सांख्ियकी 14ण्1 भूमिका कक्षा प्ग् में, आप दिए हुए आँकड़ों को अवगीर्वृफत एवं वगीर्वृफत बारंबारता बंटनों में व्यवस्िथत करना सीख चुके हैं। आपने आँकड़ों को चित्राीय रूप से विभ्िान्न आलेखों, जैसे दंड आलेख, आयत चित्रा ;इनमें असमान चैड़ाइर् वाले वगर् अंतराल भी सम्िमलित थेद्ध और बारंबारता बहुभुजों के रूप में निरूपित करना भी सीखा था। तथ्य तो यह है कि आप अवगीर्वृफत आँकड़ों के वुफछ संख्यात्मक प्रतिनिध्ि ;दनउमतपबंस तमचतमेमदजपअमेद्ध ज्ञात करके एक कदम आगे बढ़ गए थे। इन संख्यात्मक प्रतिनिध्ियों को वेंफद्रीय प्रवृिा के मापक ;उमंेनतमे व िबमदजतंस जमदकमदबलद्ध कहते हैं। हमने ऐसे तीन मापकों अथार्त् माध्य ;उमंदद्धए माध्यक ;उमकपंदद्ध और बहुलक ;उवकमद्ध का अध्ययन किया था। इस अध्याय में, हम इन तीनों मापकों, अथार्त् माध्य, माध्यक और बहुलक, का अध्ययन अवगीर्वृफत आँकड़ों से वगीर्वृफत आँकड़ों के लिए आगे बढ़ाएँगे। हम संचयी बारंबारता ;बनउनसंजपअम तिमुनमदबलद्ध और संचयी बारंबारता सारणी की अवधरणाओं की चचार् भी करेंगे तथा यह भी सीखेंगे कि संचयी बारंबारता वक्रों ;बनउनसंजपअम तिमुनमदबल बनतअमेद्धए जो तोरण ;वहपअमेद्ध कहलाती हैं, को किस प्रकार खींचा जाता है। 14ण्2 वगीर्वृफत आँकड़ों का माध्य जैसाकि हम पहले से जानते हैं, दिए हुए प्रेक्षणों का माध्य ;या औसतद्ध सभी प्रेक्षणों के मानों के योग को प्रेक्षणों की वुफल संख्या से भाग देकर प्राप्त किया जाता है। कक्षा प्ग् से, याद कीजिए कि यदि प्रेक्षणों ग ए गएण् ण् ण्ए गकी बारंबारताएँ क्रमशः िए एि ण् ण् ण्ए हिों, तो इसका12द 12द अथर् है कि प्रेक्षण ग ए िबार आता हैऋ प्रेक्षण ग ए िबार आता है, इत्यादि।11 22 अब, सभी प्रेक्षणों के मानों का योगत्र गि ़ गि ़ ण् ण् ण् ़ गि है तथा प्रेक्षणों की संख्या1122दद ि1 ़ ि2 ़ ण् ण् ण् ़ दि है। अतः, इनका माध्य ग निम्नलिख्िात द्वारा प्राप्त होगा: गि ़ गि ़़ गि 11 22 दद ग त्र ि़ ि़़ ि12 द याद कीजिए कि उपरोक्त को संक्ष्िाप्त रूप में एक यूनानी अक्षर Σ ¹बड़ा सिगमा ;बंचपजंस ेपहउंद्धह् से व्यक्त करते हैं। इस अक्षर का अथर् है जोड़ना ;ेनउउंजपवदद्ध अथार्त् द ∑ गि प प पत्र1ग त्र ∑ द पि पत्र1 Σ गि इसे और अध्िक संक्ष्िाप्त रूप में, ग त्र पप लिखते हैं, यह समझते हुए कि प का मान 1Σ पि से द तक विचरण करता है। आइए इस सूत्रा का निम्नलिख्िात उदाहरण में माध्य ज्ञात करने के लिए उपयोग करें। उदाहरण 1 रू किसी स्वूफल की कक्षा ग् के 30 विद्या£थयों द्वारा गण्िात के एक पेपर में, 100 में से प्राप्त किए गए अंक, नीचे एक सारणी में दिए गए हैं। इन विद्या£थयों द्वारा प्राप्त अंकों का माध्य ज्ञात कीजिए। प्राप्तांक ;ग पद्ध 10 20 36 40 50 56 60 70 72 80 88 92 95 विद्या£थयों की संख्या ; िपद्ध 1 1 3 4 3 2 4 4 1 1 2 3 1 हलरू याद कीजिए कि माध्य ज्ञात करने के लिए, हमें प्रत्येक गप से उसकी संगत बारंबारता पि द्वारा गुणनपफल की आवश्यकता है। अतः, आइए इन गुणनपफलों को सारणी 14.1 में दशार्ए अनुसार एक स्तंभ में रखें। सारणी 14ण्1 प्राप्तांक ;ग प द्ध विद्या£थयों की संख्या ; िप द्ध िप ग प 10 1 10 20 1 20 ण् 36 3 108 40 4 160 50 3 150 56 2 112 60 4 240 70 4 280 72 1 72 80 1 80 88 2 176 92 3 276 95 1 95 योग Σ िप त्र 30 Σ िप ग प त्र 1779 Σ गि प प 1779 अब ग त्र त्र त्र 59ण्3 Σ पि 30अतः, प्राप्त किया गया माध्य अंक 59.3 है। हमारे दैनिक जीवन की अध्िकांश स्िथतियों में, आँकड़े इतने बड़े होते हैं कि उनका एक अथर्पूणर् अध्ययन करने के लिए उन्हें समूहों में बाँट कर ;वगीर्वृफत करकेद्ध छोटा किया जाता है। अतः, हमें दिए हुए अवगीर्वृफत आँकड़ों को, वगीर्वृफत आँकड़ों में बदलने की आवश्यकता होती है तथा इन आँकड़ों के माध्य ज्ञात करने की विध्ि निकालने की आवश्यकता होती है। आइए उदाहरण 1 के अवगीर्वृफत आँकड़ों को चैड़ाइर्, मान लीजिए, 15 के वगर् अंतराल बनाकर वगीर्वृफत आँकड़ों में बदलें। याद रख्िाए कि वगर् अंतरालों की बारंबारताएँ नि£दष्ट करते समय, किसी उपरि वगर् सीमा ;नचचमत बसंेे सपउपजद्ध में आने वाले प्रेक्षण अगले वगर् अंतराल में लिए जाते हैं। उदाहरणाथर्, अंक 40 प्राप्त करने वाले 4 विद्या£थयों को वगर् अंतराल 25 - 40 में न लेकर अंतराल 40 - 55 में लिया जाता है। इस परंपरा को ध्यान में रखते हुए, आइए इनकी एक वगीर्वृफत बारंबारता सारणी बनाएँ ;देख्िाए सारणी 14.2द्ध। सारणी 14ण्2 वगर् अंतराल 10 . 25 25 . 40 40 . 55 55 . 70 70 . 85 85 . 100 विद्या£थयों की संख्या 2 3 7 6 6 6 अब, प्रत्येक वगर् अंतराल के लिए, हमें एक ऐसे ¯बदु ;मानद्ध की आवश्यकता है, जो पूरे अंतराल का प्रतिनिध्ित्व करे। यह मान लिया जाता है कि प्रत्येक वगर् अंतराल की बारंबारता उसके मध्य - ¯बदु के चारों ओर केंदि्रत होती है। अतः, प्रत्येक वगर् के मध्य - बिंदु ;उपक.चवपदजद्ध ¹या वगर् चिÉ ;बसंेे उंताद्धह् को उस वगर् में आने वाले सभी प्रेक्षणों का प्रतिनििा ;तमचतमेमदजंजपअमद्ध माना जा सकता है। याद कीजिए कि हम एक वगर् अंतराल का मध्य ¯बदु ;या वगर् चिÉद्ध उसकी उपरि और निचली सीमाओं का औसत निकालकर ज्ञात करते हैं। अथार्त् उपरि वगर् सीमा ़ निचली वगर् सीमा वगर् चिÉ त्र 2 ़25 सारणी 14.2 के संदभर् में, वगर् 10 - 25 का वगर् चिÉ 10 ए अथार्त् 17ण्5 है। इसी2 प्रकार, हम अन्य वगर् अंतरालों के वगर् चिÉ ज्ञात कर सकते हैं। हम इन वगर् चिÉों को सारणी 14.3 में रखते हैं। ये वगर् चिÉ गप ष्े का काम करते हैं। व्यापक रूप में वगर् अंतराल के वगर् चिÉ ग के संगत बारंबारता िलिखी जाती है। अब हम उदाहरण 1 की ही तरह, माध्यपप परिकलित करने की प्रिया की ओर आगे बढ़ सकते हैं। सारणी 14ण्3 वगर् अंतराल विद्या£थयों की संख्या ;पि द्ध वगर् चिÉ ;गप द्ध िप ग प 10 . 25 25 . 40 40 . 55 55 . 70 70 . 85 85 दृ 100 2 3 7 6 6 6 17ण्5 32ण्5 47ण्5 62ण्5 77ण्5 92ण्5 35ण्0 97ण्5 332ण्5 375ण्0 465ण्0 555ण्0 योग Σ िप त्र 30 Σ िप ग प त्र 1860ण्0 अंतिम स्तंभ में दिए मानों के योग से हमें Σ पिगप प्राप्त होता है। अतः, दिए हुए आँकड़ों का माध्य ग ए नीचे दशार्ए अनुसार प्राप्त होता हैः Σगि 1860ण्0 ग त्र पप त्रत्र 62 Σपि 30 माध्य ज्ञात करने की इस नयी विध्ि को प्रत्यक्ष विध्ि ;कपतमबज उमजीवकद्ध कहा जा सकता है। हम देखते हैं कि सारण्िायों 14.1 और 14.3 में, समान आँकड़ों का प्रयोग किया गया है तथा इनमें माध्य परिकलित करने के लिए एक ही सूत्रा का प्रयोग किया गया है। परंतु इन दोनों में हमें परिणाम ;माध्यद्ध भ्िान्न - भ्िान्न प्राप्त हुए हैं। क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसा क्यों हुआ है और इनमें से कौन - सा माध्य अध्िक सही है? दोनों मानों के अंतर का कारण सारणी 14.3 में की गइर् मध्य - ¯बदु कल्पना है। 59.3 सही माध्य है, जबकि 62 एक सन्िनकट माध्य है। कभी - कभी जब ग और िके मान बड़े होते हैं, तोग और िके गुणनपफल ज्ञात करनापप पप जटिल हो जाता है तथा इसमें समय भी अध्िक लगता है। अतः, ऐसी स्िथतियों के लिए, आइए इन परिकलनों को सरल बनाने की विध्ि सोचें। हम पि के साथ वुफछ नहीं कर सकते, परंतु हम प्रत्येक गप को एक छोटी संख्या में बदल सकते हैं, जिससे हमारे परिकलन सरल हो जाएँगे। हम ऐसा वैफसे करेंगे? प्रत्येक गप मेें से एक निश्िचत संख्या घटाने के बारे में आपका क्या विचार है? आइए यह विध्ि अपनाने का प्रयत्न करें। इसमें पहला चरण यह हो सकता है कि प्राप्त किए गए सभी गप में से किसी गप को कल्िपत माध्य ;ंेेनउमक उमंदद्ध के रूप में चुन लें तथा इसे ष्ंष् से व्यक्त करें। साथ ही, अपने परिकलन कायर् को और अध्िक कम करने के लिए, हम ष्ंष् को ऐसा गप ले सकते हैं जो ग 1ए ग 2ए ण् ण् ण्ए गद के मध्य में कहीं आता हो। अतः, हम ं त्र 47ण्5 या ं त्र 62ण्5 चुन सकते हैं। आइए ं त्र 47ण्5 चुनें। अगला चरण है कि ं और प्रत्येक गप के बीच का अंतर कप ज्ञात किया जाए, अथार्त् प्रत्येक गप से ष्ंष् का विचलन ;कमअपंजपवदद्ध ज्ञात किया जाए। अथार्त् क त्र ग दृ ं पपत्रग दृ 47ण्5 पतीसरा चरण है कि प्रत्येक क और उसके संगत िका गुणनपफल ज्ञात करके सभी कि का पप प प योग ज्ञात किया जाए। ये परिकलन सारणी 14.4 में दशार्ए गए हैं। सारणी 14ण्4 वगर् अंतराल विद्या£थयों की संख्या ; िप द्ध वगर् चिÉ ;ग प द्ध क प त्र ग प दृ 47ण्5 िप क प 10 . 25 25 . 40 40 . 55 55 . 70 70 . 85 85 . 100 2 3 7 6 6 6 17ण्5 32ण्5 47ण्5 62ण्5 77ण्5 92ण्5 दृ30 दृ15 0 15 30 45 दृ60 दृ45 0 90 180 270 योग Σ िप त्र 30 Σ िप क प त्र 435 Σकि अतः, सारणी 14.4 से, विचलनों का माध्य क त्र पप Σपि आइए, अब क और ग में संबंध् ज्ञात करने का प्रयत्न करें। चूँकि कप ज्ञात करने के लिए हमने प्रत्येक गप में से ं को घटाया है, इसलिए माध्य ग ज्ञात करने के लिए, हम क में ं जोड़ते हैं। इसे गण्िातीय रूप से, नीचे दशार्ए अनुसार स्पष्ट किया जा सकता हैः Σकि विचलनों का माध्य क त्र पप Σपि Σपि ;गप − ंद्धअतः क त्र Σपि Σगि Σंि पप प त्र − Σपि Σपि Σ ित्र ग − ंप Σपि त्र ग − ं अतः ग त्र ं ़ क Σकि अथार्त् ग त्र ं ़ पप Σपि अब सारणी 14.4 से, ंए Σकि और Σ िके मान रखने पर, हमें प्राप्त होता हैपप प 435 ग त्र 47ण्5 ़त्र 47ण्5 ़ 14ण्5 त्र 62 30 अतः, विद्या£थयों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों का माध्य 62 है। माध्य ज्ञात करने की उपरोक्त विध्ि कल्िपत माध्य विध्ि ;ंेेनउमक उमंद उमजीवकद्ध कहलाती है। ियाकलाप 1 रू सारणी 14.3 से, प्रत्येक गप ;17ण्5ए 32ण्5ए इत्यादिद्ध को ष्ंष् मानकर माध्य परिकलित कीजिए। आप क्या देखते हैं? आप पाएँगे कि प्रत्येक स्िथति में माध्य एक ही, अथार्त् 62 आता है। ;क्यों?द्ध अतः, हम यह कह सकते हैं कि प्राप्त किए गए माध्य का मान चुने हुए ष्ंष् के मान पर निभर्र नहीं करता। ध्यान दीजिए कि सारणी 14.4 के स्तंभ में दिए सभी मान 15 के गुणज ;उनसजपचसमेद्ध हैं। अतः, यदि हम स्तंभ 4 के सभी मानों को 15 से भाग दे दें, तो हमें पि से गुणा करने के लिए छोटी संख्याएँ प्राप्त हो जाएँगी। ¹यहाँ 15, प्रत्येक वगर् अंतराल की वगर् माप ;साइजद्ध है।ह् गप− ंअतः, आइए मान लें कि नप त्र है, जहाँ ं कल्िपत माध्य है और ी वगर्माप है।ी अब हम सभी नप परिकलित करते हैं और पहले की तरह ही प्रिया जारी रखते हैं ;अथार्त् नि ज्ञात करते हैं और पिफर Σनि ज्ञात करते हैं। आइए ी त्र 15 लेकर, सारणीप प पप 14.5 बनाएँ। सारणी 14ण्5 वगर् अंतराल िप ग प क प त्र ग प दृ ं न प त्र गप दृ ं ी िप न प 10 . 25 25 . 40 40 . 55 55 . 70 70 . 85 85 . 100 2 3 7 6 6 6 17ण्5 32ण्5 47ण्5 62ण्5 77ण्5 92ण्5 दृ30 दृ15 0 15 30 45 दृ2 दृ1 0 1 2 3 दृ4 दृ3 0 6 12 18 योग Σ िप त्र 30 Σ िप न प त्र 29 Σनि मान लीजिए न त्र पप है।Σपि यहाँ भी हम न और ग में संबंध् ज्ञात करेंगे। − ंहमंें प्राप्त है नप त्र गप ी ;ग − ंद्धΣपि प 1 ⎡Σगि − ं Σ ि⎤ी पपपअतः न त्र त्र ⎢⎥Σपि ी ⎣Σपि ⎦1 ⎡Σगि Σ ि⎤पप प− ंत्र ⎢⎥ी Σ िΣि⎣ पप ⎦1 त्र ख्ग − ं,ी या ीन त्र ग − ं अथार्त् ग त्र ं ़ ीन ⎛Σनि ⎞ गं ़ ीअतः त्र ⎜ प िप ⎟  Σ प ⎠ अब, सारणी 14.5 से ंए ीए Σनि और Σ िके मान प्रतिस्थापित करने पर, हमें प्राप्त होता हैः पप प ⎛ 29 ⎞ ग त्र 47ण्5 ़ 15 ×⎜ ⎟⎝ 30 ⎠ त्र 47ण्5 ़ 14ण्5 त्र 62 अतः, विद्या£थयों द्वारा प्राप्त किया गया माध्य अंक 62 है। माध्य ज्ञात करने की उपरोक्त विध्ि पग - विचलन विध्ि ;ेजमच कमअपंजपवद उमजीवकद्ध कहलाती है। ध्यान दीजिए कि ऽ पग - विचलन विध्ि तभी सुविधजनक होगी, जबकि सभी कप गुणनखंड है। ऽ तीनों विध्ियों से प्राप्त माध्य एक ही है। में कोइर् सावर् ऽ कल्िपत माध्य विध्ि और पग - विचलन विध्ि प्रत्यक्ष विध्ि के ही सरलीवृफत रूप हैं। ऽ सूत्रा ग त्र ं ़ ीन का तब भी प्रयोग किया जा सकता है, जबकि ं और ी ऊपर दी हुइर् संख्याओं की भाँति न हों, बल्िक वे शून्य के अतिरिक्त ऐसी वास्तविक गप − ंसंख्याएँ हों ताकि नप त्र हो।ी आइए इन विध्ियों का प्रयोग एक अन्य उदाहरण से करें। उदाहरण2 रू नीचे दी हुइर् सारणी भारत के विभ्िान्न राज्यों एवं संघीय क्षेत्रों;नदपवद जमततपजवतपमेद्ध के ग्रामीण क्षेत्रांे के प्राथमिक विद्यालयों में, महिला श्िाक्षकों के प्रतिशत बंटन को दशार्ती है। इस अनुच्छेद में च£चत तीनों विध्ियों से महिला श्िाक्षकों का माध्य प्रतिशत ज्ञात कीजिए। महिला श्िाक्षकों का प्रतिशत 15 . 25 25 . 35 35 . 45 45 . 55 55 . 65 65 . 75 75 . 85 राज्यों/संघीय क्षेत्रों की संख्या 6 11 7 4 4 2 1 ;स्रोतः एन.सी.इर्.आर.टी द्वारा किया गया सातवाँ अख्िाल भारतीय स्वूफल श्िाक्षा सवेर्द्ध हल रू आइए प्रत्येक वगर् अंतराल का गप ज्ञात करें और उन्हें एक स्तंभ में रखें ;देख्िाए सारणी 14.6द्ध। सारणी 14ण्6 महिला श्िाक्षकों का प्रतिशत राज्यों/संघीय क्षेत्रों की संख्या ; िप द्ध ग प 15 . 25 25 . 35 35 . 45 45 . 55 55 . 65 65 . 75 75 . 85 6 11 7 4 4 2 1 20 30 40 50 60 70 80 गप − 50 यहाँ, हम ं त्र 50ए ी त्र 10ए लेते हैं। तब क त्र ग दृ 50 और न त्र होगा।पपप10 अब हम कप और नप ज्ञात करते हैं और इन्हें सारणी 14.7 में रखते हैं। सारणी 14ण्7 महिला श्िाक्षकों का प्रतिशत राज्यों/संघीय क्षेत्रांे की संख्या ; िप द्ध ग प क प त्र ग प दृ 50 50 त्र 10 प प ग न िप ग प िप क प िप न प 15 . 25 6 20 दृ30 दृ3 120 दृ180 दृ18 25 . 35 11 30 दृ20 दृ2 330 दृ220 दृ22 35 . 45 7 40 दृ10 दृ1 280 दृ70 दृ7 45 . 55 4 50 0 0 200 0 0 55 . 65 4 60 10 1 240 40 4 65 . 75 2 70 20 2 140 40 4 75 . 85 1 80 30 3 80 30 3 योग 35 1390 दृ360 दृ36 उपरोक्त सारणी से, हमंे Σ ित्र 35ए Σगि त्र 1390ए Σकि त्र दृ 360ए Σनि त्र दृ36 प्राप्त होता है।पपपपपपपΣगि 1390 पपप्रत्यक्ष विध्ि का प्रयोग करने से, ग त्रत्रत्र 39ण्71 Σपि 35 कल्िपत माध्य विध्ि का प्रयोग करने से, Σकि पप ;−360द्ध ग त्र ं ़ त्र 50 ़त्र 39ण्71 Σपि 35 पग - विचलन विध्ि के प्रयोग से, ⎛Σनि ⎞⎛ दृ 36 ⎞ ग त्र ं ़⎜ पप ⎟× ी त्र 50 ़⎜ ⎟× 10 त्र 39ण्71 ⎝Σपि ⎠⎝ 35 ⎠ अतः, ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक विद्यालयों में महिला श्िाक्षकों का माध्य प्रतिशत 39.71 है। टिप्पणी रू सभी तीनों विध्ियों से प्राप्त परिणाम एक ही समान है। अतः, माध्य ज्ञात करने की विध्ि चुनना इस बात पर निभर्र करता है कि ग और िके मान क्या हैं। यदि ग और िपयार्प्तपप पप रूप से छोटे हैं, तो प्रत्यक्ष विध्ि ही उपयुक्त रहती है। यदि गप और पि के मान संख्यात्मक रूप से बड़े हैं, तो हम कल्िपत माध्य विध्ि या पग - विचलन विध्ि का प्रयोग कर सकते हैं। यदि वगर्माप असमान हैं और गप संख्यात्मक रूप से बड़े हैं, तो भी हम सभी कप का एक उपयुक्त सवर्निष्ठ गुणनखंड ी लेकर, पग - विचलन विध्ि का प्रयोग कर सकते हैं। उदाहरण 3 रू नीचे दिया हुआ बंटन एकदिवसीय िकेट मैचों में, गेंदबाज़ों द्वारा लिए गए विकिटों की संख्या दशार्ता है। उपयुक्त विध्ि चुनते हुए, लिए गए विकिटों का माध्य ज्ञात कीजिए। यह माध्य क्या सूचित करता है? विकिटों की संख्या 20 . 60 60 . 100 100 . 150 150 . 250 250 . 350 350 . 450 गेंदबाज़ों की संख्या 7 5 16 12 2 3 हल रू यहाँ वगर् माप भ्िान्न - भ्िान्न हैं तथा गप संख्यात्मक रूप से बड़े हैं। आइए ं त्र 200 और ी त्र 20 लेकर पग - विचलन विध्ि का प्रयोग करें। तब, हम सारणी 14.8 में दशार्ए अनुसार आँकड़े प्राप्त करते हैंः सारणी 14ण्8 लिए गए विकिटों की संख्या गेंदबाज़ों की संख्या ; िप द्ध ग प क प त्र ग प दृ 200 त्र 20 प प क न न प िप 20 . 60 60 . 100 100 . 150 150 . 250 250 . 350 350 . 450 7 5 16 12 2 3 40 80 125 200 300 400 दृ160 दृ120 दृ75 0 100 200 दृ8 दृ6 दृ3ण्75 0 5 10 दृ56 दृ30 दृ60 0 10 30 योग 45 दृ106 −106 ⎛−106 ⎞अतः, न त्र है। इसलिए, ग त्र 200 ़ 20 ⎜⎟ त्र 200 दृ 47ण्11 त्र 152ण्89 है।45 ⎝ 45 ⎠यह हमें बताता है कि उपरोक्त 45 गेंदबाज़ों ने एकदिवसीय िकेट मैचों में 152.89 की औसत से विकिट लिए हैं। आइए देखें कि इस अनुच्छेद में पढ़ी अवधरणाओं को आप किस प्रकार अनुप्रयोग कर सकते हैं। ियाकलाप 2 रू अपनी कक्षा के विद्या£थयों को तीन समूहों में बाँटिए और प्रत्येक समूह से निम्नलिख्िात में से एक ियाकलाप करने को कहिए: 1ण् आपके स्कूल द्वारा हाल ही में ली गइर् परीक्षा में, अपनी कक्षा के सभी विद्या£थयों द्वारा गण्िात में प्राप्त किए गए अंक एकत्रिात कीजिए। इस प्रकार प्राप्त आँकड़ों का एक वगीर्वृफत बारंबारता बंटन सारणी बनाइए। 2ण् अपने शहर में 30 दिन का रिकाॅडर् किए गए दैनिक अध्िकतम तापमान एकत्रिात कीजिए। इन आँकड़ों को एक वगीर्वृफत बारंबारता बंटन सारणी के रूप में प्रस्तुत कीजिए। 3ण् अपनी कक्षा के सभी विद्या£थयों की ऊँचाइयाँ ;बउ मेंद्ध मापिए और उनका एक वगीर्वृफत बारंबारता बंटन सारणी बनाइए। जब सभी समूह आँकड़े एकत्रिात करके उनकी वगीर्वृफत बारंबारता बंटन सारण्िायाँ बना लें, तब प्रत्येक समूह से अपने बारंबारता बंटन का माध्य निकालने को कहिए। इसमें वे जो विध्ि उपयुक्त समझें उसका प्रयोग करें। प्रश्नावली 14ण्1 1ण् विद्या£थयों के एक समूह द्वारा अपने पयार्वरण संचेतना अभ्िायान के अंतगर्त एक सवेर्क्षण किया गया, जिसमें उन्होंने एक मोहल्ले के 20 घरों में लगे हुए पौधें से संबंध्ित निम्नलिख्िात आँकड़े एकत्रिात किए। प्रति घर माध्य पौधें की संख्या ज्ञात कीजिए। माध्य ज्ञात करने के लिए आपने किस विध्ि का प्रयोग किया और क्यों? 2ण् किसी पैफक्टरी के 50 श्रमिकों की दैनिक मज़दूरी के निम्नलिख्िात बंटन पर विचार कीजिएः एक उपयुक्त विध्ि का प्रयोग करते हुए, इस पैफक्ट्री के श्रमिकों की माध्य दैनिक मज़दूरी ज्ञात कीजिए। 3ण् निम्नलिख्िात बंटन एक मोहल्ले के बच्चों के दैनिक जेबखचर् दशार्ता है। माध्य जेबखचर् ृ 18 है। लुप्त बारंबारता िज्ञात कीजिए: 4ण् किसी अस्पताल में, एक डाॅक्टर द्वारा 30 महिलाओं की जाँच की गइर् और उनके हृदय स्पंदन ;इमंजद्ध की प्रति मिनट संख्या नोट करके नीचे दशार्ए अनुसार संक्ष्िाप्त रूप में लिखी गइर्। एक उपयुक्त विध्ि चुनते हुए, इन महिलाओं के हृदय स्पंदन की प्रति मिनट माध्य संख्या ज्ञात कीजिएः 5ण् किसी पुफटकर बाज़ार में, पफल विव्रेफता पेटियों में रखे आम बेच रहे थे। इन पेटियों में आमों की संख्याएँ भ्िान्न - भ्िान्न थीं। पेटियों की संख्या के अनुसार, आमों का बंटन निम्नलिख्िात था: एक पेटी में रखे आमों की माध्य संख्या ज्ञात कीजिए। आपने माध्य ज्ञात करने की किस वििा का प्रयोग किया है? 6ण् निम्नलिख्िात सारणी किसी मोहल्ले के 25 परिवारों में भोजन पर हुए दैनिक व्यय को दशार्ती हैः एक उपयुक्त विध्ि द्वारा भोजन पर हुआ माध्य व्यय ज्ञात कीजिए। 7ण् वायु में सल्पफर डाइर् - आॅक्साइड ;ैव्2द्ध वफी सांद्रता ;भाग प्रति मिलियन मेंद्ध को ज्ञात करने के लिए, एक नगर के 30 मोहल्लों से आँकड़े एकत्रिात किए गए, जिन्हें नीचे प्रस्तुत किया गया है: पौधें की संख्या 0 . 2 2 . 4 4 . 6 6 . 8 8 . 10 10 . 12 12 . 14 घरों की संख्या 1 2 1 5 6 2 3 दैनिक मज़दूरी ;रुपयों मेंद्ध 100 . 120 120 . 140 140 . 160 160 . 180 180 . 200 श्रमिकों की संख्या 12 14 8 6 10 दैनिक जेब भत्ता ;रुपयों मेंद्ध 11 . 13 13 . 15 15 . 17 17 . 19 19 . 21 21 . 23 23 . 25 बच्चों की संख्या 7 6 9 13 ि 5 4 हृदय स्पंदन की प्रति मिनट संख्या 65 . 68 68 . 71 71 . 74 74 . 77 77 . 80 80 . 83 83 . 86 महिलाओं की संख्या 2 4 3 8 7 4 2 आमों की संख्या 50 . 52 53 . 55 56 . 58 59 . 61 62 . 64 पेटियों की संख्या 15 110 135 115 25 दैनिक व्यय ;रुपयों मेंद्ध 100.150 150.200 200.250 250.300 300.350 परिवारों की संख्या 4 5 12 2 2 ैव् 2 की सांद्रता बारंबारता 0ण्00 . 0ण्04 4 0ण्04 . 0ण्08 9 0ण्08 . 0ण्12 9 0ण्12 . 0ण्16 2 0ण्16 . 0ण्20 4 0ण्20 . 0ण्24 2 वायु में ैव्2 की सांद्रता का माध्य ज्ञात कीजिए। 8ण् किसी कक्षा अध्यापिका ने पूरे सत्रा के लिए अपनी कक्षा के 40 विद्या£थयों की अनुपस्िथति निम्नलिख्िात रूप में रिकाॅडर् ;तमबवतकद्ध की। एक विद्याथीर् जितने दिन अनुपस्िथत रहा उनका माध्य ज्ञात कीजिए: 9ण् निम्नलिख्िात सारणी 35 नगरों की साक्षरता दर ;प्रतिशत मेंद्ध दशार्ती है। माध्य साक्षरता दर ज्ञात कीजिए: दिनों की संख्या 0 . 6 6 . 10 10 . 14 14 . 20 20 . 28 28 . 38 38 . 40 विद्या£थयों की संख्या 11 10 7 4 4 3 1 साक्षरता दर ;ः मेंद्ध 45 . 55 55 . 65 65 . 75 75 . 85 85 . 95 नगरों की संख्या 3 10 11 8 3 14ण्3 वगीर्वृफत आंँकड़ों का बहुलक कक्षा प्ग् से याद कीजिए कि बहुलक ;उवकमद्ध दिए हुए प्रेक्षणों में वह मान है जो सबसे अिाक बार आता है, अथार्त् उस प्रेक्षण का मान जिसकी बारंबारता अध्िकतम है। साथ ही, हमने अवगीर्वृफत आँकड़ों के बहुलक ज्ञात करने की भी चचार् कक्षा प्ग् में की थी। यहाँ, हम वगीर्वृफत आँकड़ों का बहुलक ज्ञात करने की विध्ि की चचार् करेंगे। यह संभव है कि एक से अध्िक मानों की एक ही अध्िकतम बारंबारता हो। ऐसी स्िथतियों में, आँकड़ों को बहुबहुलकीय ;उनसजप उवकंस द्ध आँकड़े कहा जाता है। यद्यपि, वगीर्वृफत आँकड़े भी बहुबहुलकीय हो सकते हैं, परंतु हम अपनी चचार् को केवल एक ही बहुलक वाली समस्याओं तक ही सीमित रखेंगे। आइए पहले एक उदाहरण की सहायता से यह याद करें कि अवगीर्वृफत आँकड़ों का बहुलक हमने किस प्रकार ज्ञात किया था। उदाहरण 4 रू किसी गेंदबाज़ द्वारा 10 िकेट मैचों में लिए गए विकिटों की संख्याएँ निम्नलिख्िात हैं: 2645021323 इन आँकड़ों का बहुलक ज्ञात कीजिए। हल रू आइए उपरोक्त आँकड़ों के लिए, एक बारंबारता बंटन सारणी बनाएँ, जैसा कि नीचे दशार्या गया है: विकिटों की संख्या 0 1 2 3 4 5 6 िकेट मैचों की संख्या 1 1 3 2 1 1 1 स्पष्ट है कि गेंदबाज़ ने अध्िकतम मैचों ;3द्ध में 2 विकिट लिए हैं। अतः, इन आँकड़ों का बहुलक 2 है। एक वगीर्वृफत बारंबारता बंटन में, बारंबारताओं को देखकर बहुलक ज्ञात करना संभव नहीं है। यहाँ, हम केवल वह वगर् ;बसंेेद्ध ज्ञात कर सकते हैं जिसकी बारंबारता अध्िकतम है। इस वगर् को बहुलक वगर् ;उवकंस बसंेेद्ध कहते हैं। बहुलक इस बहुलक वगर् के अंदर कोइर् मान है, जिसे निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा ज्ञात किया जाता है: ⎛ ि− ि⎞बहुलक त्र स ़⎜ 10 ⎟× ी 2 ि− ि− ि⎝ 10 2 ⎠ जहाँ स त्र बहुलक वगर् की निम्न ;निचलीद्ध सीमा ी त्र वगर् अंतराल की माप ;यह मानते हुए कि सभी अंतराल बराबर मापों के हैंद्ध ि1 त्र बहुलक वगर् की बारंबारता ि0 त्र बहुलक वगर् से ठीक पहले वगर् की बारंबारता तथा ि2 त्र बहुलक वगर् के ठीक बाद में आने वालेे वगर् की बारंबारता है। इस सूत्रा का प्रयोग दशार्ने के लिए, आइए एक उदाहरण लें। उदाहरण 5 रू विद्या£थयों के एक समूह द्वारा एक मोहल्ले के 20 परिवारों पर किए गए सवेर्क्षण के परिणामस्वरूप विभ्िान्न परिवारों के सदस्यों की संख्या से संबंध्ित निम्नलिख्िात आँकड़े प्राप्त हुए: परिवार माप 1 . 3 3 . 5 5 . 7 7 . 9 9 . 11 परिवारों की संख्या 7 8 2 2 1 इन आँकड़ों का बहुलक ज्ञात कीजिए। हल रू यहाँ, अध्िकतम वगर् बारंबारता 8 है तथा इस बारंबारता का संगत वगर् 3 - 5 है। अतः, बहुलक वगर् 3 - 5 है। अब, बहुलक वगर् त्र 3 . 5ए बहुलक वगर् की निम्न सीमा ;सद्ध त्र 3 तथा वगर् माप ;ीद्ध त्र 2 है। बहुलक वगर् की बारंबारता ; ि1द्ध त्र 8 बहुलक वगर् से ठीक पहले वाले वगर् की बारंबारता ; ि0द्ध त्र 7 तथा बहुलक वगर् के ठीक बाद में आने वाले वगर् की बारंबारता ; ि2द्ध त्र 2 है। आइए इन मानों को सूत्रा में प्रतिस्थापित करें। हमें प्राप्त होता है: ⎛ 1ि − 0ि ⎞बहुलक त्र स ़⎜ ⎟× ी 2 ि− ि− ि⎝ 10 2 ⎠ ⎛ 8 − 7 ⎞ 2 त्र3 ़× 2 त्र 3 ़त्र 3ण्286 ⎜⎟ 2 × 8 − 7 − 27⎝⎠ अतः, उपरोक्त आँकड़ों का बहुलक 3ण्286 है। उदाहरण 6 रू गण्िात की एक परीक्षा में 30 विद्या£थयों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों का बंटन उदाहरण 1 की सारणी 14.3 में दिया गया है। इन आँकड़ों का बहुलक ज्ञात कीजिए। साथ ही, बहुलक और माध्य की तुलना कीजिए और इनकी व्याख्या कीजिए। हल रू उदाहरण 1 की सारणी 14.3 को देख्िाए। चूँकि अध्िकतम विद्या£थयों की संख्या ;7द्ध वाला अंतराल 40 - 55 है, इसलिए बहुलक वगर् 40 - 55 है। अतः, बहुलक वगर् की निम्न सीमा ;सद्ध त्र 40 है, वगर् माप ;ीद्ध त्र 15 है, बहुलक वगर् की बारंबारता ; ि1द्ध त्र 7 है, बहुलक वगर् से ठीक पहले आने वाले वगर् की बारंबारता ; ि0द्ध त्र 3 है, तथा बहुलक वगर् के ठीक बाद में आने वाले वगर् की बारंबारता ; ि2द्ध त्र 6 है। अब, सूत्रा का प्रयोग करने पर, हमें प्राप्त होता है: ⎛ 1ि − 0ि ⎞बहुलक त्र स ़⎜ ⎟× ी 2 ि− ि− ि⎝ 10 2 ⎠⎛ 7 − 3 ⎞ त्र 40 ़× 15 त्र 52⎜⎟ 14 − 6 − 3⎝⎠अतः, बहुलक अंक 52 है। अब, उदाहरण 1 से आप जानते हैं कि माध्य अंक 62 है। अतः, अध्िकतम विद्या£थयों का अंक 52 है तथा औसत के रूप में प्रत्येक विद्याथीर् ने 62 अंक प्राप्त किए हैं। टिप्पणीरू 1ण् उदाहरण 6 में, बहुलक माध्य से छोटा है। परंतु किन्हीं और समस्याओं ;प्रश्नोंद्ध के लिए यह माध्य के बराबर या उससे बड़ा भी हो सकता है। 2ण् यह स्िथति की माँग पर निभर्र करता है कि हमारी रुचि विद्या£थयों द्वारा प्राप्त किए गए औसत अंकों में है या पिफर अध्िकतम विद्या£थयों द्वारा प्राप्त किए गए औसत अंकों में है। पहली स्िथति में, माध्य की आवश्यकता होगी तथा दूसरी स्िथति में बहुलक की आवश्यकता होगी। ियाकलाप 3 रू ियाकलाप 2 में बनाए गए समूहों और उनको नि£दष्ट किए कायो± के साथ ियाकलाप जारी रख्िाए। प्रत्येक समूह से आँकड़ों का बहुलक ज्ञात करने को कहिए। उनसे इसकी तुलना माध्य से करने को कहिए तथा दोनों के अथो± की व्याख्या करने को कहिए। टिप्पणी रू असमान वगर् मापों वाले वगीर्वृफत आँकड़ों का बहुलक भी परिकलित किया जा सकता है। परंतु यहाँ हम इसकी चचार् नहीं करेंगे। प्रश्नावली 14ण्2 1ण् निम्नलिख्िात सारणी किसी अस्पताल में एक विशेष वषर् में भतीर् हुए रोगियों की आयु को दशार्ती हैः आयु ;वषो± मेंद्ध 5 . 15 15 . 25 25 . 35 35 . 45 45 . 55 55 . 65 रोगियों की संख्या 6 11 21 23 14 5 उपरोक्त आँकड़ों के बहुलक और माध्य ज्ञात कीजिए। दोनों केंद्रीय प्रवृिा की मापों की तुलना कीजिए और उनकी व्याख्या कीजिए। 2ण् निम्नलिख्िात आँकड़े, 225 बिजली उपकरणों के प्रेक्ष्िात जीवन काल ;घंटों मेंद्ध की सूचना देते हैं: उपकरणों का बहुलक जीवनकाल ज्ञात कीजिए। 3ण् निम्नलिख्िात आँकड़े किसी गाँव के 200 परिवारों के वुफल मासिक घरेलू व्यय के बंटन को दशार्ते हैं। इन परिवारों का बहुलक मासिक व्यय ज्ञात कीजिए। साथ ही, माध्य मासिक व्यय भी ज्ञात कीजिए। 4ण् निम्नलिख्िात बंटन भारत के उच्चतर माध्यमिक स्वूफलों में, राज्यों के अनुसार, श्िाक्षक - विद्याथीर् अनुपात को दशार्ता है। इन आँकड़ों के बहुलक और माध्य ज्ञात कीजिए। दोनों मापकों की व्याख्या कीजिए। 5ण् दिया हुआ बंटन विश्व के वुफछ श्रेष्ठतम बल्लेबाज़ों द्वारा एकदिवसीय अंतरार्ष्ट्रीय िकेट मैचों में बनाए गए रनों को दशार्ता है: जीवनकाल ;घंटों मेंद्ध 0 . 20 20 . 40 40 . 60 60 . 80 80 . 100 100 . 120 बारंबारता 10 35 52 61 38 29 व्यय ;ृ मेंद्ध परिवारों की संख्या 1000 . 1500 1500 . 2000 2000 . 2500 2500 . 3000 3000 . 3500 3500 . 4000 4000 . 4500 4500 . 5000 24 40 33 28 30 22 16 7 प्रति श्िाक्षक विद्या£थयों की संख्या राज्य/संघीय क्षेत्रों की संख्या 15 . 20 20 . 25 25 . 30 30 . 35 35 . 40 40 . 45 45 . 50 50 . 55 3 8 9 10 3 0 0 2 बनाए गए रन बल्लेबाज़ों की संख्या 3000 . 4000 4000 . 5000 5000 . 6000 6000 . 7000 7000 . 8000 8000 . 9000 9000 . 10ए000 10ए000 . 11ए000 4 18 9 7 6 3 1 1 इन आँकड़ों का बहुलक ज्ञात कीजिए। 6ण् एक विद्याथीर् ने एक सड़क के किसी स्थान से होकर जाती हुइर् कारों की संख्याएँ नोट की और उन्हें नीचे दी हुइर् सारणी के रूप में व्यक्त किया। सारणी में दिया प्रत्येक प्रेक्षण 3 मिनट के अंतराल मंे उस स्थान से होकर जाने वाली कारों की संख्याओं से संबंध्ित है। ऐसे 100 अंतरालों पर प्रेक्षण लिए गए। इन आँकड़ों का बहुलक ज्ञात कीजिए। कारों की संख्या 0 . 10 10 . 20 20 . 30 30 . 40 40 . 50 50 . 60 60 . 70 70 . 80 बारंबारता 7 14 13 12 20 11 15 8 14ण्4 वगीर्वृफत आँकड़ों का माध्यक जैसाकि आप कक्षा प्ग् में पढ़ चुके हैं, माध्यक ;उमकपंदद्ध केंद्रीय प्रवृिा का ऐसा मापक है, जो आँकड़ों में सबसे बीच के प्रेक्षण का मान देता है। याद कीजिए कि अवगीर्वृफत आँकड़ों का माध्यक ज्ञात करने के लिए, पहले हम प्रेक्षणों के मानों को आरोही क्रम में व्यवस्िथत ⎛ द ़ 1⎞करते हैं। अब, यदि द विषम है, तो माध्यक ⎜⎟ वें प्रेक्षण का मान होता है। यदि द सम⎝ 2 ⎠ द ⎛ द ⎞है, तो माध्यक वेंऔर ⎜़ 1⎟ वें प्रेक्षणों के मानों का औसत ;माध्यद्ध होता है।2 ⎝ 2 ⎠ माना, हमें निम्नलिख्िात आँकड़ों का माध्यक ज्ञात करना है जो एक परीक्षा में 100 विद्याथ्िार्यों द्वारा 50 में से प्राप्त अंक देते हैं। प्राप्तांक 20 29 28 33 42 38 43 25 विद्याथ्िार्यों की संख्या 6 28 24 15 2 4 1 20 पहले प्राप्त अंकों का आरोही क्रम तैयार करें और बारंबारता सारणी को निम्न प्रकार से बनाएँ। सारणी 14ण्9 प्राप्तांक विद्याथ्िार्यों की संख्या बारंबारता 20 25 28 29 33 38 42 43 6 20 24 28 15 4 2 1 योग 100 द ⎛ द ⎞यहाँ द त्र 100 है जो सम संख्या है। माध्यक प्रेक्षण वें तथा ⎜़ 1⎟ वें प्रेक्षण का2 ⎝ 2 ⎠ औसत होगा। अथार्त् 50वें तथा 51वें प्रेक्षणों का औसत। इन प्रेक्षणों को ज्ञात करने के लिए, हम निम्न प्रकार बढ़ते हैं। सारणी 14ण्10 प्राप्तांक विद्याथ्िार्यों की संख्या 20 25 तक 28 तक 29 तक 33 तक 38 तक 42 तक 43 तक 6 6 ़ 20 त्र 26 26 ़ 24 त्र 50 50 ़ 28 त्र 78 78 ़ 15 त्र 93 93 ़ 4 त्र 97 97 ़ 2 त्र 99 99 ़ 1 त्र 100 अब हम इस सूचना को दशार्ता एक नया स्तंभ उपरोक्त बारंबारता सारणी में जोड़ते हैं तथा उसे संचयी बारंबारता स्तंभ का नाम देते हैं। सारणी 14ण्11 प्राप्तांक विद्याथ्िार्यों की संख्या संचयी बारंबारता 20 25 28 29 33 38 42 43 6 20 24 28 15 4 2 1 6 26 50 78 93 97 99 100 उपरोक्त सारणी से हम पाते हैंः 50वाँ प्रेक्षण 28 है ;क्यों?द्ध 51वाँ प्रेक्षण 29 है 28 ़ 29 इसलिए, माध्यक त्र त्र 28ण्5 2 टिप्पणी रू सारणी 14.11 के भाग में सम्िमलित स्तंभ 1 और 3 संचयी बारंबारता सारणी के नाम से जाना जाता है। माध्यक अंक 28.5 सूचित करता है कि लगभग 50 प्रतिशत विद्या£थयों ने 28.5 से कम अंक और दूसरे अन्य 50 प्रतिशत विद्याथ्िार्यों ने 28.5 से अिाक अंक प्राप्त किए। आइए देखें कि निम्नलिख्िात स्िथति में समूहित आँकड़े का माध्यक वैफसे प्राप्त करते हैं। निम्नानुसार एक निश्िचत परीक्षा में 100 में 53 विद्या£थयों द्वारा प्राप्त अंकों का समूहित बारंबारता बंटन पर विचार करें। सारणी 14ण्12 प्राप्तांक विद्या£थयों की संख्या 0 . 10 10 . 20 20 . 30 30 . 40 40 . 50 50 . 60 60 . 70 70 . 80 80 . 90 90 . 100 5 3 4 3 3 4 7 9 7 8 उपरोक्त सारणी से निम्नलिख्िात प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास करें। कितने विद्या£थयों ने 10 से कम अंक प्राप्त किए हैं? स्पष्टतया, उत्तर 5 है। कितने विद्या£थयों ने 20 से कम अंक प्राप्त किए हैं? ध्यान दीजिए कि 20 से कम अंक प्राप्त करने वाले विद्या£थयों में वे विद्याथीर् सम्िमलित हैं, जिन्होंने वगर्0 . 10 में अंक प्राप्त किए हैं और वे विद्याथीर् भी सम्िमलित हैं जिन्होंने वगर् 10 . 20 में अंक प्राप्त किए हैं। अतः, 20 से कम अंक प्राप्त करने वाले विद्या£थयों की वुफल संख्या 5 ़ 3 अथार्त् 8 है। हम कहते हैं कि वगर् 10 . 20 की संचयी बारंबारता ;बनउनसंजपअम तिमुनमदबलद्ध 8 है। इसी प्रकार, हम अन्य वगो± की संचयी बारंबारताएँ भी ज्ञात कर सकते हैं, अथार्त् हम यह ज्ञात कर सकते हैं कि 30 से कम अंक प्राप्त करने वाले कितने विद्याथीर् हैं, 40 से कम अंक प्राप्त करने वाले कितने विद्याथीर् हैं, ..., 100 से कम अंक प्राप्त करने वाले कितने विद्याथीर् हैं। हम इन्हें नीचे एक सारणी 14.13 के रूप में दे रहे हैं: सारणी 14ण्13 प्राप्तांक विद्या£थयों की संख्या ;संचयी बारंबारताद्ध 10 से कम 20 से कम 30 से कम 40 से कम 50 से कम 60 से कम 70 से कम 80 से कम 90 से कम 100 से कम 5 5 ़ 3 त्र 8 8 ़ 4 त्र 12 12 ़ 3 त्र 15 15 ़ 3 त्र 18 18 ़ 4 त्र 22 22 ़ 7 त्र 29 29 ़ 9 त्र 38 38 ़ 7 त्र 45 45 ़ 8 त्र 53 उपरोक्त बंटन से कम प्रकार का संचयी बारंबारता बंटन कहलाता है। यहाँ 10ए 20ए 30ए ण् ण् ण् 100ए संगत वगर् अंतरालों की उपरि सीमाएँ हैं। हम इसी प्रकार उन विद्या£थयों की संख्याओं के लिए भी जिन्होंने 0 से अध्िक या उसके बराबर अंक प्राप्त किए हैं, 10 से अध्िक या उसके बराबर अंक प्राप्त किए हैं, 20 से अध्िक या उसके बराबर अंक प्राप्त किए हैं, इत्यादि के लिए एक सारणी बना सकते हैं। सारणी 14.12 से हम देख सकते हैं कि सभी 53 विद्या£थयों ने 0 से अध्िक या 0 के बराबर अंक प्राप्त किए हैं। चूँकि अंतराल 0 . 10 में 5 विद्याथीर् हैं, इसलिए 53 दृ 5 त्र 48 विद्या£थयों ने 10 से अध्िक या उसके बराबर अंक प्राप्त किए हैं। इसी प्रिया को जारी रखते हुए हम 20 से अध्िक या उसके बराबर 48 दृ 3 त्र 45ए 30 से अिाक या उसके बराबर 45 दृ 4 त्र 41ए इत्यादि विद्याथीर् प्राप्त करते हैं, जिन्हें सारणी 14.14 में दशार्या गया है। सारणी 14ण्14 प्राप्तांक विद्या£थयों की संख्या ;संचयी बारंबारताद्ध 0 से अध्िक या उसके बराबर 10 से अध्िक या उसके बराबर 20 से अध्िक या उसके बराबर 30 से अध्िक या उसके बराबर 40 से अध्िक या उसके बराबर 50 से अध्िक या उसके बराबर 60 से अध्िक या उसके बराबर 70 से अध्िक या उसके बराबर 80 से अध्िक या उसके बराबर 90 से अध्िक या उसके बराबर 53 53 दृ 5 त्र 48 48 दृ 3 त्र 45 45 दृ 4 त्र 41 41 दृ 3 त्र 38 38 दृ 3 त्र 35 35 दृ 4 त्र 31 31 दृ 7 त्र 24 24 दृ 9 त्र 15 15 दृ 7 त्र 8 उपरोक्त सारणी या बंटन अध्िक प्रकार का संचयी बारंबारता बंटन कहलाता है। यहाँ 0ए 10ए 20ए ण् ण् ण्ए 90 संगत वगर् अंतरालों की निम्न सीमाएँ हैं। अब, वगीर्वृफत आँकड़ों का माध्यक ज्ञात करने के लिए, हम उपरोक्त दोनों प्रकार के संचयी बारंबारता बंटनों में से किसी बंटन का प्रयोग कर सकते हैं। हम सारणी 14.12 और सारणी 14.13 को मिलाकर एक नयी सारणी 14.15 बना लें जो नीचे दी गइर् हैः सारणी 14ण्15 प्राप्तांक विद्या£थयों की संख्या ; िद्ध संचयी बारंबारता ;बद्धि 0 . 10 10 . 20 20 . 30 30 . 40 40 . 50 50 . 60 60 . 70 70 . 80 80 . 90 90 . 100 5 3 4 3 3 4 7 9 7 8 5 8 12 15 18 22 29 38 45 53 अब, वगीर्कृत आँकड़ों के सबसे मध्य के प्रेक्षण को हम केवल संचयी बारंबारताएँ देख कर ही नहीं ज्ञात कर सकते, क्योंकि सबसे मध्य का प्रेक्षण किसी अंतराल में होगा। अतः, यह आवश्यक है कि इस मध्य प्रेक्षण को उस वगर् अंतराल में खोजा जाए, जो आँकड़ों को दो बराबर भागों में विभक्त करता है। परंतु यह वगर् अंतराल कौन - सा है? दइस अंतराल को ज्ञात करने के लिए, हम सभी वगो± की संचयी बारंबारताएँ और 2 दज्ञात करते हैं। अब, हम वह वगर् खोजते हैं जिसकी संचयी बारंबारता से अध्िक और2 उसके निकटतम है। इस वगर् को माध्यक वगर् ;उमकपंद बसंेेद्ध कहते हैं। उपरोक्त बंटन में, दद त्र 53 है। अतः, त्र 26ण्5 हुआ। अब, 60 . 70 ही वह वगर् है जिसकी संचयी बारंबारता 29ए2 द अथार्त् 26ण्5 से अध्िक और उसके निकटतम है।2 अतः, 60 . 70 माध्यक वगर् है। माध्यक वगर् ज्ञात करने के बाद, हम निम्नलिख्िात सूत्रा का प्रयोग करके माध्यक ज्ञात करते हैंः ⎛ द ⎞− ब ि⎜⎟2माध्यक त्र स ़ ⎜ ⎟× ी ए ि⎜⎟⎜⎟⎝⎠ जहाँ स त्र माध्यक वगर् की निम्न सीमा द त्र प्रेक्षणों की संख्या ब ित्र माध्यक वगर् से ठीक पहले वाले वगर् की संचयी बारंबारता ित्र माध्यक वगर् की बारंबारता ी त्र वगर् माप ;यह मानते हुए कि वगर् माप बराबर हैंद्ध द अब त्र 26ण्5ए स त्र 60ए ब ित्र 22ए ित्र 7ए ी त्र 10 2 को सूत्रा में प्रतिस्थापित करने पर, हमें प्राप्त होता है: ⎛ 26ण्5 − 22 ⎞ 45 माध्यक त्र 60 ़× 10 त्र 60 ़⎜⎟⎝ 7 ⎠7 त्र 66ण्4 अतः, लगभग आध्े विद्या£थयों ने 66.4 से कम अंक प्राप्त किए हैं और शेष आध्े विद्या£थयों ने 66.4 से अध्िक या उसके बराबर अंक प्राप्त किए हैं। उदाहरण 7 रू किसी स्वूफल की कक्षा ग् की 51 लड़कियों की ऊँचाइयों का एक सवेर्क्षण किया गया और निम्नलिख्िात आँकड़े प्राप्त किए गएः ऊँचाइर् ;बउ मेंद्ध 140 से कम 145 से कम 150 से कम 155 से कम 160 से कम 165 से कम लड़कियों की संख्या 4 11 29 40 46 51 माध्यक ऊँचाइर् ज्ञात कीजिए। हल रू माध्यक ऊँचाइर् ज्ञात करने के लिए, हमें वगर् अंतराल और उनकी बारंबारताओं की आवश्यकता है। चूँकि दिया हुआ बंटन कम प्रकार का है, इसलिए हमें वगर् अंतरालों की उपरि सीमाएँ 140ए 145ए 150ए ण् ण् ण्ए 165 प्राप्त होती हैं तथा इनके संगत वगर् अंतराल क्रमशः 140 से कम, 140.145ए 145.150एण्ण्ण्ण्ण्160.165 हैं। दिए हुए बंटन से, हम देखते हैं कि ऐसी 4 लड़कियाँ हैं जिनकी ऊँचाइर् 140 से कम है, अथार्त् वगर् अंतराल 140 से कम की बारंबारता 4 है। अब 145 बउ से कम ऊँचाइर् वाली 11 लड़कियाँ हैं और 140 बउ से कम ऊँचाइर् वाली 4 लड़कियाँ हैं। अतः, अंतराल 140 . 145 में ऊँचाइर् रखने वाली लड़कियों की संख्या 11 दृ 4 त्र 7 होगी। अथार्त् वगर् अंतराल 140 . 145 की बारंबारता 7 है। इसी प्रकार, 145 दृ 150 की बारंबारता 29 दृ 11 त्र 18 है, 150 . 155 की बारंबारता 40 दृ 29 त्र 11 है, इत्यादि। अतः संचयी बारंबारताओं के साथ हमारी बारंबारता बंटन सारणी निम्नलिख्िात रूप की हो जाती हैः सारणी 14ण्16 वगर् अंतराल बारंबारता संचयी बारंबारता 140 से कम 140 . 145 145 . 150 150 . 155 155 . 160 160 . 165 4 7 18 11 6 5 4 11 29 40 46 51 द 51 अब द त्र 51 है। अतः, त्रत्र 25ण्5 है। यह प्रेक्षण अंतराल 145 . 150 में आता है। तब,22 स ;निम्न सीमाद्ध त्र 145ए माध्यक वगर्145 . 150 के ठीक पहले वगर् की संचयी बारंबारता ;बद्धि त्र 11ए माध्यक वगर् 145 दृ 150 की बारंबारता ित्र 18 तथा वगर् माप ी त्र 5 है। ⎛ द ⎞− ब ि⎜⎟2सूत्रा, माध्यक त्र स ़ ⎜ ⎟× ी का प्रयोग करने पर, हमें प्राप्त होता है: ि⎜⎟ ⎝⎠ ⎛ 25ण्5 − 11 ⎞माध्यक त्र 145 ़× 5⎜⎟⎝ 18 ⎠ 72ण्5 त्र 145 ़ त्र 149ण्03 18अतः, लड़कियों की माध्यक ऊँचाइर् 149ण्03 बउ है। इसका अथर् है कि लगभग 50ः लड़कियों की ऊँचाइयाँ 149ण्03 बउ से कम या उसके बराबर है तथा शेष 50ः की ऊँचाइयाँ 149ण्03 बउ से अध्िक है। उदाहरण 8 रू निम्नलिख्िात आँकड़ों का माध्यक 525 है। यदि बारंबारताओं का योग 100 है, तो ग और ल का मान ज्ञात कीजिए। वगर् अंतराल बारंबारता 0 . 100 2 100 . 200 5 200 .300 ग 300 . 400 12 400 . 500 17 500 . 600 20 600 . 700 ल 700 . 800 9 800 . 900 7 900 . 1000 4 हल रू वगर् अंतराल बारंबारता संचयी बारंबारता 0 . 100 100 . 200 200 . 300 300 . 400 400 . 500 500 . 600 600 . 700 700 . 800 800 . 900 900 . 1000 2 5 ग 12 17 20 ल 9 7 4 2 7 7 ़ ग 19 ़ ग 36 ़ ग 56 ़ ग 56 ़ ग ़ ल 65 ़ ग ़ ल 72 ़ ग ़ ल 76 ़ ग ़ ल यह दिया है कि द त्र 100 है। अतः, 76 ़ ग ़ ल त्र 100 अथार्त् ग ़ ल त्र 24 ;1द्ध माध्यक 525 है, जो वगर् 500 - 600 में स्िथत है। अतः, स त्र 500ए ित्र 20ए ब ित्र 36 ़ गए ी त्र 100 है। ⎛ द ⎞− ब ि⎜⎟2सूत्रा माध्यक त्र स ़⎜ ⎟ ीए का प्रयोग करने पर, हमें प्राप्त होता है: ि⎜⎟ ⎝⎠ ⎛ 50 − 36 − ग ⎞ 525 त्र 500 ़× 100 ⎜⎟⎝ 20 ⎠ या 525 दृ 500 त्र ;14 दृ गद्ध × 5 या 25 त्र 70 दृ 5ग या 5ग त्र 70 दृ 25 त्र 45 अतः ग त्र9 इसलिए ;1द्ध से हमें प्राप्त होता है कि 9 ़ ल त्र 24 अथार्त् ल त्र 15 अब जब हमने तीनों केंद्रीय प्रवृिा के मापकों का अध्ययन कर लिया है, तो आइए इस बात की चचार् करें कि एक विश्िाष्ट आवश्यकता के लिए, कौन - सा मापक अध्िक उपयुक्त रहेगा। केंद्रीय प्रवृिा का अध्िकतर प्रयोग होने वाला मापक माध्य है, क्योंकि यह सभी पे्रक्षणों पर आधरित होता है तथा दोनों चरम मानों के बीच में स्िथत होता है। अथार्त्, यह संपूणर् आँकड़ों में सबसे बड़े और सबसे छोटे प्रेक्षणों के बीच में स्िथत होता है। यह हमें दो या अध्िक दिए हुए बंटनों की तुलना करने में भी सहायक है। उदाहरणाथर्, किसी परीक्षा में, विभ्िान्न स्वूफलों के विद्या£थयों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों के औसत ;माध्यद्ध की तुलना करके हम यह निष्कषर् निकाल सकते हैं कि किस स्वूफल का प्रदशर्न बेहतर रहा। परंतु आँकड़ों के चरम मान माध्य पर प्रभाव डालते हैं। उदाहरणाथर्, लगभग एक - सी बारंबारताओं वाले वगो± का माध्य दिए हुए आँकड़ों का एक अच्छा प्रतिनिध्ि होगा। परंतु यदि एक वगर् की बारंबारता मान लीजिए 2 हो और शेष पाँच वगो± की बारंबारताएँ 20, 25, 20, 21 और 18 हों, तो इनका माध्य आँकड़ों का सही प्रति¯बब प्रदान नहीं करेगा। अतः ऐसी स्िथतियों के लिए, माध्य आँकड़ों का एक अच्छा प्रतिनिध्ित्व नहीं करेगा। उन समस्याओं में, जहाँ व्यक्ितगत प्रेक्षण महत्वपूणर् नहीं होते और हम एक ‘प्रतीकात्मक’ ;जलचपबंसद्ध प्रेक्षण ज्ञात करना चाहते हैं, तो माध्यक अध्िक उपयुक्त रहता है। उदाहरणाथर्, किसी राष्ट्र के श्रमिकों की प्रतीकात्मक उत्पादकता दर, औसत मज़दूरी, इत्यादि के लिए माध्यक एक उपयुक्त मापक रहता है। ये ऐसी स्िथतियाँ हैं जिनमें चरम ;अथार्त् बहुत बड़े या बहुत छोटेद्ध मान संब( हो सकते हैं। अतः, इन स्िथतियों में, हम माध्य के स्थान पर, केंद्रीय प्रवृिा का मापक माध्यक लेते हैं। ऐसी स्िथतियों में, जहाँ अध्िकतर आने वाला मान स्थापित करना हो या सबसे अिाक लोकपि्रय वस्तु का पता करना हो, तो बहुलक सबसे अध्िक अच्छा विकल्प होता है। उदाहरणाथर्, सबसे अध्िक देखे जाने वाला लोकपि्रय टीवी प्रोग्राम ज्ञात करने, उस उपभोक्ता वस्तु को ज्ञात करने, जिसकी माँग सबसे अध्िक है, लोगों द्वारा वाहनों का सबसे अध्िक पसंद किए जाने वाला रंग ज्ञात करने, इत्यादि में बहुलक उपयुक्त मापक है। टिप्पण्िायाँ रू 1ण् इन तीनों केंद्रीय प्रवृिा के मापकों में एक संबंध् है, जो निम्नलिख्िात हैः 3 माध्यक त्र बहुलक $ 2 माध्य 2ण् असमान वगर्मापों वाले वगीर्वृफत आँकड़ों के माध्यक भी परिकलित किए जा सकते हैं। परंतु यहाँ हम इनकी चचार् नहीं करेंगे। प्रश्नावली 14ण्3 1ण् निम्नलिख्िात बारंबारता बंटन किसी मोहल्ले के 68 उपभोक्ताओं की बिजली की मासिक खपत दशार्ता है। इन आँकड़ों के माध्यक, माध्य और बहुलक ज्ञात कीजिए। इनकी तुलना कीजिए। 2ण् यदि नीचे दिए हुए बंटन का माध्यक 28.5 हो तो ग और ल के मान ज्ञात कीजिए: 3ण् एक जीवन बीमा एजेंट 100 पाॅलिसी धरकों की आयु के बंटन के निम्नलिख्िात आँकड़े ज्ञात करता है। माध्यक आयु परिकलित कीजिए, यदि पाॅलिसी केवल उन्हीं व्यक्ितयों को दी जाती है, जिनकी आयु 18 वषर् या उससे अध्िक हो, परंतु 60 वषर् से कम हो। मासिक खपत ;इकाइयों मेंद्ध उपभोक्ताओं की संख्या 65 . 85 85 . 105 105 . 125 125 . 145 145 . 165 165 . 185 185 . 205 4 5 13 20 14 8 4 वगर् अंतराल बारंबारता 0 . 10 5 10 . 20 ग 20 . 30 20 30 . 40 15 40 . 50 ल 50 . 60 5 योग 60 आयु ;वषो± मंेेद्ध पाॅलिसी धरकों की संख्या 20 से कम 25 से कम 30 से कम 35 से कम 40 से कम 45 से कम 50 से कम 55 से कम 60 से कम 2 6 24 45 78 89 92 98 100 4ण् एक पौध्े की 40 पिायों की लंबाइयाँ निकटतम मिलीमीटरों में मापी जाती है तथा प्राप्त आँकड़ों को निम्नलिख्िात सारणी के रूप में निरूपित किया जाता है: लंबाइर् ;उउ मेंद्ध पिायों की संख्या 118 . 126 127 . 135 136 . 144 145 . 153 154 . 162 163 . 171 172 . 180 3 5 9 12 5 4 2 पिायों की माध्यक लंबाइर् ज्ञात कीजिए। संकेतः माध्यक ज्ञात करने के लिए, आँकड़ों को सतत वगर् अंतरालों में बदलना पड़ेगा, क्योंकि सूत्रा में वगर् अंतरालों को सतत माना गया है। तब ये वगर्117ण्5 . 126ण्5ए 126ण्5 . 135ण्5ए ण् ण् ण्ए 171ण्5 . 180ण्5 में बदल जाते हैं। 5ण् निम्नलिख्िात सारणी 400 नियाॅन लैंपों के जीवन कालों ;सपमि जपउमद्ध को प्रद£शत करती है: जीवन काल ;घंटों मेंद्ध लैंपों की संख्या 1500 . 2000 2000 . 2500 2500 . 3000 3000 . 3500 3500 . 4000 4000 . 4500 4500 . 5000 14 56 60 86 74 62 48 एक लैंप का माध्यक जीवन काल ज्ञात कीजिए। 6ण् एक स्थानीय टेलीप़फोन निदेर्श्िाका से 100 वुफलनाम ;ेनतदंउमेद्ध लिए गए और उनमें प्रयुक्त अंग्रेज़ी वणर्माला के अक्षरों की संख्या का निम्नलिख्िात बारंबारता बंटन प्राप्त हुआ: अक्षरों की संख्या 1 . 4 4 . 7 7 . 10 10 . 13 13 . 16 16 . 29 वुफलनामों की संख्या 6 30 40 16 4 4 वुफलनामों में माध्यक अक्षरों की संख्या ज्ञात कीजिए। वुफलनामों में माध्य अक्षरों की संख्या ज्ञात कीजिए। साथ ही, वुफलनामों का बहुलक ज्ञात कीजिए। 7ण् नीचे दिया हुआ बंटन एक कक्षा के 30 विद्या£थयों के भार दशार् रहा है। विद्या£थयों का माध्यक भार ज्ञात कीजिए। भार ;किलोग्राम मेंद्ध 40 . 45 45 . 50 50 . 55 55 . 60 60 . 65 65 . 70 70 . 75 विद्या£थयों की संख्या 2 3 8 6 6 3 2 14ण्5 संचयी बारंबारता बंटन का आलेखीय निरूपण जैसाकि हम सभी जानते हैं कि चित्रा, अक्षरों से अध्िक अच्छी भाषा बोलते हैं। एक आलेखीय निरूपण हमें एक ही दृष्िट में उनसे संबंध्ित आँकड़ों को समझने में सहायक सि( होता है। कक्षा प्ग् में, हमने दिए हुए आँकड़ों को दंड आलेखों, आयतचित्रों और बारंबारता बहुभुजों की सहायता से निरूपित किया था। आइए अब एक संचयी बारंबारता बंटन को आलेखीय रूप से निरूपित करें। उदाहरण के लिए, आइए सारणी 14.13 में दिए संचयी बारंबारता बंटन पर विचार करें। याद कीजिए कि मान 10ए 20ए 30ए ण्ण्ण्ए 100 संगत वगर् अंतरालों की उपरि सीमाएँ हैं। सारणी में दिए आँकड़ों को आलेखीय रूप से निरूपित करने के लिए, हम क्षैतिज अक्ष ;ग.अक्षद्ध पर वगर् अंतरालों की उपरि सीमाएँ एक सुविधजनक पैमाना ;ेबंसमद्ध लेकर अंकित करते हैं तथा ऊध्वार्धर अक्ष ; ल.अक्षद्ध पर वही या कोइर् अन्य पैमाना लेकर संचयी बारंबारताएँ अंकित करते हैं। अथार्त् दोनों अक्षों पर एक ही पैमाना चुनना आवृफति 14ण्1 आवश्यक नहीं है। आइए अब एक ग्रापफ पेपर पर ;उपरि सीमा, संगत संचयी बारंबारताद्ध से प्राप्त क्रमित युग्मों ;वतकमतमक चंपतेद्ध के संगत ¯बदु ;10ए 5द्धए ;20ए 8द्धए ;30ए 12द्धए ;40ए 15द्धए ;50ए 18द्धए ;60ए 22द्धए ;70ए 29द्धए ;80ए 38द्धए ;90ए 45द्धए ;100ए 53द्ध आलेख्िात करें तथा इन ¯बदुओं वफा एक मुक्त मृदु हस्त वक्र ;तिमम ींदक ेउववजी बनतअमद्ध द्वारा मिलाएँ। यह प्राप्त हुइर् वक्र से कम प्रकार की एक संचयी बारंबारता वक्र ;बनउनसंजपअम तिमुनमदबल बनतअमद्ध या तोरण ;वहपअमद्ध कहलाती है ;देख्िाए आवृफति 14.1द्ध। अंग्रेज़ी के शब्द श्वहपअमश् को श्वहममअश् ;ओजीवद्ध बोला जाता है, जिसकी व्युत्पिा शब्द श्वहममश् से हुइर् है। यह एक उत्तल वक्र ;बवदअमग बनतअमद्ध के रूप में लहराती हुइर् एक अवतल वक्र ;बवदबंअम बनतअमद्ध के आकार की वक्र होती है। अथार्त् यह वक्र ै के आकार की होती है जिसके सिरे ऊध्वार्ध्र रहते हैं। 14वीं और 15वीं शताब्िदयों की गाॅथ्िाक ढंग ;ळवजीपब ेजलसमद्ध की वास्तुकला में, वहमम आकार का वक्र उस कला की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। अब, हम पुनः सारणी 14.14 में दिए हुए ;से अध्िक प्रकार केद्ध संचयी बारंबारता बंटन पर विचार करते हैं और उसका तोरण खींचते हैं। याद कीजिए कि यहाँ 0ए 10ए 20ए ण्ण्ण्90 क्रमशः संगत वगर् अंतरालों 0 . 10ए 10 . 20ए ण्ण्ण्ए 90 . 100 की निम्न सीमाएँ हैं। ‘से अिाक प्रकार’ के आलेखीय निरूपण के लिए, हम उपयुक्त पैमाना लेते हुए, एक ग्रापफ पेपर पर क्षैतिज अक्ष पर निम्न सीमाएँ तथा ऊध्वार्ध्र अक्ष पर संचयी बारंबारताएँ अंकित करते हैं। इसके बाद, हम ;निम्न सीमा, संगत संचयी बारंबारताद्ध के अनुसार ¯बदु ;0ए 53द्धए ;10ए 48द्धए ;20ए 45द्धए ;30ए 41द्धए ;40ए 38द्धए आवृफति 14ण्2 ;50ए 35द्धए ;60ए 31द्ध ;70ए 24द्धए ;80ए 15द्धए ;90ए 8द्धए आलेख्िात करते हैं। पिफर हम ¯बदुओं को एक मुक्त हस्त मृदु वक्र द्वारा मिलाते हैं। अब जो हमें वक्र प्राप्त होती है वह ‘से अध्िक प्रकार’ की एक संचयी बारंबारता वक्र या तोरण कहलाती है ;देख्िाए आवृफति 14.2द्ध। टिप्पणी रू ध्यान दीजिए कि दोनों तोरण ;आवृफति 14.1 और आवृफति 14.2 वालेद्ध समान आँकड़ों के संगत हैं, जो सारणी 14.12 में दिए हैं। अब प्रश्न उठता है कि क्या तोरण किसी रूप में माध्यक से संबंध्ित है? क्या सारणी 14.12 के आँकड़ों के संगत खींची गइर् इन दोनों संचयी बारंबारता वक्रों से हम आँकड़ों का माध्यक ज्ञात कर सकते हैं? आइए इसकी जाँच करें। एक स्पष्ट विध्ि यह है कि ऊध्वार्धर द 53 अक्ष पर, त्रत्र 26ण्5 की स्िथति ज्ञात 22 करें ;देख्िाए आवृफति 14.3द्ध। इस ¯बदु ;स्िथतिद्ध से होकर, क्षैतिज अक्ष के समांतर एक रेखा खींचिए जो उपरोक्त वक्र को आवृफति 14ण्3 एक ¯बदु पर प्रतिच्छेद करती है। इस ¯बदु से, क्षैतिज अक्ष पर लंब डालिए। क्षैतिज अक्ष और इस लंब के प्रतिच्छेद ¯बदु से ही माध्यक निधार्रित हो जाता है ;देख्िाए आवृफति 14.3द्ध। माध्यक ज्ञात करने की एक अन्य विध्ि निम्नलिख्िात हैः एक ही अक्षों पर दोनों प्रकार के ;अथार्त् से कम प्रकार के और से अध्िक प्रकार केद्ध तोरण खींचिए। दोनों तोरण एक ¯बदु पर प्रतिच्छेद करते हैं। इस ¯बदु से, आवृफति 14ण्4 हम क्षैतिज अक्ष पर लंब खींचते हैं। यह लंब क्षैतिज अक्ष को जहाँ काटता है, वही आँकड़ों का माध्यक है ;देख्िाए आवृफति 14.4द्ध। उदाहरण 9 रू किसी मोहल्ले के एक शाॅ¯पग कांप्लेक्स ;ेीवचचपदह बवउचसमगद्ध की 30 दुकानों द्वारा अ£जत किए गए वा£षक लाभों से निम्नलिख्िात बारंबारता बंटन प्राप्त होता हैः लाभ ;लाख रुपयों मेंद्ध दुकानों की संख्या 5 से अध्िक या उसके बराबर 10 से अध्िक या उसके बराबर 15 से अध्िक या उसके बराबर 20 से अध्िक या उसके बराबर 25 से अध्िक या उसके बराबर 30 से अध्िक या उसके बराबर 35 से अध्िक या उसके बराबर 30 28 16 14 10 7 3 उपरोक्त आँकड़ों के लिए एक ही अक्षों पर दोनों तोरण खींचिए। इसके बाद, माध्यक लाभ ज्ञात कीजिए। हल रू पहले हम ग्रापफ पेपर पर क्षैतिज और ऊध्वार्धर अक्ष खींचते हैं, जिनमें लाभ के अंतरालों की निम्न सीमाएँ क्षैतिज अक्ष के अनुदिश लेते हैं और संचयी बारंबारताओं का ऊध्वार्ध्र अक्ष के अनुदिश लेते हैं। पिफर हम ¯बदुओं ;5ए 30द्धए ;10ए 28द्धए ;15ए 16द्धए ;20ए 14द्धए ;25ए 10द्धए ;30ए 7द्ध और ;35ए 3द्ध को आलेख्िात करके एक मुक्त हस्त वक्र से मिला देते हैं। इससे हमें ‘से अध्िक के प्रकार का’ तोरण प्राप्त हो जाता है, जैसाकि आवृफति 14.5 में दशार्या गया है। आवृफति 14ण्5 अब आइए उपरोक्त सारणी से, वगर् अंतराल, संगत बारंबारताएँ और संचयी बारंबारताएँ प्राप्त करें। सारणी 14ण्17 वगर् अंतराल 5 . 10 10 . 15 15 . 20 20 . 25 25 . 30 30 . 35 35 . 40 दुकानों की संख्या 2 12 2 4 3 4 3 संचयी बारंबारता 2 14 16 20 23 27 30 इन मानों का प्रयोग करके हम ;10ए 2द्धए ;15ए 14द्धए ;20ए 16द्धए ;25ए 20द्धए ;30ए 23द्धए ;35ए 27द्धए ;40ए 30द्ध को आवृफति 14.5 वाले आलेख में आलेख्िात करते हैं। पिफर इनको एक मुक्त हस्त वक्र द्वारा मिलाकर ‘से कम के प्रकार का’ तोरण प्राप्त करते हैं, जैसाकि आवृफति 14.6 में दशार्या गया है। इनके प्रतिच्छेद ¯बदु से क्षैतिज अक्ष पर लंब डालने पर जो क्षैतिज अक्ष और लंब का प्रतिच्छेद ¯बदु है, उसी के संगत मान से माध्यक प्राप्त होता है। यह माध्यक 17.5 लाख रुपये है। आवृफति 14ण्6 टिप्पणी रू उपरोक्त उदाहरण में, वगर् अंतराल सतत ;बवदजपदनवनेद्ध थे। तोरण खींचने से पहले यह सुनिश्िचत कर लेना चाहिए कि वगर् अंतराल सतत हों। ;कक्षा प्ग् में दी आयत चित्रों की रचनाएँ भी देख्िाए।द्ध प्रश्नावली 14ण्4 1ण् निम्नलिख्िात बंटन किसी पैफक्ट्री के 50 श्रमिकों की दैनिक आय दशार्ता हैः ‘उपरोक्त बंटन को एक कम प्रकार’ के संचयी बारंबारता बंटन में बदलिए और उसका तोरण खींचिए। 2ण् किसी कक्षा के 35 विद्या£थयों की मेडिकल जाँच के समय, उनके भार निम्नलिख्िात रूप में रिकाॅडर् किए गएः उपरोक्त आँकड़ों के ‘लिए कम प्रकार का तोरण’ खींचिए। इसके बाद माध्यक भार ज्ञात कीजिए। 3ण् निम्नलिख्िात सारणी किसी गाँव के 100 पफामो± में हुआ प्रति हेक्टेयर ;ींद्ध गेहूँ का उत्पादन दशार्ते हैंः दैनिक आय ;रुपयों मेंद्ध 100 . 120 120 . 140 140 . 160 160 . 180 180 . 200 श्रमिकों की संख्या 12 14 8 6 10 भार ;कि.ग्रा. मेंद्ध विद्या£थयों की संख्या 38 से कम 40 से कम 42 से कम 44 से कम 46 से कम 48 से कम 50 से कम 52 से कम 0 3 5 9 14 28 32 35 उत्पादन ;ाहध्ींद्ध 50 . 55 55 . 60 60 . 65 65 . 70 70 . 75 75 . 80 पफामो± की संख्या 2 8 12 24 38 16 इस बंटन वफो ‘अध्िक के प्रकार के’ बंटन में बदलिए और पिफर उसका तोरण खींचिए। 14ण्6 सारांश इस अध्याय में, आपने निम्नलिख्िात ¯बदुओं का अध्ययन किया है: 1ण् वगीर्वृफत आँकड़ों का माध्य निम्नलिख्िात प्रकार ज्ञात किया जा सकता है: Σगि ;पद्ध प्रत्यक्ष विध्िः ग त्र पप Σपि Σकि ;पपद्ध कल्िपत माध्य विध्ि ग त्र ं ़ पप Σपि ⎛Σनि ⎞ ;पपपद्ध पग - विचलन विध्िः ग त्र ं ़⎜ पप ⎟× ी ि⎝Σ प ⎠ इनमें यह मान लिया जाता है कि प्रत्येक वगर् की बारंबारता उसके मध्य - ¯बदु, अथार्त् वगर् चिÉ पर वेंफदि्रत है। 2ण् वगीर्वृफत आँकड़ों का बहुलक निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा ज्ञात किया जाता है: ⎛ 1ि − 0ि ⎞बहुलकत्र स ़⎜ ⎟× ी 2 ि − ि− ि 10 2 ⎠ जहाँ संकेत अपना स्वाभाविक अथर् रखते हैं। 3ण् किसी बारंबारता बंटन में किसी वगर् की संचयी बारंबारता उस वगर् से पहले वाले सभी वगो± की बारंबारताओं का योग होता है। 4ण् वगीर्वृफत आँकड़ों का माध्यक निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा ज्ञात किया जाता है: ⎛ द ⎞− ब िमाध्यकत्र स ़ ⎜⎜ 2 ⎟⎟ × ी ि ⎝⎠ जहाँ संकेत अपना स्वाभाविक अथर् रखते हैं। 5ण् संचयी बारंबारता बंटनों को आलेखीय रूप से संचयी बारंबारता वक्रों या ‘से कम प्रकार के’ या ‘से अध्िक प्रकार के’ तोरण द्वारा निरूपण। 6ण् वगीर्वृफत आँकड़ों का माध्यक इनके दोनों प्रकार के तोरणों के प्रतिच्छेद ¯बदु से क्षैतिज अक्ष पर लंब डालकर लंब और क्षैतिज अक्ष के प्रतिच्छेद ¯बदु के संगत मान से प्राप्त हो जाता है।

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