लेखांकन - एक परिचय 1 अध्िगम उद्देश्य इस अध्याय के अध्ययन के उपरांत आपः ऽलेखांकन का अथर् एवं आवश्यकता को बता सवेंफगेऋ ऽ लेखांकन की सूचना के स्रोत के रूप में चचार् कर सवेंफगेऋ ऽ लेखांकन सूचना के आंतरिक एवं बाह्य उपयोगकतार्ओं की पहचान कर सवेंफगेऋ ऽ लेखांकन के उद्देश्य को समझा सवेंफगेऋ ऽ लेखांकन की भूमिका का वणर्न कर सवेंफगेऋ ऽ लेखांकन में प्रयुक्त मूल पारिभाष्िाक शब्दों को समझा सवेंफगे। सदियों से लेखांकन लेखापाल के वित्त संबध्ित हिसाब - किताबंरखने तक सीमित रहा है। परन्तु आज के तेजी से बदलते व्यावसायिक वातावरण ने लेखापाल को संगठन एवं समाज, दोनों में अपनी भूमिका एवं कायो± के पुनः मूल्यांकन के लिए बाध्य कर दिया है। लेखापाल की भूमिका अब मात्रा व्यापारिक सौदों के हिसाब लेखक से निणार्यक मंडल को उपयुक्त सूचना उपलब्ध् कराने वाले लेखक सदस्य के रूप में हो गइर् है। विस्तृत रूप से लेखांकन आज मात्रापुस्त - लेखन एवं वित्तीय प्रलेख तैयार करना ही नहीं बल्िक उससे बहुत आगे है। लेखापाल आज नये विकसित क्षेत्रों, जैसे - न्यायलिक लेखांकन ;कंप्यूटर हैविंफग एवं इन्टरनैट पर बड़े पैमाने में ध्न की चोरी जैसे अपराधें को हल करनाद्ध, इर् - कामसर् ;वैब - आधरितभुगतान प्रणालीद्ध, वित्तीय नियोजन पयार्वरण लेखांकन आदि में कायर् करने के योग्य हैं। इस अनुभूति का कारण है कि आज लेखांकन प्रबन्ध्कों एवं दूसरे इच्छुक व्यक्ितयों को वह सूचनाएँ प्रदान करने में सक्षम है जो उन्हें निणर्य लेने में सहायता प्रदान कर सवेंफ। समय के साथ लेखांकन का यह पक्ष इतना अध्िक महत्वपूणर् बन गया है कि आज यह सूचना प्रणाली के स्तर तक पहुँच गया है। एक सूचना प्रणाली के रूप में यह किसी भी संगठन की आथ्िार्क सूचनाओं से ंसबंध्ित आंकड़े एकत्रिात कर उनका संप्रेषणउन विभ्िान्न उपयोगकत्तार्ओं तक करता है, जिनके निणर्य एवं ियाएं संगठन के प्रदशर्न को प्रभावित करती है। अतः यह परिचय रूपी प्रारंभ्िाक अध्याय इसी संदभर् में लेखांकनकी प्रकृति, आवश्यकता एवं क्षेत्रा की व्याख्या करता है। 1ण्1 लेखांकन का अथर् वषर् 1941 में अमेरिकन इंस्टीट्यूट आॅपफ सटिर्पफाइड पब्िलक एकाउटेंट्स ; ।उमतपबंद प्देजपजनजम व िब्मतजपपिमक च्नइसपब ।बबवनदजंदजे ;।प्ब्च्।द्धद्ध ने लेखांकन की परिभाषा इस प्रकार दी हैं दृ लेखांकन कासंबंध् उन लेन - देनों एंव घटनाओं, जो पूणर् रूप से या आंश्िाक रूप से वित्तीय प्रकृति के होते हैं, मुद्राके रूप में प्रभावशाली ढंग से लिखने, वगीर्कृत करने, संक्षेप में व्यक्त करने एवं उनके परिणामों की विश्लेषणात्मक व्याख्या करने की कला से है। उत्तरोत्तर आथ्िार्क विकास के परिणामस्वरूप लेखांकन की भूमिका एवं क्षेत्रा का भी विस्तार हुआ है। वषर् 1966 में अमेरिकन एकाउटिंग एसोसिएशन ;।।।द्ध ने लेखांकन को इस प्रकार परिभाष्िात किया १ ‘‘लेखांकन आथ्िार्क सूचनाओं को पहचानने, मापने और संप्रेष्िात करने की एक ऐसी प्रिया है जिसकेआधर पर सूचनाओं के उपयोगकत्तार् तकर्युक्त निणर्य लेने में सक्षम होते हैं। लेखांकन प्रिया लेखांकन निणर्यकतार्ओं लेखांकन सूचना काको आथ्िार्क ियाओंआथ्िार्क घटनाएं सम्प्रेषणएवं उनके निणर्यों के परिणामों से जोड़ता है निणार्यक ;आंतरिक एवं बाह्य उपयोगकतार्द्ध निणर्यों चित्रा 1ण्1ः लेखांकन प्रिया 1970 में अकाउटिंग पि्रन्सीपल बोडर् आॅपफ एआइर्सीपीए ने कहा कि लेखांकन का कायर् मुख्य रूप सेआथ्िार्क इकाइर्यों के संबंध् में ऐसी गुणात्मक सूचनाएं उपलब्ध् कराना है, जो प्रमुख रूप से वित्तीयप्रकृति की होती हैं, और जो आथ्िार्क निणर्य लेने में उपयोगी होती हैं। उपरोक्त विवरण के आधर पर लेखांकन को इस प्रकार परिभाष्िात किया जा सकता है कि लेखांकन संगठन की आथ्िार्क घटनाओं को पहचानने, मापने और लिखकर रखने की ऐसी प्रिया है, जिसकेमाध्यम सूचनाओं से संबंध्ित आंकड़े उपयोगकतार्ओं तक संप्रेष्िात किये जा सवेंफ। लेखांकन की प्रकृति को समझने के लिए हमें परिभाषा के निम्न संबंध्ित पहलूओं को समझना आवश्यक हैः ऽ आथ्िार्क घटनाएं ऽ पहचान, मापन, अभ्िालेखन एवं संप्रेषण òसंगठन ऽ सूचना से सबंध्ित उपयोगकतार् बाॅक्स - 1 लेखांकन का इतिहास एवं विकास लेखांकन की अद्भुत परंपरा है। लेखांकन का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी सभ्यता। लेखांकन के बीज पहली बार शायद इर्सा के 4000 वषर् पूवर् बेबीलोनियां एवं इजिप्ट में बो दिये गये थे जहाँ मजदूरी एवं करों के भुगतान सम्बन्धी लेन - देनों का लेखा मिट्टी की एक पट्टी पर किया जाता था। इतिहास साक्षी है कि इजिप्ट के लोग अपने खशाने, जिनमें सोना एवं अन्य दूसरी कीमती वस्तुएं रखी जाती थी, के लिए एक प्रकार के लेखांकन का प्रयोग करते थे और वे माहवार ब्यौरा राजा को भेजते थे। बेबीलोनीयां जिसे वाण्िाज्य नगरी कहा जाता था, वाण्िाज्य के लेखांकन का उपयोग धेखाधड़ी एवं अक्षमता के कारण होने वाली हानि को उजागर करने के लिए किया जाता था। ग्रीस में लेखांकन काप्रयोग प्राप्त आगम को खशानों में आबंटन, कुल प्राप्ितयों, कुल भुगतानों एवं सरकारी वित्तीय लेन - देनों के शेष का ब्यौरा रखने के लिए किया जाता था। रोमवासी विवरण - पत्रा अथवा दैनिक बही का प्रयोग करते थे जिनमें प्राप्ित एवं भुगतान का अभ्िालेखन किया जाता था तथा उनसे प्रतिमाह खाता बही में खतौनी की जाती थी। ;700 वषर् इर्सा पूवर् से 400इर्.द्ध चीन में तो 2000 वषर् इर्सवी पूवर् में ही बहुत ही परिष्कृत रूप में राजकीय लेखांकन का उपयोग होता था। भारत में लेखांकन का प्रचलन 2300 शताब्दी पूवर् कौटिल्य के समय से माना जा सकता है जो चन्द्रगुप्त मौयर् के राज्य में एक मंत्राी था तथा जिसने अथर्शास्त्रा के नाम से एक पुस्तक लिखी थी जिसमें लेखांकन अभ्िालेखों को वैफसे रखा जाये का वणर्न किया गया था। लूकस पेसिओली, जो व्यापारी क्षेणी से संबंध् रखते थे, की पुस्तक सुमा - डे - अरिथमटिªका, जयोमेटिªका, प्रोपोरशनालिटि पर प्रोपोरशन ;अंक गण्िात एवं रेखा गण्िात के पुनवार्लोकन के अंशद्ध, को द्विअंकन पुस्त - पालन पर पहली पुस्तक माना गया है। इस पुस्तक के एक भाग में व्यवसाय एवं पुस्त - पालन के सम्बन्ध् में लिखा है। पेसियोली ने यह दावा कभी नहीं किया कि वह द्विअंकन, पुस्त - पालन का आविष्कारक हैं। उसने तो इसके ज्ञान का विस्तार किया था। इससेऐसा लगता है कि शायद उसने समकालीन पुस्त - पालन ग्रन्थों को अपनी इस उत्तम रचना का आधार बनाया। अपनी इस पुस्तक में उसने आज के लेखांकन के सवर्प्रचलित शब्द नाम क्त जमा ब्त का उपयोग किया। इन संकल्पनाओं को इटली की शब्दावली में प्रयुक्त किया गया था। डेबिट शब्द इटली के शब्द कमइपजव से निकला है जो लेटिन शब्द कमइपजं एवं कमइमव शब्द से निकला है जिसका अथर् होता है स्वामी का ट्टणी होना। ब्तमकपज शब्द इटली के ब्तमकपजव शब्द से निकला है जो लेटिन शब्द ब्तमकं से निकला है जिसका अथर् होता है ;स्वामी में विश्वास या स्वामी की देनदारीद्ध। द्वि अंकन प्रणाली को समझाते हुए पेसियोली ने लिखा कि सभी प्रविष्िटयां दो बार अंकित की जाती है अथार्त् यदि आप एक लेनदार बनाते हैं तो आपको एक देनदार बनाना होगा। उसका कहना था कि एक व्यापारीके उत्तरदायित्वों में अपने व्यवसाय में इर्श्वर की महत्ता को बढ़ाना, व्यवसाय के कायोर् में नैतिकता तथा लाभ कमाना सम्िमलित है। उसने विवरण - पत्रा, रोजनामचा, खाता बही एवं विश्िाष्ट लेखांकन प्रिया पर विस्तार से चचार् की है। 1ण्1ण्1 आथ्िार्क घटनाएं व्यावसायिक संगठनों का संबंध् आथ्िार्क घटनाओं से होता है। आथ्िार्क घटना से तात्पयर् किसी व्यावसायिक संगठन में होने वाले ऐसे आथ्िार्क लेन - देनों से है जिसके परिणामों को मुद्रा रूप में मापा जा सकता हो। उदाहरणाथर्, मशीन का क्रय, उसके स्थापना एवं विनिमार्ण के लिए तैयार करना एक घटना है जिसमें कुछवित्तीय लेन - देन समाहित हैं, जैसे दृ मशीन का क्रय, मशीन का परिवहन, मशीन स्थापना स्थल को तैयार करना, स्थापना पर व्यय एवं परीक्षण संचालन। इस प्रकार लेखांकन किसी आथ्िार्क घटना से संबंध्ित सौदों के समूह की पहचान करता है। किसी घटना में संगठन एवं किसी बाहर के व्यक्ित के बीच लेन - देन है तो इसे बाह्य घटना कहेंगे। इस प्रकार के लेन - देन के उदाहरण नीचे दिये हैंः ऽ ग्राहक को रीबोक जूतों का विक्रय। ऽ वीडियोकाॅन लि. द्वारा अपने ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करना। ऽ आपूतिर्कतार्ओं से माल का क्रय। ऽ मकान मालिक को मासिक किराये का भुगतान। आंतरिक घटना एक ऐसी वित्तीय घटना है जो पूणर्तः किसी उद्यम के आंतरिक विभागों के बीच घटित होती है। उदाहरण के लिए संग्रहण विभाग द्वारा कच्चे माल अथवा कलपुजोर्ं की विनिमार्ण विभाग को आपूतिर्, कमर्चारियों को मजदूरी का भुगतान आदि। 1ण्1ण्2 पहचान करना, मापना, लेखा - जोखा एवं सम्प्रेषण पहचान इसका अथर् यह निधर्रित करना है किन लेन - देनों का अभ्िालेखन किया जाए अथार्त् इसमें उन घटनाओं की पहचान करना, जिनका अभ्िालेखन किया जाना है। इसमें संगठन से संबंध्ित सभी ियाओं काअवलोकन कर केवल उन्हीं ियाओं का चयन किया जाता है जो वित्तीय प्रकृति की हैं। लेखा - पुस्तकों में लिखने का निणर्य लेने से पहले व्यावसायिक लेन - देन एवं दूसरी आथ्िार्क घटनाओं का मूल्यांकन किया जाता है। उदाहरणाथर् मानव एवं संसाध्नों का मूल्य, प्रबन्ध्कीय नीतियों में परिवतर्न अथवा कमर्चारियों की नियुक्ित महत्वपूणर् घटनाएं हैं लेकिन इनमें से किसी को भी लेखा - पुस्तकों में नहीं लिखा जाता। यद्यपि जब भी कंपनी नकद अथवा उधर क्रय अथवा विक्रय करती है अथवा वेतन का भुगतान करती है तो इसे लेखा पुस्तकों में लिखा जाता है। मापन इसका अथर् है मौदि्रक इकाइर् के द्वारा व्यावसायिक लेन - देनों का वित्तीय प्रमापीकरण ;अनुमानों, मौदि्रक आधरों रुपए व पैसों की इकाइयों का अभ्िालेखन के लिए प्रयोगद्ध अथ।र्त् मापन की इकाइर् के रूप में रुपये पैसे। यदि किसी घटना को मौदि्रक रुप में प्रमापीकरण सम्भव नहीं है तो इसका वित्तीय लेखों में लेखन नहीं किया जाएगा। इसी कारणवश प्रबन्ध् निदेशक की नियुक्ित, महत्त्वपूणर् अनुबंध् व कमर्चारियों की बदली जैसी आवश्यक सूचनाओं का लेखा - पुस्तकों में नहीं किया जाएगा। अभ्िालेखन जब एक बार आथ्िार्क घटनाओं की पहचान व मापन वित्तीय रूप में हो जाती है तो इन्हें मौदि्रक इकाइयों में लेखा - पुस्तकों में कालक्रमानुसार ;तिथ्िावारद्ध अभ्िालिख्िात कर लिया जाता है। अभ्िालेखन इस प्रकारसे किया जाता है कि आवश्यक वित्तीय सूचना को स्थापित परम्परा के अनुसार सारांश निकाला जा सके एवं जब भी आवश्यकता हो उसे उपलब्ध् किया जा सके। संप्रेषण आथ्िार्क घटनाओं की पहचान की जाती है उन्हें मापा जाता है एवं उनका अभ्िालेखन किया जाता है जिससे प्रसंगानुकूल सूचना तैयार होती है एवं इसका, प्रबन्ध्कों एवं दूसरे आंतरिक एवं बाह्य उपयोगकतार्ओं को, एक विश्िाष्ट रूप में सम्प्रेषण होता है। सूचना का लेखा प्रलेखों के माध्यम सेनियमित रूप से संप्रेष्िात किया जाता है। इन प्रलेखों द्वारा दी गइर् सूचना उन विभ्िान्न उपयोगकत्तार्ओं केलिए उपयोगी होती है जो उद्यम की वित्तीय स्िथति एवं प्रदशर्न के आकलन, व्यावसायिक ियाओं के नियोजन एवं नियंत्राण तथा समय - समय पर आवश्यक निणर्य लेने में रुचि रखते हैं। लेखांकन सूचना प्रणाली को इस प्रकार से बनाना चाहिए कि सही सूचना, सही व्यक्ित को सही समय पर संप्रेष्िात हो सके। प्रलेख उपयोगकतार्ओं की आवश्यकताओं को देखते हुए अभ्िालेख दैनिक,साप्ताहिक, मासिक या पिफर त्रौमासिक हो सकते हैं। इस संप्रेषण प्रिया का महत्त्वपूणर् तत्व लेखापाल की योग्यता एवं कायर् उपयुक्त सूचना के प्रस्तुतिकरण में है। 1ण्1ण्3 संगठन संगठन से अभ्िाप्राय किसी व्यावसायिक उद्यम से है जिनका उद्देश्य लाभ कमाना है अथवा नहीं। ियाओं के आकार एवं व्यवसाय के परिचालन स्तर के आधर पर यह एकल स्वामित्व इकाइर्, साझेदारी पफमर्, सहकारी समिति या कंपनी, स्थानीय निकाय, नगरपालिका अथवा कोइर् अन्य संगठन हो सकता है। बाॅक्स - 2 उपयोगकत्तार्ओं को लेखांकन सूचना की आवश्यकता क्यों होती है। उपयोगकत्तार् लेखांकन सूचना की मांग विभ्िान्न उद्देश्यों से करते हैंः ऽ स्वामी अंशधरी इनका उपयोग यह जानने के लिए करते हैं कि क्या वे अपने निवेश पर पयार्प्त वापसी प्राप्तकर रहे हैं एवं अपनी कंपनी/व्यवसाय के वित्तीय स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए करते हैं। ऽ निदेशक/प्रबन्ध्क इनका उपयोग निष्पादन का मूल्यांकन करने हेतु आंतरिक एवं बाह्य दोंनों प्रकार की तुलना करने के लिए करते हैं। अपनी कंपनी की शक्ित एवं कमी का निधर्रण करने के लिए वह अपनी कंपनीके वित्तीय विश्लेषण की तुलना उद्योग के आंकड़ो से कर सकते हैं। प्रबन्ध्क यह भी सुनिश्िचत करना चाहते हैं कि कंपनी संगठन में विनियोजित राश्िा की पयार्प्त वापसी आ रही है तथा कंपनी संगठन अपनेट्टणों को चुकाने में सक्षम हैं एवं वह सम्पन्न बना रहता है। ऽ लेनदार ;ट्टणदाताद्ध यह जानने को उत्सुक होते हैं कि क्या उनके द्वारा दिए गए ट्टण का भुगतान समयपर हो सकेगा एवं विशेष रूप से वित्तीय तरलता को देखते हैं जो किसी कंपनी/संगठन के ट्टणों की देयता के समय इनके भुगतान की क्षमता को दशार्ती है। ऽ भावी निवेशक यह निश्िचत करने के लिए इनका उपयोग करतें हैं कि उन्हें अपना ध्न इस कंपनी/संगठन में लगाना चाहिए अथवा नहीं। ऽ सरकार एवं कंपनी रजिस्ट्रार, कस्टम विभाग, रिजवर् बैंक आॅपफ इंडिया आदि नियमन संस्थाओं को विभ्िान्न करों के भुगतान के सम्बन्ध् में सूचना चाहिए। ये कर हैं - वैट, आयकर, आबकारी एवं उत्पाद शुल्क जोनिवेशकों एवं लेनदारों ;ट्टणदाताद्ध के हितों की रक्षा कर सके एवं समय - समय पर कंपनी अध्िनियम 1956 एवं ैम्ठप् द्वारा निश्िचत वैधनिक दायित्वों को पूरा करा सवेंफ। 1ण्1ण्4 सूचना के इच्छुक उपयोगकत्तार् लेखांकन का संबंध् व्यवसाय की वित्तीय सूचना के संप्रेषण से है तथा इसे व्यवसाय की भाषा भी कहाजाता है। अनेक उपयोगकत्तार्ओं को महत्त्वपूणर् निणर्य लेने के लिए वित्तीय सूचना की आवश्यकता होती है। इन उपयोगकत्तार्ओं को दो वगोर्ं में बाँटा जा सकता है œ आंतरिक उपयोगकतार् एवं बाह्य उपयोगकत्तार्।आंतरिक उपयोगकत्तार् में सम्िमलित हैंः मुख्य कायर्कारी, वित्तीय प्राध्िकारी, उपप्रधन, व्यावसायिक इकाइर्प्रबन्ध्क, संयन्त्रा प्रबन्ध्क, स्टोर प्रबन्ध्क, लाइन पयर्वेक्षक आदि। बाह्य उपयोगकत्तार् हैंः वतर्मान एवं भावीनिवेशक ;शेयर धरकद्ध, लेनदार ;बैंक, एवं अन्य वित्तीय संस्थान, ट्टण - पत्रा धारक एवं दूसरे ट्टणदाताद्ध, कर अध्िकारी, नियमन एजेन्सी ;कंपनी मामलों का विभाग, कंपनी रजिस्ट्रार, भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोडर्, श्रम संगठन, व्यापारिक संघ, स्टाॅक एक्सचेंज, एवं ग्राहक आदि।द्ध लेखांकन का मूल उद्देश्य निणर्य लेने के लिए उपयोगी सूचना उपलब्ध् कराना है। यह साध्य को प्राप्त करने का साध्न है और वह साध्य है, निणर्य जिसे उपलब्ध् लेखांकन सूचना से सहायता मिलती है। आप लेखांकन सूचना के प्रकारों एवंइसके उपयोगकत्तार्ओं के संबंध् में इस अध्याय में आगे पढ़ेंगे। 1ण्2 लेखांकन एक सूचना के स्रोत के रूप में जैसा कि पहले चचार् की जा चुकी है लेखांकन एक सूचना के स्रोत के रूप में, परस्पर एक दूसरे से जुड़ी ियाओं की एक सुनिश्िचत प्रिया है ;देखें चित्रा 1ण्1द्ध जो लेन - देनों की पहचान से आरम्भहोती है तथा वित्तीय विवरणों के निमार्ण पर समाप्त होती है। लेखांकन प्रिया के प्रत्येक चरण मंे सूचना उत्पन्न होती है। सूचनाओं का विकास अपने आप में साध्य नहीं है। यह सूचना के विभ्िान्न उपयोगकत्तार्ओं में सूचना के प्रसार का माध्यम है। यह सूचना इच्छुक वगोर् को उचित निणर्य लेने में सहायक होती है। इसीलिए सूचना का प्रसार लेखांकन का अनिवायर् कायर् है। लेखांकन सूचना को उपयोगी बनाने के लिए निम्न को सुनिश्िचत करने की आवश्यकता होती हैœ ऽ आथ्िार्क निणर्य लेने के लिए सूचना उपलब्ध् कराना। ऽ वित्तीय विवरणों को सूचना के प्रमुख स्रोत मानकर उनपर निभर्र करने वाले उपयोगकत्तार्ओं की सेवा करनाऋ ऽ सम्भावित रोकड़ प्रवाह की राश्िा, समय एवं अनिश्चितता के पूवार्नुमान लगाने एवं मूल्यांकन के लिए उपयोगी सूचना उपलब्ध् करानाऋ ऽ लक्ष्यों की प्राप्ित हेतु संसाध्नों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रबन्ध्कों की योग्यता की जाँच के लिए सूचना प्रदान करनाऋ ऽ ऐसे विषय जिनकी व्याख्या, मूल्यांकन, पूवार्नुमान या आकलन किया जाता है उनको निहित संकल्पनाओं को स्पष्ट करने के लिये तथ्यात्मक एवं व्याख्यात्मक सूचना प्रदान करनाऋ एवं ऽ समाज को प्रभावित करने वाले कायोर्ं से संबंध्ित सूचना प्रदान करना। स्वयं जाँचिए - 1 वाक्यों को पूरा करेंः ;कद्ध वित्तीय विवरणों में दी गइर् सूचना ............ लेन - देनों पर आधरित होती है। ;खद्ध आंतरिक उपयोगकत्तार् व्यावसायिक इकाइर् के ............ होते हैं। ;गद्ध ............ कोइर् व्यावसायिक इकाइर् ट्टण के लिए उपयुक्त है या नहीं इसका निधर्रण करने के लिएउसकी वित्तीय सूचना का उपयोग करना चाहेगा। ;घद्ध ........... व्यवसाय से बाहर के वह लोग होते हैं जो व्यवसाय के संबंध् में निणर्य लेने के लिए सूचना का उपयोग करते हैं। ;घद्ध इन्टरनेट वित्तीय सूचना उपयोगकत्तार्ओं को जारी करने के ............. में कमी लाने में सहायक रही है। ;चद्ध सूचना उपयुक्त होगी यदि यह .......... है। ;छद्ध लेखांकन प्रिया .............. से प्रारम्भ होती है और .......... पर समाप्त होती है। ;जद्ध लेखांकन व्यावसायिक प्रिया लेन - देनों को .......... रुप में मापती है। ;झद्ध चिन्िहत एवं मापित आथ्िार्क घटनाओं को ................ में अभ्िालेख्िात करना चाहिए। आइए करके देखें आज के समाज मे कुछ लोग एक लेखाकार को मात्रा गौरव प्राप्त पुस्त - पालक समझते हैं जबकि लेखाकार की भूमिका निरन्तर बदल रही है। कक्षा में चचार् करें कि लेखांकन प्रिया की वास्तविकता क्या है? लेखांकन सूचना के विकास में लेखाकार घटनाओं एवं लेन - देनों को मापने एवं उनके प्रियन के लिएउनका अवलोकन, जाँच एवं पहचान करता है एवं उपयोगकत्तार्ओं के संप्रेषणों के लिए लेखांकन सूचनासे परिपूणर् विवरण तैयार करता है। इन विवरणों की प्रबन्ध्क एवं अन्य उपयोगकत्तार् व्याख्या करते हैं, अवकूटन करते हैं एवं उनका उपयोग करते हैं। यह सुनिश्िचत करना आवश्यक है कि सूचना निणर्य लेनेके लिए प्रासंगिक, पयार्प्त एवं विश्वसनीय हो। लेखांकन सूचना की आंतरिक एवं बाह्य उपयोगकत्तार्ओं के एक दूसरे से भ्िान्न दिखने वाली आवश्यकता के कारण लेखांकन विषय में उप - विषयों का विकास हुआहै जो हैं वित्तीय लेखांकन, लागत लेखांकन एवं प्रबन्ध् लेखांकन ;देखें बॅाक्स 3द्ध। वित्तीय लेखांकन वित्तीय लेन - देनों को व्यवस्िथत अभ्िालेखन एवं वित्तीय विवरणों को बनाने एवंप्रस्तुतिकरण में सहायता करता हैं जिससे कि संगठनात्मक सपफलता एवं वित्तीय सुदृढ़ता को मापा जा सके। इसका संबंध् बीते हुए समय से होता है। प्राथमिक रूप से यह संरक्षणता का कायर् करता है साथही इसकी प्रकृति मौदि्रक है। इसका कायर् सभी हिताथ्िार्यों को वित्तीय सूचना प्रदान करना है। लागत लेखांकन पफमर् के द्वारा विभ्िान्न उत्पादों के विनिमार्ण या प्रदत्त सेवाओं की लागत निधर्रण के व्यय के विश्लेषण एवं मूल्य निधर्रण में सहायता प्रदान करता है। यह लागत पर नियन्त्राण में सहायता करता है एवं प्रबन्ध्कों को निणर्य लेने के लिए आवश्यक लागत संबंध्ी सूचना प्रदान करता है। प्रबन्ध् लेखांकन संगठन में कायर्रत लोगों को आवश्यक लेखांकन सूचना प्रदान करना है जिससे कि वह व्यावसायिक कायोर् के सम्बन्ध् में निणर्य ले सके, योजना बना सके एवं नियन्त्राण कर सके। प्रबन्ध्लेखांकन के लिए सूचना मुख्यतः वित्तीय लेखांकन एवं लागत लेखांकन से प्राप्त होती है जो प्रबन्ध्कोंको बजट बनाने, लाभ प्रदत्त का आकलन करने, मूल्य निधर्रण करने, पूँजीगत व्यय के संबंध् में निणर्य लेने आदि में सहायक होता है। इसके साथ ही यह अन्य दूसरी सूचनाएं ;परिमाणात्मक एवं गुणात्मक,वित्तीय एवं गैर - वित्तीयद्ध भी देता है जो भविष्य से संबंध्ित होती है तथा संगठन के निणर्यों के लिए प्रासंगिक भी। इन सूचनाओं में सम्िमलित हैं, संभावित विक्रय, रोकड़ प्रवाह, क्रय की आवश्यकताएं,श्रम शक्ित की आवश्कताएं, हवा - पानी, भूमि, प्राकृतिक साध्न, मानवीय सामाजिक उत्तरदायित्व पर प्रभाव के संबंध् में पयार्वरण के आंकड़े। परिणामस्वरूप लेखांकन का क्षेत्रा इतना व्यापक हो गया है कि नये क्षेत्रा, जैसे œ मानव संसाधन लेखांकन, समाजिक लेखांकन, उत्तरदायित्व लेखांकन भी महत्त्वपूणर् हो गये हैं। 1ण्2ण्1 लेखांकन की गुणात्मक विशेषताएं गुणात्मक विशेषताएं उस लेखांकन सूचना का परिणाम है जो इसकी बोध्गम्यता एवं उपयोगिता को बढ़ाती हैं। लेखांकन सूचना का निणर्य लेने में उपयोगिता के मूल्यांकन के लिए इसमें विश्वसनीयता, प्रासंगिकता, बोध्गम्यता तथा तुलनात्मकता का गुण होना आवश्यक है। विश्वसनीयता विश्वसनीयता का अथर् है कि उपयोगकतार् सूचना पर निभर्र रह सके। लेखांकन सूचना की विश्वसनीयता इस बात पर निभर्र करती है कि जो घटनाएं एवं लेन - देन हुए हैं उनके मापन व प्रस्तुतिकरण के बीच किस स्तर का अंतस±बंध् है। विश्वसनीय सूचना अनावश्यक अशुि, व्यक्ितगत आग्रह से मुक्त होनी चाहिए तथा उसे विश्वसनीय रूप से वही दशार्ना चाहिए जो उससे अपेक्ष्िात है। विश्वसनीयता को सुनिश्िचित करने के लिए सूचना विश्वास के योग्य होनी चाहिए, जिसकी जाँच स्वतंत्रा रूप से उन पक्षों द्वारा की जा सके जो समान मापन की समान विध्ि का उपयोग कर रही हैं जो निष्पक्ष एवं समपिर्त हैं ;देखें चित्रा 1ण्2द्ध। बाॅक्स - 3 लेखांकन की शाखाएं: आथ्िार्क विकास एवं तकनीकी सुधर के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर प्रचालन एवं व्यवसाय के कंपनी स्वरूप का प्रादुभार्व हुआ है। इसके कारण प्रबन्ध् कायर् और अध्िक जटिल हो गया है तथा इससे लेखांकनसूचना का महत्त्व बढ़ गया है। इसके परिणामस्वरूप लेखांकन की विश्िाष्ट शाखाओं का जन्म हुआ है इनका वणर्न संक्षेप में नीचे किया गया है। वित्तीय लेखांकन: लेखांकन की इस शाखा का उद्देश्य प्रत्येक वित्तीय लेन - देन का ब्यौरा रखना है जिससे किः ;कद्ध एक लेखांकन अवध्ि में व्यवसाय में कितना लाभ कमाया है अथवा हानि हुइर् है, को ज्ञात किया जा सके,;खद्ध लेखांकन अवध्ि के अंत में व्यवसाय की वित्तीय स्िथति का निधर्रण किया जा सके,;गद्ध प्रबन्ध्क एवं अन्य रुचि रखने वाले पक्षों को आवश्यक वित्तीय सूचना उपलब्ध् कराना। लागत लेखांकन: लागत लेखांकन का उद्देश्य खचोर्ं का विश्लेषण करना है जिससे कि व्यावसयिक इकाइर् द्वारा विनिमिर्त विभ्िान्न उत्पादों की लागत निधर्रित की जा सके एवं मूल्य निश्िचत किये जा सवेंफ। यह लागत निधर्रण एवं निणर्य लेने के लिए प्रबन्ध्कों को आवश्यक लागत की सूचना प्रदान करने में सहायक होती है। प्रबन्ध् लेखांकन: प्रबन्ध् लेखांकन का उद्देश्य प्रबन्ध् को नीति संबंध्ित विवेक पूणर् निणर्य लेने एवं इसके नियमित कायार्वाही के प्रभाव का मूल्यांकन करने में सहायक होता है। प्रासंगिकता सूचना तभी प्रासंगिक होगी जबकि यह समय पर उपलब्ध् होगी, पूवार्नुमान लगाने एवं प्रत्युत्तर देने मेंहोगी। सूचना की प्रासंगिकता के लिए इसे उपयोगकत्तार्ओं के निणर्यों को निम्न के द्वारा प्रभावित करना अनिवायर् हैंः ;कद्ध भूत, वतर्मान एवं भविष्य की घटनाओं के परिणामों का पूवार्नुमान लगाने, करने एवं प्रत्युतर देने में सहायक होना, अथवा ;खद्ध पिछले मूल्यांकन की पुष्िट अथवा उनमें संशोध्न करना। चित्रा 1ण्2ः लेखांकन सूचना की गुणात्मक विशेषताएंबोध्गम्यता बोध्गम्यता से आशय है कि जो लोग निणर्य लेते हैं उन्हें लेखांकन सूचना को उसी संदभर् में समझना चाहिए जिस संदभर् में उन्हें तैयार किया गया है एवं प्रस्तुत किया गया है। किसी संदेश की वह विशेषताएं जो अच्छे अथवा बुरे संदेश में भेद करती हैं संदेश की बोध्गम्यता का आधर है। संदेश तभी संपे्रष्िात माना जाता है जब वह प्रेषणी द्वारा उसे उसी अथर् में समझा जाए जिस अथर् में भेजा गया है। लेखाकारों को सूचना को बिना प्रासंगिकता एवं विश्वसनीयता को खोए इस प्रकार से प्रस्तुत करना चाहिए कि वह बोध्गम्य हो। तुलनीयता यह पयार्प्त नहीं है कि वित्तीय सूचना एक समय विशेष पर विशेष परिस्िथतियों में अथवा विशेष प्रतिवेदन ;रिपोटर्द्ध इकाइर् के लिए ही प्रासंगिक एवं विश्वसनीय हो। लेकिन यह भी महत्त्वपूणर् है कि सूचना के उपयोगकत्तार् साधरण उद्देश्य के लिए प्रस्तुत व्यवसाय के वित्तीय प्रलेखों में प्रदश्िार्त विभ्िान्न आयामों की अन्य व्यावसायिक इकाइर्यों से परस्पर तुलना कर सकें। लेखांकन प्रलेखों की तुलना करने के लिए यह आवश्यक है कि उनका संबंध् समान अवध्ि व समान मापन इकाइर् व समान प्रारूप में किया गया हो। स्वयं जाँचिए - 2 आप रामोना एंटरप्राइिाश में वरिष्ठ लेखाकार हैंे। आप अपनी कंपनी के वित्तीय विवरणों एवं निणर्यों को उपयोगी बनाने के लिए कौन से तीन कदम उठाएंगे? 1 - - - - - - - - - - - 2 - - - - - - - - - - - 3 - - - - - - - - - - - संकेतः लेखांकन सूचना की गुणात्मक विशेषताओं को देखें। 1ण्3 लेखांकन के उद्देश्य सूचना प्रणाली के रूप में लेखांकन का मूल उद्देश्य इसके बाह्य एवं आंतरिक उपयोग करने वाले दोनोंसमूहों को उपयोगी सूचना उपलब्ध् कराना है। आवश्यक सूचना विशेषतः बाह्य उपयोगकत्तार्ओं को वित्तीय विवरणों, जैसे - लाभ - हानि खाता एवं तुलन - पत्रा, के रूप में प्रदान की जाती है। इनके अतिरिक्त प्रबन्धकों को समय - समय पर अतिरिक्त सूचना व्यवसाय के लेखांकन प्रलेखों से प्राप्त होती है। अतः लेखांकन के मूल उद्देश्य निम्नलिख्िात हंैः 1ण्3ण्1 व्यावसायिक लेन - देन का हिसाब रखना लेखांकन का उपयोग लेखांकन पुस्तकों में सभी वित्तीय लेन - देनों के व्यवस्िथत रूप में लेखा रखने के लिए किया जाता है। व्यवसाय में बहुत प्रतिभावान अध्िकारी एवं प्रबंध्क भी पूणर् शु(ता के साथ व्यवसाय में प्रतिदिन के विभ्िान्न लेन - देनों जैसे - क्रय, विक्रय, प्राप्ित, भुगतान आदि, को पूणर् शु(ता के साथ स्मरण नहीं रख सकते। इसीलिए सभी व्यावसायिक लेन - देनों का सही एवं पूणर् लेखा नियमित रूप से रखा जाता है। इसके अतिरिक्त लेखांकित सूचना से सत्यता की जांच की जा सकती है तथा इसका उपयोग प्रमाण के रूप में किया जाता है। 1ण्3ण्2 लाभ अथवा हानि की गणना व्यवसाय के स्वामी निश्िचत अवध्ि के व्यावसायिक कायर्कलापों के शु( परिणामों को जानने के इच्छुक रहते हैं अथार्त् व्यवसाय ने लाभ कमाया है अथवा उससे हानि हुइर् है। अतः लेखांकन का दूसरा उद्देश्य किसी लेखांकन अवध्ि के दौरान व्यवसाय के लाभ अथवा हानि का निधर्रण है। जिसका निधार्रण व्यवसाय के उस अवध्ि के आय एवं व्ययों के लेखे - जोखों की सहायता से लाभ - हानि खाता बनाकर सरलता से किया जा सकता है। लाभ आगम ;आयद्ध के व्यय से आध्िक्य को प्रकट करता है। यदि किसी एक अवध्ि की कुल आगम 60ए000 रु. तथा कुल व्यय 5ए40ए000 रु. है तो लाभ की राश्िा 60ए000 रु. होगी ;6ए00ए000 रु.√ 5ए40ए000 रु.द्ध होगा। यदि कुल व्यय कुल आगम से अध्िक है तो अन्तर हानि को दशार्एगा। 1ण्3ण्3 वित्तीय स्िथति को प्रदश्िार्त करना लेखांकन का उद्देश्य प्रत्येक लेखांकन अवध्ि के अन्त में परिसंपिायों एवं देयताओं के रूप में वित्तीय स्िथति का निधर्रण करना है। किसी व्यावसायिक संगठन के संसाध्नों एवं इनके विरु( दावों ;देयताओंद्ध का सही लेखा - जोखा एक विवरण, जिसे, स्िथति विवरण अथवा वस्तु स्िथति विवरण अथवा तुलन - पत्रा कहते हैं, को बनाने में सहायता प्रदान करता है। 1ण्3ण्4 उपयोगकत्तार्ओं को सूचनाएं उपलब्ध् कराना लेखांकन प्रिया से जनित लेखांकन सूचना को प्रतिवेदन विवरण ग्रापफ एवं चाटर् रूप में उन उपयोगकत्तार्ओं को संपे्रष्िात की जाती है जिन्हें विभ्िान्न निणर्य परिस्िथतियों में इनकी आवश्यकता होती है। जैसा कि पहलेबताया जा चुका है। मुख्यतः उपयोगकत्तार्ओं के दो समूह हैं। आंतरिक उपयोगकत्तार् जिनमें मुख्यतः प्रबन्धक होते हैं जिन्हें नियोजन, नियन्त्राण एवं निणर्य लेने के लिए समय पर विक्रय लागत, लाभप्रदता आदि कीसूचना की आवश्यकता होती है एवं वाह्य उपयोगकत्तार् जिनमें आवश्यक सूचनाएं प्राप्त करने के सीमितअध्िकार, योग्यता एवं साध्न होते हैं तथा जिन्हें वित्तीय विवरणों ;तुलन - पत्रा, लाभ - हानि खाताद्ध पर निभर्रकरना होता है। बाह्य उपयोगकत्तार् मूलतः निम्न में रुचि रखते हैंः ऽ निवेषक एवं संभावित निवेषकः निवेष की जोख्िाम एवं उन पर आय के संबंध् में सूचनाएं। ऽ क्रमसंघ एवं कमर्चारी समूहः व्यवसाय की स्िथरता, लाभप्रदता एवं उसके ध्न के बंटवारे के सम्बन्ध् में सूचनाएं। ऽ ट्टणदाता एवं वि त्तीय संस्थान कंपनी की साख एवं इसकी ट्टण एवं ब्याज को भुगतान की क्षमता से परिपक्व संबंध्ित सूचना। ऽ आपूतिर्कत्तार् एवं लेनदारः देनदारी की तिथ्िा को भुगतान करने तथा व्यवसाय की निरंतरता के संबंध् में सूचना। ऽ ग्राहकः व्यवसाय की निरंतरता परिणामतः उत्पाद पाटर््स एवं बिक्री के पश्चात की सेवाओं के संबंध् में सूचनाएं। ऽ सरकार एवं अन्य नियमकः संसाध्नों के आबंटन एवं नियमों के पालन से संबंध्ित सूचना। ऽ सामाजिक उत्तरदायित्व समूहः जैसे - पयार्वरण समूह - पयार्वरण पर प्रभाव एवं उसके संरक्षण के सम्बन्ध् मंे सूचना। ऽ प्रतियोगीः अपने प्रतियोगी की अपेक्षाकृत शक्ित एवं तुलनात्मक निदेर्श चिन्ह के उद्देश्य सेसंबंिात सूचना। जबकि उपयुर्क्त वगर् के उपयोगकत्तार् कम्पनी की संपिा हिस्सा बंटाते हैं, प्रतियोगी सूचनाओं की आवश्यकता मुख्यतः व्यूह रचना के लिए होती है। स्वयं जाँचिए - 3 कौन सा समूह ........... में अध्िकतम रुचि लेगाः - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - ;कद्ध पफमर् को वैट एवं अन्य कर देयता - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - ;खद्ध भावी वेतन, पुरस्कार एवं बोनस - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - ;गद्ध पफमर् की नैतिक एवं पयार्वरण संबंध्ी ियाएं - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - ;घद्ध क्या पफमर् का दीघर् - अवध्ि भविष्य है - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - ;घद्ध लाभप्रदता, एवं - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - ;चद्ध पफमर् द्वारा सेवा प्रदान करने अथवा वस्तु के उत्पादन कायर् को करने की क्षमता 1ण्4 लेखांकन की भूमिका शताब्िदयों से आथ्िार्क विकास में परिवतर्न एवं सामाजिक आवश्यकताओं की बढ़ती मांग के साथ लेखांकन की भूमिका में परिवतर्न होता रहा है। यह किसी उद्यम के मापन वगीर्करण एवं संक्ष्िाप्तीकरण के द्वारा उन्हें विश्लेष्िात एवं वण्िार्त भी करता है और उन्हें विवरणों व प्रतिवेदनों के रूप में प्रस्तुत करताहै। ये विवरण एवं प्रतिवेदन उस संगठन की वित्तीय स्िथति व संचालन परिणामों को प्रदश्िार्त करते हैं।इसीलिए इसे व्यवसाय की भाषा कहा जाता है। परिमाणात्मक वित्तीय सूचना प्रदान कर यह सेवा कायर्भी करता है जो उपयोगकत्तार्ओं को अनेक प्रकार से सहायता देती है। एक सूचना प्रणाली के रूप में लेखांकन एक संगठन की विभ्िान्न प्रकार की सूचनाओं को एकत्रिात करके उन्हें व्यवसाय में रुचि रखने वाले विभ्िान्न पक्षों वफो संप्रेष्िात करता है। लेखांकन सूचनाओं का संबंध् भूतकाल के लेन - देनों से होताहै तथा यह परिमाणात्मक एवं वित्तीय होती है। यह गुणात्मक एवं गैर - वित्तीय सूचना प्रदान नहीं करती। लेखांकन सूचनाओं का उपयोग करते समय लेखांकन की इन सीमाओं को ध्यान में रखना आवश्यक है। स्वयं जाँचिए - 4 सही उत्तर पर निशान लगाएं 1ण् निम्न में से कौन सी व्यावसायिक लेन - देन नहीं हैः ;कद्धव्यवसाय के लिए 10ए000 रु. का पफनीर्चर खरीदा। ;खद्ध 5ए000 रु. का कमर्चारियों को वेतन का भुगतान किया। ;गद्धअपने निजी बैंक खाते से 20ए000 रु. अपने बेटे की पफीस का भुगतान किया। ;घद्ध 20ए000 रु. व्यवसाय में से बेटे की पफीस का भुगतान किया। 2ण् दीप्ित अपने व्यवसाय के लिए एक भवन खरीदना चाहती है। इस निणर्य से संबंध्ित उपयुक्त आंकड़े कौन से हैं ;कद्धइसी प्रकार के व्यवसाय ने वषर् 2000 में 1ए00ए000 रु. का भवन खरीदा। ;खद्ध 2003 की भवन की लागत का विवरण। ;गद्ध 1998 की भवन की लागत का विवरण। ;घद्ध इसी प्रकार के भवन की अगस्त 2005 में लागत 25ए00ए000 रु.। 3ण् एक सूचना प्रिया के रूप में लेखांकन का अन्ितम चरण कौन सा है? ;कद्धलेखा - पुस्तकों में आंकड़ो का लेखा। ;खद्ध वित्तीय विवरणों के रूप में संक्ष्िाप्तीकरण। ;गद्धसूचना का संप्रेषण। ;घद्ध सूचना का विश्लेषण एवं उसकी व्याख्या करना। 4ण् जब लेखांकन सूचना को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर दिया गया हो तो लेखांकन सूचना की कौन सी गुणात्मक विशेषता परिलक्ष्िात होती हैः ;कद्धसुबोध्ता ;खद्ध प्रासंगिकता ;गद्धतुलनीयता ;घद्ध विश्वसनीयता 5ण् मापने की सामान्य इकाइर् एवं प्रतिवेदन का साधरण प्रारूप प्रोत्साहित करता हैः ;कद्धतुलनीयता ;खद्ध सुबोध्ता बोध्गम्यता ;गद्धउपयुक्तता ;घद्ध विश्वसनीयता बाॅक्स - 4 लेखांकन की विभ्िान्न भूमिकाएं ऽ एक भाषा के रूप मेंः इसे व्यवसाय की भाषा माना गया है जिसे व्यवसाय से संबध्ित सूचना को संप्रेष्िात करने के उपयोग मे लाया जाता है। ऽ एक ऐतिहासिक लेखाः इसे किसी व्यवसाय को वित्तीय सौदों का क्रमवार लेखा माना जाता है वास्तविक राश्िा पर वतर्मान आथ्िार्क वास्तविकता - इसे किसी इकाइर् की सही आय के निधर्रण का माध्यम माना जाता है एक समय से दूसरे समय में ध्न में परिवतर्न होता है। ऽ एक सूचना तंत्राः इसे एक ऐसी प्रिया माना जाता है जो संप्रेषण मागर् के द्वारा सूचना ड्डोत ;लेखाकारद्ध कोप्राप्तकत्तार्ओं ;बाह्य उपयोगकत्तार्द्ध से जोड़ता है। ऽ एक वस्तुः विश्िाष्ट सूचना को एक ऐसी सेवा माना जाता है जिसकी समाज में मांग है तथा लेखाकार जिसे उपलब्ध् कराने के लिए इच्छुक एवं सक्षम भी हैं। 1ण्5 लेखांकन के आधरभूत पारिभाष्िाक शब्द 1ण्5ण्1 इकाइर् यहाँ इकाइर् से अभ्िाप्राय एक ऐसी वस्तु से है जिनका एक निश्िचत अस्ितत्व है। व्यावसायिक इकाइर् से अभ्िाप्राय विशेष रूप से पहचान किए गये व्यावसायिक उद्यम से है जैसे - सुपर बाजार, हायर ज्वैलसर्, आइर्.टी.सी.लि., आदि। एक लेखांकन प्रणाली को सदा विश्िाष्ट व्यावसायिक अस्ितत्व के लिए तैयार किया जाता है ;इसे लेखांकन इकाइर् भी कहते हैंद्ध। 1ण्5ण्2 लेन - देन दो या दो से अध्िक इकाइयों के बीच कोइर् घटना जिसका कुछ मूल्य होता है लेन - देन कहलाता है। यह माल का क्रय, ध्न की प्राप्ित, लेनदार को भुगतान, व्यय आदि हो सकती है। यह एक नकद अथवा उधार सौदा हो सकता है। 1ण्5ण्3 परिसंपिायां यह किसी उद्यम के आथ्िार्क ड्डोत होते हैं जिन्हें मुद्रा के रूप में उपयोगी ढंग से प्रकट किया जा सकताहै। परिसंपिायों का मूल्य होता है तथा इनका व्यवसाय के परिचालन में उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए सुपर बाजार के पास ट्रकों का बेड़ा है जिनका उपयोग यह खाद्य पदाथोर्ं की सुपुदर्गी के लिए करता है। ट्रक इस प्रकार से उद्यम को आथ्िार्क लाभ पहुँचाते रहे हैं। इसे सुपर बाजार के तुलन - पत्राकी परिसंपिा की ओर दशार्या जाएगा। परिसंपिायों को सामान्यतया दो वगोर्ं में बाँटा जा सकता हैः स्थाइर् परिसंपिायां - यह वह परिसंपिायां हैं जिन्हें लम्बी अवध्ि के लिए रखा जाता है। जैसे - भूमि,भवन, मशीनरी, संयन्त्रा, पफनीर्चर आदि। इन परिसंपिायों को व्यवसाय की साधरण प्रचालन में प्रयोग किया जाता है।चालू परिसंपिायांः यह वे परिसंपिायां हैं जिन्हें अल्प - अवध्ि के लिए रखा जाता है। जैसे देनदार ;प्राप्य लेखेद्ध, प्राप्य बिल ;विपत्राद्ध, स्टाॅक ;रहतियाद्ध, अस्थाइर् प्रतिभूतियां, रोकड़ एवं बैंक शेष। 1ण्5ण्4 देयताएं यह वे देनदारियां या ट्टण हैं जिनका भुगतान व्यावसायिक इकाइर् ने भविष्य मंे किसी समय करना है।यह लेनदारों का पफमर् की परिसंपिायों पर दावे का प्रतिनिध्ित्व करती है। व्यवसाय चाहे छोटा हो या बड़ा कभी न कभी उसे ध्न उधर लेने और उधर पर वस्तुएं खरीदने की आवश्यकता पड़ती है। उदाहरण के लिए 25 माचर्, 2005 को सुपर बाजार ने पफास्ट पफूड प्रोडक्ट्स कंपनी से 10ए000 रुका माल उधर क्रय किया। यदि 31 माचर्, 2005 को सुपर बाजार का तुलन - पत्रा तैयार किया जाए तो पफास्ट पफूड प्रोडक्ट्स कंपनी को उसके स्िथति विवरण के देयता पक्ष में लेनदार ;खाते देयद्ध के रूप में दशार्या जायेगा। यदि सुपर बाजार दिल्ली स्टेट कोआॅपरेटिव बैंक लि. से तीन वषर् की अवध्िके लिए ट्टण लेती है तो इसे भी सुपर बाजार के तुलन - पत्रा में देनदारी के रूप में दशार्या जायेगा। देयताओं को दो वगोर्ं में बांटा गया है - दीघर्कालिक देयताएं एवं अल्पकालिक देयताएं। दीघर्कालिक देयताएंः यह वे देयताएं है जिनका भुगतान सामान्यतः एक वषर् की अवध्ि के पश्चातकिया जाता है। उदाहरण के लिए एक वित्तीय संस्था से दीघर्कालिक ट्टण या किसी कंपनी द्वारानिगर्मित ट्टण - पत्रा ;बांडद्ध। अल्पकालिक देयताएंः यह वे देयताएं है जिनका भुगतान एक वषर् की अवध्ि के भीतर किया जाना है। उदाहरण के लिए देनदार, देय बिल, बैंक अध्िविकषर् आदि। 1ण्5ण्5 पूँजी स्वामी द्वारा व्यवसाय में उपयोग के लिए किया जाने वाला निवेष पूँजी कहलाता है। व्यावसायिकइकाइर् के लिए इसे स्वामी रोकड़ अथवा परिसंपिा के रूप में लाता है। पँूजी व्यवसाय कीपरिसंपिायों पर स्वामी का दायित्व एवं दावा है इसलिए इसे तुलन - पत्रा के देयता की ओर पूँजी के रूप में दशार्या जाता है। 1ण्5ण्6 विक्रय विक्रय वस्तुओं की बिक्री या सेवाओं की बिक्री या उपयोगकत्तार्ओं को प्रदान की गइर् सेवाओं से प्राप्त कुल आगम है। विक्रय नकद भी हो सकता है और उधर भी। 1ण्5ण्7 आगम यह वह ध्नराश्िा है जो व्यवसाय वस्तुओं की बिक्री या उपभोक्ताओं को प्रदान की गइर् सेवाओं से अजिर्त करता है। इसे विक्रय आमदनी भी कहा जाता है। आमदनी की अन्य दूसरी मदें जो अध्िकांश व्यवसायों में समान रूप से प्रयुक्त होती है यह हैः कमीशन, ब्याज, लाभांश, राॅयल्टी, किराया प्राप्त आदि। आमदनी को आय भी कहते है। 1ण्5ण्8 व्यय यह व्यवसाय में आगम अजिर्त करने की प्रिया में आने वाली लागत है। साधरणतः व्यय का मापनएक लेखांकन अवध्ि के दौरान उपयोग की गइर् परिसंपिायों या उपयोग की गइर् सेवाओं के रूप में किया जाता है। व्यय की अध्िकांश मदें हैः मूल्य ”ास, किराया, मजदूरी, वेतन, ब्याज, बिजली, पानी, दूरभाष इत्यादि की लागत। 1ण्5ण्9 पूँजी व्यय यह किसी लाभ, सेवा अथवा संपिा को प्राप्त करने पर राश्िा व्यय करना अथवा देनदारी उत्पन्न करना है। व्यय के उदाहरण हैंः किराये का भुगतान, वेतन, माल का क्रय, मशीन का क्रय, पफनीर्चर का क्रय आदि। यदि व्यय का लाभ एक वषर् के भीतर प्राप्त हो जाता है। इसे व्यय कहेंगे ;इसे आगम व्यय कहतेहैंद्ध, दूसरी ओर यदि खचेर् का लाभ एक वषर् से अध्िक मिलता है तो इसे संपिा माना जायेगा ;इसे पूंजीगत व्यय भी कहते हैंद्ध इसके उदाहरण हैं मशीन, पफनीर्चर आदि का क्रय। 1ण्5ण्10 लाभ लाभ एक लेखांकन वषर् में व्ययों पर आमदनी का अध्िक्य है। इसमें स्वामी की पूंजी में वृि होती है। 1ण्5ण्11 अभ्िावृि व्यवसाय से प्रासंगिक घटनाओं अथवा लेनदेनों से हाने वाले लाभ को अभ्िावृि कहते हैं। इसके उदाहरणहैं स्थाइर् संपिा का विक्रय, न्यायालय में किसी मुकदमे को जीतना, किसी परिसंपिा के मूल्य में वृि। 1ण्5ण्12 हानि किसी अवध्ि की संबंध्ित आगम से व्यय अध्िक्य को हानि कहते हैं। इससे स्वामी की पूँजी घटती है। यह मुद्रा अथवा मुद्रा सममूल्य ;लागत पर व्ययद्ध में हुइर् हानि की पुनः वसूली न होने की ओर संकेत करती है। उदाहरण के लिए चोरी अथवा आग दुघर्टना आदि से रोकड़ अथवा माल का नष्ट होना। इससेस्थाइर् परिसंपिा के विक्रय पर होने वाली हानि भी सम्िमलित है। 1ण्5ण्13 बट्टा बट्टा विक्रय की गइर् वस्तुओं के मूल्य में कटौती को कहते हैं। यह दो प्रकार से दी जाती है। एक ढंग है वस्तुओं के विक्रय पर सूचि मूल्य पर तय प्रतिशत से कटौती। ऐसी छूट को व्यापारिक बट्टा कहते हैं। यह साधरणतया विनिमार्ताओं द्वारा थोक व्यापारियों को एवं थोक व्यापारियों द्वारा पुफटकर विक्रेताओं को दी जाती है। वस्तुओं के उधर विक्रय पर देनदार यदि भुगतान तिथ्िा अथवा उससे पहले देय राश्िा का भुगतान कर देते हैं तो उन्हें देय राश्िा पर कुछ छूट दी जा सकती है। यह कटौती देय राश्िा पर भुगतान कटौती के समय दी जाती है। इसीलिए इसे नकद कटौती कहते हैं। नकद कटौती एक ऐसा प्रोत्साहन है जो देनदारों को तुरंत भुगतान के लिए प्रेरित करता है। 1ण्5ण्14 प्रमाणक किसी लेन - देन के समथर्न में विलेख के रूप में प्रमाण को प्रमाणक कहते हैं। उदाहरण के लिए यदि हम माल नकद खरीदते हैं तो हमें वैफशमैमो मिलता है, यदि हम इसे उधर खरीदते हैं तो हमे बीजक मिलता है, जब हम भुगतान करते हैं तो हमें रसीद प्राप्त होती है। 1ण्5ण्15 माल वह उत्पाद जिनसे व्यवसायी कारोबार करता है, माल कहलाता है। अथार्त् जिनका वह क्रय एवं विक्रय अथवा उत्पादन एवं विक्रय कर रहा है। जिन वस्तुओं को व्यवसाय में उपयोग के लिए खरीदा जाता है, उन्हें माल नहीं कहते हैं। उदाहरण के लिए पफनीर्चर विक्रेता यदि मेज एवं कुसिर्याँ खरीदता है तोयह माल है लेकिन दूसरों के लिए यह पफनीर्चर परिसंपिा माना जाता है। इसी प्रकार से स्टेशनरी का कारोबार करने वाले के लिए स्टेशनरी माल है जबकि दूसरों के लिये यह व्यय की एक मद है ;यह क्रय नहीं हैद्ध। 1ण्5ण्16 क्रय क्रय एक व्यवसाय द्वारा नकद या उधर प्राप्त वस्तुओं का कुल मूल्य है जिन्हें विक्रय करने के लिए प्राप्त किया गया है। एक व्यापारिक इकाइर् में माल को क्रय उसी रूप में या विनिमार्ण प्रिया पूणर् हो जाने के बाद विक्रय के लिए किया जाता है। एक उत्पादन इकाइर् में कच्चा माल क्रय किया जाता है। पिफर उसे तैयार माल में परिवतिर्त करके बेचा जाता है। क्रय नकद भी हो सकता है और उधर भी। 1ण्5ण्17 आहरण व्यवसाय में स्वामी द्वारा अपने व्यक्ितगत प्रयोग के लिए निकाली गइर् नकद ध्नराश्िा या वस्तुएं आहरण हैं। आहरण स्वामियों के विनियोग को घटाता है। 1ण्5ण्18 स्टाॅक किसी भी व्यवसाय में जो वस्तुएं, अतिरिक्त पुजेर् व अन्य मदें हाथ में होती हैं उनका मापन रहतिया ;स्टाॅकद्ध कहलाता है। इसे हस्तस्य रहतिया भी कहते हैं। एक व्यापारिक इकाइर् में स्टाॅक से अभ्िाप्राय उस माल से है जो लेखांकन वषर् के अन्ितम दिन बिना बिका रह गया है। इसे अन्ितम स्टाॅक या अन्ितम स्कंध् भी कहते हैं। एक उत्पादन कंपनी के अन्ितम स्टाॅक में अंन्ितम दिन का कच्चा माल, अध्र्निमिर्त व निमिर्त स्टाॅक वस्तुएं सम्िमलित होती हैं। इसी प्रकार प्रारंभ्िाक स्टाॅक किसी लेखांकन वषर् की प्रारंभ्िाक स्टाॅक राश्िा है। 1ण्5ण्19 देनदार देनदार प्राप्य खाते वे व्यक्ित या इकाइयां हैं जिनसे व्यावसायिक संस्था को उससे वस्तुएं या सेवाएं उधार प्राप्त करने के बदले कुछ ध्नराश्िा लेनी है। इन व्यक्ितयों या इकाइयों द्वारा कुल प्राप्य राश्िा को अंतिमदिन तुलन - पत्रा में विविध् देनदारों के रूप में परिसंपिा पक्ष में दशार्या जाता है। 1ण्5ण्20 लेनदार लेनदार वे व्यक्ित एवं/या इकाइयां है, जिनका किसी व्यवसायिक संस्था द्वारा उनसे उधर वस्तुएं या सेवाएं प्राप्त करने के बदले भुगतान करना है। इन व्यक्ितयों या इकाइयों को देय कुल ध्न राश्िा को अंतिम दिन स्िथति विवरण में विविध् लेनदारों ;देय खातोंद्ध के रूप में देयता पक्ष में दशार्या जाता है। स्वयं जाँचिये - 5 श्री सनराइज ने 5ए00ए000 रु. के प्रारम्िभक निवेश से स्टेशनरी क्रय - विक्रय का व्यवसाय प्रारम्भ किया। इस राश्िा में से उसने 1ए00ए000 रु. पफनीर्चर एवं 2ए00ए000 रु. स्टेशनरी का सामान खरीदने पर व्यय किये। उसने एक विक्रेता एवं एक लिपिक की नियुक्ित की। महीने के अन्त में 5ए000 रु. उनके वेतन के भुगतान किये। जो स्टेशनरी उसने क्रय की थी उसमें से कुछ तो उसने 1ए50ए000 रु. में नकद बेची तथा कुछ रवि को 1ए00ए000 रु. में उधर बेची। इसके पश्चात उसने श्री पीस से 1ए50ए000 रु. की स्टेशनरी का सामान खरीदा। अगले वषर् के प्रथम सप्ताह में अग्िन दुघर्टना हुइर् जिसमें 30ए000 रु. मूल्य की स्टेशनरी स्वाहा हो गइर्। 40ए000 रु. की लागत की मशीनरी के एक भाग को 45ए000 रु. मंे बेच दिया। उपयुर्क्त के आधर पर निम्न का उत्तर देंः 1ण् श्री सनराइज ने कितनी पूँजी से व्यापार आरम्भ किया। 2ण् उसने कौन - कौन सी स्थाइर् संपिा खरीदी? 3ण् विक्रय किये गये माल की कीमत क्या थी? 4ण् लेनदार कौन था? उसको कितनी राश्िा देय है? 5ण् उसने कौन - कौन से व्यय किये? 6ण् उसे कितना लाभ हुआ? 7ण् उसे कितनी हानि हुइर्? 8ण् उसका देनदार कौन है? उससे कितनी राश्िा प्राप्त होनी है? 9ण् उसने कुल कितनी राश्िा व्यय की एवं कुल कितनी हानि हुइर्? 10ण् बताएं कि निम्न मदें परिसंपिायां हैं, देयताएं हैं, आगम हैं, व्यय है अथवा इनमें से कोइर् भी नहीं है। विक्रय, देनदार लेनदार, प्रबन्ध्क को वेतन, देनदारों को छूट, स्वामी का आहरण। अध्िगम उद्देश्यों के संदभर् में सारांश 1ण् लेखांकन का अथर्ः लेखांकन व्यावसायिक लेन - देनों की पहचान करने, मापने, अभ्िालेखन करने एवंआवश्यक सूचना को उनके उपयोगकत्तार् को सम्प्रेषण की प्रिया है। 2ण् लेखांकन सूचना के स्रोत के रूप मेंः लेखांकन सूचना के ड्डोत के रूप में किसी संगठन की आथ्िार्कघटनाओं की सूचनाओं के पहचानने, मापने, अभ्िालेखन करने एवं सूचनाओं के उपयोगकत्तार्ओं के संप्रेषण की प्रिया है। 3ण् लेखांकन सूचना के उपयोगकत्तार्ः लेखांकन की समाज में महत्त्वपूणर् भूमिका है। यह हर स्तर के प्रबन्ध्कों को एवं उन लोगों को, जिनका उद्यम में वित्तीय हित होता है, जैसे वतर्मान एवं संभावित निवेशकत्तार्एवं लेनदार, सूचना उपलब्ध् कराता है। लेखांकन सूचना, परोक्ष रूप से वित्तीय हित रखने वालों के लिएभी महत्त्व रखती है। ये लोग हैं नियमन एजेंसीयाँ, कर अध्िकारी, ग्राहक, श्रमिक संगठन, व्यापारिक संघ, स्टाॅक एक्सचेंज तथा अन्य। 4ण् लेखांकन की गुणात्मक विशेषताएंः लेखांकन सूचना को अध्िक उपयोगी बनाने के लिए इसमें निम्न गुणात्मक विशेषताओं का होना आवश्यक हैः ऽ विश्वसनीयता ± सुबोध्ता ऽ प्रासंगिकता ± तुलनीयता 5ण् लेखांकन का उद्देश्यः लेखांकन का प्राथमिक उद्देश्य निम्न हैः ऽ व्यवसाय के िया - कलापों का अभ्िालेखनय ऽ लाभ एवं हानि की गणनाय ऽ व्यावसायिक स्िथति का प्रदशर्नऋ और ऽ विभ्िान्न वगो± के लिए सूचना उपलब्ध् कराना। 6ण् लेखांकन की भूमिकाः लेखांकन स्वयं में एक साध्य नहीं है। यह साध्य को प्राप्त करने का एक साधन है। इसकी भूमिकाएँ हैंः ऽ व्यवसाय की भाषा ऽ ऐतिहासिक अभ्िालेखन ऽ वतर्मान आथ्िार्क वास्तविकता ऽ सूचना तंत्रा ऽ उपयोगकत्तार्ओं को सेवा प्रदान करना अभ्यास के लिए प्रश्न लघु उत्तरीय प्रश्न 1ण् लेखांकन को परिभाष्िात कीजिए। 2ण् वित्तीय लेखांकन का अंतिम परिणाम क्या होता है? 3ण् लेखांकन के मुख्य उद्देश्यों की गणना कीजिए। 4ण् ऐसे पाँच उपयोगकत्तार्ओं को सूचीब( कीजिए जिनकी लेखांकन में परोक्ष रूप से रुचि होती है। 5ण् दीघर् अवध्ि ट्टणदाताओं के लिए आवश्यक लेखांकन सूचना की प्रकृति को बताइए। 6ण् सूचना के बाह्य उपयोगकत्तार् कौन हैं? 7ण् प्रबन्ध् की सूचना संबंध्ी आवश्यकता की गणना करें। 8ण् आगम के कोइर् तीन उदाहरण दीजिए। 9ण् देनदार एवं लेनदारों में अंतभेर्द कीजिए। 10ण् लेखांकन सूचना तुलना योग्य होनी चाहिए। क्या आप इस कथन से सहमत है? कोइर् दो कारण दें। 11ण् यदि लेखांकन सूचना का प्रस्तुतिकरण स्पष्ट नहीं है तो लेखांकन सूचना की कौन सी गुणात्मक विशेषता का उल्लंघन हुआ है? 12ण् बीते समय में लेखांकन की भूमिका में परिवतर्न आया है। क्या आप सहमत हैं? व्याख्या कीजिए। 13ण् निम्न लेखांकन शब्दों को उदाहरण देकर समझाइए ऽ स्थायी परिसंपिायाँ ऽ लाभ ऽ आगम ऽ व्यय ऽ अल्प - अवध्ि देयता ऽ पूँजी 14ण् आगम एवं व्यय को आप वैफसे परिभाष्िात करेंगे? 15ण् वाण्िाज्य के विद्याथ्िार्यों एवं अन्य लोगों के लिए लेखांकन विषय के अध्ययन के प्राथमिक कारण क्या हैं। दीघर् उत्तरीय प्रश्न 1ण् व्यवस्िथत लेखांकन की आवश्यकता के निधर्रक तत्वों को समझाइए। 2ण् लेखांकन के संक्ष्िाप्त इतिहास का वणर्न कीजिए। 3ण् लेखांकन की भूमिका और विकास को समझाइए। 4ण् लेखांकन की परिभाषा दीजिए तथा इसके उद्देश्यों का वणर्न कीजिए। 5ण् बाह्य उपयोगकत्तार्ओं की सूचना की आवश्यकता का वणर्न कीजिए। 6ण् परिसम्पिा से आप क्या समझते हैं और परिसंपिायों के विभ्िान्न प्रकार कौन - कौन से हैं? 7ण् आमदनी एवं लाभ के अथर् को समझाइए। इन दोनों शब्दों में अंतर बताइए। 8ण् लेखांकन सूचना की गुणात्मक विशेषताओं को समझाइए। 9ण् आध्ुनिक समय में लेखांकन की भूमिका का वणर्न कीजिए। स्वयं जाँचिए की जाँच सूची स्वयं जाँचिए - 1 ;कद्ध आथ्िार्क ;खद्ध प्रबन्ध्/कमर्चारी ;गद्ध ेलनदार ;घद्ध समय - अन्तराल ;ड.द्ध बाह्य ;चद्ध सादौंे की पहचान करना, ;छद्ध सूचना का संप्रेषण ;जद्ध मौदि्रक ;झद्ध कालक्रम के अनुसार स्वयं जाँचिए - 2 ;कद्ध सरकार एवं अन्य नियामक ;खद्ध प्रबन्ध् ;गद्ध सामाजिक उत्तरदायित्व समूह ;घद्ध ट्टणदाता ;ड.द्ध आपूतिर्कत्तार् एवं लेनदार ;चद्ध गाहक ्रस्वयं जाँचिए - 3 1ण् विश्वसनीयता अथार्त् प्रमाण्िाकता, निष्ठा, तटस्थता 2ण् प्रासंगिकता अथार्त् समयानुकूल 3ण् समझ योग्य एवं तुलनात्मकता स्वयं जाँचिए - 4 1ण् ;गद्ध 2ण् ;कद्ध 3ण् ;गद्ध 4ण् ;खद्ध 5ण् ;कद्ध स्वयं जाँचिए - 5 1ण् 5ए00ए000 रु.2ण् 1ए00ए000 रु.3ण् 2ए00ए000 रु.4ण् श्री रीस 1ए50ए000 रु.5ण् 5ए000 रु6ण् 5ए000 रु.7ण् 30ए000 रु.8ण् रवि 1ए00ए000 रु.9ण् 35ए000 रु10ण् परिसम्पिायाँऋ देनदारोंऋ देयताऋ आहरणऋ आगमः विक्रय व्यय, बट्टा, वेतन आइए करके देखें आज लेखाकार उत्साह से भरे नयेे विकसित क्षेत्रों में कायर् कर सकते हैं। ये क्षेत्रा हैंः न्यायालय लेखांकन, बजट लेखांकन, लागत लेखांकन, पयार्वरण लेखांकन, इ - कामसर्, एवं सावर्जनिक क्षेत्रा की विभ्िान्न एजेंसीयां। सूचना तकनीक के आगमन से आज के लेखाकार में आवश्यक कौशल का विकास हुआ है जिसमें निम्न से संबंध्ित योग्यताएँ सम्मलित हैं। ऽ रचना का विश्लेषण एवं कम्प्यूटर तकनीक में योग्यताएँ सम्िमलित हंैः ऽ सुविध कौशल जैसे प्रोत्सहित करने एवं संप्रेषण की योग्यताओं का विकास ऽ प्रचालन, मानव संसाध्न, विपणन, वित्त एवं अथर्शास्त्रा के क्षेत्रा में विस्तृत व्यावसायिक ज्ञान प्राप्त करना ऽ विश्लेषणात्मक चातुयर् कौशल का विकास ऽ लेखांकन एवं कर से संबंध्ित समस्याओं में प्रवीणता का विकास।

>Chapter 1>

लेखांकन - एक परिचय

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अधिगम उद्देश्य

इस अध्याय के अध्ययन के उपरांत आपः

लेखांकन का अर्थ एवं आवश्यकता को बता सकेंगे;

लेखांकन की सूचना के स्रोत के रूप में चर्चा कर सकेंगे;

लेखांकन सूचना के आंतरिक एवं बाह्य उपयोगकर्ताओं की पहचान कर सकेंगे;

लेखांकन के उद्देश्य को समझा सकेंगे;

लेखांकन की भूमिका का वर्णन कर सकेंगे;

लेखांकन में प्रयुक्त मूल पारिभाषिक शब्दों को समझा सकेंगे।

 

 

सदियों से लेखांकन लेखापाल के वित्त संबंधित हिसाब-किताब रखने तक सीमित रहा है। परन्तु आज के तेजी से बदलते

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व्यावसायिक वातावरण ने लेखापाल को संगठन एवं समाज, दोनों में अपनी भूमिका एव कार्यों के पुनः मूल्यांकन के लिए बाध्य कर दिया है। लेखापाल की भूमिका अब मात्र व्यापारिक सौदों के हिसाब लेखक से निर्णायक मंडल को उपयुक्त सूचना उपलब्ध कराने ाले लेखक सदस्य के रूप में हो गई है। विस्तृत रूप से लेखांकन आज मात्र पुस्त-लेखन एवं वित्तीय प्रलेख तैयार रना ही नहीं बल्कि उससे बहुत आगे है। लेखापाल आज नये विकसित क्षेत्रों, जैसे - न्यायलिक लेखांकन (कंप्यूटर हैकिंग एवं इन्टरनैट पर बड़े पैमाने में धन की चोरी जैसे अपराधों को हल करना), ई-कामर्स (वैब-आधारित भुगतान प्रणाली), वित्तीय नियोजन पर्यावरण लेखांकन आदि में
कार्य करने के
योग्य हैं। इस अनुभूति का कारण है कि आज लेखांकन प्रबन्धकों एवं दूसरे इच्छुक व्यक्तियों को वह सूचनाएँ प्रदान करने में सक्षम है जो उन्हें निर्णय लेने में सहायता प्रदान कर सकें। समय के साथ लेखांकन का यह पक्ष इतना अधिक महत्वपूर्ण बन गया है कि आज यह सूचना प्रणाली के स्तर तक पहुँच गया है। एक सूचना प्रणाली के रूप में यह किसी भी संगठन की आर्थिक सूचनाओं से संबंधित आंकड़े एकत्रित कर उनका संप्रेषण उन विभिन्न उपयोगकर्त्ताओं तक करता है, जिनके निर्णय एवं क्रियाएं संगठन के प्रदर्शन को प्रभावित करती है।

अतः यह रिचय रूपी प्रारंभिक अध्याय इसी संदर्भ में लेखांकन की प्रकृति, आवश्यकता एवं क्षेत्र की व्याख्या करता है।

1.1 लेखांकन का अर्थ

वर्ष 1941 में अमेरिकन इंस्टीट्यूट अॉफ सर्टिफाइड पब्लिक एकाउटेंट्स ( American Institute of Certified Public Accountants (AICPA)) ने लेखांकन की परिभाषा इस प्रकार दी हैं लेखांकन का संबंध उन लेन-देनों एंव घटनाओं, जो पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से वित्तीय प्रकृति के होते हैं, मुद्रा के रूप में प्रभावशाली ढंग से लिखने, वर्गीकृत करने, संक्षेप में व्यक्त करने एवं उनके परिणामों की विश्लेषणात्मक व्याख्या करने की कला से है।

उत्तरोत्तर आर्थिक विकास के परिणामस्वरूप लेखांकन की भूमिका एवं क्षेत्र का भी विस्तार हुआ है। वर्ष 1966 में अमेरिकन एकाउटिंग एसोसिएशन (AAA) ने लेखांकन को इस प्रकार परिभाषित किया ‘‘लेखांकन आर्थिक सूचनाओं को पहचानने, मापने और संप्रेषित करने की एक एेसी प्रक्रिया है जिसके
आधार पर सूचनाओं के उपयोगक
र्त्ता तर्कयुक्त निर्णय लेने में सक्षम होते हैं।

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आर्थिक घटनाएं

निर्णयों

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लेखांकन निर्णयकर्ताओं को आर्थिक क्रियाओं एवं उनके निर्णयों के परिणामों से जोड़ता है

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निर्णायक (आंतरिक एवं बाह्य उपयोगकर्ता)

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लेखांकन प्रक्रिया

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लेखांकन सूचना का सम्प्रेषण

चित्र 1.1 लेखांकन प्रक्रिया

1970 में अकाउटिंग प्रिन्सीपल बोर्ड अॉफ एआईसीपीए ने कहा कि लेखांकन का कार्य मुख्य रूप से आर्थिक इकाईयों के संबंध में एेसी गुणात्मक सूचनाएं उपलब्ध कराना है, जो प्रमुख रूप से वित्तीय प्रकृति की होती हैं, और जो आर्थिक निर्णय लेने में उपयोगी होती हैं।

उपरोक्त विवरण के आधार पर लेखांकन को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि लेखांकन संगठन की आर्थिक घटनाओं को पहचानने, मापने और लिखकर रखने की एेसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम सूचनाओं से संबंधित आंकड़े उपयोगकर्ताओं तक संप्रेषित किये जा सकें। लेखांकन प्रकृति को समझने के लिए हमें परिभाषा के निम्न संबंधित पहलूओं को समझना आवश्यक हैः

आर्थिक घटनाएं

पहचान, मापन, अभिलेखन एवं संप्रेषण

संगठन

सूचना से सबंधित उपयोगकर्ता

बॉक्स - 1

लेखांकन का इतिहास एवं विकास

लेखांकन की अद्भुत परंपरा है। लेखांकन का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी सभ्यता। लेखांकन के बीज पहली बार शायद ईसा के 4000 वर्ष पूर्व बेबीलोनियां एवं इजिप्ट में बो दिये गये थे जहाँ मजदूरी एवं करों के भुगतान सम्बन्धी लेन-देनों का लेखा मिट्टी की एक पट्टी पर किया जाता था। इतिहास साक्षी है कि इजिप्ट के लोग अपने खज़ाने, जिनमें सोना एवं अन्य दूसरी कीमती वस्तुएं रखी जाती थी, के िए एक प्रकार के लेखांकन का प्रयोग करते थे और वे माहवार ब्यौरा राजा को भेजते थे। बेबीलोनीयां जिसे वाणिज्य नगरी कहा जाता था, वाणिज्य के लेखांकन का उपयोग धोखाधड़ी एवं अक्षमता के कारण होने वाली हानि को उजागर करने के लिए किया जाता था। ग्रीस में लेखांकन का प्रयोग प्राप्त आगम को खज़ानों में आबंटन, कुल प्राप्तियों, कुल ुगतानों एवं सरकारी वित्तीय लेन-देनों के शेष का ब्यौरा रखने के लिए किया जाता था। रोमवासी विवरण-पत्र अथवा दैनिक बही का प्रयोग करते थे जिनमें प्राप्ति एवं भुगतान का अभिलेखन किय जाता था तथा उनसे प्रतिमाह खाता बही में खतौनी की जाती थी। (700 वर्ष ईसा पूर्व से 400
ई.) चीन में तो 2000 वर्ष ईसवी
पूर्व में ही बहुत ही परिष्कृत रूप में राजकीय लेखांकन का उपयोग होता था। भारत में लेखांकन का प्रचलन 2300 शताब्दी पूर्व कौटिल्य के समय से माना जा सकता है जो चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्य में एक मंत्री था तथा जिसने अर्थशास्त्र के नाम से एक पुस्तक लिखी थी जिसमें लेखांकन अभिलेखों को कैसे रखा जाये का वर्णन किया गया था।

लूकस पेसिओली, जो व्यापारी क्षेणी से संबंध रखते थे, की पुस्तक सुमा-डे-अरिथमट्रिका, जयोमेट्रिका, प्रोपोरशनालिटि पर प्रोपोरशन (अंक गणित वं रेखा गणित के पुनर्वालोकन के अंश), को द्विअंकन पुस्त-पालन पर पहली पुस्तक माना गया है। इस पुस्तक के एक भाग में व्यवसाय एवं पुस्त-पालन के सम्बन्ध में लिखा है। पेसियोली ने यह दावा कभी नहीं किया कि वह द्विअंकन, पुस्त-पालन का आविष्कारक हैं। उसने तो इसके ज्ञान का विस्तार किया था। इससे एेसा लगता है कि शायद उसने समकालीन पुस्त-पालन ग्रन्थों को अपनी इस उत्तम रचना का आधार बनाया। अपनी इस पुस्तक में उसने आज के लेखांकन के सर्वप्रचलित शब्द नाम Dr जमा Cr का उपयोग किया। इन संकल्पनाओं को इटली की शब्दावली में प्रयुक्त किया गया था। डेबिट शब्द इटली के शब्द debito से निकला है जो लेटिन शब्द debita एवं debeo शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता है स्वामी का ऋणी होना। Credit शब्द इटली के Credito शब्द से निकला है जो लेटिन शब्द Credaे निकला है जिसका अर्थ होता है (स्वामी में विश्वास या स्वामी की देनदारी)। द्वि अंकन प्रणाली को समझाते हुए पेसियोली ने लिखा कि सभी प्रविष्टियां दो बार अंकित की जाती है अर्थात् यदि आप एक लेनदार बनाते हैं तो आपको एक देनदार बनाना होगा। उसका कहना था कि एक व्यापारी के उत्तरदायित्वों में अपने व्यवसाय में ईश्वर की महत्ता को बढ़ाना, व्यवसाय के कार्यो में नैतिकता तथा लाभ कमाना सम्मिलित है। उसने विवरण-पत्र, रोजनामचा, खाता बही एवं विशिष्ट लेखांकन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की है।

1.1.1 आर्थिक घटनाए

व्यावसायिक संगठनों का संबंध आर्थिक घटनाओं से होता है। आर्थिक घटना से तात्पर्य किसी व्यावसायिक संगठन में होने वाले एेसे आर्थिक लेन-देनों से है जिसके परिणामों को मुद्रा रूप में मापा जा सकता हो। उदाहरणार्थ, मशीन का क्रय, उसके स्थापना एवं विनिर्माण के लिए तैयार करना एक घटना है जिसमें कुछ वित्तीय लेन-देन समाहित हैं, जैसे मशीन का क्रय, मशीन का परिवहन, मशीन स्थापना स्थल को तैयार करना, स्थापना पर व्यय एवं परीक्षण संचालन। इस प्रकार लेखांकन किसी आर्थिक घटना से संबंधित सौदों के समूह की पहचान करता है।

किसी घटना में संगठन एवं किसी बाहर के व्यक्ति के बीच लेन-देन है तो इसे बाह्य घटना कहेंगे। इस प्रकार के लेन-देन के उदाहरण नीचे दिये हैंः

ग्राहक को माल का विक्रय।

कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करना।

आपूर्तिकर्ताओं से माल का क्रय।

मकान मालिक को मासिक किराये का भुगतान।

आंतरिक घटना एक एेसी वित्तीय घटना है जो पूर्णतः किसी उद्यम के आंतरिक विभागों के बीच घटित होती है। उदाहरण के लिए संग्रहण विभाग द्वारा कच्चे माल अथवा कलपुर्जों की विनिर्माण विभाग को आपूर्ति, कर्मचारियों को मजदूरी का भुगतान आदि।

1.1.2 पहचान करना, मापना, लेखा-जोखा एवं सम्प्रेषण

पहचान

इसका अर्थ यह निर्धारित करना है किन लेन-देनों का अभिलेखन किया जाए अर्थात् इसमें उन घटनाओं की पहचान करना, जिनका अभिलेखन किया जाना है। इसमें संगठन से संबंधित सभी क्रियाओं का अवलोकन कर केवल उन्हीं क्रियाओं का चयन किया जाता है जो वित्तीय प्रकृति की हैं। लेखा-पुस्तकों में लिखने का निर्णय लेने से पहले व्यावसायिक लेन-देन एवं दूसरी आर्थिक घटनाओं का मूल्यांकन किया जाता है। उदाहरणार्थ मानव एवं संसाधनों का मूल्य, प्रबन्धकीय नीतियों में परिवर्तन अथवा कर्मचारियों की नियुक्ति महत्वपूर्ण घटनाएं हैं लेकिन इनमें से किसी को भी लेखा-पुस्तकों में नहीं लिखा जाता। यद्यपि जब भी कंपनी नकद अथवा उधार क्रय अथवा विक्रय करती है अथवा वेतन का भुगतान करती है तो इसे लेखा पुस्तकों में लिखा जाता है।

मापन

इसका अर्थ है मौद्रिक इकाई के द्वारा व्यावसायिक लेन-देनों का वित्तीय प्रमापीकरण (अनुमानों, मौद्रिक आधारों रुपए व पैसों की इकाइयों का अभिलेखन के लिए प्रयोग) अथ।ρत् मापन की इकाई के रूप में रुपये पैसे।

यदि किसी घटना को मौद्रिक रुप में प्रमापीकरण सम्भव नहीं है तो इसका वित्तीय लेखों में लेखन नहीं
किया जाएगा। इसी कार
णवश प्रबन्ध निदेशक की नियुक्ति, महत्त्वपूर्ण अनुबंध व कर्मचारियों की
बदली जैसी आवश्यक सूचनाओं का
लेखा-पुस्तकों में नहीं किया जाएगा।

अभिलेखन

जब एक बार आर्थिक घटनाओं की पहचान व मापन वित्तीय रूप में हो जाती है तो इन्हें मौद्रिक इकाइयों में लेखा-पुस्तकों में कालक्रमानुसार (तिथिवार) अभिलिखित कर लिया जाता है। अभिलेखन इस प्रकार से किया जाता है कि आवश्यक वित्तीय सूचना को स्थापित परम्परा के अनुसार सारांश निकाला जा सके एवं जब भी आवश्यकता हो उसे उपलब्ध किया जा सके।

संप्रेषण

आर्थिक घटनाओं की पहचान की जाती है उन्हें मापा जाता है एवं उनका अभिलेखन किया जाता है जिससे प्रसंगानुकूल सूचना तैयार होती है एवं इसका, प्रबन्धकों एवं दूसरे आंतरिक एवं बाह्य उपयोगकर्ताओं को, एक विशिष्ट रूप में सम्प्रेषण होता है। सूचना का लेखा प्रलेखों के माध्यम से नियमित रूप से संप्रेषित किया जाता है। इन प्रलेखों द्वारा दी गई सूचना उन विभिन्न उपयोगकर्त्ताओं के
लिए उपयोगी होती है जो उद्यम की वित्तीय स्थिति एवं प्रदर्शन के आकलन, व्यावसायिक क्रियाओं के नियोजन एवं नियंत्रण तथा समय-समय पर आवश्यक निर्णय लेने में रुचि रखते हैं।

लेखांकन सूचना प्रणाली को इस प्रकार से बनाना चाहिए कि सही सूचना, सही व्यक्ति को सही समय पर संप्रेषित हो सके। प्रलेख उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को देखते हुए अभिलेख दैनिक, साप्ताहिक, मासिक या फिर त्रैमासिक हो सकते हैं। इस संप्रेषण प्रक्रिया का महत्त्वपूर्ण तत्व लेखापाल की योग्यता एवं कार्य उपयुक्त सूचना के प्रस्तुतिकरण में है।

1.1.3 संगठन

ंगठन से अभिप्राय किसी व्यावसायिक उद्यम से है जिनका उद्देश्य लाभ कमाना है अथवा नहीं। क्रियाओं के आकार एवं व्यवसा के परिचालन स्तर के आधार पर यह एकल स्वामित्व इकाई, साझेदारी फर्म, सहकारी समिति या कंपनी, स्थानीय निकाय, नगरपालिका अथवा कोई अन्य संगठन हो सकता है।

बॉक्स - 2

उपयोगकर्त्ताओं को लेखांकन सूचना की आवश्यकता क्यों होती है।

उपयोगकर्त्ता लेखांकन सूचना की मांग विभिन्न उद्देश्यों से करते हैंः

स्वामी अंशधारी इनका उपयोग यह जानने के लिए करते हैं कि क्या वे अपने निवेश पर पर्याप्त वापसी प्राप्त कर रहे हैं एवं अपनी कंपनी/व्यवसाय के वित्तीय स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए करते हैं।

निदेशक/प्रबन्धक इनका उपयोग निष्पादन का मूल्यांकन करने हेतु आंतरिक एवं बाह्य दोंनों प्रकार की तुलना करने के लिए करते हैं। अपनी कंपनी की शक्ति एवं कमी का निर्धारण करने के लिए वह अपनी कंपनी के वित्तीय विश्लेषण की तुलना उद्योग के आंकड़ो से कर सकते हैं। प्रबन्धक यह भी सुनिश्चित करना
चाहते हैं कि कंपनी संगठन में विनियोजित राशि की पर्याप्त वापसी आ रही है तथा कंपनी संगठन अपने
ऋणों को
चुकाने में सक्षम हैं एवं वह सम्पन्न बना रहता है।

लेनदार (ऋणदाता) यह जानने को उत्सुक होते हैं कि क्या उनके द्वारा दिए गए ऋण का भुगतान समय
पर हो स
केगा एवं विशेष रूप से वित्तीय तरलता को देखते हैं जो किसी कंपनी/संगठन के ऋणों की देयता के समय इनके भुगतान की क्षमता को दर्शाती है।

भावी निवेशक यह निश्चित करने के लिए इनका उपयोग करतें हैं कि उन्हें अपना धन इस कंपनी/संगठन में लगाना चाहिए अथवा नहीं।

सरकार एवं कंपनी रजिस्ट्रार, कस्टम विभाग, रिजर्व बैंक अॉफ इंडिया आदि नियमन संस्थाओं को विभिन्न करों के भुगतान के सम्बन्ध में सूचना चाहिए। ये कर हैं - वैट, आयकर, आबकारी एवं उत्पाद शुल्क जो निवेशकों एवं लेनदारों (ऋणदाता) के हितों की रक्षा कर सके एवं समय-समय पर कंपनी अधिनियम
2013वं SEBI द्वारा निश्चित वैधानिक दायित्वों को पूरा करा सकें।

1.1.4 सूचना के इच्छुक उपयोगकर्त्ता

लेखांकन का संबंध व्यवसाय की वित्तीय सूचना के संप्रेषण से है तथा इसे व्यवसाय की भाषा भी कहा जाता है। अने उपयोगकर्त्ताओं को महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए वित्तीय सूचना की आवश्यकता होती है। इन उपयोगकर्त्ताओं को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है आंतरिक उपयोगकर्ता एवं बाह्य उपयोगकर्त्ता। आंतरिक उपयोगकर्त्ता में सम्मिलित हैंः मुख्य कार्यकारी, वित्तीय प्राधिकारी, उपप्रधान, व्यावसायिक इकाई प्रबन्धक, संयन्त्र प्रबन्धक, स्टोर प्रबन्धक, लाइन पर्यवेक्षक आदि। बाह्य उपयोगकर्त्ता हैंः वर्तमान एवं भावी निवेशक (शेयर धारक), लेनदार (बैंक, एवं अन्य वित्तीय संस्थान, ऋण-पत्र धाारक एवं दूसरे ऋणदाता), कर अधिकारी, नियमन एजेन्सी (कंपनी मामलों का विभाग, कंपनी रजिस्ट्रार, भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड, श्रम संगठन, व्यापारिक संघ, स्टॉक एक्सचेंज, एवं ग्राहक आदि।) लेखांकन का मूल उद्देश्य निर्णय लेने के लिए उपयोगी सूचना उपलब्ध कराना है। यह साध्य को प्राप्त करने का साधन है और वह साध्य है, निर्णय जिसे उपलब्ध लेखांकन सूचना से सहायता मिलती है। आप लेखांकन सूचना के प्रकारों एवं इसके उपयोगकर्त्ताओं के संबंध में इस अध्याय में आगे पढ़ेंगे।

1.2 लेखांकन एक सूचना के स्रोत के रूप में

जैसा कि पहले चर्चा की जा चुक है लेखांकन एक सूचना के स्रोत के रूप में, परस्पर दूसरे से जुड़ी क्रियाओं की एक सुनिश्चित प्रक्रिया (देखें चित्र 1.1) जो लेन-देनों की पहचान से आरम्भ होती है तथा वित्तीय विवरणों के निर्माण पर समाप्त होती है। लेखांकन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में सूचना उत्पन्न होती है। सूचनाओं का विकास अपने आप में साध्य नहीं है। यह सूचना के विभिन्न उपयोगकर्त्ताओं में सूचना के प्रसार का माध्यम है। यह सूचना इच्छुक वर्गो को उचित निर्णय लेने में सहायक होती है। इसीलिए सूचना का प्रसार लेखांकन का अनिवार्य कार्य है। लेखांकन सूचना को उपयोगी बनाने के लिए निम्न को सुनिश्चित करने की आवश्यकता होती है

आर्थिक निर्णय लेने के लिए सूचना उपलब्ध कराना।

वित्तीय विवरणों को सूचना के प्रमुख स्रोत मानकर उनपर निर्भर करने वाले उपयोगकर्त्ताओं की सेवा करना;

सम्भावित रोकड़ प्रवाह की राशि, समय एवं अनिश्चितता के पूर्वानुमान लगाने एवं मूल्यांकन के लिए उपयोगी सूचना उपलब्ध कराना;

लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रबन्धकों की योग्यता की जाँच के लिए सूचना प्रदान करना;

एेसे विषय जिनकी व्याख्या, मूल्यांकन, पूर्वानुमान या आकलन किया जाता है उनको निहित संकल्पनाओं को स्पष्ट करने के लिये तथ्यात्मक एवं व्याख्यात्मक सूचना प्रदान करना; एवं

समाज को प्रभावित करने वाले कार्यों से संबंधित सूचना प्रदान करना।

स्वयं जाँचिए - 1

वाक्यों को पूरा करेंः

(क) वित्तीय विवरणों में दी गई सूचना ............ पर आधारित होती है।

(ख) आंतरिक उपयोगकर्त्ता व्यावसायिक इकाई के ............ होते हैं।

(ग) ............ कोई व्यावसायिक इकाई ऋण के लिए उपयुक्त है या नहीं इसका निर्धारण करने के लिए उसकी वित्तीय सूचना का उपयोग करना चाहेगा।

(घ) ........... व्यवसाय से बाहर के वह लोग होते हैं जो व्यवसाय के संबंध में निर्णय लेने के लिए सूचना का उपयोग करते हैं।

(ङ) इन्टरनेट वित्तीय सूचना उपयोगकर्त्ताओं को जारी करने के ............. में कमी लाने में सहायक रही है।

(च) सूचना उपयुक्त होगी यदि यह .......... है।

(छ) लेखांकन प्रक्रिया .............. से प्रारम्भ होती है और .......... पर समाप्त होती है।

(ज) लेखांकन व्यावसायिक प्रक्रिया लेन-देनों को .......... रुप में मापती है।

(झ) चिन्हित एवं मापित आर्थिक घटनाओं को ................ में अभिलेखित करना चाहिए।

आइए करके देखें

आज के समाज मे कुछ लोग एक लेखाकार को मात्र गौरव प्राप्त पुस्त-पालक समझते हैं जबकि लेखाकार की भूमिका निरन्तर बदल रही है। कक्षा में चर्चा करें कि लेखांकन प्रक्रिया की वास्तविकता क्या है?

लेखांकन सूचना के विकास में लेखाकार घटनाओं एवं लेन-देनों को मापने एवं उनके प्रक्रियन के लिए उनका अवलोकन, जाँच एवं पहचान करता है एवं उपयोगकर्त्ताओं के संप्रेषणों के लिए लेखांकन सूचना से परिपूर्ण विवरण तैयार करता है। इन विवरणों की प्रबन्धक एवं अन्य उपयोगकर्त्ता व्याख्या करते हैं, अवकूटन करते हैं एवं उनका उपयोग करते हैं। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सूचना निर्णय लेने के लिए प्रासंगिक, पर्याप्त एवं विश्वसनीय हो। लेखांकन सूचना की आंतरिक एवं बाह्य उपयोगकर्त्ताओं के एक दूसरे से भिन्न दिखने वाली आवश्यकता के कारण लेखांकन विषय में उप-विषयों का विकास हुआ है जो हैं वित्तीय लेखांकन, लागत लेखांकन एवं प्रबन्ध लेखांकन (देखें बॅाक्स 3)।

वित्तीय लेखांकन वित्तीय लेन-देनों को व्यवस्थित अभिलेखन एवं वित्तीय विवरणों को बनाने एवं प्रस्तुतिकरण में सहायता करता हैं जिससे कि संगठनात्मक सफलता एवं वित्तीय सुदृढ़ता को मापा जा
सके। इसका संबंध बीते हुए समय से होता है। प्राथमिक रूप से यह संरक्षणता का कार्य करता है साथ ही इसकी प्रकृति मौद्रिक है। इसका कार्य सभी हितार्थियों को वित्तीय सूचना प्रदान करना है।

लागत लेखांकन फर्म के द्वारा विभिन्न उत्पादों के विनिर्माण या प्रदत्त सेवाओं की लागत निर्धारण के
व्यय
के विश्लेषण एवं मूल्य निर्धारण में सहायता प्रदान करता है। यह लागत पर नियन्त्रण में सहायता करता है एवं प्रबन्धकों को निर्णय लेने के लिए आवश्यक लागत संबंधी सूचना प्रदान करता है।

लेखांकन की गुणात्मक विशेषताएं

निर्णायक

( लेखांकन सूचना का उपयोगकर्त्ता )

सुबोधता

निर्णय की उपयोगिता

प्रासंगिकता विश्वसनीयता

समयानुकूलता

मर्पण योग्य प्रत्युत्तर प्रमाणित करने योग्य विश्वसनीयता

ूल्य मूल्य

तुलनीयता निष्पक्षता

प्रबन्ध लेखांकन संगठन में कार्यरत लोगों को आवश्यक लेखांकन सूचना प्रदान करना है जिससे कि वह व्यावसायिक कार्यो के सम्बन्ध में निर्णय ले सके, योजना बना सके एवं नियन्त्रण कर सके। प्रबन्ध लेखांकन के लिए सूचना मुख्यतः वित्तीय लेखांकन एवं लागत लेखांकन से प्राप्त होती है जो प्रबन्धकों
को
बजट बनाने, लाभ प्रदत्त का आकलन करने, मूल्य निर्धारण करने, पूँजीगत व्यय के संबंध में निर्णय लेने आदि में सहायक होता है। इसके साथ ही यह अन्य दूसरी सूचनाएं (परिमाणात्मक एवं गुणात्मक, वित्तीय एवं गैर-वित्तीय) भी देता है जो भविष्य से संबंधित होती है तथा संगठन के निर्णयों के लिए प्रासंगिक भी। इन सूचनाओं में सम्मिलित हैं, संभावित विक्रय, रोकड़ प्रवाह, क्रय की आवश्यकताएं,
श्रम शक्त
ि की आवश्कताएं, हवा-पानी, भूमि, प्राकृतिक साधन, मानवीय सामाजिक उत्तरदायित्व पर
प्रभाव के संबंध में
पर्यावरण के आंकड़े।

परिणामस्वरूप लेखांकन का क्षेत्र इतना व्यापक हो गया है कि नये क्षेत्र, जैसे मानव संसाधन लेखांकन, समाजिक लेखांकन, उत्तरदायित्व लेखांकन भी महत्त्वपूर्ण हो गये हैं।

1.2.1 लेखांकन की गुणात्मक विशेषताएं

गुणात्मक विशेषताएं उस लेखांकन सूचना का परिणाम है जो इसकी बोधगम्यता एवं उपयोगिता को बढ़ाती हैं। लेखांकन सूचना का निर्णय लेने में उपयोगिता के मूल्यांकन के लिए इसमें विश्वसनीयता, प्रासंगिकता, बोधगम्यता तथा तुलनात्मकता का गुण होना आवश्यक है।

विश्वसनीयता

विश्वसनीयता का अर्थ है कि उपयोगकर्ता सूचना पर निर्भर रह सके। लेखांकन सूचना की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि जो घटनाएं एवं लेन-देन हुए हैं उनके मापन प्रस्तुतिकरण के बीच किस स्तर का अंतर्संबंध है। विश्वसनीय सूचना अनावश्यक अशुद्धि, व्यक्तिगत आग्रह से मुक्त होनी चाहि तथा उसे विश्वसनीय रूप से वही दर्शाना चाहिए जो उससे अपेक्षित है। विश्वसनीयता को सुनिशि्चित करने के लिए सूचना विश्वास के योग्य होनी चाहिए, जिसकी जाँच स्वतंत्र रूप से उन क्षों द्वारा की जा सके जो समान मापन की समान विधि का उपयोग कर रही हैं जो निष्पक्ष एवं समर्पित हैं (देखें चित्र 1.2)

बॉक्स - 3

लेखांकन की शाखाएं ः आर्थिक विकास एवं तकनीकी उन्नत के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर प्रचालन एवं व्यवसाय के कंपनी स्वरूप का प्रादुर्भाव हुआ है। इसके कारण प्रबन्ध कार्य और अधिक जटिल हो गया है तथा इससे लेखांकन सूचना का महत्त्व बढ़ गया है। इसके परिणामस्वरूप लेखांकन की विशिष्ट शाखाओं का जन्म हुआ है इनका वर्णन संक्षेप में नीचे किया गया है।

वित्तीय लेखांकन ः लेखांकन की इस शाखा का उद्देश्य प्रत्येक वित्तीय लेन-देन का ब्यौरा रखना है जिससे किः

(क) एक लेखांकन अवधि में व्यवसाय में कितना लाभ कमाया है अथवा हानि हुई है, को ज्ञात किया जा सके,

(ख) लेखांकन अवधि के अंत में व्यवसाय की वित्तीय स्थिति का निर्धारण किया जा सके,

(ग) प्रबन्धक एवं अन्य रुचि रखने वाले पक्षों को आवश्यक वित्तीय सूचना उपलब्ध कराना।

लागत लेखांकन ः लागत लेखांकन का उद्देश्य खर्चों का विश्लेषण करना है जिससे कि व्यावसयिक इकाई द्वारा विनिर्मित विभिन्न उत्पादों की लागत निर्धारित की जा सके एवं मूल्य निश्चित किये जा सकें। यह लागत निर्धारण एवं निर्णय लेने के लिए प्रबन्धकों को आवश्यक लागत की सूचना प्रदान करने में सहायक होती है।

प्रबन्ध लेखांकन ः्रबन्ध लेखांकन का उद्देश्य प्रबन्ध को नीति संबंधित विवेक पूर्ण निर्णय लेने एवं इसके नियमित कार्यावाही के प्रभाव का मूल्यांकन करने में सहायक होता है।

प्रासंगिकता

सूचना तभी प्रासंगिक होगी जबकि यह समय पर उपलब्ध होगी, पूर्वानुमान लगाने एवं प्रत्युत्तर देने में होगी। सूचना की प्रासंगिकता के लिए इसे उपयोगकर्त्ताओं के निर्णयो को निम्न के द्वारा प्रभावित करना अनिवार्य हैंः

(क) भूत, वर्तमान एवं भविष्य की घटनाओं के परिणामों का पूर्वानुमान लगाने, करने एवं प्रत्युतर देने में सहायक होना, अथवा

(ख) पिछले मूल्यांकन की पुष्टि अथवा उनमें संशोधन करना।

बोधगम्यता

बोधगम्यता से आशय है कि जो लोग निर्णय लेते हैं उन्हें लेखांकन सूचना को उसी संदर्भ में समझना चाहिए जिस संदर्भ में न्हें तैयार किया गया है एवं प्रस्तुत किया गया है। किसी संदेश की वह विशेषताएं जो अच्छे अथवा बुरे संदेश ें भेद करती हैं संदेश की बोधगम्यता का आधार है। संदेश तभी संप्रेषित माना जाता है
जब वह प्रेषणी द्वा
रा उसे उसी अर्थ में समझा जाए जिस अर्थ में भेजा गया है। लेखाकारों को सूचना को
बिना प्रासंगिकता एवं वि
श्वसनीयता को खोए इस प्रकार से प्रस्तुत करना चाहिए कि वह बोधगम्य हो।

तुलनीयता

यह पर्याप्त नहीं है कि वित्तीय सूचना एक समय विशेष पर विशेष परिस्थितियों में अथवा विशेष
प्रतिवेदन (रिपोर्ट) इकाई के लिए ही
प्रासंगिक एवं विश्वसनीय हो। लेकिन यह भी महत्त्वपूर्ण है कि
सूचना के उपयोगकर्त्ता साधार
ण उद्देश्य के लिए प्रस्तुत व्यवसाय के वित्तीय प्रलेखों में प्रदर्शित विभिन्न आयामों की अन्य व्यावसायिक इकाईयों से परस्पर तुलना कर सकें।

लेखांकन प्रलेखों की तुलना करने के लिए यह आवश्यक है कि उनका संबंध समान अवधि
समान मापन इकाई व स
मान प्रारूप में किया गया हो।

स्वयं जाँचिए - 2

आप रामोना एंटरप्राइज़िज़ में वरिष्ठ लेखाकार हैें। आप अपनी कंपनी के वित्तीय विवरणों एवं निर्णयों को उपयोगी बनाने के लिए कौन से तीन कदम उठाएंगे?

1 -----------

2 -----------

3 -----------

संकेतः लेखांकन सूचना की गुणात्मक विशेषताओं को देखें।

1.3 लेखांकन के उद्देश्य

सूचना प्रणाली के रूप में लेखांकन का मूल उद्देश्य इसके बाह्य एवं आंतरिक उपयोग करने वाले दोनों समूहों को उपयोगी सूचना उपलब्ध कराना है। आवश्यक सूचना विशेषतः बाह्य उपयोगकर्त्ताओं को वित्तीय विवरणों, जैसे - लाभ-हानि खाता एवं तुलन-पत्र, के रूप में प्रदान की जाती है। इनके अतिरिक्त प्रबन्धकों को समय-समय पर अतिरिक्त सूचना व्यवसाय के लेखांकन प्रलेखों से प्राप्त होती है। अतः लेखांकन के मूल उद्देश्य निम्नलिखित हैंः

1.3.1 व्यावसायिक लेन-देन का हिसाब रखना

लेखांकन का उपयोग लेखांकन पुस्तकों में सभी वित्तीय लेन-देनों के व्यवस्थित रूप में लेखा रखने के लिए किया जाता है। व्यवसाय मे बहुत प्रतिभावान अधिकारी एवं प्रबंधक भी पूर्ण शुद्धता के साथ व्यवसाय में प्रतिदिन के विभिन्न लेन-देनों जैसे - क्रय, विक्रय, प्राप्ति, भुगतान आदि, को पूर्ण शुद्धता के साथ स्मरण नहीं रख सकते। इसीलिए सभी व्यावसायिक लेन-देनों का सही एवं पूर्ण लेखा नियमित रूप से रखा जाता है। इसके अतिरिक् लेखांकित सूचना से सत्यता की जांच की जा सकती है तथ इसका उपयोग प्रमाण के रूप में किया जाता है।

1.3.2 लाभ अथवा हानि की गणना

व्यवसाय के स्वामी निश्चित अवधि के व्यावसायिक कार्यकलापों के शुद्ध परिणामों को जानने के
इच्छुक रहते हैं अर्था
त् व्यवसाय ने लाभ कमाया है अथवा उससे हानि हुई है। अतः लेखांकन का दूसरा उद्देश्य किसी लेखांकन अवधि के दौरान व्यवसाय के लाभ अथवा हानि का निर्धारण है। जिसका निर्धारण व्यवसाय के उस अवधि के आय एवं व्ययों के लेखे-जोखों की सहायता से लाभ-हानि खाता बनाकर सरलता से किया जा सकता है। लाभ आगम (आय) के व्यय से आधिक्य को प्रकट करता है। यदि किसी एक अवधि की कुल आगम 60,000 रु. तथा कुल व्यय 5,40,000 रु. है तो लाभ की राशि 60,000 रु. होगी (6,00,000 रु. 5,40,000 रु.) होगा। यदि कुल व्यय कुल आगम से अधिक है तो अन्तर हानि को दर्शाएगा।

1.3.3 वित्तीय स्थिति को प्रदर्शित करना

लेखांकन का उद्देश्य प्रत्येक लेखांकन अवधि के अन्त में परिसंपत्तियों एवं देयताओं के रूप में वित्तीय स्थिति का निर्धारण करना है। किसी व्यावसायिक संगठन के संसाधनों एवं इनके विरुद्ध दावों (देयताओं) का सही लेखा-जोखा एक विवरण, जिसे, स्थिति विवरण अथवा वस्तु स्थिति विवरण अथवा तुलन-पत्र कहते हैं, को बनाने में सहायता प्रदान करता है।

1.3.4 उपयोगकर्त्ताओं को सूचनाएं उपलब्ध कराना

लेखांकन प्रक्रिया से जनित लेखांकन सूचना को प्रतिवेदन विवरण ग्राफ एवं चार्ट रूप में उन उपयोगकर्त्ताओं को संप्रेषित की जाती है जिन्हें विभिन्न निर्णय परिस्थितियों में इनकी आवश्यकता होती है। जैसा कि पहले ताया जा चुका है। मुख्यतः उपयोगकर्त्ताओं के दो समूह हैं। आंतरिक उपयोगकर्त्ता जिनमें मुख्यतः प्रबन्धक होते हैं जिन्हें नियोजन, नियन्त्र एवं निर्णय लेने के लिए समय पर विक्रय लागत, लाभप्रदता आदि की
सूचना की
आवश्यकता होती है एवं वाह्य उपयोगकर्त्ता जिनमें आवश्यक सूचनाएं प्राप्त करने के सीमित
अधिकार, योग्य
ता एवं साधन होते हैं तथा जिन्हें वित्तीय विवरणों (तुलन-पत्र, लाभ-हानि खाता) पर निर्भर करना होता है। बाह्य उपयोगकर्त्ता मूलतः निम्न में रुचि रखते हैंः

निवेषक एवं संभावित निवेषकः निवेष की जोखिम एवं उन पर आय के संबंध में सूचनाएं।

क्रमसंघ एवं कर्मचारी समूहः व्यवसाय की स्थिरता, लाभप्रदता एवं उसके धन के बंटवारे के
सम्बन्ध में सूचनाएं।

ऋणदाता एवं वित्तीय संस्थान कंपनी की साख एवं इसकी ऋण एवं ब्याज को भुगतान की
क्षमता
से परिपक्व संबंधित सूचना।

आपूर्तिकर्त्ता एवं लेनदारः देनदारी की तिथि को भुगतान करने तथा व्यवसाय की निरंतरता के
संबंध में सूचना।

ग्राहकः व्यवसा

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स्थिर

परिसंपत्तियाँ

मूर्त

परिसंपत्तियाँ

चित्र 1.3 परिसंपत्तियों का वर्गीकरण

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चालू

परिसंपत्तियाँ

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गैर चालू

निवेश

अमूर्त

परिसंपत्तियाँ

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माल
सूची

 

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स्थगित कराधान

परिसंपत्तियाँ (शुद्ध)

पूँजीगत कार्य
प्रगति पर

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व्यापार

विपत्र

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विकास के
अधीन अमूर्त परिसंपत्तियाँ

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दीर्घकालीन ऋण एवं अग्रिम

गैर चालू

परिसंपत्तियाँ

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नकद एवं नकद समतुल्य

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परिसंपत्तियाँ

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अन्य गैर चालू परिसंपत्तियाँ

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लघुअवधीय ऋण एवं अग्रिम

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चालू

परिसंपत्तियाँ

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अन्य चालू परिसपंत्तियाँ

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य की निरंतरता परिणामतः उत्पाद पार्ट्स एवं बिक्री के पश्चात की सेवाओं के
संबंध मे
ं सूचनाएं।

सरकार एवं अन्य नियमकः संसाधनों के आबंटन एवं नियमों के पालन से संबंधित सूचना।

सामाजिक उत्तरदायित्व समूहः जैसे - पर्यावरण समूह-पर्यावरण पर प्रभाव एवं उसके संरक्षण के सम्बन्ध में सूचना।

प्रतियोगीः अपने प्रतियोगी की अपेक्षाकृत शक्ति एवं तुलनात्मक निर्देश चिन्ह के उद्देश्य से
संबंधित सूचना। जबकि
उपर्युक्त वर्ग के उपयोगकर्त्ता कम्पनी की संपत्ति हिस्सा बंटाते हैं,
प्रतियोगी सूचनाओं की आवश्यकता मुख्यतः व्यूह रचना के लिए होती है।

स्वयं जाँचिए - 3

कौन सा समूह ........... में अधिकतम रुचि लेगाः

------------------------- (क) फर्म को वैट एवं अन्य कर देयता

------------------------- (ख) भावी वेतन, पुरस्कार एवं बोनस

------------------------- (ग) फर्म की नैतिक एवं पर्यावरण संबंधी क्रियाएं

------------------------- (घ) क्या फर्म का दीर्घ-अवधि भविष्य है

------------------------- (ङ) लाभप्रदता, एवं

-------------------------

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चित्र 1.4 देयताओं का वर्गीकरण

दीर्घकालीन

ऋण

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स्थगित कराधान

देयताएँ (शुद्ध)

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गैर चालू

देयताएँ

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अन्य दीर्घकालीन ऋण

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अन्य दीर्घकालीन प्रावधान

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देयताएँ

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लघुकालीन

ऋण

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देय विपत्र

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चालू

देयताएँ

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अन्य

चालू देयताएँ

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लघुकालीन प्रावधान

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(च) फर्म द्वारा सेवा प्रदान करने अथवा वस्तु के उत्पादन कार्य को करने की क्षमता

1.4 लेखांकन की भूमिका

शताब्दियो से आर्थिक विकास में परिवर्तन एवं सामाजिक आवश्यकताओं की बढ़ती मांग के साथ लेखांकन की भूमिका में परिवर्तन होता रहा है। यह किसी उद्यम के मापन वर्गीकरण एवं संक्षिप्तीकरण के द्वारा उन्हें विश्लेषित एवं वर्णित भी करता है और उन्हें विवरणों व प्रतिवेदनों के रूप में प्रस्तुत करता है। ये विवरण एवं प्रतिवेदन उस संगठन की वित्तीय स्थिति व संचालन परिणामों को प्रदर्शित करते हैं। इसीलिए इसे व्यवसाय की भाषा कहा जाता है। परिमाणात्मक वित्तीय सूचना प्रदान कर यह सेवा कार्य भी करता है जो उपयोगकर्त्ताओं को अनेक प्रकार से सहायता देती है। एक सूचना प्रणाली के रूप में लेखांकन एक संगठन की विभिन्न प्रकार की सूचनाओं को एकत्रित करके उन्हें व्यवसाय में रुचि रखने वाले विभिन्न पक्षों को संप्रेषित करता है। लेखांकन सूचनाओं का संबंध भूतकाल के लेन-देनों से होता है तथा यह परिमाणात्मक एवं वित्तीय होती है। यह गुणात्मक एवं गैर-वित्तीय सूचना प्रदान नहीं करती। लेखांकन सूचनाओं का उपयोग करते समय लेखांकन की इन सीमाओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।

स्वयं जाँचिए - 4

सही उत्तर पर निशान लगाएं

1. निम्न में से कौन सी व्यावसायिक लेन-देन नहीं हैः

(क) व्यवसाय के लिए 10,000 रु. का फर्नीचर खरीदा।

(ख) 5,000 रु. का कर्मचारियों को वेतन का भुगतान किया।

(ग) अपने निजी बैंक खाते से 20,000 रु. अपने बेटे की फीस का भुगतान किया।

(घ) 20,000 रु. व्यवसाय में से बेटे की फीस का भुगतान किया

2. दीप्ति अपने व्यवसाय के लिए एक भवन खरीदना चाहती है। इस निर्णय से संबंधित उपयुक्त आंकड़े कौन से हैं

(क) इसी प्रकार के व्यवसाय ने वर्ष 2000 में 1,00,000 रु. का भवन खरीदा।

(ख) 2003 की भवन की लागत का विवरण।

(ग) 1998 की भवन की लागत का विवरण।

(घ) इसी प्रकार के भवन की अगस्त 2005 में लागत 25,00,000 रु.।

3. एक सूचना प्रक्रिया के रूप में लेखांकन का अन्तिम चरण कौन सा है?

(क) लेखा-पुस्तकों में आंकड़ो का लेखा।

(ख) वित्तीय विवरणों के रूप में संक्षिप्तीकरण।

(ग) सूचना का संप्रेषण।

(घ) सूचना का विश्लेषण एवं उसकी व्याख्या करना।

4. जब लेखांकन सूचना को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर दिया गया हो तो लेखांकन सूचना की कौन सी
गुणात्मक विशेषता
परिलक्षित होती हैः

(क) सुबोधता

(ख) प्रासंगिकता

(ग) तुलनीयता

(घ) विश्वसनीयता

5. मापने की सामान्य इकाई एवं प्रतिवेदन का साधारण प्रारूप प्रोत्साहित करता हैः

(क) तुलनीयता

(ख) सुबोधता बोधगम्यता

(ग) उपयुक्तता

(घ) विश्वसनीयता

 

 

बॉक्स - 4

लेखांकन की विभिन्न भूमिकाएं

एक भाषा के रूप मेंः इसे व्यवसाय की भाषा माना गया है जिसे व्यवसाय से संबधित सूचना को संप्रेषित करने के उपयोग मे लाया जाता है।

एक एेतिहासिक लेखाः इसे किसी व्यवसाय को वित्तीय सौदों का क्रमवार लेखा माना जाता है वास्तविक राशि पर वर्तमान आर्थिक वास्तविकता - इसे किसी इकाई की सही आय के निर्धारण का माध्यम माना जाता है एक समय से दूसरे समय में धन में परिवर्तन होता है।

एक सूचना तंत्रः इसे एक एेसी प्रक्रिया माना जाता है जो संप्रेषण मार्ग के द्वारा सूचना स्रोत (लेखाकार) को प्राप्तकर्त्ताओं (बाह्य उपयोगकर्त्ता) से जोड़ता है।

एक वस्तुः विशिष्ट सूचना को एक एेसी सेवा माना जाता है जिसकी समाज में मांग है तथा लेखाकार जिसे उपलब्ध कराने के लिए इच्छुक एवं सक्षम भी हैं।

1.5 लेखांकन के आधारभूत पारिभाषिक शब्द

1.5.1 इकाई

यहाँ इकाई से अभिप्राय एक एेसी वस्तु से है जिनका एक निश्चित अस्तित्व है। व्यावसायिक इकाई से अभिप्राय विशेष रूप से पहचान किए गये व्यावसायिक उद्यम से है जैसे - सुपर बाजार, हायर ज्वैलर्स, आई.टी.सी.लि., आदि। एक लेखांकन प्रणाली को सदा विशिष्ट व्यावसायिक अस्तित्व के लिए तैयार
किया
जाता है (इसे लेखांकन इकाई भी कहते हैं)।

1.5.2 लेन-देन

दो या दो से अधिक इकाइयों के बीच कोई घटना जिसका कुछ मूल्य होता है लेन-देन कहलाता है। यह माल का क्रय, धन की प्राप्ति, लेनदार को भुगतान, व्यय आदि हो सकती है। यह एक नकद अथवा
उधार सौदा हो
सकता है।

1.5.3 परिसंपत्तियाँ

यह किसी उद्यम के आर्थिक स्रोत होते हैं जिन्हें मुद्रा के रूप में उपयोगी ढंग से प्रकट किया जा सकता है। परिसंपत्तियों का मूल्य होता है तथा इनका व्यवसाय के परिचालन में उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए सुपर बाजार के पास ट्रकों का बेड़ा है जिनका उपयोग यह खाद्य पदार्थों की सुपुर्दगी के लिए करता है। ट्रक इस प्रकार से उद्यम को आर्थिक लाभ पहुँचाते रहे हैं। इसे सुपर बाजार के तुलन-पत्र की परिसंपत्ति की ओर दर्शाया जाएगा। परिसंपत्तियों को सामान्यतया दो वर्गों में बाँटा जाता हैः चालू व गैर चालू परिसंपत्ति (देखें चित्र 1.3)।

1.5.4 देयताएँ

यह वे देनदारियां या ऋण हैं जिनका भुगतान व्यावसायिक इकाई ने भविष्य में किसी समय करना है। यह लेनदारों का फर्म की परिसंपत्तियों पर दावे का प्रतिनिधित्व करती है। व्यवसाय चाहे छोटा हो या बड़ा कभी न कभी उसे धन उधार लेने और उधार पर वस्तुएं खरीदने की आवश्यकता पड़ती है। उदाहरण के लि25 मार्च, 2015 को सुपर बाजार ने फास्ट फूड प्रोडक्ट्स कंपनी से 10,000 रु. का माल उधार क्रय किया। यदि 31 मार्च, 2015 को सुपर बाजार का तुलन-पत्र तैयार किया जाए तो फास्ट फूड प्रोडक्ट्स कंपनी को उसके स्थिति विवरण के देयता पक्ष में लेनदार (खाते देय) के रूप में दर्शाया जायेगा। यदि सुपर बाजार दिल्ली स्टेट कोअॉपरेटिव बैंक लि. से तीन वर्ष की अवधि के लिए ऋण लेती है तो इसे भी सुपर बाजार के तुलन-पत्र में देनदारी के रूप में दर्शाया जायेगा। देयताओं को दो वर्गों में बांटा जाता हैः चालू व गैर चालू देयताएँ (देखें चित्र 1.4)।

1.5.5 पूँजी

स्वामी द्वारा व्यवसाय में उपयोग के लिए किया जाने वाला निवेश पूँजी कहलाता है। व्यावसायिक इकाई के लिए इसे स्वामी रोकड़ अथवा परिसंपत्ति के रूप में लाता है। पूँजी व्यवसाय की परिसंपत्तियों पर स्वामी का दायित्व एवं दावा है इसलिए इसे तुलन-पत्र के देयता की ओर पूँजी के रूप में दर्शाया जाता है।

1.5.6 विक्रय

विक्रय वस्तुओं की बिक्री या सेवाओं की बिक्री या उपयोगकर्त्ताओं को प्रदान की गई सेवाओं से प्राप्त
कुल आगम
है। विक्रय नकद भी हो सकता है और उधार भी।

बॉक्स - 5

चालू व गैर चालू मदों में अंतर

चालू देयताएँ एवं परिसंपत्तियाँ प्रचालन चक्र से संबंधित हैं।

चालू देयताएँ एवं परिसंपत्तियों का भुगतान/निपटान 12 माह के भीतर किया जाता है।

चालू मदें मुख्यतः व्यापारिक गतिविधियों के लिये प्रयोग में आती हैं।

चालू मदें नकद व नकद समतुल्य हैं।

1.5.7 आगम

यह वह धनराशि है जो व्यवसाय वस्तुओं की बिक्री या उपभोक्ताओं को प्रदान की गई सेवाओं से अर्जित करता है। इसे विक्रय आमदनी भी कहा जाता है। आमदनी की अन्य दूसरी मदें जो अधिकांश व्यवसायों में समान रूप से प्रयुक्त होती है यह हैः कमीशन, ब्याज, लाभांश, रॉयल्टी, किराया प्राप्त आदि। आमदनी को आय भी कहते है।

1.5.8 व्यय

यह व्यवसाय में आगम अर्जित करने की प्रक्रिया में आने वाली लागत है। साधारणतः व्यय का मापन एक लेखांकन अवधि के दौरान उपयोग की गई परिसंपत्तियों या उपयोग की सेवाओं के रूप में किया जाता है। व्यय की अधिकांश मदें हैः मूल्य ह्रास, किराया, मजदूरी, वेतन, ब्याज, बिजली, पानी, दूरभाष इत्यादि की लागत।

1.5.9 खर्च

यह किसी लाभ, सेवा अथवा संपत्ति को प्राप्त करने पर राशि व्यय करना अथवा देनदारी उत्पन्न करना है। खर्च के उदाहरण हैंः वेतन, माल का क्रय, मशीन का क्रय, फर्नीचर का क्रय आदि। यदि व्यय का लाभ एक वर्ष के भीतर प्राप्त हो जाता है। इसे व्यय कहेंगे (इसे आगम व्यय कहते हैं), दूसरी ओर यदि खर्चे का लाभ एक वर्ष से अधिक मिलता है तो इसे संपत्ति माना जायेगा (इसे पूंजीगत व्यय भी कहते हैं) इसके उदाहरण हैं मशीन, फर्नीचर आदि का क्रय।

1.5.10 लाभ

लाभ एक लेखांकन वर्ष में व्ययों पर आमदनी का अधिक्य है। इसमें स्वामी की पूंजी में वृद्धि होती है।

1.5.11 अभिवृद्धि

व्यवसाय से प्रासंगिक घटनाओं अथवा लेनदेनों से हाने वाले लाभ को अभिवृद्धि कहते हैं। इसके उदाहरण हैं स्थाई संपत्ति का विक्रय, न्यायालय में किसी मुकदमे को जीतना, किसी परिसंपत्ति के मूल्य में वृद्धि।

1.5.12 हानि

किसी अवधि की संबंधित आगम से व्यय अधिक्य को हानि कहते हैं। इससे स्वामी की पूँजी घटती है। यह मुद्रा अथवा मुद्रा सममूल्य (लागत पर व्यय) में हुई हानि की पुनः वसूली न होने की ओर संकेत करती है। उदाहरण के लिए चोरी अथवा आग दुर्घटना आदि से रोकड़ अथवा माल का नष्ट होना। इससे स्थाई परिसंपत्ति के विक्रय पर होने वाली हानि भी सम्मिलित है।

1.5.13 बट्टा

बट्टा विक्रय की गई वस्तुओं के मूल्य में कटौती को कहते हैं। यह दो प्रकार से दी जाती है। एक ढंग है वस्तुओं के विक्रय पर सूचि मूल्य पर तय प्रतिशत से कटौती। एेसी छूट को व्यापारिक बट्टा कहते हैं। यह साधारणतया विनिर्माताओं द्वारा थोक व्यापारियों को एवं ोक व्यापारियों द्वारा फुटकर विक्रेताओं को दी जाती है। वस्तुओं के उधार विक्रय पर देनदार यदि भुगतान तिथि अथवा उससे पहले देय राशि का भुगतान कर देते हैं तो उन्हें देय राशि पर कुछ छूट दी जा सकती है। यह कटौत देय राशि पर
भुगतान
कटौती के समय दी जाती है। इसीलिए इसे नकद कटौती कहते हैं। नकद कटौती एक एेसा प्रोत्साहन है जो देनदारों को तुरंत भुगतान के लिए प्रेरित करता है।

1.5.14 प्रमाणक

किसी लेन-देन के समर्थन में विलेख के रूप में प्रमाण को प्रमाणक कहते हैं। उदाहरण के लिए यदि
हम माल नकद
खरीदते हैं तो हमें कैशमैमो मिलता है, यदि हम इसे उधार खरीदते हैं तो हमे बीजक मिलता है, जब हम भुगतान करते हैं तो हमें रसीद प्राप्त होती है।

1.5.15 माल

वह उत्पाद जिनसे व्यवसायी कारोबार करता है, माल कहलाता है। अर्थात् जिनका वह क्रय एवं विक्रय अथवा उत्पादन एवं विक्रय कर रहा है। जिन वस्तुओं को व्यवसाय में उपयोग के लिए खरीदा जाता
है, उन्ह
ें माल नहीं कहते हैं। उदाहरण के लिए फर्नीचर विक्रेता यदि मेज एवं कुर्सियाँ खरीदता है तो
यह माल है लेकिन दूसरों के लिए यह
फर्नीचर परिसंपत्ति माना जाता है। इसी प्रकार से स्टेशनरी का कारोबार करने वाले के लिए स्टेशनरी माल है जबकि दूसरों के लिये यह व्यय की एक मद है (यह
क्रय
नहीं है)।

1.5.16 क्रय

क्रय एक व्यवसाय द्वारा नकद या उधार प्राप्त वस्तुओं का कुल मूल्य है जिन्हें विक्रय करने के लिए प्राप्त किया गया है। एक व्यापारिक इकाई में माल को क्रय उसी रूप में या िनिर्माण प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के बाद विक्रय के लिए किया जाता है। एक उत्पादन इकाई में कच्चा माल क्रय किया जाता है। फिर उसे तैयार माल में परिवर्तित करके बेचा जाता है। क्रय नकद भी हो सकता है और उधार भी।

1.5.17 आहरण

परियोजना 1ः उपयुक्त विकल्प का चुनाव करेंः

मदें चालू परिसंपत्तियाँ गैर चालू परिसंपत्तियाँ चालू देयताएँ गैर चालू देयताएँ

मशीनरी

लेनदार

वैकस्थ रोकड़

ख्याति

देय विपत्र

भूमि एवं भवन

फर्नीचर

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर

मालसूची

मोटर वाहन

निवेश

बैंक से ऋण

देनदार

पेटेंट

एयर-कंडिश्नर

खुले औजार

व्यवसाय में स्वामी द्वारा अपने व्यक्तिगत प्रयोग के लिए निकाली गई नकद धनराशि या वस्तुएं आहरण हैं। आहरण स्वामियों के विनियोग को घटाता है।

1.5.18 स्टॉक

किसी भी व्यवसाय में जो वस्तुएं, अतिरिक्त पुर्जे व अन्य मदें हाथ में होती हैं उनका मापन रहतिया (स्टॉक) कहलाता है। इसे हस्तस्य रहतिया भी कहते हैं। एक व्यापारिक इकाई में स्टॉक से अभिप्राय उस माल से है जो लेखांकन वर्ष के अन्तिम दिन बिना बिका रह गया है। इसे अन्तिम स्टॉक या अन्तिम स्कंध भी कहते हैं। एक उत्पादन कंपनी के अन्तिम स्टॉक में अंन्तिम दिन का कच्चा माल, अर्धनिर्मित व निर्मित स्टॉक वस्तुएं सम्मिलित होती हैं। इसी प्रकार प्रारंभिक स्टॉक किसी लेखांकन वर्ष की प्रारंभिक स्टॉक राशि है।

1.5.19 देनदार

देनदार प्राप्य खाते वे व्यक्ति या इकाइयां हैं जिनसे व्यावसायिक संस्था को उससे वस्तुएं या सेवाएं उधार प्राप्त करने के बदले कुछ धनराशि लेनी है। इन व्यक्तियों या इकाइयों द्वारा कुल प्राप्य राशि को अंतिम
दिन तुलन-पत्र में विव
िध देनदारों के रूप में परिसंपत्ति पक्ष में दर्शाया जाता है।

1.5.20 लेनदार

लेनदार वे व्यक्ति एवं/या इकाइयां है, जिनका किसी व्यवसायिक संस्था द्वारा उनसे उधार वस्तुएं या सेवाएं प्राप्त करने के बदले भुगतान करना है। इन व्यक्तियों या इकाइयों को देय कुल धन राशि को अंतिम दिन स्थिति विवरण में विविध लेनदारों (देय खातों) के रूप में देयता पक्ष में र्शाया जाता है।

स्वयं जाँचिये - 5

मैसर्स सनराइज ने 5,00,000 रु. के प्रारम्भिक निवेश से स्टेशनरी क्रय-विक्रय का व्यवसाय प्रारम्भ किया। इस राशि में से उसने 1,00,000 रु. फर्नीचर एवं 2,00,000 रु. स्टेशनरी का सामान खरीदने पर व्यय किये। उसने एक विक्रेता एवं एक लिपिक की नियुक्ति की। महीने के अन्त में 5,000 रु. उनके वेतन के भुगतान किये। जो स्टेशनरी उसने क्रय की थी उसमें से कुछ तो उसने 1,50,000 रु. में नकद बेची तथा कुछ रवि को 1,00,000 रु. में उधार बेची। इसके पश्चात उसने श्री पीस से 1,50,000 रु. की स्टेशनरी का सामान खरीदा। अगले वर्ष के प्रथम सप्ताह में अग्नि दुर्घटना हुई जिसमें 30,000 रु. मूल्य की स्टेशनरी स्वाहा हो गई। 40,000 रु. की लागत की मशीनरी के एक भाग को 45,000 रु. में बेच दिया।

उपर्युक्त के आधार पर निम्न का उत्तर देंः

1. मैसर्स सनराइज ने कितनी पूँजी से व्यापार आरम्भ किया।

2. उसने कौन-कौन सी स्थाई संपत्ति खरीदी?

3. विक्रय किये गये माल की कीमत क्या थी?

4. लेनदार कौन था? उसको कितनी राशि देय है?

5. उसने कौन-कौन से व्यय किये?

6. उसे कितना लाभ हुआ?

7. उसे कितनी हानि हुई?

8. उसका देनदार कौन है? उससे कितनी राशि प्राप्त होनी है?

9. उसने कुल कितनी राशि व्यय की एवं कुल कितनी हानि हुई?

10. बताएं कि निम्न मदें परिसंपत्तियां हैं, देयताएं हैं, आगम हैं, व्यय है अथवा इनमें से कोई भी नहीं है।

विक्रय, देनदार लेनदार, प्रबन्धक को वेतन, देनदारों को छूट, स्वामी का आहरण।

अधिगम उद्देश्यों के संदर्भ में सारांश

1. लेखांकन का अर्थः लेखांकन व्यावसायिक लेन-देनों की पहचान करने, मापने, अभिलेखन करने एवं आवश्यक सूचना को उनके उपयोगकर्त्ता को सम्प्रेषण की प्रक्रिया है।

2. लेखांकन सूचना के स्रोत के रूप मेंः लेखांकन सूचना के स्रोत के रूप में किसी संगठन की आर्थिक घटनाओं की सूचनाओं के पहचानने, मापने, अभिलेखन करने एवं सूचनाओं के उपयोगकर्त्ताओं के संप्रेषण की प्रक्रिया है।

3. लेखांकन सूचना के उपयोगकर्त्ताः लेखांकन की समाज में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। यह हर स्तर के प्रबन्धकों को एवं उन लोगों को, जिनका उद्यम में वित्तीय हित होता है, जैसे वर्तमान एवं संभावित निवेशकर्त्ता एवं लेनदार, सूचना उपलब्ध कराता है। लेखांकन सूचना, परोक्ष रूप से वित्तीय हित रखने वालों के लिए भी महत्त्व रखती है। ये लोग हैं नियमन एजेंसीयाँ, कर अधिकारी, ग्राहक, श्रमिक संगठन, व्यापारिक संघ, स्टॉक एक्सचेंज तथा अन्य।

4. लेखांकन की गुणात्मक विशेषताएंः लेखांकन सूचना को अधिक उपयोगी बनाने के लिए इसमें निम्न गुणात्मक विशेषताओं का होना आवश्यक हैः

विश्वसनीयता सुबोधता

प्रासंगिकता तुलनीयता

5. लेखांकन का उद्देश्यः लेखांकन का प्राथमिक उद्देश्य निम्न हैः

व्यवसाय के क्रिया-कलापों का अभिलेखन;

लाभ एवं हानि की गणना;

व्यावसायिक स्थिति का प्रदर्शन; और

विभिन्न वर्गों के लिए सूचना उपलब्ध कराना।

6. लेखांकन की भूमिकाः लेखांकन स्वयं में एक साध्य नहीं है। यह साध्य को प्राप्त करने का एक साधन है। इसकी भूमिकाएँ हैंः

व्यवसाय की भाषा एेतिहासिक अभिलेखन

वर्तमान आर्थिक वास्तविकता सूचना तंत्र

उपयोगकर्त्ताओं को सेवा प्रदान करना

अभ्यास के लिए प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. लेखांकन को परिभाषित कीजिए।

2. वित्तीय लेखांकन का अंतिम परिणाम क्या होता है?

3. लेखांकन के मुख्य उद्देश्यों की गणना कीजिए।

4. एेसे पाँच उपयोगकर्त्ताओं को सूचीबद्ध कीजिए जिनकी लेखांकन में परोक्ष रूप से रुचि होती है।

5. दीर्घ अवधि ऋणदाताओं के लिए आवश्यक लेखांकन सूचना की प्रकृति को बताइए।

6. सूचना के बाह्य उपयोगकर्त्ता कौन हैं?

7. प्रबन्ध की सूचना संबंधी आवश्यकता की गणना करें।

8. आगम के कोई तीन उदाहरण दीजिए।

9. देनदार एवं लेनदारों में अंतर्भेद कीजिए।

10. लेखांकन सूचना तुलना योग्य होनी चाहिए। क्या आप इस कथन से सहमत है? कोई दो कारण दें।

11. यदि लेखांकन सूचना का प्रस्तुतिकरण स्पष्ट नहीं है तो लेखांकन सूचना की कौन सी गुणात्मक विशेषता का उल्लंघन हुआ है?

12.ीते समय में लेखांकन की भूमिका में परिवर्तन आया है। क्या आप सहमत हैं? व्याख्या कीजिए।

13. निम्न लेखांकन शब्दों को उदाहरण देकर समझाइए

स्थायी परिसंपत्तियाँ लाभ

आगम व्यय

अल्प-अवधि देयता पूँजी

14. आगम एवं व्यय को आप कैसे परिभाषित करेंगे?

15. वाणिज्य के विद्यार्थियों एवं अन्य लोगों के लिए लेखांकन विषय के अध्ययन के प्राथमिक कारण क्या हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. लेखांकन की परिभाषा दीजिए तथा इसके उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।

2. व्यवस्थित लेखांकन की आवश्यकता के निर्धारक तत्वों को समझाइए।

3. बाह्य उपयोगकर्त्ताओं की सूचना की आवश्यकता का वर्णन कीजिए।

4. परिसम्पत्ति से आप क्या समझते हैं और परिसंपत्तियों के विभिन्न प्रकार कौन-कौन से हैं?

5. आमदनी एवं लाभ के अर्थ को समझाइए। इन दोनों शब्दों में अंतर बताइए।

6. लेखांकन सूचना की गुणात्मक विशेषताओं को समझाइए।

7. आधुनिक समय में लेखांकन की भूमिका का वर्णन कीजिए।

स्वयं जाँचिए की जाँच सूची

स्वयं जाँचिए - 1

(क) आर्थिक (ख) प्रबन्ध/कर्मचारी (ग) लेनदार

(घ) समय-अन्तराल (ड.) बाह्य (च) सौदों की पहचान करना,

(छ) सूचना का संप्रेषण (ज) मौद्रिक (झ) कालक्रम के अनुसार

स्वयं जाँचिए - 2

(क) सरकार एवं अन्य नियामक (ख) प्रबन्ध (ग) सामाजिक उत्तरदायित्व समूह

(घ) ऋणदाता (ड.) आपूर्तिकर्त्ता एवं लेनदार (च) ग्राहक

स्वयं जाँचिए - 3

1. विश्वसनीयता अर्थात् प्रमाणिकता, निष्ठा, तटस्थता

2. प्रासंगिकता अर्थात् समयानुकूल 3. समझ योग्य एवं तुलनात्मकता

स्वयं जाँचिए - 4

1. (ग) 2. (क) 3. (ग) 4. (ख) 5. (क)

स्वयं जाँचिए- 5

1. 5,00,000 रु. 2. 1,00,000 रु. 3. 2,00,000 रु. 4. श्री रीस 1,50,000 रु. 5. 5,000 रु. 6. 5,000 रु. 7. 30,000 रु. 8. रवि 1,00,000 रु. 9. 35,000 रु.

10. परिसम्पत्तियाँ; देनदारों; देयता; आहरण; आगमः विक्रय व्यय, बट्टा, वेतन

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चित्र 1.2 लेखांकन सूचना की गुणात्मक विशेषताएं

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