त्रिाभुज 6 6ण्1 भूमिका आप अपनी पिछली कक्षाओं से, त्रिाभुजों और उनके अनेक गुणध्मो± से भली भाँति परिचित हैं। कक्षा प्ग् में, आप त्रिाभुजों की सवा±गसमता के बारे में विस्तृत रूप से अध्ययन कर चुके हैं। याद कीजिए कि दो त्रिाभुज सवा±गसम तब कहे जाते हैं जब उनके समान आकार ;ेींचमद्ध तथा समान आमाप ;ेप्रमद्ध हों। इस अध्याय में, हम ऐसी आवृफतियों के बारे में अध्ययन करेंगे जिनके आकार समान हों परंतु उनके आमाप का समान होना आवश्यक नहीं हो। दो आवृफतियाँ जिनके समान आकार हों ;परंतु समान आमाप होना आवश्यक न होद्ध समरूप आवृफतियाँ ;ेपउपसंत पिहनतमेद्ध कहलाती हैं। विशेष रूप से, हम समरूप त्रिाभुजों की चचार् करेंगे तथा इसजानकारी को पहले पढ़ी गइर् पाइथागोरस प्रमेय की एक सरल उपपिा देने में प्रयोग करेंगे। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि पवर्तों ;जैसे माऊंट एवरेस्टद्ध की ऊँचाइर्याँ अथवा वुफछ दूरस्थ वस्तुओं ;जैसे चन्द्रमाद्ध की दूरियाँ किस प्रकार ज्ञात की गइर् हैं? क्या आप सोचते हैं कि इन्हें एक मापने वाले पफीते से सीध ;प्रत्यक्षद्ध मापा गया है? वास्तव में, इन सभीऊँचाइर् और दूरियों को अप्रत्यक्ष मापन ;पदकपतमबज उमंेनतमउमदजद्ध की अवधरणा का प्रयोग करते हुए ज्ञात किया गया है, जो आवृफतियों की समरूपता के सि(ांत पर आधरित है ;देख्िाए उदाहरण 7, प्रश्नावली 6.3 का प्रश्न 15 तथा साथ ही इस पुस्तक के अध्याय 8 और 9द्ध। 6ण्2 समरूप आवृफतियाँ कक्षा प्ग् में, आपने देखा था कि समान;एक हीद्ध त्रिाज्या वाले सभी वृत्त सवा±गसम होते हैं, समान लंबाइर् की भुजा वाले सभी वगर् सवा±गसम होते हैं तथा समान लंबाइर् की भुजा वाले सभी समबाहु त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं। अब किन्हीं दो ;या अध्िकद्धवृत्तों पर विचार कीजिए ख्देख्िाए आवृफति 6ण्1 ;पद्ध,। क्या ये सवा±गसम हैं? चूँकि इनमें से सभी की त्रिाज्या समान नहीं है, इसलिए ये परस्पर सवा±गसम नहीं हैं। ध्यान दीजिए कि इनमें वुफछ सवा±गसम हैं और वुफछ सवा±गसम नहीं हैं, परंतु इनमें से सभी के आकार समान हैं। अतः, ये सभी वे आवृफतियाँ हैं जिन्हें हम समरूप ;ेपउपसंतद्ध कहते हैं। दो समरूप आवृफतियों के आकार समान होते हैं परंतु इनके आमाप समान होने आवश्यक नहींहै। अतः, सभी वृत्त समरूप होते हैं। दो आवृफति 6ण्1 ;या अध्िकद्ध वगो± के बारे में अथवा दो ;या अध्िकद्ध समबाहु त्रिाभुजों के बारे में आप क्या सोचते हैं ख्देख्िाए आवृफति 6ण्1 ;पपद्ध और ;पपपद्ध,घ् सभी वृत्तांे की तरह ही, यहाँ सभी वगर् समरूप हैं तथा सभी समबाहु त्रिाभुज समरूप हैं। उपरोक्त चचार् से, हम यह भी कह सकते हैं कि सभी सवा±गसम आवृफतियाँ समरूप होती हैं, परंतु सभी समरूप आवृफतियों का सवा±गसम होना आवश्यक नहीं है। क्या एक वृत्त और एक वगर् समरूप हो सकते हैं? क्या एक त्रिाभुज और एक वगर्समरूप हो सकते हैं? इन आवृफतियों को देखने मात्रा से ही आप प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं ;देख्िाए आवृफति 6.1द्ध। स्पष्ट शब्दों में, ये आवृफतियाँ समरूप नहीं हैं। ;क्यों?द्ध आप दो चतुभुर्जों।ठब्क् और च्फत्ै के बारे में क्या कह सकते हैं ;देख्िाए आवृफति 6.2द्ध? क्या ये समरूप हैं? ये आवृफतियाँ समरूप - सी प्रतीत हो रही हैं, परंतु हम इसके बारे में निश्िचत रूप से वुफछ नहीं कह सकते। इसलिए, यह आवृफति 6ण्2 आवश्यक हो जाता है कि हम आवृफतियों की समरूपता के लिए कोइर् परिभाषा ज्ञात करें तथा इस परिभाषा पर आधरित यह सुनिश्िचत करने के लिए कि दो दी हुइर् आवृफतियाँ समरूप हैं या नहीं, वुफछ नियम प्राप्त करें। इसके लिए, आइए आवृफति 6.3 में चित्रों को देखेंः आवृफति 6ण्3 आप तुरंत यह कहेंगे कि ये एक ही स्मारक ;ताजमहलद्ध के चित्रा हैं, परंतु ये भ्िान्न - भ्िान्न आमापों ;ेप्रमेद्ध के हैं। क्या आप यह कहेंगे कि ये चित्रा समरूप हैं? हाँ, ये हैं। आप एक ही व्यक्ित के एक ही आमाप वाले उन दो चित्रों के बारे में क्या कह सकते हैं, जिनमें से एक उसकी 10 वषर् की आयु का है तथा दूसरा उसकी 40 वषर् की आयु का है? क्या ये दोनों चित्रा समरूप हैं? ये चित्रा समान आमाप के हैं, परंतु निश्िचत रूप से ये समान आकार के नहीं हैं। अतः, ये समरूप नहीं हैं। जब कोइर् प़फोटोग्रापफरएक ही नेगेटिवसे विभ्िान्न मापों के प़फोटो ¯प्रटनिकालती है, तो वह क्या करती है? आपने स्टैंप साइज़़़़्फोटो ;या चित्रोंद्ध ा, पासपोटर् साइज एवं पोस्ट काडर् साइज पके बारे में अवश्य सुना होगा। वह सामान्य रूप से एक छोटे आमाप ;साइजद्ध की पि़फल्म ;पिसउद्धए मान लीजिए जो 35 उउ आमाप वाली पि़फल्म है, पर प़फोटो खींचती है और पिफर उसे एक बड़े आमाप, जैसे 45 उउ ;या 55 उउद्ध आमाप, वाली प़फोटो के रूप में आव£ध्त करती है। इस प्रकार, यदि हम छोटे चित्रा के किसी एक रेखाखंड को लें, तो बड़े चित्रा में 45  55इसका संगत रेखाखंड, लंबाइर् में पहले रेखाखंड का  या  गुना होगा। वास्तव में35  35 इसका अथर् यह है कि छोटे चित्रा का प्रत्येक रेखाखंड 35ः45 ;या 35ः55द्ध के अनुपात में आव£ध्त हो ;बढ़द्ध गया है। इसी को इस प्रकार भी कहा जा सकता है कि बड़े चित्रा का प्रत्येक रेखाखंड 45ः35 ;या 55ः35द्ध के अनुपात में घट ;कम होद्ध गया है। साथ ही, यदि आप विभ्िान्न आमापों के दो चित्रों में संगत रेखाखंडों के किसी भी युग्म के बीच बने झुकावों ¹अथवा कोणोंह् को लें, तो आप देखेंगे कि ये झुकाव ;या कोणद्ध सदैव बराबर होंगे। यही दो आवृफतियों तथा विशेषकर दो बहुभुजों की समरूपता का सार है। हम कहते हैं किः भुजाओं की समान संख्या वाले दो बहुभुज समरूप होते हैं, यदि ;पद्ध उनके संगत कोण बराबर हों तथा ;पपद्ध इनकी संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में ;अथार्त् समानुपातीद्ध हों। ध्यान दीजिए कि बहुभुजों के लिए संगत भुजाओं के इस एक ही अनुपात को स्केल गुणक ;ेबंसम ंिबजवतद्ध ¹अथवा प्रतिनिध्ित्व भ्िान्न ;त्मचतमेमदजंजपअम थ्तंबजपवदद्धह् कहा जाता है। आपने यह अवश्य सुना होगा कि विश्व मानचित्रा ¹अथार्त् ग्लोबल मानचित्राह् तथा भवनों के निमार्ण के लिए बनाए जाने वाली रूप रेखा एक उपयुक्त स्केल गुणक तथा वुफछ परिपाटियों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। आवृफतियों की समरूपता को अध्िक स्पष्ट रूप से समझने के लिए, आइए निम्नलिख्िात ियाकलाप करेंः ियाकलाप 1 रू अपनी कक्षा के कमरे की छत के किसी ¯बदु व् पर प्रकाश युक्त बल्ब लगाइए तथा उसके ठीक नीचे एक मेज रख्िाए। आइए एक समतल काडर्बोडर् में से एक बहुभुज, मान लीजिए चतुभुर्ज।ठब्क्ए काट लें तथा इस काडर्बोडर् को भूमि के समांतर मेज और जलते हुए बल्ब के बीच में रखें। तब, मेज पर ।ठब्क् की एक छाया ;ेींकवूद्ध पड़ेगी। इस छाया की बाहरी रूपरेखा को।′ठ′ब्′क्′ से चिित कीजिए ;देख्िाए आवृफति 6.4द्ध। ध्यान दीजिए कि चतुभुर्ज ।′ठ′ब्′क्′ चतुभुर्ज ।ठब्क् का एक आकार परिवध्र्न ;या आवधर्नद्ध है। यह प्रकाश के इस गुणध्मर् के कारण है कि प्रकाश सीध्ी रेखा में चलती है। आप यह भी देख सकते हैं कि।′ किरण व्। पर स्िथत है, ठ′ किरण व्ठ पर स्िथत है, ब्′ किरण व्ब् पर स्िथत है तथा क्′ किरण व्क् पर स्िथत है। इस प्रकार, चतुभुर्ज।′ठ′ब्′क्′ और।ठब्क् समान आकार के हैंऋ परंतु इनके माप भ्िान्न - भ्िान्न हैं। अतः चतुभुर्ज ।′ठ′ब्′क्′ चतुभुर्ज।ठब्क् के समरूप हैं। हम यह भी कह सकते हैं कि चतुभुर्ज ।ठब्क् चतुभुर्ज ।′ठ′ब्′क्′ के समरूप हैं। यहाँ, आप यह भी देख सकते हैं कि शीषर्।′ शीषर्। के संगत है, शीषर् ठ′ शीषर् ठ के संगत है, शीषर् ब्′ शीषर् ब् के संगत है तथा शीषर् क्′ शीषर् क् के संगत है। सांकेतिक रूप से इन संगतताओं ;बवततमेचवदकमदबमेद्ध को ।′ ↔ ।ए ठ′ ↔ ठए ब्′ ↔ ब् और क्′ ↔ क् से निरूपित किया जाता है। दोनों चतुभुर्जों के कोणों और भुजाओं को वास्तविक रूप से माप कर, आप इसका सत्यापन कर सकते हैं कि ;पद्ध ∠ । त्र ∠ ।′ए ∠ ठ त्र ∠ ठ′ए ∠ ब् त्र ∠ ब्′ए ∠ क् त्र ∠ क्′ और ।ठ ठब् ब्क् क्। ण्;पपद्ध त्रत्रत्र ′′ ब्क् ′′।ठ′′ ठब् ′ क्। ′ इससे पुनः यह बात स्पष्ट होती है कि भुजाओं की समान संख्या वाले दो बहुभुज समरूप होते हैं, यदि ;पद्ध उनके सभी संगत कोण बराबर हों तथा ;पपद्ध उनकी सभी संगत भुजाएँ एक ही अनुपात ;समानुपातद्ध में हों। उपरेाक्त के आधर पर, आप सरलता से यह कह सकते हैं कि आवृफति 6.5 में दिए आवृफति 6ण्5 टिप्पणी रू आप इसका सत्यापन कर सकते हैं कि यदि एक बहुभुज किसी अन्य बहुभुज के समरूप हो और यह दूसरा बहुभुज एक तीसरे बहुभुज के समरूप हो, तो पहला बहुभुज तीसरे बहुभुज के समरूप होगा। आप यह देख सकते हैं कि आवृफति 6.6 के दो चतुभुर्जों ;एक वगर् और एक आयतद्ध में, संगत कोण बराबर हैं, परंतु इनकी संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में नहीं हैं। अतः, ये दोनों चतुभुर्ज समरूप नहीं हैं। आवृफति 6ण्6 इसी प्रकार आप देख सकते हैं कि आवृफति 6.7 के दो चतुभुर्जों ;एक वगर् और एक समचतुभुर्जद्ध में, संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हैं, परंतु इनके संगत कोण बराबर नहीं हैं। पुनः, दोनों बहुभुज ;चतुभुर्जद्ध समरूप नहीं हैं। आवृफति 6ण्7 इस प्रकार, आप देख सकते हैं कि दो बहुभुजों की समरूपता के प्रतिबंधें ;पद्ध और ;पपद्ध में से किसी एक का ही संतुष्ट होना उनकी समरूपता के लिए पयार्प्त नहीं है। प्रश्नावली 6ण्1 1ण् कोष्ठकों में दिए शब्दों में से सही शब्दों का प्रयोग करते हुए, रिक्त स्थानों को भरिएः ;पद्ध सभी वृत्त होते हैं। ;सवा±गसम, समरूपद्ध ;पपद्ध सभी वगर् होते हैं। ;समरूप, सवा±गसमद्ध ;पपपद्ध सभी त्रिाभुज समरूप होते हैं। ;समद्विबाहु, समबाहुद्ध ;पअद्ध भुजाओं की समान संख्या वाले दो बहुभुज समरूप होते हैं, यदि ;पद्ध उनके संगत कोण हों तथा;पपद्ध उनकी संगत भुजाएँ हों। ;बराबर, समानुपातीद्ध 2ण् निम्नलिख्िात युग्मों के दो भ्िान्न - भ्िान्न उदाहरण दीजिएः ;पद्ध समरूप आवृफतियाँ ;पपद्ध ऐसी आवृफतियाँ जो समरूप नहीं हैं। 3ण् बताइए कि निम्नलिख्िात चतुभुर्ज समरूप हैं या नहींः आवृफति 6ण्8 6ण्3 त्रिाभुजों की समरूपता आप दो त्रिाभुजों की समरूपता के बारे में क्या कह सकते हैं? आपको याद होगा कि त्रिाभुज भी एक बहुभुज ही है। इसलिए,हम त्रिाभुजों की समरूपता के लिए भी वही प्रतिबंध् लिख सकते हैं, जो बहुभुजों की समरूपता के लिए लिखे थे। अथार्त् दो त्रिाभुज समरूप होते हैं, यदि ;पद्ध उनके संगत कोण बराबर हों तथा ;पपद्ध उनकी संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में ;अथार्त् समानुपातीद्ध हों। ध्यान दीजिए कि यदि दो त्रिाभुजों के संगत कोण बराबर हों, तो वे समानकोण्िाक त्रिाभुज ;मुनपंदहनसंत जतपंदहसमेद्ध कहलाते हैं। एक प्रसि( यूनानी गण्िातज्ञ थेल्स ;ज्ींसमेद्ध ने दो समानकोण्िाक त्रिाभुजों से संबंध्ित एक महत्वपूणर् तथ्य प्रतिपादित किया, जो नीचे दिया जा रहा हैः दो समानकोण्िाक त्रिाभुजों में उनकी संगत भुजाओं का अनुपात सदैव समान रहता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि इसके लिए उन्होंने एक परिणाम का प्रयोग किया जिसे आधरभूत समानुपातिकता प्रमेय ;आजकल थेल्स प्रमेयद्ध कहा जाता है। आधरभूत समानुपातिकता प्रमेय ;ठंेपब च्तवचवतजपवदंसपजल ज्ीमवतमउद्ध को समझने के लिए, आइए निम्नलिख्िात ियाकलाप करेंः ियाकलाप 2 रू कोइर् कोण ग्।ल् खींचिए तथा उसकी एक भुजा।ग् पर वुफछ ¯बदु ;मान लीजिए पाँच ¯बदुद्ध च्ए फए क्ए त् और ठ इस प्रकार अंकित कीजिए कि आवृफति 6ण्9 ।च् त्र च्फ त्र फक् त्र क्त् त्र त्ठ हो। अब, ¯बदु ठ से होती हुइर् कोइर् एक रेखा खींचिए, जो भुजा ।ल् को ¯बदु ब् पर काटे ;देख्िाए आवृफति 6.9द्ध। साथ ही, ¯बदु क् से होकर ठब् के समांतर एक रेखा खींचिए, जो।ब् को म् पर काटे।।क्3 ।म्क्या आप अपनी रचनाओं से यह देखते हैं कि त्र हैं?।म् और म्ब् मापिए। क्याक्ठ2 म्ब् ।म् 3है? देख्िाए भी के बराबर है। इस प्रकार, आप देख सकते हैं कि त्रिाभुज ।ठब् में,म्ब् 2।क् ।म् क्म् द्यद्य ठब् है तथा त्र है। क्या यह संयोगवश है? नहीं, यह निम्नलिख्िात प्रमेय केक्ठ म्ब् कारण है ;जिसे आधरभूत समानुपातिकता प्रमेय कहा जाता हैद्धः प्रमेय 6ण्1 रू यदि किसी त्रिाभुज की एक भुजा के समांतर अन्य दो भुजाओं को भ्िान्न - भ्िान्न ¯बदुओं पर प्रतिच्छेद करने के लिए एक रेखा खींची जाए, तो ये अन्य दो भुजाएँ एक ही अनुपात में विभाजित हो जाती हैं। उपपिा रू हमें एक त्रिाभुज ।ठब् दिया है, जिसमें भुजा ठब् के समांतर खींची गइर् एक रेखा अन्य दो भुजाओं ।ठ और ।ब् को क्रमशः क् और म् पर काटती हैं ;देख्िाए आवृफति 6.10द्ध। ।क् ।म्हमें सि( करना है कि त्र आवृफति 6ण्10क्ठ म्ब् आइए ठ और म् तथा ब् और क् को मिलाएँ और पिफर क्ड ⊥ ।ब् एवं म्छ ⊥ ।ठ खीचें। 11अब, ∆ ।क्म् का क्षेत्रापफल ;त्र आधर × ऊँचाइर्द्ध त्र ।क् × म्छ22 कक्षा प्ग् से याद कीजिए कि ∆ ।क्म् के क्षेत्रापफल को ंत ;।क्म्द्ध से व्यक्त किया जाता है। अतः ंत;।क्म्द्ध त्र 1 ।क् × म्छ2 1इसी प्रकार ंत ;ठक्म्द्ध त्र क्ठ × म्छए2ंत ;।क्म्द्ध त्र 1 ।म् × क्ड तथा ंत;क्म्ब्द्ध त्र 1 म्ब् × क्ड221 ।क्× म्छ ंत;।क्म्द्ध ।क्अतः त्र2 त्र ;1द्धंत;ठक्म्द्ध1 क्ठक्ठ× म्छ 2 1 ।म् × क्ड ंत;।क्म्द्ध ।म्तथा त्र2 त्र ;2द्धंत;क्म्ब्द्ध1 म्ब्म्ब् × क्ड 2 ध्यान दीजिए कि ∆ ठक्म् और ∆ क्म्ब् एक ही आधर क्म् तथा समांतर रेखाओं ठब् और क्म् के बीच बने दो त्रिाभुज हैं। अतः ंत;ठक्म्द्ध त्र ंत;क्म्ब्द्ध ;3द्ध इसलिए ;1द्धए ;2द्ध और ;3द्धए से हमें प्राप्त होता हैः ।क् ।म् त्र ण्क्ठम्ब् क्या इस प्रमेय का विलोम भी सत्य है ;विलोम के अथर् के लिए परिश्िाष्ट 1 देख्िाएद्ध? इसकी जाँच करने के लिए, आइए निम्नलिख्िात ियाकलाप करेंः ियाकलाप 3 रू अपनी अभ्यासपुस्ितका में एक कोण ग्।ल् खींचिए तथा किरण ।ग् पर ¯बदु ठए ठए ठए123ठऔर ठ इस प्रकार अंकित कीजिए कि4 ।ठ त्र ठठ त्र ठठ त्र ठठ त्र ठठ हो।11223344इसी प्रकार, किरण ।ल्ए पर ¯बदु ब्ए ब्ए ब्ए ब्1234 और ब् इस प्रकार अंकित कीजिए कि ।ब् त्र ब्ब् त्र ब्ब् त्र ब्ब् त्र ब्ब् हो। पिफर ठब्1122334411 और ठब् को मिलाइए ;देख्िाए आवृफति 6.11द्ध। ।ठ ।ब्1 11ध्यान दीजिए कि त्र ;प्रत्येक के बराबर हैद्धठठब्ब्11 4 आप यह भी देख सकते हैं कि रेखाएँ ठब्और ठब् परस्पर समांतर हैं, अथार्त्11 ठ1ब्1 द्यद्य ठब् ;1द्ध इसी प्रकार, क्रमशः ठब्ए ठब्और ठब्को मिलाकर आप देख सकते हैं कि2233 44 ।ठ ।ब्  2 2 त्र 2  त्र  और ठब् द्यद्य ठब् ;2द्ध ठठब्ब्  3  2222 ।ठ ।ब्  3 3 त्र 3  त्र  और ठ3ब्3 द्यद्य ठब्ए ;3द्ध ठठब्ब्  2 33 ।ठ ।ब्  4 4 त्र 4  त्र  और ठब् द्यद्य ठब् ;4द्ध ठठब्ब्  1  4444 ;1द्धए ;2द्धए ;3द्ध और ;4द्ध से, यह देखा जा सकता है कि यदि कोइर् रेखा किसी त्रिाभुज की दो भुजाओं को एक ही अनुपात में विभाजित करे, तो वह रेखा तीसरी भुजा के समांतर होती हैं। समान भाग अंकित कर, इस ियाकलाप को दोहरा सकते हैं। प्रत्येक बार, आप एक ही परिणाम पर पहुँचेंगे। इस प्रकार, हम निम्नलिख्िात प्रमेय प्राप्त करते हैं, जो प्रमेय 6.1 का विलोम हैः प्रमेय 6ण्2 रू यदि एक रेखा किसी त्रिाभुज की दो भुजाओं को एक ही अनुपात में विभाजित करे, तो वह तीसरी भुजा के समांतर होती है। ।क् ।म्इस प्रमेय को सि( किया जा सकता है, यदि हम एक रेखा क्म् इस प्रकार लें कि त्र क्ठ म्ब् हो तथा क्म् भुजा ठब् के समांतर न हो ;देख्िाए आवृफति 6.12द्ध। अब यदि क्म् भुजा ठब् के समांतर नहीं है, तो ठब् के समांतर एक रेखा क्म्′ खींचिए। ।क् ।म्′ अतः त्र ;क्यों?द्ध′क्ठम्ब् ।म् ।म्′ इसलिए त्र ;क्यों?द्ध′म्ब्म्ब् उपरोक्त के दोनों पक्षों में 1 जोड़ कर, आप यह देख सकते हैं कि म् और म्′ को अवश्य ही संपाती होना चाहिए ;क्यों?द्ध। उपरोक्त प्रमेयों का प्रयोग स्पष्ट करने के लिए आइए वुफछ उदाहरण लें। उदाहरण 1 रू यदि कोइर् रेखा एक ∆ ।ठब् की भुजाओं ।ठ और ।ब् को क्रमशः क् और म् पर ।क् ।म्प्रतिच्छेद करे तथा भुजा ठब् के समांतर हो, तो सि( कीजिए कि त्र होगा ;देख्िाए।ठ।ब् आवृफति 6.13द्ध। हल रू क्म् द्यद्य ठब् ;दिया हैद्ध ।क् ।म्अतः त्र ;प्रमेय 6.1द्धक्ठम्ब् क्ठ म्ब्अथार्त् त्र ।क्।म् क्ठ म्ब्या ़1 त्र ़ 1 ।क् ।म् ।ठ ।ब्या त्र ।क्।म् आवृफति 6ण्13 ।क् ।म्अतः त्र ।ठ।ब् उदाहरण 2 रू ।ठब्क् एक समलंब है जिसमें।ठ द्यद्य क्ब् है। असमांतर भुजाओं ।क् और ठब् पर क्रमशः ¯बदु म् और थ् इस प्रकार स्िथत हैं कि म्थ् भुजा।ठ के समांतर ।म् ठथ् है ;देख्िाए आवृफति 6.14द्ध। दशार्इए कि त्र है।म्क् थ्ब् आवृफति 6ण्14 हल रू आइए । और ब् को मिलाएँ जो म्थ् को ळ पर प्रतिच्छेद करे ;देख्िाए आवृफति 6.15द्ध। ।ठ द्यद्य क्ब् और म्थ् द्यद्य ।ठ ;दिया हैद्ध इसलिए म्थ् द्यद्य क्ब् ;एक ही रेखा के समांतर रेखाएँ परस्पर समांतर होती हैंद्ध आवृफति 6ण्15 अब ∆ ।क्ब् में, म्ळ द्यद्य क्ब् ;क्योंकि म्थ् द्यद्य क्ब्द्ध ।म् ।ळअतः त्र ;प्रमेय 6.1द्ध ;1द्धम्क्ळब् इसी प्रकार, ∆ ब्।ठ में ब्ळ ब्थ् त्र ।ळठथ् ।ळ ठथ्अथार्त् त्र ;2द्धळब्थ्ब् अतः ;1द्ध और ;2द्ध से ।म् ठथ् त्र म्क्थ्ब् च्ै च्ज्उदाहरण 3 रू आवृफति 6.16 में ैफ त्र ज्त् है तथा ∠ च्ैज् त्र ∠ च्त्फ है। सि( कीजिए कि ∆च्फत् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है। च्ै च्ज् त्रहल रू यह दिया है कि, ैफ ज्त् आवृफति 6ण्16 अतः ैज् द्यद्य फत् ;प्रमेय 6.2द्ध इसलिए ∠ च्ैज् त्र ∠ च्फत् ;संगत कोणद्ध ;1द्ध साथ ही यह दिया है कि ∠ च्ैज् त्र ∠ च्त्फ ;2द्ध अतः ∠ च्त्फ त्र ∠ च्फत् ख्;1द्ध और ;2द्ध से, इसलिए च्फ त्र च्त् ;समान कोणों की सम्मुख भुजाएँद्ध अथार्त् ∆च्फत् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है। प्रश्नावली 6ण्2 1ण् आवृफति 6.17;पद्ध और;पपद्ध में,क्म् द्यद्य ठब् है। ;पद्ध में म्ब् और;पपद्ध में ।क् ज्ञात कीजिएः । । क् 1ण्8 बउ1ण्5 बउ 3बउ 7ण्2 बउ म् ठ 5ण्4 बउ ठब् ;पद्ध ;पपद्ध ब् आवृफति 6ण्17 2ण् किसी∆ च्फत् की भुजाओं च्फ और च्त् पर क्रमशः ¯बदु म् और थ् स्िथत हैं। निम्नलिख्िात में से प्रत्येक स्िथति के लिए, बताइए कि क्याम्थ् द्यद्य फत् हैः ;पद्ध च्म् त्र 3ण्9 बउ,म्फ त्र 3 बउ,च्थ् त्र 3ण्6 बउ औरथ्त् त्र 2ण्4 बउ ;पपद्ध च्म् त्र 4 बउ,फम् त्र 4ण्5 बउ,च्थ् त्र 8 बउ औरत्थ् त्र 9 बउ आवृफति 6ण्18 ;पपपद्ध च्फ त्र 1ण्28 बउ, च्त् त्र 2ण्56 बउ,च्म् त्र 0ण्18 बउ औरच्थ् त्र 0ण्36 बउ 3ण् आवृफति 6.18 में यदि स्ड द्यद्य ब्ठ और स्छ द्यद्य ब्क् हो तो ।ड ।छ सि( कीजिए कि त्र है।।ठ ।क् 4ण् आवृफति 6.19 में क्म् द्यद्य ।ब् और क्थ् द्यद्य ।म् है। सि( कीजिए ठथ् ठम् कि त्र है।थ्म् म्ब् आवृफति 6ण्19 5ण् आवृफति 6.20 में क्म् द्यद्य व्फ औरक्थ् द्यद्य व्त् है। दशार्इए कि म्थ् द्यद्य फत् है। 6ण् आवृफति 6.21 में क्रमशः व्च्ए व्फ और व्त् पर स्िथत ¯बदु ।ए ठ और ब् इस प्रकार हैं कि ।ठ द्यद्य च्फ और।ब् द्यद्य च्त् है। दशार्इए किठब् द्यद्य फत् है। 7ण् प्रमेय 6.1 का प्रयोग करते हुए सि( कीजिए कि एक त्रिाभुज की एक भुजा के मध्य - ¯बदु से होकर दूसरी भुजा के समांतर खींची गइर् रेखा तीसरी भुजा को समद्विभाजित करती है। ;याद कीजिए कि आप इसे कक्षा प्ग् में सि( कर चुके हैं।द्ध 8ण् प्रमेय 6.2 का प्रयोग करते हुए सि( कीजिए कि एक त्रिाभुज की किन्हीं दो भुजाओं के मध्य - ¯बदुओं को मिलाने वाली रेखा तीसरी भुजा के समांतर होती है। ;याद कीजिए कि आप कक्षाप्ग् में ऐसा कर चुके हैंद्ध। 9ण् ।ठब्क् एक समलंब है जिसमें ।ठ द्यद्य क्ब् है तथा इसके विकणर् परस्पर ¯बदु व् पर प्रतिच्छेद करते ।व् ब्व् हैं। दशार्इए कि त्र है।ठव् क्व् ।व् ब्व् 10ण् एक चतुभुर्ज।ठब्क् के विकणर् परस्पर ¯बदुव् पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते हैं कि त्र ठव् क्व् है। दशार्इए कि ।ठब्क् एक समलंब है। 6ण्4 त्रिाभुजों की समरूपता के लिए कसौटियाँ पिछले अनुच्छेद में हमने कहा था कि दो त्रिाभुज समरूप होते हैं यदि ;पद्ध उनके संगत कोण बराबर हों तथा ;पपद्ध उनकी संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में ;समानुपाती होंद्ध। अथार्त् यदि ∆ ।ठब् और ∆ क्म्थ् में, ;पद्ध ∠ । त्र ∠ क्ए ∠ ठ त्र ∠ म्ए ∠ ब् त्र ∠ थ् है तथा ।ठ ठब् ब्। ;पपद्ध त्र त्र है तो दोनों त्रिाभुज समरूप होते हैं ;देख्िाए आवृफति 6.22द्ध।क्म् म्थ् थ्क् आवृफति 6ण्22 यहाँ आप देख सकते हैं कि ।ए क् के संगत हैऋ ठए म् के संगत है तथा ब्ए थ् के संगत है। सांकेतिक रूप से, हम इन त्रिाभुजों की समरूपता को ष्∆ ।ठब् ् ∆ क्म्थ्ष् लिखते हैं तथा ‘त्रिाभुज।ठब् समरूप है त्रिाभुज क्म्थ् के’ पढ़ते हैं। संकेत ष््ष् ‘समरूप’ को प्रकट करता है। याद कीजिए कि कक्षा प्ग् में आपने ‘सवा±गसम’ के लिए संकेत ष्≅ष् का प्रयोग किया था। इस बात पर अवश्य ध्यान देना चाहिए कि जैसा त्रिाभुजों की सवा±गसमता की स्िथति में किया गया था त्रिाभुजों की समरूपता को भी सांकेतिक रूप से व्यक्त करने के लिए, उनके शीषो± की संगतताओं को सही क्रम में लिखा जाना चाहिए। उदाहरणाथर्, आवृफति 6.22 के त्रिाभुजों ।ठब् और क्म्थ् के लिए, हम ∆ ।ठब् ् ∆ म्क्थ् अथवा ∆ ।ठब् ् ∆ थ्म्क् नहीं लिख सकते। परंतु हम ∆ ठ।ब् ् ∆ म्क्थ् लिख सकते हैं। अब एक प्रश्न यह उठता हैः दो त्रिाभुजों, मान लीजिए।ठब् औरक्म्थ् की समरूपता की जाँच के लिए क्या हम सदैव उनके संगत कोणों के सभी युग्मों की समानता ;∠ । त्र ∠ क्ए ∠ ठ त्र ∠ म्ए ∠ ब् त्र ∠ थ्द्ध तथा उनकी संगत भुजाओं के सभी युग्मों के अनुपातों की समानता  ।ठ ठब् ब्।   त्रत्र  पर विचार करते हैं? आइए इसकी जाँच करें। आपको याद होगा कि कक्षा क्म् म्थ् थ्क्  प्ग् में, आपने दो त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए वुफछ ऐसी कसौटियाँ ;बतपजमतपंद्ध प्राप्त की थीं जिनमें दोनों त्रिाभुजों के संगत भागांे ;या अवयवोंद्ध के केवल तीन युग्म ही निहित थे। यहाँ भी, आइए हम दो त्रिाभुजों की समरूपता के लिए, वुफछ ऐसी कसौटियाँ प्राप्त करने का प्रयत्न करें, जिनमें इन दोनों त्रिाभुजों के संगत भागों के सभी छः युग्मों के स्थान पर, इन संगत भागों के कम युग्मों के बीच संबंध् ही निहित हों। इसके लिए, आइए निम्नलिख्िात ियाकलाप करेंः ियाकलाप 4 रू भ्िान्न - भ्िान्न लंबाइयों, मान लीजिए 3बउ और 5बउ वाले क्रमशः दो रेखाखंड ठब् और म्थ् खींचिए। पिफर ¯बदुओं ठ और ब् पर क्रमशः ∠च्ठब् और ∠फब्ठ किन्हीं दो मापों, मान लीजिए 60° और 40°ए के खींचिए। साथ ही, ¯बदुओं म् और थ् पर क्रमशः ∠त्म्थ् त्र 60ह् और ∠ैथ्म् त्र 40ह् खींचिए ;देख्िाए आवृफति 6.23द्ध। आवृफति 6ण्23 मान लीजिए किरण ठच् और ब्फ परस्पर ¯बदु। पर प्रतिच्छेद करती हैं तथा किरण म्त् और थ्ै परस्पर ¯बदु क् पर प्रतिच्छेद करती हैं। इन दोनों त्रिाभुजों।ठब् और क्म्थ् में, आप देख सकते हैं कि ∠ ठ त्र ∠ म्ए ∠ ब् त्र ∠ थ् और ∠ । त्र ∠ क् है। अथार्त् इन त्रिाभुजों के संगत कोण बराबर ठब् 3हैं। इनकी संगत भुजाओं के बारे में आप क्या कह सकते हैं? ध्यान दीजिए कि त्रत्र0ण्6 म्थ् 5 ।ठ ब्।है। और के बारे में आप क्या कह सकते हैं?।ठए क्म्ए ब्। और थ्क् को मापने पर,क्म् थ्क् ।ठ ब्।आप पाएँगे कि और भी0.6 के बराबर है ;अथवा लगभग 0.6 के बराबर हैं, यदि क्म् थ्क् ।ठ ठब् ब्। मापन में कोइर् त्राुटि हैद्ध। इस प्रकार, त्रत्र है। आप समान संगत कोण वालेक्म् म्थ् थ्क् त्रिाभुजों के अनेक युग्म खींचकर इस ियाकलाप को दुहरा सकते हैं। प्रत्येक बार, आप यह पाएँगे कि उनकी संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में ;समानुपातीद्ध हैं। यह ियाकलाप हमें दो त्रिाभुजों की समरूपता की निम्नलिख्िात कसौटी की ओर अग्रसित करता हैः प्रमेय 6ण्3 रू यदि दो त्रिाभुजों में, संगत कोण बराबर हों, तो उनकी संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में ;समानुपातीद्ध होती हैं और इसीलिए ये त्रिाभुज समरूप होते हैं। उपरोक्त कसौटी को दो त्रिाभुजों की समरूपता की।।। ;कोण - कोण - कोणद्ध कसौटी कहा जाता है। इस प्रमेय को दो ऐसे त्रिाभुज ।ठब् और क्म्थ् लेकर, जिनमें∠ । त्र ∠क्ए ∠ठ त्र ∠म् और ∠ब् त्र ∠थ् हो, सि( किया जा सकता आवृफति 6ण्24है ;देख्िाए आवृफति 6.24द्ध। क्च् त्र ।ठ और क्फ त्र ।ब् काटिए तथा च् और फ को मिलाइए। अतः ∆।ठब् ≅∆क्च्फ ;क्यों?द्ध इससे ∠ठ त्र ∠च्त्र ∠म् और च्फ द्यद्य म्थ् प्राप्त होता है ;वैफसे?द्ध क्च् क्फअतः च्म् त्र फथ् ;क्यों?द्ध ।ठ ।ब्अथार्त् त्र ;क्यों?द्धक्म्क्थ् ।ठ ठब् ।ठठब् ।ब्इसी प्रकार, त्र और इसीलिए त्रत्र क्म्म्थ् क्म्म्थ् क्थ् टिप्पणी रू यदि एक त्रिाभुज के दो कोण किसी अन्य त्रिाभुज के दो कोणों के क्रमशः बराबर हों, तो त्रिाभुज के कोण योग गुणध्मर् के कारण, इनके तीसरे कोण भी बराबर होंगे। इसीलिए, ।।। समरूपता कसौटी को निम्नलिख्िात रूप में भी व्यक्त किया जा सकता हैः यदि एक त्रिाभुज के दो कोण एक अन्य त्रिाभुज के क्रमशः दो कोणों के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज समरूप होते हैं। उपरोक्त को दो त्रिाभुजों की समरूपता की ।। कसौटी कहा जाता है। ऊपर आपने देखा है कि यदि एक त्रिाभुज के तीनों कोण क्रमशः दूसरे त्रिाभुज के तीनों कोणों के बराबर हों, तो उनकी संगत भुजाएँ समानुपाती ;एक ही अनुपात मेंद्ध होती हैं। इस कथन के विलोम के बारे में क्या कह सकते हैं? क्या यह विलोम सत्य है? दूसरे शब्दों में, यदि एक त्रिाभुज की भुजाएँ क्रमशः दूसरे त्रिाभुज की भुजाओं के समानुपाती हों, तो क्या यह सत्य है कि इन त्रिाभुजों के संगत कोण बराबर हैं? आइए, एक ियाकलाप द्वारा जाँच करें। ियाकलाप 5 रू दो त्रिाभुज।ठब् और क्म्थ् इस प्रकार खींचिए कि।ठ त्र 3 बउए ठब् त्र 6 बउ, ब्। त्र 8 बउ, क्म् त्र 4ण्5 बउ, म्थ् त्र 9 बउ और थ्क् त्र 12 बउ हो ;देख्िाए आवृफति 6.25द्ध। आवृफति 6ण्25 ।ठठब् ब्। 2तब, आपको प्राप्त हैः त्रत्र ;प्रत्येक के बराबर हैंद्धक्म्म्थ्थ्क् 3 अब, ∠ ।ए ∠ ठए ∠ ब्ए ∠ क्ए ∠ म् और ∠ थ् को मापिए। आप देखेंगे कि ∠ । त्र ∠ क्ए ∠ ठ त्र ∠ म् और ∠ ब् त्र ∠ थ् है, अथार्त् दोनों त्रिाभुजों के संगत कोण बराबर हैं। इसी प्रकार के अनेक त्रिाभुजों के युग्म खींचकर ;जिनमें संगत भुजाओं के अनुपात एक ही होंद्ध, आप इस ियाकलाप को पुनः कर सकते हैं। प्रत्येक बार आप यह पाएँगे कि इन त्रिाभुजों के संगत कोण बराबर हैं। यह दो त्रिाभुजों की समरूपता की निम्नलिख्िात कसौटी के कारण हैंः प्रमेय 6ण्4 रू यदि दो त्रिाभुजों में एक त्रिाभुज की भुजाएँ दूसरे त्रिाभुज की भुजाओं के समानुपाती ;अथार्त् एक ही अनुपात मेंद्ध हों, तो इनके संगत कोण बराबर होते हैं, और इसीलिए दोनों त्रिाभुज समरूप होते हैं। इस कसौटी को दो त्रिाभुजों की समरूपता की ैैै ;भुजा - भुजा - भुजाद्ध कसौटी कहा जाता है। ।ठ ठब् ब्। उपरोक्त प्रमेय को ऐसे दो त्रिाभुज।ठब् और क्म्थ् लेकर, जिनमें त्रत्र हो,क्म् म्थ् थ्क् सि( किया जा सकता है ;देख्िाए आवृफति 6.26द्धः ∆क्म्थ् में क्च् त्र ।ठ और क्फ त्र ।ब् काटिए तथा च् और फ को मिलाइए। आवृफति 6ण्26 क्च् क्फयहाँ यह देखा जा सकता है कि च्म् त्र फथ् और च्फ द्यद्य म्थ् है ;वैफसे?द्ध अतः ∠च् त्र ∠म् और ∠फ त्र ∠थ्ण् क्च् क्फच्फइसलिए त्र त्र क्म्क्थ्म्थ् क्च् क्फठब्जिससे त्र त्र ;क्यों?द्धक्म्क्थ्म्थ् अतः ठब् त्र च्फ ;क्यों?द्ध इस प्रकार ∆।ठब् ≅∆क्च्फ ;क्यों?द्ध अतः ∠ । त्र ∠क्ए ∠ठ त्र ∠म् और ∠ब् त्र ∠थ् ;वैफसे?द्ध टिप्पणी रू आपको याद होगा कि दो बहुभुजों की समरूपता के दोनों प्रतिबंधें, अथार्त् ;पद्ध संगत कोण बराबर हों और ;पपद्ध संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों, में से केवल किसी एक का ही संतुष्ट होना उनकी समरूपता के लिए पयार्प्त नहीं होता। परंतु प्रमेयों 6.3 और 6.4 के आधर पर, अब आप यह कह सकते हैं कि दो त्रिाभुजों की समरूपता की स्िथति में, इन दोनों प्रतिबंधें की जाँच करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि एक प्रतिबंध् से स्वतः ही दूसरा प्रतिबंध् प्राप्त हो जाता है। आइए अब दो त्रिाभुजों की सवा±गसमता की उन कसौटियों को याद करें, जो हमने कक्षा प्ग् में पढ़ी थीं। आप देख सकते हैं कि ैैै समरूपता कसौटी की तुलना ैैै सवा±गसमता कसौटी से की जा सकती है। इससे हमें यह संकेत मिलता है कि त्रिाभुजों की समरूपता की ऐसी कसौटी प्राप्त करने का प्रयत्न किया जाए जिसकी त्रिाभुजों की ै।ै सवा±गसमता कसौटी से तुलना की जा सके। इसके लिए, आइए एक ियाकलाप करें। ियाकलाप 6 रू दो त्रिाभुज।ठब् और क्म्थ् इस प्रकार खींचिए कि।ठ त्र 2 बउए ∠ । त्र 50ह्ए ।ब् त्र 4 बउए क्म् त्र 3 बउए ∠ क् त्र 50° और क्थ् त्र 6 बउ हो ;देख्िाए आवृफति 6.27द्ध। आवृफति 6ण्27 ।ठ।ब् 2यहाँ, आप देख सकते हैं कि त्र ;प्रत्येक के बराबर हैंद्धतथा∠ । ;भुजाओंक्म्क्थ् 3 ।ठ और।ब् के अंतगर्त कोणद्ध त्र ∠ क् ;भुजाओं क्म् और क्थ् के अंतगर्त कोणद्ध है। अथार्त् एक त्रिाभुज का एक कोण दूसरे त्रिाभुज के एक कोण के बराबर है तथा इन कोणों को अंतगर्त करने वाली भुजाएँ एक ही अनुपात में ;समानुपातीद्ध हैं। अब, आइए ∠ ठए ∠ ब्ए ∠ म् और ∠ थ् को मापें। आप पाएँगे कि ∠ ठ त्र ∠ म् और ∠ ब् त्र ∠ थ् है। अथार्त्, ∠ । त्र ∠ क्ए ∠ ठ त्र ∠ म् और ∠ ब् त्र ∠ थ् है। इसलिए, ।।। समरूपता कसौटी से ∆ ।ठब् ् ∆ क्म्थ् है। आप ऐसे अनेक त्रिाभुजों के युग्मों को खींचकर, जिनमें एक त्रिाभुज का एक कोण दूसरे त्रिाभुज के एक कोण के बराबर हो तथा इन कोणों को अंतगर्त करने वाली भुजाएँ एक ही अनुपात में ;समानुपातीद्ध हों, इस ियाकलाप को दोहरा सकते हैं। प्रत्येक बार, आप यह पाएँगे कि दोनों त्रिाभुज समरूप हैं। यह त्रिाभुजों की समरूपता की निम्नलिख्िात कसौटी के कारण हैंः प्रमेय 6ण्5 रू यदि एक त्रिाभुज का एक कोण दूसरे त्रिाभुज के एक कोण के बराबर हो तथा इन कोणों को अंतगर्त करने वाली भुजाएँ समानुपाती हों, तो दोनोें त्रिाभुज समरूप होते हैं। इस कसौटी को दो त्रिाभुजों की समरूपता की ै।ै ;भुजा - कोण - भुजाद्ध कसौटी कहा जाता है। पहले की ही तरह, इस प्रमेय को भी दो त्रिाभुज ।ठब् और क्म्थ् ऐसे ।ठ ।ब्लेकर कि त्र ;ढ 1द्ध हो तथाक्म् क्थ् ∠ । त्र ∠ क् हो ;देख्िाए आवृफति 6.28द्ध तो सि( किया जा सकता है। ∆ क्म्थ् में क्च् त्र ।ठ और क्फ त्र ।ब् आवृफति 6ण्28काटिए तथा च् और फ को मिलाइए। अब च्फ द्यद्य म्थ् और ∆ ।ठब् ≅ ∆ क्च्फ ;वैफसे?द्ध अतः ∠ । त्र ∠ क्ए ∠ ठ त्र ∠ च् और ∠ ब् त्र ∠ फ है इसलिए ∆ ।ठब् ् ∆ क्म्थ् ;क्यों?द्ध आइए अब हम इन कसौटियों के प्रयोग को प्रदश्िार्त करने के लिए, वुफछ उदाहरण लें। उदाहरण 4 रू आवृफति 6.29 में, यदि च्फ द्यद्य त्ै है, तो सि( कीजिए कि ∆ च्व्फ ् ∆ ैव्त् है। आवृफति 6ण्29 हल रू च्फ द्यद्य त्ै ;दिया हैद्ध अतः ∠ च् त्र ∠ ै ;एकांतर कोणद्ध और ∠ फ त्र ∠ त् ;एकांतर कोणद्ध साथ ही ∠ च्व्फ त्र ∠ ैव्त् ;शीषार्भ्िामुख कोणद्ध इसलिए ∆ च्व्फ ् ∆ ैव्त् ;।।। समरूपता कसौटीद्ध उदाहरण 5 रू आवृफति 6.30 में ∠ च् ज्ञात कीजिए। आवृफति 6ण्30 हल रू ∆।ठब् और ∆ च्फत् में, ।ठ3ण्8 1ठब् 6 1 ब्।331 एत्रत्र त्रत्र और त्रत्र त्फ7ण्62फच्122 च्त्632 ।ठ ठब् ब्। अथार्त् त्रत्र त्फफच् च्त् इसलिए ∆ ।ठब् ् ∆ त्फच् ;ैैै समरूपताद्ध इसलिए ∠ ब् त्र ∠ च् ;समरूप त्रिाभुजों के संगत कोणद्ध परंतु ∠ ब् त्र 180° दृ ∠ । दृ ∠ ठ;त्रिाभुज का कोण योग गुणध्मर्द्ध त्र 180° दृ 80° दृ 60° त्र 40° अतः ∠ च् त्र 40° उदाहरण 6 रू आवृफति 6.31 में, व्। ण् व्ठ त्र व्ब् ण् व्क् है। दशार्इए कि ∠ । त्र ∠ ब् और ∠ ठ त्र ∠ क् है। हल रू व्। ण् व्ठ त्र व्ब् ण् व्क् ;दिया हैद्ध आवृफति 6ण्31व्। व्क्अतः त्र ;1द्धव्ब्व्ठ साथ ही, हमें प्राप्त हैः ∠ ।व्क् त्र ∠ ब्व्ठ ;शीषार्भ्िामुख कोणद्ध ;2द्ध अतः ;1द्ध और ;2द्ध से ∆ ।व्क् ् ∆ ब्व्ठ ;ै।ै समरूपता कसौटीद्ध इसलिए ∠ । त्र ∠ ब् और ∠ क् त्र ∠ ठ ;समरूप त्रिाभुजों के संगत कोणद्ध उदाहरण 7 रू 90 बउ की लंबाइर् वाली एक लड़की बल्ब लगे एक खंभे के आधर से परे 1.2 उध्े की चाल से चल रही है। यदि बल्ब भूमि से 3.6बउ की ऊँचाइर् पर है, तो 4 सेवंफड बाद उस लड़की की छाया की लंबाइर् ज्ञात कीजिए। हलरू मान लीजिए।ठ बल्ब लगे खंभे को तथा ब्क् लड़की द्वारा खंभे के आधर से परे 4 सेवंफड चलने के बाद उसकी स्िथति को प्रकट करते हैं ;देख्िाए आवृफति 6.32द्ध। आवृफति से आप देख सकते हैं कि क्म् लड़की की छाया की लंबाइर् है। मान लीजिए क्म्ए ग उ है। अब, ठक् त्र 1ण्2 उ × 4 त्र 4ण्8 उ आवृफति 6ण्32ध्यान दीजिए कि ∆ ।ठम् और ∆ ब्क्म् में, ∠ ठ त्र ∠ क्;प्रत्येक 90° का है, क्योंकि बल्बलगा खंभा और लड़की दोनों ही भूमि से ऊध्वार्ध्र खड़े हैंद्ध तथा ∠ म् त्र ∠ म् ;समान कोणद्ध अतः ∆ ।ठम् ् ∆ ब्क्म् ;।। समरूपता कसौटीद्ध ठम् ।ठइसलिए त्र ;समरूप त्रिाभुजों की संगत भुजाएंद्धक्म्ब्क् 4ण्8 ़ ग 3ण्6 90अथार्त् त्र ;90 बउ त्र उ त्र 0ण्9 उद्ध ग0ण्9 100अथार्त् 4ण्8 ़ ग त्र4ग अथार्त् 3ग त्र 4ण्8 अथार्त् ग त्र 1ण्6 अतः 4 सेवंफड चलने के बाद लड़की की छाया की लंबाइर् 1.6 उ है। उदाहरण 8 रू आवृफति 6.33 में ब्ड और त्छ क्रमशः ∆ ।ठब् और ∆ च्फत् की माियकाएँ हैं। यदि ∆ ।ठब् ् ∆ च्फत् है तो सि( कीजिए कि ;पद्ध ∆ ।डब् ् ∆ च्छत् ब्ड ।ठ त्र;पपद्ध त्छ च्फ ;पपपद्ध ∆ ब्डठ ् ∆ त्छफ हल रू ;पद्ध ∆ ।ठब् ् ∆ च्फत् ;दिया हैद्ध ।ठ ठब्ब्। त्रअतः त्र ;1द्धच्फफत्त्च् तथा ∠ । त्र ∠ च्ए ∠ ठ त्र ∠ फ और ∠ ब् त्र ∠ त् ;2द्ध परंतु ।ठ त्र 2।ड और च्फ त्र 2 च्छ ;क्योंकि ब्ड और त्छ माियकाएँ हैंद्ध 2।ड ब्।इसलिए ;1द्ध से त्र 2च्छत्च् ।ड ब्।अथार्त् त्र ;3द्धच्छत्च् साथ ही ∠ ड।ब् त्र ∠ छच्त् ख्;2द्ध से,;4द्ध इसलिए ;3द्ध और ;4द्ध से, ∆ ।डब् ् ∆ च्छत् ;ै।ै समरूपताद्ध;5द्ध ब्ड ब्। ;पपद्ध ;5द्ध से त्र ;6द्धत्छत्च् ब्। ।ठपरंतु त्च् त्र च्फ ख्;1द्ध से,;7द्ध ब्ड ।ठअतः त्र च्फ ख्;6द्ध और ;7द्ध से,;8द्ध त्छ।ठ ठब् ;पपपद्ध पुनः च्फ त्र फत् ख्;1द्ध से, ब्ड ठब्अतः त्र ख्;8द्ध से,;9द्ध त्छफत् ब्ड ।ठ 2ठड साथ ही त्र त्र त्छच्फ 2फछ ब्ड ठडअथार्त् त्र ;10द्धत्छफछ ब्ड ठब्ठड त्रअथार्त् त्र ख्;9द्ध और ;10द्ध से,त्छफत्फछ अतः ∆ ब्डठ ् ∆ त्छफ ;ैैै समरूपताद्ध ख्टिप्पणी रू आप इस प्रश्न के भाग ;पपपद्ध को भाग ;पद्ध में प्रयोग की गइर् विध्ि से भी सि( करसकते हैं।, प्रश्नावली 6ण्3 1ण् बताइए कि आवृफति 6.34 में दिए त्रिाभुजों के युग्मों में से कौन - कौन से युग्म समरूप हैं। उससमरूपता कसौटी को लिख्िाए जिसका प्रयोग आपने उत्तर देने में किया है तथा साथ ही समरूप त्रिाभुजों को सांकेतिक रूप में व्यक्त कीजिए। आवृफति 6ण्34 2ण् आवृफति 6.35 में,∆ व्क्ब् ् ∆ व्ठ।ए ∠ ठव्ब् त्र 125° और∠ ब्क्व् त्र 70° है।∠ क्व्ब्ए ∠ क्ब्व् और∠ व्।ठ ज्ञात कीजिए। 3ण् समलंब।ठब्क्ए जिसमें ।ठ द्यद्य क्ब् है, के विकणर् ।ब् और ठक् परस्पर व् पर प्रतिच्छेद करते हैं। दो त्रिाभुजों की समरूपता कसौटी का प्रयोग करते व्। व्ठहुए, दशार्इए कि त्र है।व्ब् व्क् आवृफति 6ण्35 फत् फज्त्र4ण् आवृफति 6.36 में, तथा∠ 1 त्र ∠ 2 है।फै च्त् दशार्इए कि∆ च्फै ् ∆ ज्फत् है। 5ण् ∆ च्फत् की भुजाओं च्त् और फत् पर क्रमशः ¯बदु ै और Τ इस प्रकार स्िथत हैं कि∠ च् त्र ∠ त्ज्ै है। दशार्इए कि∆ त्च्फ ् ∆ त्ज्ै है। 6ण् आवृफति 6.37 में, यदि ∆ ।ठम् ≅ ∆ ।ब्क् है, तो दशार्इए कि∆ ।क्म् ् ∆ ।ठब् है। 7ण् आवृफति 6.38 में,∆ ।ठब् के शीषर्लंब ।क् और ब्म् परस्पर ¯बदुच् पर प्रतिच्छेद करते हैं। दशार्इए किः ;पद्ध ∆ ।म्च् ् ∆ ब्क्च् ;पपद्ध ∆।ठक् ् ∆ ब्ठम् ;पपपद्ध ∆ ।म्च् ् ∆।क्ठ ;पअद्ध ∆ च्क्ब् ् ∆ ठम्ब् 8ण् समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् की बढ़ाइर् गइर् भुजा ।क् पर स्िथत म् एक ¯बदु है तथाठम् भुजाब्क् को थ् पर प्रतिच्छेद करती है। दशार्इए कि ∆ ।ठम् ् ∆ ब्थ्ठ है। 9ण् आवृफति 6.39 में, ।ठब् और।डच् दो समकोण त्रिाभुज हैं, जिनके कोण ठ औरड समकोण हैं। सि( कीजिए किः ;पद्ध ∆ ।ठब् ् ∆ ।डच् ब्। ठब् ;पपद्ध त्र च्। डच् 10ण् ब्क् औरळभ् क्रमशः∠ ।ब्ठ और∠ म्ळथ् के ऐसे समद्विभाजक हैं कि ¯बदु क् औरभ् क्रमशः∆।ठब् और∆थ्म्ळ की भुजाओं ।ठ और थ्म् पर स्िथत हैं। यदि∆ ।ठब् ् ∆ थ्म्ळ है, तो दशार्इए किः ब्क् ।ब् ;पद्ध त्र ळभ् थ्ळ ;पपद्ध ∆ क्ब्ठ ् ∆ भ्ळम् ;पपपद्ध ∆ क्ब्। ् ∆ भ्ळथ् आवृफति 6ण्36 आवृफति 6ण्37 आवृफति 6ण्38 आवृफति 6ण्39 11ण् आवृफति 6.40 में, ।ठ त्र ।ब् वाले, एक समद्विबाहु त्रिाभुज।ठब् की बढ़ाइर् गइर् भुजाब्ठ पर स्िथत म् एक ¯बदु है। यदि ।क् ⊥ ठब् और म्थ् ⊥ ।ब् है तो सि( कीजिए कि∆ ।ठक् ् ∆ म्ब्थ् है। 12ण् एक त्रिाभुज ।ठब् की भुजाएँ।ठ औरठब् तथा माियका।क् एक अन्य त्रिाभुज च्फत् की क्रमशः भुजाओं च्फ और फत् तथा माियका च्ड के समानुपाती हैं ;देख्िाए आवृफति 6.41द्ध। दशार्इए कि ∆ ।ठब् ् ∆ च्फत् है। आवृफति 6ण्40 आवृफति 6ण्41 13ण् एक त्रिाभुज ।ठब् की भुजा ठब् पर एक ¯बदु क् इस प्रकार स्िथत है कि ∠ ।क्ब् त्र ∠ ठ।ब् है। दशार्इए किब्।2 त्र ब्ठण्ब्क् है। 14ण् एक त्रिाभुज।ठब् की भुजाएँ ।ठ और ।ब् तथा माियका।क् एक अन्य त्रिाभुज की भुजाओंच्फ औरच्त् तथा माियकाच्ड के क्रमशः समानुपाती हैं। दशार्इए कि∆ ।ठब् ् ∆ च्फत् है। 15ण् लंबाइर् 6 उ वाले एक ऊध्वार्ध्र स्तंभ की भूमि पर छाया की लंबाइर् 4 उ है, जबकि उसी समयएक मीनार की छाया की लंबाइर् 28 उ है। मीनार की ऊँचाइर् ज्ञात कीजिए। 16ण् ।क् औरच्ड त्रिाभुजों ।ठब् और च्फत् कीक्रमशः माियकाएँ हैं, जबकि∆ ।ठब् ् ∆ च्फत् है। ।ठ ।क् त्रसि( कीजिए कि है।च्फ च्ड 6ण्5 समरूप त्रिाभुजों के क्षेत्रापफल आपने यह सीखा है कि दो समरूप त्रिाभुजों में, उनकी संगत भुजाओं के अनुपात एक ही ;समानद्ध रहते हैं। क्या आप सोचते हैं कि इन त्रिाभुजों के क्षेत्रापफलों के अनुपात और इनकी संगत भुजाओं के अनुपात में कोइर् संबंध् है? आप जानते हैं कि क्षेत्रापफल को वगर् मात्राकों ;ेुनंतम नदपजेद्ध में मापा जाता है। अतः, आप यह आशा कर सकते हैं कि क्षेत्रापफलों का अनुपात इनकी संगत भुजाओं के अनुपात के वगर् के बराबर होगा। यह वास्तव में सत्य है और इसे हम अगली प्रमेय में सि( करेंगे। प्रमेय 6ण्6 रू दो समरूप त्रिाभुजों के क्षेत्रापफलों का अनुपात इनकी संगत भुजाओं के अनुपात के वगर् के बराबर होता है। आवृफति 6ण्42 उपपिा रू हमें दो त्रिाभुज ।ठब् और च्फत् ऐसे दिए हैं कि ∆ ।ठब् ् ∆ च्फत् है;देख्िाए आवृफति 6.42द्ध। 222ंत ;।ठब्द्ध  ।ठ  ठब्  ब्। हमें सि( करना है कि त्र  त्र  त्र ंत ;च्फत्द्ध  च्फ  फत्  त्च्  दोनों त्रिाभुजों के क्षेत्रापफल ज्ञात करने के लिए, हम इनके क्रमशः शीषर्लंब ।ड और च्छ खींचते हैं। 1 अब ंत ;।ठब्द्ध त्र ठब्×।ड 2 तथा ंत ;च्फत्द्ध त्र 1फत्×च्छ 2 1 × ठब्× ।ड ंत ;।ठब्द्ध ठब् × ।ड अतः त्र2 त्र ;1द्धंत;च्फत्द्ध1 फत्×च्छ × फत् × च्छ अब, ∆ ।ठड और ∆ च्फछ में, औरअतः इसलिए साथ ही इसलिए 2 ∠ ठ त्र ∠ फ ∠ ड त्र ∠ छ ∆ ।ठड ् ∆ च्फछ ।ड ।ठ त्र च्छ च्फ ∆ ।ठब् ् ∆ च्फत् ।ठ त्र च्फअतः ंत ;।ठब्द्ध ंत ;च्फत्द्ध त्र त्र त्र अब ;3द्ध का प्रयोग करके, हमें प्राप्त होता है ठब् ब्। त्र फत् त्च् ।ठ ।ड × च्फ च्छ ।ठ ।ठ× च्फ च्फ 2 ।ठ   च्फ  ;क्योंकि ∆ ।ठब् ् ∆ च्फत् हैद्ध ;प्रत्येक 90° का हैद्ध ;।। समरूपता कसौटीद्ध ;2द्ध ;दिया हैद्ध ;3द्ध ख्;1द्ध और ;3द्ध से, ख्;2द्ध से, 222ंत ;।ठब्द्ध  ।ठ  ठब्  ब्।  त्र त्र   त्र ंत ;च्फत्द्ध च्फ  फत्  त्च्  उदाहरण 9 रू आवृफति 6.43 में, रेखाखंड ग्ल् त्रिाभुज ।ठब् की भुजा ।ब् के समांतर है तथा इस त्रिाभुज को वह बराबर क्षेत्रापफलों वाले दो ।ग्भागों में विभाजित करता है। अनुपात ज्ञात।ठ कीजिए। हल रू हमें प्राप्त हैः ग्ल् द्यद्य ।ब् ;दिया हैद्ध अतः ∠ ठग्ल् त्र ∠ । और ∠ ठल्ग् त्र ∠ ब् ;संगत कोणद्ध इसलिए ∆ ।ठब् ् ∆ ग्ठल् ;।। समरूपता कसौटीद्ध ंत ;।ठब्द्ध  ।ठ 2 अतः त्र  ;प्रमेय 6.6द्ध ;1द्धंत ;ग्ठल्द्धग्ठ साथ ही ंत ;।ठब्द्ध त्र 2 ंत ;ग्ठल्द्ध ;दिया हैद्ध ंत ;।ठब्द्ध 2अतः त्र ;2द्धंत ;ग्ठल्द्ध1इसलिए ;1द्ध और ;2द्ध से  ।ठ 22 2  त्र ए अथार्त् ।ठ त्र है। ग्ठ  1 ग्ठ1 या ग्ठ त्र 1 ।ठ2 ग्ठ 1या 1दृ।ठ त्र1दृ 2 ।ठदृ ग्ठ 2 − 1 ।ग्2 − 12 − 2या त्र ए अथार्त् त्रत्र है।।ठ2 ।ठ2 2 प्रश्नावली 6ण्4 1ण् मान लीजिए∆ ।ठब् ् ∆ क्म्थ् है और इनके क्षेत्रापफल क्रमशः 64 बउ2 और 121 बउ2 हैं। यदि म्थ् त्र 15ण्4 बउ हो, तो ठब् ज्ञात कीजिए। 2ण् एक समलंब।ठब्क् जिसमें।ठ द्यद्य क्ब् है, के विकणर् परस्पर ¯बदु व् पर प्रतिच्छेद करते हैं। यदि ।ठ त्र 2 ब्क् हो तो त्रिाभुजों।व्ठ औरब्व्क् के क्षेत्रापफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए। 3ण् आवृफति 6.44 में एक ही आधर ठब् पर दो त्रिाभुज ।ठब् और क्ठब् बने हुए हैं। यदि ।क्ए ठब् को व् पर ंत ;।ठब्द्ध ।व् त्रप्रतिच्छेद करे, तो दशार्इए कि है।ंत ;क्ठब्द्ध क्व् 4ण् यदि दो समरूप त्रिाभुजों के क्षेत्रापफल बराबर हों तो सि( कीजिए कि वे त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं। आवृफति 6ण्44 5ण् एक त्रिाभुज ।ठब् की भुजाओं ।ठए ठब् और ब्। के मध्य - ¯बदु क्रमशःक्ए म् औरथ् हैं। ∆ क्म्थ् और ∆।ठब् के क्षेत्रापफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए। 6ण् सि( कीजिए कि दो समरूप त्रिाभुजों के क्षेत्रापफलों का अनुपात इनकी संगत माियकाओं के अनुपात का वगर् होता है। 7ण् सि( कीजिए कि एक वगर् की किसी भुजा पर बनाए गए समबाहु त्रिाभुज का क्षेत्रापफल उसी वगर् के एक विकणर् पर बनाए गए समबाहु त्रिाभुज के क्षेत्रापफल का आध होता है। सही उत्तर चुनिए और अपने उत्तर का औचित्य दीजिएः 8ण् ।ठब् औरठक्म् दो समबाहु त्रिाभुज इस प्रकार हैं किक् भुजाठब् का मध्य - ¯बदु है। त्रिाभुजों ।ठब् और ठक्म् के क्षेत्रापफलों का अनुपात हैः ;।द्ध 2 रू 1 ;ठद्ध 1 रू 2 ;ब्द्ध 4 रू 1 ;क्द्ध 1 रू 4 9ण् दो समरूप त्रिाभुजों की भुजाएँ4 रू 9 के अनुपात में हैं। इन त्रिाभुजों के क्षेत्रापफलों का अनुपात हैः ;।द्ध 2 रू 3 ;ठद्ध 4 रू 9 ;ब्द्ध 81 रू 16 ;क्द्ध 16 रू 81 6ण्6 पाइथागोरस प्रमेय पिछली कक्षाओं में, आप पाइथागोरस प्रमेय से भली - भाँति परिचित हो चुके हैं। आपने वुफछ ियाकलापों द्वारा इस प्रमेय की जाँच की थी तथा इसके आधर पर वुफछ प्रश्न हल किए थे। आपने कक्षा प्ग् में, इसकी एक उपपिा भी देखी थी। अब, हम इस प्रमेय को त्रिाभुजों की समरूपता की अवधरणा का प्रयोग करके सि( करेंगे। इसे सि( करने के लिए हम एक समकोण त्रिाभुज के कणर् पर सम्मुख शीषर् से डाले गए लंब के दोनों ओर बने समरूप त्रिाभुजों से संबंध्ित एक परिणाम का प्रयोग करेंगे। अब, आइए एक समकोण त्रिाभुज ।ठब् लें जिसका कोण ठ समकोण है। मान लीजिए ठक् कणर् ।ब् पर लंब है ;देख्िाए आवृफति 6.45द्ध। आप देख सकते हैं कि ∆ ।क्ठ और ∆ ।ठब् में ∠ । त्र ∠ । आवृफति 6ण्45 और ∠ ।क्ठ त्र ∠ ।ठब् ;क्यों?द्ध अतः ∆ ।क्ठ ् ∆ ।ठब् ;वैफसे?द्ध ;1द्ध इसी प्रकार ∆ ठक्ब् ् ∆ ।ठब् ;वैफसे?द्ध ;2द्ध अतः, ;1द्ध और ;2द्ध के अनुसार, लम्ब ठक् के दोनों ओर के त्रिाभुज संपूणर् त्रिाभुज ।ठब् के समरूप हैं। साथ ही, क्योंकि ∆ ।क्ठ ् ∆ ।ठब् है और ∆ ठक्ब् ् ∆ ।ठब् है इसलिए ∆ ।क्ठ ् ∆ ठक्ब् ;अनुच्छेद 6.2 की टिप्पणी सेद्ध उपरोक्त चचार् से, हम निम्नलिख्िात प्रमेय पर पहुँचते हैंः प्रमेय 6ण्7 रू यदि किसी समकोण त्रिाभुज के समकोण वाले शीषर् से कणर् पर लंब डाला जाए तो इस लंब के दोनों ओर बने त्रिाभुज संपूणर् त्रिाभुज के समरूप होते हैं तथा परस्पर भी समरूप होते हैं। आइए पाइथागोरस प्रमेय को सि( करने के लिए उपरोक्त प्रमेय का प्रयोग करें। प्रमेय 6ण्8 रू एक समकोण त्रिाभुज में कणर् का वगर् शेष दो भुजाओं के वगो± के योग के बराबर होता है। उपपिा रू हमें एक समकोण त्रिाभुज ।ठब् दिया है जिसका ∠ठ समकोण है। हमें सि( करना है कि ।ब्2 त्र ।ठ2 ़ ठब्2 आइए ठक् ⊥ ।ब् खीचंे ;देख्िाए आवृफति 6.46द्ध। आवृफति 6ण्46 अब ∆ ।क्ठ ् ∆ ।ठब् ;प्रमेय 6.7द्ध अतः ।क् ।ठ त्र ।ठ ।ब् ;भुजाएँ समानुपाती हैंद्ध या ।क् ण् ।ब् त्र ।ठ2 ;1द्ध साथ ही ∆ ठक्ब् ् ∆ ।ठब् ;प्रमेय 6.7द्ध अतः ब्क् ठब् त्र ठब् ।ब् ;भुजाएँ समानुपाती हैंद्ध या ब्क् ण् ।ब् त्र ठब्2 ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध को जोड़ने पर ।क् ण् ।ब् ़ ब्क् ण् ।ब् त्र ।ठ2 ़ ठब्2 या ।ब् ;।क् ़ ब्क्द्ध त्र ।ठ2 ़ ठब्2 या ।ब् ण् ।ब् त्र ।ठ2 ़ ठब्2 या ।ब्2 त्र।ठ2 ़ ठब्2 उपरोक्त प्रमेय को पहले एक प्राचीन भारतीय गण्िातज्ञ बौधयन ;लगभग 800 इर्.पू.द्ध ने निम्नलिख्िात रूप में दिया थाः एक आयत का विकणर् स्वयं से उतना ही क्षेत्रापफल नि£मत करता है, जितना उसकी दोनोंभुजाओं ;अथार्त् लंबाइर् और चैड़ाइर्द्ध से मिल कर बनता है। इसका अथर् हैः किसी आयत के विकणर् से बने वगर् का क्षेत्रापफल इसकी दोनों आसन्न भुजाओं पर बनेवगो± के योग के बराबर होता है। इसी कारण, इस प्रमेय को कभी - कभी बौधयन प्रमेय भी कहा जाता है। पाइथागोरस प्रमेय के विलोम के बारे में क्या कहा जा सकता है? आप पिछली कक्षाओं में इसकी जाँच कर चुके हैं कि यह विलोम भी सत्य है। अब हम इसे एक प्रमेय के रूप में सि( करेंगे। प्रमेय 6ण्9 रू यदि किसी त्रिाभुज की एक भुजा का वगर् अन्य दो भुजाओं के वगो± के योग के बराबर हो तो पहली भुजा का सम्मुख कोण समकोण होता है। उपपिा रू यहाँ हमें एक त्रिाभुज ।ठब् दिया है जिसमें ।ब्2 त्र ।ठ2 ़ ठब्2 है। हमें सि( करना है कि ∠ ठ त्र 90° है। इसे प्रारंभ करने के लिए हम एक ∆च्फत् की रचना करते हैं जिसमें ∠फ त्र 90ह्ए च्फ त्र ।ठ और फत् त्र ठब् ;देख्िाए आवृफति 6.47द्ध। आवृफति 6ण्47 अब, ∆च्फत् से हमें प्राप्त हैः च्त्2 त्रच्फ2 ़ फत्2 ;पाइथागोरस प्रमेय, क्योंकि ∠फ त्र 90° हैद्ध या च्त्2 त्र।ठ2 ़ ठब्2 ;रचना सेद्ध ;1द्ध परंतु ।ब्2 त्र।ठ2 ़ ठब्2 ;दिया हैद्ध ;2द्ध अतः ।ब् त्र च्त् ख्;1द्ध और ;2द्ध से, ;3द्ध अब, ∆।ठब् और ∆च्फत् में ।ठ त्र च्फ ;रचना सेद्ध ठब् त्र फत् ;रचना सेद्ध ।ब् त्रच्त् ख्ऊपर ;3द्ध में सि( किया है, अतः ∆।ठब् ≅∆च्फत् ;ैैै सवा±गसमताद्ध इसलिए ∠ठ त्र ∠फ ;ब्च्ब्ज्द्ध परंतु ∠ फ त्र 90° ;रचना सेद्ध अतः ∠ ठ त्र 90° टिप्पणी रू इस प्रमेय की एक अन्य उपपिा के लिए परिश्िाष्ट 1 देख्िाए। आइए इन प्रमेयों का प्रयोग दशार्ने के लिए वुफछ उदाहरण लें। उदाहरण 10 रू आवृफति 6.48 में ∠।ब्ठ त्र 90° तथा ठब्2 ठक् ब्क् ⊥।ठ है। सि( कीजिए कि त्र है।।ब्2 ।क् हल रू ∆ ।ब्क् ् ∆।ठब् ;प्रमेय 6.7द्ध आवृफति 6ण्48 162 गण्िात अतः या इसी प्रकार अतः या अतः ;1द्ध और ;2द्ध से ।ब् ।ठ त्र ।क् ।ब् ।ब्2 त्र ।ठ ण् ।क् ∆ ठब्क् ् ∆ ठ।ब् ठब् ठ। त्र ठक् ठब् ठब्2 त्र ठ। ण् ठक् ;प्रमेय 6.7द्ध ;1द्ध ;2द्ध ठब्2 ठ। ⋅ ठक् ठक् त्र त्र 2 ।ठ ⋅ ।क् ।क्।ब्उदाहरण 11 रू एक सीढ़ी किसी दीवार पर इस प्रकार टिकी हुइर् है कि इसका निचला सिरा दीवार से 2.5 उ की दूरी परहै तथा इसका ऊपरी सिरा भूमि से 6 उ की ऊँचाइर् पर बनी एक ख्िाड़की तक पहुँचता है। सीढ़ी की लंबाइर् ज्ञात कीजिए। हल रू मान लीजिए ।ठ सीढ़ी है तथा ब्। दीवार है जिसमें ख्िाड़की । पर है ;देख्िाए आवृफति 6.49द्ध। साथ ही ठब् त्र 2ण्5 उ और ब्। त्र 6 उ है। पाइथागोरस प्रमेय से हमें प्राप्त होता हैः आवृफति 6ण्49 ।ठ2 त्रठब्2 ़ ब्।2 त्र ;2ण्5द्ध2 ़ ;6द्ध2 त्र 42ण्25 अतः ।ठ त्र 6ण्5 इस प्रकार, सीढ़ी की लंबाइर् 6.5 उ है। उदाहरण 12 रू आवृफति 6.50 में ।क् ⊥ ठब् है। सि( कीजिए कि ।ठ2 ़ ब्क्2 त्र ठक्2 ़ ।ब्2 है। हल रू ∆ ।क्ब् से हमें प्राप्त होता हैः ।ब्2 त्र।क्2 ़ ब्क्2 ;1द्ध ;पाइथागोरस प्रमेयद्ध त्रिाभुज 163 ∆ ।क्ठ से हमें प्राप्त होता हैः ।ठ2 त्र।क्2 ़ ठक्2 ;2द्ध में से ;1द्ध को घटाने पर हमें प्राप्त होता हैः ;2द्ध ;पाइथागोरस प्रमेयद्ध ।ठ2 दृ ।ब्2 त्रठक्2 दृ ब्क्2 या ।ठ2 ़ ब्क्2 त्रठक्2 ़ ।ब्2 उदहारण 13 रू ठस् और ब्ड एक समकोण त्रिाभुज ।ठब् की माियकाएँ हैं तथा इस त्रिाभुज का कोण । समकोण है। सि( कीजिए कि 4 ;ठस्2 ़ ब्ड2द्ध त्र 5 ठब्2 हलरू ठस् और ब्ड एक ∆ ।ठब् की माियकाएँ हैंऋ आवृफति 6ण्51 जिसमें ∠ । त्र 90° है ;देख्िाए आवृफति 6.51द्ध। ∆ ।ठब् से ठब्2 त्र।ठ2 ़ ।ब्2 ;पाइथागोरस प्रमेयद्ध ;1द्ध ∆ ।ठस् से ठस्2 त्र।स्2 ़ ।ठ2  ।ब् 22या ठस्2 त्र  ़ ।ठ ;।ब् का मध्य - ¯बदु स् हैद्ध 2  ।ब्2 या ठस्2 त्र ़ ।ठ2 4 या 4 ठस्2 त्र।ब्2 ़ 4 ।ठ2 ;2द्ध ∆ ब्ड। से ब्ड2 त्र।ब्2 ़ ।ड2  ।ठ 2 या ब्ड2 त्र।ब्2 ़  ;।ठ का मध्य ¯बदु ड हैद्ध 2  ।ठ2 या ब्ड2 त्र।ब्2 ़ 4 या 4 ब्ड2 त्र4।ब्2 ़ ।ठ2 ;3द्ध ;2द्ध और ;3द्ध को जोड़ने पर हमें प्राप्त होता हैः 4 ;ठस्2 ़ ब्ड2द्ध त्र 5 ;।ब्2 ़ ।ठ2द्ध या 4 ;ठस्2 ़ ब्ड2द्ध त्र 5 ठब्2 ¹;1द्ध सेह् उदाहरण 14 रू आयत ।ठब्क् के अंदर स्िथत व् कोइर् ¯बदु है ;देख्िाए आवृफति 6.52द्ध। सि( कीजिए कि व्ठ2 ़ व्क्2 त्र व्।2 ़ व्ब्2 है। हल रू व् से होकर जाती हुइर्च्फ द्यद्य ठब् खींचिए, जिससे कि च् भुजा।ठ पर स्िथत हो तथा फ भुजा क्ब् आवृफति 6ण्52 पर स्िथत हो। अब च्फ द्यद्य ठब् है अतः च्फ ⊥ ।ठ और च्फ ⊥ क्ब् ;∠ ठ त्र 90° और ∠ ब् त्र 90°द्ध इसलिए ∠ ठच्फ त्र 90° और ∠ ब्फच् त्र 90° है। अतः ठच्फब् और ।च्फक् दोनों आयत हैं। अब ∆ व्च्ठ से व्ठ2 त्रठच्2 ़ व्च्2 ;1द्ध इसी प्रकार ∆ व्फक् से व्क्2 त्रव्फ2 ़ क्फ2 ;2द्ध ∆ व्फब् से हमें प्राप्त होता है व्ब्2 त्रव्फ2 ़ ब्फ2 ;3द्ध तथा ∆ व्।च् से हमें प्राप्त होता है व्।2 त्र।च्2 ़ व्च्2 ;4द्ध ;1द्ध और ;2द्ध को जोड़ने पर व्ठ2 ़ व्क्2 त्रठच्2 ़ व्च्2 ़ व्फ2 ़ क्फ2 त्रब्फ2 ़ व्च्2 ़ व्फ2 ़ ।च्2 ;क्योंकि ठच् त्र ब्फ और क्फ त्र ।च् हैद्ध त्रब्फ2 ़ व्फ2 ़ व्च्2 ़ ।च्2 त्रव्ब्2 ़ व्।2 ख्;3द्ध और ;4द्ध से, प्रश्नावली 6ण्5 1ण् वुफछ त्रिाभुजों की भुजाएँ नीचे दी गइर् हैं। निधर्रित कीजिए कि इनमें से कौन - कौन से त्रिाभुज समकोण त्रिाभुज हैं। इस स्िथति में कणर् की लंबाइर् भी लिख्िाए। ;पद्ध 7 बउ,24 बउए 25 बउ ;पपद्ध 3 बउ,8 बउ,6 बउ ;पपपद्ध 50 बउ,80 बउ,100 बउ ;पअद्ध 13 बउ,12 बउ,5 बउ 2ण् च्फत् एक समकोण त्रिाभुज है जिसका कोण च् समकोण है तथाफत् पर ¯बदु ड इस प्रकार स्िथत है किच्ड ⊥ फत् है। दशार्इए किच्ड2 त्र फड ण् डत् है। 3ण् आवृफति 6.53 में।ठक् एक समकोण त्रिाभुज है जिसका कोण। समकोण है तथा।ब् ⊥ ठक् है। दशार्इए कि ;पद्ध ।ठ2 त्र ठब् ण् ठक् आवृफति 6ण्53;पपद्ध ।ब्2 त्र ठब् ण् क्ब् ;पपपद्ध ।क्2 त्र ठक् ण् ब्क् 4ण् ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है जिसका कोण ब् समकोण है। सि( कीजिए कि।ठ2 त्र 2।ब्2 है। 5ण् ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है जिसमें।ब् त्र ठब् है। यदि।ठ2 त्र 2 ।ब्2 है, तो सि( कीजिए कि।ठब् एक समकोण त्रिाभुज है। 6ण् एक समबाहु त्रिाभुज ।ठब् की भुजा2ं है। उसके प्रत्येक शीषर्लंब की लंबाइर् ज्ञात कीजिए। 7ण् सि( कीजिए कि एक समचतुभुर्ज की भुजाओं के वगो± का योग उसके विकणो± के वगो± के योग के बराबर होता है। 8ण् आवृफति 6.54 में ∆।ठब् के अभ्यंतर में स्िथत कोइर्¯बदु व् है तथाव्क् ⊥ ठब्ए व्म् ⊥ ।ब् औरव्थ् ⊥ ।ठ है।दशार्इए कि ;पद्ध व्।2 ़ व्ठ2 ़ व्ब्2 दृ व्क्2 दृ व्म्2 दृ व्थ्2 त्र ।थ्2 ़ ठक्2 ़ ब्म्2 ;पपद्ध ।थ्2 ़ ठक्2 ़ ब्म्2 त्र ।म्2 ़ ब्क्2 ़ ठथ्2 आवृफति 6ण्54 9ण् 10 उ लंबी एक सीढ़ी एक दीवार पर टिकाने पर भूमि से 8 उ की ऊँचाइर् पर स्िथत एक ख्िाड़कीतक पहुँचती है। दीवार के आधर से सीढ़ी के निचले सिरे की दूरी ज्ञात कीजिए। 10ण् 18 उ ऊंचे एक ऊध्वार्ध्र खंभे के ऊपरी सिरे से एक तार का एक सिरा जुड़ा हुआ है तथा तार का दूसरा सिरा एक खूँटे से जुड़ा हुआ है। खंभे के आधर से खूँटे को कितनी दूरी पर गाड़ा जाए कि तार तना रहे जबकि तार की लंबाइर् 24 उ है। 11ण् एक हवाइर् जहाज एक हवाइर् अîóे से उत्तर की ओर 1000 ाउध्ीत की चाल से उड़ता है। इसी समय एक अन्य हवाइर् जहाज उसी हवाइर् अड्डे से पश्िचम की ओर 1200 ाउध्ीत 1की चाल से उड़ता है। 1 घंटे के बाद दोनों हवाइर् जहाजों के बीच की दूरी कितनी होगी?2 12ण् दो खंभे जिनकी ऊँचाइर्याँ 6 उ और 11 उ हैं तथा ये समतल भूमि पर खड़े हैं। यदि इनकेऊपरी सिरों के बीच की दूरी12 उ है तो इनके ऊपरी सिरों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए। 13ण् एक त्रिाभुज ।ठब् जिसका कोणब् समकोण है, की भुजाओंब्। औरब्ठ पर क्रमशः ¯बदु क् और म् स्िथत हैं। सि( कीजिए कि ।म्2 ़ ठक्2 त्र ।ठ2 ़ क्म्2 है। 14ण् किसी त्रिाभुज ।ठब् के शीषर् । सेठब् पर डाला गया लम्ब ठब् को ¯बदु क् पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करता है कि क्ठ त्र 3 ब्क् है ;देख्िाए आवृफति 6.55द्ध। सि( कीजिए कि2 ।ठ2 त्र 2 ।ब्2 ़ ठब्2 है। आवृफति 6ण्55 15ण् किसी समबाहु त्रिाभुज ।ठब् की भुजा ठब् पर एक ¯बदु क् इस प्रकार स्िथत है कि1 ठक् त्र ठब् है। सि( कीजिए कि 9 ।क्2 त्र 7 ।ठ2 है।316ण् किसी समबाहु त्रिाभुज में, सि( कीजिए कि उसकी एक भुजा के वगर् का तिगुना उसकेएक शीषर्लंब के वगर् के चार गुने के बराबर होता है। 17ण् सही उत्तर चुनकर उसका औचित्य दीजिएः∆ ।ठब् में, ।ठ त्र 63बउ,।ब् त्र 12 बउ और ठब् त्र 6 बउ है। कोणठ हैः ;।द्ध 120ह् ;ठद्ध 60ह् ;ब्द्ध 90ह् ;क्द्ध 45ह् अभ्यास6ण्6 ;ऐच्िछकद्ध’ फै च्फ 1ण् आवृफति 6.56 मेंच्ै कोण फच्त् का समद्विभाजक है। सि( कीजिए कि त्र है।ैत् च्त् आवृफति 6ण्56 आवृफति 6ण्57 2ण् आवृफति 6.57 में क् त्रिाभुज।ठब् के कणर् ।ब् पर स्िथत एक ¯बदु है जबकि ठक् ⊥ ।ब् तथा क्ड ⊥ ठब् औरक्छ ⊥ ।ठ है। सि( कीजिए कि ;पद्ध क्ड2 त्र क्छ ण् डब् ;पपद्ध क्छ2 त्र क्ड ण् ।छ ’ यह प्रश्नावली परीक्षा की दृष्िट से नहीं दी गइर् है। 3ण् आवृफति 6.58 मंे ।ठब् एक त्रिाभुज है जिसमें∠ ।ठब् झ 90° है तथा।क् ⊥ ब्ठ है। सि( कीजिए कि।ब्2 त्र ।ठ2 ़ ठब्2 ़ 2 ठब् ण् ठक् है। आवृफति 6ण्58 आवृफति 6ण्59 4ण् आवृफति 6.59 में ।ठब् एक त्रिाभुज है जिसमें∠ ।ठब् ढ 90° है तथा।क् ⊥ ठब् है। सि( कीजिए कि।ब्2 त्र ।ठ2 ़ ठब्2 दृ2 ठब् ण् ठक् है। 5ण् आवृफति 6.60 में ।क् त्रिाभुज।ठब् की एक माियका है तथा।ड ⊥ ठब् है। सि( कीजिए कि  ठब् 2 ;पद्ध ।ब्2 त्र ।क्2 ़ ठब् ण् क्ड ़  2   ठब् 2 ;पपद्ध ।ठ2 त्र ।क्2 दृ ठब् ण् क्ड ़  2  1 ;पपपद्ध ।ब्2 ़ ।ठ2 त्र 2 ।क्2 ़ ठब्2 2 आवृफति 6ण्60 6ण् सि( कीजिए कि एक समांतर चतुभुर्ज के विकणो± के वगो± का योग उसकी भुजाओं के वगो± के योग के बराबर होता है। 7ण् आवृफति 6.61 में एक वृत्त की दो जीवाएँ ।ठ और ब्क् परस्पर ¯बदु च् पर प्रतिच्छेद करती हैं। सि( कीजिए कि ;पद्ध ∆ ।च्ब् ् ∆ क्च्ठ ;पपद्ध ।च् ण् च्ठ त्र ब्च् ण् क्च् आवृफति 6ण्61 8ण् आवृफति 6.62 में एक वृत्त की दो जीवाएँ।ठ औरब्क् बढ़ाने पर परस्पर ¯बदुच् पर प्रतिच्छेद करती हैं। सि( कीजिए कि ;पद्ध ∆ च्।ब् ् ∆ च्क्ठ ;पपद्ध च्। ण् च्ठ त्र च्ब् ण् च्क् आवृफति 6ण्62 आवृफति 6ण्63 9ण् आवृफति 6.63 मंे त्रिाभुज ।ठब् की भुजा ठब् पर एक ¯बदु क् इस प्रकार स्िथत है कि ठक् ।ठ त्र है। सि( कीजिए कि।क्ए कोणठ।ब् का समद्विभाजक है।ब्क् ।ब् 10ण् नाजि़मा एक नदी की धरा में मछलियाँ पकड़ रही है। उसकी मछली पकड़ने वाली छड़ का सिरा पानी की सतह से 1.8 उ ऊपर है तथा डोरी के निचले सिरे से लगा काँटा पानी के सतह पर इस प्रकार स्िथत है कि उसकी नाजिमा से दूरी 3.6 उ है और छड़ के सिरे के ठीक नीचे पानी के सतह पर स्िथत ¯बदु से उसकी दूरी 2.4 उ है। यह मानते हुए कि उसकी डोरी ;उसकी छड़ के सिरे से काँटे तकद्ध तनी हुइर् है, उसने कितनी डोरी बाहर निकाली हुइर् है ;देख्िाए आवृफति 6.64द्ध? यदि वह डोरी को 5बउ ध्े की दर से अंदर खींचे, तो 12 सेवंफड के बाद नाजिमा की काँटे से क्षैतिज दूरी कितनी होगी? 6ण्7 सारांश इस अध्याय में, आपने निम्नलिख्िात तथ्यों का अध्ययन किया हैः 1ण् दो आवृफतियाँ जिनके आकार समान हों, परंतु आवश्यक रूप से आमाप समान न हों, समरूपआवृफतियाँ कहलाती हैं। 2ण् सभी सवा±गसम आवृफतियाँ समरूप होती हैं परंतु इसका विलोम सत्य नहीं है। 3ण् भुजाओं की समान संख्या वाले दो बहुभुज समरूप होते हैं, यदि;पद्ध उनके संगत कोण बराबर हों तथा;पपद्ध उनकी संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में ;समानुपातीद्ध हों। 4ण् यदि किसी त्रिाभुज की एक भुजा के समांतर अन्य दो भुजाओं को भ्िान्न - भ्िान्न ¯बदुओं पर प्रतिच्छेद करने के लिए, एक रेखा खींची जाए, तो ये अन्य दो भुजाएँ एक ही अनुपात में विभाजित हो जाती हंै। 5ण् यदि एक रेखा किसी त्रिाभुज की दो भुजाओं को एक ही अनुपात में विभाजित करे, तो यह रेखा तीसरी भुजा के समांतर होती है। 6ण् यदि दो त्रिाभुजों में, संगत कोण बराबर हों, तो उनकी संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में होती हैं और इसीलिए दोनों त्रिाभुज समरूप होते हैं;।।। समरूपता कसौटीद्ध । 7ण् यदि दो त्रिाभुजों में, एक त्रिाभुज के दो कोण क्रमशः दूसरे त्रिाभुज के दो कोणों के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज समरूप होते हैं;।। समरूपता कसौटीद्ध। 8ण् यदि दो त्रिाभुजों में, संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों, तो उनके संगत कोण बराबर होते हैं और इसीलिए दोनों त्रिाभुज समरूप होते हैं ;ैैै समरूपता कसौटीद्ध। 9ण् यदि एक त्रिाभुज का एक कोण दूसरे त्रिाभुज के एक कोण के बराबर हो तथा इन कोणों को अंतगर्त करने वाली भुजाएँ एक ही अनुपात में हों, तो दोनों त्रिाभुज समरूप होते हैं;ै।ै समरूपता कसौटीद्ध। 10ण् दो समरूप त्रिाभुजों के क्षेत्रापफलों का अनुपात उनकी संगत भुजाओं के अनुपात के वगर् के बराबर होता है। 11ण् यदि एक समकोण त्रिाभुज के समकोण वाले शीषर् से उसके कणर् पर लंब डाला जाए तो लंब के दोनों ओर बनने वाले त्रिाभुज संपूणर् त्रिाभुज के समरूप होते हैं तथा परस्पर भी समरूप होते हैं। 12ण् एक समकोण त्रिाभुज में, कणर् का वगर् शेष दो भुजाओं के वगो± के योग के बराबर होता है ;पाइथागोरस प्रमेयद्ध। 13ण् यदि एक त्रिाभुज में, किसी एक भुजा का वगर् अन्य दो भुजाओं के वगो± के योग के बराबर हो, तो पहली भुजा का सम्मुख कोण समकोण होता है। उपपति और भी सरल हो जाएगी।

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