”ास, प्रावधन और संचय 7 अध्िगम उद्दे}य इस अध्याय के अध्ययन के उपरांत आपः ऽ ”ास के अथर् को समझा सवफगंेे और ”ास, रिक्तीकरण, एवं परिशोध्न में अंतर कर सकेंगेऋ ऽ ”ास लगाने एवं इसके कारणों की पहचान की आवश्यकता को बता सवंेफगेऋ ऽ सीध्ी रेखा एवं क्रमागत प(तियों के द्वारा ”ास की गणना कर सवेंफगेऋ ऽ परिसंपिा पर ”ास और निपटान के संदभर् में लेन - देनों का अभ्िालेखन कर सकेंगेऋ ऽ प्रावधन एवं संचय की व्यवस्था के अथर् एवं उद्देश्य को समझा सवेंफगेऋ ऽ प्रावधन एवं संचय में अंतर कर सकेंगेऋ ऽ गुप्त संचय सहित भ्िान्न प्रकारोंप्रावधन और संचय की प्रकृति की व्याख्या कर सकेंगेऋ आगम व्यय मिलान संकल्पना के अनुसार एक समयावध्ि के आगम का उसी समय के व्यय से मिलान किया जाता है। इससे वास्तविक एवं उचित लाभ अथवा हानि का निधर्रण होता है। यदि कोइर् ऐसा व्यय किया जाता है जिसका लाभ एक लेखा वषर् से अध्िक समय तक मिलता रहेगा, तो ऐसी स्िथति में पूरी लागत को जिस वषर् में इसे खचर् किया गया है उसी में इसे व्यय मान लेना न्यायोचित नहीं होगा। इसके स्थान पर इस लागत को उस पूरी अवध्ि में बांटना चाहिए जिस अवध्ि तक इसका लाभ मिल रहा है। ”ास जो इस अध्याय का मुख्य विषय है, इस स्िथति को समझाता है। इसके अतिरिक्त, व्यय विशेष की राश्िा को पूरी तरह से सुनिश्िचत करना सदा सम्भव नहीं होता है। जरा याद करें कि रूढि़वादिता के सि(ांत के अनुसार व्यय की ऐसी मदों की उपेक्षा करने के स्थान पर इनके लिए पयार्प्त प्रावधन करना चाहिए और इन्हें वतर्मान वषर् के लाभ में से घटा देना चाहिए। वैसे लाभ के एक भाग को संचय के रूप में संचित कर लेना चाहिए। यह विकास, विस्तार अथवा व्यवसाय की भविष्य की कुछ विश्िाष्ट आवश्यकताओं की पूतिर् के लिए आवश्यक हैं। यह अध्याय दो भ्िान्न विषयों की व्याख्या करता है, इसलिए इसे दो अलग - अलग भागों में प्रस्तुत किया गया है। पहला भाग ”ास के सम्बन्ध् में है तो दूसरे भाग में प्रावधन और संचय के सम्बन्ध् में लिखा गया है। भाग 1 7ण्1 ”ास अब आप जान चुके होंगे कि स्थायी परिसम्पिायाँ वे परिसम्पिायाँ हैं जिनका व्यवसाय में उपयोग एक लेखा वषर् से अध्िक अवध्ि तक होता है। स्थायी परिसम्पिायों ;तकनीकी तौर पर इन्हें ‘‘”ास मान/अवक्षयण योग्य परिसम्पिा’’ कहेंगेद्ध का यदि उपयोग करना प्रारम्भ कर लेते हैं तो इनके मूल्य में कमी आने लगती है। सामान्य रूपमें मूल्य ”ास का अथर् है उपयोग, समय बीतने अथवा अप्रचलन के कारण स्थाइर् परिसम्पिा के मूल्य में कमी आना। दूसरे शब्दों में, यदि एक व्यावसायिक इकाइर् कोइर् मशीन खरीदती है और उसे उत्पादन के लिए प्रयोग में लाती है तो उपयोग के कारण मूल्य में कमी आएगी। यदि इस मशीन को उत्पादन के लिए उपयोग नहीं भी किया जाता है तो भी समय बीतने अथवा बाजार में नये माॅडल के आ जाने पर अथवा प्रचलन के बाहर हो जाने की स्िथति में हम वही विक्रय मूल्य प्राप्त नहीं कर सकते है। इसका अथर् यह हुआ किस्थाइर् परिसम्पिायों के मूल्य में कमी आती है और इस कमी को तकनीकी रूप से मूल्य ”ास कहते हैं। एक लेखांकन शब्द के रूप में ”ास स्थायी परिसम्पिा की लागत का वह भाग है जो उपयोग एवं अथवा समय बीतने के कारण समाप्त हो चुका है। अतः ”ास बीती हुइर् वह लागत अथवा व्यय है जो किसी दिये गये लेखांकन वषर् के आगम में से घटाइर् गइर् है। उदाहरण के लिये, 1 अप्रैल, 2005 को एक लाख रुपये में एक मशीन खरीदी गइर्। इस मशीन का उपयोगी जीवन 10 वषर् आंका गया । इसका अथर् हुआ कि इस मशीन को अगले 10 वषर् अथार्त् 31 माचर्, 2015 तक उत्पादन के लिए काम में लाया जा सकता है । आप समझ गये होंगे कि यह 1ए00ए000 रु. वषर् 2005 में पूँजीगत व्यय है। लेकिन वषर् का आय विवरण ;अथवा लाभ - हानि खाताद्ध बनाया जायेगा तो पूरी एक लाख रुपये की राश्िा को वषर् 2005 की आगम में से नहीं घटाया जाएगा क्योंकि इस एक लाख रु. के पूँजीगत व्यय से एक वषर् ही नहीं वरन् अगले 10 वषो± तक लाभ मिलेगा। इसलिए तकर्संगत यही होगा कि वुफल लागत का एक भाग, जो कि 10ए000 रु. है ;1ए00ए000 रु. का दसवाँ भागद्ध को वषर् 2005 के आगम पर व्यय माना जाए। यह भाग उपयोग के कारण या पिफर समय के बीतने के कारण मूल्य में कमी को दशार्ता है तथा इसे ”ास कहते हैं। ”ास की यह राश्िा लाभ पर अजिर्त व्यय है अतः लाभ - हानि के नाम पक्ष में लिखी जाएगी। 7ण्1ण्1 ”ास का अथर् ”ास का वणर्न हम स्थायी परिसम्पिा के मूल्य में स्थायी, सतत् एवं ध्ीरे - ध्ीरे हो रही घटोत्तरी के रूपमें कर सकते हंै। यह व्यवसाय में परिसम्पिा की लागत के क्षीण होने पर, न कि बाशार मूल्य पर आधारित है। इंस्टीट्यूट आॅपफ कास्ट एण्ड मैनेजमेंट एकाउफंटिंग, लंदन ;प्ब्ड।द्ध के अनुसार ‘‘”ास पर परिसम्पिाके वास्तविक मूल्य में इसके उपयोग एवं/अथवा समय बीतने के कारण आइर् घटोत्तरी को कहते हैं।’’ इंस्टीट्यूट आॅपफ चाटर्डर् एकाउंटेंट्स आॅपफ इंडिया ;प्ब्।प्द्ध द्वारा जारी लेखांकन मानक - 6 ने ”ास की परिभाषा इस प्रकार दी है ‘‘यह, अवक्षयण योग्य परिसम्पिा में घ्िासावट, उपभोग अथवा कीमत में कोइर् अन्य कमी जो उपयोग, समय के व्यतीत होने अथवा तकनीक एवं बाशार में परिवतर्न के कारण अप्रचलितहोने से हुइर् है का मापन है। ”ास का निधर्रण परिसम्पिा के सम्भावित उपयोगी जीवन काल में प्रति लेखांकन अवध्ि में ”ास की राश्िा के संतोषजनक भाग को व्यय दशार्ने के लिए किया जाता है। ”ास मेंउन सभी परिसम्पिायों का अपलेखन सम्िमलित होता है जिनकी जीवन अवध्ि पूवर् निधर्रित है’’। ”ास उद्यम की वित्तीय स्िथति एवं परिचालन के परिणामों के निधर्रण एवं प्रस्तुतिकरण को प्रभावित करता है। यह प्रति लेखा वषर् अवक्षयण योग्य राश्िा पर लगाया जाता है। ध्यान देने योग्य हैकि ”ास का विषय अथवा इसका आधर परिसम्पिा होती हैः ऽ ‘‘जिनकी एक लेखा वषर् से अध्िक समय तक उपयोग की सम्भावना हैऋ ऽ जिनका सीमित उपयोगी जीवन हैऋ ऽ जिन्हें कोइर् भी उद्यम उत्पादन में उपयोग या वस्तु एवं सेवाओं की आपूतिर्, दूसरों को किराए पर देने या प्रशासनिक कायोर्ं के उपयोग के लिए रखता है न कि व्यवसाय में सामान्य रूप से बिक्री के उद्देश्य से।’’ अवक्षयण योग्य परिसम्पिायों के उदाहरण हैं - मशीन, संयंत्रा, पफनीर्चर, भवन, कंप्यूटर, ट्रक, वैन, उपकरण इत्यादि। इसके अतिरिक्त ”ास एक निधर्रित अवक्षयित राश्िा है, जो या तो ऐतिहासिक लागत अथवा ऐतिहासिक लागत की वह पूरक राश्िा, घटाए गए अनुमानित अवश्िाष्ट मूल्य सहित हो सकती है।”ास राश्िा के निधर्रण में एक और ध्यान योग्य बिन्दु है ‘परिसम्पिा का अनुमानित जीवन काल’। इसे निम्न दो बिन्दुओं की सहायता से समझाया जा सकता है ;पद्ध उद्यम द्वारा आंका गया अवक्षयण योग्यपरिसंपिा का जीवनकाल, ;पपद्ध अन्य उद्यम द्वारा समान परिसंपिा से उत्पादन की मात्रा। बाॅक्स - 1 ।ै.6 ;संशोध्ितद्ध ”ास ऽ ”ास ‘‘अवक्षयण योग्य सम्पिा में घ्िासावट, उपभोग, अथवा कीमत में कोइर् अन्य कमी जो उपयोग, समय के व्यतीत होने अथवा तकनीक एवं बाजार में परिवतर्न के कारण अपलिख्िात होने से हुइर् है का मापन है।”ास का निधर्रण परिसम्पिा के संभावित उपयोगी जीवन काल में प्रति लेखांकन अवध्ि में ”ास केसंतोषजनक भाग को व्यय दशार्ने के लिए किया जाता है। ”ास में उन परिसम्पिायों का परिशोध्न सम्िमलित होता है जिनकी जीवन अवध्ि पूवर् - निधर्रित है।’’ ऽ ”ास, उद्यम की वित्तीय स्िथति एवं परिचालन के परिणामों के निधर्रण एवं प्रस्तुतिकरण को प्रभावित करता है। ”ास प्रतिवषर् लेखा वषर् अवक्षयण योग्य राश्िा तक लगाया जाता है। ऽ ”ास का विषय अथवा इसका आधर मूल्य अवक्षयण योग्य परिसम्पिा होती हैः ऽ जिनकी एक लेखा वषर् से अध्िक समय तक उपयोग की सम्भावना है। ऽ जिनका सीमित उपयोगी जीवन है, और ऽ जिन्हें कोइर् भी उद्यम उत्पादन में उपयोग या वस्तु एवं सेवाओं की आपूतिर् दूसरों को किराए पर देने या प्रशासनिक कायोर्ं के उपयोग के लिए रखता है, न कि व्यवसाय में सामान्य बिक्री के लिए। ऽ ”ास की राश्िा मूल रूप से तीन तत्वों पर आधरित है œ लागत, उपयोगी जीवन एवं शु( वसूलने योग्य मूल्य। ऽ स्थायी परिसम्पिा की लागत ‘‘इसके अध्िग्रहण, स्थापना कायर् प्रारम्भ एवं अतिरिक्त वस्तु या अवक्षयणयोग्य परिसम्पिा में सुधर पर किया गया कुल व्यय होती है।’’ ऽ परिसम्पिा का उपयोगी जीवन वह अवध्ि होती है जिसमें व्यावसायिक इकाइर् द्वारा इसके उपयोग की सम्भावना है। ऽ ”ास राश्िा के गणना करने की दो मुख्य विध्ियां हैंः ऽ सीध्ी रेखा विध्ि ऽ क्रमागत विध्ि ऽ उचितविध्ि का चयन निम्न तत्वों पर निभर्र करता हैः ऽ परिसम्पिा के प्रकार। ऽ परिसम्पिा के उपयोग की प्रकृति। ऽ व्यवसाय की परिस्िथतियां। ऽ चुनी गये ”ास प(ति के एक समय से दूसरे समय तक उपयोग में एकरूपता होनी चाहिए ”ास प(ति में परिवतर्न में छूट कुछ विश्िाष्ट परिस्िथतियों में ही दी जानी चाहिए। 7ण्1ण्2 ”ास की विशेषताएँ ”ास के उफपर की गइर् चचार् से ”ास के निम्न विशेषताएँ स्पष्ट होती हैंऋ 1ण् यह स्थायी परिसम्पिायों के पुस्तक - मूल्य का अवक्षयण है। 2ण् इसमें समय के बीतने, उपयोग करने अथवा प्रचलन से बाहर होने से मूल्य में हानि, सम्िमलित है। उदाहरण के लिए अप्रैल, 2006 को एक पफमर् 1ए00ए000 रु. की एक मशीन खरीदती है। वषर् 2007 में यही मशीन एक नये रूप में आती है परिणामस्वरूप व्यावसायिक पफमर् द्वारा क्रय की गइर् मशीन पुरानी हो जायेगी। इसके कारण पुरानी मशीन की कीमत में कमी अप्रचलन के कारण होगी। 3ण् यह एक निरंतर चलने वाली प्रिया है। 4ण् यह बीती हुइर् लागत है इसलिए कर योग्य लाभ की गणना से पूवर् इसे घटाना आवश्यक है। उदाहरण के लिए, ”ास एवं कर से पूवर् लाभ की राश्िा 50ए000 रु. है। ”ास 10ए000 रु. एवं कर 35ः की दर से लगाया गया है। कर से पूवर् के लाभ की गणना इस प्रकार से होगीः ;रु.द्ध ”ास एवं कर से पूवर् लाभ 50ए000 ; - द्ध अवक्षयण की राश्िा कर पूवर् लाभ ;10ए000द्ध कर से पूवर् लाभ 40ए000 5ण् यह गैर रोकड़ व्यय है। इससे किसी प्रकार की रोकड़ का प्रवाह नहीं होता है। यह पहले से किये गये पूँजीगत व्यय को समाप्त करने की प्रिया है। स्वयं करें अपने आस - पास देखें एवं अपने घर, विद्यालय, अस्पताल, छपाइर् कारखाना एवं बेकरी में कम - से - कम पाँच अवक्षयण योग्य परिसम्पिायों की पहचान करें। 7ण्2 ”ास एवं इससे मेल खाते शब्द कुछ ऐसे शब्द भी होते हैं जैसे रिक्तीकरण एवं परिशोध्न जो ”ास के सम्बन्ध् में प्रयुक्त होते हैं। इसकाकारण इनका समान लेखांकन व्यवहार है, चूंकि ये शब्द विभ्िान्न परिसंपिायों की उपयोगिता समाप्ित का प्रतिनिध्ित्व करते हैं। 7ण्2ण्1 रिक्तीकरण रिक्तीकरण शब्द का प्रयोग प्राकृतिक साध्नों को खोदकर निकालने के संदभर् में किया जाता है जैसेखानंे, खदानें इत्यादि। इससे माल अथवा परिसम्पिा की मात्रा की उपलब्ध्ता घट जाती है। उदाहरण के लिए एक व्यवसायिक इकाइर् ने जो कि खनन का व्यापार करती है, 10ए00ए000 रु. की कोयले की खान खरीदी। जैसे - जैसे इस खान में से कोयला निकाला जाता रहेगा इसकी कीमत कम होती जायेगी।खान की कीमत में घटोत्तरी को रिक्तीकरण कहते हैं। रिक्तीकरण एवं मूल्य में मूल अन्तर यह है किपहले में कुछ आथ्िार्क संसाध्नों का उपयोग किया जाता है जबकि दूसरे का सम्बन्ध् किसी परिसम्पिाके प्रयोग से है। इसके बावजूद भी इसका परिणाम प्राकृतिक संसाध्नों की मात्रा का नष्ट होना व सेवा क्षमता क्षीण होना है। इसी कारणवश रिक्तीकरण एवं मूल्य का लेखांकन व्यवहार एक समान होता है। 7ए2ए2 परिशोध्न परिशोध्न से अभ्िाप्राय पेटेन्ट, कापीराइट, ट्रेडमाकर्, प्रफैंचाइज, ख्याति, जिनका एक निश्िचत अवध्ि के लियेही उपयोग किया जाता है, मूल्य को पुस्तकों में व्यय दिखा कर समाप्त करने से है। अमूतर् परिसम्पिा की लागत एक भाग का अपलेखन या एक अवध्ि में उसको समाप्त दिखाने के लिये प्रिया एक ही है। उदाहरण के लिए एक पफमर् ने 10ए00ए000 रु. में पेटेन्ट खरीदा और यदि इसका उपयोगी जीवनकाल 10 वषर् आंका गया है तो पफमर् के लिए इस 10ए00ए000 रु. की राश्िा को 10 वषोर्ं में व्यय दिखाकार समाप्त करना होगा। व्यय दिखाइर् गइर् राश्िा तकनीकी रूप से परिशोध्न कहलाती है। 7ण्3 ”ास के कारण लेखांकन मानक 6 द्वारा दी गइर् ”ास की परिभाषा के एक भाग में इन्हें पूरी तरह से स्पष्ट किया गया है। यहाँ इनका विस्तृत विवरण दिया गया है। 7ण्3ण्1 क्षय एवं घ्िासावट अथवा समय की समाप्ित के कारण मूल्य में कमी क्षय एवं घ्िासावट का अथर् है क्षमता में कमी एवं परिणामस्वरूप परिसम्पिा के मूल्य में गिरावट, जो इसके आय अजर्न के लिए व्यवसाय प्रचालन में उपयोग के कारण होती है। इससे परिसम्पिा की अपने उद्देश्य को पूरा करनेकी तकनीकी क्षमता कम हो जाती है। क्षय एवं घ्िासावट का दूसरा पहलू परिसंपिा का भौतिक रूप से नष्ट होनाहै। कुछ परिसम्पिायाँ मात्रा समय के व्यतीत होने के साथ नष्ट होती रहती हैं जबकि उनका कोइर् उपयोग नहीं कियाजाता है। ऐसा विशेष रूप से मौसम, हवा, बारिश आदि प्रकृति की आपदाओं के प्रभाव से होता है। 7ण्3ण्2 कानूनी अध्िकार की समाप्ित व्यवसाय के लिए कुछ परिसम्पिायों का मूल्य उनको उपयोग करने का करार, पूवर् निश्िचत समय कीसमाप्ित पर खत्म हो जाता है। ऐसी परिसम्पिायों के उदाहरण हैं - पेटेन्ट्स, काॅपीराइट, पट्टा आदि। व्यवसाय के लिए इनकी उपयोगिता उनको प्राप्त कानूनी समथर्न के हटते ही समाप्त हो जाती है। 7ण्3ण्3 अप्रचलन स्थायी परिसम्पिायों के ”ास का एक और तत्व अप्रचलन है। साधरण शब्दों में अप्रचलन का अथर् हैसमयानुकूल न होना। अप्रचलन से अभ्िाप्राय है किसी परिसम्पिा का पुराना हो जाना क्योंकि अब उससेऔर श्रेष्ठ परिसम्पिा उपलब्ध् है। यह निम्न तत्वों के कारण पैदा होती हैः ऽ तकनीकी परिवतर्न। ऽ उत्पादन प(तियों में सुधर। ऽ इन परिसम्पिायों के कारण उत्पादित वस्तु एवं सेवाओं की बाशार मांग में परिवतर्न। ऽ वैधनिक अथवा अन्य कोइर् ऐसा कारण। 7ण्3ण्4 असमान्य तत्व किसी भी परिसम्पिा की उपयोगिता में कमी कुछ असामान्य कारकों से भी हो सकती है - जैसे आग से दुघर्टना, भूचाल, बाढ़ आदि। दुघर्टनाजन्य हानि स्थायी होती है लेकिन लगातार या क्रमिक नहीं होती। उदाहरण के लिए एक दुघर्टनाग्रस्त कार का मरम्मत के पश्चात भी बाशार में पहला मूल्य नहीं रहेगा यद्यपि इसको उपयोग में नहीं लाया गया है। स्वयं जाँचिए - 1 1 आपके सामने तीन व्यावसायिक इकाइयों के लाभ - हानि खाते हैं। आपने पाया कि पहली इकाइर् में ”ास शब्द प्रयोग किया गया हैऋ दूसरी में रिक्तीकरण तथा तीसरी में परिशोध्न। प्रत्येक के सम्बन्ध् में बताइए कि वे किस प्रकार का व्यवसाय कर रहें हैं। 2 एक दवा निमार्ता ने एक अपूवर् दवा को विकसित किया है एवं इसके पेटेन्ट को पंजीयन कराया है। पेटेन्ट की लागत को लाभ हानि खाते में व्यय दिखाने के लिए कौन सा शब्द लिखा जायेगा। 7ण्4 ”ास की आवश्यकता लेखांकन अभ्िालेखों में ”ास के लिए प्रावधन की आवश्यकता संकल्पना, वैधनिक, एवं व्यवसाय में व्यवहारिकतावश होती है। इनके कारण ”ास एक व्यावसायिक व्यय के रूप में महत्त्वपूणर् हो जाता है। 7ण्4ण्1 आगम एवं लागत का मिलान स्थायी परिसम्पिायों को व्यवसोय वफ परिचालन में उपयोग का औचित्य यही है कि इनसे आगम का अजर्नहोता है। हर परिसम्पिा कुछ न कुछ घ्िासती है इसलिए इसका मूल्य कम हो जाता है। इसीलिए ”ास भी व्यवसाय के किसी भी अन्य दूसरे सामान्य व्यय जैसे वेतन, भाड़ा, पोस्टेज एवं स्टेशनरी आदि के समान व्यय है। यह समान अवध्ि के आगम पर प्रभार होता है इसीलिए इन्हें साधरण रूप से समान्यतः मान्य लेखांकन सि(ांतों ;ळ।।च्द्ध का अनुकरण करते हुए निवल लाभ निधर्रण से पूवर् घटाना अनिवायर् होता है। 7ण्4ण्2 कर के लिए महत्त्व ”ास करों के कारण भी घटाने के योग्य व्यय है। वैसे ”ास की राश्िा के निधर्रण के लिए कर संबंधी नियम व्यवसाय में वतर्मान में प्रचलित नियमों के समान होने आवश्यक नहीं हैं। 7ण्4ण्3 सत्य एवं उचित वित्तीय स्िथति यदि परिसम्पिा पर ”ास के लिए प्रावधन नहीं किया गया है तो इसका अध्ि - मूल्यांकन होगा औरतुलन - पत्रा व्यवसाय की सही वित्तीय स्िथति नही दशार्एगा। वैसे न तो स्थापित लेखांकन व्यवहारों और न ही कानून के विश्िाष्ट प्रावधन इसकी अनुमती देते हैं। 7ण्4ण्4 कानून का अनुपालन कर नियमों के अतिरिक्त कुछ निश्िचत अध्िनियम हैं जो परोक्ष रूप से कुछ व्यावसयिक संगठनों जैसेनिगमित उद्यम को स्थाइर् परिसम्पिा पर मूल्य ”ास के प्रावधन के लिए बाध्य करते हैं। 7ण्5 ”ास की राश्िा को प्रभावित करने वाले तत्व ”ास का निधर्रण तीन बातों पर निभर्र करता है वे हैं लागत, अनुमानित उपयोगी जीवन काल एवं संभावित अवश्िाष्ट मूल्य। 7ण्5ण्1 परिसम्पिा की लागत किसी परिसम्पिा की लागत ;जिसे मूल लागत अथवा ऐतिहासिक लागत भी कहते हैंद्ध में बीजक मूल्यएवं परिसम्पिा को ियात्मक स्िथति में लाने अथवा उपयोग के योग्य बनाने के लिए किये गये आवश्यक व्यय सम्िमलित हैं। क्रय मूल्य के अतिरिक्त इसमें भाड़ा एवं परिवहन लागत मागर् के लिए बीमा,स्थापन लागत, पंजीयन व्यय परिसम्पिा के क्रय पर दिया कमीशन एवं मिलानेवाली मदें जैसे साॅफ्रटवेयरआदि सम्िमलित होते हैं। यदि पुरानी परिसम्पिा क्रय की है तो इसमें परिसम्पिा को कायर् के योग्य बनाने के लिए किया गया प्रारंभ्िाक मरम्मत व्यय सम्िमलित होता है। लेखांकन मानक œ 6 के अनुसार स्थाइर् परिसम्पिा की लागत इसकी अध्िग्रहण, स्थापना, चालू करनेएवं इसके साथ अतिरिक्त चीजें, अथवा अवक्षयित परिसम्पिा में सुधर पर किया गया कुल व्यय है। उदाहरण के लिए एक मशीन 50ए000 रु. में खरीदी एवं 5ए000 रु. इसके परिवहन एवं स्थापना पर व्यय किये। यहां मशीन का भौतिक मूल्य 55ए000 रु. ;अथार्त् 50ए000 ़ 5ए000 रु.द्ध जिसे मशीन के उपयोगी जीवन काल में ”ास व्यय के रूप में समाप्त करना है। 7ण्5ण्2 अनुमानित शु( अवश्िाष्ट मूल्य अनुमानित शु( अवश्िाष्ट मूल्य ;जिसे अवशेष मूल्य अथवा क्षय के पश्चात मूल्य भी कहते हैंद्ध से आशयपरिसम्पिा के जीवनकाल के अन्त में अनुमानित शु( वसूली योग्य मूल्य ;अथवा विक्रय मूल्यद्ध से हैं।इसकी गणना परिसम्पिा को बेचने पर किये जाने वाले खचोर्ं को काटकर की जाती है। उदाहरण के लिए एक मशीन 50ए000 रु. में खरीदी एवं इसका अनुमानित जीवनकाल 10 वषर् आंका गया है। 10 वषर् की समाप्ित पर माना इसको 6ए000 रु. में बेचा जा सकेगा। लेकिन इसको बेचने पर 1ए000 रु. व्यय होने का अनुमान है। ऐसे में इसका अवश्िाष्ट मूल्य 5ए000 रु. ;6ए000 रु.√ 1ए000 रु. होगाद्ध। 7ण्5ण्3 ”ास मान मूल्य किसी परिसम्पिा का ”ा्रस मान मूल्य इसकी लागत ;जैसा बिन्दु 7ण्5ण्1 में गणना की गइर् हैद्ध घटा शु( अवश्िाष्ट मूल्य ;जैसे बिन्दु 7ण्5ण्2 में गणना की गइर् हैद्ध के बराबर होता है। अतः उपरोक्त उदाहरणमें परिसंपिा का अवक्षयण मूल्य 45ए000 रु. होगा ;अथार्त् 50ए000 रु. - 5ए000 रु.द्ध जिसे उसकेअनुमानित जीवनकाल में बाँट दिया जाएगा। यहाँ यह बताना आवश्यक है कि परिसंपिा के उपयोगी जीवनकाल पर प्रभारित कुल अवक्षयित राश्िा ”ास मान लागत के बराबर होनी चाहिये। यदि निधर्रित की गइर् अवक्षयण की कुल राश्िा ”ास मान लागत से कम है तो पूँजीगत व्यय का अव - पुनलार्भ होगा। साथ ही यह आगम - व्यय मिलान संकल्पना का उल्लंघन होगा। 7ण्5ण्4 अनुमानित उपयोगी जीवनकाल परिसम्पिा का उपयोगी जीवनकाल उसका अनुमानित आथ्िार्क अथवा वाण्िाज्ियक जीवनकाल होता है।इसके लिए भौतिक जीवनकाल महत्त्वपूणर् नहीं है क्योंकि हो सकता है कि परिसम्पिा भेैतिक रूप से अभी भी दृश्य है किन्तु यह संभव है कि वाण्िाज्ियक रूप से उत्पादन के योग्य न हो। उदाहरण के लिए एक मशीन का क्रय किया गया तथा अनुमान है कि इसका उपयोग उत्पादन प्रंेिया म5 वषर् तक किया जायेगा। हो सकता है कि 5 वषर् के पश्चात् भी मशीन अच्छी स्िथति में हो लेकिन उत्पादन में उसका उपयोग लाभप्रद नहीं होगा अथार्त् यदि इसको अभी भी उपयोग में लाया जाए तो हो सकता है कि उत्पादन लागत बढ़ जाए। इसीलिए इसके भौतिक जीवन काल से हटकर इसका उपयोगी जीवनकाल पांच वषर् काहोगा। परिसम्पिा के उपयोगी जीवनकाल का अनुमान लगाना कठिन होता है क्योंकि यह अनेक कारकोंपर निभर्र करता है जैसे परिसम्पिा के उपयोग करने का स्तर, परिसम्पिा का रखरखाव, तकनीकी परिवतर्न बाशार में परिवतर्न इत्यादि। लेखांकन मानक 6 के अनुसार किसी परिसम्पिा का जीवनकाल सामान्यतः वह अवध्ि होता है जिसमें उद्यम द्वारा इसका उपयोग करने की सम्भावना है। साधरणतः उपयोगीजीवनकाल भौतिक जीवनकाल से कम होता है। वैसे तो परिसम्पिा का उपयोगी जीवनकाल वषोर्ं में दिया जाता है लेकिन इसे अन्य इकाइयों में भी दशार्या जा सकता है जैसे उत्पादन की इकाइयां ;जैसा कि खानों की दशा मेंद्ध अथवा कायर् के घंटे उपयोगी जीवनकाल निम्न तत्वों पर निभर्र करता हैः ऽ कानून अथवा प्रसंविदे द्वारा पहले से निधर्रण जैसे पट्टाध्िकार परिसम्पिा का उपयोगी जीवनकाल पट्टे की अवध्ि होता है। ऽ परिसम्पिा के उपयोग हेतु निश्िचत पारियों की संख्या, व्यावसायिक संगठन में मरम्मत एवं रखरखाव की नीति। ऽ तकनीकी रूप से अप्रचलित। ऽ उत्पादन प(ति में नवीनता/सुधर। ऽ वैधनिक अथवा अन्य प्रतिबन्ध्। स्वयं जाँचिए - 2 बताएं कि निम्न कथन सत्य हैं अथवा असत्यः 1 ”ास एक गैर - रोकड़ व्यय है। 2 ”ास चालू परिसम्पिायों पर भी व्यय भार होता है। 3 ”ास मूतर् स्थाइर् परिसम्पिायों के बाशार मूल्य में गिरावट को कहते हैं। 4 ”ास का मुख्य कारण प्रयोग के कारण घ्िासावट होता है। 5 व्यवसाय का सत्य लाभ अथवा हानि ज्ञात करने के लिए ”ास लगाना अनिवायर् है। 6 रिक्तीकरण शब्द अमूतर् परिसम्पिायों के सम्बन्ध् में उपयोग किया जाता है। 7 ”ास पुनस्र्थापन के लिए कोष जुटाता है। 8 जब परिसम्पिा का बाशार मूल्य इसके पुस्तकीय मूल्य से अध्िक हो तो इस पर ”ास नहीं लगाया जाता है। 9 ”ास सम्पिा के मूल्य को घटाकर इसके बाशार मूल्य तक लाने के लिये लगाया जाता है। 10 यदि रख - रखाव पर ठीक - ठीक व्यय किया जाय तो ”ास लगाने की आवश्यकता नहीं होती है। 7ण्6 ”ास की राश्िा की गणना की प(तियाँ किसी एक लेखा वषर् मंे लगाइर् जाने वाली अवक्षयित राश्िा उसके ”ास मान एवं उसके आबंटन की प(ति पर निभर्र करती है। इसकी दो विध्ियां हैं जिनको कानून ने निश्िचत किया है तथा जिन्हें भारत में पेशेवर लेखांकन व्यवहार में लागू किया गया है। ये विध्ियां हैं सीध्ी रेखा विध्ि एवं क्रमागत विध्ि। इन दो मुख्यप(तियों के अतिरिक्त अन्य प(तियों भी हैं जैसे - वाष्िार्क वृिा विध्ि, मूल्य ”ास कोष प(ति, बीमा पालिसी विध्ि, वषो± के अंकों की योगविध्ि, दोहरी क्रमागत ”ास विध्ि जिसे अवक्षयण की राश्िा तय करने के लिए प्रयोग किया जाता है। उचित प(ति का चयन निम्न पर निभर्र करता हैः ऽ परिसम्पिा के प्रकारऋ ऽ ऐसी परिसम्पिा के उपयोग की प्रकृतिऋ ऽ व्यवसाय में प्रचलित परिस्िथतियांऋ ऽ लेखांकन मानक √ 6 के अनुसार चयन की गइर् मूल्य ”ास प(ति को एक अवध्ि से दूसरी अवध्ि में समान रूप से लागू करना चाहिए। विश्िाष्ट परिस्िथतियों में ही मूल्य ”ास प(ति में परिवतर्न किया जाना चाहिए। 7ण्6ण्1 सीध्ी रेखा प(ति ”ास लगाने का यह सबसे पुरानी एवं बहुत अध्िक प्रयोग की जाने वाली विध्ि है। यह प(ति इसअवधारणा पर आधरित है कि परिसम्पिा अपने संपूणर् उपयोगी जीवनकाल में समान रुप से प्रयोग की जाएगी। इसे सीधी रेखा कहते हैं क्योंकि यदि ”ास की राश्िा एवं सम्ब( समय को ग्रापफ पर दशार्या जाय तो यह एक सीध्ी रेखा बन जाएगी। ;चित्रा 7ण्1द्ध 25000 20000 20000 20000 20000 15000 10000 5000 2001 2002 2003 चित्रा 7ण्1 सरल रेखा विध्ि से अवक्षयण की राश्िा इसे स्थायी प(ति भी कहते हैं क्योंकि परिसम्पिा के उपयोगी जीवनकाल में प्रतिवषर् ”ास की राश्िाएक समान रहती है। इस प(ति के अनुसार परिसम्पिा के जीवनकाल में प्रत्येक लेखांकन वषर् में एक स्िथर एवं समान राश्िा को भार के रुप में दशार्ता है। प्रति वषर् ”ास की राश्िा इस प्रकार से लगाइर् जातीहै कि परिसम्पिा के उपयोगी जीवन के अन्त में इसकी मूल्य लागत घटाकर इसके अवश्िाष्ट मूल्य के अवक्षयण ;रु. मेंद्ध बराबर आ जाती है। इसे मूल लागत पर स्थायी प्रतिवषर् विध्ि भी कहते हंै, क्योंकि प्रतिवषर् मूल लागत ;वास्तव में ”ासमान लागतद्ध को समान प्रतिशत से मूल्य ”ास के रूप में समाप्त किया जाता है। इस विध्ि से अवक्षयण राश्िा की गणना निम्न सूत्रा लगाकर की जाती हैः परिसम्पिाकीलागत - अनुमानिताु ष्टमूल्श् ङ अवश्ि ा”ास त्र परिसम्पिाका अनुमानितजीवनकाल सीध्ी रेखा विध्ि में ”ास की दर परिसम्पिा के कुल मूल्य का प्रतिशत होती है जिससे परिसम्पिा पर उपयोगी जीवनकाल में अवक्षयण के रूप में व्यय भार लगाया जाता है। ”ास की दर इस प्रकार निकाली जाती हैः वाष्िार्क ”ास राश्िा ”ास की दर त्र× 100 अध्िग्रहणलागत इस उदाहरण को देखें। परिसम्पिा की मूल लागत 2ए50ए000 रु. है तथा उपयोगी जीवनकाल 10 वषर् एवं अवश्िाष्ट मूल्य का अनुमान 50ए000 रु. लगाया है। प्रति वषर् लगाइर् जाने वाली ”ास की राश्िा की गणना इस प्रकार की जाएगी परिसम्पिाकीअध्िग्रहणलागत - अनुमानिताु ष्ट मूल्श् ङ अवश्ि ावाष्िार्क ”ास राश्िा त्र परिसम्पिाका अनुमानितजीवनकाल 2ए50ए000 रु. - 50ए000 रु्त्र त्र 20ए000 रुअथार्त 10 ”ास की दर इस प्रकार से निकाली जायेगी - वाष्िार्क ”ास राश्िा ;पद्ध ”ास की दर त्र× 100 अध्िग्रहणलागत बिन्दु ;पद्ध से वाष्िार्क ”ास राश्िा 20ए000 रु. है 20ए000 रुत्र× 100 त्र 8ःअतः ”ास की दर होगी।2ए50ए000 रु7ण्6ण्1ण्1 सीध्ी रेखा विध्ि के लाभ सीध्ी रेखा विध्ि के कुछ लाभ हैं जो नीचे दिये गये हैं ऽ यह बहुत सरल विध्ि है इसको समझना एवं इसका उपयोग सरल है इसकी सरलता के कारण व्यवहार में यह बहुत लोकपि्रय है। ऽ परिसम्पिा पर ”ास लगाकर इसका शु( अवशेष मूल्य या शून्य मूल्य पर लाया जा सकता है।इसीलिए इस विध्ि से सम्पिा के पूरे ”ास मान मूल्य को इसके उपयोगी जीवनकाल में बाँटना सम्भव हो पाता है। ऽ प्रतिवषर् लाभ - हानि खाते में एक ही राश्िा लिखी जाती है। इससे विभ्िान्न वषोर्ं के लाभों में तुलना करना सरल हो जाता है। ऽ यह विध्ि उन परिसम्पिायों के लिए उचित रहती है जिसका उपयोगी जीवन का सही अनुमान लगायाजा सकता है एवं जहाँ परिसम्पिा के उपयोग में प्रतिवषर् एकरूपता है जैसे पट्टे पर लिया गया भवन। 7ण्6ण्1ण्2 सीध्ी रेखा विध्ि की सीमाएं यद्यपि सीध्ी रेखाविध्ि सरल होती है एवं इसको लागू करना आसान होता है पिफर भी इसकी कुछ सीमाएं हैं। जो नीचे दी गइर् हैंः 1ण् यह प(ति इस दोषपूणर् अवधरणा पर आधरित है कि परिसम्पिा की उपयोगिता विभ्िान्न लेखा वषोर्ं में समान रहती है। 2ण् समय के साथ परिसम्पिा की क्षमता कम होती जाती है तथा मरम्मत एवं रखरखाव पर खचर् बढ़ता जाता है। इसीलिए इस प(ति में लाभ पर प्रभार ”ास एवं मरम्मत दोनों को मिलाकर/कुल राश्िापरिसम्पिा के पूरे जीवनकाल में समान नहीं होगी बल्िक यह प्रतिवषर् बढ़ती रहेगी। 7ण्6ण्2 क्रमागत प(ति इस प(ति में ”ास परिसम्पिा के पुस्तक मूल्य पर प्रभार होता है। पुस्तक मूल्य लगाइर् गइर् वाष्िार्क ”ास राश्िा से घटता चला जाता है। इसे ”ासमान शेष प(ति भी कहते हैं। इस प(ति में ”ास की राश्िा कीगणना प्रत्येक लेखांकन अवध्ि के प्रारम्भ में दिये गए परिसम्पिा के मूल्य पर पूवर् - निधर्रित अनुपात प्रतिशत से की जाती है। ”ास राश्िा प्रतिवषर् कम होती जाती है।;देखें चित्रा 7ण्2द्ध क्रमागत प(ति से ”ास 25ए000 उदाहरण के लिए एक परिसम्पिा का मूल्य 2ए00ए000 रु. है तथा इस पर ”ास क्रमागत प(ति के अनुसार 10» प्रति वषर् की दर से लगाया जाता है। इसमें ”ास की राश्िा की गणना इस प्रकार से की जायेगीः 2ए00ए000 रु.×10 ;पद्ध ”ास ;प् वषर्द्ध त्र त्र 20ए000 रु100 ;पपद्ध अपलिख्िात मूल्य त्र 2ए00ए000 रु.√ 20ए000 रु.त्र 1ए80ए000 रुलेखाशास्त्रा - वित्तीय लेखांकन ;प् वषर् के अन्त मेंद्ध 1ए80ए000 रु.10 ;पपपद्ध ”ास ;प्प् वषर्द्ध त्र त्र 18ए000 रु100 ;पअद्ध अपलिख्िात मूल्य त्र 1ए80ए000 रु.√ 18ए000 रु.त्र 1ए62ए000 रु;प्प् वषर् के अन्त मेंद्ध ;अद्ध प्प्प् वषर् त्र 1ए62ए000 रु.√ 16ए200 रु;अपद्ध अपलिख्िात मूल्य त्र 1ए62ए000 रु.√ 16ए200 रु;प्प्प् वषर् के अन्त मेंद्ध त्र 1ए45ए800 रुजैसा कि उदाहरण से स्पष्ट है, ”ास की राश्िा प्रतिवषर् कम होती जा रही है। इसी कारण से इसे क्रमागत ”ा्रस किश्त अथवा ”ास मान मूल्य प(ति भी कहते हैं। यह प(ति इस अवधरणा पर आधरित है किव्यवसाय को होने वाला लाभ सम्पिा के पुराने होने के साथ घटता जाता है ;देखें चित्रा 7ण्2द्ध इसका कारणप्रति वषर् परिसम्पिा खाते के निरन्तर घटते हुए शेष पर पूवर् निधर्रित प्रतिशत से गणना करना है। इसी कारण से बाद के वषो± की अपेक्षा आरम्भ के वषो± में अवक्षयण भार के रूप में बड़ी राश्िा वसूल की जाती है। अपलिख्िात मूल्य प(ति में ”ास की दर की गणना निम्न सूत्रा के द्वारा की जाती हैः ⎡ े ⎤ त् त्र⎢1− द ⎥×100 ⎢ ब ⎥⎣ ⎦ जहाँ त् त्र अवक्षयण की दर द त्र अनुमानित उपयोगी जीवन े त्र अवश्िाष्ट मूल्य ब त्र परिसम्पिा की लागत उदाहरण के लिए ट्रक की मौलिक लागत 9ए00ए000 रु. एवं इसके 16 वषर् के उपयोगी जीवन काल के बाद इसका अवशेष मूल्य 50ए000 रु. है तब ”ास की उचित दर गणना इस प्रकार से की जायेगीः ⎡ 50ए000 ⎤ त् त्र 1−16 ×100त्र ;1 .0ण्834द्ध×100 त्र16ण्6ः⎢⎥9ए00ए000⎣ ⎦ 7ण्6ण्2ण्1 क्रमागत प(ति के लाभ क्रमागत प(ति के निम्न लाभ हैंः 1ण् यह प(ति अध्िक वास्तविक अवधरणा पर आधरित है कि समय के व्यतीत होने के साथपरिसम्पिा से प्राप्त लाभ कम होता जाता है। इसलिए आवश्यकता लागत के उचित आबंटन कीहै, क्योंकि प्रारंभ के दिनों में जब परिसम्पिा की उपयोगिता अध्िक होती है तब अध्िक ”ास लगाया जाता है जबकि बाद के वषो± में कम जब परिसम्पिा की उपयोगिता कम हो जाती है। 2ण् इसके कारण ”ास एवं मरम्मत व्यय का लाभ - हानि खाते पर प्रति वषर् भार लगभग समान रहता है। 3ण् आयकर अध्िनियम करावधन के लिए इस विध्ि को स्वीकार करता है। 4ण् चंूकि प्रारंम्भ के वषो± में लागत का बड़ा भाग समाप्त कर दिया जाता है अतः अप्रचलन के कारण हानि कम हो जाती है। 5ण् यह प(ति स्थाइर् परिसम्पिायों के यथायोग्य होती है क्योंकि यह अध्िक समय तक चलती है एवं समय की समाप्ित के साथ इनकी मरम्मत एवं रखरखाव पर अध्िक व्यय की आवश्यकता होती है। 7ण्6ण्2ण्2 क्रमागत ”ास विध्ि की सीमाएं यद्यपि क्रमागत ”ास विध्ि अध्िक वास्तविक अवधरणा पर आधरित होती है पिफर भी इसकी सीमाएं हैं, जो निम्न हैंः 1ण् ”ास अपलिख्िात मूल्य पर निश्िचत प्रतिशत से निकाला जाता है, परिसम्पिा की लागत को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, परिसम्पिा की मूल्य कमी भी शून्य नहीं हो सकती। 2ण् ”ास की उपयुक्त दर निश्िचत करना कठिन हो जाता है। 7ण्7 सीध्ी रेखा एवं क्रमागत ”ासविध्ि तुलनात्मक विश्लेषण व्यवहार में ”ास की राश्िा की गणना के लिए सीध्ी रेखा विध्ि एवं क्रमागत् ”ास विध्ि का उपयोग किया जाता है। इन दो विध्ियों में निम्न बिन्दुओं के आधर पर अन्तर हैंः 7ण्7ण्1 ”ास लगाने के आधर सीध्ी रेेखा विध्ि में मौलिक लागत ;या ऐतिहासिक लागतद्ध पर ”ास लगाया जाता है जबकि क्रमागत विध्ि में ”ास लगाने का आधर वषर् के आरंभ में शु( पुस्तक मूल्य है ;अथार्त् मूल लागत में से घटायी गयी वतर्मान तिथ्िा तक की ”ास राश्िाद्ध। 7ण्7ण्2 ”ास का वाष्िार्क प्रभार सीध्ी रेखा विध्ि के अन्तगर्त प्रति वषर् अपलिख्िात की जानेवाली ”ास की राश्िा स्िथर अथवा समान रहती है जबकि क्रमागत ”ास विध्ि में प्रथम वषर् में यह राश्िा सवार्ध्िक होती है एवं बाद के वषो± मे यह घटती जाती है। इस अन्तर का कारण मूल्य ”ास की दोनों विध्ियों में अवक्षयण लगाने के आधर में अन्तर है। सीध्ी रेखा विध्ि मे ”ास मूल लागत पर लगाया जाता है जबकि क्रमागत ”ास विध्ि में यह अपलिख्िात मूल्य पर लगाया जाता है। 7ण्7ण्3 ”ास एवं मरम्मत व्यय का लाभ - हानि खाते पर भार यह विश्िाष्टता सभी को मान्य है कि परिसम्पिा के उपयोगी जीवनकाल के बाद के वषोर् में मरम्मत एवंरखरखाव पर व्यय बढ़ जाते हैं। अतः सीध्ी रेखा विध्ि के अंतगर्त, परिसंपिा के उपयोगी जीवनकाल के बाद के वषो± में ”ास और मरमम्त व्ययोें के संदभर् में लाभ - हानि खाते पर कुल प्रभार बढ़ जाता है। दूसरी ओर क्रमागत विध्ि में ”ास भार बाद के वषोर्ं में घटता है इसलिए ”ास एवं मरम्मत व्यय प्रतिवषर् समान रहता है। 7ण्7ण्4 आयकर कानून मान्यता सीध्ी रेखा प(ति को आयकर कानून मान्यता नहीं देता है जबकि यह क्रमागत ”ास प(ति को मान्यता देता है। 7ण्7ण्5 उपयुक्तता सीध्ी रेखा प(ति उन परिसम्पिायों के लिए उपयुक्त रहती है जिनमें मरम्मत व्यय कम होते है, प्रचलन की सम्भावना भी कम रहती है तथा अवश्िाष्ट मूल्य अवध्ि पर निभर्र करता है। इसके उदाहरण हैं प्रफीहोल्डभूमि एवं भवन, पेटेन्ट्स, ट्रेड माकर् आदि। क्रमागत ”ास प(ति उन परिसम्पिायों के लिए उपयुक्त रहती है जिन पर तकनीकी परिवतर्नों का प्रभाव पड़ता है तथा समय के व्यतीत होने के साथ मरम्मत व्यय बढ़ता जाता है जैसे सयंन्त्रा एवं मशीनरी, वाहन इत्यादि। स्वयं जाँचिए - 3 आपके क्षेत्रा में दांतों के दो चिकित्सक हैं डाॅ. अग्रवाल एवं डाॅ. मेहता जो एक दूसरे के प्रतियोगी हैं। दोनों ने मरीजों का इलाज करने के लिए एक मशीन खरीदी है। डाॅ. अग्रवाल ने निणर्य लिया कि वह प्रतिवषर् ”ास को समान मूल्य पर व्यय मानेंगे जबकि डाॅ मेहता प्रारम्िभक वषो± में अध्िक ”ास लगाना चाहते हैं। उन्हें ”ास की विध्ियों का कोइर्ज्ञान नहीं है। आपकी दृष्िट में कौन अध्िक समझदार है? अपने उत्तर के समथर्न में कारण दें। अन्तर का आधर सीध्ी रेखा प(ति क्रमागत ”ास प(ति 1ण् ”ास लगाने का आधर 2ण् वाष्िार्क ”ास 3ण् ”ास एवं मरम्मत की पूरी लाभ - हानि खाते पर भार मूल लागत प्रतिवषर् स्िथर ;एक समानद्ध प्रतिवषर् असमान अन्ितम वषो± में बढ़ता है पुस्तक मूल्य ;अथार्त् मूल लागत घटा आज तक की तिथ्िा तक का ”ास, प्रतिवषर् घटता है प्रतिवषर् लगभग समान 4ण् आयकर कानून द्वारा मान्यता 5ण् उपयुक्तता मान्यता नहीं देता है उन परिसम्पिायों के लिए उपयुक्त जिनमें मरम्मत खचर् कम होता है, अप्रचलन की सम्भावना कम रहती है तथा अवश्िाष्ट मूल्य उसकी अवध्ि पर निभर्र करता है मान्यता देता है उन परिसम्पिायों के लिए उपयुक्त रहती है जिन पर तकनीकी परिवतर्नों का प्रभाव पड़ता है तथा समय व्यय बढ़ता जाता है। चित्रा 7ण्3ः सीध्ी रेखा प(ति एवं क्रमागत हृास प(ति में तुलना 7ण्8 ”ास के अभ्िालेखन की प(तियां स्थाइर् परिसम्पिायों पर ”ास वफा लेखा पुस्तकों में अभ्िालेखन दो प्रकार हैंः ऽ परिसम्पिा खाते पर ”ास का लगाया जाना ऽ ”ास पर प्रावधन खाता/संचित ”ास खाता बनाना 7ण्8ण्1 परिसम्पिा खाते पर ”ास का लगाया जाना इस व्यवस्था के अनुसार ”ास को परिसम्पिा की मूल लागत में से घटाया जाता है ;परिसम्पिा खाते के जमा पक्ष में लिखा जाता हैद्ध व लाभ - हानि खाते पर भार लगाया जाता है ;नाम पक्ष में लिखा जाता हैद्ध। इस विध्ि में रोजनामचा प्रविष्िटयाँ निम्न होंगीः 1ण् परिसंपिा के क्रय के अभ्िालेखन पर ;केवल क्रय के वषर् मेंद्ध परिसंपिा खाता नाम ;स्थापना, भाड़ा व्ययसहित परिसंपिा की लागतद्ध बैंक/विक्रेता के खाते से ;नकद/उधर क्रयद्ध 2ण् निम्नवत् दो प्रविष्िटयाँ प्रत्येक वषर् के अंत में की जाएंगी ;अद्ध परिसंपिा की लागत से ”ास राश्िा घटाने पर ”ास खाता नाम ;”ास राश्िा सेद्धपरिसंपिा खाते से ;बद्ध ”ास राश्िा का लाभ - हानि खाते पर प्रभाव के लिए लाभ - हानि खाता नाम ;अवक्षयित राश्िा सेद्ध ”ास खाते से 3ण् तुलन पत्रा का व्यवहार जब इस विध्ि का प्रयोग किया जाता है तब स्थायी परिसंपिा को तुलन पत्रा के परिसंपिा पक्ष में शु( पुस्तकमूल्य पर दशार्या जाएगा ;अथार्त् तिथ्िा विशेष पर परिसंपिा को वह लागत जिसमें से ”ास राश्िा घटाइर् गइर् हैद्ध न कि वास्तविक लागत जिसे ऐतिहासिक लागत भी कहते हैं। 7ण्8ण्2 ”ास पर प्रावधन खाता/संचित ”ास खाता इस विध्ि मे परिसंपिा पर लगाइर् गइर् ”ास राश्िा एक अलग खाते में संचित होती है जिसे ”ास पर प्रावधान अथवा संचित ”ास कहते हैं। ”ास की राश्िा के इस प्रकार से संचयन के कारण परिसंपिा खाता किसी भी रूप में प्रभावित नहीं होता है तथा इसे इसके उपयोगी जीवनकाल के हर आने वाले वषो± में लागत मूल्य पर ही दशार्या जाता है। ”ास के अभ्िालेखन की इस विध्ि की कुछ आधरभूत विशेषताएं हैं जो नीचे दी गइर् हैंः ऽ परिसंपिा खाता इसके पूरे जीवनकाल में इसे मूल लागत पर ही दशार्ता है। ऽ ”ास की राश्िा को प्रत्येक लेखांकन वषर् के अन्त में परिसंपिा खाते में समायोजन करने के स्थान पर एक अलग खाते में समेकित किया जाता है। इस विध्ि में निम्न रोजनामचा प्रविष्िटयाँ की जाएंगी 1ण् परिसंपिा के क्रय का अभ्िालेखन ;केवल क्रय वषर् मेंद्ध परिसंपिा खाता नाम ;स्थापना व्ययों सहित परिसंपिा की लागतद्ध बैंक/विक्रेता खाते से ;नकद/उधर क्रयद्ध 2ण् प्रत्येक वषर् के अंत में निम्नवत् दो प्रविष्िटयाँ दी जाएंगीः ;अद्ध ”ास मान राश्िा को ”ास प्रावधन खाते के जमा पक्ष में लिखने परः ”ास खाता नाम ;अवक्षयित राश्िा सेद्ध ”ास पर प्रावधन खाते से ;बद्ध ”ास का लाभ - हानि खाते पर प्रभार के लिए लाभ - हानि खाता नाम ;अवक्षयित राश्िा सेद्ध ”ास खाते से 3ण् तुलन पत्रा का व्यवहार तुलन पत्रा में इसे परिसंपिा पक्ष की ओर मूल लागत पर दशार्या जाएगा। तिथ्िा विशेष तक लगाइर् गइर् ”ास की राश्िा ”ास प्रावधान खाते में दशार्यी जाती है जिसे या तो देयता पक्ष की ओर दशार्या जाएगा या पिफर तुलन पत्रा की परिसंपिा पक्ष की ओर संबन्िध्त परिसंपिा के मूल लागत से घटा कर दशार्या जाएगा। उदाहरण 1 मै.सिघानियां एण्ड ब्रदसर् ने ं1 अप्रैल, 2002 को 5ए00ए000 रु. का संयन्त्रा खरीदा एवं इसकी स्थापना पर 50ए000 रु. व्यय किये। संयन्त्रा के 10 वषर् के उपयोगी जीवन के पश्चात अवश्िाष्ट मूल्य का अनुमान 10ए000 रु. लगाया गया। वषर् 2002 के लिये रोजनामचा में प्रविष्िट करें एवं यह मानते हुए कि ”ास सीधी रेखा प(ति उधर पर लगाया गया है प्रथम तीन वषर् का संयन्त्रा खाता और ”ास खाता बनाएँ यदिः ;पद्ध लेखा पुस्तवेंफ प्रति वषर् 31 माचर् को बन्द की जाती हैं, एवं ;पपद्ध ”ास प्रभार के रुप में परिसंपिा खाते पर दशार्या जाता है। हल सिंघानिया एण्ड ब्रदसर् की पुस्तवेंफ रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.संनाम जमा राश्िाराश्िा रु रु2002 01 अप्रैल संयन्त्रा खाता नाम 5ए00ए000 बैंक खाते से 5ए00ए000 ;50ए000 रु. का सयंत्रा क्रय कियाद्ध 01 अप्रैल संयन्त्रा खाता नाम 50ए000 बैंक खाते से 50ए000 ;स्थापना पर किये गये व्ययद्ध 2003 31 माचर् ”ास खाता नाम 54ए000 सयंन्त्रा खाते से 54ए000 ;परिसंपिा पर ”ास लगायाद्ध 31 माचर् लाभ - हानि खाता नाम 54ए000 ”ास खाते से 54ए000 ;”ास की राश्िा लाभ - हानि खाते के नाम पक्ष में लिखी गइर्द्ध संयन्त्रा खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2002 01 अप्रैल 2003 01 अप्रैल 2004 01 अप्रैल 2005 01 अप्रेल बैंक बैंक ;स्थापना व्ययद्ध शेष आ/ला शेष आ/ला शेष आ/ला 5ए00ए000 50ए000 2003 31 माचर् 2004 01 अप्रैल 2005 31 माचर् ”ास शेष आ/ले ”ास शेष आ/ले ”ास शेष आ/ले 54ए000 4ए96ए000 5ए50ए000 5ए50ए000 4ए96ए000 54ए000 4ए42ए000 4ए96ए000 4ए96ए000 4ए42ए000 54ए000 3ए88ए000 4ए42ए000 4ए42ए000 3ए88ए000 ”ास खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2003 2003 31 माचर् संयन्त्रा 54ए000 31 माचर् लाभ - हानि 54ए000 2004 2004 31 माचर् संयन्त्रा 54ए000 31 माचर् लाभ - हानि 54ए000 2005 2005 31 माचर् संयन्त्रा 54ए000 31 माचर् लाभ - हानि 54ए000 कायर्कारी टिप्पणी ;1द्ध मूल लागत की गणना ;रु.द्ध क्रय लागत 5ए00ए000 जमा स्थापना लागत 50ए000 मूल लागत 5ए50ए000 अवश्िाष्ट मूल्य 10ए000 उपयोगी जीवनकाल 10 वषर् 5ए50ए000 रु. - 10ए000 रुत्रत्र 54ए000 रु.प्रति वष;2द्ध ”ास मान 10 उदाहरण 2 मै. मेहरा एण्ड संस ने 01 अक्टूबर, 2003 को एक मशीन क्रय की एवं उसके स्थापना पर 20ए000 रुप्राप्त किये। पफमर् प्रतिवषर् मूल लागत पर 10» की दर से ”ास लगा रही है। वषर् 2003 के लिये आवश्यक रोजनामचा प्रविष्िट कीजिए एवं प्रथम तीन वषर् के मशीन खाता एवं ”ास खाता बनाइए यदि दिया गया है किः ;पद्ध खाता बही प्रतिवषर् 31 माचर् बन्द की जाती है एवं ;पपद्ध ”ास प्रभार के रुप में परिसंपिा खाते में दशार्या जाता है। हल मै. मेहरा एण्ड संस की पुस्तवेेंफ रोजनामचा तिथ्िा विवरण ब.पृ.सं नाम जमा राश्िा राश्िा ;रु.द्ध;रु.द्ध 2003 20 अक्टूबर मशीन खाता नाम 1ए80ए000 बैंक खाते से 1ए80ए000 ;1ए80ए000 रु. में मशीन खरीदीद्ध 01 अक्टूबर मशीन खाता नाम 20ए000 बैंक खाते से 20ए000 ;स्थापना पर व्यय कियेद्ध 2004 31 माचर् ”ास खाता नाम 10ए000 मशीन खाते से 10ए000 ;मशीन पर ”ास लगायाद्ध 2005 31 माचर् लाभ एवं हानि खाता नाम 20ए000 ”ास खाते से 20ए000 ;”ास की राश्िा लाभ - हानि खाते के नाम पक्ष में लिखी गइर्द्ध 2006 31 माचर् ”ास खाता मशीन खाते से ;मशीन पर ”ास लगायाद्ध नाम 20ए000 20ए000 20ए000 31 माचर् लाभ - हानि खाता नाम ”ास खाते से ;”ास मान की राश्िा लाभ - हानि खाते के नाम पक्ष में लिखी गइर्।द्ध 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 31 माचर् ”ास खाता मशीन खाते से ;मशीन पर ”ास लागायाद्ध नाम 31 माचर् लाभ - हानि खाता नाम ”ास खाते से ;”ा्रस राश्िा लाभ - हानि खाते के नाम पक्ष में लिखी गइर्द्ध 20ए000 मशीन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2003 01 अक्टूबर 01 अक्टूबर 2004 01 अप्रैल 2005 01 अप्रैल बैंक बैंक ;स्थापना व्ययद्ध शेष आ/ला शेष आ/ला 1ए80ए000 20ए000 2004 31 माचर् 31 माचर् 2005 31 माचर् 2006 31 माचर् ”ास ;छः माह के लिएद्ध शेष आ/ले ”ास शेष आ/ले ”ास शेष आ/ले 10ए000 1ए90ए000 2ए00ए000 2ए00ए000 1ए90ए000 20ए000 1ए70ए000 1ए90ए000 20ए000 1ए50ए000 1ए70ए000 1ए90ए000 1ए70ए000 1ए70ए000 ”ास खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2004 31 माचर् मशीन 10ए000 2004 31 माचर् लाभ - हानि 10ए000 2005 10ए000 2005 10ए000 31 माचर् मशीन 20ए000 31 माचर् लाभ - हानि 20ए000 2006 20ए000 2006 20ए000 31 माचर् मशीन 20ए000 31 माचर् लाभ - हानि 20ए000 20ए000 20ए000 कायर्कारी टिप्पणी मशीन की मूल लागत की गणना ;रु.द्ध क्रय लागत 1ए80ए000 जोडि़येः स्थापना लागत 20ए000 मूल लागत 2ए00ए000 2ण् ”ास व्यय त्र 2ए00ए000 रु. पर 10» से प्रतिवषर् त्र 20ए000 रु. प्रतिवषर् 3ण् वषर् 2003 में ”ास केवल 6 महीने के लिये लगाया जायेगा क्योंकि क्रय तिथ्िा 01 अक्टूबर 2003 है अथार्त् वषर् 2003 - 04 में परिसम्पिा का केवल 6 महीने उपयोग किया गया है। 4ण् ”ास ;2003.04द्ध त्र 20ए000 रु.× 6 त्र10ए000 रु12 उदाहरण 3 प्रश्न 2 में दिये गये आंकड़ों के आधर पर 3 वषर् का मशीन खाता ”ास खाता एवं ”ास पर प्रावधान खाता बनाइए यदि पफमर् ”ास के लिए प्रावधन खाता रख रही है। 268 लेखाशास्त्रा - वित्तीय लेखांकन हल नाम मेहरा एण्ड संस की पुस्तवंेफ मशीन खाता जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2003 01 अक्टूबर 01 अक्टूबर 2004 01 अप्रैल 2005 01 अप्रैल बैंक बैंक ;स्थापना व्ययद्ध शेष आ/ला शेष आ/ला 1ए80ए000 20ए000 2004 31 माचर् 2005 31 माचर् 2006 31 माचर् शेष आ/ले शेष आ/ले शेष आ/ले 2ए00ए000 2ए00ए000 2ए00ए000 2ए00ए000 2ए00ए000 2ए00ए000 2ए00ए000 2ए00ए000 2ए00ए000 2ए00ए000 2ए00ए000 मशीन पर ”ास प्रावधन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2004 31 माचर् 2005 31 माचर् 2006 31 माचर् शेष आ/ले शेष आ/ले शेष आ/ले 10ए000 2004 31 माचर् 2004 01 अप्रैल 31 माचर् 2005 01 अप्रैल 2006 31 माचर् ”ास शेष आ/ला ”ास शेष आ/ला ”ास 10ए000 10ए000 10ए000 30ए000 10ए000 20ए000 30ए000 30ए000 50ए000 30ए000 20ए000 50ए000 50ए000 ”ास खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2004 31 माचर् 2005 31 माचर् 2006 31 माचर् ”ास पर प्रावधन ”ास पर प्रावधन ”ास पर प्रावधन 10ए000 2004 31 माचर् 2005 31 माचर् 2006 31 माचर् लाभ - हानि लाभ - हानि लाभ - हानि 10ए000 10ए000 10ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 20ए000 उदाहरण 4 मै. डालमिया टैक्सटाइल मिल्स ने 1 अप्रैल, 2001 को मै. आहुजा एण्ड संस से 2ए00ए000 रु. की मशीन उधर एवं 10ए000 रु. इसकी स्थापना पर व्यय किये। ”ास 10» वाष्िार्क की दर से क्रमागत आधर पर लगाना है। प्रथम तीन वषर् का मशीन खाता तैयार करें। लेखा पुस्तवेंफ प्रतिवषर् 31 माचर् को बन्द की जाती हैं। हल डालमिया टैक्स्टाइल मिल्स की पुस्तकें मशीन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2001 01 अप्रैल आहुजा एण्ड संस बैंक 2ए00ए000 10ए000 2002 31 माचर् ”ास शेष आ/ले 21ए000 1ए89ए000 2ए10ए000 2003 31 माचर् ”ास शेष आ/ले 2ए10ए000 18ए900 1ए70ए000 1ए89ए000 2002 01 अप्रैल शेष आ/ला 1ए89ए000 1ए89ए000 2003 01 अप्रैल शेष आ/ला 1ए70ए100 2004 31 माचर् ”ास शेष आ/ले 17ए010 1ए53ए090 1ए70ए100 1ए70ए100 2004 01 अप्रैल शेष आ/ला 1ए53ए090 कायर्कारी टिप्पणी 1ण् ”ास राश्िा की गणना घटाया वषर् 2002 के लिए ”ास रुअप्रैल 1ण् 2001 को मूल लागत 2ए10ए000 ;पण्मण् 2ए00ए000 ़ 10ए000द्ध घटाया वषर् 2002 के लिए ”ास ;21ए000द्ध1 31 माचर् 2002 अप्रैल 2002 के लिए अवक्षयित मूल्य 1ए89ए000 घटाया वषर् 2003 के लिए ”ास ;18ए900द्ध2 31 माचर् 2003 अप्रैल 2003 के लिए अवक्षयित मूल्य 1ए70ए100 घटाया वषर् 2003 के लिए ”ास ;17ए010द्ध3 वषर् 2004 के लिए अवक्षयित मूल्य 1ए53ए090 उदाहरण 5 मै. साहनी एन्टरप्राइिाश ने 01 जुलाइर्, 2001 को 40ए000 रु. की एक पि्रटिंग मशीन खरीदी एवं 5ए000 रु. इसकी ढुलाइर् एवं स्थापना पर व्यय किये। 01 जनवरी, 2003 को एक और मशीन 35ए000 रु. में खरीदी। 20» की दर से क्रमागत विध्ि के अनुसार ”ास लगाया गया है। वषर् समाप्ित 31 माचर्, 2002, 2003, 2004 एवं 2005 को पि्रटिंग मशीन खाता बनाइए। हल साहनी एंटरप्राइिाश की पुस्तवंेफ पि्रंटिग मशीन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2001 01 जुलाइर् बैंक बैंक 2002 40ए000 5ए000 31 माचर् ”ास शेष आ/ले 6ए7501 38ए250 45ए000 45ए000 2002 2003 01 अप्रैल शेष आ/ला 38ए250 31 माचर् ”ास 9ए4002 01 जनवरी बैंक 35ए000 शेष आ/ले 63ए850 73ए250 73ए250 2003 01 अप्रैल शेष आ/ला 63ए850 2004 31 माचर् ”ास शेष आ/ले 12ए7703 51ए080 63ए850 63ए850 2004 01 अप्रेल शेष आ/ला 51ए080 कायर्कारी टिप्प्णी रु1 जुलाइर्, 2001 को खरीदी गइर् मशीन की मूल लागत 45ए000 ; - द्ध 31 माचर् 2002 तक का ”ास ;20» की दर से 9 माह काद्ध ;6ए7501द्ध 38ण्250 ;़द्ध 1 जनवरी, 2003 को क्रय की गइर् नइर् मशीन की लागत 35ण्000 73ए250 ; - द्ध वषर् 2002 - 2003 का ”ास ;9ए400द्ध2 3 माह के लिए 38ए250 रु. और 35ए000 रु. पर 20» ”ासद्ध 31ण्3ण्2003 को अवक्षयित मूल्य 63ए850 ; - द्ध वषर् 2003 - 04 का ”ास ;63ए850 रु. का 20»द्ध ;12ए7703द्ध 31 माचर्, 2004 को अवक्षयित मूल्य 51ए080 स्वयं जाँचिए . 4 बसारिया कन्पफैक्सनर ने जुलाइर् 2003 को 10ए000 रु. में एक शीत भण्डार संयन्त्रा खरीदा। निम्न के आधर पर लगाइर् गइर् ”ास राश्िा की तुलना कीजिएः ;पद्ध मूल लागत पर 10» की दर से ;पपद्ध क्रमागत विध्ि पर 10» की दर से ;पपपद्ध मूल्य की गणना की गइर् राश्िा को ग्रापफ पर भी दशार्इए। 7ण्9 परिसम्पिा का निपटान/विक्रय परिसम्पिा का निपटान या तो ;कद्ध इसके स्वामान्य जीवन के अन्त में अथवा ;खद्ध इसके उपयोगी जीवन के मध्य प्रचलन के बाहर अथवा अन्य असामान्य कारण से हो सकता हैं। यदि इसका विक्रय इसके उपयोगी जीवनकाल के अन्त में किया जाता है, तो परिसम्पिा के विक्रयसे प्राप्त राश्िा को अवश्िाष्ट मूल्य मानकर परिसम्पिा खाते के जमा पक्ष में लिखा जायेगा तथा शेष को लाभ - हानि खाते में हस्तान्तरित किया जायेगा। इस सम्बन्ध् में निम्न रोजनामचा प्रविष्िटयां की जाएगीः ;पद्ध परिसम्पिा को अवशेष मानकर उसका विक्रय बैंक खातापरिसम्पिा खाते से नाम ;पपद्ध परिसम्पिा खाते के शेष का हस्तान्तरण ;कद्ध लाभ की स्िथति मेंपरिसम्पिा खाता नाम लाभ - हानि खाते से ;खद्ध हानि होने पर लाभ - हानि खातापरिसम्पिा खाते से नाम यदि ”ास के अभ्िालेखन के लिए ”ास पर प्रावधन संचित ”ास खाता खोला गया है तो उपरोक्तप्रविष्िटयों से पहले ”ास प्रावधन संचित ”ास खाते के शेष को परिसम्पिा खाते में निम्न रोजनामचा प्रविष्िट के अभ्िालेखन द्वारा हस्तान्तरित किया जायेगा ”ास पर प्रावधन खाता नाम परिसम्पिा खाते से उदाहरण के लिए आर. एस. लि. ने एक वाहन 4ए00ए000 रु. में क्रय किया इसका अवश्िाष्ट मूल्य अनुमानतः 40ए000 रु. माना गया। सीध्ी रेखा विध्ि से प्रतिवषर् लगाए जाने के लिए ”ास मूल्य राश्िा ज्ञात कीजिए। यह मानते हुए कि अन्त में यदि इसे 50ए000 रु. में बेचा जाता है चार वषर् का वाहन खाता बनाइए यदिः ;कद्ध”ास को प्रभार के रुप में परिसम्पति खाते में दशार्या गया है। ;खद्ध ”ास पर प्रावधन खाता खोला गया है। अब, आर. एस. लिमिटेड की निम्नलिख्िात प्रविष्िटयों को देखेंः ;कद्ध जब ”ास को प्रभार के रुप में परिसम्पति खाते में दशार्या गया है - आर.एस लिमिटेड का पुस्तकें वाहन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु प्रथम वषर् बैंक 4ए00ए000 वषर् के अन्त में ”ास 90ए000 शेष आ/ले 3ए10ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 प्प् वषर् प्प्प् वषर् प्ट वषर् शेष आ/ला शेष आ/ला शेष आ/ला लाभ - हानि ;वाहन के विक्रय पर लाभ ”ास प्रावधन 3ए10ए000 वषार्न्त वषार्न्त वषार्न्त ”ास शेष आ/ले ”ास शेष आ/ले ”ास बैंक 90ए000 2ए20ए000 3ए10ए000 3ए10ए000 2ए20ए000 90ए000 1ए30ए000 2ए20ए000 2ए20ए000 1ए30ए000 10ए000 90ए000 50ए000 1ए40ए000 1ए40ए000 ;खद्ध जब ”ास पर प्रावधन रखा गया है आर. एस. लिमिटेड की पुस्तवेंफ वाहन खाता नाम जमा तिथ्िा प् वषर् प्प् वषर् प्प्प् वषर् प्ट वषर् विवरण बैंक शेष आ/ला शेष आ/ला शेष आ/ला रो.पृ.संराश्िा रु4ए00ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 तिथ्िा वषार्न्त वषार्न्त वषार्न्त वषार्न्त विवरण शेष आ/ले शेष आ/ले शेष आ/ले शेष आ/ले रो.पृ.संराश्िा रु4ए00ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 4ए00ए000 ट वषर् शेष आ/ला लाभ हानि ;वाहन के विक्रय पर लाभद्ध 4ए00ए000 10ए000 वषार्न्त ”ास पर प्रावधन बैंक 3ए60ए000 50ए000 4ए10ए000 4ए10ए000 वाहन पर ”ास प्रावधन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु प् वषर् प्प् वषर् प्प्प् वषर् प्ट वषर् शेष आ/ला शेष आ/ला शेष आ/ला वाहन 90ए000 वषार्न्त वषार्न्त वषार्न्त वषर्ान्त ”ास शेष आ/ले ”ास शेष आ/ले ”ास शेष आ/ले ”ास 90ए000 90ए000 90ए000 1ए80ए000 90ए000 90ए000 1ए80ए000 1ए80ए000 2ए70ए000 1ए80ए000 90ए000 2ए70ए000 2ए70ए000 3ए60ए000 2ए70ए000 90ए000 3ए60ए000 3ए60ए000 7ण्9ण्1 परिसम्पिा निपटान खाते की उपयोगिता परिसम्पिा निपटान खाते की संरचना एक ही खाता शीषर् के अन्तर्गत परिसम्पिा की बिक्री से संबन्िध्त सभी लेन - देनों को पूणर् एवं स्पष्ट रूप से दिखाने के लिए की जाती है। संबंध्ित अन्य परिसम्पिाकी मूल लागत, परिसम्पिा पर आज की तिथ्िा तक संचित ”ास, परिसम्पिा का विक्रय मूल्य सम्पिा का शेष भाग जिसे उपयोग के लिए रख लिया है एवं विक्रय से लाभ अथवा हानि, होते हैं। इसे खाते के शेष लाभ हानि में हस्तान्ितरित कर दिया जाता है। इस प(ति को जब परिसम्पिा के किसी भाग को बेचा जाता है एवं ”ास पर प्रावधन खाता खुला हो तब अपनाया जाता है। इस प(ति के अन्तगतर्परिसम्पिा निपटान खाते के नाम से एक नया खाता खोला जाता है। बेची गइर्परिसम्पिा की मूल्य लागत को परिसम्पिा खाते के नाम पक्ष में एवं इस परिसम्पिा की निपटान तिथ्िा तक ”ास पर प्रावधन संचय खाते में स्िथत संचित ”ास राश्िा को परिसम्पिा निपटान खाते के जमा पक्ष मंेदशार्या जाता है। इस विक्रय से वसूली गइर् शु( राश्िा को इसी परिसम्पिा निपटान खाते के जमा में लिखा जाता ह।ैपरिसम्पिा निपटान खाते का शेष लाभ अथवा हानि को दशार्ता है जिसे लाभ - हानि खाते में हस्तान्तरित करदिया जाता है। इस प(ति का लाभ है कि यह सम्पिा निपटान से सम्ब( सभी लेन - देनों के एक ही स्थानपर पूरी तस्वीर प्रस्तुत करता है। परिसम्पिा निपटान खाते को बनाने के लिए जिन रोजनामचों में प्रविष्िटयों की अवश्यकता है वह इस प्रकार हैः 1ण् परिसम्पिा निपटान खाता नाम ;मूल परिसम्पिा का विक्रयद्धपरिसम्पिा खाते से 2ण् ”ास पर प्रावधन खाता नाम ;”ास पर प्रावधन खाते पर संचित शेषद्धपरिसम्पिा निपटान खाते से 3ण् बै नाम ;शु( विक्रय राश्िाद्धक खाता परिसम्पिा निपटान खाते सेपरिसम्पिा निपटान खाता अन्त में नाम अथवा जमा शेष दिखाएगा। खाते का नाम शेष विक्रय पर हानि दिखाता है तथा इसकी प्रविष्िट इस प्रकार होगीः लाभ - हानि खाता नाम ;विक्रय से होने वाली हानि की राश्िाद्धपरिसम्पिा निपटान खाते से खाते का जमा शेष निपटान पर लाभ दशार् रहा है एवं इसे निम्न रोजनामचा प्रविष्िट से बन्द किया जायेगापरिसम्पिा निपटान खाता नाम ;विक्रय पर लाभद्ध लाभ - हानि खाता उदाहरण के लिये, 31 माचर्, 2005 को करण एन्टरप्राइजिज की बहियों में निम्न शेष थे मशीनरी ;सकल मूल्यद्ध 6ए00ए000 रु”ास पर प्रावधन 2ए50ए000 रु1 नवम्बर, 2001 को 1ए00ए000 रु. में खरीदी गइर् एक मशीन जिस पर 60ए000 रु. संचित ”ास था, 1 अप्रैल, 2005 को 35ए000 रु. में बेचा। इस स्िथति में परिसंपिा निपटान इस प्रकार तैयार किया जाएगाः करण एंटरप्राइर्जिज मशीन निपटान खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2006 2006 01 अप्रैल मशीनरी 1ए00ए000 01 अप्रैल ”ास पर प्रावधन 60ए000 01 अप्रैल बैंक 35ए000 2007 31 माचर् लाभ - हानि ;विक्रय पर हानिद्ध 5ए0001 1ए00ए000 1ए00ए000 मशीनरी खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2005 2005 31 माचर् शेष आ/ ला 6ए00ए000 01 अप्रैल मशीन निपटान 1ए00ए000 2006 31 माचर् शेष आ/ले 5ए00ए000 6ए00ए000 6ए00ए000 कायर्कारी टिप्पणी 1ण्मशीन की बिक्री पर हानि की गणना रुबेची गइर् मशीनरी परिसम्पिा की मूल लागत 1ए00ए000 घटायाः संचित ”ास ;60ए000द्ध 40ए000 2ण्विक्रय मूल्य वसूल किया ;35ए000द्ध विक्रय पर हानि ;आथार्त् 40ए000 रु. - 35ए000 रु.द्ध 5ए000 उदाहरण 6 01 जनवरी, 2001 को खोसला ट्रांसपोटर् कम्पनी ने 20ए000 रु.प्रेँªति ट्रक की कीमत स पाच टक खरीदे। इन पर सीध्ी रेखा विध्ि से 10ः की दर से ”ास लगाया जा रहा है एवं ”ास प्रावधन खाता बनाया गया है। 1 जनवरी, 2002 को एक ट्रक को 15ए000 रु. में बेच दिया दिया गया। 01 जुलाइर्, 2003 को दूसरा ट्रक जिसे 2001 को 20ए000 रु. में खरीदा गया था 18ए000 रु. में बेच दिया गया। 1 अक्टूबर, 2003 को 30ए000 रु. की लागत का नया ट्रक खरीदा गया। यह मानते हुए कि पफमर् अपने खाते प्रति वषर् दिसंबर में बंद करती है, वषर् समाप्ित दिसंम्बर 2001, 2002, एवं 2003 को ट्रक खाता, ”ास पर प्रावधन एवं ट्रक निपटान खाता बनाइए। ”ास, प्रावधन एवं संचय 277 खोसला ट्रांसपोटर् कंपनी की पुस्तकें ट्रक निपटान खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं2002 1 जनवरी ट्रक ;ट्रक का क्रयद्ध 2003 1 जुलाइर् ट्रक 1 जुलाइर् लाभ - हानि ;विक्रय पर लाभद्ध राश्िा तिथ्िा विवरण रो.पृ.संराश्िा रुरु20ए000 2002 1 जनवरी ”ास पर प्रावधन 2ए000 1 जनवरी बैंक ;बिक्रीद्ध 15ए000 1 जनवरी लाभ - हानि 3ए000 ;विक्रय पर हानिद्ध 20ए000 20ए000 2003 20ए000 01 जुलाइर् ”ास पर प्रावधन 5ए000 3ए000 31 दिसंबर बैंक ;विक्रयद्ध 18ए000 23ए000 23ए000 ट्रक खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण 2001 01 जनवरी बैंक ;ट्रक का क्रयद्ध 2002 01 जनवरी शेष आ/ला 2003 01 जनवरी शेष आ/ला 01 अक्टूबर बैंक ;नया ट्रक खरीदाद्ध रो.पृ.संराश्िा रु1ए00ए000 1ए00ए000 1ए00ए000 1ए00ए000 80ए000 30ए000 1ए10ए000 तिथ्िा विवरण 2001 31 दिसंबर शेष आ/ले 2002 01 जनवरी ट्रक निपटान 31 दिसंबर शेष आ/ले 2003 01 जुलाइर् ट्रक निपटान शेष आ/ले रो.पृ.संराश्िा रु1ए00ए000 1ए00ए000 20ए000 80ए000 1ए00ए000 20ए000 9ए000 1ए10ए000 ट्रक पर ”ास प्रावधन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2001 31 दिसंबर शेष आ/ले 2001 10ए000 31 दिसंबर ”ास 10ए000 10ए000 10ए000 2002 2002 01 जनवरी ट्रक निपटान 2ए000 01जनवरी शेष आ/ला 10ए000 31 दिसंबर शेष आ/ले 16ए000 31 दिसंबर ”ास 8ए000 18ए000 18ए000 2003 01 जनवरी 31 दिसंबर ट्रक निपटान शेष आ/ ले 5ए000 18ए750 2003 01 जनवरी 31 दिसंबर शेष ”ास ;6ए000 रु.़ 1ए000 रु.़ 750 रु.द्ध 16ए000 7ए750 23ए750 23ए750 कायर्कारिणी टिप्पणी 1ण् मूल्य ”ास राश्िा की गणना रुवषर् 2001 1,00,000 पर 10» ;एक वषर् काद्ध 10ए0001 वषर् 2002 80ए000 पर 10» ;एक वषर् काद्ध 8ए0002 वषर् - 2003 60ए000 रु. पर 10» ;1 वषर् काद्ध 6ए000 20ए000 रु. पर 10» ;6 मास काद्ध 1ए000 30ए000 रु. पर 10» ;3 मास काद्ध 750 7ए7503 2ण् प्रथम ट्रक के विक्रय पर हानिः जनवरी 01, 2001 को मूल लागत 20ए000 घटाया 10» से ”ास ;2ए000द्ध जनवरी 01, 2002 को पुस्तक मूल्य 18ए000 विक्रय मूल्य ;15ए000द्ध प्रथम ट्रक के विक्रय पर हानि 3ए000 3ण् द्वितीय ट्रक के विक्रय पर लाभ जनवरी 1, 2001 को मूल लागत 20ए000 घटाया वषर् 2001 का 10» से ”ास ;2ए000द्ध घटाया वषर् 2002 का 10» से ”ास ;2ए000द्ध 10» से 6 मास का ”ास जुलाइर् 2ए000 तक ;1ए000द्ध जुलाइर् 2002 1ण्07ण्2003 को पुस्तक मूल्य 15ए000 विक्रय मूल्य 18ए000 विक्रय पर लाभ 3ए0005 उदाहरण 7 मैं. कनिष्का टेªडसर् में 31 अप्रैल, 2004 को निम्न शेष थे: पफनीर्चर खाता 50ए000 रु., पफनीर्चर पर ”ास पर प्रावधन 22ए000 रु.01 अक्टूबर, 2004 को पफनीर्चर का एक भाग जिसे 01 अप्रैल, 2000 को खरीदा था को 5ए000 रु. में बेच दिया। उसी तिथ्िा को 25ए000 रु. लागत का नया पफनीर्चर क्रय किया। ”ास 10ः वाष्िार्क दर से परिसम्पिा की मूललागत पर लगाया गया। विक्रय वाले वषर् में परिसम्पिा पर कोइर् ”ास नहीं लगाया गया। वषर् समाप्ित 31 माचर्, 2005 के लिये पफनीर्चर खाता, एवं ”ास पर प्रावधन खाता बनाइए। हल कनिष्का ट्रेडसर् की पुस्तवेंफ पफनीर्चर खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2004 1 अप्रैल शेष आ/ला बैंक 50ए000 25ए000 2004 1 अक्टूबर 1 अप्रैल बैंक ”ास पर प्रावधन लाभ - हानि ;विक्रय पर हानिद्ध शेष आ/ले 5ए000 8ए000 7ए0001 55ए000 75ए000 75ए000 पफनीर्चर पर ”ास प्रावधन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2004 2004 01 अक्टूबर पफनीर्चर 8ए000 01 अप्रैल शेष आ/ला 22ए000 ;विक्रय किये पफनीर्चर पर संचित ”ासद्ध 2005 2005 31 माचर् शेष आ/ले 18ए250 31 माचर् ”ास ;3ए000 रु 4ए2502 ़ 1ए250 रु.द्ध 26ए250 26ए250 कायर्कारी टिप्प्णी 1ण् विक्रय पर हानि की गणना रु01ण्10ण्2004 को पफनीर्चर की मूल लागत 20ए000 घटाया 01ण्04ण्2000 से 31ण्04ण्2004 तक का मूल लागत पर 10ः प्र. व की दर से चार वषर् का ”ास ;बिक्री वषर् में कोइर् ”ास राश्िा नहींद्ध ;8ए000द्ध को पफनीर्चर पर ”ासित माल 12ण्000 01ण्10ण्2004 5ए000 विक्रय मूल्य 7ए000 विक्रय पर हानि 2.”ास राश्िा की गणना वषर् 2004.05 का ”ास ;50ए000 रु. - 20ए000 रु.द्ध 30ए000 रु. पर 10ः की दर से 3ए000 25ए000 रु.10ः 6 मास का 1ए250 4ए2502 उदाहरण 8 उदाहरण 7 को हल करें - यदि पफमर् पफनीर्चर खाता एवं पफनीर्चर पर ”ास प्रावधन खाते के साथ पफनीर्चर निपटान खाता भी बना रही है। कनिष्का ट्रेडसर् पफनीर्चर खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2004 01 अप्रैल 01 अक्टूबर शेष आ/ला बैंक 50ए000 25ए000 75ए000 अप्रैल 2005 31 माचर् पफनीर्चर निपटान शेष आ/ले 20ए000 55ए000 75ए000 ”ास, प्रावधन एवं संचय 281 नाम तिथ्िा 2004 01 अक्टूबर 2005 31 माचर् विवरण पफनीर्चर निपटान शेष आ/ले रो.पृ.सं ”ास खाता राश्िा तिथ्िा रु2004 8ए000 01 अप्रैल 2005 18ए250 31 माचर् 26ए250 विवरण शेष आ/ला ”ास रो.पृ.सं जमा राश्िा रु22ए000 4ए250 26ए250 नाम तिथ्िा 2004 01 अक्टूबर विवरण पफनीर्चर रो.पृ.सं पफनीर्चर निपटान खाता राश्िा तिथ्िा विवरण रु2004 20ए000 01 अक्टूबर ”ास पर प्रावधन बैंक लाभ - हानि ;विक्रय पर हानिद्ध 20ए000 रो.पृ.सं जमा राश्िा रु8ए000 5ए000 7ण्000 20ए000 उदाहरण 9 1 जनवरी, 2000 को जैन एण्ड संस ने 2ए00ए000 रु. में एक पुराना संयन्त्रा खरीदा एवं 10ए000 रुइसकी काया कल्प पर व्यय किये। 50ए000 रु. इसके भाडे़ एवं स्थापना पर व्यय किये। 20ः वाष्िार्क से क्रमागत विध्ि से ”ास लगाने का निणर्य लिया गया। 31 जुलाइर्, 2004 को संयन्त्रा में आग लग गइर् तथा बीमा कंपनी ने 50ए000 रु. का दावा स्वीकार किया। यह मानते हुए कि पफमर् की पुस्तकें प्रत्येक वषर् 31 दिसंबर को बंद की जाती हैं सयंत्रा खाता, ”ास पर प्रावधन खाता और सयंत्रा निपटान खाता बनाऐं। जैन एण्ड संस की पुस्तकें संयन्त्रा खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2001 01 जनवरी बैंक 2ए15ए000 2001 31 दिसंबर शेष आ/ले 2ए15ए000 2ए15ए000 2ए15ए000 2002 1 जनवरी 2003 1 जनवरी 2004 1 जनवरी शेष आ/ला शेष आ/ला शेष आ/ला 2ए15ए000 2002 31 दिसंबर 2003 31 दिसंबर2004 3 जुलाइर् शेष आ/ले शेष आ/ले संयन्त्रा निपटान 2ए15ए000 2ए15ए000 2ए15ए000 2ए15ए000 2ए15ए000 2ए15ए000 2ए15ए000 2ए15ए000 2ए15ए000 2ए15ए000 2ए15ए000 संयन्त्रा पर ”ास प्रावधन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2001 31 दिसंबर 2002 01 जनवरी 2003 31 दिसंबर 2004 31 जुलाइर् शेष आ/ले शेष आ/ले शेष आ/ले संयंत्रा निपटान 43ए000 2001 31 दिसंबर 2002 01जनवरी 2003 01जनवरी 31दिसंबर 2004 01 जुलाइर् 31 जुलाइर् ”ास शेष आ/ला ”ास शेष आ/ला ”ास शेष आ/ला ”ास 43ए000 43ए000 43ए000 77ए400 43ए000 34ए4002 77ए400 77ए400 1ए04ए920 77ए400 27ए5203 1ए04ए920 1ए04ए920 1ए17ए763 77ए400 12ए8434 1ए17ए763 1ए77ए763 संयन्त्रा निपटान खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2004 31 जुलाइर् संयन्त्रा 2ए15ए000 2004 31 जुलाइर् ”ास पर प्रावधन बीमा कंपनी लाभ - हानि 1ए77ए763 50ए000 47ए2375 2ए15ए000 2ए15ए000 कायर्कारी टिप्पणी 1ण् ”ास राश्िा की गणना रुमूल लागत 01ण्01ण्2001 2ए15ए000 ;2ए00ए000 रु.़ 10ए000 रु.़ 5ए000 रु.द्ध वषर् 2001 के लिए ”ास 2ए15ए000 रु.20» 43ए0001 1ए72ए000 वषर् 2002 के लिए ”ास;/ 20», 1ए72ए000 परद्ध 34ए4002 वषर् 2003 के लिए ”ास 1ए37ए600 / 20» 1ए10ए080 रु. पर 27ए5203 1ए10ए080 ”ास 31ण्07ण्04 तक 12ए8434 ;/ 20» 1ए10ए080 रु. परद्ध 97ए237 बीमा दावा ;50ए000द्ध निपटान पर हानि 47ए2375 7ण्10 वतर्मान परिसम्पिा में बढ़ोत्तरी एवं विस्तार वतर्मान परिसम्पिा को परिचालन के योग्य बनाने के लिए कुछ वृि अथवा विस्तार की आवश्यकता होतीहै। यह वृि विस्तार परिसम्पिा का सम्पूणर् भाग बन भी सकता है और नहीं भी। इस वृि विस्तार परव्यय की गइर् राश्िा को पंजीकृत कर परिसंपिा के जीवन के दौरान अपलिख्िात किया जाता है। यहाँ यह बताना आवश्यक है कि इस प्रकार से व्यय की गइर् राश्िा मरम्मत एवं रखरखाव खचोर्ं से अतिरिक्त होती है। लेखांकन मानक√ 6 ;संशोध्ितद्ध में दिया गया है कि - 1ण् किसी भी परिसम्पिा में वृि अथवा विस्तार जो उसका सम्पूणर् भाग बन चुकी है, के उसपरिसम्पिा के उपयोगी जीवन काल में ”ास लगाकर समाप्त कर देना चाहिए। 2ण् इस वृि अथवा विस्तार पर ”ास उसी दर पर लगाया जा सकता है जिस दर पर विद्यमानपरिसम्पिा पर लगाया जा रहा हैै। 3ण् जहाँ वृि अथवा विस्तार का स्वतन्त्रा अस्ितत्व होता है एवं जिसे विद्यमान परिसम्पिा केनिपटान के पश्चात उपयोग में लाया जा सकता है वहाँ ऐसी परिसम्पिा पर स्वतन्त्रा रूप से इसके अपने उपयोगी जीवन पर ”ास लगाना चाहिए। उदाहरण 10 मै. डिजीटल स्टूडियो ने 1 अप्रैल, 2000 को 8ए00ए000 रु. में एक मशीन खरीदी। इसकी मूल लागत पर 20ः की दर से सीध्ी रेखा विध्ि से लगाया गया। 1 अप्रैल, 2002 की 80ए000 रु. की लागत से इस मशीन की कायर्क्षमता बढ़ाने के लिए ठोस परिवतर्न किये गये। इस राश्िा पर 20ः से सीध्ी रेखा विध्ि से ”ास लगाना है। वषर् 2003.04 में समान्य रखरखाव व्यय 2ए000 रु. किये गये। वषर् समाप्ित 31 माचर् 2003 के लेखा वषर् के लिए मशीन खाता, मशीन पर ”ास प्रावधन खाता बनाएँ। साथ ही लाभ - हानि खाते नाम में की जाने वाली राश्िा को ज्ञात करें। हल नाम तिथ्िा 2002 01 अप्रैल विवरण शेष आ/ला बैंक रो.पृ.सं मशीन खाता राश्िा तिथ्िा रु2003 8ए00ए000 31 माचर् 80ए000 8ए80ए000 विवरण शेष आ/ले रो.पृ.सं जमा राश्िा रु8ए80ए000 8ए80ए000 मशीन पर ”ास प्रावधन खाता तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2003 31 माचर् शेष आ/ले 4ए96ए000 2002 01 अप्रैल शेष आ/ले 3ए20ए0001 4ए96ए000 4ए96ए000 2003 31 माचर् ”ास 3ए20ए000 1ए76ए000 4ए96ए000 कायर्कारी टिप्पणी 1ण् रूपान्तर लागत का पूँजीकरण किया गया है लेकिन साधरण मरम्मत खचो± को आगम व्यय माना गया है। 2ण् 01ण् 04ण्2002 को ”ास पर प्रावधन खाते के शेष की गणना 01ण्01ण्2000 को मूल लागत 8ण्00ण्000 रुवषर् 2000.01 व 2001.02 के लिए ”ास राश्िा 3ए20ए000 रु;8ए00ए000 रु. पर 20» ”ासद्ध 3ण् 2002.03 के लिए ”ास की गणना इस प्रकार से की गइर् हैः 8ए00ए000 रु. का 20» 1ए60ए000 रु80ए000 रु. का 20» 16ए000 रु2002.03 का कुल मूल्य ”ास 1ए76ए0002 4ण् लाभ हानि खाते में नाम की जानेवाली राश्िा हृास 1ए76ए000 रुमरम्मत एवं रखरखाव 2ए000 रुउदाहरण 11 01 अपै्रेल, 2001 को मै. निश्िात पि्रटिंग प्रेस ने एक पि्रंटिंग मशीन खरीदी। ”ास मूल लागत पर 20» से सीध्ी रेखा विध्ि से लगाया गया। 01 अप्रैल, 2003 को मशीन की तकनीकी योग्यता को बढ़ाने के लिए इसके रूपान्तर पर 70ए000 रु. व्यय किए। वैसे इस रूपान्तर से मशीन के उपयोगी जीवन में वृि की संभावना नहीं है। अध्िक घ्िासावट के कारण मशीन के एक महत्त्वपूणर् घटक को बदल दिया गया इस पर 20ए000 रु. खचर् आया। 2003.04 में 5ण्000 रु. साधरण रखरखाव व व्यय 5ए000 रु. थे। लेखा वषर् 31 माचर्, 2004 की समाप्ित के लिए मशीन खाता, ”ास पर प्रावधन खाता तैयार करें। साथ ही लाभ - हानि खाते के नाम पक्ष में लिखी जाने वाली राश्िा को ज्ञात करें। हल मशीन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2003 1 अप्रैल शेष आ/ला बैंक बैंक 2004 6ए80ए000 70ए000 20ए000 31 माचर् शेष आ/ले 7ए70ए000 7ए70ए000 7ए70ए000 लेखाशास्त्रा - वित्तीय लेखांकन मशीन पर ”ास प्रावधन खाता नाम जमा तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु तिथ्िा विवरण रो.पृ.सं राश्िा रु 2003 2003 31 माचर् शेष आ/ले 4ए38ए000 1 अप्रैल शेष आ/ला 2ए72ए0001 2004 31 माचर् ”ास 1ए66ए0002 4ए38ए000 4ए38ए000 कायर्कारी टिप्पणी 1ण्रूपान्तर की लागत एवं मशीन के घटक को बदलने की लागत का पूँजीकरण कर लिया गया लेकिन समान्य मरम्मत व्यय को आगम व्यय माना गया। 2ण् 01ण्04ण्2003 को ”ास पर प्रावधन खाते के शेष की गणना 01ण्04ण्2001 की मूल लागत 6ए80ए000 रु2001.02 एवं 2002.03 का ”ास 2ए72ए000 रु⎡ 20 ⎤2 ×6ए80ए000⎢⎣100 ⎥⎦ 3ण् 2003.04 के लिए ”ास की गणना इस प्रकार से की गइर् हैः 6ए80ए000 रु. का 20» 1ए36ए000 रु90ए000 रु. का 1ध्3 30ए000 रु2003.04 का कुल ”ास 1ए66ए000 रु4ण् लाभ - हानि खाते के नाम पक्ष में राश्िा ”ास 1ए66ए000 रुमरम्मत एवं रखरखाव 5ए000 रुअतिरिक्त मशीन के भाग पर ”ास की गणना भाग 2 प्रावधन एवं संचय 7ण्11 प्रावधन कुछ खचेर्, हानियाँ र्ेर्े ं क्योंकि यह व्यय अभी कियेे नहीं गये ंैवतमान लखा वष ससम्बन्िध्त होते हैह इसलिए इनकी राश्िा सुनिश्िचत नहीं है। सही शु( लाभ निकालने के लिए ऐसी मदों के लिए प्रावधन करना आवश्यक है। उदाहरण के लिए एक व्यापारी को जो उधर विक्रय करता है उसे पता है कि चालू वषर् के कुछ देनदार या तो कुछ भी भुगतान नहीं करेंगे या आंश्िाक भुगतान करेंगे। सतकर्वता एवं रूढि़ादिता वेेुंे ूफ संकल्पना वफ अनसार सही एव उचित लाभ - हानि की गणना वफ लिए। इसीलिए व्यापारी देनदारों से वसली के समय संभावित हानि से बचाव के लिए संदिग्ध् ट्टण के लिए प्रावधन करता है। इसी प्रकार से स्थाइर्परिसम्पिायों की संभावित मरम्मत एवं नवीनीकरण के लिए प्रावधन कर सकता है। प्रावधनों के उदाहरण इस प्रकार हंैः 1ण् ”ास के लिए प्रावधन 2ण् डूबत एवं संदिग्ध् ट्टण के लिए प्रावधन 3ण् कर के लिए प्रावधन 4ण् देनदारों पर छूट के लिए प्रावधन 5ण्मरम्मत एवं नवीनीकरण के लिए प्रावधन यह ध्यान रहे कि व्यय एवं हानि के लिए प्रावधन की राश्िा वतर्मान अवध्ि की आगम पर खचार् है। प्रावधन सृजन व्यय के मिलान को सुनिश्िचत करता है जिससे सही लाभ निकल आता है। लाभ - हानि खाते के नाम पक्ष में लिखने से प्रावधन का सृजन होता है। तुलन - पत्रा में प्रावधन की राश्िा को निम्न से किसी तरीके से देखा जा सकता हैः 1ण् परिसम्पिा की ओर सम्बन्िध्त परिसम्पिा में से घटाकर । उदाहरण के लिए संदिग्ध् ट्टणों के लिए प्रावधान को देनदारों की राश्िा में से घटाया जाता है तथा ”ास पर प्रावधन को सम्बन्िधतस्थायी परिसम्पिा में से घटाकर दशार्या जाता है। 2ण् तुलन - पत्रा में चालू देयताओं के साथ उदाहरण के लिए करों के लिए प्रावधान, मरम्मत एवं नवीनीकरण के लिए प्रावधन। 7ण्11ण्1 प्रावधनों का लेखांकन सभी प्रकार के प्रावधनों का लेखांकन लगभग एक जैसा होता है। इसी लिए यहां संदिग्ध् ट्टणों के लिए प्रावधन के लेखांकन व्यवहार को उदाहरण स्वरूप समझाया गया है। जैसा कि पहले बताया जा चुका है जब भी व्यावसायिक लेन - देन उधर किया जाता है तो देनदार खाताबनाया जाता है तथा इसके शेष को तुलन - पत्रा की परिसम्पिा की ओर दशार्या जाता है। यह देनदार तीन प्रकार के हो सकते हैं 1ण् सही देनदार वह होते हैं जिनसे वसूली निश्िचत है। 2ण् डूबत ट्टण वह देनदार हैं जिनसे वसूली की कोइर् सम्भावना नहीं है तथा हानि की राश्िा जमा में लिखी जाएगी। 3ण् संदिग्ध् ट्टण वह देनदार होते हैं जो भुगतान तो करेंगे लेकिन उनसे पूरी राश्िा की वसूली की आशा नहीं है। व्यवसाय के अनुभव से पता लगता है ऐसे देनदारों का कुछ प्रतिशतभुगतान नहीं करेगा इसलिए इन्हें संदिग्ध् ट्टण माना जाएगा। यदि संदिग्ध् देनदार भुगतान नहीं करते हैं तो सही लाभ अथवा हानि निकालने के लिए ऐसी संभावित हानि के लिएयह एक सामान्य व्यवहार है ;एवं आवश्यक भीद्ध कि संदिग्ध् ट्टणों के लिए आवश्यक प्रावधन किया जाए। संदिग्ध् ट्टणों के लिए प्रावधन कुल देनदारों पर सभी डूबत ट्टण, जिनकी पहले से ही जानकारी है, को घटाकर एक निश्िचत प्रतिशत से किया जाता है।संदिग्ध् ट्टणों के लिए प्रावधान को डूबत एवं संदिग्ध् ट्टणों के लिए प्रावधन भी कहते हैं। इस प्रकार के प्रावधन के सृजन के लिए प्रावधन की राश्िा लाभ हानि खाते के नामऔर संदिग्ध् ट्टणों के लिए प्रावधन खाते के जमा में लिखी जाती है। संदिग्ध् ट्टणों के प्रावधन के लिए निम्न रोजनामचा प्रविष्िट की जाएगीः लाभ हानि खाता नाम ;प्रावधन की राश्िा सेद्ध संदिग्ध् ट्टण खाते से इसे निम्न उदाहरण की सहायता से समझा जा सकता हैः 31 माचर्, 2005 को तेहन बा्रदसर् की लेखा पुस्तकों से लिए तलपट पर ध्यान दें तिथ्िा खाते के नाम नाम खाता ;रु.द्ध जमा खाता ;रु.द्ध कुल देनदार 68ए000 अतारिक्त सूचना ऽ डूबत ट्टण जिनका लेखा नहीं किया गया 8ए000 रु.। ऽ देनदारों पर 10ः से प्रावधन करना है। संदिग्ध् ट्टणों के प्रावधन के लिए निम्न रोजनामचा प्रविष्िट की जाएंगीः रोजनामचा तिथ्िा 2005 विवरण खा.पृ नाम राश्िा ;रु.द्ध जमा राश्िा ;रु.द्ध 31 माचर् अशोध्य ट्टण खाता नाम कुल देनदार खाते से;अशोध्य ट्टण घटाए गयेद्ध 8ए000 8ए000 6ए000 8ए000 8ए000 6ए000 31 माचर् लाभ हानि खाता नाम डूबत ट्टण खाते से;अशोध्य ट्टण लाभ हानि खाते के नाम लिखे गयेद्ध 31 माचर् लाभ हानि खाता नाम संदिग्ध् ट्टण के लिए प्रावधन खाते से;संदिग्ध् ट्टणों के लिए प्रावधन का सृजनद्ध कायर्कारी टिप्पणी कुल देनादारों पर 10ः से संदिग्ध् ट्टणों के लिए प्रावधन अथार्त् ;68ए000 रु. - 8ए000 रु.द्ध त्र 60ए000 रु7ण्12 संचय लाभ वेफ एक भाग को अलग रखकर व्यवसाय में संचित किया जा सकता है। इससे विकास एवं विस्तार जैसी भविष्य की आवश्यकताओं की पूतिर् अथवा कमर्चारियों की क्षति पूतिर् जैसी भविष्य की आकस्िमक आवश्यकताओं की पूतिर् की जा सकती है। संचय सृजन से यह संभव है। प्रावधन भ्िान्न व्यवसाय कीवित्तीय स्िथति को सुदृढ़ करने के लिए संचय लाभ का समायोजन है। संचय लाभ पर व्यय भार नहीं है। इसका उपयोग भविष्य में किसी देयता के भुगतान या सम्भावित हानि की पूतिर् के लिए नहीं किया जाता है। संचय के रूप में लाभ को रोक लेने से व्यवसाय के स्वामियों में वितरण के लिए राश्िा कम रह जाएगी। इसे तुलन - पत्रा के देयता पक्ष की ओर पँूजी की मद के पश्चात् संचय एवं आध्िक्य शीषर्क में दिखाया जाता है। संचय के उदाहरण इस प्रकार हैंः 1ण् सामान्य संचय 2ण् कमर्चारी क्षति पूरक कोष 3ण् निवेश परिवतर्न कोष 4ण् पूँजी संचय 5ण् लाभांश समानीकरण 6ण् ट्टण - पत्रों के शोध्न के लिए संचय 7ण्12ण्1 संचय एवं प्रावधन में अन्तर संचय एवं प्रावधन मंे अन्तर के बिन्दुओं को नीचे समझाया गया हैः 1ण् मूल भूत प्रकृतिः प्रावधन लाभ पर प्रभार है जबकि संचय लाभ का समायोजन है। इसीलिये लाभ हानि खाते के नाम पक्ष में सभी प्रावधन को लिखे बिना लाभ की गणना नही की जा सकती जबकि संचय का सृजन लाभ ज्ञात करने के पश्चात किया जाता है। 2ण् उद्देश्यः चालू लेखा अवध्ि के लिए दी गइर् देनदारी या खचोर्ं के लिए प्रावधन किया जाताहै जिनकी राश्िा निश्िचत नहीं है। जबकि संचय का सृजन व्यवसाय की वित्तीय स्िथति को सुदृढ़ करने के लिए किया जाता है। कुछ संचय कानूनन अनिवायर् होते हैं। 3ण् तुलन - पत्रा में प्रस्तुतिः प्रावधन या तो ;पद्ध उस परिसम्पिा में से जिसके लिए इसका सृजन किया गया है घटाकर अथवा ;पपद्ध चालू देयताओं के साथ देयता पक्ष में दिखाया जाता है, जबकि संचय को पूँजी के पश्चात देयता पक्ष की ओर दिखाया जाता है। 4ण् कर योग्य लाभों पर प्रभावः प्रावधन को कर योग्य लाभ की गणना से पहले घटा लिया जाता है। इसीलिए इससे कर योग्य लाभ कम हो जाता है। संचय का कर के पश्चात के लाभ में से सृजन किया जाता है इसलिए इसका कर योग्य लाभ पर कोइर् प्रभाव नहीं पड़ता। 5ण् बाध्यताः सतकर्ता अथवा रूढि़वादिता की संकल्पना के अनुसार सही एवं उचित लाभ अथवा हानि के निधर्रण के लिए प्रावधन करना आवश्यक है, प्रावधन लाभ न होने की स्िथति में भी बनाया जाता है। जबकि संचय का सृजन प्रबन्ध्कों की इच्छा पर निभर्र करता है। कुछमामलों में कानून ने विश्िाष्ट संचय के लिए नियम बनाए हैं जैसे ट्टण पत्रा शोध्न संचय। संचय का सृजन लाभ न होने पर नहीं हो सकता। 6ण् लाभांश के भुगतान के लिए उपयोगः प्रावधन को लाभंाश के रूप में नहीं बाँटा जा सकता जबकि संचय को लाभांश के लिए प्रयोग किया जा सकता है। अन्तर का आधर प्रावधन संचय 1ण् मूल प्रकृति लाभ पर प्रभार लाभ का समायोजन 2ण् उद्देश्य इसका सृजन चालू लेखा वषर् की पहले से ही दी गइर् देनदारी अथवा खचर् के लिए किया जाता है लेकिन जिसकी राश्िा निश्िचत न हो। इसको व्यवसाय की वित्तीय स्िथति को सुदृढ़ करने के लिए बनाया जाता है। 3ण् कर योग्य लाभ पर प्रभाव इससे कर योग्य लाभ कम हो जाता है इसका कर योग्य लाभ पर कोइर् प्रभाव नहीं पड़ता है 4ण् तुलन पत्रा में प्रस्तुतिकरण इसे ;पद्ध परिसम्पिा की ओर उस मद मे से घटा कर दिखाया जाता है जिसके लिए इसका सृजन किया गया है ;पपद्ध चालू देनदारी के साथ देयता पक्ष की ओर दिखाया जाता है। इसे देयता पक्ष की ओर पूँजी के पश्चात दिखाया जाता है। 5ण् अनिवायर्ता प्रावधन की व्यवस्था सतकर्ता एवं रूढ़ीवादिता की संकल्पना के अनूरूप सही एवं उचित लाभ एवं हानि ज्ञात करने के लिए आवश्यक है। लाभ न होने पर भी इसकी व्यवस्था की जाती है। समान्यतः संचय का प्रावधन प्रबन्ध् की इच्छा पर निभर्र करता है। लाभ न होने पर संचय करना संभव नहीं है। वैसे कुछ मामलों में कानून ने विश्िाष्ट संचय जैसे ट्टण - पत्रा शोध्न संचय अनिवायर् कर दिया है। 6ण् लाभांश के भुगतान के लिए उपयोग इसका उपयोग लाभांश के लिए नहीं किया जा सकता इसका उपयोग लाभांश वितरण के लिए किया जा सकता है। चित्रा 7ण्4ः प्रावधन एवं संचय में अंतर 7ण्12ण्2 संचय के प्रकार व्यवसाय के लाभ को रोक कर संचय का निमार्ण या तो सामान्य या पिफर विश्िाष्ट उद्देश्य के लिए हो सकता है। ;1द्ध सामान्य सचयः जब संचय निमार्ण का कोइर् निश्िचत उद्देश्य नहीं होता है तो इसे सामान्य संचयंकहते हैं। इसे स्वतन्त्रा संचय भी कहते हैं क्योंकि प्रबन्ध्क इसे स्वतन्त्रा संचय से किसी भी उद्देश्यके लिए उपयोग कर सकते हैं। सामान्य संचय व्यवसाय की वित्तीय स्िथति को सुदृढ़ करते हैं। ;2द्ध विश्िाष्ट संचयः विश्िाष्ट संचय वह संचय होते हैं जिनका निमार्ण एक विश्िाष्ट उद्देश्य के लिए किया जाता है एवं इसका उपयोग इन्हीं उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। विश्िाष्ट संचय के कुछ उदाहरण नीचे दिये हैंः ;पद्ध लाभांश समानीकरण संचयः इस संचय निमार्ण लाभांश की दर को स्िथर रखने या समान रखने के लिए किया जाता है। लाभ के अध्िक होने वाले वषर् में राश्िा को लाभांश समानीकरण संचय में हस्तान्तरित कर दिया जाता है। यदि किसी वषर् में लाभ कम हुआ है तो इस संचय की हुइर् राश्िा को लाभांश की दर को समान रखने के लिए उपयोग में लाया जाता है। ;पपद्ध कमर्चारी क्षतिपूतिर् कोषः इसका निमार्ण दुघर्टना आदि के कारण कमर्चारियों के दावों के लिए प्रावधन करने के लिए किया जाता है। ;पपपद्ध विनियोग परिवतर्नशील कोषः इसका निमार्ण बाजार में उतार चढ़ाव के कारण विनियोग की कीमत में कमी को पूतिर् के लिए किया जाता है। ;पअद्ध ट्टण शोध्न संचयः इस संचय का सृजन ट्टण पत्रों के शोध्न के लिए कोष को व्यवस्िथत करने के लिए किया जाता है। संचय को, लाभ की प्रकृति के अनुसार जिसमें से इसका सृजन किया गया है, को आयगत संचय एवं पूँजीगत संचय में वगीर्कृत किया गया है। ;कद्ध आयगत संचयः आयगत संचय में उन आयगत लाभों में सृजन किया जाता है जो व्यवसाय की सामान्य संचालन ियायों का परिणाम होते हैं अन्यथा जो लाभांश वितरण के लिए स्वतंत्रा रूप से उपलब्ध् हैं। आयगत संचय के उदाहरण हंैः ऽ सामान्य संचय ऽ कमर्चारी क्षतिपूतिर् कोष ऽ निवेश परिवतर्न कोष ऽ लाभांश समानीकरण संचय ऽ ट्टण पत्रा शोध्न संचय का निमार्ण ;खद्ध पूँजीगत संचयः पूँजीगत संचय, पूँजीगत लाभों में से किया जाता है। यह लाभ सामान्य संचयलन गतिविध्ियों के कारण नहीं होते हैं। यदि कम्पनी है तो इस संचय का उपयोग पूँजीगत हानियों को समाप्त करने अथवा बोनस अंशों के निगर्मन के लिए किया जाता है। पूँजीगत लाभ जिन्हें पूँजीगत संचय माना जाता है चाहे उन्हें इस रूप में हस्तान्तरित किया गया हो अथवा नहीं, के उदाहरण हैंः ऽ अंश अथवा ट्टणपत्रों के जारी करने पर पि्रमियम ऽ स्थाइर् परिसम्पिा के विक्रय पर लाभ ऽ ट्टण पत्रों के शोध्न पर लाभ ऽ स्थाइर् परिसम्पिा एवं देयताओं के पूनर्मूल्यांकन पर लाभ, समामेलन से पूवर् लाभ ऽ जब्त किये गये अंशों के पुनः निगर्मन पर लाभ 7ण्12ण्3 आयगत एवं पूँजीगत संचय में अन्तर आयगत एवं पूँजीगत संचयों में निम्न के आधर पर अन्तर किया जा सकता हैः 1ण् सृजन का ड्डोतः आयगत संचय का निमर्ाण उन आयगत लाभों में से किया जाता है जो व्यवसाय के सामान्य संचालन गतिविध्ियों के कारण होते हैं अन्यथा जो लाभांश के लिये उपलब्ध् है। दूसरी ओर पूँजीगत संचय का निमार्ण पूँजीगत लाभ में से होता है। पूँजीगत लाभ व्यवसाय की सामान्य संचालन ियायों से पैदा नहीं होते एवं यह लाभांश के रूप में आबंटन के लिये उपलब्ध् नहीं होते। लेकिन आयगत लाभ में से भी पूंजीगत संचय का सृजन किया जा सकता है। 2ण् उद्देश्यः आयगत संचय का निमार्ण अप्रत्याश्िात सम्भाव्यों के लिए, या पिफर किसी निश्िचत उद्देश्य के लिए किया जाता है। जबकि पूँजीगत संचय कानूनी औपचारिकताओं लेखांकन व्यावहारिकता के पालन के लिए किया जाता है। 3ण् उपयोग: विश्िाष्ट आयगत संचय को केवल निधर्रित उद्देश्य के लिए ही उपयोग में लाया जा सकता है। जबकि सामान्य संचय को लाभांश वितरण सहित किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। जबकि पूँजीगत संचय को कानून में निधर्रित विश्िाष्ट उद्देश्य के लिए ही काम में लाया जा सकता है। जैेसे कि पूँजीगत हानि को लेखा पुस्तकों में से समाप्त करने के लिए अथवा बोनस अंशों के निगर्मन के लिए। अन्तर का आधर आयगत संचय पूंजीगत संचय 1ण् सृजन का स्रोत इसका सृजन आयगत लाभ में से किया जाता है जो कि व्यवसाय की सामान्य परिचाल ियायों से पैदा होता है अन्यथा जो लाभांश वितरण के लिए उपलब्ध् रहता है। इसका निमार्ण मूलतः पूँजीगत लाभ में से होता है जो व्यवसाय के सामान्य परिचालन का परिणाम नहीं होते और ना ही उनका लाभांश वितरण के लिए उपयोग किया जा सकता है। यद्यपि आयगत लाभों को भी इसके लिये प्रयुक्त किया जा सकता है। 2ण् उद्देश्य इसका सृजन वित्तीय स्िथति को सुदृढ़ करने, अप्रत्याश्िात सम्भाव्यों का भुगतान करने या पिफर विश्िाष्ट उद्देश्य के लिए किया जाता है। इसका सृजन कानूनी औपचारिकताओं अथवा लेखांकन रीतियों को निभाने के लिए किया जाता है। 3ण् उपयोग विश्िाष्ट आयगत संचय को उद्देश्य के लिए ही उपयोग किया जा सकता है जबकि सामान्य संचय का लाभांश वितरण सहित किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसे प्रचलित कानून में निधर्रित उद्देश्य की पूतिर् के लिए उपयोग किया जासकता है। जैसे पूँजीगत कृतियों को लेखा पुस्तकों में से समाप्त करना या बोनस अंश जारी करना प्रदशर् 7ण्5: पूँजीगत संचय एवं आयगत संचय में अन्तर 7ण्12 संचय का महत्व एक व्यावसायिक पफमर् के लिए भविष्य में होने वाले अप्रत्याश्िात खचेर् एवं हानियों से बचाव के लिए कोइर् भी उचित प्रणाली स्थापित करना उचित रहेगा। कुछ मामलों में उसके लिए अध्िक उचित रहेगाकि व्यवसाय के स्वामी लाभ में से कम भाग को निकाले जिससे कि कुछ महत्त्वपूणर् आवश्यकताओं की पूतिर् हेतु व्यवसाय की साध्नों को बचाकर रखा जा सके। ऐसी किसी आवश्यकता का एक उदाहरण व्यवसाय परिचालन के पैमाने को विस्तार की आवश्यकता है। व्यावसायिक एवं लेखांकन में संचय की आवश्यकता का औचित्य सि( करती है। इस प्रकार से जो राश्िा अलग से रखी जायेगी वह निम्न उद्देश्यों के लिए होगीः ऽ भविष्य में होने वाली किसी भी आकस्िमक आवश्यकता के लिए। ऽ व्यवसाय की साधरण वििाय स्थति को सुदृढ़ करने के लिए। ऽ ट्टण - पत्रों जैसी दीघर् अवध्ि देयताओं के शोध्न के लिए। 7ण्13 गुप्त संचय गुप्त संचय वह संचय होता है जिसे तुलन - पत्रा में नहीं दिखाया जाता। यह दिखाये जाने वाले लाभ एवं कर देयता को कम पर दिखाने में सहायक होता है। कमी के समय में अध्िक लाभ दिखाने के लिए गुप्त संचय को लाभ में मिला दिया जाता है। प्रबन्ध्क उचित से अध्िक ”ास लगाकर गुप्त संचय का सृजन करते हैं। इसे गुप्त संचय इसलिए कहा जाता है क्योंकि बाहर के अंश धरकों को इसका ज्ञान नहीं होता है। गुप्त संचय का सृजन निम्न ढंग से भी किया जा सकता है। ऽ रहतिया/स्कन्ध् का अवमूल्यन। ऽ पूँजीगत व्यय का लाभ - हानि खाते में लिखना संदिग्ध् ट्टणों के लिए आवश्यकता से अध्िक प्रावधान करना। ऽ सम्भाव्य देयता को वास्तविक देयता दिखाना। उचित सीमा तक गुप्त संचय के निमार्ण को युक्ित संगत एवं सतकर्ता तथा अन्य पफमोर्ं से प्रतियोगिता को रोकने के लिए उचित ठहराया जा सकता है। स्वयं जाँचिए - 5 कारण सहित बताएं कि निम्न कथन सत्य हैं अथवा असत्य ;पद्ध संदिग्ध् ट्टणों के लिए सीमा से अध्िक प्रावधन करने से व्यवसाय में गुप्त संचय एकत्रिात हो जाता है। ;पपद्ध पूँजीगत संचय का निमार्ण सामान्यतः स्वतन्त्रा या वितरण योग्य लाभ मे से किया जाता है। ;पपपद्ध लाभांश समानीकरण संचय, साधरण संचय का उदाहरण है। ;पअद्ध साधरण संचय का केवल कुछ निश्िचत उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकता है। ;अद्ध प्रावधन लाभ पर भार होता है ;अपद्ध संचय उन सम्भावित खचर् एवं हानियों को पूरा करने के लिए होते हैं। जिनकी राश्िा निश्िचत नहीं है। ;अपपद्ध संचय का सृजन व्यवसाय के कर योग्य लाभ को कम करता है। प्प् सही शब्द भरेंः ;पद्ध ”ास - - - - - - - - की कीमत में कमी को कहते हैं। ;पपद्ध स्थापित करना, भाड़ा एवं परिवहन व्यय - - - - - - - - के भाग होते हैं। ;पपपद्ध प्रावधन लाभ पर - - - - - - - - होता है। ;पअद्ध स्िथर लाभांश दर बनाए रखने के लिए संचय का सृजन - - - - - - कहलाता है। अध्याय में प्रयुक्त शब्द ऽ मूल्य ”ास, ”ास हेतु लागत, मूल - लागत, उपयोगी जीवन ऽ रिक्तीकरण, अप्रचलन, अवश्िाष्ट मूल्य, अपलिख्िात मूल्य ऽ सीध्ी रेखा/स्थाइर् किश्त प(ति ऽ परिसम्पिा निपटान खाता ऽ संचित ”ास/”ास प्रावधन खाता, संचय, प्रावधन, पूँजीगत संचय, आयगत संचय, साधरण संचय,विश्िाष्ट संचय, गुप्त संचय, संदिग्ध् ट्टणों के लिए प्रावधन। अध्िगम उद्देश्यों के संदभर् में सारांश 1ण् ”ासः”ास मूतर् स्थाइर् परिसम्पिायों के मूल्य में ”ास को कहते हैं। लेखांकन में ”ास किसी स्थाइर्परिसम्पिा की हेतु लागत को उसके उपयोगी जीवन में आबंटन है। 2ण् ”ास एवं अन्य समान शब्दः ”ास शब्द का उपयोग मूतर् स्थाइर् परिसम्पिायों के संदभर् में किया जाता है।श्वनन उद्योग के संदभर् में रिक्तीकरण एवं अमूतर् सम्पिायों के संदभर् में अपलेखन दूसरे सम्बंध्ित शब्द हैं। 3ण् ”ास को प्रभावित करने वाले तत्व ऽ उपयोग या समय परिसम्पिा के कारण घ्िासावट ऽ वैधनिक अध्िकारों की परिसम्पिा अवक्षयण का महत्व ऽ सरल एवं संतोषजनक लाभ अथवा हानि के निधर्रण के लिए अवक्षयण लागाना अनिवायर् है ऽ ”ास गैर नकद संचालन लागत है 4ण् ”ास लगाने की प(तियां ऽ सीध्ी रेखा प(ति ऽ अपलिख्िात मूल्य प(ति ”ास राश्िा को प्रभावित करने वाले तत्व अवक्षयण की राश्िा का निधर्रण ऽ मूल लागत क्षय होने से बचे मूल्य, एवं ऽ परिसम्पिा के उपयोगी जीवन के द्वारा किया जाता है 5ण् प्रावधन: लाभ पर प्रभार है। इसका सृजन दी गइर् चालू देनदारी जिसकी राश्िा अनिश्िचित है पर कियाजाता है। दूसरी ओर संचय लाभ का समायोजन है। इसका निमार्ण वयवसाय की वित्तीय स्िथति को सुदृढ़ करने के लिए किया जाता है। 6ण् संचय के प्रकारः साधरण संचय एवं विश्िष्ट संचय, आयगत संचय एंव पूँजीगत संचय हो सकते हैं। गुप्त संचयः जब लगाया गया कुल अवक्षयण लगाइर् जानेवाली कुल राश्िा से अध्िक होता है तो गुप्त संचय का निमार्ण होता है। गुप्त संचय को स्िथति विवरण में स्पष्ट नहीं किया जाता है। अभ्यास के लिए प्रश्न लघु उत्तरीय प्रश्न 1ण् ”ास क्या है? 2ण् ”ास की आवश्यकता को संक्षेप में बताइए? 3ण् ”ास के क्या कारण हैं? 4ण् हृास की राश्िा को प्रभावित करने वाला तत्वों को समझाइए? 5ण् हृास की गणना करने के लिए सीध्ी रेखा विध्ि एंव क्रमागत विध्ि में अन्तभेर्द कीजिए 6ण् दीघर् अवध्ि की परिसम्पिायों के मरम्मत एवं रखरखाव व्ययों में बाद के वषो± में पहले के वषार्ें की अपेक्षा वृि की सम्भावना रहती है। यदि प्रबन्ध्क मूल्य ”ास एवं मरम्मत के कारण लाभ - हानि खाते पर भार बढ़ाना नहीं चाहें तो मूल्य ”ास लगाने की कौनसी विध्ि उपयुर्क्त रहेगी? 7ण् ”ास का लाभ - हानि खाते एवं तुलन - पत्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा? 8ण् प्रावधन एवं पूँजी संचय में अन्तभेर्द कीजिए। 9ण् प्रावधन एंव संचय के चार चार उदाहरण दीजिए 10ण् आगम संचय एवं पूँजी संचय में अन्तभेर्द कीजिए 11ण् आगम संचय और पूँजीगत् संचय के चार उदाहरण दें। 12ण् सामान्य संचय एवं विश्िाष्ट संचय में अन्तर बताइए। 13ण् गुप्त संचय की संकल्पना को समझाइए दीघर् उत्तरीय प्रश्न 1ण् ”ास की अवधरणा को समझाइए। ”ास लगाने की क्या आवश्यकता है एवं इसके क्या कारण है? 2ण् ”ास की सरल रेखाविध्ि एवं मूल्य हृास विध्ि की विस्तार से चचार् कीजिए दोनों में अन्तर भी बताइए तथा उन परिस्िथतियों को भी बताइए जिनमंे ये उपयोगी हंै। 3ण् ”ास के लेखन की दोनों प(तियों का विस्तार से वणर्न कीजिए। आवश्यक रोजनामचा प्रविष्िट भी दीजिए। 4ण् ”ास राश्िा के निधर्रक तत्वों को समझाइए। 5ण् विभ्िान्न प्रकार के संचयों के नाम देकर इनको विस्तार से समझाइए। 6ण् प्रावधन क्या है? उनका सृजन वैफसे किया जाता है? संदिग्ध् ट्टणों के प्रावधन का लेखांकन कैसे करेंगे? अंकिक प्रश्न 1ण् 01 अप्रैल, 2ए000 को बजरंग माबर्ल्स ने 2ए80ए000 रु. की मशीन खरीदी तथा 10ए000 रु.भाडे़ पर एवं 10ए000 रु. स्थापना पर व्यय किये। अनुमान लगाया गया कि इसका उपयोगी जीवन 10 वषर् एवं 10 वषर् की समाप्ित पर इसका अवश्िाष्ट मूल्य 20ए000 रु. होगा। ;कद्ध मूल्य हृास की सीध्ी रेखा विध्ि से पहले चार वषो± का मशीन खाता एवं ”ास खाता बनाइए। खाते प्रतिवषर् 31 माचर् को बन्द किये जाते हैं। ;खद्ध सीध्ी रेखा विध्ि से ”ास लगाकर प्रथम चार वषोर् के लिए मशीन खाता ”ास खाता एवं ”ास पर प्रावधन खाता ;या संचित ”ास खाताद्ध बनाइए खाते प्रतिवषर् 31 माचर् को बन्द किये जाते हैं। ;उत्तरः ;अद्ध अप्रैल 1 2004 को मशीन खाते का शेष 1ए25ए000 रु., ;बद्ध ”ास पर प्रावधान खाते का शेष 72ए000 रु.द्ध 2ण् 01 जुलाइर्, 2ए000 को अशोक लि. ने 1ए08ए000 रु. की मशीन खरीदी एवं 12ए000 रु. इसकी स्थापना पर खचर् किये। क्रय के समय अनुमान लगाया गया कि इसका सिय वाण्िाज्ियक जीवन 12 वषर् होगा एवं 12 वषर् के पश्चात इसका अवश्िाष्ट मूल्य 12ए000 रु. होगा। अशोक लि. की लेखा पुस्तकों में प्रथम तीन वषो± का मशीन खाता एवं ”ास खाता बनाइए यदि ”ास सीध्ी रेखा विध्ि से लगाया जा रहा हो। ;उत्तरः 1ण्01ण् 2003 को मशीन खाते का शेष 97ए000 रु.द्ध 3ण् 01 अक्टूबर, 2001 को रिलायंस लि. ने 56ए000 रु. में एक पुरानी मशीन खरीदी एवं इसके परिचालन में लाने से पूवर् इसपर 28ए000 रु. इसकी काया पलट एवं स्थापना पर व्यय किये । अनुमान लगाया गया कि इसके 15 वषर् के उपयोगी जीवन के अन्त में इसको 6ए000 रु. अवश्िाष्ट वसूल पर बेचा जाएगा। साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया कि 6ए000 के अवश्िाष्ट मूल्य को प्राप्त करने हेतु 1ए000 रु. व्यय करने होंगे। सीध्ी व्यय से ”ास लगाकर पहले तीन वषर् का मशीन खाता एवं ”ास पर प्रावधन खाता बनाइए। खाते प्रति वषर् 31 दिसम्बर को बन्द किए जाते हैं। ;उत्तरः 1ण्01ण्2004 को ”ास पर प्रावधन खाते का शेष 18ए200 रु.द्ध 4ण् बरलिया लि. ने 01 जुलाइर्, 2001 को एक पुरानी मशीन 56ए000 रु. में खरीदी तथा 24ए000 रु. इसकी मरम्मत एवं इसको लगाने पर व्यय किए एवं 5ए000 रु. इसको लाने के लिए भाड़े पर व्यय किये। 01 सितम्बर, 2002 को बरलिया लि. ने 2ए50ए000 रु. में एक और मशीन खरीदी एवं 10ए000 रु. इसकी स्थापना पर व्यय किये। ;कद्ध मशीन पर 10» प्रतिवषर् की दर से मूल लागत प(ति पर प्रतिवषर् 31 दिसम्बर को ”ास लगाना है। वषर् 2001 से 2004 तक का मशीन खाता एवं मूल्य ”ास खाता बनाइए। ;खद्ध 2001 से 2004 तक का मशीन खाता एवं मूल्य ”ास खाता बनाइए यदि मशीन पर ”ास 10ः वाष्िार्क दर से प्रतिवषर् 31 दिसम्बर को इसके ”ासित मूल्य पर लगाया जाता है। ;उत्तरः ;अद्ध 1ण्01ण्2005 को मशीन खाते का शेष 2ए54ए582 रु., ;बद्ध 1ण्01ण्2005 को मशीन खाते का शेष 2ए62ए448 रु.द्ध 5ण् गंगा लि. ने 1 जनवरी, 2001 को 5ए50ए000 में एक मशीन खरीदी। इसकी स्थापना पर 50ए000 रु. व्यय किये गये। 1 सितम्बर, 2001 को 3ए70ए000 रु. में एक और मशीन खरीदी। 01 मइर्, 2002 को 8ए40ए000 रु. ;स्थापना व्यय सहितद्ध में एक और मशीन खरीदी। प्रतिवषर् 31 दिसम्बर, को 10» वाष्िार्क से सीध्ी रेखा प(ति ”ास लगाया गया। ;कद्ध वषर् 2001, 2002, 2003 एवं 2004 के लिए मशीन खाता एवं मूल्य ”ास खाता बनाएं ;खद्ध यदि ”ास राश्िा को ”ास पर प्रावधन में संचित कर लिया जाए तो वषर् 2001, 2002, 2003 एवं 2004 के लिए मशीन खाता एवं मशीन पर ”ास प्रावधन खाता बनाएं। ;उत्तरः ;अद्ध 1ण्01ण्2005 को मशीन खाते का शेष 12ए22ए666 रु., ;बद्ध 01ण्01ण्2005 को ”ास पर प्रावधन खाते का शेष 5ए87ए337 रु.द्ध 6ण् आजाद लि. ने 1 अक्टूबर, 2002 को 4ए50ए000 रु. का पफनीर्चर खरीदा। 01 माचर्, 2003 को इसने 3ए00ए000 रु. का एक और पफनीर्चर खरीदा। 1 जुलाइर्, 2004 को 1 जनवरी, 2001 को खरीदा गया पफनीर्चर 2ए25ए000 रु. में बेच दिया। ”ास 15ः प्रतिवषर् की दर से क्रमागत प(ति से लगाया जा रहा है। खाते प्रतिवषर् 31 माचर् को बंद किये जाते है। ;पद्धवषर् समाप्ित 31 माचर्, 2003, 31 माचर्, 2004 एवं 31 माचर्, 2005 को पफनीर्चर खाता एवं संचित ”ास खाता बनाइए। ;पपद्धयह मानते हुए कि पफनीर्चर निपटान खाता खोला गया है, पफनीर्चर खाता एवं संचित ”ास खाता बनाएँ। ;उत्तरः पफनीर्चर के विक्रय पर हानि 1ए14ए915 रु., 31ण्03ण्2005 को ”ास पर प्रावधन खाते का शेष 85ए959 रु.द्ध 7ण् लोकेश पफैवरिक्स ने 01 अप्रैल, 2001 को 1ए00ए000 रु. में टैक्सटाइल मशीन खरीदी। 01 जुलाइर्, 2002 को इसने 2ए50ए000 रु. की लागत से एक और मशीन खरीदी। 01 अप्रैल, 2001 को क्रय की गइर् मशीन को 01 अक्टूबर, 2005 को 25ए000 रु. में बेच दिया। कंपनी 15» वाष्िार्क से सीध्ी रेखा विध्ि से ”ास लगा रही है। वषर् समाप्ित 31 माचर् 2006 के लिए मशीनरी खाता एवं मशीनरी निपटान खाता बनाइए। ;उत्तरः मशीन के विक्रय पर हानि 7ए500 रु., 01ण्04ण्2005 को मशीन खाते का शेष 1ए09ए375 रु.द्ध 8ण् िस्टल लि. के खातों में 01 जनवरी, 2005 को निम्न खाते शेष थे मशीनरी खाता 15ए00ए000 रुमशीनरी पर ”ास प्रावधन खाता 5ए50ए000 रु1 अप्रैल, 2005 को 01 जनवरी 2002 को 2ए00ए000 रु. में क्रय गइर् मशीन को 75ए000 रु. में बेच दिया। 298 लेखाशास्त्रा - वित्तीय लेखांकन 1 जुलाइर्, 2005 को 6ए00ए000 रु. में एक और नइर् मशीन खरीदी। मशीन पर ”ास 20» वाष्िार्क से सीधी रेखा विध्ि से लागाना है तथा खाते प्रतिवषर् 31 दिसम्बर को बंद किए जाते हैं। वषर् समाप्ित 31 दिसम्बर 2003 को मशीन खाता एवं ”ास प्रावधन खाता बनाइए। ;उत्तरः मशीन की बिक्री पर लाभ 5ए000 रु., 31ण्03ण्2005 को मशीन खाते का शेष 19ए00ए000 रु.। 31ण्03ण्2005 को ”ास प्रावधन खाते का शेष 4ए80ए000 रु.द्ध 9ण् मै. एक्सैल कम्प्यूटसर् की लेखा पुस्तकों में कम्प्यूटसर् खाते का 01 अप्रैल 2002 को 50ए000 रु का ;मूल लागत 1ए20ए000 रु.द्ध नाम शेष है। 01 जुलाइर्, 20ए000 को इसने 2ए50ए000 रु का एक और कम्प्यूटर खरीदा। 01 जनवरी, 2001 को 30ए000 रु. में एक और कम्प्यूटर खरीदा। 1 अप्रैल 2004 को 01 जुलाइर्,, 2000 को कम्प्यूटर प्रचलन से बाहर होने के कारण 20ए000 रु. में बेच दिया गया। 1 अगस्त, 2004 को 80ए000 रु. पर प्ठड कम्प्यूटर का एक नवीन संस्करण खरीदा। एक्सैल कम्प्यूटसर् की पुस्तकों में वषर् समाप्ित 31 माचर्, 2001, 31 माचर्, 2002, 31 माचर् 2003 एवं 31 माचर्, 2004 को कम्प्यूटर खाता बनाइए। कम्प्यूटर पर 10» वाष्िार्क से सीध्ी रेखा विध्ि से ”ास लगाया जा रहा है। ;उत्तरः कम्प्यूटर के विक्रय पर हानि 1ए36ए250 रु., 31ण्03ण्2005 को कम्प्यूटर खाते का शेष 80ए583 रु.द्ध 10ण् केरिज ट्रांसपोटर् कम्पनी ने 1 अप्रैल, 2001 को 2ए00ए000 प्रति ट्रक से 5 ट्रक खरीदे कम्पनी 20» वाष्िार्क से मूल लागत पर ”ास लगाती है तथा लेखा पुस्तकों को प्रतिवषर् 31 दिसम्बर को बंद करती है। 1 अक्टूबर, 2003 को एक ट्रक दुघर्टनाग्रस्त होकर पूरी तरह से नष्ट हो गया। बीमा कम्पनी दावे को पूरा चुकता करते हुए 70ए000 रु. देने को सहमत हुइर् उसी तिथ्िा का कम्पनी ने 1ए00ए000 रु. में एक और पुराना ट्रक खरीदा तथा उसके कायाकल्प पर 20ए000 रु. व्यय किये। 31 दिसम्बर, 2003 को समाप्त हो रहे तीन वषो± के लिए ट्रक खाता एवं ट्रक पर ”ास प्रावधन खाता बनाइए। यदि ट्रक निपटान खाता बनाया जा रहा हो तो ट्रक खाता भी बनाइए। ;उत्तरः बीमा निपटान पर हानि 30ए000 रु., 31ण्12ण्03 को ”ास पर प्रावधन खाते का शेष 4ए46ए000 रु., 31ण्12ण्03 को ट्रक खाते का शेष 09ए20ए000 रु.द्ध 11ण् सरस्वती लि. ने 1 जनवरी, 2001 को 1ए00ए000 रु. की लागत की एक मशीन खरीदी। 1 मइर्, 2002 को 15ए00ए000 रु. में तथा 1 जुलाइर्, 2004 को 12ए00ए000 रु. में दूसरी नइर् मशीन खरीदी। मशीन के एक भाग, जिसकी मूल लागत, वषर् 2001 में 2ए00ए000 रु. थी, को 31 अक्टूबर, 2004 को 75ए000 रु. मंे बेच दिया। 2001 से 2005 तक के मशीन खाता, मशीन पर ”ास प्रावधन खाता एवं मशीन निपटान खाता बनाइए यदि ”ास 10» वाष्िार्क दर से सीध्ी रेखा पर लगाया गया हो तथा खाते प्रतिवषर् 31 दिसम्बर को बन्द होता हो। ;उत्तरः मशीन की बिक्री पर हानि 58ए333 रु., 31ण्12ण्05 को ”ास पर प्रावधन खाते का शेष 11ए30ए000 रु., 31ण्12ण्05 को मशीन खाते का शेष 35ए00ए000 रु.द्ध 12ण् 1 जुलाइर्, 2001 को अश्िवनी ने 2ए00ए000 रु. में एक उधर मशीन खरीदी जिस पर 25ए000 रु. का व्यय चैक से भुगतान किये। मशीन का संभावित जीवन 5 वषर् तथा पाँच वषर् पश्चात अवश्िाष्ट मूल्य 20ए000 रु. आंका गया। सीध्ी रेखा प(ति लगाना है। वषर् 2001 में रोजनामचा प्रविष्िट करें एवं प्रथम तीन वषर् के आवश्यक खाते बनाएं। ;उत्तरः 11ण्12ण्03 को मशीन खाते का शेष 1ए22ए500 रु.द्ध 13ण् लक्ष्मी ट्रांसपोटर् लि. ने 1 अक्टूबर, 2001 को 8ए00ए000 रु. में एक ट्रक खरीदा। इसे ट्रक पर 15ः वाष्िार्क से ”ास मान शेष प(ति से ”ास लगाया गया। 31 दिसम्बर, 2003 को इस ट्रक को 5ए00ए000 रु. में बेच दिया गया। खाते प्रतिवषर् 31 माचर् को बन्द किये जाते हैं। चार वषर् के लिए ट्रक खाता बनाइए। ;उत्तरः ट्रक की बिक्री पर लाभ 55ए548 रु.द्ध 14ण् कपिल लि. ने 01 जुलाइर्, 2001 को 3ए50ए000 रु. की एक मशीन खरीदी 01 अप्रैल, 2002 एवं 01 अक्टूबर, 2002 को इसने क्रमशः 1ए50ए000 रु. तथा 1ए00ए000 रु. की दो और मशीनें खरीदीं। ”ास 10ः वाष्िार्क से सीध्ी रेखा विध्ि से लगाना है। 01 जनवरी, 2003 को तकनीक में परिवतर्न के कारण पहली मशीन अनुपयोगी हो गइर्। इस मशीन को 1ए00ए000 रु. में बेच दिया गया। कलेंडर वषर् के आधर पर प्रथम वषर् के लिए मशीन खाता बनाइए। ;उत्तरः मशीन की बिक्री पर हानि 1ए97ए500 रु.01ण्12ण्05 को मशीन खाते का शेष 1ए86ए250 रु.द्ध 15ण् सतकार ट्रांसपोटर् लि. ने 10ए00ए000 प्रति बस ने हिसाब से 01 जनवरी, 2001 को तीन बसें खीरीदी। 01 जुलाइर्, 2003 को एक बस दुघर्टनाग्रस्त हो गइर् तथा पूरी तरह से नष्ट हो गइर्। बीमा कम्पनी से हिसाब चुकता के एवज में 7ए00ए000 रु. प्राप्त हुए। ”ास 15ः वाष्िार्क से क्रमागत प(ति से लगाया जाना है। 2001 से 2004 तक का बस खाता बनाइए। लेखा पुस्तकें प्रतिवषर् 31 दिसम्बर को बन्द की जाती हैं। ;उत्तरः बीमा दावे पर लाभ 31ए687 रु.01ण्12ण्05 को बस खाते का शेष 10ए44ए013 रु.द्ध 16ण् जुनेजा ट्रांसपोटर् ने 1 अक्टूबर, 2001 को 2 ट्रक 10ए00ए000 रु. ट्रक से खरीदे। 01 जुलाइर्, 2003 को एक ट्रक दुघर्टना ग्रस्त हो गया तथा पूरी तरह नष्ट हो गया। हिसाब चुकता करते हुए बीमा कंपनी से 6ए00ए000 रु. प्राप्त हुए। 31 दिसम्बर, 2003 को एक और ट्रक दुघर्टनाग्रस्त हो गया जो आंश्िाक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ। इस ट्रक का बीमा नहीं कराया गया था। इसे 15ए00ए00 रु. मे बेच दिया गया। 31 जनवरी, 2004 को कम्पनी ने 12ए00ए000 रु. में एक और ट्रक खरीदा। ”ास 10ः वाष्िार्क दर से क्रमागत प(ति से लगाना है। लेखा पुस्तकें प्रतिवषर् 31 माचर् को बन्द की जाती हैं। 2001 से 2004 तक का ट्रक खाता बनाइए। ;उत्तरः पहले ट्रक पर बीमा दावे पर हानि 1ए41ए000 रु. दूसरे ट्रक पर हानि 5ए53ण्000 रु., 31ए03ण्2004 को ट्रक खाते का शेष 11ए80ए000 रु.द्ध 17ण् नोयडा की एक भवन निमार्ण कम्पनी के पास 5 क्रेन हैं। 01 अप्रैल, 2001 को इनकी लेखा पुस्तकों के अनुसार 40ए00ए000 रु. है। 1 अक्टूबर, 2001 को इसने एक क्रेन जिसकी 1 अप्रैल, 2001 को कीमत 5ए00ए000 रु. थी 10» लाभ पर बेच दी। उसी दिन उसने दो और क्रेन 4ए50ए000 रु. प्रति क्रेन खरीदी ली। क्रेन खाता खोलिए। यह अपने खाते 31 माचर् को बन्द करते हैं एवं ”ास क्रमागत प(ति पर निकालते हैं। ;उत्तरः क्रेन की बिक्री पर लाभ 47ए500 रु.31ण्03ण्02 को क्रेन खाते का शेष 41ए15ए000 रु.द्ध 18ण् श्री कृष्णा मैन्यूपफैक्चरिंग कम्पनी ने 01 जुलाइर्, 2000 को 75ए000 रु. प्रति से 10 मशीने खरीदी। 01 अक्टूबर, 2002 को एक मशीन आग से नष्ट हो गइर् तथा बीमा कंपनी ने 45ए000 रु. दावे के स्वीकार किए। इसी तिथ्िा को कंपनी ने 1ए25ए000 रु. एक दूसरी मशीन खरीदी ली। कंपनी 15ः वाष्िार्क से क्रमागत प(ति से ”ास लगा रही है। कंपनी का वििाय वषर् कैलेन्डर वषर् है। 2002 से 2003 के लिए मशीनरी खाता बनाइए। ;उत्तरः बीमा निपटान पर हानि 7ए735 रु.द्ध 19ण् 1 जनवरी, 2000 को एक लिमिटेड कंपनी ने 20ए00ए000 रु. में मशीन खरीदी। ”ास 15ः वाष्िार्क से क्रमागत प(ति से लगाया जा रहा है। 01 माचर्, 2002 को मशीन का 1ध्4 भाग आग से नष्ट हो गया बीमा कम्पनी से 40ए000 रु. पूरा हिसाब चुकता कर प्राप्त हुए। 01 सितम्बर, 2002 को 15ए00ए000 रु. में एक और मशीन खरीदी। 2002 से 2003 तक के मशीन खाता बनाइए। खाते 31 दिसम्बर को बन्द किये जाते हैं। ;उत्तरः बीमा निपटान पर हानि 12ए219 रु.01ण्01ण्04 को मशीन खाते का शेष 19ए94ए260 रु.द्ध 20ण् 1 जुलाइर्, 2000 को 3ए00ए000 रु. की लागत का एक संयन्त्रा खरीदा तथा इसकी स्थापना पर 50ए000 रु. व्यय किये। 15ः वाष्िार्क से सीध्ी रेखा प(ति से ”ास लगाया गया। 01 अक्टूबर, 2002 को संयन्त्रा को 1ए50ए000 रु. में बेच दिया एवं उसी तिथ्िा को 4ए00ए000 रु. की लागत का एक और संयन्त्रा लगा दिया जिसमें उसका क्रय मूल्य सम्मलित है। तीन वषर् के लिए मशीनरी खात एवं ”ास पर प्रावधन खाता बनाइए। ;उत्तरः सयन्त्रा की बिक्री पर हानि 81ए875 रु., 01ण्01ण्03 को मशीन खाते का शेष15ए000 रु., 01ण्01ण्03 को ”ास पर प्रावधन खाते का शेष 15ए000 रु.द्ध 21ण् ताहिलियानी एण्ड संस एन्टरप्राइजिज की लेखा पुस्तकों में 31 दिसम्बर, 2005 को लिये गये तलपट इस प्रकार हैंः खाते का नाम नाम राश्िा ;रु.द्ध जमा राश्िा ;रु.द्ध विभ्िान्न देनदारडूबत ट्टण संदिग्ध् ट्टणों के लिए प्रावधन 50ए000 6ए000 4ए000 अतिरिक्त सूचना ऽ डूबत ट्टण जिनका लेखांकन नहीं किया गया 2ए000 रु.। ऽ देनदारों पर 8ः से प्रावधन की व्यवस्था करनी है। ऽ डूबत ट्टणों को पुस्तकों में से समाप्त करने एवं संदिग्ध् ट्टण खाते के लिए प्रावधन की व्यवस्था करने के लिये आवश्यक लेखांकन प्रविष्िट कीजिए। आवश्यक खाते भी बनाइए। ;उत्तरः नया प्रावधन 1ए600 रु., लाभ - हानि खाता ;जमाद्ध 1ए900 रु.द्ध 22ण् 31 दिसंबर, 2005 को मै. निशा ट्रेडसर् की पुस्तकों के विभ्िान्न खातों के शेष इस प्रकार थेः खाते का नाम राश्िा ;रु.द्ध विविध् देनदारडूबत ट्टण संदिग्ध् ट्टणों पर प्रावधन 80ए500 1ए000 5ए000 अतिरिक्त सूचनाःडूबत ट्टण 500 देनदारों पर 2» पर प्रावधन बनाएँडूबत ट्टण खाता, संदिग्ध् ट्टणों पर प्रावधन और लाभ - व - हानि खाता तैयार करें। स्वयं जाँचिए की जाँच सूची स्वयं जाँचिए - 1 1ण् स्थाइर् परिसम्पिायां, प्राकृतिक स्रोतों को निःशेष करना, विश्िाष्ट अनुबंध्ित व्यवसाय 2ण् परिशोध्न स्वयं जाँचिए - 2 ;पद्ध सत्य ;पपद्ध असत्य ;पपपद्ध असत्य ;पअद्ध सत्य ;अद्ध सत्य ;अपद्ध असत्य ;अपपद्ध सत्य ;अपपपद्ध असत्य ;पगद्ध असत्य ;गद्ध असत्य स्वयं जाँचिए - 3 क्रमागत प(ति अध्िक सही है क्योंकि यह प(ति उन परिसम्पिायों के लिए उचित है जो तकनीकी परिवतर्नों से प्रभावित हैं। वैसे इस प(ति को आयकर निधर्रक मान्यता देते हैं। स्वयं जाँचिए - 4 1 ;पद्ध सत्य ;पपद्ध असत्य ;पपपद्ध असत्य ;पअद्ध असत्य ;अद्ध सत्य ;अपद्ध असत्य ;अपपद्ध असत्य 2 ;पद्ध परिसम्पिायां ;पपद्ध क्रय लागत ;पपपद्ध प्रभार ;पअद्ध लाभांश समानीकरण कोष

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