से दूर मुड़ती है। पि्रश्म के प्रत्येक अपवतर्क पृष्ठ पर आपतन कोण तथा अपवतर्न कोण की तुलना कीजिए। क्या यह काँच के स्लैब में हुए झुकाव के समान ही है? पि्रश्म की विशेष आकृति के कारण निगर्त किरण, आपतित किरण की दिशा से एक कोण बनाती है। इस कोण को विचलन कोण कहते हैं। इस स्िथति में ∠क् विचलन कोण है। उपरोक्त ियाकलाप में विचलन कोण को चिित कीजिए तथा इसे मापिए। 11ण्4काँच के पि्रश्म द्वारा श्वेत प्रकाश का विक्षेपण आपने किसी इंद्रध्नुष में भव्य वणो± ;रंगोंद्ध को देखा और सराहा होगा। सूयर् के श्वेत प्रकाश से हमें इंद्रध्नुष के विभ्िान्न वणर् ;रंगद्ध किस प्रकार प्राप्त हो जाते हैं? इस प्रश्न पर विचार करने से पहले हम पिफर से पि्रश्म से होने वाले प्रकाश के अपवतर्न को देखते हैं। काँच के पि्रश्म के झुके हुए अपवतर्क पृष्ठ एक रोचक परिघटना दशार्ते हैं। आइए इसे एक ियाकलाप द्वारा देखें। ियाकलाप 11.2 ऽ गत्ते की एक मोटी शीट लीजिए तथा इसके मध्य में एक छोटा छिद्र या एक पतली झिरी बनाइए। ऽ पतली झिरी पर सूयर् का प्रकाश पड़ने दीजिए। इससे श्वेत प्रकाश का एक पतला किरण पुंज प्राप्त होता है। ऽ अब काँच का एक पि्रश्म लीजिए तथा चित्रा 11.5 में दशार्ए अनुसार झिरी से प्रकाश को इसके एक पफलक पर डालिए। ऽ पि्रश्म को ध्ीरे से इतना घुमाइए कि इससे बाहर निकलने वाला प्रकाश पास रखे किसी परदे पर दिखाइर् देने लगे। ऽ आप क्या देखते हैं? आप वणो± की एक आकषर्क पट्टी देखेंगे। ऐसा क्यों होता है? संभवतः पि्रश्म ने आपतित श्वेत प्रकाश को रंगों ;वणो±द्ध की पट्टी में विभक्त कर दिया है। इस रंगीन पट्टी के दोनांे सिरांे पर दिखाइर् देने वाले वणो± को नोट कीजिए। परदे पर दिखाइर् देने वाले वणो± का क्रम क्या है? दिखाइर् देने वाले विभ्िान्न वणो± का क्रम है, बैंगनी ;अपवसमजद्ध, जामुनी ;पदकपहवद्ध, नीला ;इसनमद्ध, हरा ;हतममदद्ध, पीला ;लमससवूद्ध, नारंगी ;वतंदहमद्ध तथा लाल ;तमकद्ध जैसा कि चित्रा 11.5 में दशार्या गया है। प्रसि( परिवणीर् शब्द टप्ठळल्व्त् आपको वणो± के क्रम याद रखने में सहायता करेगा। प्रकाश के अवयवी वणो± के इस बैंड को स्पेक्ट्रम कहते हैं। हो सकता है कि आप सभी वणो± को अलग - अलग न देख पाएँ। पिफर भी कुछ ऐसा अवश्य है जो प्रत्येक वणर् को एक - दूसरे से अलग करता है। श्वेत प्रकाश - पुंज काँच का पि्रश्म प्रकाश के अवयवी वणो± में विभाजन को विक्षेपण चित्रा 11.5 काँच के पि्रश्म द्वारा श्वेत प्रकाश का विक्षेपण कहते हैं। विज्ञान आपने देखा कि श्वेत प्रकाश पि्रश्म द्वारा इसके सात अवयवी परदा वणो± में विक्षेपित हो जाता है। हमें ये वणर् क्यों प्राप्त होते हैं? किसी पि्रश्म से गुशरने के पश्चात, प्रकाश के विभ्िान्न वणर्, श्वेत प्रकाश आपतित किरण के सापेक्ष अलग - अलग कोणों पर झुकते ;मुड़तेद्ध हैं। लाल प्रकाश सबसे कम झुकता है जबकि बैंगनी सबसे अिाक झुकता है। इसलिए प्रत्येक वणर् की किरणें अलग - अलग पथांे के अनुदिश निगर्त होती हैं तथा सुस्पष्ट दिखाइर् देती हैं। यह चित्रा 11.6 श्वेत प्रकाश के स्पेक्ट्रम का पुनयोर्जन सुस्पष्ट वणो± का बैंड ही हमें स्पेक्ट्रम के रूप में दिखाइर् देता है। आइशक न्यूटन ने सवर्प्रथम सूयर् का स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए काँच के पि्रज़्म का उपयोग किया। एक दूसरा समान पि्रज़्म उपयोग करके उन्होंने श्वेत प्रकाश के स्पेक्ट्रम के वणो± को और अध्िक विभक्त करने का प्रयत्न किया। ¯कतु उन्हें और अिाक वणर् नहीं मिल पाए। पिफर उन्होंने चित्रा 11.6 की भाँति एक दूसरा सवर् सम पि्रज़्म पहले पि्रश्म के सापेक्ष उलटी स्िथति में रखा। इससे स्पेक्ट्रम के सभी वणर् दूसरे पि्रज़्म से होकर गुशरे। उन्होंने देखा कि दूसरे पि्रश्म से श्वेत प्रकाश का किरण पंुज निगर्त हो रहा है। इस प्रेक्षण से न्यूटन को यह विचार आया कि सूयर् का प्रकाश सात वणो± से मिलकर बना है। कोइर् भी प्रकाश जो सूयर् के प्रकाश के सदृश स्पेक्ट्रम बनाता है, प्रायः श्वेत प्रकाश कहलाता है। इंद्रध्नुष, वषार् के पश्चात आकाश में जल के सूक्ष्म कणों में दिखाइर् देने चित्रा 11.7 आकाश में इंद्रध्नुषवाला प्राकृतिक स्पेक्ट्रम है ;चित्रा 11.7द्ध। यह वायुमंडल में उपस्िथत जल की सूक्ष्म बूँदों द्वारा सूयर् के प्रकाश के परिक्षेपण के कारण प्राप्त होता है। वषार् की बूँद इंद्रधनुष सदैव सूयर् के विपरीत दिशा में बनता है। जल की सूक्ष्म बूँदें छोटे सूयर् का प्रकाशपि्रश्मों की भाँति कायर् करती हैं। सूयर् के आपतित प्रकाश को ये बूँदें अपवतिर्त तथा विक्षेपित करती हंै, तत्पश्चात इसे आंतरिक परावतिर्त करती हैं, अंततः जल की बूँद से बाहर निकलते समय प्रकाश को पुनः अपवतिर्त करती हंै ;चित्रा 11.8द्ध। प्रकाश के परिक्षेपण तथा आंतरिक परावतर्न के कारण विभ्िान्न लाल बैंगनी वणर् प्रेक्षक के नेत्रों तक पहुँचते हैं। यदि सूयर् आपकी पीठ की ओर हो, और आप आकाश की ओर ध्ूप वाले चित्रा 11.8किसी दिन किसी जल प्रपात अथवा जल के पफव्वारे से देखें तो आप इंद्रधनुष इंद्रधनुष का बननाका दृश्य देख सकते हैं। 11ण्5वायुमंडलीय अपवतर्न आपने संभवतः कभी आग या भट्टी अथवा किसी ऊष्मीय विकिरक के ऊपर उठती गरम वायु के विक्षुब्ध प्रवाह में धूल के कणों की आभासी, अनियमित, अस्िथर गति अथवा झिलमिलाहट देखी होगी। आग के तुरंत ऊपर की वायु अपने ऊपर की वायु की तुलना में अध्िक गरम हो जाती है। गरम वायु अपने ऊपर की ठंडी वायु की तुलना में हलकी ;कम सघनद्ध होती है तथा इसका अपवतर्नांक ठंडी वायु की अपेक्षा थोड़ा कम होता है। क्योंकि अपवतर्क माध्यम ;वायुद्ध की भौतिक अवस्थाएँ स्िथर नहीं हैं, इसलिए मानव नेत्रा तथा रंगबिरंगा संसार संभवतः आपने देखा होगा कि ‘खतरे’ के संकेत ;सिग्नलद्ध का प्रकाश लाल रंग का होता है। क्या आप इसका कारण जानते हैं? लाल रंग कुहरे या ध्ुएँ से सबसे कम प्रकीणर् होता है। इसीलिए, यह दूर से देखने पर भी लाल रंग का ही दिखलाइर् देता है। 11ण्6ण्3सूयोर्दय तथा सूयार्स्त के समय सूयर् का रंग क्या आपने सूयार्ेदय अथवा सूयार्स्त के समय आकाश तथा सूयर् को देखा है? क्या आपने सोचा है कि सूयर् तथा उसके आसपास का आकाश रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है? आकाश के नीले रंग तथा सूयोर्दय या सूयार्स्त के समय सूयर् का रक्ताभ प्रतीत होने को समझने के लिए आइए एक ियाकलाप करें। ियाकलाप 11.3 ऽ कोइर् अभ्िासारी लेंस स्1;उत्तल लेंसद्ध लेकर इसके पफोकस पर श्वेत प्रकाश का तीव्र स्रोत ;ैद्ध रख्िाए। लेंस, प्रकाश का एक समांतर किरण पुंज प्रदान करता है। ऽ प्रकाश के समांतर किरण पुंज को स्वच्छ जल से भरे एक पारदशीर् काँच के टैंक ;ज्द्ध से गुशारिए। ऽ किसी एक गत्ते में बने एक वृत्ताकार छिद्र ;ब्द्ध से इस प्रकाश किरण पुंज को गुशरने दीजिए। चित्रा 11.11 में दशार्ए अनुसार एक - दूसरे अभ्िासारी लेंस ;स्2द्ध का प्रयोग करके वृत्ताकार छिद्र का स्पष्ट प्रतिबिंब परदे ;डछद्ध पर बनाइए। ऽ टैंक में लगभग 2 स् स्वच्छ जल लेकर 200 ह सोडियम थायोसल्पेफट ;हाइपोद्ध घोलिए। जल में लगभग 1 से 2 उस् सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल डालिए। आप क्या देखते हैं? लगभग 2.3 मिनट के पश्चात आप सल्पफर के सूक्ष्म कणों को अवक्षेपित होते देखेंगे। जैसे ही सल्पफर के कण बनना प्रारंभ होते हैं, आप काँच के टैंक के तीन पाश्वो± ;ेपकमेद्ध से नीला प्रकाश देख पाएँगे। यह सल्पफर के सूक्ष्म कोलाॅइडी कणों द्वारा कम तरंगदैघ्यर् के प्रकाश के चित्रा 11.11 कोलाॅइडल विलयन में प्रकाश के प्रकीणर्न का प्रकीणर्न के कारण है। काँच के टैंक के प्रेक्षण करने लिए एक प्रबंध् चैथे पाश्वर् से, वृत्ताकार छिद्र की ओर से पारगत प्रकाश के रंग का प्रेक्षण कीजिए। यह प्रेक्षण अति रोचक है, क्योंकि परदे पर पहले नारंगी - लाल और पिफर चमकीला किरमिजी - लाल रंग दिखाइर् देता है। यह ियाकलाप प्रकाश के प्रकीणर्न को निदश्िार्त करता है जिससे आपको आकाश के नीले रंग तथा सूयोर्दय तथा सूयार्स्त के समय सूयर् के रक्ताभ प्रतीत होने को समझने में सहायता मिलती है। विज्ञान क्ष्िातिज के समीप स्िथत सूयर् से आने वाला प्रकाश हमारे नेत्रों तक पहुँचने से पहले पृथ्वी के वायुमंडल में वायु की मोटी परतों से होकर गुशरता है ;चित्रा11.12द्ध। तथापि, जब सूयर् सिर से ठीक ऊपर ;ऊध्वर्स्थद्ध हो तो सूयर् से आने वाला प्रकाश, अपेक्षाकृत कम दूरी चलेगा। दोपहर के समय सूयर् श्वेत प्रतीत होता है क्योंकि नीले तथा बैंगनी वणर् का बहुत थोड़ा भाग ही प्रकीणर् हो पाता है। क्ष्िातिज के समीप नीले तथा कम तरंगदैघ्यर् के प्रकाश का अिाकांश भाग कणों द्वारा प्रकीणर् हो जाता है। इसीलिए, हमारे नेत्रों तक पहुँचने वाला प्रकाश अध्िक तरंगदैघ्यर् का होता है। इससे सूयोर्दय या सूयार्स्त के समय सूयर् रक्ताभ प्रतीत होता है। आपने क्या सीखा नीले प्रकाश के प्रकीणर् होने से सूयर् का रक्ताभ प्रतीत होना क्ष्िातिज के निकट सूयर् सूयर् लगभग उध्वर्स्थ नीले प्रकाश का कम प्रकीणर्न प्रेक्षक चित्रा 11.12 सूयोर्दय तथा सूयार्स्त के समय सूयर् का रक्ताभ प्रतीत होना ऽ नेत्रा की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी पफोकस दूरी को समायोजित करके निकट तथा दूरस्थ वस्तुओं को पफोकसित कर लेता है, नेत्रा की समंजन क्षमता कहलाती है। ऽ वह अल्पतम दूरी जिस पर रखी वस्तु को नेत्रा बिना किसी तनाव के सुस्पष्ट देख सकता है उसे नेत्रा का निकट बिंदु अथवा सुस्पष्ट दशर्न की अल्पतम दूरी कहते हैं। सामान्य दृष्िट के वयस्क के लिए यह दूरी लगभग 25 बउ होती है। ऽ दृष्िट के सामान्य अपवतर्क दोष हैं - निकट - दृष्िट, दीघर् - दृष्िट तथा जरा - दूरदृष्िटता। निकट - दृष्िट ;निकट दृष्िटता - दूर रखी वस्तु का प्रतिबिंब दृष्िटपटल के सामने बनता हैद्ध को उचित क्षमता के अवतल लेंस द्वारा संशोध्ित किया जाता है। दीघर् - दृष्िट ;दूरदृष्िटता - पास रखी वस्तुओं के प्रतिबिंब दृष्िटपटल के पीछे बनते हैंद्ध को उचित क्षमता के उत्तल लेंस द्वारा संशोध्ित किया जाता है। वृ(ावस्था में नेत्रा की समंजन क्षमता घट जाती है। ऽ श्वेत प्रकाश वफा इसके अवयवी वणो± में विभाजन विक्षेपण कहलाता हैं। ऽ प्रकाश के प्रकीणर्न के कारण आकाश का रंग नीला तथा सूयोर्दय एवं सूयार्स्त के समय सूयर् रक्ताभ प्रतीत होता है। अभ्यास 1.मानव नेत्रा अभ्िानेत्रा लेंस की पफोकस दूरी को समायोजित करके विभ्िान्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को पफोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है - ;ंद्ध जरा - दूरदृष्िटता ;इद्ध समंजन ;बद्ध निकट - दृष्िट ;कद्ध दीघर् - दृष्िट मानव नेत्रा तथा रंगबिरंगा संसार

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