प्रस्तावना विज्ञान के विकास में प्रयोगों की विज्ञान निणार्यक भूमिका होती है। प्रयोगशालाओं में सामान्यतः किए जाने वाले अन्वेषणों द्वारा एक बड़ी संख्या में नइर् - नइर् खोज एवं आविष्कार संभव हो सके हैं। इसीलिए विज्ञान के किसी भी पाठ्यक्रम में प्रयोगात्मक कायर् को एक आवश्यक घटक माना गया है। विद्यालयों में माध्यमिक स्तर पर विज्ञान की पाठ्यचयार्ओं में प्रयोगात्मक कायर् के पाठ्यक्रम की आवश्यक रूप से अभ्िाकल्पना इस उद्देश्य से की गयी है कि विद्याथीर् विज्ञान प्रयोगशालाओं में उपयोग होने वाले मूलयंत्रों तथा तकनीकों से परिचित हो सवेंफ। साथ ही वे समस्याओं के निराकरण का कौशल विकसित करने पर भी ध्यान दंे। ये कौशल विद्याथीर् की समस्या पहचानने, प्रयोगों की व्यवस्था की अभ्िाकल्पना करने, आंकड़ों को एकत्रिात एवं विश्लेष्िात करने तथा आंकड़ों की व्याख्या करके कालान्तर में सत्याभासी हल तक पहुँचने में सहायता करते हैं। ये वास्तव में प्रयोगात्मक कायो± के दीघर्कालिक उद्देश्य हैं जो विद्याथीर् द्वारा ज्ञान की रचना के चिन्तन केन्द्र बन जाते हैं। विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशाला वह स्थान है जहाँ उपयुक्त अभ्िाव्यक्ित एवं निधार्रित प्रयोगों के समुच्चय को सुव्यवस्िथत ढंग से सम्पन्न करके मूल प्रयोगिक कौशलों को सीखा जाता है। किसी विद्याथीर् द्वारा प्रयोगों को अपने हाथों से स्वयं सम्पन्न करना मात्रा रोमांचित करने वाला अनुभव ही नहीं है परंतु इन्हें करके सीखना अपरिहायर् होने के कारण यह बहुत महत्त्वपूणर् भी है। इससे विज्ञान की धरणाओं को समझने में भी सहायता मिलती है। माध्यमिक स्तर पर सुझाए गए प्रयोगों तथा प्रोजेेक्ट कायो± का मुख्य उद्देश्य मापन की मूल वुफशलता का विकास करना, वुफछ सामान्य मापक यंत्रों, उपकरणों तथा रसायनों का उपयोग करना, सरल उपकरणों को व्यवस्िथत करना, सूक्ष्मदशीर् का उपयोग करना तथा स्लाइड बनाना, प्रेक्षण लेना, आंकड़े एकत्रा करना तथा इन्हें उचित रूप में प्रस्तुत करना, निष्कषर् निकालना तथा रिपोटर् तैयार करना है। प्रयोगशाला में प्रयोगात्मक कायर् आरम्भ करने से पूवर् प्रत्येक विद्याथीर् को वुफछ नियमों तथा विद्यालयों की जानकारी होना आवश्यक है। विद्याथीर् को प्रयोगशाला में उपलब्ध सामान्य सुविधओं तथा उपकरणोें के विषय में आवश्यक जानकारी और नियम तथा हिदायतों का पालन करना आवश्यक है। प्रायः सत्रा के आरम्भ में श्िाक्षक विद्याथ्िार्यों को अपने साथ विद्यालय की विज्ञान प्रयोगशाला का भ्रमण कराते हैं तथा उसमें उपलब्ध सामान्य सुविधाओं से परिचित कराते हैं तथा उन्हें ‘प्रयोगशाला में प्रयोग करते समय क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए’ के विषय में बताते हैं। कक्षा 10 के लिए विज्ञान प्रयोगात्मक पुस्ितका किसी विद्यालय की विज्ञान प्रयोगशाला में उपलब्ध सामान्य सुविधाओं, उपकरणों, मापक यंत्रों, रसायनों, काँच के सामानों, प्रतिदशो± से विद्याथ्िार्यों को परिचित कराने की एक चेष्टा है। प्रस्तुत पुस्ितका में प्रयोगशाला में बरती जाने वाली सावधानियों तथा सुरक्षा के लिए पालन करने वाले उपायों का भी वणर्न किया गया है। प्रयोग के वणर्न के लिए अपनाए गए संरूप में प्रयोग का उद्देश्य, प्रयोग में सम्िमलित सि(ांत अथवा नियम, प्रयोग को करने के लिए दिए गए नियम के आधार पर आवश्यक उपकरणों की सूची, प्रयोग को करने में सम्िमलित चरण अथार्त् कायर्विध्ि, प्रेक्षणों का रिकाडर् रखना, परिकलनों के लिए आवश्यक सूत्रा तथा परिणाम लिखना सम्िमलित हैं। प्रयोग के आधार पर निष्कषर् निकालने तथा परिचचार् आरम्भ करने पर जोर दिया गया है। यद्यपि प्रयोग करते समय बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों को प्रयोग की कायर्वििा में मिला दिया गया है तथापि इनका संभावित त्राुटि के ड्डोतों के साथ अिाक विवेचन सहित पृथक रूप से वणर्न किया गया है। किसी प्रयोग को करने के लिए प्रयोगशाला बनाने तथा किसी विशेष प्रयोग के लिए श्िाक्षकों के लिए अतिरिक्त सूचना की वुफछ पूवार्पेक्षाएं हो सकती हैं। ऐसे ही वाद - विषयों को लगभग सभी प्रयोगों में ‘श्िाक्षक के लिए’ नामक स्तम्भ मंे उभारा गया है। लेखकों ने इस स्तम्भ का उपयोग श्िाक्षकों से संवाद बनाए रखने के लिए भी किया है। आशा की जाती है कि श्िाक्षक इस स्तम्भ को उपयोगी पाएंगे। प्रयोग को करने के लिए अपनायी गयी वििा का उपयोग वुफछ अनुप्रयोगों को समझ के विस्तार के लिए भी किया जा सकता है। यदा - कदा इसी प्रकार की समस्याओं के संबोधन के लिए ‘अनुप्रयोग’ नामक शीषर्क का स्तम्भ जोड़ा गया है। प्रत्येक प्रयोग के अंत में वुफछ विचारोत्तेजक प्रश्नों का उल्लेख भी किया गया है। ये प्रश्न प्रायः प्रयोग के लिए सम्िमलित कायर्वििा पर आधारित हैं। दैनिक जीवन के अनुभवों को वैज्ञानिक सि(ांतों से संबंिात करने के लिए वुफछ प्रश्न विद्याथ्िार्यों को उत्तेजित भी कर सकते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस प्रकार के प्रश्न विद्याथ्िार्यों में वैज्ञानिक मनःस्िथति एवं मनोवृिा को दृढ़ करने में सहायक होंगे। इन विवरणों में यह देखा जा सकता है कि ‘आवश्यक सामग्री’ तथा ‘श्िाक्षक के लिए’ जैसे स्तम्भों में प्रायः ऐसी समस्याओं को संबोिात किया गया है जो वैकल्िपक सामग्री तथा यहाँ तक कि कायर्वििायों जिनका उपयोग प्रयोग करने के लिए किया जा सकता है, से संबंिात होती हैं। तथापि यहाँ यह उल्लेख करना महत्त्वपूणर् है कि प्रयोगों को करने के लिए दिए गए संकेत, मात्रा सुझाव के लिए हंै और इनमें विश्िाष्ट परिस्िथतियों में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर संशोधन किए जा सकते हैं। उदाहरणाथर् यदि किसी विशेष प्रयोग करने के लिए सुझाइर् गयी आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं है तो कोइर् उचित उपयुक्त वैकल्िपक सामग्री उपयोग की जा सकती है। इन प्रयोगों के अतिरिक्त कोइर् छात्रा अपनी रुचि के अनुसार कोइर् अन्य प्रयोग भी कर सकता है। तथापि यह महत्त्वपूणर् है कि विज्ञान का प्रत्येक विद्याथीर् प्रयोगात्मक कायर् पर उचित ध्यान दे तथा मूल प्रयोगात्मक कौशलों को अजिर्त करने का प्रयास करे तथा प्रेक्षण का प्रखर बोध विकसित करने एवं किए गए कायर् का विवरण देने का गहन प्रश्िाक्षण अजिर्त करे। बहुत से प्रयोगों का चयन इस प्रकार किया गया है कि उन्हें कम मूल्य की तथा स्थानीय उपलब्ध सामग्री का उपयोग करके विज्ञान की जटिलता को श्िाथ्िाल किए बिना सम्पन्न किया जा सके। जहाँ भी संभव हो सका है उपकरणों के रखरखाव के लिए सुझाव दिए गए हैं। प्रत्येक प्रयोगों के अंत में दिए गए प्रश्नों पर अत्यािाक सावधानीपूवर्क विचार किया जाना चाहिए जिससे उनके विषय में अपने श्िाक्षकों तथा समकक्ष साथ्िायों से प्रतिचचार् करके उपयुक्त तथा विश्वसनीय उत्तरों पर पहुँचा जा सके। इस पुस्ितका के अंत में वुफछ प्रोजेक्टों को प्रस्तावित किया गया है। यह सूची माध्यमिक स्तर पर विज्ञान के वतर्मान पाठ्यव्रफम पर आधरित है। वुफछ प्रोजेक्टों विस्तृत विवरण भी प्रष्िात किया गया है। 1ण्1 प्रयोगशाला में उपलब्ध् सामान्य सुविधयें विज्ञान की प्रयोगशाला में सामान्यतः काम करने के लिए मेज, सामान्य उपयोग के लिए वुफछ वस्तुएँ तथा उपकरण, रसायनों तथा काँच के बने सामान के भंडारण के लिए स्थान उपलब्ध् रहता है। विज्ञान प्रयोगशाला की कायर् संचालन मेज में सामान्यतः यह प्रावधान होते हैंः ऽ सिंक जिसमें ध्ुलाइर् तथा तरल अपश्िाष्टों के निष्कासन के लिए पानी का नल लगा हो। यह आशा की जाती है कि विद्याथीर् आवश्यकता पड़ने पर ही नल का प्रयोग करेंगे और जल का अपव्यय नहीं करेंगे। सिंक की नियमित सपफाइर् होना आवश्यक है। ऽ अभ्िाकमर्क स्तंभांे का उपयोग रसायनों तथा बार - बार प्रयोग में लाये जाने वाले अभ्िाकमर्कों की बोतलों को रखने के लिए किया जाता है। इन अभ्िाकमर्कों को विशेष क्रम में व्यवस्िथत किया जाता है। ऽ गैस की टोंटियों से जुड़े बनर्र अथवा स्िप्रट लैम्प तापन सुविधयें प्रदान करते हैं। गैस की टोंटियों को तभी खोलना चाहिए जब बनर्र जलाने के लिए गैस की आवश्यकता हो। यदि गैस का रिसाव हो तो तुरंत इसकी सूचना अध्यापक अथवा प्रयोगशाला में कायर्रत कमर्चारियों को देनी चाहिए। प्रत्येक प्रयोगशाला में सुविधजनक स्थानों पर वुफछ अग्िनशामक लगे होने चाहिए। ऽ विज्ञान प्रयोगशाला में सामान्य उपयोग के उपकरणों तथा काँच के सामानों को अलमारी में अलग - अलग रखना चाहिए। यह सभी वस्तुएं विद्याथ्िार्यों को प्रयोग सम्पन्न करते समय दी जाती हंै। ऽ वुफछ प्रयोगशालाओं में तुला, सूक्ष्मदशीर् जैसे उपकरण स्थायी रूप से सुविधजनक स्थान पर रखे हो सकते हैं क्योंकि इनका उपयोग बार - बार किया जाता है। किस प्रकार की तुला का उपयोग करना है यह इस तथ्य पर निभर्र करता है कि आपको क्या तौलना है। माध्यमिक स्तर पर कमानीदार तुला तथा भौतिक तुला का चयन ही ठीक समझा गया है। श्िाक्षकों को परामशर् दिया जाता है कि वह विद्याथ्िार्यों को ऐसे प्रयोग जिनमें तोलन की आवश्यकता हो को आरंभ करने से पूवर् भौतिक तुला ;चित्रा 1द्ध केउपयोग का उचित प्रश्िाक्षण दें। चूणर् अथवा ठोस पदाथो± को तौलने के लिए पदाथर् की प्रकृति के अनुसार विद्याथीर् को तौल नलिकाओं अथवा बटर पेपर का उपयोग करना चाहिए। तुला के पलड़े सदैव सापफ रखना चाहिए। आवश्यक सूयर् के प्रकाश को सुनिश्िचत करने के लिए सूक्ष्मदशीर् ;चित्रा 2द्ध को सदैव ख्िाड़की के पास रखना चाहिये। ऽ प्रयोगशाला में जल आसवन संयंत्रा भी लगा रहना चाहिए। आसवन संयंत्रा के पास जल संभरण तथा निकास का उचित प्रबंध् होना चाहिए। विद्युत आपूतिर् का स्िवच आॅन करने से पूवर् यह सुनिश्िचत कर लेना चाहिए कि संयंत्रा से जल का संभरण ठीक प्रकार हो रहा है अथवा नहीं। ऽ प्रयोगशाला में गैसों के लिए सघन क्षेत्रा अथवा निकास का प्रावधान होना चाहिए। ऽ विद्युत तथा चुम्बकत्व प्रयोगों को सम्पन्न करने के लिए प्रयोगशाला की सभी कायर्कारी मेजों पर विद्युत संयोजन प्रदान किये जाने चाहिए। चित्रा 1रू भौतिक तुला चित्रा 2 रू संयुक्त सूक्ष्मदशीर् ऽ आम प्रयोग की वस्तुएं जैसे सोल्ड्ररन राॅड, हथौड़ी, प्लायर, डिªल मशीन, लोहा काटने की आरी, कटर, पेचकस का सैट, स्पैनर, टाॅचर् इत्यादि को प्रयोगशाला में किसी सुविधजनक स्थान पर रखना चाहिए। सामान्य विद्युत मापन युक्ितयों जैसे मल्टीमीटर को भी प्रयोगशाला में रखा जा सकता है। ऽ श्िाक्षक निदशर्न के लिए एक निदशर्न मेज भी उपलब्ध होनी चाहिए। ऽ ठोस अपश्िाष्टों के निपटारे के लिए वूफड़ादान व्यवस्था होना चाहिए जिसे प्रयोगशाला में हर मेज के पास अथवा किसी सामान्य स्थान पर रखा जा सकता है। ऽ उपकरण, काँच का सामान, तथा अभ्िाकमर्कों की बोतलों को उपयुक्त एवं विश्िाष्ट स्थानों पर रखा जाता है। प्रयोगशाला के वुफछ सामान्य उपकरणों तथा काँच के सामानों को चित्रा 3 में दिखाया गया है। पेट्री डिश द्रोणी ;जतवनहीद्ध व्ल्पफ बोतल कवरस्िलपप्लास्िटक की बोतल गोल पेंदे वाला;धेने के लिएद्ध फ्रलास्क छड़ चुम्बक स्लाइड उत्तल लेंस अवतल दपर्ण बीकर तापमापी विस्तार क्लैंप निकास नली परखनली क्वथन नली परखनली होल्डर रिंग क्लेंम्प मापक सिलिण्डर क्रसुबिल टोंग तार जाली बनर्र त्रिापाद स्टैण्डपफोरसेप्स प्रयोगशाला स्टैंड गैल्वानोमीटर स्िपरिट लैम्प परखनली ब्रशधरा नियंत्राकआवध्र्क लेन्स विराम घड़ी पूवर् - प्रयोगशाला परिचचार् द्वारा विद्याथ्िार्यों को यह सुस्पष्ट बोध हो जाना चाहिए कि उनके सामने स्वच्छ चित्रा आ जायेगा और वह समझने लगेंगे कि उन्हें प्रयोगशाला में क्या करना होगा। इससे विद्या£थयों को अपना ध्यान केन्िद्रत करने में सहायता मिलेगी और उन्हें प्राप्त होने वाला अनुभव अध्िक अथर्संगत होगा। यदि किसी ियाकलाप में कोइर् विशेष उपकरण अथवा कठिन प्रियायें सम्िमलित हैं तो श्िाक्षकों से अपेक्षा है कि वे विद्या£थयों को उपकरण के उपयोग तथा ियाकलाप की प्रिया के बारे में समझायंे। पूवर् - प्रयोगशाला परिचचार् संक्ष्िाप्त परंतु अथर्संगत होनी चाहिए ताकि विद्याथीर् प्रयोगशाला कायर् में दक्ष हो जायें। कभी - कभी विद्या£थयों के साथ प्रयोगशाला की कक्षा एक दिन पहले की जाती है ताकि विद्याथीर् को जो प्रयोगशाला कायर् सम्पन्न करने हैं उनके लिए उसे पयार्प्त समय मिले। प्रयोगशाला अभ्यास के निदेर्श सुस्पष्ट होने चाहिए। इन निदेर्शों को मौख्िाक रूप में, लिख्िात रूप में अथवा प्रयोगशाला के पूवर् सत्रा के दौरान परिचचार् द्वारा दिया जा सकता है। कभी - कभी उन निदेर्शों को जिन्हें विद्याथ्िार्यों को पहले दिया जा चुका है को सारांश रूप में ब्लैकबोडर् पर लिखकर समझाना भी सहायक हो सकता है। पश्च - प्रयोगशाला परिचचार् के दौरान विद्याथीर् अपने आंकड़ों को प्रस्तुत तथा उनका विश्लेषण कर सकते हैं। ये परिचचार्एं विज्ञान की विषयवस्तु तथा प्रियाओं के बोध का विद्याथ्िार्यों में विस्तार करने में अत्यिाक सहायक होती हैं। 1ण्3 सामान्य प्रयोगशाला नियमविज्ञान प्रयोगशाला में सभी प्रयोगकत्तार्ओं को निम्नलिख्िात सामान्य नियमों का पालन करना होता हैः ऽ विद्याथीर् को उस प्रयोग की पहले ही तैयारी कर लेनी चाहिए, जिसे वह प्रयोगशाला में सम्पन्न करेंगे। ऽ विद्याथीर् नियमित रूप से प्रायोगिक कक्षा में अपनी प्रायोगिक नोटबुक, प्रायोगिक पुस्ितका, ज्यामिती बाॅक्स, पेंसिल, पेंसिल शापर्नर तथा रबड़ लायें। यदि उपलब्ध है तो प्रयोगशालाओं में कायर् करते समय प्रयोगशाला कोट अथवा एप्रन अवश्य पहनना चाहिए। ऽ विद्या£थयों को नियत स्थान पर रहकर ही प्रयोग सावधनीपूवर्क सम्पन्न करना चाहिए और उन्हें श्िाक्षक के निदेर्शों का कड़ाइर् से पालन करना चाहिए। प्रयोगशाला में किसी को भी इध्र - उध्र नहीं घूमना चाहिए। किसी भी प्रकार की सहायता अथवा दिशा निदेर्शों के लिए श्िाक्षक का परामशर् अवश्य लेना चाहिए। अपश्िाष्ट अभ्िाकमर्कों का निपटारा बहुत ही सावधनी से करना चाहिए। ऽ सभी उपकरणों जैसे सूक्ष्मदशीर्, भौतिक तुला, मापन युक्ितयाँ तथा काँच के सामान का सावधनी से उपयोग करना चाहिए तथा कायर् आरंभ करने से पूवर् इनके प्रकायो± का बोध अवश्य कर लेना चाहिए। ऽ अभ्िाकमर्क की बोतलों का प्रयोग करने से पूवर् उन पर लगे लैबलों को सावधनीपूवर्क पढ़ना चाहिए। अभ्िाकमर्क बोतलों तथा रसायनों का प्रयोग करने के पश्चात् उन्हें यथावत् उनके निधर्रित स्थानों पर रखना चाहिए। रसायन अभ्िाकमर्क का प्रयोग करने के तुरंत बाद बोतल को ढक्कन से बंद कर देना चाहिए। अभ्िाकमर्क के संदूषण को रोकने के लिए ग्लास राॅड, पिफल्टर पेपर, ड्राॅपर को सीध्े अभ्िाकमर्क बोतल में कदापि नहीं डुबोना चाहिए। आंश्िाक रूप से प्रयोग की गयी सामग्री को वापस अभ्िाकमर्क बोतल में नहीं डालना चाहिए। ऽ किसी अभ्िाकमर्क को गमर् करते समय अथवा किसी अन्य अभ्िाकमर्क में मिलाते समय परखनली के मँुह को अपने तथा अपने किसी भी साथी की ओर नहीं करना चाहिए ;चित्रा 4द्ध। ऽ रसायनों अथवा इनसे उत्पन्न वाष्पों को सीध्े नहीं सूँघना चाहिए। वाष्पों को धीरे से हाथ से हवा करते चित्रा 4 रू वाष्पों की गंध् को जानने तथा क्वथन नली को गमर् करने की सही विध्ि ऽ किसी अम्ल को तनु करने के लिए उसमंे जल कदापि नहीं मिलाइए। इसके स्थान पर चित्रा 5 में दशार्ए अनुसार काँच की छड़ द्वारा जल में अम्ल की बूँद मिलानी चाहिए। चित्रा 5 रू तनुकरण के लिए जल में अम्ल मिलाने की सही विध्ि ऽ रसायनों को कभी भी हाथ में न लें और किसी भी रसायन का कभी भी स्वाद न चखें। ऽ अपनी कायर्कारी मेज और उसके आस - पास के स्थान में सपफाइर् रखनी चाहिए। प्रयोग की समाप्ित पर सभी प्रयोगशाला उपकरणों को यथावत् उनके नियत स्थान पर रखना चाहिए। ऽ प्रयोगशाला में खान - पान न करें। प्रयोगशाला की कक्षा के पश्चात् सदैव हाथ धेएं। ऽ प्राथमिक चिकित्सा किट तथा अग्िन शामक यंत्रों को चलाने की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। किसी भी प्रकार की दुघर्टना अथवा चोट अथवा उपकरण का टूटना आदि के बारे में श्िाक्षक को तुरंत सूचित करें। ऽ विद्याथीर्, विद्युत से संबंिात कोइर् भी प्रयोग प्रारंभ करने से पहले श्िाक्षक से संयोजित परिपथ की जाँच करा लें। 1ण्4 प्राथमिक चिकित्सा/उपचार प्राथमिक चिकित्सा किट् किसी भी विज्ञान - प्रयोगशाला का आवश्यक भाग है जिसे सरल सुगम स्थान पर रखा जाता है। विज्ञान प्रयोगशाला में अिाकांश दुघर्टनाएं संयोगवश अथवा ध्यान भंग होने के कारण होती हंै। दुघर्टना का कारण कोइर् भी क्यों न हो प्राथमिक उपचार तुरंत प्रदान किया जाना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो पीडि़त व्यक्ित को डाॅक्टर के पास ले जाना चाहिए। दुघर्टनाओं के कारण होने वाली वुफछ सामान्य क्षतियाँ तथा उनके प्राथमिक उपचार नीचे दिए गए हैं। दग्ध् प्रयोगशाला में दग्ध ;इनतदेद्ध भाप, गमर् जल, अम्लों अथवा क्षारों द्वारा हो सकते हैं। इनमें प्रत्येक के कारण होने वाले दग्धें के प्राथमिक उपचार अलग - अलग हैं। इनमें से वुफछ के प्रदान किए जाने वाले प्राथमिक उपचार निम्न हैंः ऽ भाप अथवा गमर् जल के कारण उत्पन्न दग्ध् के लिए प्रभावित भाग को ठंडे बहते हुए जल से धोना चाहिए। बपर्फ का प्रयोग नहीं करना चाहिए। एक बार जब प्रभावित भाग ठंडा पड़ जाए तो उसे धीरे - धीरे सापफ कपड़े से सुखाने के पश्चात् रोगाणुरोधक ;एंटीसेप्िटकद्ध महरम लगाइए। ऽ अम्ल से उत्पन्न दग्ध् के लिए, जख्म अथवा प्रभावित भाग को जल से धोकर उस पर सोडियम हाइड्रोजन काबोर्हाइड्रेट का तनु विलयन डालिए। घाव को पुनः जल से धेइए और सापफ कपड़े से धीरे - ध्ीरे सुखाकर उस पर ऐन्टीसेप्िटक महरम लगाइए। ऽ क्षारीय दग्ध् के लिए, सवर्प्रथम पयार्प्त से धेइए ताकि घाव से सारा क्षार निकल जाय। प्रभावित भाग को सापफ कपड़े से शुष्क करके ऐन्टीसेप्िटक महरम लगाइए। काँच से उत्पन्न काट एवं घाव घाव से सावधनीपूवर्क सभी दिखाइर् देने योग्य काँच के टुकड़े हटाइए। घाव को गंदगी तथा ध्ूल से बचाइए। घाव पर यदि छोटे - छोटे काँच के टुकड़े चिपके हों तो उन टुकड़ों को हटाने के लिये घाव पर ठंडे जल की धर डालिए। घाव को सापफ रूइर् अथवा कपड़े की सहायता से दबाकर रक्तस्राव को नियंत्रिात कीजिए। ऐन्टीसेप्िटक घोल अथवा ऐन्टीसेप्िटक महरम को घाव पर लगाइए। पीडि़त को यदि आवश्यकता है, तो डाॅक्टर के पास ले जाइए। आँख में क्षति आँखों में उत्पन्न क्षति के प्रकरण में आँख को ठंडे जल से धेइए। आँखों को मलिए नहीं। तुरंत डाॅक्टर का परामशर् लीजिए। अग्िन यदि कपड़ों में आग लग जाए तो इध्र - उध्र न दौडें़। तुरंत पफशर् पर लेटिए और लुढ़कते रहिए। यदि किसी ज्वलनशील तरल से भरे पात्रा में तापन के समय आग लग जाती है तब तुरंत ही गैस बनर्र को बुझा दीजिए तथा पात्रा को सभी अभ्िाकमर्कों तथा रसायनों से दूर ले जाइए। भीगे कपड़े से पात्रा के मँुह को बंद करिए। यदि आग नियंत्राण से बाहर हो जाए तो अग्िन शामकों का प्रयोग करना चाहिए। यदि विद्युत परिपथ में शाटर् स£कट के कारण आग लगी है तब विद्युत आपूतिर् के मुख्य स्िवच को तुरंत ‘आपफ’ कर दें और प्रभावित क्षेत्रा पर रेत ;मिट्टðीद्ध पेफवेंफ। ऐसे प्रकरणों में जल का उपयोग कदापि न करें। गैसों का अन्तःश्वसन सल्पफर डाइआॅक्साइड, क्लोरीन अथवा ब्रोमीन जैसी गैसें यदि कोइर् विद्याथीर् अंतः श्वसित कर लेता है तो, तुरंत ही उस विद्याथीर् को खुली हवा में ले जाइए ताकि वह गहरी साँस ले सके। तदुपरांत उसे अमोनिया की वाष्प सुँघाइए। यदि अंतः श्वसित गैस अमोनिया है तब किसी भी प्रकार का पफल - रस अथवा नींबू - रस पिलाइए। यदि अम्लीय वाष्प का अंतः श्वसन हो जाए, तब तनु अमोनियम हाइड्राक्साइड सुँघाइए। दुघर्टना की सूचना तुरंत ही श्िाक्षक/प्रयोगशाला स्टापफ को दें ताकि शीघ्रातिशीघ्र चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध् हो सके। 1ण्5 प्रयोग का अभ्िालेखन प्रयोगशाला में सम्पन्न प्रत्येक प्रयोग की रिपोटर् तैयार करना तथा किये गये कायर् का रिकाडर् रखना एक मूलभूत आवश्यकता है। प्रत्येक प्रयोग की रिपोटर् ऐसी होनी चाहिए कि उसमें प्रयोग सम्पन्न करने के सभी चरण तथा प्राप्त परिणाम की जानकारी प्राप्त होती हो। अतः यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रत्येक प्रयोग की रिपोटर् को भ्िान्न - भ्िान्न शीषर्कों के अंतगर्त प्रस्तुत किया जाय ताकि वह आसानी से समझ में आ सके। रिपोटर् के प्रस्तुतीकरण का नमूना नीचे सुझाया गया है। उद्देश्य इसमें प्रयोग के उद्देश्य का सुस्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। सि(ांत इसमें इनके मूल सि(ांतों एवं नियमों की व्याख्या की जानी चाहिए जिस पर प्रयोग आधारित है अथवा जिसे आप सत्यापित करना चाहते है। जहाँ कहीं आवश्यकता हो प्रयोग में सम्िमलित मूलभूत नियमों को गण्िातीय सूत्रों, समीकरणों अथवा स्वच्छ व नामांकित आरेखों द्वारा संपूणर् किया जाना चाहिए। आवश्यक सामग्री प्रयोग सम्पन्न करने के लिए आवश्यक उपकरणों, मापन युक्ितओं तथा अन्य सभी वस्तुओं और पदाथो± को सूचीब( करिए। कायर्वििा इस शीषर्क के अंतगर्त प्रयोग सम्पन्न करने के लिए अपनाए गए विभ्िान्न चरणों का क्रमवार उल्लेख किया जाना चाहिए। यदि कोइर् नामांकित आरेख है तो प्रायोगिक व्यवस्था का चित्राण प्रस्तुत करने के लिए उसे आलेख्िात किया जाना चाहिए। प्रेक्षण प्रयोग सम्पन्न करते समय सभी प्रेक्षणों को पूणर्तः व उचित ढंग से नोट बुक में रिकाडर् करना चाहिए। इन्हें तालिका के रूप में, आरेखों अथवा कथनों अथवा इनके संयोजनों के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। प्रेक्षणोंकी प्रकृति के अनुसार यदि वुफछ प्रेक्षण त्राुटिपूणर् रिकाडर् हो गए हैं तो उन्हें मिटाना नहीं चाहिए। उन्हें एक रेखा खींचकर काटा जा सकता है तथा सही प्रेक्षण ;पाठ्याँकद्ध लिखे जा सकते हैं। सभी मापनों को उनके उचित मात्राकों सहित व्यक्त किया जाना चाहिए। परिकलन यदि किसी प्रयोग के परिमाण को प्राप्त करने के लिए प्रेक्षणों पर आधारित परिकलनों की आवश्यकता है तो आंकड़ों को भरने के लिए सही सूत्रों एवं मात्राकों का उपयोग करना चाहिए। सभी परिकलन अत्यंतसावधानीपूवर्क करने चाहिए। परिमाण तथा उत्तरों का उचित ैप् मात्राकों सहित उल्लेख किया जाना चाहिए। वुफछ प्रयोगों में परिकलन के एक अंश के रूप में ग्रापफ आलेखन की आवश्यकता भी पड़ सकती है। परिणाम तथा परिचचार् किसी प्रयोग के सभी परिणामों तथा उपलब्िध्यों को सरल तथा स्पष्ट भाषा में लिखना चाहिए। सावधनियाँ एवं त्राुटि के स्रोत प्रयोग सम्पन्न करते समय जिन - जिन सावधनियों का पालन किया गया है उन सभी को नोट करना चाहिए तथा उनका उल्लेख रिपोटर् में करना चाहिए। यद्यपि वुफछ प्रयोगों को सम्पन्न करते समय वुफछ सावधनियाँ सामान्य हों, परंतु यह एक प्रयोग से दूसरे प्रयोग के लिये प्रायः ये अलग भी हो सकती हैं। और यह सब प्रयोग की प्रवृफति, उपलब्ध् उपकरण तथा सुविधओं पर भी निभर्र करता है। सावधनियों के अतिरिक्त त्राुटियों के संभावित स्रोत जो नकली उपकरणों, वायुमंडलीय परिस्िथतियों में परिवतर्न अथवा किसी अन्य कारणवश होते हैं उनका उल्लेख भी किया जाना चाहिए। प्रयोगात्मक नोटबुक में प्रत्येक प्रयोग की रिपोटर् को नए पृष्ठ से आरम्भ किया जाना चाहिए तथा किए गए प्रयोगों की सूची प्रयोगात्मक नोटबुक में आरम्भ में दी जानी चाहिए।

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