अध्याय 15 हमारा पयार्वरण हम ‘पयार्वरण’ शब्द से परिचित हंै। इस शब्द का प्रयोग टेलीविजन पर, समाचार पत्रों मेें तथा हमारे आस - पास लोगों द्वारा प्रायः किया जाता है। हमारे बुजुगर् हमसे कहते हंै कि अब वह पयार्वरण/वातावरण नहीं रहा जैसा कि पहले था, दूसरे कहते हैं हमें स्वस्थ पयार्वरण में काम करना चािहए। ‘पयार्वरणीय’ समस्याओं पर चचार् के लिए विकसित एवं विकासशील देशों के वैश्िवक सम्मेलन भी नियमित रूप से होते रहते हैं। इस अध्याय में हम चचार् करेंगे कि विभ्िान्न कारक पयार्वरण में किस प्रकार अन्योन्यवि्रफया करते हैं तथा हम पयार्वरण पर क्या प्रभाव डालते हैं। कक्षा 9 में हमने जाना कि विभ्िान्न पदाथो± का चव्रफण पयार्वरण में अलग - अलग जैव - भौगोलिक रासायनिक चव्रफों में होता है। इन चव्रफों में अनिवायर् पोषकऋ जैसेदृनाइट्रोजन, काबर्न, आॅक्सीजन एवं जल एक रूप से दूसरे रूप में बदलते हैं। अब हम जानेंगे कि मनुष्य की गतिवििायाँ इन चव्रफों को किस प्रकार प्रभावित करती हैं। 15.1 क्या होता है जब हम अपने अपश्िाष्ट पयार्वरण में डालते हैं? अपनी दैनिक गतिवििायों में हम बहुत से ऐसे पदाथर् उत्पादित करते हैं जिन्हें पेंफकना पड़ता है। इनमें से अपश्िाष्ट पदाथर् क्या हंै? जब हम उन्हें पेंफक देते हैं तो उनकाक्या होता है? आइए, इन प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए निम्न वि्रफयाकलाप करते हैं। ियाकलाप 15.1 ऽ अपने घर से कचरा एकत्रा कीजिए। इसमें पूरे दिन में उत्पन्न वूफड़ा - कचरा, जैसे कि रसोइर् का वूफड़ा ;संदूष्िात भोजन, सब्िजयों के छिलके, चाय की उपयोग की गइर्पिायाँ, दूध की खाली थैली तथा खाली डिब्बेद्ध, रद्दी कागश, दवा की खाली बोतल/स्िट्रप्स, बबल पैवफ, पुराने पफटे कपड़े तथा टूटे जूते आदि हो सकते हैं। ऽ इसे विद्यालय के बगीचे में एक गड्ढे में दबा दीजिए, यदि ऐसा स्थान उपलब्ध न हो तो इस कचरे को किसी पुरानी बाल्टी अथवा गमले में एकत्रा करके उसे 15 बउ मोटी मिट्टी की पतर् से ढक दीजिए। ऽ इसे नम रख्िाए तथा 15 दिनों के अंतराल पर इसका अवलोकन करते रहिए। ऽ वह कौन - से पदाथर् हैं जो लंबे समय बाद भी अपरिवतिर्त रहते हैं? ऽ वे कौन - से पदाथर् हैं जिनके स्वरूप एवं संरचना में परिवतर्न आता है? ऽ जिन पदाथो± के स्वरूप में समय के साथ परिवतर्न आया है, उनमें कौन - सेे पदाथर् अतिशीघ्र परिवतिर्त हुए हैं? हमने ‘जैव प्रव्रफम’ वाले अध्याय में पढ़ा है कि हमारे द्वारा खाए गए भोजन का पाचन विभ्िान्न एंजाइमों द्वारा किया जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही एंजाइम भोजन के सभी पदाथो± का पाचन क्यों नहीं करता ? एंजाइम अपनी वि्रफया में विश्िाष्ट होते हैं। किसी विशेष प्रकार के पदाथर् के पाचन/अपघटन के लिए विश्िाष्ट एंजाइम की आवश्यकता होती है। इसीलिए कोयला खाने से हमें उफजार् प्राप्त नहीं हो सकती। इसी कारण, बहुत से मानव - निमिर्त पदाथर् जैसे कि प्लास्िटक का अपघटन जीवाणु अथवा दूसरे मृतजीवियों द्वारा नहीं हो सकता। इन पदाथो± पर भौतिक प्रव्रफम जैसे कि उफष्मा तथा दाब का प्रभाव होता है, परंतु सामान्य अवस्था में लंबे समय तक पयार्वरण में बने रहते हैं। वे पदाथर् जो जैविक प्रव्रफम द्वारा अपघटित हो जाते हैं, ‘जैव निम्नीकरणीय’ कहलाते हैं। आपके द्वारा दबाए गए पदाथो± में से कितने ‘जैव निम्नीकरणीय’ थे? वे पदाथर् जो इस प्रव्रफम में अपघटित नहीं होते ‘अजैव निम्नीकरणीय’ कहलाते हैं। यह पदाथर् सामान्यतः ‘अवि्रफय ;प्दमतजद्ध ’ हैं तथा लंबे समय तक पयार्वरण में बने रहते हैं अथवा पयार्वरण के अन्य सदस्यों को हानि पहुँचाते हैं। ियाकलाप 15.2 ऽ पुस्तकालय अथवा इंटरनेट द्वारा ‘जैव निम्नीकरणीय’ एवं ‘अजैव निम्नीकरणीय’ पदाथो± के विषय में अिाक जानकारी प्राप्त कीजिए। ऽ अजैव निम्नीकरणीय पदाथर् कितने समय तक पयार्वरण में इसी रूप में बने रह सकते हैं? ऽ आजकल ‘जैव निम्नीकरणीय प्लास्िटक’ उपलब्ध हैं। इन पदाथो± के विषय में और अिाक जानकारी प्राप्त कीजिए तथा पता लगाइए कि क्या उनसे पयार्वरण को हानि हो सकती है अथवा नहीं। प्रश्न 123 क्या कारण है कि वुफछ पदाथर् जैव निम्नीकरणीय होते हैं और वुफछ अजैव निम्नीकरणीय? ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदाथर् पयार्वरण को प्रभावित करते हैं। ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदाथर् पयार्वरण को प्रभावित करते हैं। घ् 15.2 पारितंत्राकृइसके संघटक क्या हैं? सभी जीव जैसे कि पौधे, जंतु, सूक्ष्मजीव एवं मानव तथा भौतिक कारकों में परस्पर अन्योन्यवि्रफया होती है तथा प्रवृफति में संतुलन बनाए रखते हैं। किसी क्षेत्रा के सभी जीव तथा वातावरण के अजैव कारक संयुक्त रूप से पारितंत्रा बनाते हैं। अतः एक पारितंत्रा में सभी जीवों के जैव घटक तथा अजैव घटक होते हैं। भौतिक कारकऋ जैसे - ताप, वषार्, वायु, मृदा एवं खनिज इत्यादि अजैव घटक हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप बगीचे में जाएँ तो आपको विभ्िान्न पौधेऋ जैसे - घास, वृक्ष, गुलाब, चमेली, सूयर्मुखी जैसे पूफल वाले सजावटी पौधे तथा मेंढ़क, कीट एवं पक्षी जैसे जंतु दिखाइर् देंगे। यह सभी सजीव परस्पर अन्योन्यवि्रफया करते हैं तथा इनकी वृि, जनन एवं अन्य वि्रफयाकलाप पारितंत्रा के अजैव घटकों द्वारा प्रभावित होते हैं। अतः एक बगीचा एक पारितंत्रा है। वन, तालाब तथा झील पारितंत्रा के अन्य प्रकार हैं। ये प्रावृफतिक पारितंत्रा हैं, जबकि बगीचा तथा खेत मानव निमिर्त ;वृफत्रिामद्ध पारितंत्रा हैं। ियाकलाप 15.3 ऽ संभवतः आपने एक जल जीवशाला ;ंुनंतपनउद्ध देखी होगी। आइए, इसे बनाने का प्रयास करते हैं। ऽ जल जीवशाला बनाते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना होगा? मछलियों को तैरने के लिए पयार्प्त स्थान ;एक बड़ा जार भी ले सकते हैंद्ध जल, आॅक्सीजन एवं भोजन। ऽ हम एक वायु पंप ;वातित्राद्ध द्वारा आॅक्सीजन पंप कर सकते हैं तथा मछली का भोजन बाशार में उपलब्ध होता है। ऽ यदि हम इसमें वुफछ पौधे लगा दें तो यह एक स्वनिवार्ह तंत्रा बन जाएगा। क्या आप सोच सकते हैं कि यह कैसे होता है? एक जल जीवशाला मानव - निमिर्त पारितंत्रा का उदाहरण है। ऽ क्या हम जल जीवशाला बनाने के उपरांत इसे ऐसे ही छोड़ सकते हैं? यदा - कदा इसकी सप़फाइर् की क्या आवश्यकता है? क्या हमें इसी प्रकार तालाबों एवं झीलों की सप़फाइर् भी करनी चाहिए? क्यांे और क्यों नहीं? हम पिछली कक्षा में पढ़ चुके हैं कि जीवन निवार्ह के आधार जीवों को उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक वगो± में बाँटा गया है। आइए, स्मरण करने का प्रयास करें जो हमने स्वनिवार्ह पारितंत्रा स्वयं बनाया था। कौन - से जीव सूयर् के प्रकाश एवं क्लोरोपिफल की उपस्िथति में अकाबर्निक पदाथो± से काबर्निक पदाथर् जैसे कि, शवर्फरा ;चीनीद्ध एवं मंड का निमार्ण कर सकते हैं? सभी हरे पौधों एवं नील - हरित शैवाल जिनमें प्रकाश संश्लेषण की क्षमता होती है, इसी वगर् में आते हैं तथा उत्पादक कहलाते हैं। सभी जीव प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से अपने निवार्ह हेतु उत्पादकों पर निभर्र करते हैं? ये जीव जो उत्पादक द्वारा उत्पादित भोजन पर प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से निभर्र करते हैं, उपभोक्ता कहलाते हैं। उपभोक्ता को मुख्यतः शाकाहारी, मांसाहारी तथा सवार्हारी एवं परजीवी में बाँटा गया है। क्या इनमें से प्रत्येक प्रकार के वगर् के उदाहरण बता सकते हैं? ऽ ऐसी स्िथति की कल्पना कीजिए जब आप जल जीवशाला को साप़फ करना छोड़ दें तथा वुुफछ मछलियाँ एवं पौधे इसमें मर भी गए हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि क्या होता है जब एक जीव मरता है? जीवाणु और कवक जैसे सूक्ष्मजीव मतजैव अवशेषों का अपमाजर्न करते हैं। ये सूक्ष्मजीव अपमाजर्क हैं क्योंकि ये ृजटिल काबर्निक पदाथो± को सरल अकाबर्निक पदाथो± में बदल देते हैं जो मिट्टी ;भूमिद्ध में चले जाते हैं तथा पौधों द्वारा पुनः उपयोग में लाए जाते हैं। इनकी अनुपस्िथति में मृत जंतुओं एवं पौधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? क्या अपमाजर्कों के न रहने पर भी मृदा की प्रावृफतिक पुनःपूतिर् होती रहती हैं? ियाकलाप 15.4 ऽ जल जीवशाला बनाते समय क्या आपने इस बात का ध्यान रखा कि ऐसे जलीय जीवों को साथ न रखें जो दूसरों को खा जाएँ। अन्यथा क्या हुआ होता? ऽ समूह बनाइए और चचार् कीजिए कि उपरोक्त समूहों में जीव एक - दूसरे पर किस प्रकार निभर्र करते हैं। ऽ जलीय जीवों के नाम उसी व्रफम में लिख्िाए जिसमें एक जीव दूसरे जीव को खाताहै तथा एक ऐसी शृंखला की स्थापना कीजिए जिसमें कम से कम तीन चरण हों।→ → ऽ क्या आप किसी एक समूह को सबसे अिाक महत्त्व का मानते हैं? क्यों अथवा क्यों नहीं? 15ण्2ण्1 आहार शृंखला एवं जाल वि्रफयाकलाप 15.4 में हमने जीवों की एक शृंखला बनाइर् थी जो एक - दूसरे का आहार करते हैं। विभ्िान्न जैविक स्तरों पर भाग लेने वाले जीवों कीयह शंृखला आहार शृंखला का निमार्ण करती हैं ;चित्रा 15.1द्ध। आहार शृंखला का प्रत्येक चरण अथवा कड़ी एक पोषी स्तर बनाते हैं। स्वपोषी अथवा उत्पादक प्रथम पोषी स्तर हैं तथा सौर उफजार् का स्िथरीकरण करके उसे विषमपोष्िायों अथवा उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराते हैं। शाकाहारी अथवा प्राथमिक उपभोक्ता द्वितीय पोषी स्तरऋ छोटे ;ंद्ध ;बद्धमांसाहारी अथवा द्वितीय उपभोक्ता तीसरे पोषी स्तरऋ तथा बड़े मांसाहारी चित्रा 15.1 ;इद्धअथवा तृतीय उपभोक्ता चैथे पोषी स्तर का निमार्ण करते हैं ;चित्रा 15.2द्ध। प्रकृति में आहार शृंखला;ंद्धवन में ;इद्धघासहम जानते हैं कि जो भोजन हम खाते हैं, हमारे लिए उफजार् स्रोत का के मैदानों में;बद्धतालाब मेंकायर् करता है तथा विभ्िान्न कायो± के लिए उफजार् प्रदान करता है। अतः पयार्वरण के विभ्िान्न घटकों वफी परस्पर अन्योन्यवि्रफया में निकाय के एक घटक से दूसरे में उफजार् का प्रवाह होता है। जैसा कि हम पढ़ चुके हैं, स्वपोषी सौर प्रकाश में निहित उफजार् को ग्रहण करके रासायनिक उफजार् में बदल देते हैं। यह उफजार् संसार के संपूणर् जैवसमुदाय की सभी वि्रफयाओं के संपादन में सहायक है। स्वपोषी से उफजार् विषमपोषी एवं अपघटकों तक जाती है जैसा कि ‘उफजार् के स्रोत’ नामक पिछले अध्याय में हमने जाना था कि जब उफजार् का एक रूप से दूसरे रूप में परिवतर्न होता है, तो पयार्वरण में उफजार् की वुफछ मात्रा का अनुपयोगीउफजार् के रूप में Éास हो जाता है। पयार्वरण के विभ्िान्न घटकों के बीच उफजार् के प्रवाह का विस्तृत अध्ययन किया गया तथा यह पाया गया किः तृतीय उपभोक्ता द्वितीय उपभोक्ता प्राथमिक उपभोक्ता उत्पादक चित्रा 15.2 पोषी स्तर ऽ एक स्थलीय पारितंत्रा में हरे पौधे की पिायों द्वारा प्राप्त होने वाली सौर उफजार् का लगभग 1ः भाग खाद्य ऊजार् में परिवतिर्त करते हैं। ऽ जब हरे पौधे प्राथमिक उपभोक्ता द्वारा खाए जाते हैं, उफजार् की बड़ी मात्रा का पयार्वरण में उफष्माके रूप में Éास होता है, वुफछ मात्रा का उपयोग पाचन, विभ्िान्न जैव कायो± में, वृि एवं जनन में होता है। खाए हुए भोजन की मात्रा का लगभग 10ः ही जैव मात्रा में बदल पाता है तथा अगले स्तर के उपभोक्ता को उपलब्ध हो पाता है। ऽ अतः हम कह सकते हैं प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध काबर्निक पदाथो± की मात्रा का औसतन 10ः ही उपभोक्ता के अगले स्तर तक पहुँचता है। ऽ क्योंकि उपभोक्ता के अगले स्तर के लिए उफजार् की बहुत कम मात्रा उपलब्ध हो पाती है, अतःआहार शृंखला सामान्यतः तीन अथवा चार चरणकी होती है। प्रत्येक चरण पर उफजार् का Éास इतना अिाक होता है कि चैथे पोषी स्तर के बाद उपयोगी उफजार् की मात्रा बहुत कम हो जाती है। चित्रा 15.3 अनेक आहार शृंखलाओं से बना आहार जाल ऽ सामान्यतः निचले पोषी स्तर पर जीवों की संख्या अिाक होती है, अतः उत्पादक स्तर पर यह संख्या सवार्िाक होती है। ़ऽ विभ्िान्न आहार शृंखलाओं की लंबाइर् एवं जटिलता में कापफी अंतर होता है। आमतौर पर प्रत्येक जीव दो अथवा अिाक प्रकार के जीवों द्वारा खाया जाता है, जो स्वयं अनेक प्रकार के जीवों का आहार बनते हैं। अतः एक सीधी आहार शृंखला के बजाय जीवों के मध्य आहार संबंध शाखान्िवत होते हैं तथा शाखान्िवत शृंखलाओं का एक जाल बनाते हैं जिससे ‘आहार जाल’ कहते हैं ;चित्रा 15ण्3द्ध। उफजार् प्रवाह के चित्रा ;15ण्4द्ध से दो बातें स्पष्ट होती हैं। पहली, उफजार् का प्रवाह एकदिश्िाक अथवा एक ही दिशा में होता है। स्वपोषी जीवों द्वारा ग्रहण की गइर् उफजार् पुनः सौर उफजार् में परिवतिर्त नहीं होती तथा शाकाहारियों को स्थानांतरित की गइर् उफजार् पुनः स्वपोषी जीवों को उपलब्ध नहीं होती है। जसैे यह विभ्िान्न पोषी स्तरों पर क्रमिक स्थानांतरित होती है अपने से पहले स्तर के लिए उपलब्ध नहीं होती। आहार शृंखला का एक दूसरा आयाम यह भी है कि हमारी जानकारी के बिना ही वुफछ हानिकारक रासायनिक पदाथर् आहार शृंखला से होते हुए हमारे शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं। आप कक्षा 9 में पढ़ चुके हैं कि जल प्रदूषण किस प्रकार होता शीषर् मांसाहारी मांसाहारी उत्पादक सूयर् का प्रकाश चित्रा 15.4 एक पारितंत्रा में उफजार् के प्रवाह का आरेख चित्रा है। इसका एक कारण है कि विभ्िान्न पफसलों को रोग, एवं पीड़कों से बचाने के लिए पीड़कनाशक एवं रसायनों का अत्यिाक प्रयोग करना है ये रसायन बह कर मिट्टी में अथवा जल स्रेोत में चले जाते हैं। मिट्टी स इन पदाथो± का पौधों द्वारा जल एवं खनिजों के साथ - साथ अवशोषण हो जाता है तथा जलाशयों से यह जलीय पौधों एवं जंतुओं में प्रवेश कर जाते हैं। यह केवल एक तरीका है जिससे वे आहार शृंखला में प्रवेश करते हैं। क्योंकि ये पदाथर् अजैव निम्नीवृफत हैं, यह प्रत्येक पोषी स्तर पर उतरोत्तर संग्रहित होते जाते हैं। क्योंकि किसी भी आहार शृंखला में मनुष्य शीषर्स्थ है, अतः हमारे शरीर में यह रसायन सवार्िाक मात्रा में संचित हो जाते हैं। इसे ‘जैव - आवधर्न कहते हैं। यही कारण है कि हमारे खाद्यान्नकृ गेहूँ तथा चावल, सब्िजयाँ, पफल तथा मांस में पीड़क रसायन के अवश्िाष्ट विभ्िान्न मात्रा में उपस्िथत होते हैं। उन्हें पानी से धोकर अथवा अन्य प्रकार से अलग नहीं किया जा सकता। प्रश्न 12 पोषी स्तर क्या हैं? एक आहार शृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभ्िान्न पोषी स्तर बताइए। पारितंत्रा में अपमाजर्कों की क्या भूमिका है? घ् 15.3 हमारे वि्रफयाकलाप पयार्वरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं? हम सब पयार्वरण का समेकित भाग हैं। पयार्वरण में परिवतर्न हमें प्रभावित करते हैं तथा हमारे वि्रफयाकलाप/गतिवििायाँ हमारे चारों ओर के पयार्वरण को प्रभावित करते हैं। कक्षा 9 में हम चढ़ चुके हैं कि हमारे वि्रफयाकलाप पयार्वरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। इस भाग में हम पयार्वरण संबंधी दो समस्याओं के विषय में विस्तार से चचार् करेंगे, वे हैं - ओशोन परत का अपक्षय तथा अपश्िाष्ट निपटान। 15ण्3ण्1 ओजोन परत तथा यह किस प्रकार अपक्षयित होती है ओशोन ष्व्ष् के अणु आॅक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनते हैं जबकि सामान्य3 आॅक्सीजन जिसके विषय में हम प्रायः चचार् करते हंै, के अणु में दो परमाणु होते हैं। जहाँ आॅक्सीजन सभी प्रकार के वायविक जीवों के लिए आवश्यक है, वहीं ओशोन एक घातक विष है। परंतु वायुमंडल के उफपरी स्तर में ओशोन एक आवश्यक प्रकायर् संपादित करती है। यह सूयर् से आने वाले पराबैंगनी विकिरण से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है। यह पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यंत हानिकारक है। उदाहरणतः, यह गैस मानव में त्वचा का वैंफसर उत्पन्न करती हैं। वायुमंडल के उच्चतर स्तर पर पराबैंगनी ;न्टद्ध विकिरण के प्रभाव से आॅक्सीजन ;व्द्ध अणुओं से ओशोन बनती है। उच्च उफजार् वाले पराबैंगनी विकिरण आॅक्सीजन2अणुओं ;व्द्ध को विघटित कर स्वतंत्रा आॅक्सीजन ;व्द्ध परमाणु बनाते हैं। आॅक्सीजन के2ये स्वतंत्रा परमाणु संयुक्त होकर ओशोन बनाते हैं जैसा कि समीकरण में दशार्या गया है। पराबंै;न्टद्ध गनीव्2 ⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯→व़्व् व्व्2 →व्3़ ;ओशोन द्ध 1980 से वायुमंडल में ओशोन की मात्रा में तीव्रता से गिरावट आने लगी।क्लोरोफ्रलुओरो काबर्न ;ब्थ्ब्ेद्ध जैसे मानव संश्लेष्िात रसायनों को इसका मुख्य कारक माना गया। इनका उपयोग रेप्रफीजेरेटर ;शीतलनद्ध एवं अग्िनशमन के लिए किया जाता है। 1987 में संयुक्त राष्ट्र पयार्वरण कायर्व्रफम ;न्छम्च्द्ध में सवार्नुमति बनी कि ब्थ्ब् के उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही सीमित रखा जाए। ऽ पुस्तकालय, इंटरनेट अथवा समाचारपत्रों से पता लगाइए कि कौन - से रसायन ओशोनपरत के अपक्षय के लिए उत्तरदायी हैं? ऽ पता लगाइए कि इन पदाथो± के उत्पादन एवं उत्सजर्न के नियमन संबंधी कानून ओशोन क्षरण कम करने में कितने सपफल रहे हैं। क्या पिछले वुफछ वषो± में ओशोन - छिद्र के आकार में वुफछ परिवतर्न आया है। 15ण्3ण्2 कचरा प्रबंधन किसी भी नगर एवं कस्बे में जाने पर चारों ओर कचरे के ढेर दिखाइर् देते हैं। किसी पयर्टन स्थल पर जाइए, हमें विश्वास है कि वहाँ पर बड़ी मात्रा में खाद्य पदाथो± की खाली थैलियाँ इधर - उधर पैफली हुइर् दिख जाएँगी। पिछली कक्षाओं में हमने स्वयं द्वारा उत्पादित इस कचरे से निपटान के उपायों पर चचार् की है। आइए, इस समस्या पर अिाक गंभीरता से ध्यान दें। हमारी जीवन शैली में सुधार के साथ उत्पादित कचरे की मात्रा भी बहुत अिाकबढ़ गइर् है। हमारी अभ्िावृिा में परिवतर्न भी एक महत्वपूणर् भूमिका निवार्ह करता है। हम प्रयोज्य ;निवतर्नीयद्ध वस्तुओं का प्रयोग करने लगे हैं। पैकेजिंग के तरीकों में बदलाव से अजैव निम्नीकरणीय वस्तु के कचरे में पयार्प्त वृि हुइर् है। आपके विचार में इन सबका हमारे पयार्वरण पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? ऽ इंटरनेट अथवा पुस्तकालय की सहायता से पता लगाएँ कि इलेक्ट्राॅनिक वस्तुओं के निपटान के समय किन खतरनाक वस्तुओं से आपको सुरक्षापूवर्क छुटकारा पाना है। ये पदाथर् पयार्वरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं? ऽ पता लगाइए कि प्लास्िटक का पुनः चव्रफण किस प्रकार होता है? क्या प्लास्िटक के पुनः चव्रफण का पयार्वरण पर कोइर् समाघात होता है? प्रश्न 12 ओशोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्रा को किस प्रकार प्रभावित करती है। आप कचरा निपटान की समस्या कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं? किन्हीं दो तरीकों का वणर्न कीजिए। घ्

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