प्रोजेक्ट के प्ररूप प्रोजेक्ट कायर् की प्रवृफति का वगीर्करण उसमें निहित कायो± के आधर पर किया जाना चाहिए: ;पद्ध व्यावहारिक कायर् μ जिसमें माॅडल रचना जैसी सामग्री के वास्तविक निमार्ण पर बल दिया जाता है। ;पपद्ध बोध् μ इसमें पठन और कहानियों के श्रवण जैसे प्रत्यक्ष और प्रतिनिध्िक अनुभव शामिल हैं। ;पपपद्ध समस्या हल संबंध्ी μ इसमें बौिक प्रक्रमों युक्त समस्या का हल निकाला जाता है। ;पअद्ध कौशल और ज्ञान की प्रवीणता μ इसमें पाठ्यपुस्तकों या प्रयोगशाला पुस्ितकाओं में दिये गए प्रयोगशाला निदशर्कों का नि£दष्ट जैसे कौशलों में कौशल प्राप्त किया जाता है। प्रोजेक्ट कायर् का उद्देश्य विद्या£थयों में दिन - प्रतिदिन की समस्याओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना, ज्ञान का अनुप्रयोग करना, क्रांतिक चिंतन को प्रोत्साहित करना और उनमें कायर् करने की वैज्ञानिक प(ति विकसित करना है। श्िाक्षु अपनी सुविधनुसार कायर् कर सकते हैं। वे एक नियत कालावध्ि में अपने विचारों का नियोजन और निष्पादन कर सकते हैं। सजीव निष्पादन के द्वारा वे विज्ञान अध्िगम में वृि करते हैं जबकि प्रोजेक्ट कायर् से श्िाक्षुओं की मानसिक क्षमता का विस्तार होता है। विद्या£थयों को प्रेक्षण, तवर्फ शक्ित, व्याख्या, निष्कषर् और प्रतिवेदन जैसे कौशलों को सीखने का अवसर मिलता है। सामूहिक रूप से संचालित परियोजना से, दलों के सभी सदस्यों में पारस्परिक सामाजिक सहयोग विकसित होता है। किसी प्रोजेक्ट को करते समय विभ्िान्न अभ्िागम स्वीकार किए गए हैं। ऐसे अभ्िागमों में प्रयोग, आधारितपरियोजना में उपकरण की व्यवस्था, सवेर्क्षण आधरित परियोजना, प्रकृति निरीक्षण आधरित परियोजना, अिागम शीट आधरित परियोजना, उपलब्ध् आंकड़ों के प्रयोग पर परियोजना, बाह्य कायर् आधरित परियोजना अन्वेषण आधरित परियोजना, सूचना प्रदायक परियोजना इत्यादि विधएं शामिल हैं। इन विधओं पर आधरित वुफछ परियोजनाओं का अगले अनुच्छेद में उल्लेख किया गया है। वुफछ प्रस्तावित प्रोजेक्ट 1ण् चंद्रमा को देख्िाये। लगभग एक माह तक प्रतिदिन उसी समय चंद्रमा का आकार, उसकी चमक तथापृथ्वी से उसकी ऊँचाइर् का अध्ययन कीजिये। 2ण् घषर्ण विद्युत शृंखला तैयार कीजिये। घषर्ण विद्युत से तात्पयर् घषर्ण द्वारा उत्पन्न विद्युत आवेश से है ;जैसा काँच को मखमली कपड़े से रगड़ा जाना हैद्ध। आस - पास से विभ्िान्न पदाथर् एकत्रिात कीजिए। विभ्िान्न संयोजनों को आपस में रगड़ने की प्रिया द्वारा आवेश्िात कीजिये। 3ण् ऊष्मा के संचरण का अध्ययन कीजिये। उन प्रचलों की जाँच कीजिए जो ऊष्मा के संचरण को प्रभावित करते हैं। 4ण् अपने क्षेत्रा में स्िथत तालाब/झील की वनस्पति और उसके आवास की छानबीन कीजिए। 5ण् अपने मुहल्ले के जल संसाध्नों का सवेर्क्षण कीजिये। प्रतिदिन हम कितने जल का प्रयोग करते हैं? घरांे में नलों में पानी के रिसने से कितना जल व्यथर् होता है? 6ण् हमें वषार् से कितने जल की मात्रा प्राप्त होती है ;जल प्रमापी तैयार करनाद्ध? 7ण् मौसम का चाटर् तैयार कीजिए। 8ण् मैं अपने पेड़ की देखभाल वैफसे करता हूँ? इसकी आकारिकी, वृि और स्वास्थ्य का अध्ययन कीजिए। इसके लिए क्या आवश्यक है? क्या यह वृफत्रिामता के प्रति अनुिया प्रद£शत करता है। इसकी मृत्यु कब होती है? 9ण् अपने शहर के पौधें की विविध्ताओं का अध्ययन कीजिए। 10ण् अपने शहर के पुष्पीय तथा अपुष्पीय पादपों का वगीर्करण कीजिए। 11ण् विभ्िान्न पादपों की जड़ों का अध्ययन कीजिए। 12ण् बीज के अंवुफरित होने के समय का अध्ययन कीजिए। अत्यंत अनुवूफल तथा प्रतिवूफल परिस्िथतियों की पहचान कीजिए। 13 घरेलू चिकित्सीय उपचार के लिये प्रयोग में लाये जाने वाले पादपों को सूचीब( कीजिए। रोग के उपचार में पादप का कौन सा भाग औषध्ि के रूप में अध्िक उपयुक्त होता है। 14ण् ऊजार् प्रबंध्न। 15ण् जल प्रबंध्न। 16ण् अपने मुहल्ले/शहर/नगर के अपश्िाष्ट का प्रबंध्न। 17ण् किसी कीट के जीवन चक्र का अध्ययन। 18ण् मृदा का अध्ययन। उसके भौतिक अभ्िालक्षणों जैसे चभ्ए जैविक प्रकृति, जलधारण क्षमता, सरंध्रता। 19ण् जैव विविध्ता का अध्ययन ;स्वयं से अथवा परिभाषा कोश के द्वाराद्ध। 20ण् पूफलों के रंगों का अध्ययन। 21ण् पत्ती के आकारों का अध्ययन। 22ण् किण्वन की प्रिया का अध्ययन। 23ण् पौधें से प्राप्त रसों का अध्ययन। 24ण् मेरे शहर के पक्षी। 25ण् हम शहद किस प्रकार एकत्रिात करते हैं? 26ण् पेड़ की आयु का निधर्रण। 27ण् विभ्िान्न उँफचाइयों पर वायु रफ्रतार का मापनμपरिवेशी संरचनाओं तथा वनस्पति पर इसके प्रभाव का अध्ययन। 28ण् प्रावृफतिक रेशों का निरीक्षण। 29ण् विभ्िान्न प्रकार के रेशों से निमिर्त वस्त्रों द्वारा ऊष्मा का अवशोषण। 30ण् अपद्रव्यों का बपर्फ के पिघलने पर प्रभाव। 31ण् दूध् में उपस्िथत जल की मात्रा के अनुसार उबलने में लगने वाले समय पर प्रभाव। 32ण् क्रमिक विसजर्नों के बाद वैफमरे के दो फ्रलैशों के मध्य, न्यूनतम समय अंतराल का अध्ययन और इस प्रकार इसमें प्रयुक्त बैट्री की जाँच। 33ण् द्रवों से होकर एक ही सामग्री से निमिर्त विभ्िान्न आकार की वस्तुओं की गति। 34ण् सि¯लकी का निरीक्षण करना। 35ण् क्षैतिज तथा आनत तलों पर सपीर् घषर्ण ;ेसपकपदह तिपबजपवदद्ध का अध्ययन करना। 36ण् विभ्िान्न आकारों के बतर्नों में भरे द्रवों के कारण उनसे उत्पन्न किसी बिंदु पर द्रव दाब का अध्ययन करना। 37ण् प्लास्िटक की गेंदों का प्रयोग करते हुये दुग्ध्मापी/तरल घनत्वमापी का निमार्ण करना। 38ण् दृष्िटदोष के रोगियों का सवेर्क्षण तथा उनका वगीर्करण करना। 39ण् सेल में भंडारित ऊजार् का मापन। 40ण् आद्रर्तामापी अध्ययन। 41ण् विभ्िान्न तापों पर किसी चालक तार के लिये धरा - वोल्टता संबंध का पता लगाना। 42ण् स्वेच्छा परिमाण के लंबाइर् मापन के पैमाने तथा विभ्िान्न युक्ितयों का निमार्ण करना। 43ण् अलग - अलग लंबाइयों की छड़ों ;लीवरोंद्ध का प्रयोग करते हुये किसी पिंड को घुमाने के लिये बल की आवश्यकता का मापन करना। 44ण् विभ्िान्न साबुनों तथा अपमाजर्कों की निमर्लन क्षमता का सवेर्क्षण करना। 45ण् एक बतर्न में रखे तरल की नियत मात्रा, जो अलग - अलग प्रकार के रंगों के ढक्कनों से ढकी है, के लिये प्रशीतलन दर का प्रेक्षण करना। 46ण् आनत तल पर एक निधर्रित समयान्तराल में अलग - अलग पदाथो± से बने बेलनों को घुमाने पर, उनकेद्वारा तय की गइर् दूरी के मापन द्वारा घषर्ण बल का आंकलन कीजिये। इसकी पुनरावृिा विभ्िान्न वक्रों के पृष्ठ पर करने का प्रयास कीजिये। 47ण् पानी के विभ्िान्न प्रतिदशो± में घुली वायु का आंकलन करना। 48ण् वषार् )तु में अलग - अलग समय पर वषार् के जल को एकत्रिात कीजिये। उसमें उपस्िथत अम्लता का तुलनात्मक अध्ययन कीजिये। 49ण् मिचर्/हल्दी/चाय/शहद/अन्य खाद्य पदाथो± की शु(ता का निधर्रण करना। 50ण् विभ्िान्न तेलों में उपलब्ध् काबर्न अवयवों का निधर्रण करना। 51ण् विभ्िान्न खाद्य पदाथो± को विलयनों, निलंबनों तथा कोलाॅइडों में वगीर्करण। 52ण् विभ्िान्न खाद्य प्रतिदशीर् जैसेμदूध्, मुरब्बा, जेली, गांेद आदि में कोलाॅइडी गुणों का अध्ययन। 53ण् विभ्िान्न खाद्य पदाथो± में वसीय मात्रा ज्ञात करना। 54ण् अपने मुहल्ले के औषध्ीय पादपों का वनस्पति संग्रहालय तैयार करना। 55ण् प्रावृफतिक चभ् संसूचकों की सूची। 56ण् अपने आस - पास होनेवाली ऊष्माक्षेपी तथा ऊष्माशोषी अभ्िाियाओं की सूची। 57ण् आपके आस - पास के आद्रर्ताग्राही पदाथो± की सूची तैयार करना और जल के प्रति इनकी आपेक्ष्िात बंध् ुता का आकलन। 58ण् उन घटनाओं का सवेर्क्षण कीजिए जिनमेें आप ऊजार् के विभ्िान्न रूपों का परिवतर्न देखते हैं। तत्पश्चात् ट्रांसड्यूसरों के नामों की सूची तैचार कीजिये। 59ण् विभ्िान्न प्रकार के ईंध्नों की दक्षता का निधर्रण। 60ण् खाद्य पदाथो± के वैफलोरीय मानों को प्रद£शत करने के लिये चाटर्। 61ण् पादप रसों को एकत्रिात कर उनके रंग, घनत्व प्रतिशत जल मात्रा के गुणों का औषध्ीय मान आदि ज्ञात करना। 62ण् अपने रसोइर्घर में उपयोग में आने वाले अम्लों तथा क्षारों का अध्ययन। 63ण् जैव अणु से आप क्या समझते हैं? उनके संघटन तथा कायो± को ज्ञात कीजिये। 64ण् विभ्िान्न प्रकार के उपलब्ध साबुनों की उनकी चभ् तथा झाग उत्पन्न करने की क्षमता का निधर्रण। क्या इसका संबंध् उनकी निमर्लन क्षमता से है? 65ण् द्रवों के क्वथनांकों पर अपद्रवों का प्रभाव। 66ण् किसी मिश्र धतु के संघटन को आप किस प्रकार पहचानेंगे। 67ण् तत्वों, वैज्ञानिक शब्दों/वैज्ञानिक नामों के लिये शब्द पहेली लिख्िाये। 68ण् रासायनिक अभ्िािया के स्टाॅइकियोमीट्री निधर्रित कीजिए। 69ण् आवत्तर् सारणी से संक्रमणीय तत्वों को अलग कीजिए। इनसे उपलब्ध रंगीन यौगिकों की सूची तैयार कीजिए। 70ण् विभ्िान्न तरलों की वाष्पशीलता का निरीक्षण कीजिए। 71ण् प्रावृफतिक रूप से अभ्िाविन्यस्त परियोजनाओं जैसे केले के तने पर अनुसंधन कायर् और इससे धगों को प्राप्त करना तथा कागज का निमार्ण करना। 72ण् माॅडलों तथा चाटो± के माध्यम से संयोजकता का अध्ययन। 73ण् एक सिक्के की मदद से पूणर् चंद्रमा का कोणीय व्यास का मापन कीजिए। 74ण् कायर्कारी माॅडलों को तैयार करने में आने वाली कठिनाइयों की सूची तैयार करना। 75ण् अंध्विश्वासों की सूची तथा उन पर टिप्पणी कीजिए। 76ण् साहित्य से उन वाक्यांशों की सूची तैयार करना जो विज्ञान के विकास से जुड़े हैं। 77ण् औषध्ीय पादप उद्यान को लगाना एवं विकसित करना। 78ण् लोकपि्रय विज्ञान पत्रिाकाओं तथा उनकी पाठ्यसामग्री की सूची। 79ण् जल/एथेनाॅल/इर्थर/ऐसीटोन जैसे विभ्िान्न विलायकों का प्रयोग करते हुये बेन्शोइक अम्ल तथा सैलिसिलिक अम्ल का िस्टलीकरण। 80ण् कोलाॅइडों को तैयार करना तथा उनमें स्वंफदन निस्यंदनीयता, ब्राइनी गति का अध्ययन। 81ण् आपके दैनिक जीवन में होने वाली विभ्िान्न आॅक्सीकरण - अपचयन अभ्िाियाओं की पहचान। 82ण् ऐसे प्लास्िटक की पहचान करो जिसका पुनः चक्रण हो सके। 83ण् खाद्य योज्यों के रूप तथा कायर्। 84ण् सूयर् के प्रकाश से लाभ एवं हानियाँ। 85ण् उद्योग संब( वायु प्रदूषण के प्रकार। 86ण् घर में वायु प्रदूषण के स्रोत। 87ण् घर में जल प्रदूषण के स्रोत। 88ण् दीघोर्पयोगी वृफष्िा। 89ण् कीटनाश्िायों तथा शाकनाश्िायों पर आध्ुनिक वृफष्िा की निभर्रता। 90ण् जैव वृफष्िा। 91ण् एक बीज पत्राीय तथा द्विबीज पत्रिायों के रंध््रों की तुलना। 92ण् प्रोटोजोअन संबधर् को तैयार करना एवं उसका अध्ययन। 93ण् एस्ट्रैसी ;क्राइर्सेन्थीमम/वैफलेनडुल्ला/टेगेट्सद्ध के पुष्प विन्यास का अध्ययन। 94ण् विभ्िान्न मण्िाकाओं का प्रयोग करते हुए। मेन्डेल अनुपात की पुष्िट। 95ण् ‘लाइपफ आॅपफ द पास्ट’μ एक साहित्यक सवेर्क्षण पर आधरित प्रोजेक्ट। विभ्िान्न स्रोतों से पाँच लुप्त पादपों तथा पाँच ही लुप्त जंतुओं से संबंध्ित जानकारी प्राप्त कीजिए। इन लुप्त जीवों के समीपस्थ जीवित जाति को खोजने का प्रयास कीजिए। 96ण् एक परिवार में आनुवंश्िाक विभ्िान्नताएँः शक्ल सूरत के आधार पर किसी परिवार के संतानों काअध्ययन विभ्िान्नताओं के अस्ितत्व तथा उनके ड्डोत के बारे में निष्कषर् निकालिए। 97ण् उद्यान के निरीक्षण द्वारा खाद्य जालिका तथा पारिस्िथतिक पिरामिड का निमार्ण। 98ण् तेजी से दौड़ लगाने ;लगभग 100 मीटर दूरी तय करने परद्ध वाले व्यक्ित की हृदय गति की दर का अध्ययन और उसकी एक सामान्य स्िथति में किसी व्यक्ित के हृदय गति की दर से तुलना। 99ण् बीजों के अंवुफरण पर विभ्िान्न रंगों के प्रकाश का अध्ययन। 100ण् जलोद्भ्िाद्ों की वृि पर जल में विभ्िान्न लवणों की सांद्रता के प्रभाव का अध्ययन। 101ण् मनुष्यों में व्यायाम का उपापचयी दर ;स्टाचर् का पाचनद्ध के प्रभाव का अध्ययन। 102ण् मृदा के किसी प्रतिदशर् का संवधर्न सूक्ष्मजीवों की उपस्िथति का अध्ययन तथा मृदा की उत्पादकता को प्रभावित करने वाले कारकों की पहचान। 103ण् धतु सियता श्रेणी तैयार - करना विभ्िान्न धतुओं की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभ्िािया का प्रेक्षण। इस श्रेणी का उपयोग कर किसी अज्ञात धतु का निधर्रण। 104ण् ऐसे पफलों तथा सब्िजयों को अध्ययन जिनमें विद्युत - अपघट्य पाये जाते हैं। 105ण् एक गतिमान इस्पात की गेंद का एक अचल लक्ष्य गेंद पर पड़ने वाले प्रभाव की जाँच कर अपनी धारणा बनाइए। 106ण् ध्वनि: क्या आप ध्वनि को देख सकते हैं? जलती हुइर् मोमबत्ती को क्या ध्वनि बुझा सकती है? क्या आप बोतल में रखी घंटी की ध्वनि सुन सकते हैं। ध्वनि कितनी तेज गति से गमन करती है? ध्वनि किस कारण उत्पन्न होती है। माध्यम की प्रवृफति किस प्रकार ध्वनि को प्रभावित करती है। 107ण् प्रारंभ्िाक विद्युत् मोटर/जेनेरेटर का निमार्ण। 108ण् घर की बनी बैटरियाँ। 109ण् ध्ूप पेटी में रखे समतल दपर्ण तथा अवतल दपर्ण द्वारा अ(र्चालक लेसर स्रोत निगर्मित प्रकाश किरण के परावतर्न का अध्ययन करना। 110ण् ध्ूप पेटी में रखे उत्तल/अवतल लेंसों द्वारा अ(र्चालक लेसर स्रोत से निगर्मित प्रकाश किरण के अपवतर्न का अध्ययन करना। 111ण् जल में ;अ(र्चालक लेसर स्रोत का प्रयोग करते हुएद्ध प्रकाश किरण के क्रांतिक कोण का मापन करना। प्रोजेक्ट लेखन के वुफछ उदाहरण जैव निम्नीय एवं अजैव निम्ननीय अपश्िाष्ट शीषर्क पयार्वरण में जैव निम्नीय तथा अजैव निम्ननीय पदाथो± ;अपश्िाष्टोंद्ध की पहचान करना। सि(ांत यह जानना महत्वपूणर् है कि जैव निम्ननीय तथा अजैव निम्ननीय पदाथो± जैसे μ शब्दों का प्रयोग मानव ियाओं द्वारा उत्पन्न अपश्िाष्टों के लिए किया गया है। इन अपश्िाष्टों को यदि दक्षतापूवर्क विस£जत नहीं किया गया तो ये अत्यध्िक मात्रा में संचयित होकर जल, थल तथा मृदा को प्रदूष्िात कर देंगे। मनुष्यों तथा पशुधन से प्राप्त मल, औद्योगिक बाहित, पीड़कनाश्िायों, शाकनाश्िायों, खाली डिब्बों, बोतलों तथा जारों, धातु तथा प्लास्िटक के बने प्यालों, पोलीथ्िान की थैलियों, कागज, बेंक्लर मशीनों के पुजेर् आदि से विभ्िान्न अपश्िाष्ट प्राप्त होते हैं। रसोइर्घर, सब्जी बाजार, उद्यानों, वृफष्िा तथा खेतों इत्यादि से प्राप्त अपश्िाष्ट की एक बड़ी मात्रा एकत्रिात होती है। इनकी सूची लंबी है परन्तु सुविध एवं पारिस्िथतिक बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुये इन्हें जैव निम्ननीय तथा अजैव निम्ननीय अपश्िाष्टों के रूप में वगीर्वृफत किया गया है। एक पारस्िथतिक तंत्रा मेंउत्पादनकत्तार्ओं तथा उपभोक्ताओं के अलावा परपोषी जीवों का एक और वगर् भी है जिसे सामूहिक रूप से निम्ननीय वगर् कहा जा सकता है। इस वगर् में मुख्यतः जीवाणु तथा कवक आते हैं। ये दोनों मृत पादपों तथा जंतु पदाथो± को निम्नीवृफत कर उनका पाचन कर लेते हैं। ऐसे सभी पदाथर् जो निम्नीवृफतों द्वारा निम्नीवृफत तथा अपघटकों द्वारा अपघटित हो जाते हैं उन्हें जैव निम्ननीय अपश्िाष्ट कहते हैं। ऐसे अपश्िाष्टों का प्रबंध्न आसान है। इसे प्रावृफतिक प्रियाओं अथवा इंजीनियरी तंत्रों ;उदाहरण के लिये अपश्िाष्ट उपचार यंत्रोंद्ध द्वारा प्रबंध्ित किया जा सकता है। परिणामस्वरूप एक लाभदायक संसाध्नों ;उदाहरण के लिये बायो गैस संयंत्रा इत्यादिद्ध में परिव£तत किया जा सकता है। अपश्िाष्टों की अनेक किस्मों का उत्पादन मनुष्यों तथा उद्योगों द्वारा होता है। यद्यपि इनमें से वुफछ निम्नीवृफत नहीं हो पाते ;पोलीथ्िान, प्लास्िटक, काँच आदिद्ध अथवा अपघटकों द्वारा धीरे - ध्ीरे निम्नीवृफत होते रहते हैं ;उदाहरण के लिये डी.डी.टीद्ध, ऐसे अपश्िाष्ट अजैव निम्ननीय पदाथर् कहलाते हैं। इनका लगातार संचयन विशेषकर अत्यध्िक प्रदूष्िात शहरी क्षेत्रों में विशाल स्वास्थ्य संकट पैदा करते हैं और स्वच्छ जीवन प्रदान करने में ये बहुत अिाक बाधक हैं। इस अध्ययन के द्वारा पदाथो± की दोनों किस्मों के बीच के मध्य भेद स्थापित किये जा सकते हैं। आवश्यक सामग्री उद्यान, रसोइर्घर, बाशार, गौशाला इत्यादि से उपलब्ध् अपश्िाष्ट पदाथो± के नमूने, ¯स्प्रग तुला, एक जोड़ा दस्ताने, प्लास्िटक की दो थैलियाँ ;10ष् 6ष्द्ध तथा नायलाॅन का धगा। कायर्विध्ि 1ण् अपने आसपास से निम्नलिख्िात को नमूने के तौर पर मुट्ठी पर हाथ में लीजिये। नमूनों से उत्पन्न संक्रमण अथवा क्षति से बचाव के लिये हाथों में दस्ताने पहन लीजिये। यह नमूने साग - सब्िजयों, जंतुतथा मछलियों के अवशेष, बाँस के टुकड़ों, गत्ते के टुकड़ों, घास पूँफस, पत्ती, कागज, शीशे के टुकड़ों, गाय का गोबर, कपड़े के टुकड़े, बचा वुफचा भोजन, टहनियाँ, छाल, थमोर्प्लास्िटक अपश्िाष्ट, पफलों के छिलके, सिगरेट के टुकड़े, प्लास्िटक प्लेटों के टुकड़ों, रबर तथा प्लास्िटक की ट्यूब, चीनी मिट्टðी के छोटे - छोटे टुकड़े, डी.डी.टी. पाउडर हो सकते हैं। 2ण् पादप तथा जन्तु स्रोतों ;उदाहरण के लिये साग - सब्जी, पिायाँ, टहनियाँ, गत्ते के टुकड़े, कागज, गाय का गोबर इत्यादिद्ध से अपश्िाष्ट के थोड़े नमूने ;प्रत्येक का 5 हद्ध को अलग कर लीजिये। 3ण् ठीक इसी प्रकार पादपों तथा जंतुओं के स्रोतों के अतिरिक्त ;उदाहरण के लिये प्लास्िटक के ढक्कन, प्लास्िटक ट्यूब के टुकड़े, पोलीथ्िान, नाइलोन, ग्लास, धतु के डिब्बे और चीनी मिट्टðी के छोटे - छोटे टुकड़ों के नमूने तैयार कर अलग कीजिए। 4ण् एक तेज चावूफ की सहायता से सभी नमूनों को छोटे - छोटे खण्डों में काट लीजिये और उन्हें आपस में भली - भाँति मिलाकर ढेर । ;पद 2 का नमूनाद्ध तथा ठ ;पद ठ का नमूनाद्ध में बाँट लो। 5ण् पोलीथ्िान की थैलियों पर वाटर प्रूपफ स्याही की मदद से ष्।ष् तथा ष्ठष् लिख लीजिये। 6ण् नाखूनों की मदद से प्रत्येक पोलीथ्िान की थैली में खरौंच मार कर उनमें छेद कर लीजिये। दोनों नमूनों ष्।ष् तथा ष्ठष् को क्रमशः ष्।ष् तथा ष्ठष् चिित थैलियों में डाल दीजिये। इन थैलियों के मुँह को कस कर नाइलोन के धगे से बाँध् दीजिये। 7ण् कमानीदार तुला की सहायता से प्रत्येक थैली को अलग - अलग तौल लीजिये और उनमें भरे सामान को नोट कर लीजिये। 8ण् उद्यान के पास एक गहरा गड्ढा जिसका उचित साइज हो, उसमें इन दोनों थैलियों को दबा दें तथा गड्ढे को मिट्टðी से भर दें। 9ण् तीन - चार सप्ताह के बाद दोनों थैलियों को गड्ढे से बाहर निकाल लीजिये तथा उनकी सतहों पर जमी हुयी मिट्टðी को सापफ कर लीजिये ;सपफाइर् के लिये पानी का प्रयोग नहीं करेंद्ध। 10ण् दोनों थैलियों को सूखने के लिये खुली ध्ूप में रख दीजिये। 11ण् दोनों थैलियों को पुनः तौल लीजिये तथा उनके प्रारंभ्िाक एवं अंतिम मानों में अंतर ज्ञात कीजिये। 12ण्थैलियों को खोल लीजिये तथा उनमें उपस्िथत सामगि्रयों को अलग करके दो कागज की शीटों पर पलट कर नमूनांे में गाड़ने के समय में हुये परिवतर्नों का निरीक्षण कीजिये। अपने निरीक्षणों को निम्न सारणी में लिख्िाये। प्रतिदशर् प्रारंभ्िाक तौल का मान अंतिम तौल का मान तौलों में अंतर प्रतिदशर् । प्रतिदशर् ठ प्रेक्षण अध्ययन के अंत में निधर्रित कीजिए - ;पद्ध किस प्रतिदशर् में उल्लेखनीय ”ास होता है? ;पपद्ध क्या । और ठ प्रतिदशो± युक्त थैलों के विभ्िान्न घटक आसानी से पहचाने जा सकते हैं? ;पपपद्ध क्या प्रतिदशो± । और ठ के घटकों के वणर् ;रंगद्ध और गठन में कोइर् परिवतर्न हुआ है? परिचचार् प्रतिदशर् ष्।ष् में पादप और जान्तव मूल की अपश्िाष्ट सामग्री है। भूमि में गाड़ने पर उसका सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा अपघटन हो जाता है। संवुफल जैव द्रव्य, अपेक्षावृफत सरल यौगिकों में अपघटित हो गया है और वुफछ यौगिकों का रंध््रों से होकर मृदा में क्षरण हुआ है। टहनी, छाल, पणर्वृत और श्िारा जैसी वुफछ सामग्री काआंश्िाक अपघटन होता है जबकि पिायों और मृत जानवरों के मृदु ऊतकों का पूणर् अपघटन हो जाता है। इसी कारण प्रतिदशर् ष्।ष् के भार में पयार्प्त कमी हो गइर् है। प्रतिदशर् ष्ठष् के किसी घटक का सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटन नहीं हुआ है। अतः यह निष्कषर् निकलता है कि थैले ष्।ष् की सभी विभ्िान्न प्रकार की सामग्री जैव निम्ननीय थी जबकि थैले ष्ठष् के प्रतिदशर् अजैवनिम्ननीय थे। पादप का स्थल क्षेत्रापफल और पणर् क्षेत्रापफल शीषर्क पादप के फ्स्थल क्षेत्रापफलय् और फ्सम्पूणर् पणर् क्षेत्रापफलय् के मध्य संबंध् स्थापित करना। सि(ांत हम अपने चारों ओर विभ्िान्न साइजों और आकारों के पादप देखते हैं। बाटिका अलंकरण शाक जैसे वुफछ पादप अत्यंत छोटे होते हैं और वे वुफछ ही मास तक जीवित रहते हैं जबकि नारियल, आम, पीपल तथा बरगद आदि वुफछ पौध्े, अत्यंत विशाल होते हैं और इनकी आयु अनेक वषर् होती है। अध्िकांश भू पादप, जिनका आकार वुफछ भी हो सकता है, वे सीध्े होते हैं और उनमें अनेक शाखाएं होती हैं। प्रत्येक अलग - अलग पौधे को अपने अस्ितत्व के लिए न्यूनतम् स्थल क्षेत्रापफल की आवश्यकता होती है जो पादप के साइज और उसकी छाया की विमा पर निभर्र करती है। इस स्थल क्षेत्रापफल के अंदर वुफछ छोटे - छोटे पादप तो उग सकते हैं परंतु उतनी विमा का कोइर् अन्य पादप नहीं उपज सकता। यह नियम शाक जैसे छोटे पादपों पर भी लागू होता है। पादप स्वयं को अध्यासित क्षेत्रापफल में अनुवूफलित कर सामान्य जीवन व्यतीत करते हैं। हालाँकि इन पादपों का पणर् क्षेत्रापफल अध्िकतम् होता है ताकि वे प्रकाश संश्लेषण के लिए अध्िकतम् सूयर् प्रकाश का संग्रहण कर सवेंफ। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से हम वुफछ पादपों का पणर् क्षेत्रापफल ज्ञात करके उस पादप के स्थल क्षेत्रापफल के मध्य संबंध् पता करेंगे। परिकल्पना ऽ पादप का स्थल क्षेत्रापफल उसके पणर् क्षेत्रापफल की तुलना में कम होता है। ऽ वृक्ष जैसे अपेक्षावृफत बड़े पादपों को शाक जैसे छोटे पादपों की तुलना में अध्िक स्थल क्षेत्रापफल की आवश्यकता होती है। ऽ किसी पादप के स्थल क्षेत्रापफल और उसके पणर् क्षेत्रापफल के मध्य कोइर् संबंध् नहीं है। आवश्यक सामग्री पेटनिया/गुल मेंहदी/हिबिस्कस/ क्रोटन/कोलियस/फ्रलाॅक्स/सैल्िवया आदि अथवा स्थानीय उपलब्ध् वैसे ही चैड़ीपत्ती युक्त गमले में लगा शाकीय पादप, डोरा, मापन स्केल तथा ग्रापफ पेपर। कायर्विध्ि 1ण् ऊपर उल्लेख्िात सूची में से कोइर् पुष्पी, अलंकरणी प्रौढ़ शाक का चयन करके उसे प्रायोगिक पादप के रूप में अंकित कीजिए ;पहचान के लिए डोरा बाँध्िएद्ध। 2ण् पादप से एक प्रौढ़ पत्ती तोडि़ए और उसकी रूपरेखा को ग्रापफ शीट पर अनुरेख्िात कीजिए। पणर् पटल के क्षेत्रापफल में उपांतों के अंतगर्त वगो± की गिनती कर पणर् का क्षेत्रापफल परिकलित कीजिए। 3ण् पादप में पिायों की गणना कीजिए और अपनी नोट बुक में उनकी संख्या लिख्िाए। 4ण् सूत्रा के द्वारा पादप का संपूणर् ‘पणर् क्षेत्रापफल’ परिकलित कीजिए। 5ण् सम्पूणर् पणर् क्षेत्रापफल त्र एक प्रौढ़ पणर् का क्षेत्रापफल पादप में पिायों की संख्या ;बउ2द्ध। 6ण् सबसे चैड़े स्थलों पर पादप की चैड़ाइर् मापिए। दो सम्मुख निविष्ट प्रौढ़ पंक्ितयों को स्तंभ ;ल1द्ध के अनुलंब पकड़ कर उनके अग्रों के मध्य दूरी को माप कर उनकी चैड़ाइर् ;लद्ध मापी जाती है।7ण् उसी पणर् - युगत के अभ्िाविन्यास के समकोण पर चैड़ाइर् ;लद्ध परिकलित कीजिए जिस पर आपने12पहला पाठ्याँक लिया था। 8ण् स्थल क्षेत्रापफल अथार्त् लल ;बउ2द्ध परिकलित कीजिए।129ण् प्रायोगिक पादप की ऊँचाइर् माप कर उसे सारणी के स्तंभों में लिख्िाए। 10ण् एक ही जाति के दो अतिरिक्त प्रायोगिक पादपों के साथ प्रयोग को दोहराइए। 11ण् अध्ययन किए गए सभी पादपों के स्थल क्षेत्रापफल और पणर् क्षेत्रापफल का अनुपात परिकलित कीजिए और इन दो प्राचलों के मध्य संबंध् स्थापित कीजिए। प्रेक्षण विश्िाष्टता पादप प् पादप प्प् पादप प्प्प् पिायों की संख्या एक प्रौढ़ पणर् का क्षेत्रापफल ;बउ2द्ध संपूणर् पणर् का क्षेत्रापफल ;बउ2द्ध पादप की उँफचाइर् ;बउद्ध पादप में शाखाओं की संख्या पादप का ‘स्थल क्षेत्रापफल’ लल ;बउ2द्ध12स्थल क्षेत्रापफल और पणर् क्षेत्रापफल का अनुपात परिणाम तथा परिचचार् प्राप्त मानों के आधर पर विद्याथीर्, पादप के स्थल क्षेत्रापफल और पणर् क्षेत्रापफल के मध्य संबंध् स्थापित कर सकते हैं। इस अनुपात को बहिवेर्श्िात कर आस - पास के वृक्ष का स्थल क्षेत्रापफल और पणर् क्षेत्रापफल आकलित किया जा सकता है। लोहे में जंग लगना शीषर्क लोहे में जंग लगने का अध्ययन और जंग लगने की अवस्थाओं का अभ्िानिधर्रण। सि(ांत लोहे का पृष्ठ जब नम वायु के सम्पवर्फ में आता है तो उस पर जंग लग जाती है। इस प्रकार लगी जंग जलयोजित लोह ;प्प्प्द्ध आॅक्साइड ;थ्मव् ण् गभ्व्द्ध है। इस प्रकार जंग का लगना, लोहे के आॅक्सीकरण का प्रक्रम232है जो वायु और नमी दोनों उपस्िथति में सम्पन्न होता है। इस प्रोजेक्ट कायर् में हम उन कारकों का अध्ययन करेंगे जिनके कारण लोहे में जंग लगती है। आवश्यक सामग्री अनाद्रर् वैफल्िसमय क्लोराइड ;2 हद्धए तेल, आसुत जल, लगभग पंद्रह लोहे की कीलें, तीन परखनलियाँ, मापन सिलिंडर ;50 उस्द्धए बीकर, तीन काॅवर्फ, बनर्र, त्रिापाद स्टैंड, ड्राॅपर, और रेगमाल का एक टुकड़ा। कायर्विध्ि 1ण् तीन परखनलियाँ लीजिए और उन्हें ।ए ठ और ब् के द्वारा लेबल कीजिए। 2ण् नली । में लगभग 10 उस् आसुत जल और नली ठ में लगभग 15 उस् उबला हुआ आसुत जल लीजिए। नली ठ में तेल की थोड़ी मात्रा लीजिए ताकि उबले हुए आसुत जल पर तेल की एक परत बन जाए। नली ब् में लगभग 2 ह अनाद्रर् वैफल्िसयम क्लोराइड डालिए। तीनों नलियों को परखनली स्टैंड में लगाइए। 3ण् लोहे की वुफछ कीलों को लेकर उन्हें रेगमाल से रगड़ कर सापफ कीजिए। 4ण् नली । में जंग मुक्त स्वच्छ दो या तीन कीलें डुबोइए। अब परखनली में कस कर डाट लगा दीजिए। 5ण् नली ठ में, तेल की परत युक्त उबले हुए आसुत जल में वुफछ जंग रहित स्वच्छ लोहे की कीलें डालिए। अब परखनली में कस कर डाट लगा दीजिए। 6ण् नली ब् में रखे अनाद्रर् वैफल्िसयम क्लोराइड में जंग रहित वुफछ लोहे की कीलें लगा दीजिए। नली में कस कर डाट लगा दीजिए ताकि वह वायु रु( हो जाए। 7ण् परखनली की इस व्यवस्था की तीन - चार दिन इसी प्रकार रखा रहने दीजिए। अपने प्रेक्षणों को नोट करके निम्न प्रकार से लिख्िाए। प्रेक्षणक्रम सं.परखनली प्रेक्षण निष्कषर्1ण् ।2ण् ठ3ण् ब् परिणाम तथा परिचचार् प्रेक्षणों के आधर पर निष्कषर् निकालिए कि आसुत जल लोहे की कीलों पर किस प्रकार जंग उत्पन्न करता है, तेल के उपचार से जंग लगने में किस प्रकार कमी उत्पन्न होती है और अनाद्रर् वैफल्िसयम क्लोराइड की उपस्िथति में किस प्रकार जंग लगती है। अब लोहे जैसे धतुओं पर जंग निवारक विध्ियाँ सुझाइए। जंग की प्रवृफति की जाँच करके उस पर टिप्पणी कीजिए।

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