संसूचन किया जा सकता है, उस चुंबक का चुंबकीय क्षेत्रा कहलाता है। वह रेखाएँ जिनके अनुदिश लौह - चूणर् स्वयं संरेख्िात होता है, चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओंका निरूपण करती हैं। क्या किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ प्राप्त करने के अन्य कोइर् उपाय भी हैं? वास्तव में आप स्वयं किसी छड़ चुंबक की चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ खींच सकते हैं। ियाकलाप 13.3 ऽ एक छड़ चुंबक तथा एक छोटी दिव्फसूची लीजिए। ऽ किसी चिपचिपे पदाथर् से ड्राइंग बोडर् पर चिपकाए गए सप़ेफद कागश के बीचोंबीच इस चुंबक को रख्िाए। ऽ चुंबक की सीमा रेखा अंकित कीजिए। ऽ दिव्फसूची को चुंबक के उत्तर ध््रुव के निकट ले जाइए। यह वैफसे व्यवहार करता है? दिव्फसूची का दक्ष्िाण ध््रुव चुंबक के उत्तर ध्रुव की ओर संकेत करता है। दिव्फसूची का उत्तर ध््रुव चुंबक के उत्तर ध््रुव से दूर की ओर संकेत करता है। ऽ दिव्फसूची के दोनों सिरों की स्िथतियाँ नुकीली पेंसिल से अंकित कीजिए। ऽ अब दिव्फसूची को इस प्रकार रख्िाए कि इसका दक्ष्िाण ध््रुव उस स्िथति पर आ जाए जहाँ पहले उत्तर ध््रुव की स्िथति को अंकित चित्रा 13.3 किया था। उत्तर ध््रुव की इस नयी स्िथति को अंकित कीजिए। दिव्फसूचक की सहायता से चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ आरेख्िात ऽ चित्रा 13.3 में दशार्ए अनुसार चुंबक के दक्ष्िाण ध्रुव पर पहुँचने करना तक इस िया को दोहराते जाइए। ऽ अब कागश पर अंकित बिंदुआंे को इस प्रकार मिलाइए कि एक निष्कोण वक्र प्राप्त हो जाए। यह वक्र एक चुंबकीय क्षेत्रा रेखा को निरूपित करता है। उपरोक्त प्रिया को दोहराकर जितनी संभव हो सवंेफ क्षेत्रा रेखाएँ खींचिए। आपको चित्रा 13.4 में दशार्ए जैसा पैटनर् प्राप्त होगा। ये रेखाएँ चुंबक के चारों ओर के चुंबकीय क्षेत्रा को निरूपित करती हैं। इन्हें चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ कहते हैं। ऽ किसी चुंबकीय क्षेत्रा रेखा के अनुदिश गमन करते समय दिव्फसूची चित्रा 13.4 के विक्षेप का प्रेक्षण कीजिए। चुंबक के ध््रुवों के निकट जाने पर किसी छड़ चुंबक के चारों ओर क्षेत्रा रेखाएँ सुइर् के विक्षेप में वृि होती जाती है। चुंबकीय क्षेत्रा एक ऐसी राश्िा है जिसमें परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं। किसी चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा वह मानी जाती है जिसके अनुदिश दिव्फसूची का उत्तर ध््रुव उस क्षेत्रा के भीतर गमन करता है। इसीलिए परिपाटी के अनुसार चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ चुंबक के उत्तर धु्रुव से प्रकट होती हैं तथा दक्ष्िाण ध्ु्रव पर विलीन हो जाती हैं ;चित्रा 13.4 में चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं पर अंकित तीर के निशानों पर ध्यान दीजिएद्ध। चुंबक के भीतर चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं की दिशा उसके दक्ष्िाण ध्रुव से उत्तर ध््रुव की ओर होती है। अतः चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ एक बंद वक्र होती हैं। विद्युत धरा के चुंबकीय प्रभाव चुंबकीय क्षेत्रा की आपेक्ष्िाक प्रबलता को क्षेत्रा रेखाओं की निकटता की कोटि द्वारा दशार्या जाता है। जहाँ पर चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ अपेक्षाकृत अध्िक निकट होती हैं वहाँ चुंबकीय क्षेत्रा अध्िक प्रबल होता है, अथार्त वहाँ पर विद्यमान किसी अन्य चुंबक के ध्रुव पर चुंबकीय क्षेत्रा के कारण अध्िक बल कायर् करेगा ;चित्रा 13.4 देख्िाएद्ध। दो क्षेत्रा रेखाएँ कहीं भी एक - दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं। यदि वे ऐसा करें तो इसका यह अथर् होगा कि प्रतिच्छेद बिंदु पर दिव्फसूची को रखने पर उसकी सुइर् दो दिशाओं की ओर संकेत करेगी जो संभव नहीं हो सकता। 13.2 किसी विद्युत धरावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्रा ियाकलाप 13.1 में हमने यह देखा कि किसी धतु के चालक में विद्युत धरा प्रवाहित करने पर उसके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्रा उत्पन्न हो जाता है। उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा को ज्ञात करने के लिए आइए हम इसी ियाकलाप को नीचे दिए गए ढंग से करते हैं। ियाकलाप 13.4 ऽ एक लंबा सीध ताँबे का तार, 1ण्5 ट के दो या तीन सेल तथा एक प्लग वुंफजी लीजिए। इन सबको चित्रा 13ण्5 ;ंद्ध में दशार्ए अनुसार श्रेणीक्रम में संयोजित कीजिए। ऽ सीध्े तार को दिव्फसूची के ऊपर उसकी सुइर् के समांतर रख्िाए। अब प्लग में वुंफजी लगाकर परिपथ को पूरा कीजिए। सुइर् के उत्तर ध््रुव के विक्षेप की दिशा नोट कीजिए। यदि विद्युत धरा चित्रा 13ण्5 ;ंद्ध में दशार्ए अनुसार उत्तर से दक्ष्िाण की ओर प्रवाहित हो रही है तो दिव्फसूची का उत्तर ध््रुव पूवर् की ओर विक्षेपित होगा। ऽ चित्रा 13ण्5 ;इद्ध में दशार्ए अनुसार परिपथ में जुड़े सेलों के संयोजनों को प्रतिस्थापित कीजिए। इसके परिणामस्वरूप ताँबे के तार में विद्युत धरा के प्रवाह की दिशा में परिवतर्न होगा अथार्त विद्युत धरा के प्रवाह की दिशा दक्ष्िाण से उत्तर की ओर हो उत्तर उत्तर पूवर् पश्िचम ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 13.5 एक सरल विद्युत परिपथ जिसमें किसी लंबे ताँबे के तार को किसी दिव्फसूची के ऊपर तथा उसकी सुइर् के समांतर रखा गया है। जब तार में विद्युत धरा के प्रवाह की दिशा उत्क्रमित होती है तो दिव्फसूची का विक्षेप विपरीत दिशा में होता है। जाएगी। दिव्फसूची के विक्षेप की दिशा में परिवतर्न का प्रेक्षण कीजिए। आप यह देखेंगे कि अब सुइर् विपरीत दिशा में अथार्त पश्िचम की ओर विक्षेपित होती है। इसका अथर् यह हुआ कि विद्युत धरा द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा भी उत्क्रमित हो गयी है। 13ण्2ण्1 सीध्े चालक से विद्युत धरा प्रवाहित होने के कारण चुंबकीय क्षेत्रा किसी चालक से विद्युत धरा प्रवाहित होने पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा का पैटनर् वैफसे निधार्रित होता है? क्या यह पैटनर् चालक की आकृति पर निभर्र करता है? इसकी जाँच हम एक ियाकलाप द्वारा करेंगे। पहले हम किसी विद्युत धरावाही सीध्े चालक के चारों ओर के चुंबकीय क्षेत्रा पैटनर् पर विचार करेंगे। ियाकलाप 13.5 ऽ एक 12 ट की बैटरी, एक परिवतीर् प्रतिरोध् ;धरा नियंत्राकद्ध, परिवतीर् 0.5 । परिसर का ऐमीटर, एक प्लग वुंफजी तथा एक लंबा मोटा प्रतिरोध सीध ताँबे का तार लीजिए। ऽ एक आयताकार काडर्बोडर् का टुकड़ा लेकर उसके बीचोंबीच काडर्बोडर् के तल के अभ्िालंबवत इस मोटे तार को प्रविष्ट कराइए। यह सावधनी रख्िाए कि काडर्बोडर् तार में स्िथर रहे, ऊपर - नीचे हिले - डुले नहीं। ऽ चित्रा 13ण्6 ;ंद्ध में दशार्ए अनुसार ताँबे के तार को ऊध्वार्ध्रतः बिंदुओं ग् तथा ल् के बीच श्रेणीक्रम में बैटरी, ऐमीटर, धरा नियंत्राक तथा प्लग वुंफजी से संयोजित कीजिए। ऽ तार के चारों ओर काडर्बोडर् पर वुफछ लौह - चूणर् एकसमान रूप से ;ंद्ध छितराइए। ;इसके लिए आप नमक छितरावक का उपयोग भी कर सकते हैं।द्ध ऽ धरा - नियंत्राक के परिवतर्क को किसी एक नियत स्िथति पर रख्िाए तथा ऐमीटर में विद्युत धरा का पाठ्यांक नोट कीजिए। ऽ वुंफजी लगाकर परिपथ बंद कीजिए ताकि ताँबे के तार से विद्युत धारा प्रवाहित हो। यह सुनिश्िचत कीजिए कि बिंदुओं ग् तथा ल् के बीच में लगा ताँबे का तार ऊध्वार्ध्रतः सीध रहे। ऽ काडर्बोडर् को हलके से वुफछ बार थपथपाइए। लौह - चूणर् के पैटनर् ;इद्ध का प्रेक्षण कीजिए। आप यह देखेंगे कि लौह - चूणर् संरेख्िात होकर चित्रा 13.6 ;ंद्ध किसी विद्युत धरावाही सीध्े चालक तार के चारों ओर संवेंफद्री वृत्तों के रूप में व्यवस्िथत होकर एक तार के चारों ओर के चुंबकीय क्षेत्रा की क्षेत्रा रेखाओं को वृत्ताकार पैटनर् बनाता है ;चित्रा 13.6द्ध। निरूपित करता संवेंफद्री वृत्तों का पैटनर्। वृत्तों पर अंकित ऽ ये संवेंफद्री वृत्त क्या निरूपित करते हैं? ये चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं को तीर क्षेत्रा रेखाओं की दिशाओं को दशार्ते हैं ;इद्ध प्राप्त निरूपित करते हैं। पैटनर् का समीप दृश्य विद्युत धरा के चुंबकीय प्रभाव ियाकलाप 13.6 ऽ एक ऐसा आयताकर काडर्बोडर् लीजिए जिसमें दो छिद्र हों। एक ऐसी वृत्ताकार वुंफडली लीजिए जिसमें पेफरों की संख्या काप़फी अध्िक हो और उसे काडर्बोडर् के तल के अभ्िालंबवत लगाया गया हो। ऽ चित्रा 13.9 में दशार्ए अनुसार वुंफडली के सिरांे को श्रेणीक्रम में बैटरी, एक वुंफजी तथा एक धरा नियंत्राक से संयोजित कीजिए। ऽ काडर्बोडर् पर लौह - चूणर् एकसमान रूप से छितराइए। चित्रा 13.9 ऽ वुंफजी लगाकर परिपथ पूरा कीजिए।धरावाही वृत्ताकार वुंफडली द्वारा उत्पन्न ऽ काडर्बोडर् को हलके से वुफछ बार थपथपाइए। काडर्बोडर् पर जो पैटनर्चुंबकीय क्षेत्रा बनता दिखाइर् दे उसका प्रेक्षण कीजिए। 13ण्2ण्4 परिनालिका में प्रवाहित विद्युत धरा के कारण चुंबकीय क्षेत्रा पास - पास लिपटे विद्युतरोध्ी ताँबे के तार की बेलन की आकृति की अनेक पेफरों वाली वुंफडली को परिनालिका कहते हैं। किसी विद्युत धारावाही परिनालिका के कारण उसके चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं का पैटनर् चित्रा 13.10 में दशार्या गया है। इस चुंबकीय क्षेत्रा के पैटनर् की तुलना चित्रा 13.4 में दशार्ए गए छड़ चुंबक के चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं के पैटनर् से कीजिए। क्या ये एक जैसे प्रतीत होते हैं? वास्तव में परिनालिका का एकचित्रा 13.10 किसी विद्युत धरावाही परिनालिका के भीतर सिरा उत्तर ध्रुव तथा दूसरा सिरा दक्ष्िाण ध््रुव की भाँति व्यवहार करता है। और उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्रा की परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ समांतर सरल रेखाओं की भाँति क्षेत्रा रेखाएँ होती हैं। यह निदिर्ष्ट करता है कि किसी परिनालिका के भीतर सभी बिंदुओं पर चुंबकीय क्षेत्रा समान होता है। अथार्त परिनालिका के भीतर एकसमान चुंबकीय क्षेत्रा होता है। परिनालिका के भीतर उत्पन्न प्रबल चुंबकीय क्षेत्रा का उपयोग किसी चुंबकीय पदाथर्, जैसे नमर् लोहे, को परिनालिका के भीतर रखकर चुंबक चित्रा 13.11 बनाने में किया जा सकता है ;चित्रा 13.11द्ध। इस प्रकार बने चुंबक को किसी विद्युत धरावाही परिनालिका का विद्युत चुंबक कहते हैं। उपयोग उसके भीतर रखी स्टील की छड़ को चुंबकित करने में किया जाता है - एक विद्युत चुबंक प्रश्न 1.मेश के तल में पड़े तार के वृत्ताकार पाश पर विचार कीजिए। मान लीजिए इस पाश में दक्ष्िाणावतर् विद्युत धरा प्रवाहित हो रही है। दक्ष्िाण - हस्त अंगुष्ठ नियम को लागू करके पाश के भीतर तथा बाहर चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा ज्ञात कीजिए। 2.किसी दिए गए क्षेत्रा में चुंबकीय क्षेत्रा एकसमान है। इसे निरूपित करने के लिए आरेख खींचिए। 3.सही विकल्प चुनिएः किसी विद्युत धरावाही सीध्ी लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्रा - ;ंद्ध शून्य होता है। ;इद्ध इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है। ;बद्ध इसके सिरे की ओर जाने पर बढ़ता है। घ् ;कद्ध सभी बिंदुओं पर समान होता है। 13.3 चुंबकीय क्षेत्रा में किसी विद्युत धरावाही चालक पर बल हमने यह सीखा है कि किसी चालक में प्रवाहित विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्रा उत्पन्न करती है। इस प्रकार उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा इस चालक के निकट रखे किसी चुंबक पर कोइर् बल आरोपित करता है। Úांसीसी वैज्ञानिक आंद्रे मैरी ऐम्िपयर ;1775 - 1836द्ध ने यह विचार प्रस्तुत किया कि चुंबक को भी विद्युत धरावाही चालक पर परिमाण में समान परंतु दिशा में विपरीत बल आरोपित करना चाहिए। किसी विद्युत धरावाही चालक पर चुंबकीय क्षेत्रा के कारण लगने वाले बल को निम्नलिख्िात ियाकलाप द्वारा निदश्िार्त किया जा सकता है। ियाकलाप 13.7 ऽ ऐलुमिनियम की एक छोटी छड़ ;लगभग 5 बउ लंबीद्ध लीजिए। चित्रा 13.12 में दशार्ए अनुसार इस छड़ को दो संयोजक तारों द्वारा किसी स्टैंड से क्षैतिजतः लटकाइए। ऽ एक प्रबल नाल चुंबक इस प्रकार से व्यवस्िथत कीजिए कि छड़ नाल चुंबक के दो ध््रुवों के बीच में हो तथा चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा उपरिमुखी हो। ऐसा करने के लिए नाल चुंबक का उत्तर ध््रुव ऐलुमिनियम की छड़ के ऊध्वार्ध्रतः नीचे एवं दक्ष्िाण ध्रुव ऊध्वार्धरतः ऊपर रख्िाए ;चित्रा 13.12द्ध। ऽ ऐलुमिनियम की छड़ को एक बैटरी, एक वुंफजी तथा एक धरा नियंत्राक के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित कीजिए। ऐलुमिनियम छड़ में सिरे ठ से । की ओर विद्युत धरा प्रवाहित कराइए। ऽ आप क्या देखते हैं? हम यह देखते हैं कि विद्युत धरा प्रवाहित होते ही छड़ बाईं दिशा में विस्थापित होती है। चित्रा 13.12 ऽ अब छड़ में प्रवाहित होने वाली विद्युत धरा की दिशा उत्क्रमित विद्युत धरावाही छड़ ।ठ अपनी लंबाइर् तथाकीजिए और छड़ के विस्थापन की दिशा नोट कीजिए। अब यह चुंबकीय क्षेत्रा के लंबवत एक बल का अनुभवदाईं ओर विस्थापित होती है। छड़ क्यों विस्थापित होती है? करती है विद्युत धरा के चुंबकीय प्रभाव उपरोक्त ियाकलाप में छड़ के विस्थापन से हमें यह संकेत मिलता है कि चुंबकीय क्षेत्रा में रखने पर ऐलुमिनियम की विद्युत धरावाही छड़ पर एक बल आरोपित होता है। और यह भी संकेत मिलता है कि चालक में प्रवाहित विद्युत धरा की दिशा उत्क्रमित करने पर बल की दिशा भी उत्क्रमित हो जाती है। अब चुंबक के ध््रुवों को परस्पर बदल कर चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा ऊध्वार्ध्रतः अधेमुखी कीजिए। एक बार पुनः यह दिखाइर् देता है कि विद्युत धरावाही छड़ पर आरोपित बल की दिशा उत्क्रमित हो जाती है। इससे यह प्रदश्िार्त होता है कि चालक पर आरोपित बल की दिशा विद्युत धारा की दिशा और चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा दोनों पर निभर्र करती है। प्रयोगों द्वारा यह देखा गया है कि छड़ में विस्थापन उस समय अध्िकतम ;अथवा छड़ पर आरोपित बल का परिणाम उच्चतमद्ध होता है जब विद्युत धारा की दिशा चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा के लंबवत होती है। ऐसी स्िथति में चालक पर आरोपित बल की दिशा का पता हम एक सरल नियम द्वारा लगा सकते हैं। ियाकलाप 13.7 में, हमने विद्युत धरा की दिशा और चित्रा 13.13 फ्रलेमिंग का वामहस्त नियम चुम्बकीय क्षेत्रा चुंबकीय क्षेत्रा चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा को परस्पर लंबवत रखकर विचार किया था और यह पाया कि चालक पर आरोपित बल की दिशा इन अँगूठा विद्युत धारा दोनों के लंबवत है। इन तीनों दिशाओं की व्याख्या एक सरल बल नियम जिसे फ्रलेमिंग का वामहस्त ;बायाँ हाथद्ध नियम कहते हैं, द्वारा की जा सकती है। इस नियम के अनुसार, अपने विद्युत धारा बाएँ हाथ की तजर्नी, मध्यमा तथा अँगूठे को इस प्रकार पैफलाइए कि ये तीनों एक - दूसरे के परस्पर लंबवत हों ;चित्रा 13.13द्ध। यदि तजर्नी चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करती है तो अँगूठा चालक की गति की दिशा अथवा चालक पर आरोपित बल की दिशा की ओर संकेत करेगा। विद्युत मोटर, विद्युत जनित्रा, ध्वनि विस्तारक यंत्रा, माइक्रोप़फोन तथा विद्युत मापक यंत्रा वुफछ ऐसी युक्ितयाँ हैं जिनमें विद्युत धरावाही चालक तथा चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग होता है। आगे के वुफछ अनुभागों में हम विद्युत मोटरों तथा विद्युत जनित्रों के विषय में अध्ययन करेंगे। उदाहरण 13.2 चुंबकीय क्षेत्रा चित्रा 13.14 में दशार्ए अनुसार कोइर् इलेक्ट्राॅन किसी चुंबकीय क्षेत्रा में क्षेत्रा के लंबवत प्रवेश करता है। इलेक्ट्राॅन पर आरोपित बल की दिशा क्या है? ;ंद्ध दाईं ओर इलेक्ट्रॅान ;इद्ध बाईं ओर ;बद्ध कागश से बाहर की ओर आते हुएचित्रा 13.14 ;कद्ध कागश में भीतर की ओर जाते हुए छ विभक्त वलय ;च् तथा फद्ध चित्रा 13.15 सरल विद्युत मोटर चित्रा 13.15 में दशार्ए अनुसार विद्युत मोटर में विद्युतरोधी तार की एक आयताकार वुंफडली ।ठब्क् होती है। यह वुंफडली किसी चुंबकीय क्षेत्रा के दो धु्रवों के बीच इस प्रकार रखी होती है कि इसकी भुजाएँ ।ठ तथा ब्क् चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा के लंबवत रहें। वुंफडली के दो सिरे विभक्त वलय के दो धुरी ब्रुश ;ग् तथा ल्द्ध अधर्भागों च् तथा फ से संयोजित होते हैं। इन अधर् भागों की भीतरी सतह विद्युतरोधी होती है तथा ध्ुरी से जुड़ी होती है। च् तथा फ के बाहरी चालक सिरे क्रमशः दो स्िथर चालक ब्रुशों ग् तथा ल् से स्पशर् करते हैं ;चित्रा 13.15द्ध। बैटरी से चलकर चालक ब्रुश ग् से होते हुए विद्युत धारा वुंफडली ।ठब्क् में प्रवेश करती है तथा चालक ब्रुश ल् से होते हुए बैटरी के दूसरे टमिर्नल पर वापस भी आ जाती है। ध्यान दीजिए, वुंफडली में विद्युत धरा इसकी भुजा ।ठ में । से ठ की ओर तथा भुजा ब्क् में ब् से क् की ओर प्रवाहित होती है। अतः, ।ठ तथा ब्क् में विद्युत धरा की दिशाएँ परस्पर विपरीत होती हैं। चुंबकीय क्षेत्रा में रखे विद्युत धरावाही चालक पर आरोपित बल की दिशा ज्ञात करने के लिए फ्रलेमिंग का वामहस्त नियम ;देख्िाए चित्रा 13.13द्ध अनुप्रयुक्त करने पर हम यह पाते हैं कि भुजा ।ठ पर आरोपित बल इसे अधोमुखी धकेलता है, जबकि भुजा ब्क् पर आरोपित बल इसे उपरिमुखी ध्केलता है। इस प्रकार किसी अक्ष पर घूमने के लिए स्वतंत्रा वुंफडली तथा ध्ुरी वामावतर् घूणर्न करते हैं। आधे घूणर्न में फ का संपवर्फ ब्रुश ग् से होता है तथा च् का संपवर्फ ब्रुश ल् से होता है। अतः, वुंफडली में विद्युत धरा उत्क्रमित होकर पथ क्ब्ठ। के अनुदिश प्रवाहित होती है। वह युक्ित जो परिपथ में विद्युत धरा के प्रवाह को उत्क्रमित कर देती है, उसे दिव्फपरिवतर्क कहते हैं। विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिव्फपरिवतर्क का कायर् करता है। विद्युत धरा के उत्क्रमित होने पर दोनों भुजाओं ।ठ तथा ब्क् पर आरोपित बलों की दिशाएँ भी उत्क्रमित हो जाती हैं। इस प्रकार वुंफडली की भुजा ।ठ जो पहले अधेमुखी ध्केली गइर् थी, अब उपरिमुखी ध्केली जाती है, तथा वुंफडली की भुजा ब्क् जो पहले उपरिमुखी धकेली गइर्, अब अधेमुखी ध्केली जाती है। अतः, वुंफडली तथा ध्ुरी उसी दिशा में अब आध घूणर्न और पूरा कर लेती हैं। प्रत्येक आध्े घूणर्न के पश्चात विद्युत धारा के उत्क्रमित होने का क्रम दोहराता रहता है जिसके पफलस्वरूप वुंफडली तथा धुरी का निरंतर घूणर्न होता रहता है। व्यावसायिक मोटरों में ;पद्ध स्थायी चुंबकों के स्थान पर विद्युत चुंबक प्रयोग किए जाते हैं, ;पपद्ध विद्युत धरावाही वुंफडली में पेफरों की संख्या अत्यध्िक होती है तथा ;पपपद्ध वुंफडली नमर् लौह - क्रोड पर लपेटी जाती है। वह नमर् लौह - क्रोड जिस पर वुंफडली को लपेटा जाता है तथा वुंफडली दोनों मिलकर आमेर्चर कहलाते हैं। इससे मोटर की शक्ित में वृि हो जाती है। प्रश्न 1.फ्रलेंमिंग का वामहस्त नियम लिख्िाए। 2.विद्युत मोटर का क्या सि(ांत है? घ्3.विद्युत मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है? 13.5 वैद्युतचुंबकीय प्रेरण हमने यह पढ़ा है कि जब कोइर् विद्युत धरावाही चालक किसी चुंबकीय क्षेत्रा में इस प्रकार रखा जाता है कि चालक में प्रवाहित विद्युत धरा की दिशा चुंबकीय क्षेत्रा के लंबवत हो तो वह चालक एक बल का अनुभव करता है। इस बल के कारण वह चालक गति करने लगता है। अब हम एक ऐसी स्िथति की कल्पना करते हैं जिसमें कोइर् चालक किसी चुंबकीय क्षेत्रा में गति कर रहा है अथवा किसी स्िथर चालक के चारों ओर का चुंबकीय क्षेत्रा परिवतिर्त हो रहा है। इस स्िथति में क्या होगा? इसका सवर्प्रथम अध्ययन सन् 1831 इर्. में माइकेल पैफराडे ने किया था। पैफराडे की इस खोज ने कि ‘किसी गतिशील चुंबक का उपयोग किस प्रकार विद्युत धरा उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है’ वैज्ञानिक क्षेत्रा को एक नयी दिशा प्रदान की। इस प्रभाव का अध्ययन करने के लिए आइए एक ियाकलाप करते हैं। ियाकलाप 13.8 ऽ अनेक पेफरों वाली तार की एक वुुुंफडली ।ठ लीजिए। ऽ वुंफडली के सिरों को किसी गैल्वनोमीटर से चित्रा 13.16ेमें दशार्ए अनुसार संयोजित कीजिए। ऽ एक प्रबल छड़ चुंबक लीजिए तथा इसके उत्तर - ध्रुव को वुंफडली के सिरे ठ की ओर ले जाइए। क्या आप गैल्वेनोमीटर की सुइर् में कोइर् परिवतर्न पाते हैं? ऽ गैल्वेनोमीटर की सुइर् में क्षण्िाक विक्षेप होता है, मान लीजिए यह दाईं ओर है। यह वुंफडली ।ठ में विद्युत धारा की उपस्िथति का संकेत देता है। जैसे ही चुंबक की गति समाप्त होती है, गैल्वनोमीटर में विक्षेप शून्य हो जाता है। ऽ अब चुंबक के उत्तर ध््रुव को वुंफडली से दूर ले जाइए। इस बार गैल्वेनोमीटर की सुइर् बाईं ओर चित्रा 13.16 चुंबक को वुंफडली की ओर ले जाने पर विक्षेपित होती है, जो यह दशार्ता है कि अब परिपथ वुंफडली के परिपथ में विद्युत धरा उत्पन्न होती है, जिसे में उत्पन्न विद्युत धारा की दिशा पहले के विपरीत है। गैल्वेनोमीटर की सुइर् के विक्षेप द्वारा इंगित किया जाता है। विद्युत धरा के चुंबकीय प्रभाव ऽ वुंफडली के निकट किसी चुंबक को स्िथर अवस्था में इस प्रकार रख्िाए कि चंुबक का उत्तर ध््रुव वुंफडली के सिरे ठ की ओर हो। हम यह देखते हैं कि जैसे ही वुंफडली को चुंबक के उत्तर ध््रुव की ओर ले जाते हैं, गैल्वेनोमीटर की सुइर् दाईं ओर विक्षेपित होती है। इसी प्रकार, जब वुंफडली को उत्तर ध््रुव से दूर हटाते हंै तो गैल्वेनोमीटर की सुइर् बाईं ओर विक्षेपित होती है। ऽ जब वुंफडली को चुंबक के सापेक्ष स्िथर रखते हैं तो गैल्वेनोमीटर में विक्षेप शून्य हो जाता है। इस ियाकलाप से आप क्या निष्कषर् निकालते हैं? आप यह जाँच कर सकते हैं कि यदि आप चुंबक के दक्ष्िाण ध््रुव को वुंफडली के ठ सिरे की ओर गति कराते हैं तो गैल्वेनोमीटर में विक्षेपण पहली स्िथति ;जिसमें उत्तर ध््रुव का उपयोग किया गया थाद्ध के विपरीत होगा। जब वुंफडली तथा चुंबक दोनों स्िथर होते हैं तब गैल्वेनोमीटर में कोइर् विक्षेपण नहीं होता अतः इस ियाकलाप से यह स्पष्ट है कि वुंफडली के सापेक्ष चुंबक की गति एक प्रेरित विभवांतर उत्पन्न करती है, जिसके कारण परिपथ में प्रेरित विद्युत धरा प्रवाहित होती है। गैल्वनोमीटर एक ऐसा उपकरण है जो किसी परिपथ में विद्युत धारा की उपस्िथति संसूचित करता है। यदि इससे प्रवाहित विद्युत धरा शून्य है तो इसका संकेतक शून्य ;पैमाने के मध्य मेंद्ध पर रहता है। यह अपने शून्य चिÉ के या तो बाईं ओर अथवा दाईं ओर विक्षेपित हो सकता है, यह विक्षेप विद्युत धरा की दिशा पर निभर्र करता है। माइकेल पैफराडे ;1791 - 1867द्ध माइकेल पैफराडे एक प्रायोगिक भौतिकविज्ञानी थे। उन्होंने कोइर् औपचारिक श्िाक्षा प्राप्त नहीं की। अपने जीवन के आरंभ्िाक काल में उन्होंने जिल्दसाशी की दुकान पर कायर् किया। पैफराडे जिल्दसाशी के लिए दुकान पर आनेवाली पुस्तकों का अध्ययन किया करते थे। इससे उनकी विज्ञान में रुचि उत्पन्न हो गइर्। उन्हें राॅयल इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक सर हम्Úे डेवी के सावर्जनिक व्याख्यान सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने सावधनीपूवर्क डेवी के व्याख्यानों के नोट तैयार किए और उन्हें सर डेवी के पास भेज दिया। शीघ्र ही उन्हें राॅयल इंस्टीट्यूट में डेवी की प्रयोगशाला में सहायक बना दिया गया। पैफराडे ने बहुत सी क्रांतिकारी खोज कीं जिनमें वैद्युतचुंबकीय प्रेरण तथा वैद्युतअपघटन के नियम सम्िमलित हैं। अनेक विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद उपाध्ियाँ प्रदान करने का प्रयास किया, परंतु उन्होंने इस प्रकार के सम्मानों को ठुकरा दिया। पैफराडे को किसी भी सम्मान की तुलना में अपने वैज्ञानिक कायो± से अध्िक प्यार था। आइए, अब हम ियाकलाप 13.8 में वुफछ परिवतर्न करते हैं और गतिमान चुंबक को ऐसी विद्युत धरावाही वुंफडली से प्रतिस्थापित करते हैं जिसमें विद्युत धरा के परिमाण को परिवतिर्त किया जा सकता है। ियाकलाप 13.9 ऽ ताँबे के तार की दो भ्िान्न वुंफडलियाँ लीजिए जिनमें पेफरों की संख्या काप़फी अध्िक ;जैसे क्रमशः 50 तथा 100 पेफरेद्ध हो। इन वुंफडलियों को चित्रा 13.17 में दशार्ए अनुसार किसी विद्युतरोधी खोखले बेलन पर चढ़ाइए ;आप मोटे कागश को भी खोखले बेलन के रूप में लपेटकर यह कायर् कर सकते हैंद्ध। ऽ वुंफडली - 1 को जिसमें पेफरों की संख्या अपेक्षाकृत अिाक है, वुंफडली - 1 वुंफडली - 2 श्रेणीक्रम में बैटरी तथा प्लग वुंफजी से संयोजित कीजिए। अन्य वुंफडली - 2 को भी चित्रा 13.7 में दशार्ए अनुसार गैल्वेनोमीटर से संयोजित कीजिए। ऽ वुंफजी को प्लग में लगाइए। गैल्वेनोमीटर का प्रेक्षण कीजिए। क्या इसकी सुइर् कोइर् विक्षेप दशार्ती है? आप यह देखेंगे कि गैल्वेनोमीटर की सुइर् तुरंत ही एक दिशा में तीव्र गति से विक्षेपित होकर उसी चित्रा 13.17गति से शीघ्र वापस शून्य पर आ जाती है। यह वुंफडली - 2 में वुंफडली - 1 में विद्युत धारा परिवतिर्त करने परक्षण्िाक विद्युत धरा का उत्पन्न होना सूचित करता है। वुंफडली - 2 में विद्युत धारा प्रेरित होती है बैटरी से वुंफडली - 1 को वियोजित कीजिए। आप यह पाएँगे कि ऐसा करने पर वुंफडली - 2 में एक क्षण्िाक विद्युत धरा प्रवाहित होती है, परंतु इसकी दिशा पहले से विपरीत होती है। इस ियाकलाप में हम यह प्रेक्षण करते हैं कि जैसे ही वुंफडली - 1 में विद्युत धरा स्थायी होती है, वुंफडली - 2 से संयोजित गैल्वेनोमीटर कोइर् विक्षेप नहीं दशार्ता। इन प्रेक्षणों से यह निष्कषर् निकलता है कि जब भी कभी वुंफडली - 1 में प्रवाहित विद्युत धरा के परिमाण में परिवतर्न होता है ;विद्युत धरा आरंभ अथवा समाप्त होती हैद्ध तो वुंफडली - 2 में एक विभवांतर प्रेरित होता है। वुंफडली - 1 को प्राथमिक वुंफडली तथा वुंफडली - 2 को द्वितीयक वुंफडली कहते हैं। जैसे ही प्रथम वुंफडली में प्रवाहित विद्युत धरा में परिवतर्न होता है। इससे संब( चालक की गति चुंबकीय क्षेत्रा भी परिवतिर्त हो जाता है। इस प्रकार द्वितीयक वुंफडली चुंबकीय क्षेत्रा के चारों ओर की चुंबकीय क्षेत्रा रेखाएँ भी परिवतिर्त होती हैं। अतः गति द्वितीयक वुंफडली से संब( चुंबकीय क्षेत्रा रेखाओं में परिवतर्न ही क्षेत्राउसमें प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होने का कारण होता है। वह प्रक्रम जिसके द्वारा किसी चालक के परिवतीर् चुंबकीय क्षेत्रा के कारण अन्य चालक में प्रेरित विद्युत धारा पे्ररित विद्युत धारा चालक में विद्युत धरा प्रेरित होती है, वैद्युतचुंबकीय प्रेरण कहलाता चित्रा 13.18 है। व्यवहार में हम किसी वुंफडली में प्रेरित विद्युत धरा को या तो उसे फ्रलेमिंग का दक्ष्िाण - हस्त नियम विद्युत धरा के चुंबकीय प्रभाव किसी चुंबकीय क्षेत्रा में गति कराकर अथवा उसके चारों ओर के चुंबकीय क्षेत्रा को, परिवतिर्त करके, उत्पन्न कर सकते हैं। अध्िकांश परिस्िथतियों में चुंबकीय क्षेत्रा में वुंफडली को गति कराकर प्रेरित विद्युत धरा उत्पन्न करना अध्िक सुविधाजनक होता है। जब वुंफडली की गति की दिशा चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा के लंबवत होती है तब वुंफडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धरा अध्िकतम होती है। इस स्िथति में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए हम एक सरल नियम का उपयोग कर सकते हैं। इस नियम के अनुसार, फ्अपने दाहिने हाथ की तजर्नी, मध्यमा तथा अँगूठे को इस प्रकार पैफलाइए कि ये तीनों एक - दूसरे के परस्पर लंबवत हों ;चित्रा 13.18द्ध। यदि तजर्नी चंुबकीय क्षेत्रा की दिशा की ओर संकेत करती है तथा अँगूठा चालक की गति की दिशा की ओर संकेत करता है तो मध्यमा चालक में प्रेरित विद्युत धरा की दिशा दशार्ती है।य् इस सरल नियम को फ्रलेमिंग का दक्ष्िाण - हस्त नियम कहते हैं। प्रश्न 1.किसी वुंफडली में विद्युत धरा प्रेरित करने के विभ्िान्न ढंग स्पष्ट कीजिए। घ् 13ण्6विद्युत जनित्रा वैद्युतचुंबकीय प्रेरण की परिघटना पर आधरित जिन प्रयोगोें का हमने ऊपर अध्ययन किया, उनमें उत्पन्न प्रेरित विद्युत धरा का परिमाण प्रायः बहुत कम होता है। इस सि(ांत का उपयोग घरों तथा उद्योगों के लिए अत्यध्िक परिमाण की विद्युत धरा उत्पन्न करने में भी किया जाता है। विद्युत जनित्रा में यांत्रिाक ऊजार् का उपयोग चुंबकीय क्षेत्रा में रखे किसी चालक को घूणीर् गति प्रदान करने में किया जाता है जिसके पफलस्वरूप विद्युत धारा उत्पन्न होती है। चित्रा 13.19 में दशार्ए अनुसार विद्युत जनित्रा में एक घूणीर् आयताकार वुंफडली ।ठब्क् होती है जिसे किसी स्थायी चुंबक के दो ध््रुवों के बीच रखा जाता है। इस वुंफडली के दो सिरे दो वलयों त्1 तथा त्2 से संयोजित होते हैं। दो स्िथर चालक ब्रुशों ठ1 तथा ठ2 को पृथव्फ - पृथव्फ रूप से क्रमशः वलयों त्1 तथाबु्रशवलय ;ठ तथा ठद्ध त् पर दबाकर रखा जाता है। दोनों वलय त् तथा त् भीतर12212;त् तथा त् द्ध12से ध्ुरी से जुड़े होते हैं। चुंबकीय क्षेत्रा के भीतर स्िथत वुंफडली को घूणर्न गति देने के लिए इसकी धुरी को यांत्रिाक रूप से बाहर से घुमाया जा सकता है। दोनों ब्रुशों के बाहरी सिरे, बाहरी परिपथ में विद्युत धरा के प्रवाह को दशार्ने के लिए गैल्वेनोमीटर चित्रा 13.19 विद्युत जनित्रा के सि(ांत को दशार्ना से संयोजित होते हैं। जब दो वलयों से जुड़ी ध्ुरी को इस प्रकार घुमाया जाता है कि वुंफडली की भुजा ।ठ ऊपर की ओर ;तथा भुजा ब्क् नीचे की ओरद्ध, स्थायी चुंबक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय 4.सही विकल्प का चयन कीजिए - ताँबे के तार की एक आयताकार वुंफडली किसी चुंबकीय क्षेत्रा में घूणीर् गति कर रही है। इस वुंफडली में प्रेरित विद्युत धरा की दिशा में कितने परिभ्रमण के पश्चात परिवतर्न होता है? ;ंद्ध दो ;इद्ध एक ;बद्ध आध्े ;कद्ध चैथाइर् 13ण्7 घरेलू विद्युत परिपथ हम अपने घरों में विद्युत शक्ित की आपूतिर् मुख्य तारों ;जिसे मेंस भी कहते हैंद्ध से प्राप्त करते हैं। ये मुख्य तार या तो ध्रती पर लगे विद्युत खंभों के सहारे अथवा भूमिगत केबलों से हमारे घरों तक आते हैं। इस आपूतिर् के तारों में से एक तार को जिस पर प्रायः लाल विद्युतरोध्ी आवरण होता है, विद्युन्मय तार ;अथवा ध्नात्मक तारद्ध कहते हैं। अन्य तार को जिस पर काला आवरण होता है, उदासीन तार ;अथवा ट्टणात्मक तारद्ध कहते हैं। हमारे देश में इन दोनों तारों के बीच 220 ट का विभवांतर होता है। घर में लगे मीटर बोडर् में ये तार मुख्य फ्रयूश से होते हुए एक विद्युत मीटर में प्रवेश करते हैं। इन्हें मुख्य स्िवच से होते हुए घर के लाइन तारों से संयोजित किया जाता है। ये तार घर के पृथव्फ - पृथव्फ परिपथों मेें विद्युत आपूतिर् करते हैं। प्रायः घरों में दो पृथव्फ परिपथ होते हैं, एक 15 । विद्युत धरा अनुमतांक के लिए जिसका उपयोग उच्च शक्ित वाले विद्युत साध्ित्रों जैसे गीशर, वायु शीतित्रा/वूफलर ;ंपत बववसमतद्ध आदि के लिए किया जाता है। दूसरा विद्युत परिपथ 5 । विद्युत धरा अनुमतांक के लिए होता हैजिससेबल्ब पंखे आदि चलाए जाते हैं। भूसंपवर्फ तार जिस पर प्रायः हरा विद्युतरोध्ी आवरण होता है, घर के निकट भूमि के भीतर बहुत गहराइर् पर स्िथत धतु की प्लेट से संयोजित होता है। इस तार का उपयोग विशेषकर विद्युत इस्त्राी, टोस्टर, मेश का पंखा, रेिजरेटर, आदि धतु के आवरण वाले विद्युत साध्ित्रों में सुरक्षा के उपाय के रूप में किया जाता है। धातु भूसंपवर्फ तार विद्युन्मय तार उदासीन तार विद्युत प्रदाय विद्युतमापीबोडर् का फ्ऱयूश वितरण बक्स जिसमें मुख्य स्िवच एवं प्रत्येक परिपथ के लिए पृथव्फ फ्ऱयूश लगे हों चित्रा 13.20 सामान्य घरेलू विद्युत परिपथों मंे से एक परिपथ का व्यवस्था आरेख

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