एकक प् पदाथर् उद्देश्य लोहे की कील के जलीय काॅपर सल्पेफट विलयन के साथ रासायनिक अभ्िािया का अध्ययन और मैग्नीश्िायम रिबन के वायु मंे दहन का अध्ययन। ।ण् जल में लोहे की कील की काॅपर सल्पेफट के विलयन के साथ रासायनिक अभ्िािया सि(ांत लोहा ;आयरनद्ध काॅपर सल्पेफट के जलीय विलयन से काॅपर आयनों का विस्थापन कर देता है। यह एक धातु द्वारादूसरी धातु की एकल विस्थापन अभ्िािया है। सियता श्रेणी में आयरन, काॅपर से पहले आता है। इस श्रेणी में ऊपर रखे गये तत्व उनके नीचे रखे गये तत्वों से अिाक अभ्िाियाशील होते हैं। अतः आयरन, काॅपर से अिाक अभ्िाियाशील है। इस अभ्िािया में धात्िवक आयरन, पेफरस आयन ;थ्म2़द्धमें परिवतिर्त हो जाता है और क्यूपि्रक आयन ;ब्न2़द्ध धात्िवक काॅपर मंे परिवतिर्त हो जाता है। थ्म ;ेद्ध ़ ब्न2 ़ ;ंुद्ध ⎯→ थ्म2़ ;ंुद्ध ़ ब्न ;ेद्धण् आवश्यक सामग्री दो परखनलियाँ, दो लोहे की कीलें, मापक सि¯लडर ;50 उस्द्धए क्लैम्प युक्त प्रयोगशाला स्टैण्ड, परखनली स्टैण्ड,धागा, रेगमाल का एक टुकड़ा, एक छेद वाला कावर्फ, काॅपर सल्पेफट, आसुत जल, तथा तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल। कायर्वििा 1ण् दो लोहे की कीलें लें और उन्हें रेगमाल से सापफ कर लें। स्टैण्ड परखनली धगा काॅपर सल्पेफट विलयन लोहे की कील 2ण् एक स्वच्छ परखनली में 20 उस् आसुत जल लें और उसमें 1ण्0 ह काॅपर सल्पेफट विलेय करें। जल में काॅपरसल्पेफट अपघटन रोकने के लिये इसमें तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल की 2 या 3 बूँदें मिलायें। इस परखनली को । चिित करें। 3ण् परखनली । से लगभग 10 उस् काॅपर सल्पेफट विलयन एक अन्य स्वच्छ परखनली में स्थानांतरित करें। इसे परखनली ठ चिित करें। 4ण् एक लोहे की कील को धागे से बाँधें और इसे छिदि्रत काॅवर्फ से सावधानीपूवर्क परखनली ठ में डुबोयें ¹जैसा चित्रा 1.1 ं में दशार्या गया हैह्। दूसरी लोहे की कील को बाद में तुलना हेतु अलग रख लें। 5ण् लगभग 15 मिनट पश्चात् काॅपर सल्पेफट विलयन से लोहे की कील निकाल लें। परखनली काॅपर सल्पेफट विलयन लोहे की कील;प्रयोग से पहलेद्ध काॅपर सल्पेफट विलयन से निकाला हुआ लोहे की कीलपरखनली स्टैण्ड अभ्िािया मिश्रण ;इद्ध ;बद्ध चित्रा 1ण्1रू ;ंद्ध काॅपर सल्पेफट विलयन में डुबी हुइर् लोहे की कीलऋ ;इद्ध और ;बद्ध क्रमशः काॅपर सल्पेफट विलयनों तथा लोहे की कीलों की तुलना। 6ण् परखनली । और ठ में प्रयोग से पहले और बाद में काॅपर सल्पेफट विलयन के नीले रंग की तीव्रता की तुलना करें और काॅपर सल्पेफट मंे डुबोयी गयी लोहे की कील की तुलना, अलग रखी कील से करें ख्चित्रा 1.1;इद्ध और ;बद्ध,। अपने प्रेक्षण आलेख्िात करें। प्रेक्षण एवं परिकलन परिणाम एवं परिचचार् काॅपर सल्पेफट विलयन और लोहे की कील में हुए परिवतर्नों के बारे में अपने प्रेक्षणों से निष्कषर् निकालें। सावधानियाँ एवं त्राुटियों के स्रोत ऽ लोहे की कीलों में से एक को काॅपर सल्पेफट विलयन में डुबोने से पूवर्, उसे रेगमाल का उपयोग कर उचित रूप से सापफ अवश्य कर लेना चाहिये। ठण् मैग्नीश्िायम रिबन के वायु में दहन की रासायनिक अभ्िािया सि(ांत मैग्नीश्िायम वायु की उपस्िथति में दहन करने पर मैग्नीश्िायम आॅक्साइड बनाता है। यह दो तत्वों के मध्यसंयोजन अभ्िािया है। मैग्नीश्िायम आॅक्साइड क्षारकीय प्रकृति का होता है अतः इसका जलीय विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है। 2डह ;ेद्ध ़ व्;हद्ध ⎯→ 2डहव् ;ेद्ध2 आवश्यक सामग्री मैग्नीश्िायम रिबन ;2 से 3 बउ लम्बाद्ध, टाँग्स, बनर्र, गहरे रंग के काँच वाला चश्मा, वाच - ग्लास, लाल और नीले लिटमस पत्रा, आसुत जल, बीकर, और रेगमाल का एक टुकड़ा। कायर्वििा 1ण् एक 2 बउ या 3 बउ लम्बा मैग्नीश्िायम रिबन लें और इसे रेगमाल से सापफ कर लें। यह मैग्नीश्िायम रिबन पर जमी हुइर् आॅक्साइड की परत को हटाएगा, जो इसे निष्िक्रय बनाती है। 2ण् मैग्नीश्िायम रिबन को टाँग्स की सहायता से वाॅच ग्लास के ऊपर पकड़ें और इसे बनर्र द्वारा वायु में जलायें ;चित्रा 1.2द्ध। गहरे रंग के काँच वाला चश्मा लगाकर मैग्नीश्िायम रिबन के दहन को देखें। 3ण् बने हुए सपेफद चूणर् को एकत्रा कीजिए। 4ण् इस सपेफद चूणर् को एक बीकर, जिसमें वुफछ आसुत जल हो, में स्थानांतरित कर मिश्रित कीजिए। 5ण् इस मिश्रण की वुफछ बूँदें लाल और वुफछ बूँदें नीले लिटमस पत्रों पर डालें और अपने प्रेक्षण लिखें। मैग्नीश्िायम रिबन वाच - ग्लास मैग्नीश्िायम आॅक्साइड बनर्र चित्रा 1.2: मैग्नीश्िायम रिबन का दहन और वाच - ग्लास पर मैग्नीश्िायम आॅक्साइड को एकत्रा करना। प्रेक्षण मिश्रण की एक बूँद लाल लिटमस पत्रा पर डालने पर, लिटमस पत्रा का रंग ऋऋऋऋऋऋऋऋऋ हो जाता है। मिश्रण की एक बूँद नीले लिटमस पत्रा पर डालने पर, लिटमस का रंग ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ हो जाता है। परिणाम एवं परिचचार् ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ लिटमस पत्रा का रंग ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ होना यह बताता है कि मैग्नीश्िायम आॅक्साइडके विलयन की प्रकृति ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है। सावधानियाँ ऽ मैग्नीश्िायम रिबन पर जमी आॅक्साइड परत हटाते समय रिबन को सावधानीपूवर्क सापफ करें। ऽ मैग्नीश्िायम रिबन को अपनी आँखों से यथासम्भव दूर रखकर दहन करें और मैग्नीश्िायम के दहने से उत्पन्न चकाचैंध करने वाले प्रकाश को देखने के लिये गहरे रंग के काँच वाले चश्मे का उपयोग कीजिए। ;क्यों?द्ध ऽ मैग्नीश्िायम आॅक्साइड का चूणर् एकत्रा करते उसे त्वचा से स्पशर् न होने दें। उद्देश्य निम्नलिख्िात रासायनिक अभ्िाियाओं का अध्ययन करनाः ;ंद्ध जिंक की सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथऋ ;इद्ध बेरियम क्लोराइड के जलीय विलयन और सोडियम सल्पेफट के जलीय विलयन के मध्य अवक्षेपण अभ्िािया और ;बद्ध अमोनियम क्लोराइड का खुले पात्रा में ऊष्मीय अपघटन। ।ण् जिंक की सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ रासायनिक अभ्िािया सि(ांत जिंक धातु तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ अभ्िािया करती है और हाइड्रोजन गैस बनाती है। र्द;ेद्ध ़ भ्2ैव्4;ंुद्ध ⎯→ र्दैव्4;ंुद्ध ़ भ्2;हद्ध यह एक धातु द्वारा एक अधातु की एकल विस्थापन अभ्िािया का उदाहरण है। आवश्यक सामग्री जिंक धातु कण्िाकाएं, तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल, लाल और नीले लिटमस पत्रा, परखनली, और एक मोमबत्ती। कायर्विध्ि 1ण् एक परखनली में वुुफछ जिंक कण्िाकाएं ;दानेदार जिंकद्ध लें। 2ण् जिंक कण्िाकाओं के साथ लगभ 10 उस् तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल मिलायें। अभ्िािया मिश्रण से बुदबुदाहट निकलती है ;चित्रा 2.1द्ध। 3ण् प्रेक्षण सारणी मंे दिये अनुसार परीक्षण सम्पन्न करें और अपने प्रेक्षण लिखें। काँच की नली गैस परखनली तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल जिंक कण्िाकाएं चित्रा 2.1: ¯जक कण्िाकाओं की तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ अभ्िािया प्रेक्षण क्रम संपरीक्षण ियाकलाप प्रेक्षण 1ण् रंग उत्सजिर्त गैस के रंग को देखें 2ण् गंध अपने हाथ से पंखा कर गैस को हल्के से अपनी नाक की ओर ले जायें। 3ण् लिटमस परीक्षण परखनली के मुँह के पास गीले नीले और लाल लिटमस पत्रा लायें। 4ण् दहन परीक्षण परखनली के मुँह के पास एक जलती हुइर्मोमबत्ती लायें। परिणाम एवं परिचचार् उत्सजिर्त गैस की प्रकृति जानने हेतु प्रेक्षणों के निष्कषर् निकालें। यह अम्लीय है या क्षारकीय है या उदासीनहै? क्या यह वायु में दहन ;अथवा ऊष्माक्षेपी दहनद्ध से जल उत्पन्न करती है? सावधानियाँ ऽ सापफ जिंक कण्िाकाएं उपयोग में लानी चाहिये। ऽ परखनली में तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल डालते समय और दहन परीक्षण करते समय सावधनी रखनी चाहिये। ठण् बेरियम क्लोराइड के जलीय विलयन और सोडियम सल्पेफट के जलीय विलयन के मध्य अवक्षेपण अभ्िािया सि(ांत जब सोडियम सल्पेफट के विलयन को बेरियम क्लोराइड के विलयन में मिलाया जाता है, तो निम्नलिख्िात द्विविस्थापन अभ्िािया होती है। छं2ैव्4 ;ंुद्ध ़ ठंब्स2 ;ंुद्ध ⎯→ ठंैव्4 ;ेद्ध ़ 2छंब्स ;ंुद्ध 2−इस अभ्िािया मंे सोडियम सल्पेफट से सल्पेफट आयन ; ैव्4 द्ध क्लोराइड आयनों ; ब्स− द्ध द्वारा विस्थापित होते हैं और बेरियम क्लोराइड से क्लोराइड आयन, सल्पेफट आयनों द्वारा विस्थापित होते हैं। परिणामस्वरूप, बेरियम सल्पेफट का सपेफद अवक्षेप बनता है और सोडियम क्लोराइड विलयन में रहता है। आवश्यक सामग्री दो परखनलियाँ, एक छोटा मापक सिलिण्डर ;50 उस्द्धए सोडियम सल्पेफट का जलीय विलयन, तथा बेरियम क्लोराइड का जलीय विलयन। कायर्वििा 1ण् एक परखनली में 3 उस् सोडियम सल्पेफट विलयन लें और उसे । चिित करें। 2ण् एक दूसरी परखनली में 3 उस् बेरियम क्लोराइड विलयन लें और उसे ठ चिित करें। 3ण् परखनली । के विलयन को परखनली ठ में ध्ीरे - ध्ीरे स्थानांतरित करें। 4ण् हल्का - हल्का हिलाकर दोनों विलयनों को मिश्रित करें। 5ण् नीचे दी गयी प्रेक्षण सारणी में दिये गये पदों के अनुसार विलयनों के रंगों में होने वाले परिवतर्नों को देखें। प्रेक्षण क्रम सं.प्रयोग प्रेक्षण 1ण् परखनलियों । और ठ के विलयनों को मिलाने से पहले उनके रंग देखें। 2ण् दोनों विलयनों को मिलायें और मिश्रण को वुफछ समय के लिये निविर्घ्न छोड़ दें। क्या परखनली मंे वुफछ अवक्षेपित होता है? यदि है, तो उसका रंग क्या है? परिणाम एवं परिचचार् पुष्िट करें कि क्या आपने परखनली में बेरियम सल्पेफट का सपेफद अवक्षेप प्राप्त किया है। क्या इससे यह सुझाव मिलता है कि पदाथर्, जो जल में आयन देेते हैं, अनुवूफल परिस्िथतियों में अवक्षेपण अभ्िािया में परिण्िात हो जाते हैं? ब्ण् अमोनियम क्लोराइड का खुले पात्रा में ऊष्मीय अपघटन। सि(ांत अमोनियम क्लोराइड को किसी खुले पात्रा मंे गरम करने पर वह हाइड्रोजन क्लोराइड में विघटित होता है और अमोनिया गैस बनती है। यह अपघटन अभ्िािया का एक उदाहरण है। गरम करंेछभ् ब्स ;ेद्ध छभ् ;हद्ध भ्ब्स ;हद्ध 4 3 आवश्यक सामग्री अमोनियम क्लोराइड, नेसलर अभ्िाकमर्क ज्ञ ख्भ्ह प्,ए नीला लिटमस पत्रा, प्रयोगशाला स्टैण्ड क्लैम्प सहित,24त्रिापाद स्टैण्ड, बनर्र, चीनी प्याली, तार की जाली और एक कीप। कायर्वििा 1ण् एक सापफ और शुष्क चीनी प्याली ;बीपदं कपेीद्ध में लगभग 5 ह अमोनियम क्लोराइड लें। 2ण् चीनी प्याली को त्रिापाद स्टैण्ड पर रखी किसी लोहे की जाली पर रख्िाये। 3ण् चीनी प्याली में रखे पदाथर् के ऊपर एक सापफ और शुष्क कीप उलटी कर रख दें। 4ण् अमोनिया क्लोराइड के नमूने युक्त चीनी प्याली को गरम करें ;चित्रा 2.2द्ध। 5ण् कीप की डंडी ;ेजमउद्ध से उत्पन्न होने वाली वाष्प बाहर आती है। क्या चीनी प्याली में कोइर् तरल पदाथर् बनता है? 6ण् नेसलर अभ्िाकमर्क ज्ञख्भ्हप्, में डुबोए हुए पिफल्टर पत्रा को कीप की नोंक के समीप लायें। पिफल्टर24पत्रा के रंग में क्या कोइर् परिवतर्न होता है? 7ण् एक आद्रर् नीला लिटमस पत्रा कीप के किनारे के निकट लायें। रंग में होने वाले परिवतर्न का अवलोकन करें। अमोनिया और हाइड्रोजन क्लोराइड गैस का मिश्रण उलटी कीप चीनी प्याली बनर्र चित्रा 2.1: खुले पात्रा में अमोनियम क्लोराइड को गरम करना प्रेक्षण क्रम सं.प्रयोग प्रेक्षण निष्कषर् 1ण् नेसलर अभ्िाकमर्क परीक्षण 2ण् लिटमस पत्रा परीक्षण परिणाम एवं परिचचार् कीप से उत्सजिर्त वाष्पों पर नेसलर अभ्िाकमर्क परीक्षण और लिटमस पत्रा परीक्षण के प्रेक्षणों से क्रमशः अमोनिया और हाइड्रोजन क्लोराइड गैसों की उपस्िथति का निष्कषर् निकालें। अब आप समेकन करें कि अमोनिया क्लोराइड को जब खुले पात्रा मंे गरम किया जाता है तो यह अपघटित होकर अमोनिया और हाइड्रोजन क्लोराइड गैस देता है। सावधानियाँ ऽ जब अिाकांश अमोनियम क्लोराइड अपघटित हो जाए तो तापन रोक देना चाहिये। ऽ यदि यह अभ्िािया एक बंद पात्रा में हो, तो हाइड्रोजन क्लोराइड और अमोनिया गैसों का निकास नहीं हो पाता। ;यह अभ्िािया कीप की डंडी के ऊपरी सिरे को रूइर् से अच्छी तरह बंद कर, सम्पन्न करायी जा सकती है।द्ध ये गैसे पुनः मिलकर अमोनियम क्लोराइड ;छभ्ब्सद्ध बना4देती है। ठंडा करेंछभ्3 ;हद्ध ़ भ्ब्स ;हद्ध ⎯⎯→ छभ्4ब्स ;ेद्ध इस प्रकार, बंद पात्रा मंे अमोनियम क्लोराइड, अमोनिया और हाइड्रोजन क्लोराइड के मध्य एक साम्य स्थापित हो जाता है। इस अभ्िािया में ठोस अमोनियम क्लोराइड, बिना द्रव में परिवतिर्तहुए, सीधा गैसीय अवस्था में परिवतिर्त हो जाता है। इस प्रकार यह ऊध्वर्पातन अभ्िािया है। ऽ नेस्लर अभ्िाकमर्क बनाना: 10 ह पोटैश्िायम आयोडाइड को 10 उस् जल मंे विलेय करें ;विलयन ।द्ध। इसी प्रकार 6 ह मवर्फरी ;प्प्द्ध क्लोराइड को 100 उस् जल में विलेय करें ;विलयन ठद्ध। जल में 45 ह पोटैश्िायम हाइड्राॅक्साइड विलय करें और उसे 80 उस् तक तनु कर लें ;विलयन ब्द्ध। विलयन ठ को बूँद - बूँद कर विलयन । में मिलाये, जब तक एक हल्का स्थाइर् अवक्षेप नहीं बन जाता। इसमंे विलयन ब् मिलायें और जल मिलाकर 200 उस् तक तनुकर लें। अच्छी तरह हिलाकर विलयन को रात भर छोड़े दें और पिफर ऊपरी सापफ विलयन को निखार लें। उद्देश्य रासायनिक अभ्िाियाओं के समय ताप में परिवतर्न का मापन करना और निष्कषर् निकालना कि अभ्िाियाऊष्माशोषी है या ऊष्माक्षेपी। सि(ांत अिाकांश रासायनिक अभ्िाियाओं में ऊजार् परिवतर्न होता है। वुफछ अभ्िाियाओं में ऊजार्, ऊष्मा के रूप मेंअवशोष्िात होती है जबकि वुफछ में उत्सजिर्त होती है। रासायनिक अभ्िाियाएं, जिनमें ऊष्मा का अवशोषण होताहै, ऊष्माशोषी अभ्िाियाएं कहलाती हैं और वे जिनमें ऊष्मा उत्सजिर्त होती है, ऊष्माक्षेपी अभ्िाियाएं कहलातीहैं। अभ्िािया मिश्रण के ताप मंे परिवतर्न का मापन कर, अभ्िािया के ऊष्माक्षेपी या ऊष्माशोषी होने की पहचान की जा सकती है। इस प्रयोग में, निम्नलिख्िात रासायनिक अभ्िाियाएं सम्पन्न हो सकती हैंμ ;पद्ध छंव्भ् ;ंुद्ध ़ भ्ब्स ;हद्ध ⎯→ छंब्स ;हद्ध ़ भ्2व् ;सद्धय तथा ;पपद्धठं;व्भ्द्धण्8भ्व् ;ेद्ध ़ 2छभ्ब्स ;ेद्ध ⎯→ ठंब्स ;ंुद्ध ़ 10भ्व् ;सद्ध ़ छभ्;ंुद्धण्224223 आवश्यक सामग्री सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, अमोनियम क्लोराइड ;ठोसद्ध और बेरियम हाइड्राॅक्साइड ;ठोसद्ध, तुला, वाच ग्लास, चार बीकर ;100 उस्द्धए एक तापमापी ;दृ10 ह्ब् से110 ह्ब्द्ध और एक काँच की छड़। कायर्वििा 1ण् चारों सापफ बीकरों को बीकर 1, 2, 3 और 4 के रूप में लेबल करें। 2ण् सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन का 20 उस् बीकर संख्या 1 में, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का 20 उस् बीकर संख्या 2 मेंऋ बेरियम हाइड्राॅक्साइड का 15.75 ह बीकर संख्या 3 में, तथा अमोनियम क्लोराइड का 5ण्35 ह बीकर संख्या 4 में लें। 3ण् एक के बाद एक सभी बीकरों में वुफछ समय के लिये एक तापमापी डालें और उनका ताप अभ्िालेख्िात करें तथा कमरे का ताप भी अभ्िालेख्िात करें। 4ण् सोडियम हाइड्राॅॅक्साइड विलयन की अभ्िािया हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ देखने हेतु बीकर संख्या 1 की सामग्री को बीकर संख्या 2 में डाल दें। इस अभ्िािया मिश्रण में तुरंत तापमापी डालें। इसका प्रारम्िभक ताप पठन नोट करें तथा अभ्िालेख्िात करें। एक काँच की छड़ द्वारा अभ्िािया मिश्रण को ध्ीरे - ध्ीरे हिलायें तथा तापमापी द्वारा अंतिम ताप नोट एवं अभ्िालेख्िात करें। पाठ्यांक लिखने के बाद तापमापी और काँच की छड़ को धो लें। 5ण् इसी प्रकार, बेरियम हाइड्राॅक्साइड विलयन की अभ्िािया अमोनियम क्लोराइड के देखने हेतु बीकर संख्या 3 की सामग्री को बीकर संख्या 4 में डाल दें। इस अभ्िािया मिश्रण में तुरंत तापमापी डालें। इसका प्रारम्िभक ताप नोट एवं अभ्िालेख्िात करें। एक काँच की छड़ से धीरे - धीरे अभ्िािया मिश्रण को भली - भाँति हिलायें। तापमापी द्वारा अंतिम ताप नोट एवं अभ्िालेख्िात करें। प्रेेक्षण पण् सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन का ताप त्र ऋऋऋ °ब् त्रऋऋऋ ज्ञ पपण् हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का ताप त्र ऋऋऋ °ब् त्रऋऋऋ ज्ञ पपपण् बेरियम हाइड्राॅक्साइड विलयन का ताप त्र ऋऋऋ °ब् त्रऋऋऋ ज्ञ पअण् अमोनियम क्लोराइड का ताप त्र ऋऋऋ °ब् त्रऋऋऋ ज्ञ अण् कमरे का ताप त्र ऋऋऋ °ब् त्रऋऋऋ ज्ञ क्रम अभ्िािया के अभ्िािया मिश्रण का अभ्िािया मिश्रण का ताप में परिवतर्न सं.अभ्िाकमर्क प्रारम्िभक ताप, θ1 अंतिम ताप, θ2 ;°ब्द्ध ;°ब्द्ध θ2 दृ θ1 ;°ब्द्ध 1ण् छंव्भ् ़ भ्ब्स 2ण् ठं;व्भ्2द्धण्8भ्2व् ़ 2छभ्4ब्स परिणाम एवं परिचचार् ताप परिवतर्न के प्रेक्षणोें के आधर पर दोनों रासायनिक अभ्िाियाओं की प्रकृति ;ऊष्माक्षेपी या ऊष्माशोषीद्ध संबंधी निष्कषर् निकालिये। सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन और हाइड्रोजन क्लोराइड अम्ल के मध्य अभ्िािया ऋऋऋऋऋऋऋऋऋ ;ऊष्माक्षेपी/ऊष्माशोषीद्ध हैऋ और बेरियम हाइड्राॅक्साइड विलयन और अमोनियम क्लोराइड के मध्य अभ्िािया ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है ;ऊष्माक्षेपी या ऊष्माशोषीद्ध। सावधानियाँ ऽ अभ्िािया मिश्रण को बहुत ध्ीरे - ध्ीरे से हिलायें, ताकि हिलाते समय ऊष्मा की हानि न हो। ऽ तापमापी या काँच की छड़ को दूसरे अभ्िाकारक या अभ्िािया मिश्रण में डालने से पहले धो लें। उद्देश्य हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की जिंक धातु, सोडियम काबोर्नेट और सोडियम हाइड्राॅक्साइड के साथ अभ्िाियाओं का अध्ययन करना। सि(ांत कोइर् अम्ल ;भ्ब्सद्ध ;पद्ध जिंक धातु के साथ अभ्िािया कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता हैऋ ;पपद्ध काबोर्नेटों और हाइड्रोजन काबोर्नेटों के साथ काबर्न डाइआॅक्साइड गैस बनाता हैऋ ;पपपद्ध सोडियम हाइड्राॅक्साइड ;क्षारकद्ध के साथ अभ्िािया कर उसे उदासीन करता है तथा सोडियम क्लोराइड ;लवणद्ध और जल देता है। र्द ;ेद्ध ़ 2भ्ब्स ;ंुद्ध ⎯→ र्दब्स2 ;ंुद्ध ़ भ्2 ;हद्ध छं2ब्व्3 ;ेद्ध ़ 2भ्ब्स ;ंुद्ध ⎯→ 2छंब्स ;ंुद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध ़ ब्व्2 ;हद्ध भ्ब्स ;ंुद्ध ़ छंव्भ् ;ंुद्ध ⎯→ छंब्स ;ंुद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध आवश्यक सामग्री जिंक धातु कण्िाकाएं, तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, सोडियम काबोर्नेट, सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन, ताजा बनाया चूने का पानी, लाल और नीले लिटमस पत्रा, आसुत जल, चार परखनलियाँ, एक निकास नली, परखनली पर लगाने हेतु एक छिद्र वाला कावर्फ और एक रेगमाल का टुकड़ा। कायर्वििा ;पद्ध जिंक धातु से अभ्िािया 1ण् एक स्वच्छ और शुष्क परखनली में एक स्वच्छ जिंक कण्िाका लें। 2ण् इसमें लगभग 5 उस् तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालें। 3ण् अभ्िािया मिश्रण से बुदबुदाहट बाहर निकलेगी। 4ण् अभ्िालेख्िात करें। प्रेक्षण क्रम संप्रयोग प्रेक्षण 1ण् लिटमस परीक्षण - लाल लिटमस पर ियानीले लिटमस पर िया ;पपद्ध सोडियम काबोर्नेट से अभ्िािया 1ण् एक स्वच्छ और शुष्क परखनली मंे लगभग 1ह सोडियम काबोर्नेट लें। 2ण् इसमें लगभग 2 उस् तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलायें। 3ए अभ्िािया मिश्रण से बुदबुदाहट आनी प्रारम्भ हो जाती है। 4ण् एक कावर्फ के बीच से एक निकास नली को परखनली के मुँह पर लगायें और उत्सजिर्त होने वाली गैस को ताजा बनाये गये चूने के पानी में प्रवाहित करें। ;चित्रा 4.1द्ध देखें, क्या होता है? क्या आप इसके बुलबुले चूने के पानी में देखते हैं? क्या यह दूिाया हो जाता है?े यदि हाँ, तो यह काबर्न डाइआॅक्साइड की उपस्िथति दशार्ता है। प्रेक्षण क्रम सं.प्रयोग प्रेक्षण 1ण् चूने के पानी द्वारा परीक्षण ;पपपद्ध सोडियम हाइड्राॅक्साइड से अभ्िािया 1ण् 2ण् इसे ठ चिित करें।3ण् तनु भ्ब्स युक्त परखनली । में एक नीला लिटमस पत्रा डुबोए। आप क्या देखते हैं? क्या आप पाते है कि नीला लिटमस पत्रा लाल हो जाता है। 4ण् इसी प्रकार, एक लाल लिटमस पत्रा परखनली ठ में डुबोयें। क्या यह अब नीला हो जाता है? 5ण् परखनली ठ में रखे तनु छंव्भ् में परखनली । से बूँद - बूँद कर तनु भ्ब्स मिलायें। 6ण् मिश्रण को धीरे परंतु लगातार हिलायें और परखनली ठ में प्रत्येक बार लिटमस पत्रा डुबोकर परिवतर्न देखें। ;इस कायर् हेतु आप कौन - सा लिटमस पत्रा उपयोग में लायेंगे?द्ध 7ण् परखनली । से तनु भ्ब्स परखनली ठ के 10ः छंव्भ् में मिलाते रहें, जब तक परखनली ठ में अभ्िािया मिश्रण उदासीन न हो जाए। इस मिश्रण की उदासीनता को क्रम से लाल और नीला लिटमस पत्रा डुबोकर सुनिश्िचत करें। 8ण् परखनली को स्पशर् कर ताप का अनुभव करें। आप इसे गरम पाते हैं या ठण्डा? इसका क्या अथर् है। प्रेक्षण क्रम सं.ियाकलाप प्रेक्षण निष्कषर् 1ण् लिटमस पत्रा परीक्षण - ;ंद्ध प्रयोग के प्रारम्भ में, परखनली । में नीला लिटमस पत्रा डुबोयें। परखनली ठ में लाल लिटमस पत्रा डुबोयें। ;इद्धपरखनली ठ से तनु भ्ब्स की द बूँदे परखनली ठ के तनु छंव्भ् में डालने के पश्चात्, पण् द त्र ऋऋऋ य लाल लिटमस पत्रा पर िया नीले लिटमस पत्रा पर िया पपण् द त्र ऋऋऋ य लाल लिटमस पत्रा पर िया नीले लिटमस पत्रा पर िया पपपण् द त्रऋऋऋ य लाल लिटमस पत्रा पर िया नीले लिटमस पत्रा पर िया पअण् द त्र ऋऋऋ य लाल लिटमस पत्रा पर िया नीले लिटमस पत्रा पर िया ण्ऋऋ द त्र ऋऋऋ य लाल लिटमस पत्रा पर िया परिवतर्न नहीं परखनी ठ में विलयननीले लिटमस पत्रा पर िया परिवतर्न नहीं उदासीन हो गया है। 2ण् तापीय परिवतर्न - लिटमस परीक्षण के बाद, परखनली को बाहर से ठंडा/गरम अभ्िािया स्पशर् करें। अभ्िािया में ऊष्मा ऊष्माशोषी/ अवशोष्िात/उत्सजिर्त हुइर्। ऊष्माक्षेपी है। परिणाम एवं परिचचार् इस प्रयोग में सभी अभ्िाियाओं के प्रत्येक परीक्षण का उल्लेख करें और उनके निष्पादन की परिचचार् कीजिय।ेसावधानियाँ ऽ हाइड्रोजन का परीक्षण सदैव गैस के बहुत कम आयतन के साथ करें। ऽ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयनों का हस्तन ध्यान से करें। ऽ विलयनों और अभ्िािया मिश्रण को बिना छलकायें सावधनीपूवर्क हिलायें। ऽ दहन परीक्षण करते समय सावधान रहना चाहिये। उद्देश्य सोडियम हाइड्राॅक्साइड की ;पद्ध एल्युमिनियम धातु और ;पपद्ध हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभ्िाियाओं का अध्ययन करना। सि(ांत सोडियम हाइड्राॅक्साइड एक क्षार है। यह एल्युमिनियम धातु से अभ्िािया कर हाइड्रोजन गैस बनाता है। यह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को भी उदासीन कर सोडियम क्लोराइड लवण और जल बनाता है। 2छंव्भ् ;ंुद्ध ़ 2।स ;ेद्ध ़ 2भ्व् ;सद्ध 2छं।सव् ;ंुद्ध ़ भ्;हद्ध2⎯⎯→22 छंव्भ् ;ंुद्ध ़ भ्ब्स ;ंुद्ध ⎯⎯→ छंब्स ;ंुद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध आवश्यक सामग्री तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन, एल्युमिनियम धातु के वुफछ टुकड़े, लाल और नीले लिटमस पत्रा, एक छोटा मापक सिलेण्डर ;100 उस्द्धए तीन परखनलियाँ, और एक मोमबत्ती। कायर्वििा ;पद्ध एल्युमिनियम धातु से अभ्िािया 1ण् एक छोटा एल्युमिनियम का टुकड़ा लें और इसे एक स्वच्छ और शुष्क परखनली में रखें। 2ण् इसमें लगभग 5 उस् सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन डालें। 3ण् अंिभिया मिश्रण से निकलने वाली बुदबुदाहट को देखें। उत्सजिर्त गैस के रंग को देखें। 4ण् उत्सजिर्त गैस को हाथ द्वारा हल्के से पंखा कर अपनी नाक की ओर ले जाएं और उसका गंध परीक्षण करें। 5ण् परखनली के मुँह पर क्रमशः गीला, नीला और लाल लिटमस पत्रा ले जाएं। 6ण् जलती हुइर् मोमबत्ती परखनली के मुँह के पास लाकर दहन परीक्षण करें। क्या उत्सजिर्त गैस ऊष्माक्षेपी रूप से जलकर जल उत्पन्न करती है? प्रेक्षण क्रम सं.परीक्षण प्रयोग प्रेक्षण निष्कषर् 1ण् रंग मुक्त गैस का रंग देखें। 2ण् गंध अपने हाथ से हल्के से पंखाकर गैस अपनी नाक की ओर ले जाएं। 3ण् लिटमस परखनली के मुँह के निकट क्रमशः गीला, परीक्षण नीला और लाल लिटमस पत्रा ले जाएं। 4ण् दहन परखनली के मुँह के निकट एक जलती परीक्षण हुइर् मोमबत्तती ले जाएं। ;पपद्ध हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभ्िािया प्रयोग 4 की तरह इस प्रयोग को किया जाना चाहिये। परिणाम एवं परिचचार् इस प्रयोग में सभी अभ्िाियाओं के प्रत्येक परीक्षण का उल्लेख करें और उनके निष्पादन की परिचचार् कीजिये। सावधानियाँ ऽ हाइड्रोजन का परीक्षण सदैव गैस के बहुत कम आयतन के साथ करें। ऽ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयनों का हस्तन ध्यान से करें। ऽ विलयनों और अभ्िािया मिश्रण को बिना छलकाये सावधनीपूवर्क हिलायें। ऽ दहन परीक्षण करते समय सावधान रहना चाहिये। उद्देश्य यह दशार्ना कि अम्ल, क्षारक और लवण विद्युत - अपघट्य हैं। सि(ांत एक विद्युत - अपघट्य वह यौगिक है जो विलयन अथवा संगलित अवस्था में विद्य़ुतधारा का चालन करता है और साथ ही उससे अपघटित भी हो जाता है। विद्युत - अपघट्य में धारा का चालन आयनों द्वारा होता है न कि इलेक्ट्राॅनों द्वारा, जैसाकि धातुओं में होता है। विद्युत - अपघट्य अम्ल, क्षारक या लवण हो सकते हैं। इस प्रयोग मंे हम इसे एक विद्युत परिपथ में सातत्य परीक्षण ;बवदजपदनपजल जमेजद्ध द्वारा जानेंगे, जिसमें एक अम्ल या एक क्षारक या एक लवण विलयन उस परिपथ के एक भाग के रूप में होता है। आवश्यक सामग्री हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ;लगभग 5 उस्द्ध, सोडियम हाइड्राॅक्साइड के टुकड़े ;लगभग 100 उहद्ध, सोडियम क्लोराइड ;लगभग 5 हद्ध, आसुत जल, चार बीकर ;250 उस्द्ध, 1ण्5 ट वाले चार सेल मय सेल होल्डर ;या 6 ट की एक बैटरी या एक बैटरी एलिमिनेटरद्ध, एक रबड़ कावर्फ, दो लोहे की कील, एक प्लग वुंफजी, संयोजी तार और रेगमाल का टुकड़ा। कायर्वििा 1ण् रेगमाल का उपयोग करके संयोजी तारों के सिरों से विद्युुत - रोधक परतेें हटा दें। 2ण् एक शुष्क रबड़ कावर्फ लें और इसमें दो लोहे की कील वुफछ दूरी रखकर लगा दें। ये दो कील, दो इलेक्ट्रोड के रूप में कायर् करेंगे। इन कीलों को अलग - अलग दो संयोजी तारों से भी जोड़ दें। 3ण् एक विद्युत परिपथ मंे सातत्य परीक्षण करने हेतु एक परिपथ आरेख बनायें जिसके अंश के रूप में एक अम्ल या एक क्षारक या एक लवण का विलयन होता है ;देखें चित्रा 6.1द्ध। ध्यान दें कि किस प्रकार विभ्िान्न घटक, जैसे शुष्क सेल ;या बैटरी या बैटरी निराकरकद्ध, टाॅचर् बल्ब, एक प्लग वंुफजी जो विलयन परिपथ में जुड़े हुए हैं। 4ण् चार बीकरों ;250 उस्द्ध में प्रत्येक में लगभग 100 उह आसुत जल लें। इन्हें क्रमशः बीकर ।ए ठए ब् और क् चिित करें। 5ण्बीकर । में अम्लीय विलयन प्राप्त करने हेतु आसुत जल में लगभग पाँच बूँद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालें, बीकर ठ में क्षारकीय विलयन प्राप्त करने हेतु आसुत जल मंे 100 उह सोडियम हाइड्राॅक्साइड के टुकड़े डालें और सोडियम क्लोराइड लवण का विलयन प्राप्त करने हेतु बीकर ब् के आसुत जल में लगभग 2 - 3 ह सोडियम क्लोराइड लवण ;लगभग आधा चाय चम्मचद्ध मिलायें। बीकर क् के आसुत जल में वुफछ नहीं मिलायें। 6ण्विभ्िान्न घटकों को संयोजी तारों से जोड़कर विद्युत परिपथ व्यवस्िथत करें। रबड़ कावर्फ ;जिसमंे दो लोहे की कील लगी हो और परिपथ में जुड़े हुए हों।द्ध को किसी बीकर मंे नहीं डुबोयें। वंुफजी को प्लग में डालें। जाँच करें कि क्या टाॅचर् बल्ब जलता है? यह नहीं जलता। क्या इसका अथर् है कि विद्युत् परिपथ अभी भी पूणर् नहीं है या शुष्क रबड़ कावर्फ विद्युत् का चालन नहीं करता? प्लग से वुंफजी हटा दें। 7ण् तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मंे सातत्य परीक्षण करने हेतु, रबड़ कावर्फ को बीकर । में इस प्रकार रखें कि दोनों लोहे की कील आंश्िाक रूप से विलयन में डूबी रहें। 8ण् प्लग मंे वंुफजी डालें और परिपथ मंे धारा बहने दें, जिसका एक घटक तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के रूप में है। क्या अब बल्ब जलता है? हाँ, वह जलता है। इसका अथर् है कि अब विद्युत् परिपथ पूणर् है और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विद्युत का चालन करता है। अतः यह विद्युत् - अपघट्य है। अपना प्रेक्षण अभ्िालेख्िात करें। 9ण् वंुफजी को हटायें और बीकर । से रबड़ कावर्फ निकाल लें। रबड़ कावर्फ को धो लें और एक सापफ कपड़े का उपयोग कर उसे सुखा लें। 10ण् रबड़ कावर्फ को क्रम से बीकर ठए ब् और क् में डुबोकर क्रमशः तनु सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन, सोडियम क्लोराइड विलयन और आसुत जल के मध्य सातत्य परीक्षण को दोहराएं। प्रेक्षण क्रम. संप्रयोग प्रेक्षणनिष्कषर् विद्युत् सातत्य परीक्षण 1ण् बीकर ।रू तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विलयन बल्ब जला या नहीं? 2ण् बीकर ठरू तनु सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन बल्ब जला या नहीं? 3ण् बीकर ब्रू सोडियम क्लोराइड विलयन बल्ब जला या नहीं? 4ण् बीकर क्रू आसुत जल बल्ब जला या नहीं़? परिणाम एवं परिचचार् प्रेक्षणों से निष्कषर् निकालेें कि अम्ल, क्षारक और लवण विद्युत् - अपघट्य हैं। निम्नलिख्िात अभ्िाियाओं की परिचचार् कीजियेμ भ्ब्स ;ंुद्ध ⎯→ भ़् ;ंुद्ध ़ ब्सदृ ;ंुद्ध छंव्भ् ;ंुद्ध ⎯→ छं़ ;ंुद्ध़व्भ्दृ ;ंुद्धदृछंब्स ;ंुद्ध ⎯→ छं़ ;ंुद्ध ़ ब्स ;ंुद्धण् सावधानियाँ ऽ संयोजी तारों के सिरों को सापफ करना चाहिये और उस परिपथ के अन्य घटकों से दृढ़तापूवर्क जोड़ना चाहिये। ऽ आसुत जल में अम्लीय सांद्रता अत्यािाक तनु होनी चाहिये अन्यथा कील अम्ल से अभ्िािया प्रारम्भ कर देंगे। ऽ विद्युत् - सातत्य परीक्षण करते समय, कील आंश्िाक रूप से द्रव मंे डूबे होने चाहिये। ऽ प्रत्येक परीक्षण के उपरांत और दूसरे द्रव विलयन में डुबोने से पूवर् रबड़ कावर्फ को आवश्यक रूप से धोकर सुखा लेना चाहिये। ऽ प्रयोग संख्या 48 से 51 विद्युत् परिपथों वाले प्रेक्षणों से सम्ब( हैं। यह सुझाव है कि प्रयोग 6 को करने से पूवर् विद्याथ्िार्यों को प्रयोग संख्या 48 से 51 में से कोइर् एक प्रयोग करने की सलाह दी जाए। ऽ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विलयन के स्थान पर सल्फ्रयूरिक अम्ल विलयन भी उपयोग में लिया जा सकता है। उद्देश्य चभ् पत्रा का उपयोग कर, ठोस पदाथो± के विलयनों या पफलों के रस के नमूनों की चभ् ज्ञात करना। सि(ांत चभ् किसी विलयन की अम्लीय या क्षारकीय सामथ्यर् का माप होता है। यह किसी विलयन की हाइड्रोजन आयन सांद्रता के मापन हेतु पैमाना है। चभ् पैमाना 0 से 14 तक के स्केल पर बँटा होता है। 25ह् ब् ;298 ज्ञद्ध पर उदासीन विलयन का चभ् 7 होता है। चभ् पैमाने पर 7 से कम वाला मान अम्लीय विलयन दशार्ता है जबकि 7 से अिाक चभ् मान क्षारकीय विलयन दशार्ता है। सामान्यतः चभ् का लगभग मान ज्ञात करने हेतु सावर्त्रिाक सूचक से संसेचित ;पउचतमहदंजमकद्ध पत्रा का उपयोग किया जाता है। यह भ्िान्न चभ् पर भ्िान्न रंग दशार्ता है ख्चित्रा 7.1 ;इद्ध,। आवश्यक सामग्री परीक्षण विलयनों के नमूने ;ंद्ध एक तनु अम्ल ;भ्ब्स या भ्2ैव्4 या ब्भ्3ब्व्व्भ् इत्यादिद्धय ;इद्ध एक तनु क्षारक ;छंव्भ् या ज्ञव्भ्द्धय ;बद्ध लवण ;जैसे छंब्सए छं2ब्व्3ए छभ्4ब्स इत्यादिद्धय 10 उस् आसुत जल में 1 ह लवणद्धऋ ;कद्ध मृदा जल निष्कषर् ;10 उस् आसुत जल में मृदा नमूने का 1 ह विलेय करें और छानकर मृदा जल निष्कषर् प्राप्त करेंद्ध और ;मद्ध पफल का रसऋ पाँच परखनलियाँ और एक परखनली स्टैण्ड, एक मापक सिलिण्डर ;10 उस्द्ध चभ् पत्रा, और एक काँच की छड़। कायर्वििा 1ण् एक परखनली स्टैण्ड में पाँच स्वच्छ परखनलियाँ लगायें। परिणाम एवं परिचचार् चूँकि चभ्ए भ़् सांद्रता पर निभर्र करती है और एक जलीय विलयन में भ़् और व्भ्दृआयन सांद्रताएं परस्पर सम्बंिात रहती हैं, अतः प्रत्येक अम्लीय और क्षारकीय विलयन भ्िान्न चभ् पर भ्िान्न रंग दशार्ता है। सावधानियाँ ऽ परीक्षण हेतु नमूने के विलयन ताशे बनाने चाहिये और पफलों के रस के नमूने भी ताशे होने चाहिये। ऽ एक नमूने के लिये उपयोग में लायी गयी काँच की छड़ जल द्वारा सापफ करने के बाद ही दूसरे नमूने हेतु उपयोग में ली जानी चाहिये। उद्देश्य दिये गये रसायनों के नमूनों में से विरंजक चूणर् की पहचान करना। सि(ांत विरंजक चूणर् वैफल्िसयम आॅक्सोक्लोराइड ;ब्ंव्ब्स2 अथवा ब्ली¯चग पाउडरद्ध होता है। इसकी िया तनु अम्ल की थोड़ी - सी मात्रा से करवाने पर यह हाइपोक्लोरस अम्ल बनाता है जो सरलतापूवर्क आॅक्सीजन ;नवजात आॅक्सीजन कहलाती हैद्ध देता है और इस प्रकार यह आॅक्सीकारक और विरंजक के रूप में कायर् करता है। 2ब्ंव्ब्स2 ;ेद्ध ़ भ्2ैव्4 ;ंुद्ध ⎯→ ब्ंैव्4 ;ंुद्ध ़ ब्ंब्स2 ;ंुद्ध ़ 2भ्ब्सव् ;ंुद्ध भ्ब्सव् → भ्ब्स़ ख्व्, ;नवजात आक्ॅसीजनद्ध इस प्रयोग में हम दिये गये रसायनों के नमूनों ;माना चारद्ध से विरंजक चूणर् की पहचान करने में उक्त अभ्िािया का उपयोग करेंगे। आवश्यक सामग्री दिये गये चार नमूने - विरंजक चूणर्, सोडियम क्लोराइड, वैफल्िसयम क्लोराइड और अमोनियम क्लोराइड;अथवा कोइर् अन्य वैकल्िपक लवणद्ध, तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल, पूफलों की पंखुडि़याँ या रंगीन सूती कपड़े के छोटे टुकड़े, आठ बीकर ;100 उस्द्धए एक मापक सिलिण्डर ;100 उस्द्धए और एक काँच की छड़। कायर्वििा 1ण् चार बीकरों में, दिये गये चार रसायनों के प्रत्येक नमूने के लगभग 50 उस्ए 5ः विलयन ;आयतन सेद्ध तैयार करें। इन बीकरों को ।ए ठए ब् और क् चिित करें। 2ण् शेष चार बीकर लेकर प्रत्येक में लगभग 20 उस् तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल भरें। इन्हें म्ए थ्ए ळ और भ् चिित करें। 3ण् रंगीन कपड़े का एक छोटा टुकड़ा या पूफल की पंखुड़ी बीकर । में डुबोयें। 4ण् बीकर । से कपड़ा या पूफल की पंखुड़ी बाहर निकालें और इसे बीकर म् में रखे तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल में डाल दें। इसे काँच की छड़ द्वारा ध्ीरे - ध्ीरे हिलायें। क्या सूती कपड़ा या पूफल की पंखुड़ी रंगहीन हो जाती है? अपना प्रेक्षण अभ्िालेख्िात करें। 5ण् पद 3 और 4 को दिये गये रसायनों के अन्य तीन नमूनों के साथ और तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ दोहरायें और अपने प्रेक्षण अभ्िालेख्िात करें। प्रेक्षण क्रम नमूना नमूने के रसायन के विलयन में कपड़े या पूफल की पंखुड़ी का रंगसंडुबोये कपड़े या पूफल की ;नमूने के विलयन में डुबोकर पिफर तनुपंखुड़ी का रंग सल्फ्रयूरिक अम्ल में डुबोने परद्ध 1ण् । 2ण् ठ 3ण् ब् 4ण् क् परिणाम एवं परिचचार् प्रेक्षणों से निष्कषर् निकालें कि कौन - सा रसायनिक विलयन सूती कपड़े या पूफल की पंखुड़ी को रंगहीन करता है। जो रसायन रंगहीन करता है, वह विरंजक िया दशार्ता है। इस प्रकार विरंजक चूणर् को पहचाना जा सकता है। इस प्रयोग में बीकर ऋऋऋऋऋऋऋ का विलयन विरंजक अभ्िािया दशार्ता है और इसलिये उस बीकर के विलयन का रसायन विरंजक चूणर् है। हाइपोक्लोरस अम्ल ;भ्ब्सव्द्ध के अपघटन से प्राप्त नवजात आॅक्सीजन विरंजक िया का कारण है। सावधानियाँ ऽ नमूने के विलयनों और सल्फ्रयूरिक अम्ल का हस्तन ध्यान से करें। ये आपकी त्वचा को स्पशर् नहीं करने चाहिए। ऽ विलयन के एक नमूने के लिये उपयोग में ली गयी काँच की छड़ जल से धोने के बाद ही विलयन के दूसरे - नमूने हेतु काम में लेना चाहिए। ऽ रसायनों के नमूनों में, सल्पफाइट ; ैव्32− द्ध और हाइड्रोजन सल्पफाइट ; भ्ैव्3.द्ध नहीं देने चाहिये, क्योंकि ये रसायन तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल से अभ्िािया कर सल्पफर डाइआॅक्साइड गैस उत्पन्न करती है जो अस्थाइर् विरंजक कमर्क की भाँति कायर् करती है। प्रयोग 9 उद्देश्य दिये गये रसायनों के नमूनों से धावन सोडा या खाने का सोडा की पहचान करना। सि(ांत धावन सोडा ;छंब्व्ण्10भ्व्द्ध और खाने का सोडा ;मुख्य रूप से छंभ्ब्व्द्ध सपेफद ठोस पदाथर् हैं।2323इनके जलीय विलयन क्षारकीय होते हैं और लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। काबोर्नेट और हाइड्रोजन काबोर्नेट तनु अम्लों से अभ्िािया करते हैं और काबर्न डाइआॅक्साइड गैस उत्पन्न करते हैं, जो चूने के पानी को दूिाया कर देती है। 2.ब्व् ;ंुद्ध़भ् व्; द्ध। भ् ब्व् ;ंुद्ध़2व्भ् ;ंुद्ध32 23 दृभ्ब्व् ;ंुद्ध ़ भ्व् ;सद्ध ⎯→ भ्ब्व् ;ंुद्ध ़ व्भ्दृ ;ंुद्ध3223छंब्व् ;ेद्ध ़ 2भ्ब्स ;ंुद्ध ⎯→ 2छंब्स ;ंुद्ध ़ भ्व् ;सद्ध ़ ब्व् ;हद्ध2322छंभ्ब्व्3 ;ेद्ध ़ 2भ्ब्स ;ंुद्ध ⎯→ 2छंब्स ;ंुद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध ़ ब्व्2 ;हद्ध ब्ं;व्भ्द्ध2 ;ंुद्ध ़ ब्व्2 ;हद्ध ⎯→ ब्ंब्व्3 ;ेद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध चूने का पानी दूिाया चूने के पानी में ब्व्2 आध्िक्य मात्रा में प्रवाहित करने पर वैफल्िसयम हाइड्रोजन काबोर्नेट बनता है। यह जल मंे विलेय होता है और रंगहीन विलयन बनाता है।ब्ंब्व्3 ;ेद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध ़ ब्व्2 ;हद्ध ⎯→ ब्ं;भ्ब्व्3 ;ंुद्धद्ध2 आवश्यक सामग्री नमूने - सोडियम काबोर्नेट ;धावन सोडाद्ध, सोडियम हाइड्रोजन काबोर्नेट ;खाने का सोडाद्ध, अमोनियम प्रेक्षण क्रम नमूना रंग जल में लाल लिटमस तनु भ्ब्स चूने का पानीसंविलेयता पर िया अम्ल की िया ;विलेय/ ;नीला हो जाता ;बुदबुदाहट देखी ;दूिाया होता अविलेयद्ध है या नहींद्ध गयी या नहींद्ध है या नहींद्ध 1ण् । 2ण् ठ 3ण् ब् 4ण् क् परिणाम एवं परिचचार् परीक्षण के लिये दिये गये नमूनों मंे धावन सोडा अथवा खाने के सोडे की पहचान हेतु प्रेक्षणों से निष्कषर् निकालें। दिये गये लिटमस पत्रा और चूने के पानी के परीक्षणों की परिचचार् कीजिये। परखनली ऋऋऋ का नमूना धावन सोडा/खाने का सोडा है। सावधानियाँ ऽ लवण के विलयन में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बूँद - बूँद कर मिलायें। यदि तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को ध्ीरे - ध्ीरे नहीं मिलाने पर एक तीव्र अभ्िािया हो सकती है और अभ्िािया मिश्रण, अभ्िािया नली से निकल कर चूने के पानी में जा सकता है। ऽ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और धावन सोडे का हस्तन ध्यान से करें। ये पदाथर् आपकी त्वचा को स्पशर् न करें। ऽ चूने के पानी के परीक्षण हेतु ताशा बना चूने का पानी उपयोग में लेना चाहिये। उद्देश्य यह दशार्ना कि काॅपर सल्पेफट के िस्टलों ;ब्नैव्4ए 5भ्2व्द्ध में िस्टलीय जल होता है। सि(ांत काॅपर सल्पेफट के नीले िस्टलों में िस्टलीय जल होता है। ये िस्टल गरम करने पर एक विश्िाष्ट तापपर िस्टल जल का त्याग कर निजर्लीकृत हो जाते हैं और इनका रंग भी परिवतिर्त हो जाता है। 100ह्ब् 250ह्ब्ब्नैव् ण्5भ् व् ब्नैव् ण्भ् व् ब्नैव्42 42 4 नीला नीलाभ श्वेत श्वेत यदि निजर्लीकृत काॅपर सल्पेफट ठोस पदाथर् को वायु में ठंडा किया जाए, तो यह वायुमण्डल से जल के अणु प्राप्त कर नीला रंग पुनः प्राप्त कर लेता है। ब्नैव्4 ़ 5भ्2व् ⎯→ ब्नैव्4ण्5भ्2व् श्वेत वायुमण्डल से नीला आवश्यक सामग्री स्पैचुला, वाच - ग्लास, काॅपर सल्पेफट, और एक बनर्र। कायर्वििा 1ण् एक स्पैचुला में काॅपर सल्पेफट ;ब्नैव्4ण्5भ्2व्द्ध के वुफछ िस्टल लें। 2ण् स्पैचुला को सीधे बनर्र की ज्वाला पर रखकर इन िस्टलों को गरम करें। 3ण् गरम करते समय काॅपर सल्पेफट िस्टलों के रंग में होने वाले परिवतर्न को नोट करें। क्या यह नीलाभ - श्वेत रंग दशार्ता है? यदि हाँ, तो िस्टलों को वुफछ समय और गरम करें। वुफछ समय बाद जब ताप 250 °ब् के पास पहुँच जाता है तो काॅपर सल्पेफट िस्टल श्वेत दिखना प्रारम्भ हो जाते हैं। 4ण् जब ये पूणर् श्वेत हो जाएं तो गरम करना बंद कर दें। 5ण् स्पैचुला की सामग्री ;श्वेत चूणर्द्ध को वाच - ग्लास में स्थानांतरित कर दें। 6ण् वाच - ग्लास को वुफछ समय खुले वातावरण मंे रखेें और इसे ठंडा होने दें क्या आप काॅपर सल्पेफट िस्टलों के रंग में परिवतर्न पाते हैं? प्र्रेक्षण पण् गरम करने पर, काॅपर सल्पेफट िस्टलों का नीला रंग परिवतिर्त होकर पहले ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ और पिफर ऋऋऋऋऋऋऋऋऋ हो जाता है। पपण् ठंडा करने पर, काॅपर सल्पेफट का रंग पुनः ऋऋऋऋऋऋऋऋऋ हो जाता है। परिणाम एवं परिचचार् अपने प्रेक्षणों से निष्कषर् निकालें कि काॅपर सल्पेफट का जलयोजित नमूना गरम करने पर िस्टलन जल खोताहै और निजर्लीकृत हो जाता है, जिसका रंग श्वेत होता है। यह निजर्लीकृत काॅपर सल्पेफट ठंडा करने पर िस्टलन जल पुनः प्राप्त करता है और पुनः नीला हो जाता है। अतः जलयोजन और निजर्लीकरण, रंग परिवतर्न का यथाथर् कारण है। सावधानियाँ ऽ काॅपर सल्पेफट िस्टलों से युक्त स्पैचुला को बहुत सावधानीपूवर्क पकड़ना चाहिये। ऽ अपना चेहरा गमर् स्पैचुला के निकट ना लायें क्योंकि इससे आघात लग सकता है। उद्देश्य मैग्नीश्िायम, ¯जक, लोहा ;आयरनद्ध, टिन, सीसा, ताम्र ;ताँबाद्ध, एल्युमिनियम जैसी धतुओं ;कोइर् चारद्ध का उनके लवण विलयनों के साथ अन्योन्य िया का अध्ययन कर उन्हें उनकी अभ्िाियाशीलता के अनुसार व्यवस्िथत करना । सि(ांत विभ्िान्न धतुओं की रासायनिक अभ्िाकमर्कों के प्रति अभ्िाियाशीलता भ्िान्न - भ्िान्न होती है। वुफछ धतुएं अन्य धतुओं की अपेक्षा अध्िक ियाशील होती हैं। वे धतुएं जो आसानी से इलेक्ट्राॅनों को खोकर धनात्मक आयन बनाती हैं, अिाक अभ्िाियाशील होती हैं। धतुओं की आपेक्ष्िाक अभ्िाियाशीलताओं को ज्ञात करने के लिए विस्थापन - अभ्िाियाओं का प्रयोग किया जा सकता है। अिाक अभ्िाियाशील धतु कम अभ्िाियाशील धातु को उसके लवण - विलयन से विस्थापित कर देता है। उदाहरणाथर्, यदि ¯जक ;यशदद्ध धतु का कोइर् टुकड़ा काॅपर सल्पेफट के विलयन में डाला जाए तो ¯जक ताम्र को विस्थापित कर देगा। काॅपर सल्पेफट का नीले रंग का विलयन धीरे - धीरे पफीका पड़ जाएगा और अंत में जिंक सल्पफेट का रंगहीन विलयन प्राप्त होगा। र्द ;ेद्ध ़ ब्नैव्4 ;ंुद्ध ⎯→ र्दैव्4 ;ंुद्ध ़ ब्न ;ेद्ध नीला ;रंगहीनद्ध लालभूरा आवश्यक सामग्री ¯जक, ताम्र, लोहा तथा सीसा अथवा अन्य कोइर् उपयुक्त धतु ;प्रत्येक धतु के टुकड़े, जिंक सल्पफेट, काॅपर ;प्प्द्ध सल्पफेट, आयरन ;प्प्द्ध सल्पफेट, और लेड नाइट्रेट के विलयन, आसुत जल, चार बीकर ;100 उस्द्धए चार परखनलियाँ, मापन सिलिण्डर ;50 उस्द्धए परखनली स्टैण्ड तथा रेगमाल का टुकड़ा। कायर्विध्ि 1ण् ¯जक, ताम्र, लोहा और सीसे के टुकड़ों को लीजिए और उनके पृष्ठ को रेगमाल से सापफ कीजिए। 2ण् जिंक सल्पफेट, काॅपर ;प्प्द्ध सल्पेफट, आयरन सल्पेफट तथा लेड नाइट्रेट की 5ः सांद्रता का ;आयतन अनुसारद्ध 50 उस् विलयन, आसुत जल मंे अलग - अलग चार बीकरों में तैयार करें। इन बीकरों को ॅएग्एल् और र् द्वारा चिित करें। ध्यान रहे कि अन्योन्य िया का अध्ययन करने के लिए कि ये चार धतुओं के लवण विलयन हैं। 3ण् चार अलग - अलग परखनलियों में 10 उस् प्रत्येक विलयन को डालें और इन्हें ।ए ठए ब्ए तथा क् द्वारा चिित करें।चित्रा 11.1: जिंक सल्पेफट ;।द्ध में, काॅपर सल्पेफट ;ठद्ध मेंऋ आयरन सल्पेफट ;ब्द्ध में और लेड नाइट्रेट ;क्द्ध 4ण् चारों परखनलियों अथार्त् ।ए ठए ब्ए तथा क् विलयनों मंे डुबोया गया धातु ¯जक। में ¯जक धतु के टुकड़े डालें और होने वाले परिवतर्नों को देखें। 5ण् धतु के ताजे लवण विलयनों में अन्य धतुओं के टुकड़े डालकर विस्थापन - अभ्िाियाओं के लिए उपयुक्त प्रयोग को दोहराएं। प्रेक्षण क्रम धतु धतु विस्थापन और विलयन के रंग में परिवतर्न सं;विलयन जिनमें ¯जक धतु डाला गया हैद्ध जिंक सल्पेफट काॅपर ;प्प्द्ध आयरन ;प्प्द्ध लेड नाइट्रेट विलयन सल्पेफट विलयन सल्पेफट विलियन विलयन । ठ ब्क् 1ण् यशद 2ण् ताम्र 3ण् लोहा 4ण् सीसा परिणाम एवं परिचचार् प्रेक्षणों से प्राप्त परिणामों के आधार पर धातुओं को अभ्िाियाशीलताओं के ”ासमान क्रम में व्यवस्िथत कीजिए। सावधानियाँ ऽ धातुओं को लवण विलयन में डुबोने से पहले उन्हें रेगमाल से अच्छी तरह रगड़ कर सापफ कीजिए। ऽ चार लवण विलयनों के साथ किसी विश्िाष्ट धातु की अन्योन्य िया के प्रेक्षणोें के बाद परखनलियों को अच्छी तरह सापफ कीजिए। उद्देश्य विभ्िान्न ताप अवस्थाओं में धातुओं की जल के साथ अभ्िािया का अध्ययन करना। सि(ांत वुफछ धातु जल से अभ्िािया कर हाइड्राॅक्साइड अथवा आॅक्साइड बनाते हैं और हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं। पोटैश्िायम और सोडियम जैसे धातु ठंडे जल के साथ तीव्र रूप से अभ्िािया करते हैं। यह अभ्िािया इतनी तीव्र होती है कि मोचित हाइड्रोजन तत्काल प्रज्वलित हो जाती है। परंतु, सभी धातु जल के साथ अभ्िािया नहीं करते।2ज्ञ ;ेद्ध ़ 2भ्2व् ;सद्ध ⎯→ 2 ज्ञव्भ् ;ंुद्ध ़ भ्2 ;हद्ध 2छं ;ेद्ध ़ 2भ्2व् ;सद्ध ⎯→ 2 छंव्भ् ;ंुद्ध ़ भ्2 ;हद्ध यद्यपि वैफल्िसयम, ठंडे जल के साथ कम तीव्रता से अभ्िािया करता है। अथार्त्ब्ं ;ेद्ध ़ 2भ्2व् ;सद्ध ⎯→ ब्ं;व्भ्द्ध2 ;ंुद्ध ़ भ्2 ;हद्ध मैग्नीश्िायम ठंडे जल के साथ अभ्िािया नहीं करता। यह गमर् जल के साथ अभ्िािया कर मैग्नीश्िायम हाइड्राॅक्साइड और हाइड्रोजन देता है। एल्युमिनियम, ¯जक और लोहा जैसे धातु ठंडे जल के साथ अथवा गमर् जल के साथ अभ्िािया नहीं करते हैं परंतु वे भाप के साथ अभ्िािया कर, धातु आॅक्साइड और हाइड्रोजन बनाते हैं। 2।स ;ेद्ध ़ 3भ्2व् ;हद्ध ⎯→ ।स2व्3 ;ेद्ध ़ 3भ्2 ;हद्ध 3थ्म ;ेद्ध ़ 4भ्2व् ;हद्ध ⎯→ थ्म3व्4 ;ेद्ध ़ 4भ्2 ;हद्धण् सीसा, ताम्र, चांदी और स्वणर् जैसी धातुएँ, भाप के साथ भी अभ्िािया नहीं करतीं। इस प्रयोग में हम वुफछ धातुओं का जल के साथ विभ्िान्न अवस्थाओं में अभ्िाियाओं का अध्ययन करेंगे। आवश्यक सामग्री सामान साइज़्ा के धात्िवक पदाथो± ;सोडियम, मैग्नीश्िायम, ¯जक, सीसा, लोहा, एल्युमिनियम तथा ताम्रद्ध के प्रतिदशो± के छोटे - छोटे टुकड़े, आसुत जल, चैदह परखनलियाँ, दो परखनली स्टैण्ड, बनर्र, बीकर ;250 उस्द्धए गैस जार, क्वथन नली, प्रयोगशाला स्टैण्ड, निकास नली, द्रोणी ;जतवनहीद्ध, एकल छिद्र युक्त कावर्फ, कांच तंतु, तथा एक रेगमाल का टुकड़ा। कायर्विध्ि 1ण् सात परखनलियाँ लीजिए और प्रत्येक नली को ठंडे जल से आधा भरिए। इन्हें परखनली स्टैण्ड में रख्िाए। 2ण् इन सात परखनलियों में सापफ धात्िवक पदाथो± के छोटे - छोटे प्रतिदशर् के टुकड़े डालिए। 3ण् ठंडे जल के साथ अभ्िािया करने वाली धातुओं की पहचान करने के लिए परखनलियों का प्रेक्षण कीजिए। ये धातुएँ ठंडे जल के साथ कितनी तेजी के साथ अभ्िािया करती हैं? परखनलियों में मोचित हाइड्रोजन गैस के बुदबुदों की निमार्ण दर का सावधानी पूवर्क प्रेक्षण कर, विभ्िान्न जल से भीगा बनर्रपरखनलियों में अभ्िाियाशीलता काँच तंतु क्वथन नली निकास नलीधतुके क्रम की तुलना भी की जा सकती है। गैस जार4ण् बीकर में लगभग 100 उस् जल उबालिए। क्लैम्प 5ण् उन परखनलियों में से धात्िवक बनर्र टुकड़ों को निकाल लीजिए जिन्होंने उपयुर्क्त चरण 2 और 3 में ठंडे जल के साथ अभ्िािया नहीं द्रोणी की है। 6ण् धातु के इन टुकड़ों को गमर् जल चित्रा 12.1ः धातु पर भाप की िया से आधी भरी परखनलियों में डालिए। 7ण् परखनलियों का प्रेक्षण कर उन धातुओं को पहचानिए जिन्होंने गमर् जल के साथ अभ्िािया की है। यह भी देख्िाए कि कौन - सी धातु गमर् जल के साथ तेजी से अभ्िािया करती है? परखनलियों में मोचित हाइड्रोजन गैस के बुदबुदों का प्रेक्षण कर उनकी अभ्िाियाशीलता की तुलना कीजिए। 8ण् क्या आप ऐसा कोइर् धात्िवक पदाथर् पाते हैं जिसने ठंडे जल व गमर् जल मंे से किसी के साथ भी अभ्िािया नहीं की। परखनली में से ऐसे प्रतिदशो± को बाहर निकालिए। भ्2गैस 9ण् धात्िवक पदाथो± की ;चरण 8 से अभ्िानिधार्रितद्ध भाप के साथ अभ्िािया को देखने के लिए, चित्रा 12.1 में दशार्ए गए उपकरण को व्यवस्िथत कीजिए और उन पदाथो± की भाप के साथ हुइर् अभ्िािया का प्रेक्षण कीजिए। 10ण् धतुओं की विभ्िान्न अवस्थाओं के साथ अभ्िाियाशीलता के ”ासमान क्रम के आधर पर व्यवस्िथत कीजिए। प्रेक्षण पण् ठंडे जल अथवा गमर् जल अथवा भाप के साथ तीव्र्र, मंद अथवा कोइर् अभ्िािया नहीं के रूप में, अपने प्रेक्षणों को निम्नलिख्िात सारणी में लिख्िाए। क्रम सं.धातु अभ्िािया अवस्था ठंडा जल गमर् जल भाप 1ण् सोडियम 2ण् मैग्नीश्िायम 3ण् जिंक 4ण् सीसा 5ण् लोहा 6ण् एल्युमिनियम 7ण् ताम्र ;ताँबाद्ध परिणाम एवं परिचचार् ठंडे जल, गमर् जल तथा भाप के साथ अभ्िािया करने वाली धातुओं की अलग - अलग सूची बनाइए। प्रत्येक सूची मंे अभ्िाियाशीलता के ”ासमान क्रम में धातुओं को व्यवस्िथत कीजिए। उन धातुओं की भी सूची बनाइए जो जल के साथ अभ्िािया नहीं करती हैं। सावधानियाँ ऽ सोडियम धातु को सावधानीपूवर्क प्रहस्तन ;ींदकसमद्ध कीजिए। क्योंकि यह त्वचा की नमी तक से तीव्र अभ्िािया करता है। ऽ सोडियम के अतिरिक्त सभी धातुओं को रेगमाल के द्वारा रगड़ कर सापफ किया जाना चाहिए। ऽ प्रेक्षण अधीन धात्िवक पदाथो± के सभी प्रतिदशो± का उद्भासित पृष्ठ का क्षेत्रापफल समान होना चाहिए। उद्देश्य तनु अम्लों के साथ धातुओं की अभ्िािया का अध्ययन करना। सि(ांत अनेक धातुएँ तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ अभ्िािया कर लवण बनाते हैं। इस अभ्िािया मंे हाइड्रोजन गैस का निगर्मन होता है। धातुएँ अम्ल से हाइड्रोजन परमाणुओं को प्रतिस्थापित कर लवण बनाते हैं। अथार्त्ऋ धातु ़ तनु अम्ल ⎯→ धातु लवण ़ हाइड्रोजनडह ;ठोसद्ध ़ 2भ्ब्स ;जलीयद्ध ⎯→ डहब्स;जलीयद्ध ़ भ्;गैसद्ध22 2।स ;ठोसद्ध ़ 6भ्ब्स ;जलीयद्ध ⎯→ 2।सब्स;जलीयद्ध ़ 3भ्;गैसद्ध3 2 र्द ;ठोसद्ध ़ 2भ्ब्स ;जलीयद्ध ⎯→ र्दब्स2 ;जलीयद्ध ़ भ्2 ;गैसद्ध 2थ्म ;ठोसद्ध ़ 6भ्ब्स ;जलीयद्ध ⎯→ 2थ्मब्स;जलीयद्ध ़ 3भ्;गैसद्ध32 यद्यपि, सभी धातुएँ तनु भ्ब्स या तनु भ्ैव्के साथ अभ्िािया नहीं करतीं। जब धातु, नाइटिªक अम्ल24 के साथ अभ्िािया करता है तो हाइड्रोजन गैस शायद ही कभी निगर्मित होती है। ऐसा इसलिए है कि नाइटिªक अम्ल एक प्रबल आॅक्सीकारक है। यह उत्पन्न हाइड्रोजन को जल में आॅक्सीकृत कर देता है तथा स्वयं नाइट्रोजन के किसी भी आॅक्साइड ;जैसे छव्ए छव्ए छव्द्ध से अपचित हो जाता हैै। यद्यपि, मैग्नीश्िायम और मैग्नीज22धातुु, तनु भ्छव्के साथ अभ्िािया करते हैं और हाइड्रोजन गैस निगर्मित करते हैं।3 आवश्यक सामग्री धात्िवक पदाथो± ;जैसे मैग्नीश्िायम, एल्युमिनियम, ¯जक, लोहा तथा ताम्रद्ध के पाँच प्रतिदशर्, तनु हाइड्रोक्लोरिकअम्ल, तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल, तनु नाइटिªक अम्ल, पाँच परखनलियाँ, परखनली स्टैण्ड, मापन सिलिण्डर ;50 उस्द्ध तथा एक रेगमाल का टुकड़ा। कायर्विध्ि 1ण् परखनली स्टैंड में पाँच परखनलियाँ लीजिए और उन्हें ।ए ठए ब्ए क् तथा म् के द्वारा चिित कीजिए। 2ण् प्रतिदशर् धात्िवक पदाथो± ;मैग्नीश्िायम, ¯जक, एल्युमिनियम, लोहा तथा ताम्र धातुओंद्ध के छोटे - छोटे टुकड़े लीजिए। इनके पृष्ठ को रेगमाल से रगड़ कर सापफ कीजिए। 3ण् इन धातुओं को क्रमशः ।ए ठए ब्ए क् तथा म् परखनलियों में डालिए। 4ण् इन परखनलियों में से प्रत्येक मंे 10 उस् तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालिए। 5ण् परखनलियों मंे बुदबुदों के बनने की दर का सावधानीपूवर्क प्रेक्षण कीजिए। ये बुदबुदाहट हाइड्रोजन गैस की है जो अभ्िािया में मुक्त हुइर् है। 6ण् धातुओं को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभ्िाियाशीलता के ”ासमान क्रम मंें व्यवस्िथत कीजिए। 7ण् परखनलियों से धात्िवक प्रतिदशो± को निकाल लीजिए। परखनलियों को जल से सापफ कीजिए। उन्हें पुनः परखनली स्टैण्ड मंे लगा दीजिए। 8ण् तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल और तनु नाइटिªक अम्ल के साथ प्रयोग ;चरण 1 से 6द्ध को दोहराइए। 9ण् तीव्र, मंद अथवा कोइर् अभ्िािया नहीं के रूप में अपने प्रेक्षणों को निम्नलिख्िात सारणी में अभ्िालेख्िात कीजिए। प्रेक्षण एवं परिकलन सावधानियाँ ऽ धातुओं का उद्भासित पृष्ठ क्षेत्रापफल लगभग समान होना चाहिए। ऽ धातु - पृष्ठों, विशेषकर डह तथा ।स को रेगमाल से सापफ कीजिए। उद्देश्य सल्पफर डाइआॅक्साइड गैस का विरचन और उसके भौतिक और रासायनिक गुणधमो± का अध्ययन करना। सि(ांत ताम्र छीलन पर गमर् सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल की िया से सल्पफर डाइआक्साइड विरचित की जाती है - ब्न;ेद्ध 2भ् ैव् ;सद्ध तापन ब्नैव् ;ंुद्ध ैव् ;हद्ध 2भ् व्24 422 सल्पफर डाइआॅक्साइड की प्रकृति अम्लीय होती है। यह अम्लीय पोटैश्िायम परमैंगनेट ;ज्ञडदव्4द्ध विलयन को रंगहीन कर देती है। अम्लीय पोटैश्िायम डाइक्रोमेट विलयन ;ज्ञब्तव्द्ध भी ैव्के द्वारा हरा हो जाता है।2272 ज्ञडदव्तथा ज्ञब्तव्के साथ अभ्िाियाएं,ैव्की अपचायक प्रवृफति और अम्लीय ज्ञडदव्तथा42272 4 ज्ञ2ब्त2व्7 की आॅक्सीकारक प्रकृति के कारण हैं। अथवा, 2ज्ञडदव् 5ैव् 2भ् व् ज्ञ ैव् 2डदैव् 2भ् ैव्4 22 24 424 इसी प्रकार, ज्ञ ब्तव् ़ 4भ् ैव् ⎯⎯→ ज्ञ ैव् ़ ब्त;ैव् द्ध ़ 4भ् व् ़ 3ख्व्,227 24 24243 2 ख्ैव्2 ़ भ्2व् ़ ख्व्, ⎯⎯→ भ्2ैव्4, × 3 अथवा ज्ञ ब्तव् ़ भ् ैव् ़ 3ैव् ⎯⎯→ ज्ञ ैव् ़ ब्त;ैव् द्ध ़ भ्व्22724 2 24 243 2 ताम्र छीलन, सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल, तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल, पोटैश्िायम परमैंगनेट विलयन, पोटैश्िायम डाइक्रोमेटविलयन, लाल और नीले लिटमस पत्रा, एक गोल पेंदी वाला फ्रलास्क, थ्िासिल पफनल ;कीपद्ध, निकास नली,दो छिद्र वाली एक कावर्फ, गत्ते का टुकड़ा, गैस जार, प्रयोगशाला स्टैण्ड, बनर्र, तार जाली, त्रिापाद स्टैण्ड, दो परखनलियाँ द्रोणी, तथा मापन सिलिंडर ;50 उस्द्ध। कायर्विध्ि 1ण् गोल पेंदे के फ्रलास्क में ताम्र छीलन के वुफछ टुकड़े ;लगभग 5 हद्ध डालिए और उपकरण को चित्रा 14.1 दशार्ए गए अनुसार व्यवस्िथत कीजिए। 2ण् थ्िासिल कीप की सहायता से 15 - 20 उस् सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल फ्रलास्क में डालिए। 3ण् फ्रलास्क मंे कावर्फ पुनः लगाइए और अंतवर्स्तु को धीरे - धीरे गमर् कीजिए। वुफछ समय बाद गैस बनना प्रारंभ हो जाती है। 4ण् गैस को गैसजार में एकत्रा कर प्रेक्षण - सारणी में दिए गए चरणों के अनुसार, उसके गुणधमो± का अध्ययन कीजिए। निकास नली सान्द्र सल्फ्रयूरिक अम्लनिगर्मित वायुताम्र छीलन सल्पफर डाआॅक्साइड गैस चित्रा 14.1: सल्पफर डाइआॅक्साइड गैस का विरचन प्रेक्षण क्रम सं.परीक्षण प्रयोग प्रेक्षण निष्कषर् 1ण् भौतिक गुणधमर् ;ंद्ध रंग गैस जार में भरी सल्पफर डाइआक्साइड को देख्िाए।;इद्ध जल में विलेयता सल्पफर डाइआक्साइड में भरे जार को लीजिएऔर उसके मुँह को गत्ते के टुकड़े से बंद कीजिए। अब इस जार को द्रोणी में रखे पानी में उलटिए और ढक्कन को सावधानीपूवर्क हटा दीजिए।2ण् रासायनिक गुणधमर् ;ंद्ध अम्लीय अथवानम अथवा गीले लिटमस पत्रा को सल्पफरक्षारकीय प्रकृति डाइआक्साइड भरे जार में डालिए। ;इद्ध ;पद्धपोटैश्िायम लगभग 2 उस् पोटैश्िायम परमैंगनेट विलयन परमैंगनेट विलयन लीजिए, उसमें 1 उस् तनु भ्ैव्4 मिलाइए2;ज्ञडदव्द्ध के और इस विलयन में सल्पफर डाइआक्साइड4साथ अभ्िािया गैस प्रवाहित कीजिए। ;पपद्धपोटैश्िायम अम्लीय पोटैश्िामय डाइक्रोमेट विलयन युक्त डाइक्रोमेट अन्य परखनली में सल्पफर डाइआॅक्साइड ;ज्ञ227द्ध प्रवाहित कीजिए।ब्तव्परिणाम एवं परिचचार् प्रेक्षणों से प्राप्त परिणामांे के आधार पर अपने निष्कषो± को प्रेक्षण सारणी में लिख्िाए। प्रेक्षणों के आधार पर विमोचित सल्पफर डाइआॅक्साइड के भौतिक और रासायिनक गुणधमो± का उल्लेख कीजिए। निम्नलिख्िात अभ्िािया के कारण ैव्की जल में विलेयता उसका एक रासायनिक गुणधमर् है - 2 ैव् ;हद्ध ़ भ्व् ;सद्ध ⎯→ भ्ैव् ;सद्ध2223ैव्2 गैस आॅॅक्सीकारक और अपचायक दोनोें रूपों में व्यवहार करती है क्योंकि यह आॅक्सीजन को ग्रहण अथवा उसका संभरण भी कर सकती है। सावधानियाँ ऽ गैस विरचित करने का उपकरण वायुरोध्ी होना चाहिए। ऽ सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल का प्रहस्तन सावधानीपूवर्क किया जाना चाहिए। इसे त्वचा को स्पशर् नहीं करनेदेना चाहिए। ऽ एक बार में अम्ल की अिाक मात्रा न डालें अन्यथा अभ्िािया तीव्र हो सकती है। हाइड्रोक्लोरिक अम्लका प्रहस्तन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। इसे त्वचा को स्पशर् नहीं होने देना चाहिए। ऽ सल्पफर डाइआॅक्साइड का अंतःश्वसन करें। उद्देश्य काबर्न डाइआॅक्साइड विरचित करना और उसके भौतिक एवं रासायनिक गुणधमो± का अध्ययन करना। सि(ांत प्रयोगशाला में काबर्न डाइआॅक्साइड गैस, वैफल्िसयम काबोर्नेट पर तनु अम्लों की िया से बनाइर् जा सकती है । वैफल्िसयम काबोर्नेट, सामान्यतः संगमरमर - चिपों के रूप में प्रयोग में लाया जाता हैै। ब्ंब्व् ;ेद्ध 2भ्ब्स ;ंुद्ध ब्ंब्स ;ंुद्ध भ् व्;सद्ध ब्व् ;हद्ध3 222 काबर्न डाइआॅक्साइड गैस की प्रवृफति अम्लीय होती है। यह आॅक्सीकारक भी है। यह लाल लिटमस पत्रा को नीला करती है और चूने के जल ब्ं;व्भ्द्धको दूिाया करती है।2 ब्ं;व्भ्द्ध2 ;ंुद्ध ़ ब्व्2 ;हद्ध ⎯→ ब्ंब्व्3 ;ेद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध चूने के जल में अिाक मात्रा में ब्व्प्रवाहित करने पर वैफल्िसयम हाइड्रोजनकाबोर्नेट बनता है। यह जल2 मंे विलेय है और रंगहीन विलयन बनाता है। ब्ंब्व्3 ;ेद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध ़ ब्व्2 ;हद्ध ⎯→ ब्ं;भ्ब्व्3 ;ंुद्धद्ध2 आवश्यक सामग्री संगमरमर चिप्स ;10 हद्धए तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, लाल और नीले लिटमस पत्रा, ताजा तैयार किया गया चूनाजल, मैग्नीश्िायम रिबन का छोटा टुकड़ा, वूल्पफ बोतल अथवा गोल पेंदे वाला फ्रलास्क, गैस जार, मापन सिलिण्डर ;50 उस्द्धए थ्िासेल कीप, निकास नली, दो छिद्र वाली एक काकर्, द्रोणी, मोमबत्ती, तथा एक गत्ते का टुकड़ा। परिणाम एवं परिचचार् प्रेक्षणों से प्राप्त परिणामों के आधार पर अपने निष्कषोर्ं को प्रेक्षण सारणी में लिख्िाए। प्रेक्षणों के आधार पर विमोचित गैस के गुणधमो± का उल्लेख कीजिए। सावधानियाँ ऽ उपकरण वायुरु( होना चाहिए। ऽ थ्िासिल कीप का निचला सिरा वूल्पफ बोतल में रखे अम्ल में डूबा हुआ रहना चाहिए अन्यथा काबर्न डाइर् आॅक्साइड, थ्िासिल कीप से होकर पलायन कर जाएगी। ऽ एक बार में अम्ल की अिाक मात्रा न डालें अन्यथा अभ्िािया तीव्र हो सकती है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का प्रहस्तन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। यह त्वचा को स्पशर् नहीं करना चाहिए। ऽ जार में गैस एकत्रा करते समय, गैस जार के मुँह पर गत्ते का टुकड़ा रखा जाना चाहिए। उद्देश्य विद्युत - अपघटन प्रक्रम का अध्ययन करना। सि(ांत विद्युत - अपघट्य एक ऐसा यौगिक है जो विलयन अथवा गलित अवस्था ;उवसजमद ेजंजमद्ध मंे आयनों में वियोजित होकर विद्युत धारा का चालन करता है। किसी बाह्य ड्डोत से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर ये आयन विपरीत आवेश्िात इलेक्ट्रोडों की ओर अभ्िागमन करते हैं। धन आयन )ण इलेक्ट्रोड की ओर तथा )ण आयन धन इलेक्ट्रोड की ओर अभ्िागमित होकर अपने इलेक्ट्रोडों पर विसजिर्त हो जाते हैं। इस प्रघटना को विद्युत - अपघटन ;मसमबजतवसलेपेद्ध तथा वह पात्रा जिसमें विद्युत - अपघटन होता है, को विद्युत - अपघटनी सेल कहते हैं। इस प्रयोग में विद्युत - अपघट्य के रूप में हम जलीय काॅपर सल्पेफट का विलयन लेते हैंऋ एक शु( ताम्र धातु की पट्टी )ण इलेक्ट्रोड का और एक अशु( ताम्र पट्टðी ध्न इलेक्ट्रोड का कायर् करती है। जब काॅपर सल्पेफट के जलीय विलयन से होकर विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो काॅपर आयन ;ब्न2़द्धए शु( ताम्र पट्टी )ण इलेक्ट्रोड की ओर अभ्िागमन करते हैं और विसजिर्त होकर उस पर निक्षेपित हो जाते हैं। सल्पेफट ; ैव्24 − द्ध आयन अशु( ताम्र ध्न इलेक्ट्रोड की ओर गमन कर, अपने ताम्र को काॅपर आयन के रूप में विलयन में घोल देते हैं और इस प्रकार से विलयन में उनकी सांद्रता स्िथर बनी रहती है। आवश्यक सामग्री अशु( ताम्र धातु की मोटी पट्टी, शु( ताम्र की पतली पट्टी, काॅपर सल्पेफट िस्टल, आसुत जल, तनुसल्फ्रयूरिक अम्ल, सेल होल्डर सहित दो शुष्क सेल ;अथवा 3 ट की बैटरी अथवा बैटरी एलिमिनेटरद्ध, प्लग - वुंफजी, बीकर ;250 उस्द्धए मापन सिलिण्डर ;50 उस्द्धए बाट पेटी सहित भौतिक तुला, दो छिद्र युक्त गत्ते का टुकड़ा, संयोजक तार और एक रेगमाल का टुुकड़ा। कायर्विध्ि 1ण् एक बीकर लीजिए और उसका विद्युत - अपघटनी सेल के रूप में प्रयोग कीजिए। 2ण् 3 ह काॅपर सल्पेफट िस्टलों को 100 उस् आसुत जल में विलेय कीजिए और इस विलयन को विद्युत - अपघटनी सेल में डालिए। इसमें लगभग 1 उस् तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल मिलाकर विलयन को अम्लीवृफत कीजिए। 3ण् संयोजक तारों के सिरों को रेगमाल द्वारा सापफ कीजिए। 4ण् इन पटि्टयों को गत्ते में बनाए गए दो )ण इलेक्ट्रोड छिद्रों में से ;चित्रा 16.1द्ध गुजारिए।ध्न इलेक्ट्रोड गत्ता दो तारों को दो ताम्र पटि्टकाओं से जोड़कर धन इलेक्ट्रोड ;अशु( ताम्र पट्टीद्ध और )ण इलेक्ट्रोड ;शु(शु( ताप पट्टðी ताम्र पट्टीद्ध बनाइए। काॅपर विलयन 5ण् दो ताम्र पटि्टयों को दो शुष्क सेलोंअशु( ताप पट्टðी सल्पेफट के संयोजन ;सेल होल्डरद्ध में से प्लग वंुफजी के माध्यम से जोड़ें जैसा कि चित्रा 16.1 में दशार्या गया है। ख्सेलों के स्थान पर 3 ट की बैटरी अथवा बैटरी एलिमिनेटर का भी प्रयोग किया जा सकता हैह् वुंफजी को प्लग मत कीजिए। 6ण् दो ताम्र पटि्टयों को विलयन मंे डुबोइए और बीकर को गत्ते से ढ़किए। 7ण् प्लग में वुंफजी प्रविष्ट कर वैद्युत अपघटनी विलयन से होकर विद्युतधारा को प्रवाहित कीजिए। 8ण् वुफछ समय बाद विद्युत - अपघटनी विलयन को देख्िाए। क्या आप दोनों ताम्र पटि्टकाओं की मोटाइर्/मोटाइर्यों में कोइर् अंतर देखते हैं? प्रेक्षणों पर ध्यान दीजिए। यदि कोइर् विशेष परिवतर्न न दिखाइर् दे तो विद्युत - अपघट्य में वुफछ और समय तक धारा प्रवाहित होने दीजिए जब तक कि आपको दोनों ताम्र पटि्टयों की मोटाइर् में वुफछ परिवतर्न न दिखाइर् देने लगे। प्रेक्षण पण् अम्लीय काॅपर सल्पेफट विलयन में वुफछ समय तक विद्युत धारा प्रवाहित करने पर अशु( ताम्र पट्टी ;ध्न इलेक्ट्रोडद्धकी मोटाइर् मंे कमी जबकि शु( ताम्र पट्टी ;)ण इलेक्ट्रोडद्ध की मोटाइर् में वृि हो जाती है। उद्देश्य ऐसीटिक अम्ल ;एथेनाॅइक अम्लद्ध के भौतिक व रासायनिक गुणधमो± का अध्ययन करना। सि(ांत एथेनाॅइक अम्ल ;ब्भ्ब्व्व्भ्द्ध एक काबर्निक अम्ल है जिसमें ;दृब्व्व्भ्द्ध प्रकायार्त्मक समूह होता3है। इसमंें सिरके की गंध होती है। यह नीले लिटमस पत्रा को लाल करता है और निम्नलिख्िात के साथ अभ्िािया करता है - ;ंद्ध सोडियम हाइड्रोजन काबोर्नेट तथा सोडियम काबोर्नेट के साथ काबर्न डाइआॅक्साइड निगर्मित होती है। ब्भ्3ब्व्व्भ् ;सद्ध ़ छंभ्ब्व्3 ;ेद्ध ⎯→ ब्भ्3ब्व्व्छं ;ंुद्ध ़ ब्व्2 ;हद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध 2ब्भ्3ब्व्व्भ् ;सद्ध ़ छं2ब्व्3 ;ेद्ध ⎯→ 2ब्भ्3ब्व्व्छं ;ंुद्ध ़ ब्व्2 ;हद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध ;इद्ध सोडियम हाइड्राॅक्साइड से सोडियम एथेनोएट और जल उत्पन्न होता है। ब्भ्3ब्व्व्भ् ;सद्ध ़ छंव्भ् ;ंुद्ध ⎯→ ब्भ्3ब्व्व्छं ;ंुद्ध ़ भ्2व् ;सद्ध आवश्यक सामग्री सोडियम हाइड्रोजनकाबोर्नेट, सोडियम काबोर्नेट, सोडियम हाइड्राॅक्साइड, पफीनाॅफ्रथेलिन विलयन, सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल, 5» एथेनाॅइक अम्ल, नीले लिटमस पत्रा की पिðयाँ, दो बीकर ;100 उस्द्धए चार परखनलियाँ, मापन सिलिण्डर ;10 उस्द्धए त्रिापाद स्टैण्ड, बनर्र और तार की जाली। कायर्विध्ि 1ण् निम्नलिख्िात प्रेक्षण सारणी के अनुसार एथेनाॅइक अम्ल के भौतिक और रासायनिक गुणधमो± का अध्ययन कर अपने प्रेक्षणों को अभ्िालिख्िात कीजिए। प्रेक्षण क्रम सं गुणधमर् प्रयोग प्रेक्षण निष्कषर् 1ण् भौतिक ;ंद्ध गंध एथेनाॅइक अम्ल के प्रतिदशर् को सूँघ्िाए। ;इद्ध विलेयता परीक्षण अम्ल के दिए गए प्रतिदशर् के 1 उस् को 2 उस् जल में डालिये। 2ण् रासायनिक ;ंद्ध लिटमस परीक्षण एथेनाॅइक अम्ल की एक बूँद को ;पद्ध नीले लिटमस पत्रा ;पपद्ध लाल लिटमस पत्रा पर डालें। ;इद्ध सोडियम हाइड्रोजनकाबोर्नेट 1 उस् एथेनाॅइक अम्ल लीजिए के साथ अभ्िािया और उसमें एक चुटकी सोडियम हाइड्रोजनकाबोर्नेट डालें। ;बद्ध सोडियम काबोर्नेट के साथ अभ्िािया 1 उस् एथेनाॅइक अम्ल लीजिए और उसमें एक चुटकी सोडियम काबोर्नेट डालें। ;कद्ध जलीय सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन के साथ अभ्िािया 5 उस् एथेनाॅइक अम्ल लीजिए और उसमंे 2 - 3 बूँद पफीनाॅफ्रथेलिन विलयन की डालें। अब इस मिश्रण में बूँद - बूँद करके सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन मिलाएं। मिश्रण को धीरे - धीरे हिलाएं। अभ्िािया मिश्रण मंे गुलाबी रंग प्रेक्षक होने के लिए आवश्यक सोडियम हाइड्रोक्साॅसाइड की बूँदों की संख्या की गिनती करें। परिणाम एवं परिचचार् अपने अवलोकनों के आधर पर भौतिक गुणधमर् तथा रासायनिक गुणधमर् के निष्कषर् प्रेक्षण सारणी में दीजिए। उद्देश्य ऐल्कोहाॅल और काबोर्क्िसलिक अम्ल के मध्य एस्टरीकरण अभ्िािया का अध्ययन करना। सि(ांत सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल की उपस्िथति में काबोर्क्िसलिक अम्ल, ऐल्कोहाॅल के साथ अभ्िािया कर एस्टर बनाते हैं और उनमें जल के एक अणु की हानि होती है। उदाहरणाथर्, जब एथेनाॅइक अम्ल की एथेनाॅल के साथ अभ्िािया होती है तो एथ्िाल एथनोएट एस्टर बनता है - सांद्र भ्2ैव्4ब्भ्ब्व्व्भ् ़ ब्भ्ब्भ्व्भ् ⎯⎯⎯⎯→ ब्भ्ब्व्व्ब्भ्ब्भ् ़ भ्व्3323232एथेनाॅइक अम्ल एथेनाॅल एथ्िाल एथेनोएट एस्टर की पफलों जैसी गंध होती है जो काॅबोर्क्सलिक अम्ल और ऐल्कोहाॅल की गंधों से भ्िान्न है। आवश्यक सामग्री एथेनाॅइक अम्ल ;3 उस्द्धए एथेनाॅल ;3 उस्द्धए सांद्र भ्2ैव्4 की वुफछ बूँदे, आसुत जल, सोडियम हाइड्रोजन - काबोर्नेट ;1 हद्धए तापमापी ;दृ10° से 110° ब्द्धए परखनली, काॅवर्फ, मापन सिलिण्डर ;10 उस्द्धए बीकर ;250 उस्द्धए बनर्र, त्रिापाद स्टैण्ड तथा तार की जाली। कायर्विध्ि 76 1ण् एक स्वच्छ परखनली मंे 3 उस् एथेनाॅइक अम्ल लीजिए। 2ण् इसमंे लगभग 3 उस् एथानाॅल मिलाइए। इस अभ्िामिश्रण में चार से पाँच बूँदें सांद्र भ्ैव्भी मिलाइए।24 परखनली के मुँह पर ढीली काॅवर्फ लगाइए। 3ण् एक बीकर में लगभग 150 उस् जल लेकर लगभग उसे 60° ब् तक गमर् कीजिए। 4ण् परखनली को गमर् जल मंे रख्िाए ¹अभ्िािया मिश्रण भी गमर् हो जाएगा। यह वििा अभ्िािया मिश्रण को जल ऊष्मक ;ूंजमत इंजीद्ध पर गमर् करना कहलाती हैह्। 5ण् थोड़ी - थोड़ी देर के बाद अभ्िािया मिश्रण को हिलाइए। 6ण् इस अभ्िािया मिश्रण को उस बीकर में उड़ेलिए जिसमें सोडियम हाइड्रोजनकाबोर्नेट का जलीय मिश्रण है। ऐसा करने से अभ्िािया मिश्रण से बिना अभ्िािया किया हुआ एथेनाॅइक अम्ल अलग हो जाएगा। क्या आप बुदबुदाहट देखते हैं? 7ण् निमिर्त्त एस्टर की वाष्प को आप अपने हाथ से नाक की ओर ले जाकर उसे सूँघ्िाए। 8ण् एथेनाॅइक अम्ल, एथेनाॅल और एस्टर की गंधों में अंतर अनुभव कीजिए। परिणाम एवं परिचचार् एथेनाॅइक अम्ल, एथेनाॅल और एस्टर की गंधों में अंतर पर टिप्पणी कीजिए। जब काबोर्क्िसलिक अम्ल का .व्भ् समूह, .व्त् ;यहाँ त् ऐल्िकल समूह निरूपित करता हैद्ध द्वारा प्रतिस्थापित होता है तो एस्टर बनते हैं। इस अभ्िािया में सांद्र भ्ैव्का उत्प्रेरक के रूप में प्रयोग किया2 4 गया है। सावधानियाँ ऽ सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल का प्रयोग करते समय सावधानी बरतें। ऽ काबर्निक यौगिक अति वाष्पशील होते हैं और ऐल्कोहाॅल दहनशील है अतः इसे कभी भी सीधी ज्वाला द्वारा गमर् न करें। अभ्िािया मिश्रण को गमर् करने के लिए सदैव जल ऊष्मक ;ूंजमत इंजीद्ध का प्रयोग करें। उद्देश्य ऐल्कोहाॅल की वुफछ आॅक्सीकरण अभ्िाियाओं का अध्ययन करना। सि(ांत आॅक्सीकरण प्रक्रम के अंतगर्त तत्वों अथवा यौगिकों द्वारा आॅक्सीजन की प्राप्ित होती है। ऐल्कोहाॅल विभ्िान्न अवस्थाओं मंे आॅक्सीवृफत होकर विभ्िान्न उत्पाद बनाता है। 1ण् पूणर् दहनः ऐल्कोहाॅल को अध्िक आॅक्सीजन की आपूतिर् ;वायु में उपस्िथतद्ध में ज्वाला में जलाने से काबर्न डाइआॅक्साइड और जल प्राप्त होता है। ब्भ्3ब्भ्2व्भ् ़ 3व्2 ⎯→2ब्व्2 ़ 3 भ्2व् 2ण् आॅक्सीकारक के प्रयोग द्वारा आॅक्सीकरण रू किसी आॅक्सीकारक ;जैसे क्षारकीय ज्ञडदव्4 विलयनद्ध द्वारा आॅक्सीकरण से ऐल्कोहाॅल आॅक्सीवृफत होकर काॅबोर्क्िसलिक अम्ल देता है। क्षारीय ज्ञडदव्4 के साथ तापनब्भ्3ब्भ्2व्भ् ⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯→ ब्भ्3ब्व्व्भ् ़ भ्2व्ण् अभ्िािया का पूणर् होना ज्ञडदव्4 विलयन के रंगहीन हो जाने से अभ्िालक्ष्िात होता है। आवश्यक सामग्री एथेनाॅल, पोटैश्िायम परमैगनेट का 1ः क्षारकीय विलयन, छंभ्ब्व्3ए ताजा बना चूने का पानी, स्िपरिट लैम्प, दो क्वथन नलियाँ, एक मापन सिलिण्डर ;10उस्द्धए एक बीकर ;250 उस्द्धए रबर की नली, एक जेट कीप तथा पिफल्टर पत्रा। कायर्विध्ि 1ण् प्रेक्षण सारणी में उल्लेख्िात अभ्िाियाओं को सम्पन्न कीजिए। परखनली में एथेनाॅल को गमर् करने ;चरण - 2द्ध के लिए निम्नलिख्िात विध्ि अपनाइए। ;पद्ध बीकर में लगभग 150 उस् जल लीजिए और उसे 60 °ब् तक गमर् कीजिए। ;पपद्ध परखनली को गमर् जल मंे रख्िाए इससे अभ्िािया मिश्रण भी गमर् हो जाएगा । यह विध्ि अभ्िािया मिश्रण को जलऊष्मक ;ूंजमत इंजीद्ध पर गमर् करना कहलाती है। चित्रा 19ण्1 रूएथेनाॅल का पूणर् - दहन प्रेक्षण क्रम सं.प्रयोग प्रेक्षण निष्कषर् 1ण् पूणर् - दहन एथेनाॅल को एक स्िपरिट लैम्प में ईंध्न के रूप में लीजिए। लैम्प के ऊपर उल्टी कीप रखें। उल्टी कीप के तने से एक ओर जेट से संलग्िनत रबर की नली को चित्रा 19.1 के अनुसार संयोजित करें। लैम्प को सामान्य रूप से प्रज्वलित करें। निगर्मित वाष्प को ताजे चूने के पानी में प्रवाहित करें। क्या कीप की भीतरी सतह पर आप जल - वाष्प का संघनित होना अवलोकित कर रहे हैं? 2ण् आॅक्सीकारक के प्रयोग द्वारा आॅक्सीकरण एक परखनली में 3 उस् एथेनाॅल लेकर उसे जल ऊष्मक पर गमर् कीजिए। इसमें 1ः क्षारीय ज्ञडदव्विलयन की दो या तीन बूँदें4मिलाइए। अभ्िािया मिश्रण को रंगहीन होने तक गमर् करें। इसे पिफल्टर कर मिश्रण में चुटकी भर सोडियम हाइड्रोजनकाबोर्नेट ;छंभ्ब्व्3द्ध मिलाएं। परिणाम एवं परिचचार् विभ्िान्न आॅॅक्सीकरण अभ्िाियाओं से निष्कषर् निकालिए। ऐल्कोहाॅल के आॅक्सीकरण उत्पाद, सम्पन्न प्रक्रम की अवस्थाओं और प्रवृफति पर निभर्र करते हैं। सावधनियाँ ऽ ऐल्कोहाॅल अति वाष्पशील और ज्वलनशील होते हैं। इन्हें जलाते समय बहुत सावधनी बरतें और स्पैचुला पर केवल दो बूँद ऐल्कोहाॅल का ही प्रयोग करें। ऽ क्षारकीय पोटैश्िायम परमैगनेट विलयन अत्यंत तनु होना चाहिए और इसे बूँद - बूँद करके ही डाला जाना चाहिए। ऽ अभ्िािया मिश्रण में बहुत अध्िक पोटैश्िायम परमैगनेट विलयन न मिलाएं। उद्देश्य साबुन बनाने के लिए साबुनीकरण अभ्िािया का अध्ययन करना। सि(ांत तेल या वसा की जब सोडियम हाइड्राॅक्साइड के साथ िया की जाती है तो वे वसा अम्ल के सोडियम लवण ;साबुनद्ध तथा ग्िलसराॅल मंे परिण्िात हो जाते हैं। यह अभ्िािया साबुनीकरण कहलाती है। साबुनसोडियम हाइड्राॅक्साइड ग्िलसराॅलट्राइएस्टर या ट्राइग्िलसराइड ;तेल अथवा वसाद्ध यह ऊष्माक्षेपी अभ्िािया है अथार्त् साबुनीकरण की प्रिया में ऊष्मा का विमोचन होता है। आवश्यक सामग्री सोडियम हाइड्राॅक्साइड, वनस्पतिक तेल जैसे एरंड तेल का प्रतिदशर् ;25 उस्द्ध, साधरण नमक ;10 हद्धए आसुत जल, लाल तथा नीले लिटमस पत्रा, दो बीकर ;250 उस्द्धए दो परखनलियाँ, एक काँच की छड़, एक मापन सिलिण्डर ;50 उस्द्ध तथा एक चावूफ। कायर्विध्ि 1ण् एक बीकर ;250 उस्द्ध में लगभग 20 उस् एरंड तेल ;बंेजमत वपस या जतपहसलबमतपकमद्ध लीजिए। 2ण् आसुत जल में लगभग 50 उस् 20ः सोडियम हाइड्राॅक्साइड का विलयन तैयार कीजिए और इस विलयन के 30 उस् एरंड तेल में मिलाइए। 3ण् इस अभ्िािया विलयन मंे क्रमशः लाल तथा नीले लिटमस पत्रा की पिðयाँ डुबोइए। क्या आप किसी लिटमस पत्रा की पट्टी के रंग में परिवतर्न देखते हैं? देखकर अपने प्रेक्षण अभ्िालिख्िात कीजिए। 4ण् बीकर को बाहर से स्पशर् कीजिए। क्या यह गमर् अथवा ठंडा है? 5ण् इस मिश्रण में 5 ह से 10 ह साधरण नमक डालिए और काँच की छड़ द्वारा मिश्रण को लगातार हिलाते रहिए जब तक कि साबुन बनना न प्रारंभ हो जाए। 6ण् इसे एक दिन ऐसा ही छोड़ दीजिए ताकि मिश्रण ठंडा होकर ठोस हो जाए। 7ण् साबुन केक को निकाल कर वांछित आकार और साइज में काटिए। प्रेक्षण पण् मिश्रण में डुबोए जाने पर लाल लिटमस पत्रा का रंगऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋए हो जाता है जबकि नीले लिटमस पत्रा का रंगऋऋऋऋऋऋऋऋऋ रहता है। पपण् तेल में सोडियम हाइड्राॅक्साइड मिलाने पर अभ्िािया मिश्रण का तापऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ ;बढ़ता/घटताद्ध है। परिणाम एवं परिचचार् लिटमस पत्रा पर अपने प्रेक्षण के आधर पर साबुन विलयन का माध्यम ;अम्लीय/क्षारकीयद्ध सुनिश्िचत कीजिए।यह भी बताइए कि साबुनीकरण अभ्िािया ऊष्माक्षेपी अथवा ऊष्माशोषी है? साबुनीकरण अभ्िािया, साबुन के साथ ग्िलसराॅल का बनना दशार्ती है जो एक अलग उत्पाद के रूप में उपस्िथत रहता है। साबुन, वसा अम्ल का लवण है और उसका अवक्षेपण भी अन्य किसी लवण के अवक्षेपण की भाँति ही अभ्िानियंत्रिात होता है। सावधनियाँ ऽ साबुन के विलयन को सावधनीपूवर्क विलोडि़त करें ताकि वह बाहर न छलके। उद्देश्य विभ्िान्न साबुन के प्रतिदशो± की पेफनन क्षमता की तुलना करना। सि(ांत जब साबुन को जल के साथ हिलाया जाता है तो झाग ;पेफनद्ध उत्पन्न होते हैं। अणु त्ब्व्व्.छं़ में जलरागी और जल विरागी अंशों की उपस्िथति के कारण ;देख्िाए अध्याय 4 विज्ञान, कक्षा ग् की छब्म्त्ज् द्वारा प्रकाश्िात पाठ्य पुस्तकद्ध साबुन झाग देता है। विभ्िान्न साबुन प्रतिदशो± की पफेनन क्षमता की तुलना, उनकी समान मात्रा द्वारा उत्पन्न झाग की मात्रा को मापकर की जा सकती है। आवश्यक सामग्री साबुन के चार विभ्िान्न प्रतिदशर्, आसुत जल, भौतिक तुला तथा बाट पेटी, चार परखनलियाँ, परखनली स्टैण्ड, चार बीकर ;100 उस्द्धए काँच की छड़, बनर्र, त्रिापाद स्टैण्ड, तार की जाली, मापन सिलिंडर ;50 उस्द्ध मापन स्केल। कायर्विध्ि 1ण् 100 उस् के चार बीकर लीजिए और उन्हें ।ए ठए ब्ए तथा क् द्वारा चिित कीजिए। भौतिक तुला के द्वारा चार विभ्िान्न साबुन प्रतिदशो± में से प्रत्येक की 1 ह मात्रा तोलिए। चार अलग - अलग बीकरों में डालिए। 2ण्साबुन प्रतिदशो± युक्त प्रत्येक बीकर में 20 उस् आसुत जल डालिए। काँच की छड़ द्वारा मिश्रण को प्रेक्षण ;पद्ध बीकर में लिए गए प्रत्येक साबुन प्रतिदशर् का द्रव्यमान त्र ऋऋऋऋऋ ह ;पपद्ध प्रत्येक बीकर में डाले गए आसुत जल का आयतन त्र ऋऋऋऋऋउस् ;पपपद्ध परखनली में लिए गए प्रत्येक साबुन विलयन का आयतन त्र ऋऋऋऋऋ उस् ;पअद्ध प्रत्येक परखनली में डाले गए आसुत जल का आयतन त्र ऋऋऋऋऋ उस् ;अद्ध परख नली को कितनी बार हिलाया गया त्र ऋऋऋऋऋ ण् साबुन विलयन परखनली पाठ्यांक उत्पन्न पेफन की लंबाइर् प्रारंभ्िाक लंबाइर् अंतिम लंबाइर् ;बउद्ध ;बउद्ध ;बउद्ध 1ण् 2ण् 3ण् 4ण् परिणाम एवं परिचचार् प्रेक्षणों से यह निष्कषर् निकालिए कि परखनली में किस साबुन प्रतिदशर् से झाग की अध्िकतम लंबाइर् प्राप्त हुइर् है। अलग - अलग साबुन विलयनों की पेफन क्षमता अलग - अलग क्यों है? क्या इसका कारण विभ्िान्न साबुन विलयनों में विभ्िान्न ऐल्िकल समूहों ;त्द्ध की उपस्िथति है? साबुन में ऐल्िकल समूह जलविरागी भाग होता है। सावधनियाँ ऽ प्रत्येक प्रतिदशर् के लिए आसुत जल का प्रयोग करें क्योंकि साबुन विलयन, कठोर जल में झाग नहीं देते। ऽ साबुन को जल में विलीन करते समय मिश्रण का सावधनीपूवर्क विलोडन करें ताकि साबुन - विलयन न छलके। ऽ सभी विलयनों में साबुन की मात्रा समान होनी चाहिए। प्रत्येक साबुन विलयन में मिलाए गए आसुत जल की मात्रा समान होनी चाहिए अथार्त् सभी परीक्षण विलयनों की सांद्रता समान होनी चाहिए। ऽ साबुन प्रतिदशो± का द्रव्यमान, भौतिक तुला का प्रयोग करके सावधनीपूवर्क निधर्रित किया जाना चाहिए। यदि आवश्ययकता हो तो आप अपने श्िाक्षक से सहायता लें। ऽ प्रत्येक परखनली को एक ही प्रकार से और समान बार हिलाएं। ऽ झाग बनने के तत्काल बाद ही झाग की लम्बाइर् मापें। ऽ साबुन प्रतिदशो± युक्त बीकर को एक समान रूप से गमर् करने के लिए तार की जाली का प्रयोग करें। 22 उद्देश्य मृदु और कठोर जल में साबुन प्रतिदशर् की निमर्लन क्षमता का तुलनात्मक अध्ययन करना। सि(ांत जल में वैफल्िसयम तथा मैग्नीश्िायम के लवणों ;हाइड्रोजन काबोर्नेटों, क्लोराइडों तथा सल्पेफटोंद्ध की उपस्िथति से जल - कठोरता उत्पन्न होती है। ये लवण जल में विलेय हैं। जब कठोर जल में साबुन मिलाया जाता है तो यह लवणों से अभ्िािया कर पृष्ठमल ;ेबनउद्ध बनाता है जो अविलेय है और जल के पृष्ठ पर तैरने लगता है। यह पृष्ठमल, साबुन को बनाने में प्रयुक्त वसा अम्ल के अविलेय वैफल्िसयम और मैग्नीश्िायम लवणों के बनने के कारण उत्पन्न होता है। तब विलयन में साबुन अप्रभावी हो जाता है। ब्ं;भ्ब्व्3द्ध2 ;ंुद्ध ़ 2छं़.ेजमंतंजम. ;ंुद्ध⎯→ ब्ं;ेजमंतंजमद्ध2 ;ेद्ध ़ 2छंभ्ब्व्3 ;ंुद्ध सोडियम स्टीएरेट पृष्ठमल;साबुनद्ध ब्ंैव् ;ंुद्ध ़ 2छं़.ेजमंतंजम.;ंुद्ध ⎯→ ब्ं;ेजमंतंजमद्ध ;ेद्ध ़ छंैव्;ंुद्ध4224पृष्ठमल वैफल्िसयम और मैग्नीश्िायम के लवण भी इसी प्रकार की अभ्िािया दशार्ते हैं। इस प्रकार जल में वैफल्िसयम और मैग्नीश्िायम लवणों की उपस्िथति से साबुन का अवक्षेपण हो जाता है। इस कारण इनकी निमर्लन क्षमता और झाग देने की क्षमता कम हो जाती है। आवश्यक सामग्री भौम जल ;वूफप जलद्ध, आसुत जल, वैफल्िसयम हाइड्रोजनकाबोर्नेट अथवा वैफल्िशयम सल्पेफट, साबुन प्रतिदशर्, भौतिक तुला और बाट पेटी, तीन परखनलियाँ, परखनली स्टैण्ड, तीन बीकर ;100 उस्द्ध तीन काँच की छड़ें, मापन सिलिण्डर ;50उस्द्धए तथा एक मापन स्केल। कायर्विध्ि 1ण् तीन बीकरों को लीजिए और उन्हें ।ए ठ और ब् के द्वारा चिित कीजिए। 2ण् बीकर । में 20 उस् आसुत जल लीजिए। बीकर ठए में 20 उस् भौमजल और बीकर ब् में 20 उस् आसुत जल में 2 ह वैफल्िसयम हाइड्रोजन काबोर्नेट ;अथवा वैफल्िसयम सल्पेफटद्ध मिलाइए। 3ण् बीकर ब् की अतंवर्स्तु को विलोडि़त कीजिए ताकि वैफल्िसयम हाइड्रोजनकाबोर्नेट ;अथवा वैफल्िसयम सल्पेफटद्ध जल में विलीन हो जाए। 4ण् भौतिक तुला से तौलकर प्रत्येक बीकर ।ए ठ और ब् मे 1 ह साबुन डालिए। 5ण् अलग - अलग काँच की छड़ों से इन बीकरों की अंतवर्स्तु को विलोडि़त कीजिए। 6ण् एक परखनली स्टैण्ड में तीनों परखनलियों को रखकर उन्हें ।ए ठ और ब् द्वारा चिित ख्चित्रा 22ण्1;ंद्ध, कीजिए। 7ण् ऊपर तैयार किए गए 3 उस् साबुन विलयन को तदनुरूपी परखनलियों में डालिए।चित्रा 22ण्1 रू ;ंद्ध विभ्िान्न साबुन विलयनों युक्त परखनलियाँ ;इद्ध परखनलियों का हिलाया जाना, तथा ;बद्ध विभ्िान्न साबुन प्रतिदशो± की विभ्िान्न पेफनन क्षमता की तुलना। 8ण् अब परखनली । को लेकर उसके मँुह पर अँगूठा रख कर 10 बार ख्चित्रा 22ण्1;इद्ध, हिलाएं। 9ण् परखनली को हिलाने पर झाग या पेफन बनेगा। मापन स्केल की सहायता से बने झाग की लम्बाइर् तत्काल ख्चित्रा 22ण्1;बद्ध, मापिए। 10ण् अन्य दो प्रतिदशो± के साथ चरण 8 व 9 को इसी प्रकार दोहराइए। प्रेक्षण ;पद्ध प्रत्येक बीकर में लिए गए साबुन प्रतिदशर् का द्रव्यमान त्र ऋऋऋऋऋ ह ;पपद्ध प्रत्येक बीकर में मिलाए गए आसुत जल और भौमजल का आयतन त्र ऋऋऋऋऋ उस् ;पपपद्ध प्रत्येक परखनली में साबुन प्रतिदशर् का आयतन त्र ऋऋऋऋऋ उस् ;पअद्ध प्रत्येक परखनली को कितनी बार हिलाया गया त्र ऋऋऋऋऋ ण् क्रम मिश्रण परखनली पाठ्यांक उत्पन्न झाग सं.;जल ़ साबुनद्ध प्रारंभ्िाक लंबाइर् अंतिम लंबाइर् की लबाइर् ;बउद्ध ;बउद्ध ;बउद्ध 1ण् आसुत जल ;मृदु जलद्ध 2ण् वूफप जल अथवा भौम जल ;कठोर जलद्ध 3ण् ब्ं;भ्ब्व्3द्ध2 अथवा ब्ंैव्;कठोर जलद्ध4 परिणाम एवं परिचचार् प्रेक्षणों से यह निष्कषर् निकालिए कि साबुन प्रतिदशर् के किस विलयन से पेफन ;झागद्ध की अध्िकतम लंबाइर् प्राप्त हुइर् है। निमर्लन के लिए पेफन उत्पन्न होना आवश्यक है जो साबुन के जल विरागी अंश ;अथवा ऐल्िकल समूहोंद्ध की मुक्त उपलब्ध्ता पर निभर्र करता है। कठोर जल में यह पृष्ठमल या अवक्षेपण द्वारा संपाश्िात हो जाता है इस कारण कठोर जल धेने के लिए अनुपयुक्त है। सावधनियाँ ऽ मृदु जल और कठोर जल साबुन के लिए एक ही प्रतिदशर् का प्रयोग करें। ऽ साबुन को जल मंे विलीन करते समय मिश्रण का सावधनीपूवर्क विलोड़न करें ताकि साबुन विलयन छलके नहीं। ऽ सभी विलयनों में साबुन प्रतिदशर् की मात्रा समान होनी चाहिए। प्रत्येक साबुन प्रतिदशर् में आसुत जल की समान मात्रा मिलायी जानी चाहिए । तात्पयर् यह है कि सभी परीक्षण विलयनों की सांद्रता समान होनी चाहिए। ऽ साबुन प्रतिदशर् का द्रव्यमान भौतिक तुला का प्रयोग करके सावधनीपूवर्क निधर्रित किया जाना चाहिए। यदि आवश्यकता हो तो अपने श्िाक्षक से सहायता लें। ऽ प्रत्येक परखनली को एक ही प्रकार से और समान बार हिलाएं। ऽ झाग बनने के तत्काल बाद ही बने झाग की लम्बाइर् मापिए।

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