8विनिमय विपत्रा व्यापार में माल का क्रय एवं विक्रय नकद और उधर पर किया जाता है। यदि माल का क्रय अथवा विक्रय नकद होता है, तो ऐसी स्िथति में भुगतान तत्काल कर दिया जाता है। दूसरी तरपफ, यदि व्यापारी उधार लेन - देन करता है और सौदों का मूल्य तुरंत न चुका कर भविष्य में चुकाता है तो ऐसी स्िथति में भावी भुगतान की समस्या का समाधान साख - पत्रों के प्रयोग से संभव होता है। इस प्रिया के अंतगर्त माल खरीदने वाला व्यक्ित माल बेचने वाले व्यक्ित को एक निश्िचत अवध्ि में भुगतान करने का आश्वासन देता है। भारत में साख - पत्रों का प्रचलन बहुत प्राचीन है तथा इसे हुंडी कहा जाता है। हुंडी भारतीय भाषा में लिखी जाती है और अनेक प्रकार की होती है ;देखें बाॅक्स 1द्ध। आध्ुनिक समय में इन साख - पत्रों को विनिमय विपत्रा अथवा प्रतिज्ञा - विपत्रों के नाम से जाना जाता है। विनिमय विपत्रा एक शतर् रहित लिख्िात आदेश होता है, जिसमें उसको लिखने वाला किसी व्यक्ित विशेष को एक निश्िचत अवध्ि में भुगतान की शतर्विहीन आज्ञा देता है जबकि प्रतिज्ञा - विपत्रा एक लिख्िात हस्ताक्षर सहित बिना शतर् का प्रपत्रा है जिसमें देनदार निश्िचततिथ्िा पर प्रदत्त मूल्य का भुगतान करने की प्रतिज्ञा करता है। भारत में ये साख - पत्रा भारतीय पराक्रम्य विलेख अध्िनियम 1881 द्वारा नियंत्रिात होते हैं। बाॅक्स - 1 हुंडी और उसके प्रकार हमारे देश में विभ्िान्न प्रकार की हुंडियों का प्रयोग होता है जिनमें से सामान्यतया प्रयोग में आने वाली हुंडियों के विषय में चचार् करेंगे। अध्िगम उद्देश्य इस अध्याय के अध्ययन के उपरांत आपः ऽ विनिमय विपत्रा एवं प्रतिज्ञा - पत्रा का अथर् बता सवेंफगेऋ ऽ विनिमय विपत्रा और प्रतिज्ञा - पत्रा का अंतर कर सवेंफगेऋ ऽ विनिमय विपत्रा के गुण बता सकेंगेऋ ऽ विनिमय लेन - देन से सबंध्ित ंशब्दावलीकी व्याख्या कर सकेगेऋ ऽ विनिमय विपत्रा लेन - देनों को रोजनामचे में अभ्िालेख्िात कर सकेंगेऋ ऽ विनिमय विपत्रा के भुनाने अनादरण एवं नवीनीकरण से संबंध्ित लेन - देनों को अभ्िालेख्िात कर सकेंगेऋ ऽ प्राप्य विपत्रा और देय विपत्रा के उपयोग की व्याख्या कर सकेंगेऋ ऽ सहायताथर् - विपत्रा का अथर् और उपयोग समझ सवेंफगे। शहजोग हुंडी: यह हुंडी एक व्यापारी द्वारा दूसरे व्यापारी पर नामित की जाती है जिसमें यह इंगित किया जाता है कि आहायीर् शाह को भुगतान करेे। शाह एक सम्मानीय एवं जिम्मेदार व्यक्ित होता है जिसकी बाजार में अपनी एक पहचान होती है। हुंडी अनेक व्यक्ितयों के माध्यम से शाह तक पहँुचती है जो सामान्य पूछताछके पश्चात आहायीर् के समक्ष भुगतान की स्वीकृति हेतु प्रस्तुत की जाती है। दशर्नी हुंडी: इस हुंडी का भुगतान तत्काल किया जाता है। धरक द्वारा इस हुंडी को एक नियत समय अवध्ि के अन्दर भुगतान हेतु प्रस्तुत करना होता है। दशर्नी हंुडी मांग विपत्रा के समान होती है। मुद्दती अथवा मियादी हुंडी: मुद्दती अथवा मियादी हंुडी का भुगतान एक निश्िचत समय अवध्ि के पश्चात किया जाता है। यह हुंडी समय अवध्ि विपत्रा के समान होती है। हुंडी के कुछ अन्य प्राकर हैं: नामजोग हंुडी, धनीजोग हुंडी, जवाबी हुंडी, हुकनामी हंुडी, पफरमान जोग हुंडी इत्यादि। 8ण्1 विनिमय - विपत्रा की परिभाषा भारतीय पराक्रम्य विलेख अध्िनियम 1881 के अनुसार विनिमय विपत्रा की परिभाषा इस प्रकार है - फ्विनिमय विपत्रा एक शतर् रहित लिख्िात आज्ञा पत्रा है, जिसमें लिखने वाला किसी व्यक्ित को यह आज्ञा देता है कि वह एक निश्िचत राश्िा या तो स्वयं उसे या उसकी आज्ञानुसार किसी अन्य व्यक्ित को या उस विनिमय - विपत्रा के धरक को माँगने पर या एक निश्िचत अवध्ि की समाप्ित पर दे।य् उपरोक्त परिभाषा के अनुसार विनिमय - विपत्रा की निम्नलिख्िात विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं - ऽ विनिमय विपत्रा लिख्िात होता है। यह मौख्िाक नहीं हो सकता। ऽ इसमें राश्िा के भुगतान की आज्ञा निहित होती है। ऽ इसमें शतर् रहित आज्ञा निहित होती है। ऽ इसमें विपत्रा लिखने वाले के हस्ताक्षर होते हैं। ऽ विनिमय विपत्रा में लिख्िात राश्िा निश्िचत होती है। ऽ विनिमय विपत्रा में भुगतान की तिथ्िा निश्िचत होती है। ऽ इस विपत्रा द्वारा उस व्यक्ित विशेष को आज्ञा दी जाती है, जिसके नाम पर विनिमय विपत्रा लिखा जाता है। ऽ इसमें लिख्िात निश्िचत राश्िा माँग पर देय अथवा निश्िचत समय के बाद दी जाती है। ऽ अध्िनियम के अनुसार इस विलेख पर मुद्रांक होना अनिवायर् है। विनिमय विपत्रा लेनदार द्वारा अपने देनदार पर लिखा जाता है। अतः विनिमय विपत्रा का किसी निश्िचतव्यक्ित विशेष द्वारा अथवा उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ित विशेष द्वारा स्वीकृत होना एक महत्त्वपूणर्विशेषता है। इस संबंध् में यह बात ध्यान देने योग्य है कि विनिमय - विपत्रा स्वीकृत होने से पूवर् ड्राफ्रटकहलाता है तथा स्वीकृति के पश्चात ही इसे विनिमय विपत्रा कहते हैं। उदाहरण के लिए, अमित ने रोहित को 10ए000 रु. का उधर माल बेचा। देय तिथ्िा पर निश्िचत भुगतान प्राप्ित हेतु अमित ने रोहित पर तीन महीने की अवध्ि का एक विनिमय विपत्रा लिखा। ध्यान देने योग्य बात यह है कि रोहित इस विपत्रा को स्वीकृत कर हस्ताक्षरित करेगा तथा स्वीकृति की सूचना अमित को देगा,तभी यह विनिमय - विपत्रा कहलाएगा, अन्यथा इसे ड्राफ्रट कहेंगे। 8ण्1ण्1 विनिमय - विपत्रा के पक्षकार विनिमय - विपत्रा के प्रायः तीन पक्षकार होते हैं ऽ आहतार्/बिलकत्तार् - यह व्यक्ित, जो विपत्रा लिखता है तथा उस पर अपने हस्ताक्षर करके एक निश्िचत राश्िा के भुगतान का आदेश देता है, उसे आहतार्/बिलकत्तार् कहते हैं। यह व्यक्ित विशेष प्रायः माल का विक्रेता/लेनदार होता है। ऽ आहायीर्/स्वीकारकतार् - जिस व्यक्ित पर विनिमय - विपत्रा लिखा जाता है अथार्त् वह व्यक्ितजिसे एक निश्िचत राश्िा के भुगतान का आदेश दिया जाता है उसे अहायीर्/स्वीकारकत्तार् कहते हैं। यह व्यक्ित प्रायः माल का क्रेता अथवा देनदार होता है। ऽ पानेवाला: वह व्यक्ित जिसे विनिमय - विपत्रा का भुगतान मिलता है, विनिमय - विपत्रा पानेवाला कहलाता है। आहतार्/बिलकत्तार् यदि भुगतान की तिथ्िा तक बिल अपने पास रखता है तब आहतार् ही भुगतान पानेवाला व्यक्ित होगा। किन्तु निम्न परिस्िथतियों में भुगतान पाने वाला व्यक्ित अलग हो सकता हैः ;अद्ध यदि आहतार्/बिलकत्तार् विपत्रा को भुनवा लेता है तो ऐसी दशा में भुगतान पाने वाला व्यक्ित आहतार् से भ्िान्न होगाऋ ;बद्ध यदि आहतार्/बिलकत्तार् विपत्रा को अपने लेनदार के पक्ष में बेचान करता है तो लेनदार राश्िा पाने वाला व्यक्ित बन जाएगा।सामान्यतया आहतार् और भुगतान पानेवाला व्यक्ित एक ही होता है। उस प्रकार आदेश्िात स्वीकारकत्तार् और आहायीर् एक ही व्यक्ित होता है। उदाहरण के लिए ममता ने ज्योति को 10ए000 रु. का माल उधर बेचा। तत्पश्चात् ममता ने ज्योति पर तीन माह की भुगतान अवध्ि के लिए एक विपत्रा लिखा। यहाँ पर ममता आहतार्/बिलकत्तार् है और ज्योति आहायीर् ;स्वीकारकतार्द्ध है। यदि ममता तीन माह तक विपत्रा अपने पास रखकर भुगतान प्राप्त करती है तो ममता भुगतान पाने वाली व्यक्ित मानी जाएगी। किन्तु, यदि ममता इस विपत्रा को अपनी एक अन्य लेनदार, रुचि को हस्तांतरित करती है तब रुचि भुगतान पाने वाली व्यक्ित होगी। और यदि ममता इस विपत्रा को बैंक से भुनवा लेती है तो बैंक भुगतान पाले वाला व्यक्ित माना जाएगा। चित्रा 8ण्1ः विनिमय - विपत्रा का प्रारूप उपयुर्क्त विनिमय विपत्रा के प्रारूप में ममता आहतार् और ज्योति आहायीर् है। चूंकि ज्योति ने विपत्रास्वीकृत किया है, इसलिए ज्योति स्वीकारकत्तार् भी है। मान लीजिए ज्योति के स्थान पर विपत्रा कोअशोक ने स्वीकृत किया होता तो अशोक स्वीकारकत्तार् माना जाता। स्वयं जाँचिए - 1 विभ्िान्न विपत्रा के संदभर् में सही एवं गलत वाक्य को पहचानेंः ;पद्ध विनिमय विपत्रा पर आहायीर् की स्वीकृति अनिवायर् है। ;पपद्ध विनिमय विपत्रा लेनदार द्वारा लिखा जाता है। ;पपपद्ध विनिमय विपत्रा प्रत्येक नकद लेन - देनों के लिए लिखा जाता है। ;पअद्ध मांग पर देय विनिमय विपत्रा को समयावध्ि विपत्रा कहते है। ;अद्ध वह व्यक्ित जिसको विनिमय विपत्रा का भुगतान किया जाता है भुगतान पानेवाला व्यक्ित कहलाता है। ;अपद्ध एक विनिमय विलेख को लेखक द्वारा हस्ताक्षरित किया जाना आवश्यक नहीं है। ;अपपद्ध देखते ही भुगतान हंुडी दशर्नी हुंडी कहलाती है। ;अपपपद्ध एक विनिमय विलेख का मुक्त रूप से हस्तांतरण नहीं किया जा सकता है। ;पगद्ध प्रतिज्ञा पत्रा को मुदि्रत करना अनिवायर् नहीं है। ;गद्ध विनिमय विपत्रा पर समयावध्ि भुगतान निश्िचत नहीं होता है। 8ण्2 प्रतिज्ञा - पत्रा भारतीय पराक्रम्य विलेख अध्िनियम 1881 के अनुसार प्रतिज्ञा - पत्रा एक लिख्िात हस्ताक्षर सहित विपत्रा है। ;बैंक या करेंसी नोट नहींद्ध जिसको लिखने वाला बिना शतर् के एक निश्िचत राश्िा किसी व्यक्ित को अथवा उसके आदेशानुसार किसी अन्य व्यक्ित को अथवा उस विपत्रा के धरक को देने की प्रतिज्ञा करता है। किंतु रिजर्व बैंक आॅपफ इंडिया के अध्िनियम के अनुसार धरक के नाम के अतिरिक्त अन्य तिज्ञा - पत्रा का भगतान गर - काननी ह। इसलिए पतिज्ञफ अतिरिक्त अन्य व्यक्ित व्यक्ित को प्रुैूै्रा - पत्रा धरक वेके नाम से प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। उपयुर्क्त परिभाषा के आधर पर प्रतिज्ञा - पत्रा की निम्नलिख्िात विशेषताएँ होती हैं - ऽ प्रतिज्ञा - पत्रा लिख्िात होता है। ऽ इसमें शतर् रहित प्रतिज्ञा की जाती है। ऽ यह एक निश्िचत व्यक्ित विशेष द्वारा लिखा जाता है तथा हस्ताक्षरित होता है। ऽ इसका भुगतान किसी व्यक्ित विशेष को किया जाता है। ऽ इसके अग्रभाग पर मुद्रांक का होना अनिवायर् है। प्रतिज्ञा - पत्रा की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि प्रतिज्ञार् - पत्रा का लेखक ही भुगतान करने की प्रतिज्ञा लेता है। अशोक कुमार 30ए000 रुनयी दिल्ली 1 अप्रैल, 2006 मुद्रांक लिख्िात तिथ्िा के तीन माह पश्चात, मैं श्री हरीश चंद्र 30ए000 रुपए देने की प्रतिज्ञा करता हूँ, जिसका प्रतिपफल प्राप्त हो चुका है। सेवा में, श्री हरीश चन्द्र अशोक कुमार 24, अंसारी रोड 2ए दरिबा कलां दरियागंज, चाँदनी चैक नयी दिल्ली - 110 002 नयी दिल्ली - 110 006 चित्रा 8ण्2: प्रतिज्ञा - पत्रा का प्रारूप 8ण्2ण्1 प्रतिज्ञा - पत्रा के पक्षकार प्रतिज्ञा - पत्रा में केवल दो पक्षकार होते हैं - लेखक - यह वह व्यक्ित होता है, जो निश्िचत राश्िा के भुगतान के लिए प्रतिज्ञा - पत्रा लिखकर देता है। यह व्यक्ित साधरणतया )णी कहलाता है। पाने वाला - यह वह व्यक्ित होता है, जिसको प्रतिज्ञा - पत्रा की राश्िा का भुगतान किया जाता है। इस व्यक्ित के पक्ष में ही प्रतिज्ञा - पत्रा लिखा जाता है। यह व्यक्ित )णदाता कहलाता है। चित्रा 8ण्2 में अशोक कुमार प्रतिज्ञा - पत्रा का लेखक है तथा हरीश चंद्र भुगतान पाने वाला व्यक्ित है। यदि हरीश चंद प्रतिज्ञा - पत्रा का बेचान रोहित को करता है तब रोहित भुगतान पाने वाला व्यक्ित होगा। यदि हरीश चंद्र स्वयं इस प्रतिज्ञा - पत्रा को बैंक द्वारा भुनाता है तो वह स्वयं भुगतान पाने वाला व्यक्ित माना जाएगा। बाॅक्स - 2 विनिमय - विपत्रा और प्रतिज्ञा - पत्रा में अन्तर ट्टण दस्तावेजों के रूप में विनिमय विपत्रा और प्रतिज्ञा - पत्रा में अनेक समानताएं होते हुए भी निम्नलिख्िात मूलभूत अन्तर हैंः क्र.सं आधर विनिमय विपत्रा प्रतिज्ञा - पत्रा 1ण् लेखक यह लेनदार द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। यह देनदार द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। 2ण् आदेश/प्रतिज्ञा एवं पक्षकार इसमें भुगतान के लिए एक शतर् रहित आज्ञा होती है। इसमें तीन पक्षकार होते हैं - लेखक, देनदार और पाने वाला। इसमें भुगतान के लिए लेखक द्वारा शतर् रहित प्रतिज्ञा होती है। इसमें केवल दो पक्षकार होते हैं। लेखक तथा लेनदार 3ण् स्वीकृति इसमें आदेश्िात व्यक्ित अथवा अदेशानुसार अन्य व्यक्ित द्वारास्वीकृति अनिवायर् है। इसमें स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती। 4ण् भुगतान पाने वाला इसमें लेखक और पाने वाला एक ही व्यक्ित हो सकता है। इसमें लेखक और राश्िा पाने वाला व्यक्ित भ्िान्न - भ्िान्न होते हैं। 5ण् नोटिस विपत्रा के अनादरण होने पर धरक द्वारा लेखक को नोटिस दिया जाता है। इसमें, अनादरण की दशा में, कोइर् भी नोटिस नहीं दिया जाता। चित्रा 8ण्3: विनिमय - विपत्रा और प्रतिज्ञा - पत्रा में अंतर स्वयं जाँचिए - 2 रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिए - ;पद्ध वह व्यक्ित जिसका नाम प्रतिज्ञा - पत्रा पर भुगतान प्राप्ित हेतु अंकित किया जाता है, - - - - - - - - - - कहलाता है। ;पपद्ध हस्ताक्षर द्वारा विपत्रा के स्वामित्व हस्तांतरण प्रिया को - - - - - - - कहते हैं। ;पपपद्ध वह व्यक्ित जो निश्िचत राश्िा के भुगतान के लिए प्रतिज्ञा - पत्रा लिखकर देता है - - - - - कहलाता है। ;पअद्ध वह व्यक्ित जो प्रतिज्ञा - पत्रा का बेचान अन्य व्यक्ित को करता है - - - - - - - - कहलाता है। 8ण्3 विनिमय विपत्रा के लाभ आध्ुनिक व्यापार जगत में विनिमय विपत्रा से निम्नलिख्िात लाभ हंैः ऽ संबंधें की रूपरेखा: विनिमय विपत्रा उधर माल खरीदने की सुविध प्रदान करता है। इसके परिणामस्वरूप व्यापारी व्यापार बढ़ाने में समथर् होता है और विक्रेता एवं क्रेता के बीच एक संबंध् स्थापित होता है। ऽ निश्िचत शत±े: विनिमय विपत्रों की सहायता से व्यापारी यह जान लेता है कि अमुक तिथ्िा तक व्यापारी को कितनी ध्नराश्िा प्राप्त होगी अथवा भुगतान करना होगा। इसका मूल कारण लेनदार और देनदार के मध्य लिख्िात शता±े से संबंध्ित है जैसे कि भुगतान की राश्िा, भुगतान की तिथ्िा, ब्याज का भुगतान, यदि है तो, भुगतान का स्थान आदि विपत्रा पर स्पष्ट रूप से लिखा जाता है। ऽ उधर का सुविधजनक माध्यमः यह आवश्यक नहीं होता कि माल का क्रय करते समय व्यापारी नकद भुगतान ही करे। वह उधर माल खरीद कर विपत्रा स्वीकार कर सकता है। हालाँकि अतिरिक्त ध्न की आवश्यकता अनुभव करने पर विपत्रा को बैंक से बट्टागत ध्नराश्िा प्राप्त की जा सकती है या तृतीय पक्ष की ओर विपत्रा का बेचान किया जा सकता है। ऽ निणार्यक प्रमाण: विनिमय विपत्रा एक कानूनी दस्तावेज है। जिसका आशय यह है कि व्यापारिक सौदे के तहत खरीददार बिक्रीदाता से उधर माल खरीदता है, अतः वह विक्रेताको भुगतान करने के लिए बाध्य है। अस्वीकृति की स्िथति में लेनदार नोटरी से निणार्यक प्रमाण लेकर न्यायालय की सहायता से भुगतान वसूल कर सकता है। ò सरल हस्तांतरण: )णों का भुगतान विनिमय पत्रा के बेचान अथवा सुपुदर्गी द्वारा की जा सकती है। 8ण्4 विपत्रा की परिपक्वता परिपक्वता तिथ्िा से आशय उस तिथ्िा से है जिस दिन विनिमय - विपत्रा या प्रतिज्ञा - पत्रा भुगतान के लिए देय होता है। भुगतान की तिथ्िा विपत्रा की अवध्ि में तीन दिन, जो रियायती दिन कहलाते हैं, जोड़कर निकाली जाती है। अतः यदि एक विपत्रा 30 दिन की भुगतान अवध्ि पर 5 माचर् को लिखा जाता है तो उसकी परिपक्वता तिथ्िा 7 अप्रैल होगी, अथार्त् 5 माचर् से 33 दिन। यदि भुगतान की अवध्ि एक माह है, तो परिपक्वता तिथ्िा 8 अप्रैल होगी अथार्त् 5 माचर् से एक माह और तीन दिन। यदि परिपक्वता तिथ्िा के दिन सावर्जनिक अवकाश होता है तो साख - पत्रा एक दिन पूवर् देय होगा। ऐसी स्िथति में यदि 8 अप्रैल ;परिपक्वता तिथ्िाद्ध सावर्जनिक अवकाश है तो 7 अप्रैल परिपक्वता तिथ्िा मानी जाएगी। यदि भारतीय पराक्रम्य विलेख अध्िनियम 1881 के अंतगर्त भारत सरकार द्वारा आकस्िमक अवकाश घोष्िात किया जाता है जो साख - पत्रा के लिए परिपक्वता तिथ्िा है, तो ऐसी स्िथति में अगला कायर् दिवस परिपक्वता तिथ्िा माना जाएगा। उदाहरण के लिए गुप्ता द्वारा वमार् पर 20ए000 रु. का विपत्रा प्रस्तुत किया गया जिसकी परिपक्वता तिथ्िा 8 अप्रैल थी। किन्तु, यदि पराक्रम्य विलेख अध्िनियम के अंतगर्त भारत सरकार द्वारा 8 अप्रैल आकस्िमक अवकाश घोष्िात किया जाता है, तो ऐसी स्िथति में 9 अप्रैल परिपक्वता तिथ्िा मानी जायगी। 8ण्5 विपत्रा को बट्टागत ;भुनानाद्ध कराना यदि विपत्रा के धरक को ध्न की आवश्यकता होती है। तब वह देय तिथ्िा से पूवर् उसे बैंक से भुनवा सकता है। इस स्िथति में बैंक विपत्रा का भुगतान नाम मात्रा कटौती के पश्चात ;जिसे बट्टा कहते हैंद्ध विपत्रा धरक को करता है। इस विपत्रा के नकदीकरण की प्रिया को विपत्रा का भुनाना कहते हैं। बैंक आहायीर् से देय तिथ्िा पर विपत्रा को भुगतान की प्राप्ित करता है। 8ण्6 विनिमय - विपत्रा का बेचान विनिमय - विपत्रा का बेचान संभव है। विपत्रा का धरक भुगतान के लिए अपने किसी भी लेनदार को विपत्रा का बेचान कर सकता है। विपत्रा के धरक द्वारा बिल का हस्तांतरण संभव है सिवाय इसके कि हस्तांतरण पर प्रतिबंध् हो अथार्त् बिल पर हस्तांतरण प्रतिबंध् संबंध्ी शब्दों का प्रयोग किया गया हो। 8ण्7 लेखांकन व्यवहार वह व्यक्ित जिसके द्वारा विनिमय - विपत्रा लिखा जाता है और स्वीकृति के बाद उसके पास वापिस आ जाता है, तो ऐसी स्िथति में विपत्रा उस व्यक्ित विशेष के लिए प्राप्य विपत्रा बन जाता है। जोव्यक्ित उस विपत्रा पर अपनी स्वीकृति देता है उसके लिए वह विपत्रा देय विपत्रा होता है। प्रतिज्ञा - विपत्रा की स्िथति में लेखक के लिए देय नोट और स्वीकारकत्तार् के लिए प्राप्य नोट होता है। प्राप्य विपत्रापरिसंपिा होती है और देय विपत्रा दायित्व होते हैं। विपत्रा और नोट का प्रयोग अदल - बदल कर किया जा सकता है। 8ण्7ण्1 आहतार्/बिलकत्तार् की पुस्तक में प्रविष्िटयाँ एक प्राप्य विपत्रा का लेखांकन व्यवहार निम्नलिख्िात प्रकार से प्राप्तकतार् द्वारा किया जा सकता हैः ऽ परिपक्वता तिथ्िा तक रखनाः ;अद्ध परिपक्वता तिथ्िा तक अपने पास रख कर भुगतान प्राप्त करना। ;बद्ध बैंकर द्वारा भुगतान प्राप्त करना। ऽ बैंक से विपत्रा को भुनाना। ऽ लेनदार के पक्ष में विपत्रा का बेचान करना उपयुर्क्त अवस्थाओं के लिए प्राप्तकत्तार् की पुस्तक में निम्नलिख्िात प्रविष्िटयाँ की जाएंगी। यह इस मान्यता पर आधरित है कि विपत्रा का भुगतान परिपक्वता तिथ्िा पर होगा। 1ण्;अद्ध जब विनिमय विपत्रा प्राप्तकतार् परिपक्वता तिथ्िा तक अपने पास रखता है। विपत्रा प्राप्त होने पर प्राप्य विपत्रा खाता नाम देनदार खाते से विपत्रा की परिपक्वता पर रोकड़/बैंक खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से जब प्राप्तकत्तार् विपत्रा अपने पास रखता है और परिपक्वता तिथ्िा से पूवर् विपत्रा को बैंक में संग्रह हेतु भेजता है तो ऐसी स्िथति में निम्नलिख्िात दो प्रविष्िटयाँ की जाती हैंः विपत्रा को संग्रह हेतु भेजना विपत्रा को संग्रह हेतु भेजना खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से बैंक से राश्िा प्राप्ित वफी सूचना मिलने पर बैंक खाता नाम विपत्रा संग्रह हेतु भेजना खाते से 2ण् प्राप्तकत्तार् द्वारा बैंक से विपत्रा भुनाने पर विपत्रा प्राप्त होने पर प्राप्य विपत्रा खाता नाम देनदार खाते से विपत्रा को भुनाने ;बट्टागत कराने परद्धपर बैंेक खाता नाम विपत्रा पर छूट खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से परिपक्वता पर कोइर् प्रविष्िट नहीं ;क्योंकि विपत्रा बैंक की परिसंपिा बन जाती है और बैंक द्वारा स्वीकारकत्तार् से वसूली की जाती है इसलिए पुस्तक में प्रविष्िट नहीं की जाएगीद्ध। 3ण् प्राप्तकत्तार् द्वारा अपने लेनदार के पक्ष में विपत्रा का बेचान विपत्रा प्राप्त होने पर प्राप्य विपत्रा खाता नाम देनदार खाते से विपत्रा के बेचान पर लेनदार खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से परिपक्वता पर कोइर् प्रविष्िट नहीं ;क्योंकि विपत्रा का हस्तांतरण लेनदार के पक्ष में किया गया है, इसलिए लेनदार द्वारा परिपक्वता तिथ्िा को भुगतान प्राप्त होगा। अतः प्राप्तकत्तार् की पुस्तक में कोइर् प्रविष्िट नहीं की जाएगीद्ध 8ण्7ण्2 स्वीकारकत्तार्/प्रतिज्ञाकत्तार् की पुस्तक उपयुर्क्त अवस्थाओं में स्वीकारकत्तार् की पुस्तक में निम्नलिख्िात प्रविष्िटयाँ की जाएंगी। इससे कोइर् अंतर नहीं पड़ता कि विपत्रा को अपने पास रखा गया है, भुनाया गया है अथवा बेचान किया गया है।विपत्रा की स्वीकृति पर लेनदार खाता नाम देय विपत्रा खाते से विपत्रा के परिपक्वता पर देय विपत्रा खाता नाम बैंक खाते से बाॅक्स - 3 1ण् जब आहतार् परिपक्वता तिथ्िा तक विपत्रा स्वयं पास रखता है और स्वयं संग्रहित करके राश्िा प्राप्त करता है। 2ण् जब आहतार् विपत्रा स्वयं के पास रखता है और परिपक्वता तिथ्िा से कुछ दिन पूवर् संग्रह हेतु बैंक भेजता है। लेन - देन लेनदार/आहतार् की पुस्तक देनदार/स्वीकारकत्तार् की पुस्तक माल का क्रय/विक्रय देनदार खाता विक्रय खाते से नाम क्रय खाता नाम लेनदार खाते से विपत्रा की प्राप्ित/स्वीकृति प्राप्य विपत्रा खाता देनदार खाते से नाम लेनदार खाता नाम देय विपत्रा खाते से विपत्रा की वसूली रोकड़/बैंक खाता प्राप्य विपत्रा खाते से नाम देय विपत्रा खाता नाम बैंक खाते से लेन देन लेनदार/आहतार् की पुस्तक देनदार/स्वीकारकत्तार् की पुस्तक माल का क्रय/विक्रय देनदार खाता नाम विक्रय खाते से क्रय खाता नाम लेनदार खाते से विपत्रा प्राप्ित/स्वीकार करना प्राप्य विपत्रा खाता नाम देनदार खाते से लेनदार खाता नाम देय विपत्रा खाते से विपत्रा संग्रह हेतु बैंक भेजना विपत्रा संग्रह हेतु भेजना खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से कोइर् प्रविष्िट नहीं बैंक से भुगतान प्राप्ित की सूचना प्राप्त कारना बैंक खाता नाम विपत्रा संग्रह हेतु भेजना खाते से देय विपत्रा खाता नाम बैंक खाते से 3ण् जब आहतार्/बिलकत्तार् विपत्रा बैंक से भुनाता है। 4ण् लेखक द्वारा लेनदार को विपत्रा का बेचान लेनदेन लेनदार/आहतार् की पुस्तक देनदार/ स्वीकारकत्तार् की पुस्तक माल का क्रय/विक्रय देनदार खाता विक्रय खाते से नाम क्रय खाता नाम लेनदार खाते से विपत्रा की प्राप्ित/स्वीकृति प्राप्य विपत्रा खाता देनदार खाते से नाम लेनदार खाता नाम देय विपत्रा खाते से विपत्रा भुनाना बैंक खाता विपत्रा पर बट्टा खाता प्राप्य विपत्रा खाते से नाम नाम कोइर् प्रविष्िट नहीं विपत्रा का परिपक्वता कोइर् प्रविष्िट नहीं देय विपत्रा खाता नाम बैंक खाते से लेन - देन लेनदार/आहतार् की पुस्तक देनदार/स्वीकारकत्तार् की पुस्तक माल का क्रय/विक्रय देनदार खाता विक्रय खाते से नाम क्रय खाता नाम लेनदार खाते से विपत्रा की प्राप्ित/स्वीकार करना प्राप्य विपत्रा खाता देनदार खाते से नाम लेनदार खाता नाम देय विपत्रा खाते से विपत्रा का बेचान लेनदार खाता प्राप्य विपत्रा खाते से नाम कोइर् प्रविष्िट नहीं विपत्रा का परिपक्वता कोइर् प्रविष्िट नहीं देय विपत्रा खाता नाम बैंक खाते से उदाहरण 1 1 जनवरी, 2006 को अमित ने सुमित को 20ए000 रु. का उधर माल बेचा और तीन माह की अवध्ि का एक विपत्रा सुमित पर लिखा। सुमित ने विपत्रा स्वीकार किया और अमित को वापिस भेज दिया। परिपक्वता तिथ्िा पर सुमित ने विपत्रा का भुगतान कर दिया। निम्नवत अवस्थाओं के संदभर् में इन व्यवहारों की प्रविष्िटयाँ अमित और सुमित की पुस्तकों में कीजिए - ;पद्ध यदि अमित परिपक्वता तिथ्िा तक विपत्रा अपने पास रखता है। ;पपद्ध यदि अमित 12ः प्रति वषर् दर से विपत्रा को बैंक से भुना लेता है। ;पपपद्ध यदि अमित द्वारा अंकित को विपत्रा का बेचान किया जाता है। ;पअद्ध यदि 31 माचर्, 2006 को अमित विपत्रा अपने बैंकर को संग्रह हेतु भेजता है और 5 अप्रैल को विपत्रा भुगतान की सूचना प्राप्त होती है। हल अमित की पुस्तक रोजनामचा ;पद्ध जब अमित परिपक्वता तिथ्िा तक विपत्रा अपने पास रखता है। तिथ्िा 2006 विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा;रु.द्ध जमा राश्िा;रु.द्ध 01 जनवरी सुमित का खाता विक्रय खाते से ;सुमित को माल का उधर विक्रयद्ध नाम 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 01 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता सुमित के खाते से ;सुमित ने विपत्रा स्वीकार कियाद्ध नाम 05 अप्रैल बैंक खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतानद्ध नाम ;पपद्ध जब अमित विपत्रा को बैंक से भुनवा लेता है। रोजनामचा तिथ्िा 2006 विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा;रु.द्ध जमा राश्िा;रु.द्ध 01 जनवरी सुमित का खाता नाम विक्रय खाते से ;सुमित को माल का उधर विक्रयद्ध 20ए000 20ए000 01 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता सुमित के खाते से ;सुमित ने विपत्रा स्वीकार कियाद्ध नाम 20ए000 19ए400 600 20ए000 20ए000 01 जनवरी बैंक खाता बट्टा खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;विपत्रा को बैंक से भुनानाद्ध नाम नाम ;पपपद्ध जब अमित विपत्रा अंकित ;लेनदार द्ध के पक्ष बेचान करता है। रोजनामचा तिथ्िा 2006 विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा ;रु.द्ध जमा राश्िा ;रु.द्ध 01 जनवरी सुमित वफा खाता विक्रय खाते से ;सुमित को उधर विक्रयद्ध नाम 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 01 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता सुमित के खाते से ;सुमित ने विपत्रा स्वीकार कियाद्ध नाम 01 जनवरी अंकित का खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;अंकित के पक्ष में विपत्रा को भुगतानद्ध नाम ;पअद्ध अमित द्वारा विपत्रा वसूली के लिए बैंक में भेजा गया। रोजनामचा तिथ्िा 2006 विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा ;रु.द्ध जमा राश्िा ;रु.द्ध 01 जनवरी सुमित का खाता विक्रय खाते से ;सुमित को माल का उधर क्रयद्ध नाम 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 01 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता सुमित के खाते से ;सुमित ने विपत्रा स्वीकार कियाद्ध नाम 31 माचर् विपत्रा संग्रह के लिए भेजना खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;विपत्रा की वसूली के लिए भेजनाद्ध नाम 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 5 अप्रैल बैंक खाता विपत्रा संग्रह के लिए भेजना खाते से ;विपत्रा की वसूलीद्ध नाम सभी अवस्थाओं में सुमित की पुस्तक में निम्नवत् प्रविष्िटयाँ की जाएगी। सुमित की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा 2006 विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 1 जनवरी क्रय खाता अमित के खाते से ;अमित से उधर क्रयद्ध नाम 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 1 जनवरी अमित खाता देय विपत्रा खाते से;तीन माह की अवध्ि के लिए स्वीकृत प्राप्तद्ध नाम 4 अप्रैल देय विपत्रा खाता बैंक खाते से ;परिपक्वता पर भुगतानद्ध नाम उदाहरण 2 15 माचर्, 2006 को रमेश ने दीपक को 8ए000 रु. का माल उधर बेचा तथा उक्त राश्िा के लिए तीन माह की अवध्ि का दीपक पर एक विपत्रा लिखा। 15 अप्रैल को रमेश ने अपनी लेनदार पूनम के पक्ष में 8ए250 रुपए के पूणर् भुगतान के रूप में विपत्रा का बेचान किया 15 मइर् को पूनम ने 12» प्रति वषर् की दर से विपत्रा को भुना लिया। परिपक्वता तिथ्िा पर दीपक ने विपत्रा का भुगतान कर दिया। रमेश, दीपक और पूनम के रोजनामचों में प्रविष्िटयाँ कीजिए। 316 लेखाशास्त्रा - वित्तीय लेखांकन हल रमेश की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा 2006 15 माचर् 15 माचर् 15 अप्रैल विवरण दीपक का खाता विक्रय खाते से ;दीपक को उधर माल बेचाद्ध प्राप्य विपत्रा खाता दीपक के खाते से ;दीपक ने विपत्रा पर स्वीकृति दीद्ध पूनम का खाता प्राप्य विपत्रा खाते से बट्टा प्राप्ित खाते से ;विपत्रा का पूनम को बेचान तथा 8ए250 रु. का पूणर् भुगतानद्ध नाम नाम नाम ब.पृ.सं नाम राश्िा रु8ए000 8ए000 8ए250 जमा राश्िा रु8ए000 8ए000 8ए000 250 दीपक की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा 2006 5 माचर् 5 माचर् 18 जून विवरण क्रय खाता रमेश के खाते से ;रमेश से माल का उधर क्रयद्ध रमेश का खाता देय विपत्रा खाते से;रमेश को विपत्रा पर स्वीकृति भेजी गइर्द्ध क्रय विपत्रा खाता बैंक खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर भुगतान किया गयाद्ध नाम नाम नाम ब.पृ.सं नाम राश्िा रु8ए000 8ए000 8ए000 जमा राश्िा रु8ए000 8ए000 8ए000 पूनम की पुस्तक रोजनामचा दिनांक विवरण 2006 15 माचर् प्राप्य विपत्रा खाता विपत्रा पर बट्टा खाता रमेश के खाते से ;रमेश द्वारा पूनम को विपत्रा का बेचानद्ध 5 माचर् बैंक खाता विपत्रा पर बट्टा खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;विपत्रा को बैंक से भुनाया गयाद्ध नाम नाम नाम नाम ब.पृ.सं नाम 8ए000 250 7ए920 80 जमा 8ए250 8ए000 8ण्8 विनिमय - विपत्रा का अनादरण जब विपत्रा का स्वीकारकत्तार् परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा भुगतान नहीं करता है तो इसे विपत्रा का अनादरण कहते हैं। विपत्रा के अनादृत होने पर उसके धरक को विपत्रा के सभी पक्षों को अनादरण सूचना देनी होती है अन्यथा सूचना नहीं पाने वाले पक्षकार अपने दायित्व से मुक्त हो जाते हैं। ऐसी स्िथति में विपत्रा प्राप्ित की विपरीत प्रविष्िट की जाती है। उदाहरण के लिए, अंजू द्वारा लिखा विपत्रा मंजू ने स्वीकार किया। भुगतान तिथ्िा पर विपत्रा अनादृत होता है। तो ऐसी स्िथति में मंजू की पुस्तक में निम्नलिख्िात लेखे किए जाएँगेः जब अंजू परिपक्वता तिथ्िा तक विपत्रा अपने पास रखती है मंजू का खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाता से जब अंजू संध्या को विपत्रा का बेचान करती है मंजू का खाता नाम संध्या के खाते से जब अंजू विपत्रा को बैंक में भुनाती है मंजू का खाता नाम बैंक खाते से जब अंजू विपत्रा संग्रह हेतु भेजती है मंजू का खाता नाम विपत्रा संग्रह हेतु भेजना खाते से उदाहरण 3 1 जनवरी, 2006 को विशाल ने शीबा से 10ए000 रु. का उधर माल खरीदा। शीबा ने विशाल परदो माह की अवध्ि का विपत्रा लिखा जिसे विशाल द्वारा स्वीकृत किया गया है। परिपक्वता तिथ्िा पर विशाल द्वारा विपत्रा का अनादरण होता है। निम्न परिस्िथतियों में शीबा और विशाल की पुस्तकों में प्रविष्िटयाँ कीजिएः ऽ जब परिपक्वता तिथ्िा तक शीबा विपत्रा को अपने पास रखती है। ऽ जब शीबा अपने बैंक से विपत्रा को 200 रु. पर भुनाती है। ऽ जब शीबा लाल चंद को विपत्रा का बेचान करती है। हल ;पद्ध जब शीबा परिपक्वता तिथ्िा तक विपत्रा अपने पास रखती है। शीबा की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण 2006 1 जनवरी विशाल का खाता विक्रय खाते से ;विशाल द्वारा माल का क्रयद्ध 1 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता विशाल के खाते से ;विशाल विपत्रा पर अपनी स्वीकृति देता हैैद्ध 4 माचर् विशाल का खाता प्राप्य - विपत्रा खाते से ;विशाल विपत्रा का अनादरण करता हैद्ध नाम नाम नाम ब.पृ.संनाम जमा राश्िा ;रु.द्ध राश्िा ;रु.द्ध 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 ;पपद्ध जब शीबा विपत्रा बैंक से भुनाती है। रोजनामचा तिथ्िा विवरण 2006 1 जनवरी विशाल का खाता विक्रय खाते से ;विशाल द्वारा माल का क्रयद्ध नाम ब.पृ.संनाम जमा राश्िा ;रु.द्ध राश्िा ;रु.द्ध 10ए000 10ए000 1 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता विशाल के खाते से;विशाल द्वारा विपत्रा पर स्वीकृतिद्ध नाम 10ए000 9ए800 200 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 1 जनवरी बैंक खाता विपत्रा पर बट्टा का खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;विपत्रा का बैंक से भुनानाद्ध नाम नाम 4 माचर् प्राप्य विपत्रा खाता बैंक खाते से ;विशाल द्वारा विपत्रा का अनादरणद्ध नाम ;पपपद्ध जब शीबा लालचंद को विपत्रा बेचान करती है। रोजनामचा तिथ्िा 2006 विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 1 जनवरी 1 जनवरी 1 जनवरी 4 माचर् विशाल का खाता विक्रय खाते से ;विशाल द्वारा माल का क्रयद्ध नाम 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 प्राप्य विपत्रा खाता विशाल के खाते से;विपत्रा पर विशाल की स्वीकृतिद्ध नाम लाल चंद का खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;लाल चंद को विपत्रा का बेचानद्ध नाम प्राप्य विपत्रा खाता लाल चंद खाते से ;भुगतान तिथ्िा पर विपत्रा का अनादरणद्ध नाम उपरोक्त अवस्थाओं में विशाल की पुस्तक में निम्न प्रविष्िटयाँ की जाएँगी विशाल की पुस्तक रोजनामचा दिनांक 2006 1 जनवरी विवरण क्रय खाता शीबा के खाते से ;शीबा द्वारा माल का विक्रयद्ध नाम ब.पृ.सं नाम राश्िा रु10ए000 जमा राश्िा रु10ए000 1 जनवरी शीबा के खाते से देय विपत्रा खाता;शीबा द्वारा लिखे विपत्रा पर स्वीकृति प्राप्तद्ध नाम 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 4 माचर् देय विपत्रा खाता शीबा के खाते से ;भुगतान तिथ्िा पर विपत्रा का अनादरणद्ध नाम 8ण्8ण्1 निकराइर् व्यय जब विपत्रा का भुगतान प्राप्त नहीं होता है तब यह प्रमाण्िात करने के लिए कि विपत्रा का भुगतान प्राप्तनहीं हो सका है, आहतार्/बिलकत्तार् द्वारा इस संंेवाही की जाती है। विनिमय विपत्रा के अनादरण बध् म कायर्होने का प्रमाण लेना आवश्यक होता है। विपत्रा के उचित प्रस्तुतीकरण से आशय है कि बिल कोपरिपक्वता तिथ्िा पर स्वीकारकत्तार् के समक्ष व्यावसायिक कायर्कारी घंटों के दौरान प्रस्तुत किया जाना। विपत्रा का अनादरण विपत्रालोकी ;नोटरी पब्िलकद्ध की उपस्िथति में कराया जाता है। यह अध्िकारी विपत्रा के पीछे यह प्रमाण्िात करता है कि मेरी उपस्िथति मंे विपत्रा भुगतान के लिए पेश किया गया था लेकिन स्वीकारकतार् द्वारा विपत्रा का अनादरण किया गया। नोटरी पब्िलक अध्िकारी अपने हस्ताक्षर करके विपत्रा पर सील लगा देता है। ऐसा करने से अनादरण का तथ्य स्वतः ही सि( हो जाता है। इस अध्िकारी को दिया गया शुल्क निकराइर् व्यय कहलाता है। निम्नलिख्िात तथ्य नोटरी पब्िलक द्वारा प्रमाण्िात किए जाते हैंः ऽ अनादरण होने का दिनांक, तथ्य एवं कारणऋ ऽ यदि विपत्रा के अनादरण का खुलासा नही हो पाया है तो अनादरण के कारण व्यक्त करनाऋ ऽ निकराइर् व्यय की राश्िा।आहतार्/बिलकत्तार् की लिखने वाले की पुस्तकों में विभ्िान्न परिस्िथतियों में निकराइर् व्यय के निम्नलिख्िात लेेखे किए जाते हैं - ऽ जब आहतार् स्वयं निकराइर् व्यय देता हैस्वीकारकत्तार् खाता नाम रोकड़ खाते से ऽ जब बेचानकत्तार् निकराइर् व्यय देता हैस्वीकारकत्तार् खाता नाम बेचानकत्तार् के खाते से ऽ जब बैंक भुनाए गए विपत्रा पर निकराइर् व्यय देता है स्वीकारकतार् खाता नाम बैंक खाते से ऽ विपत्रा को बैंक में संग्रह हेतु भेजे जाने की स्िथति में, बैंक द्वारा निकराइर् व्यय का भुगतान स्वीकारकतार् खाता नाम बैंक खाते से उपयुर्क्त सभी अवस्थाओं में ध्यान देने योग्य बात यह है कि चाहे किसी भी पक्ष द्वारा निकराइर् व्ययकिए जाएँ, ऐसे व्यय का भार स्वीकारकत्तार् पर ही रहता है। इसका कारण यह है कि स्वीकारकत्तार् द्वारा विपत्रा का अनादरण हुआ है, अतः उसे ही इन व्ययों का भुगतान करना पड़ेगा। इस संदभर् मेंस्वीकारकत्तार् अपनी पुस्तक में ‘निकराइर् व्यय खाता’ खोलता है वह निकराइर् व्यय खाते को नाम तथाआहतार्/बिलकत्तार् खाते को जमा करता है। उदाहरणतयाः आजाद ने ंेबटी का15ए000 रुपए का माल बेचा और तत्काल तीन माह की अवध्ि के लिए 1 जनवरी, 2006 को एक विपत्रा लिखा। परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा अनादृेे े भगतान हतुत हानपर धरक द्वारा 50 रुपए निकराइर् व्यय कुेआजाद और बंटी की पुस्तकों मे निम्नवत् पविष्िटयाँ की जाएगीः ं्रँऽ जब आजाद विपत्रा स्वयं परिपक्वता तिथ्िा तक रखता है। ऽ जब आजाद बैंक से 12» प्रतिवषर् की दर से विपत्रा भुनाता है। ऽ जब आजाद चित्रा को विपत्रा का बेचान करता है। आजाद की पुस्तक में प्रविष्िटयाँ इस प्रकार होगीः आजाद की पुस्तक रोजनामचा ;पद्ध जब आजाद विपत्रा स्वयं के पास परिपक्वता तिथ्िा तक रखता है। तिथ्िा विवरण 2006 01 जनवरी बंटी का खाता विक्रय खाते से ;बंटी से उधर माल खरीदाद्ध 01 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता बंटी खाते से;बंटी से स्वीकृति प्राप्त हुइर्द्ध 04 अप्रैल बंटी का खाता प्राप्य विपत्रा खाते से रोकड़ खाते से ;बंटी द्वारा विपत्रा का अनादरण और 50 रु. निकराइर् व्यय का भुगतानद्ध नाम नाम नाम ब.पृ.संनाम राश्िा रु15ए000 15ए000 15ए050 जमा राश्िा रु15ए000 15ए000 15ए000 50 रोजनामचा ;पपद्ध जब अजाद ने विपत्रा बैंक से भुनाया। तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम जमा 2006 राश्िा रु राश्िा रु 01 जनवरी बंटी का खाता नाम 15ए000 विक्रय खाते से 15ए000 ;बंटी द्वारा उधर क्रयद्ध 15ए000 01 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता नाम बंटी के खाते से 15ए000 ;विपत्रा पर स्वीकृति प्राप्तद्ध 14ए550 01 जनवरी बैंक खाता नाम बट्टा खाता नाम 450 प्राप्य विपत्रा खाते से 15ए000 ;विपत्रा को बैंक से बट्टागत कराया गयाद्ध 15ए050 04 अप्रैल बंटी का खाता नाम बैंक खाते से 15ए050 ;भुगतान तिथ्िा पर विपत्रा का अनादरण और निकराइर् व्ययों का बैंक द्वारा भुगतानद्ध चित्रा को विपत्रा का बेचान रोजनामचा तिथ्िा 2006 विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 01 जनवरी 01 जनवरी 01 जनवरी 04 अपै्रल बंटी का खाता नाम विक्रय खाते से ;बंटी द्वारा उधर क्रयद्ध 15ए000 15ए000 15ए000 15ए050 15ए000 15ए000 15ए000 15ए050 प्राप्य विपत्रा खाता बंटी का खाते से;बंटी की स्वीकृति प्राप्तद्ध चित्रा का खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से ;विपत्रा का अनादरणद्ध बंटी का खाता नाम चित्रा का खाते से ;बंटी द्वारा विपत्रा का अनादरण और चित्रा द्वारा निकराइर् व्यय का भुगतानद्ध तीनों परिस्िथतियों में बंटी की पुस्तक में निम्न प्रविष्िटयाँ की जाएँगी। बंटी की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण 2006 01 जनवरी क्रय खाता आजाद के खाते से ;आजाद से उधर क्रयद्ध 01 जनवरी आजाद का खाता देय विपत्रा खाते से ;विपत्रा पर स्वीकृतिद्ध 04 अप्रैल देय विपत्रा खाता निकराइर् व्यय खाता आजाद के खाते से ;विपत्रा का अनादरणद्ध नाम नाम नाम ब.पृ.संनाम राश्िा रु15ए000 15ए000 15ए000 50 जमा राश्िा रु15ए000 15ए000 15ए050 8ण्9 विपत्रा का नवीनीकरण कइर् बार ऐसी स्िथति हो जाती है कि विपत्रा स्वीकार करने वाला विपत्रा का भुगतान परिपक्वता तिथ्िा पर नहीं कर पाता है। ऐसी दशा में वह विपत्रा के अनादरण की अपेक्षा आहतार् को देय तिथ्िा से पूवर् विपत्रा को रद्द करने तथा नया विपत्रा आगे की अवध्ि के लिए लिखने का अनुरोध् करता है। इस प्रियाको विनिमय विपत्रा नवीनीकरण कहते हैं। वह इस नए विपत्रा को स्वीकृति देकर आहतार् को वापिस देदेता है। नए विपत्रा की अवध्ि, ब्याज की दर आदि शते± आहतार्/बिलकत्तार् और स्वीकारकत्तार् आपस में तय कर लेते हैं। ब्याज की राश्िा या तो नकद दे दी जाती है और यदि इसका प्रबंध् न हो सके तो इसेभी विपत्रा की रकम में जोड़ दिया जाता है। कइर् बार स्वीकारकत्तार् आंश्िाक राश्िा का भुगतान करता हैै और अतिरिक्त राश्िा के लिए विपत्रा का नवीनीकरण कराता है। उदाहरण के लिए, एक विपत्रा 10ए000 रु. के लिए प्रस्तुत किया गया। यदि स्वीकारकत्तार् केवल 3ए000 रु. का प्रबंध् कर सका तो ऐसी स्िथति में 7ए000 रु. का नया विपत्रा ब्याज की राश्िा के साथ लिखा जा सकता है। आहतार् और स्वीकारकत्तार् की पुस्तकों में प्रविष्िटयाँ विपत्रा के अनादरण के समान की जाएगी। यदि ब्याज की राश्िा नकद में दी जाती है तो इसे आय माना जाता है। यदि ब्याज की राश्िा नकद नहीं दी जाती तो ऐसी स्िथति मेंआहतार्/बिलकत्तार् स्वीकारकत्तार् के खाते को नाम और ब्याज खाते में जमा करेगा। स्वीकारकत्तार् ब्याज को नाम और लेखक के खाते को जमा करेगा। लेन - देन आहतार् की पुस्तक स्वीकारकत्तार् की पुस्तक विपत्रा रद्द करना स्वीकारकत्तार् खाता प्राप्त विपत्रा खाते से नाम देय विपत्रा खाता आहतार् खाते से नाम ब्याज की राश्िा स्वीकारकत्तार् खाता ब्याज खाते से नाम ब्याज खाता आहतार् खाते से नाम नया विपत्रा लिखना प्राप्य विपत्रा खातास्वीकारकत्तार् खाते से नाम आहतार् खाता देय विपत्रा खाते से नाम मान लीजिए, 1 पफरवरी, 2006 को रवि ने मोहन को 18ए000 रु. का उधर माल बेचा। मोहन ने 3ए000 रु. का तत्काल नकद भुगतान किया तथा शेष राश्िा के लिए तीन माह की अवध्ि का विपत्रा स्वीकार किया। परिपक्वता तिथ्िा पर मोहन ने रवि से पुराना विपत्रा रद्द करने और उसके स्थान पर दो माह की अवध्ि का नया विपत्रा लिखने का अनुरोध् किया। मोहन ने 12» प्रतिवषर् की दर से नकद ब्याज देने का निणर्य लिया। मोहन के अनुरोध् पर रवि ने पुराना विपत्रा रद्द कर नया विपत्रा लिखा। परिपक्वता तिथ्िा पर मोहन ने विपत्रा का भुगतान कर दिया। इस संदभर् में रवि और मोहन की पुस्तकों में प्रविष्िटयाँ इस प्रकार की जाएँगीः रवि की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा 2006 विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 1 पफरवरी मोहन का खाता विक्रय खाते से ;मोहन को उधर माल बेचाद्ध नाम 18ए000 3ए000 18ए000 1 पफरवरी रोकड़ खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाता नाम 15ए000 मोहन के खाते से ;मोहन ने 3ए000 रु. का नकद भुगतान किया और शेष राश्िा के लिए विपत्रा स्वीकार किया।द्ध 15ए300 18ए000 1 मइर् मोहन का खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से 15ए000 ब्याज प्राप्ित खाते से ;पुराना विपत्रा रद्द किया गया और 300 रु. ब्याज राश्िा का भुगतान कियाद्ध 300 4 मइर् प्राप्य विपत्रा खाता रोकड़ खाता मोहन के खाते से;मोहन ने नये विपत्रा पर स्वीकृति दीद्ध नाम 15ए000 300 15ए000 15ए300 15ए000 7 जुलाइर् बैंक खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;मोहन ने विपत्रा का भुगतान कियाद्ध नाम मोहन की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा 2006 विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 1 पफरवरी 1 पफरवरी क्रय खाता नाम रवि का खाते से ;रवि से उधर माल खरीदाद्ध 18ए000 18ए000 18ए000 रवि का खाता नाम रोकड़ खाते से 3ए000 4 मइर् प्राप्य विपत्रा खाते से ;रवि को 3ए000 रु. का नकद भुगतान किया और शेष राश्िा का विपत्रा स्वीकार कियाद्ध 15ए000 15ए000 देय विपत्रा खाता नाम ब्याज खाता नाम 300 4 मइर् रवि के खाते से ;पुराना विपत्रा रद्द किया और 300 रुब्याज राश्िा का भुगतान कियाद्ध 15ए000 15ए300 रवि का खाता नाम देय विपत्रा खाते से 15ए000 7 जुलाइर् रोकड़ खाते से ;नया विपत्रा स्वीकार कियाद्ध 15ए000 300 15ए000 देय विपत्रा खाता नाम बैंक खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतानद्ध 8ण्10 विनिमय विपत्रा का परिपक्वता तिथ्िा से पूवर् भुगतान कभी - कभी आहतार् और स्वीकारकत्तार् की आपसी सहमति से विपत्रा का भुगतान परिपक्वता तिथ्िा सेपूवर् कर दिया जाता है। ऐसा तब होता है जब स्वीकारकत्तार् के पास पयार्प्त ध्नराश्िा होती है और वह विपत्रा की राश्िा का परिपक्वता तिथ्िा से पहले भुगतान करने का निश्चय करता है। वह इसकी जानकारीविपत्रा के लेखक को देता है और यदि उसे लेखक की स्वीकृति प्राप्त हो जाती है तो वह किसी भीदिन विपत्रा का भुगतान कर देता है। चूँकि स्वीकारकत्तार् राश्िा का देय तिथ्िा से पूवर् भुगतान करता है इस कारण वह जितने दिन पूवर् भुगतान करता है उतने दिन का ब्याज विनिमय विपत्रा की राश्िा में से घटा कर, शेष राश्िा आहतार् को देता है। परिपक्वता तिथ्िा से पूवर् विपत्रा के भुगतान को प्रोत्साहित करनेहेतु आहतार्/बिलकत्तार् विपत्रा पर एक निश्िचत बट्टा प्रदान करता है जिसे विपत्रा पर छूट कहते हैं। छूट की राश्िा का निधार्रण एक निश्िचत ब्याज दर पर किया जाता है। समान्य परिस्िथतियों में, परिपक्वता तिथ्िा से पूवर् विपत्रा के भुगतान का लेखांकन व्यवहार देय तिथ्िा पर विपत्रा के भुगतान के समान ही होता है। दोनो मदों के मध्य केवल छूट प्राप्ित लेखांकन व्यवहार का ही अंतर होता है। उपरोक्त स्िथति मेें निम्नलिख्िात प्रविष्िटयाँ की जाती हैंः धरक की पुस्तक में विपत्रा का अवध्ि से पहले भुगतान और छूट प्राप्त होने पर रोकड़ खाता नाम विपत्रा पर छूट खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से स्वीकारकत्तार् की पुस्तक में देय विपत्रा खाता नाम रोकड़ खाता नाम विपत्रा पर छूट खाते से उदाहरण के लिए अमित ने बबली को 1 जनवरी, 2006 को 10ए000 रु. का उधर माल बेचा और उक्त राश्िा काएक विपत्रा लिखा जिसे बबली ने स्वीकृत करके अमित को वापिस कर दिया। 4 माचर्, 2006 को 6ः वाष्िार्क छूट पर विपत्रा का भुगतान कर दिया। इस संदभर् में निम्नांकित प्रविष्िटयाँ की जाएगीः अमित की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2006 1 जनवरी बबली का खाता नाम विक्रय खाते से ;बंटी को उधर माल बेचा।द्ध 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 1 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता नाम बंटी के खाते से;तीन माह की अवध्ि के लिए स्वीकृत प्राप्तद्ध 4 माचर् रोकड़ खाता विपत्रा पर छूट खाताप्राप्य विपत्रा खाते से ;विपत्रा भुगतान प्राप्त हुआद्ध नाम नाम 9ए950 50 10ए000 अभ्िालिख्िात प्रविष्िटयों की खतौनी इस प्रकार होगीः बबली का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं राश्िा रु 2006 2006 1 जनवरी विक्रय 10ए000 1 जनवरी प्राप्य विपत्रा 10ए000 प्राप्त किया खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं राश्िा रु 2006 1 जनवरी बबली 10ए000 2006 1 जनवरी रोकड़ विपत्रा पर छूट 9,950 50 10ए000 बबली की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2006 01 जनवरी क्रय खाता नाम अमित के खाते से;अमित से माल खरीदाद्ध 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 9ए950 50 01 जनवरी अमित का खाता नाम देय विपत्रा खाते से ;विपत्रा पर स्वीकृति प्राप्तद्ध 04 माचर् देय विपत्रा खाता नाम रोकड़ खाता विपत्रा पर छूट खाते से ;देय तिथ्िा से पूवर् भुगतान और छूट प्राप्तद्ध अमित का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 01 जनवरी देय विपत्रा 10ए000 2006 04 जनवरी क्रय 10ए000 10ए000 10ए000 328 लेखाशास्त्रा - वित्तीय लेखांकन देय विपत्रा खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 2006 01 जनवरी रोकड़ 10ए000 01 जनवरी अमित 10ए000 विपत्रा पर छूट 50 10ए000 10ए000 8ण्11 प्राप्य विपत्रा बही और देय विपत्रा पुस्तवेंफ जब व्यापार में अध्िक मात्रा में विपत्रों का लेन - देन होने लगता है तब विपत्रों से संबंध्ित लेन - देनों के प्रत्येक सौदे को रोजनामचा प्रविष्िट के माध्यम से अभ्िालेख्िात किया जाना एक किस्म से बाधप्रद हो जाता है। तब यह आवश्यक समझा जाता है कि विशेष सहायक बही बनाइर् जाए जिसमें सभी प्राप्य विपत्रों और देय विपत्रों का लेखा हो। विपत्रा संबंध्ी लेन - देनों को सहायक पुस्तकों में अभ्िालिख्िात करने का कारण रोकड़ क्रय आदि को सहायक पुस्तकों में प्रविष्िट करने के समान होता है। सहायक बही के संबंध् में एक आवश्यक बिंदु यह है कि इनमें बेचान, अनादरण, भुनाना, रद्द करना, समय पूवर् भुगतान के संदभर् मेंप्रविष्िटयाँ नहीं की जाती हंै, बल्िक सिपफर् विपत्रा को लिखने व स्वीकृत करने की प्रविष्िटयाँ अभ्िालिख्िात होती हैं। ध्यानयोग्य है कि विपत्रा के भुगतान की प्रविष्िट रोकड़ बही में की जाती है। 8ण्11ण्1 प्राप्य विपत्रा पुस्तक इस पुस्तक में व्यापारी द्वारा प्राप्त विपत्रा और उनके भुगतान से संबंध्ित सूचनाएँ रहती हैं। विपत्रा कीतिथ्िा स्वीकारकत्तार् का नाम, राश्िा, अवध्ि, भुगतान का स्थान आदि सूचनाएँ इसमें सम्िमलित होती हैं। अन्य सहायक पुस्तकों के समान प्राप्य विपत्रा पुस्तक को निश्िचत समयावध्ि पर जोड़ा जाता है। इस जोड़ को प्राप्य विपत्रा खाते में नाम किया जाता है, जबकि प्रत्येक देनदार के खाते को खाता - बही मेंजमा किया जाता है। प्राप्य विपत्रा खाता एक परिसंपिा खाता है तथा सदैव इसका नाम शेष रहता है। किसी भी दिनांक पर प्राप्य विपत्रा का शेष अपरिपक्व प्राप्य विपत्रा माना जाता है। प्राप्य विपत्रा पुस्तक का प्रारूप चित्रा 8ण्3 मे दशार्या गया है। प्राप्य विपत्रा बही सं. प्राप्ित विपत्रा किससे लेखक स्वीकारकत्तार् देय अवध्ि देय ब.पृ.स राश्िा रो.ब.सं टिप्पणी तिथ्िा की प्राप्त स्थान तिथ्िा रु तिथ्िा किया चित्रा 8ण्3ः प्राप्त विपत्रा बही का प्रारुप 8ण्11ण्2 देय विपत्रा बही इस पुस्तक को प्राप्य विपत्रा बही के समान बनाया जाता है। व्यापारी जो माल दूसरे व्यापारियों से क्रय करता है और उसके बदले में विपत्रा स्वीकार करता है, उन विपत्रों का लेखा देय विपत्रा बही में किया जाता है। देय विपत्रा का प्रारूप चित्रा 8ण्4 में दशार्या गया है। देय विपत्रा बही सं. विपत्रा की तिथ्िा किसे दिया गया लेखक पाने वाला कहाँपर देय अवध्ि देय तिथ्िा ब.पृ.स राश्िा रु दिनांक रो.पृ.सं टिप्पणी चित्रा 8ण्4रू देय विपत्रा बही का प्रारूप इस पुस्तक से प्रविष्िटयाँ प्रत्येक लेनदार के खाते में नाम पक्ष मंे की जाती है। इस पुस्तक का समय - समय पर किया गया कुल जोड़ देय विपत्रा खाते के जमा पक्ष में लिखा जाता है। चूँकि देय विपत्रा खाता दायित्व दशार्ता है, इसलिए इसका शेष जमा पक्ष मे लिखा जाता है। इस खाते के जमा पक्ष का जोड़ किसी भी दिनांक पर देय विपत्रा प्रस्तुत होने के जोड़, जो देय विपत्रा बही से पता चलता है, के समान होना चाहिए। उदाहरण के लिए निम्नलिख्िात लेन - देनों की प्राप्य विपत्रा और देय विपत्रा पुस्तक में प्रविष्िटयाँ संबंध्ित खाता - बही में खतौनी सहित इस प्रकार की जाएंगीः 2006 7 जनवरी तीन माह की अवध्ि के लिए श्री एस. मित्रा से 1ए32ए500 रुपए का विपत्रा दिनांक 4 जनवरी को स्वीकार किया। 9 जनवरी दो माह की अवध्ि के लिए श्री. एस. वध्र्न से 9ए70ए000 रु. का विपत्रा स्वीकार किया। 13 जनवरी प्रधन ने तीन माह की अवध्ि के लिए 39ए000 रुपए का विपत्रा लिखाऋ जिस पर स्वीकृति प्राप्त हुइर्। 14 जनवरी आर. राकेश पर एक माह की अवध्ि के लिए 25ए500 रु. का विपत्रा लिखा जिसे उसने दूसरे दिन स्वीकार कर लिया। 18 जनवरी एस. पारकर को 42ए000 रुपए के लिए दो माह की स्वीकृति दी। 21 जनवरी जी. घोष को दो माह की अवध्ि के लिए 31ए000 रुपए के लिए स्वीकृति दी। 22 जनवरीडी. ध्ीमान से ए. वकील को विपत्रा पर स्वीकृति तीन माह की अवध्ि के लिए 20ए000 रुपए के लिए प्राप्त की। 23 जनवरी के. कंगा ने 30ए000 रुपए का माह की अवध्ि के लिए विपत्रा पर स्वीकृति दी। 27 जनवरीएम. मेयर द्वारा दो माह की अवध्ि के लिए लिखा, पी. पारकर द्वारा स्वीकृति 35ए000 रुपए का विपत्रा सी. शाह से प्राप्त किया। 31 जनवरी ए. रोबटर् को एक माह की अवध्ि के लिए 21ए500 रुपए के विपत्रा पर स्वीकृति दी। एस. मित्रा का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 1 जनवरी विक्रय 1ए32ए500 2006 7 जनवरी प्राप्य विपत्रा 1ए32ए500 1ए32ए500 1ए32ए500 आर. राकेश का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 14 जनवरी विक्रय 25ए000 2006 15 जनवरी प्राप्य विपत्रा 25ए000 25ए000 25ए000 जी. घोष का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 21 जनवरी विक्रय 31ए000 2006 21 जनवरी प्राप्य विपत्रा 31ए000 31ए000 31ए000 डी. ध्ीमान का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 22 जनवरी विक्रय 20ए000 2006 22 जनवरी प्राप्य विपत्रा 20ए000 20ए000 20ए000 प्राप्य विपत्रा बही देय विपत्रा बही सं. विपत्रा किसे दियागया लेखक पानेवाला कहाँपर देय अवध्ि देय तिथ्िा ब.पृ.सं राश्िारु. भुगतानकी तिथ्िा रो.पृ.सं टिप्पणी 2006 2006 01 09 जनवरी एस. वध्र्न एस. वध्र्न . 2 माह 31 माचर् 97ए000 02 13 जनवरी प्रधन प्रधन . 3 माह 16 अप्रैल 39ए000 03 18 जनवरी एस. पारकर एस. पारकर . 2 माह 21 माचर् 42ए000 04 31 जनवरी ए. रोबटर् ए. रोबटर् . 1 माह 03 माचर् 21ए000 योग 1ए99ए500 के. कंगा का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 23 जनवरी विक्रय 30ए000 30ए000 23 जनवरी प्राप्य विपत्रा 30ए000 30ए000 सी. शाह का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 27 जनवरी विक्रय 35ए000 35ए000 2006 27 जनवरी प्राप्य विपत्रा 35ए000 35ए000 प्राप्य विपत्रा खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 31 जनवरी माल 2ए73ए500 2ए73ए500 2006 31 जनवरी योग आ/ले 2ए73ए500 2ए73ए500 एस. वध्र्न का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 9 जनवरी देय विपत्रा 97ए000 2006 9 जनवरी प्राप्य विपत्रा 97ए000 97ए000 97ए000 प्रधन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 13 जनवरी देय विपत्रा 39ए000 2006 31 जनवरी प्राप्य विपत्रा 39ए000 39ए000 39ए000 विनिमय विपत्रा 333 एस. पारकर का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 18 जनवरी देय विपत्रा 42ए000 2006 18 जनवरी 18 जनवरी क्रय 42ए000 42ए000 42ए000 ए. रोबटर् का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं. राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 31 जनवरी देय विपत्रा 21ए500 2006 31 जनवरी क्रय 21ए500 21ए500 21ए500 देय विपत्रा खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 31 जनवरी शेष आ/ले 1ए99ए500 2006 31 जनवरी माल 1ए99ए500 1ए99ए500 1ए99ए500 टिप्पणीः विपत्रा के आहरण एवं स्वीकृति से यह मान लिया जाता है कि क्रय - विक्रय किया गया है। अतः विपत्रा लेन - देनों को इन पुस्तकों से लेनदार/देनदार खातों में हस्तांतरण के लिए क्रय - विक्रय का होना आवश्यक है। उदाहरण 4 15 जनवरी, 2006 को सचिन ने नारायण को 30ए000 रुपए का उधर माल बेचा और तीन माह की अवध्ि के लिए एक विनिमय - विपत्रा लिखा जिसे नारायण ने स्वीकार कर लिया। 31 जनवरी, 2006 को सचिन ने विनिमय - विपत्रा बैंक से 29ए250 रु. में भुना लिया। परिपक्वता तिथ्िा पर नारायण ने सचिन से विपत्रा रद्द करने और नया विनिमय - विपत्रा लिखने का अनुरोध् किया। नारायण ने सचिन को 10ए500 रु. जिसमें ब्याज की राश्िा 500 रु. सम्िमलित थी, का नकद भुगतान किया और शेष 20ए000 रु. की राश्िा के लिए नया विनिमय - विपत्रा स्वीकार किया। सचिन ने नया विनिमय - विपत्रा 20ए800 रु. ट्टण के पूणर् भुगतान के लिए अपने लेनदार कपिल को बेचान किया। नारायण ने देय तिथ्िा पर नए विनिमय - विपत्रा का भुगतान किया। सचिन और नारायण की पुस्तकों में प्रविष्िटयाँ कीजिए। 334 लेखाशास्त्रा - वित्तीय लेखांकन हल सचिन की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2006 15 जनवरी 15 जनवरी 31 जनवरी नारायण का खाता नाम विक्रय खाते से ;नारायण को उधर माल बेचाद्ध 30ए000 30ए000 29ए250 30ए000 30ए000 प्राप्य विपत्रा खाता नाम नारायण के खाते से ;नारायण ने विपत्रा स्वीकार कियाद्ध बैंक खाता नाम विपत्रा पर बट्टा 750 19 अपै्रल प्राप्य विपत्रा खाते से;स्वीकृत विपत्रा को बैंक से भुनायाद्ध 30ए500 30ए000 नारायण का खाता नाम बैंक खाता 30ए000 19 अप्रैल ब्याज खाते से ;विपत्रा रद्द को बैंक से भुनायाद्ध 10ए500 500 बैंक खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाता नाम 20ए000 19 अप्रैल नारायण के खाते से ;नारायण द्वारा नकद भुगतान औरनए विपत्रा पर स्वीकृतिद्ध 20ए800 30ए500 कपिल का खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से 20ए000 बट्टा प्राप्ित खाते से ;कपिल को विपत्रा का बेचान और बट्टा प्राप्तद्ध 800 नारायण की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2006 15 जनवरी क्रय खाता नाम सचिन का खाते से ;सचिन ने उधर माल बेचाद्ध 30ए000 30ए000 30ए000 30ए000 30ए000 15 जनवरी सचिन का खाता नाम देय विपत्रा खाते से;विपत्रा पर स्वीकृतिद्ध 19 अपै्रल देय विपत्रा खाता नाम ब्याज खाता नाम 500 सचिन के खाते से ;पुराना विपत्रा रद्द और उस पर ब्याज का भुगतानद्ध 30ए500 30ए500 19 अप्रैल सचिन का खाता नाम बैंक खाते से 10ए500 देय विपत्रा खाते से ;सचिन को नकद भुगतान और शेषराश्िा पर विपत्रा स्वीकृतद्ध 20ए000 20ए000 20ए000 22 जुलाइर् देय विपत्रा खाता नाम बैंक खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतानद्ध उदाहरण 5 30 अक्टूबर, 2005 को अशोक ने बिशन को 14ए000 रुपए का माल बेचा और तीन विपत्रा लिखेः पहला विपत्रा 2ए000 रुपए का दो माह की अवध्ि के लिए, दूसरा विपत्रा 4ए000 रुपए का तीन माह की अवध्ि के लिए, और तीसरा विपत्रा 8ए000 रुपए का चार माह की अवध्ि के लिए। पहला विपत्रा अशोक ने परिपक्वता तिथ्िा तक अपने पास रखा। दूसरा विपत्रा का अशोक ने अपने लेनदार चेतन को बेचान किया। तीसरा विपत्रा 3 दिसंबर, 2005 को 12ः प्रति वषर् की दर से भुना लिया गया। पहले और दूसरे विपत्रा का परिपक्वता तिथ्िा पर भुगतान कर दिया गया परंतु तीसरा विपत्रा अनादृत हुआ और बैंक ने 50 रुपए निकराइर् व्यय का भुगतान किया। 3 माचर्, 2006 को बिशन ने 4ए000 रुपए और निकराइर् व्यय का नकद भुगतान किया और शेष राश्िा के लिए नया विपत्रा 100 रुपए ब्याज सहित स्वीकार किया। परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतान किया गया। अशोक और बिशन के रोजनामचे में प्रविष्टयाँ कीजिए तथा अशोक की पुस्तक में बिशन का खाता और बिशन की पुस्तक में अशोक का खाता बनाइए। 336 लेखाशास्त्रा - वित्तीय लेखांकन हल अशोक की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.प.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2005 30 अक्टूबर 30 अक्टूबर 30 अक्टूबर 3 दिसंबर बिशन का खाता विक्रय खाते से ;बिशन द्वारा उधर माल विक्रयद्ध नाम 14ए000 14ए000 4ए000 7ए760 14ए000 14ए000 4ए000 प्राप्य विपत्रा खाता बिशन के खाते से;बिशन से तीन विपत्रों पर स्वीकृति प्राप्त कीद्ध नाम चेतन का खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;लेनदार चेतन को विपत्रा का बेचानद्ध नाम बैंक खाता बट्टा प्राप्ित खाता 240 2006 प्राप्य विपत्रा खाते से ;तीसरा विपत्रा बैंक से भुनायाद्ध 8ए000 2 जनवरी बैंक खाता नाम 2ए000 3 माचर् 3 माचर् 3 माचर् 3 माचर् 12 मइर् प्राप्य विपत्रा खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर पहले विपत्रा का भुगतानद्ध 8ए050 4ए050 100 4ए100 4ए100 2ए000 8ए050 4ए050 100 4ए100 4ए100 बिशन का खाता बैंक खाते से ;तीसरे विपत्रा का अनादरण हुआद्ध नाम रोकड़ खाता बिशन के खाते से ;बिशन से नकद प्राप्ित हुइर्द्ध नाम बिशन का खाता ब्याज खाता ;बढ़ाइर् गइर् अवध्ि पर ब्याज का भुगतानद्ध नाम प्राप्य विपत्रा खाता बिशन के खाते से;दो माह की अवध्ि के लिए नइर् स्वीकृति दीद्ध नाम बैंक खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा विपत्रा का भुगतानद्ध नाम विनिमय विपत्रा 337 बिशन का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2005 30 अक्टूबर 2006 3 माचर् 3 माचर् विक्रय बैंक ब्याज 14ए000 8ए050 100 2005 30 अक्टूबर 2006 3 माचर् 3 माचर् प्राप्य विपत्रा रोकड़प्राप्य विपत्रा 14ए000 4ए050 4ए100 22ए150 22ए150 बिशन की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.प.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2005 30 अक्टूबर क्रय खाता नाम अशोक के खाते से ;अशोक से उधर क्रयद्ध 14ए000 14ए000 14ए000 14ए000 30 अक्टूबर अशोक का खाता नाम देय विपत्रा खाते से;तीन विपत्रों पर स्वीकृति दीद्ध 2006 2 जनवरी देय विपत्रा खाता नाम 2ए000 बैंक खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर पहले विपत्रा का भुगतानद्ध 8ए000 2ए000 2 जनवरी देय विपत्रा खाता नाम निकराइर् व्यय खाता नाम 50 अशोक के खाते से ;तीसरे विपत्रा का अनादरण और 50 रु. निकराइर् व्यय का भुगतानद्ध 4ए050 100 8ए050 4ए050 100 3 माचर् अशोक खाता नाम रोकड़ खाते से ;अशोक को 4ए000 और निकराइर् व्यय का भुगतानद्ध 3 माचर् ब्याज खाता नाम अशोक खाता ;बढ़ाइर् गइर् समय सीमा पर ब्याजद्ध 3 माचर् अशोक का खाता नाम देय विपत्रा खाते से ;दो माह की अवध्ि के लिए नया विपत्रा स्वीकारद्ध 4ए100 4ए100 4ए100 4ए100 6 माचर् देय विपत्रा खाता नाम बैंक खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर नए विपत्रा का भुगतानद्ध अशोक का खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं राश्िा रु 2005 30 अक्टूबर 2006 9 माचर् 9 माचर् देय विपत्रा रोकड़देय विपत्रा 14ए000 4ए050 4ए100 2005 30 अक्टूबर 2006 3 माचर् 9 माचर् क्रय देय विपत्रा निकराइर् व्यय ब्याज 14ए000 8ए000 50 100 22ए150 22ए150 उदाहरण 6 आशीवार्द ने आकषर्क पर 10ए000 रु. का तीन माह की अवध्ि के लिए एक विपत्रा लिखा, जिसे 1 जनवरी, 2006 को आकषर्क ने स्वीकार किया। आशीवार्द ने आकृति को इस विपत्रा का बेचान किया। परिपक्वता तिथ्िा से पूवर् आकषर्क ने आशीवार्द से 18ः प्रति वषर् की दर से तीन माह कीअवध्ि के लिए विपत्रा के नवीनीकरण का अुनरोध् किया। आशीवार्द ने आकृति को देय तिथ्िा पर भुगतान किया साथ ही आकषर्क के अनुरोध् को स्वीकार कर नया विपत्रा लिखा। परिपक्वता तिथ्िा पर आकषर्क ने विपत्रा का भुगतान कर दिया। आशीवार्द की पुस्तक से प्रविष्िटयाँ कीजिए। हल आशीवार्द की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2006 1 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता नाम आकषर्क के खाते से;आकषर्क द्वारा स्वीकृति प्राप्तद्ध 10ए000 10ए000 1 जनवरी 4 अप्रैल 4 अप्रैल 4 अप्रैल 4 अप्रैल 7 जुलाइर् आकृति का खाता प्राप्य विपत्रा खाते से;आकृति को विपत्रा का बेचानद्ध नाम 10ए000 10ए000 10ए000 450 10ए450 10ए450 10ए000 10ए000 10ए000 450 10ए450 10ए450 आकषर्क का खाताआकृति के खाते से ;विपत्रा रद्द किया गयाद्ध नाम आकृति का खाता बैंक के खाते से ;आकृति को भुगतानद्ध नाम आकषर्क का खाता ब्याज खाते से ;18ः प्रतिवषर् की दर से तीन माह की अवध्ि पर ब्याजद्ध नाम प्राप्य विपत्रा खाता आकषर्क के खाते से;नए विपत्रा पर आकषर्क ने स्वीकृति दीद्ध नाम बैंक खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर नए विपत्रा का भुगतानद्ध नाम उदाहरण 7 1 अपै्रल, 2006 को अंकित ने निकिता को 6ए000 रुपए का तीन माह की अवध्ि के लिए एक प्रतिज्ञा - पत्रा लिखा जिसे निकिता ने 5ए760 रुपए में बैंक से भुना लिया। परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा अनादृत हुआ, जिस पर बैंक ने 15 रुपए निकराइर् व्यय का भुगतान किया। अंकित ने 2ए000 रुपए का नकद भुगतान किया और शेष राश्िा के लिए नया विपत्रा स्वीकार किया, जिसमें ब्याज के 100 रु. सम्िमलित थे। नया विपत्रा दो माह की अवध्ि के लिए लिखा गया। परिपक्वता तिथ्िा पर पुनः विपत्रा अनादृत हुआ और निकिता ने 15 रुपए निकराइर् व्यय का भुगतान किया। निकिता के रोजनामचे में प्रविष्िटयाँ कीजिए। हल निकिता की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा 2005 1 अप्रैल विवरण प्राप्य विपत्रा खाता अंकित के खाते से ;अंकित से प्रतिज्ञा - पत्रा प्राप्त कियाद्ध नाम ब.पृ.सं नाम राश्िा रु6ए000 जमा राश्िा रु6ए000 1 अप्रैल 4 जुलाइर् 4 जुलाइर् 4 जुलाइर् 4 जुलाइर् बैंक खाता नाम बट्टा प्राप्ित खाता नाम देय विपत्रा खाते से ;अंकित के प्रतिज्ञा - पत्रा को 5ए760 रु. में बैंक से भुनायाद्ध अंकित का खाता नाम बैंक खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का अनादरण और बैंक द्वारा निकराइर् व्यय का भुगतानद्ध 5ए760 240 6ए015 2ए000 100 4ए115 6ए000 6ए015 2ए000 100 रोकड़ खाता नाम अंकित के खाते से ;अंकित से नकद प्राप्ितद्ध अंकित का खाता नाम ब्याज खाते से ;नए विपत्रा पर ब्याजद्ध प्राप्य विपत्रा खाता नाम अंकित के खाते से ;बढ़ाइर् गइर् दो माह की अवध्ि पर अंकित की स्वीकृतिद्ध 4ए115 उदाहरण 8 1 मइर्, 2006 को मोहित ने 6ए000 रुपये का तीन माह की अवध्ि के लिए रोहित को एक प्रतिज्ञा - पत्रा भेजा। रोहित ने 4 मइर्, 2006 को बैकसंे 18ः प्रति वषर् की दर से विपत्रा भुना लिया। परिपक्वता तिथ्िा पर मोहित द्वारा विपत्रा अनादृत हुआ और बैंक ने 10 रुपये निरकाइर् व्यय किए। रोहित ने मोहित से 2ए170 रुपए नकद स्वीकार किए जिसमें 130 रुपए निकराइर् व्यय और ब्याज सम्िमलित हैं तथा 4ए000 रुपए का दो माह की अवध्ि के लिए नया प्रतिज्ञा - पत्रा स्वीकार किया। परिपक्वता तिथ्िा पर रोहित ने इस शतर् पर मोहित का अनुरोध् स्वीकार किया कि वह 200 रुपए ब्याज की नकद राश्िा का भुगतान करे। परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतान किया गया। रोहित और मोहित के रोजनामचे में प्रविष्िटयाँ कीजिए। मोहित की पुस्तक रोजनामचा दिनांक विवरण ब.पृ.स नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2006 1 मइर् रोहित का खाता नाम देय विपत्रा खाते से ;रोहित को प्रतिज्ञा - पत्रा भेजाद्ध 6ए000 6ए000 4 अगस्त देय विपत्रा खाता नाम निकराइर् खाता नाम रोहित के खाते से ;विपत्रा का अनादरण और निकराइर् व्ययद्ध 6ए000 10 120 6ए130 6ए010 120 4 अगस्त ब्याज खाता नाम रोहित के खाते से ;ब्याज की राश्िा का भुगतानद्ध 4 अगस्त रोहित का खाता नाम देय विपत्रा खाता 4ए000 रोकड़ खाते से ;2ए130 रुपए का नकद भुगतान और नया शेष राश्िा के लिए विपत्रा लिखाद्ध 4ए000 200 4ए200 2ए130 4ए000 200 7 अक्तूबर देय विपत्रा खाता नाम रोहित के खाते से ;विपत्रा रद्द किया गयाद्ध 7 अक्तूबर ब्याज खाता नाम रोहित के खाते से ;नये विपत्रा पर ब्याज की राश्िाद्ध 7 अक्टूबर रोहित खाता नाम रोकड़ खाते से 200 देय विपत्रा खाते से ;ब्याज का भुगतान और नया विपत्रा रोहित को भेजाद्ध 4ए000 4ए000 4ए000 1 जनवरी देय विपत्रा खाता नाम रोकड़ खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतानद्ध रोहित की पुस्तकें रोजनमचा दिनांक विवरण ब.पृ.स नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2006 01 मइर् प्राप्य विपत्रा खाता नाम मोहित के खाते से ;मोहित से प्रतिज्ञा पत्रा प्राप्तद्ध 6ए000 5ए730 270 6ए000 6ए000 04 मइर् बैंक खाता नाम बट्टा खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से ;प्रतिज्ञा पत्रा को 18ः प्रति वषर् की दर पर बैंक से भुनायाद्ध 04 अगस्त मोहित का खाता बैंक खाते से ;प्रतिज्ञा - पत्रा का अनादरण और बैंक ने 10 रु. निकराइर् व्यय दियेद्ध नाम 6ए000 120 6ए010 120 04 अगस्त मोहित का खाता ब्याज खाते से;ब्याज के रूप में स्वीकृत राश्िा का भुगतानद्ध नाम स्वयं जाँचिए - 3 रिक्त स्थानों की पूतिर् करेंः ;पद्ध विनिमय विपत्रा एक - - - - - - - - - - - - - - पत्राक है। ;पपद्ध विनिमय विपत्रा - - - - - - - - - द्वारा - - - - - - - - - पर लिखा जाता है। ;पपपद्ध प्रतिज्ञा पत्रा - - - - - - - - द्वारा - - - - - - - - - पर लिखा जाता है। ;पअद्ध विनिमय विपत्रा के - - - - - - - - - - पक्षकार होते हैं। ;अद्ध प्रतिज्ञा पत्रा के - - - - - - - - - पक्षकार होते हैं। ;अपद्ध विपत्रा के संदभर् में बिलकत्तार् और - - - - - - - - - एक पक्षकार नहीं हो सकते हैं। ;अपपद्ध भारतीय भाषा में विनिमय विपत्रा - - - - - - - - - कहलाती है। ;अपपपद्ध - - - - - - - - तिथ्िा के अंकन के लिए - - - - - रियायती दिन विपत्रा की शतोर् में जोड़े जाते हैं। 8ण्12 निभाव ;सहायताथर्द्ध विपत्रा सामान्यतया विनिमय विपत्रा अथवा प्रतिज्ञा - पत्रा वास्तविक माल के लेन - देनों को वित्त करने हेतु लिखा जाताहै अथार्त् विनिमय विपत्रा के संदभर् में बिलकत्तार् पर उत्पन्न व्यापार ट्टण के निपटान हेतु आहायीर् द्वारा दीगयी स्वीकृति है तथा यह विलेख व्यापार विपत्रा कहलाता है। चूँकि इसकी उत्पिा वास्तविक व्यपारिक लेन - देन से होती है, इस विलेख का निमार्ण नकद प्राप्ित हेतु पक्षों वफो बाध्य करता है। उदाहरणतयाः अंकितने बिन्दु से माल का क्रय किया जिसका भुगतान अंकित बिन्दु द्वारा लिखे गए ड्राफ्रट को स्वीकृत करकेस्थगित कर सकता है। जबकि बिन्दु यदि चाहे तो अंकित की स्वीकृति अपने बैंकर से बटतत्काल नकद राश्िा की व्यवस्था कर सकती है। इससे आशय यह है कि विनिमय विपत्रा एवं प्रतिज्ञा - पत्राका प्रयोग बाशार से अस्थाइर् रूप से वित्त प्रयोजन हेतु भी किया जा सकता है। ऐसे विलेख को सहायताथर् विपत्रा भी कहते हैं। क्योंकि इसका प्रयोग आहायीर् द्वारा आहतार् को सहायता करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए 1 अप्रैल, 2006 को राज तीन माह की अवध्ि के लिए 10ए000 रु. का एक बिल लिखता है जिस पर पाल अपनी स्वीकृति देकर राज की सहायता करता है। उपरोक्त तिथ्िा को राज अपने बैंकर द्वारा 6ः प्रति वषर् की दर से भुनाता है। राज परिपक्वता तिथ्िा से एक दिन पूवर् इस बिल का भुगतान पाल को करता है। पाल बिल की परिपक्वता पर बिल का भुगतान कर देता है। ्टागत करवाकर राज की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2006 01 अप्रैल प्राप्य विपत्रा खाता नाम पाल के खाते से;पाल की स्वीकृति प्राप्तद्ध 10ए000 9ए700 10ए000 10ए000 9ए700 10ए000 01 अप्रैल बैंक खाता नाम प्राप्य विपत्रा खाते से;पाल की स्वीकृति 6ः प्रति वषर् की दर पर भुनायाद्ध 03 जुलाइर् पाल का खाता नाम बैंक खाता ;निभाव विपत्रा का भुगतानद्ध पाल की पुस्तक रोजनामचा दिनांक विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2006 01 अप्रैल राज का खाता देय विपत्रा ;निभाव विपत्रा राज की स्वीकृतिद्ध नाम 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 10ए000 03 जुलाइर् बैंक खाता राज के खाते से ;राज द्वारा भुगतानद्ध नाम देय विपत्रा खाता बैंक खाते से ;निभाव विपत्रा की नियुक्ितद्ध नाम कभी - कभी सहायताथर् पक्ष आपसी लाभ के लिए सहायताथर् विपत्रा वित्त उत्पिा के लिए सहमत हो जाते हैं। यह निम्नलिख्िात दो प्रकारों में से किसी एक के द्वारा किया जा सकता हैः;अद्ध अहतार् एवं आहायीर्/स्वीकारकत्तार् ध्न राश्िा को स्वीकृत दर पर बांट लेते हैं।;बद्ध प्रत्येक पक्ष दूसरे पक्ष पर विपत्रा लिखता भी है और स्वीकृत भी करता है। दशा ;अद्ध में अहतार् एवं आहायीर्र् द्वारा स्वीकृत अनुपात में बट्टा राश्िा का भुगतान किया जाता है जबकि दशा ;बद्ध में बट्टे की राश्िा को बांटा नहीं जाता है बल्िक प्रत्येक पक्ष संपूणर् ध्नराश्िा को भुनाने केपश्चात स्वंय प्राप्त करता है। परिपक्वता पर प्रत्येक पक्ष अपने संसाध्नों में से स्वीकृत ध्नराश्िा का भुगतान करता है। किन्तु जहां दोनों पक्ष एक विपत्रा की ध्नराश्िा को आपस में बांटते है उस दशा मेंबिलकत्तार् द्वारा परिपक्वता तिथ्िा से पूवर् अपने हिस्से की ध्नराश्िा का भुगतान कर दिया जाता है ताकिशेष धनराश्िा का भुगतान स्वीकारकत्तार् द्वारा समय पर किया जा सके। उपरोक्त व्याख्या के आधर पर यह कहा जा सकता है कि सहायताथर्/निभाव विपत्रा दोनों पक्षों कीअस्थाइर् वित्त का प्रबंध् करने में मददगाार होता है। उदाहरण 9 आशु और मुदित को वित्त की आवश्यकता थी। 1 अक्टूबर, 2005 को आशु ने दो माह को समयावध्ि के लिए 9ए000 रु. का एक विपत्रा लिखा। मुदित ने विपत्रा पर अपनी स्वीकृति के पश्चात आशु को भेज दिया तथा आशु ने 6ः प्रति वषर् की दर से विपत्रा को बैंक से भुनाया और विपत्रा राश्िा का आध हिस्सा मुदित कोोााा न अपन हिस्से की ध्नराश्िा मुदित को वापिस दी और मुदित ने विपत्रा दिय। दय तिथ्ि पर अश्ुेेका भुगतान सही समय पर किया। उपरोक्त लेन - देनों की प्रविष्िटयाँ आशु और मुदित के रोजनामचे में करं।ेआशु की पुस्तक रोजनामचा मुदित की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा रु जमा राश्िा रु 2006 1 अक्टूबर विपत्रा प्राप्य खाता मुदित खाते से ;आपसी सहायताथर् राश्िा प्राप्तद्ध नाम 9ए000 8ए925 9ए000 1 अक्टूबर बैंक खाता नाम बट्टा खाता नाम 75 प्राप्य विपत्रा खाते से ;विपत्रा बैंक द्वारा भुनाया गयाद्ध 4ए500 9ए000 1 अक्टूबर मुदित खाता नाम रोकड़ खाते से 4ए462ण्50 बट्टा खाते से ;आध्ी ध्न राश्िा का भुगतानद्ध 4ए500 37ण्50 4ए500 1 अक्टूबर मुदित खाता रोकड़ खाते से ;मुदित द्वारा आध्ी राश्िा का भुगतानद्ध नाम तिथ्िा 2006 1 अक्टूबर 1 अक्टूबर 4 दिसंबर 4 दिसंबर विवरण आशु का खाता देय विपत्रा खाते से;आपसी निभाव विपत्रा स्वीकृतद्ध रोकड़ खाता बट्टा खाता आशु खाते से ;भुनाया गये विपत्रा ध्नराश्िा प्राप्तद्ध रोकड़ खाता आशु के खाते से ;भुगतान हेतु ध्नराश्िा प्राप्तद्ध देय विपत्रा खाता बैंक खाते से ;विपत्रा का भुगतानद्ध नाम नाम नाम नाम नाम ब.पृ.संनाम राश्िा ;रु.द्ध 9ए000 44ए64ण्50 37ण्50 4ए500 9ए000 जमा राश्िा ;रु.द्ध 9ए000 4ए500 4ए500 9ए000 उदाहरण 10 रोहन और रोहित को वित्त की आवश्यकता थी। 1 नवंबर, 2006 को रोहन द्वारा 3 माह की समयावध्ि के लिए रोहित से 5ए000 रुपये का एक ड्राफ्रट स्वीकृत किया और रोहित ने तीन माह की समयावध्ि के लिए रोहन द्वारा लिखा 4ए000 रुपये का ड्राफ्रट स्वीकृत किया। रोहन और रोहित ने दोनों विपत्रों को अपने - अपने बैंको द्वारा क्रमशः 4ए800 रुपये तथा 3ए850 रुपये में भुनवाया। विपत्रा परिपक्वता से पूवर् रोहित ने 1ए000 रुपये की अन्तर राश्िा को भेज दी। देय तिथ्िा पर रोहन और रोहित ने अपनी स्वीकृति की पूतिर् की। उपरोक्त लेन - देनों की प्रविष्िटयाँ रोहन और रोहित के रोजनामचे में कीजिए। रोहन की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा ;रु.द्ध जमा राश्िा ;रु.द्ध 2006 01 नवंबर रोहित का खाता नाम देय विपत्रा खाते से;रोहन की निभान विपत्रा पर स्वीकृतिद्ध 5ए000 5ए000 01 नवंबर 01 नवंबर 04 पफरवरी 04 पफरवरी प्राप्य विपत्रा खाता रोहित के खाते से ;निभाव विपत्रा प्राप्तद्ध नाम 4ए000 3ए850 150 1ए000 5ए000 4ए000 4ए000 1ए000 5ए000 बैंक खाता बट्टा खाता प्राप्य विक्रय खाते से ;निभाव विपत्रा को बैंक से भुनाया गयाद्ध नाम नाम रोकड़ खाता रोहित के खाते से ;विपत्रा के भुगतान हेतु नकद प्राप्ितद्ध नाम देय विपत्रा खाता बैंक खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतानद्ध नाम रोहित की पुस्तक रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम राश्िा ;रु.द्ध जमा राश्िा ;रु.द्ध 2006 01 नवंबर रोहन खाता नाम 4ए000 देय विपत्रा खाते से 4ए000 ;रोहित द्वारा सहायताथर् विपत्रा पर स्वीकृतिद्ध 5ए000 01 नवंबर प्राप्य विपत्रा खाता नाम रोहन खाते से 5ए000 ;सहायताथर्/निभाव विपत्रा प्राप्तद्ध 4ए800 01 नवंबर बैंक खाता नाम बट्टा खाता नाम 200 2007 प्राप्य विपत्रा खाते से ;विपत्रा को बैंक से भुनाया गयाद्ध 1ए000 5ए000 04 पफरवरी रोहन खाता नाम रोकड़ खाते से 1ए000 ;रोहन को नकद भुगतानद्ध 4ए000 04 पफरवरी देय विपत्रा खाता नाम बैंक खाते से 4ए000 ;विपत्रा का तथाकथ्िात भुगतानद्ध उदाहरण 11 1 जनवरी, 2006 को सुनील ने अनिल से तीन माह की अवध्ि के लिए तीन प्रतिज्ञा - पत्रा प्राप्त किए। पहला 3ए000 रुपए के लिए, दूसरा 4ए000 रुपए के लिए और तीसरा 5ए000 रुपए के लिए। दूसरा विपत्रा अजीत को बेचान किया गया। 4 जनवरी, 2006 को तीसरा विपत्रा 4ए700 रुपए में बैंक से भुनाया गया। सुनील के रोजनामचे में निम्नवत परिस्िथतियों के संदभर् में प्रविष्िटयाँ कीजिएः ऽ जब परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतान किया गया। ऽ जब परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा अनादृत हुआ। सुनील की पुस्तक रोजनामचा अध्याय में प्रयुक्त शब्द तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नामराश्िा ;रु.द्ध जमा राश्िा ;रु.द्ध 2006 1 जनवरी प्राप्य विपत्रा खाता अनिल के खाते से ;3ए000 रु., 4ए000 रु. और 5ए000 रुके लिए तीन प्रतिज्ञा - पत्रा प्राप्त हुए। नाम 12ए000 4ए000 4ए700 12ए000 4ए000 1 जनवरी अजित का खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;प्रतिज्ञा - पत्रा का अजीत को बेचानद्ध नाम 4 जनवरी बैंक खाता नाम बट्टा खाता नाम 300 प्राप्य विपत्रा खाते से ;5ए000 रु. का विपत्रा, 4ए700 रु. में बैंक से भुनायाद्ध 3ए000 3ए000 4ए000 5ए000 3ए000 3ए000 4ए000 ;पद्ध 4 अप्रैल रोकड़/बैंक खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतानद्ध नाम ;पपद्ध 4 अप्रैल अनिल का खाता प्राप्य विपत्रा खाते से ;परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा अनादृतद्ध नाम 4 अप्रैल अनिल का खाता अजित के खाते से ;अजीत को बेजान विपत्रा अनादृत हुआद्ध नाम 4 अप्रैल अनिल का खाता बैंक खाते से ;बैंक से भुनाया गया विपत्रा अनादृत हुआद्ध नाम 5ए000 5ए000 ऽ विपत्रा का लेखक/बिलकत्तार्/आहत्तार् ऽ विपत्रा का स्वीकारकत्तार् ऽ राश्िा पाने वाला ऽ प्राप्य विपत्रा ऽ देय विपत्रा ऽ विपत्रा का अनादरण ऽ विपत्रा पर स्वीकृति ऽ विपत्रा का भुगतान अध्िगम उद्देश्यों के संदभर् में सारांश 1ण् विनिमय विपत्रा पराक्रम्य साध्न के रूप मेंः विनिमय विपत्रा के माध्यम से उधर लेन - देन में क्रेता अथवा देनदार को तत्काल भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होती वरन् वह एक निश्िचत अवध्ि के लिए देय राश्िा का विपत्रा स्वीकार करता है। 2ण् विनिमय विपत्रा और प्रतिज्ञा - पत्रा का आशयः विनिमय विपत्रा एक शतर् रहित लिख्िात आदेश होता है, जिसमें उसका लिखने वाला किसी व्यक्ित विशेष को एक निश्िचत अवध्ि को भुगतान का शतर् रहित आज्ञा देता है। प्रतिज्ञा - पत्रा भी एक लिख्िात हस्ताक्षर सहित बिना शतर् का पत्रा है, जिसमें देनदार निश्िचत तिथ्िा पर भुगतान करने की प्रतिज्ञा करता है। 3ण् विपत्रा और नोट में अंतरः ;पद्ध विपत्रा लेनदार द्वारा लिखा और देनदार द्वारा स्वीकार किया जाता है। नोट देनदार द्वारा लिखा जाता है। ;पपद्ध विपत्रा में तीन पक्ष होते हैं और नोट पर दो पक्ष होते हैं। ;पपपद्ध वित्तीय स्तर के लिए विपत्रा पर स्वीकृति अनिवायर् है, परंतु नोट मे वित्तीय स्तर निहित होता है। 4ण् विपत्रा की विशेषताएँ एंव लाभ विशेषताएँ ऽ विपत्रा लिख्िात होता है। ऽ इसमें राश्िा के भुगतान की आज्ञा होती है। ऽ यह आज्ञा शतर् रहित होती है। ऽ इसमें लिखने वाले के हस्ताक्षर होते हैं। ऽ इसमें भुगतान की तिथ्िा होती है। ऽ इसमें मुद्रांक का होना अनिवायर् है। लाभ - ऽ इसमें लेनदार और देनदार के मध्य संबंध् स्थापित होता है। ऽ निश्िचत शतेर्ं निहित होती हैं। ऽ लेनदार को वित्तीय सुविध प्रदान करता है। ऽ भुगतान माँग पर अथवा निश्िचत अवध्ि पर देय होता है। ऽ भुगतान धरक को अथवा उल्ल्ेाख किए गए नाम को किया जाता है। अभ्यास प्रश्न लघु उत्तरीय प्रश्न 1ण् सामान्य रूप से प्रयोग होने वाले दो पराक्रम्य विलेखों का उल्लेख कीजिए। 2ण् विनिमय विपत्रा और प्रतिज्ञा - पत्रा में अन्तर स्पष्ट कीजिए। 3ण् विनिमय विपत्रा की चार विशेषताएं बताइए। 4ण् विनिमय विपत्रा के तीन पक्षों का उल्लेख कीजिए। 5ण् विनिमय विपत्रा की परिपक्वता से अपा क्या समझते हैं। 6ण् विनिमय विपत्रा के अनादरण से आप क्या समझते हैं। 7ण् प्रतिज्ञा - पत्रा के पक्षों की व्याख्या कीजिए। 8ण् विनिमय विपत्रा की स्वीकृति से आप क्या समझते हैं। 9ण् निरकाइर् का अथर् समझाइए। 10ण् विनिमय विपत्रा के नवीनीकरण से आप क्या समझते हैं। 11ण् प्राप्य विपत्रा पुस्तक का प्रारूप बनाइए। 12ण् देय विपत्रा पुस्तक का प्रारूप बनाइए। 13ण् समय से पूवर् विनिमय विपत्रा के भुगतान से क्या आशय है। 14ण् छूट का अथर् समझाइए। 15ण् विनिमय विपत्रा का प्रारूप बनाइए। दीघर् उत्तरीय प्रश्न 1ण् ‘विनिमय विपत्रा एक शतर् रहित आज्ञापत्रा है’ क्या आप इस वाक्य से सहमत हैं। 2ण् विनिमय विपत्रा के अनादरण और निकराइर् व्यय के प्रभाव बताइए। 3ण् उदाहरण सहित परिपक्वता तिथ्िा की गणना प्रिया को समझाइए। 4ण् विनिमय विपत्रा और प्रतिज्ञा पत्रा में अंतर स्पष्ट करें। 5ण् विनिमय विपत्रा के समय से पूवर् भुगतान का लेनदार और देनदार के लिए लाभ और उद्देश्य बताइए। 6ण् प्राप्य विपत्रा पुस्तक बनाने के उद्देश्य और लाभ बताइए। 7ण् देय विपत्रा पुस्तक बनाने के उद्देश्य और लाभ बताइए। अंाकिक प्रश्न परिपक्वता तिथ्िा पर भुगतान 1ण् 1 जनवरी, 2006 को राव ने रेड्डी को 10ए000 रु. का माल बेचा। रेड्डी ने आध्ी राश्िा का भुगतान तत्काल किया और शेष राश्िा के लिए 30 दिन की अवध्ि का एक विपत्रा स्वीकार किया। परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतान कर दिया गया। उपरोक्त लेन - देनों की राव और रेड्डी के रोजनामचे में प्रविष्िटयाँ कीजिए और राव की पुस्तक में रेड्डी का खाता और रेड्डी की पुस्तक में राव का खाता बनाइए। 2ण् 1 जनवरी, 2006 को शंकर ने पावर्ती से 8ए000 रु. का माल क्रय किया और पावर्ती को तीन माह की अवध्ि के लिए पावर्ती को एक प्रतिज्ञा - पत्रा लिखा। परिपक्वता तिथ्िा के दिन भारत - सरकार द्वारा पराक्रम्य विलेख अिानियम 1881 के अंतगर्त अवकाश घोष्िात किया। चूँकि पावर्ती अध्िनियम के परिपक्वता तिथ्िा प्रावधन से अनभ्िाज्ञ थी, इसलिए उसने विपत्रा राश्िा भुगतान के लिए अपने अध्िक्ता को दे दिया। जिसने विपत्रा को नियमानुसार भुगतान के लिए प्रस्तुत कर भुगतान प्राप्त किया। पावर्ती को विपत्रा की राश्िा का तत्काल भुगतान प्राप्त हुआ। पावर्ती और शंकर के रोजनामचे मंे आवश्यक प्रविष्िटयाँ कीजिए। 3ण् 5 जनवरी, 2006 को विशाल ने मंजू को 7ए000 रु. का माल विक्रय किया तथा मंजू पर दो माह की अवध्ि के लिए एक विनिमय विपत्रा लिखा। मंजू ने विपत्रा पर अपनी तत्काल स्वीकृति दी और विपत्रा विशाल को वापिस कर दिया। विशाल ने विपत्रा को 12ः प्रतिवषर् की दर से बैंक से भुनालिया। परिपक्वता तिथ्िा पर मंजू ने विपत्रा पर अपनी स्वीकृति पूणर् की। उपयुर्क्त लेन - देनों का विशाल और मंजू के रोजनामचों मंे प्रविष्िटयाँ कीजिए। 4ण् 1 पफरवरी, 2006 को जाॅन ने जिमी से 15ए000 रु. का माल क्रय किया और 5ए000 रु. की राश्िा का तत्काल चेक से भुगतान किया तथा शेष राश्िा के लिए जिमी द्वारा लिखा विपत्रा स्वीकृत किया। यह विपत्रा 40 दिन की अवध्ि पर देय था। परिपक्वता तिथ्िा से पाँच दिन पूवर् जिमी ने विपत्रा संग्रह हेतु बैंक भेजा। परिपक्वता तिथ्िा पर बैंक द्वारा बिल जाॅन से भुगतान के लिए पेश किया गया तथा तदानुसार जिमी को सूचित किया गया। जाॅन और जिमी के राजनामचों में प्रविष्िटयाँ कीजिए। जिमी की पुस्तकों में जाॅन का खाता और जाॅन की पुस्तकों में जिमी का खाता बनाइए। 5ण् 15 जनवरी, 2006 को करतार ने 30ए000 रु. का माल भगवान को बेचा और उस पर 10ए000 रु. के तीन विपत्रा लिखे, जो कि एक माह, दो माह तथा तीन माह की अवध्ि पर देय थे। पहला विपत्रा करतार ने परिपक्वता तिथ्िा तक अपने पास रखा। दूसरा बिल करतार ने अपने लेन - देन रत्ना को बेचान किया। तीसरा बिल करतार ने तत्काल 6ः प्रति वषर् की दर से बैंक से भुनाया। भगवान द्वारा तीनों विपत्रों का भुगतान परिपक्वता तिथ्िा पर कर दिया गया। करतार और भगवान के रोजनामचों में प्रविष्िटयाँ कीजिए तथा खाते बनाइए। 6ण् 1 जनवरी, 2006 को सुनील ने अरुण से 30ए00 रु. का उधर माल खरीदा। सुनील ने 50ः राश्िा का तत्काल भुगतान किया, जिस पर अरुण ने 2ः की नकद छूट दी। शेष राश्िा के लिए सुनील ने 20 दिन की अवध्ि के लिए प्रतिज्ञा - पत्रा लिखा। चूँकि परिपक्वता तिथ्िा के दिन सावर्जनिक अवकाश था, इसलिए अरुण ने पराक्रम्य विलेख अध्िनियम 1881 के परिपक्वता प्रावधन के अंतगर्त कायर्कारी दिवस पर प्रतिज्ञा - पत्रा पेश किया, जिसका समय पर पूणर् भुगतान कर दिया गया। बताइए, वरुण द्वारा किस तिथ्िा पर प्रतिज्ञा - पत्रा प्रस्तुत किया गया। उपयुर्क्त लेनदेन को अरुण और सुनील के रोजनामचों में प्रविष्िट कीजिए। 7ण् दशर्न ने वरुण को 40ए000 रु. का उधर माल बेचा तथा दो माह की अवध्ि के लिए एक विपत्रा लिखा। वरुण ने विपत्रा पर अपनी स्वीकृति दी और दशर्न को विपत्रा वापिस भेज दिया। परिपक्वता तिथ्िा पर विपत्रा का भुगतान कर दिया। निम्नलिख्िात परिस्िथतियों में दशर्न और वरुण के रोजनामचों में प्रविष्िटयाँ कीजिए। ऽ जब दशर्न द्वारा विपत्रा परिपक्वता तिथ्िा तक स्वयं के पास रखता है। ऽ जब दशर्न 6ः प्रतिवषर् की दर से विपत्रा को बैंक से भुना लेता है। ऽ जब दशर्न विपत्रा को तत्काल अपने लेनदार सुरेश को बेचान कर देता है। ऽ जब दशर्न परिपक्वता तिथ्िा से तीन दिन पूवर् 10 विपत्रा को संग्रह हेतु बैंक भेजता है बेचान/अनादरण/समयपूवर् भुगतान 8ण् बंसल ट्रेडसर् माल के क्रय पर अंकित मूल्य का 10ः की व्यावसायिक छूट देते हैं। मोहन ट्रेडसर् जो एक पफुटकर व्यापारी हैं, ने बंसल ट्रेडसर् से निम्नलिख्िात माल का क्रय कियाः दिनांक राश्िा रु21ण्12ण्2006 1ए000 26ण्12ण्2006 1ए200 28ण्12.2006 2ए000 31ण्12ण्2006 5ए000 सभी उपयुर्क्त क्रय के लिए मोहन ट्रेडसर् ने बंसल ट्रेडसर् को 30 दिन की अवध्ि के लिए प्रतिज्ञा - पत्रा लिखे। दिनांक 21ण्12ण्2006 के माल क्रय के लिए लिखा प्रतिज्ञा - पत्रा बंसल ट्रेडसर् ने परिपक्वता तिथ्िा तक स्वयं के पास रखा। दिनांक 26ण्12ण्2006 के माल क्रय के लिए लिखा प्रतिज्ञा - पत्रा बंसल ट्रेडसर् ने 12ः प्रतिवषर् की दर से भुना लिया। दिनांक 25ण्1ण्2006 को बंसल टेªडसर् ने दिनांक 28ण्12ण्2006 के लिए लिखा प्रतिज्ञा - पत्रा का अपने लेनदार ड्रीम सोप्स को 1ए900 रु. के पूणर् भुगतान के लिए बेचान कर दिया। दिनांक 31ण्12ण्2006 के माल क्रय के लिए लिखा प्रतिज्ञा - पत्रा संग्रह हेतु बैंक भेज दिया। मोहन ट्रेडसर् द्वारा सभी प्रतिज्ञा पत्रों को समय पर भुगतान कर दिया गया। उपयुर्क्त सभी लेन देनों की बंसल ट्रेडसर् और मोहन ट्रेडसर् के रोजनामचों में प्रविष्िटयाँ कीजिए तथा बंसल ट्रेडसर् की पुस्तकों में मोहन ट्रेडसर् का खाता और मोहन ट्रेडसर् की पुस्तकों में बंसल ट्रेडसर् का खाता बनाइए। 9ण् 1 पफरवरी, 2005 को नारायण ने रविंद्रन से 25ए000 रु. का उधर माल क्रय किया। रविंद्रन ने उपयुर्क्त राश्िा के लिए 30 दिन की अवध्ि का एक विपत्रा लिखा। परिपक्वता तिथ्िा पर नारायण ने विपत्रा का अनादरण किया। निम्नवत परिस्िथतियों में रविंद्रन और नारायण की पुस्तकों में प्रविष्िटयाँ कीजिए - ऽ जब रविंद्रन परिपक्वता तिथ्िा तक विपत्रा स्वयं के पास रखता है। ऽ जब रविंद्रन तत्काल 6ः प्रतिवषर् की दर से विपत्रा बैंक से भुना लेता है। ऽ जब रविंद्रन विपत्रा का अपने लेनदार गणेशन को बेचान करता है। ऽ जब रविंद्रन परिपक्वता तिथ्िा से कुछ समय पूवर् विपत्रा संग्रह हेतु बैंक भेजता है। 10ण् 13 पफरवरी, 2006 को रवि ने राज को 40ए000 रु. का माल उधर बेचा, तथा राज पर चार विपत्रा लिखें। 5ए000 रु. की राश्िा का पहला विपत्रा एक माह की देय भुगतान के लिए लिखा गया। दूसरा विपत्रा 10ए000 रु. के लिए 40 दिन की अवध्ि के लिए लिखा गया। तीसरा विपत्रा 12ए000 रुकी राश्िा के लिए तीन माह की अवध्ि के लिए और चैथा बिल शेष राश्िा के लिए 19 दिन की अवध्ि के लिए लिखा गया। राज ने सभी विपत्रा स्वीकार किए और उन्हें स्वीकृति पश्चात रवि को वापिस भेज दिए। रवि ने पहला विपत्रा 6ः प्रति वषर् की दर से भुना लिया। दूसरा विपत्रा का अपने लेनदार अजय को 10ए200 रु. के पूणर् भुगतान के लिए बेचान किया। तीसरा विपत्रा रवि ने परिपक्वता तिथ्िा तक स्वयं के पास रखा रवि ने चैथा बिल परिपक्वता तिथ्िा से पाँच दिन पूवर् संग्रह हेतु बैंक भेज दिया। राज द्वारा चारों विपत्रों का अनादरण हुआ। विपत्रा के अनादरण के तीन दिन पश्चात राज ने रवि को 12ः प्रतिवषर् की ब्याज पर से नकद भुगतान किया। उपयर्ुक्त लेन - देनों का रवि, राज, अजय के रोजनामचों में प्रविष्िटयाँ कीजिए। रवि की पुस्तकों में राज और अजय का खाता बनाइए। 11ण् 1 जनवरी, 2006 को मुस्कान ने नेहा से 20ए000 रु. का उधर माल खरीदा और दो माह की अवध्ि के लिए नेहा ने मुस्कान पर एक विपत्रा लिखा। परिपक्वता तिथ्िा से एक माह पूवर् मुस्कान ने नेहा से 12ः प्रति वषर् की छूट पर समय पूवर् भुगतान का अनुरोध् किया जिस पर नेहा ने अपनी सहमति दी। नेहा और मुस्कान को रोजनामचों में उपयुर्क्त लेनदेनों की प्रविष्िटयाँ कीजिए। 12ण् 15 जनवरी, 2006 रघु ने देवेन्द्र को 35ए000 रु. का माल बेचा और देवेन्द्र पर 3 माह की अवध्ि के लिए विनिमय विपत्रा लिखे। पहला विपत्रा 1 माह की अवध्ि के लिए 5ए000 रु. के लिए, दूसरा विपत्रा 3 माह की अवध्ि के लिए 20ए000 रु. के लिए, तीसरा विपत्रा शेष राश्िा के लिए 4 माह की अवध्ि के लिए लिखा। रघु ने प्रथम विपत्रा अपने लेनदार दीवान को 5ए200 रु. के पूणर् भुगतान के लिए बेचान किया। दूसरा विपत्रा रघु ने 6ः प्रति वषर् की दर से भुनाया तथा तीसरा विपत्रा रघु ने परिपक्वता तिथ्िा तक अपने पास रखा। परिपक्वता तिथ्िा पर देवेन्द्र द्वारा प्रथम बिल का अनादरण हुआ तथा 30 रु. निकराइर् व्यय के रूप में खचर् हुए। देवेन्द्र द्वारा स्वीकृत दूसरा विपत्रा भी अनादृत हुआ तथा उस पर 50 रु. निकराइर् व्यय के रुप में खचर् हुए। देवेन्द्र द्वारा स्वीकृत दूसरा विपत्रा भी अनादृत हुआ तथा उस पर 50 रु. निकराइर् व्यय खचर् हुए। रघु ने तीसरा विपत्रा परिपक्वता तिथ्िा से चार दिन पूवर् बैंक संग्रह हेतु भेजा। तीसरा विपत्रा भी अनादृत हुआ जिसपर 200 रु. निकराइर् व्यय हुआ। तीसरे विपत्रा के अनादरण होने के पाँच दिनों के पश्चात् देवेन्द्र ने रघु को 1ए000 रु. की ब्याज राश्िा सहित पूणर् भुगतान कर दिया, जिसके लिए उसे बैंक से लघु ट्टण राश्िा लेनी पड़ी। रघु, देवेन्द्र और दीवान की पुस्तकों में रोजनामचा प्रविष्िटयाँ कीजिए तथा रघु की पुस्तक में देवेन्द्र का खाता और देवेन्द्र की पुस्तकों में रघु का खाता बनाइए। 13ण् 15 जनवरी, 2006 को विमल ने कमल से 25ए000 रु. का उधर माल खरीदा और उक्त राश्िा के लिए दो माह की भुगतान अवध्ि का एक विपत्रा लिखा। निम्नलिख्िात परिस्िथतियों में कमल और विमल की पुस्तकों में प्रविष्िटयाँ कीजिए। ऽ जब कमल परिपक्वता तिथ्िा तक विपत्रा स्वयं के पास रखता है। ऽ जब कमल 6ः प्रतिवषर् की दर से विपत्रा बैंक से भुना लेता है। ऽ जब कमल विपत्रा का बेचान अपने लेनदार शरद को करता है। ऽ परिपक्वता तिथ्िा से पाँच दिन पूवर् कमल विपत्रा को संग्रह हेतु बैंक भेजता है। 14ण् 17 जनवरी 2006 को अब्दुल्ला ने ताहिर को 18ए000 रु. का उधर माल बेचा और उक्त राश्िा के लिए 45 दिनों का एक विपत्रा लिखा। इसी तिथ्िा पर ताहिर ने विपत्रा को स्वीकृत कर अब्दुल्ला को वापिस भेजा। देय तिथ्िा पर अब्दुल्ला द्वारा बिल प्रस्तुत करने पर बिल अनादृत हुआ और अब्दुल्ला ने 40 रु. निकराइर् व्यय दिये। विपत्रा के अनादरण के पाँच दिनों के पश्चात ताहिर ने 18ए700 रु. के ट्टण का भुगतान कर दिया जिसमें ब्याज और निकराइर् व्यय राश्िा सम्िमलित थी। उपरोक्त लेन - देनों की प्रविष्िटयाँ अब्दुल्ला और ताहिर की पुस्तकों में करें। साथ ही अब्दुल्ला की पुस्तकों में ताहिर का खाता और ताहिर की पुस्तकों में अब्दुल्ला का खाता बनाएँ। 15ण् 2 माचर्, 2006 को आशा ने 19ए000 रु. का माल निशा को उधर बेचा। निशा ने 4ए000 रुका तत्काल भुगतान किया और शेष राश्िा के लिए तीन माह की अवध्ि का एक विपत्रा लिखा। आशा ने विपत्रा बैंक से भुनाया। परिपक्वता तिथ्िा पर निशा के विपत्रा अनादृत हुआ तथा बैंक ने 30 रु. निकराइर् व्यय किए। आशा और निशा के रोजनामचों में आवश्यक प्रविष्िटयाँ कीजिए। 16ण् 2 पफरवरी, 2006 को वमार् ने शमार् से 17ए500 रु. का माल क्रय किया। वमार् ने 2ए500 रु. का तत्काल भुगतान किया और शेष राश्िा के लिए 60 दिन की भुगतान अवध्ि का एक प्रतिज्ञा पत्रा लिखा। शमार् ने अपने लेनदार गुप्ता को प्रतिज्ञा - पत्रा का बेचान 15ए400 रु. के पूणर् भुगतान के रूप में किया। परिपक्वता तिथ्िा पर गुप्ता द्वारा विपत्रा पेश करने पर उसका अनादरण हुआ। गुप्ता ने 5ए000 रु. निकराइर् व्यय किए। उसी दिन गुप्ता ने वमार् को प्रतिज्ञा - पत्रा ने अनादरण हुआ। गुप्ता ने 5ए000 रु. निकराइर् व्यय किए। उसी दिन गुप्ता ने वमार् को प्रतिज्ञा - पत्रा के अनादरण की सूचना दी। शमार् ने चेक द्वारा गुप्ता को 15ए500 रु. का भुगतान किया जिसमें निकराइर् व्यय और ब्याज की राश्िा शामिल थी। वमार् ने शमार् को उक्त राश्िा का भुगतान चेक से किया। शमार्, वमार् और गुप्ता के रोजनामचों में प्रविष्टयाँ कीजिए और वमार् और गुप्ता का खाता शमार् की पुस्तक में, शमार् का खाता वमार् की पुस्तक में और शमार् का खाता गुप्ता की पुस्तक में दिखाइए। 17ण् 1 माचर्, 2006 को लिलि ने मैथ्यू को 12ए000 रु. का उधर माल बेचा और उक्त राश्िा के लिए 2 माह की अवध्ि का एक विपत्रा लिखा। लिलि ने तत्काल विपत्रा को 9ः प्र. व. की दर से भुना लिया। चूँकि परिपक्वता तिथ्िा एक गैर - व्यावसायिक दिवस था अतः लिलि ने विपत्रा 1 दिन पूवर् अध्िनियम के प्रावधन के अनुसार प्रस्तुत किया। मैथ्यू द्वारा विपत्रा अनादृत हुआ और लिलि ने 45 रुपए निकराइर् के रूप में व्यय किए। पाँच दिनों के पश्चात मैथ्यू ने चेक द्वारा पूणर् भुगतान कर दिया जिसमें 12ः प्र. व. की दर से ब्याज राश्िा सम्िमलित थी। उपयुर्क्त लेनदेनों की रोजनामचे में प्रविष्िटयाँ कीजिए तथा लिलि की पुस्तक में मैथ्यू का खाता और मैथ्यू की पुस्तक में लिलि का खाता बनाइए। 18ण् दिनांक 1ण्2ण्2006 कपिल ने गौरव से 21ए000 रु. का उधर माल खरीदा और उक्त राश्िा के लिए गौरव ने कपिल पर एक विपत्रा लिखा। विपत्रा एक माह की अवध्ि पर देय था। दिनांक 25ण्2ण्2006 को गौरव ने विपत्रा संग्रह हेतु बैंक भेजा। परिपक्वता तिथ्िा पर बैंक ने नियमानुसार विपत्रा पेश किया जिसे कपिल ने अनादृत किया। बैंक ने 100 रु. निकराइर् व्यय किए। कपिल और गौरव की पुस्तकों में प्रविष्िटयाँ दें। 19ण् 14ण्2ण्2006 को रश्िम ने 7ए500 रुपए का माल अलका को बेचा। अलका ने 500 रु. का नकद भुगतान किया और शेष राश्िा के लिए दो माह की अवध्ि का विनिमय विपत्रा स्वीकार किया। 10ण्4ण्2006 को अलका ने रश्िम से विपत्रा रद्द करने का अनुरोध् किया। अलका ने दोबारा रश्िम को 2ए000 रु. नकद स्वीकार और नया विपत्रा लिखने का अनुरोध् किया जिसमे 500 रु. की ब्याज राश्िा सम्िमलित है। रश्िम ने अलका का अनुरोध् स्वीकार करते हुए 2 माह की अवध्ि के लिए देय राश्िा का एक नया विपत्रा लिखा। विपत्रा का भुगतान परिपक्वता तिथ्िा पर पूणर्तः कर दिया गया। रश्िम और अलका की पुस्तकों में रोजनामचा प्रविष्िटयाँ कीजिए तथा अलका की पुस्तकों में रश्िम का खाता और रश्िम की पुस्तकों में अलका का खाता बनाइए। 20ण् 1ण्12ण्2006 को निख्िाल ने अख्िाल को 23ए000 रु. का उधर माल बेचा और अख्िाल पर 2 माह की अवध्ि के लिए एक विपत्रा लिखा। अख्िाल ने विपत्रा स्वीकार किया और निख्िाल को वापिस भेज दिया। निख्िाल ने विपत्रा को बैंक से 12ः प्रति वषर् की दर से भुनाया। देय तिथ्िा पर अख्िाल ने विनिमय विपत्रा को अनादृत किया और बैंक ने 100 रु. निकारइर् व्यय के रुप में खचर् किए। अख्िाल ने निख्िाल से 10ः ब्याज की दर सहित नया विपत्रा लिखने का अनुरोध् किया। नया विपत्रा 2 माह की अवध्ि के लिए लिखा गया। परिपक्वता तिथ्िा से 1 सप्ताह पूवर्, अख्िाल ने निख्िाल से नया विपत्रा रद्द करने का अनुरोध् किया। इसके अतिरिक्त अख्िाल ने निख्िाल से 10ए000 रु. नकद स्वीकार करने और शेष राश्िा के लिए तीसरा विपत्रा 500 रु. की ब्याज राश्िा लिखने का अनुरोध् किया, जिसे निख्िाल ने स्वीकार कर लिया। तीसरा विपत्रा 1 माह की अवध्ि पर देय था। अख्िाल ने इस विपत्रा का भुगतान परिपक्वता तिथ्िा पर किया। अख्िाल और निख्िाल की पुस्तकों में रोजनामचा प्रविष्िटयाँ कीजिए और निख्िाल का खाता अख्िाल की पुस्तकों में और अख्िाल का खाता निख्िाल की पुस्तकों में दशार्इए। 21ण् 1 जनवरी, 2006 को विभा ने सूध को 18ए000 रु. का माल बेचा और सुध पर 2 माह कीअवध्ि के लिए एक विपत्रा लिखा। विपत्रा पर सुध ने अपनी स्वीकृति दी और विभा को लौटा दिया। विभा ने तत्काल इस विपत्रा को अपनी एक लेनदार गीता के नाम पर बेचान किया। किसी कारणवश सुध ने विभा से विपत्रा रद्द करने और 200 रु. की ब्याज राश्िा सहित एक नया विपत्रा लिखने का अुनरोध् किया। विभा ने सुध के अुनरोध् को स्वीकार कर लिया। विभा ने गीता से विपत्रा वापिस ले लिया तथा गीता को नकद भुगतान कर विपत्रा रद्द कर दिया। इसके पश्चात विभा ने सुध पर एक नया विपत्रा लिखा। इस विपत्रा की अवध्ि एक माह थी। नया विपत्रा का सुध द्वारा परिपक्वता तिथ्िा पर भुगतान कर दिया गया। विभा की पुस्तक में रोजनामचा प्रविष्िटयाँ कीजिए। 22ण् 1 जनवरी, 2006 को हषर् ने एक माह की समयावध्ि के लिए 10ए000 रुपये का तनु द्वारा लिखा एक विपत्रा स्वीकृत किया उसी दिन तनु ने विपत्रा को 8ः प्रतिवषर् की दर से भुनवाया। देय तिथ्िा पर तनु द्वारा विपत्रा प्रकट किए जाने पर हषर् द्वारा संपूणर् भुगतान कर दिया गया। तनु और हषर् की पुस्तकों मे रोजनामचा प्रविष्िटयाँ कीजिए। 23ण् रितेश और नैना को अस्थाइर् रूप से वित्त की आवश्यकता थी। 1 अगस्त, 2005 को रितेश ने नैना पर चार माह की अवध्ि के लिए 12ए000 रुपए की राश्िा का विपत्रा लिखा जिसे नैना ने स्वीकृत कर रितेश को वापस भेज दिया। रितेश ने 8ः प्रतिशत प्रतिवषर् की दर से विपत्रा को भुनवाया तथा आध्ी ध्नराश्िा नैना को दी। देय तिथ्िा पर रितेश ने अपेक्ष्िात ध्नराश्िा नेहा को भेजी। नेहा ने पूणर् रूप से बिल का भुगतान कर दिया। उपरोक्त लेन - देनों की प्रवृष्िटयां दोनों के रोजनामचे में कीजिए। 24ण् 1 जनवरी, 2006 को भानु और रमन ने आपसी लाभ के लिए एक दूसरे पर तीन माह की समयावध्ि के लिए 8ए000 रुपये का विपत्रा लिखा। 2 जनवरी को उन्होंने अपने बैंकों से विपत्रों को 5ः प्रतिवषर् को दर से भुनाया। देय तिथ्िा पर दोनो ने अपनी स्वीकृति की पूतिर् की भानु और रमन के रोजनामचे में प्रवृष्िटयां दिखाएं। 25ण् 1 नवंबर, 2005 को सोनिया ने सनी पर तीन माह की समयावध्ि के लिए 15ए000 रुपये की राश्िा का विपत्रा लिखा जिसे सनी ने स्वीकृत कर सोनिया को लौटा दिया। सोनिया ने 8ः प्रतिवषर् की दर से विपत्रा को अपने बैंकर से भुनवाया। प्राप्त ध्नराश्िा का विभाजन सोनिया और सनी के मध्य क्रमशः 2ध्3ए 1ध्3 के अनुपात में किया गया देय तिथ्िा पर सोनिया ने अपेक्ष्िात राश्िा सनी को भेज दी। सनी निश्िचत समय पर बिल का भुगतान नहीं कर सका जिसके परिणाम - स्वरूप सोनिया ने संपूणर् बिल का भुगतान किया। सनी द्वारा सोनिया को 100 रुपये की ब्याज राश्िा सहित देय ध्नराश्िा के लिए नयी स्वीकृति दी तथा देय तिथ्िा पर अपनी स्वीकृति की पूतिर् की। सनी और सोनिया के रोजनामचों में प्रवृष्िटयां दिखाइए। 26ण् 1 जनवरी, 2006 को गौतम के लेनदारों और देनदारों का वितरण निम्न प्रकार था - देनदार रु.लेनदार रुबाबू 5ए000 - चंद्रकला 8ए000 - किरण 13ए500 - अनिता 14ए000 - अंजू - 5ए000 शीबा - 12ए000 मंजू - 6ए000 जनवरी माह में निम्न लेन - देन किए गए - 2 जनवरी 48ए000 रु. के पूणर् भुगतान के लिए बाबू पर दो माह की अवध्ि के लिए एक विपत्रा लिखा। बाबू ने विपत्रा स्वीकार कर 05ण्01ण्06 को लौटा दिया। 4 जनवरी बाबू के विपत्रा को 4ए750 रु. पर भुना लिया गया। 8 जनवरी चंद्रकला ने 3 माह की अवध्ि के लिए 8ए000 रु. की राश्िा का प्रतिज्ञा - पत्रा लिखा। 10 जनवरी चंद्रकला के प्राप्त प्रतिज्ञा - पत्रा को 7ए900 रु. पर भुना लिया गया। 12 जनवरी आगामी दो माह पर देय तिथ्िा के लिए शीबा का ड्राफ्रट स्वीकृत। 22 जनवरी आगामी 2 माह की देय तिथ्िा के लिए अनिता से प्रतिज्ञा - पत्रा प्राप्त। 23 जनवरी अनिता से प्राप्त प्रतिज्ञा - पत्रा का मंजू को बेचान। 25 जनवरी आगामी तीन माह की देय तिथ्िा के लिए मंजू का ड्राफ्रट स्वीकार। 29 जनवरी किरण ने 2ए000 रु. का नकद भुगतान किया और शेष राश्िा के लिए 3 माह पर देय एक प्रतिज्ञा - पत्रा भेजा। उपयुर्क्त लेन - देन का उपयुर्क्त सहायक पुस्तकों में अभ्िालेखन कीजिए। 356 लेखाशास्त्रा - वित्तीय लेखांकन स्वयं जाँचिए की जाँच सूची स्वयं जाँचिए - 1 ;पद्ध असत्य ;पपद्ध सत्य ;पपपद्ध असत्य ;पअद्ध असत्य ;अद्ध सत्य ;अपद्ध असत्य ;अपपद्ध सत्य ;अपपपद्ध असत्य ;पगद्ध असत्य ;गद्ध असत्य स्वयं जाँचिए - 2 ;1द्ध स्वीकारकत्तार् ;2द्ध बेचान ;3द्ध लेखक ;4द्ध बेचानकत्तार् स्वयं जाँचिए - 3 ;पद्धपराक्रम्य ;पपद्ध आहतार् अहाथीर् ;पपपद्ध देनदार लेनदार ;पअद्ध तीन ;अद्ध दो ;अपद्धआहायीर् ;अपपद्ध हुंडी ;अपपपद्ध परिपक्वता, 3 दिन

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