बहुपद 2ण्1 भूमिका कक्षा प्ग् में, आपने एक चर वाले बहुपदों ;चवसलदवउपंसेद्ध एवं उनकी घातों ;कमहतममद्ध के बारेमें अध्ययन किया है। याद कीजिए कि चर ग के बहुपदच;गद्ध मेंग की उच्चतम घात ;चवूमतद्ध बहुपद की घात ;कमहतममद्ध कहलाती है। उदाहरण के लिए, 4ग ़ 2 चर ग में घात 1 का बहुपद है, 2ल2 दृ 3ल ़ 4 चर ल में घात 2 का बहुपद है, 5ग3 दृ 4ग2 ़ ग दृ 2 चर ग में घात 3 का 342 1बहुपद है और 7न6 दृ न ़ 4न ़ न − 8 चरन में घात6 का बहुपद है। व्यंजक ए ग ़ 2ए2 ग − 11 इत्यादि बहुपद नहीं हैं।ग2 ़ 2ग ़ 3 घात 1 के बहुपद को रैख्िाक बहुपद ;सपदमंत चवसलदवउपंसद्ध कहते हैं। उदाहरण के 22लिए, 2ग दृ 3ए 3ग ़ 5ए ल ़ 2ए ग − 11ए 3्र ़ 4ए 3 न ़ 1ए इत्यादि सभी रैख्िाक बहुपद हैं। जबकि 2ग ़ 5 दृ ग2ए ग3 ़ 1ए आदि प्रकार के बहुपद रैख्िाक बहुपद नहीं हैं। घात 2 के बहुपद को द्विघात बहुपद ;ुनंकतंजपब चवसलदवउपंसद्ध कहते हैं। द्विघात ;ुनंकतंजपबद्ध शब्द क्वाड्रेट ;ुनंकतंजमद्ध शब्द से बना है, जिसका अथर् है ‘वगर्’। 2ग2 ़ 3ग − 2ए 5 न ल2 दृ 2ए 2 − ग2 ़ 3ए ग − 2न2 ़ 5ए 5अ2 − 2 अए4 ्र2 ़ 1ए द्विघात बहुपदों के वुफछ उदाहरण3 37 हैं ;जिनके गुणांक वास्तविक संख्याएँ हैंद्ध। अध्िक व्यापक रूप में, ग में कोइर् द्विघात बहुपद ंग2 ़ इग ़ बए जहाँ ंए इए ब वास्तविक संख्याएँ हैं और ं ≠ 0 है, के प्रकार का होता है। घात3 का बहुपद त्रिाघात बहुपद ;बनइपब चवसलदवउपंसद्ध कहलाता है। त्रिाघात बहुपद के वुफछ उदाहरण हैंः 2 दृ ग3ए ग3ए 2एग3 3 दृ ग2 ़ ग3ए 3ग3 दृ 2ग2 ़ ग दृ 1 वास्तव में, त्रिाघात बहुपद का सबसे व्यापक रूप हैः ंग3 ़ इग2 ़ बग ़ कए जहाँ ंए इए बए क वास्तविक संख्याएँ हैं और ं ≠ 0 है। अब बहुपदच;गद्ध त्र ग2 दृ 3ग दृ 4 पर विचार कीजिए। इस बहुपद में ग त्र 2 रखने पर हम च;2द्ध त्र 22 दृ 3 × 2 दृ 4 त्र दृ 6 पाते हैं। ग2 दृ 3ग दृ 4 में, ग को 2 से प्रतिस्थापित करने से प्राप्त मान ‘ - 6’, ग2 दृ 3ग दृ 4 का ग त्र 2 पर मान कहलाता है। इसी प्रकार च;0द्धए च;गद्ध का ग त्र 0 पर मान है, जो दृ 4 है। यदि च;गद्धए ग में कोइर् बहुपद है और ा कोइर् वास्तविक संख्या है, तो च;गद्ध में ग को ा से प्रतिस्थापित करने पर प्राप्त वास्तविक संख्या च;गद्ध काग त्र ा पर मान कहलाती है और इसे च;ाद्ध से निरूपित करते हैं। च;गद्ध त्र ग2 दृ3ग दृ 4 का ग त्र दृ1 पर क्या मान है? हम पाते हैं: च;दृ1द्ध त्र ;दृ1द्ध2 दृक्ष्3 × ;दृ1द्धद्व दृ 4 त्र 0 साथ ही, ध्यान दीजिए कि च;4द्ध त्र42 दृ ;3 × 4द्ध दृ 4 त्र 0 है। क्योंकि च;दृ1द्ध त्र 0 और च;4द्ध त्र 0 है, इसलिए दृ1 और 4 द्विघात बहुपद ग2 दृ 3ग दृ 4 के शून्यक ;्रमतवमेद्ध कहलाते हैं। अध्िक व्यापक रूप में, एक वास्तविक संख्या ा बहुपद च;गद्ध का शून्यक कहलाती है, यदि च;ाद्ध त्र 0 है। आप कक्षा प्ग् में पढ़ चुके हैं कि किसी रैख्िाक बहुपद का शून्यक वैफसे ज्ञात किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि च;गद्ध त्र 2ग ़ 3 का शून्यक ा है, तो च;ाद्ध त्र 0 से, हमें3 2ा ़ 3 त्र 0 अथार्त् ा त्र − 2 प्राप्त होता है। व्यापक रूप में, यदिच;गद्ध त्र ंग ़ इ का एक शून्यक ा है, तो च;ाद्ध त्र ंा ़ इ त्र 0ए अथार्त् −इ −इ − ;अचर पदद्ध त्रा त्र होगा। अतः, रैख्िाक बहुपद ंग ़ इ का शून्यक है।ं ंग का गुणाकंइस प्रकार, रैख्िाक बहुपद का शून्यक उसके गुणांकों से संबंध्ित है। क्या यह अन्य बहुपदों में भी होता है? उदाहरण के लिए, क्या द्विघात बहुपद के शून्यक भी उसके गुणांकों से संबंध्ित होते हैं? इस अध्याय में, हम इन प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयत्न करेंगे। हम बहुपदों के लिए विभाजन कलन विध्ि ;कपअपेपवद ंसहवतपजीउद्ध का भी अध्ययन करेंगे। 2ण्2 बहुपद के शून्यकों का ज्यामितीय अथर् आप जानते हैं कि एक वास्तविक संख्या ा बहुपद च;गद्ध का एक शून्यक है, यदि च;ाद्ध त्र 0 है।परंतु किसी बहुपद के शून्यक इतने आवश्यक क्यों हैं? इसका उत्तर देने के लिए, सवर्प्रथम हम रैख्िाक और द्विघात बहुपदों के आलेखीय निरूपण देखेंगे और पिफर उनके शून्यकों का ज्यामितीय अथर् देखेंगे। पहले एक रैख्िाक बहुपदंग ़ इए ं ≠ 0 पर विचार करते हैं। आपने कक्षा प्ग् में पढ़ा हैकि ल त्र ंग ़ इ का ग्रापफ ;आलेखद्ध एक सरल रेखा है। उदाहरण के लिए, ल त्र 2ग ़ 3 का ग्रापफ ¯बदुओं ;दृ 2ए दृ1द्ध तथा ;2ए 7द्ध से जाने वाली एक सरल रेखा है। ग दृ2 2 ल त्र 2ग ़ 3 दृ1 7 आवृफति 2ण्1 से आप देख सकते हैं किल त्र 2ग ़ 3 का ग्रापफगदृअक्ष को ग त्र दृ1 तथा ग त्र दृ2 के बीचो बीच, ⎛ 3 ⎞अथार्त् ¯बदु ए0 पर प्रतिच्छेद⎜− ⎟⎝ 2 ⎠ करता है। आप यह भी जानते हैं कि 2ग़ 3 का शून्यक − 3 है। अतः बहुपद2 2ग ़ 3 का शून्यक उस ¯बदु का ग.निदेर्शांक है, जहाँ ल त्र 2ग ़ 3 का ग्रापफ ग.अक्ष को प्रतिच्छेद करता है। आवृफति 2ण्1 व्यापक रूप में, एक रैख्िाक बहुपद ंग ़ इए ं ≠ 0 के लिए, ल त्र ंग ़ इ का ग्रापफ एक ⎛−इ ⎞सरल रेखा है, जोग.अक्ष को ठीक एक ¯बदु ए0 पर प्रतिच्छेद करती है। अतः, रैख्िाक ⎜⎟⎝ ं ⎠ बहुपद ंग ़ इए ं ≠ 0 का केवल एक शून्यक है, जो उस ¯बदु का गदृनिदेर्शांक है, जहाँं ल त्र ंग ़ इ का ग्रापफ गदृअक्ष को प्रतिच्छेद करता है। अब आइए हम द्विघात बहुपद के किसी शून्यक का ज्यामितीय अथर् जाने। द्विघात बहुपदग2 दृ 3ग दृ 4 पर विचार कीजिए। आइए देखें किल त्र ग2 दृ 3ग दृ 4 का ग्रापफ’ किस प्रकार ’ द्विघात या त्रिाघात बहुपदों के ग्रापफ खींचना विद्या£थयों के लिए अपेक्ष्िात नहीं है और न ही इनका मूल्यांकन से संबंध् है। का दिखता है। हमग के वुफछ मानों के संगत ल त्र ग2 दृ 3ग दृ 4 के वुफछ मानों को लेते हैं, जैसे सारणी 2ण्1 में दिए हैं। सारणी 2ण्1 ग दृ 2 दृ1 0 1 2 3 4 5 ल त्र ग2 दृ 3ग दृ 4 6 0 दृ 4 दृ 6 दृ 6 दृ 4 0 6 यदि हम उपयर्ुक्त ¯बदुओं को एक ग्रापफ पेेपर पर अंकित करें और ग्रापफ खींचें, तो यह आवृफति 2ण्2 में दिए गए जैसा दिखेगा। वास्तव में किसी द्विघात बहुपद ंग2 ़ इग ़ बए ं ≠ 0 के लिए संगत समीकरण ल त्र ंग2 ़ इग ़ ब के ग्रापफ का आकार या तो ऊपर की ओर खुला की तरह अथवा नीचे की ओर खुला की तरह का होगा, जो इस पर निभर्र करेगा किं झ 0 है या ं ढ 0 है ;इन वक्रों को परवलय ;चंतंइवसंद्ध कहते हैंद्ध। सारणी 2ण्1 से आप देख सकते हैं कि द्विघात बहुपद के शून्यक दृ1 तथा 4 हैं। इस पर भी ध्यान दीजिए कि दृ1 तथा 4 उन ¯बदुें वेआफ गदृनिदेर्शांक हैं, जहाँ ल त्र ग2 दृ 3ग दृ 4 का ग्रापफ गदृअक्ष को प्रतिच्छेद करता है। इस प्रकार, द्विघात बहुपद ग2 दृ 3ग दृ 4 के शून्यक उन ¯बदुओं वफेगदृनिदर्ेशांक हैं, जहाँ ल त्र ग2 दृ 3ग दृ 4 का ग्रापफ गदृअक्ष को प्रतिच्छेद करता है। यह तथ्य सभी द्विघात बहुपदों के लिए सत्य है, अथार्त् द्विघात बहुपद ंग2 ़ इग ़ बए ं ≠ 0 के शून्यक उन ¯बदुओं के गदृनिदेर्शांक हैं, जहाँ ल त्र ंग2 ़ इग ़ ब को निरूपित करनेवाला परवलय गदृअक्ष को प्रतिच्छेद करता है। ल त्र ंग2 ़ इग ़ ब के ग्रापफ के आकार का प्रेक्षण करने से तीन निम्नलिख्िात स्िथतियाँसंभावित हैं। स्िथति ;पद्ध रू यहाँ ग्रापफग.अक्ष को दो भ्िान्न ¯बदुओं। और।′ पर काटता है। इस स्िथति में, । और।′ के गदृनिदेर्शांक द्विघात बहुपद ंग2 ़ इग ़ ब के दो शून्यक हैं;देख्िाए आवृफति 2.3द्ध। आवृफति 2ण्3 स्िथति ;पपद्ध रू यहाँ ग्रापफ ग.अक्ष को केवल एक ¯बदु पर, अथार्त् दो संपाती ¯बदुओं पर काटताहै। इसलिए, स्िथति ;पद्ध के दो ¯बदु। और ।′ यहाँ पर संपाती होकर एक ¯बदु । हो जाते हैं;देख्िाए आवृफति 2.4द्ध। आवृफति 2ण्4 इस स्िथति में, ।का गदृनिदेर्शांक द्विघात बहुपदंग2 ़ इग ़ ब का केवल एक शून्यक है। स्िथति ;पपपद्ध रू यहाँ ग्रापफ या तो पूणर् रूप सेगदृअक्ष के ऊपर या पूणर् रूप से गदृअक्ष के नीचेहै। इसलिए, यह गदृअक्ष को कहीं पर नहीं काटता है ;देख्िाए आवृफति 2.5द्ध। आवृफति 2ण्5 अतः, इस स्िथति में द्विघात बहुपद ंग2 ़ इग ़ ब का कोइर् शून्यक नहीं है। इस प्रकार, आप ज्यामितीय रूप में देख सकते हैं कि किसी द्विघात बहुपद के दो भ्िान्न शून्यक, या दो बराबर शून्यक ;अथार्त् एक शून्यकद्ध या कोइर् भी शून्यक नहीं, हो सकते हैं। इसका यह भी अथर् है कि घात 2 के किसी बहुपद के अध्िकतम दो शून्यक हो सकते हैं। अब आप एक त्रिाघात बहुपद के शून्यकों के ज्यामितीय अथर् के बारे में क्या आशा कर सकते हैं? आइए इसे ज्ञात करें। त्रिाघात बहुपदग3 दृ 4ग पर विचार कीजिए। इसे देखने के लिए किल त्र ग3 दृ 4ग का ग्रापफ वैफसा लगता है, आइए ग के वुफछ मानों के संगतल के वुफछ मानों को सारणी 2.2 में सूचीब( करें। सारणी 2ण्2 ग दृ2 दृ1 0 1 2 ल त्र ग3 दृ 4ग 0 3 0 दृ3 0 सारणी के ¯बदुओं को एक ग्रापफ पेपर पर अंकित करने और ग्रापफ खींचने पर, हम देखते हैं कि ल त्र ग3 दृ 4ग का ग्रापफ वास्तव में आवृफति 2.6 जैसा दिखता है। उपयुर्क्त सारणी से हम देखते हैंकि त्रिाघात बहुपद ग3 दृ 4ग के शून्यक दृ2ए 0 और 2 हैं। ध्यान दीजिए कि दृ2ए 0 और 2 वास्तव में उन ¯बदुओं के गदृनिदेर्शांक हैं, जहाँ ल त्र ग3 दृ 4ग का ग्रापफ गदृअक्ष को प्रतिच्छेद करता है।क्योंकि वक्र गदृअक्ष को केवल इन्हींतीन ¯बदुओं पर काटता है, इसलिए बहुपद के शून्यक केवल इन्हीं बिंदुओंके गदृनिदेर्शांक हैं। अब हम वुफछ अन्य उदाहरणलेते हैं। त्रिाघात बहुपदों ग3 और ग3 दृ ग2 पर विचार कीजिए। हम ल त्र ग3 तथा ल त्र ग3 दृ ग2 के ग्रापफ क्रमशः आवृफति 2.7 और आकृति 2.8 में खींचते हैं। आवृफति 2ण्6 आवृफति 2ण्7 आवृफति 2ण्8 ध्यान दीजिए कि बहुपद ग3 का केवल एक शून्यक 0 है। आवृफति 2.7 से भी आप देख सकते हैं कि 0 केवल उस ¯बदु का गदृनिदेर्शांक है, जहाँ ल त्र ग3 का ग्रापफ गदृअक्ष को प्रतिच्छेद करता है। इसी प्रकार, क्योंकि ग3 दृ ग2 त्र ग2 ;ग दृ 1द्ध है, इसलिए बहुपदग3 दृ ग2 के शून्यक केवल 0 और 1 हैं। आवृफति 2.8 से भी ये मान केवल उन ¯बदुओं के गदृनिदेर्शांक हैं, जहाँ ल त्र ग3 दृ ग2 का ग्रापफ गदृअक्ष को प्रतिच्छेद करता है। उपयुर्क्त उदाहरणों से हम देखते हैं कि किसी त्रिाघात बहुपद के अध्िक से अध्िक 3 शून्यक हो सकते हैं। दूसरे शब्दों में, घात 3 के किसी बहुपद के अध्िक से अध्िक तीन शून्यक हो सकते हैं। टिप्पणीरू व्यापक रूप में, घात द के दिए गए बहुपद च;गद्ध के लिए, ल त्र च;गद्ध का ग्रापफ गदृअक्ष को अध्िक से अध्िक द ¯बदुओं पर प्रतिच्छेद करता है। अतः घात द के किसी बहुपद के अिाक से अध्िक द शून्यक हो सकते हैं। उदाहरण 1 रू नीचे दी गइर् आवृफति 2.9 में, ग्रापफों को देख्िाए। प्रत्येक आकृतिल त्र च;गद्धए जहाँ च;गद्ध एक बहुपद है, का ग्रापफ है। ग्रापफों से प्रत्येक के लिए, च;गद्ध के शून्यकों की संख्या ज्ञातकीजिए। आवृफति 2ण्9 हल रू ;पद्ध शून्यकों की संख्या 1 है, क्योंकि ग्रापफगदृअक्ष को केवल एक ¯बदु पर प्रतिच्छेद करता है। ;पपद्ध शून्यकों की संख्या 2 है, क्योंकि ग्रापफ ग.अक्ष को दो ¯बदुओं पर प्रतिच्छेद करता है। ;पपपद्ध शून्यकों की संख्या 3 है। ;क्यों?द्ध ;पअद्ध शून्यकों की संख्या 1 है। ;क्यों?द्ध ;अद्ध शून्यकों की संख्या 1 है। ;क्यांे?द्ध ;अपद्ध शून्यकों की संख्या 4 है। ;क्यों?द्ध प्रश्नावली 2ण्1 1ण् किसी बहुपद च;गद्ध के लिए, ल त्र च;गद्ध का ग्रापफ नीचे आवृफति 2.10 में दिया है। प्रत्येक स्िथति में, च;गद्ध के शून्यकों की संख्या ज्ञात कीजिए। आवृफति 2ण्10 2ण्3 किसी बहुपद के शून्यकों और गुणांकों में संबंध् आप पहले ही देख चुके हैं कि रैख्िाक बहुपद ंग ़ इ का शून्यक − इ होता है। अब हमं किसी द्विघात बहुपद के शून्यकों और उसके गुणांकों के संबंध् में अनुच्छेद 2.1 में उठाए गए प्रश्न का उत्तर देने का प्रयत्न करेंगे। इसके लिए एक द्विघात बहुपद माना च;गद्ध त्र 2ग2 दृ 8ग ़ 6 लीजिए। कक्षाप्ग् मंे, आप सीख चुके हैं कि मध्य पद को विभक्त करके वैफसे किसी द्विघात बहुपद के गुणनखंड किए जाते हैं। इसलिए, यहाँ हमें मध्य पदष्दृ 8गष् को दो ऐसे पदों के योग के रूप में विभक्त करना है जिनका गुणनपफल 6 × 2ग2 त्र 12ग2 हो। अतः, हम लिखते हैंः 2ग2 दृ 8ग ़ 6 त्र2ग2 दृ 6ग दृ 2ग ़ 6 त्र 2ग;ग दृ 3द्ध दृ 2;ग दृ 3द्ध त्र;2ग दृ 2द्ध;ग दृ 3द्ध त्र 2;ग दृ 1द्ध;ग दृ 3द्ध इसलिए, च;गद्ध त्र 2ग2 दृ 8ग ़ 6 का मान शून्य है, जबग दृ 1 त्र 0 या ग दृ 3 त्र 0 है, अथार्त् जब ग त्र 1 या ग त्र 3 हो। अतः, 2ग2 दृ 8ग ़ 6 के शून्यक 1 और 3 हैं। ध्यान दीजिए: −−;8द्ध −ग णाकंद्ध; का गु134 त्रशून्यकों का योग त्र ़त्रत्र 2 ग2 का गण्ुााकं 6 अचर पद शून्यकों का गुणनपफल त्र13×त्रत्र 3 त्र 22 ग का गुंणाकआइए, एक और द्विघात बहुपद, माना च;गद्ध त्र 3ग2 ़ 5ग दृ 2 लें। मध्य पद के विभक्त करने की विध्ि से, 3ग2 ़ 5ग दृ 2 त्र3ग2 ़ 6ग दृ ग दृ 2 त्र 3ग;ग ़ 2द्ध दृ1;ग ़ 2द्ध त्र;3ग दृ 1द्ध;ग ़ 2द्ध अतः, 3ग2 ़ 5ग दृ 2 का मान शून्य होगा यदि या तो3ग दृ 1 त्र 0 हो या ग ़ 2 त्र 0 हो, अथार्त् जब ग त्र 1 हो या ग त्र दृ2 हो। इसलिए, 3ग2 ़ 5ग दृ 2 के शून्यक 1 और दृ 2 हैं। ध्यान दीजिएः33 1 −5 −; का गणाकंद्धग ु;2द्ध त्रशून्यकों का योग त्र ़− त्र 33 ग2 का गण्ुााकं 1 −2 अचर पद शून्यकों का गुणनपफल त्र ×−;2द्ध त्रत्र 233 ग का गुणाकं व्यापक रूप में, यदि ’ α, β द्विघात बहुपद च;गद्ध त्र ंग2 ़ इग ़ बए ं ≠ 0 के शून्यक हों, तो आप जानते हैं कि ग दृ α और ग दृ βए च;गद्ध के गुणनखंड होते हंै। अतः, ंग2 ़ इग ़ ब त्र ा;ग दृ αद्ध ;ग दृ βद्धए जहाँा एक अचर है त्र ाख्ग2 दृ ;α ़ βद्धग ़ α β, त्र ाग2 दृ ा;α ़ βद्धग ़ ा α β ’ αए β यूनानी भाषा के अक्षर हैं, जिन्हें क्रमशः अल्पफा, बीटा द्वारा उच्चरित किया जाता है। बाद में हम एक और अक्षर γ का प्रयोग करेंगे, जिसे ‘गामा’ से उच्चरित किया जाता है। दोनों ओर के ग2ए ग के गुणांकों तथा अचर पदों की तुलना करने पर, हम पाते हैं: ं त्र ाए इ त्रदृ ा;α ़ βद्ध और ब त्र ाαβ इससे प्राप्त होता हैः α़ βत्र दृइ ं बαβत्र ं इ − ग;का गण्ुााकंद्धअथार्त् शून्यकों का योग त्र α ़ β त्र −त्र 2ंग का गण्ुााकं ब अचर पदशून्यकों का गुणनपफल त्र αβ त्र त्र ंग2 ुंका गणाकआइए वुफछ उदाहरणों पर विचार करें। उदाहरण 2 रू द्विघात बहुपदग2 ़ 7ग ़ 10 के शून्यक ज्ञात कीजिए और शून्यकों तथा गुणांकों के बीच के संबंध् की सत्यता की जाँच कीजिए। हल रू हम पाते हैंः ग2 ़ 7ग ़ 10 त्र ;ग ़ 2द्ध;ग ़ 5द्ध इसलिए ग2 ़ 7ग ़ 10 का मान शून्य है, जब ग ़ 2 त्र 0 है या ग ़ 5 त्र 0 है, अथार्त् जब ग त्र दृ 2 या ग त्र दृ5 हो। इसलिए, ग2 ़ 7ग ़ 10 के शून्यक दृ 2 और दृ 5 हैं। अब, ;7द्ध − ग ुंद्ध− ;का गणाकशून्यकों का योग त्र दृ2 ़ ;दृ5द्ध त्र दृ ;7द्ध त्रत्र 21 ग ुंका गणाक10 अचर पद;2द्ध ×त्र 10 2शून्यकों का गुणनपफल त्र − ;5द्ध− त्रत्र 1 ग का गण्ुााकं उदाहरण 3 रू बहुपद ग2 दृ 3 के शून्यक ज्ञात कीजिए और शून्यकों तथा गुणांकों के बीच के संबंध की सत्यता की जाँच कीजिए। हल रू सवर्समिका ं2 दृ इ2 त्र ;ं दृ इद्ध;ं ़ इद्ध का स्मरण कीजिए। इसे प्रयोग कर, हम लिख सकते हैंः ग2 दृ 3 त्र ; ग − 3 द्ध; ग ़ 3 द्ध इसलिए, ग2 दृ 3 का मान शून्य होगा, जब ग त्र 3 हो याग त्र दृ 3 हो। अतः, ग2 दृ 3 के शून्यक 3 और − 3 हैं। अब, −ग कद्ध ;का गण्ुाांशून्यकों का योग त्र3 − 3 त्र0 त्र 2ग का गण्ुााकं −3 अचर पद 3द्ध;− 3द्धत्रदृ3 त्रत्र 2शून्यकों का गुणनपफल त्र ; 1 ग ुंका गणाकउदाहरण 4 रू एक द्विघात बहुपद ज्ञात कीजिए, जिसके शून्यकों का योग तथा गुणनपफल क्रमशः दृ3 और 2 हैं। हल रू माना द्विघात बहुपद ंग2 ़ इग ़ ब है और इसके शून्यक α और β हैं। हम पाते हैंः α ़ β त्रदृ 3 त्र −इ ं बऔर αβ त्र2त्र ं यदि ं त्र 1 हैए तो इ त्र 3 और ब त्र 2 होगा। अतः, एक द्विघात बहुपद, जिसमें दी गइर् शते± संतुष्ट होती हैं, ग2 ़ 3ग ़ 2 है। आप जाँच कर सकते हैं कि अन्य कोइर् द्विघात बहुपद, जो इन शतो± को संतुष्ट करताहो, ा;ग2 ़ 3ग ़ 2द्ध की तरह का होगा, जहाँ ा एक वास्तविक संख्या है। आइए अब हम त्रिाघात बहुपद की ओर दृष्िटपात करें। क्या आप सोचते हैं कि त्रिाघातबहुपद के शून्यकों और उसके गुणांकों के बीच इसी प्रकार का संबंध् होता है? आइए च;गद्ध त्र 2ग3 दृ 5ग2 दृ 14ग ़ 8 पर विचार करें। आप इसकी जाँच कर सकते हैं कि ग त्र 4ए दृ2 और 1 के लिए च;गद्ध त्र 0 है। क्योंकिच;गद्ध2 के अध्िक से अध्िक तीन शून्यक हो सकते हैं, इसलिए 2ग3 दृ 5ग2 दृ 14ग ़ 8 के यही शून्यक हैं। अब, 15 −− −ग2; 5द्ध ;का गण्ुााकंद्धशून्यकों का योग त्र ़− त्रत्र त्र4;2द्ध ़ ए 22 2 ग3 का गुणाकं 1 −8दृ अचर पद शून्यकों का गुणनपफल त्र ×−× त्र− 44;2द्ध त्रत्र 22 ग3 का गण्ु ााकं परंतु, यहाँ एक और संबंध् भी है। दो शून्यकों को एक साथ लेकर उनके गुणनपफलों के योग पर विचार करें। हम पाते हैं: ⎧ 1 ⎫⎧1 ⎫क्ष्×− द्व़ ; 2द्ध ⎬⎨़ ×4;2द्ध ⎨− × 4⎬⎩ 2 ⎭⎩2 ⎭ −14 ग का गण्ुााकंत्रदृ812−़ त्र−7 त्र त्र 32 ग ुंका गणाकव्यापक रूप में, यह सि( किया जा सकता है कि यदि αए βए γ त्रिाघात बहुपद ंग3 ़ इग2 ़ बग ़ क के शून्यक हों, तो दृइ α़ β़ γत्र ं बαβ़ βγ़ γαत्र ं दृकतथा α β γत्र ं आइए एक उदाहरण पर विचार करें। उदाहरण 5’ रू जाँच कीजिए कि त्रिाघात बहुपदच;गद्ध त्र 3ग3 दृ 5ग2 दृ 11ग दृ 3 के शून्यक 3ए दृ1 और −1 हैं। इसके पश्चात् शून्यकों तथा गुणांकों के बीच के संबंध् की सत्यता की जाँच3 कीजिए। हल रू दिए हुए बहुपद की ंग3 ़ इग2 ़ बग ़ क से तुलना करने पर, हम पाते हैंः ं त्र 3ए इ त्र दृ 5ए ब त्र दृ11ए क त्र दृ 3 है। पुनः, च;3द्ध त्र 3 × 33 दृ;5 × 32द्ध दृ ;11 × 3द्ध दृ 3 त्र 81 दृ 45 दृ 33 दृ 3 त्र 0 च;दृ1द्ध त्र 3 × ;दृ1द्ध3 दृ 5 × ;दृ1द्ध2 दृ 11 × ;दृ1द्ध दृ 3 त्र दृ3 दृ 5 ़ 11 दृ 3 त्र 0 ⎛ 1 ⎞ ⎛ 1 ⎞3 ⎛ 1 ⎞2 ⎛ 1 ⎞−त्र3 ×− 5 −11 ×− −3च −×−⎜⎟ ⎜⎟ ⎜⎟ ⎜⎟⎝ 3 ⎠ ⎝ 3 ⎠⎝ 3 ⎠⎝ 3 ⎠ 1511 22 त्रदृ −़ −3दृत्र ़त्र0 993 33 1अतःए 3ग3 दृ 5ग2 दृ 11ग दृ 3 के शून्यक 3ए दृ1 और −3 हैं। ’ यह परीक्षा की दृष्िट से नहीं है। इसलिए, हम α त्र 3ए β त्र दृ1 और γ त्र −1 लेते हैं। अब, 3 ⎛ 1 ⎞ 15 −−; 5द्ध −इ त्र3;1द्ध ़− त्र2 त्रα़β़γ़− −त्रत्र⎜⎟⎝ 3 ⎠ 33 3 ं ⎛ 1 ⎞⎛ 1 ⎞ 1 −11 बαβ़βγ़γαत्र 3;1द्ध ×− ; 1द्ध ×− ़− ×3 त्र− 3़− ़−1 त्रत्र⎜⎟⎜ ⎟⎝ 3 ⎠⎝ 3 ⎠ 33 ं ⎛ 1 ⎞ −−; 3द्ध −कαβγत्र 3;1द्ध ×− ×− त्र1 त्रत्रऔर ⎜⎟ है।⎝ 3 ⎠ 3 ं प्रश्नावली 2ण्2 1ण् निम्न द्विघात बहुपदों के शून्यक ज्ञात कीजिए और शून्यकों तथा गुणांकों के बीच के संबंध् की सत्यता की जाँच कीजिए: ;पद्ध ग2 दृ 2ग दृ 8 ;पपद्ध 4े2 दृ 4े ़ 1 ;पपपद्ध 6ग2 दृ 3 दृ 7ग ;पअद्ध 4न2 ़ 8 न ;अद्ध ज2 दृ 15 ;अपद्ध 3ग2 दृ ग दृ 4 2ण् एक द्विघात बहुपद ज्ञात कीजिए, जिसके शून्यकों के योग तथा गुणनपफल क्रमशः दी गइर् संख्याएँ हैंः 1 1;पद्ध ए −1 ;पपद्ध ;पपपद्ध 0ए 52ए4 3 11 ए;पअद्ध 1ए 1 ;अद्ध − ;अपद्ध 4ए 1 44 2ण्4 बहुपदों के लिए विभाजन एल्गोरिथ्म आप जानते हैं कि एक त्रिाघात बहुपद के अध्िक से अध्िक तीन शून्यक हो सकते हैं। परंतु, यदि आपको केवल एक शून्यक दिया हो, तो क्या आप अन्य दो शून्यक ज्ञात कर सकते हैं? इसके लिए, आइए त्रिाघात बहुपदग3 दृ 3ग2 दृ ग ़ 3 पर विचार करें। यदि हम आपको बताएँ कि उसका एक शून्यक 1 है, तो आप जानते हैं कि ग3 दृ 3ग2 दृ ग ़ 3 का एक गुणनखंडग दृ 1 है। इसलिए आप ग3 दृ 3ग2 दृ ग ़ 3 कोग दृ 1 से भाग देकर भागपफल ग2 दृ 2ग दृ 3 प्राप्त कर सकते हैं। अब आप मध्य पद को विभक्त करकेग2 दृ 2गदृ 3 के गुणनखंड;ग ़ 1द्ध;गदृ 3द्ध प्राप्त कर सकते हैं। अथार्त् ग3 दृ 3ग2 दृ ग ़ 3 त्र;ग दृ 1द्ध ;ग2 दृ 2ग दृ 3द्ध त्र;ग दृ 1द्ध;ग ़ 1द्ध;ग दृ 3द्ध इसलिए त्रिाघात बहुपद के सभी शून्यक 1ए दृ 1 और 3 हैं। आइए अब एक बहुपद को दूसरे बहुपद से भाग देने के एल्गोरिथ्म ;कलन विध्िद्ध की विवेचना वुफछ विस्तार से करें। विध्िवत चरणों पर ध्यान देने से पूवर्, एक उदाहरण पर विचार कीजिए। उदाहरण 6 रू 2ग2 ़ 3ग ़ 1 को ग ़ 2 से भाग दीजिए। हलरू ध्यान दीजिए कि जब शेषपफल या तो शून्य हो जाए या 2ग दृ 1 इसकी घात भाजक की घात से कम हो जाए, तो हम भाग ग ़ 2 देने की प्रिया को रोक देते हैं। इसलिए, यहाँ भागपफल 2 ़ 4गग 2ग दृ 1 है तथा शेषपफल 3 है। इसके अतिरिक्त, ;2ग दृ 1द्ध;ग ़ 2द्ध ़ 3 त्र 2ग2 ़ 3ग दृ 2 ़ 3 त्र 2ग2 ़ 3ग ़ 1 अथार्त्, 2ग2 ़ 3ग ़ 1 त्र ;ग ़ 2द्ध;2ग दृ 1द्ध ़ 3 अतः, भाज्य त्र भाजक × भागपफल़ शेषपफल अब हम यह प्रिया किसी बहुपद को एक द्विघात बहुपद से भाग देने के लिए विस्तृत करते हैं। उदाहरण 7 रू 3ग3 ़ ग2 ़ 2ग ़ 5 को 1 ़ 2ग ़ ग2 से भाग दीजिए। 3ग दृ 5 हल रू हम सवर्प्रथम भाजक एवं भाज्य के पदों को ग 2 ़ 2ग ़ 1 घटती हुइर् घातों के क्रम में व्यवस्िथत करते हैं। याद 3 ़ 63 2 ़3गगग दृदृदृ कीजिए कि बहुपदों के पद इस प्रकार व्यवस्िथत 2करने को बहुपद को मानक रूप में लिखना कहते दृ5ग दृ 10ग दृ 5 हैं। इस उदाहरण में, भाज्य पहले से ही मानक रूप ़़ ़ 9ग ़ 10 में है तथा मानक रूप में भाजक ग2 ़2ग ़ 1 है। चरण1 रू भागपफल का पहला पद प्राप्त करने के लिए, उच्चतम घात वाले पद ;अथार्त् 3ग3द्ध को भाजक के उच्चतम घात वाले पद ;अथार्त् ग2द्ध से भाग दीजिए। यह 3ग है। तब, भागदेने की प्रिया कीजिए। जो शेष बचता है वह दृ5ग2 दृ ग ़ 5 है। चरण 2 रू अब भागपफल का दूसरा पद ज्ञात करने के लिए, नए भाज्य के उच्चतम घात वालेपद ;अथार्त् दृ5ग2द्ध को भाजक के उच्चतम घात वाले पद ;अथार्त् ग2द्ध से भाग कीजिए।इससे दृ5 मिलता है। पुनः भाग देने की प्रियादृ5ग2 दृ ग ़ 5 के साथ कीजिए। चरण 3 रू अब शेष बचे9ग ़ 10 की घात भाजक ग2 ़ 2ग ़ 1 की घात से कम है। इसलिए, हम भाग देने की िया को और नहीं कर सकते हैं। इसलिए, भागपफल 3ग दृ 5 है तथा शेषपफल 9ग ़ 10 है। इसके अतिरिक्त, ;ग2 ़ 2ग ़ 1द्ध × ;3ग दृ 5द्ध ़ ;9ग ़ 10द्ध त्र 3ग3 ़ 6ग2 ़ 3ग दृ 5ग2 दृ 10ग दृ 5 ़ 9ग ़ 10 त्र3ग3 ़ ग2 ़ 2ग ़ 5 यहाँ हम पुनः देखते हैं कि भाज्य त्र भाजक × भागपफल ़ शेषपफल हम यहाँ जिस एल्गोरिथ्म का प्रयोग कर रहे हैं वह यूक्िलड वफी विभाजन एल्गोरिथ्म, जिसे आप अध्याय 1 में पढ़ चुके हैं, जैसी है। इसके अनुसार यदि च;गद्ध और ह;गद्ध कोइर् दो बहुपद हैं जहाँ ह;गद्ध ≠0 हो तो हम बहुपद ु;गद्ध और त;गद्ध ऐसे प्राप्त कर सकते हैं कि च;गद्ध त्र ह;गद्ध × ु;गद्ध ़ त;गद्ध जहाँ त;गद्ध त्र 0 है अथवा त;गद्ध की घात ढ ह;गद्ध की घात है। यह निष्कषर् बहुपदों के लिए विभाजन एल्गोरिथ्म कहलाता है। इसके उपयोग को दशार्ने के लिए, आइए वुफछ उदाहरण लेते हैं। उदाहरण 8 रू 3ग2 दृ ग3 दृ 3ग ़ 5 को ग दृ 1 दृ ग2 से भाग दीजिए और विभाजन एल्गोरिथ्म की सत्यता की जाँच कीजिए। हल रू ध्यान दीजिए कि दिए हुए बहुपद मानक ग दृ 2 रूप में नहीं हैं। भाग की िया करने के लिए,दृग 2 ़ ग दृ 1 दृ ग 3 ़ 3ग 2 दृ 3ग ़ 5हम सवर्प्रथम भाज्य और भाजक दोनों कोदृ ग3 ़ ग 2 दृ ग उनकी घातों के घटते क्रम में लिखते हैं। ़ दृ ़ इसलिए, भाज्य त्र दृग3 ़ 3ग2 दृ 3ग ़ 5 तथा 2 दृ 2ग 2 ग ़ 5 22 दृ 2ग ़ 2गभाजक त्र दृग2 ़ ग दृ 1 है। दृ ़ दृ भाग देने की िया दायीं ओर दिखाइर् गइर् है।3 हम यहाँ रुकते हैं, क्योंकि 3 की घात 0ए दृग2 ़ ग दृ 1 की घात 2 से कम है। इसलिए भाग कि िया करके शेषपफल 3 तथा भागपफल ग दृ 2 प्राप्त होता है। अब भाजक × भागपफल ़ शेषपफल त्र;दृग2 ़ ग दृ 1द्ध ;ग दृ 2द्ध ़ 3 त्रदृग3 ़ ग2 दृ ग ़ 2ग2 दृ 2ग ़ 2 ़ 3 त्रदृग3 ़ 3ग2 दृ 3ग ़ 5 त्र भाज्य अतः, विभाजन एल्गोरिथ्म सत्यापित हो गया। उदाहरण 9 रू 2ग4 दृ 3ग3 दृ 3ग2 ़ 6ग दृ 2 के सभी शून्यक ज्ञात कीजिए, यदि आपको इसके दो शून्यक 2 और − 2 ज्ञात हैं। हल रू क्योंकि दो शून्यक 2 और − 2 हैं, इसलिए ;ग − 2 द्ध;ग ़2 द्ध त्र ग2 दृ 2 दिए गए बहुपद का एक गुणक है। अब आइए विभाजन एल्गोरिथ्म का प्रयोग दिए गए बहुपद और ग2 दृ 2 के लिए करें। ग 2 दृ 2 2 दृ 3 दृ 3ग ग ग दृ 4 3 ग2 ़6 2 दृ 3 ़ 1 ग ग2 2 दृ 4 ग ग4 2 2 भागपफल का प्रथम पद 4 2 2ग ग त्र 22ग है दृ ़ दृ3ग3 दृ3 ग3 ़ ग2 ़ 6ग ़ 6 ग दृ 2 भागपफल का दूसरा पद 3 2 3ग ग − 3गत्र− है ़ दृ ग2 ग2 दृ 2 दृ 2 भागपफल का तीसरा पद 2 2 ग ग त्र 1 है दृ ़ 0 इसलिए 2ग4 दृ 3ग3 दृ 3ग2 ़ 6ग दृ 2 त्र ;ग2 दृ 2द्ध;2ग2 दृ 3ग ़ 1द्ध अब दृ3ग को विभक्त करके 2ग2 दृ 3ग ़ 1 के गुणनखंड ;2ग दृ 1द्ध;ग दृ 1द्ध प्राप्त होते हैं। इसलिए, इसके शून्यक ग त्र 1 और ग त्र 1 द्वारा दिए जाएँगे। अतः, दिए हुए बहुपद के2 शून्यक 2ए − 2ए 1 और 1 हैं।2 प्रश्नावली 2ण्3 1ण् विभाजन एल्गोरिथ्म का प्रयोग करके, निम्न में च;गद्ध कोह;गद्ध से भाग देने पर भागपफल तथा शेषपफल ज्ञात कीजिए: ;पद्ध च;गद्ध त्र ग3 दृ 3ग2 ़ 5ग दृ 3ए ह;गद्ध त्र ग2 दृ 2 ;पपद्ध च;गद्ध त्र ग4 दृ 3ग2 ़ 4ग ़ 5ए ह;गद्ध त्र ग2 ़ 1 दृ ग ;पपपद्ध च;गद्ध त्र ग4 दृ 5ग ़ 6ए ह;गद्ध त्र 2 दृ ग2 2ण् पहले बहुपद से दूसरे बहुपद को भाग करके, जाँच कीजिए कि क्या प्रथम बहुपद द्वितीय बहुपद का एक गुणनखंड है: ;पद्ध ज2 दृ 3ए 2ज4 ़ 3ज3 दृ 2ज2 दृ 9ज दृ 12 ;पपद्ध ग2 ़ 3ग ़ 1ए 3ग4 ़ 5ग3 दृ 7ग2 ़ 2ग ़ 2 ;पपपद्ध ग3 दृ 3ग ़ 1ए ग5 दृ 4ग3 ़ ग2 ़ 3ग ़ 1 3ण् 3ग4 ़ 6ग3 दृ 2ग2 दृ 10ग दृ 5 के अन्य सभी शून्यक ज्ञात कीजिए, यदि इसके दो शून्यक 5 आरै दृ5 33 हैं। 4ण् यदि ग3 दृ 3ग2 ़ ग ़ 2 को एक बहुपदह;गद्ध से भाग देने पर, भागपफल और शेषपफल क्रमशः ग दृ 2 औरदृ2ग ़ 4 हैं तो ह;गद्ध ज्ञात कीजिए। 5ण् बहुपदोंच;गद्धए ह;गद्धए ु;गद्ध औरत;गद्ध के ऐसे उदाहरण दीजिए जो विभाजन एल्गोरिथ्म को संतुष्ट करते हों तथा ;पद्ध घातच;गद्ध त्र घातु;गद्ध ;पपद्ध घातु;गद्ध त्र घातत;गद्ध ;पपपद्ध घातत ;गद्ध त्र 0 प्रश्नावली 2ण्4 ;ऐच्िछकद्ध’ 1ण् सत्यापित कीजिए कि निम्न त्रिाघात बहुपदों के साथ दी गइर् संख्याएँ उसकी शून्यक हैं। प्रत्येक स्िथति में शून्यकों और गुणांकों के बीच के संबंध् को भी सत्यापित कीजिए: 1;पद्ध 2ग3 ़ ग2 दृ 5ग ़ 2य ए1एदृ2 ;पपद्ध ग3 दृ 4ग2 ़ 5ग दृ 2य 2ए 1ए 1 2 2ण् एक त्रिाघात बहुपद प्राप्त कीजिए जिसके शून्यकों का योग, दो शून्यकों को एक साथ लेकर उनके गुणनपफलों का योग तथा तीनों शून्यकों के गुणनपफल क्रमशः 2ए दृ7ए दृ14 हों। 3ण् यदि बहुपद ग3 दृ 3ग2 ़ ग ़ 1 के शून्यकं दृ इए ंए ं ़ इ हों, तो ं औरइ ज्ञात कीजिए। 4ण् यदि बहुपद ग4 दृ 6ग3 दृ 26ग2 ़ 138ग दृ 35 के दो शून्यक 2 ± 3 हों, तो अन्य शून्यक ज्ञात कीजिए। 5ण् यदि बहुपदग4 दृ 6ग3 ़ 16ग2 दृ 25ग ़ 10को एक अन्य बहुपदग2 दृ 2ग ़ ा से भाग दिया जाए और शेषपफल ग ़ ं आता हो, तो ा तथा ं ज्ञात कीजिए। 2ण्5 सारांश इस अध्याय में, आपने निम्न तथ्यांे का अध्ययन किया है: 1ण् घातों1ए 2 और3 के बहुपद क्रमशः रैख्िाक बहुपद, द्विघात बहुपद एवं त्रिाघात बहुपद कहलाते हैं। 2ण् एक द्विघात बहुपदंग2 ़ इग ़ बए जहाँंए इए ब वास्तविक संख्याएँ हैं औरं ≠ 0 है, के रूप का होता है। ’ यह प्रश्नावली परीक्षा की दृष्िट से नहीं है। 3ण् एक बहुपद च;गद्ध के शून्यक उन ¯बदुओं के गदृनिदेर्शांक होते हैं जहाँ ल त्र च;गद्ध का ग्रापफ गदृअक्ष को प्रतिच्छेद करता है। 4ण् एक द्विघात बहुपद के अध्िक से अध्िक दो शून्यक हो सकते हैं और एक त्रिाघात बहुपद के अध्िक से अध्िक तीन शून्यक हो सकते हैं। 5ण् यदि द्विघात बहुपद ंग2 ़ इग़ ब केशून्यक α और β हों, तो इबα़βत्र− ए αβत्र ं 6ण् यदिαए βए γ त्रिाघात बहुपदंग3 ़ इग2 ़ बग ़ क के शून्यक हों, तो −इα़β़γत्र ं बαβ़βγ़γαत्र ं और αβγत्र −क ं 7ण् विभाजन एल्गोरिथ्म के अनुसार दिए गए बहुपद च;गद्ध और शून्येतर बहुपद ह;गद्ध के लिए दो ऐसे बहुपदों ु;गद्ध तथा त;गद्ध का अस्ितत्व है कि च;गद्ध त्र ह;गद्ध ु;गद्ध ़ त;गद्धए जहाँ त;गद्ध त्र 0 है या घातत;गद्ध ढ घात ह;गद्ध है।

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