हैं। प्रतिरोधक के दोनों सिरों पर विभवान्तर इसके पाश्वर् क्रम में जुड़े वोल्टमीटर द्वारा मापा जाता है। ट तथा प् के बीच खींचा गया सरल रेखीय ग्रापफ ओम के नियम को सत्यापित करता है। आवश्यक सामग्री लगभग 2 Ω का एक प्रतिरोधक, एक ऐमीटर ;0 दृ 3 ।द्धए एक वोल्टमीटर ;0 दृ10 टद्धए होल्डर में लगे 1ण्5 ट के चार शुष्क सेल ;या एक बैटरी एलिमिनेटरद्ध, प्लग वंुुफजी, संयोजी तार, तथा रेगमाल का एक टुकड़ा। कायर्वििा 1ण् उपयोग में लिए जाने वाले ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के परास तथा अल्पतमांक नोट कीजिए। 2ण् नए संयोजी तारों के ऊपर एक विद्युतरोधी परत होती है। इसी प्रकार वुफछ समय तक उपयोग न किए जाने पर संयोजी तारों पर भी एक विद्युुतरोधी परत विकसित हो जाती है। ;वैफसे?द्ध इसलिए यह आवश्यक है कि संयोजी तारों के सिरों को एक रेगमाल की सहायता से सापफ कर लिया जाए। 3ण् अपनी नोटबुक में ओम के नियम का अध्ययन करने के लिए चित्रा 48.1 में दशार्ए अनुसार परिपथ का चित्रा बनाइए। प्रेक्षण कीजिए कि परिपथ के विभ्िान्न घटक जैसे ऐमीटर, वोल्टमीटर, प्रतिरोधक तथा प्लग वंुफजी, सेलों ;या बैटरी एलिमिनेटरद्ध से किस प्रकार संयोजित हैं। 4ण् संयोजी तारोें की सहायता से विभ्िान्न घटकों को जोड़कर परिपथ बनाइए। प्रारम्भ मेें परिपथ में केवल एक सेल जोडि़ए ;अथार्त् सेल का संयोजन बिंदु । तथा ठ के बीच कीजिएद्ध। यदि बैटरी एलिमिनेटर का उपयोग कर रहे हैं तो एलिमिनेटर का निधार्रित मान न्यूनतम् ;माना कि 2 टद्ध रख्िाए। 5ण् सुनिश्िचत कीजिए कि ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के धन तथा )ण सिरे, चित्रा 48.1 मेंें दशार्ए अनुसार ठीक - ठीक संयोजित किए गए हैं। वुंफजी को प्लग में लगाने से पहले, आपके द्वारा बनाए गए परिपथ की अपने श्िाक्षक से जाँच करा लें। 6ण् परिपथ में विद्युतधारा प्रवाहित कराने के लिए वुंफजी को प्लग में लगाएं। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्याँकों को नोट कीजिए तथा उन्हें अंकित कीजिए। वोल्टमीटर, प्रतिरोधक के दो सिरों ग् तथा ल् के बीच विभवान्तर ;ट द्ध को मापता है तथा ऐमीटर, इससे बहने वाली विद्युतधारा ;प् द्ध को मापता है। तारों को व्यथर् गमर् होने से बचाने के लिए वंुफजी को प्लग से निकाल लें। ;यह वैफसे होता है? इसके बारे में जूल के तापन नियम के अनुसार सोचिएद्ध 7ण् अब परिपथ में एक सेल की बजाय दो सेल संयोजित कीजिए ;अथार्त् सेलों का संयोजन बिंदुओं । तथा ब् के बीच कीजिए अथवा यदि बैटरी एलिमिनेटर का उपयोग कर रहें हैं तो इसका निधार्रित मान बढ़ा दें।द्ध परिपथ के प्लग में वुंफजी लगाएं। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्याँकों को नोट कीजिए तथा उन्हें अंकित कीजिए। 8ण् परिपथ में तीन तथा चार सेलों को संयोजित कर प्रयोग को दोहराएं। प्रेक्षण एवं परिकलन ;पद्ध ऐमीटर का परास त्र ऋऋऋ . ऋऋऋ ।ण् ;पपद्ध ऐमीटर का अल्पतमांक त्र ऋऋऋ ।ण् ;पपपद्ध वोल्टमीटर का परास त्र ऋऋऋ टण् ;पअद्ध वोल्टमीटर का अल्पतमांक त्र ऋऋऋ टण् क्रम परिपथ में उपयोग प्रतिरोधक में बहने प्रतिरोधक के सिरों प्रतिरोधक का संकिए गए सेलों की वाली विद्युतधरा प् के बीच प्रतिरोध संख्या विभवान्तर ट त् त्र टध्प् 1ण् 2ण् 3ण् 4ण् 1 2 3 4 प्रतिरोधक के प्रतिरोध त् का माध्य मान त्र ऋऋऋऋऋ Ωण् ग्रापफ प् तथा ट के अध्िकतम् और न्यूनतम् मानों का अंतर ज्ञात कीजिए। ग्रापफ पेपर पर ग.तथा ल.अक्षों के अनुदिश क्रमशः प् तथा ट के लिए उचित स्केल चुनिये। ग्रापफ पेपर पर विद्युतधारा प् के प्रत्येक मान तथा उनके संगत विभवान्तर ट के मानों को बिंदुओं के रूप में अंकित कीजिए ;चित्रा 48.2द्ध। इन सभी बिंदुओं को एक सरल रेखा के रूप में इस प्रकार मिलाइए कि अिाकांश बिंदु इस रेखा पर रहें। इस रेखा पर पयार्प्त दूरी पर कोइर् दो बिंदु च् तथा फ लेकर इस सरल रेखीय ग्रापफ की प्रवणता ज्ञात कीजिए। यह प्रवणता परिपथ में उपयोग किए गए प्रतिरोधक का धराप्रतिरोध है ;चित्रा 48.1द्ध। चित्रा 48.2: किसी प्रतिरोध्क का टदृप् ग्रापफ फडप्रवणता = डच् ट2 − ट1 त्रण्प्2 − प्1 ग्रापफ की सरल रेखा को पीछे की ओर बढ़ाइए और जाँच कीजिए कि क्या यह सरल रेखा पेपर के मूल बिंदु से गुजरती है। परिणाम एवं परिचचार् ऽ प्रतिरोधक के प्रतिरोध् के परिकलन ;प्रेक्षण सारणी में दिए अनुसारद्ध द्वारा तथा ग्रापफ द्वारा प्राप्त प्रतिरोध त् के मानों की तुलना कीजिए। ऽ विद्युतधारा के प्रत्येक मान के लिए प्रतिरोधक के प्रतिरोध त् का मान समान ;या लगभग समानद्ध रहता है। ट तथा प् के बीच ग्रापफ मूल बिंदु से गुजरने वाली एक सरल रेखा है। इससे ओम का नियम सत्यापित होता है। सावधानियाँ एवं त्राुटि के स्रोत ऽ संयोजी तार, ताँबे के मोटे तार होने चाहिए तथा उनके सिरों की विद्युतरोधी परत को रेगमाल से रगड़ कर हटा देना चाहिए। ऽ तारों में संबंधन दृढ़ होने चाहिए अन्यथा परिपथ में वुफछ बाह्य प्रतिरोध समाविष्ट हो सकता है। ऽ ऐमीटर को प्रतिरोधक के श्रेणीक्रम में इस प्रकार लगाना चाहिए कि विद्युतधारा ऐमीटर के धन सिरे से प्रवेश करे तथा )ण सिरे से बाहर निकले। ऽ वोल्टमीटर को सदैव प्रतिरोधक के पाश्वर् क्रम मेें संयोजित करना चाहिए। ऽ परिपथ में विद्युतधारा, केवल प्रेक्षण लेते समय, बहुत थोड़े समय के लिए ही प्रवाहित करनी चाहिए अन्यथा विद्युतधारा परिपथ मंे अनावश्यक तापन उत्पन्न करेगी। तापन से प्रतिरोधक के प्रतिरोध में परिवतर्न हो सकता है। ऽ जब परिपथ में कोइर् विद्युतधारा प्रवाहित न हो रही हो तो ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के संकेतकों को शून्य पर होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो अपने अध्यापक से इसे ठीक करने को कहें। उद्देश्य किसी प्रतिरोधक के प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करना। सि(ांत ओम के नियम के अनुसार, किसी प्रतिरोधक का प्रतिरोध, इसकी लंबाइर्, इसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रापफलतथा इसके पदाथर् की प्रकृति पर निभर्र करता है। परिशु( माप यह दशार्ते हैं कि किसी धातु के एकसमान चालक का प्रतिरोध ;त्द्धए उसकी लंबाइर् ;स द्ध के अनुक्रमानुपाती तथा उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रापफल ;।द्ध के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अथार्त् 1 त् ∝ स तथा त् । अतः त् त्र ρ स ;1द्ध। यहाँ, आनुपातिक स्िथरांक है, जिसे चालक के पदाथर् की वैद्युत प्रतिरोधकता कहते हैं। प्रतिरोधकता का ैप् मात्राक ओम मीटर ;Ω उद्धहै। इस प्रयोग में, हम भ्िान्न - भ्िान्न लंबाइर्यों तथा अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रापफलों के विभ्िान्न प्रतिरोधकों ;तारोंद्ध को एक विद्युत परिपथ में लगाकर, इन कारकों का अध्ययन करेंगे। ओम के नियम का उपयोग करके, किसी विद्युत परिपथ में किसी चालक का प्रतिरोध इसमें बहने वाली विद्युतधारा तथा इसके सिरों के बीच विभवान्तर माप कर, ज्ञात किया जा सकता है। प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा ऐमीटर, इसमें बहने वाली विद्युतधारा मापता है तथा प्रतिरोधक के साथ पाश्वर् क्रम में जुड़ा वोल्टमीटर इसके दोनों के बीच विभवान्तर मापता है। वस्तुएं वैफसे कायर् करती हैं? आवश्यक सामग्री ैॅळ.20 ;मानक तार गेजद्ध के कांस्टेंटन ;या मैंगेनिनद्ध के क्रमशः 10 बउ तथा 20 बउ लम्बाइर् के दो तार, ैॅळ.24 कांस्टेंटन ;या मैंगेनिनद्ध का 10 बउ लम्बाइर् का एक तार, ैॅळ.20 ;या ैॅळ24द्ध का 10 बउ तार ;इन तारों के सिरों को मजबूती से अनुयोजकों से जोड़ना चाहिए, एक ऐमीटर ;परास 0 दृ 500 उ।द्धए एक वोल्टमीटर ;परास 0 दृ 5टद्धए सेल होल्डर सहित चार 1ण्5 ट के शुष्क सेल ;या एक बैटरी एलिमिनेटरद्ध एक प्लग वंुफजी, मकर क्िलप ;बतवबवकपसम बसपचेद्धए संयोजी तार तथा रेगमाल का एक टुकड़ा। ज्ञात रहे कि ैॅळ.20 तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रापफल 10.710.75ण्178 उ2य तथा ैॅळ.24 तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रापफल 2ण्05 उ2 है। कायर्वििा 1ण् दिए गए ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के परास तथा अल्पतमांक नोट कीजिए। 2ण् नए संयोजी तारों के ऊपर एक विद्युुतरोधी परत होती है। इसी प्रकार, वुफछ समय तक उपयोग न किए जाने पर संयोजी तारों पर भी एक विद्युतरोधी परत विकसित हो जाती है। ;वैफसे?द्ध इसलिए यह आवश्यक है कि संयोजी तारों के सिरों को एक रेगमाल की सहायता से सापफ कर तारलिया जाए। 3ण् अपनी नोटबुक मंे प्रतिरोधक के प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करने के लिए, चित्रा 49.1 में दशार्ए अनुसार परिपथ का चित्रा बनाइए। प्रेक्षण तार कीजिए कि विभ्िान्न घटक जैसे ऐमीटर, वोल्टमीटर तथा प्लग वंुफजी सेलों से ;या बैटरी एलिमिनेटर सेद्ध किस प्रकार संयोजित हैं। नोट करें कि प्रतिरोधक, परिपथ में । तारतथा ठ बिंदुओं के बीच संयोजित है। 4ण् संयोजी तारों की सहायता से विभ्िान्न घटकों को जोड़कर परिपथ बनाइए। परिपथ में सभी चारों सेलों को जोडि़ए। ;इद्धयदि बैटरी एलिमिनेटर का उपयोग कर रहे हैं तो तारएलिमिनेटर का निधार्रित मान लगभग 6 ट रख्िाए। चित्रा 49ण्1 रू ;ंद्ध चालक के प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करने के लिए विद्युत परिपथऋ ;इद्ध प्रतिरोधक की भाँति प्रयोग किए जाने वाले विभ्िान्न तार 5ण् दिए गए तारों ;प्रतिरोधकोंद्ध को निम्न प्रकार लेबल से कीजिए - तार 1 μ ैॅळ.20 कांस्टेंटन ;या मैंगेनिनद्ध का 10 बउ लम्बाइर् का तार तार 2 μ ैॅळ 20 कांस्टेंटन ;या मैंगेनिनद्ध का 20 बउ लम्बाइर् का तार तार 3 μ ैॅळ.24 कांस्टेंटन ;या मैंगेनिनद्ध का 10 बउ लम्बाइर् का तार तथा तार 4 μ ैॅळ.20 ;या ैॅळ.24द्ध नाइक्रोम का 10 बउ लम्बाइर् का तार। सभी तार, अनुयोजकों ;जैसे मकर क्िलपोंद्ध से चित्रा 49ण्1 ;इद्ध में दशार्ए अनुसार जुड़े होने चाहिए। यह सुनिश्िचत करेगा कि परिपथ में तार की पूरी लम्बाइर् प्रतिरोधक की तरह कायर् करेगी। 6ण् तार 1 को बिंदुओं । तथा ठ के बीच संयोजित कीजिए। सुनिश्िचत कीजिए कि ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के धन तथा )ण टमिर्नल चित्रा 49.1 में दशार्ए अनुसार ठीक - ठीक संयोजित किए गए हैं। वुंफजी को प्लग में लगाने से पहले परिपथ की अपने अध्यापक से जाँच करा लें। 7ण् परिपथ में विद्युतधारा प्रवाहित करने के लिए वुंफजी को प्लग में लगाएं। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्याँकांे को नोट करें तथा उन्हें अंकित करें। तारों को व्यथर् गमर् होने से बचाने के लिए, ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्याँक लेने के तुरन्त बाद वुुंफजी को प्लग से निकाल दें। 8ण् अब परिपथ में तार 1 के स्थान पर तार 2 को संयोजित करें। वुंफजी को प्लग में लगाए तथा तार 2 में बहने वाली विद्युतधारा को मापें तथा तार 2 के सिरोें के बीच विभवान्तर को मापें। विद्युतधारा तथा विभवान्तर के मानों को नोट करें। वुंफजी को निकालें। 9ण् तार 3 तथा तार 4 के लिए चरण 8 को दोहराएं। प्रेक्षण एवं परिकलन ;पद्ध ऐमीटर का परास त्र ऋऋऋ . ऋऋऋ ।ण् ;पपद्ध ऐमीटर का अल्पतमांक त्र ऋऋऋ ।ण् ;पपपद्ध वोल्टमीटर का परास त्र ऋऋऋ − ऋऋऋ टण् ;पअद्ध वोल्टमीटर का अल्पतमांक त्र ऋऋऋ टण् क्रम बिंदुओं । तथा ठ के बीच प्रतिरोधक में बहने वाली प्रतिरोधक के सिरों के प्रतिरोधक का संण् संयोजित प्रतिरोधक विद्युतधारा प् बीच विभवान्तर ट प्रतिरोधका लेबल त् त्र टध्प् । ;उ।द्ध ट ;टद्ध त् ;Ωद्ध 1ण् तार 1 2ण् तार 2 3ण् तार 3 4ण् तार 4 परिणाम एवं परिचचार् उन कारकोें के बारे में निष्कषर् निकालिए जो प्रतिरोधकों के प्रतिरोध को प्रभावित करते हैं तथा निम्नके उत्तर दीजिए। ऽ यह लम्बाइर् के साथ वैफसे परिवतिर्त होता है? ऽ यह अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रापफल के साथ वैफसे परिवतिर्त होता है? ऽ यह तार के पदाथर् की प्रतिरोधकता के साथ वैफसे परिवतिर्त होता है? ;पदाथर् की प्रतिरोध्कता, पाठ्य पुस्तक या अनुलानक.प् से प्राप्त की जाएद्ध। सावधानियाँ ऽ संयोजी तार, ताँबे के मोटे तार होने चाहिए तथा उनके सिरों की विद्युतरोधी परत को रेगमाल से रगड़कर हटा देना चाहिए। ऽ तार के संबंधन दृढ़ होने चाहिए अन्यथा परिपथ में वुफछ अतिरिक्त प्रतिरोध समाविष्ट हो सकते हैं। ऽ ऐमीटर को प्रतिरोध के श्रेणीक्रम में इस प्रकार लगाना चाहिए कि विद्युतधारा ऐमीटर के धन सिरे से प्रवेश करे तथा )ण सिरे से बाहर निकले। ऽ वोल्टमीटर को सदैव प्रतिरोधक के पाश्वर् क्रम में संयोजित करना चाहिए। ऽ जब परिपथ में कोइर् विद्युतधारा प्रवाहित न हो रही हो तो ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के संकेतकों को शून्य पर होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो अपने अध्यापक से इसको ठीक करने को कहें। ऽ परिपथ में विद्युतधारा, केवल प्रेक्षण लेते समय, बहुत थोड़े समय के लिए ही प्रवाहित करनी चाहिए अन्यथा विद्युतधारा परिपथ में अनावश्यक तापन उत्पन्न करेगी। तापन से प्रतिरोधक के प्रतिरोध में परिवतर्न हो सकता है। ऽ इस प्रयोग में ैॅळ.20 तथा ैॅळ . 24 के कांस्टेंटन ;या मेंगनिनद्ध तथा नाइक्रोम के तारों प्रयोग 50 उद्देश्य श्रेणीक्रम मंे संयोजित दो प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करना। सि(ांत जब त्1 तथा त्2 प्रतिरोध के दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम संयोजन मंे संयोजित किया जाता है ;चित्रा 50.1द्ध तो उनका तुल्य प्रतिरोध त् निम्न रूप में दिया जाता है - े त्े त्र त्1 ़ त्2ण् ;1द्ध चित्रा 50ण्1 रू ;ंद्ध दो प्रतिरोधक ।ठ तथा ब्क् एक के बाद दूसरे के साथ रखे हुए ;इद्ध दो प्रतिरोधक ।ठ चित्रा 50ण्2 रू श्रेणीक्रम मंे संयोजित दो प्रतिरोधकों ।ठ तथा ब्क् श्रेणीक्रम में संयोजित तथा ब्क् के लिए परिपथ आरेख श्रेणीक्रम मेें संयोजित प्रतिरोधकों का प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए, संयोजन के श्रेणीक्रम में संयोजित एक ऐमीटर से परिपथ में बहने वाली विद्युतधारा प् को मापा जाता है। प्रतिरोधकों के संयोजन के दोनों सिरों के बीच विभवान्तर ट को, इन सिरों से पाश्वर् क्रम मंे जुड़े एक वोल्टमीटर से मापा जाता है ;चित्रा 50.2द्ध। आवश्यक सामग्री दो प्रतिरोधक ;प्रत्येक 2 Ω प्रतिरोध काद्ध, एक ऐमीटर ;परास 0 दृ 1ण्0 ।द्धए एक वोल्टमीटर ;परास 0 दृ 5ण्0 टद्धए 1ण्5 ट के तीन शुष्क सेल, सेल - होल्डर सहित ;या एक बैटरी एलिमिनेटरद्ध, एक प्लग वंुफजी, संयोजी तार तथा रेगमाल का एक टुकड़ा। कायर्वििा 1ण् दिए गए ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के परास तथा अल्पतमांक नोट कीजिए। 2ण् नए संयोजी तारों के ऊपर एक विद्युतरोधी परत होती है। इसी प्रकार वुफछ समय तक उपयोग न किए जाने पर भी संयोजी तारों पर एक विद्युतरोधी परत विकसित हो जाती है। ;वैफसे?द्ध इसलिए यह आवश्यक है कि संयोजी तारों के सिरों को एक रेगमाल की सहायता से सापफ कर लिया जाए। 3ण् अपनी नोटबुक में प्रतिरोधकों के श्रेणीक्रम संयोजन के लिए चित्रा 50.2 में दशार्ए अनुसार परिपथ आरेख बनाइए। प्रेक्षण कीजिए कि विभ्िान्न घटक जैसे ऐमीटर, वोल्टमीटर, श्रेणीक्रम मंे संयोजित प्रतिरोध ;ज्ञात प्रतिरोध त्एवं त्द्ध तथा प्लग वंुफजी, सेलों से ;या बैटरी इलिमिनेटर सेद्ध किस प्रकार संयोजित है। 124ण् एक के बाद दूसरा प्रतिरोधक रखकर, दिए गए प्रतिरोधकों के सिरों ठ तथा ब् को चित्रा 50.1 में दशार्ए अनुसार जोडि़ए। परिपथ आरेख में दशार्ए अनुसार संयोजी तारों की सहायता से विभ्िान्न घटकों को जोड़कर परिपथ बनाइए ;चित्रा 50.2द्ध। 5ण् सुनिश्िचत कीजिए कि ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के धन तथा )ण सिरे, चित्रा 50.2 मंे दशार्ए अनुसार ठीक - ठीक संयोजित किए गए हैं। वंुफजी को प्लग मंे लगाने से पहले, आपके द्वारा बनाए गए परिपथ की अपने अध्यापक से जाँच करा लें। 6ण् परिपथ मंे विद्युतधारा प्रवाहित कराने के लिए वंुफजी को प्लग में लगाएं। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्याँकों को नोट कीजिए तथा उन्हें अंकित कीजिए। वोल्टमीटर, श्रेणीक्रम में संयोजित दो प्रतिरोधकों के दो सिरों । तथा क् के बीच विभवान्तर ;ट द्ध को मापता है तथा ऐमीटर, श्रेणीक्रम संयोजन से होकर बहने वाली विद्युतधारा ;प्द्ध को मापता है। तारों को व्यथर् में गमर् होने से बचाने के लिए वंुफजी को प्लग से निकाल लें। ;यह वैफसे होता है? इसके बारे में जूल के तापन नियम के अनुसार सोचिए।द्ध 7ण् इस िया को परिपथ में बहने वाली विद्युतधारा के तीन विभ्िान्न मानों के लिए दोहराइए तथा प्रत्येक स्िथति में ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्याँकों को अंकित कीजिए। परिपथ में सेलों की संख्या को बदल कर ;या बैटरी एलिमिनेटर के निधार्रित मान को बदल करद्ध परिपथ मंे विद्युतधारा को घटाया या बढ़ाया जा सकता है। प्रेक्षण ऐमीटर का परास त्र ऋऋऋ . ऋऋऋ ।ण् ऐमीटर का अल्पतमांक त्र ऋऋऋ ।ण् वोल्टमीटर का परास त्र ऋऋऋ .ऋऋऋ टण् वोल्टमीटर का अल्पतमांक त्र ऋऋऋ टण् पहले प्रतिरोधक का प्रतिरोध त्त्र ऋऋऋ Ωण्1 दूसरे प्रतिरोधक का प्रतिरोध त्2 त्र ऋऋऋ Ωण् क्रम परिपथ में उपयोग श्रेणीक्रम संयोजन श्रेणीक्रम संयोजन के संयोजन का तुल्य त्ै का माध्य संण् किए गए सेलों में बहने वाली सिरों के बीच प्रतिरोध त्मानै की संख्या विद्युतधारा प्विभवान्तर टत्ै त्र टेध्प्ेै ै ;।द्ध ;टद्ध ;Ωद्ध ;Ωद्ध 1ण् 2ण् 3ण् 4ण् त्1 त्र ऋऋऋऋ Ωए त्2 त्र ऋऋऋऋऋ Ω तुल्य प्रतिरोध ¹समीकरण ;1द्ध से , त्र त् ़ त्त्र ऋऋऋ Ω12 परिणाम एवं परिचचार् दिए गए दो प्रतिरोधकों के श्रेणीक्रम संयोजन के तुल्य प्रतिरोध के प्रेक्षण मान ;प्रेक्षण सारणी सेद्ध की समीकरण ;1द्ध द्वारा परिकलित मान से तुलना कीजिए। सावधानियाँ ऽ संयोजी तार ताँबे के मोटे तार होने चाहिए तथा उनके सिरों की विद्युतरोधी परत को रेगमाल से रगड़कर सापफ कर देना चाहिए। ऽ तारोें के संबंधन दृढ़ होने चाहिए अन्यथा परिपथ में वुफछ अतिरिक्त प्रतिरोध समाविष्ट हो सकते हैं। ऽ ऐमीटर को प्रतिरोधकों के संयोजन के श्रेणीक्रम मंे इस प्रकार संयोजित करें कि धरा ध्न सिरे से प्रवेश करे तथा )ण सिरे से बाहर निकले। ऽ वोल्टमीटर को सदैव प्रतिरोधकों के संयोजन के पाश्वर् क्रम में संयोजित करना चाहिए। ऽ जब परिपथ में कोइर् विद्युतधारा प्रवाहित न हो रही हो तो ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के संकेतकों की स्िथति शून्य पर होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो अपने अध्यापक से इसको ठीक करने को कहें। ऽ परिपथ में विद्युतधारा केवल प्रेक्षण लेते समय बहुत थोड़े समय के लिए ही प्रवाहित करनी चाहिएऋ अन्यथा विद्युतधारा परिपथ में अनावश्यक तापन उत्पन्न करेगी। तापन से प्रतिरोधकों के प्रतिरोध में परिवतर्न हो सकता है। प्रयोग 51 उद्देश्य पाश्वर्क्रम मंे संयोजित दो प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करना। सि(ांत जब त्तथा त्प्रतिरोध के दो प्रतिरोधकों को पाश्वर्क्रम मंे संयोजित किया जाता है ¹चित्रा 51.1 ;ंद्धह् तो12 उनका तुल्य प्रतिरोध त्च निम्न समीकरण से परिकलित किया जा सकता है - 111 त्ऱ त् त्त्च 12 या त् त्र त्1त्2 च ;1द्धत्1 ़ त्2 पाश्वर्क्रम में संयोजित प्रतिरोधकों का प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए, संयोजन के श्रेणीक्रम में संयोजित एक ऐमीटर से परिपथ में बहने वाली विद्युतधारा प् को मापा जाता है। प्रतिरोधकों के संयोजन के दोनों सिरों के बीच विभवान्तर टको, इन सिरों पर पाश्वर्क्रम मंे जुड़े एक वोल्टमीटर से मापा चित्रा 51ण्1 रू ;ंद्ध दो प्रतिरोधक त् तथा त् 12 एक दूसरे के बराबर में रखें हैं, ;इद्ध दो प्रतिरोधकजाता है ;चित्रा 51.2द्ध। त्तथा त्पाश्वर्क्रम संयोजन मंें संयोजित हैं।12 आवश्यक सामग्री दो प्रतिरोधकों ;प्रत्येक 2 Ω प्रतिरोध काद्ध, एक ऐमीटर ;परास 0 दृ 5 ।द्धए एक वोल्टमीटर ;परास 0 दृ 5 टद्धए सेल होल्डर सहित 1ण्5 ट के तीन शुष्क सेल ;या एक बैटरी इलिमिनेटरद्ध, एक प्लग वुंफजी, संयोजी तार, तथा रेगमाल का एक टुकड़ा। कायर्वििा 1ण् दिए गए ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के परास तथा अल्पतमांक नोट कीजिए। 2ण् नए संयोजीे तारों के ऊपर एक विद्युतरोधी परत होती है। इसी प्रकार वुफछ समय तक उपयोग न किए जाने पर भी संयोजी तारों पर एक विद्युतरोधी परत विकसित हो जाती है। ;वैफसे?द्ध इसलिए यह आवश्यक है कि संयोजी तारों के सिरों को एक रेगमाल की सहायता से सापफ कर लिया जाए। 3ण् अपनी नोटबुक में प्रतिरोधकों के पाश्वर्क्रम संयोजन के लिए चित्रा 51.2 में दशार्ए अनुसार परिपथ आरेख बनाइए। सुनिश्िचत कीजिए कि विभ्िान्न घटक जैसे ऐमीटर, वोल्टमीटर, पाश्वर्क्रम मंे संयोजित प्रतिरोध ;प्रतिरोध त्1 तथा त्2 केद्ध तथा प्लग वुंफजी सेलों से ;या बैटरी एलिमिनेटर सेद्ध किस प्रकार संयोजित है। 4ण् दिए गए प्रतिरोधकों को एक - दूसरे के बराबर रख्िाए तथा सिरे । को सिरे ब् के साथ तथा सिरे ठ को सिरे क् के साथ जोडि़ए ;चित्रा 51.1द्ध। परिपथ आरेख में दशार्ए अनुसार संयोजी तारों की सहायता से विभ्िान्न घटकों को जोड़कर परिपथ बनाइए ;चित्रा 51.2द्ध। 5ण् सुनिश्िचत कीजिए कि ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के धन तथा )ण टमिर्नल परिपथ मंे ठीक - ठीक संयोजित किए गए हैं। वुंफजी को प्लग मंे लगाने से पहले, आपके द्वारा बनाए गए परिपथ की अपने अध्यापक से जाँच करा लें। 6ण् परिपथ में विद्युतधारा प्रवाहित कराने के लिए वुंफजी को प्लग में लगाएं। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्याँकों को नोट कीजिए तथा उन्हें अंकित कीजिए। वोल्टमीटर पाश्वर्क्रम मंे संयोजित दो प्रतिरोधकों के दो सिरों । तथा क् के बीच विभवान्तर ;ट द्ध को मापता है तथा ऐमीटर इस संयोजन से बहने वाली विद्युतधारा ;प् द्ध को मापता है। तारों को गमर् होने से बचानेे के लिए वुंफजी को प्लग से निकाल लें। ;यह वैफसे होता है? इसके बारे में जूल के तापन नियम के अनुसार सोचिए।द्ध 7ण् इस िया को परिपथ मंे बहने वाली विद्युतधारा के तीन भ्िान्न - भ्िान्न मानों के लिए दोहराइए तथा प्रत्येक स्िथति में ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्याँकों को अंकित कीजिए। परिपथ में सेलों की संख्या को बदलकर ;या बैटरी एलिमिनेटर के टमिर्नल के विन्यास को बदल करद्ध परिपथ मंे विद्युतधारा को घटाया या बढ़ाया जा सकता है। प्रेक्षण तथा परिकलन ;पद्ध ऐमीटर का परास ;पपद्ध ऐमीटर का अल्पतमांक ;पपपद्ध वोल्टमीटर का परास ;पअद्ध वोल्टमीटर का अल्पतमांक ;अद्ध पहले प्रतिरोधक का प्रतिरोध त्;अपद्ध दूसरे प्रतिरोधक का प्रतिरोध त्2 1 क्रम परिपथ में उपयोग पाश्वर्क्रम संयोजन पाश्वर्क्रम संयोजन के सिरों के बीच विभवान्तर ट च ;टद्ध त्र ऋऋऋऋ . ऋऋऋऋ ।ण् त्र ऋऋऋऋ ।ण् त्र ऋऋऋऋ .ऋऋऋऋ टण् त्र ऋऋऋऋ टण् त्र ऋऋऋऋ Ωण् त्र ऋऋऋऋ Ωण् संयोजन का तुल्य त्च का माध्य मानप्रतिरोथ त्च त्च त्र टचध्प्च;Ωद्ध;Ωद्ध सं.किए गए सेलों की संख्या 1ण् 2ण् 3ण् 4ण् गणनाएं त्1 त्र ऋऋऋऋ Ωए त्2 के सिरों के बीच विभवान्तर प् च ;।द्धत्र ऋऋऋऋऋ Ω तुल्य प्रतिरोध ;समीकरण 1 सेद्ध त्र त्र ऋऋऋ Ωत्1 ़ त्2 परिणाम एवं परिचचार् त्1त्2 दिए गए दो प्रतिरोधकों के पाश्वर्क्रम संयोजन के प्रेक्ष्िात तुल्य प्रतिरोध के मान ;प्रेक्षण सारणी सेद्ध की समीकरण ;1द्ध द्वारा गणना किए गए मान से तुलना कीजिए। आवश्यक सामग्री लगभग 10 बउ लंबा एक छड़ चुंबक, एक छोटी दिक्सूची, लौह - चूणर्, ड्राइंग बोडर्, चिपकाने वाली टेप या पीतल के ड्राइंग पिन तथा सपेफद कागज की शीटें। कायर्वििा ।ण् छड़ चुंबक के चारों ओर लौह - चूणर् के पैटनर् को प्रेक्ष्िात करना 1ण् चिपकने वाली टेप या पीतल के ड्राइंग पिनों का उपयोग करके ड्राइंग बोडर् पर एक सपेफद चिकनेकागज की शीट लगाइए। 2ण् इस शीट के बीच मंें एक छड़ चुंबक रख्िाए। 3ण् छड़ चुंबक के चारों ओर लौह - चूणर् छितराइए और ड्राइंग बोडर् को ध्ीरे से थपथपाइए जबतक कि चित्रा52.1 में दशार्ए अनुसार पैटनर् नहीं बन जाता। 4ण् पैटनर् का प्रेक्षण कीजिए। यह क्या दशार्ता है?नोट कीजिए कि लौह - चूणर् छड़ चंुबक केध््रुवों के चारों ओर ;सघनद्ध है। 5ण् कागज से लौह - चूणर् को हटाइए। ठण् किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्रारेखाएं खींचना 6ण् छड़ चुंबक के उत्तरी तथा दक्ष्िाणी ध््रुवों कीपहचान कीजिए। छड़ चुंबक को कागज केबीचों - बीच रख्िाए। चुंबक के उत्तर तथाचित्रा 52.2: दिक्सूची की सहायता से चुंबकीय क्षेत्रादक्ष्िाण ध््रुवों को अंकित कीजिए तथा छड़रेखाएँ आरेख्िात करनाचुंबक की सीमा रेखा भी खींचिए। 7ण् एक छोटी दिक्सूची को चुंबक के उत्तरध््रुव के अत्यंत निकट रख्िाए। 8ण् आप देखेंगे कि दिक्सूची का दक्ष्िाण ध््रुवछड़ चुंबक के उत्तर ध्रुव की ओर संरेख्िात होजाता है। 9ण् दिक्सूची के दोनों सिरों की स्िथतियाँ अंकितकीजिए। 10ण् अब दिक्सूची को नइर् स्िथति में इस प्रकाररख्िाए कि इसका दक्ष्िाण ध््रुव उस स्िथति परआ जाए जहाँ पहले इसका उत्तरी धु्रव था। 11ण् इस प्रकार ध्ीरे - धीरे इस िया को दोहराइए जब तक कि आप चुंबक के दक्ष्िाण ध््रुव तक न पहुँच जाएं जैसा कि चित्रा 52.2 में दशार्या गया है। 12ण् कागज पर अंकित बिंदुओं को इस प्रकार मिलाइए कि एक निष्कोण वक्र प्राप्त हो जाए। यह वक्र क्षेत्रा रेखा को निरूपित करता है। 13ण् उपरोक्त वििा को दोहराइए और जितनी क्षेत्रा रेखाएं संभव हो सवेंफ खींचिए। आपको चित्रा 52.3 में दशार्ए जैसा पैटनर् प्राप्त होगा। आपने नोट किया होगा कि चुंबक के ध््रुवों के निकट ले जाने पर दिक्सूची में विक्षेप अिाक होता है। प्रेक्षण संलग्न कागज की शीट पर बना आरेख दंड चुम्बक के चुंबकीय क्षेत्रा का पैटनर् दशार्ता है। परिणाम एवं परिचचार् किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं को देखकर यह पुष्िट होती है कि μ ऽ चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ बंद तथा संतत वक्र हैंऋ ऽ जब दिक्सूची को ध्ु्रवों के निकट ले जाते हैं तो इसके संकेतक का विक्षेप बढ़ता हैऋ ऽ दो चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ एक - दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीऋ और ऽ चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ छड़ चुंबक के ध्ु्रवों पर संवुफल ;बतवूकमकद्ध होती हैं। सावधानियाँ ऽ चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ आरेख्िात करते समय छड़ चुंबक के निकट दिक्सूची को छोड़कर अन्य कोइर् भी चुंबकीय पदाथर् नहीं होना चाहिए। ऽ दिक्सूची का साइश छोटा होना चााहिए। ऽ छड़ चुंबक पयार्प्त मात्रा मंे प्रबल होना चाहिए जिससे कि इससे 15 बउ दूर रखी दिक्सूची मंेें पयार्प्त विक्षेप हो सके। अनुप्रयोग इस वििा को चुंबकीय पदाथो± की पहचान करने के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। इससे दो छड़ चुंबकों की प्रबलताओं की तुलना भी की जा सकती है। उद्देश्य किसी विद्युत धरावाही सीधे तार की चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं को आरेख्िात करना। सि(ांत किसी तार ;चालकद्ध में प्रवाहित होने वाली विद्युतधरा उसके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्रा उत्पन्न करती है। चुंबकीय क्षेत्रा के अस्ितत्व को एक चुंबकीय दिक्सूचक सुुइर् का प्रयोग करके प्रेक्ष्िात किया जा सकता है। चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा तार मंें प्रवाहित होने वाली विद्युतधारा की दिशा पर निभर्र करती है। इस प्रयोग में हम सीधे विद्युत धारावाही तार की चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं को आरेख्िात करने का प्रयास करेंगे तथा तार में विद्युत धारा की दिशा परिवतर्न का चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं पर प्रभाव ज्ञात करेंगे। आवश्यक सामग्री एक बैटरी ;12 टद्ध या एक बैटरी इलिमिनेटर ;12टध्2।द्धए एक परिवतीर् प्रतिरोधक ;एक धारा नियंत्राकद्ध, प्लग वुंफजी, ताँबे का मोटा तार ;अिामानतः ैॅळ.12 लगभग 50 बउद्ध लंबा, लकड़ी का आयताकार तख्ता जिसके बीच में एक ऐसा सुराख हो जिससे ताँबे का मोटा तार आसानी से गुजर सके, ऐमीटर ;0 दृ 3।द्धए सपेफद कागज की एक शीट, एक छोटी दिक्सूची, लकड़ी का स्टैण्ड, चिपकाने वाली टेप, संयोजी तार तथा रेगमाल का एक टुकड़ा। कायर्वििा 1ण् दिए गए ऐमीटर का परास तथा अल्पतमांक नोट कीजिए। 2ण् नए संयोजी तारों के ऊपर एक विद्युतरोधी परत होती है। इसी प्रकार वुफछ समय तक उपयोग न किए जाने पर भी संयोजी तारों पर एक विद्युतरोधी परत विकसित हो जाती है। ;वैफसे?द्ध इसलिए यह आवश्यक है कि संयोजी तारों के सिरों को एक रेगमाल की सहायता से सापफ कर लिया जाए। चित्रा 53.1: एक विद्युत धारावाही सीध्े तार की चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ आरेख्िात करने के लिए विद्युत परिपथ 3ण् चित्रा 53.1 मेें दशार्ए अनुसार एक परिपथ आरेख बनाइए जिसमें एक परिवतीर् प्रतिरोधक ;धारा नियंत्राकद्ध, एक ऐमीटर, बैटरी ;या बैटरी एलिमिनेटरद्ध एवं प्लग वुंफजी को एक मोटे ताँबे के तार ग्ल् से संयोजित कीजिए। 4ण् चिपकाने वाली टेप की सहायता से एक आयताकार लकड़ी के तख्ते पर सपेफद कागज की एक शीट चिपकाइए। शीट के केन्द्र में एक छोटा सूराख व्इस प्रकार कीजिए कि यह तख्ते के सुराख के ठीक ऊपर हो। चित्रा मंे दशार्ए अनुसार तख्ते को मेज पर क्षैतिजतः रखें। 5ण् विभ्िान्न घटकों को संयोजित करके चित्रा 53.1 में दशार्ए अनुसार परिपथ बनाएं। ताँबे का मोटा तार ग्ल्ए आयताकार तख्ते के तल से लंबवत् रहे। ताँबे के मोटे तार के ऊपरी सिरे ग् को एक प्रयोगशाला स्टैण्ड ;लकड़ी काद्ध पर जड़ा जा सकता है। यह सुनिश्िचत करेगा कि तार ग्ल् ऊध्वार्धर स्िथति में रहे। 6ण् सुनिश्िचत कीजिए कि बैटरी ;या बैटरी एलिमिनेटरद्ध तथा ऐमीटर के धन तथा )ण टमिर्नल परिपथ में ठीक - ठीक संयोजित किए गए हैं। वुंफजी को प्लग में लगाने से पहले, आपके द्वारा बनाए गए परिपथ की अपने अध्यापक से जाँच करा लें। 7ण् परिपथ मंे विद्युतधारा प्रवाहित कराने के लिए वुंफजी को प्लग मंे लगाएं। परिवतीर् प्रतिरोधक या धारा नियंत्राक की स्िथति कोे ऐसा बदलें कि ताँबे के मोटे तार ग्ल् मंे लगभग 2 । विद्युतधारा प्रवाहित करे। ऐमीटर के पाठ्याँक को नोट करें तथा अंकित करें। 8ण् आयताकार तख्ते पर रखी सपेफद शीट के किसी बिंदु ;माना च्द्ध पर एक दिक्सूची रख्िाए। दिक्सूची की सुइर् की दिशा का प्रेक्षण कीजिए। परिपाटी के अनुसार, दिक्सूची के उत्तर ध््रुव की दिशा बिंदु च् पर सीधे चालक में बहने वाली विद्युुतधारा द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा बताती है। 9ण् दिक्सूची के दोनों सिरों की स्िथति अंकित कीजिए तथा अब इसे इस प्रकार रख्िाए कि इसका दक्ष्िाण ध्ु्रव उस स्िथति पर आ जाए, जहाँ पहले उत्तर ध्ु्रव के सिरे की स्िथति थी। दिक्सूची के दोेनों सिरों द्वारा इंगित नइर् स्िथति पिफर से अंकित कीजिए। इस िया को क्रमशः दोहराते जाइए जब तक कि आपको चित्रा 53.1 में दशार्ए अनुसार पूणर् वृत्ताकार पैटनर् प्राप्त न हो जाए। इस प्रकार एक धारावाही सीधे तार की चुंबकीय क्षेत्रा रेखा जिसका केन्द्र धारावाही तार पर होता है। 10ण् एक चुंबकीय क्षेत्रा रेखा संरेख्िात करने के पश्चात् वुंफजी को प्लग में से निकाल लीजिए और वुफछ मिनट तक प्रतीक्षा कीजिए जिससे कि तार पिफर से अपने सामान्य ताप पर आ जाए। 11ण् उपरोक्त प्रिया को दोहराइए तथा जितने संभव हो सवेंफ वृत ;चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओें को निरूपित करने वालेद्ध खींचिए। यदि दिक्सूची को ताँबे के मोटे तार से दूर ले जाते हैं तो दिक्सूची के विक्षेप पर क्या प्रभाव पड़ता है? क्या आप देखते हैं कि दिक्सूची का विक्षेप घट जाता है। इससे निदिर्ष्ट होता है कि किसी चालक में प्रवाहित होने वाली विद्युतधारा के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा चालक से दूरी बढ़ने पर घटता है। 12ण् इस परिपथ का उपयोग करके आप यह भी देख सकते हैं कि किसी बिंदु पर रखे दिक्सूची के विक्षेप पर तार में प्रवाहित होने वाली विद्युतधारा के परिवतर्न का क्या प्रभाव पड़ता है? इसे देखने के लिए दिक्सूची को किसी नियत बिंदु फ ;मानाद्ध पर रख्िाए। अब धारा नियंत्राक के परिवतीर् संपवर्फ की स्िथति बदल कर मोटे ताँबे के तार में विद्युतधारा बढ़ाइए। आप क्या प्रभाव प्रेक्ष्िात करते हैं? दिक्सूची में भी विक्षेप बढ़ता है। क्या आप मोटे ताँबे के तार में विद्युतधारा घटाने पर दिए गए बिंदु फ पर रखी दिक्सूची के विक्षेप मंे कमी देखते हैं? इससे निदिर्ष्ट होता है कि जैसे - जैसे मोटे ताँबेे के तार मंे विद्युतधारा के परिमाण में वृि होती है। किसी दिए गए बिंदु पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा के परिमाण में भी वृि होती है। विलोमतः धरा घटाने पर इस चुंबकीय क्षेत्रा का परिमाण कम हो जाता है। 13ण् ताँबेे के सीधे मोटे तार में विद्युतधारा की दिशा को बैटरी ;या बैटरी इलिमिनेटरद्ध के टमिर्नलों को अदला - बदली करके उत्क्रमित कीजिए तथा दिक्सूची के विक्षेप की दिशा को प्रेक्ष्िात कीजिए। क्या यह भी उत्क्रमित हो जाती है? प्रेक्षण संलग्न शीट पर बना आलेख किसी सीधे धरावाही तार के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्रा रेखाओं के पैटनर् को दशार्ता है। परिणाम एवं परिचचार् चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं के प्रेक्षण के आधार पर निम्न निष्कषर् निकाले जा सकते हैं - ऽ किसी धरावाही सीधे तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ एक दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं। ऽ धारावाही सीधे तार से दिक्सूची के दूर जाने पर इसमें विक्षेप घटता है। ऽ तार में विद्य़ुतधारा परिवतिर्त होने पर दिक्सूची के विक्षेप में भी परिवतर्न होता है। ऽ यदि ताँबे के सीधे तार मंे विद्युतधारा की दिशा उत्क्रमित कर दी जाती है तो चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं की दिशा भी उत्क्रमित हो जाती है। सावधानियाँ एवं त्राुटि के स्रोत ऽ वुंफजी को प्लग में तभी लगाना चाहिए जब आप पे्रक्षण अंकित कर रहे हों। ऽ एक चुंबकीय क्षेत्रा रेखा आरेख्िात करने के पश्चात् वुंफजी को प्लग से निकालिए तथा वुफछ मिनट प्रतीक्षा कीजिए जिससे कि तार अपने सामान्य ताप पर वापस आ जाए। ऽ प्रयोग के समय तार अत्यंत गमर् हो जाता है इसलिए प्रयोग करते समय तार को न छुएं अन्यथा आपको नुकसान पहुँच सकता है। ऽ धरावाही सीधे तार के निकट, दिक्सूची को छोड़कर अन्य कोइर् भी चुंबकीय पदाथर् नहीं होना चाहिए। ऽ ताँबे के मोटे तार को पूरे प्रयोग मंे सीधा तथा ऊध्वार्धर रखना चाहिए। यदि लकड़ी का स्टैण्ड उपलब्ध न हो तब तार को किसी काॅवर्फ मंे से गुजारें जिसे किसी प्रयोगशाला स्टैण्ड में क्लैम्प किया जा सके। ऽ मोटे तथा सीधे ताँबे के तार के साथ श्रेणीक्रम में एक परिवतीर् प्रतिरोधक या धारा नियंत्राक लगाना चाहिए जिससे कि सीधे ताँबे के तार में विद्युतधारा नियंत्रिात की जा सके। ऽ उद्देश्य किसी विद्युत चुंबक के चुंबकीय क्षेत्रा का अध्ययन करना। सि(ांत विद्युत चुंबक एक ऐसा चुंबक है जिसमंे किसी नमर् लोहे की क्रोड पर विद्य़ुतरोधी ताँबे के तार की एक वुंफडली लिपटी हो। जब तार में से विद्युतधारा प्रवाहित होती है तो क्रोड चुंबकित हो जाती है जब विद्युतधारा प्रवाहित होनी बंद हो जाती है तो क्रोड का चुंबकत्व खत्म हो जाता है। इस प्रयोग में एक दिक्सूची का अवलोकन करके हम किसी विद्युत चुंबक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा का अध्ययन करेंगे। ;दिक्सूची एक छोटा चुंबक है। इसका एक सिरा जो उत्तर की ओर संवेेफत करता है इसका उत्तरी ध््रुव कहलाता है और दूसरा सिरा जो दक्ष्िाण की ओर संकेत करता है, दक्ष्िाणी ध््रुव कहलाता है। दिक्सूची के आधर पर लगा एक वृताकार स्केल इसके चारों ओर विक्षेप को मापने के लिए उपयोग किया जाता हैद्ध। वुुंफडली में विद्युतधारा का परिमाण तथा दिशा परिवतिर्त करके हम विद्युत चुंबक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा में परिवतर्न की जाँच करेंगे तथा वुंफडली मंे बहने वाली विद्युतधारा के मान को स्िथर रखकर दिक्सूची को विद्युत चुंबक से दूर ले जाने पर चुंबकीय क्षेत्रा में परिवतर्न की भी जाँच करेंगे। आवश्यक सामग्री एक छोटा विद्युत चुंबक, वृताकार स्केल युक्त दिक्सूची, कम - से - कम 6 ट की एक बैटरी, एक परिवतीर् प्रतिरोधक ;धरा नियंत्राकद्ध, एक ऐमीटर ;0 दृ 3 ।द्धए एक प्लग वुंफजी, मापक पैमाना, संयोजी तार तथा रेगमाल का एक टुकड़ा। कायर्वििा 1ण् दिए गए ऐमीटर का परास तथा अल्पतमांक नोट कीजिए। 2ण् रेगमाल का उपयोग करके संयोजी तारों के सिरों को सापफ कीजिए। 3ण् संयोजी तारों का उपयोग करके चित्रा 54.1 मंे दशार्ए अनुसार एक विद्युत परिपथ तैयार कीजिए जिसमें एक विद्युत चुंबक, बैटरी, परिवतीर् प्रतिरोधक ;धारा नियंत्राकद्ध, प्लग वुंफजी तथा ऐमीटर लगा हो। परिपथ को ऐसी जगह बनाएं कि विद्युत चुंबक का अक्ष मेज के एक पाश्वर् कोर के निकट तथा समांतर रहे ;चित्रा 54.1द्ध। प्रारम्भ में धरा नियंत्राक के सपीर् संस्पशर् लगभग इसके अिाकतम् विन्यास पर रख्िाए। इस स्िथति में, वुंफजी को प्लग में लगाने पर वुंफडली में बहने वाली विद्युतधारा का परिमाण न्यूनतम् होगा। चित्रा 54.1: विद्युत चुंबक के निकट रखने पर दिक्सूची की सुईं विक्षेपित होती है। 4ण् विद्युत चुंबक के एक सिरे से, इसके अक्ष के अनुदिश पेज पर 20 बउ से लंबी एक रेखा च्फ खींचिए। रेखा च्फ पर लगभग 5 बउ के समान अंतराल पर त्ए ैए ज्ए न् ¯बदुओं के निशान लगाइए। 5ण् विद्युत चुंबक के एक सिरे के निकट रेखा च्फ के बिंदु त् पर एक दिक्सूची इस प्रकार रख्िाए कि दिक्सूची का केन्द्र बिंदु त् के निशान से सम्पाती हो। दिक्सूची को इस प्रकार घुमाइए कि इसकी सुईं 0° पर आ जाए। 6ण् विद्युत चुंबक के नमर् लोहे की क्रोड के चारों ओर लिपटी वंुफडली में विद्युतधारा प्रवाहित कराने के लिए वुंफजी को प्लग में लगाएं। क्रोड चुंबकित हो जाएगी और इसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्रा उत्पन्न होगा। इससे दिव्फसूची मंे विक्षेप होगा। धरा नियंत्राक के परिवतीर् संबंधक की स्िथति में बदल कर वुंफडली मंे बहने वाली विद्युतधारा के मान को इस प्रकार समायोजित कीजिए कि बिंदु त् पर रखी दिक्सूची में लगभग 30° का विक्षेप दिखाइर् दे। दिक्सूची मंे विक्षेप तथा वुंफडली में बहने वाली विद्युतधारा को नोट कीजिए तथा मान सारणी में अंकित कीजिए। 7ण् धारा नियंत्राक पर परिवतीर् संयोजक की स्िथति बदलकर वुंफडली में बहने वाली विद्युतधारा को बढ़ाइए। दिक्सूची पर क्या प्रभाव पड़ता है? क्या अब इसमें अिाक विक्षेप होता है? ऐमीटर तथा दिक्सूची की मापों को नोट कीजिए तथा सारणी में अंकित कीजिए। इस चरण को वुंफडली मंे विद्युतधारा के तीन अन्य मानों के लिए दोहराइए। वुंफडली मंे विद्युतधरा के मान को इस प्रकार रख्िाए कि यह दिक्सूची मंे 60° से अिाक विक्षेप उत्पन्न न करे। वुंफजी को प्लग से निकालिए। 8ण् वुंफडली मंें विद्युतधारा परिवतिर्त करने के लिए बैटरी के टमिर्नलों संबंधनों को आपस में बदलिए। दिक्सूची के विक्षेप मंे परिवतर्न प्रेक्ष्िात कीजिए। 9ण् वुंफजी को प्लग में लगाइए। विद्युुत चुंबक के अक्ष च्फ के अनुदिश बिंदु त् पर रखी दिक्सूची मंे विक्षेप तथा वुंफडली मंे प्रवाहित होने वाली विद्युतधारा को पुनः नोट कीजिए तथा सारणी में अंकित कीजिए। वंुफजी को प्लग से निकालिए। 10ण् दिक्सूची स्िथति ै पर ले जाइए। सुनिश्िचत कीजिए कि दिक्सूची की सुइर् 0° पर रहे। वुंफजी को प्लग मंे लगाइए तथा दिव्फसूची की सुइर् 0° पर रहे। दिक्सूची में विक्षेप को प्रेक्ष्िात कीजिए। अब दिक्सूची विद्युत चुंबक के च् सिरे से विभ्िान्न दूरियों पर रखी हो तो दिक्सूची में विक्षेप प्रेक्ष्िात कीजिए तथा सारणी में अंकित कीजिए। अथार्त् जब दिक्सूची बिंदुओं ज्ण्टण् आदि पर रखी हो, वुुंफजी को प्लग में से निकालिए। 11ण् इस प्रयोग में आपने मेज पर वुफछ रेखाएँ खींची होगीं। आपके मित्रा बाद मंे इस प्रयोग को कर सकते है।। श्िाष्टाचार के नाते कृपया मेज को सापफ कर दें। प्रेक्षण एवं परिकलन ऐमीटर का परास त्र ऋऋऋऋ . ऋऋऋऋ ।ण् ऐमीटर का अल्पतमांक त्र ऋऋऋऋ ।ण् ।ण् वुंफडली मंे प्रवाहित होनेवाली विद्युतधारा मंे परिवतर्न के साथ किसी एक बिंदु पर रखी दिक्सूची के विक्षेप मंे परिवतर्न विद्य़ुत चुंबक के एक सिरे से दिक्सूची की स्िथति त्र ऋऋऋऋ बउण् क्रम संवुंफडली मंे विद्युतधारा दिक्सूची में विक्षेप ;°द्ध 1ण् 2ण् 3ण् 4ण् ठण् वुंफडली मंे प्रवाहित होने वाली विद्युतधारा अपरिवतीर् रहने पर लेकिन दिक्सूची की विद्युत चुंबक के सापेक्ष स्िथति बदलने पर दिक्सूची के विक्षेप में परिवतर्न विद्युत चुंबक की वुंफडली मंे प्रवाहित होनेवाली विद्युतधारा त्र ऋऋऋऋऋ ।ण् 1ण् बिंदु त् 5 2ण् बिंदु ै 10 3ण् बिंदु ज् 15 4ण् बिंदु न् 20 परिणाम एवं परिचचार् अपने प्रेक्षणों से, निम्न के बारे में निष्कषर् निकालिएः ऽ विद्युत चुंबक की वंुफडली मंे प्रवाहित होनेवाली विद्युतधारा मंे परिवतर्न के साथ किसी दिए गए बिंदु पर विद्युत चुंबक के चुंबकीय क्षेत्रा की प्रबलता मंे परिवतर्न। ऽ विद्युत चुंबक से दूरी बढ़ने पर उसेवफ चुंबकीय क्षेत्रा की प्रबलता मंें परिवतर्न। ऽ वुंफडली मंे प्रवाहित होने वाली विद्युतधारा की दिशा मंें परिवतर्न का विद्युत चुंबक द्वारा उत्पन्न चुंकबकीय क्षेत्रा की दिशा पर प्रभाव। सावधानियाँ एवं त्राुटि के स्रोत ऽ संयोजी तार तांबे के मोटे तार होने चाहिए तथा उनके सिरों की विद्युतरोधी परत को रेगमाल की सहायता से हटा देना चाहिए। ऽ ऐमीटर को विद्युत चुंबक की वुंुफडली के साथ श्रेणीक्रम मंे इस प्रकार लगाना चाहिए कि विद्युतधारा ऐमीटर के ध्न टमिर्नल से प्रवेश करें तथा )ण टमिर्नल से बाहर निकले। ऽ जब परिपथ में कोइर् विद्युतधारा प्रवाहित न हो रही हो तो ऐमीटर के संकेतक की स्िथति शून्य पर होनी चाहिए।। यदि ऐसा नहीं है तो अपने अध्यापक से इसको ठीक करने को कहें। ऽ परिपथ में वुंफजी को प्लग में तभी लगाना चाहिए जब आप प्रेक्षणों को नोट कर रहे हैं। ऽ विद्युत चुंबक के निकट दिक्सूची को छोड़कर अन्य कोइर् भी चुम्बक या चुंबकीय पदाथर् नहीं होना चाहिए। विद्युत चुंबक को लकड़ी की मेज पर रखना चाहिए। ऽ दिक्सूची का साइश बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। ऽ विद्युत चंुबक की वुंफडली मंें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का परिमाण इतना होना चाहिए कि इसका क्षेत्रा इतना प्रबल हो कि विद्युत चुंबक से 20 बउ दूरी पर रखी दिक्सूची मंे पयार्प्त विक्षेप उत्पन्न कर सके। प्रयोग 55 उद्देश्य चुंबकीय क्षेत्रा में रखे किसी विद्युत धरावाही चालक पर लगने वाले बल का अध्ययन करना तथा यह सत्यापितकरना कि चालक की गति फ्रलेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार है। सि(ांत चुंबकीय क्षेत्रा में रखा धरावाही चालक एक बल का अनुभव करता है ;चित्रा 55ण्1द्ध। यदि चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा तथा विद्युतधरा की दिशा एक दूसरे के परस्पर लंबवत् है तो चालक पर लगने वाला बल इन दोनों के लंबवत् होगा तथा इसकी दिशा को फ्रले¯मग के वाम हस्त नियम का उपयोग करके ज्ञात किया जा सकता है ;चित्रा 55ण्2द्ध। किसी विद्युत धरावाही ैचालक पर लगने वाले बल का अध्ययन करने के लिए, एक ठ ऐलुमिनियम की छड़ ;।ठद्ध को चित्रा 55ण्1 में दशार्ए अनुसार छकिसी नाल चुंबक के चुंबकीय क्षेत्रा में रखा जा सकता है। जब । चालक ;ऐलुमिनियम की छड़द्ध में विद्युत धरा प्रवाहित होती है तो यह विस्थापित होता है जो चालक पर लगने वाले बल के अस्ितत्व को सत्यापित करता है। इस प्रयोग में हम चालक पर लगने वाले बल की चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा तथा चालक में प्रवाहित होने चित्रा 55ण्1 रू विद्युत धरावाही छड़ ।ठए अपनी लंबाइर् तथावाली विद्युत धारा के परिमाण और दिशा पर निभर्रता का अध्ययन चुंबकीय क्षेत्रा के लंबवत् एक बल का अनुभवकरेंगे। करती है चुंबकीय क्षेत्रा चुंबकीय क्षेत्रा अंगूठा - गति विद्युत धरा बल विद्युत धरा चित्रा 55ण्2 रू फ्रलेमिंग का वामहस्त नियम आवश्यक सामग्री एक प्रबल नाल चुंबक, ऐलुमिनियम की एक छोटी छड़ ;लगभग 5 बउ लंबीद्ध, ऐमीटर ;0 . 3 ।द्धए लकड़ी के दो स्टैण्ड, सेल होल्डर सहित चार शुष्क सेल ;प्रत्येक 1ण्5 टद्ध ;या 6 ट की बैटरी या एक बैटरीएलिमिनेटरद्ध, एक प्लग वुंफजी, संयोजी तार, रेगमाल का एक टुकड़ा, एक गत्ता, ग्रापफ पेपर, तथा चिपकने वाली टेप। कायर्विध्ि 1ण् सापफ संयोजी तारों का प्रयोग करके एक चालक ;एक छोटी ऐलुमिनियम की छड़द्ध को श्रेणीक्रम में शुष्क सेल होल्डर ;या बैटरी या बैटरी एलिमिनेटरद्ध, एक ऐमीटर तथा प्लग वुंफजी के साथ संयोजित कीजिए। प्लग में वुंफजी मत लगाइए। 2ण् ऐलुमिनियम की छड़ को लकड़ी के एक प्रयोगशाला स्टैण्ड से इस प्रकार लटकाइए कि इसकी लंबाइर् ।ठ क्षैतिज रहे। साथ ही एक प्रबल नाल चुंबक को लकड़ी के दूसरे प्रयोगशाला स्टैण्ड पर इस प्रकारलगाइए कि इसके उत्तर तथा दक्ष्िाण ध्ु्रव एक ही ऊध्वार्ध्र तल में रहें। 3ण् दोनों प्रयोगशाला स्टैण्डों को इस प्रकार एक सीध् में लगाइए कि ऐलुमिनियम की छड़ चुंबक के दो ध्ु्रवों के बीच में हो तथा चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा उध्वर् हो, जैसा कि चित्रा 55ण्1 में दशार्या गया है।एक गत्ते को चुंबक तथा ऐलुमिनियम की छड़ के समुच्चय के ठीक पीछे रख्िाए। ऐलुमिनियम की छड़ में विक्षेप अंकित करने के लिए इस पर एक ग्रापफ पेपर चिपकाइए। इसके लिए ऐलुमिनियम की छड़ की प्रारंभ्िाक स्िथति को ग्रापफ पेपर पर अंकित कीजिए। 4ण् ऐलुमिनियम की छड़ को एक सेल ;या 2 ट बैटरी एलिमिनेटरद्ध के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित करें और चालक में विद्युत धरा प्रवाहित कराने के लिए वुंफजी को प्लग में लगाएं। ;चालक में विद्युत धारा को बिन्दु ठ से । की ओर प्रवाहित होने देंद्ध। ऐमीटर का पाठ्यांक नोट कीजिए तथा अंकित कीजिए। 5ण् क्या आप चालक में कोइर् विस्थापन देखते हैं? यह किस दिशा में विस्थापित होता है? क्या यह बाईं ओर विस्थापित होता है? जाँच कीजिए कि यह विस्थापन फ्रले¯मग के वामहस्त नियम के अनुसार है। इसके लिए अपने बाएं हाथ के अंगूठे, तजर्नी तथा मध्यमा को इस प्रकार पैफलाइए कि ये तीनों परस्पर एक दूसरे के लंबवत् हों ;चित्रा 55ण्2द्ध। अपनी तजर्नी का इस प्रकार समायोजन कीजिए कि यह चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा की ओर ;उपरिमुखीद्ध तथा मध्यमा विद्युत धरा की दिशा की ओर ;ठ से ।द्ध संकेत करें तो आपके अंगूठे को बाईं दिशा की ओर संकेत करना चाहिए। ऐलुमिनियम की छड़ ।ठ का विस्थापन पीछे रखे ग्रापफ पेपर का उपयोग करके मापिए ;चरण 3द्ध। 6ण् सेल ;या बैटरी या बैटरी एलिमिनेटरद्ध तथा ऐमीटर के संबंध्नों का विनिमय करके ऐलुमिनियम की छड़ में प्रवाहित होने वाली विद्युत धरा की दिशा उत्क्रमित कीजिए। ;सदैव सुनिश्िचत कीजिए कि ऐमिटर का ध्न ट£मनल सेल के ध्न ट£मनल से ही संयोजित हैद्ध। चालक के विस्थापन की दिशा प्रेक्ष्िात कीजिए। क्या यह विपरीत दिशा में विस्थापित होता है? विस्थापन को चिहि्नत तथा अंकित कीजिए। 7ण् चालक में प्रवाहित होने वाली विद्युत धरा के विभ्िान्न मानों के लिए चरण 4 से 6 को दोहराइए। 3 ट की आपू£त के लिए 2 सेलों, 4ण्5 ट की आपू£त के लिए 3 सेलों तथा 6 ट की आपू£त के लिए चार सेलों का उपयोग कीजिए। ;यदि बैटरी एलिमिनेटर का उपयोग किया जा रहा है तो इसके विन्यास में तदनुसार परिवतर्न करेंद्ध। छड़ ।ठ में प्रवाहित होने वाली विद्युत धरा तथा इसके विस्थापन को नोट कीजिए तथा अंकित कीजिए ;विद्युत धरा की दोनों दिशाओं के लिएद्ध। पे्रक्षण एवं परिकलन क्रम उपयोग किए गए आपू£त की छड़ ।ठ मंेऐलुमिनियम की छड़ में विस्थापन ;उउद्ध सं.सेलों की संख्या वोल्टता ;टद्ध प्रवाहित होने जब इसमें विद्युत धरा प्रवाहित होती है वाली विद्युत ठ। के अनुदिश ।ठ के अनुदिश धरा विस्थापन बाईं ओर विस्थापन दाईं ओर 1ण् 1 1ण्5 2ण् 2 3ण्0 3ण् 3 4ण्5 4ण् 4 6ण्0 परिणाम एवं परिचचार् अपने प्रेक्षणों से निम्न के बारे में निष्कषर्/परिणाम निकालिए ऽ चुबकीय क्षेत्रा में रखे सीध्े चालक में ;ऐलुमिनियम की छड़द्ध विद्युत धरा प्रवाहित करने पर, चालक विस्थापित होता है। ऽ चालक में विद्युत धरा का परिमाण बढ़ाने पर, चालक का विस्थापन बढ़ जाता है। वुंफडली - 1 वुंफडली - 2 चित्रा 56ण्2 रू वुंफडली - 1 में विद्युतधरा परिव£तत करने पर वुंफडली - 2 में विद्युतधरा प्रेरित होती है। आवश्यक सामग्री ताँबे के तार की लगभग 50 पेफरों वाली दो वुंफडलियाँ, धरा नियंत्राक ;परिवतीर् प्रतिरोध्कद्ध, एक ऐमीटर ;0 . 3 ।द्धए एक गैल्वेनोमीटर, एक प्रबल दण्ड चुंबक, प्लग वुंफजी, संयोजी तार तथा रेगमाल का एक टुकड़ा। कायर्विध्ि ।ण् किसी वुंफडली तथा चुंबक के बीच आपेक्ष्िाक गति के कारण वुंफडली में पे्ररित विद्युत धरा का अस्ितत्व 1ण् एक वुंफडली ।ठ लीजिए तथा इसे चित्रा 56ण्1 में दशार्ए अनुसार एक गैल्वेनोमीटर से संयोजित कीजिए। 2ण् एक प्रबल दण्ड चुंबक लीजिए तथा इसके उत्तरी ध्ु्रव ;या दक्ष्िाणी ध्ु्रवद्ध को वुंफडली के एक सिरे ;माना ठद्ध की ओर ले जाइए। गैल्वेनोमीटर की सुइर् की स्िथति को प्रेक्ष्िात कीजिए। क्या इसमें कोइर् विक्षेप हुआ है? गैल्वेनोमीटर की सुइर् में एक दिशा में ;मान लीजिए दाईं दिशा मेंद्ध क्षण्िाक विक्षेप होता है। यह क्या इंगित करता है? यह वुंफडली ।ठ में विद्युत धरा की उपस्िथति का संकेत देता है। 3ण् दण्ड चुंबक की गति को रोकिए। अब आप क्या देखते हैं? क्या गैल्वेनोमीटर कोइर् विक्षेप दशार्ता है? नहीं। जैसे ही दण्ड चुंबक की गति समाप्त होती है, गैल्वेनोमीटर में विक्षेप शून्य हो जाता है। इसका क्या अथर् है? 4ण् अब चुंबक के उत्तरी ध््रुव को वुंफडली से दूर ले जाइए तथा गैल्वेनोमीटर में विक्षेप को प्रेक्ष्िात कीजिए। इस बार गैल्वेनोमीटर की सुइर् विपरीत दिशा में ;अथार्त् बाईं ओरद्ध विक्षेपित होती है, जो यह दशार्ता है कि अब उत्पन्न विद्युतधरा की दिशा पहले के विपरीत है। 5ण् अब दण्ड चुंबक के दक्ष्िाणी ध््रुव को वुंफडली के ठ सिरे की ओर लाइए और गैल्वेनोमीटर की सुइर् में विक्षेप प्रेक्ष्िात कीजिए। 6ण् वंुफडली के निकट किसी चुंबक को स्िथर अवस्था मंे इस प्रकार रख्िाए कि चुंबक का उत्तरी ध्ु्रव वुंफडली के सिरे ठ की ओर हो और इसके साथ जुड़े गेल्वेनोमीटर में विक्षेप प्रेक्ष्िात कीजिए। जब वुंफडली को चुंबक के उत्तरी ध्ु्रव की ओर ले जाते हैं तो गैल्वेनोमीटर की सुइर् दाईं ओर विक्षेपित होती है। इसी प्रकार, जब वुंफडली को दूर ले जाते हैं तो सुइर् बाईं ओर विक्षेपित होती है। जब वुंफडली को स्िथर रखते हैं तो गैल्वेनोमीटर का विक्षेप शून्य हो जाता है। 7ण् अंत में वुंफडली एवं चुंबक दोनों को स्िथर रख्िाए तथा विक्षेप को प्रेक्ष्िात कीजिए। अब गैल्वेनोमीटर में कोइर् विक्षेपण नहीं होता। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि वुंफडली के सापेक्ष चुंबक की गति, एक प्रेरित विभवान्तर उत्पन्न करती है जिसके कारण परिपथ में प्रेरित विद्युत धरा प्रवाहित होती है, जिसे उपरोक्त चरणों में गैल्वेनोमीटर के विक्षेप के रूप में देखा गया है। अपने प्रेक्षणों को अंकित कीजिए। ठण् किसी वुंफडली में, इसके समीप रखी दूसरी वुंफडली में विद्युत धरा के परिवतर्न के कारण प्रेरित विद्युत धारा का अस्ितत्व। 8ण् ताँबे के तार की एक वुंफडली ;माना वुंफडली - 1द्ध को चित्रा 56ण्2 में दशार्ए अनुसार एक स्रोत ;एक सेल या बैटरीद्ध से एक धरा - नियंत्राक, ऐमीटर तथा प्लग वुंफजी के साथ संयोजित कीजिए। परिपथ बनाने के लिए सापफ संयोजी तार प्रयोग कीजिए। 9ण् गैल्वेनोमीटर के साथ संयोजित एक अन्य वंुफडली ;माना वुंफडली - 2द्ध को वुंफडली - 1 के परिपथ के निकट रख्िाए। 10ण् वुंफजी को प्लग में लगाइए तथा वंुफडली - 1 में विद्युतधरा प्रवाहित होने दीजिए। आप क्या प्रेक्षण करते हैं? क्या वुंफडली - 2 से संयोजित गैल्वेनोमीटर की सुइर् विक्षेपित होती है? हाँ, यह क्षण्िाक रूप से विक्षेपित होती है। जैसे ही वुंफडली - 1 में विद्युतधरा स्िथर हो जाती है, यह वापस शून्य पर आकर रुक जाती है। ;धरा नियंत्राक के परिवतीर् संबंध्क को समायोजित करके वंुफडली - 1 में पयार्प्त विद्युत धारा बहने दें। नोट कीजिए कि धरा नियंत्राक मूल रूप से एक परिवतीर् प्रतिरोध् का प्रतिरोध्क है। परिपथ में प्रतिरोध बदलने के लिए यह परिपथ में श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाता हैद्ध। 11ण् धरा नियंत्राक के परिवतीर् सम्पवर्फ को समायोजित करके वंुफडली - 1 में बहने वाली विद्युतधरा में परिवतर्न कीजिए। आप क्या प्रेक्ष्िात करते हैं? क्या आप देख पाते हैं कि जब वुंफडली - 1 के परिपथ में विद्युत धरा बढ़ती है तो वुंफडली - 2 से संयोजित गैल्वेनोमीटर एक दिशा में विक्षेप दशार्ता है जबकि वुंफडली - 1 के परिपथ में विद्युत धरा घटने पर गैल्वेनोमीटर की सुइर् का विक्षेप उल्टा हो जाता है। 12ण् अपने प्रेक्षणों को प्रेक्षण सारणी में अंकित कीजिए। पे्रक्षण ।ण् किसी वुंफडली तथा चुंबक के बीच आपेक्ष्िाक गति के कारण वुंफडली में प्रेरित विद्युत धरा के अस्ितत्व का प्रेक्षण;चित्रा 56ण्1द्ध। 1.वुंफडली स्िथरऋ दण्ड चुंबक का उत्तरी - ध्ु्रव वुंफडली की ओर गति करता हुआ। 2.वुंफडली स्िथरऋ दण्ड चुंबक का उत्तरी - ध्ु्रव वुंफडली से दूर जाता हुआ। 3.वुंफडली स्िथरऋ दण्ड चुंबक का दक्ष्िाणी - ध्ु्रव वुंफडली की ओर गति करता हुआ। 4.वुंफडली स्िथरऋ दण्ड चुंबक का दक्ष्िाणी - ध्ु्रव वुंफडली से दूर जाता हुआ। 5.दण्ड चुंबक स्िथर तथा इसका उत्तरी - ध््रुव वुंफडली की ओरऋ वुंफडली, चुंबक की ओर गति करती हुइर्। 6.दण्ड चुंबक स्िथर तथा इसका उत्तरी - ध््रुव वुंफडली की ओरऋ वुंफडली, चुंबक से दूर जाती हुइर्। 7.दण्ड चुंबक स्िथर तथा इसका दक्ष्िाणी - ध््रुव वुंफडली की ओरऋ वुंफडली, चुंबक की ओर गति करती हुइर्। 8.दण्ड चुंबक स्िथर तथा इसका दक्ष्िाणी - ध््रुव वुंफडली की ओरऋ वुंफडली, चुंबक से दूर जाती हुइर्। 9.वुंफडली तथा चुंबक दोनों स्िथर। ठण् किसी वुंफडली ;वुंफडली - 1द्ध में विद्युतधरा के परिवतर्न के कारण इसके समीप रखी किसी अन्य वुंफडली ;वुंफडली - 2द्ध में प्रेरित विद्युतधरा के अस्ितत्व ;चित्रा 56ण्2द्ध का प्रेक्षण। क्रम ियाकलाप गैल्वेनोमीटर की सुइर् से विक्षेप परिअनुमान सं;दाईं ओर/बाईं ओर/कोइर् विक्षेप नहींद्ध 1ण् वुंफडली - 1 में कोइर् विद्युत धरा नहीं। 2ण् वुंफडली - 1 में विद्युत धरा बढ़ती हुइर्। 3ण् वुंफडली - 1 में विद्युत धरा घटती हुइर्। परिणाम एवं परिचचार् प्रेक्षण सारणी में ियाकलापों के अनुमान लिख्िाए तथा निष्कषर् निकालिए कि विद्युतचुंबकीय प्रेरण की परिघटना, समय परिवतीर् चुंबकीय क्षेत्रा में रखी किसी वुंफडली में प्रेरित विद्युत धरा का उत्पन्न होना दशार्ती है। साथ ही उन विध्ियों पर टिप्पणी कीजिए, जिनसे आप किसी विद्युत स्रोत रहित परिपथ में विद्युत धरा ;प्रेरितद्ध उत्पन्न कर सकते हैं। सावधनियाँ एवं त्राुटि के स्रोत ऽ संयोजी तारों के सिरों से विद्युतरोध्ी परत को हटाने के लिए उन्हें रेगमाल से रगड़ कर सापफ कीजिए। ऽ दण्ड चुंबक की गति इस प्रकार होनी चाहिए ;वुंफडली के अंदर या बाहरद्ध कि वह वुंफडली को स्पशर् न करे। ऽ वंुफडलियों में ताँबे के तार एक समान रूप से लिपटे होने चाहिए। ऽ प्रायोगिक समुच्चय के पास अन्य कोइर् भी चुंबकीय पदाथर् नहीं होना चाहिए।

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