अध्याय 5 तत्वांे का आवतर् वगीर्करण वीं कक्षा में हमने सीखा कि हमारे आसपास के पदाथर् तत्व, मिश्रण एवं यौगिकनौके रूप में उपस्िथत रहते हैं। हमने यह भी सीखा कि तत्व एक ही प्रकार के परमाणुओं से बने होते हैं। क्या आप जानते हैं कि आज तक कितने तत्वों का पता चल चुका है? आज तक हमें 114 तत्वों की जानकारी है। सन् 1800 तक केवल 30 तत्वों का पता चला था। इन सभी तत्वों की संभवतः भ्िान्न - भ्िान्न विशेषताएँ थीं।जैसे - जैसे विभ्िान्न तत्वों की खोज हो रही थी, वैज्ञानिक इन तत्वों के गुणधमो± के बारे में अिाक से अिाक जानकारी एकत्रा करने लगे। उन्हें तत्वों की इन जानकारियों को व्यवस्िथत करना बड़ा ही कठिन लगा। उन्होंने इन गुणधमो± में एक ऐसा प्रतिरूप ढूँढ़ना आरंभ किया जिसके आधार पर इतने सारे तत्वों का आसानी से अध्ययन किया जा सके। 5ण्1अव्यवस्िथत को व्यवस्िथत करनाμतत्वों के वगीर्करण के प्रारंभ्िाक प्रयास हमने पढ़ा कि कैसे विभ्िान्न वस्तुओं एवं प्राण्िायों को उनके गुणधमोे± के आधार परवगीर्कृत किया जा सकता है। अन्य स्िथतियों में भी हमें गुणधमो± के आधार पर व्यवस्िथत होने के उदाहरण मिलते हैं। जैसे, दुकानों में साबुनों को एक साथ एक स्थान पर रखा जाता है, जबकि बिस्वुफटों को एक साथ दूसरे स्थान पर रखा जाता है। यहाँ तक कि साबुनों में भी, नहाने के साबुन को कपड़ा धोने के साबुन से अलग रखा जाता है। इसी प्रकार वैज्ञानिकों ने भी तत्वों को उनके गुणधमो± के आधार पर वगीर्कृत करने के कइर् प्रयास किए ताकि अव्यवस्िथत को व्यवस्िथत किया सके। सबसे पहले, ज्ञात तत्वों को धातु एवं अधातु में वगीर्कृत किया गया। जैसे - जैसे तत्वों एवं उनके गुणधमोंर् के बारे में हमारा ज्ञान बढ़ता गया, वैसे - वैसे उन्हें वगीर्कृत करने के प्रयास किए गए। 5ण्1ण्1डाॅबेराइनर के त्रिाक सन् 1817 में जमर्न रसायनज्ञ, वुल्पफगांग डाॅबेराइनर ने समान गुणधमोे± वाले तत्वों को समूहों में व्यवस्िथत करने का प्रयास किया। उन्होंने तीन - तीन तत्व वाले वुफछ समूहों को चुना एवं उन समूहों को त्रिाक कहा। डाॅबेराइनर ने बताया कि त्रिाक के तीनों तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में रखने पर बीच वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान, अन्य दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमान का लगभग औसत होता हैै। उदाहरण के लिए, लीथ्िायम ;स्पद्धए सोडियम ;छंद्ध एवं पोटैश्िायम ;ज्ञद्ध वाले त्रिाक पर ध्यान दीजिए, जिनके परमाणु द्रव्यमान क्रमशः 6ण्9ए 23ण्0 तथा 39ण्0 हैं। लीथ्िायम एवं पोटैश्िायम के परमाणु द्रव्यमानों का औसत क्या है? सोडियम के परमाणु द्रव्यमान से इसकी तुलना कैसे की जा सकती है? निम्न सारणी 5ण्1 में तीन तत्वों के वुफछ समूह दिए गए हैं। इन तत्वों कोपरमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में ऊपर से नीचे की ओर व्यवस्िथत किया गया है। क्या आप बता सकते हैं कि इनमें से कौन - सा समूह डाॅबेराइनर त्रिाक बनाता है। सारणी 5ण्1 छ 14ण्0 ब्ं 40ण्1 ब्स 35ण्5 च् 31ण्0 ैत 87ण्6 ठत 79ण्9 ।े 74ण्9 ठं 137ण्3 प् 126ण्9 आप देखेंगे कि समूह ठ तथा समूह ब् डाॅबेराइनर त्रिाक बनाते हैं। डाॅबेराइनर उस समय तक ज्ञात तत्वों में केवल तीन त्रिाक ही ज्ञात कर सके थे ;सारणी 5ण्2द्ध। इसलिए त्रिाक में वगीर्कृत करने की यह प(ति सपफल नहीं रही। 5ण्1ण्2न्यूलैंड्स का अष्टक सि(ांत डाॅबेराइनर के प्रयासों ने दूसरे रसायनज्ञों को तत्वों के गुणधमोे± का उनके परमाणु द्रव्यमान के साथ संबंध स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया। सन् 1866 में अंग्रेज़ वैज्ञानिक जाॅन न्यूलैंड्स ने ज्ञात तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में व्यवस्िथत किया। उन्होंने सबसे कम परमाणु द्रव्यमान वाले तत्व हाइड्रोजन से आरंभ किया तथा 56वें तत्व थोरियम पर इसे समाप्त किया। उन्होंने पाया कि प्रत्येक आठवें तत्व का गुणधमर् पहले चित्रा 5.1 कल्पना कीजिए कि आपको तथा आपके दोस्तों को टुकड़ों में बँटा हुआ एक नक्शा मिलता है जो किसी खज़ाने का पता बताता है। क्या उस खज़ाने तक का रास्ते का पता करना आसान होगा या अव्यवस्िथत? रसायन विज्ञान में भी ऐसी ही अव्यवस्था थी, तत्व तो ज्ञात थे लेकिन उनके वगीर्करण एवं अध्ययन की कोइर् वििा ज्ञात नहीं थी। सारणी 5.2 डाॅबेराइनर त्रिाक तत्व के गुणधमर् के समान है। उन्होंने इसकी तुलना संगीत के अष्टक से की और इसलिए उन्होंने इसे अष्टक का सि(ांत कहा। इसे ‘न्यूलैंड्स का अष्टक सि(ांत’ के नाम से जाना जाता है। न्यूलैंड्स के अष्टक में लीथ्िायम एवं सोडियम के गुणधमर् समान थे। सोडियम, लीथ्िायम के बाद आठवाँ तत्व है। इसी तरह बेरिलियम एवं मैग्नीश्िायम में अिाक समानता है। न्यूलैंड्स के अष्टक के मूल रूप का एक भाग सारणी 5ण्3 में दिया गया है। स्प ब्ं ब्स छं ैत ठत ज्ञ ठं प् सारणी 5ण्3 न्यूलैंड्स का अष्टक संगीत के सुर ऽ ऐसा देखा गया कि अष्टक का सि(ांत केवल कैल्िसयम तक ही लागू होता था, क्योंकि कैल्िसयम के बाद प्रत्येक आठवें तत्व का गुणधमर् पहले तत्व से नहीं मिलता। ऽ न्यूलैंड्स ने कल्पना की कि प्रकृति में केवल 56 तत्व विद्यमान हैं तथा भविष्य में कोइर् अन्य तत्व नहीं मिलेगा। लेकिन, बाद में कइर् नए तत्व पाए गए जिनके गुणधमर्, अष्टक सि(ांत से मेल नहीं खाते थे। ऽ अपनी सारणी में इन तत्वों को समंजित करने के लिए न्यूलैंड्स ने दो तत्वों को एक साथ रख दिया और वुफछ असमान तत्वों को एक स्थान में रख दिया। क्या आप सारणी 5ण्3 में ऐसे उदाहरण ढूँढ़ सकते हैं? ध्यान दीजिए कि कोबाल्ट तथा निवैफलएक साथ में हैं तथा इन्हें एक साथ उसी स्तंभ में रखा गया है जिसमें फ्रलुओरीन, क्लोरीन एवं ब्रोमीन हैं यद्यपि इनके गुणधमर् उन दोनों तत्वों से भ्िान्न हैं। आयरन को कोबाल्ट एवं निवैफल से दूर रखा गया है जबकि उनके गुणधमोंऽ इस प्रकार, न्यूलैंड्स अष्टक सि(ांत केवल हलके तत्वों के लिए ही ठीक से लागू हो पाया। विज्ञान ±में समानता होती ह।ैप्रश्न 123 क्या डाॅबेराइनर के त्रिाक, न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ में भी पाए जाते हैं? तुलना करके पता कीजिए। डाॅबेराइनर के वगीर्करण की क्या सीमाएँ हैं? न्यूलैंड्स के अष्टक सि(ांत की क्या सीमाएँ हैं? घ् 5ण्2अव्यवस्िथत से व्यवस्िथत करनाμमेन्डेलीपफ की आवतर् सारणी न्यूलैंड्स के अष्टक सि(ांत के अस्वीकार होने के बाद भी कइर् वैज्ञानिकों ने ऐसे प्रतिरूपों की खोज जारी रखी जिससे तत्वों के गुणधमोे± का, उनके परमाणु द्रव्यमान के साथ संबंध स्थापित हो सके। तत्वों के वगीर्करण का मुख्य श्रेय रूसी रसायनज्ञ डमित्राी इवानोविच मेन्डेलीपफ को जाता है। तत्वों वफी आवतर् सारणी के प्रारंभ्िाक विकास में उनका प्रमुख योगदान रहा। उन्होंने अपनी सारणी में तत्वों को उनके मूल गुणधमर्, परमाणु द्रव्यमान तथा रासायनिक गुणधमोे± में समानता के आधार पर व्यवस्िथत किया। जब मेन्डेलीपफ ने अपना कायर् आरंभ किया तब तक 63 तत्व ज्ञात थे। उन्होंने तत्वों के परमाणु द्रव्यमान एवं उनके भौतिक तथा रासायनिक गुणधमोे± के बीच संबंधों तत्वों का आवतर् वगीर्करण का अध्ययन किया। रासायनिक गुणधमोे± के अंतगर्त मेन्डेलीपफ ने तत्वों के आॅक्सीजन एवं हाइड्रोजन के साथ बनने वाले यौगिकों पर अपना ध्यान केंदि्रत किया। उन्होंने आॅक्सीजन एवं हाइड्रोजन का इसलिए चुनाव किया क्योंकि ये अत्यंत सिय हैं तथा अिाकांश तत्वों के साथ यौगिक बनाते हैं। तत्व से बनने वाले हाइड्राइड एवं आॅक्साइड के सूत्रा को तत्वों के वगीर्करण के लिए मूलभूत गुणधमर् माना गया। पिफर उन्होंने 63 काडर् लिए एवं प्रत्येक काडर् पर अलग - अलग तत्वों के गुणधमोे± को लिखा। उन्होंने समान गुणधमर् वाले तत्वों को अलग कर दिया तथा इन पत्तों को पिन लगाकर दीवार पर लटका दिया। उन्होंने देखा कि अिाकांश तत्वों को आवतर् सारणी में स्थान मिल गया था तथा अपने परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में ये तत्व व्यवस्िथत हो गए। यह भी देखा गया कि समान भौतिक एवं रासायनिक गुणधमर् वाले विभ्िान्न तत्व एक निश्िचत अंतराल के बाद पिफर आ जाते हैं। इसी आधार पर मेन्डेलीपफ ने आवतर् सारणी बनाइर्, जिसका सि(ांत हैμतत्वों के गुणधमर् उनके परमाणु द्रव्यमान का आवतर् पफलन होते हैं। मेन्डेलीपफ की आवतर् सारणी में ऊध्वर् स्तंभ को ‘ग्रुप’ ;समूहद्ध तथा क्षैतिज पंक्ितयों को ‘पीरियड’ ;आवतर्द्ध कहते हैं ;सारणी 5ण्4द्ध। सारणी 5.4 मेन्डेलीपफ वफी आवतर् सारणी मेन्डेलीपफ की आवतर् सारणी 1872 में जमर्न पत्रिाका में प्रकाश्िात हुइर् थी। स्तंभ के शीषर् पर आॅक्साइड तथा हाइड्राइड के सूत्रा में अंग्रेज़ी का अक्षर श्त्श्ए समूह के किसी भी तत्व को दशार्ता है। सूत्रा को लिखने के तरीके पर ध्यान दीजिए। उदाहरण के लिए, काबर्न के हाइड्राइड ब्भ्4 को त्भ्4 तथा उसके आॅक्साइड ब्व् को त्व्22लिखा गया है। 5ण्5ण्2ण्1 मेन्डेलीपफ वफी आवतर् सारणी की उपलब्िधयाँ आवतर् सारणी व्यवस्िथत करते समय मेन्डेलीपफ को सारणी में अिाक द्रव्यमान वालेतत्व को कभी - कभी कम द्रव्यमान वाले तत्व से पहले रखना पड़ा। क्रम इसलिए उलटनापड़ा ताकि समान गुणधमर् वाले तत्वों को एक साथ रखा जा सके। उदाहरण के लिएकोबाल्ट ;परमाणु द्रव्यमान 58ण्9द्ध सारणी में निवैफल ;परमाणु द्रव्यमान 58ण्7द्ध सेपहले है। सारणी 5ण्4 को देखकर क्या आप ऐसी ही एक अन्य विसंगति ढूँढ़ सकते हैं।इसके अतिरिक्त, मेन्डेलीपफ ने अपनी आवतर् सारणी में वुफछ रिक्त स्थानों को छोड़दिया। इन रिक्त स्थानों को दोष के रूप में देखने के बजाय मेन्डेलीपफ ने दृढ़तापूवर्कवुफछ ऐसे तत्वों के अस्ितत्व का अनुमान किया जो उस समय तक ज्ञात नहीं थे। इनकानामकरण उन्होंने उसी समूह में इससे पहले आने वाले तत्व के नाम में एका ;संस्कृतशब्दद्ध उपसगर् लगाकर किया। जैसे बाद में ज्ञात होने वाले स्कैंडियम, गैलियम, जमेर्नियमके गुणधमर् क्रमशः एका - बोराॅन, एका - ऐलुमिनियम तथा एका - सिलिकाॅन के समान थे। मेन्डेलीपफ द्वारा अनुमानित एका - ऐलुमिनियम तथा बाद में ज्ञात गैलियम के गुणधमर् को सारणी 5ण्5 में सूचीब( किया गया हैः इससे मेन्डेलीपफ की आवतर् सारणी की परिशु(ता तथा उपयोगिता के ठोस प्रमाण मिल गए। इसके अलावा मेन्डेलीपफ के अनुमान की असाधारण सपफलता के कारण रसायनज्ञों ने उनकी आवतर् सारणी को न केवल स्वीकार किया अपितु उनको इससि(ांत की अवधारणा का सृजक भी माना। उत्कृष्ट गैसोंऋ जैसेμहीलियम ;भ्मद्धए निआॅन ;छमद्ध एवं आगर्न ;।तद्ध का पहले भी कइर् संदभर् में उल्लेख किया गया। इन गैसों का पता देर से चला क्योंकि ये अिय हैं तथा वायुमंडल में इनकी मात्रा बहुत कम है। मेन्डेलीपफ की आवतर् सारणी की एक विशेषता यह भी थी कि जब इन गैसों का पता चला तब पिछली व्यवस्था को छेड़े बिना ही इन्हें नए समूह में रखा जा सका। 5.2.3 मेन्डेलीपफ के वगीर्करण की सीमाएँ हाइड्रोजन का इलेक्ट्राॅनिक विन्यास क्षार धातुओं से मिलता है। क्षार धातुओं की भाँंति हाइड्रोजन भी हैलोजन, आॅक्सीजन एवं सल्प़फर के साथ एक जैसे सूत्रा वाले यौगिक बनाती है जैसा उदाहरण में दिखाया गया हैः दूसरी ओर, हैलोजन की भाँति हाइड्रोजन भी द्विपरमाणुक अणु के रूप में पाइर् जाती है और धातुओं एवं अधातुओं के साथ सहसंयोजक यौगिक बनाती है। निश्िचत रूप से आवतर् सारणी में हाइड्रोजन को नियत स्थान नहीं दिया जा सकता है। यह मेन्डेलीपफ वफी आवतर् सारणी की पहली कमी थी। वह अपनी सारणी में हाइड्रोजन को सही स्थान नहीं दे पाए। मेन्डेलीपफ के तत्वों के आवतर् वगीर्करण तैयार होने के पयार्प्त समय बाद समस्थानिकों का पता चला। हम जानते हैं कि किसी तत्व के समस्थानिकों के रासायनिक गुणधमर् समान होते हैं लेकिन उनके परमाणु द्रव्यमान भ्िान्न - भ्िान्न होते हैं। इस प्रकार सभी तत्वों के समस्थानिक मेन्डेलीपफ के आवतर् नियम के लिए एक चुनौती थी। दूसरी समस्या यह थी कि एक तत्व से दूसरे तत्व की ओर आगे बढ़ने पर परमाणु द्रव्यमान नियमित रूप से नहीं बढ़ते। इसलिए यह अनुमान लगाना कठिन हो गया कि दो तत्वों के बीच कितने तत्व खोजे जा सकते हंै, विशेषकर जब हम भारी तत्वों पर विचार करते हैं तो कठिनाइर् आती है। प्रश्न 1234 मेन्डेलीपफ की आवतर् सारणी का उपयोग कर निम्नलिख्िात तत्वों के आॅक्साइड के सूत्रा का अनुमान कीजिएः ज्ञए ब्ए ।सए ैपए ठं गैलियम के अतिरिक्त, अब तक कौन - कौन से तत्वों का पता चला है जिसके लिए मेन्डेलीपफ ने अपनी आवतर् सारणी में खाली स्थान छोड़ दिया था? दो उदाहरण दीजिए। मेन्डेलीपफ ने अपनी आवतर् सारणी तैयार करने के लिए कौन सा मापदंड अपनाया? आपके अनुसार उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया? घ् 5ण्3अव्यवस्िथत से व्यवस्िथत करनाμआधुनिक आवतर् सारणी सन् 1913 में हेनरी मोज्ले ने बताया कि तत्व के परमाणु द्रव्यमान की तुलना में उसका परमाणु - संख्या अिाक आधारभूत गुणधमर् है। तदनुसार, मेन्डेलीपफ वफी आवतर् सारणी में परिवतर्न किया गया तथा परमाणु - संख्या को आधुनिक आवतर् सारणी के आधार के रूप में स्वीकार किया गया। इस आधुनिक आवतर् नियम को इस प्रकार वण्िार्त किया जा सकता हैः ‘तत्वों के गुणधमर् उनकी परमाणु - संख्या का आवतर् पफलन होते हैं।’ आप जानते हैं कि परमाणु संख्या से हमें परमाणु के नाभ्िाक में स्िथत प्रोटोनों की संख्या का पता चलता है तथा एक तत्व से दूसरे तक बढ़ने पर इस संख्या में एक की बढ़ोतरी होती है। तत्वों को उनकी परमाणु - संख्या ;र्द्ध के आरोही क्रम में व्यवस्िथत करने पर जो वगीर्करण प्राप्त होता है उसे आधुनिक आवतर् सारणी कहा जाता है ;सारणी 5ण्6द्ध। तत्वों को परमाणु - संख्या के आरोही क्रम में व्यवस्िथत करने पर तत्वों के गुणधमो± का अिाक परिशु(ता से अनुमान लगाया जा सकता है। आप देख सकते हैं कि आधुनिक आवतर् सारणी में मेन्डेलीपफ वफी आवतर् सारणी वफी तीनों कमियों को सुधारा गया है। आधुनिक आवतर् सारणी में तत्वों का स्थान किन बातों पर निभर्र करता है, यह जानने के बाद हम हाइड्रोजन की असंगत स्िथति की चचार् करेंगे। 5ण्3ण्1 आधुनिक आवतर् सारणी में तत्वों की स्िथति आधुनिक आवतर् सारणी में 18 ऊध्वर् स्तंभ हैं जिन्हें ‘समूह’ कहा जाता है तथा 7 क्षैतिज पक्ितयाँ हैं जिन्हें ‘आवतर्’ कहा जाता है। आइए, देखते हैं कि किसी ‘समूह’ अथवा ‘आवतर्’ में तत्वों की स्िथति किस बात पर निभर्र करती है। सारणी 5.6 आधुनिक आवतर् सारणी आ व तर् आप देखेंगे कि इन सभी तत्वों के संयोजकता इलेक्ट्राॅनों की संख्या समान है। इसी प्रकार आप देखेंगे कि एक ही समूह के सभी तत्वों के संयोजकता इलेक्ट्राॅनों की संख्यासमान है। जैसे फ्रलुओरीन ;थ्द्ध तथा क्लोरीन ;ब्सद्ध जो समूह - 17 के तत्व हैं। फ्रलुओरीन एवं क्लोरीन के बाहरी कोश में कितने इलेक्ट्रॅान हैं? इससे पता चलता है कि आधुनिक आवतर् सारणी में समूह, बाहरी कोश के सवर्सम इलेक्ट्राॅनिक विन्यास को दशार्ता है। यद्यपि समूह में उफपर से नीचे की ओर जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती जाती है। हाइड्रोजन की स्िथति अनिश्िचत रहती है क्योंकि इसे पहले आवतर् के समूह 1 या समूह 17 किसी में भी रखा जा सकता है। क्या आप बता सकते हैं क्यों? आप देखेंगे कि इन तत्वों के संयोजकता इलेक्ट्राॅनों की संख्या तो भ्िान्न - भ्िान्न है लेकिन इनमें कोशों की संख्या समान है। आप यह भी देखेंगे कि आवतर् में बाईं से दाईं ओर जाने पर यदि परमाणु - संख्या में इकाइर् की वृि होती है तो संयोजकता इलेक्ट्राॅनों की संख्या में भी इकाइर् वृि होती है। आप कह सकते हैं कि अध्यासित कोशों की समान संख्या वाले विभ्िान्न तत्वों के परमाणु एक ही आवतर् में स्िथत हैं। छंए डहए ।सए ैपए च्ए ैए ब्स एवं ।त आधुनिक आवतर् सारणी के तीसरे आवतर् में स्िथत हैं क्योंकि इनके परमाणुओं के इलेक्ट्राॅन ज्ञए स् एवं ड कोशों में स्िथत हैं। इन तत्वों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास लिखकर इस कथन की पुष्िट कीजिए। प्रत्येक आवतर् दशार्ता है कि एक नया कोश इलेक्ट्राॅनों से भरा गया। पहले, दूसरे, तीसरे एवं चैथे आवतर् में कितने तत्व हैं? विभ्िान्न कक्षों में भरे जाने वाले इलेक्ट्राॅनों की संख्या के आधार पर हम इन आवतो± में तत्वों की संख्या बता सकते हैं। आगे की कक्षा में आप इस बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे। आप जानते हैं कि किसी कोश में इलेक्ट्राॅनों की अिाकतम संख्या एक सूत्रा 2द2 पर निभर्र करती है जहाँ द, नाभ्िाक से नियत कोश की संख्या को दशार्ता है। जैसे, ज्ञ कोश दृ 2 × ;1द्ध2 त्र 2ए प्रथम आवतर् में दो तत्व हैं। स् कोश दृ 2 × ;2द्ध2 त्र 8ए दूसरे आवतर् में आठ तत्व हैं। ड कोश दृ 2 × ;3द्ध2 त्र 18ए बाहरी कोश में आठ से अिाक इलेक्ट्राॅन नहीं हो सकते हैं इसलिए तीसरे आवतर् में भी आठ तत्व होंगे। आवतर् सारणी में तत्वों की स्िथति से उनकी रासायनिक अभ्िाियाशीलता का पता चलता है। आप जानते हैं कि तत्व द्वारा नि£मत आबंध के प्रारूप तथा इसकी संख्या संयोजकता इलेक्ट्राॅनों द्वारा निधार्रित होती है। क्या अब आप बता सकते हैं कि मेन्डेलीपफ ने अपनी सारणी में तत्वों की स्िथति निधार्रित करने के लिए यौगिकों के सूत्रा को आधार बनाया था, वह शु( था। इस आधार पर समान रासायनिक गुणधमर् वाले तत्वों को एक ही समूह में कैसे रखा जा सकता है? 5ण्3ण्2 आधुुनिक आवतर् सारणी की प्रवृिा संयोजकताः आप जानते हैं कि किसी भी तत्व की संयोजकता उसके परमाणु के सबसे बाहरी कोश में उपस्िथत संयोजकता इलेक्ट्राॅनों की संख्या से निधार्रित होती है। परमाणु साइज़ परमाणु साइज़ से परमाणु की त्रिाज्या का पता चलता है। एक स्वतंत्रा परमाणु के वेंफद्र से उसके सबसे बाहरी कोश की दूरी ही परमाणु के साइज़ को दशार्ती है। हाइड्रोजन परमाणु की त्रिाज्या 37 चउ ;पीकोमीटर, 1 चउ त्र 10दृ12 उद्ध है। आइए, हम समूह तथा आवतर् में परमाणु साइज़ की विभ्िान्नता का अध्ययन करें। आप देखेंगे कि आवतर् में बाईं से दाईं ओर जाने पर परमाणु त्रिाज्या घटती है। नाभ्िाक में आवेश के बढ़ने से यह इलेक्ट्राॅनों को नाभ्िाक की ओर खींचता है जिससे परमाणु का साइज़ घटता जाता है। आप देखेंगे कि समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु का साइज़ बढ़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर एक नया कोश जुड़ जाता है। इससे नाभ्िाक तथा सबसे बाहरी कोश के बीच की दूरी बढ़ जाती है और इस कारण नाभ्िाक का आवेश बढ़ जाने के बाद भी परमाणु का साइज़ बढ़ जाता है। धात्िवक एवं अधात्िवक गुणधमर् छं एवं डह जैसी धातुएँ सारणी के बाईं ओर तथा सल्प़फर एवं क्लोरीन जैसी अधातुएँ दाईं ओर स्िथत हैं। मध्य में, सिलिकन स्िथत है जिसे अ(र्धातु या उपधातु कहते हैं। यह अधातु एवं धातु दोनों के गुणधमर् प्रदश्िार्त करती है। आधुनिक आवतर् सारणी में एक टेढ़ी - मेढ़ी रेखा धातुओं को अधातुओं से अलग करती है। इस रेखा पर आने वाले तत्वμबोरोन, सिलिकन, जमेर्नियम, आसेर्निक, एंेटिमनी, टेल्यूरियम एवं पोलोनियम धातुओं एवं अधातुओं दोनों के गुणधमर् प्रदश्िर्ात करते हैं। इसलिए इन्हें अ(र्धातु या उपधातु भी कहते हैं। तीसरे अध्याय में आपने देखा कि आबंध बनाते समय धातु में इलेक्ट्राॅन त्यागने कीप्रवृिा होती है अथार्त यह विद्युत धनात्मक होते हैं। आवतर् में जैसे - जैसे संयोजकता कोश के इलेक्ट्राॅनों पर किया जाने वाला प्रभावीनाभ्िाकीय आवेश बढ़ता है, इलेक्ट्राॅन त्यागने की प्रवृिा घट जाती है। समूह में नीचे की ओर, संयोजकता इलेक्ट्राॅन पर िया करने वाला प्रभावी नाभ्िाकीय आवेश घटता है क्योंकि सबसे बाहरी इलेक्ट्राॅन नाभ्िाक से दूर होते हैं। इसलिए यह इलेक्ट्राॅन सुगमतापूवर्क निकल जाते हैं। इसलिए धत्िवक अभ्िालक्षण आवतर् में घटता है तथा समूह में नीचे जाने पर बढ़ता है। दूसरी ओर, अधातुएँ विद्युत )णात्मक होती हैं। उनमें इलेक्ट्राॅन ग्रहण करके आबंधबनाने की प्रवृिा होती है। आइए, इन गुणधमो± की विविधता के बारे में जानकारी प्राप्त करें। विद्युत)णात्मकता वफी प्रवृिा के अनुसार अधातुएँ आवतर् सारणी के दाहिनी ओरऊपर की ओर स्िथत होती हैं।इन प्रवृिायों से हमें इन तत्वों से बने आॅक्साइडों की प्रकृति का भी पता चलता है क्योंकि धातुओं के आॅक्साइड क्षारकीय तथा अधातुओं के आॅक्साइड सामान्यतः अम्लीय होते हैं। प्रश्न 123456 आधुनिक आवतर् सारणी द्वारा किस प्रकार से मेन्डेलीपफ की आवतर् सारणी की विविध विसंगतियों को दूर किया गया? मैग्नीश्िायम की तरह रासायनिक अभ्िाियाशीलता दिखाने वाले दो तत्वों के नाम लिख्िाए? आपके चयन का क्या आधर है? के नाम बताइएः ;ंद्ध तीन तत्वों जिनके सबसे बाहरी कोश में एक इलेक्ट्राॅन उपस्िथत हो। ;इद्ध दो तत्वों जिनके सबसे बाहरी कोश में दो इलेक्ट्राॅन उपस्िथत हों। ;बद्ध तीन तत्वों जिनका बाहरी कोश पूणर् हो। ;ंद्ध लीथ्िायम, सोडियम, पोटैश्िायम, ये सभी धातुएँ जल से अभ्िािया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। क्या इन तत्वों के परमाणुओं में कोइर् समानता है? ;इद्ध हीलियम एक अियाशील गैस है जबकि निआॅन की अभ्िाियाशीलता अत्यंत कम है। इनके परमाणुओं में कोइर् समानता है? आधुनिक आवतर् सारणी में पहले दस तत्वों में कौन सी धातुएँ हैं? आवतर् सारणी में इनके स्थान के आधार पर इनमें से किस तत्व में सबसे अिाक धात्िवक अभ्िालक्षण की विशेषता है? ळं ळम ।े ैम ठम घ्

RELOAD if chapter isn't visible.