमान - संरक्षण का नियम इस नियम के अनुसार द्रव्य न तो बनाया जा सकता है, और न ही नष्ट किया जा सकता है। इस नियम को आंतोएन लावूसिए आंतोएन लावूसिएने सन् 1789 में दिया था। उन्होंने दहन ;1743 - 1794द्ध अभ्िाियाओं का प्रायोगिक अध्ययन ध्यान - पूवर्क किया औरपिफर ऊपर दिए गए निष्कषर् पर पहुँचे। रसायन विज्ञान की बाद की कइर् संकल्पनाएँ इसी पर आधारित हैं। वास्तव में अभ्िाकमर्कों और उत्पादों के द्रव्यमानों के यथाथर्परक मापनों और लावूसिए द्वारा प्रयोगों को ध्यानपूवर्क करने के कारण ऐसा संभव हुआ। 1.5.2 स्िथर अनुपात का नियम यह नियम Úान्सीसी रसायनज्ञ जोसेपफ प्राउस्ट ने दिया था। उनके अनुसार,किसी यौगिक में तत्त्वों के द्रव्यमानों का अनुपात सदैव समान होता है। प्राउस्ट ने क्यूपि्रक काबोर्नेट के दो नमूनों के साथ प्रयोग किया, जिनमें सेजोसेपफ प्राउस्टएक प्राकृतिक और दूसरा संश्लेष्िात था।;1754 - 1826द्धउन्होंने पाया कि इन दोनों नमूनों में तत्त्वों का संघटन समान था, जैसा नीचे दिया गया है। नमूना ताँबे का आॅक्सीजन का काबर्न का प्रतिशत प्रतिशत प्रतिशत प्राकृतिक 51.35 9.74 38.91 संश्लेष्िात 51.35 9.74 38.91 अतः ड्डोत पर निभर्र न करते हुए किसी यौगिक में तत्त्व समान अनुपात में पाए जाते हैं। इस नियम को कइर् प्रयोगों द्वारा सत्यापित किया जा चुका है। इसे कभी - कभी ‘निश्िचत संघटन का नियम’ भी कहा जाता है। 1.5.3 गुण्िात अनुपात का नियम यह नियम डाल्टन द्वारा सन् 1803 में दिया गया। इस नियम के अनुसार, यदिदो तत्त्व संयोजित होकर एक से अिाक यौगिक बनाते हैं, तो एकतत्त्व के साथ दूसरे तत्त्व के संयुक्त होने वाले द्रव्यमान छोटे पूणा±कों के अनुपात में होते हैं। जोसेपफ लुइस गै - लुसैकउदाहरण के लिए दृ हाइड्रोजन आॅक्सीजन के साथ संयुक्त होकर दो यौगिक ;जल और हाइड्रोजन परआॅक्साइडद्ध बनाती है। हाइड्रोजन ़ आॅक्सीजन → जल 2 ह 16 ह 18 ह हाइड्रोजन ़ आॅक्सीजन →हाइड्रोजन परआॅक्साइड 2 ह 32 ह 34 ह यहाँ आॅक्सीजन के द्रव्यमान ;अथार्त् 16 ह और 32 हद्ध, जो हाइड्रोजन के निश्िचत द्रव्यमान ;2हद्ध के साथ संयुक्त होते हैं, एक सरल अनुपात 16रू32 या 1रू2 में होते हैं। रसायन विज्ञान 1.5.4 गै - लुसैक का गैसीय आयतनों का नियम यह नियम गै - लुसैक द्वारा सन् 1808 में दिया गया। उन्होंने पाया कि जब रासायनिक अभ्िाियाओं में गैसें संयुक्त होती हैं या बनती हैं, तो उनके आयतन सरल अनुपात में होते हैं, बशतेर् सभी गैसें समान ताप और दाब पर हों। अतः हाइड्रोजन के 100 उस् आॅक्सीजन के 50 उस् के साथ संयुक्त होकर 100 उस् जल - वाष्प देते हैं। हाइड्रोजन ़ आॅक्सीजन → जल 100 उस् 50 उस् 100 उस् अतः हाइड्रोजन और आॅक्सीजन के आयतन ;जो आपस में संयुक्त, अथार्त् 100 उस् और 50 उस् होते हैंद्ध आपस में सरल अनुपात 2रू1 में होते हैं। गै - लुसैक के आयतन संबंधों के पूणा±क अनुपातों की खोज वास्तव में आयतन के संदभर् में ‘स्िथर अनुपात का नियम’ है। पहले बताया गया स्िथर अनुपात का नियम द्रव्यमान के संदभर् में है। गै - लुसैक के कायर् की परिपणर् सन् 1811 में आवोगाद्रो के द्वारा की गइर्। 1.5.5 आवोगाद्रो का नियम सन् 1811 में आवोगाद्रो ने प्रस्तावित किया कि समान ताप और दाब पर गैसों के समान आयतनों में अणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। आवोगाद्रो ने परमाणुओं और अणुओं के बीच अंतर की व्याख्या की, जो आज आसानी से समझ में आती है। यदि हम हाइड्रोजन और आॅक्सीजन की जल बनाने की अभ्िावि्रफया को दुबारा देखें, तो यह कह सकते हैं कि हाइड्रोजन के दो आयतन और आॅक्सीजन का एक आवोगाद्रोआयतन आपस में संयुक्त होकर जल के ;1776 - 1856द्धदो आयतन देते हैं और आॅक्सीजन लेशमात्रा भी नहीं बचती है। चित्रा 1.9 में ध्यान दीजिए कि प्रत्येक डिब्बे में अणुओं की संख्या समान है। वास्तव में आवोगाद्रो ने इन परिणामों की व्याख्या अणुओं को बहुपरमाणुक मानकर की। यदि हाइड्रोजन और आॅक्सीजन को द्वि - परमाणुक मानाजाता जैसा अभी है, तो ऊपर दिए गए परिणामों को समझना कापफी आसान है। परंतु उस समय डाल्टन और कइर् अन्य लोगों का यह मत था कि एक जैसे परमाणु आपस में संयुक्त नहीं हो सकते और हाइड्रोजन या आॅक्सीजन के दो परमाणुओं वाले अणुउपस्िथत नहीं हो सकते। आवोगाद्रो का प्रस्ताव Úांसीसी में ;श्रवनतदंस कम च्ीलेपकनम मेंद्ध प्रकाश्िात हुआ। सही होने के बाद भी इस मत को बहुत बढ़ावा नहीं मिला। लगभग 50 वषो± के बाद ;सन् 1860 मेंद्ध जमर्नी ;काल्सर्रूहद्ध में रसायन विज्ञान पर प्रथम अंतरार्ष्ट्रीय सम्मेलन आहूत हुआ, ताकि कइर् मतों को सुलझाया जा सके। उसमें स्तेनिस्लाओ केनिशारो ने रसायन - दशर्न पर विचार प्रस्तुत करतेसमय आवोगाद्रो के कायर् के महत्त्व पर बल दिया। 1.6 डाल्टन का परमाणु सि(ांत हालाँकि द्रव्य के छोटे अविभाज्य कणों, जिन्हें एटोमोस ;ंजवउवेद्ध अथार्त् ‘अविभाज्य’ कहा जाता था, द्वारा बनेहोने के विचार की उत्पिा ग्रीक दशर्नशास्त्राी डिमेिट्स ;460.370 ठब्द्ध के समय हुइर्, परंतु कइर् प्रायोगिक अध्ययनों ;जिन्होंने उपरोक्त नियमों को जन्म दियाद्ध जाॅन डाल्टन के पफलस्वरूप इस पर पिफर से विचार ;1776 - 1884द्ध किया जाने लगा। सन् 1808 में डाल्टन ने रसायन - दशर्नशास्त्रा की एक नइर् प(ति ;। छमू ैलेजमउ व िब्ीमउपबंस च्ीपसवेवचीलद्ध प्रकाश्िात की, जिसमें उन्होंने निम्नलिख्िात तथा प्रस्तावित किएμ चित्रा 1.9 हाइड्रोजन के दो आयतन आॅक्सीजन के एक आयतन के साथ अभ्िािया करके जल के दो आयतन बनाते हैं ;कद्ध द्रव्य अविभाज्य परमाणुओं से बना है। ;खद्ध किसी दिए हुए तत्त्व के सभी परमाणुओं के एक समान द्रव्यमान सहित एक समान गुणधमर् होते हैं। विभ्िान्नतत्त्वों के परमाणु द्रव्यमान में भ्िान्न होते हैं। ;गद्ध एक से अिाक तत्त्वों के परमाणुओं के निश्िचत अनुपात में संयोजन से यौगिक बनते हैं। ;घद्ध रासायनिक अभ्िाियाओं में परमाणु पुनव्यर्वस्िथत होते हैं। रासायनिक अभ्िाियाओं में न तो उन्हें बनाया जा सकता है, न नष्ट किया जा सकता है। डाल्टन के इस सि(ांत से रासायनिक संयोजन के नियमों की व्याख्या की जा सकी। 1.7 परमाणु द्रव्यमान और आण्िवक द्रव्यमान परमाणुओं और अणुओं से परिचित होने के पश्चात् अब यह समझना उचित होगा कि परमाणु द्रव्यमान और आण्िवक द्रव्यमान से हम क्या समझते हैं। 1.7.1 परमाणु द्रव्यमान परमाणु द्रव्यमान, अथार्त् किसी परमाणु का द्रव्यमान वास्तव में बहुत कम होता है, क्योंकि परमाणु अत्यंत छोटे होते हैं। आज सही - सही परमाणु द्रव्यमान ज्ञात करने की बेहतर तकनीवंेफ ;जैसेμ द्रव्यमान स्पेक्ट्रममितिद्ध हमारे पास उपलब्ध हैं। परंतु जैसा पहले बताया गया है, उन्नीसवीं शताब्दी में वैज्ञानिक एक परमाणु का द्रव्यमान दूसरे के सापेक्ष प्रायोगिक रूप से निधार्रित कर सकते थे। हाइड्रोजन परमाणु को सबसे हल्का होने के कारण स्वेच्छ रूप से 1 द्रव्यमान ;बिना किसी मात्राक केद्धदिया गया और बाकी सभी तत्त्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान उसके सापेक्ष दिए गए, परंतु परमाणु द्रव्यमानों की वतर्मान प(ति काबर्न - 12 मानक पर आधारित है। इसे सन् 1961 मेंस्वीकृत किया गया। यहाँ काबर्न - 12 का एक समस्थानिक है, जिसे 12ब् को 12 परमाणु - द्रव्यमान मात्राक ;ंजवउपब उंेे नदपज.ंउनद्ध द्रव्यमान दिया गया है। बाकी सभी तत्त्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान इसे मानक मानकर इसके सापेक्ष दिए जाते हैं। एक परमाणु द्रव्यमान मात्राक को एक काबर्न - 12 1परमाणु के द्रव्यमान के वें भाग के रूप में परिभाष्िात किया12 जाता है। और 1 ंउन त्र 1ण्66056 10दृ24ह हाइड्रोजन के एक परमाणु का द्रव्यमान त्र 1ण्6736 10दृ24ह अतः ंउन के पदों में हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान 1ण्6736 ×10 24ह त्र 1ण्66056 ×10 24ह त्र 1ण्0078 न त्र 1ण्0080 न इसी प्रकार, आॅक्सीजन दृ16;16व्द्ध परमाणु का द्रव्यमान 15ण्995 ंउन होगा। आजकल ंउन के स्थान पर न का प्रयोग किया जाता है, जिसे ‘एकीकृत द्रव्यमान’ ;नदपपिमक उंेेद्ध कहा जाता है। जब हम गणनाओं के लिए परमाणु द्रव्यमानों का प्रयोग करते हैं, तो वास्तव में हम औसत परमाणु द्रव्यमानों का उपयोग करते हैं, जिनका वणर्न नीचे किया जा रहा है। 1.7.2 औसत परमाणु द्रव्यमान प्रकृति में अनेक तत्त्व एक से अिाक समस्थानिकों के रूप में पाए जाते हैं। जब हम इन समस्थानिकों की उपस्िथति और उनकी आपेक्ष्िाक बाहुल्यता ;प्रतिशत - उपलब्धताद्ध को ध्यान मेंरखते हैं, तो किसी तत्त्व का औसत परमाणु द्रव्यमान परिकलित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए काबर्न के तीन समस्थानिक होते हैं, जिनकी आपेक्ष्िाक बाहुल्यताएँ और द्रव्यमान इस सारणी में उनके सामने दशार्ए गए हैं दृ समस्थानिक आपेक्ष्िाक परमाणु बाहुल्यत ;ःद्ध द्रव्यमान ;नद्ध 12 ब् 98ण्892 12 13 ब् 1ण्108 13ण्00335 14 ब् 210दृ10 14ण्00317 ऊपर दिए गए आँकड़ों से काबर्न का औसत परमाणु द्रव्यमान इस प्रकार प्राप्त होगाμ औसत परमाणु द्रव्यमान त्र ;0ण्98892द्ध ;12 नद्ध ़ ;0ण्01108द्ध ;13ण्00335 नद्ध ़ ;2 10दृ10द्ध ;14ण्003ण्17 नद्ध त्र 12ण्011 न इसी प्रकार, अन्य तत्त्वों के लिए भी औसत परमाणुद्रव्यमान परिकलित किए जा सकते हैं। तत्त्वों की आवतर् सारणीमें विभ्िान्न तत्त्वों के लिए दिए गए परमाणु द्रव्यमान उन तत्त्वों के औसत परमाणु द्रव्यमान होते हैं। 1.7.3 आण्िवक द्रव्यमान किसी अणु का आण्िवक द्रव्यमान उसमें उपस्िथत विभ्िान्नतत्त्वों के परमाणु द्रव्यमानों का योग होता है। इसे प्रत्येक तत्त्व के परमाणु द्रव्यमान और उपस्िथत परमाणुओं की संख्या के गुणनपफलों के योग द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए दृ मेथैन ;जिसमें एक काबर्न परमाणु और चार हाइड्रोजन परमाणु उपस्िथत होते हैंद्ध का आण्िवक द्रव्यमान इस प्रकार प्राप्त किया जा सकता हैμ मेथैन ;ब्भ्4 द्ध का आण्िवक द्रव्यमान त्र ;12ण्011नद्ध ़ 4 ;1ण्008 नद्ध त्र 16ण्043 न इसी प्रकार, जल ;भ्व्द्ध का आण्िवक द्रव्यमान त्र 22 हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान ़ 1 आॅक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान त्र 2 ;1ण्008 नद्ध ़ 16 न त्र 18ण्02 न उदाहरण 1.1 ग्लूकोस ; 6 12 6ब्भ् व्परिकलित कीजिए। द्ध अणु का आण्िवक द्रव्यमान हल ग्लूकोस ; 6 12 6ब्भ् व् द्ध का आण्िवक द्रव्यमान त्र 6 ;12ण्011नद्ध ़ 12 ;1ण्008 नद्ध ़ 6 ;16ण्00 नद्ध त्र ;72ण्066 नद्ध ़ 12ण्096 नद्ध ़ ;96ण्00 नद्ध त्र 180ण्162 न 1.7.4 सूत्रा - द्रव्यमान वुफछ पदाथो± ;जैसे दृ सोडियम क्लोराइडद्ध में उनकी घटक इकाइयों के रूप में विविक्त अणु उपस्िथत नहीं होते। ऐसेयौगिकों में धनात्मक ;सोडियमद्ध और ट्टणात्मक ;क्लोराइडद्ध चित्रा 1.10 सोडियम क्लोराइड में छं़ और ब्सदृ आयनों की व्यवस्था रसायन विज्ञान कण त्रिाविमीय संरचना चित्रा 1ण्10 के अनुसार व्यवस्िथत रहते हैं। इस प्रकार, सूत्रा ;जैसे दृ छंब्सद्ध का प्रयोग सूत्रा - द्रव्यमान परिकलित करने के लिए किया जाता है, न कि आण्िवक द्रव्यमान के परिकलन के लिए, क्योंकि ठोस अवस्था में सोडियम क्लोराइड में अणु उपस्िथत ही नहीं होते। अतः सोडियम क्लोराइड का सूत्रा द्रव्यमान त्र सोडियम का परमाणु द्रव्यमान ़ क्लोरीन का परमाणु द्रव्यमान त्र 23ण्0 न ़ 35ण्5 न त्र 58ण्5 न 1.8 मोल - संकल्पना और मोलर द्रव्यमान परमाणु और अणु आकार में अत्यंत छोटे होते हैं, परंतु किसी पदाथर् की बहुत कम मात्रा में भी उनकी संख्या बहुत अिाक होती है। इतनी बड़ी संख्याओं के साथ काम करने के लिए इतने ही परिमाण के एक मात्राक की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार हम 12 वस्तुओं के लिए ‘एक दजर्न’, 20 वस्तुओं के लिए ‘एक स्कोर’ ;ैबवतमए समंकद्ध और 144 वस्तुओं के लिए ‘एक ग्रोस’ ;हतवेेद्ध का प्रयोग करते हैं, उसी प्रकार अतिसूक्ष्म स्तर पर कणों ;जैसे - परमाणुओं, अणुओं, कणों, इलेक्ट्राॅनों आदिद्ध को गिनने के लिए मोल की धारणा का उपयोग किया जाता है। ैप् मात्राकों में मोल ;संकेतμ उवसद्ध को किसी पदाथर् की मात्रा व्यक्त करने के लिए सात आधार राश्िायों में सम्िमलित किया गया था। किसी पदाथर् का एक मोल उसकी वह मात्रा है, जिसमें उतने ही कण उपस्िथत होते हैं, जितने काबर्नदृ12 समस्थानिक के ठीक 12ह ;या 0ण्012 ाहद्ध में परमाणुओं की संख्या होती है। यहाँ यह ध्यान देने की बात है कि किसी पदाथर् के एक मोल में कणों की संख्या सदैव समान होगी, भले ही वह कोइर् भी पदाथर् हो। इस संख्या के सही निधार्रण के लिए काबर्न दृ12 परमाणु का द्रव्यमान, द्रव्यमान स्पेक्ट्रममापी द्वारा ज्ञात किया गया, जिसका मान 1ण्992648 10दृ23ह प्राप्त हुआ। काबर्न के 1 मोल का द्रव्यमान 12 ह होता है, अतः काबर्न के 1 मोल में परमाणुओं की संख्या इस प्रकार होगी दृ 12हध्उवस 12 ब् 10दृ23 12 ब् परमाणु1ण्992648 ×हध् 6ण्0221367 ×1023 परमाणु प्रति मोल1 मोल में कणों की संख्या इतनी महत्त्वपूणर् है कि इसे एक अलग नाम और संकेत दिया गया, जिसे ;आमीदियो आवोगाद्रो के सम्मान मेंद्ध ‘आवोगाद्रो संख्या’ कहते हैं और छ से। व्यक्त करते हैं। इस संख्या के बड़े परिमाण को अनुभव करने के लिए इसे दस की घात का उपयोग किए बिना आने वाले सभी शून्यों के साथ इस प्रकार लिखें दृ 6 022 136 700 00 00 00 00 00 00 00 अतः किसी पदाथर् के 1 मोल में दी गइर् पूवोर्क्त संख्या के बराबर कण ;परमाणु, अणु या कोइर् अन्य कणद्ध होंगे। अतः हम यह कह सकते हैं कि 1 मोल हाइड्रोजन परमाणु त्र 6ण्022 1023 हाइड्रोजन परमाणु 1 मोल जल - अणु त्र 6ण्022 1023 जल - अणु 1 मोल सोडियम क्लोराइड त्र सोडियम क्लोराइड की 6ण्022 1023 सूत्रा इकाइयाँ चित्रा 1ण्11 में विभ्िान्न पदाथो± के 1 मोल को दशार्या गया है। चित्रा 1.11 विभ्िान्न पदाथो± का एक मोल मोल को परिभाष्िात करने के बाद किसी पदाथर् या उसके घटकों के एक मोल के द्रव्यमान को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है। किसी पदाथर् के एक मोल के ग्राम में व्यक्त द्रव्यमान को उसका ‘मोलर द्रव्यमान’ कहते हैं। ग्राम में व्यक्त मोलर द्रव्यमान संख्यात्मक रूप से परमाणु द्रव्यमान / आण्िवक द्रव्यमान / सूत्रा द्रव्यमान के बराबर होता है। अतः जल का मोलर द्रव्यमान त्र 18ण्02 ह उवस.1 सोडियम क्लोराइड का मोलर द्रव्यमान त्र 58ण्5 ह उवस.1 1.9 प्रतिशत - संघटन अभी तक हम किसी नमूने में उपस्िथत कणों की संख्या के बारे में चचार् कर रहे थे, परंतु कइर् बार किसी यौगिक में किसी विशेष तत्त्व के प्रतिशत की जानकारी की आवश्यकता होती है। मान लीजिए कि आपको कोइर् अज्ञात या नया यौगिक दिया गया है। आप पहले यह प्रश्न पूछेंगे कि इसका सूत्रा क्या है या इसके घटक कौन - कौन से हैं और वे किस अनुपात में उपस्िथत हैं? ज्ञात यौगिकों के लिए भी इस जानकारी से यह पता लगाने में सहायता मिलती है कि क्या दिए गए नमूने में तत्त्वों का वही प्रतिशत है, जो शु( नमूने में होना चाहिए। दूसरे शब्दों मेंμ इन आँकड़ों के विश्लेषण से यह जानने में सहायता मिलती है कि दिया गया नमूना शु( है या नहीं। आइए, जल ;भ् व्द्ध का उदाहरण लेकर इसे समझें। चूँकि2जल में हाइड्रोजन और आॅक्सीजन उपस्िथत होती हैं, अतः इन तत्त्वों का प्रतिशत - संघटन इस प्रकार परिकलित किया जा सकता हैदृ किसी तत्त्व का द्रव्यमान प्रतिशत जल का मोलर द्रव्यमान त्र 18ण्02 ह 2 ×1ण्008 हाइड्रोजन का द्रव्यमान प्रतिशत त्र ×100 18ण्02 त्र11ण्18 16ण्00 आॅक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत त्र ×100 18ण्02 त्र 88ण्79 आइए, एक और उदाहरण लें। एथेनाॅल में काबर्न, हाइड्रोजन और आॅक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत कितना है? एथेनाॅल का आण्िवक सूत्रा त्रब् भ्व्भ् 25एथेनाॅल का मोलर द्रव्यमान ;2 ×12ण्01 61ण्008 ़16ण्00द्धह × त्र 46ण्068ह 24ण्02ह काबर्न का द्रव्यमान प्रतिशत त्र ×100 त्र 52ण्14ः 46ण्068 हाइड्रोजन का द्रव्यमान प्रतिशत 6ण्048ह त्र ×100 त्र13ण्13ः 46ण्068ह आॅक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत 15ण्9994ह त्र ×100 त्र 34ण्728ः 46ण्068ह द्रव्यमान - प्रतिशत के परिकलनों को समझने के बाद अबहम यह देखें कि प्रतिशत - संघटन आँकड़ों से क्या जानकारीप्राप्त की जा सकती है। 1.9.1 मूलानुपाती सूत्रा और आण्िवक सूत्रा मूलानुपाती सूत्रा किसी यौगिक में उपस्िथत विभ्िान्न परमाणुओं के सरलतम पूणर् संख्या - अनुपात को व्यक्त करता है, रसायन विज्ञान उदाहरण 1.2 एक यौगिक में 4ण्07ः हाइड्रोजन, 24ण्27ः काबर्न और 71ण्65ः क्लोरीन है। इसका मोलर द्रव्यमान 98ण्96 ह है। इसके मूलानुपाती सूत्रा और आण्िवक सूत्रा क्या होंगे? हल चरण - 1 द्रव्यमान - प्रतिशत को ग्राम में परिवतिर्त करना चूँकि हमारे पास द्रव्यमान - प्रतिशत उपलब्ध् है, अतः 100 ह यौगिक को मानकर परिकलन करनासुविधजनक होगा। इस प्रकार, ऊपर दिए गए यौगिक के 100 ह प्रतिदशर् में 4ण्07 ह हाइड्रोजन, 24ण्27 ह काबर्न 71ण्65 ह क्लोरीन उपस्िथत है। चरण - 2 प्रत्येक तत्त्व को मोलों की संख्या में परिवतिर्त करना ऊपर प्राप्त द्रव्यमानों को क्रमशः प्रत्येक के परमाणु - द्रव्यमान से विभाजित कीजिए। 4ण्07ह हाइड्रोजन के मोलों की संख्या 4ण्04 1ण्008ह 24ण्27ह काबर्न के मोलों की संख्या 2ण्021 12ण्01ह 71ण्65ह क्लोरीन के मोलों की संख्या 2ण्021 35ण्453 ह चरण - 3 ऊपर प्राप्त मोलों की संख्या को सबसे छोटी संख्या से विभाजित करना चूँकि 2ण्021 सबसे छोटा मान है, अतः 2ण्021 से विभाजन करने पर भ् रू ब् रू ब्स के लिए 2 रू 1 रू 1 अनुपात प्राप्त होता है। यदि ये अनुपात पूणर् संख्याएँ न हों, तो इन्हें उपयुक्त गुणांक से गुणा करके पूणर् संख्याओं में परिवतिर्त किया जा सकता है। चरण - 4 सभी तत्त्वों के संकेत लिखकर क्रमशःऊपर प्राप्त संख्याओं को उसके साथ दशार्कर मूलानुपाती सूत्रा लिख्िाए। अतः ऊपर दिए गए यौगिक का मूलानुपाती सूत्रा ब्भ् ब्स है।2चरण - 5 आण्िवक सूत्रा लिखना ;कद्ध मूलानुपाती सूत्रा द्रव्यमान निधर्रित कीजिए। मूलानुपाती सूत्रा में उपस्िथत सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग कीजिए। ब्भ् ब्स के लिए, मूलानुपाती सूत्रा द्रव्यमान2त्र12ण्01 ़×1ण्008 2 ़35ण्453 त्र 49ण्48ह ;खद्ध मोलर द्रव्यमान को मूलानुपाती सूत्रा द्रव्यमान से विभाजित कीजिए। मोलर द्रव्यमान 98ण्96 हमूलानुपाती सूत्रा द्रव्यमान 2 ;दद्ध49ण्48 ह ;गद्धमूलानुपाती सूत्रा को ऊपर प्राप्त द से गुणा करने पर आण्िवक सूत्रा प्राप्त होता है। मूलानुपाती सूत्रा ब्भ् ब्स और द त्र 2 है।2अतः आण्िवक सूत्रा ब्भ्ब्स है।24 2 जबकि आण्िवक सूत्रा किसी यौगिक के अणु में उपस्िथत विभ्िान्न प्रकार के परमाणुओं की सही संख्या को दशार्ता है।यदि किसी यौगिक में उपस्िथत सभी तत्त्वों का द्रव्यमान - प्रतिशत ज्ञात हो, तो उसका मूलानुपाती सूत्रा निधार्रित किया जा सकता है। यदि मोलर द्रव्यमान ज्ञात हो, तो मूलानुपाती सूत्रा से आण्िवक सूत्रा ज्ञात किया जा सकता है। इन चरणों को इस उदाहरण द्वारा दशार्या गया हैμ 1.10 स्टाॅइकियोमीट्री और स्टाॅइकियोमीटिªक परिकलन ‘स्टाॅइकियोमीट्री’ शब्द दो ग्रीक शब्दों दृ ‘स्टाॅकियोन’ ;ेजतपबीमपवदद्धए जिसका अथर् ‘तत्त्व’ है और मेट्रोन ;उमजतवदद्धए जिसका अथर् ‘मापना’ है, से मिलकर बना है। अतः ‘स्टाॅइकियोमीट्री’ के अंतगर्त रासायनिक अभ्िािया में अभ्िाियकों और उत्पादों के द्रव्यमानों ;या कभी - कभी आयतनोंद्ध का परिकलन आता है। यह समझने से पहले कि किसी रासायनिक अभ्िािया में किसी अभ्िाियक की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी या कितना उत्पाद प्राप्त होगा, यह जान लें कि किसी दी गइर् रासायनिक अभ्िािया के संतुलित रासायनिक समीकरण से क्या जानकारी प्राप्त होती है। आइए, मेथेन के दहन पर विचार करें। इस अभ्िािया के लिए संतुलित समीकरण इस प्रकार है दृ ब्भ्;हद्ध 4 2 ब्व्;हद्ध 22व् ;हद्ध 2 2भ् व्;हद्ध यहाँ मेथेन और डाइआॅक्सीजन को ‘अभ्िाियक’ या अभ्िाकारक कहा जाता है और काबर्न डाइआॅक्साइड तथा जल को ‘उत्पाद’ कहते हैं। ध्यान दीजिए कि ऊपरोक्त अभ्िािया में सभी अभ्िाियक और उत्पाद गैसें हैं और इसे उनके सूत्रों के बाद कोष्ठक में ह अक्षर को लिखकर व्यक्त किया जाता है। इसी प्रकार, ठोसों और द्रवों के लिए क्रमशः ;ेद्ध और ;सद्ध लिखे जाते हैं। व् और भ्व् के लिए गुणांक 2 को ‘स्टाॅइकियोमीटिªक22गुणांक’ कहा जाता है। इसी प्रकार ब्भ् और ब्व् दोनों के लिए42यह गुणांक 1 है। ये गुणांक अभ्िािया में भाग ले रहे या बनने वाले अणुओं की संख्या ;या मोलों की संख्याद्ध को व्यक्त करते हैं। अतः ऊपर दी गइर् अभ्िािया के अनुसार 17 ऽ ब्भ् ;हद्ध का एक मोल व्;हद्ध के 2 मोलों के साथ42अभ्िािया करके एक मोल ब्व् ;हद्ध और 2 मोल2भ् व्;हद्ध देता है।2ऽ ब्भ् ;हद्ध का एक अणु व्;हद्ध के दो अणुओं के साथ42अभ्िािया करके ब्व् ;हद्ध का एक अणु और भ्व्;हद्ध 22के दो अणु देता है। ऽ 22ण्7स्ब्भ् ;हद्धए45ण्4स्व् ;हद्ध के साथ अभ्िािया42द्वारा 22ण्7स् ब्व् ;हद्ध और 45ण्4स्भ् व्;हद्ध देती है।22ऽ 16 हब्भ् ;हद्धए2 4 × 32ह व् ;हद्ध के साथ अभ्िािया2 करके 44हब्व् ;हद्ध और ×218ह भ् व्;हद्ध देती22रासायनिक समीकरण संतुलित करनाद्रव्यमान संरक्षण के नियमानुसार, संतुलित रासायनिक समीकरण के दोनों ओर प्रत्येक तत्त्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है। कइर् रासायनिक समीकरण ‘जाँच और भूल - प(ति से संतुलित किए जा सकते हैं। आइए, हम वुफछ धतुओं और अधतुओं का संयोग कर आॅक्सीजन के साथ आॅक्साइड उत्पन्न करने की अभ्िाियाओं पर विचार करें दृ 2 2 34थ्म;ेद्ध 3व् ;हद्ध 2थ्म व् ;ेद्ध ़ → ;कद्ध संतुलित समीकरण ़ →22डह;ेद्ध व् ;हद्ध 2डहव्;ेद्ध ;खद्ध संतुलित समीकरण ़ →4 2 4 10 च्;ेद्ध व् ;हद्ध च् व् ;ेद्ध ;गद्ध असंतुलित समीकरण समीकरण ;कद्ध और ;खद्ध संतुलित हैं, क्योंकि समीकरणों में तीर के दोनों ओर संबंध्ित धतु और आॅक्सीजन के परमाणुओं की संख्या समान है, परंतु समीकरण ;गद्ध संतुलित नहीं है, क्योंकि इसमें पफाॅस्पफोरस के परमाणु तो संतुलित हंै, परंतु आॅक्सीजन के परमाणुओं की संख्या तीर के दोनों ओर समान नहीं है। इसे संतुलित करने के लिए समीकरण में बाईं ओर आॅक्सीजन के पूवर् में 5 से गुणा करने पर ही समीकरण की दाईं ओर आॅक्सीजन के परमाणुओं की संख्या संतुलित होगी दृ च् ;ेद्ध 4 ़5व् ;हद्ध 2 → 4 10 ;ेद्ध संतुलित समीकरणच्व् आइए, अब हम प्रोपेन, ब्भ् के दहन पर विचार करें। इस समीकरण को निम्नलिख्िात पदों में संतुलित किया जा सकता है दृ 38 पद 1.अभ्िाियकों और उत्पादों के सही सूत्रा लिख्िाए। यहाँ प्रोपेन एवं आॅक्सीजन अभ्िाियक हैं और काबर्न डाइआॅक्साइड तथा जल उत्पाद हैं: ब् भ् ;हद्ध ़व् ;हद्ध →ब्व् ;हद्ध ़भ् व्;सद्ध असंतुलित समीकरण382 22 पद 2.ब् परमाणुओं की संख्या संतुलित करें: चूँकि अभ्िाियक में तीन ब् परमाणु हैं, इसलिए दाईं ओर तीन ब्व् अणुओं2का होना आवश्यक है। ब् भ् ;हद्ध ़व् ;हद्ध →3ब्व् ;हद्ध ़भ् व्;सद्ध 382 22 पद 3.भ् परमाणुओं की संख्या संतुलित करें: बाईं ओर अभ्िाियकों में आठ भ् परमाणु है, जल के हर अणु में दो भ् परमाणु हैं। इसलिए दाईं ओर भ् के 8 परमाणुओं के लिए जल के चार अणु होने चाहिए दृ ब्भ्;हद्ध व्;हद्ध 3ब्व्;हद्ध 4भ्व्;सद्ध 382 22 32 241पद 4.व् परमाणुओं की संख्या संतुलित करें: दाईं ओर दस आॅक्सीजन परमाणु ; ×त्र6एब्व् में तथा ×त्र4 जल मेंद्ध अतः दस आॅक्सीजन परमाणुओं के लिए पाँच व् अणुओं की आवश्यकता होगी।2ब् भ् ;हद्ध ़50;हद्ध →3ब्व्;हद्ध ़4भ् व्;सद्ध 382 22 पद 5.जाँच करें कि अंतिम समीकरणों में प्रत्येक तत्त्व के परमाणुओं की संख्या संतुलित है: समीकरण में दोनों ओर 3 काबर्न परमाणु, 8 हाइड्रोजन परमाणु और 10 आॅक्सीजन परमाणु हैं। ऐसे सभी समीकरणों, जिनमें सभी अभ्िाियकों तथा उत्पादों के लिए सही सूत्रों का उपयोग हुआ हो, संतुलित किया जा सकता है। हमेशा ध्यान रखें कि समीकरण संतुलित करने के लिए अभ्िाियकों और उत्पादों के सूत्रों में पादांक ;ेनइेबतपचजद्ध नहीं बदले जा सकते। है। इन संबंधों के आधार पर दिए गए आँकड़ों को एक - दूसरे में इस प्रकार परिवतिर्त किया जा सकता है दृ द्रव्यमान मोलों की संख्या अणु की संख्या 1.10.1 सीमांत अभ्िाकमर्क कइर् बार अभ्िाियाओं में संतुलित समीकरण के अनुसार आवश्यक अभ्िाियकों की मात्राएँ उपस्िथत नहीं होतीं। ऐसी उदाहरण 1.3 16 ह मेथेन के दहन से प्राप्त जल की मात्रा ;हद्ध का परिकलन कीजिए। हल मेथेन के दहन का संतुलित समीकरण इस प्रकार है - ब्भ् ;हद्ध ़2व् ;हद्ध →ब्व् ;हद्ध ़2भ् व्;हद्ध 42 22 ;पद्ध 16ह ब्भ् एक मोल के बराबर है।;पपद्ध ऊपर दिए गए समीकरण से 1 मोल ब्भ् ;हद्ध से4 4भ् व्;हद्ध के 2 मोल प्राप्त होते हैं।22 मोल भ्व् त्र×2 ;2 ़ त्र×त्र 216द्धह2 18ह36ह 18हभ् व् 1 मोल भ्व्18हभ्व् 2 12 21 माले भ्व् 2 अतः 2 मोल 18हभ् व् भ्व् 2 2 18हभ्व् 36हभ्व् 2 221 मालेभ् व् 2 उदाहरण 1.4 मेथेन के कितने मोलों के दहन से 22ह ब्व् ;हद्धप्राप्त2की जाती है। हल रासायनिक समीकरण के अनुसार - ब्भ् ;हद्ध ़2व् ;हद्ध →ब्व् ;हद्ध ़ ;द्ध2भ्व् ह 42 22 16हब्भ् ;हद्ध से 44हब्व् ;हद्ध प्राप्त होती है।42;फ 1 मोल ब्भ् ;हद्ध से 1 मोल ब्व् ;हद्ध प्राप्त होती हैद्ध421माले ब्व् ;हद्ध ब्व् ;हद्ध के मोल 22हब्व्;हद्ध 2 22 44ह ब्व् ;हद्ध 2 0ण्5 माले ब्व् ;हद्ध 2 रसायन विज्ञान स्िथतियों में एक अभ्िाियक दूसरे की अपेक्षा अिाकता में उपस्िथत होता है। जो अभ्िाियक कम मात्रा में उपस्िथत होता है, वह वुफछ देर बाद समाप्त हो जाता है। उसके बाद और आगे अभ्िािया नहीं होती, भले ही दूसरे अभ्िाियक की कितनी ही मात्रा उपस्िथत हो। अतः जो अभ्िाियक पहले समाप्त होता है, वह उत्पाद की मात्रा को सीमित कर देता है। इसलिए उसे ‘सीमांत अभ्िाकमर्क’ ;सपउपजपदह तमंहमदजद्ध कहते हैं। स्टाॅइकियोमीटिªक गणनाएं करते समय यह बात ध्यान में रखनी चाहिए। अतः 0ण्5 मोल ब्भ् ;हद्ध के दहन से 0ण्5 मोल4ब्व् ;हद्ध प्राप्त होगी या 0ण्5 मोल ब्भ् ;हद्ध से2422ह ब्व् ;हद्ध प्राप्त होगी। 2उदाहरण 1.5 50ण्00 ाह छ2;हद्ध और 10ण्00 ाह भ्2;हद्ध को छभ्3;हद्ध बनाने के लिए मिश्रित किया जाता है। प्राप्त छभ्3;हद्ध की मात्रा का परिकलन कीजिए। इन स्िथतियों में छभ्3 उत्पादन के लिए सीमांत अभ्िाियक को पहचानिए। हल ऊपर दी गइर् अभ्िािया के लिए संतुलित समीकरण इस प्रकार है दृ छ ;हद्ध ़3भ् ;हद्ध 2छभ् ;हद्ध 22 3 मोलों का परिकलन छ2;हद्ध के मोल 1000हछ 1 मोल छ50ण्0ाहछ 2 2 2 1ाहछ 2 28ण्0हछ 2 2त्र17ण्86 ×10 मोल भ् ;हद्ध के मोल21000हभ् 2 1 मोल भ्10ण्00ाहभ् 2 2 1ाहभ् 2 2ण्016हभ् 2 3त्र4ण्96 ×10 मोल ऊपर दिए गए समीकरण के अनुसार, अभ्िािया के 1 मोल छ;हद्ध के लिए 3 मोल भ्2;हद्ध की आवश्यकता2होती है। अतः 17ण्86 102 के लिए आवश्यक भ्2;हद्ध के मोलों की संख्या त्र 17ण्86 102 मोल 3 माले भ् ;हद्ध छ2 2 1 मोल 2छ ;हद्ध त्र 5ण्36 103 मोल भ्2;हद्ध परंतु केवल 4ण्96 103 मोल भ्2;हद्ध उपलब्ध है। अतः यहाँ भ्2;हद्ध सीमांत अभ्िाकमर्क है। अतः छभ्3;हद्ध केवल उपलब्ध भ्2;हद्ध की मात्रा ;4ण्96 103 मोलद्ध से ही प्राप्त होगी। चूँकि 3 मोल भ्2;हद्ध से 2 मोल छभ्3;हद्ध उपलब्ध होती है, अतः 4ण्96 103 मोल 1.10.2 विलयनों में अभ्िाियाएँ प्रयोगशाला में अिाकांश अभ्िाियाएँ विलयनों में की जाती हैं।अतः यह जानना महत्त्वपूणर् होगा कि जब कोइर् पदाथर् विलयन के रूप में उपस्िथत होता है, तब उसकी मात्रा किस प्रकार व्यक्त की जाती है। किसी विलयन की सांद्रता या उसके दिए गए आयतन में उपस्िथत पदाथर् की मात्रा निम्नलिख्िात रूप में व्यक्त की जा सकती है दृ 1.द्रव्यमान - प्रतिशत या भार - प्रतिशत ;ूध्ूःद्ध 2.मोल - अंश 3.मोलरता 4.मोललता आइए, अब इनके बारे में विस्तार से जानें। 1. द्रव्यमान - प्रतिशत इसे निम्नलिख्िात संबंध द्वारा ज्ञात किया जाता हैμ विलेय का दव््रयमान ×100विलयन का द्रव्यमान 2. मोल - अंश यह किसी विशेष घटक के मोलों की संख्या और विलयन के मोलों की वुफल संख्या की अनुपात होता है। यदि कोइर् पदाथर् । किसी पदाथर् ठ में घुलता है और उनके मोलों की संख्या क्रमश: दऔर दहो, तो उनके मोल अंश इस प्रकार।ठ व्यक्त किए जाएँगे दृ । का मोलदृअंश । क ेमालेांे की सख्ंया द। विलयन केमोोंद। दलं की सख्या ठ ठ का मोलदृअंश 2 मोल छभ् ;हद्ध भ् ;हद्ध × 3 3ण्30×103 मोल छभ् ;हद्ध 23 माले छ ;हद्ध 3 2 इस प्रकार 3ण्30 103 मोल छभ्3;हद्ध प्राप्त होगी। यदि इसे ग्राम ;हद्ध में परिवतिर्त करना हो, तो इस प्रकार किया जाएगा दृ 1 मोल छभ्3 ;हद्ध त्र 17ण्0 ह छभ्3 ;हद्ध 17ण्0 ह छभ् ;हद्ध 33ण्30 103 मोल छभ् ;हद्ध ×31 मोल छभ् ;हद्ध 3 3ण्30 ×103 ×17;हद्धछभ् ;हद्ध 3 10हछभ् 35ण्61 × 4 3 56ण्1ाहछभ् ;हद्ध ठ क ेमालेांे की सख्ंया दठ विलयन केमों की सख्या ंददलो।ठ उदाहरण 1.6 किसी पदाथर् । के 2ह को 18ह जल में मिलाकर एक विलयन प्राप्त किया जाता है। विलेय ;।द्ध का द्रव्यमान प्रतिशत परिकलित कीजिए। हल । का दव््रयमान । का द्रव्यमान प्रतिशत त्र ×100विलयन का दव््रयमान 2ह 2ह×100 ×100 10ः 2ह । ़18ह जल 20ह 3. मोलरता यह सबसे अिाक प्रयुक्त मात्राक है। इसे ड द्वारा व्यक्त किया जाता है। यह किसी विलेय की 1स् विलयन में उपस्िथत मोलों की संख्या होती है। अतः विलयन केमोे की सख्ंया लांमोलरता ;डद्ध त्र स् ेविलयन का आयतन ; मंद्धमान लीजिए कि हमारे पास किसी पदाथर् ;जैसे दृ छंव्भ्द्ध का 1ड विलयन है और हम उससे 0ण्2 ड वाला विलयन प्राप्त करना चाहते हैं। 1 ड छंव्भ् का अथर् है कि विलयन के 1स् में 1 मोल छंव्भ् उपस्िथत है। 0ण्2 ड विलयन के लिए हमें प्स् विलयन में 0.2 मोल छंव्भ् की आवश्यकता होगी। ऐसी गणनाओं में सामान्य सूत्रा डटत्र डटप्रयोग किया जाता है, जहाँ1 12 2 ड तथा ट क्रमशः मोलरता तथा आयतन हैं। यहाँ डत्र0ण्2य ट1त्र1000 उस् तथा ड2त्र1ण्0य इन सभी मानों को सूत्रा में रखकर टको इस प्रकार ज्ञात किया जा सकता हैदृ 2 ण्2 ड 1000 उस् त्र 1ण्0 ड ट2 2ट 0ण्2ड 1000 उस् 1ण्0 ड × 200 उस् 4हध्40ह 0ण्1 माले 1 स् विलयन में 0ण्2 मोल छंव्भ् चाहिए। अतः हमें 0ण्2 मोल छंव्भ् लेना होगा और विलयन का आयतन 1स् बनाना होगा। अब सांद्र ;1डद्ध छंव्भ् का कितना आयतन लिया जाए, जिसमें 0ण्2 मोल छंव्भ् उपस्िथत हो, इसका परिकलन निम्नलिख्िात रूप में किया जा सकता है दृ यदि 1 स् या 1000 उस् आयतन में 1 मोल उपस्िथत है, तब 0ण्2 मोल उपस्िथत होगाμ 1000 उस् × 0ण्2 मोल त्र 200 उस् आयतन में 1 माले अतः 1 ड छंव्भ् के 200 उस् लेकर उसमें उतना जल मिलाया जाता है, ताकि आयतन 1स् के बराबर हो जाए। ध्यान दीजिए कि 200 उस् में विलय ;छंव्भ्द्ध के मोलों की संख्या 0ण्2 थी और यह तनु करने पर ;1000 उस्द्ध में भी उतनी ही, अथार्त् ;0ण्2द्ध रही है, क्योंकि हमने केवल विलायक ;जलद्ध की मात्रा परिवतिर्त की है, न कि छंव्भ् की। 4. मोललता इस 1 ाह विलायक में उपस्िथत विलेय के मोलों की संख्या के रूप में परिभाष्िात किया जाता है। इसे उ द्वारा व्यक्त किया जाता है।विलेयवेेांफ माले की सख्या अतः मोललता ;उद्ध त्र विलायक का द्राह मेव्यमान ंउदाहरण 1.7 छंव्भ् के ऐसे विलयन की मोलरता का परिकलन कीजिए, जिसे 4 ह छंव्भ् को जल की पयार्प्त मात्रा में मिलाकर प्राप्त किया गया हो, ताकि विलयन के 250 उस् प्राप्त हो जाएँ। हल विलये वफे मों की सख्ंया लोचूँकि मोलरता ;डद्ध त्र विलयन का आयतन ;स् मंद्धे रसायन विज्ञान छंव्भ् का द्रव्यमान / छंव्भ् का मालेर दव््रयमान 0ण्250स् मालेपति लिटर 0ण्4 ्र0ण्250स् 0ण्250स् त्र 0ण्4 उवस स्−1 त्र 0ण्4 ड यह ध्यान रखें कि किसी विलयन की मोलरता ताप पर निभर्र करती है, क्योंकि आयतन ताप पर निभर्र करता है। उदाहरण 1.8 3 ड छंब्स विलयन का घनत्व सण्25 ह उसदृ1 है इस विलयन की मोललता का परिकलन कीजिए। उ त्र 3 उवस स्दृ1 1 स् विलयन में छंब्स का द्रव्यमान त्र 3 58ण्5 त्र 175ण्5 ह 1 स् विलयन का द्रव्यमान त्र 1000 1ण्25हउ त्र 1000 1ण्25 त्र 1250 ह त्र 1250 हउ ;क्योंकि घनत्व त्र 1ण्25 ह उस्दृ1द्ध विलयन में जल का द्रव्यमान त्र 1250 दृ 175ण्5 त्र 1074ण्5 ह विलेेेोयवफमालंकी सख्ंया अब मोललता ;उद्ध ाह मंे विलायक का दव्यमान ्र3उवस 2ण्79 उ 1ण्0745ाह रासायनिक प्रयोगशालाओं में वांछित सांद्रता का विलयन सामान्यतया अिाक सांद्र विलयन के तनुकरण से बनाया जाता है। अिाक सांद्रता वाले विलयन को ‘स्टाॅक विलयन’ ;ैजवबा ेवसनजपवदद्ध भी कहते हैं। ध्यान रहे कि विलयन की मोललता तापमान के साथ परिवतिर्त नहीं होती, क्योंकि द्रव्यमान तापमान से अप्रभावित रहता है। रसायन विज्ञान अभ्यास 1.1 निम्नलिख्िात के लिए मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिएμ ;पद्ध भ्2व् ;पपद्ध ब्व्2 ;पपपद्ध ब्भ्4 1.2 सोडियम सल्पेफट ;छंैव्द्ध में उपस्िथत विभ्िान्न तत्त्वों के द्रव्यमान प्रतिशत का परिकलन कीजिए।241.3 आयरन के उस आॅक्साइड का मूलानुपाती सूत्रा ज्ञात कीजिए, जिसमें द्रव्यमान द्वारा 69ण्9ः आयरन और 30ण्1ः आॅक्सीजन है। 1.4 प्राप्त काबर्न डाइआॅक्साइड की मात्रा का परिकलन कीजिए। जब ;पद्ध 1 मोल काबर्न को हवा में जलाया जाता है और ;पपद्ध 1 मोल काबर्न को 16 ह आॅक्सीजन में जलाया जाता है। 1.5 सोडियम ऐसीटेट ;ब्भ्ब्व्व्छंद्ध का 500 उस्ए 0ण्375 मोलर जलीय विलयन बनाने के लिए उसके3कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी? सोडियम ऐसीटेट का मोलर द्रव्यमान 82ण्0245 ह उवसदृ1 है। 1.6 सांद्र नाइटिªक अम्ल के उस प्रतिदशर् का मोल प्रति लिटर में सांद्रता का परिकलन कीजिए, जिसमें उसका द्रव्यमान प्रतिशत 69ः हो और जिसका घनत्व 1ण्41 ह उस्दृ1 हो। 1.7 100 ह काॅपर सल्पेफट ;ब्नैव्द्ध से कितना काॅपर प्राप्त किया जा सकता है?41.8 आयरन के आॅक्साइड का आण्िवक सूत्रा ज्ञात कीजिए, जिसमें आयरन तथा आॅक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत क्रमशः 69.9 ह तथा 30.1 ह है। 1.9 निम्नलिख्िात आँकड़ों के आधर पर क्लोरीन के औसत परमाणु द्रव्यमान का परिकलन कीजिए - : प्राकृतिक बाहुल्यता मोलर - द्रव्यमान 35ब्स 75ण्77 34ण्9 689 37ब्स 24ण्23 36ण्9659 1.10 एथेन ;ब्भ्द्ध के तीन मोलों में निम्नलिख्िात का परिकलन कीजिए - 26;पद्ध काबर्न परमाणुओं के मोलों की संख्या ;पपद्ध हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या ;पपपद्ध एथेन के अणुओं की संख्या 1.11 यदि 20ह चीनी ;ब् भ् व्द्ध को जल की पयार्प्त मात्रा में घोलने पर उसका आयतन 2स् हो जाए,1222 11तो चीनी के इस विलयन की सांद्रता क्या होगी? 1.12 यदि मेथेनाॅल का घनत्व 0ण्793 ाह स्दृ1 हो, तो इसके 0ण्25 ड के 2ण्5 स् विलयन को बनाने के लिए कितने आयतन की आवश्यकता होगी? 1.13 दाब को प्रति इकाइर् क्षेत्रापफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाष्िात किया जाता है। दाब का ैप् मात्राक पास्कल नीचे दिया गया हैμ 1 च्ं त्र 1 छउदृ2 यदि समुद्रतल पर हवा का द्रव्यमान 1034 ह बउदृ2 हो, तो पास्कल में दाब का परिकलन कीजिए। 1.14 द्रव्यमान का ैप् मात्राक क्या है? इसे किस प्रकार परिभाष्िात किया जाता है? 1.15 निम्ननिलिख्िात पूवर् - लग्नों को उनके गुणांकों के साथ मिलाइएμ पूवर् लग्न गुणांक ;पद्ध माइक्रो 106 ;पपद्ध डेका 109 ;पपपद्ध मेगा 10दृ6 10दृ15;पअद्ध गिगा ;अद्ध पेफम्टो 10 1.16 साथर्क अंकों से आप क्या समझते हैं? 1.17 पेय जल के नमूने में क्लोरोपफाॅमर्, जो वैंफसरजन्य है, से अत्यध्िक संदूष्िात पाया गया। संदूषण का स्तर 15 चचउ ;द्रव्यमान के रूप मेंद्ध था। ;पद्ध इसे द्रव्यमान प्रतिशतता में दशार्इए। ;पपद्ध जल के नमूने में क्लोरोपफाॅमर् की मोललता ज्ञात कीजिए। 1.18 निम्नलिख्िात को वैज्ञानिक संकेतन में लिख्िाएμ ;पद्ध 0ण्0048 ;पपद्ध 234ए000 ;पपपद्ध 8008 ;पअद्ध 500ण्0 ;अद्ध 6ण्0012 1.19 निम्नलिख्िात में साथर्क अंकों की संख्या बताइएμ ;पद्ध 0ण्0025 ;पपद्ध 208 ;पपपद्ध 5005 ;पअद्ध 126ए000 ;अद्ध 500ण्00 ;अपद्ध 2ण्0034 1.20 निम्नलिख्िात को तीन साथर्क अंकों तक निकटित कीजिएμ ;पद्ध 34ण्216 ;पपद्ध 10ण्4107 ;पपपद्ध 0ण्04597 ;पअद्ध 2808 1.21 ;कद्ध जब डाइनाइट्रोजन और डाइआॅक्सीजन अभ्िािया द्वारा भ्िान्न यौगिक बनाती हैं, तो निम्नलिख्िात आँकड़े प्राप्त होते हैंμ नाइट्रोजन का द्रव्यमान आॅक्सीजन का द्रव्यमान ;पद्ध 14 ह 16 ह ;पपद्ध 14 ह 32 ह ;पपपद्ध 28 ह 32 ह ;पअद्ध 28 ह 80 ह ये प्रायोगिक आँकड़े रासायनिक संयोजन के किस नियम के अनुरूप हैं? बताइए। ;खद्ध निम्नलिख्िात में रिक्त स्थान को भरिएμ ;पद्ध 1 ाउ त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् उउ त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् चउ ;पपद्ध 1 उह त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् ाह त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् दह ;पपपद्ध 1 उस् त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् स् त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् कउ3 1.22 यदि प्रकाश का वेग 3ण्00 108 उ े दृ1 हो, तो 2ण्00 दे में प्रकाश कितनी दूरी तय करेगा? 1.23 किसी अभ्िािया 2 2। ठ ।ठ ़ → में निम्नलिख्िात अभ्िािया मिश्रणों में सीमांत अभ्िाकमर्क, ;यदि कोइर् हो, तोद्ध ज्ञात कीजिएμ ;पद्ध । के 300 परमाणु ़ ठ के 200 अणु ;पपद्ध 2 मोल । ़ 3 मोल ठ ;पपपद्ध । के 100 परमाणु ़ ठ के 100 अणु ;पअद्ध । के 5 मोल ़ ठ के 2ण्5 मोल ;अद्ध । के 2ण्5 मोल ़ ठ के 5 मोल 1.24 डाइनाइट्रोजन और डाइहाइड्रोजन निम्नलिख्िात रासायनिक समीकरण के अनुसार अमोनिया बनाती हैंμ 2 2 3छ ;हद्ध 3भ् ;हद्ध 2छभ् ;हद्ध ़ → ;पद्ध यदि 2ण्00 103 ह डाइनाइट्रोजन 1ण्00 103 ह डाइहाड्रोजन के साथ अभ्िािया करती है, तो प्राप्त अमोनिया के द्रव्यमान का परिकलन कीजिए। ;पपद्ध क्या दोनों में से कोइर् अभ्िाियक शेष बचेगा? ;पपपद्ध यदि हाँ, तो कौन - सा उसका द्रव्यमान क्या होगा? 1.25 0ण्5 उवस छंब्व्और 0ण्50 ड छंब्व्में क्या अंतर है?23 23 1.26 यदि डाइहाइड्रोजन गैस के 10 आयतन डाइआॅक्सीजन गैस के 5 आयतनों के साथ अभ्िािया करें, तो जलवाष्प के कितने आयतन प्राप्त होंगे? 1.27 निम्नलिख्िात को मूल मात्राकों में परिवतिर्त कीजिएμ ;पद्ध 28ण्7 चउ ;पपद्ध 15ण्15 चउ ;पपपद्ध 25365 उह 1.28 निम्नलिख्िात में से किसमें परमाणुओं की संख्या सबसे अध्िक होगी? ;पद्ध 1 ह ।न ;ेद्ध ;पपद्ध 1 ह छं ;ेद्ध ;पपपद्ध 1 ह स्प ;ेद्ध ;पअद्ध 1 ह ब्स2 ;हद्ध 1.29 एथेनाॅल के ऐसे जलीय विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिए, जिसमें एथेनाॅल का मोल - अंश 0ण्040 है। ;मान लें कि जल का घनत्व 1 है।द्ध 1.30 एक 12ब् काबर्न परमाणु का ग्राम ;हद्ध में द्रव्यमान क्या होगा? 1.31 निम्नलिख्िात परिकलनों के उत्तर में कितने साथर्क अंक होने चाहिए? 0ण्02856 × 298ण्15 × 0ण्112 ;पद्ध 0ण्5785 ;पपद्ध 55ण्364× ;पपपद्ध 0ण्0125 ़ 0ण्7864 ़ 0ण्0215 1.32 प्रकृति में उपलब्ध् आॅगर्न के मोलर द्रव्यमान की गणना के लिए निम्नलिख्िात तालिका में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिएμ समस्थानिक समस्थानिक मोलर द्रव्यमान प्रचुरता 36।त 35ण्96755 उवसदृ1 0ण्337ः 38।त 37ण्96272 ह उवसदृ1 0ण्063ः 40।त 39ण्9624 ह उवसदृ1 99ण्600ः 1.33 निम्नलिख्िात में से प्रत्येक में परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिएμ ;पद्ध 52 मोल ।त ;पपद्ध 52 न भ्म ;पपपद्ध 52 ह भ्म 1.34 एक वेल्िंडग ईंध्न गैस में केवल काबर्न और हाइड्रोजन उपस्िथत हैं। इसके नमूने की वुफछ मात्रा आॅक्सीजन से जलाने पर 3ण्38 ह काबर्न डाइआॅक्साइड, 0ण्690 ह जल के अतिरिक्त और कोइर् उत्पाद नहीं बनाती। इस गैस के 10ण्0स् ;ैज्च् पर मापितद्ध आयतन का भार 11ण्69 ह पाया गया। इसके दृ ;पद्ध मूलानुपाती सूत्रा ;पपद्ध अणु द्रव्यमान और ;पपपद्ध अणुसूत्रा की गणना कीजिए। 1.35 ब्ंब्व्जलीय भ्ब्स के साथ निम्नलिख्िात अभ्िािया कर ब्ंब्सऔर ब्व्बनाता है।3 2 2 ब्ंब्व् ;ेद्ध ़ 2भ्ब्स;हद्ध → ब्ंब्स ;ंुद्ध ़ ब्व् ;हद्ध ़ भ् व्;सद्ध 3 222 0ण्75ड भ्ब्स के 25 उस् के साथ पूणर्तः अभ्िािया करने के लिए ब्ंब्व्की कितनी मात्रा की3 आवश्यकता होगी? 1.36 प्रयोगशाला में क्लोरीन का विरचन मैंगनीज डाइआॅक्साइड ;डदव्द्ध को जलीय भ्ब्स विलयन के साथ2अभ्िािया द्वारा निम्नलिख्िात समीकरण के अनुसार किया जाता हैμ 4भ्ब्स;ंुद्ध ़ डदव् ;ेद्ध → 2भ् व्;सद्ध ़ डदब्स ;ंुद्ध ़ ब्स ;हद्ध5ण्0ह मैंगनीज डाइआॅक्साइड के22 22 साथ भ्ब्स के कितने ग्राम अभ्िािया करेंगे? रसायन विज्ञान

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