यह चित्रा महाराष्ट्र की वरली शैली में बना है। बच्चों का ध्यान चित्रा की ओर दिलाएँ। 14. एक बुढि़या कहीं एक बुढि़या थी जिसका नाम नहीं था वुफछ भी, वह दिन भर खाली रहती थी काम नहीं था वुफछ भी। काम न होने से उसको आराम नहीं था वुफछ भी, दोपहरी, दिन, रात, सबेरे, शाम नहीं थी वुफछ भी। नाम बताओ, काम बताओ बिना नामवाली बुढि़या का कोइर् नाम रखो। वह दिन भर खाली रहती थी। उसके लिए वुफछ काम सुझाओ। काम करो वुफछ काम करो तुम्हारे घर में सबसे श्यादा काम कौन करता है? तुम्हारे घर में सबसे श्यादा आराम कौन करता है?

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