अध्याय 12 विद्युत द्युत का आधुनिक समाज में एक महत्त्वपूणर् स्थान है। यह घरों, विद्यालयों,विअस्पतालों, उद्योगों तथा ऐसे ही अन्य संस्थानों के विविध उपयोगों के लिए एकनियंत्रिात कर सकने योग्य और सुविधाजनक ऊजार् का रूप है। वह क्या है जिससे विद्युत बनती है? किसी विद्युत परिपथ में यह कैसे प्रवाहित होती है? वह कौन से कारक हैं जो किसी विद्युत परिपथ की विद्युत धारा को नियंत्रिात अथवा नियमित करते हैं। इस अध्याय में हम इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करेंगे। हम विद्युत धाराके ऊष्मीय प्रभाव तथा इसके अनुप्रयोगों पर भी चचार् करेंगे। 12ण्1विद्युत धारा और परिपथ हम वायु धारा तथा जल धारा से परिचित हैं। हम जानते हैं कि बहते हुए जल से नदियों में जल धारा बनती है। इसी प्रकार यदि विद्युत आवेश किसी चालक में से प्रवाहित होता है ;उदाहरण के लिए किसी धातु के तार में सेद्ध तब हम यह कहते हैं कि चालक में विद्युत धारा है। हम जानते हैं कि किसी टाॅचर् में सेल ;अथवा बैटरी, जब उचित क्रम में रखे जाते हैंद्ध टाॅचर् बल्ब को दीप्ित के लिए आवेश का प्रवाह अथवा विद्युत धारा प्रदान करते हैं। हमने यह भी देखा है कि टाॅचर् तभी प्रकाश देती है जब उसके स्िवच को ‘आॅन’ करते हैं। स्िवच क्या कायर् करता है? स्िवच सेल तथा बल्ब के बीच चालक संबंध जोड़ता है। किसी विद्युत धारा के सतत तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं। अब, यदि परिपथ कहीं से टूट जाए ;अथवा टाॅचर् के स्िवच को ‘आॅपफ’ कर देंद्ध तो विद्युत धारा का प्रवाह समाप्त हो जाता है तथा बल्ब दीप्ित नहीं करता। हम विद्युत धारा को कैसे व्यक्त करें? विद्युत धारा को एकांक समय में किसी विशेष क्षेत्रा से प्रवाहित आवेश के परिमाण द्वारा व्यक्त किया जाता है। दूसरे शब्दों में, विद्युत आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं। उन परिपथों में जिनमें धातु के तार उपयोग होते हंै, आवेशों के प्रवाह की रचना इलेक्ट्राॅन करते हैं। तथापि, जिस समय विद्युत की परिघटना का सवर्प्रथम पे्रक्षण किया गया था, इलेक्ट्राॅनों के बारे में कोइर् जानकारी नहीं थी। अतः विद्युत धारा को धनावेशों का प्रवाह माना गया तथा धनावेश के प्रवाह की दिशा को ही विद्युत धारा की दिशा माना गया। परिपाटी के अनुसार किसी विद्युत परिपथ में इलेक्ट्राॅनों जो )णावेश हैं, के प्रवाह की दिशा के विपरीत दिशा को विद्युत धारा की दिशा माना जाता है। यदि किसी चालक की किसी भी अनुप्रस्थ काट से समय ज में नेट आवेश फ प्रवाहित होता है तब उस अनुप्रस्थ काट से प्रवाहित विद्युत धारा प् को इस प्रकार व्यक्त करते हैंः फप् त्र ;12ण्1द्धज विद्युत आवेश का ैप् मात्राक कूलाॅम ;ब्द्ध है, जो लगभग 6 × 1018 इलेक्ट्राॅनों में समाए आवेश के तुल्य होता है ;हम जानते हैं कि एक इलेक्ट्राॅन पर 1ण्6 × 10दृ19ब् आवेश होता हैद्ध। विद्युत धारा को एक मात्राक जिसे ऐम्िपयर ;।द्ध कहते हैं, में व्यक्त किया जाता है, इस मात्राक का नाम आंद्रे - मेरी ऐम्िपयर ;1775.1836द्ध नाम के Úांसीसी वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है। एक ऐम्िपयर विद्युत धारा की रचना प्रति सेवंफड एक कूलाॅम आवेश के प्रवाह से होती है, अथार्त 1 । त्र 1 ब्ध्1 े अल्प परिमाण की विद्युत धारा को मिलिऐम्िपयर ;1 उ। त्र 10दृ3 ।द्ध अथवा माइक्रोऐम्िपयर ;1 μ। त्र 10दृ6 ।द्ध में व्यक्त करते हैं। परिपथों की विद्युत धारा मापने के लिए जिस यंत्रा का उपयोग करते हैं उसे ऐमीटर कहते हैं। इसे सदैव जिस परिपथ में विद्युत धारा मापनी होती है, उसके श्रेणीक्रम में संयोजित करते हैं। चित्रा 12ण्1 में एक प्रतीकात्मक विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख दिखाया गया है जिसमें एक सेल, एक विद्युतचित्रा 12.1 बल्ब, एक ऐमीटर तथा प्लग वुंफजी जुड़े हैं। ध्यान दीजिएएक सेल, एक विद्युत बल, एक ऐमीटर तथा एक प्लग वुंफजी से मिलकर बने विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख परिपथ में विद्युत धारा, सेल के धन टमिर्नल से सेल के )ण टमिर्नल तक बल्ब और ऐमीटर से होकर प्रवाहित होती है। उदाहरण 12.1 किसी विद्युत बल्ब के तंतु में से 0ण्5 । विद्युत धारा 10 मिनट तक प्रवाहित होती है। विद्युत परिपथ से प्रवाहित विद्युत आवेश का परिमाण ज्ञात कीजिए। हल हमें दिया गया है, प् त्र 0ण्5 ।य ज त्र 10 उपद त्र 600 े समीकरण ;12ण्1द्धए से फ त्र प्ज त्र 0ण्5 । × 600 े त्र 300 ब् प्रश्न 1ण् विद्युत परिपथ का क्या अथर् है? 2ण् विद्युत धारा के मात्राक की परिभाषा लिख्िाए। 3ण् एक कूलाॅम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्राॅनों की संख्या परिकलित कीजिए। घ् 12ण्2विद्युत विभव और विभवांतर वह क्या है जो विद्युत आवेश को प्रवाहित कराता है? आइए जल के प्रवाह से सदृश के आधार पर इसका विचार करते हैं। किसी काॅपर के तार से आवेश स्वयं प्रवाहित नहीं होते, ठीक वैसे ही जैसे किसी आदशर् क्षैतिज नली से जल प्रवाहित नहीं होता। यदि नली के एक सिरे को किसी उच्च तल पर रखे जल - टैंक से जोड़ दें जिससे नली के दो सिरों के बीच कोइर् दाबांतर बन जाए, तो नली के मुक्त सिरे से जल बाहर की ओर प्रवाहित होता है। किसी चालक तार में आवेशों के प्रवाह के लिए, वास्तव में, गुरुत्व बल की कोइर् भूमिका नहीं होतीऋ इलेक्ट्राॅन केवल तभी गति करते हैं जब चालक के अनुदिश वैद्युत दाब में कोइर् अंतर होता है, जिसे विभवांतर कहते हैं। विभव में यह अंतर एक या अिाक विद्युत सेलों से बनी बैटरी द्वारा उत्पन्न किया जा सकता है। किसी सेल के भीतर होने वाली रासायनिक अभ्िािया सेल के टमिर्नलों के बीच विभवांतर उत्पन्न कर देती है, ऐसा उस समय भी होता है जब सेल से कोइर् विद्युत धारा नहीं ली जाती। जब सेल को किसी चालक परिपथ अवयव से संयोजित करते हैं तो विभवांतर उस चालक के आवेशों में गति ला देता है और विद्युत धारा उत्पन्न हो जाती है। किसी विद्युत परिपथ में विद्युत धारा बनाएरखने के लिए सेल अपनी संचित रासायनिक ऊजार् खचर् करता है। किसी धारावाही विद्युत परिपथ के दो ¯बदुओं के बीच विद्युत विभवांतर को हम उस कायर् द्वारा परिभाष्िात करते हैं जो एकांक आवेश को एक ¯बदु से दूसरे ¯बदु तक लाने में किया जाता है। किया गया कायर् ;द्धॅ दो ¯बदुओं के बीच विभवांतर ;टद्ध त्र आवश्ेा ;द्धफ ट त्र ॅध्फ ;12ण्2द्ध विद्युत विभवांतर का ैप् मात्राक वोल्ट ;टद्ध है जिसे इटली के भौतिकविज्ञानी अलेसान्द्रो वोल्टा के नाम पर रखा गया है। यदि किसी विद्युत धारावाही चालक के दो ¯बदुओं के बीच एक कूलाॅम आवेश को एक ¯बदु से दूसरे ¯बदु तक ले जाने में 1 जूल कायर् किया जाता है तो उन दो ¯बदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट होता है। अतः 1 जूल त्र1 वोल्ट 1 वूफलाॅम 1ट त्र 1श्रब्दृ1 ;12ण्3द्ध विभवांतर की माप एक यंत्रा द्वारा की जाती है जिसे वोल्टमीटर कहते हैं। वोल्टमीटर को सदैव उन ¯बदुओं से पाश्वर्क्रम में संयोजित करते हैं जिनके बीच विभवांतर मापना होता है। उदाहरण 12.2 12 ट विभवांतर के दो ¯बदुओं के बीच 2 ब् आवेश को ले जाने में कितना कायर् किया जाता है? हल विभवांतर ट ;त्र 12 वोल्टद्ध के दो ¯बदुओं के बीच प्रवाहित आवेश का परिमाण फ ;त्र 2 कूलाॅमद्ध है। इस प्रकार आवेश को स्थानांतरित करने में किया गया कायर् ;समीकरण 12.2 के अनुसारद्ध है: ॅत्र टफ त्र 12 ट × 2 ब् त्र 24 श्र प्रश्न 1ण् उस युक्ित का नाम लिख्िाए जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है। 2ण् यह कहने का क्या तात्पयर् है कि दो ¯बदुओं के बीच विभवांतर 1ट है? 3ण् 6 ट बैटरी से गुशरने वाले हर एक वूफलाॅम आवेश को कितनी ऊजार् दी जाती है? घ् 12.3 विद्युत परिपथ आरेख हम जानते हैं कि कोइर् विद्युत परिपथ, जैसा चित्रा 12.1 में दिखाया गया है, एक सेल ;अथवा एक बैटरीद्ध, एक प्लग वुंफजी, वैद्युत अवयव ;अथवा अवयवोंद्ध तथा संयोजी तारों से मिलकर बनता है। विद्युत परिपथों का प्रायः ऐसा व्यवस्था आरेख खींचना सुविधाजनक होता है जिसमें परिपथ के विभ्िान्न अवयवों को सुविधाजनक प्रतीकों द्वारा निरूपित किया जाता है। सारणी 12.1 में सामान्य उपयोग में आने वाले कुछ वैद्युत अवयवों को निरूपित करने वाले रूढ़ प्रतीक दिए गए हैं। सारणी 12.1: विद्युत परिपथों में सामान्यतः उपयोग होने वाले कुछ अवयवों के प्रतीक 12.4 ओम का नियम क्या किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर और उससे प्रवाहित विद्युतधारा के बीच कोइर् संबंध है? आइए एक ियाकलाप द्वारा इसकी छानबीन करते हैं। इस ियाकलाप में आप यह देखेंगे कि प्रत्येक प्रकरण में टध्प् का लगभग एक ही मान प्राप्त होता है। इस प्रकार ट.प् ग्रापफ चित्रा 12.3 में दिखाए अनुसार मूल ¯बदु से गुशरने वाली एक सरल रेखा होती है। इस प्रकार, टध्प् एक नियत अनुपात है। 1827 में जमर्न भौतिकविज्ञानी जाजर् साइर्मन ओम ने, किसी धातु के तार में प्रवाहित विद्युत धारा प् तथा उसके सिरों के बीच विभवांतर में परस्पर संबंध का पता लगाया। एक विद्युत परिपथ में धतु के तार के दो सिरों के बीच विभवान्तर उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धरा के समानुपाती होता है, परंतु तार का ताप समान रहना चाहिए। इसे ओम का नियम कहते हंैं। दूसरे शब्दों में - ट ∝ प् ;12ण्4द्ध अथवा टध्प् त्र नियतांक त्र त् अथवा ट त्रप्त् ;12ण्5द्ध समीकरण ;12.5द्ध में किसी दिए गए धातु के लिए, दिए गए ताप पर, त् एक नियतांक है जिसे तार का प्रतिरोध कहते हैं। किसी चालक का यह गुण है कि वह अपने में प्रवाहित होने वाले आवेश के प्रवाह का विरोध करता हैं। प्रतिरोध का ैप् मात्राक ओम है, इसे ग्रीक भाषा के शब्द Ω से निरूपित करते हैं। ओम के नियम के अनुसार त् त्र टध्प् ;12ण्6द्ध यदि किसी चालक के दोनों सिरों के बीच विभवांतर 1 ट है तथा उससे 1 । विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तब उस चालक का प्रतिरोध त्ए 1 Ω होता है। 1 वोल्ट 1 ओम त्र 1ऐि म्पयर समीकरण ;12.5द्ध से हमें यह संबंध भी प्राप्त होता है: प् त्र टध्त् ;12ण्7द्ध समीकरण ;12.7द्ध से स्पष्ट है कि किसी प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा उसके प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है। यदि प्रतिरोध दोगुना हो जाए तो विद्युत धारा आधी रह जाती है। व्यवहार में कइर् बार किसी विद्युत परिपथ में विद्युत धारा को घटाना अथवा बढ़ाना आवश्यक हो जाता है। स्रोत की वोल्टता में बिना कोइर् परिवतर्न किए परिपथ की विद्युत धारा को नियंत्रिात करने के लिए उपयोग किए जाने वाले अवयव को परिवतीर् प्रतिरोध कहते हैं। किसी विद्युत परिपथ में परिपथ के प्रतिरोध को परिवतिर्त करने के लिए प्रायः एक युक्ित का उपयोग करते हैं जिसे धारा नियंत्राक कहते हैं। अब हम नीचे दिए गए ियाकलाप की सहायता से किसी चालक के विद्युत प्रतिरोध के विषय में अध्ययन करेंगे। ियाकलाप 12.2 ऽ एक निक्रोम तार, एक टाॅचर् बल्ब, एक 10 ॅ का बल्ब तथा एक ऐमीटर ;0 दृ 5 । परिसरद्धए एक प्लग वुंफजी तथा कुछ संयोजी तार लीजिए। ऽ चार शुष्क सेलों ;प्रत्येक 1ण्5 ट काद्ध को श्रेणीक्रम में ऐमीटर से संयोजित करके चित्रा 12.4 में दिखाए अनुसार परिपथ में एक अंतराल ग्ल् छोड़कर एक परिपथ बनाइए। चित्रा12ण्4 ऽ अंतराल ग्ल् में निक्रोम तार को जोड़कर परिपथ को पूरा कीजिए। वुंफजी लगाइए। ऐमीटर का पाठ्यांक नोट कीजिए। प्लग से वुंफजी बाहर निकालिए ;ध्यान दीजिए: परिपथ की धारा मापने के पश्चात सदैव ही प्लग से वुंफजी बाहर निकालिएद्ध। ऽ निक्रोम तार के स्थान पर अंतराल ग्ल् में टाचर् बल्ब को परिपथ में जोडि़ए तथा ऐमीटर का पाठ्यांक लेकर बल्ब से प्रवाहित विद्युत धारा मापिए। ऽ अंतराल ग्ल् में विभ्िान्न अवयवों को जोड़ने पर ऐमीटर के पाठ्यांक भ्िान्न - भ्िान्न हैं? उपरोक्त प्रेक्षण क्या संकेत देते हैं? ऽ आप अंतराल ग्ल् में किसी भी पदाथर् का अवयव जोड़कर इस ियाकलाप को दोहरा सकते हैं। प्रत्येक स्िथति में ऐमीटर के पाठ्यांक का पे्रक्षण कीजिए। इन प्रेक्षणों का विश्लेषण कीजिए। इस ियाकलाप में हम यह अवलोकन करते हैं कि विभ्िान्न अवयवों के लिए विद्युत धारा भ्िान्न है। यह भ्िान्न क्यों है? कुछ अवयव विद्युत धारा के प्रवाह के लिए सरल पथ प्रदान करते हैं जबकि अन्य इस प्रवाह का विरोध करते हैं। हम यह जानते हैं कि इलेक्ट्राॅनों की किसी परिपथ में गति के कारण ही परिपथ में कोइर् विद्युत धारा बनती है। तथापि, चालक के भीतर इलेक्ट्राॅन गति करने के लिए पूणर्तः स्वतंत्रा नहीं होते। जिन परमाणुओं के बीच ये गति करते हैं उन्हीं के आकषर्ण द्वारा इनकी गति नियंत्रिात हो जाती है। इस प्रकार किसी चालक से होकर इलेक्ट्राॅनों की गति उसके प्रतिरोध द्वारा मंद हो जाती है। एक ही साइश के चालकों में वह चालक जिसका प्रतिरोध कम होता है, अिाक अच्छा चालक होता है। वह चालक जो पयार्प्त प्रतिरोध लगाता है, प्रतिरोधक कहलाता है। सवर्सम साइश का वह अवयव जोे उच्च प्रतिरोध लगाता है, हीन चालक कहलाता है। समान साइश का कोइर् विद्युतरोधी इससे भी अिाक प्रतिरोध लगाता है। 12.5 वह कारक जिन पर किसी चालक का प्रतिरोध निभर्र करता है यह पाया गया है कि जब तार की लंबाइर् दोगुनी कर देते हैं तो ऐमीटर का पाठ्यांक आधा हो जाता है। परिपथ में समान पदाथर् तथा समान लंबाइर् का मोटा तार जोड़ने पर ऐमीटर का पाठ्यांक बढ़ जाता है। ऐमीटर के पाठ्यांक में तब भी अंतर आता है जब परिपथ में भ्िान्न पदाथर् परंतु समान लंबाइर् तथा समान अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रापफल के तार को जोड़ते हैं। ओम के नियम ख्समीकरण ;12ण्5द्ध दृ ;12ण्7द्ध, को अनुप्रयोग करने पर हम यह पाते हैं कि किसी चालक का प्रतिरोध ;पद्ध चालक की लंबाइर् ;पपद्ध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रापफल तथा ;पपपद्ध उसके पदाथर् की प्रकृति पर निभर्र करता है। परिशु( माप यह दशार्ते हैं कि किसी धातु के एकसमान चालक का प्रतिरोध उसकी लंबाइर् ;सद्ध के अनुक्रमानुपाती तथा उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रापफल ;।द्ध के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अथार्त् त् ∝ स ;12ण्8द्ध तथा त् ∝ 1ध्। ;12ण्9द्ध समीकरणांे ;12ण्8द्ध तथा ;12ण्9द्ध को संयोजित करने पर हमें प्राप्त होता है त् ∝ स अथवा त् त्र ρ स ;12ण्10द्ध।। यहाँ ρ ;रोद्ध आनुपातिकता स्िथरांक है जिसे चालक के पदाथर् की वैद्युत प्रतिरोधकता कहते हैं। प्रतिरोधकता का ैप् मात्राक Ω उ है। यह किसी पदाथर् का अभ्िालाक्षण्िाक गुणधमर् है। धातुओं तथा मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता अत्यंत कम होती है जिसका परिसर 10दृ8 Ωउ से 10दृ6 Ωउ है। ये विद्युत की अच्छी चालक हैं। रबड़ तथा काँच जैसे विद्युतरोधी पदाथो± की प्रतिरोधकता 1012 से 1017 Ω उ कोटि की होती है। किसी पदाथर् का प्रतिरोध तथा प्रतिरोधकता दोनों ही ताप में परिवतर्न के साथ परिवतिर्त हो जाते हैं। सारणी 12.2 में हम यह देखते हैं कि व्यापक रूप में मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता उनकी अवयवी धातुओं की अपेक्षा अिाक होती है। मिश्रातुओं का उच्च ताप पर शीघ्र ही उपचयन ;दहनद्ध नहीं होता। यही कारण है कि मिश्रातुओं का उपयोग विद्युत - इस्तरी, टोस्टर आदि सामान्य वैद्युत तापन युक्ितयों के निमार्ण में किया जाता है। विद्युत बल्बों के तंतुओं के निमार्ण में तो एकमात्रा टंगस्टन का ही उपयोग किया जाता है, जबकि काॅपर तथा ऐलुमिनियम का उपयोग विद्युत संचरण के लिए उपयोग होने वाले तारों के निमार्ण में किया जाता है। सारणी 12.2 20 °ब् पर वुफछ पदाथो± की वैद्युत प्रतिरोधकता’ चालक सिल्वर 1ण्60 × 10दृ8 काॅपर 1ण्62 × 10दृ8 ऐलुमिनियम 2ण्63 × 10दृ8 टंगस्टन 5ण्20 × 10दृ8 निवैफल 6ण्84 × 10दृ8 आयरन 10ण्0 × 10दृ8 क्रोमियम 12ण्9 × 10दृ8 मवर्फरी 94ण्0 × 10दृ8 मैगनीज़ 1ण्84 × 10दृ6 मिश्रातुएँ कांस्टेंटन 49 × 10दृ6 ;ब्न तथा छप की मिश्रातुद्ध मैंगनीश 44 × 10दृ6 ;ब्नए डद तथा छप की मिश्रातुद्ध निक्रोम 100 × 10दृ6 ;छपए ब्तए डद तथा थ्म की मिश्रातुद्ध विद्युतरोधी काँच 1010 दृ 1014 कठोर 1013 दृ 1016 ऐबोनाइट 1015 दृ 1017 डायमंड 1012 दृ 1013 1012कागश ;शुष्कद्ध ’ आपको इन मानांे को याद करने की कोइर् आवश्यकता नहीं है। इन मानांे का उपयोग आप आंकिकप्रश्नांे को हल करने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण 12.3 ;ंद्ध यदि किसी विद्युत बल्ब के तंतु का प्रतिरोध 1200Ω है तो यह बल्ब 220ट स्रोत से कितनी विद्युत धारा लेगा? ;इद्ध यदि किसी विद्युत हीटर की वुफंडली का प्रतिरोध 100Ω है तो यह विद्युत हीटर 220ट स्रोत से कितनी धारा लेगा? हल ;ंद्ध हमें दिया गया है ट त्र 220टय त् त्र 1200 Ω समीकरण ;12.6द्ध से विद्युत धारा प् त्र 220 टध्1200 Ω त्र 0ण्18 । ;इद्ध हमें दिया गया है ट त्र 220 टय त् त्र 100 Ω समीकरण ;12.6द्ध से विद्युत धारा प् त्र 220 टध्100 Ω त्र 2ण्2 । 220 ट के समान विद्युत स्रोत से विद्युत बल्ब तथा विद्युत हीटर द्वारा ली जाने वाली विद्युत धाराओं के अंतर पर ध्यान दीजिए! उदाहरण 12.4 जब कोइर् विद्युत हीटर विद्युत स्रोत से 4 । विद्युत धारा लेता है तब उसके टमिर्नलों के बीच विभवांतर 60 ट है। उस समय विद्युत हीटर कितनी विद्युत धारा लेगा जब विभवांतर को 120 ट तक बढ़ा दिया जाएगा? हल हमें दिया गया है, विभवांतर ट त्र 60 टए विद्युत धारा प् त्र 4 । ट 60 ट ओम के नियम के अनुसार, त् त्र त्र त्र15 Ω प् 4 । जब विभवांतर बढ़ाकर 120 ट किया जाता है, तब ट 120 ट विद्युतधारा प् त्र त्र त्र8। त् 15 Ω अथार्त, तब विद्युत हीटर से प्रवाहित विद्युत धारा का मान 8 । हो जाता है। उदाहरण 12.5 किसी धातु के 1 उ लंबे तार का 20 °ब् पर वैद्युत प्रतिरोध 26Ω है। यदि तार का व्यास 0ण्3 उउ है, तो इस ताप पर धातु की वैद्युत प्रतिरोधकता क्या है? सारणी 12.2 का उपयोग करके तार के पदाथर् की भविष्यवाणी कीजिए। हल हमें दिया गया है तार का प्रतिरोध त् त्र 26 Ω , व्यास क त्र 0ण्3 उउ त्र 3 × 10.4 उए तथा तार की लंबाइर् स त्र 1 उ अतः, समीकरण ;12.10द्ध से, दिए गए धातु के तार की वैद्युत प्रतिरोधकता ρ त्र ;त्।ध्सद्ध त्र ;त्πक2ध्4स द्ध मानों को प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है ρ त्र 1ण्84 × 10.6 Ω उए इस प्रकार दिए गए तार की धातु की 20 °ब् पर वैद्युत प्रतिरोधकता 1ण्84 × 10.6 Ω उ है। सारणी 12.2 में हम देखते हैं कि मैंगनीश की वैद्युत प्रतिरोधकता का मान यही है। उदाहरण 12.6 दिए गए पदाथर् के किसी स लंबाइर् तथा । मोटाइर् के तार का प्रतिरोध् 4Ω है। इसी पदाथर् के किसी अन्य तार का प्रतिरोध् क्या होगा जिसकी लंबाइर् 2 स तथा मोटाइर् 2। है? हल प्रथम तार के लिए स त्1 त्र ρ । त्र 4 Ω द्वितीय तार के लिए स ध्2त्2 त्र ρ 2 । 1 स त्रण्ρ 4 । 1 त्र 4 त्1 1 त्र × 4Ω4 त्र 1Ω अतः तार का नया प्रतिरोध 1 Ω है। प्रश्न 12345 किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निभर्र करता है? समान पदाथर् के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें से किसमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाता है? क्यों? मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर को उसके पूवर् के विभवांतर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा में क्या परिवतर्न होगा? विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शु( धातु के न बनाकर किसी मिश्रातु के क्यों बनाए जाते हैं?निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर तालिका 12.2 में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिएः ;ंद्ध आयरन ;थ्मद्ध तथा मवर्फरी ;भ्हद्ध में कौन अच्छा विद्युत चालक है? ;इद्ध कौन - सा पदाथर् सवर्श्रेष्ठ चालक है? घ् 12ण्6प्रतिरोधकों के निकाय का प्रतिरोध पिछले अनुभाग में हमने वुफछ सरल विद्युत परिपथों के बारे में सीखा था। हमने यह देखा कि किसी चालक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान किस प्रकार उसके प्रतिरोध तथा उसके सिरों के बीच विभवांतर पर निभर्र करता है। विविध प्रकार के विद्युत उपकरणों तथा युक्ितयों में हम प्रायः प्रतिरोधकों के विविध संयोजन देखते हैं। इसलिए अब हमें यह विचार करना है कि प्रतिरोधकों के संयोजनों पर ओम के नियम को किस प्रकार अनुप्रयुक्त किया जा सकता है? प्रतिरोधकों को परस्पर संयोजित करने की दो वििायाँ हैं। चित्रा 12.6 में एक विद्युत परिपथ दिखाया गया है जिसमें त्ए त् तथा त् प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को एक सिरे123से दूसरा सिरा मिलाकर जोड़ा गया है। प्रतिरोधकों के इस संयोजन को श्रेणीक्रम संयोजन कहा जाता है। चित्रा 12.6 श्रेणीक्रम में संयोजित प्रतिरोधक चित्रा 12.7 में प्रतिरोधकों का एक ऐसा संयोजन दिखाया गया है जिसमें तीन प्रतिरोधक एक साथ ¯बदुओं ग् तथा ल् के बीच संयोजित हैं। प्रतिरोधकों के इस प्रकार के संयोजन को पाश्वर्क्रम संयोजन कहा जाता है। चित्रा 12.7 पाश्वर्क्रम में संयोजित प्रतिरोधक 12ण्6ण्1 श्रेणीक्रम में संयोजित प्रतिरोधक जब कइर् प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में संयोजित करते हैं तो परिपथ में प्रवाहित विद्युत धारा का क्या होता है? उनका तुल्य प्रतिरोध क्या होता है? आइए इसे निम्नलिख्िात ियाकलापों की सहायता से समझने का प्रयास करते हैं। आप यह देखेंगे कि ऐमीटर में विद्युत धारा का मान वही रहता है, यह परिपथ में ऐमीटर की स्िथति पर निभर्र नहीं करता। इसका तात्पयर् यह है कि प्रतिरोधकों के श्रेणीक्रम संयोजन में परिपथ के हर भाग में विद्युत धारा समान होती है अथार्त प्रत्येक प्रतिरोध से समान विद्युत धारा प्रवाहित होती है। ऽ परिपथ में प्लग में वुंफजी लगाइए तथा वोल्टमीटर का पाठ्यांक नोट कीजिए। इससे हमें श्रेणीक्रम संयोजन के सिरों के बीच विभवांतर ज्ञात होता है। मान लीजिए यह ट है। अब बैटरी के दोनों टमिर्नलों के बीच विभवांतर नोट कीजिए। इन दोनों मानों की तुलना कीजिए। ऽ प्लग से वुुंफजी निकालिए तथा वोल्टमीटर को भी परिपथ से हटा दीजिए। अब वोल्टमीटर को चित्रा 12.8 में दिखाए अनुसार पहले प्रतिरोधक के सिरों ग् तथा च् के बीच जोडि़ए। ऽ प्लग में वुंफजी लगाइए तथा पहले प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर मापिए। मान लीजिए यह ट है।ऽ इसी प्रकार अन्य दो प्रतिरोधकों के सिरों के बीच पृथक - पृथक विभवांतर मापिए। मान लीजिए ये मान क्रमशः ट तथा ट हैं।ऽ टए टए टतथा टके बीच संबंध व्युत्पन्न कीजिए।1231 2 3 आप यह देखेंगे कि विभवांतर ट अन्य तीन विभवांतरों, टए ट तथा ट के योग123के बराबर है। अथार्त प्रतिरोधक के श्रेणीक्रम संयोजन के सिरों के बीच वुफल विभवांतर व्यष्िटगत प्रतिरोधकों के विभवांतरों के योग के बराबर है। अथार्त ट त्र ट1 ़ ट2 ़ ट3 ;12ण्11द्ध मान लीजिए, चित्रा 12.8 विद्युत में दशार्ये गए परिपथ में प्रवाहित विद्युत धारा प् है। तब प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित विद्युत धारा भी प् है। श्रेणीक्रम में जुड़े इन तीनों प्रतिरोधकों को एक ऐसे तुल्य एकल प्रतिरोधक जिसका प्रतिरोध त् है, के द्वारा प्रतिस्थापित करना संभव है जिसे परिपथ में जोड़ने पर इसके सिरों पर प्रतिरोध ट तथा परिपथ में प्रवाहित धारा प् वही रहती है। समस्त परिपथ पर ओम का नियम अनुप्रयुक्त करने पर हमें प्राप्त होता हैः ट त्र प् त् ;12ण्12द्ध तीनों प्रतिरोधकांे पर पृथक - पृथक ओम का नियम अनुप्रयुक्त करने पर हमें प्राप्त होता हैः त्रप् त् ख्12ण्13;ंद्ध,ट1 1 ट2 त्रप् त्2 ख्12ण्13;इद्ध, तथा ट3त्रप् त्3 ख्12ण्13;बद्ध, समीकरण ;12.11द्ध से प् त् त्र प् त्1 ़ प् त्2 ़ प् त्3 अथवा त् त्र त् ़त् ़ त्;12ण्14द्धे 123 इस प्रकार हम यह निष्कषर् निकाल सकते हैं कि जब बहुत से प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में संयोजित होते हैं तो संयोजन का वुफल प्रतिरोध त्ए त्ए त्के योग के बराबर होता123 है और इस प्रकार संयोजन वफा प्रतिरोध किसी भी व्यष्िटगत प्रतिरोधक के प्रतिरोध से अिाक होता है। उदाहरण 12.7 एक विद्युत लैम्प जिसका प्रतिरोध 20 है, तथा एक 4 Ω प्रतिरोध का चालक 6 ट की बैटरी से चित्रा 12.9 में दिखाए अनुसार संयोजित हैं। ;ंद्ध परिपथ का वुफल प्रतिरोध, ;इद्ध परिपथ में प्रवाहित विद्युत धारा तथा ;बद्ध विद्युत लैम्प तथा चालक के सिरों के बीच विभवांतर परिकलित कीजिए। हल विद्युत लैम्प का प्रतिरोध त्त्र 20 Ω1 श्रेणीक्रम में संयोजित चालक का प्रतिरोध त् त्र 4 Ω2तब, परिपथ में वुफल प्रतिरोध त् त्र त्1 ़ त्2 त्त्र 20 Ω ़ 4 Ω त्र 24 Ω े बैटरी के दो टमिर्नलों के बीच वुफल विभवांतर ट त्र 6 ट अब, ओम के नियम के अनुसार परिपथ में प्रवाहित वुफल विद्युत धारा प् त्र टध्त् े त्र 6 टध्24 Ω त्र 0ण्25 । विद्युत लैम्प तथा चालक पर ओम का नियम पृथक - पृथक अनुप्रयुक्त करने पर हमें विद्युत लैम्प के सिरों के बीच विभवांतर प्राप्त होता हैः ट1 त्र 20 Ω× 0ण्25 । त्र5 टय तथा, चालक के सिरों के बीच विभवांतर प्राप्त होता हैऋ ट2 त्र 4 Ω× 0ण्25 । त्र 1 ट अब मान लीजिए हम विद्युत लैम्प तथा चालक के श्रेणीक्रम संयोजन को किसी एकल तथा तुल्य प्रतिरोधक से प्रतिस्थापित करना चाहते हैं। इस तुल्य प्रतिरोधक का प्रतिरोध इतना होना चाहिए कि इसे 6 ट बैटरी के दो टमिर्नलों से संयोजित करने पर परिपथ में 0.25 । विद्युत धारा प्रवाहित हो। तब इस तुल्य प्रतिरोधक का प्रतिरोध त् होगा त् त्र टध्प् त्र 6 टध् 0ण्25 । त्र 24 Ω यह श्रेणीक्रम परिपथ का वुफल प्रतिरोध हैऋ यह दोनों प्रतिरोधों के योग के बराबर है। प्रश्न 12 किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 2 ट के तीन सेलों की बैटरी, एक 5 Ω प्रतिरोधक, एक 8 Ω प्रतिरोधक, एक 12 Ω प्रतिरोधक तथा एक प्लग वुंफजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों। प्रश्न 1 का परिपथ दुबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत धारा को मापने के लिए ऐमीटर तथा 12 Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवंातर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्यांक होंगे? घ् 12ण्6ण्2 पाश्वर्क्रम में संयोजित प्रतिरोधक आइए अब चित्रा 12.7 में दिखाए अनुसार, जोड़े गये सेलों के एक संयोजन ;अथवा बैटरीद्ध से पाश्वर्क्रम में संयोजित तीन प्रतिरोधकों की व्यवस्था पर विचार करते हैं। चित्रा 12.11 ऽ वुंफजी से प्लग बाहर निकालिए। परिपथ से ऐमीटर तथा वोल्टमीटर निकाल लीजिए। चित्रा 12.11 में दिखाए अनुसार ऐमीटर को प्रतिरोध त् से श्रेणीक्रम में संयोजित1कीजिए। ऐमीटर का पाठ्यांक प्ए नोट कीजिए। ऽ इसी प्रकार, त् एवं त् में प्रवाहित होने वाली धारा भी मापिए। माना इनका मान12क्रमशः प् एवं प् है। प्ए प्ए प् एवं प् में क्या संबंध है?12123यह पाया जाता है कि वुफल विद्युत धारा प्ए संयोजन की प्रत्येक शाखा में प्रवाहित होने वाली पृथक धाराओं के योग के बराबर है। प् त्र प्1 ़ प्2 ़ प्3 ;12ण्15द्ध मान लीजिए प्रतिरोधकों के पाश्वर् संयोजन का तुल्य प्रतिरोध त्च है। प्रतिरोधकों के पाश्वर् संयोजन पर ओम का नियम लागू करने पर हमें प्राप्त होता है प् त्र टध्त्च ;12ण्16द्ध प्रत्येक प्रतिरोधक पर ओम का नियम लागू करने पर हमंे प्राप्त होता है प् त्र ट ध्त्य प् त्र ट ध्त्य और प् त्र ट ध्त् ;12ण्17द्ध112233 समीकरणांे ;12ण्15द्ध तथा ;12ण्17द्ध से हमें प्राप्त होता है टध्त्च त्र टध्त्1 ़ टध्त्2 ़ टध्त्3 अथवा 1ध्त्च त्र 1ध्त्1 ़ 1ध्त्2 ़ 1ध्त्3 ;12ण्18द्ध इस प्रकार हम यह निष्कषर् निकाल सकते हैं कि पाश्वर्क्रम से संयोजित प्रतिरोधों के समूह के तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम पृथक प्रतिरोधांे के व्युत्क्रमांे के योग के बराबर होता है। उदाहरण 12.8 चित्रा 12ण्10 के परिपथ आरेख मंे मान लीजिए प्रतिरोधकों त्ए त्तथा त्के मान12 3 क्रमशः 5 Ωए 10 Ωए 30 Ω हैं तथा इन्हें 12 ट की बैटरी से संयोजित किया गया है। ;ंद्ध प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित विद्युत धारा ;इद्ध परिपथ मंे प्रवाहित कुल विद्युत धारा तथा ;बद्ध परिपथ का कुल प्रतिरोध परिकलित कीजिए। हल त्1 त्र 5 Ωए त्2 त्र 10 Ωए तथा त्3 त्र 30 Ω बैटरी के सिरांे पर विभवांतर, ट त्र 12 ट प्रत्येक व्यष्िटगत प्रतिरोधक के सिरांे पर भी विभवांतर इतना ही है, अतः प्रतिरोधकांे से प्रवाहित विद्युत धारा का परिकलन करने के लिए हम ओम के नियम का उपयोग करते हैं। त्से प्रवाहित विद्युत धारा प्त्र टध् त्1 11 प्1 त्र 12 टध्5 Ω त्र 2ण्4 । त्से प्रवाहित विद्युत धारा प्त्र टध् त्2 22 प्2 त्र 12 टध्10 Ω त्र 1ण्2 । त्से प्रवाहित विद्युत धारा प्त्र टध्त्3 33 प्3 त्र 12 टध्30 Ω त्र 0ण्4 । परिपथ से प्रवाहित वुफल धारा प् त्र प्1 ़ प्2 ़ प्3 त्र ;2ण्4 ़ 1ण्2 ़ 0ण्4द्ध । त्र4 । समीकरण ;12.18द्ध से वुफल प्रतिरोध त्चए का मान इस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है। 111 11 त्ऱ़ त्र त्च 510303 इस प्रकार त्च त्र 3 Ω उदाहरण 12.9 चित्रा 12ण्12ए में त् त्र 10 Ωए त् त्र 40 Ωए त् त्र 30 Ωए त् त्र 20 Ωए1234त् त्र 60 Ωए है तथा प्रतिरोधकों के इस विन्यास को 12 ट से संयोजित5किया जाता है। ;ंद्ध परिपथ मंे कुल प्रतिरोध तथा ;इद्ध परिपथ मंे प्रवाहित कुल विद्युत धारा परिकलित कीजिए। हल मान लीजिए इन पाश्वर्क्रम मंे संयोजित दो प्रतिरोधकों त्तथा त् को12किसी तुल्य प्रतिरोधक जिसका प्रतिरोध त्′ण् है, द्वारा प्रतिस्थापित करते हैं। इस प्रकार हम पाश्वर्क्रम मंे संयोजित तीन प्रतिरोधकों त्ए त्तथा34 त् को किसी अन्य तुल्य प्रतिरोधक जिसका प्रतिरोध त्″ द्वारा प्रतिस्थापित5 करते हैं। तब समीकरण ;12.19द्ध का उपयोग करने पर हमें प्राप्त होता है 1ध् त्′ त्र 1ध्10 ़ 1ध्40 त्र 5ध्40य अथार्त त्′ त्र 8 Ω इसी प्रकार 1ध् त्″ त्र 1ध्30 ़ 1ध्20 ़ 1ध्60 त्र 6ध्60य अथार्त त्″ त्र 10 Ω इस प्रकार, कुल प्रतिरोध, त्त्र त्′ ़ त्″ त्र 18 Ω विद्युत धारा का मान परिकलित करने के लिए ओम का नियम उपयोग करने पर हमंे प्राप्त होता हैप् त्र टध्त् त्र 12 टध्18 Ω त्र 0ण्67 । हमने देखा है कि किसी श्रेणीब( विद्युत परिपथ में शुरू से अंत तक विद्युत धारा नियत रहती है। इस प्रकार स्पष्ट रूप से यह व्यावहारिक नहीं है कि हम किसी विद्युत परिपथ में विद्युत बल्ब तथा विद्युत हीटर को श्रेणीक्रम में संयोजित करें। इसका कारण यह है कि इन्हें उचित प्रकार से कायर् करने के लिए अत्यिाक भ्िान्न मानों की विद्युत धाराओं की आवश्यकता होती है ;उदाहरण 12.3 देख्िाएद्ध। श्रेणीब( परिपथ से एक प्रमुख हानि यह होती है कि जब परिपथ का एक अवयव कायर् करना बंद कर देता है तो परिपथ टूट जाता है और परिपथ का अन्य कोइर् अवयव कायर् नहीं कर पाता। यदि आपने त्योहारों, विवाहोत्सवों आदि पर भवनों की सजावट में बल्बों की सजावटी लडि़यों का उपयोग होते देखा है तो आपने बिजली - मिस्तरी को परिपथ में खराबी वाले स्थानको ढूँढ़ने में कापफी समय खचर् करते हुए यह देखा होगा कि वैफसे वह फ्ऱयूश बल्बोें को ढूँढ़ने में सभी बल्बों की जाँच करता है, खराब बल्बों को बदलता है। इसके विपरीत पाश्वर्क्रम परिपथ में विद्युत धारा विभ्िान्न वैद्युत सािात्रों में विभाजित हो जाती है। पाश्वर् परिपथ में वुफल प्रतिरोध समीकरण ;12.18द्ध के अनुसार घटता है। यह विशेष रूप से तब अिाक सहायक होता है जब सािात्रों के प्रतिरोध भ्िान्न - भ्िान्न होते हैं तथा उन्हें उचित रूप से कायर् करने के लिए भ्िान्न विद्युत धारा की आवश्यकता होती है। प्रश्न 12345 जब ;ंद्ध 1 Ω तथा 106 Ω ;इद्ध 1 Ω, 103 Ω तथा 106 Ω के प्रतिरोध पाश्वर्क्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के संबंध में आप क्या निणर्य करेंगे। 100 Ω का एक विद्युत लैम्प, 50 Ω का एक विद्युत टोस्टर तथा 500 Ω का एक जल पिफल्टर 220 ट के विद्युत स्रोत से पाश्वर्क्रम में संयोजित हैं। उस विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत धारा लेती है जितनी तीनों युक्ितयाँ लेती हैं। यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत इस्तरी से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होती है? श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत युक्ितयों को पाश्वर्क्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं? 2 Ω, 3 Ω तथा 6 Ω के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का वुफल प्रतिरोध ;ंद्ध 4 Ω, ;इद्ध 1 Ω हो? 4 Ω, 8 Ω, 12 Ω तथा 24 Ω प्रतिरोध की चार वुफंडलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से ;ंद्ध अिाकतम ;इद्ध निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके? घ् 12ण्7विद्युत धारा का तापीय प्रभाव हम जानते हैं कि बैटरी अथवा सेल विद्युत ऊजार् के स्रोत हैं। सेल के भीतर होने वाली रासायनिक अभ्िािया सेल के दो टमिर्नलों के बीच विभवांतर उत्पन्न करती है, जो बैटरी से संयोजित किसी प्रतिरोधक अथवा प्रतिरोधकों के किसी निकाय में विद्युत धारा प्रवाहित करने के लिए इलेक्ट्राॅनों में गति स्थापित करता है। हमने अनुभाग 12.2 में यह अध्ययन किया है कि परिपथ में विद्युत धारा बनाए रखने के लिए स्रोतको अपनी ऊजार् खचर् करते रहना पड़ता है। यह ऊजार् कहाँ चली जाती है? विद्युत धारा बनाए रखने में, खचर् हुइर् स्रोत की ऊजार् का वुफछ भाग उपयोगी कायर् करने ;जैसे पंखेकी पंखुडि़यों को घुमानाद्ध में उपयोग हो जाता है। स्रोत की ऊजार् का शेष भाग उस ऊष्मा को उत्पन्न करने में खचर् होता है। जो सािात्रों के ताप में वृि करती है। इसका प्रेक्षण प्रायः हम अपने दैनिक जीवन में करते हैं। उदाहरण के लिए, हम किसी विद्युत पंखे को निरंतर कापफी समय तक चलाते हैं तो वह गमर् हो जाता है। इसके विपरीत यदि विद्युत परिपथ विशु( रूप से प्रतिरोधक है, अथार्त बैटरी से केवल प्रतिरोधकों का एकसमूह ही संयोजित है तो स्रोत की ऊजार् निरंतर पूणर् रूप से ऊष्मा के रूप में क्षयित होती रहती है। इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं। इस प्रभाव का उपयोग विद्युत हीटर, विद्युत इस्तरी जैसी युक्ितयों में किया जाता है। प्रतिरोध त् के किसी प्रतिरोधक पर विचार कीजिए जिससे विद्युत धारा प् प्रवाहित हो रही है। मान लीजिए इसके सिरों के बीच विभवांतर ट है ;चित्रा 12.13द्ध। मान लीजिए इससे समय ज में फ आवेश प्रवाहित होता है। फ आवेश विभवांतर ट से प्रवाहित होने में किया गया कायर् टफ है। अतः स्रोत को समय ज में टफ ऊजार् की आपू£त करनी चाहिए। अतः स्रोत द्वारा परिपथ में निवेश्िात शक्ित फच्ट त्र टप् ;12ण्19द्धत्र ज अथार्त समय ज मंे स्रोत द्वारा परिपथ को प्रदान की गयी उफजार् च् × ज है जो टप्ज के बराबर है। स्रोत द्वारा खचर् की जाने वाली इस उफजार् का क्या होता है? यह उफजार् उफष्मा के रूप मंे प्रतिरोधक में क्षयित हो जाती है। इस प्रकार किसी स्थायी विद्युत धारा प् द्वारा समय ज मंे उत्पन्न उफष्मा की मात्रा भ् त्र टप्ज ;12ण्20द्ध ओम का नियम ख्समीकरण ;12.5द्ध, लागू करने पर हमंे प्राप्त होता है भ् त्र प्2 त्ज ;12ण्21द्ध इसे जूल का तापन नियम कहते हैं। इस नियम से यह स्पष्ट है कि किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न होने वाली उफष्मा ;पद्ध दिए गए प्रतिरोधक में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के वगर् के अनुक्रमानुपाती, ;पपद्ध दी गयी विद्युत धारा के लिए प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती तथा ;पपपद्ध उस समय के अनुक्रमानुपाती होती है जिसके लिए दिए गए प्रतिरोध से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। व्यावहारिक परिस्िथतियांे मंे जब एक वैद्युत सांिात्रा को किसी ज्ञात वोल्टता स्रोत से संयोजित करते हंै तो संबंध प् त्र टध्त् के द्वारा उस सािात्रा से प्रवाहित विद्युत धारा परिकलित करने के पश्चात समीकरण चित्रा 12.13;12.21द्ध का उपयोग करते हैं। विशु( प्रतिरोधक विद्युत परिपथ में अपरिवतर्नशील विद्युत धारा उदाहरण 12.10 किसी विद्युत इस्तरी में अिाकतम तापन दर के लिए 840 ॅ की दर से ऊजार् उपभुक्त होती है तथा 360 ॅ की दर से उस समय उपभुक्त होती है जब तापन विद्युत की दर निम्नतम है। यदि विद्युत स्रोत की वोल्टता 220 ट है तो दोनांे प्रकरणांे मंे विद्युत धारा तथा प्रतिरोध के मान परिकलित कीजिए। हल समीकरण ;12.19द्ध से हम यह जानते हंै कि निवेशी शक्ित च् त्र ट प् इस प्रकार विद्युत धारा प् त्र च्ध्ट ;ंद्ध जब तापन की दर अिाकतम है, तब प् त्र 840 ॅध्220 ट त्र 3ण्82 ।य तथा विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध त् त्र टध्प् त्र 220 टध्3ण्82 । त्र 57ण्60 Ω ;इद्ध जब तापन की दर निम्नतम है, तब प् त्र 360 ॅध्220 ट त्र 1ण्64 ।य तथा विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध त् त्र टध्प् त्र 220 टध्1ण्64 । त्र 134ण्15 Ω उदाहरण 12.11 किसी 4 Ω प्रतिरोधक से प्रति सेकंड 100 श्र उफष्मा उत्पन्न हो रही है। प्रतिरोधक के सिरांे पर विभवांतर ज्ञात कीजिए। हल भ् त्र 100 श्रए त् त्र 4 Ωए ज त्र 1 ेए ट त्र घ् समीकरण ;12.21द्ध से हमंे प्रतिरोध से प्रवाहित विद्युत धारा प् प्राप्त होती है प्त्र √;भ्ध्त्जद्ध त्र √ख्100 श्रध्;4 Ω× 1 ेद्ध, त्र 5 । समीकरण ;12.5द्ध से प्रतिरोधक के सिरांे पर विभवांतर ट प्राप्त होता है ट त्र प्त् त्र 5 । × 4 Ω त्र 20 ट प्रश्न 123 किसी विद्युत हीटर की डोरी क्यांे उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है? एक घंटे मंे 50 ॅ विभवांतर से 96000 कूलाॅम आवेश को स्थानांतरित करने मंे उत्पन्न उफष्मा परिकलित कीजिए। 20 Ω प्रतिरोध की कोइर् विद्युत इस्तरी 5 । विद्युत धारा लेती है। 30 े मंे उत्पन्न उफष्मा परिकलित कीजिए। घ् 12ण्7ण्1 विद्युत धारा के तापीय प्रभाव के व्यावहारिक अनुप्रयोग किसी चालक में उफष्मा उत्पन्न होना विद्युत धारा का अवश्यंभावी परिणाम है। बहुत - सी स्िथतियांे मंे यह अवांछनीय होता है क्यांेकि वह उपयोगी विद्युत उफजार् को उफष्मा मंे रूपांतरित कर देता है। विद्युत परिपथांे मंे अपरिहायर् तापन, परिपथ के अवयवांे के ताप मंे वृि कर सकता है जिससे उनके गुणांे मंे परिवतर्न हो सकता है। विद्युत इस्तरी, विद्युत टोस्टर, विद्युत तंदूर, विद्युत केतली तथा विद्युत हीटर जूल के तापन पर आधारित कुछ सुपरिचित युक्ितयाँ हैं। विद्युत तापन का उपयोग प्रकाश उत्पन्न करने मंे भी होता है जैसा कि हम विद्युत बल्ब में देखते हैं। यहाँ पर बल्ब के तंतु को उत्पन्न उफष्मा को जितना संभव हो सके रोके रखना चाहिए ताकि वह अत्यंत तप्त होकर प्रकाश उत्पन्न करे। इसे इतने उच्च ताप पर पिघलना नहीं चाहिए। बल्ब के तंतुआंे को बनाने के लिए टंगस्टन ;गलनांक 3380 °ब्द्ध का उपयोग किया जाता है जो उच्च गलनांक की एक प्रबल धातु है। विद्युतरोधी टेक का उपयोग करके तंतु को यथासंभव ताप विलगित बनाना चाहिए। प्रायः बल्बांे मंे रासायनिक दृष्िट से अिय नाइट्रोजन तथा आगर्न गैस भरी जाती है जिससे उसके तंतु की आयु मंे वृि हो जाती है। तंतु द्वारा उपभुक्त उफजार् का अिाकांश भाग उफष्मा के रूप मंे प्रकट होता है, परंतु इसका एक अल्प भाग विकरित प्रकाश के रूप मंे भी दृष्िटगोचर होता है। जूल तापन का एक और सामान्य उपयोग विद्युत परिपथांे मंे उपयोग होने वाला फ्रयूश है। यह परिपथों तथा सािात्रांे की सुरक्षा, किसी भी अनावश्यक रूप से उच्च विद्युत धारा को उनसे प्रवाहित न होने देकर, करता है। फ्रयूश को युक्ित के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित करते हैं। फ्रयूश किसी ऐसी धातु अथवा मिश्रातु के तार का टुकड़ा होता है जिसका उचित गलनांक हो, उदाहरण के लिए ऐलुमिनियम, काॅपर, आयरन, लैड आदि। यदि परिपथ मंे किसी निदिर्ष्ट मान से अिाक मान की विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो फ्रयूश तार के ताप मंे वृि होती है। इससे फ्रयूश तार पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है। फ्रयूश तार प्रायः धातु के सिरे वाले पोसेर्लेन अथवा इसी प्रकार के विद्युतरोधी पदाथर् के का£ट्रज मंे रखा जाता है। घरेलू परिपथों मंे उपयोग होने वाली फ्रयूश की अनुमत विद्युत धारा 1 ।ए 2 ।ए 3 ।ए 5 ।ए 10 । आदि होती है। उस विद्युत इस्तरी के परिपथ में जो 1 ाॅ की विद्युत शक्ित उस समय उपभुक्त करती है, जब उसे 220 ट पर प्रचालित करते हैं, 1000 ॅ/220 ट त्र 4.54 । की विद्युत धारा प्रवाहित होती है। इस प्रकरण मंे 5 । अनुमतांक का फ्रयूश उपयोग किया जाना चाहिए। 12ण्8विद्युत शक्ित आपने अपनी पिछली कक्षाआंे मंे यह अध्ययन किया था कि कायर् करने की दर को शक्ित कहते हैं। उफजार् के उपभुक्त होने की दर को भी शक्ित कहते हैं। समीकरण ;12.21द्ध से हमें किसी विद्युत परिपथ मंे उपभुक्त अथवा क्षयित विद्युत उफजार् की दर प्राप्त होती है। इसे विद्युत शक्ित भी कहते हैं। शक्ित च् को इस प्रकार व्यक्त करते हैं च् त्र टप् अथवा च् त्र प्2त् त्र ट2ध्त् ;12ण्22द्ध विद्युत शक्ित का ैप् मात्राक वाट ;ॅद्ध है। यह उस युक्ित द्वारा उपभुक्त शक्ित है जिससे उस समय 1 । विद्युत धारा प्रवाहित होती है जब उसे 1 ट विभवांतर पर प्रचालित कराया जाता है। इस प्रकार1 ॅ त्र 1 वोल्ट × 1 ऐम्िपयर त्र 1 ट । ;12ण्23द्ध ‘वाट’ शक्ित का छोटा मात्राक है। अतः वास्तविक व्यवहार मंे हम इसके कापफी बड़े मात्राक ;किलोवाटद्ध का उपयोग करते हैं। एक किलोवाट, 1000 वाट के बराबर होता है। चँूकि विद्युत उफजार् शक्ित तथा समय का गुणनपफल होती है इसलिए विद्युत उफजार् का मात्राक वाट घंटा ;ॅ ीद्ध है। जब एक वाट शक्ित का उपयोग 1 घंटे तक होता है तो उपभुक्त उफजार् एक वाट घंटा होती है। विद्युत उफजार् का व्यापारिक मात्राक किलोवाट घंटा ;ाॅ ीद्ध है जिसे सामान्य बोलचाल मंे ‘यूनिट’ कहते हैं। 1 ाॅ ी त्र 1000 वाट × 3600 सेकंड त्र 3ण्6 × 106 वाट सेकंड त्र 3ण्6 × 106 जूल ;श्रद्ध उदाहरण 12.12 कोइर् विद्युत बल्ब 220 ट के जनित्रा से संयोजित है। यदि बल्ब से 0ण्50 । विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो बल्ब की शक्ित क्या है? हल च् त्रटप् त्र 220 ट × 0ण्50 । त्र 110 श्रध्े त्र 110 ॅ उदाहरण 12.13 400 ॅ अनुमत का कोइर् विद्युत रेिजरेटर 8 घंटे/दिन चलाया जाता है। 3.00 रुपये प्रति ाॅ ी की दर से इसे 30 दिन तक चलाने के लिए उफजार् का मूल्य क्या है? हल 30 दिन मंे रेपि्रफजरेटर द्वारा उपभुक्त कुल उफजार् 400 ॅ × 8ण्0 घंटेध्दिन × 30 दिन त्र 96000 ॅ ी त्र 96 ाॅ ी इस प्रकार 30 दिन तक रेपि्रफजरेटर को चलाने मंे उपभुक्त वुफल उफजार् का मूल्य 96 ाॅ ी × 3ण्00 ाॅ ी रुपये त्र 288ण्00 रुपये प्रश्न 12 घ्विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊजार् की दर का निधार्रण वैफसे किया जाता है? कोइर् विद्युत मोटर 220 ट के विद्युत स्रोत से 5.0 । विद्युत धारा लेता है। मोटर की शक्ित निधार्रित कीजिए तथा 2 घंटे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊजार् परिकलित कीजिए।

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