रचनाएँ 11ण्1 भूमिका कक्षा प्ग् में, आपने एक पटरी तथा परकार का प्रयोग करके वुफछ रचनाएँ की थी, जैसे किसी कोण को समद्विभाजित करना, किसी रेखाखंड का लंब समद्विभाजक खींचना, वुफछ त्रिाभुजों की रचनाएँ करना इत्यादि तथा उनका औचित्य भी दिया था। इस अध्याय में, हम पिछली रचनाओं के ज्ञान का उपयोग करते हुए, वुफछ और रचनाओं का अध्ययन करेंगे। ये रचनाएँ क्यों हो जाती हैं, इनसे संबंध्ित वुफछ गण्िातीय व्याख्या भी आपको देनी होगी। 11ण्2 रेखाखंड का विभाजन मान लीजिए कि एक रेखाखंड दिया है और आपको उसे एक दिए गए अनुपात, माना 3 रू 2 में विभाजित करना है। आप इसकी लंबाइर् माप कर तथा दिए गए अनुपात के अनुसार एक¯बदु चिित कर सकते हैं। परंतु यदि आपके पास इसे सही - सही मापने की कोइर् विध्ि न हो, तो आप इस ¯बदु को वैफसे प्राप्त करेंगे? इस प्रकार के ¯बदु को प्राप्त करने के लिए, हम निम्नलिख्िात दो विध्ियाँ दे रहे हैंः रचना 11ण्1 रू एक रेखाखंड को दिए हुए अनुपात में विभाजित करना। एक रेखाखंड।ठ दिया है, हम इसको उ रू द के अनुपात में विभाजित करना चाहते हैं। प्रिया को समझने में सहायता करने के लिए, हम उ त्र 3 और द त्र 2 लेंगे। रचना के चरणः 1ण् ।ठ से न्यूनकोण बनाती कोइर् किरण ।ग् खींचिए। 2ण् ।ग् पर 5 ;त्र उ ़ दद्ध ¯बदु ।ए ।ए ।ए ।और ।इस प्रकार अंकित कीजिए कि1234 5 ।। त्र ।। त्र ।। त्र ।। त्र ।।हो।112233445 3ण् ठ।को मिलाइए।4ण् ¯बदु । ;उ त्र 3द्ध से होकर जाने वाली ।ठ के5 35समांतर एक रेखा ;।पर ∠ ।।ठ के बराबर35कोण बनाकरद्ध।ठ को एक ¯बदु ब् पर प्रतिच्छेद करती हुइर् खींचिए ;देख्िाए आवृफति 11.1द्ध। तब,।ब् रू ब्ठ त्र 3 रू 2 है। आवृफति 11ण्1 आइए देखें कि यह विध्ि वैफसे हमें अभीष्ट विभाजन देती है। क्योंकि ।ब्ए ।ठ के समांतर है,35।।3 ।ब्अतः त्र ;आधरभूत समानुपातिकता प्रमेय द्वाराद्ध।।35 ब्ठ ।।3 3 ।ब्3रचना से, त्र ह।ैअतःत्र है।।।2 ब्ठ 235 इससे यह निष्कषर् निकलता है कि बिंदु ब्ए ।ठ को3 रू 2 अनुपात में विभाजित करता है। वैकल्िपक विध्ि रचना के चरण रू 1ण् ।ठ से न्यूनकोण बनाती कोइर् किरण ।ग् खींचिए। 2ण् ∠ठ।ग् के बराबर ∠।ठल् बनाकर ।ग् के समांतर एक किरण ठल् खींचिए। 3ण् ।ग् पर ¯बदु ।ए ।ए । ;उ त्र 3द्ध और ठल् पर बिंदु ठए ठ ;द त्र 2द्ध इस प्रकार अंकित12312कीजिए कि।। त्र ।। त्र ।। त्र ठठ त्र ठठहो।11223112 4ण् ।ठको मिलाइए। माना यह।ठ को ¯बदु ब् पर प्रतिच्छेद करती है ;देख्िाए आवृफति 11.2द्ध।32 तब,।ब् रू ब्ठ त्र 3 रू 2 है। आइए देखंे कि इस विध्ि से हमें अभीष्ट रचना किस प्रकार प्राप्त होता है? यहाँ Δ ।।3ब् ् Δ ठठ2ब् ;क्यों?द्ध ।।3 ।ब् तब त्र ठठ2 ठब् ।।3 त्र 3 ।ब्3परंतु रचना द्वारा है। अत:, त्र ठठ2 2 ठब्2 वास्तव में इन विध्ियों द्वारा दिये गये रेखाखंड को किसी भी अनुपात में विभाजित किया जा सकता है। अब हम ऊपर दी गइर् रचना को एक दिए गए त्रिाभुज के समरूप एक अन्य त्रिाभुज की रचना करने में उपयोग करेंगे जिसकी भुजाओं और दिए गए त्रिाभुज की संगत भुजाओं में एक अनुपात दिया हुआ हो। रचना 11ण्2 रू एक दिए गए स्केल गुणक के अनुसार दिए गए त्रिाभुज के समरूप एक त्रिाभुज की रचना करना। इस रचना की दो स्िथतियाँ हैं। एक में, जिस त्रिाभुज की रचना करनी है, वह दिए गए त्रिाभुज से छोटा हो तथा दूसरी में वह बड़ा हो। यहाँ स्केल गुणक का अथर् रचना करने वाले त्रिाभुज की भुजाओं तथा दिए हुए त्रिाभुज की संगत भुजाओं के अनुपात से है। ;अध्याय 6 भी देख्िाएद्ध। इन रचनाओं को समझने के लिए आइए निम्न उदाहरण लें। यही विध्ि व्यापक स्िथति में भी लागू होगी। उदाहरण 1 रू एक दिए गए त्रिाभुज ।ठब् के समरूप एक त्रिाभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ दिए गए त्रिाभुज की संगत भुजाओं की 3 हों ;अथार्त् स्केल गुणक 3 हैद्ध।44 हल रू एक त्रिाभुज ।ठब् दिया है। हमें एक अन्य त्रिाभुज की रचना करनी है, जिसकी भुजाएँ त्रिाभुज ।ठब् की संगत भुजाओं की 43 हों। रचना के चरणः 1ण् ठब् से शीषर् । की दूसरी ओर न्यूनकोण बनाती हुइर् एक किरण ठग् खींचिए। 2ण् ठग् पर 4 बिंदु ; 43 में 3 और 4 में से बड़ी संख्याद्ध ठ1ए ठ2ए ठ3 और ठ4ए इस प्रकार अंकित कीजिए कि ठठ त्र ठठ त्र ठठ त्र ठठ1122333ण् ठ4ब् मिलाइए और ठ3 ;तीसरे ¯बदु, यहाँ 3 4 में 3 और 4 में से 3 छोटी हैद्ध से होकर जाने वाली ठ4ब् के समांतर एक रेखा ठब् को ब्′ पर प्रतिच्छेद करती हुइर् खींचिए। 4ण् ब्′ से होकर जाने वाली ब्। के समांतरएक रेखा ठ। को ।′ पर प्रतिच्छेद करतीहुइर् खींचिए ;देख्िाए आवृफति 11.3द्ध। तब, Δ ।′ठब्′ अभीष्ट त्रिाभुज है। आवृफति 11ण्3 आइए देखें कि इस रचना से वैफसे अभीष्ट त्रिाभुज प्राप्त हो जाता है। ठब्′ 3रचना 11.1 से, त्र ब्ब् 1′ ठब् ठब् ़ब्ब् ′′ ब्ब् ′ 14 ठब्′3इसलिए, त्रत्र 1 ़त्र 1 ़त्र ए अथार्त् त्र है।ठब्′ ठब्′ ठब्′ 33 ठब्4 साथ ही, ब्′।′ए ब्। के समांतर है। इसलिए Δ ।′ठब्′ ् Δ ।ठब् ;क्यों?द्ध ।ठ ।ब् ′ ठब् ′ 3′′ अतः, त्र त्रत्र ।ठ ।ब् ठब् 4 उदाहरण 2 रू एक दिए गए त्रिाभुज ।ठब् के समरूप एक त्रिाभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ त्रिाभुज ।ठब् की संगत भुजाओं की 5 हों ;अथार्त् स्केल गुणक 5 हैद्ध।3 3 हलरू एक त्रिाभुज।ठब् दिया गया है। हमें एक त्रिाभुज की रचना करनी है, जिसकी भुजाएँ 5Δ ।ठब् की संगत भुजाओं की 3 हों। रचना के चरणः 1ण् ठब् से शीषर्। के दूसरी ओर न्यूनकोण बनाती हुइर् एक किरण ठग् खींचिए। 5 2ण् 5 ;3 में 5 और 3 में से बड़ी संख्याद्ध ¯बदुठए ठए ठए ठऔर ठए ठग् पर इस प्रकार1 234 5अंकित कीजिए कि ठठ त्र ठठ त्र ठठ त्र ठठ त्र ठठहो।112233445 3ण् ठ3 ;तीसरा ¯बदु, 5 में 5 और 3 में से छोटी संख्याद्ध को ब् से मिलाइए और ठ5 से3 होकर जाने वाली ठब् के समांतर एक रेखा, बढ़ाए गए रेखाखंड ठब् को ब्′ पर3 प्रतिच्छेद करती हुइर् खींचिए। 4ण् ब्′ से होकर जाने वाली ब्। के समांतर एक रेखा, बढ़ाने पर रेखाखंडठ।को।′ पर प्रतिच्छेद करती हुइर् खींचिए ;देख्िाए आवृफति 11.4द्ध। तब,।′ठब्′ अभीष्ट त्रिाभुज है। रचना के औचित्य सि( करने के लिए, ध्यान दीजिए Δ ।ठब् ् Δ ।′ठब्′ ;क्यों?द्ध ।ठ ।ब् ठब् इसलिए त्रत्र है।′′ ठब् ।ठ ।ब्′′ आवृफति 11ण्4 ठब् ठठ3 3परंतु त्रत्र है।ठब्′ ठठ 5 5 ′ 5 ′ ।ब् ′ ठब् ′ 5।ठ ′ इसलिए ठब् त्र है और इसीलिए त्र त्रत्र है।ठब्3 ।ठ ।ब्ठब् 3 टिप्पणीरू उदाहरण 1 और 2 में आप।ठ अथवा।ब् से न्यूनकोण बनाती हुइर् किरण भी ले सकते थे और उसी प्रकार आगे बढ़ सकते थे। प्रश्नावली 11ण्1 निम्न में से प्रत्येक के लिए रचना का औचित्य भी दीजिएः 1ण् 7ण्6 बउ लंबा एक रेखाखंड खींचिए और इसे5 रू 8 अनुपात में विभाजित कीजिए। दोनों भागों को मापिए। 2ण् 4 बउए 5 बउ और 6 बउ भुजाओं वाले एक त्रिाभुज की रचना कीजिए और पिफर इसके समरूप एक2अन्य त्रिाभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ दिए हुए त्रिाभुज की संगत भुजाओं की 3 गुनी हों। 3ण् 5 बउए 6 बउ और 7 बउ भुजाओं वाले एक त्रिाभुज की रचना कीजिए और पिफर एक अन्य त्रिाभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ दिये हुऐ त्रिाभुज की संगत भुजाओं की 7 गुनी हों।5 4ण् आधर 8 बउ तथा ऊँचाइर् 4 बउ के एक समद्विबाहु त्रिाभुज की रचना कीजिए और पिफर एक अन्य त्रिाभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ इस समद्विबाहु त्रिाभुज की संगत भुजाओं की 11 गुनी2हों। 5ण् एक त्रिाभुज ।ठब् बनाइएजिसमें ठब् त्र 6 बउए ।ठ त्र5 बउ और ∠ ।ठब् त्र 60° हो। पिफर एक त्रिाभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ Δ ।ठब् की संगत भुजाओं की 3 गुनी हों।6ण् एक त्रिाभुज ।ठब् बनाइए, जिसमें ठब् त्र 7 बउए ∠ ठ त्र 45°ए ∠ । त्र 105° हो। पिफर एक अन्य त्रिाभुज 4 की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ Δ ।ठब् की संगत भुजाओं की 4 गुनी हों।3 7ण् एक समकोण त्रिाभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ ;कणर् के अतिरिक्तद्ध4 बउ तथा 3 बउ लंबाइर् की हों। पिफर एक अन्य त्रिाभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ दिए हुए त्रिाभुज की संगत भुजाओं की 5 गुनी हों।3 11ण्3 किसी वृत्त पर स्पशर् रेखाओं की रचना आप पिछले अध्याय में पढ़ चुके हैं कि यदि कोइर् ¯बदु वृत्त के अंदर स्िथत है, तो इस ¯बदुसे जाने वाली वृत्त की कोइर् स्पशर् रेखा नहीं हो सकती है। परंतु यदि ¯बदु वृत्त पर स्िथत है,तो उस ¯बदु पर वृत्त की एक और केवल एक स्पशर् रेखा होती है, जो उस ¯बदु से जाने वालीत्रिाज्या पर लंब होती है। अतः यदि आप वृत्त के किसी ¯बदु पर स्पशर् रेखा खींचना चाहते हैं, तो केवल उस ¯बदु से जाने वाली त्रिाज्या खींचिए और उसी ¯बदु पर इसकी लंब रेखा खींचिए। तब, यही अभीष्ट स्पशर् रेखा होगी। आपने यह भी देखा है कि यदि ¯बदु वृत्त के बाहर स्िथत है, तो इस ¯बदु से वृत्त पर दो स्पशर् रेखाएँ होती हैं। अब हम देखंेगे कि वैफसे इन स्पशर् रेखाओं को खींचा जाता है। रचना 11ण्3 रू एक वृत्त के बाहर स्िथत एक ¯बदु से उस पर स्पशर् रेखाओं की रचना करना। हमें एक वृत्त जिसका वेंफद्रव् है तथा इसके बाहर एक ¯बदु च् दिए हुए हैं। हमेंच् से वृत्त पर दोनों स्पशर् रेखाएँ खींचनी हंै। रचना के चरण: 1ण् च्व् को मिलाइए और इसे समद्विभाजित करिए। माना च्व् का मध्य ¯बदु ड है। 2ण् ड को वेंफद्र मान कर तथा डव् त्रिाज्या लेकरएक वृत्त खींचिए। माना यह दिए गए वृत्त को फ और त् पर प्रतिच्छेद करता है। 3ण् च् को फ तथा त् से मिलाइये। तब, च्फ और च्त् अभीष्ट दो स्पशर् रेखाएँ है। ;देख्िाए आवृफति 11.5द्ध। आइए अब देखें कि इस रचना से हमें स्पशर् रेखाएँ किस प्रकार मिलती हैं। व्फ को मिलाइए। तब, ∠ च्फव् अधर्वृत्त में बना एक कोण है और इसीलिए ∠ च्फव् त्र 90ह् है। क्या हम कह सकते हैं कि च्फ ⊥ व्फ है? क्योंकि, व्फ दिए वृत्त की त्रिाज्या है, इसलिए च्फ वृत्त की स्पशर् रेखा ही होगी। इसी प्रकार, च्त् भी वृत्त की स्पशर् रेखा है। टिप्पणी रू यदि वृत्त का वेंफद्र नहीं दिया है, तो आप कोइर् दो असमांतर जीवाएँ लेकर तथा उनके लंब समद्विभाजकों के प्रतिच्छेद ¯बदु के रूप में वेंफद्र ज्ञात कर सकते हैं। इसके बाद, आप उपयुर्क्त रूप से आगे बढ़ सकते हैं। प्रश्नावली 11ण्2 निम्न में से प्रत्येक के लिए रचना का औचित्य भी दीजिएः 1ण् 6 बउ त्रिाज्या का एक वृत्त खींचिए। वेंफद्र से 10 बउ दूर स्िथत एक ¯बदु से वृत्त पर स्पशर् रेखा युग्मकी रचना कीजिए और उनकी लंबाइयाँ मापिए। 2ण् 4 बउ त्रिाज्या के एक वृत्त पर 6 बउ त्रिाज्या के एक सवेंफद्रीय वृत्त के किसी ¯बदु से एक स्पशर्रेखा की रचना कीजिए और उसकी लंबाइर् मापिए। परिकलन से इस माप की जाँच भी कीजिए। 3ण् 3 बउ त्रिाज्या का एक वृत्त खींचिए। इसके किसी बढ़ाए गए व्यास पर वेंफद्र से 7 बउ की दूरीपर स्िथत दो ¯बदु च् और फ लीजिए। इन दोनों ¯बदुओं से वृत्त पर स्पशर् रेखाएँ खींचिए। 4ण् 5 बउ त्रिाज्या के एक वृत्त पर ऐसी दो स्पशर् रेखाएँ खींचिए, जो परस्पर 60° के कोण पर झुकी हों। 5ण् 8 बउ लंबा एक रेखाखंड ।ठ खींचिए। । को वेंफद्र मान कर4 बउ त्रिाज्या का एक वृत्त तथा ठ को वेंफद्र लेकर 3 बउ त्रिाज्या का एक अन्य वृत्त खींचिए। प्रत्येक वृत्त पर दूसरे वृत्त के वेंफद्र सेस्पशर् रेखाओं की रचना कीजिए। 6ण् माना।ठब् एक समकोण त्रिाभुज है, जिसमें ।ठ त्र 6 बउए ठब् त्र 8 बउतथा ∠ठ त्र 90° है। ठ से।ब् पर ठक् लंब है। बिंदुओं ठए ब्ए क् से होकर जाने वाला एक वृत्त खींचा गया है। । से इस वृत्त पर स्पशर् रेखा की रचना कीजिए। 7ण् किसी चूड़ी की सहायता से एक वृत्त खींचिए। वृत्त के बाहर एक ¯बदु लीजिए। इस ¯बदु सेवृत्त पर स्पशर् रेखाओं की रचना कीजिए। 11ण्4 सारांश इस अध्याय में, आपने देखा है कि निम्न रचनाएँ किस प्रकार की जाती हैं: 1ण् एक रेखाखंड को एक दिए गए अनुपात में विभाजित करना। 2ण् एक दिए गए त्रिाभुज के समरूप त्रिाभुज की रचना करना जबकि स्केल गुणक दिया गया हो ;स्केल गुणक एक से कम या एक से अध्िक हो सकता हैद्ध। 3ण् किसी बाह्य ¯बदु से किसी वृत्त पर एक स्पशर् रेखा युग्म की रचना करना। पाठकों के लिए विशेष रचना 11.2 के उदाहरणों 1 तथा 2 के चरणों का अनुसरण करते हुए, एक दिये हुए चतुभुर्ज ;या बहुभुजद्ध के समरूप अन्य चतुभुर्ज ;या बहुभुजद्ध की, दिये हुए स्केल गुणक के अनुसार, रचना की जा सकती है।

RELOAD if chapter isn't visible.