अध्याय 7 नियंत्राण एवं समन्वय छले अध्याय में हमने सजीवों में अनुरक्षण ;अथवा रख - रखावद्ध कायर् मेंपिसंलग्न जैव प्रक्रमों के बारे में पढ़ा था। हमने इस बात पर विचार करना प्रारंभ किया था कि यदि कोइर् वस्तु गतिशील है तो वह सजीव है। पादपों में इस तरह की वुफछ गतियाँ वास्तव में वृि का परिणाम हैं। एक बीज अंवुफरित होता है और वृि करता है, और हम देख सकते हैं कि नवोद्भ्िाद वुफछ दिनों में गति करता हुआ मृदा को एक ओर धकेलकर बाहर आ जाता है। लेकिन यदि इसकी वृि रुक गइर् होती तो ये गतियाँ नहीं होतीं। अिाकांश जंतुओं में तथा वुफछ पादप में होने वाली वुफछ गतियाँ वृि से संबंिात नहीं हैं। एक दौड़ती बिल्ली, झूले पर खेलते बच्चे, जुगाली करती भैंसμये गतियाँ वृि के कारण नहीं होती हैं। दिखाइर् देने वाली इन गतियों को हम जीवन के साथ क्यों जोड़ते हैं? इसका एकसंभावित उत्तर यह है कि हम गतियों को जीव के पयार्वरण में आए परिवतर्न की अनुिया सोचते हैं। बिल्ली इसलिए दौड़ी होगी क्योंकि इसने एक चूहा देखा था। केवल यही नहीं, हम गति को सजीवों द्वारा किए गए एक ऐसे प्रयास के रूप में भी सोचते हैं जिसमें उनके पयार्वरण में हुए परिवतर्न उनके लिए लाभकारी हों। सूयर् के प्रकाश में पौधे वृि करते हैं। बच्चे झूले से आनंद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। भैंस जुगाली करती है ताकि भोजन छोटे टुकड़ों में टूट जाए और उसका पाचन भलीभाँति हो सके। जब तेश रोशनी हमारी आँखों पर पफोकस की जाती हेै या जब हम किसी गमर् वस्तु को छूते हैं तो हमें परिवतर्न का पता लग जाता है और इसकी अनुिया में स्वयं को बचाने के लिए गति करते हैं, ऐसा प्रतीत होता है। यदि हम इसके बारे में और अिाक विचार करें तो ऐसा प्रतीत होता है कि पयार्वरण की अनुिया के प्रति ये गतियाँ सावधानी से नियंत्रिात की जाती हैं। पयार्वरण में प्रत्येक परिवतर्न की अनुिया से एक समुचित गति उत्पन्न होती है। जब हम कक्षा में अपने दोस्तों से बात करना चाहते हैं तो हम शोर से चीखने की अपेक्षा पुफसपुफसाते हैं। स्पष्ट रूप से कोइर् भी गति उस घटना पर निभर्र करती है जो इसे पे्ररित करती है। अतः इस तरह की नियंत्रिात गति को पयार्वरण में भ्िान्न घटनाओं के अभ्िाज्ञान से जोड़ा जाना चाहिए जो अनुिया के अनुरूप गति करें। दूसरे शब्दों मंे, सजीवों को उन तंत्रों का उपयोग करना चाहिए जो नियंत्राण एवं समन्वय का कायर् करते हैं। बहुकोश्िाकीय जीवों में शरीर संगठन के सामान्य सि(ांत को ध्यान में रखते हुए यह कह सकते हैं किविश्िाष्टीकृत ऊतक का उपयोग इन नियंत्राण तथा समन्वय ियाकलापों में किया जाता है। 7ण्1जंतु - तंत्रिाका तंत्रा जंतुआंे में यह नियंत्राण तथा समन्वय तंत्रिाका तथा पेशी ऊतक द्वारा किया जाता है जिसके विषय में हम कक्षा 9 में पढ़ चुके हैं। आकस्िमक परिस्िथति में गरम पदाथर् को छूना हमारे लिए खतरनाक हो सकता है। हमें इसे पहचानने की तथा इसके अनुरूप अनुिया की आवश्यकता है। हम वैफसे पता लगाएँ कि हम गरम वस्तु को छू रहे हैं? हमारेपयार्वरण से सभी सूचनाओं का पता वुफछ तंत्रिाका कोश्िाकाओं के विश्िाष्टीकृत सिरों द्वारा, लगाया जाता है। ये ग्राही प्रायः हमारी ज्ञानेंदि्रयों में स्िथत होते हैंऋ जैसे μ आंतरिक कणर्, नाक, जिह्वा आदि। रस संवेदी ग्राही स्वाद का पता लगाते हैं जबकि घ्राणग्राही गंध् का पता लगाते हैं।यह सूचना एक तंत्रिाका कोश्िाका के द्रुमाकृतिक वेंफद्रक सिरे द्वारा उपाजिर्त की जाती है। ;चित्रा 7.1 ंद्ध, और एक रासायनिक िया द्वारा यह एक विद्युत आवेग पैदा करती है। यह आवेग द्रुमिका से कोश्िाकाकाय तक जाता है और तब तंत्रिाकाक्ष ;एक्साॅनद्ध में होता हुआ इसके अंतिम सिरे तक पहुँच जाता है। एक्साॅन के अंत में विद्युत आवेग वुफछ रसायनों का विमोचन कराता है। ये रसायन रिक्त स्थान या सिनेप्स ;सिनेप्िटक दरारद्ध को पार ;ंद्ध करते हैं और अगली तंत्रिाका कोश्िाका की द्रुमिका में इसी तरह का विद्युत आवेग प्रारंभ करते हैं। यह शरीर में तंत्रिाका आवेग की मात्रा की सामान्य योजना है। इसी तरह का एक अंतग्रर्थन ;सिनेप्सद्ध अंततः ऐसे आवेगों को तंत्रिाका कोश्िाका से अन्य कोश्िाकाओं, जैसे कि पेशी कोश्िाकाओं या ग्रंथ्िा ;चित्रा 7.1 इद्ध तक ले जाता है। अतः इसमें कोइर् आश्चयर् नहीं है कि तंत्रिाकाऊतक तंत्रिाका कोश्िाकाओं या न्यूराॅन के एक संगठित जाल का बना होता है और यह सूचनाओं को विद्युत आवेग के द्वारा शरीर के एक भाग सेदूसरे भाग तक संवहन में विश्िाष्टीकृत है। चित्रा 7ण्1 ;ंद्ध को देख्िाए तथा इसमें तंत्रिाका कोश्िाका के भागों को पहचानिए ;पद्ध जहाँ सूचनाएँ उपजिर्त की जाती हैं, ;पपद्ध जिससे होकर सूचनाएँ विद्युत आवेग की तरह यात्रा करती हैं, तथा ;पपपद्ध जहाँ इस आवेग का परिवतर्न रासायनिक संकेत में किया जाता है जिससे यह आगे संचरित हो सके। जब नाक बंद होती है तो क्या आप चीनी तथा भोजन के स्वाद में कोइर् अंतर महसूस करते हंै? यदि हाँ, तो आप सोचते होंगे कि यह क्यों होता है? इस तरह के अंतर जानने के लिए और उनके संभावित हल खोजने के लिए पढि़ए तथा चचार् करिए। जब आपको जुकाम हो जाता है तब भी क्या आप इसी तरह की स्िथति का सामना करते हैं? 7ण्1ण्1प्रतिवतीर् िया में क्या होता है? पयार्वरण में किसी घटना की अनुिया के पफलस्वरूप अचानक हुइर् िया की चचार् करते हैं तो बहुधा प्रतिवतर् शब्द का प्रयोग करते हैं। हम कहते हैं ‘मैं प्रतिवतर्स्वरूप बस से कूद गया’, या ‘मैंने प्रतिवतर्स्वरूप आग की लौ से अपना हाथ पीछे खींच लिया’, या ‘मैं इतना भूखा था कि प्रतिवतर्स्वरूप मेरे मुँह में पानी आने लगा, इसका क्या अभ्िाप्राय है? इन सभी उदाहरणों में एक सामान्य विचार आता है कि जो वुफछ हम करते हैं उसके बारे में विचार नहीं करते हैं, या अपनी ियाओं को नियंत्राण में महसूस नहीं करते हैं। पिफर भी ये वे स्िथतियाँ हंै जहाँ हम अपने पयार्वरण में होने वाले परिवतर्नों के प्रति अनुिया कर रहे हैं। इन परिस्िथतियों में नियंत्राण व समन्वय कैसे प्राप्त किया जाता है? इस पर पिफर से विचार करते हैं। एक उदाहरण लेते हैं। आग की लपट को छूना हमारे अथवा किसी भी जंतु के लिए एक दुराग्रही तथा खतरनाक स्िथति है। हम इसके प्रति कैसे अनुिया करते? एक सरल वििा है कि हम विचार करें कि हमें आघात पहुँच सकता है, और इसलिए हमें अपना हाथ हटा लेना चाहिए। तब एक आवश्यक प्रश्नआता है कि यह सब सोचने के लिए हमें कितना समय लगेगा? उत्तर निभर्र करता है कि हम किस प्रकार सोचते हैं। यदि तंत्रिाका आवेग को उस ओर भेजा जाता है जिसकी चचार् हम पहले कर चुके हैं, तब इसी प्रकार के आवेग उत्पन्न करने के लिए मस्ितष्क द्वारा चिंतन भी आवश्यक है। विचार करना एक जटिल िया है अतः यह बहुत सी तंत्रिाका कोश्िाकाओं के तंत्रिाका आवेग की जटिल अन्योन्यियाओं से जुड़ने के लिए बाध्य है।यदि यह वस्तुस्िथति है तो कोइर् आश्चयर् नहीं कि हमारे शरीर में सोचने वाले ऊतक, जटिल रूप से व्यवस्िथत न्यूराॅन के घने जाल से बने हैं। यह खोपड़ी में अग्र सिरे पर स्िथत हैं तथा शरीर के सभी हिस्सों से संकेत प्राप्त करते हैं तथा उन पर अनुिया से पहले विचार करते हंै। निस्संदेह, ये संकेत प्राप्त करने के लिए खोपड़ी में मस्ितष्क का सोचने वाला भाग तंत्रिाकाओं द्वारा शरीर के विभ्िान्न भागों से जुड़ा होना चाहिए। इसी तरह, यदि मस्ितष्क का यह भाग पेश्िायों को गति करने का आदेश देता है तो तंत्रिाकाएँ इन संकेतों को शरीर के विभ्िान्न भागों तक पहुँचाने का कायर् करती हैंे। हम किसी गमर् वस्तु को छुएँ और हमें यह सब करना पड़े तो इसमें काप़फी समय लगेगा कि हम जलन महसूस कर सकते हैं।शरीर की डिशाइन किस तरह इस समस्या का हल करती है? ऊष्मा के संवेदन केबारे में सोचने की अपेक्षा यदि जो तंत्रिाकाएँ ऊष्मा का पता लगाती हैं उन्हें उन तंत्रिाकाओं से जोड़ा जाए जो पेश्िायों को गति कराती हैं, तो जो प्रक्रम आगम संकेतों का पता लगाने तथा तदनुसार निगर्म िया को करने का कायर् करता है वह अतिशीघ्र पूरा हो जाता है। आमतौर पर इस तरह के संबंधन को प्रतिवतीर् चाप कहते हैं ;चित्रा 7ण्2द्ध। इस प्रकार के प्रतिवतीर् चाप को संबंधन आगत तंत्रिाका तथा निगर्त तंत्रिाका के मध्य कहाँ होना चाहिए? सबसे उपयुक्त स्थान शायद वही ¯बदु होगा जहाँ सबसे पहले वे एक - दूसरे से मिलते हैं। पूरे शरीर की तंत्रिाकाएँ मेरुरज्जु में मस्ितष्क को जाने वाले रास्ते में एक बंडल में मिलती हैं। प्रतिवतीर् चाप इसी मेरुरज्जु में बनते हैं, यद्यपि आगत सूचनाएँ मस्ितष्क तक भी जाती हैं। अिाकतर जंतुओं में प्रतिवतीर् चाप इसलिए विकसित हुआ है क्योंकि इनके मस्ितष्क के सोचने का प्रक्रम बहुत तेश नहीं है। वास्तव में अिाकांश जंतुओं में सोचने के लिए आवश्यक जटिल न्यूराॅन जाल या तो अल्प है या अनुपस्िथत होता है। अतः यह स्पष्ट है कि वास्तविक विचार प्रक्रम की अनुपस्िथति में प्रतिवतीर् चाप का दक्ष कायर् प्रणाली के रूप में विकास हुआ है। यद्यपि जटिल न्यूराॅन जाल के अस्ितत्व में आने के बाद भी प्रतिवतीर् चाप तुरंत अनुिया के लिए एक अिाक दक्ष प्रणाली के रूप में कायर् करता है। क्या आप उन घटनाओं के क्रम को खोज सकते हैं जो आपकी आँखों में तेश प्रकाश पफोकस करने पर होती हैं। 7ण्1ण्2मानव मस्ितष्क क्या मेरुरज्जु का कायर् केवल प्रतिवतीर् िया है? निश्िचत रूप से नहीं, क्योंकि हम जानते हैं कि हम सोचने वाले प्राणी हैं। मेरुरज्जु तंत्रिाकाओं की बनी होती है जो सोचने के लिए सूचनाएँ प्रदान करती हैं सोचने में अिाक जटिल ियावििा तथा तंत्रिाक संबंधन होते हैं। ये मस्ितष्क में संवेंफदि्रत होते हैं जो शरीर का मुख्य समन्वय वेंफद्र है। मस्ितष्क तथा मेरुरज्जु वेंफद्रीय तंत्रिाका तंत्रा बनाते हैं। ये शरीर के सभी भागों से सूचनाएँ प्राप्त करते हैं तथा इसका समाकलन करते हैं। हम अपनी ियाओं के बारे में भी सोचते हैं। लिखना, बात करना, एक वुफसीर् घुमाना, किसी कायर्क्रम के समाप्त होने पर ताली बजाना इत्यादि ऐच्िछक ियाओं के उदाहरण हैं जो आगे क्या करना है, के निणर्य पर आधारित हैं। अतः मस्ितष्क को भी पेश्िायों तक संदेश भेजने होते हैं। यह दूसरा मागर् है जिसमें तंत्रिाका तंत्रा पेश्िायों में संचार भेजता है। वेंफद्रीय तंत्रिाका तंत्रा तथा शरीर के अन्य भागों में संचार को परिधीय तंत्रिाका तंत्रा सुगमता प्रदान करता है जो मस्ितष्क से निकलने वाली कपाल तंत्रिाकाओं तथा मेरुरज्जु से निकलने वाली मेरु तंत्रिाकाओं से बना होता है। इस प्रकार मस्ितष्क हमें सोचने की अनुमति तथा सोचने पर आधारित िया करने की अनुमति प्रदान करता है। जैसी आपको संभावना होगी, यह एक जटिल अभ्िाकल्पना द्वारा मस्ितष्क के विभ्िान्नभागों से जो विभ्िान्न आगत एवं निगर्त सूचनाओं को समाकलित करने के लिए उत्तरदायी है, पूरा किया जाता है। मस्ितष्क में इस तरह के तीन मुख्य भाग या क्षेत्रा होते हैं जिनके नाम अग्रमस्ितष्क, मध्यमस्ितष्क तथा पश्चमस्ितष्क हैं। प्रमस्ितष्क अग्रमस्ितष्क मध्यमस्ितष्क मस्ितष्क का मुख्य सोचने वाला भाग अग्रमस्ितष्क है। इसमें विभ्िान्न ग्राही से संवेदी आवेग ;सूचनाएँद्ध प्राप्त करने के लिए क्षेत्रा होते हैं। अग्रमस्ितष्क के अलग - अलग क्षेत्रासुनने, सूँघने, देखने आदि के लिए विश्िाष्टीकृत हैं। इसमें साहचयर् के क्षेत्रा पृथक होते हैं जहाँ इन संवेदी सूचनाओं, अन्य ग्राही से प्राप्त सूचनाओं एवं पहले से मस्ितष्क में एकत्रा सूचनाओं का अथर् लगाया जाता है। इस सब पर आधारित, एक निणर्य लिया जाता है कि अनुिया तथा सूचनाएँ प्रेरक क्षेत्रा तक कैसे पहुँचाइर् जाएँ जो ऐच्िछक पेशी कीगति को, जैसे हमारी टाँग की पेश्िायाँ, नियंत्रिात करती हैं। हालाँकि प्रकृति में वुफछ संवेदन देखने और सुनने से अिाक जटिल हैं जैसे, हमें कैसे पता लगता कि हम पयार्प्त भोजन खा चुके हैं? हमारा पेट पूरा भरा है। यह जानने के लिए एक भूख से संबंिात वेंफद्र है जो अग्रमस्ितष्क में एक अलग भाग है। मानव मस्ितष्क के नामांकित चित्रा का अध्ययन कीजिए। हम देख चुके हैं कि विभ्िान्न भागों के विश्िाष्ट कायर् हैं। अपने अध्यापक से परामशर् करके प्रत्येक भाग के कायर् का पता लगाइए। आइए ‘प्रतिवतर्’ शब्द का दूसरा उपयोग भी देखते हैं जैसी कि हमने प्रारंभ में चचार् की थी। जब हम किसी ऐसे खाद्य पदाथर् को देखते हैं जिसे हम पसंद करते हैं तो अनायास ही हमारे मुँह में पानी आ जाता है। हृदय स्पंदन के बारे में हम न भी सोचें तब भी यह होगा। वास्तव में, इनके बारे में सोचकर या चाहकर भी आसानी से हम इन ियाओं पर नियंत्राण नहीं कर सकते हैं। क्या हमें साँस लेने के लिए या भोजन पचाने के लिए सोचना या याद करना पड़ता है? अतः सामान्य प्रतिवतीर् िया जैसे पुतली के आकार में परिवतर्न तथा कोइर् सोची िया जैसे वुफसीर् ख्िासकाना के मध्य एक और पेशी गति का सैट है जिस पर हमारे सोचने का कोइर् नियंत्राण नहीं है। इन अनैच्िछक ियाओं में से कइर् मध्यमस्ितष्क तथा पश्चमस्ितष्क से नियंत्रिात होती हैं। ये सभी अनैच्िछक ियाएँ जैसे रक्तदाब, लार आना तथा वमन पश्चमस्ितष्क स्िथत मेडुला द्वारा नियंत्रिात होती हैं। वुफछ ियाओं जैसे एक सीधी रेखा में चलना, साइकिल चलाना, एक पेंसिल उठाना पर विचार कीजिए। ये पश्चमस्ितष्क में स्िथत भाग अनुमस्ितष्क द्वारा ही संभव है जोऐच्िछक ियाओं की परिशुि तथा शरीर की संस्िथति तथा संतुलन के लिए उत्तरदायी है। कल्पना कीजिए कि यदि हम इनके बारे में नहीं सोच रहे हैं और ये सभी घटनाएँ काम करना बंद कर दें, तो क्या होगा? 7ण्1ण्3ये ऊतक रक्ष्िात कैसे होते हैं? मस्ितष्क की तरह कोमल अंग जो विविध ियाओं के लिए बहुत आवश्यक है, की सावधानीपूवर्क रक्षा भी होनी चाहिए। इसके लिए शरीर की अभ्िाकल्पना इस प्रकार की है कि मस्ितष्क एक हिóयों के बाॅक्स में अवस्िथत होता है। बाॅक्स के अंदर तरलपूरित गुब्बारे में मस्ितष्क होता है जो प्रघात अवशोषक उपलब्ध कराता है। यदि आप अपने हाथ को कमर के मध्य के नीचे ले जाएँ तो आप एक कठोर, उभार वाली संरचना का अनुभव करेंगे। यह कशेरुकदंड या रीढ़ की हîóी है जो मेरुरज्जु की रक्षा करती है। 7ण्1ण्4तंत्रिाका ऊतक कैसे िया करता है? अब तक हम तंत्रिाका ऊतक की चचार् कर रहे थे, यह कैसे सूचना एकत्रा करता है, इन्हें शरीर में भेजता है, सूचनाओं को संसािात करता है, सूचनाओं के आधार पर निणर्य लेता है और पेश्िायों तक िया के लिए निणर्य को संवाहित करता है। दूसरे शब्दों में, जबिया या गति संपन्न होनी होती है, पेशी ऊतक अंतिम काम करेंगे। जंतु पेशी कैसे गति करती है? जब तंत्रिाका आवेग पेशी तक पहुँचता है तो पेशी को गति करनी चाहिए। एक पेशी कोश्िाका कैसे गति करती है? कोश्िाकीय स्तर पर गति के लिए सबसे सरल धारणाहै कि पेशी कोश्िाकाएँ अपनी आकृति बदलकर गति करती हैं। अतः आगामी प्रश्न हैकि पेशी कोश्िाकाएँ आकृति कैसे बदलती हैं? इनका उत्तर कोश्िाकीय अवयव के रसायन में निहित है। पेशी कोश्िाकाओं में विशेष प्रकार की प्रोटीन होती है जो उनकीआकृति तथा व्यवस्था दोनों को ही बदल देती है कोश्िाका में यह तंत्रिाका विद्युत आवेग की अनुिया के पफलस्वरूप होता है। जब यह घटना होती है तो इन प्रोटीन की नयीव्यवस्था पेशी की नयी आकृति देती है। स्मरण कीजिए जब हमने कक्षा 9 में पेशी ऊतक की चचार् की थी तब भ्िान्न प्रकार की पेश्िायाँ जैसे ऐच्िछक पेश्िायाँ तथा अनैच्िछक पेश्िायाँ थीं। अब तक हमने जो चचार् की है इसके आधार पर आपके विचार में इनमें क्या अंतर हो सकते हैं? प्रश्न 1.प्रतिवतीर् िया तथा टहलने के बीच क्या अंतर है? 2.दो तंत्रिाका कोश्िाकाओं ;न्यूराॅनद्ध के मध्य अंतग्रर्थन ;सिनेप्सद्ध में क्या होता है? 3.मस्ितष्क का कौन सा भाग शरीर की स्िथति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है? 4.हम एक अगरबत्ती की गंध का पता वैफसे लगाते हैं? 5.प्रतिवतीर् िया में मस्ितष्क की क्या भूमिका है? घ् 7ण्2पादपों में समन्वय शरीर की ियाओं के नियंत्राण तथा समन्वय के लिए जंतुओं में तंत्रिाका तंत्रा होता है। लेकिन पादपों में न तो तंत्रिाका तंत्रा होता है और न ही पेश्िायाँ। अतः वे उद्दीपन के प्रतिअनुिया वैफसे करते हैं? जब हम छुइर् - मुइर् के पादप की पिायाँ छूते हैं तो वे मुड़ना प्रारंभ कर देती हैं तथा नीचे झुक जाती हैं। जब एक बीज अंवुुफरित होता है तो जड़ें नीचेकी ओर जाती हैं तथा तना ऊपर की ओर आता है। जानते हो क्या होता है? छुइर् - मुइर्की पिायाँ स्पशर् की अनुिया से बहुत तेशी से गति करती हैं। इस गति से वृि का कोइर् संबंध नहीं है। दूसरी ओर, नवोद्भ्िाद की दिश्िाक गति वृि के कारण होती है। यदि इसकी वृि को किसी प्रकार रोक दिया जाए तब यह कोइर् गति प्रदश्िार्त नहीं करेगा। अतः पादप दो भ्िान्न प्रकार की गतियाँ दशार्ते हैंμएक वृि पर आश्रित है और दूसरी वृि से मुक्त है। चित्रा 7.4 छुइर् - मुइर् का पौधा 7ण्2ण्1उद्दीपन के लिए तत्काल अनुिया आइए पहले प्रकार की गति पर विचार करते हैं जैसे छुइर् - मुइर् के पौधे की गति। क्योंकियह वृि से संबंिात नहीं है, पादप को स्पशर् की अनुिया के पफलस्वरूप अपनी पिायोंमें गति करनी चाहिए। लेकिन यहाँ कोइर् तंत्रिाका ऊतक नहीं है और न ही कोइर् पेशीऊतक। पिफर पादप वैफसे स्पशर् का संसूचन करता है और किस प्रकार अनुिया में पिायाँ गति करती हैं? यदि हम विचार करें कि पौधे को किस बिंदु पर छुआ जाता है और पौधे के किस भाग में गति होती है यह आभासी है कि स्पशर् वाला ¯बदु तथा गति वाला बिंदु दोनों भ्िान्न हैं। अतः स्पशर् होने की सूचना संचारित होनी चाहिए। पादप इस सूचना को एक कोश्िाका से दूसरी कोश्िाका तक संचारित करने के लिए वैद्युत - रसायन साधन का उपयोग भी करते हैं लेकिन जंतुओं की तरह पादप में सूचनाओं के चालन के लिए कोइर्विश्िाष्टीकृत ऊतक नहीं होते हैं। अंत में जंतुओं की तरह ही गति करने के लिए वुफछकोश्िाकाओं को अपनी आकृति बदल लेनी चाहिए। पादप कोश्िाकाओं में जंतु पेशीकोश्िाकाओं की तरह विश्िाष्टीकृत प्रोटीन तो नहीं होतीं अपितु वे जल की मात्रा मेंपरिवतर्न करके अपनी आकृति बदल लेती हैं, परिणामस्वरूप पूफलने या सिवुफड़ने में उनका आकार बदल जाता है। 7ण्2ण्2वृि के कारण गति मटर के पौधे की तरह वुफछ पादप दूसरे पादप या बाड़ पर प्रतान की सहायता से ऊपर चढ़ते हैं। ये प्रतान स्पशर् के लिए संवेदनशील हैं। जब ये किसी आधार के संपवर्फ में आते हैं तो प्रतान का वह भाग जो वस्तु के संपवर्फ में है, उतनी तीव्रता से वृि नहीं करता है जितना प्रतान का वह भाग, जो वस्तु से दूर रहता है। इस कारण प्रतान वस्तु को चारों ओर से जकड़ लेता है। आमतौर पर, पादप धीरे से एक निश्िचत दिशा में गति करके उद्दीपन के प्रति अनुिया करते हैं। क्योंकि यह वृि दिश्िाक है इससे ऐसा लगता है कि पादप गति कर रहा है। आइए इस प्रकार की गति को एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं। चित्रा 7.5 प्रकाश की दिशा में पादप की अनुिया )णात्मक गुरुत्वानुवतीर् चित्रा 7.6 गुरुत्वानुवतर्न दिखाता पादप पयार्वरणीय प्रेरण जैसे प्रकाश या गुरुत्व पादप की वृि वाले भाग में दिशा परिवतिर्त कर देते हैं। ये दिश्िाक या अनुवतर्न गतियाँ उद्दीपन की ओर या इससे विपरीत दिशा में हो सकती हैं। अतः इन दो भ्िान्न प्रकार की प्रकाशानुवतर्न गतियों में प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़कर अनुिया तथा जड़ इससे दूर मुड़कर अनुिया करते हैं। यह पादप की सहायता वैफसे करता है? पादप अन्य उद्दीपनों के लिए भी अनुिया करके अनुवतर्न दिखाते हैं। एक पादपकी जड़ सदैव नीचे की ओर वृि करती है जबकि प्ररोह प्रायः ऊपर की ओर तथा पृथ्वी से दूर वृि करते हैं। यह प्ररोह तथा जड़ में क्रमशः उपरिगामी तथा अधोगामी वृि पृथ्वी या गुरुत्व के ख्िांचाव की अनुिया निःसंदेह गुरुत्वानुवतर्न है ;चित्रा 7.6द्ध। यदि जल का अथर् पानी तथा रसायन का अथर् रासायनिक पदाथर् हो तो जलानुवतर्न तथा रसायनानुवतर्न का क्या अथर् होगा? क्या हम इस प्रकार के दिश्िाक वृि गतियों के उदाहरणों के बारे में विचार कर सकते हैं? रसायनानुवतर्न का एक उदाहरण पराग नलिका का बीजांड की ओर वृि करना है जिसके बारे में हम अिाक जानकारीे जीवों मंे जनन प्रक्रम का अध्ययन करते समय प्राप्त करेंगे। आइए, एक बार हम पिफर विचार करते हैं कि बहुकोश्िाकीय जीवों के शरीर में सूचनाएँ किस प्रकार संचारित होती हैं। छुइर् - मुइर् में स्पशर् की अनुिया की गति बहुत तीव्र है। दूसरी ओर, रात और दिन की अनुिया में पुष्पों की गति बहुत मंद है। पादप की वृि संबंिात गतियाँ भी मंद होती हैं। जंतु शरीर मेें भी वृि के लिए सावधानीपूवर्क नियंत्रिात दिशाएँ हैं। हमारी भुजा और अँगुलियाँ यादृच्छ न होकर एक निश्िचत दिशा में वृि करती हैं। नियंत्रिात गति मंद या तीव्र हो सकती है। यदि उद्दीपन के लिए तीव्र अनुिया होती है तो सूचनाओं का स्थानांतरण भी बहुत तीव्र होना चाहिए। इसके लिए तीव्र गति से चलने के लिए संचरणका माध्यम होना चाहिए। इसके लिए विद्युत आवेग एक उत्तम साधन है। लेकिन विद्युत आवेग के उपयोग के लिए सीमाएँ हैं। सवर्प्रथम वे केवल उन्हीं कोश्िाकाओं तकपहुँचेंगी जो तंत्रिाका ऊतक से जुड़ी हैं, जंतु शरीर की प्रत्येक कोश्िाका तक नहीं। दूसरे, एक बार एक कोश्िाका में विद्युत आवेग जनित होता है तथा संचरित होता है तो पुनः नया आवेग जनित करने तथा उसे संचरित करने के लिए कोश्िाका पिफर से अपनी कायर्वििा को सुचारु करने के लिए वुुफछ समय लेगी। दूसरे शब्दों में कोश्िाकाएँ सतत विद्युत आवेग न जनित और न ही संचरित कर सकती हैं। इसमें कोइर् आश्चयर् नहीं कि अिाकांश बहुकोश्िाकीय जीव कोश्िाकाओं के मध्य संचार के लिए अन्य साधनों का उपयोग करते हैं। हम पहले ही रासायनिक संचरण का संदभर् दे चुके हैं। यदि एक विद्युत आवेग जनित करने के अलावा उद्दीपित कोश्िाकाएँ एक रासायनिक यौगिक निमोर्चित करना प्रारंभ कर दें तो यह यौगिक आसपास की सभी कोश्िाकाओं में विसरित हो जाएगा। यदि आसपास की अन्य कोश्िाकाओं के पास इस यौगिक को संसूचित ;कमजमबजद्ध करने के साधन हों तो उनकी सतह पर विशेष अणुओं का उपयोग करके वे सूचनाओं का अभ्िाज्ञान ;तमबवहदपेमद्ध करने योग्य होंगे तथा इन्हें संचारित भी करेंगे। हालाँकि यह प्रक्रम बहुत धीमा होगा, लेकिन यह तंत्रिाका संबंधन के बिना भी शरीर की सभी कोश्िाकाओं तक पहुँचेगा तथा इसे अपरिवतीर् तथा स्थायी बनाया जा सकता है। बहुकोश्िाकीय जंतुओं द्वारा नियंत्राण एवं समन्वय के लिए प्रयुक्त ये हाॅमोर्न हमारी आशा के अनुरूप विविधता दशार्ते हैं। विविध पादप हाॅमोर्न वृि, विकास तथा पयार्वरण के प्रति अनुिया के समन्वय में सहायता करते हैं। इनके संश्लेषण का स्थान इनके िया क्षेत्रा से दूर होता है और साधारण विसरण द्वारा वे िया क्षेत्रा तक पहुँच जाते हैं। आइए, हम एक उदाहरण लेते हैं जो हम पहले कर चुके हैं ;ियाकलाप 7.2द्ध। जब वृि करता पादप प्रकाश को संसूचित ;कमजमबजद्ध करता है, एक हाॅमोर्न जिसे आॅक्िसन कहते हैं, यह प्ररोह के अग्रभाग ;टिपद्ध में संश्लेष्िात होता है तथा कोश्िाकाओं की लंबाइर् में वृि में सहायक होता है। जब पादप पर एक ओर से प्रकाश आ रहा है तब आॅक्िसन विसरित होकर प्ररोह के छाया वाले भाग में आ जाता है। प्ररोह की प्रकाश से दूर वाली साइड में आॅक्िसन का सांद्रण कोश्िाकाओं को लंबाइर् में वृि के लिए उद्दीपित करता है। अतः पादप प्रकाश की ओर मुड़ता हुआ दिखाइर् देता है। पादप हाॅमोर्न का दूसरा उदाहरण जिब्बेरेलिन हैं जो आॅक्िसन की तरह तने की वृि में सहायक होते हैं। साइटोकाइनिन कोश्िाका विभाजन को प्रेरित करता है और इसीलिए यह उन क्षेत्रों में जहाँ कोश्िाका विभाजन तीव्र होता है, विशेष रूप से पफलों और बीजों में अिाक सांद्रता में पाया जाता है। ये उन पादप हाॅमोर्न के उदाहरण हैं जो वृि में सहायता करते हैं। लेकिन पादप की वृि संदमन के लिए भी संकेतों की आवश्यकताहै। एब्िससिक अम्ल वृि का संदमन करने वाले हाॅमोर्न का एक उदाहरण है। पिायों का मुरझाना इसके प्रभावों में सम्िमलित है। प्रश्न 1.पादप हाॅमोर्न क्या हैं? 2.छुइर् - मुइर् पादप की पिायों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भ्िान्न है? 3.एक पादप हाॅमोर्न का उदाहरण दीजिए जो वृि को बढ़ाता है। 4.किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृि में आॅक्िसन किस प्रकार सहायक है? 5.जलानुवतर्न दशार्ने के लिए एक प्रयोग की अभ्िाकल्पना कीजिए। घ् 7ण्3जंतुओं में हाॅमोर्न ये रसायन या हाॅमोर्न जंतुओं में किस प्रकार सूचनाओं के संचरण के साधन की तरह प्रयुक्त होते हैं। वुफछ जंतु जैसे गिलहरी को लीजिए, जब वे विषम परिस्िथति में होती हैंे तो क्या महसूस करती हैं? वे अपना शरीर लड़ने के लिए या भाग जाने के लिए तैयार करती हैं। दोनों ही बहुत जटिल ियाएँ हैं जिसे नियंत्रिात तरीके से अत्यिाक ऊजार् की आवश्यकता होती है। अनेक प्रकार के भ्िान्न ऊतकों का उपयोग होगा तथा उनकी एकीकृत ियाएँ मिलकर ये कायर् करेंगे। यद्यपि लड़ना या दौड़ना, दो एकांतर ियाएँ एक - दूसरे से बिलवुफल भ्िान्न हैं। अतः यहाँ एक स्िथति है जिसमें वुफछ सामान्य तैयारियाँ शरीर में लाभप्रद बनाइर् जाती हैं। ये तैयारियाँ आदशर् रूप से निकट भविष्य में किसी भी िया को सरल बना देती हैं। यह सब वैफसे उपलब्ध होगा? यदि गिलहरी में शरीर अभ्िाकल्प तंत्रिाका कोश्िाकाओं द्वारा केवल विद्युत आवेग पर आश्रित होगा तो आगामी िया को करने के लिए प्रश्िाक्ष्िात ऊतकों का परिसर सीमित होगा। दूसरी ओर, यदि रासायनिक संकेत भी भेजा जाता तो यह शरीर की सभी कोश्िाकाओं तक पहुँचता और आवश्यक परिवतिर्त परिसर बृहत हो जाता। अिावृक्क ग्रंथ्िा से स्रावित एड्रीनलीन हाॅमोर्न द्वारा मनुष्य सहित अनेक जंतुओं में यह किया जाता है। इन ग्रंथ्िायों की शरीर में स्िथति जानने के लिए चित्रा 7.7 देख्िाए। एड्रीनलीन सीधा रुिार में स्रावित हो जाता है और शरीर के विभ्िान्न भागों तक पहुँचा दिया जाता है। हृदय सहित यह लक्ष्य अंगों या विश्िाष्ट ऊतकों पर कायर् करता है। परिणामस्वरूप हृदय की धड़कन बढ़ जाती है ताकि हमारी पेश्िायों को अिाक आॅक्सीजन की आपूतिर् हो सके। पाचन तंत्रा तथा त्वचा में रुिार की आपूतिर् कम हो जाती है क्योंकि इन अंगों की छोटी धमनियों के आसपास की पेश्िायाँ सिवुफड़ जाती हैं। यह रुिार की दिशा हमारी कंकाल पेश्िायों की ओर कर देता है। डायाÚाम तथा पसलियों की पेशी के संवुफचन से श्वसन दर भी बढ़ जाती है। ये सभी अनुियाएँ मिलकर जंतु शरीर को स्िथति से निपटने के लिए तैयार करती हैं। ये जंतु हाॅमोर्न अंतःस्रावी ग्रंथ्िायों का भाग हैं जो हमारे शरीर में नियंत्राण एवं समन्वय का दूसरा मागर् है। ऽ चित्रा 7.7 देख्िाए। ऽ चित्रा में दशाइर् गइर् अंतःस्रावी ग्रंथ्िायों की पहचान कीजिए। ऽ इनमें से वुफछ ग्रंथ्िायों को पुस्तक में वण्िार्त किया गया है। पुस्तकालय में पुस्तकों की सहायता से एवं अध्यापकों के साथ चचार् करके वुफछ अन्य गं्रथ्िायों के कायो± के बारे में जानकारी प्राप्त करें। ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 7.7 मानव की अंतःस्रावी गं्रथ्िायाँ ;ंद्ध नर, ;इद्ध मादा स्मरण कीजिए कि पादपों में हाॅमोर्न होते हैं जो दिश्िाक वृि को नियंत्रिात करते हैं। जंतु हाॅमोर्न क्या कायर् करते हैं? इसके बारे में, हम उनकी भूमिका की कल्पना दिश्िाक वृि में नहीं कर सकते हैं। हमने किसी जंतु को प्रकाश या गुरुत्व पर आश्रित किसी एक दिशा में अिाक वृि करते कभी नहीं देखा है! लेकिन यदि हम इसके बारे में और अिाक चिंतन करें तो यह साक्षी होगा कि जंतु शरीर में भी सावधानीपूवर्क नियंत्रिात स्थानों पर वृि होती है। उदाहरण के लिए पादप अपनेशरीर पर अनेक स्थानों पर पिायाँ उगाते हैं, लेकिन हम अपने चेहरे पर अँगुलियाँ नहीं उगाते हैं। हमारे शरीर की अभ्िाकल्पना, बच्चों की वृि के समय भी सावधानीपूवर्क अनुरक्ष्िात है। यह समझने के लिए कि समन्िवत वृि में हाॅमोर्न कैसे सहायता करते हैं, आइए वुफछ उदाहरणों की परीक्षा करते हैं। नमक के पैकेट पर हम सबने देखा है ‘आयोडीन युक्त नमक’ या ‘आयोडीन से संव£धत।’ हमें अपने आहार में आयोडीन युक्त नमक लेना क्यों आवश्यक है? अवटुगं्रथ्िा को थायराॅक्िसन हाॅमोर्न बनाने के लिए आयोडीन आवश्यक है। थाॅयराॅक्िसन काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय का, हमारे शरीरमें नियंत्राण करता है ताकि वृि के लिए उत्कृष्ट संतुलन उपलब्ध कराया जा सके। थायराॅक्िसन के संश्लेषण के लिए आयोडीन अनिवायर् है। यदि हमारे आहार में आयोडीन की कमी है तो यह संभावना है कि हम गाॅयटर से ग्रसित हो सकते हैं। इस बीमारी का एक लक्षण पूफली हुइर् गदर्न है। क्या आप इसे चित्रा 7ण्7 मंे अवटुग्रंथ्िा की स्िथति से संबंिात कर सकते हो? कभी - कभी हम ऐसे व्यक्ितयों के संपवर्फ में आते हैं जो बहुत छोटे ;बौनेद्ध होते हैं या बहुत अिाक लंबे होते हैं। क्या आपको कभी आश्चयर् हुआ है यह कैसे होता है? पीयूष गं्रथ्िा से स्रावित होने वाले हाॅमोर्न में एक वृि हाॅमोर्न है। जैसा इसका नाम इंगित करता है वृि हाॅमोर्न शरीर की वृि और विकास को नियंत्रिात करता है। यदि बाल्यकाल में इस हाॅमोर्न की कमी हो जाती है तो यह बौनापन का कारण बनता है। जब आप या आपके दोस्तों की आयु 10.12 वषर् रही होगी तो आपने अपने और उनके अंदर कइर् नाटकीय अंतर देखे होंगे। ये परिवतर्न यौवनारंभ से संब( हैं क्योंकि नर में टेस्टोस्टेरोन तथा मादा में एस्ट्रोजन का स्रावण होता है। क्या आप अपने परिवार या दोस्तों में किसी को जानते हो जिन्हें डाॅक्टर ने अपने आहार में कम शकर्रा लेने की सलाह दी हो क्योंकि वे मधुमेह के रोगी हैं। उपचार के रूप में वे इंसुलिन का इंजेक्शन भी ले रहे हों। यह एक हाॅमोर्न है जिसका उत्पादन अग्न्याशय में होता है और जो रुिार में शकर्रा स्तर को नियंत्रिात करने में सहायता करता है। यदि यह उचित मात्रा में स्रावित नहीं होता है तो रुिार में शकर्रा स्तर बढ़ जाता है और कइर् हानिकारक प्रभाव का कारण बनता है। यदि यह इतना आवश्यक है कि हाॅमोर्न का स्रावण परिशु( मात्रा में होना चाहिए तो हमें एक ियावििा की आवश्यकता है जिससे यह किया जाता है। स्रावित होने वाले हाॅमोर्न का समय और मात्रा का नियंत्राण पुनभर्रण ियावििा से किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि रुिार में शकर्रा स्तर बढ़ जाता है तो इसे अग्न्याशय की कोश्िाका संसूचित ;कमजमबजद्ध कर लेती है तथा इसकी अनुिया में अिाक इंसुलिन स्रावित करती है। जब रुिार में शवर्फरा स्तर कम हो जाता है तो इंसुलिन का स्रावण कम हो जाता है। प्रश्न 1.जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है? 2.आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है? 3.जब एड्रीनलीन रुिार में स्रावित होती है तो हमारे शरीर में क्या अनुिया होती है? 4.मधुमेह के वुफछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है? घ्

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